यह दो चीजें आपने पक्का सुनी होंगी। एसइओ इज़ डेड, जीईओ इज द फ्यूचर। दोनों ही गलत है। और अगर आप भी एक बिगिनर हैं, यह दोनों चीजें आपको कंफ्यूज कर रही होंगी। तो, अगले 10 मिनट में मैं एग्जैक्टली आपको समझाऊंगा एसइओ क्या है? जीईओ क्या है? कैसे यह दोनों डिफरेंट हैं? कैसे यह दोनों इकट्ठे यूज़ करने हैं आपने? और सबसे पहली चीज आपको क्या करनी है? और देख लेना वीडियो के एंड तक। आपकी सारी कंफ्यूजन खत्म हो जाएगी। तो प्लान ये है कि मैं आसान अल्फाज़ में पहले एक्सप्लेन करूंगा एसइओ है क्या? जीईओ क्या है?
और इन दोनों में एक ऐसा स्पेशल डिफरेंस है। एंड मोस्टेंटली जो बिगिनर्स हैं उनको कहां से स्टार्ट करना चाहिए जिसके ऊपर अभी तक कोई बात ही नहीं कर रहा। और वीडियो में आगे जाके एक छोटी सी केस स्टडी है आपके लिए जो वर्थ लिसनिंग होगी। पार्ट वन व्हाट इज एसइओ? लेट्स स्टार्ट सिंपल। एसइओ स्टैंड्स फॉर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन मतलब वेबसाइट को इस तरह से बनाना कि वो Google सर्च में टॉप पर शो हो। Google को एक जॉइंट लाइब्रेरी की तरह समझे। जब आप कुछ सर्च करते हैं तो Google लाइब्रेरी की सारी बुक्स उसी टाइम रीड
नहीं करता बल्कि वह एडवांस में कर चुका होता है और आपके लिए बेस्ट आंसर को रेकमेंड करता है। तो एसइओ से आप वो बुक बनते हैं जो टॉप स्पॉट्स में रेकमेंड होगी। अब Google मेनली तीन चीजों को देखता है। रेलेवेंस यानी क्या पेज सर्च क्यूरी से मैच करता है? क्वालिटी क्या ये काम की इंफॉर्मेशन है पेज पर? एंड ट्रस्ट क्या दूसरी वेबसाइट्स आपकी वेबसाइट को लिंक कर रही हैं? और कोर फंक्शनैलिटी यही है। एसइओ का गोल बड़ा सिंपल सा है। कोई सर्च करेगा, आपका लिंक देखेगा, उस पर क्लिक करेगा और वेबसाइट पर आ जाएगा। अब
ये जो क्लिक करके वेबसाइट पर आना है, यहां पर चीजें चेंज हो जाती हैं। जब हम जीईओ की बात करते हैं। नाउ व्हाट इज जीईओ? यहां पर कुछ चीजें थोड़ी सी चेंज हैं। अब लोग सिर्फ Google पर नहीं बल्कि एi पर भी सर्च कर रहे हैं। लाइक चैट जीपीटी पर, क्लॉड पर, परप्लेक्सिटी पर और Google के अपने एi मोड में भी। अब एआई क्या करता है भला? यह Google की तरह आपको 10 ब्लू लिंक्स नहीं देता जिसमें से आपने चूज़ करना है। बल्कि यह काफी सारे सोर्सर्सेस को खुद रीड करके आपको एक आंसर देता है
और कुछ सोर्सेस को साइड कर देता है। नाउ जीओ स्टैंड्स फॉर जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन जिसका मतलब है अपने कंटेंट को ऐसा बनाना जिसको एआई पिक करे और अपने आंसर में वो मेंशन कर दे आपको। अब लाइब्रेरी वाली एग्जांपल पर वापस चलते हैं। अगर एसइओ में आपको शेलफ पर पड़ी बुक की तरह रेकमेंड किया जा रहा है तो जीईओ में एक्सपर्ट लाइब्रेरियन बनके डायरेक्टली आंसर को साफ-साफ बोल के बताया जा रहा है। लेकिन जीओ से आपके आंसर का तो लोगों को पता लगेगा लेकिन आपकी वेबसाइट को जल्दी रेकमेंड नहीं करेगा ये। बट आप ए मॉडल्स को
फोर्स कर सकते हैं। जिसका एक डिटेल्ड प्रोसीजर मैंने इस वीडियो में सिखाया है। तो फिर अब चीजें सिंपल हो गई। एसइओ इज अबाउट द लिस्ट ऑफ लिंक्स एंड जीईओ इज अबाउट बीइंग इनसाइड द आंसर। अब यहां पर जो ट्विस्ट है इससे आपको पता चल जाएगा कि इन दोनों में से क्या इंपॉर्टेंट है आपके लिए। अगर मैं अपनी पूरी वीडियो के लिए एक लाइन बोलना चाहूं तो क्या आप सुनेंगे? एसइओ गेट्स यू क्लिक। जीईओ गेट्स यू कोटेड। यानी एसइओ से क्लिक्स आएंगे ट्रैफिक आएगी। जीईओ में आपका बनाया हुआ आंसर और उसके साथ आपका मेंशन। कोई गारंटी
नहीं है क्लिक की यानी ट्रैफिक की। अब जो बिगिनर बंदा होगा वो यही सोचेगा चलो ठीक है दोनों में से कोई एक ऑप्शन हम पिक कर लेते हैं एसइओ या जीओ में से ऐसा नहीं है। एसइओ इज नॉट दैट इन फैक्ट 80% जो ट्रेडिशनल एसइओ स्टफ है उसी से जीईओ होगी और इसी वजह से मेरी एजेंसी जीएमएस डिजिटल्स पर मंथ $23,000 का रेवेन्यू करती है। सिर्फ 20% न्यू चीजें हैं जो हम ऑलरेडी ट्राई एंड टेस्ट कर चुके हैं कि क्या वर्किंग है। और ये चीजें मैं एसएम7 में भी डिटेल में प्रैक्टिकली सिखाने जा रहा हूं।
पांच मार्क की ट्रेनिंग में डिस्क्रिप्शन में डिटेल्स होंगी। अब एसइओ और जीईओ दोनों इकट्ठी क्यों चलती हैं? मैं अगर अपनी बात करूं मुझे स्टिल Google पर रैंक करना है ताकि मुझे क्लिक्स आए, ट्रैफिक आए और एलएलएम्स यानी कि चैट जीपीटी और क्लॉट पर लोग जाते हैं अपना आंसर लेते हैं बट वेबसाइट पर नहीं जाते। लेकिन लेट्स से आपका क्लाइंट आपको इंसिस्ट कर रहा है कि नहीं भाई हमें एलएलएम्स में भी रैंक करवाएं। गेस व्हाट? एसइओ प्लस जीईओ इकट्ठी ही चलेगी फिर भी। जब आप Google के लिए एक पेज को बेस्ट बना रहे होते हैं, वो
ऑटोमेटिकली बाय डिफॉल्ट एआई के लिए अच्छा बन रहा होता है। अगर तो वो क्लियर हो, जेनुइनली यूज़फुल हो एंड ट्रस्टवर्ती हो कि दूसरी साइट्स उसको रेफर कर रही हो, तो ऑटोमेटिकली वही पेज आपका Google के लिए भी बेस्ट परफॉर्म करेगा, एलएलएम्स के लिए भी बेस्ट परफॉर्म करेगा। एंड ऑनेस्टली स्पीकिंग एक मेजर डिफरेंस है दोनों के अंदर। फॉर Google आपको क्लिक चाहिए तो टॉप 10 लिस्ट में आना इज इनफ। बट फॉर एआई जो आपके पेज से आंसर पुल करता है और बाद में डिसाइड करता है आपकी साइट को सोर्स करना है या नहीं करना। तो फिर
पहले क्या करें? तो ये पांच चीजें आपने करनी है एंड मजे की बात ये है अगर आप इनको इंप्लीमेंट करते हैं आप टेक्निकली एसइओ प्लस जीयू एट द सेम टाइम कर रहे होंगे। पहली है आंसर द एक्चुअल क्वेश्चन क्लियरली नियर द टॉप। आपको लंबे चौड़े आंसर्स लिखने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले आप अपना शॉर्ट आंसर देंगे। देन आप डिटेल्ड एक्सप्लेनेशन देते जाएंगे। और यही चीज Google भी चाहता है और यहीं से एलएलएम्स भी डाटा रिट्रीव करेंगे। दूसरी चीज राइट फॉर अ रियल क्वेश्चन अ रियल पर्सन आस्क्स। कोई आपको फैंसी वर्ड्स लिखने की जरूरत नहीं
है। बस जो कस्टमर है आपका उसके लिए सूटेबल वर्ड्स लिखें। लेट्स से अगर किसी का क्वेश्चन है हाउ डू आई अनक्लॉग अ ड्रेन? आपकी हेडिंग एकजेक्टली यही होनी चाहिए जो मैंने बोली है। थर्ड है स्ट्रक्चर इट। सो इट्स इजी टू स्कैन। क्लियर हेडिंग्स हर हेडिंग में एक आईडिया एंड जहां हो सके लिस्ट्स एंड टेबल्स। जितना इजी आप एक ह्यूमन के लिए उस पेज को बनाते जाएंगे वो उतना ही इजी एआई के लिए होता जाएगा। नंबर फोर बैक योर क्लेम्स विद समथिंग रियल। कोई स्पेसिफिक नंबर, कोई सोर्स या किसी एक्सपर्ट का लिया हुआ कोर्ट ऐड करते
हैं। यह वन ऑफ़ द बेस्ट थिंग्स है जिनकी बेस पर ए आपको साइट करेगा। एंड ऑब्वियसली ह्यूमंस के लिए भी यही चीज परफेक्ट वर्क करती है। नेक्स्ट वन इज़ मेक श्योर यू आर एक्चुअली फाइंडेबल। आपकी वेबसाइट Google में इंडेक्स होनी चाहिए और मेक श्योर रोबोट्स.txt के अंदर किसी भी तरह की कोई ब्लॉकेज ना हो। यानी आसान अल्फ़ाज़ में सर्च इंजंस को हम यह प्रूव कर रहे हैं हम एकिस्ट कर रहे हैं। दैट्स इट। एंड फाइनली गेट मेंशंड इन अ फ्यू ट्रस्टेड प्लेसेस। जब इंटरनेट पर मौजूद रेप्यूटेबल वेबसाइट्स और कम्युनिटीज आपके बारे में बात करती हैं
तो Google और एi ऑटोमेटिकली आप पर ट्रस्ट करते हैं। तो ऐसी जगहों पर जाके लोगों को हेल्प करें जहां पर आपका एक आइडियल कस्टमर टाइम स्पेंड करे। इट कुड बी RedIT, कोरा, Facebook, वेयरवर जस्ट गो एंड हेल्प देम। दैट्स वन ऑफ़ द बेस्ट थिंग यू कैन डू। नाउ स्टार्ट में आपको मैंने बोला था एक छोटी सी केस स्टडी आपके लिए शेयर करूंगा। रिसेंटली हमने एक क्लाइंट के एड्स को स्टॉप करवा के फुल टाइम ऑर्गेनिक ट्रैफिक पर फोकस करना शुरू कर दिया। इवन हमने फर्स्ट 30 डेज वेस्ट भी किए कुछ मिस्टेक्स की वजह से। बट विद
इन सिक्स टू सेव वीक्स क्लाइंट को ऑर्गेनिक ट्रैफिक आने लगी। एंड इवन फर्स्ट सेल भी आ गई। इसकी डिटेल्ड केस स्टडी इस वीडियो में मैं ऑलरेडी बता भी चुका हूं। डिस्क्रिप्शन में लिंक मिलेगा। एंड दैट्स ऑल फॉर दिस वीडियो। अच्छी लगी है तो लाइक कीजिएगा, शेयर विद अदर्स।