इश्क मारी पिया साथ छोड़ना हमसे जो भूल हुई है कुछ तो भूलना अस्सलाम वालेकुम वालेकुम अस्सलाम ये सब क्या है क्या सब ये सारी चीजें अम्मी ग्रोसरी है कहां से आई आप ही तो ग्रोसरी करके लाई थी। मैंने जो है ना सारा सामान रख दिया। बल्कि हम तो सरप्राइज थे कि आप इतनी एक्सपेंसिव चीजें कैसे ले आई? फिर हमें लगा कि कोई पार्टी है घर पे। नहीं नहीं ये ये हमारा सामान नहीं है। इसको वापस बंद करो। वो जमाल साहब है ना ये सब उनका है। अरे पूछ तो लेते पहले। क्या पूछते? कि हम कि
अम्मी हम ये सब इस्तेमाल नहीं करते। ये हमारा सामान है। मम्मी आपने ही कहा था सामान निकाल के रख दो। हमने रख दिया। अरे पूछ तो लेते फिर भी। चलो पैक करो अब ये। जी सॉरी। हम रख देते हैं। बाकी सारा सामान पैक कर ही देते हैं। बंद करो इस्तेमाल करना। बंद करो ये सब। वापस थैलियों में डालो। जल्दी से पैक करो सारा सामान। अस्सलाम वालेकुम। खैरियत तो है आज? सुबह-सुबह मेरी याद कैसे आ गई आपको? वालेकुम सलाम। आपने मेरे घर की ग्रोसरीज के बजाय अपने घर की ग्रोसरीज यहां भिजवा दी। इतना तो पता होना
चाहिए आपको। तो क्या हुआ? मेरे बच्चों ने सारी ग्रोसरीज निकाल दी और इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया। मैंने अभी उनसे कहा है कि सब कुछ वापस बैग्स में रख दें। तो अगर आप किसी को भेज सकते हैं ये पिक करा दें और हमारे घर के ड्रॉप करा दें प्लीज। देखें मैं जानता हूं कि मेरे बारे में आपकी राय कोई अच्छी नहीं है। लेकिन आप वाकई ये सोचती है मेरे बारे में कि मैं ड्राइवर को भेजूंगा सामान लेने के लिए। बच्चों ने अगर यूज़ कर लिया तो कोई बात नहीं वो वो लोग मेरे अपने बच्चों
की तरह हैं। हमें आदत नहीं है ये सब चीजें इस्तेमाल करने की। हमें अपनी ही चीजें इस्तेमाल करने की आदत है। अब क्या कर सकते हैं? लेकिन तब्दीली अच्छी चीज है। इनफैक्ट मैं भी अभी आपकी ग्रोसरी यूज कर रहा हूं। वैसे बहुत अच्छी क्वालिटी है आप। आप खामखा ही परेशान हो रही थी और चाय तो देखिए ये बहुत नामुनासिब बात है। क्या? ये सब अगर आप किसी को भेज नहीं रहे मैं खुद आके ड्रॉप करा दूंगी। चल अगर अब आप यह वादा करती हैं कि आप खुद आएंगी तो फिर ठीक है फिर तो मैं इंतजार
करूंगा आपका तुम्हें ही अभी बस अच्छा लगा ये आपके मुंह से तुम सुनकर एक बार प्लीज दोहराएंगी आप ये हेलो हेलो अम्मी हमने सारा सामान पैक कर लिया है। अब क्या करना है? मैं बता दूंगी अभी फिलहाल लेट हो रहे हैं स्कूल के लिए। बस निकल जाएगी मेरी। तुम लोग भी चलो। छोड़ दो हम कर लेंगे वापस आके। तुम कॉलेज क्यों नहीं गए आज? वो तबियत थोड़ी ठीक नहीं लग रही थी। थोड़ा लेजी फील करके। अरे क्या हुआ? नहीं बुखार नहीं है। बस एसिड हो। हां बॉडी तो ठंडी है। और ये लेजीपन कब तक चलेगा?
पता नहीं बट नो वरी। आई विल बी फाइन। औलाद जितना मर्जी बोले डोंट वरी। कि मां को तो सुकून नहीं मिलता ना। बस फिर दुआ करें। सब ठीक हो जाएगा। बेगम साहिबा अनीला भाभी कहां गई? नजर नहीं आ रही। वो मैके गई है। खैर तो है। अभी तो अपने घर से वापस आई थी फिर चली गई। उसकी तबीयत ठीक नहीं थी ना। और वैसे भी वो जावियार के रोने से बहुत डिस्टर्ब हो गई थी। ऐसी हालत में सुकून भी तो जरूरी होता है ना। इसीलिए मैंने उसे महके भिजवा दी। कह तो आप सही रही हैं।
जिंदगी में सुकून बहुत जरूरी है। अगर आप मेरा मशवरा मानती ना तो अनीला भाभी के बजाय ना आप वर्दा बाजी को उनके ससुराल भेज देती तो जिंदगी में सुकून ही सुकून होता। आहिस्ता बोलो क्या हो गया है तुम्हें? ये तो तुम्हारे गले में ना ढोल बजता रहता है। फिर तो सुन लिया ना तुम्हारी बहुत बेइज्जती करेगी। पिछली बार ना मैं आपकी वजह से खामोश हो गई थी। नहीं तो आपकी बेटी का दिमाग ना ठीक करके रख देती। आपने ही उन्हें बेवजह खामखा चौड़े में रखा हुआ है। ऐसे घर नहीं बचते। औरतों को अपनी जिंदगी घिसनी
पड़ती है जब कहीं जाकर राजधानी मिलती है और वह तो बहुत खुशकिस्मत हैं कि उन्हें इतना चाहने वाला ख्याल रखने वाला शौहर मिला है। अगर उनके जैसा उन्हें कोई खर दिमाग मिल जाता ना तो उन्हें टके-टके के लिए तरसा देता। तुम ठीक कह रही हो। खैर क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। रूठी हुई बेटी को उसकी गलतियां कैसे गिनवाऊं? तो आप क्या उनका घर उजाड़ कर उन्हें उनकी गलतियां गिनवाएंगी? और ऊपर से आपने घर के मालिक वारिस को अपनी बहू के साथ घर भेज दिया है। दूसरे के वारिस को पालकर आपने कर ही
क्या लेना है? मेरा ध्यान तो सिर्फ अमीना की तरफ है। इकलौता इकलौता बेटा है मेरा और उसकी पहली औलाद क्या करूं मैं? सुबह से दो बार फोन किया है। अब देखो अगर उसकी तबीयत ठीक नहीं हुई तो मैं जाऊंगी उसकी तरफ। और जो बातें मेरी बात तो आप मान ही नहीं रही हैं। आप पता नहीं किन सोचों में बैठी हुई हैं। आप क्यों नहीं भेजती इतनी वर्दा बाजी को उनके ससुराल? करती हूं कुछ। अल्लाह हिदायत दे। आ रहा हूं। अस्सलाम वालेकुम, अंकल। वालेकुम अस्सलाम। भाई डिस्टर्ब तो नहीं किया तुमको मैंने तुम्हें डिस्टर्ब नहीं कर सकते
प्लीज अंदर आए कैसे हैं बिल्कुल ठीक बताओ कैसे हो अल्लाह का करम बिल्कुल ठीक आंटी कैसी हैं ओके बिल्कुल ठीक आ जाए आजा सॉरी एक सेकंड अरे प्लीज बैठे थैंक यू क्या लेंगे अंकल आप मैं कुछ नहीं अरे नहीं प्लीज प्लीज कुछ कुछ तो ले लें मैं वो घर पे काम कर रहा था घर पे कोई है नहीं लेकिन आप हुकुम करें क्या लेंगे प्लीज मैं जानता हूं घर पे कोई नहीं तुम अकेले हो इसलिए तुमसे मिलने आया था। बात हुई थी मेरी ज़िबा पाजी से। बस कुछ ज्यादा वक्त नहीं लूंगा तुम्हारा। अब कुछ बातें
करना चाहता हूं तुमसे। बेटी का बाप हो ना तो बहुत सी बातें करते हुए झिझक महसूस होती है। लेकिन अगर बेटी दन जैसी लाडली और चहीती हो तो फिर बाप को भी हिम्मत करके हर बात साफ-साफ करनी पड़ती है। अंकल सुबुक जानते हो मैं तुमसे क्या बात करना चाहता हूं? मेरी बेटी में ऐसा क्या नुक्स है कि तुम उसको अपनी जिंदगी का साथी नहीं बनाना चाहते हो? बताओ। कोई नुक्स नहीं है। तन ही शी इज परफेक्ट। उसमें कोई कमी नहीं है। मुझ में है लुक्स। कुछ मुझ में कमी है। मेरे इस घर में नुक्स है
कमी है। नहीं नहीं बेटा तुम में कोई नुक्स नहीं है। अगर ऐसा होता तो मैं उसको तुम्हारे बारे में सोचने भी नहीं देता। वहां बहुत कम है। अंकल आप दो मिनट आएंगे मेरे साथ। प्लीज मुझे मुझे आपको एक चीज़ दिखानी है। एक सेकंड। आइए हमारे घर में दो बैडरूम है। ये पहला बैडरूम है। यहां मेरी दोनों बहनें रहती हैं। ये यहां ये ये अलमारी है। यहां हम कपड़े वगैरह हैंग करके रखते हैं। लेकिन अक्सर वो फिट नहीं आते। तो फिर सामान हम बिस्तर पे इधर-उधर जहां-जगह मिलती है रख देते हैं। वो देखें वो वो दरवाजा
खुला हुआ है ना वो वाशरूम है। आपके घर में सर्वेंट क्वार्टर होगा ना। उसके वाशरूम से भी छोटा होगा यह वाशरूम। आए अभी टोल बाथरूम ही काफी है। आ जाए। ये दूसरा कमरा है हमारे घर का मास्टर बेडरूम। यहां अम्मी और मैं रहते हैं लेकिन मैं यहां सोता नहीं हूं। रात को जब आप आ रहे थे तो बाहर बेड लगा हुआ था ना। वो मेरा बिस्तर है। मैं वहां सोता हूं। क्योंकि रात को मैं इधर काम नहीं कर सकता। यहां काम करूंगा। अम्मी सो नहीं पाएंगी। हाय यहां पे ये किचन ये ये किचन है हमारा
वो वहां पे टेरेस है। ये साफ सफाई के बाद है किचन। ये चूल्हा है जिसमें गैस कभी आती है कभी नहीं आती। ज्यादातर नहीं आती। कैबिनेट्स पे धागे लगाए हुए हैं ताकि कैबिनेट बंद रहे। ड्रेनेज सिस्टम खराब है। इस पे ये पानी बहता रहता है। नाला ब्लॉक हो जाता है और जब नाला ब्लॉक होता है और यह सिंक ब्लॉक हो जाता है तो हम इस तरह बैठ के मैं और मेरी बहनें हाथों से कचरा निकालते हैं यहां से। आप एक सेकंड के लिए इमेजिन करें को अपने घर अपने किचन से बाहर इस किचन में इस
घर में अंकल आप नहीं कर पाएंगे और मैं मैं चाहूंगा कि दन इधर आके कहेगी कि कचरा साफ करें। ये है हमारा किचन हमारा घर कल हमारी जिंदगी आजा धनी को ये सब नहीं नजर आता मुझे आता है नजर नन आती है मेरे घर पे। मेरे बहनों के साथ टाइम स्पेंड करती है। एक दो बार कभी रात भी गुजार लेती है। और वो लोग बहुत एंजॉय करते हैं। पर अंकल एक-दो दिन गुजारने में और जिंदगी गुजारने में तो बहुत फर्क है ना। नहीं रह पाएगी वो। वो नहीं रह पाएगी यहां। परेशान हो जाएगी। और जब
वो परेशान होगी तो मैं परेशान होऊंगा। मेरे मेरी बहनें मेरी मां परेशान होंगी। आपको मैंने दिखाया है दो बैडरूम है। घर में तीसरा बैडरूम नहीं है। तीन बडरूम वाला घर मैंने लेना है और वो लेने में बड़ी मेहनत लगनी है। अभी बड़ा टाइम लगना है। अब मैं कैसे उसको दावे देके बांध लूं अपने साथ। दन आपकी इकलौती बेटी है। आपको इतनी अजीज है। मुझे भी बहुत अजीज है दन। बचपन से आ रही है मेरे घर। मेरा बचपन गुजरा है उसके साथ। मैं मैं कैसे उसका बुरा चाह सकता हूं? अंकल मैं नहीं मैं नहीं हूं ऑप्शन
अच्छा जमन के लिए मैं आई एम नॉट अ गुड ऑप्शन फॉर हर इतने ऑप्शन है अंकल इतने ऑप्शन मिल जाएंगे आपको अच्छा ऑप्शन होता तो मैं पागल हूं किसी को अपनी जगह लेने दूं आई एम आई एम नॉट राइट फॉर हर और कुछ कहना है तुम्हें? जी अंकल देखिए मैं मैं आपसे कुछ लूंगा नहीं। अगर आप कहे भी मुझे कि मैं तुम्हारे मसले हल कर दूंगा। घर दे मैं मैं मैं नहीं लूंगा प्लीज। नहीं ऐसा कोई हल मेरे लिए पास नहीं है आपके लिए। हां, मैं अपनी जिंदगी से मुतालिक कुछ बातें जरूर करना चाहता हूं
आपसे। आइए बैठिए। प्लीज सट। देखो मैंने बहुत खामोशी से सारी बातें सुनी है। मैं उम्मीद करता हूं कि आप भी मेरी सारी बातें खामोशी और तसल्ली से सुनेंगे। आपको पता है मैंने अपनी जिंदगी की शुरुआत एक रेडी से की है। ठेले से प्लास्टिक का सामान बेचा करता था उस पर। गुरबत इतनी थी कि वालिद साहब इसके अलावा कोई काम करवा भी नहीं सकते थे। तालीम भी ऐसी जैसे पूरी की है बस। ऐसे ही एक दिन प्लास्टिक का सामान बेचते-बेचते तुम्हारी आंटी पर नजर पड़ गई। दिल में उतर गई यार पहले लम्हे में। बिलकुल भाग गई।
लेकिन वो थी मोहल्ले के सबसे अमीर आदमी की बेटी। दो मंजिला मकान वाला घर। एक रे वाला कैसे हिम्मत कर सकता था उनके घर रिश्ता भेजने की। लेकिन पसंद भी बहुत आई थी। पता नहीं मेरी क्या खुशकिस्मती थी कि मैंने जुर्रत करके उनसे अपने दिल की बात कह दी। तुम्हें भी पता होगा कमर लड़कियां तो भोली मासूम होती है ना बेवकूफ होती हैं। वो अपने से प्यार करने वाले के घर को उसके कमरों के उसके किचन के उसके वाशरूम के साइज को नहीं देखती। तो बस प्यार करने वाला दिल देखती है और उसके पीछे चली
आती हैं। बाज दफा इसी वजह से बहुत तकलीफें भी उठाती हैं। उसके अब्बू तो मुझसे शादी करने पर तैयार ही नहीं थे उसकी। ऐसीऐसी शर्तें रखी है उन्होंने। यह भी चाहिए, वो भी चाहिए, यह भी लाओ, वो भी लाओ। 5 साल गुजर गए। कुछ नहीं कर सका मैं। बल्कि मेरे हालात और खराब हो गए। मैंने भी वही किया जो तुम कर रहे हो। मैं शला के पास गया। उसे कहा कि मैं उसके लिए ठीक इंसान नहीं हूं। जिससे उसके वालिद चाहते हैं उसको उससे शादी करनी चाहिए। मैंने उसको समझाया लेकिन वो कहीं और शादी करने
को तैयार ही नहीं थी। मैं उसे कसमें देता रहा कि मैं उसके लिए सही इंसान नहीं हूं। वो रोती रही और हमारी यही बातें उसके वालिद ने सुन ली। उन्हें पता है वो अगले दिन मेरे पास आया और मुझसे कहने लगे हमारे घर शैला का रिश्ता ले आओ। मुझे यकीन ही नहीं आ रहा था। मुझे लगा शायद मैं मैं मेहनती हूं। मैं सच्चा हूं। मैं मुखलिस हूं। आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों मेरा वक्त जरूर बदलेगा। मेरा वक्त बदल गया बेटा। तुम्हारे सामने है। खुदा का शुक्र है। आज भी मैं सोचता हूं कि
अगर शैला से मेरी शादी ना हुई होती तो मैं वहीं उसी रे पर अपनी जिंदगी को घसीट रहा होता। जब उससे मेरी शादी हुई ना तो मैंने कसम खाई अपने आप से कि इसको इतने बड़े घर से ला रहा हूं तो इसके लिए भी एक महल बनाऊंगा। और अल्लाह ने साथ दिया और देखो तुम्हें पता है मेरी किस्मत तो शैला की वजह से बदली है। तुम्हें क्यों नहीं यकीन होता कि दन की वजह से तुम्हारा नसीब बदल सकता है। पर तुम जानते हो ये जो बड़े मकान वाले और ज्यादा पैसे वाले लड़के होते हैं ना
ये हमारे चारों तरफ घूमते हैं जिस इलाके में हम रहते हैं लेकिन वो ना दन को पसंद आए और ना हमारे दिल को भाए क्योंकि हमारे दिल को तो सुबुक भाग गया है। अब वो हमसे जितना इंतज़ार करवाए सारी जिंदगी इंतज़ार करवाए। हम इंतजार करने को तैयार हैं। बेखबर क्यों हो गया है दिल बेअसर। अब हो गया है ये जाने कितने गम छुपे हाथों की लकीरों में। अपने बगैर लगे कैसे मैं कहूं इश्क दी मारी पिया साथ छोड़ना हमसे जो भूल हुई है कुछ तो बोलना इश्क मारी पिया साथ छोड़ना हमसे जो भूल हुई है
कुछ तो भूलना कई जंगल घोड़े कई दोखने आशिक बनके सुखदे किस्मत विच दीदार भी नहीं माया हाल मेरा पे ना अंजुआ दे मैं रह सया खामोश भी नहीं कुछ कर सया इजहार भी नहीं क्या कहा सुक ने भाई बहुत बातें हुई आज तो हमारे दरमियान फिर फिर बस मैंने कहा कि हम तुम्हारे जवाब का इंतजार करेंगे। तो उसने क्या कहा? फिलहाल तो खामोश रहा। खामोश रहा मतलब कोई उम्मीद नहीं, कोई तसल्ली नहीं। बस खामोश रहा। खामोश रहने का मतलब यही तो है कि उसने तसल्ली ही तो दी हमें। यह भी तो कह सकता था कि
मत करे मेरे जवाब का इंतजार। खामोश रहा इसका मतलब हमारे बारे में सोचेगा मेरी बात पे। समझदार आदमी है, अकलमंद आदमी है और हमें भी कोई ऐसा बेसबरा होने की जरूरत नहीं है। धनीन की पढ़ाई बाकी है। उसको भी वक्त चाहिए। अच्छा बात सुनो फिलहाल धनीन से कोई बात करने की जरूरत नहीं है। ठीक है। मैंने पहले भी उसे कुछ नहीं कहा। मैं ऐसे ही कह रहा हूं। तुमसे ना असल में ना खुशी छुपाई जाती है और ना गुस्सा। जी जी जानती हूं। बार-बार रिमाइंड कराने की जरूरत नहीं है। आमीन हम आमीन सु कोई जमाल
साहब आए हैं आपसे मिलने जमाल कौन जमाल मैं तो किसी जमाल को नहीं जानती बेटा पता नहीं आपका और अब्बा का नाम ले रहे हैं। शक तो मुझे भी हो रहा है कि कहीं देखा है लेकिन कह रहा है कि आप देखेंगी तो पहचान लेंगी। अच्छा तुम्हारे अब्बू के कुछ जानने वालों में से या दोस्तों में से कोई ना हो। लेकिन मेरी तो कोई अलैक सलाहक या सलाम दुआ नहीं थी उनके दोस्तों से। चलो खैर चल चले आ तो सही देखें तो सही देखते हैं अच्छा अस्सलाम वालेकुम आंटी। वालेकुम सलाम बेटा। कैसी हैं आप? मैं
माफ़ करना बेटा। मैं पहचाना नहीं मैंने। बड़े बैठे। वैसे तो चेहरा देखादेखा लग रहा है लेकिन बस याददाश्त ऐसी हो गई है कि कुछ याद नहीं रहता। आंटी मैं आपसे अपना तारुफ करवाऊंगा। अब तो आप यकीनन पहचान जाएंगे मुझे। वैसे तो इसका चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा है पर समझ नहीं आ रहा याददाश्त नहीं साथ दे रही। आंटी मैं अपनी बहन शैला बाजी और अपनी बहनोई के साथ यहां आया था आपके घर 5 साल पहले। आपकी छोटी बेटी के रिश्ते के लिए फरहाना आंटी के से आए थे हम लोग। हां हां हां आ
गया याद मुझे। हां। और पसंद करने के बावजूद आप लोगों ने रिश्ते से इंकार किया था। ऐसा ही है ना? तुम्हारी बहन का फोन आया था मुझे। याद आ गया मुझे। कह रही थी कि बस आपके घर से होकर आए हैं। तो अचानक पता नहीं क्या हुआ। भाई ने रिश्ते से इंकार कर दिया। हालांकि उसे तो सब कुछ पसंद था। वजह कुछ समझ नहीं आई। जी आंटी मैंने इंकार कर दिया था। असल में आंटी मुझे पता नहीं था कि मैं यहां पर आपकी छोटी बेटी के रिश्ते के लिए आया हूं। क्या मतलब? मतलब ये आंटी
है। मैं आपकी बड़ी बेटी जेबा से शादी करना चाहता था। आंटी आप प्लीज मेरी बात तहम्मुल से सुनिएगा बगैर गुस्से और नाराजगी के। मैं बहुत कम उम्र था जब मैंने ज़बा को अपने दोस्त के फंक्शन में देखा था और आंटी पहली नजर में ही सेवा मुझे बहुत अच्छी लगने लगी थी। इत्तेफाक से मेरे घर वाले मेरे लिए रिश्ता देख रहे थे। इसलिए मैंने बहुत कोशिश की कि अपने दोस्त से जेबा का कांटेक्ट नंबर ले लूं। लेकिन फिर पता चला कि इमरजेंसी में जेबा की शादी हो गई। मैं बहुत अपसेट हो गया था आंटी। शायद पहली
नजर की मोहब्बत थी इसलिए। फिर मेरे घर वाले मुस्तकिल फोर्स कर रहे थे मुझे शादी के लिए। इसलिए मैं आप लोगों के घर आया। लेकिन वहां आकर पता लगा कि मैं तो जेबा की छोटी बहन को देखने के लिए आया हूं। अगर मैं जेबा से शादी नहीं कर सका तो आंटी इतनी गैरत तो थी मुझ में कि उसकी छुट्टी बहन से शादी तो नहीं करता मैं। फिर आपके घर में ही मेरी जेबा से दोबारा मुलाकात हुई। उसके बाद मैंने अपनी बहन और बहन को साफ इंकार कर दिया इस रिश्ते के लिए। और वजह भी नहीं
बताई। क्या बताता उन्हें फिर उसके कुछ हफ्ते बाद या मेरी भी शादी हो गई थी मेरी बीवी बहुत अच्छी लड़की थी वो बहुत अच्छा साथ रहा हमारा लेकिन आंटी कुछ साल पहले ही उसका इंतकाल हो गया अब मेरे दो बेटे हैं। दोनों बाहर पढ़ते हैं। एक का अभी पिछले दिनों ही निकाह किया है मैंने। और आंटी अभी कुछ वक्त पहले मेरी जेबा से दोबारा मुलाकात हुई। उसकी खुला के सिलसिले के बारे में पता लगा मुझे। तो मैं फौरन यहां आप लोगों के पास आ गया। यह कहने कि मैं मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता
हूं। ये ये क्या उगड़ी सीधी बातें कर रहे हो तुम। दिमाग ठीक है तुम्हारा। आंटी आपको मेरे बारे में कुछ भी पता करवाना है तो मैं आपको सारी डिटेल्स देने के लिए तैयार हूं। मेरा घर, मेरी फैमिली आप लोगों को जो कुछ भी पता करवाना है आप लोग पता करवा सकते हैं। और आंटी मैं मैं जेबा की फैमिली से भी मिल चुका हूं और मैं जेबा को उसकी फैमिली के साथ कुबूल करने के लिए तैयार हूं। मेरी अपनी कोई बेटी नहीं है आंटी। लेकिन मैं जेबा की बच्चियों को अपनी बेटियों की तरह पालूंगा। यह मेरा
वादा है आपसे। आंटी। भाई ना तो अक्ल है तुम में और ना थोड़ी सी हया। जवान बच्चों की मां है वो और दो जवान बच्चों के बाप हो तुम। अच्छा लगेगा कि इस उम्र में वो अपनी बच्चियों के साथ-साथ अपने लिए रिश्ते ढूंढे। अम्मी। अपनी जवान बच्चियों की शादियां कर रही है वो। अम्मी की बात तो सुन ले आप। चुप कर जाओ। मुझे चुप करवाने की बजाय इसे खामोश कराओ। यह उल्टी सीधी बातें कर रहा है। इसे निकालो घर से। किसी मुलाजिम ने सुन लिया तो क्या समझेगा। तुम्हारी बीवी ने सुन लिया तो ताने देगी
तुम्हें वो बात। हम इज्जतदार लोग हैं। इस उम्र में ऐसे काम नहीं करवाते। मेरी बेटी जवान बच्चों की मां है। और तुम दो जवान बच्चों के बाप हो। कुछ तो शर्म करो। आंटी कुरान में ये कहां लिखा है? कि अगर बच्चे बड़े हो जाए तो मर्द या औरत में से अगर किसी का साथी नहीं है तो वो दूसरा निकाह नहीं कर सकता। अल्लाह ताला हया का हुक्म देता है और हया की तल्लकीन करता है मर्दों को भी और औरतों को भी। आंटी हया के साथ-साथ अल्लाह निकाह का भी हुकुम देता है। हलाल और जायज रिश्तों
का भी हुकुम देता है। आंटी इसको इसको कहो कि चुप हो जाए। मैं इसकी बातें बर्दाश्त नहीं कर सकती। मैं नहीं सुन सकती इसकी बातें। अम्मी समझाओ इसे। आप जाए आप जाए। मुझसे ऐसी बातें मत करें। आपने किया जय बाबा जी को प्रपोज हम क्या कहा यही सारी बातें की है उसने भी जो आंटी कह कर गई है और इसीलिए मैं आप लोगों के पास आया था उसके दिल में भी यही डर खौफ है जो आंटी के दिल में है। और यहां मेरे आने का मकसद भी यही था कि मैं आकर आप लोगों से बात
कर सकूं। चला गया वो। चार बातें सुना कर भेजना था उसे। आजकल के लोगों को जरा सी शर्म नहीं है। मुंह उठाकर चले आते हैं। उम्र देखो और ख्वाहिशें देखो इसकी। और सुनो सानिया के सामने कोई बात मत करना। बिला वजह चार लोगों में बैठकर बात करेगी और मेरी जेबा का मजाक बनेगा। अम्मी मैं अम्मी ये एक मुनासिब रिश्ता है। और मैं इस हवाले से जे बाबा जी से बात करूंगा। उसकी बातें तो हमारे दिमाग पे भी असर कर गई है। लगता है। दिमाग खराब हो गया है। मेरा दिमाग बिल्कुल ठीक है अम्मी। मैंने ज़बा
पाजी को खवारी काटते हुए देखा है। और मैं नहीं चाहता कि वो अपनी सारी जिंदगी ऐसे ही खार होती रहे। अब अगर एक रिश्ता आया है और सही वक्त पर आया है तो हमें इसे कंसीडर करना चाहिए। उस्मान यह सही वक्त है। खुद बताओ सही वक्त है ये। अम्मी अगर यही रिश्ता आपने उस वक्त किया होता तो ज़बा बाजी को ऐसी जिंदगी ना गुजारनी पड़ती। और किसी को पसंद करना या अपनी मर्जी से शादी की ख्वाहिश करना कहां गलत है? अम्मी। कहां लिखा है कि यह सब गलत है। मुझे याद है इस लड़के ने शायद
एक रुमाल पर मेरी बहन को एक नंबर लिख कर दे दिया था और आप लोगों ने बस फटाफट फटाफट ज़ेबाजी को यहां से निकालने की की। बस भगाया आप लोगों ने ज़ेबाजी को। क्या कसूर था एक रुमाल? लेकिन ज़ेबाजी तो पढ़ना चाहती थी ना अभी। अगर पढ़ लिख गई होती तो आलिया की तरह ज़ेबाजी का भी किसी अच्छे घर में रिश्ता हुआ होता। किसी अच्छे घर में शादी हो गई होती। आ से पापा जी आ। मैंने अपनी बहन की जिंदगी का सारा वक्त देखा है अम्मी। एक कम उम्र भाई के तौर पर मैं उसकी मदद
करना चाहता था लेकिन मैं नहीं कर सकता था। लेकिन अब मैं मदद कर सकता हूं और मैं करूंगा। प्लीज अम्मी मुझे करने दे। उस्मान बेटा इतना तो देख लो कि जवान बच्चों की मां है। एक बेटी ब्याही उसने बाकी सबकी शादियां करनी है। दुनिया को क्या मुंह दिखाएगी वो। दुनिया को वही मुंह दिखाएंगे जो है अम्मी। ये क्या दुनिया दुनिया दुनिया दुनिया को क्या मुंह दिखाना है हमने। दुनिया क्या करती है आपके लिए? जब मेरी बहन के बच्चे अपने घर पर भूखे फाके काट रहे थे तो इस दुनिया ने उनके घर में राशन डाला। क्या
किया इस दुनिया ने? कि जब मेरी बहन मुसीबतों में थी, जब मेरी बहन मुश्किलात में थी तो इस दुनिया ने क्या किया उसके लिए? दुनिया को बकवास करने के अलावा क्या आता है अम्मी? बस चार दिन ये दुनिया बातें करेगी। उसके बाद इनका मुंह बंद। दुनिया के चक्कर में 24 साल उसने अपनी जिंदगी के जहन्नुम में गुजार दिए। क्या गलत कर रही है यार वो किसी से दोस्ती कर रही है अफेयर चला रही है नहीं ना निकाह निकाह में और वो भी वो नहीं करना चाहती आप ही की तरह उसने भी इंकार कर दिया है
कि दुनिया क्या कहेगी लेकिन हमें उसे मनाना और समझाना होगा हमें एक बार जेबाजी की जिंदगी को गैरत ने डुबो दिया है दूसरी बार इस झूठी गैरत के चक्कर चक्कर में मैं अपनी बहन की जिंदगी नहीं डुबोने दूंगा। अम्मी प्लीज अम्मी ये दुनिया ये झूठी इज्जत झूठी गैरत बस कर दे यार इसे बस कर दे अम्मी। अच्छा बेटा तो ना परेशान बस मेरी जान। इश्क मारी पिया साथ छोड़ना हमसे जो भूल हुई है कुछ तो भूलना इश्क दी मारी पिया साथ छोड़ना वे हमसे जो भूल हुई है कुछ तो बोलना इश्क दादी मारी पिया साथ
छोड़ना हमसे जो भूल हुई है कुछ तो भूलना जिम्मेदारियां देो जिंदगी की भरोसा जिंदगी नहीं सुकून कोई ना काम वाला मेरे