कि अ [संगीत] जो मनुष्य इतना कुछ हो गया कितना अपमान है मानव जाति का है में कितना गिर गए विषय विकारों में ताकि अ कि हे भगवान इस गल चुका है इस तरह जो तमोगुण और विकार इज उसका क्या बुरा हाल है लोग बोलते तरक्की काजू है सत्यानाश का योग है बेचारे कुमार कुमारियों के साथ तो जुलम का जो पैसा पूर्वकाल में कभी शास्त्रों में वर्णित नहीं है युवा इन युवतियों के साथ जो जुल्म हो रहा है राम भगवान की रक्षा करें ई का विवाह धर्म के साथ महज लुटा न गाय का दूध प्योर नंगी
मट्ठा भैंस का दूध और गाय का भी मिल जाए तो नकली बाय सूर्य का दूध के पुत्र देवी सुवर्चला हो जाते मां-बाप का अपमान कर बैठे हुए अचार्य और पढ़ाई-लिखाई में भी ऐसा कोई तत्व नहीं दिखता तुम का आत्मा और संयम का कुछ सीख पाए हैं मैं नेट यार फिर कि आज आर्य शिक्षकों को डंडे मारकर किसी बड़े आदमी से आप ज्ञान नहीं ले सकते सूचना से ले सकते पगार देखकर पाठ्यपुस्तकें रख सकते लेकिन जो राधे की प्रसन्नता से शिक्षकों के और माता-पिता के द्वारा जो ज्ञान और आशीष मिलता उन बच्चों को नहीं है विचारों
को कि बच्चे के चेहरे को गले से अंदर आ कि हर खोखला मन पिक्चरों में इधर उधर पटक पटक लेकिन हो जाते हैं का निर्माण सो जाते हैं आत्महत्या तक कर लेते सोच लेते हैं कि बच्चों में बहुत सारी संभावना है इन बच्चों में से तो असमंजस जैसे ही हो योग्य प्रकट हुए दो है और बच्चों को समझ लेना चाहिए कि दुनिया के जो भी बड़े प्राइम मिनिस्टर मिनिस्टर महापुरुष संत जतिन जोगी हुए हो रहे होंगे वह सब तुम्हारे जैसे पहले बच्चे थे तो तो क्या हम ऐसे ही आ गए क्या दाढ़ी वाले ओके हम
भी तो नन्हे-मुन्ने बच्चे तो थे शुभ संस्कार हो मैं यहां तक लाकर रख दिया इसी जगह पर डालकर भून कर खान-पान और हल्के फुल्के हमारे दुश्मन पाकिस्तान में भी घरों का दूध भर-भर के आते खीर बनती और को खीर फट टीमों के लोक ले जाते श्राद्ध के जड़ो इंटरनेट 120 भी सौ घड़ा भर के आते हैं है उतनी सारी खेतों में घुस आए हैं कुछ दिखता नहीं था उस जमाने में दूध-मट्ठा बट मारने के लिए मैच ना तो अभी चालू शास्त्रों में तो कल जगह ऐसा आएगा कि लोग दूर दही बेचेंगे तो भी गिराया मुफ्त
में घूम देवे पैसा देने पर भी प्योर नहीं मिले हैं कि अ जो हेयर फिर भी निराश नहीं होना चाहिए अ है क्यों कि कुछ सब कुछ नष्ट हुआ बदला अन्याय हुआ लेकिन फिर भी कुछ और सुविधाएं हुई जो घर-बार छोड़कर गुरु के द्वार पर झाड़ू बुहारी करने के बाद कई वर्षों के बाद मिलता था वह सत्संग साधन और गुरू मंत्र घर बैठे शहद में मिल रहा है यह कलयुग का सदगुण भी स्वीकार करना पड़ेगा उसका फायदा उठा ले गए थे कि मुझे वह मंत्र मिल गया जिस मंत्र से ब्रह्मचर्य की रक्षा हो ललना चिपक
जाए और वह मंत्र आप श्रद्धा से जप पहले तो आपका धातु शहर ना हो ऐसे मंत्र आसानी से मिल जाए यह कलयुग का भी धन्यवाद हम पढेंगे इस युग में विनाश के साधन तो खूब है लेकिन अविनाश ईश्वर को पाने के साधन भी घर बैठे लोगों को सत्संग पहुंचाने के साधनों को भी धन्यवाद देना ही पड़ेगा उनका सदुपयोग करना ही पड़ेगा ना कि शिरोमणि निराश मत हो फरियाद वाला चित्र मत बनाओ हां इस दोस्तों से अपने को बचाने के लिए आप अच्छा बनना चाहते हो बेटे यदि आप अच्छी बनना चाहते हो बिटिया लेकिन तुम्हारा मन
कभी फिसल जाता है कभी घर वाले इकलौते बेटे को बेटी को कभी पड़ोसी टूटे कभी दोस्तों को तेरे कभी तो खुद अपना मन ही बदमाशी करके बुरे कर्म में ले जाता है यह आपसे नहीं सभी चाहिए अन्य है जो लेग होता है बेटे लेकिन उस अन्याय के शिकार तुम सदा ना बनो उसका उपाय दुराचार के तरफ आप भी का मन आप भी खुद भी कई बार फसल जाओ ऐसा आपकी बुद्धि गिर जाती है लेकिन आप एक रक्षा कवच पहन लव रक्षा कवच ना पकाएं फिर नीच व्यक्तियों को आने देगा आपके चित्र चाहिए प्रो फिल्मी दुनिया
से हो जाए दोस्तों के स्वासो स्वास से हो चाहे किसी के उपदेश से हो जाए क्विक पार्ट्स से हो सुरक्षा कवच अंजाने मुझे मिल गया था बचपन में अभी शास्त्रों से जानकारी से मिला है तब हिम्मत करता हूं बोलने की मेरे को भी गिराने के लिए लोग पिक्चर में लेकर तो मैं भगवत नाम लेकर उस समय पिक्चर हकीकत पिक्चर चली थी चीन दावा और उसमें दिखा रहे थे सरकार ने टैक्स माफ कर दिया बहुत बढ़िया है वैसा है ले गए और हमारे यहां शुभ है क्योंकि रक्षा कवच अंजाने में भगवान के नाम का स्मरण तक
के भगवान मैं यहां फिर कैसे मैं फसूंगा आए इसे पुश भगवान की स्मृति ही रक्षा कवच है लेकिन शास्त्र में इसकी विधि है कि क्या डर है न तूने से श्वास लेवे और श्वास लेते समय भगवन नाम शहीद सुभाष ले उसको रोक रखकर भगवान के नाम का मन में पुनरावर्तन तिमाही नथुने से श्वास छोड़े श्वास छोड़ें तो हमारे हीन विचारों बुद्धि में मन में छुपे हैं उनको मैंने तय जब श्वास लें तो मैं भगवत्कृपा को गुरु कृपा को सुरक्षा कवच का आवाहन करता हूं आपने श्वास रोग का और गुरू मंत्र अथवा जो भगवान का प्रिय
मंत्र रखता है उसका जब करो मुसलमान भाई हो तो आप अल्लाह करो गुलाबों का एसाइड बाय होता आप गॉड कस्टमर करो इस सिंधी भाइयों तो अपना झूलेलाल नहीं तो ओंकार तुम शक्तिदायक मंत्र आए विद्यार्थियों तो गं गणपतए नमः हाईट मिक्स शक्ति भी कुछ नहीं ऐसा अंदर उर्जा पैदा करेगा फिर भी हमारा आग्रह नहीं है कि आप मुसलमान हो तो आप गं गणपतए नमः करने में सुख चाहते हो तो मत करो लेकिन करोगे तो लाभ होगा आप दूसरा भी मंत्र करूं उसका अपना लाभ किलो लेकिन यह रक्षा कवच आप मुसलमान बच्चे हैं बेटियां है बच्चे हैं
अपने जीवन को ऊंचा करें वह भी तो हमारे बच्चे हैं कि वह हमारे भाई हैं मनुष्य मात्र में ऊपर महात्मा मुझे तो सांप भी हमारे भाई लगते हैं मित्र लगते मुझे सांप ने काटा नहीं आ से पहले कई बाहर उन सांपों के बीच जी ने कर दिन देखे थे सांप के ऊपर पैर भी पड़ गया लेकिन उनके अंदर भी मेरा खानदानी दिखाने वाला है यार बैठा हूं है तो मैं किसी जाति से किसी मजहब से आप किसी व्यक्ति से द्वेष करूं तो मेरा दिल खराब होगा ना मैन गुरु कृपा की है आज शाम को मैं
अपना दिल क्यों खराब करूं आप जैसी मजाक में मत में हो आपका नहीं तो मेरे से अगर कुछ तो यह रक्षा कवच ॐ जपा कर आधारण करो तुम बल बढ़ेगा घुम में 19th पिक शक्तियां प्राथमिकता होती है ऐसे ॐ गं गणपतए नमः ए हॉबी गजब का प्रभाव पड़ता है यह मंत्र आपकी ऊर्जा को ज्ञान तंतुओं में भारत का आप बुद्धिमान होने में सफल हो जाएंगे ॐ गं गणपतए नमः अथवा ॐ गं बीजमंत्र आप गम गम गम गम अंदर हट लगाइए इसका सुषमा ऐसा कुछ प्रभाव होता है कि इन्हें बीच सुषमा बड़े दिखेंगे नहीं समय पाते
हुए हरा भरा खत ऐसे आपके हरे-भरे पवित्र विचार आपको उन्नत करने में बहुत सहायता देंगे वहीं सूक्ष्म विचार है तो आज आपका व्यक्तित्व है विचार पहले तो भाव सूख नहीं होते तो सूक्ष्मदृष्टि बहुत ही होते मध्यम बाहुबली होते उत्तम बेहूदे और परम उत्तम होते तो परम उत्तम तो दो है ना गणेशा पर अवश्य ही दुनिया में कई देवी-देवताओं सिद्ध पुरुष भतीजे जोगी पैगंबर हुए सब का सत्कार लेकिन गणेश्वर प्रदर्शनी से भड़कर और इंद्रियों को वश करने में कोई माई का लाल का नाम नहीं आया ना गणेशा साथ परवशी है ने पार्वती से बढ़कर कोई तपस्या
करने वाले साध्वी का नाम नहीं है और गणेश से बढ़कर कोई इंद्रियों को वश ही नही पैदा हुआ माइक करता तो यह गणेश जी का बीज मंत्र है ऊं गं गणपतए नमः ॐ गं गणपतए नमः अब इसको आप चप्पो अथवा ॐ हो अथवा राम राम राम का चिंतन करता है तो उसको अपनी पत्नी में भी सद्बुद्धि आ जाती अपने कपड़े सीताजी के लिए मैं कैसे राम का चिंतन करके जाऊं मैया कि किसी लिए कुंभकर्ण मैंने तुझे चमकाया है हो तो राम नाम राष्ट्रीय तभी रही बढ़िया रहेगा अ है यह मेरा क्या नहीं है और डर
नहीं है आपको सलाह है फिर जो आपको पसंद पड़ता है भगवान करना उसी का प्रण करें जितनी देर स्वास हुक्का ऐसा आपने 10 बार श्वास रोककर किया फिर 15 बार फिर भी इस बार 10 प्रणब हो गए स्वास्थ्य लिया रोका छोड़ा लिया रोका छोड़ा एक प्रणब होता है दो बार रोकना बराबर एक प्राण है है तो आप इंदाणी से 10 प्रणाम लिए पिंगला से 10 लिए तो आपकी जो यह रेंज 210 आरंभ ए न्यू रोमांस है कर दो कि वह इन इस प्राणायाम से रजस और तमस के हल के कणों से थोड़ी स्वच्छ होती जाएंगी
धीरे-धीरे और उस आत्मा की चेतना से वह थोड़ी सी पोस्ट होती जाएंगी विश्वामित्र ने तो इस रहस्य को इतना इतना आगे बढ़ा दिया के विश्वामित्र ने जैसे ब्रह्मा जी ने सामर्थ्य पाया और स्वस्थ बनाएं तो आत्मा सब में वह यह तो हम भी एक्सेस टीम बनाएंगे ब्रह्माजी के नहीं और विश्वामित्र ने ब्रह्म पाश ने क्यों बनाए चावल बनाए जो बनाएं और विश्वामित्र ने बाजरा बनाया जो आप प्रमुख आधार है है में मकई बनाई आज के विज्ञान को भी चेहरे को कहां इसके साथ ले जाने का सोचोगे तो कि कपिल मुनि के पिता ने हवाई जहाज
बनाया संयोगवश और उसी में जी नौ कन्याओं को जन्म दिया और कर्दम ऋषि ने योग बल से न्यूरॉन्स विकसित करके अपने चैतन्य का सामर्थ्य जगह है ए देवोटी व कपिल ने दूसरी जहाज मे अपना अगस्त 30 कभी लोक-लोकांतर में जाकर तो कभी धरती पर नौ कन्याओं को जन्म दिया सती अनुसूया उन्हें की कन्याए जिससे दत्तात्रेय भगवान प्रकट हुए महाराष्ट्र के भक्तों के इष्टदेव सारी दुनिया के स्थिति में को एकदम ऋषिकेश अ 12 थे सती अनुसूया के पुत्र थे दत्तात्रेय भगवान दुर्वासा ऋषि इनके धोते थे करतम के कर दो को दूर भाषा का नाम किसने नहीं
सुना है तूने धार्मिक व्यक्ति है है अरुंधति भगवान राम के गुरु वशिष्ठ महाराज को बिहार के देखकर दबिशें दे दो है जो भगवान राम की गुरु माता बनी थी वह कर्दम ऋषि की बेटी थी अ कि आपका कितना उज्जवल इतिहास है है तो यह जो आजकल जो कि आपको सारे विश्व में है फिर भी भारत के बच्चे उसको आप के वातावरण में होते हुए भी भाग्यशाली है कि यह महापुरुषों के प्राकट्य और जन्मस्थली और उपदेश स्थली भारत है तो आप अपने को सभी से भाग्यशाली तो जरूर मानोगे और अभी भी और बच्चों से और देशों
के बच्चों से आपके साथ प्रॉब्लम न्याय है कि विश्व के तमाम बच्चों से जो अन्याय हो रहा है उसके अपेक्षा भारत के बच्चे और बच्चों से अन्याय कम हो रहा है क्योंकि उनके मां-पिता मंदिर के देवता के पास चाहते प्रदेश के देवता के पास ले जाने वाले संत के पास जाते 19 के रक्त से आप का प्राकट्य हुआ इसलिए तुमको धन्यवाद है सा Vaseline अधिक तुम भारत के मां-बाप के कोख से जन्मे हो है कि प्रेस पॉइंट तुम्हारा कितना बड़ा भारी कि वे लोग सचमुच मूर्ख है जो कहते हैं कि मुझे शरम आति के जिम्मे
हिंदुस्तान में चंद्रमा ऐसा बोलने वाले के वचनों पर मुझे शरम आति कैसा आदमी कैसे बोल दिया होगा क्या उसमें राजकरण होगा या और कोई कूटनीतिक होगी वरना हिंदुस्तान में जन्म लेने के लिए तो देवता लोग लालायित रहते थे इसके कई प्रमाण और हिंदुस्तान के लोगों में इतनी योग्यता थी कि शरीयत देवलोकमे जाते थे अपनी पुरानी मूवी पुराने स्थल एप है जैसे उद्धवजी कि बृहस्पति से विदा लेने को कह अर्जुन अस्त्र-शस्त्र ले आए लोग से कि पूर्व मंत्री ने अपनी सखियों को देव लोक से बुलाकर 1701 काशी के प्रयागराज के कुंभ में कीर्तन खड़ा या दो
कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आप की पत्नी देव लोग के देवेंद्र इंद्र की पुत्री थी अ है तो आप वास्तविक देव लोक से आए हुए जीवन को लेकिन यह वातावरण और परंपरागत रजो-तमोगुण बढ़ने से आप अपनी महिमा भूल गए कि बच्चों के साथ पूरे विश्व के हर्षवर्धन के साथ घोर अन्याय हो रहा है शरीर का बांधा बनने के पहले ही उनको चलचित्रों के द्वारा धातु शहर का मार्ग मिल जाता है फिर भी चारों की याद शक्ति क्या विचार शक्ति क्या और फिर भी कोई कोई निकाला आते हैं यह उनके बचपन का कोई संयम
है है तो आप कवच सुरक्षा कवच बनाई जैसे कर्दम ऋषि ने रक्षा कवच से साधना ऐसी की तैसी की योग-सामर्थ्य से संपन्न हो गए भगवान प्रकट हो गए मैं तो कर्म की बात बताऊंगा लेकिन रक्षा कवच पहले बताऊंगा कि इस प्रकार आप अपने दास प्रणाम कर ले आ और फिर 1520 तो यह आपके 20 प्रणब से जो 20 मुख्य नायक है थे इंडियन आर्मी से 10 नारियल जुड़ी है पिंगला से 10 जोड़िए हुआ है थे बुक पोस्ट होंगी सफल हुई जितनी वहीं हरियाणा सब लोग की प्राणशक्ति और जब का संपुट मिलेगा उतने ही वह झाड़ियां
आपके दूसरे नाड़ीतंत्र को बल दे सकेगी हैं तो इस प्रकार आपने 10 बार श्वास रोग का तो पांच प्रणाम हो गए फिर भी इस बार स्वरों के 10 प्राणों फिर अपने स्वास्थ्य लिया दोनों नथुनों से और जो आप में कमजोरी है विद्या नहीं पढ़ सकते बेटा याद नहीं रहता है बेटी अथवा भगवान में मन नहीं लगता अथवा शराब की आदत है अथवा जुआ की आदत है अथवा भंडार है जो तुमको तकलीफ है जो तुम जिस किसी विषय में अपने को दुर्बल मानते हो या गिर जाते हो आप अपनी कमजोरी जितनी जानते हो आपके रिश्तेदार नहीं
जाने के जितने आप जानते हैं है तो उस कमजोरी को मन से बोला था कि के विस्मृति अब हम तुम्हें विदाई दे रहे कि हरिओम ओं मेरी स्मरण शक्ति बढ़ रही है क्योंकि वह भगवान सबका जवाहरात मेरी विद्या शक्ति बढ़ाएं मेरी स्मरण शक्ति बड़े अ मैं यहां पर लगा फिर से ऐसा करूं मैं का प्रयोग [संगीत] होमों अगर डरपोक के स्वभाव है तो जीवन बस साइड है इस समिति के आश्रम की पुस्तक इसको थोड़ा पढ़ो फैशनेबल प्रथम एचआर है वह पढ़ो फिर ऐसा होमो हम 10 मिनट ऐसा रोज करो आपका डरपोक स्वभाव ठीक होने लगेगा
आपके याद शक्ति ठीक होने लगेगी आपको किसी लड़की को देखकर बुरे विचार आते हैं लड़के को देखकर आजकल तो यह गंदे विचार स्वभाविक वास्तव में घूमते तो आप सुबह ऐसा कवच बनाओ कि वह गंदे विचार हम पर हावी में तो आप यह ऐसा करोगे थोड़े दिन में ही युवाधन अच्छा काम विकार को बचाना तो फिर इस पुस्तक की बजाय यो यो वन सुरक्षा दिवाल धन अथवा तो यौवन सुरक्षा पुस्तक को पढ़ तो आप मन से चाहोगे कि मैं सेमी अर्बन जब तक आप नहीं कहोगे तब तक को तीव्र गति से फायदा नहीं होगा आप मन
से जो चाहोगे फिर इस मंत्र से बहुत विशेष फायदा होगा नहीं तो काली मंत्र के प्रभाव का ही फायदा होगा कि आप चाहोगे तो फिर आपकी चेतना का जूस में जितना दृढ़ता होगी उतना जल्दी फायदा ज्यादा फायदा होगा व्यवधान पड़ा यौवन सुरक्षा पड़ा अब मैं कहीं जाएगी नजर तो किसी भी तरह बैंक को मुंबई में बराबरी की होगी तो मेरी बहन के समान चिंतन करूंगा बड़ी हो कि तुम आंखें समाज चोटियों की मेरी कन्या मांबा हम और आप मामा रामकृष्ण एक बार अपनी पत्नी को देखते हुए मन को कहते ले तेरी स्त्री है अब यह
मां स्त्री का रूप ले कर आई है मां ही तो सब रूप में है तेरे को विस्तृत व्यवहार करना है तो चल कि हो गए नजिक और वह ठाकुर ने अपनी पत्नी के साथ पति पत्नी का जो भाव होता है उस भाव से थोड़ा सा नजिक तो गए लेकिन वह तो मां ही तो बनकर यह पत्नी को तुरंत भाव माय हो गया युवान सुंदरी सदाचारिणी शारदा और रामकृष्ण का आविष्कार ने उठा भाव में कितनी शक्ति है का कर इतना ऊंचा भाव तो कोई कोई धरती पर कर पाएं लेकिन अभी आप विद्यार्थी हो अभी आप पर
संयम ही साथी है और तुम साधु करके एक कवच बना लो अब कि थोड़े दिनों में आप महसूस करेंगे कि आपके इर्द-गिर्द है जो जब किया है उसका एक सात्विक सूक्ष्म व्यवस्था निकलेंगे रूम को से आपके भर दें इससे आपके शरीर से हरेक कवच बन जाएगा फिर उस कवच का प्रतिदिन ऐसा चिंतन करो थोड़े दिन में आप महसूस करेंगे ध्यान में आपको दिखेगा कि चारों तरफ एक दुबला हो गया है सुदर्शन चक्र या कभी-कभी सुदर्शन ने सप्तरंग भी आवास होगा फिर आपका सुदर्शन इतना प्रभावशाली हो जाएगा कि जब भी आप व्यवहार में उसका स्मरण करते
ही आपको खेलने का यह के विचार चले जाए और उस प्रदर्शन सहित आप किसी भी ऑफिस में चले गए किसी भी वरिष्ठ व्यक्ति के पास चले गए तो आपका वह सुदर्शन उस माहौल को अपने प्रभाव रखेगा और आप सफलता पा हुआ है हुआ है और कई महापुरुषों के पास तो यह सुदर्शन बनाए बिना ही सुरक्षण जैसा कम होने लगता है जैसे रविंद्रनाथ ठाकूर कातिल गुंडे को पैसे देकर उनके हत्या के लिए की सुपारी दी गई थी और रात को दो बजे वह खिड़की खोलकर आया तो रविंद्र नाथ टैगोर लिख रहे थे अब क्या लिखेगा याद
कर ले उसको यह छुड़ा तेरे खून का प्यासा बड़े गंदे शब्द बोलकर छुड़ा सामने रख दिया रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा मित्र अभी कविता यार है थोड़ी देर ठहरो मैं यह कविता लिख लो फिर तुम अपना काम पूरा कर लेना वह कविता लिखते गए लेकिन उनका ऐसा कुछ सुदर्शन के थोड़ी देर उस बात और में ठहरते खातिर गूंदना जिस रास्ते से आया उछाल आ गया है हेलो हेलो ऊपर उठा कर कहा कि मित्र अपनी इच्छा पूरी करो लेकिन वह मित्र सचमुच मित्र बन चुका था मैं दो-चार दिन के बाद रविंद्र नाथ टैगोर को सन रास्ते में
भूनते समय सुबह बुलेट ठाकुर जी आपने कविराज मेरे को क्या कर दिया मे इतना खूंख्वार और इतना गुस्सा आया हुआ था आपकी अत्याचार किसी भी कीमत पर मैं करता था आप कितना भी रोकते लेकिन आपने क्या कहा मेरे को मित्र जरा रुक जाओ आप लग गए बस उनके पवित्र भाव के वह उस उसके हृदय का कुछ हद गोन टो बूंदों में भी तो होता है विचारों में कभी जी के पास भी है था कवच हां मेरा भाई ऐसा है ऐसा है वेश्यागामी है दारुड़िया है दोस्तों है बाबा जी इसको समझाओ कबीर कहते साधो यह तने
चार दिन का साधों बड़ा भाई गौतम महाराज यह बड़ा बदमाश है उन्हें साधु ने बोले ने तो शायद हुए साधुओं जीवन अपना ऊंचा लाइए सत्संग में जाइए साधों वह आदमी का टाइम कभी मुझको क्या पागलपन खैर लिया मेरा भाग्य मैं जानता हूं सिंपल मास्क को दोस्त को यह तो महापौर उन्हें भी से लज्जित हो जाए तो अ खतरनाक इसको साधो बोल हैं महाराज जी सादर नहीं वह ले साथ हो तुम साधु नही जाते साथ में और साधु बन गया सज्जन मन में है है तो सामने वाला कितना भी दोस्तों साफ हो जाएगी होगा लेकिन यह
है नहीं मेरा मित्र है तो शिवजी के गले में मित्र की नाईं क्या पाले हुए सेवर कि नहीं क्यों दिख नहीं रहे क्या आपके आत्मदेव में क्या आनंद है क्या सामर्थ्य आप जानते नहीं तो आप रक्षा कवच चाहिए बधाई दूसरों के वह दुश्मन है दोस्तों कैसे लेकिन आपके लिए वह अपने बस बुरे से बुरे व्यक्ति मेडिकेयर चाहिए जो भी होती और अच्छे से अच्छे व्यक्ति में भी कई गड़बड़ छुपी हुई होती है तो यह गड़बड़ जोरन हमारे इसलिए उसको प्राणायाम के द्वारा ध्यान के द्वारा और किसी की गड़बड़ तुम पर हावी न हो जाए इसलिए
आप सुरक्षा कवच ले लीजिए और हम लोगों का पतन होने का दुर्भाग्य का आता है कि जब हमारी बुद्धि में हमारे कसम कुछ योगिता आती है तो आती तो योग्यताओं सत चित्त आनंदस्वरूप इस वर्ष सेट करो योग्यता कम अपनी मांग लेते हुए IAS से तुम मिनिस्टर है हम प्राइम मिनिस्टर है हम साईं है हम्म बस पूछिए यह क्या समझता है ए हार्ट हमने गड़बड़ कर दी थी कि यह सारे संघर्षों का सारे पत्तों का मूल है आईएस साधु एंड विल कैरेक्टर डाट यह सारे राष्ट्रों की लड़ाई भी इसी गलती के कारण कुटुंबों में लड़ाई भी
इसी गलती के कारण समाज में आतंक भी इसी गलती के कारण होता है कि हम सट्टा सिद्धाश्रम अलग अपने को मान लेती हूं कि इस परमेश्वर के ज्ञान से मुंह का दूर हो दूर हो जाता है मोह अर्थात उल्टा ज्ञान ही मोह है मधुर हो जाता है के ज्ञान से मुंह को प्रकाश से अंधकार को भगवत सत्ता हमारे साथ उस आशा से निराशा को जीत लो और उस पर सत्ता के अनुभव से व्यर्थ की कल्पना आर्थर अपने को कोसने की घटना से अपने को बचा लो भगवत भाव से अभाव को अपने को असुरक्षित कर लो
मेरे पास यह नहीं यह नहीं फिर भी भगवान तो मेरे साथ है लाखों रुपए देने से हम लेस या आंखें तो मेरे पास है और रुपया देने से ऐसा शरीर फिर मेरे को क्यों नहीं मिल सकता ऐसा शरीर परमात्मा मेरे पास है और परमात्मा तो शरीर जाने के बाद भी मेरे पास रहेंगे तो फिर मैं अभाव की चिंता में क्यों अपने को हूं का पतन का कारण विनाश का कारण नकारात्मक विचार है अपने को दें मैंने और संसार को सच्चा मरना और उसमें सूखे ढूंढना यही दुख और पतन का कारण है अपने को ईश्वर का
मानना ईश्वर को अपना मानना है और फिर अमर पद पाने का रास्ता है फिर मन मायूस हो तो मोहम्मद वहीं रक्षा कवच अपना याद किया करो जहां-जहां मन जाय घुमा-फिराकर आप उस सत्ताधीश की स्मृति में आ जाओ आपके लिए ख़ूंख़्वार शेर ही हानि करता नहीं होगा मैं आपके लिए भविष्य की हानि करता नहीं होगा आपके लिए दुर्जनों के दुर्भाव आपके रक्षा तो आज के आगे प्रवेश नहीं पाएंगे अ कि आपके अंतर देव आनंद स्वरूप अरे शांत स्वरूप में मंगलस्वरूप है उस मंगलस्वरूप के कारण आप धारणा झूठ और कपट को हेत ना स्थानों की ह्रदय फिर
मलिन हो जाए अब आपसे नहीं होता है तो फिर रक्षा कवच और आकर्षक की पुकार यही तो अपने पास है जग में बैरी कोई नहीं जो मन वाशिगटन ओर युधिष्ठिर को सारा नगर सहित दिखता और दुर्योधन को सारे लोग दोस्तों देखते विद्यार्थी जीवन में मास्टर ने कहा कि इतने दोस्त है द्वारा दुर्योधन देख क्या हो उन वह सारे दोस्त लोग युधिष्ठर को भेजा कि कितने दुष्ट है वह राय सब सज्जन लोग आप अपना सुरक्षा कवच से परम सज्जन स्वरूप के साथ रोज हाथ मिलाओ रक्षा कवच के बाद हाथ मिलाने का अपना मिला दें और क्या
है है कि जब भी कुछ गड़बड़ हो तो हाथ मिलाओ तो यहां राजा रक्षा कवच बन जाए तो कि कितना आसान तरीका है मैं तीन चीजों का आखिरी साल करो अंदर में सद्भाव पैदा हो गया उसकी खूब रक्षा कर कुछ भी बलिदान हो जाए लेकिन सद्भाव अभी जो अभी सद्भाव है इस भाव की रक्षा करता है हम लोगों को वैराग्यभाव उठे तो रक्षा करो में एक बार भाई राम गया संसार से बेटे के व्यवहार से बेटी के व्यवहार से पति के व्यवहार से पत्नी के व्यवहार से मित्रों के व्यवहार से संसार कपट का ग्रह है
स्वार्थ कारगर है धत तेरे की छी है तो वैराग्य का भाव आज है उसको फिर उस भाव की रक्षा करो वह भाव आपकी रक्षा करेगा ऊपर उठा दे दो इन तीन कि तुम रक्षा करोगे तो एक्टिव तुम्हारी रक्षा करके तुमको बस तुकाराम बना देंगे नाम तुम्हारा तुकाराम नहीं होगा तो कोई बात नहीं लेकिन जहां तक गर्म पहुंच गए वहां पहुंच जाउंगी ए है जहां मारेगी लाश भगवान पहुंच गए वहां पहुंच जाओ जहां ज्ञान देव महाराज विराजे वहां बिरहा जाओगे जहां कबीर नानक विराजमान आप जाउंगी ए थे पेशेंट इन चीजों के आप सेवा करूं है एक
तो बढ़िया भाव आ गए सत्संग के समय जो उनको पकड़ को अ यह दूसरी बात है कि आप ध्यान-भजन में जो शांति मिली उसे शांत भाव की रक्षा करो और सद्भाव वैराग्य भाव और शांत भाव इन तीन निरक्षक उसकी रक्षा में कवच का चूर्ण का सकते हो मैं अभी तो सुविधा हो गई यह तीन भाउजु सत्संग में मिले उस सत्संग की कैसेट को पढ़कर फिर उन तीन बालों को पोस्ट करें है [संगीत] कर दो [संगीत]