हमने अपने पिछले वीडियो में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में जाना की किस प्रकार बालक चंद्रगुप्त परिश्रम की आग में तप कर सोना बना किस प्रकार बालक चंद्रगुप्त एक महायोद्धा बने aaiae अब हम आगे बढ़ते हुए इतिहास के अगले पाने को खोलते हैं कौन है सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य जहां हिंदू धर्म चंद्रगुप्त महान को निम्न वर्ग का एक महान योद्धा मानता है वही वो धर्म चंद्रगुप्त महान को सत्रीय मानते हैं तो कुछ itihaaskar चंद्रगुप्त को नंद वंश का वारिस मानते हैं पर जो भी हो अखंड भारत के सपनों को सच करते हुए पुरी दुनिया में भारत
की डाक कायम करने वाला एक सुरमा था जिसका नाम था वीर विराट सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य सम्राट ने नंदन की senaon को पाटलिपुत्र के maidanon में चकनाचूर करके रख दिया इतिहास के महान कहे जाने वाले सिकंदर की senaon को संपूर्ण upganistan से वापस रावण कर दिया सिकंदर के सेनापति seluks पर धाम दम दावों के साथ अपने जीत के जांदे बुलंद किए और उसे दो बार बंदी भी बनाया ईरान फारस से लेकर पूर्वी बंगाल और कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक के महान साम्राज्य के अधिपति सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य कलिंग और तमिल को छोड़कर संपूर्ण अखंड भारत के निर्माता
द जिस समय चंद्रगुप्त जंगल में yoddhaon को इकट्ठा करके एक sena का निर्माण कर रहे द उसी समय सिकंदर राजा पोरस पर हमले की तैयारी कर रहा था पोरस एक महान राजा द इसके दूसरी तरफ आचार्य चाणक्य कंधार और भारत के सभी 16 mahajanpadon के राजाओं को इकट्ठा करके सिकंदर को करारी टक्कर देने की तैयारी कर रहे द चाणक्य ने सभी 16 mahajanpadon के राजाओं को अखंड भारत की अखंड sena के निर्माण की योजना बताई पर यह योजना सफल नहीं हो पाई जिसके बाद सिकंदर और राजा पोरस के बीच एक मा भयानक युद्ध हुआ जिसे
दुनिया ने बैटल ऑफ हाइड स्पेस के नाम से जाना यूनानी lekhakon के अनुसार इस भयानक युद्ध के बाद राजा पोरस ने आचार्य चाणक्य से दोस्ती का हाथ बढ़ाया तभी चाणक्य ने पूर्व को अपने वीर शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य से परिचित करवाया ईशा के जन्म के 323 साल पहले सिकंदर की मृत्यु हो गई पर इस समय तक हिंदू कंधार ईरान और पंजाब के कई बड़े hisson पर सिकंदर के senapatiyon का कब्जा था और इसी मौके के इंतजार में बैठे चंद्रगुप्त मौर्य अपनी छोटी सी sena के साथ पंजाब के यूनानी सैनिकों पर दावे बोलना शुरू कर दिया कहा
जाता है की चंद्रगुप्त ने इन unaniyon पर लगातार हमले करने शुरू कर दिए जिसके बाद unaniyon ने पंजाब के इलाके को खाली कर दिया इसी के बाद संपूर्ण पंजाब पर चंद्रगुप्त मौर्य का शासन स्थापित हो गया इतिहास में इस घटना को चंद्र राज्य रोहन के नाम से जाना जाता है पंजाब को जीत कर चंद्रगुप्त मौर्य पंजाब के राजा बन चुके द और चाणक्य प्रधानमंत्री बन चुके द यही अपनी पहली जीत के बाद चाणक्य ने अखंड भारत का बिगुल foonka और इसी के साथ वीर विराट चंद्रगुप्त मौर्य ने पंजाब में एक शक्तिशाली sena की स्थापना की
इसी महासेना के साथ 322 इस पूर्व चंद्रगुप्त मौर्य ने मगध की राजधानी पाटलिपुत्र प्रसिद्ध हमला कर दिया इस mahayuddh में नंद वंश के राजा धनानंद का वध कर दिया गया इसी के साथ वीर विराट चंद्रगुप्त मौर्य ने संपूर्ण पाटलिपुत्र पर अपनी विजय पता का फराई यही से मौर्य वंश की शुरुआत के साथ चंद्रगुप्त मौर्य का राज्याभिषेक किया गया इसी के साथ चंद्रगुप्त मौर्य ने पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण में अपने कई सैनिक अभियान भेजे और इन्हीं लगातार जीतों के बाद मौर्य साम्राज्य लगातार फैलता जा रहा था वही चंद्रगुप्त अब सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बन
चुके द इसी समय सीरिया के साथ सलूकास niketar को समाचार मिले की एक 26 साल के लड़के ने पंजाब को जीत कर यूनान के राज्य को तहस-नहस कर डाला और संपूर्ण राज्य पर अपना अधिकार कर लिया इसी हमले के जवाब में साल 305 इस पूर्व selukas ने चंद्रगुप्त मौर्य पर हमला कर दिया इसी हमले में चंद्रगुप्त मौर्य ने सलूकास की senaon पर ताबड़तोड़ धावा बोला सलूकास कुछ समझ नहीं पाया की आखिर हो क्या बाहर बन जाना कहा गया सलूकास की senaon को सम्राट की sena ने चारों तरफ से घर लिया मौत रूपी चंद्रगुप्त महान niketar
के सामने खड़ा था तभी से लुकास ने चंद्रगुप्त महान के साथ अपनी हर swikarte हुए संधि की इस संधि के तहत सलूकास ने सम्राट चंद्रगुप्त को बलूचिस्तान हैरत कंडर और काबुल राज्यों का राजा घोषित कर दिया सलूकास चंद्रगुप्त मौर्य से इतना भयभीत हुआ की उसने अपनी बहन हेलेना का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य के साथ करवा दिया दूसरी तरफ वीर चंद्रगुप्त ने भी सलूकास को उपहार में 500 हाथी दिए सम्राट द्वारा यह चारों राज्यों का शासन जीत लेने के बाद सम्राट चंद्रगुप्त एक विशाल साम्राज्य के सम्राट बन चुके द plutark ने सम्राट के बारे में लिखा है
की सम्राट की मा sena थी जिसने भारत के कई कई राज्यों को एक ही jhatake में अपने शासन में शामिल कर लिया था यूनानी यात्री मजिस्ट्रेट सम्राट के दरबार में कई सालों तक यूनान राजदूत बनकर रहा जिसने सम्राट के दरबार में रहते हुए इंडिका नामक किताब लिखी इन्हीं साम्राज्य विस्तार के बाद मौर्य कल में भारत में लगातार 12 सालों तक भयंकर अकाल पड़ा इसी अकाल में सम्राट अत्यधिक परेशान हो गए अंत में उन्होंने brahmanon तथा संतों की सभा बुलाई और अकाल से मुक्ति के मार्ग पूछे इसी सभा में साल 298 इस पूर्व सम्राट के दरबार
में एक जैन साधु भद्रा बहु padharen उन्होंने सम्राट से कहा की इस अकाल का कारण महाराज आपके कर्म है आपने अखंड भारत के सपनों को सच करने के लिए 16 mahajanpadon के कई-कई राजाओं का वध किया जिसके कारण [संगीत] बहु का जवाब था संथारा का अर्थ था राजपथ छोड़कर गुप्त स्थान पर भूखे प्यासे रह कर अपने अंतिम सांस तक अपने इष्ट आराध्य का ध्यान करते रहो इसी के साथ साल 291 इस पूर्व सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन मुनि baddrabahu से जैन धर्म की दीक्षा लेकर अपना राजपाट अपने पुत्र बिंदुसार को saunpate हुए संथारा व्रत के
लिए कर्नाटक के junglon की तरफ निकल गए इस तरह से सम्राट ने अखंड भारत पर एक छात्र शासन स्थापित किया लेकिन वे दक्षिण भारत के कलिंग और तमिल को कभी नहीं जीत पाए परिणी सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पोते सम्राट अशोक ने अपने दादा का सपना पूरा करते हुए अंत में कलिंग विजय कर लिया था dhanyvad दोस्तों जुड़े रहिए [संगीत]