हेलो फ्रेंड्स वेलकम बैक टू माय चैनल केमिकल इजरिंग बेसिस तो हम इस सीरीज में अभी डीसीएस के बारे में पढ़ रहे डीसीएस में डीसीएस क्या होता है कैसे काम करता है सिग्नल ट्रांसफरिंग कैसे होती है एक कंट्रोलर कैसे काम करता है अब आज का इस वीडियो में हम समझेंगे कि लूप्स कितने टाइप के होते हैं जो हमारे कंट्रोल लूप होते हैं व कितने टाइप्स के होते हैं और क्या होते हैं य बहुत ही बेसिक सा ट क्वेन है कि कितने टाइप के लूप होते है उम डिफरेंसेस क्या है तो हम इस वीडियो में सिर्फ इतना
समझने की कोशिश करें लूप्स क्या होते है कितने टाइप्स के होते हैं और कौन कन से होते हैं तो सबसे पहले तीन टाइप के ू हमारे पास बेसिक है जो कि पहला है ओपन लू सेकंड है क्लोज लूप थर्ड है कैस्केड लूप एंड फोथ च नॉट सो कॉमन इ कॉम पलेक्स ल यह चार टाइप कीकी लूपिंग आपको कंट्रोलर के साथ मिल जाती है समझते हैं किय क्या होती है तो एक कंट्रोलर कभी भी कंट्रोलर का काम क्या होता है कि आपका कोई भी प्रोसेस वेरिएबल है उसको कंट्रोल करना उसी कंट्रोलिंग को हम जो है कंट्रोल
करता है उसको कंट्रोलर कहते हैं और आपका बेसिक फंक्शन किसी भी कंट्रोलर का है कि जो भी पैरामीटर्स हमको किसी भी गिवन रिएक्टर कह सकते हैं टैंक कह सकते हैं या कोई भी इक्विपमेंट कह सकते हैं किसी भी प्रोसेस में हमको उसका चाहे वो लेवल हो टेंपरेचर हो किसी भी टाइप का कुछ भी हो प्रेशर जितने कंट्रोलर कंट्रोल कर सकते हैं व सारे वेरिएबल को कंट्रोल करने का काम कंट्रोलर का है अभी आपका ओपन लूप क्या होता है ओपन लू समझते मान लेते है यह एक टैक मैं अलग से बना दिखाता हूं एक हमारे पास
एक टैंक है इस टैक का कुछ लेवल है इसके अंदर एक हमने एक लेवल ट्रांसमीटर लगा क्या किया हमने एक टक है उसके अंदर लेवल ट्रांसमीटर लगा रखा है और इसके अंदर जो इसका लेवल मेकप हो रहा है वो एक कंट्रोल ल के थ होरहा है और एक पप उसके अंदर लगा हुआ है प चलता है तो य ले ट्रांसमीटर देख करके हम इसम इसका लेवल मेकप कर सकते हैं अगर बात समझेगा अगर यह लेवल ट्रांसमीटर सिर्फ लेवल दिखा रहा है मतलब यह सिर्फ लेवल शो करने के लिए है इससे कोई कंट्रोलिंग नहीं है तो
हम उस चीज को कहते हैं ओपन लूप अगर कोई भी लेवल ट्रांसमीटर अगर हमारा सिर्फ और सिर्फ डिस्प्ले के लिए है येय डिस्प्ले कर सकता है कि तुम्हारा लेवल जो है 50 पर है या 40 पर है या 30 पर है व्ट एवर इट जो भी आपका लेवल है वो सिर्फ डिस्प्ले कर र है लेकिन इस डिस्प्ले के बेसिस प हम कोई लेवल इसका कंट्रोल नहीं कर रहे सिर्फ समझने के लिए जैसे टैंक पास में आपके टैंक्स होते हैं उन टैंक्स के अंदर आपके पास एक लेवल होता है कि इस टैंक के अंदर लिक्विड जो
है 30 लीटर भरा है 100 लीटर भरा है 200 लीटर भरा है लेकिन वो 200 लीटर से अगर 190 प आएगा तो आपका पंप चालू हो जाए ऐसा नहीं किया हमने हमने उसके साथ कोई कंट्रोलिंग नहीं दी है तो ऐसे जितने भी ट्रांसमीटर्स होते हैं उनको हम कहते हैं कि वो ट्रांसमीटर्स ओपन लूप में है अगर जैसे यहां प समझते हैं मैंने ये डायग्राम आपको एक सिंपल दिखाया अब इस डायग्राम को समझते हैं यहां पे एक टैंक है उसके अंदर हमने एक एलटी लगाया है और एक टेंपरेचर ट्रांसमीटर टीटी लगा है अभी क्या कर रहा
है ये टीटी सिफ और सिफ शो करने के लिए कि इसका टेंपरेचर कितना है इसके अंदर जो भी लिक्विड है टक का क्या टमपरेचर है वो करने के लिए टी दूसरा इसके अर ले ट्रांसमीटर है जो कि हमने ओपन लूप में रखा है इसके साथ कोई कंट्रोलिंग नहीं द यह भी सिर्फ और सिफ लेवल शो कर रहा है तो ये एक अलग और ये एक अलग य दो डिफरेंट ट्रांसमीटर दो डिफरेंट ओपन लोस अभी हम क्या करते हैं कि यह लेवल ट्रांसमीटर को हमने एक कंट्रोलर के साथ अटैच कर दिया जो कि जिसका कंट्रोलर का
एक हमने पिछले वीडियो में समझा था कंट्रोलर का एक सेट पॉइंट होगा तो हमारे पास इसका एक सेट पॉइंट दे दिया कि अगर ये कंट्रोलर जो है क्या कंट्रोल करेगा इस टैंक का लेवल कंट्रोल कर जाएगा क्योंकि हमने इसको एक कंट्रोलर के साथ अटैच कर दिया अब क्या करेगा एवी हम इसका जो भी देंगे कहते हैं कि % हमने इसका सेट पॉइंट दिया तो इस टाम का लेवल 40 पर 50 पर से नीचे या ऊपर जाएगा तो ये कंट्रोलर एक्शन में आ जाएगा इसका पवी जैसे ही डेविट करेगा तो कंट्रोलर कमांड देगा आपका इस कंट्रोल
ल को ओपन या क्लोज होने के लिए तो यह जो यह वाला लूप बना आपका एलटी का थ्रू कंट्रोलर एंड दिस कंट्रोल वल यह जो लूप बना क्लोज लूप बन गया क्योंकि ये एलटी के बेसिस प अभी हम कंट्रोल ल के थ्रू इस टैंक का लेवल कंट्रोल कर रहे एक कंट्रोलर हमने यूज किया और य इन दोनों के साथ ऑटो में कंट्रोल हो सकता है अगर यह सिस्टम हमने ऑटो मोड में र फिर समझ अगर हमने इसको ऑटो मोड में रेट किया कंट्रोलर अपने आप कंट्रोल कर रहा है विदाउट इंटरवेंशन मैन इंटरवेंशन तो वो हो
गया क्लोज लूप में लेकिन अगर हमने इसको कर दिया हमने इसको क्या किया मैनुअल मोड में ले लिया मैनुअल मोड में ले लिया अब क्या करेगा ये कंट्रोलर अभी ओपन लक में आ गया अब हमको इसको मैनली खुद कंट्रोल करना है यह क्लोज लूप से हटा के हमने ओपन लूप में कर दिया है यह हो गया ओपन लूप और क्लोज लूप की बात अभी समझते हैं तीरा लूप है कैस्केड लूप कैस्केड लूप क्या करता है आपके पास दो लेल ट्रांसमीटर किसी भी सिस्टम में है जैसा की हमने दिख रहा है य एक टप ट्रांसमीटर है
एक लेवल ट्रांसमीटर है य दो है अभी सिनेरियो ऐसा है इस टैक के अंदर जो है जैकेटिंग है और य स्टीम हीटेड है तो अभी क्या होगा ये ट्रांसमिटल इसके अंदर जो आने वाला स्टीम है वो उसको भी कंट्रोल कर सकता है इसका टेंपरेचर कंट्रोल करने के लिए और ये लेवल ट्रांसमीटर क्या कंट्रोल करेगा इसका लेवल इस टैंक का थ्रू दिस कंट्रोल ल अभी क्या होगा य पर कंट्रोलर लग गया जो इसका इसको खोलेगा या बंद करेगा तोस डिंग ऑफस रे र अभी ऐसे ल वापस समगा कके लूप में ऐसे लूप जिसम की आपके पास
दो कंट्रोलर हो दो कंट्रोलर में एक कंट्रोलर को हम कहते हैं प्राइमरी कंट्रोलर और दूसरा होता है सेकेंडरी लर इस फैमली कंट्रोलर को नॉर्मल लैंग्वेज में मास्टर कहते है मास्टर कंट्रोलर और सेकेंडरी को हम लोग स्लेव कहते हैं तो आपके कैस्टेड लूप के लिए आपको दो कंट्रोलर चाहिए दो कंट्रोलर में आपका एक प्राइमरी कंट्रोलर होगा एक सेकेंडरी कंट्रोलर होगा इसके आगे समझे तो आपका जितने भी कैस्केड लूप होंगे उस कैस्केड लूप में आपके जो भी कंट्रोलर होंगे जो दोनों कंट्रोलर है उन दोनों कंट्रोलर का एक सेट पॉइंट होगा और एक पवी होगा तो हम कहते
है ये हमारा हो गया प्राइमरी यह हो गया सेकेंडरी प्राइमरी का एक सेट वैल्यू होगा एक प्रोसेस वैल्यू होगी ठीक कहते है कि सेट वल्य हमने दिया % और प्रोसेस वेरिएबल मेरा प्रेजेंट वैल्यू जो चल रही है वो कहते है 40 चल रही है ये प्राइमरी की बात हो रही है अगर ध्यान दीजिएगा कैस्केड लूप एक ऐसा क्वेश्चन है कि कैस्केड लूप क्या होता है यह समझाना य आपके नॉर्मल इंटरव्यूज में कभी भी आप अगर कंटीन्यूअस प्लांट्स में डी प्लांट में जाते हैं तो ये बहुत ही नर्मल सा क्वेश्चन है आपसे लोग पूछ लेते हैं
कि कैस्केड लूप क्या होता है तो ये एक सिंपल सा इसका आंसर है आपके पास दो कंट्रोलर्स एक प्राइमरी एक सेकेंडरी प्राइमरी को हम मास्टर कहते हैं सेकेंडरी को स्लेव कहते हैं अगर आपका प्राइमरी का प्रेजेंट वैल्यू या प्रोसेस वैल्यू प्राइमरी का प्रोसेस वेरिएबल प्रोसेस वैल्यू प्रेजेंट वैल्यू आपका सेकेंडरी का सेट वैल्यू बन जा जाता है सेकेंडरी का सेट वैल्यू जो य पर वैल्यू आ रही है उस वैल्यू के बेसिस पर आपका इसका सेट वैल्यू डिसाइड होगी तो ऐसे जितने भी कंट्रोलर होते हैं उनको हम कहते हैं कि वो कंट्रोलर कैस्केड में आपका जैसे जैसे
इसका प्रेजेंट वैल्यू चेंज होता जाएगा वैसे वैसे आपके सेकेंडरी का सेट वैल्यू चेंज होता जाएगा ये एक चीज बहुत खास आपने इतना सा समझाया ये कैस्केड लूप यहां पे खत्म हो गया लेकिन ये कैसे होगा वो समझते हैं प्रेजेंट वैल्यू आपका 40 पर आया ये आपका लेवल है सेट वैल्यू आपका कह देते हैं सेकेंडरी कंट्रोलर आपका टेंपरेचर है तो ये 40 पर कैसे होगा टेंपरेचर आपका डिग्री सेल्सियस डिग्री फारेनहाइट इनमें नापा जाएगा तो ये 40 पर वहां पे कैसे होगा तो उसमें क्या करते हैं आपका किसी भी ट्रांसमीटर का एक स्केल होता है और इस
स्केल का एक रेंज होता है उसको हम कहते टोटल को रज कहते अगर य आपका लेवल का रेंज है कहते है की जीरो लीटर से लेक 100 लीटर तक का आपका एक रेंज है जिसम आपका टैक कारा लेवल बढ़ता है इसका इसी लेवल को हम क्या करेंगे य सॉरी ए की बात कर रहा लीटर की बात सय जो एटी है एटी का एक रज होगा जो दिखाएगा आपका जीरो से 100 पर आउटपुट है आपका लेवल जी पर है खाली हो गया है 100 पर भरा है या बीच % है तो यह जो रेंज है हम
इस रेंज ऑफ एलटी की मैपिंग आपके टीटी के रेंज के साथ मैपिंग करते है हम कहते य रज हमने लिया है जिसका हमको नापना है य रेचर हमको जीरो से 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक चाहिए पानी है स्टीम हीटिंग कर रहे हैं तो 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक हीट कर सकते हैं तो आपको जो ये रेंज की मैपिंग है उसको इस रेंज के साथ मैप करते हैं कि ये रेंज हो सकता है आपका 30 डिग तक 30 डिग्री से स्टार्ट करर हो कि हमको 30 डिग्री से नीचे जाएगा ही नहीं नॉर्मल टेंपरेचर में भी आपका रूम टेंपरेचर
प 30 डिग्री सेंटीग्रेड है तो 30 से 100 की मैपिंग आपका जीरो से 100% के बीच में मैप करते हैं जिससे कि आपका ये 40 पर जो दिख रहा है ये आपका टेंपरेचर जब ये इसके साथ ओवरलैप करेगा तो ये टेंपरेचर आपको कहीं पर दिखा रहा होगा 50 डिग्री सेंटीग्रेड लेकिन वो क्या है वो इस पर डिपेंड कर रहा है पवी प तो आपका प्रेजेंट वैल्यू बन जाता है आपका सेकेंडरी का सेट वैल्यू जिसके बेसिस पर आपका अब पवी इसके ऊपर इसका पवी इससे मैनेज होगा तो यहां कहते यहां प 48 डिग्री सेंटीग्रेड बच रहा
है सो वापस समे प्राइमरी सेकेंडरी दो कंट्रोलर एक का सेट वैल्यू आप एस ऑपरेटर आप उसको सेट वल देते हैं आपने दिया % जिसके बेसिस पर प्रेजेंट वैल्यू आएगा प्राइमरी का या मास्टर का प्रेजेंट वैल्यू आपका सेकेंडरी का सेट वैल्यू बन जाता है सेट वेबल बन जाता है अगर ऐसा होता है हम ऐसा लूपिंग करते हैं तो उसको हम कैस्केड लूप कहते हैं आई थिंक आई हैव मेड माइसेल्फ मोर देन क्लियर ये चीज हो गए आपका कैस्केड लूप कैस्केड लूप के बाद समझते हैं कॉम्प्लेक्शन लूप कॉम्प्लेक्टेड लूप्स आपके सीरीज में या पैरेलल में होते हैं
मतलब वैसे तो आपको कॉम्प्लेक्शन लूप्स बहुत ही कम रिफाइनरी में दिखते हैं जहां पे कि आपकी बहुत ही प्रेसा इज कंट्रोलिंग करनी होगी वही पर आपको मिलते हैं नहीं तो आपको कॉम्लेक्स लूप बहुत ही कम मिलते हैं क इंडस्ट्री में बहुत ही कॉम्लेक्स प्रोसेसस में ही आपको मिलते हैं जो कि बहुत ही डेंजरस प्रोसेस होते जहां पर आपके पास कंट्रोलिंग फ्रेम बहुत छोटी होती है तो कमप आपको बहुत ही कम मिलेंगे सिंपल से इतना कह देता हूं कि जहां पर भी आपका कैस्केड लूप्स दो तीन कैस्केड लूप्स एक साथ सीरीज में पलल में होंगे वो
पूरे के पूरे कैस्केड लूप्स को ऐसे जितने भी लूप्स होते हैं उनको कॉम्लेक्स लूप्स कहते हैं एक चीज वापस य पर मैं कहना चाहता हूं कि हमको कैड ल की जरूरत क्यों है मैं वो समझाना चाहता था हमने देखा कि ओपन लूप किस लिए है ओपन लूप इ ओनली फॉर डिस्प्ले ऑफ द पैरामीटर तो ओपन लूप आपको सिर्फ और सिर्फ पैरामीटर डिस्प्ले करता है जैसे कि हम कह सकते हैं कोई भी एलटी लगा है जो आपको सिर्फ लेवल बता रहा है कंट्रोल कुछ नहीं कर रहा है एक टेंपरेचर ट्रांसमीटर है जो सिर्फ टेंपरेचर बता रहा
है कंट्रोल कुछ नहीं कर रहा है इसके अलावा एक प्रेशर ट्रांसमीटर है जो सिर्फ आपको टैंक का प्रेशर बता रहा है कंट्रोल कुछ नहीं कर र है उससे हम कोई कंट्रोल नहीं कर रहे ऐसे जितने भी ट्रांसमीटर होते हैं उनको हम कहते हैं कि वो ओपन लूप में है अगर हमने इस ट्रांसमीटर को एक कंट्रोलर के साथ अगर हमने जोड़ दिया जो कि उसका अगर हमने एलटी दिखाया लेवल और वो लेवल हम कंट्रोल करने लगे ऐसे जितने लूप्स फॉर्म होते हैं वो क्लोज लूप हो गया अभी हमको क्लोज लूप के बाद कैस्केड लूप की जरूरत
क्यों पड़ी कैस्केड लूप में के पास दो कंट्रोलर एक साथ है अगर कोई भी प्रोसेस ऐसा है जिसमें क्या हमको प्रिसा कंट्रोलिंग चाहिए तो हम क्या करते हैं जो एक कंट्रोलर का पिसाने की लोड शेयरिंग होगी हम उसको दो डिफरेंट कंट्रोलर्स के बीच में डिवाइड कर देते हैं तो इससे चांसेस ऑफ इन एक्यूरेसी व बहुत कम हो जाती है प्रने बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो क्योंकि आपका जितना भी लोड रिंग है वो आपका दो डिफरेंट कंट्रोलर्स प डिवाइड हो जाता है आपके पास कंट्रोलिंग बहुत आसान हो जाती है तो कैस्केड लूप्स मेक योर कॉम्प्लेक्टेड
लूप्स का यूज करते हैं हर जगह प कैस्केड लूप्स यूज नहीं करते हैं कैड लूस बहुत ही ऐसे आप यूज करते जहां पर आपके पास कंट्रोलिंग प्रिसा चाहिए एक्यूरेट चाहिए उन्हे आप यूज करते हैं सो आई थिंक आईव मेड मोरन क्लियर माइस ए लूप्स के बारे में मैंने कोशिश कि आप तक पहुंचाने के लिए कि ओपन लूप क्लोज लूप कैस्केड लूप और कॉम्प्लेक्शन समझाने की कोशिश की इसके बाद भी अगर आपके पास कोई सवाल बचता है तो प्लीज कमेंट बॉक्स में लिखि थैंक यू