क्या इस्तेमा की नफ़सियात नहीं बदली या कमजोर की कमजोरी ख़ नहीं हुई? बहुत उम्दा [संगीत] सवाल किया आपने। वेरी गुड। दोनों नहीं ख़। इतनी ताकत और इतनी विल कहां से आ रही है कि वो दूसरे इंसान के ऊपर इतना जुल्म कर रहा है और उसके बाद उसको तस्लीम करने के लिए भी तैयार नहीं कि मैं इतना जुल्म [संगीत] कर रहा हूं। बल्कि वो उल्टा खुद मजलूम बन जाता है। बहुत सी इंसानी हालतें ऐसी है कि जहां इंसान अपनी ये सलाहिय है कि वो दूसरों के दर्द को महसूस [संगीत] कर सके। ये इंसान की कौन सी
डार्क साइकोलॉजी है? इंसान की खूबी है जो एवोल्यूशन में उसने हासिल [संगीत] की है और वो ये है कि इंसान ने अपना ये फ्रंटल लुक जो है दिमाग का ये हिस्सा जो [संगीत] आपको सामने नजर आ रहा है ये डेवलप किया है सलामती का मतलब सिर्फ ये सलामती नहीं कि मेरी जान बच जाएगी उस सलामती [संगीत] का मतलब ये है कि मैं अपने नजरियात अपने अकायद अपने बिलीफ सिस्टम के साथ जिंदा बाकी नहीं रह पाऊंगा उस सलामती को बरकरार रखने के लिए कुछ लोगों का खात्मा जरूरी समझा जाता ह्यूमन बायोलॉजी में साइकोलॉजी में ये कैसे
मुमकिन है ये सलाहियत फिर वो सिलेक्ट एक्टिव खोए वो सिर्फ एक खास तबके और खास लोगों के लिए तो [संगीत] खो दे बाकियों के लिए यह मौजूद रहे। अब कॉलोनाइजर इस शक्ल में हमारे सामने नहीं है। अब वो अपने चार कामों से हम ये देख रहे हैं कि डेमोक्रेसी जो है ये मेजोरिटेरियनिज्म बन गई है। तो हर जगह जो अक्सरियत है उसको ना जाने क्यों अकलियत से खौफ होना शुरू हो गया है। अब कॉलोनाइजर [संगीत] में एक नई चीज ऐड हुई है। वो ये है कि पहले कॉलोनाइजेशन का काम जो है वो हुकूमतें। और हुकूमतें
भी करती है। मगर हुकूमतों [संगीत] के साथ फाइनशियल इंस्टीटश भी करते हैं। जैसे तालिबान जो है वह पहले कोबोरेटर थे बड़े इस्तेमा के। [संगीत] तो जब उस बड़े इस्तेमा से उनकी लड़ाई हो गई तो वो अब खुद कॉलोनाइजर इस्तेमा की भी तो फिर एक लेगसी हुई ना कि एक नस्ल दूसरी को उसी तरह ट्रांसफर करके जाती है जैसे एक महकूमियत ट्रांसफर होती है। बिल्कुल ऐसे ही बच्चों का जवाब सुनिए। बच्चों [संगीत] ने उनको कहा ये तो कुत्ता है। इसको कौन सा दर्द होता है? अक्सर अकलियतों को जिनको हम माइनॉरिटीज कहते हैं जो मेरे ख्याल में
गलत लफ्ज है उनकी मौत और उनके हादसों को भी सीरियसली [संगीत] लेते हैं। पार्टीशन के ट्रॉमा आज अपने क्लनिक में देख अगर हालात बदल [संगीत] जाए तो नस्लें इस ट्रॉमा से निकल भी आती है। वतन से दूरी की तंगी है। इस बात का कल्क है कि उसको वतन क्यों छू सर फिर इंसान [संगीत] और मैसेज जो है वो तो बहुत वरेबल होते हैं। कोई भी शख्स नॉर्मल ज़हनी हालत [संगीत] दूसरे को नुकसान पहुंचे। रेप के वाकयात में यही दोनों क्लासेस सबसे ज्यादा मुलविस होती है। मेरा सवाल ये है कि क्या इस तरह के खौफ से
के आपको मार दिया जाएगा? अगर आपने जुर्म किया [संगीत] तो नफ्सियाती तौर पर इंसान इस तरह के खौफ से इस तरह के जरा से बाज आ सकता है? जो रेप [संगीत] होता है वो जितन की वजह से है तो वो फ्रॉइड की वो थ्यरी जो कब की डिस्क्रेडिबिट हो गई है [संगीत] उनको रिपीट करते हैं औरत का रोल सोसाइटी में चेंज हो रहा है वो बदल रहा है जो वाइस वुमेन थी वो चुड़ैल पर वो बनाना पड़ा उसको ये तब्दीली जो है ये आज तक [संगीत] मर्द के सर पर एक लटकती हुई तलवार है कैसे
हैं दोस्तों आज हमारे साथ हैं डॉक्टर अख्तर अली सैयद आप क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं और आपने एक शानदार किताब इस्तेमाार की नफसियात लिखी है और सोचने समझने वालों को बहुत कुछ सोचने और समझने पर मजबूर किया इस इस किताब [संगीत] ने। इस किताब में से और मौजूदा हालात में और इंटरनेशनल सुरते हाल में हम कुछ सवालात डॉक्टर साहब के सामने रखेंगे। डॉक्टर साहब कैसे हैं आप? बहुत-ब शुक्रिया। मैं ठीक हूं। थैंक यू। यूं लगता है कि बजाहिर खत्म हुए। एक जमाना हो गया, दहाइयां हो गई। लेकिन वो उसकी जो चिरादस्तियां है वो उसी तरह जारी हैं।
वो और जगह से हैं। वो एक एक कॉलोनियल कब्जे के बगैर है लेकिन जारी है। सो क्या इस्तेमा की नफसियात नहीं बदली या कमजोर की कमजोरी खत्म नहीं हुई? बहुत उम्दा सवाल किया आपने। वेरी गुड वेरी गुड। दोनों नहीं खत्म हुई। यानी मुख्तसर सा जवाब ये है कि दोनों नहीं खत्म हुई। अब इस इसकी थोड़ी सी तफसील करते हैं। पहली बात तो आपने बिल्कुल बजा तौर पर कहा के 1947 में डीलोनाइजेशन का जो प्रोसेस शुरू हुआ था वो कभी भी मुकम्मल नहीं। जी ठीक है। अगर आप लिटरेचर उठा के पढ़िए तो आपको मुतादिद इस्तलाहात पढ़ने
को और सुनने को मिलेगी। जी मिसाल के तौर पर कॉलोनियलिज्म से तो हम वाकिफ है। फिर एक टर्म इस्तेमाल [संगीत] हुई पोस्ट कॉलोनियलिज्म। उस पोस्ट कॉलोनियलिज्म को हफन के साथ भी लिखा गया। बगैर हफन के साथ भी लिखा गया। फिर उसके बाद एक और नई टर्म 1965 में घाना के पहले प्रेसिडेंट क्रमा ने इंट्रोड्यूस कराई थी। वो थी न्यू। हम ये चलती रही बहुत अरसा और अब आपने जब ये किताब देखी है इसमें मैंने एक टर्म इस्तेमाल की है हाइपर क्लोनियलिज्म ये दो असहाब ने इस्तेमाल की है। एक मार्केटिंग साइकोलॉजिस्ट के एक्सपर्ट है मार्क बोर्ग
और दूसरे हमारे फेमस और बहुत ही पसंदीदा नवेलिस्ट जनाब मिथर बेग साहब ओके तो ये मैंने इसमें इस्तेमाल की है। अब ये इसला क्या बता रही है? येला ये बता रही है कि क्रोनलिज्म जो 1947 से पहले था जिसके बारे में ये गुमान किया जा रहा था कि ये खत्म हो गया है उसके बाद से ऑनवर्ड वो अपनी शक्ल तब्दील करता था और उन मुख्तलिफ शक्लों को माहरीन ने मुफरीन ने मुख्तलिफ इलाहात के जरिए से समझने की कोशिश की है तो अब मैं ये समझता हूं कि हम जिस दौर में रह रहे हैं वो हाइपर
पर क्लोनलिज्म का दौर है। तो दिस इज वेयर वी आर नाउ। ओके। और आपकी जो आखरी आपने जो नुक्ता उठाया के इस्तेमार नहीं बदला या महकूम नहीं बदले तो मैंने उसकी जवाब में अर्ज कर कर दिया है कि दोनों नहीं। हम दोनों नहीं बदले। अच्छा सर जो हमने अभी देखा इस्तेमार का चेहरा 2023 के बाद और अगर सही तरह से इसको आगाज करें तो 2022 इससे जितना चाहे आप पीछे चले जाएं। हमने एक चीज देखी जिसने बहुत हैरान और परेशान किया कि क्या एक इंसान में इतनी इतनी ताकत और इतनी विल कहां से आ रही
है कि वो दूसरे इंसान के ऊपर इतना जुल्म कर रहा है और उसके बाद उसको तस्लीम करने के लिए भी तैयार नहीं कि मैं इतना जुल्म कर रहा हूं। बल्कि वो उल्टा खुद मजलूम बन जाता है। ये इंसान की कौन सी डार्क साइकोलॉजी है? अ देखिए पहली बात तो ये के इस पर मैं आपके साथ मुफसल कई जहनी अमराज गिनवा सकता हूं [गला साफ़ करने की आवाज़] जिनमें एकजेक्टली यही होता है ये लेकिन अगर आप इसको जरा सा जहनी बीमारियों के का जो डोमेन है तशकीसी निजाम का जो डोमेन है और बहुत ही टेक्निकल जो
बातें हैं उनका जो डोमेन है उससे बाहर निकाल के देखिए खालिस इंसानी सतह पर इसको ले जाए। तो बहुत सी इंसानी हालत ऐसी है कि जहां इंसान अपनी ये सलाहियत कि वो दूसरों के दर्द को महसूस कर सके खो बैठा। हम असल में जिस हालत की तरफ आप इशारा कर रहे हैं अगर मैं इसको डायग्नोस्टिक सिस्टम की टेक्निकिटी से बाहर निकाल के लाऊं और देखने की कोशिश करूं तो ये इंसान की वो सुरते हाल है कि जहां वो दूसरों के दर्द और तकलीफ को महसूस करने की सलाहियत खो बैठता है। इंसान की खूबी है। इंसान
की खूबी है जो एवोल्यूशन में उसने हासिल की है और वो ये है कि इंसान ने अपना ये फ्रंटल लुक जो है दिमाग का ये हिस्सा जो आपको सामने नजर आता है ये डेवलप [संगीत] किया है और ये वो एरिया है ब्रेन का कि जो मुझे आपकी फीलिंग्स रीड करने में हेल्प करता है। जब आपके चेहरे को मैं देखता हूं तो मुझे पता चलता है कि आप खुश है या आप तकलीफ में है। आप रो रहे हैं या आप हंस रहे हैं। उससे मुझे ये अंदाजा होता है कि आपकी इस वक्त हालत क्या है। ओके।
ये जो सारी एम्पथी है ये यहां पर है। ओके। अच्छा। जब इंसान ये सलाहियत खोता है तो वो कैफियत पैदा होती है जिसकी तरफ आपने इशारा किया। अच्छा ये क्यों खोता है? इसके खो जाने के असबाब क्या है? वो मुताब उसमें गुस्सा एक कैफियत है। उसमें खौफ एक कैफियत है। उसमें आपको कुछ ऐसी डॉक्ट्रिनेशन उसकी वजह बनती है कि जिसके जिसमें मु्तला इंसान ये महसूस करता है कि अगर उसका टारगेट बच गया तो उसकी अपनी सलामती खतरे में पड़ जाएगी। जब मैं सलामती कहता हूं तो सलामती का मतलब सिर्फ यह सलामती नहीं कि मेरी जान
बच जाएगी। उस सलामती का मतलब यह है कि मैं अपने नजरियात, अपने अकायद, अपने बिलीफ सिस्टम के साथ जिंदा बाकी नहीं रह पाऊंगा। तो उसको उस सलामती को बरकरार रखने के लिए कुछ लोगों का खात्मा जरूरी समझा जाता है। इसलिए मैं मिसाले दे सकता हूं आपको। तो ये जब कैफियत होती है तो इंसान फिर उस टारगेट की जहनी हालत को उसके दुख को उसकी तकलीफ को समझने की सलाहियत को बैठता है। उसके सामने फिर एक गोल बाकी रह जाता है कि किसी भी तरह यह जो हस्ती मेरे सामने है जो मेरी सलामती जिसको मैंने अभी
डिफाइन किया आपके सामने अगर मुझे अपनी सलामती अजीज है तो इसका खात्मा जरूर अच्छा सर ह्यूमन बायोलॉजी में साइकोलॉजी में ये कैसे मुमकिन है कि एक इंसान अपना फ्रंटल लोब की ये सलाहियत खो बैठे कि वो किसी का दुख दर्द तकलीफ किसी भी वजह से उसको महसूस करने की सलाहियत खो बैठे तो ये बायोलॉजी जी में कैसे है कि ये सलाहियत फिर वो सिलेक्टिव खोए वो सिर्फ एक खास तबके और खास लोगों के लिए तो खो दे बाकियों के लिए ये मौजूद रहे क्या ये भी पॉसिबल है ये पॉसिबल है यही पॉसिबल है यही इसी
की तरफ मैं इशारा कर रहा था जब मैं खौफ की हालत में ये सलाहियत खोता हूं तो खौफ एक पर्टिकुलर ऑब्जेक्ट से आ रहा होता पर्टिकुलर शख्स से आ रहा होता है अशखास के ग्रोह से आ रहा होता है हम ठीक है तो उनको मिटाना खौफ एलिमिनेट करने के लिए जरूरी समझा जाता है। अगर मुझे अपने खौफ से निजात पानी है [संगीत] तो ये जो शख्स मेरे खौफ का सबब है इसका नामोनिशान मिटाना इसका कला कमा करना मेरे लिए जरूरी होता है। बहुत जरूरी है। ओके। अब अब जैसे सर अक्सरियत है हम यह देख रहे
हैं कि डेमोक्रेसी जो है यह मेजोरिटेरियनिज्म बन गई है। तो हर जगह जो अक्सरियत है उसको ना जाने क्यों अकलियत से खौफ होना शुरू हो गया है। पाकिस्तान में भी आप देखें तो जो अकलियत जो बहुत ही थोड़ी यहां पर रह गई है उनसे खतरा है यहां की अक्सरियत को। इंडिया में हिंदू अक्सरियत को मुसलमानों की अकलियत से खतरा है। इसी तरह वेस्ट में 1% मुसलमान है अमेरिका में 1% उनसे उनको उनको खतरा है। तो ये क्या साइकोलॉजी है? मैथ जो आपने अभी बात कही मैथ साइकोलॉजी में कैसे कन्वर्ट होती है? क्या सिर्फ लोगों को
डॉक्ट्राइन करना ही एक सबब है या कुछ और भी है? नहीं इसप मैं लिख चुका हूं। इसप मैं लिख चुका हूं। ये जो आपने जिस तरफ इशारा किया मेजोरिटेरियनिज्म मैंने इसको तकसीरियत के नाम से इसको उर्दू में लिखा है ये एक खास कैफियत है जिसकी जिसके पीछे इस्तेमा खड़ा है अपनी पूरी ताकत और अपनी पूरी हुकूमत के साथ इसलिए के देखिए मैंने इस किताब में और अपने दीगर आर्टिकल्स में कुछ तफसीली आर्टिकल इस किताब की दूसरी जिद में छपेंगे जरा वो डिटेल्ड स्टडी है क्लोनियलिज्म की और उसकी फंक्शनिंग की तो उसमें मैंने ये डिस्क्राइब करने
की कोशिश की है कि कॉलोनाइजर जो है वो बुनियादी तौर पर चार काम करता है। हम मैं बस इसरार ये कह रहा हूं कम से कम पिछले 15 सालों से और जायद से के क्रोनलिज्म अब जो है वो नाकाबिल शनाख्त हो गया है। जैसे मिसाल देता हूं के 1947 से पहले क्योलिज्म को आप एक फर्द में देख सकते थे कि ये एक गोरा सड़क पर वक कर रहा है। ये कॉलोनाइजर अब कॉलोनाइजर इस शक्ल में हमारे सामने नहीं है। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है। अब वो अपने चार कामों से पहचान है।
हम अच्छा वो चार काम क्या है? चार कामों में से पहला काम यह है के कॉलोनाइजर कॉलोनाइज रीजंस की और लोगों की जो एक सादी हालत है उसको कंट्रोल करता है। नंबर एक अब इसकी बहुत ज्यादा तफसीलात है। जो टर्म मैंने अभी आपके सामने इस्तेमाल की थी न्यू कॉलोनियलिज्म वो सारा का सारा बेस्ड ही इकॉनमी पे है। ठीक है। पुराने कॉलोनाइजर किस तरह से पुरानी कॉलोनीस कीदियात को 65 में भी कंट्रोल कर रहे थे। जिसकी बुनियाद पर ये टर्म कई [संगीत] की गई थी। दूसरा काम कॉलोनाइजर ये करता है कि वो कॉलोनाइज लोगों के लिए
ये तय करता है कि ये किससे दोस्ती करेंगे और किससे जंग करेंगे। जो आपकी फॉरेन पॉलिसी है सारी ये कॉलोनाइजर कंट्रोल करता है। ओके। [गला साफ़ करने की आवाज़] तीसरा काम वो यह करता है कि जो कॉलोनाइज लोग हैं उनमें वो तकसीम पैदा करता और उनको तकसीम दर तकसीम के अमल से गुजारता है जब हम अभी अपने बचपन की अगर मैं बात याद करूं तो उस वक्त जो मुसलमानों के मजहबी फिरके थे उनको आप उंगलियों पे गिन सकते थे। एक्सक्टली ठीक है अब आप ऐसे नहीं कह सकते क्योंकि जो बड़े फिरके थे शिया सुन्नी सुन्नियों
में जो बड़े फिरके थे देवबंदी वहाबी अहले हदीस अब जरा आप जाइए हर फिरके जिनका मैंने नाम लिया है इनके आगे इनकी सब डिवीजन हो चुकी है हम वो जो सब डिवीजंस है वो सिर्फ सब डिवीजन नहीं है उनकी बुनियाद पर एक दूसरे पर कुफ के फतवे लगते हैं। एक्सक्टली अगर शियों के आप सब डिवीजन देख तो वो शिया है। सारे शिया है। मगर वो एक दूसरे पे कुफ्र के फतवे लगाते हैं। वो अगर देवबंदी है वो बरेलवी है तो यही सब डिवीजन आपको हर मसलक में हर ग्रो में तो ये तकसीम तकसीम के अमल
से गुजरता है। जो पुराने डिफरेंसेस है उनको बड़ा करता है। एक्सक्टली। नए नए नई डिवीजन क्रिएट करता है। ये तीसरा काम चौथा इसकी बेतहाशा तफसीलात है। बेतहाशा तफसीलात है। उसप अगर आप बात करेंगे तो मैं मजीद [संगीत] कुछ अ करूंगा आपकी खिदमत में। चौथा काम वो ये करता है कि जो कॉलोनाइज लोग हैं उनको ये यकीन दिलाता है कि अगर मैं ना रहा तो तुम भी नहीं। तुम्हारी [गला साफ़ करने की आवाज़] सलामती मेरी वजह से है क्योंकि तुम में ये सलाहियत नहीं है कि तुम अपने मामलात को खुद बरी एस चला सको तुम्हारी सलाहियत
वो नहीं है तुम में बायोलॉजिकल रेशियल डेफिसिट्स है हम ओके तुम बायोलॉजिकली और रेशली इस काबिल नहीं हो कि [संगीत] तुम अपने आप को खुद मैनेज कर सको दिस मी हु इस [गला साफ़ करने की आवाज़] डूइंग दिस फॉर यू तो ये जो आपने ने बड़ा एक मशहूर टर्म सुनी होगी सिविलाइजिंग मिशन वो इसी की तरफ इशारा करता है के जब गोरे यहां आए थे सिविलाइजिंग मिशन पे आए थे वो तहजीब सिखाने आए थे हम यस ये सिकंदर आजम से आखरी जुमला सिर्फ वो चार ये काम करता है अब अगर आपने किसी को ये पहचानना
है ये कॉलोनाइजर है या नहीं है तो देखिए कि वो ये चारों काम कर रहा है या नहीं कर लेकिन अब कॉलोनाइजर में एक नई चीज ऐड हुई है और वो ये पहले कॉलोनाइजेशन का काम जो है वो हुकूमते करती है। हम अब हुकूमते भी करती है मगर हुकूमतों के साथ फाइनशियल इंस्टिटशन भी करते हैं। हम अच्छा पहले कॉलोनाइजेशन कोई फॉरेन एजेंट आके करता था। हम अब कॉलोनाइजेशन का काम जो है वो लोकल कॉलोनाइज भी करते हैं। इसकी तरफ हमारा जो लिटरेचर है उस बहुत कम काम है। ये जरा सा मैंने इसप थोड़ा ज्यादा बात
करने की कोशिश की [संगीत] है कि लोकल कॉल लोकल ग्रोह भी है जो मलेशिया है वो भी यही काम करते हैं। मिसाल के तौर पर तालबान ने एकजेक्टली पाकिस्तान के साथ यही काम किया। हम वो इस बात पर नाराज हुए के पाकिस्तान ने उनकी मर्जी के बगैर न के बाद वॉर टेरर कैसे ज पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी को उन्होंने कंट्रोल करने की कोशिश की एक बात दूसरी बात ये कि उन्होंने पाकिस्तान के हर इफसादी एक्टिविटी पर हमला डैमेज करने की कोशिश की वो चाहते थे कि पाकिस्तान की सादी जो तरक्की है या जो भी एक्टिविटी
है उसको वो दो बार तीसरा काम उन्होंने ये किया कि पाकिस्तान में जो फिरकायत है उसको उन्होंने अपनी पीक पे पहुंचा और उसमें उन्होंने कत्लो गरत ऐड कर चौथा काम उन्होंने ये किया कि उन्होंने ये बताया कि जो हमसे मुख्तलिफ है वो कमतर लोग है वो कमतर मुसलमान है इतने कमतर है कि वो लायक कत्ल है तो वो चारों काम जो कॉलोनाइजर करता था इस मशिया ने करके दिखाया। हम अब मैंने दो बातें की है। नंबर एक अब वो कॉलोनाइजर फौरन नहीं होगा। नंबर दो वो सिर्फ हुकूमत नहीं। हम ओके। और ये चार काम वो
करेगा जिससे हमें पता लगेगा कि वो कॉलोनाइजर है। वो आप में तकसीम करेगा। वो आपकी फॉरेन पॉलिसी कंट्रोल करने की कोशिश कोशिश करेगा। वो आपको बताएगा कि वो नहीं तो आप भी नहीं। अच्छा फर्स्ट पॉइंट जो था वो वो मैंने उसको रिपीट नहीं कर सका लेकिन एक साथ ही वो आपकी इकॉनमी कंट्रोल करेगा जो नियो कॉलोनिज्म है उसको सपोर्ट करने के एलिमेंट भी तो यही मौजूद है यही मौजूद अच्छा वो क्या कभी भी कॉलोनाइजर कभी भी कभी भी कभी भी हिस्ट्री में कभी भी कॉलोनाइजर ने कोलबोरेटर्स के बगैर काम नहीं किया हम और कोलबोरेटर जो
है वो कॉलोनाइज्ड लोगों से ताल्लुक रखने वाला हूं। हम गोरे ने लोकल कोलबोरेटर्स आइडेंटिफाई किए। उसको [संगीत] उसको हायर किया। उनको सपोर्ट किया। मैं आप हिस्ट्री में उनके नाम पढ़ सकते हैं। और इसी तरह से जो एक बड़ा कॉलोनाइजर होता है उसके नीचे छोटे-छोटे कोलबोरेटर होते हैं। और ये जो कोलबोरेटर होते हैं इनमें एक कॉलोनाइजर की तमाम ट्रेड्स मौजूद होती तो ये एक चैन होती है कॉलोनाइजेशन की कॉलोनाइजेशन का पूरा अमल है वो एक बड़े कॉलोनाइजर के नीचे छोटे छोटे के नीचे और छोटे उसके नीचे वो कोलबोरेटर जो है वो एक लेवल पे एक सतह
पे खुद भी कॉलोनाइजर की ट्रेड्स [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे तालिबान जो है वो पहले कोबोरेटर थे बड़े इस्तेमा के तो जब उस बड़े इस्तेमार से उनकी लड़ाई हो गई तो वो अब खुद कॉलोनाइजर बन गए और जो बड़ा कॉलोनाइजर है उसने इनको आइडेंटिफाई करके इनको एलिमिनेट करने की कोशिश की। अब आप ये देखिए कि ये एक कास्टेंट एक एंटेंगलमेंट है बिटवीन डिफरेंट लेयर्स ऑफ कॉलोनाइजेशन। आपस में जिस तरह से एटेंगल्ड है ये उसकी पेचीदगी वो इंडिकेट करता है। तो असल विक्टिम कौन है यहां? वो जो मैसेज है जो जो पावरलेस है आप उनकी
बात कर जो कभी इस पर यकीन करते हैं कभी उसप यकीन करते हैं कभी इसको अपना मसीहा समझते हैं कभी इसको अपना मरजाओ मावा समझते है ये ये लोग तो इस्तेमा की भी तो फिर एक लेगसी हुई ना कि एक नस्ल दूसरी को उसी तरह ट्रांसफर करके जाती है जैसे एक महकूमियत ट्रांसफर होती है। बिल्कुल ऐसे ही सिंपली अगर आप इस बात को सिंपलीफाई करें तो बिल्कुल आपने ठीक बात की लेकिन मैं जो अर्ज करने की कोशिश कर रहा हूं वो ये कि एक पेचीदा काम को एक आम आदमी कैसे बेहतर तौर पे [संगीत] क्रस्प
कर सकता है। ओके आप आपने सर एक और बात को बहुत अच्छे तरीके से एक्सप्लेन किया बार-बार कि जो रियल वाउंड है जो असल जख्म है वो नफसियती जख्म होता है जो रह जाता है महकूम में भी मजलूम में भी और जो रेप विक्टिम है उनमें भी जरा इसको आप एक्सप्लेन करेंगे कि ये ये कैसे है ये क्या है देखिए एक वाकया होता है ना जैसे मिसाल के तौर पर हमने ये समझा के एक कुछ मैं बड़े वाकयात की मिसाल आपको आपके सामने मिसाल के तौर पर यह समझा के जो सेक्टेरियनिज्म था पाकिस्तान में जो
लेट 80 से शुरू हुआ जब हमने अफगान प्रोजेक्ट को जॉइ किया और ये चलता रहा और ये अभी हाल ही में छ सात साल पहले आपने इसमें एक कमी का रुझान देखा है। अच्छा अब हम ये समझते हैं कि अब ये खत्म हो गया है। इसलिए कि वाकयात नहीं अच्छा ये प्योर जनरलिस्टिक पर्सेक्टिव है मामले को देख के वाकया नहीं हो रहा कुछ वी आर नॉट रिपोर्टिंग एनीथिंग सो डजंट एक्सिस्ट ये जनरलिस्टिक है मैं आपको ये दिखा सकता हूं के जो कुछ हुआ पिछले 30 40 सालों में इंसानी जेहन पे उसके असरात क्या है जो
सेक्टेरियन रेफ जो कत्लो गारत का सफर बनी थी क्या वो इंसानी जेहन पे अपने कोई नफ्स नहीं छोड़ रही वो वाकयात तो रिपोर्ट नहीं हो रहे लेकिन जो वाकयात अब पहले भी रिपोर्ट नहीं हुए थे और अब भी नहीं होंगे वो ये बकायदा जनाजों पर ऐलान होता है कि अगर कोई इस फिरके से ताल्लुक रखने वाला फद यहां है हम ऐसा ही है। ठीक है। अ एक दूसरे के लिए जो नफरत का जो एलिमेंट है वो आज भी हम में से कितने ऐसे लोग हैं मैं नाम नहीं लेता किसी फिरके का जो कुछ खास फिरों
से ताल्लुक रखने वाले अफराद को नॉर्मली लेते हैं। हम बगैर तमाम अकलियतों को ऑलमोस्ट आम अक्सर अकलियतों को जिनको हम माइनॉरिटीज कहते हैं जो मेरे ख्याल में गलत लफ्ज है उनको नहीं उनकी मौत और उनके हादसों को भी सीरियसली लेते यानी कि ये उसकी उस कद की उस [संगीत] एनाद की एक लिमिट है कि आप उनके कत्ल पे खामोश रहते हैं। हम आप समझते हैं के ऐसा तो होना ही था इनके साथ। मेरे उस्ताद प्रोफेसर खालिद सईद साहब ने एक वाकया बयान किया। जब वो कहीं जा रहे थे तो उन्होंने देखा कि कुछ बच्चों ने
एक स्ट्रीट डॉग को रस्सी से खंबे से बांध दिया और वो उसको मार रहे थे और वो जाहिर है कि वो बेचारा स्क्रीन कर रहा था लेकिन वो उसको एंजॉय कर रहे थे [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो खैर उन्होंने गाड़ी रोकी और कुत्ते को खोदा और कहा [संगीत] पूछा कि तुम क्यों मार रहे थे? तो बच्चों का जवाब सुनिएगा। बच्चों ने उनको कहा ये तो कुत्ता है। इसको कौन सा दर्द होता है? हम ठीक है। आपने ये डिस्टेंस देखा नोट किया हम के वो बच्चे मार रहे हैं। उनका ख्याल है कि इस कुत्ते
को तकलीफ नहीं होगी। हम हमने ये डिस्टेंस क्रिएट कर लिया है हम। उस नफरत में वो जो 30 40 साल जो मुसलसल आपको इननेट किया गया है के बारे से कोई बात ये डिस्टेंस हमने क्रिएट कर जिसकी तरफ आपने शुरू में भी बात की मैं उसको फदर एक्सप्लेन कर दिया इस मिसाल से ठीक ठीक आपने एक जगह कहा कि ये जो ये जो नफसियात है ये जेनेटिकली फिर आखिरकार जो है ट्रांसफर होना शुरू हो जाती है जेनेटिकली इसमें शायद इसी में एक जगह पे कहीं मैंने कोट किया है। एक आरिश बायोलॉजिस्ट है जिन्होंने ये कहा
कि जो क्लोनियल ट्रोमा है हम वो ट्रांस जनरेशनली ट्रांसफर होता है। हम नसलन बाद नसलन ट्रांसफर है। अब ट्रॉमा पे मोस्ट सामने है। ट्रॉमा जो है अगर एक नस्ल ने मुसफर किया है तो वो आइंदा नस्लों में मुंतकिल होगा। [संगीत] गालिबन 20089 में किताब छपी थी इंडियन साइकट्रिस्ट के एक ग्रुप ने किताब लिखी थी। उसमें मुख्तल आर्टिकल्स है। इंडियन साइकेटिस्ट जो है वो पार्टीशन के ट्रॉमा को हम आज अपने क्लनिक में देखता है। उन्होंने [गला साफ़ करने की आवाज़] वो रिपोर्ट किया। अब जाहिर [नाक से की जाने वाली आवाज़] है ये वो लोग नहीं थे
जिन्होंने हिजरत की है। ये उनकी आइंदा नस्ल है। ये तीसरी नस्ल है जो अब परवान चढ़ रही है। मिसाल के तौर पर मेरे वालिद ने हिजरत [संगीत] की थी। मुझे याद है कि मुख्तलिफ मौकों पर ईद पर मुहर्रम में और मुख्तलिफ जगहों पे वो किस तरह से अपने आई शहर को याद करते थे। वो मेरठ से हिजत करके आए थे। वो [गला साफ़ करने की आवाज़] दुख के साथ नहीं करते थे। लेकिन उसमें एक लोंगिंगनेस थी। वो भी अपने वतन से एक मोहब्बत रखते थे। लेकिन उसकी बेतहाशा मिसाले हैं। अभी कल मैं एक इंडियन कॉमेडियन
को सुन रहा था। वो ये जो नफरत है मुसलमानों में और हिंदुओं में उसको बयान कर रहा था। कॉमेडियन है। कॉमेडियन है। उसकी फैमिली ने गुजरावाला से माइग्रेशन की थी। हम और वो उस ट्रॉमा को बयान कर रहा था। तीसरी नस्ल। तीसरी नस्ल। हम एक्सक्टली। अच्छा अच्छा सर मैं फिलस्तीनी एक बच्ची को देख रहा था। एक्सक्टली। उसके दादा ने फस्तीन से लेबन में हिजरत की थी। हम अर्ली 70ज में। हम ये उसके बाद उसके वालिद वही पैदा हुए ये भी वही पैदा हुई [गला साफ़ करने की आवाज़] लेकिन वो पूरा ट्रोमा मौजूद है इसी तरह
मैं एक और खातून को देख रहा था उसकी वालदा फिस्तीनी है वो जॉर्डन में शिफ्ट हुए थे उसी वक्त 70 में लेट 60 अर्ली 70 में 67 वॉर के बाद अब वो मां जो है वो जफ है ये खातून भी अपनी अराउंड [संगीत] लेट 30 में है मगर वो नहीं ट्रॉमा मौजूद है। ओके। अगर हालात बदल जाए तो नस्लें इस ट्रॉमा से निकल भी आती है। वक्त लगता है। वक्त लगता है। और दूसरे दूसरी चीज जिस पर इस बात का इनसार है कि ट्रॉमा कैसे आप खत्म कर सकते हैं वो [संगीत] ये कि सोसाइटी सोसाइटी
एस अ होल वो क्या करती है। मिसाल के तौर पर मैंने इरबेल में जाके वो जो यजीदी फिरका है वहां पे कुर्दस्तान के ट्राइबल एरियाज में रहता है वो जब आइसिस ने उन पर हमला किया तो उनके मर्द तो मार दिए सारे और खवातीन को उन्होंने रख लिया तो वो खवातीन जो रिकवर हुई थी आइसिस के कैंप से उनके लिए इरबेल [संगीत] में जो मूसल से मूसल वास ऑक्यूपाइड इन मूस से 80 किलोमीटर के फासले परमेल है तो अब सोसाइटी ने क्या किया सोसाइटी ने उन खवातीन की देखभाल मिन हैसल मुशरा उनको हेल्प किया उनके
लिए कैंप्स लगाए उनके लिए एक्सपर्ट्स बनवाए जिन्होंने उनके ट्रोमा पे काम किया बड़े बड़े कैंप्स थे और बहुत बड़ी एक्टिविटी हो रही थी तो सोसाइटी क्या करती है मिनहसुल सोसाइटी मिल हैसुल मुहाशरा वो क्या करता है जैसे जैसे हमारे यहां ये ट्रॉमा हुआ है टेररिज्म वाला। हमारी सोसाइटी ने उसके लिए कुछ नहीं किया। हम तो बड़े जब तक वो ट्रॉमा चल रहा था वो वाकयात हो रहे थे। वो ट्रॉमा कॉज करने वाले लोग हमारे हीरो थे। हम हम उनको चंदे रहे थे। एक्सक्टली। अच्छा सर हमारी सोसाइटी में पाकिस्तान में आपने बहुत से उतार-चढ़ाव आपने देखे।
उसमें लोग फौरन एक लीडर की मोहब्बत में या नफरत में गिरफ्तार हो जाते हैं बहुत जल्दी। तो क्या यह सिर्फ एक प्रोपगेंडे का मजहर है या ये हमारी नफसियात में ओवरऑल पाकिस्तानी नसियात में या आम लोगों की नसियात में कोई प्रॉब्लम है कि जब इनको बार-बार एक चीज चीज एक चीज इनको दिखाई जाए रटाई जाए तो लोग उसका शिकार होते हैं। क्या ऐसा है? देखिए सियासतदान की अगर आप बात करें डिक्टेटर जी एंड इवन डिक्टेटर जी इवन डिक्टेटर मतलब रूलर की सियासतदान की अगर आप बात करें जो हुकूमत करता है तो वो दो काम करता
है सर एक वो ये काम करता है कि वो कोई पॉलिसी बनाता है डेवलपमेंट के मसूबे बनाता है उनको इम्लीमेंट करवाता है मैनेज करता है चीजों को ये काम दूसरा काम वो ये करता है कि वो नैरेटिव देता है ठीक ठीक वो आपको कहता है कि तुम्हें तुम्हारी बुनियादी जरूरत रोटी कपड़ा और मकान है। वो ये कहता है कि तुम्हारे जो मसाइल है उनकी [गला साफ़ करने की आवाज़] वजह सियासतदानों की करप्शन है। इस तरह के बयानिया देता है। पॉलिसी जो वो बनाता है और उनप जो इम्लीमेंट करता है वो तो बंद कंधों में करता
है काम लेकिन जो बयानिया देता है वो पब्लिक जी ठीक है। उस बयानिए को लोग चस करते हैं। पब्लिक जब आप मासेस की बात करते हैं तो मासेस की के अपने मसाइल होते हैं। वो उन मसाइल को समझना चाहते हैं और वो उनको सिंपलीफाइड वे में समझना चाहते हैं। तो जो जितना सिंपल बयानिया देगा वो उतना पॉपुलर हो जाएगा। अब वो बयानिया कहां से आ रहा है? वो कितना हकीकी है? कितना गैर भी है ये अलग मगर कितना अट्रैक्टिव है कितना मेरी जरूरतों से बराहेरास्त मुतालुक लगता है मुझे और कितना आसानी से समझ आने वाला
है आपको ये तो पता ही है करप्शन का नारा लगा के मकबूल होने वाले सियासतदानों को वेस्ट में बड़ी वजीराई मिली मुल्क से बाहर बहुत मिली क्योंकि यहां रहने वाला कोई भी शख्स जो चाहे वो कितने ही अच्छे हालात में क्यों ना हो वो तंग है वो वतन से दूरी की तंगी है उसको उसको इस बात का कल्क है के उसको वतन क्यों छोड़ना पड़ा हम ये जो सारी सहूलते हमें यहां बैठ के मिलती है वेस्ट में ये घर में बैठ के क्यों हम तो उनको ये बताया जाता है कि तुम्हारे मुल्क में हालात इसलिए
खराब हुए तुम्हें मुल्क इसलिए छोड़ना पड़ा के एक या दो या तीन सियासतदान सारे मुल्क का पैसा लूट के खा गए हैं। और इस वजह से तुम्हारे हालात इतने खराब हो गए कि तुम्हें बहुत छोड़ तो तुम ये जो अपने प्यारों की घर वालों की दूरी बर्दाश्त कर रहे हो उसका सबब ये है और ये है ओके अब ये पिक होती है। ये आसान बात है। समझ में आती है। और और ये कोई इतनी गलत बात भी नहीं है। मैंने ये सियासतदानों की करप्शन कोई बहुत ही [हंसी] कोई दूर ना समझ में आने वाली बात
नहीं है। हकीकत है। लेकिन क्या वो मुल्क की इस सुरते हाल का सबब है कि जिसके सबब मुझे हिजरत करनी पड़ी मुल्क से हम ये सोचने लेकिन एक आम आदमी के लिए ये नारा बहुत अट्रैक्टिव है। तो ये दो काम किए [संगीत] उसने सियासतान ने। इसकी बुनियाद पर उसकी मकबूलियत का फैसला होता है। लेकिन एक बात और भी अ करता हूं कि जो पावर सेंटर है किसी भी मुल्क का किसी भी मुल्क का वो किसी भी वक्त पॉपुलर [संगीत] बयानिया तरतीब देने पर कुदरत रखता है। अच्छा बस यही मैं समझना चाह रहा हूं। इसका मतलब
है जाग सकती है। जी उसकी मिसाल देता हूं। उसकी मिसाल देता हूं। उसकी बहुत अच्छी मिसाल उसकी जो है वो तहरीक लबक है। हम तहरीकबक जो है वो 2018 के इलेक्शन में पंजाब की तीसरी और पाकिस्तान की पांचवी बड़ी पार्टी थी वोट्स केबार से वोट्स के एतबार से वो पंजाब की तीसरी और पाकिस्तान की पांचवी अब कहां है वो कौन बता कोई पता नहीं कोई नहीं जानता जो लाए थे उन्होंने फैसला किया एक दिन के अब ये हमारे किसी काम के नहीं रहे हम हाथ पैर काट के उनको तो सर फिर इंसान और मैसेज जो
है वो तो बहुत वनरेबल हुए ये जो काम है इस सारी सुरते हाल को एक्सप्लेन करने का एडवर्ड सैद ने कहा था कि ये पब्लिक इंटेलेक्चुअल का काम कि वो मासेस तक उसने कहा था कि वो उसका काम यह है कि वो मासेस के साथ खड़ा होकर पावर सेंटर की हर एक्टिविटी को शक की नजर से देखता और फिर उसको समझने की कोशिश करता है। ऑन बिहाफ ऑफ द मासेस हमारे यहां बदनसीबी से ये काम नहीं हुआ। अच्छा सर जो आपने यह बात कही कि जो ऑप्रेसर है वह भी लॉन्ग टर्म में एक एक नफसियाती
जो जख्म है उसको भुगतता है। अच्छा रेपिस्ट के साथ भी क्या यह बात दुरुस्त है क्योंकि हमारे यहां पाकिस्तान में एक बहुत बड़ा इशू आजकल ये है के बहुत से लोगों को उनके नेफे में गोली मार दी जाती है या चल जाती है या फिर उनको पुलिस मुकाबले में मार दिया जाता है जो किसी रेप की एक्टिविटी में या फिर किसी को कत्ल करने के के मुलजिम होते हैं। बगैर किसी मुकदमे के और बगैर किसी तफसीली ट्रायल के। अच्छा उसमें सोसाइटी साथ दे रही है। सोसाइटी भी का एक बड़ा हिस्सा समझता है कि अगर इनको
इस तरह ना मारा गया तो अदालत से तो ये छूट जाएंगे। अच्छा इसमें एक इसके बारे में आप बताएं कि क्या इस तरह के खौफ से और इस तरह की की जो किलिंग है इस इससे आप रेपिस्ट को और मर्डरर को रोक सकते हैं खौफ से और अगर वो आपकी दूसरी बात को भी इसी में आप इंक्लूड कर दीजिएगा कि क्या इन रेपिस्ट और मर्डरर्स को भी लॉन्ग टर्म नफसियाती मसाइल का सामना करना पड़ता है जिस तरह की आपने बात की। आखरी बात पर मैं एक पहला कमेंट कर देता हूं आपके लिए वो ये के
नॉर्मल और एबनॉर्मल के दरमियान जो फर्क है हम उसप बहुत साराफ मिसाल के तौर पर होमोसेक्सुअलिटी जो थी वो एनॉर्मल थी 70 के क्लासिफिकेशन सिस्टम में म अब उसको ज़हनी मर् समझने वालों को ज़हनी मरीज समझा जाता [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक बात तय है उसमें मैं उस कंट्रोवर्सी में नहीं पड़ना चाहता कि नॉर्मल और एब्नॉर्मल में जो फर्क है उस पर क्या-क्या इलाफात लेकिन एक बात तय है कि कोई भी शख्स नॉर्मल ज़हनी हालत में दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचा हम ये थे ओके अच्छा अब ये बताइए जो भी रेप कर रहा
है या कत्ल कर रहा है या तो मुस्तकिल तौर पर या उस लम्हे में जब वो उसने हरकत की तो वो जहनी तौर पर ठीक नहीं क्या ये टरेरी फ था या मुस्तकल फ था इसका इनसार इस बात पे है कि जब वो फ खत्म हो गया नुकसान पहुंचा चुका। उसके बाद उसने उस वाक पर क्या अपने उस काम पर क्या वो नादिम हुआ या उसने इसार किया कि जो कुछ उसने कहा था या किया था। ठीक अब दूसरा जो हिस्सा है कि अब करना क्या है? ये हो क्यों रहा है? जो रेप है मैंने
सख्ती से इस बात की तरती की है इसका कोई ताल्लुक सेक्सुअल डिजायर से हम अच्छा ठीक है अच्छा [संगीत] अगर आप सोसाइटी में जो तीन बड़े तबके है अपर क्लास मिडिल क्लास और लोअर क्लास उसमें सेक्सुअल डिजायर को सप्रेस करने की टेंडेंसी देखें तो आपको पता चलेगा कि सबसे ज्यादा अपनी सेक्सुअल एरर्जेस वो मिडिल क्लास प्रेस करती हम ना अपपर क्लास करती है [संगीत] ना लोअर क्लास [नाक से की जाने वाली आवाज़] इनको जो सेक्सुअल फ्रीडम है रिलेटिवली वो मिडिल क्लास से ज्यादा [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है रेप के वाकयात में यही
दोनों क्लासेस सबसे ज्यादा मुलविस होती है एलट और सबसे नीचे वाली सबसे जो लोअर आपके तबकात है जब वो इनवॉल्व होते है अब आपने आपको दिल्ली का वो याद है दिल्ली रेप केस याद है जी बस वाला उसके मैंने उस तफसील से लिखा है क्योंकि वो बहुत ही एक मॉडल केस था जो एक्सप्लेन करता है बहुत सारी चीज एक्सक्टली उसको जरा देखिए एक्सक्टली अच्छा अब वो या तो अपपर क्लास है वहां जो कुछ हो रहा है इंडिया में इंडिया बहुत ही अच्छी लेबोरेटरी है इस लिहाज से जो एक्सप्लेन करती है वहां होने वाले तमाम वाकयात
ही एक्सप्लेन करती है। या तो अपपर क्लास के लोग है या वो लोअर क्लास के सेक्सुअल सप्रेशन तो मिडिल क्लास में वो क्यों नहीं करती? हम [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा सेक्सुअल जो ये जो रेप है ये आपकी सोसाइटी में मौजूद पावर इमंबैलेंस को इंडिकेट करता है। खवातीन वनरेबल है बच्चे [संगीत] वरेबल है। अच्छा मैं सर यह पूछना चाह रहा था कि जो खौफ है जो पाकिस्तान में इस वक्त एक इशू चल रहा है पिछले कुछ साल से कुछ गवर्नमेंट ने इस तरह के एक्शन लेना शुरू किए हुए हैं कि रेपिस्ट को और मर्डरर्स
को उनको बगैर एक लंबे ट्रायल के जो कि पाकिस्तान में एक मसला भी है उससे इंसाफ नहीं मिलता और अक्सर लोग छूट जाते हैं तो ये इनको पहले ही या नेफे में पिस्तल चल जाता है या फिर उसको जान से वो भागने की कोशिश करता है तो उसको कह देते हैं मारा गया वो पूरा एक लिखा हुआ है एक पर्चा जिसमें सिर्फ नाम बदलते हैं मेरा सवाल यह है कि क्या इस तरह के खौफ से के आपको मार दिया जाएगा अगर आपने जुर्म किया तो नफ्सियाती तौर पर इंसान इस तरह के खौफ से इस तरह
के जरा से बाज आ सकता है या नहीं इस तरह का खौफ उसको नहीं रोक सकता ये जो [संगीत] दिल्ली रेप केस था इसमें जो मेन एक्यूज था जिसने खुदकुशी कर ली थी उसका छोटा भाई इसमें जेल में था उसको इंटरव्यू किया है बीबीसी ने या किसी और ने वो मैंने कोट किया है उसमें में वो ये कहता है कि आप हमें फांसी दे दे। हम आप हमें फांसी इसलिए दे देंगे कि हमने विक्टिम को छोड़ दिया था। और वो बच [गला साफ़ करने की आवाज़] गई और उसने हमारे खिलाफ गवाही दी। हम नेक्स्ट टाइम
विक्टिम को लोग नहीं छोड़ेंगे। हम ताकि उनके खिलाफ कोई सबूत ना दे। हम है ना? बात ये है कि आपने एक परपट्रेटर को पकड़ा उसको सजा दे दी। लेकिन वो जो पावर इमंबैलेंस है वो तो सोसाइटी के हर इंसान को मुतासिर कर रहा है। कोई नया उठ [संगीत] जाएगा। आप उसको फांसी देंगे फिर कोई नया उठ जाएगा। इंडिया ने क्या रोक लिया इनको? सख्त सजाएं दी है उन्होंने। अपनी हिस्ट्री में बहुत ज्यादा जाके उन्होंने आगे बढ़कर सख्त तरीन सजाएं दी है। हम इंडियन लॉ के एतबार से क्या रुक गया वहां हर [संगीत] 20 मिनट के
बाद एक खातून रेप [गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़] सर जो आपने आज की फिगर है हम अच्छा सर जो आपने कहा कि जो पावर इमंबैलेंस है वो इसका बायस बनता है। आप प्लीज हमारी सोसाइटी को सामने रखते हुए पाकिस्तान को जरा पावर इमंबैलेंस को थोड़ा और एक्सप्लेन करना चाहेंगे ताकि इसको बेहतर पावर इम्बैलेंस है वो तीन तरह के जो जो इस तरह के जरा का बायस बनता है मैं ये इस लिंक को समझना चाह रहा हूं तीन तरह के जो पावर इमंबैलेंस है वो तीन तरह की चीजें पैदा करता है
तीन तरह के इमोशंस पैदा करता है एंगर आपकी समझ में आता है अ इंतकाम की ख्वाहिश ठीक और कंट्रोल चीजों पे अपना कंट्रोल आप जरा रेप पर जो रीसेंट थरी है वो उठा के पढ़िए वो रेप की एकजेक्टली ये तीन वाक्यात तीन वजूहात बयान [गला साफ़ करने की आवाज़] कोई अपसेक्सुअल डिजायर को रेप की रीज़ नहीं बयान करते हमारे मुझे हमारे यहां एक तो पॉपुलर साइकोलॉजी बहुत पॉपुलर है और उसमें हमारे कुछ लिबरल दानिशवर है जिनका ख्याल है कि पाकिस्तान के मसाइल की जड़ मजहब है और मजहब ने सबसे बुरा काम ये किया है कि
वो जो इंसान की जिनसी आजादी है उस पे कदम लगाती है और जो रेप होता है वो जिनसी कदबंद की वजह से है तो वो फ्रॉइड की वो थरी जो कब की डिसक्रेडिट हो गई है उनको रिपीट करते हैं Facebook पे और ओके सही। अच्छा सर आपने एक बहुत अच्छा थीसिस दिया है कि औरत का रोल सोसाइटी में चेंज हो रहा है। वो बदल रहा है। ये भी एक बायस बन रही है। जरा इसको भी अगर आप आखरी सवाल के तौर पर देखिए इंसानी सोसाइटी जो है उसमें जब वो एक सोसाइटी के तौर पर उसने
फंक्शन करना शुरू किया था तो वो प्री हिस्टोरिकल एज में उसने एक छोटे-छोटे इंसानों के छोटे-छोटे गिरोहों में सोसाइटी तशकील पाई थी। ठीक है। वो सोसाइटी जो थी वो मेट्रियकल थी उसमें औरत उसको रन करती थी वो मेट्रियर्कल थी उसमें औरत का की बड़ी डोमिनेंट पोजीशन थी वो मैटली लोकल थी उसमें जब शादी के बाद मर्द जो है वो औरत के घर शिफ्ट होता था जैसे औरतों की होती थी [संगीत] और वो मैट्रलीनियल थी उसमें बच्चा जो है वो मां के नाम से पहचाना जाता उसकी शना मां के हवाले से होती जैसे बाप के नाम
से होती है या बात कर रहे हैं प्री एग्रीकल्चर की ये हम बात कर प्री प्री हिस्ट्री की प्री हिस्टोरिकली की [संगीत] कोई द हजार साल पहले की आज से की बात कर मुख्तलि जगहों पे उसकी मुख्तलिफ टाइमिंग है उस तरह से एस्टेट किया पहले इस पे यहां पे ये समझा जाता था कि एक हाइपोथेटिकल सोसाइटी नेवर एक्सिस्टेड बट अब ट्रेसेस मौजूद है। इवन अब भी कुछ जगहों पर ऐसे ऐसे ट्राइब्स मौजूद है बल्कि मलाइशिया के पास एक ऐसा मुस्लिम ट्राइब भी मौजूद है जहां आज भी उसके भी सस्ती है अच्छा तो उसके बाद सोसाइटी
जो है वो ग्रेजुअली तब्दील होनी शुरू हुई और फिर हम के इस ये जो तब्दीली है मर्द आज तक अ ये जो औरत को हम नापसंद नकल कहते हैं मिसाल के तौर पर उसके ट्रेसेस आप इस तब्दीली में देख सकते हैं। उस प्री हिस्टोरिकल इरा में मेट्रियर्की में जो औरत फैसले करती थी लीडर होती थी उसको वाइस वुमन वो वाइस वुमन को पेट्रिय्की में विच क्राफ्ट में कन्वर्ट कर दिया हम वो चुड़ैल बन गई हम वो जो वाइस वुमेन थी वो अब चुड़ैल बन गई वो बनाना पड़ा उसको हम इसलिए कि अगर मैं ने आपसे
हुकूमत छीनी है हम तो मैं आप में कुछ ऐसी ट्रेट्स आप में दिखाऊंगा [संगीत] कि जिसकी वजह से आपकी हुक्मरानी जो है वो नाकाबिल कुबूल करार दी जा सके। मैंनेकि आपसे हुकूमत छीनी थी तो मुझे मेरे लिए ये जरूरी था कि मैं आपको नाक करार और ये साबित करूं कि आप हुकूमत करने की अहल नहीं है। ये जो आप [हंसी] अखबारात में और अकायद की दुनिया में जो आप पैसे देखते हैं उसका सोर्स ये है ये एक तब्दीली है हम पेट्रिय्की से पेट्रियाकी अब ये मैं आपको कोई दास्ताने नहीं सुना रहा ये किसी भी आप
एंथ्रोपोलॉजिस्ट से जाके पूछिए वो आपको पूरी हिस्ट्री निकाल के दे देगा माइथोलॉजी में इसके ट्रेसेस मौजूद है फसल्स मौजूद है बेतहाशा है तो ये तब्दीली जो है ये आज तक मर्द के सर पर [संगीत] एक लटकती हुई तलवार है [गला साफ़ करने की आवाज़] ये औरत किसी भी वक्त वापस आ सकती है हम ये वैसे है डिक्टेटर को जब डिक्टेटर किसी आवामी लीडर को डिपोज करता है हम और उसको वो उसकी हुकूमत को वो वहां से हटाता कु करता है उसके खिलाफ उसको ये पूरा यकीन होता है कि मैंने एक लेजिटमेट लीडर को वहां से
हटाया है अब ये किसी भी [संगीत] वक्त वापस तो डिक्टेटर के लिए बहुत जरूरी होता है कि वो तशद्दुद परा हम उस तशद्दुद के पीछे उसका खौफ होता है इस्तमारी जो नफसियात है वो भी यही है उसको भी खौफ होता है कि ये जो जो जमीन बासी ओके बहुत शुक्रिया सर आपका वक्त देने का उम्मीद है आप आइंदा भी हमें कभी-कभी वक्त देते रहेंगे इंशा्लाह