एक जगह पर कथा चल रही थी गांव में देहात में कोई सेठ आया बंबई का उसने कथा सुनी जहां कथा होती थी वहां पैदल चलकर आना पड़ता था सेठ को अपने निवास से जहां ठहरा था तो पैदल चलते चलते एक दिन चप्पल टूट गई चप्पल टूट गई तो सेठ ने मोची से चप्पल सिलाना शुरू किया मोची चप्पल भी सीता जाता और बात भी करता जाता कि सेठ तुम क्या थी आव्या सेठ कहते हैं कि मैं मुंबई से आया हूं तो मुंबई से इस छोटे गांव में क्योंकि संत की महापुरुष की वाणी सुनने आया हूं कथा
सुनने आया हूं मुंबई का धमाल जीवन कुछ देहात का सातविक जीवन भी देखने को मिलेगा शुद्ध हवा मिलेगी शुद्ध दूध मिलेगा ताजा वहां तो बोतलों का पैकेट का दूध शुद्ध हवा शुद्ध पानी और शुद्ध दूध और शुद्ध में शुद्ध भगवान की कथा इसलिए यहां आया हूं मची के आंखों से आंसू बरसने लगे सेठ ने सोचा क्या बात है मोची कहता है कि सेठ जी मैंने भी पेंपलेट पढ़े थे कि सत्संग होने वाला है मैं भी जाने वाला था लेकिन मैं अभागा कथा में नहीं जा सकता हूं मेरे कर्म फुटे ले हैं आप तो मुंबई से
आए सत्संग में लेकिन मेरे कितने पाप कर्म है कि मेरे आंगन में सत्संग हो रहा है गांव में मैं नहीं जा रहा हूं तो सेठ कहते भाई चलने तेरे को किसने रोका है बोले सेठ अगर मैं कथा में चलूंगा एक दिन मेरे को धंधा बंद करना पड़ेगा मैं तो उपवास कर लूंगा पत्नी तो उपवास कर लेगी मेरे बेटों को तो बेटियों को उपवास करवा लूंगा लेकिन मेरे बुड्ढे दादा दादी और मां है उनको भूखा कैसे रखूं इसलिए मैं कथा में नहीं आ सकता हूं मेरी स्थिति है कि कमाता हूं फिर खाता हूं कमाता हूं सीधा
लाता हूं खाता हूं मोची के आंखों से आंसू टपक रहे सेठ का हृदय पिघला चप्पल सिलाया 50 पैसा देना था सेठ ने द रुपया दिया ले भाई मोची बोलता है कि सेठ क्या करते हो यह मैं आपसे एक पाई भी नहीं लूंगा बोले नहीं भाई मैं वापस एक पाई नहीं लूंगा द रुपया रख द गरीब है बोले से सेठ नहीं नहीं इतनी सेवा आप मेरी स्वीकार करो सेठ बोलता है मेरे पास 25 2 हजार पगार वाले लेने वाले नौकर काम करते हैं सीए जैसे तो मेरे यहां सर्विस करते हैं मेरा फाइनेंस का है ब्याज धीर
धान का है और है फलाना है फलाना है तेरे जैसे गरीब मोची का मैं रण कहां चुकाऊंगा ले ले भैया रप मोची कहता है सेठ जी रप वापस लो सेठ कहते नहीं तू रखो मोची की और सेठ की अंदर अंदर मधुर युद्ध चली है मधुर कला मोची बोलता है एक पैसा नहीं लेना र सेठ बोलता है तेरा गरीब का मैं क्या करूंगा आखिर होते होते मोची अडिग ्र और मोची रोते रोते कहता कि सेठ जी तुम सत्संग में जा रहे हो संत दर्शन को जा रहे हो मैं अभागा दर्शन तो नहीं कर सकता हूं वाणी
तो नहीं सुन सकता हूं संत के सत्संग में तो नहीं जा सकता हूं लेकिन सत्संगी की चप्पल से सीने की सेवा इतनी तो मुझे करने दो सत्संग में जाने वाले की इतनी सेवा करूं कुछ तो मैं अपना भाग्य बनाऊं मैं सत्संग में नहीं बैठ सकता मैं सत्संग में नहीं जा सकता तो कम से कम संत दर्शन और हरि कथा सुनने को जो जाते हैं उनकी फटी चप्पल सीकर भी मैं थोड़ा अपना भाग्य सेलू सेठ मुझे अवसर दो मेहरबानी करो इतनी सेवा मुझे दे दो है भारतीय संस्कृति की शान मान भारत का मोची भी जानता है
कि हर कथा में जाने वाले संत नहीं तो अर्ध संत तो हैं कम से कम उनकी भी थोड़ा सेवा [प्रशंसा] [संगीत] कर लुधियाना समिति बैठी है ऋषिकेश में भी आए थे अहमदाबाद में भी आए थे यहां भी बैठे तारीख दो बाबा हमें तारीख दो हां कह दो हम 35 लाख रुपया खर्च खर्च करेंगे जो आएंगे उनको भी रहे रखेंगे जि माएंगी मिलक दल्ली समिति बैठी उसने भी कहीं मिल्क रोज के स्टोल खोल दिए तो कहीं प्याऊ खोल दिए तो कहीं भंडारा खोल दिया कि बाबा सत्संग सुनने आते उनकी सेवा करने के लिए हम भंडारा कर
रहे तो हमने क्या कोई बड़ा काम किया बेटे बेटी की शादी में हमारे हजारों लाखों रुप खर्च हो जाता है तो जीवात्मा परमात्मा की शादी में हमारे 5 25 हजार खर्च हुए तो हमारा भाग खुलेगा [संगीत] बाबा तो क्या इसको आप घोर कलयुग कह सकते क्या नहीं नहीं जितने घोर घोर हो गए उसकी अपेक्षा अभी भी भगवत कृपा है अभी भी कुछ रौनक है अभी भी कुछ समझदार लोग हैं परस्पर देवो भव की बात सुनने समझने और व्यवहार में लाने वाले अभी भी समाज में लोग हैं भैया तो भगवान का अंतर्यामी अवतार आपके चित्त में
हो जाए भगवान का प्रेरक अवतार आपके चित्त में हो जाए भगवान का निर्गुण निराकार स्वरूप तो सर्वत्र व्यापक है और निर्गुण निराकार के ज्ञान से तो मुक्ति होगी लेकिन सगुरु की कथा से आपके सद्गुण और अंतःकरण का आनंद छलके रोही नक्षत्र कैसा पवित्र सुहावना नक्षत्र होगा महाराज व भगवान का प्रेरणा अवतार वसुदेव देवकी पापी कंस ने कैद कर रखे दशमा स्कंध में कंस की व्याख्या आती है हिंसक एव कंस उते जो वाणी से दूसरे को सताए हिंसा करे जो कर्म से दूसरे की हिंसा करे जो अपना अह मारु धारु था बस मैं बोला मैं चाहता
बस वही हो ऐसी जो अकड़ पकड़ है दूसरे का दुख मुसीबत किसी विचार में नहीं लेकिन हमने जो ठान ली वो करके ही रहे इस प्रकार का जब अहम जोर पकड़ लेता है हिंसक एव कंस उच्च वो कंस की दो पत्नी भी बताई है एक का नाम है अस्थि और दूसरे का नाम है प्राप्ति समझ लेना वृति पत्नी मान वो वृत्ति कंस की अहंकार की वृत्ति क्या है इतना तो है इतना और चाहिए इतना तो है इतना और करूंगा इतनो को तो ठीक किया इतनो को और ठीक करूंगा इस प्रकार का अहम जब जोर पकड़
जाता और ऐसे अहम जोर पकड़े राजे महाराजे बढ़ जाते हैं समाज में तो समाज विचारा त्राहिमाम पुकारता है तो जो अहम के प्रभाव में समाज शोषित होने लगता है तो फिर कृष्ण अवतरित होते हैं श्री कृष्ण अवतरित हो इसलिए नारद जी ने भी बड़ा काम किया वसुदेव देवकी ने भी बड़ा सहयोग दिया तपस्या किया भगवान हमारे यहां अवतरित हो कंस को बताया कि तेरे यहां जो जिसको तुम ली बहन बनाकर विवाह कराकर बने मानकर जिनको विदा दे रहे उसी के कुख से जो आठवा बालक होगा वह तुम्हारा शत्रु होगा कंस को अहंकार को कदम कदम
पर भय होता है कदम कदम पर अस्थ और प्राप्ति को मेरा जो है और मिलेगा उसको संभालने के लिए न जाने क्या क्या डिसीजन लेता है वसुदेव देवकी को छोड़ने जा रहा है सुना तो निकाली तलवार देवकी को मारने जा रहा है वासुदेव ने समझाया देवकी तो तेरी शत्रु देवकी का आठवा बालक तेरा शत्रु होगा वो हम तुझे ही दे देंगे भैया बहन को क्यों मारे समझाया कैद कर दिया बहन को बनेवी को अहंकार ये नहीं देखता है कि लोग को क्या कहेंगे अथवा कर्म कितने कठिन हो जाएंगे लेकिन अहंकार अस्थि प्राप्ति के चक्कर में
और गहरा जैसे हाथी कादो में गिरता जाता है ऐसे अहंकार विशिष्ट व्यक्ति न जाने क्या-क्या करके अपने को और अपने समाज को य अपने कुटुंब को या अपने इर्दगिर्द वालों को परेशान कर देता है उस परेशानी से ऐसे कंस जैसे धरती पर राजा बढ़ गए पृथ्वी गौ का रूप धारण करके गई और भगवान को प्रार्थना की इस प्रकार की कर्क कथाएं तुमने सुनी होगी भगवान अवतरित होते हैं रोहिणी का पुत्र इसलिए रोहिणी उनका नाम रखने का विचार गर्गाचार्य कहते हैं बल की सीमा नहीं रहेगी इसलिए बल बलराम भेदभाव नहीं रहेंगे भेदभाव मिटाए इनके कर्म दिव्य
होंगे मेल कराएंगे इसलिए इनका नाम संकर्षण और यह जो काले सांवरे लग रहे हैं इन लाला का नाम कृष्ण रखेंगे सबको कर्षी आकर्षित और आनंदित करेगा इसलिए बालक का नाम गर्गाचार्य कृष्ण रखते हैं कृष्ण नन्य है फिर भी लीलाए इतनी बढ़िया कर रहे हैं कि बाल लीलाओं से मां यशोदा आनंदित होती अलादी होती श्री कृष्ण जब जैल में प्रकट होते हैं तो उसके पूर्व चतुर्भुजी रूप दिखाते हैं परदेश के लोग वर्ल्ड पार्लिमेंट के लोग बोलते हैं कि हमारा धर्म बड़ा है और तुम्हारा हिंदुस्तानियों का भगवान तो कुछ भी नहीं हमने कहा भाई तुम्हारा धर्म बड़ा
है या छोटा है यह बात तुम जानो लेकिन जब हमारे भारतीय संस्कृति को तुम बोलते हो ऐसा है वैसा है तो सुन लो तुम जिसको जीसस बोलते हो उसका हम मान करते आदर करते लेकिन कन्हैया तो कन्हैया है भारत का भगवान तो अद्भुत है जीसस जन्मे 17 साल भारत में आए योग सीखे महापुरुष हुए रोम में आए रोम सजाया गया बाद में लोगों ने उनको माना भी और विरोध हुआ क्रॉस पर भी चढ़ा दिया बाद में 400 साल के बाद बाइबल लिखा गया लेकिन हमारा कृष्ण तो आने के पहले मां-बाप को चतुर्भुजी रूप में दर्शन
देता है आदि नारायण साक्षा और देव की स्तुति करती कि भगवान आप अव्यक्त हो आप परात पर हो चतुष्कोण के प्रेरक हो इसलिए चतुर्भुजी नारायण हो वाणी बैकरी मध्यमा पसंती और परा के उद्गम स्थान हो इसलिए आप चतुर्भुजी हो लेकिन नाथ य चतुर्भुज नाथ बाल गोपाल हो जाओ यह तो प्राग का श्री प्रश हो रहा है जन्म कर्म च में दिव्यम जन्म कर्म च में दिव्यम मेरे जन्म दिव्य है साधारण जन्म नहीं है यह दिव्य जन्म है भगवान का तो यह कृष्ण अवतार की आरंभ से ही विशेषता है जो भगवान शत्रुओं के द्वारा खीले खाकर
बेचारा मर गया उनकी हम इज्जत तो करते हैं लेकिन शत्रुओं को हसते खेलते पहुंचा दिया और मुक्ति दे दिया उस भगवान को तो हम हजार हजार बार प्रणाम [प्रशंसा] करते नन्हे हो गए वसुदेव उठाकर बबड़े में ले जा रहे यमुना जी चरण स्पर्श करना चाहती पानी बढ़ता गया वासुदेव घबराते गए अपने चरण से यमुना को संतुष्ट करके पानी उतार दिया ऐसा अवतार आपके यहां कहीं हुआ हो तो बताइए जय राम जी की हम ये नहीं कहते कि हम बड़े तुम छोटे तुम बड़े हम छोटे लेकिन जब सत्य की बात आती है तो हमें भारतीय संस्कृति
की महानता सुनाते सुनाते चाहे जीवन दे देना पड़े तो दे [प्रशंसा] देंगे महाराज फिर तो वो लोग मानेंगे प्रणाम भी करेंगे सत्य तो सत्य ही होता है और निस्वार्थ सत्य बोलना और मधुर सत्य बोलना तो पराय को भी अपना बना लेता है महाराज गोकुल में गए हैं नंद बाबा कृष्ण को लेकर जब कृष्ण आए हैं भगवान आए हैं तो बंधन खुल गए अब देखना यहां तत्व ज्ञान दर्शन शास्त्र दिखेगा कदम कदम पर भगवान अवतरित हुए हैं तो वासुदेव के बंधन खुल गए और भगवान को लेकर जाता है गोकुल में गो माना इंद्रिया इंद्रियों के कुल
में जो इंद्रिया तीत है वह इंद्रियों के कुल में आंख से दिख सके हाथ से छुआ जाए कान से जिसकी वाणी सुनी जाए वह अव्यक्त भी स व्यक्त होकर गोकुल में गए और यशोदा मैया सो रही है पास में वह बेटी जन्मी है माया वासुदेव ने क्या करा वो बाल की उठाई और बालक श्री कृष्ण रखा वसुदेव ले गए उस माया को जब माया को जीव ले जाता है तो खुले हुए बंधन फिर पड़ जाते हैं जंजीर आ गई वसुदेव माया में ही जंजीर हैं आत्मा में जंजीर नहीं है चैतन्य में जंजीर नहीं है चैतन्य
में बंधन नहीं है दूसरी तरफ देखे तो यशोदा जी रही है और कृष्ण गोकुल में आए वासुदेव छोड़कर गए कृष्ण देखते हैं कि मैं अव्यक्त स व्यक्त होकर आया हूं और यह जीव सो रहा है कब तक सोते रहेंगे जागो लोग मत सुओ ना करो नींद से प्यार जैसा स्वपना रन का तैसा यह संसार यह संसार स्वपने जैसा है उस स्वपने से जगाने के लिए भगवान देखते कि जीव सो है अगर मेरे रोने से जगता है तो रोकर भी जो जगा दे वह कृष्ण अवतार कृष्ण रोते हैं ब्रह्मा को क्या रोने की जरूरत है उसको
क्या चाहिए वो तो आप्त काम है पूर्ण काम है उसको क्या चाहिए क्या दुख है क्या प्रॉब्लम है पूतना का जहर जिसको प्रॉब्लम नहीं कर रहा है वो वो कृष्ण यशोदा को जगाने के लिए रो रहे हैं कैसी अद्भुत लीला है कंस का षडयंत्र जिसको किसी विषद में नहीं चाणक मुटि पहलवानों की बदमाशी जिसके नजर में कोई महत्व नहीं रखती है गोरधन पर्वत टचली आंगली पर उठाना जिनके लिए खेल है ऐसे कृष्ण जीव को जगाने के लिए रो रहे हैं रोता तो बालक तब है जब प्रॉब्लम हो जब कोई मुसीबत हो कोई तकलीफ हो अ
तकलीफ को तकलीफ पड़ जाती है अगर कृष्ण के पास आती है तो तना आई नटखटी सुंदरी का रूप लेकर कैसे भी करके यशोदा को भुलवा दिया कि मैं इसको जरा लेती हूं जरा पै पान कराती पय पान करते करते करते जो दूध था व तो चूस लिया विष भी चूस लिया और चूस रहे चूस के तो मारना था हथियार से तो मारना ही था हथियार से तो मारना नहीं चूसे पतना बोलती छोड़ो छोड़ो छोड़ो कृष्ण सोचते कि मैं पकड़ता नहीं और एक बार पकड़ता हूं तो फिर छोड़ता नहीं एक बार केवल ईश्वर आपके किसी सत्कर्म
से आपको पकड़ ले बस आप कोई ऐसा कर्म करो कि तुम्हारा अंतर आत्मा तुम पर धन्यवाद बरसा दे मुझे ऐसा अनुभव हुआ मैं मंदिर में जाता पूजा करने के बाद ही पानी पीता था एक बार व पूजा का लोटा शिव मंदिर में तो जल और दूध होता है एक जवान रास्ते पर गिरा पड़ा था लोग देख देख देख के जा रहे थे मैंने ने पूजा का लोटा रखा उस जवान को हिलाया डूला उसको सचेत किया उसने बोला पानी पानी मैंने उसको पानी छिटका फिर दूध पिलाया फिर पूछा तो बोला मैं बिहार से आया मेरे पिता
मर गए मेरे चाचे ने मुझे तकलीफ दी नौकरी धंधा मिलता नहीं रेलवे स्टेशन पे मजदूरी करने आया तो कुलियों ने मार भगाया अब छोटी स्टेशन पर जाता हूं लेकिन तीन दिन से खाया नहीं बाबू जी इसलिए चक्कर आ गए तो मुझे जो घर से पैसे मिलते थे खर्च के लिए वह पैसे देकर उसको मैंने रिक्शा में बैठाकर रवाना किया बस उसी समय मेरे हृदय अंतर्यामी बोल रहा कि आज शिव पूजा पूर्ण हो गई आज तेरी भक्ति पूर्ण हो गई मैं तुझे मिलूंगा मैं बहुत संतुष्ट हु हूं मैं क्या कौन बोल रहे बोले जिसकी तुम पूजा
करने रोज जाते वही बोल रहा हूं बस पहला दिन मेरा वो होगा सोने का सूरज मैं वो बोल रहा हूं इतना संतोष हुआ इतनी समझ बढ़ गई मानो अंतर्यामी अवतार क्या होता है यह तो बाद में मैंने पढ़ा और सुना लेकिन अनुभव तो उसने पहले करा दिया फिर तो जहां जहां कदम रखे लोग तो 12 12 साल तप करते कहीं कबार समाधि लगती है सात सात साल बुद्ध ने मेहनत मजदूरी की लेकिन मेरा काम तो 40 दिन में बन गया परीक्षित का सात दिन में बना तो मेरा काम 40 दिन में बन गया यह अंतर्यामी
अवतार की लीला नहीं तो और क्या तुम ऐसा काम करो कि तुम्हारा अंतर्यामी तुम पर खुश हो जाए संतुष्ट हो जाए और तुम्हें ऐसी प्रेरणा दे और ऐसी जगह पर भेजा करें कि जीवन की शाम होने के पहले जीवन दाता की मुलाकात करा दे ऐसे जीवन मुक्त के पास [संगीत] तुम्हारी आध्यात्मिक जगत अपने आखिरी में आखरी अनुभूतियों का सिरताज जीवन मुक्त महापुरुष होता है उसके अंतःकरण को छूकर जो वाणी आती है वह श्रोताओं के पाप नाश कर देती है चिंता मुक्त बना देती है आनंद और आदित कर देती है जिसके हृदय में परमात्मा प्रकट हुआ
है ऐसे ब्रह्मज्ञानी के लिए गुरुवाणी में लिखा है ब्रह्म ज्ञानी का दर्शन वड भागी पावई ब्रह्म ज्ञानी को बल बल जावई ब्रह्म ज्ञानी का भोजन ज्ञान ब्रह्म ज्ञानी का ब्रह्म ध्यान वो देखेगा लेकिन देखने वाली चीजों में गहराई से उसको वो ब्रह्म परमात्मा ही दिखेगा जैसे साधारण आदमी गहना देखता है लेकिन सोनार को तो सोना दिखता है एक अहमदावाद का सेठ कुछ तेल में कमाया सोने का राम जी बनाया तीन तोला सोने का और तेजी आई और फिर पांच तोले का मना लिया हनुमान जी फिर एक बार मंदी का जोर से तमाचा लगा सेठ जी
राम जी को और हनुमान जी को दोनों को थैली में ले जाकर माणिक चौक में पहुंचा सोना बाजार में बोले भाई राम जी के तो 600 मिलेंगे और हनुमान के मिलेंगे आपको 1000 सेठ बोलता पागल हुए हो राम जी भगवान है स्वामी है स्वामी के 600 और सेवक के हज रप कुछ तो भाव बड़ा हो कुछ तो समझ से काम लो व सोनार कहता है कि राम जी आप ले जाइए और हनुमान जी आप ले जाइए हमें तो तीन तोला और पांच तोला दे दीजिए र तोले का जमाना होगा होगा 1970 का आसपास का 65
के आसपास का जमाना होगा तो सोनार को सोना दिखता है और ग्राहक को आकृत दिखती है ऐसे दुनिया दार को जगत दिखता है और जिसको ज्ञान होता है उसको जगदीश्वर दिख रहा है ऐसे ब्रह्म ज्ञानी की तुलना तुम किस चीज से किस देवता से किस व्यक्ति से करोगे वह साधारण से साधारण दिखेगा लेकिन ऊंचे में ऊंची पहुंच होती है उसकी वह साधारण से साधारण दिखेगा लेकिन ईश्वर के साथ उसकी तार 2400 घंटा जुड़ी रहती उसकी प्रसन्नता ईश्वर की प्रसन्नता है उस उसका आदर परमात्मा का आदर है परमात्मा के प्यारे भक्तों का आदर ये परमात्मा का
आदर है किसी बच्चे को तुम मारो तो उसके मां-बाप का तुमने अपमान कर दिया मां-बाप नाराज हो जाएंगे और किसी बच्चे का तुमने सम्मान किया आदर किया मां बाप को नहीं भी पूछा तभी भी मां-बाप का हृदय तुम्हारे प्रति प्रसन्न रहेगा ऐसे ज्ञानी ईश्वर का चलता फिरता स्वरूप अंतर्यामी और परमात्मा जिनके अंत में प्रकट हुए सौराष्ट्र में गाते लोग साचा संतो ने वंदन प्रेम थीरे इ तो इ तो ले सौराष्ट्र इ तो जगमा चालता छ भगवान साचा संतो ने वंदन प्रेम थीरे तो जिस परमात्मा को परात पर ब्रह्म को जानने के लिए ऋषि तप करते
हैं जोग जतन करते हैं वह अगर रिज जाता है तो तुम्हें अंतर प्रेरणा देकर ऐसी जगह पर पहुंचा देता है कि हंसते हंसते उसके स्वरूप का साक्षात्कार करा दे जैसे परीक्षित को प्रेरणा मिल गई सर्प दंश होगा तक्षक काटेगा श्राप मिला है मौत सामने दिख रही है श्राप देने वाले पर क्रूरता नहीं कर रहे बदला नहीं लेना चाहते लेकिन मौत आकर मार ले उसके पहले अमरता का अमृत पिलाने वाले महापुरुष को खोजने के लिए परीक्षित निकले और ऊंचा सोने का सिंहासन बनवाया और जो मुझे आत्मज्ञान का कृष्ण प्रसाद का अमृत दे दे ऐसे कोई महापुरुष
मिल जाए उसके शुभ संकल्प से समाधि में बैठे हुए सुखदेव जी महाराज चलते आए हैं मूर्ख लोग उनको पागल समझते बाओ बाओ करके कंकड़ पत्थर से उनका अनादर करते हैं फिर भी सुखदेव जी के चित्त में वह आत्म रस और जब सभा में आए तो सुखदेव जी की ब्रह्म निष्ठा देखकर साधु संतों ने तो उनका सत्कार किया है और परीक्षित ने भी उनका बहु मान किया अल्पम के लोग सुखदेव जी को पागल समझकर बाओ बाओ समझकर कंकड़ पत्थर उछलते हैं और वही सुखदेव जी को परीक्षित पूजता है लेकिन सुखदेव जी के चित्त में पूजा के
समय भी क्षमता है और गालियां बरस रही उस समय भी समता है ऐसी समता वाले जीवन मुक्त महापुरुष की तुलना हम किससे करेंगे बाबा तस्य तुलना न जायते तो जब ईश्वर प्रसन्न होता है परीक्षित के सत्कर्म पर भगवान प्रसन्न हुए तो परीक्षित के अंतर में प्रेरणा अवतार हुआ के मौत के पहले अमरता का उपदेश दे दे ऐसे किसी संत के शरण जाओ और संत के शरण बैठे परीक्षित और श्रवण करते करते सातव दिन परीक्षित को पूर्ण तत्व का ज्ञान हो गया भागवत की कथा सुनते सुनते पांचवे दिन सुखदेव जी महाराज ने परीक्षित पर संप्रेक्षण शक्ति
शांभवी दीक्षा अपना शुभ संकल्प आशीर्वाद बरसाया दृष्टि से और फिर प्रश्न किया कि सुखदेव जी कहते कि परीक्षित तेरे को भूख लगी होगी तने भूख लागी तरस लागी के बापजी जे भूख ने तरस तो मने ऋषि अपमान करावनी दृष्ट करावी ते कथा श्रवण करता करता मारी भूख ने तरस क्या जती रही मने खबर नथी ले सत्संग पान कराओ कथा श्रवण कराओ परीक्षत ना आ उत्तर थी सुकदेव जी महाराज संतुष्ट थया के सत पात्र छ बे दिवस बीजी कथा चाली ने सात में दिवस परीक्षित ना माथे सुखदेव जी बरदस्त परावी स्पर्श दीक्षा आपी अने कह कि
आज राज महाराजाओ वार्ता कई तारा चि रूपी पक्षी ने जाल मा बसावा माटे बाकी तो तारो आत्मा मुक्त चैतन्य तक्षक शरीर ए पण माया ने तारू शरीर प माया माया माया मा जन्मे अने मरे तू आत्मा अमर कृष्णन सनातन सत्य स्वरूप छ तू अमर आत्मा छ अह ब्रह्म परमधाम परमानंद परम [संगीत] पदम उधव जी बज पूछ के प्रभु आप युग युग मा आओ तो छ अने गोलोक मा जाओ छ प हवे आप आव ने जसो तो पछी कलयुग आवे छ लोगन रक्षण कौन करे लोगों को प्रेम कौन देगा आनंद कौन देगा माधुर्य कौन देगा आप
आए तब तक तो थोड़ा सुंदर सुहावना हुआ आप चले जाएंगे तो फिर तो संसार बहुत दुखी होगा भगवान कहते हम चले जाएंगे तो हमारा जो श्रीमद् भागवत में है उसमें हमारा वो प्रेमा अवतार का प्रसाद मिलेगा जो भगवत कथा करेंगे सुनेंगे उनको वही रस और आनंद आता रहेगा माधुर्य मिलता रहेगा इंदिरा गांधी की गुरु जवाहरलाल ज सिर झुका के अपना पुण्य बढ़ाते थे ऐसी आनंदमय मां जब शरीर छोड़ रही थी तो आश्रम वासियों को संचालकों को बुलाया किसी संत के आश्रम की सेवा करना या संचालन कर ने का अवसर मिलना यह भी भाग्यशाली व्यक्ति को
होता है और कहीं कहीं कोई समाज में किसी कारण से कुछ लोग कोई इल्जाम लगा दे और हंसते हंसते मुंह सहते हुए भी इतनी व्यवस्था करे रखना ऐसे संचालकों को शाबाश है [संगीत] धन्यवाद इल्जाम लगाने वालों ने इल्जाम लगाए लाख मगर तेरी सौगात समझ के हम सिर पर उठाए जाते संत तो संत है लेकिन संत की सेवा करने वाले अर्ध संत या कुछ तो सदगुण तो होही जाते उनमें सहन शक्ति धैर्य आदि नहीं तो आप आप तो रूपियो मलवा तो नहीं आप कठ खखरी जता तो ढो ना ना बधा आवा स्वार्थी से तो देवी कार्य
कोण उ पड़ से ऐसे तो हनुमान भी कह देते कि अपना क्या राम जी की पत्नी गई है हम तो बाल ब्रह्मचारी किसी की प गई उसमें मुझ ब्रह्मचारी को क्या हम तो बैठे बैठे सीताराम सीताराम करेंगे नहीं राम काज बिन कहां विश्राम जैसे हनुमान कहते थे राम काज मुझ कहां विश्राम ऐसे ये हरि कथा यह राम के काज में लगे हुए लोगों को कभी भी पलायन वादी होने का विचार तक नहीं आता है यह भगवान की कृपा नहीं तो क्या अंतर्यामी अवतार का चमत्कार नहीं तो क्या श्री कृष्ण का जन्म कर्म दिव्य है हम
क्या क्या कौन से कौन से पहलू से कौन से कन से किनारे से चले कुदा कुद करता हूं जय शी कृष्ण आखू वर्णन तो थ सके नहीं भागवत वर्णा भी सका नहीं गीता वर्ण भी सका नहीं अवतार थ बधु वर्णन थ सके नहीं अत्यार हेडिंग हेडिंग जरा जरा कहीं कहीं की हेडिंग पढ़ लेते हैं एक बार में होता है है ना हेडिंग हेडिंग कहीं फास्ट आज तो किसी ने बताया कि रेलवे का एक्सीडेंट हो गया और ऐसा कुछ छापे में बहुत आया है चित्र दिखाया दूर से मेरे पास टाइम नहीं था मैं पढ़ता भी नहीं
ज्यादा तो मुझे कमलापति त्रिपाठी की बात याद आई पार्लिमेंट में उससे सवाल पूछा गया रेल मंत्री थे कमला पटी त्रिपाठी कि ये एक्सीडेंट क्यों हुआ बोले अयोग्य व्यक्तियों को ऊंची पोस्ट पर रखा लापरवाह व्यक्तियों को मोटी पोस्ट दे दिया इसलिए एक्सीडेंट होते हैं प्रमोशन तो करो उदार तो बनो लेकिन सामने कुछ योग्यता हो ऐसा अधिक योग्य योग्य व्यक्ति को योग्य जगाह दी जाए अयोग्य को बड़ी जिम्मेदारी की जगह दी जाती तो यह एक्सीडेंट होते हैं कमलापति त्रिपाठी ने कहा नेहरू थे तब की बात है शायद करीब करीब मैंने सुना है चलो जो हो भाई इंजन
ड्राइविंग की भी योग्यता चाहिए नहीं तो देखो कितनी खना खराबी हो जाती कितना कुछ नुकसान हो जाता देश का परदेश जाना है तो पासपोर्ट चाहिए और कुछ तुम्हारे पास रकम का सर्टिफिकेट चाहिए स्वर्ग जाना है तो पुण्य चाहिए नरक में जाना है तो पाप चाहिए नहीं तो नरक वाला भी अलो नहीं करता जय राम जी जेल में जाना है नहीं तो तुम्हारे पास कोई सजा और जज का लिखित कुछ हो तभी जेल वाले रखेंगे नहीं तो जेल में भी नहीं रहने देते स्वर्ग में जाना है तो पुण्य चाहिए नरक में जाना है तो पाप चाहिए
वैकुंठ में जाना है तो भगवत भक्ति की पूंजी चाहिए लेकिन सत्संग में आना है तो हाथ हिलाते हिलाते पहुंच जाओ भाई वहां स्वर्ग की टिकट भी मिलती है वंकट की टिकट भी मिलती है और वंकट अधिपति का पूरा पता भी मिल जाता है मु [प्रशंसा] नारायण हरि नारायण हरि नारायण कृष्ण ने यशोदा को जगाया यशोदा जी जागी कुछ दिन बाल लीला की बातें बता कुछ थोड़ी बता रहे हैं कृष्ण नन्ने मुन्ने जब बोलने को हुए तो क्या बोलते हैं कभी-कभी खेलने को हुए तो दौड़ के उठे हैं यशोदा मैया गोपियों से बात करर गोपियां उस
गोविंद को देखने को आई कृष्ण उठ के आए और यशोदा के पीछे आकर यशोदा के आंखों पर अपने नन्हे नन्ने हाथ की पट्टी बांध दी यशोदा का प्यार उमड़ा है मेरा लाला लाला यशोदा की चोटी पकड़ के खींचने लगे नन्हा बच्चा और वो भी कृष्ण जब चोटला खींचता हो माताओं को पता है अपना मुन्ना चोटली खींचे तो कितना मजा आता है जय श्री कृष्ण जोटी अरे लाला छोड़ छोड़ इतने में कृष्ण की नजर आसमान पर गई यशोदा को छोड़ दिया चोटली को छोड़ दिया ला दे ला दे ला दे क्या ला दू ला दे ना
गोपिया कहती है लाला क्या ला दे मेरे बाप तू जो चाहे वो ला दे क्या मक्खन खाएगा बो तो क्या दूध पिएगा तो क्या गुलाब जामुन ला दू तो क्या मिश्री खाएगा तो क्या मेवा मिठाई ला दे बोले ला देना ला देना गोपिया कहती क्या ला दे बोले ला दे ना बोले क्या ला दे तू ला दे ना अरे लेकिन क्या ला दे ओ मना आकाश का चांद ला दे गोपिया कहती मेरे [प्रशंसा] बाप व चांद बेटा वो तो आकाश का हंस बोले ला दे तो हंस उड़ाए तू ला दे पैर पछाड़ रहे हाथ पछाड़
रहे बाल चेष्टा बाल सल चे गोपिया चुप कराने में और व झूमने में ला दे ला दे यशोदा ने गोद में उठा नहीं नहीं मेरे कन्हैया देख देख वो बेटा वो हंस नहीं है ला दे लेकिन देख सुन क्या है वह है चंद्रमा बोले हा चंद्रमा वो चंद्रमा ला दे यशोदा कहते बेटा वो चंद्रमा अब देखो मायों की युक्ति बच्चे को कैसे मोड़ना चाहिए नहीं मिलेगा नहीं ननो नहींन भले ला भी दे पर तू वार्ता साभ हम तुझे ला देते लेकिन ू बात सुन यह जो चंद्रमा है ना यह इसमें देखो बीच में काला काला
दिखता है हां के दिखता है बेटा वो विष है छी छी विष है बोले विष चंद्रमा में कहां से आ गया बोले वो चंद्रमा में विष आ गया वो समुद्र मंथन हुआ था देव दानव मिलकर समुद्र मंथन किए थे वहां से विष निकला था और चंद्रमा भी निकला था तो विष तो शंकल भगवान पी गए थे बोले शंकर भगवान ने पीते पीते जो दो बूंदे ढुल गई बोले वोह तो सांपों ने चाट ली इसलिए सांप जहरी है बोले एकाद बूंद उसके साथ भी जुड़ गई है लाला तु दे चांद की तरफ ऐसे करते करते मथे
पर उंगलियों के अग्र भाग से जरा सलाती गई कन्हैया को नींद आ गई जो सारे विश्व की नींद खोलने को आया है वह नींद की लीला नहीं करे तो और कौन सी लीला करेगा चंद्रमा तो लाना नहीं और खाना नहीं कुछ करना नहीं ला दे ला दे करके लीला करके फिर एक हाथ बार किसी गोपी के यहां गए जिनको गोपियां कहते हैं या जो बाबू लोग कृष्ण पर या गोपियों पर आरोप करते हैं वे लोग लोग कान खो खोल के सुन ले जो लोग बोलते श्री कृष्ण ऐसा करते थे ऐसा करते थे नाचते थे गोपियों
के साथ ऐसा करते थे उस समय कृष्ण की उम्र भी छोटी थी और दूसरी बात ये जो गोपियां सुनते हो वह कोई साधारण लड़किया नहीं थी कोई तो रचाए थी वेद की साकार गोपी का रूप लेकर आनंद लेने को अवतरित हुई और कोई ऋषि थे मुनि थे कोई तपस्वी थे कोई जति थे कोई योगी थे शास्त्र में आता है कि ऋषि हरि धामा निराहार रहकर क्लीम काम विजय युक्त विषक श्री मंत्र का तीन कल्प तक जप करते रहे बाद में सारंग की पुत्री बने और रंग वेणी उसका नाम पड़ा वोह गोपी श्री कृष्ण की थी
रंग वणी जो गोपी थी वह तीन कल्प पहले ऋषि हरि धामा निराहार रहकर जप करते थे वह ऋषि रंग वेणी बने तो इतनी तपस्या के बाद जो आया है वह कोई साधारण जीव नहीं है व कोई साधारण गोपी नहीं है जा बाली ऋषि बचर बिचर बावली के किनारे आए ब्रह्म विद्या से दीक्षित हुए एक पैर से खड़ा रहकर तपस्या किया और वो उन कल्पों के बाद प्रच के पुत्र चित्र गंधा नाम की वो गोपी हुए हैं जो चित्र गंधा है वो अगले कल्प में जा वाली ऋषि थे अब ऐसे पवित्र पवित्र आत्मा गोपियों का रूप
लेकर आए हैं और वो साकार ब्रह्म की नटखटी लीला नहीं देखे तो और क्या देख ऐसे कई ऋषियों का नाम आता है यहां सबका वर्णन करें तो समय लग जाएगा कुल मिलाकर इतना समझना है कि सब पुण्य आत्मा देव देव आत्मा और रिचा अथवा अगले जन्म के कोई तपस्वी है तो कोई जती है तो कोई जोगी है तो कोई कुछ है यह लोग आए श्री कृष्ण ऐसे लोगों के बीच कभी खेल खेलते किसी गोपी ने पकड़ लिया कि लाला आज तेरे को नहीं छोडूंगी और गोपी ने कृष्ण को बांधना चाहा लेकिन वह कृष्ण को बांधे
तो कृष्ण के नन्ने हाथ कृष्ण घसीट के खींच लेता है गोपी फिर जरा बांधे तो निकाल लेता है ऐसे करके कृष्ण हसता है कि पगली बांधना नहीं जानती तो रस्सी लेकर क्या खड़ी है ला मैं बांध के दिखाता हूं तू बांध के दिखाता कि बोले हां सब सीखना पड़ता है आजा मैं तेरे को सिखाऊं अच्छा कन्हैया सिखाओ कैसे बांधा जाता है एक एक छेड़ा तो थंब को बांधा कृष्ण ने और दूसरा छेड़ा गोपी के हाथ पर घुमा के ये देख ये एक गांठ बोले हां देख लिया बोले ठ ठ बराबर सीख ले फिर दूसरी आंटी
लेके हाथों के बीच से निकाल के ये दूसरी गांठ फिर ऐसे वैसे घुमा के मजबूत करके यह तीसरी गांठ फिर ऐसा करके आगे से यूं करता जा रहा है इतना ही नहीं कि खोल सके ऐसे करर बिल्कुल मजबूत ऐसे करते करते न गांठ बांधी गोपी बोलती बस मैं सीख गई सीख गई छोड़ छोड़ बोले छोड़ छोड़ पगली छोड़ने को थोड़ी बांधा है ले अरे े तू मुझे बांधना सिखाती थी तो मैंने सिखा दिया तेरे को बांध ऐसे बांधा जाता है लेकिन अब खोल दे मैं तेरे को बांध जा मैं बंधन में नहीं आता हूं जा
और अंगूठा दिखाकर जीभ दिखाकर मुस्कुरा रहे और गोपिया जाले र ले ले यशोदा मां के पास भाकी के मां मां तेरे लाला ने तो कमाल कर दिया रेणुका को तो ऐसा बांधा ऐसा बांधा है कि उसके नाक में दमाग अरे ऐसा नहीं हो सकता यह बालक इतनी बड़ी को बांध सकता है कि मां ये दिखता नन्ना है यह भी ताजुब कि नन्ना दिखता है लेकिन सारे जगत को जो चला रहा है वह तो सच्चिदानंद दिखता ही नहीं फिर भी बांध रखा है [संगीत] माया जब निकल जाता है सूक्ष्म शरीर तो उसमें चैतन्य होता कहां दिखता
है दिखता नहीं फिर भी साहब सेठों को नेताओं को जनता को सबको चला रहा है हिला रहा है डला रहा है जरूरी नहीं कि दिखे वही होता है कभी-कभी न दिखने वाली चीजों में बहुत सामर्थ्य होता है प्राय करके न दिखने वाले में ज्यादा सामर्थ्य होता है ना दिखने वाला चैतन्य मेंही साकार ब्रह्म करने का और साकार जगत करने का सामर्थ्य है ये दिखता जो जगत है वो तो कुछ भी नहीं स्वपने में जो दिखता है वो बड़ा बड़ा दिखता है लेकिन जिससे दिखता है जिस सत्ता से वो सत्ता नहीं दिखती है और स्वप्ने का
जगत बहुत बड़ा दिखता है ऐसे जागृत का जगत दिख रहा है लेकिन जिस सत्ता से दिख रहा है वो नहीं दिखती है लेकिन नहीं दिखती फिर भी और जो जगत में जो सत्ता संचालित है वो अद्भुत सच्चिदानंद परमात्मा की है उस परमात्मा का ज्ञान उस परमात्मा का ध्यान और उस परमात्मा का सुमर चिंतन करके जीव को अपना कल्याण करना चाहिए ईश्वर की अलग-अलग लीलाएं और चेष्टा एं देखकर ग्वाल गोप गदगद हो रहे हैं वह भगवान कृष्ण अद्भुत लीला करते सबका मन अपने तरफ आकर्षित करते हैं कर्ष आकर्ष इति कृष्ण सुप्रसिद्ध यादव वंश के महान वारस
जन्म कर्म जिसके दिव्य हैं रोहिणी नक्षत्र में जो अवतरित हुए हैं विजय मुहूर्त के समय में जो प्रकट हुए हैं ऐसे जगत गुरु श्री कृष्ण प्रेमा अवतार की जय हो द्वार द्वारिका के संस्थापक राजाओं को सिंहासन पर बिठाने वाले भव्य प्रतिभाशाली और युग पुरुष ऐतिहासिक पुरुष श्री कृष्ण की जय हो उस महात्मा स्वरूप श्री कृष्ण परमात्मा ने बलव मंगल को दृष्टि दी और उसका हाथ पकड़ के रास्ता दिखाया द्रोपदी के चिर हरण में हरण के समय साड़ियों का अवतार लिया द्रोपदी की जरासी भाजी खाकर दुर्वासा को और उसके शिष्यों को संकल्प मात्र से तृप्त कर
दिया भक्तों के हृदय को चुराने के लिए जिसने मक्खन चोर लीला की राजसू यज्ञ में अपमान और तिरस्कार के 100 स शब्द सहे और अंत में शिशुपाल के तेज को शिशुपाल के जीव को अपने में समाविष्ट कर लिया ऐसे कृष्ण की जन्माष्टमी आज की जन्माष्टमी की आपको बधाइयां हो और कन्हैया की जय हो जहर लेकर आने वाली पूतना हथियार से नहीं कपट से नहीं प्रेम से चूस चूस के पूतना को वह पद दिया जो मां यशोदा को देने वाले ऐसे समत्व योगी की जय हो उद्धव को अंत समय श्री कृष्ण ने उपदेश दिया कि उधव
यह जो कुछ दिखता है यद इदम मनसा वाचा चक्षु ब्याम श्रवण आदि भी न स्वरम गृह मानम च विद्धि माया मनोमय ये जो कुछ आंखों से देखा जाता है कान से सुना जाता है मन से सोचा जाता है यह सब माया है इसको माया को माया समझकर मिथ्या समझकर मुझ अंतर्यामी कृष्ण में तू एक भाव से लगन कर और बद्री का आश्रम जा और तू मुझे ऐसा मिलेगा कि फिर तेरा और मेरा कभी वियोग नहीं होगा ऐसी ब्रह्म विद्या की मस्ती पाएगा कि फिर तुझे संसार बांध नहीं सकता सं सरती थ संसार जो सरकता जाए
उसे संसार कहते हैं और सरकने वाले को सच्चा समझकर जीव बार-बार सरकता है जन्मता मरता है जो असर आत्मा को संभाल लेता है जान लेता है हे उध वो मुज रूप हो जाता है ऐसे परमात्मा श्री कृष्ण की जय हो धृतराष्ट्र की राज सभा में आत्मा को उत्साह आ जाए जीवों को राजाओं को महान धर्म और ज्ञान नीति का उपदेश ऐसा श्री कृष्ण ने दिया कि दुर्योधन और दुर्योधन के समर्थक लोग भी श्री कृष्ण को प्रणाम करने लग गए ऐसे उपदेशक को प्रणाम हो भगवत दर्शन के बाद साकार दर्शन के बाद निराकार तत्व के ज्ञान
की जरूरत है ऐसा निराकार तत्व का ज्ञान युद्ध के मैदान में जिसने गीता के रूप से गाया है ऐसे कृष्ण की जय जयकार हो वंदे कृष्णम गुरु उस कृष्ण को प्रणाम है उस कृष्ण का स्मरण करने से भी चित्त पावन हो जाता है कृष्ण कहते यदा यदा ही धर्म स गलानी भवती भारता अभ स्थानम धर्मस्य तदात्मानं सजाम अहम हे भरत वंशी अर्जुन जब जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है तब तब ही मैं अपने आप को प्रकट करता हूं जब जब धर्म की हानि होती है अधर्म की वृद्धि होती है तो मैं
अपने को प्रकट करता हूं युग की मर्यादा से अभी भगवान इस समय प्रकट नहीं हो रहे हैं फिर भी भगवान के नित्य अवतार संत के हृदय में भगवत तत्व का प्रगट तो हमको मिल ही रहा है नित्य अवतार निमित्य अवतार अंतर्यामी अवतार प्रेरणा अवतार नेमक अवतार भले अभी ना हो लेकिन तुम्हारा प्रेरणा अवतार तो तेरे साधकों के हृदय में होता रहता है तुम्हारा अंतर्यामी अवतार तो सबके हृदय में है तुम्हारा साक्षी अवतार तो सबके हृदय में है जो भी कुछ कर्म करते साथ-साथ गुफा में बैठकर समाधि करो कोई ना देखे कोई कुछ का कुछ भक्ता
रहे फिर भी तुम समाधि करते हो तो तुम्हारा साक्षी अंतर्यामी अवतार वो तुम्हारी योग्यता विकसित कर लेता है साथ-साथ भोर के बीच छुपकर तुम दारू शराब या कुकर्म करते हो हो कोई नहीं देखता फिर भी वह साक्षी अवतार तुम्हारे अंतर में देख रहा है वो तो अभी भी मौजूद है कीड़ी के पग नेवर वाजे सो भी साहिब सुनत है एक आदमी आके बोले बापू मैं सचमुच कभी मैंने दारू नहीं पिया लोग बोलते हैं कि छुप के दारू पीता है बापू मेरे पर लांछन लगता है मैंने क्या पागल कहीं के इतने में रोता है घबराता है
बापू ना करता मरी जा सार खोटा अक्ष उना करता तो मरी जाऊ हमें हमने कुछ भी नहीं किया मी भी नहीं पी दारू भी नहीं पय भी नहीं कि मेरे पर आक्षेप यह दारू पीता है ये बीड़ी पीता है ये फलाना करता है मैं क्या भैया तू तो बहुत साधारण है अच्छे अच्छे सेवक जो सेवा करते उन पर भी आरोप आ जाता कि जमीन दबाते हैं एक सुई की नोक पर रहे इतनी भी जमीन नहीं दबाई बचार [संगीत] ने जय राम जी की वो हसते हसते सुन रहे तो तू क्यों नहीं ये करता है अरे
भगवान कृष्ण पर भी आरोप लगे थे चौथ का चांद देखा था श्री कृष्ण ने और कृष्ण पर आरोप लगा उस वर्ष में स्तिक मणि कृष्ण ने चुराया है और आरोप ने तो इतना जोर पकड़ा इतना जोर पकड़ा कि महाराज स्वयं कृष्ण के निकट के लोग भी कृष्ण में शंका करने लग गए और तो क्या बलराम भी कृष्ण से रूठने लगे कि तुमने नहीं चुराई तो और कौन चुरा सकता है ले मारो वालो जब आखिर कृष्ण को बहुत सारा जूझना पड़ा और वो कलंक उतारने के लिए क्या क्या हुआ भागवत में लंबी कथा है मणि ला
दी जिसने चुराई थी उनको पकड़ा कृष्ण घाट वाला बाबा ने मने पूछु के भादरवा शुद्ध चौथन चंद्रमा जोथी माणस ने कलंक वागे लागे छ ए वात तमने केवी लागे छ मैं कीदू शास्त्र मा लख्य ले साची तोसे के त अनुभव करे छ मैं क्या मैं तो अनुभव नहीं किया तुमने कभी चौथ का चंद्रमा देखा है मैं क्या मेरे स्मरण में नहीं है कि चौथ का चंद्रमा देखा कि नहीं देखा तो घाट वाला बोलता कि मैंने देखा एक साल देखा जानबूझ के बदरवास चौथ का चंद्रमा देखूं क्या होता है मैं क्या फिर क्या हुआ बोले कुछ
भी नहीं मैं शास्त्र में लिखा है कि कृष्ण ने चौथ का चंद्रमा देखा तो उस पर भी कलंक लगा व गणेश चतुर्थी को गणेश जी को ऐसा देखकर चंद्रमा हंस पड़े तो चंद्रमा को श्राप देते हुए गणपति ने कहा कि तू मेरी हंसी उड़ाता है मेरे को ऐसा वैसा बोलता है जा आज के दिन कोई तेरा दर्शन करेगा तो उसको भी कलंक लगेगा और तब से कलंक लगता है अभी भी उसकी सच्चाई तुम देख सकते हो अगर शास्त्र सच्चे हैं कि झूठे हैं ऐसी किसी को भ्रांति हो तो भादरवा सुद चौथ का चांद देख लो
फिर देखो वर्ष में क्या होता [प्रशंसा] है आजमाया हुआ नुक्सा है भांजे आजमाया हुआ है देखा हुआ अनुभव किया हुआ नुक्सा है बिल्कुल ग्रंटेड है जब भागवत की कथा भादरवा शुद्ध चौथ का चंद्रमा आप देख लो और फिर कलंक लगता कि नहीं वर्ष भर में बढ़िया भारी कलंक साधारण नहीं बड़ा जोरदार लगेगा आपको भी याद रहेगा आपके साथियों को भी पता चलेगा कि हत तेरे की आऊ थ आऊ कर त करू ना होए आ कर हर घाट वाला बोलते मेरे को तो कुछ नहीं हुआ मैं क्या तुमको कुछ नहीं हुआ यह कैसे बोलते हो जब
कृष्ण को हुआ और शास्त्र की बात है बोले मेरे को तो कुछ नहीं हुआ मेरे नाम की कुछ गंदी गंदी बातें दी वालों पर लिख दिया था और मेरे नाम कुछ का कुछ लोग बोल रहे थे मेरे को कुछ नहीं हुआ मैं क्या तुम अपने को आत्मा मानते हो इसलिए आपके आत्मा को कुछ नहीं हुआ बाकी आपके नाम को कलंक तो लगा बोले वो तो खूब लगा खूब लगा मैंने कहा अच्छा अपन भी देखेंगे तो एक बार पहले भी हमने देखा और इस बार हम यूरोप थे भादवा सुद चौथ को कहीं सत्संग करने जा रहे
थे पश्चिम के तरफ ड्राइविंग कर रही थी गाड़ी बराबर चांद देखते रहे भर पेट देखते रहे भादरवा सुध चौथ का चांद हमने खूब देखा डट के देखा फिर देखा तो प्रवचन तो अच्छा हुआ फिर इंडिया में आए संत सम्मेलन की पूर्णाहुति वृंदावन में मेरे हाथ से वो भी अच्छा गया आगरे का प्रोग्राम भी अच्छा गया कहीं कलंक नहीं और फिर इधर उधर यहां की शिविर विविर हुई सब बढ़िया आय भोपाल का प्रोग्राम य वर्ष भर के धमाधम प्रोग्राम हुए मैं सोचा ये क्या हुआ भादरवा शुद्ध चौथ का चांद भूल गया क्या काम ऐसे करते करते
करते मैं क्या चेटी चंद में कुछ होगा चलो चेटी चंद भी बड़ा आनंद से जय जयकार से गया फिर गोधरा का प्रोग्राम हुआ गोधरा का भी बढ़िया हुआ फिर मैंने क्या बम्बे में पहली बार होता है क्रॉस मैदान है भीड़ भड़के का जगह वहां जरूर कोई ऐसा वैसा कोई निंदा करने वाला कोई कुछ कुछ करेगा लेकिन वहां भी देखा कि ओ आज तक क्रॉस मैदान इतना नहीं भरा जितना इस योग वेदांत समिति के सत्संग में भ ब और वहां की कैसेट तो जीटीवी तक पहुंच गई और चौथी तारीख को चौथी नवंबर को सितंबर हां अगस्त
सितंबर ये इसी महीने पाच छ दिन के बाद और जीटीवी वाले देने वाले ऐसा सत्संग हुआ मैंने कहा अब चौथ का चंद्रमा कहां गया ऐसे करते करते महाराज मैंने क्या चलो दिल्ली लाल किला है राजधानी है वहां तो गड़बड़ ज्यादा होती है क्या पता चलो डेट तो दे दिया जो होगा देखा जाएगा और लाल किल्ला का बड़ा फुगा लगा है लाल किल्ला के सामने और देखे तो सर संघ चालक जन संघ के स्वयंसेवक संघ के वह भी घंटों भर कथा सुन लाल कृष्ण आडवाणी कांग्रेस के मंत्री विदेश मंत्री सब साथ में विरोध पक्ष के नेता
भी सब विचारे साथ में बैठकर सत्संग सुन रहे मैंने क्या चौथ का चंद्रमा से तोय उल्टा काम हो रहा है मिलना चाहिए अपयश लगना चाहिए कलंक और हो रहा है जोरों का यश दिल्ली के कई इलाकों में कैसेट चलने लग गई मैं चौथ का चंद्रमा क्या पता भूल गया काम क्या ऐसे करते करते ऋषिकेश पहुंचे एकांतवास अब भादरवा सु चौथ में तो अब तो थोड़ा ही समय है अब तो प्रोग्राम कोई खास है नहीं फिर वहां के मंडलेश्वर और कोई अखाड़े के फलाने कोई यह वो सब उन्होंने यह किया प्रोग्राम वहां के गीता आश्रम के
महा मनले शवर उनकी माता अभी भी आई है तो गीता आश्रम में सत्संग क्या यहां जरूर कुछ ना कुछ होगा लेकिन वहां भी साधु संतो ने बड़ा स्नेह किया बड़ा जय जयकार हुआ बड़ा आनंद आनंद बाद में पता चला के हां रस्ता ने लने चौथन चंद्रमा रंग जमा त्मा कोना मार ला प कोई मैगजीन ममम पम चंद्रमा बराबर दे नारायण ह तो सच्चाई देखनी है तो आप देख के देखो चौ का चंद के बापा नहीं रे बापा तो त संत आनंद बाकी हमारा तो मरि के बापा भादरवा सुद्ध चौथ के चांद का ऐसा विपरीत असर
हो सकता है तो जो पूनम का चांद समान चांदो का चांद श्री कृष्ण है उसका उपदेश सुनकर आत्मा में गोता मारो तो लाभ भी इतना हो सकता [प्रशंसा] है जिसको शास्त्र पर भारतीय संस्कृति पर या शास्त्र पर संदेह हो उसको बोलना भैया तू देख ले चौथ का चांद और दूसरा भादरवा सुद्ध चौथा है तब तक कुछ ना कुछ तू ऐसा अनुभव करेगा कि भले तू दूध में धोया हो फिर भी तेरे को ऐसा कलंक लगेगा ऐसा कलंक लगेगा तू नहीं हजारों लोग जानेंगे नारायण नारायण नारायण इस कलंक की निवृत्ति का एक उपाय भी है अगर
चौथ का चांद दिख जाए तो पांच का चांद प्रयत्न पूर्वक देखे तो कलंक का जोर मिटेगा लगेगा लेकिन अच्छा हो जाएगा मिटेगा दूसरी बात यह है कि श्री कृष्ण पर भादरवा सुद चौथ के चांद देखने का कलंक लगा था वो जो कथा भागवत में आती सुन ले तो यह कलंक की निवृति होती है नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण