सदैव खुश रहना ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है दूसरों को टोटे चबाने के बदले दूसरों को खीर खांड खिलाना यह परम सेवा और सफलता की कुंजी है दो बात तीसरी बात संसार को सच्चा मानना शरीर को मैं मानना और संसार में सुखी होने की कोशिश करना महा मूर्खता है है दुखा लय जो संसार में सुखी होना चाहता है समझो उसके भाग्य पर दुख का लेख लिखा है सुख तो आत्मा में परमात्मा में है संसार में तो व्यवस्था है बस चौथी बात यह है कि संसार में तीन चीज एक साथ किसी के पास नहीं होगी शरीर सुख
धन का सुख और कुटुंब का सुख ये संसार के तीन चीजें हैं या तो तबीयत में गड़बड़ी हो गई या तो कुटुंब में गड़बड़ी होगी या तो धन में गड़बड़ी होगी तीन एक साथ नहीं रहते अगर तीन एक साथ रहे तो आसक्ति हो जाएगी फस जाएगा फिर भगवान को कैसे पाएगा मनुष्य जीवन का अनमोल फायदा कैसे उठाएगा बाबा जी के पास कैसे आएगा इन तीन में एक ना एक गड़बड़ है तभी तो हमारी गिरा कीी चलेगी और हम फिर उससे मिलाएंगे ना हम क हित है ना एकदम सच्ची बात का हित है ना भैया भगवान
का नाम तो लो लेकिन प्रेम से लेना है उससे क्या है कि अंत आत्मा में बुद्धि का योग बन जाता है भगवान बोलते हैं भजता प्रीति पूर्वक ददा मि बुद्धि योगम तम यन माम उ पियां ते जो मुझे प्रीति पूर्वक भजता है उसे मैं बुद्धि योग देता हूं बुद्धि तो सबके पास है एक मच्छर के पास भी बुद्धि है कि नहीं है मच्छर मेरे गाल पर बैठता है ललाट प बैठता हाथ प बैठता मेरी दाढी प आज तक मच्छर नहीं बैठा उसको अकल है कि बापू जी की दाढी बोरिंग नहीं होता कोई किसी स्कूल कॉलेज
में जाने की जरूरत नहीं पड़ती उनको तो पेट भरने की अकल तो मच्छर को भी है बच्चे पैदा करने की तो चिड़ियां को भी है मच्छरों को भी है लेकिन दिल को ऐसी बुद्धि तो सबके पास है मच्छर के पास बुद्धि है कि नहीं है बोलो कीड़ी के पास बुद्धि है कि नहीं है है ना तो फिर मनुष्य के पास बुद्धि हुई और कीड़ी के पास हुई कीड़ी ने बच्चे पाल लिए मनुष्य ने पाल लिए तो क्या बात किया मनुष्य की बादरी इस बात में कि बुद्धि में योग ले आवे और बुद्धि में योग आता
है भगवान का नाम प्रीति पूर्वक भजे और भगवान की कथा सुने और भगवान के संत जनों का संग करें तो बुद्धि में भगवान का योग हो जाता है फिर वह पुरुष दिखता है मनुष्य रूप में लेकिन ईश्वर का चलता फिरता एक मॉडल साचा संतो ने वंदन प्रेम थीरे ई तो जग मा चालता छे भगवान अरे ये तो भगवान की बात की वह भगवान का बाप भी बन सकता है जय राम जी वासुदेव भगवान के बाप थे कि नहीं थे दशरथ भगवान के बाप थे कि नहीं थे कौशल्या भगवान की मां थी कि नहीं थी तो
भगवान ने इतनी महानता दे रखी है बुद्धि योग से क्या आप भगवान के सखा बन सकते सेवक बन सकते दास बन सकते मित्र बन सकते भैया बन सकते मैया बन सकते पाप पिताजी बन सकते भगवान का बाप बन सकते ऐसी योग्यता वाला मनुष्य पान मसाला आ तू सुख दे सिगरेट तू आज सुख दे हे निगड़ी शराब तू सुख दे हे पिक्चर तू सुख दे क्या इसमें सुख रखता होता तो वो शराब की बोतले ना च उठती पिक्चर की पट्टियां ना च उट सुख तो तुम्हारा अपना है एक आदमी मुछो वाला था मुछो वा वो शराब
के अड्डे पर गया बोले दो पैसे की शराब दे दे यार हथेली पे बोले दो पैसा क्यों खून करता है दो पैसे की शराब गले तक नहीं पहुंचेगी भाई साहब दो पैसे की एक अंजली क्या करेगा बोले मैं मुच्छ को मल के जाऊंगा शराबियों की महफिल में नशा तो अपना होता है बोतल में थोड़ी नशा होता है मुछे वाले अपनी मुछे ठीक कर दो तुम नहीं लगाना शराब का जरा हाथ तुम तो हरि ओम का जाम पियो जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बीती सुबह को उतर जाएगी तो हरि नाम की पलियां पि
आकर तेरी सारी जिंदगी सुधर जाएगी [प्रशंसा] सुधर ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय प्रभु देवाय इष्ट देवाय आत्म देवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते [संगीत] वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओ नमो भगवते वासुदेवाय परब्रह्म परमात्मा तुम्हारी मंदता को हरता है तुम्हारे शोक को हरता है तुम्हारे पाप ताप को हरता है वह परब्रह्म परमात्मा के आगे तुम्हारा आत्मा के आगे जगत की कोई कीमत नहीं हरि सम जग कछु वस्तु नहीं क्योंकि जगत की वस्तु को तो तुम छोड़कर चले जाओगे शरीर को भी छोड़कर चले जाओगे लेकिन अपने आत्मा हरि को आप
छोड़ सकते क्या मरने के बाद क्या अपने आत्मा को छोड़ सकते हो पत्नी को छोड़ देते दुकान पर जाते [संगीत] समय पति को छोड़ देते माय के जाते समय जय राम जी की क्या ख्याल है रुपए पैसे भी छोड़ देते रात को नींद में लेकिन अपने आप को छोड़ते हो क्या रात को नींद में अपना आप होता हैर मौत के समय शरीर छूट जाता है रिश्ते नाते छूट जाते हैं लेकिन आपना आप अपना आरी चाहे पापी है नरक में जाएगा तभी भी चेतन आत्मा तो रहेगा क्या स्वर्ग में जाएगा तो भी तो रहेगा स्वर्ग का
और नरक का अनुभव करने वाला तो रहेगा क्या तो नरक का दुख भी आक चला जाएगा स्वर्ग का सुख भी आकर चला जाएगा बचपन भी आके चला गया जवानी भी आके चली जाती है बुढ़ापा भी आके चला जाता है कई सफलताएं जीवन में आई और चली गई कई विफलता चली गई आपका हर गया क्या जा सकता है क्या जिसका आप साथ नहीं छोड़ सकते और जो आपका साथ नहीं छोड़ता उससे प्रीति कर लो उसका ज्ञान पा लो और जिसका साथ आप रख नहीं सकते हो जो आपसे साथ निभा नहीं सकता उससे ममता और अंता मिटा
लो पैसे से ममता ना करो पैसे का उपयोग कर लो शरीर से अंता मत करो यह मैं हूं क्या नाम है कि मेरा नाम फलाना है मेरा नाम गोबर गणेश है मेरा नाम जगल है शमल है कौन हो तुम बोले मैं शमशेर हूं कहां है शमशेर यह तो तेरी छाती हैय तो तेरा खोपड़ा है शमशेर कहां है जन्म के पहले तो रखा था ही नहीं नाम जन्म के बाद रखा है तेरा नाम जुगल तेरा नाम प्रमोद तेरा नाम अटल तेरा नाम मोहन तेरा नाम फला और पक्का होगा वास्तव में तुम क्या होय पता ही नहीं
इसका पता ना होने के कारण भगवान कृष्ण तुम्हारा रथ हाके घोड़ा गाड़ी चलावे हैं युद्ध की फिर भी दुखों का अंत नहीं होगा भगवान कृपा करके उपदेश देते हैं अपने हरि स्वभाव का और अर्जुन को जब उपदेश बराबर श्रद्धा भक्ति से विचार और उपदेश का रंग आया तब अर्जुन कहता है नष्ट मोह स्मृति लब्ध मोह बोलते उल्टा ज्ञान मेरा नष्ट हो गया स्मृति लब्ध अब मुझे स्मरण आया कि मैं अमर आत्मा युद्ध हार और जीत आएगी चली जाएगी शरीर भी एक मर जाएगा फिर भी जो नहीं मरता वह मैं हूं तो जिसको मौत नहीं मार
सकती उस अपने आत्मा का ज्ञान उस आत्मा हरि की प्रसादी मिल जा तो इससे बढ़कर और क्या है दुनिया में सारी धर का राज मिल जाए एक प्रधानमंत्री भारत का नहीं सारी दुनिया के देशों का कोई एक ही प्रधानमंत्री बन जाए फिर भी उसको आत्मा का ज्ञान नहीं है तो अ भागा तो जरूर है क्योंकि उसको कुर्सी तो छोड़नी पड़ेगी शरीर भी छोड़ना पड़ेगा और मरेगा तो अनाथ होकर मरेगा फिर चंद्रमा के किरणों के द्वारा किसी बरसात में अन्न में आकर बैठेगा स्थिर होगा व अन मनुष्य खाएंगे और फिर वीर्य के द्वारा किसी के गर्भ
में जाएगा गर्भ मिला ना मिला तो बाथरूम में नाली में भटका जाएगा और क्या कर लेगा तो जन्म का दुख बाकी है बुढ़ापे का दुख बाकी है बीमारी का दुख सिर पर नाच रहा है तो आप सेठ होकर क्या कर लिया प्रधानमंत्री होकर क्या कर लिया वर्ल्ड मंत्री होकर क्या कर लिया आपकी बुद्धि को भगवान के साथ योग नहीं कराया तुलसीदास ऐसे लोगों को सावधान करते हैं सर धुनि धुनि पछतावे मौत के समय आदमी पश्चाताप के आग से तपते हैं सर धुनि धुनि पछतावे काल ही कर्मही मिथ्या दोष लगावे जो न तरे भव सागर नर
समाज अस पाई सुकृत निंदक मंद मति आत्मन अधोगति जाई वो मंद मति अपने आप का हत्यारा है अपनी बुद्धि को उस आत्मा के उस शाश्वत चैतन्य के ज्ञान में उसके आनंद में उसके सामर्थ्य में नहीं लगा अपनी बुद्धि को लगा दिया मकान में फर्नीचर में फलाने की बह अच्छी है फलाने का बेटा बढ़िया है फलाने की गाड़ी बढ़ी है लेकिन यह तो सब छूट के मरने वाली चीजें है वो बढ़िया बढ़िया क्या तेरे अंदर बढ़िया में बढ़िया बैठा है जिसकी सत्ता से हाड मास का शरीर भी प्यारा लगता है मेरा बेटा बढ़िया है मेरी पत्नी
बढ़िया है ना करे नारायण जब वो हरि का संबंध छूट जाए फिर पत्नी को देख फिर बेटे को देख फिर शरीर अपने शरीर को देख तो यह शरीर तब तक खैर मनाओ खुशी मनाओ के जब तक वह हरि की चेतना से कनेक्टेड है उसका चित हरि सम जग कछु वस्तु नहीं प्रेम पंथ सम पंथ भगवान तप से व्रत से उपवास से बड़े भारी कष्टों से भी इतने सहज में वश नहीं होते जितना प्रीति से उनके भजन से व वश होते हैं अरि सम जग कछु वस्तु नहीं प्रेम पंथ सम पंथ भगवान प्रेम से वश होते
हैं व हरि प्रेम से तृप्त होते सतगुरु सम सज्जन नहीं हजारों जन्म के पिता माता क्या दे दिया हजारों जन्म के दोस्तों ने और मायों को सहेलियों ने क्या दे दिया गुरु हसते खेलते ऐसा ज्ञान देते ऐसी कुंजी दे देते इतना प्रकाश देते इतना कुछ खजाना देते कि यमराज भी उसके आगे नतमस्तक हो जाता जिसे सारे जीव कांपते हैं ऐसा यमराज भी भगवत भक्त के आगे नतमस्तक हो जाता है ब्रह्म ज्ञानी संग धर्म राज करे सेवा नानक सिख धर्म के आदि गुरु ने कहा ब्रह्म ज्ञानी संत के संग से यमराज आपकी सेवा करें खाली नानक
जी ने कहा इसलिए आप मान लो ऐसा मेरा आग्रह नहीं है बिल्कुल सनातन सत्य है यह बात यह भगवान राम के गुरुदेव ने राम जी को कहा भरद्वाज का शिष्य था शुक्र व शुक्र गुरु से मंत्र लेकर जप करते करते हरि के आनंद के रास्ते कुछ आगे बड़ा था आपके शरीर में सात जंक्शन होते हैं सात मुख्य सेंटर है आप जिस सेंटर पर आपका मन बुद्धि होता उस वक्त आप ऐसे ही होते बुरे से बुरे आदमी कभी-कभी अच्छी बात और अच्छे कर्म कर लेते हैं क्योंकि अच्छे सेंटर में आ गए और अच्छे से अच्छे आदमी
कभी-कभी बुरी बात बुरे कर्म कर लेते फिर फसाते क्योंकि बुरे सेंटर में आ तो एक सेंटर है आपका एक केंद्र है नाभि से नीचे उसको मूलाधार बोलते हैं दूसरा नाभि के पास है उसको स्वाधिष्ठान बोलते तीसरा नाभी से थोड़ा ऊपर है मणिपुर चौथा हृदय पे मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपुर विश् अनाहत आज्ञा चक्र सहस्त्र सा तो आपको जब मंत्र मिलता और गुरु विधि बता दे और प्राणायाम करने की तो यह केंद्र रूपांतरित हो जाते हैं रूपांतरित हो जाते तो जो बुद्धि जगत को देखती उस बुद्धि में एक योग्यता आ जाती है जगदीश्वर को मुलाकात करलो इसी बात
को भगवान ने कहा ददा बुद्धि योगम तम भजता प्रीति पूर्वक ददा बुद्धि योगम तम यन माम उप आंति ते जो मुझे भजते हैं उन्हें मैं बुद्धि योग देता हूं तो भजने का मतलब यह नहीं कि माला लेकर घुमाते रहो राम नाम जपना पराया माल अपना इसका नाम भजन नहीं है किम लक्षणं भजन भजन किसको बोलते ताल ठोके राग रग के उसको भजन बोलते हैं नमाज पढ़ने को भजन बोलते हैं मंदिर में जाने को भजन बोलते भजन किसको बोलते ओम नमः शिवाय वाली चदर ओड़ने वाले को भजन बोलते हैं आखिर भजन का क्या मतलब बोले रसन
लक्षण भजन जिससे हरि का रस आने लग जाए हरि का आनंद आने लग जाए हदय में उसका नाम है भजन आप गरीब गुरब माता पिता और संत की सेवा करते तो हृदय में आनंद आता है कि अहंकार आता है आनंद आता है आप प्रीति पूर्वक भगवान का भजन करते कीर्तन करते तो हृदय में क्या होता है कि पैसे मिल जाएंगे ऐसी वासना होती है कि आनंद होता है आनंद आता है शबरी भीलन गुरु के द्वार झाड़ू बुहारी करती उसे क्या आता है आनंद आता है तो जिससे हृदयेश्वर का हरि का आनंद आने लगे जो समुद्र
किनारे उनको पता है कि समुद्र दिखने के पहले सामुद्रिक हवाओं का पता चल जाता है सूरत आश्रम अपना समुद्र के नजदीक है तो सूरत प्रवेश करते 40 किलोमीटर पहले से किम चार रस्ता से पता चल जाएगा क्या बाग है सूरत की रेंज में ऐसे ही भगवान मिलने के पहले भगवती आनंद आने लगता है भगवती शांति मिलने लगती भगवती सामर्थ्य आने लगता है और उस उसी में टिक जाए तो अष्ट प्रकार की सिद्धियां प्रकट हो जाती नौ प्रकार की निधिया आ जाती अगर उन्हीं में रुक गया तो फिर भगवान तक नहीं पहुंचेगा उनको भी छोड़ता जाए
तो भगवान तक पहुंच जाए तो इस भगवान को पाने के तीन रास्ते कर्म योग कर्म तो करे लेकिन कर्म में अपने सुख के लिए कर्म ना करे दूसरे की भलाई के लिए कर्म कर सच्चाई से तो कर्म बुद्धि योग करा देंगे भगवान से अंतरात्मा का बल देने भक्ति योग भक्ति तो करे लेकिन कोई दक्षिणा धरे इसलिए भक्ति नहीं पाप मिटा के ने के लिए भक्ति नहीं भगवान को पाने के लिए भक्ति ऐसा नहीं कि बेटा पास हो जाए नौकरी मिल जाए मंदिर में गए भक्ति करो अपना जरा ठीक गाढ़ा चले वो तो साधारण भक्ति ईश्वर
प्राप्ति के लिए भक्ति तो योग बन जाएगी और ईश्वर क्या है हम क्या है और महापुरुषों के संपर्क में आकर ईश्वर तत्व का ज्ञान पा शरीर को और संसार को स्वपना समझ के भगवान को अपना समझ के उसके ध्यान में गर्क हो जाए भगवत साक्षात्कार हो जाए चाहे कर्म करते करते भगवान को पाओ चाहे भक्ति करते पाओ चाहे योग ज्ञान का अध्ययन करते पाओ चाहे दोनों साधनों से पाओ चाहे तीनों से पाओ जब सत्संग मिले तो का आश्रय नहीं तो सेवा के द्वारा जप के द्वारा ध्यान के द्वारा आपकी सच्ची मूरी है भगवत योग आपका
सच्चा धन है भगवत प्रसाद बाकी यह धन तो कितना भी रखो कोई थोड़ा संभाल के मरता है कोई ज्यादा संभाल के मरेगा और क्या करेगा क्या फर्क पड़ता है किसी के 10 कमरे हैं 10 में रहता है लेकिन 10 कमरे वाला बिल्डिंग में रहता है तो क्या है सोएगा तो वही डेढ़ साढे में वो भी आधा पूरा पलंग यूज नहीं कर सकता उधर का हिस्सा यूज करेगा तो उधर का खाली करने बाकी ये लगेगा मैं हमारी कोठी बड़ी है द कमरे बोले हमारे चार है हमारे दो है दो वाला भी आखिर शमशान में खाक बन
जाएगा और 10 वाले की भी वही खाक वैरायटी वही की वही पड़ा रहेगा माल खजाना छोड़ त्रिया सुत जाना है कर सत्संग सत आत्मा हरि कर सत्संग अभी से प्यारे नहीं तो फिर पछताना है खिला पिला के देह बड़ाई वह भी अग्नि में जलाना है कर सत्संग अभी से प्यारे नहीं तो फिर पछताना है जो भी इकट्ठा करेंगे आज तक आपने जो इकट्ठा किया है 50 साल की उम्र में 40 साल की उम्र में न्यायाधीश तुम 50 साल के हो जज 50 साल की उम्र में तो 50 साल की उम्र में जो आपने इकट्ठा किया
है समय देक आपने पाया है गहने गांठे यह वो 50 साल 40 साल की उम्र में जो तुमने पाया है सर्टिफिकेट गहने गांठे वह सब के सब वापस दे दो तो क्या 40 साल आपकी उम्र बढ़ जाएगी 40 घंटे भी आप 50 साल देकर जो चीजें पाई है वोह सब वापस करने पर भी 50 मिनट भी ज्यादा समय आप नहीं जी सकते हजूर टाइम देकर आप सब पा सकते लेकिन सब लौटकर खोया हुआ टाइम नहीं पा सकते हैं आपका वक्त सबसे ज्यादा कीमती हुआ वक्त देकर सर्टिफिकेट पाए वक्त देकर गहने गांठे पाए वक्त देकर वाहवाही
यश पाया वक्त देकर आपने जो कुछ पाया वह सब लौटा दो तो बीता हुआ वक्त का दसवा हिसा क्या स मा हजार मा हिसा भी आपके पास वापस नहीं आता तो सबसे ज्यादा कीमती हुआ वक्त ठीक है समय तो आप सुबह उठो आज का दिन एक एक मिनट भी मैं व्यर्थ नहीं [संगीत] कहूंगा वक्त सबसे ज्यादा कीमती है तो जो सबसे ज्यादा कीमती में कीमती अपने हरि को पाने में लगाऊंगा आप इरादा पक्का कर लो वक्त कीमती हुआ ये बात तो आप मान गए धाक धमकी से प्रलोभन से नहीं बुद्धि पूर्वक मानो ऐसा नहीं कि
बापू जी बोल रहे हां बोल दो नहीं वक्त सबसे ज्यादा कीमती हुआ कि नहीं हुआ यह बात समझ में नहीं आई हो तो हाथ ऊपर करो सब समझ गए तो सबसे ज्यादा कीमती है वक्त तो सबसे ज्यादा कीमती चीज आप निकम्मी चीजों में क्यों खर्च हो हजूर गपशप में क्यों खर्च हो सैर सपाटे में क्यों खर्चो पान मसाले में क्यों खर्चो कीमती से कीमती है वक्त तो कीमती से कीमती है उस वक्त से भी कीमती है तुम्हारा आत्मा परमात्मा उसमें लगाने का पक्का इरादा करो सुबह नींद में से उठो अपने ललाट पर उंगली लगा दो
जैसे हमने तिलक कर गुरु मंत्र का जप करके दोनों हाथ मिलाकर मथा टेक के पड़े रहो एकदम शांत सुरेश दिखा दो कैसे मथा टेकना है देखो कैसा जीवन में बरकत आ जाती है ये घुटनों के बल बैठ गए और पीछे आराम से मथा टेको शरीर में तनाव ना आए खिंचाव ना आए ढीला छोड़ दो स और यह कीमती वक्त तुझे अर्पण है अब तू जो बुद्धि दे तेरी मर्जी जो प्रीति दे तेरी मर्जी बालक को अपने उद्धार का अपने कल्याण का इतना पता नहीं होता जितना उसकी मां को पता होता है शिशु अपनी भलाई उतनी
नहीं जानता जितनी उसकी मां जानती और शिशु अपनी भलाई उतनी नहीं कर सकता जित उसकी मां कर सकती लेकिन हो सकता है कि मां अज्ञानता में गड़बड़ भी कर दे लेकिन परमात्मा तो अज्ञान नहीं बस आप सुबह-सुबह उठकर भगवान की शरण चले जाओ और ऐसा भी नहीं कि कृष्ण की शरण जाओ अल्लाह को मानते तो अल्लाह मान के पड़े रहो राम जी मानते तो राम के गुरु मानते तो गुरु के वह है तो एक का एक दो चार मिनट सुबह सुबह पड़े रह जाओ आपका दिन कैसा बढ़िया जाएगा वह बाद में आप देख लेना चलो
इसका भगवान का वचन है इस बात प तमेव शरणम गच्छ त्वमेव शरणम गच्छ सर्व भावे न भारता सर्व भावे न भारत त प्रसादा पराम शांति प्रसादा परम शांति स्थानम प्राप्य स शाश्वतम स्थानम प्राप्य स शाश्वतम हे अर्जुन तू सब प्रकार से मेरी शरण आा उससे शरण आने से क्या मिलेगा तत् प्रसादा परम शांति परम शांति आप जो भी धर्म कर्म करते ना तो तीन बार बोलते ओम शांति शांति शांति आदि देवी शांति आदि भौतिक शांति और आध्यात्मिक शांति तीन शांति तो बेचारी आती और चली जाती लड़का कहना नहीं मानता है सगाई नहीं हो रही है
नौकरी का बदली नहीं हो रही है प्रमोशन नहीं हो रहा है अशांति है प्रमोशन हो गया ह शांति लेकिन फिर कुछ ना कुछ रिटायरमेंट में प्रॉब्लम आएगा कुछ ना कुछ हो रहा है बरसात नहीं हो रही है बड़ी अशांति बरसात हो गई ह शांति गर्मी खूब है चलो ठंडी हवा आ गई शांति फिर अशांति हो जाती भूख लगी बड़ी अशांति खाया पेट पर हाथ घुमाया बड़ी शांति है लेकिन चार घंटे के बाद फिर बाबा था आनत खाऊ यह शांति बेचारी रोज आती जाती रहती भगवान बोलते एक बार उस हरि पद को पालो त्वमेव शरणम गच्छ
त्वमेव शरणम गच्छ सर्व भावे न भारत सर्व भावे भत तत् प्रसादा पराम शांति तत् प्रसादा पराम शांति स्थानम प्राप्त स शाश्वतम स्थानम प्राप्त शाश्वतम अभी आपको जो भी स्थान मिला है ना वो शाश्वत नहीं है चाहे दुकान पर आप सदा नहीं रह सकते प्रधानमंत्री पद में भी सदा नहीं रह सकते रह सकता है क्या कोई पूछ लो गुजराल को क्या हाल है नरसिंहराव से पूछ थोड़े दिन के बाद अटल जी से का भी वही हाल होने वाला चाहे फिर से भी आ जाए तो कब तक सीधी बात है तो यह स्थान शाश्वत नहीं है और
इन स्थान पर आने पर भी परम शांति नहीं है इस देश में जाओ उस देश में जाओ उसको रिझाओ उसको रिझाओ उसको रिझाओ परम शांति है क्या प्रधानमंत्री बनने से हैं बड़ा सेठ बनने में परम शांति है क्या लेकिन वह परम शांति मिलेगी भगवान की शरण आ गए ठीक से भगवान की शरण कहां है भगवान के मंदिर में पैर पकड़ना भगवान की शरण है कि बाबा जी हो जाना भगवान की शरण है भगवान की शरण क्या है सत्संग से पता चलेगा उस शरण में पहुंच जाओ बस दिले तस्वीरें हैं या जब की गर्दन झुका ली
और मुलाकात कर ली ऐसी है भगवान की शरण सच पूछो तो भगवान की शरण को आप छोड़ नहीं सकते हो और संसार की शरण में आप टिक नहीं सकते हो संसार की शरण में जाओ तो संसार कम वक्त आपके हाथ में रहेगा नहीं भगवान की शरण जाओ तो भगवान आपके द्वारा छूटेगा नहीं जो कभी ना छूटे उसको भगवान बोलते और जो कभी ना रहे उसको संसार बोलते बचपन आपके पास रहा क्या छूट गया ना बचपन के खिलौने छूट गए बचपन के नन्हे मुन्ने मित्र बबलू ठुलू लू म कहां गए फिर जवानी के बारात के दिन
आप दुल्हा भी बने [संगीत] थे बैंड बाजी थी वो माहौल भी छूट गया कि रहा मैया तुम भी याद करो जब बच्चियां थी और मंगनी हो गई थी और हाथ रंगे थे और दहा की सेनाया सुनी थी वो दिन रहे क्या सब बीत गया लेकिन उन दिनों को जानने वाला गया क्या उन दिनों को जो जान रहा है वह हरि तो गया नहीं आपके पास से बचपन तो चला गया मंगनी के दिन भी चले गए लेकिन मंगनी के दिनों को जो जानता था वह अभी है कि नहीं है शादी के दिनों को जो जानता था
वह है कि नहीं है बीमारी भी आई तो चली गई तंदुरुस्ती आई तो चली गई लेकिन उसको जानने वाला गया क्या हजूर गया क्या बस जो कभी तुम्हारे से साथ नहीं छोड़ता उसमें प्रीति करके उसको पाल और जो बदलता रहता है उस उपयोग कर लो उपयोग कर लो बस इसको पकड़ो मत ममता मत रखो लोग रोते कि क्या करें पहले तो 4 लाख की गाड़ी में घूमते थे अब तो पुरानी मार तो मैं घूम रहा हूं मेरा भाग्य फूटा तेरी अकल फूटी है भैया भाग्य क्या फूटा है क्यों अपना खाना खराब कर रहे हैं जो
साइकिल पर चल रहे उससे तो तू भी ठीक है सेकंड में सेकंड मारी मारुती में घूम रहा है ठीक है लोगों को साइकिल भी नहीं ऐसे लोग भी तो हैं लेकिन जिनको साइकिल नहीं ऐसे गरीब और जिनके पास 15-15 कारें हैं 1010 करोड़ 20-20 करोड़ हजार हजार करोड़ जिनके परदेश में पड़े हैं चार चार हजार करोड़ परदेश में पड़े जय राम जी की ऐसे लोग भी हैं फिर भी मांगते फिरते वोट लाइए वोट वोट वट चार चार हजार करोड़ प्रदेश में पड़े हैं फिर भी मांगते फिरते वोट दे दीजिए हमें वोट के पीछे फिर नोट
जब दो पैसे भी चलेंगे नहीं तो आपके हजार करोड़ आपके साथ चलेंगे क्या साई ते इतना मांगियो साई ते इतना मांगियो नव कोटि सुख समाए नव कोटि सुख समाए मैं भी भूखा ना रहूं मैं भी भूखा ना रहूं साधु भूखा ना जाए साधू बुखा ना जा बहुत पसारा मत करो बहुत पसारा मत करो कर थोड़े की आस कर थोड़े की आस बहुत पसारा जिन किया बहुत पसारा जिन किया वे भी गए निराश वे भी गए निराश पानी केरा बुलबुला पानी केरा बुलबुला यह मानव की जात यह मानव की जात देखते ही छुप जात है देखत
ही छुप जात है जो तारा फिर भात फिर क्या करिए क्या जोड़िए क्या करिए क्या जोड़िए थोड़े जीवन काज थोड़े जीवन काज छोड़ी छोड़ी सब जात है छोड़ी छोड़ी सब जात है देह गेह धनराज देह गेह धनराज हड बड़ा हरि भजन कर हरि भजन कर द्रव्य बड़ा कछु दे द्रव्य बड़ा कछु दे अकल बड़ी उपकार कर अकल बड़ी उपकार कर जीवन का फले जीवन का फल ऐसा नहीं चार बेटे बेटिया पैदा कर लिए मंगनी करा हा अरे कुछ भी हग नहीं मारे क्या किया जीवन का फल पैसा कमाना ही नहीं है जीवन का फल कंगाल
रह जाना ही नहीं है जीवन का फल 10 पाच बच्चे या दो चार बच्चे एक दो बच्चे कर देना ही जीवन का फल नहीं है जीवन का फल है कि जीवन की शाम होने के पहले मौत आने के पहले मौत की ज दाल नहीं गलती उस अपने आत्मा हरि का आनंद ले ले हरि का सामर्थ्य जान ले हरि से अपना हाथ मिला ले आप जड़ हो कि चेतन हो जड़ को पता होता है मैं जड़ हूं ये डेस्क जड़ है इसको पता है मैं डेस्क हूं आप जड़ हो कि चेतन हो चेतन पक्की बात है
आप हो चेतन मान गए ना आप हो चेतन भगवान जड़ है कि चेतन है चेतन तो आपकी जात और भगवान की जात से मेल होता है कि नहीं होता है होता है आपकी जात और भगवान की जात से मेल होता है यह मकान जड़ है कि चेतन जड़ है चीज वस्तुएं जड़ है कि चेतन है हाथ अगर तुम नहीं हो तो हाथ जड़ है कि चेतन है जड़ है हाथ को पता है मैं हाथ हूं खोपड़े को पता है क्या मैं खोपड़ा हूं नहीं है तो ये शरीर और संसार एक ही जाति के हुए शरीर
भी जड़ है और संसार भी जड़ है और ये जीवात्मा भी चेतन है और परमात्मा भी चेतन है तो यह जड़ संसार और जड़ शरीर ये एक जाति के हैं तो जड़ शरीर का उपयोग कर लो जड़ संसार में दूसरे के परोपकार में और चेतन जीव का उपयोग कर लो परमात्मा को पाने में आपके दोनों हाथ में लड्डू बस खाली सेटिंग कर लो बस जो जड़ है वह जड़ जड़ की दोस्ती कर चेतन चेतन की दोस्ती कर तो आप जीवात्मा चेतन हो परमात्मा चेतन है जीवात्मा ज्ञान स्वरूप है परमात्मा भी ज्ञान स्वरूप है सिर में
खुजली हुई गाल पर मक्खी बैठी और पैर में कांटा चुबा एक ही समय तीन घटना हुई तो आप एक ही समय जान जाते हैं ना तो आप पूरे शरीर में व्याप्त है जैसे आप इस पूरे शरीर में व्याप्त है ऐसे परमात्मा पूरे दुनिया में व्याप्त है अरे यह बाबा यह खाली सुनने मात्र से हजारों कपिला गौ दान करने का फल होता है हजारों तीर्थ नहाने का फल हो जाता है मेरी गलती हो गई हजारों नहीं स्तम तेन सर्व तीर्थम सारे तीर्थ जो धरती पर उसने स्नान कर लिए यह जो ब्रह्म ज्ञान परमात्मा तत्व का ज्ञान
सुनने से स्नातन तेन सर्व तीर्थम दात तेन सर्व दानम उसने सब कुछ दान कर दिया कृतम तेन सर्व यज्ञम उसके द्वारा सारे यज्ञ हो गए बाजपे यज्ञ हो गया अश्वमेघ यज्ञ हो गया उसके द्वारा क्योंकि अपना आहम अपना मैं ही भगवान को दे रहा है तो बाकी क्या बचा उसको विचार जय राम जी बोलना पड़ेगा स्नातन तेन सर्व तीर्थम दात तेन सर्व दानम कृतम तेन सर्व यज्ञम येन क्षणम एक क्षण मन ब्रह्म विचारे स्थिरम कृत्वा अभी आप ब्रह्म विचार की तरफ चल रहे जिसने एक क्षण के लिए भी ब्रह्म परमात्मा के विचार में अपने मन
को लगाया उसको इतना फल हो जाता है तो भगवान कहते हैं आप फिर से गीता का हरि सम जग कछु वस्तु नहीं प्रेम पंथ सम पंथ सतगुरु सम सज्जन नहीं गीता सम नहीं ग्रंथ आपको पता है कि विश्व के तमाम धर्म ग्रंथ है उससे सभी से गीता की जितनी जयंतिया मनाई जाती और गीता पर जितने धर्म गुरुओं ने और महापुरुषों ने व्याख्या लिखी है उतनी दुनिया के किसी ग्रंथ पर नहीं हुई गीता ऐसा है है बिल्कुल छोटा ग्रंथ साथ लोक महाभारत में एक लाख श्लोक पुराण में 8 हज पदम पुराण में भागवत में 18000 श्लोक
लेकिन गीता में खाली 700 श्लोक है लेकिन सबका सारे गागर में सागर है उपनिषदों का अमृत है वो गीता का श्लोक भगवान कृष्ण के मुंह से निकला है मैं चाहता हूं तुम्हारे मुंह से फिर से उच्चारण हो तमेव शरणम गच्छ त्वमेव शरणम ग सर्व भावे न भारता सर्व भावे भारत त प्रसादा पराम शांति तत् प्रसादाम शांति स्थानम प्राप्य स शाश्वतम स्थानम प्राप्य शाश्वतम भगवान कहते हैं कि आप सब प्रकार से उस अंतर्यामी परमेश्वर की शरण आ जाओ आपको परम शांति मिलेगी और फिर क्या मिलेगा स्थानम प्राप्य स शाश्वतम ऐसा पद मिलेगा कि फिर पतन ना
हो आप न्याय नश की पोस्ट पर हो लेकिन वहां से भी आपको रिटायर करना पड़ेगा क्या ख्याल है न्यायाधीश चाहे चीफ जस्टिस बन जाए कई चीफ जस्टिस मेरे श्रोता है सत्संगी है लेकिन वहां से रिटायर हो गए बी के दीवान गुजरात के चीफ जस्टिस बड़े दबंग थे अब रिटायर हो गए हमारे प्रति उनकी बड़ी आस्था हम भी उनको स्नेह करते ऐसे दूसरे भी कई चीफ जस्टिस कई मिनिस्टर कई प्रधान मंत्री को जीवन में देखा आपने उनका पद शाश्वत नहीं है लेकिन भगवान बोलते हैं उस आत्मा को जानने से आप शाश्वत पद को पा लोगे आप
इरादा पक्का कर लोगे जो फूली ने पाया तो व हम पा लेंगे जो लीला साप ने पाया तो हम पा लेंगे आसाराम जी को जो मिला हम पा लेंगे समझ ले इतना ही तो करना और क्या है विल विल फाइंड ए वे जहां चा वहां राह एक बार आप उस ऊंचाई को समझ लो और उसको पाने का इरादा कर लो ठीक बात है तो उस पाने की शुरुआत क्या करोगे रोज सुबह नींद में से उठो ऐसा करके प फिर शांत होकर बैठ स्वास सुंदर जाता है शाति बाहर आता है तो एक शवास अंदर जाता है
तो राम बाहर आता है तो दो थोड़ी देर शवास गिनो फिर तीसरी बात क्या आज चाहे कुछ भी हो जाए कितना भी दुख आ जाए सुख आ जाए लेकिन रहने वाला नहीं इस बात को मैं पक्का करू रहने वाला तू है मेरा आत्मा बस तेरे से प्रीति हो संसार का व्यवहार हो क्यों मेरी जात तेरी जात एक ही है ना मैं चेतन आत्मा हूं तू परमात्मा है है ना है ना प्रभु एक हाथ ईश्वर का एक अपना भगवान का हाथ पकड़ो उसे हां बुलवा जब तक ना बोले ना हां नहीं बोले तब तक पट्ठे को
छोड़ो मत एक दिन दो दिन तीन दिन पाच दिन 25 दिन अंतरात्मा से हां आ जाएगी बस आपका नाता पक्का दोस्ती शुरू हो गई मंगनी हो गई फिर शादी तो हम करा [प्रशंसा] लेंगे ऐसा सरल रास्ता बताता हूं अगर यह हम तुम जैसे घरों में हो और हम ऐसे घरों में ऐसा सत्संग मिलता तो अभी हम अभी है उससे भी कहीं आगे होते कहीं आपको जो मिल रहा है हजूर यह पाने के लिए हमने तो क्याक भांडे मांजे गुरु के द्वार पर हाथ में से खून बह जाता था और पट्टी लगा देते थे क्योंकि सेवा
छिन न जाए हमको पाने में जो राति जगे थे और रोए थे आपको हसते खेलते तालियां बजाते बजाते प्रसाद मिल रहा है देखना फिर मुफत का माल ऐसा नहीं कि पचे नहीं आप जरा पचाने की भी कृपा करो जि दिनों में जिन रातियो में लोग पलंग पर सोते थे पशु पक्षी अपने घोंस में सोते थे यहां तक कि आकाश के परिंदे भी चैन की नींद लेते थे उन रातियो में हम जगते थे कि ईश्वर सर्वत तो हमारे दिल में तो कैसे मिलेगा दिन दिन आयुष नाश हो रही है आखिर तू कैसे मिले कैसे कभी तो
खूब आनंद आता कभी तो खूब रोते कभी नाचते कभी क्या करते कभी क्या करते उस समय देखने वाले को दया जाती बिचारे का क्या हो गया कई लोग अक्कल देने को आते कि भाई सुधर जा तेरे को क्या हो गया मैं मैं ठीक हूं भाई सुनो मेरे भाइयों सुनो मेरे मितवा कबीरो बिगड़ गयो रे दही संग दूध बिगड़ो मक्खन रूप भयो रे कबीरो बिगड़ गयो रे सुनो मेरे भाइयों सुनो मेरे मितवा कबीरो बिगड़ गयो दही संग दूध बिगड़ो मक्खन रूप भयो पारस संग भाई लोहा बिगड़ो कंचन रूप भयो संतन संग दास कबीरो बिगड़ो संत कबीर
भयो रे कबीरो बिगड़ गयो रे कबीरा खड़ा बाजार में लिए लकनी हाथ जो अहम फूके अपना चले हमारे साथ कबीरा खड़ा बाजार में कबीरा खड़ा बाजार में लिए लकनी हाथ लिए लकनी हाथ जो अहम फूके अपना जो अहम फूके आपना चले हमारे साथ चले हमारे साथ हरि हरि ओ [संगीत] जब तक इस आत्मा परमात्मा का ज्ञान नहीं तब तक भगवान तुम्हारे गले भी लग जाए फिर भी साक्षात्कार नहीं होगा हां ऊंची गति हो जाएगी वैकुंठ मिल जाएगा थोड़े दिन स्वर्ग मिल जाएगा ऐसे तो पूतना भी भगवान के गले लगी थ आपको पता है पूतना कैसी
थी भगवान कृष्ण कैसे गजब के भगवान य राम मथुरा की गलियों से गुजरती हुई कंस की राज दरबार में साथल ठोकते हुई पूतना कहते य कोई माय का लाल अरे चाणक मुटि तो मच्छर है उनका राजा कंस है तेरे में दम तो आजा मुझ पूत ना के साथ कुश्ती करके देख अ पूतना क्या है कि अभी तो पहलवान का रूप लेकर आए थे लेकिन वह छह कोस की बन सकती थी 19 पट 6 किलोमीटर छ कोस मतलब साडे किलोमीटर से भी थोड़ा ज्यादा इतनी बड़ी बन जाती चाहे तब अच्छे घराने की महिला बन जाओ कंस
ने देखा कि पुत से कुश्ती करूंगा तो 10 द बार गंगा नहाने पर भी मैं पवित्र नहीं हो सकता इतनी है मैली गंदी राक्षसी अगर हां बोलता हूं तो मेरा तो मेरे को तो मच्छर की ना नींबू नहीं चो देगी अगर किसी की हिसाब से मैं जीत भी जाता हूं तो लोग बोलेंगे कि औरत औरत से कुश्ती करता है औरत से कुश्ती करता है यह पछाड़ देगी तो मेरी तो तौबा हो जाएगी मैं पछाड़ खा जाता हूं तभी भी तौबा है राजा आदमी की तो बुद्धि जरा टैक्ट वाली होती है नेता की राजा की अरे
बोले पूतना तुम मेरे को ललकार ती हो कुश्ती करने को मेरा बड़ा भाग्य है लेकिन तुम्हारी जैसी पूतना से मैं कुश्ती करूं इतना मैं बेवकूफ नहीं हूं मैं तो तुमको अपनी धर्म की बहन बनाऊंगा बहन राजाधिराज महाराज की बहन पुत ना है कोई साधारण नहीं है और मेरे को मारने वाला धरती पर आने वाला है देवकी का आठमा तो उसी को जरा अपना स्तन पान करा के पहुंचा देना ने भैया की रक्षा करने का मौका बहन को दूंगा बहन के साथ कुश्ती थोड़ी किया जाता है बहन तो भैया की रक्षा चाहती है तुम तो ऐसी
बहन हो मेरी ऐसी कौन सी बहन है जो भाई का पतन चाहे बहन तो भाई के ललाट पर तिलक करती रक्षा बंधन के दिन तो मेरा भाई त्रिलोचन बने खाली बाहर की आंखों से ना देखे ज्ञान की नजर से भी देख तो बहन तो आज मेरे से आज से मेरी बहन पूतना आ गई कंस के बातों में कृष्ण का प्रगट हुआ पूतना रूप बनाकर ब्रज में गई कृष्ण ने देखा कि कईयों को कई बच्चे जो नए-नए हैं कहीं उनको स्तन पान करा के भेज ना दे इसलिए योग माया को आदेश दिया कि उसकी बुद्धि घुमा
के निगड़ी को मेरे तक ले आओ योग माया ने पूतना की बुद्धि फिरी और सीधा यशोदा के घर पहुंची अरे क्यों री यशोधा मैया 80 साल की उम्र में बालक हुआ है हां बच्चे को कैसे पाला जाता है तुमको पता नहीं हां तुम तो मथनी मथ हो और वो मुन्ना सोया उधर उनको लाड प्यार करते गीत सुनाते हुए फिर स्तन पान कराना चाहिए माई तु उनको तो पता ही नहीं यशोदा ने देखा कि कोई बड़ी जानकार मालूम होती है अच्छा तो बहन तूही जरा देख ले शास्त्र कहते हैं कि अब भक्त भी भगवान तक तब
पहुंचता है जब भक्त सम्मति दे दे के तू देख ले जा यशोदा को सम्मति यशोदा नेति दी पूतना गई कृष्ण के तरफ तो कृष्ण ने आंखें म के मुंह घुमा लिया तो क्या डर गए थे नहीं नहीं मुह घुमा के कृष्ण का आवाहन शिव जी का आवाहन कर रहे थे कि भोले बाबा हम तो आए थे मक्खन मिश्री और गोपियों का लाड प्यार लेने को यह तो जहर भर के आई और जहर पीने की आदत आपको नीलकंठ हो पुराने पहले ही आओ मेरे कंठ में आप ही बिराजो य माल आपका आया है आपके हिस्से का
माल आया महाराज पधारो भोग लगे कृष्ण कन्हैया लाल भगवान नीलक का आवान करके फिर वो तो स्तन पान करने लगे चकर चकर चकर चकर देखते देखते तो जो विष बरा तो नीलकंठ के हवाले हो गया पुत्र बोलती छोड़ो मा मुच मुच मुच मानो कृष्ण हसते हुए कह रहे कि हम जल्दी पकड़ते नहीं पकड़ते तो सद्गति केना छोड़ते नहीं बालक मा मुच मुच मुच कृष्ण एक नहीं सुनते वो बार-बार चिंतन करना पड़ता मैं बड़ घरानी लगू मैं बड़ घरानी और पीड़ा हुई तो चिंतन छूट गया तो असली भयंकर रूप में पूतना देखते देखते भयंकर रूप में
विशाल हो गई मुंचा मुंचा मुंचा मु बड़ी विशाल पूतना हो गई हां महाराज साडे किलोमीटर की लंबी चौड़ी पूतना श्री कृष्ण उसकी छाती पर ऐसा उड़ी आकाश में ऐसे उड़ी मुंचा मुंचा मुंचा मुंचा मुचो मुच जैसे कीड़ी हाथी को भारी पड़ जाती से नन्हे कन्हैया इस 19 किलोमीटर की पूतना को बड़ी प मुंचा मुंचा मुं मुंचा मुंचा करते हाथ छटा दे छते जहां हाथ गिरा वो हाथ रस जहां हाथ गिरा पतना का वो हाथ रस और जहा अलंकार गिरे व अलीघर और जहां उसका मुन गरल गिरा वो तुम्हारा आगरा अ जा कृष्ण आए वो मथुरा
देखो कैसे हैं कृष्णा जिसको कंस छू नहीं सकता कृष्ण उसको भी गले लग जाते उसके साथ भी मिलने में कृष्ण को संकोच नहीं क्योंकि कृष्ण जानते हैं कि अच्छे बुरे सब मुझी से पैदा हुए जैसे रात्रि को स्वपने में आप बड़े महल भी देखते और गटर की नालिया भी देखते आप जीवात्मा सेही तो पैदा हुई गटर की प्रणाली के कीड़े भी आपने पैदा किए और अच्छे-अच्छे मंदिर भी आपने पैदा किए तो जीवात्मा स्वपने में पैदा करता और पर जागृत में करता है व तो भगवान की जात के हो प्रधानमंत्री आए बोला मेरे को ऐसा ऐसा
है मेरे निवास में क्या अभी सत्संग में चलो उस समय भूतपूर्व प्रधानमंत्री थे 13 दिन के राजनीति सत्संग सुना पौने दो घंटे फिर आए फलहार करने जैसे आप लोग आओ मैं कहा भाई सुनाएंगे दो वचन को माइक दो तो बो बोले भाइयों और बहनों मैं यहां भाषण करने नहीं आया हू मैंने पानीपत में बापू जी का सत्संग सुना था अभी भी मेरे दिल पर वो वचन लिखे मैं उज्जैन के शिवरात्रि पर्व पर जाने वाला था लेकिन कहते ना दाने दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम सत्संग में जाने के लिए भी कोई पुण्य
चाहिए कोई महूरत चाहिए इस जन्म का कोई पुण्य है कि ये मुझे पता नहीं लेकिन अगले जन्म का पुण्य है कि मैं यहां आप आया हूं वैसे हम भाषण राजनीतिक बकबक तो कर खूब करते हैं इतने सरल व्यक्ति राजनीतिक भाषण तोम बहुत करते मैं यहां बकबक करने नहीं आया बड़ी शांति मिली बड़ा बल मिला निराशा सी आ गए बापू जी ने चुनाव जीतने की युक्ति भी बता दी श्रोता बनक आए थे ऊपर बुला लिया नीचे से ऊपर बुला लिया अब ऊपर बिठाए रखने का भी बापू जी को चिंता करनी पड़े ऐसा बोलते ऐसा बोलते बोलते
फ ऐसे बातचीत तो होती रहती फन मन थे कुछ दिन पहले बातचीत हुई मैं क्या याद है वो अपन सत्संग में फिर कीर्तन में नचे अपन नाचे थे बाप रे बाप कितना कल मंदी है कितना बुद्धिमता है हां कितना अमानी और दूसरे को मान देने की रीत जानते हैं बोले हां बापू जी आपने मेरे को नचाया था दूसरे प्रधानमंत्री की ताकत नहीं है कि प्रधानमंत्री पद मिलने के बाद बोले हां बापू जी आपने मेरे को नचाया था मैंने बोला अपन नाचे थे वो बोले नहीं बाप जी आप बापू आपने मेरे को नचाया था अगर कोई
हरा गहरा बाप जी हो बापू हो तो सोचे कि हां हम प्रधानमंत्री को नचाए थे तो बबलू हो जाए अरे भाई वो तो उनकी सज्जनता है बोल दिया तो क्या है जय राम जी की कोई आपको मान दे आप बड़े मत बन जाना नहीं तो बहुत मूल्य चुकाना पड़ता है बड़े आदमी को खुशा आमत का बड़ा भारी मूल्य चुकाना पड़ता है और कोई आपको निंद दे तो अंदर से सुकड़ मत जाना ंदने वाला अगर सचमुच में आपकी गलती है तो गलती सुधार लो नहीं गलती है तो निंदा कर लेता तो चलो व तो आपको दुखी
करना चाहता दुखी होना ना होना अपने हाथ की बात जय राम जी की कोई वाह वाई करे आप फूलना ना फूलना अपने हाथ की बात है उन्होंने तो अपनी शालीनता दिखाई कि बापू जी आपने मेरे को नचाया था मुझे याद है लेकिन मैं क्यों बोलूंगा नचा आप श्रद्धा भक्ति से इधर बैठे और मैं कहूंगा मेरे करोड़ों चले आप दुनिया की चीजों को अपने माथे पर लेकर अहंकार मत करो दुनिया के दुखों को अपने सिर पर लेकर दब मत मारो यह तो संसार है आता जाएगा जाता जाएगा आता जाएगा जाता जाएगा लेकिन तुम नहीं जाओगे कभी
भी शरीर चला जाएगा तुम नहीं जाओगे अपने आत्म देव से उस आत्म देव में प्रीति कर लो बस तो सुबह हाथ मिलाकर पूछो कि हम तेरे हैं ना साथ फेरे फिरते ना पति-पत्नी वो भी एक दूसरे को छोड़कर मर जाते लेकिन हम तो मरने के बाद भी तुझे नहीं छोड़ते तूने छोड़ता तू हमें नहीं छोड़ता वो सरदार सरदारनी चार फेरे फिरते खाली फिर भी लड़ते रहते शादी मानते लेकिन लड़ते रहते एक दूसरे को छोड़ देक मरते लवर लवरिया भी तलाक देते लेकिन हम बिन फेरे प्रभु तेरे तेरे है ना है ना है ना बोलना है
ना है ना घर वालों को बोल देना सुबह थोड़ी देर हम पागल हो जाए तो फिकर नट फिकर नहीं करना बो बोल हम बिन फेरे तेरे हैं कि नहीं आत्मा परमात्मा का होता है ना बोलना बोलना जैसे बच्चा मां से अट खेलिया करके हां करवा लेता है आज नहीं तो कल दो दिन पाच दिन 10 दिन में आपके अत आत्मा से हां आ जाएगी जब आप भगवान के होकर जियोगे ना महाराज दुनिया का बनकर देख लिया भगवान का बनकर देख जरा इस मार्ग में कितनी खुशियां है इस मार्ग पर चल के देख जरा चलो थोड़ी
देर अभी करते बिन फेरे हम तेरे हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम तुम्हारी तपस्या होरे हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम तुम्हारी रग रग पावन हो रही है हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम रामो मा श्यामो मा शिवओ मा शिवओ राम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम प्रभु
ओम श्री ओम शिवओ शिव शि ओम शि ओम शि हरि ओम हरि ओम मा हरि ओम हरि ओम जय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो ये हरि नाम की गाड़ी मोक्ष के रास्ते जा रही है आनंद दाता के तरफ चल रही है संसार की गाड़ी धूल उड़ाती है धुआ और ये आनंद बरसाती है माधुरी छलकती [प्रशंसा] [संगीत] है ओम हरि ओम मा हरि ओम मा हरि ओम [संगीत] मा शिवा शिवा ओ मा शिवओ मा शिवओ माओ शिवाय हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि
ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम तुम उसे प्यार करना प्रीति पूर्वक भजना जय हो हे बांके बिहारी [संगीत] [प्रशंसा] गिरधार [संगीत] तुम किसके नाम की ताली बजाते हो वो जानता है तुम्हारे कानों में किसका नाम गूंज रहा है मैं जानता हूं और तुम किसको प्यार कर रहे हो तुम जान रहे [संगीत] हो ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम फिकर फें कुए में जो होगा देखा जाएगा राम ओम श्याम ओ शिवा ओ शिवा ओ राम ओम श्या नम शिवा नम शिवा हरि ओम हरि ओम हरि
ओम हरि ओम ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम जय [संगीत] हो जय [संगीत] हो ये भगवान के प्यारों की महफिल है हरि के दुल्हार की बिन फेरे हम तेरे प्रभु तेरी जय हो कन्हैया शिव राम आत्मदेव तेरी जय [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हो ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम मा हरि ओम
हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] ह ओम मा हरि ओम हरि ओम हरि [प्रशंसा] ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ह ह हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओ हरि ओ हरि ओ हरिओ हरि हरि हरि ओम ओ ओ ओ ओ ओओ ओ ओ ओ ओम ओम ओ हरि ओम हरि ओ हरि ओ हरि हरि हरि हरि हरि ओम ओम ओम ओम ओम गुरु ओम गुरु ओम शिव ओम शिव ओम हरि ओम ओ ओम राम ओम ओ ओम ओ
ओ ओ ओम बिन फेरे हम [संगीत] तेरे ये तो आप कर सकते हो नहीं कर सकते तीनों तनाव से मुक्ति मिल जाएगी शारीरिक तनाव मानसिक तनाव भावनात्मक तनाव ने सारे दुनिया को आज लपेटे में ले रखा है इस प्रयोग से तीनों तनाव की ऐसी [संगीत] तैसी