भगवान की प्यारी कुंता देवी कहती हैं कृष्णाय वासुदेवाय कृष्णा कृष्णाय वासुदेवाय देवकी नंदना यच देवकी नंदना नंद गोप कुमाराया नंद गोप कुमारा गोविंदाय नमो नमः [संगीत] गोविंदाम कुंता जी कहती हैं आप श्री कृष्ण वासुदेव देवकी के नंद नंदन नंद गोप के लाडले लाल गोविंद को हमारा बारबार प्रणाम है हे गोविंद हे गोपाल हे त हे पारब्रह्म लोग कहते हैं कि आपने यदुवंश की कीर्ति बढ़ाने के लिए अवतार लिया है यदुवंश की कीर्ति के विस्तार के लिए आप अवतरित हुए हो लेकिन हे नंद गोप कुमार मैं तो समझती हूं कि आपने मेरे उद्धार के लिए ही
अवतार लिया है कुछ लोग यह भी कहते हैं वसुदेव देवकी के अगले जन्म की तपस्या में आपने उनको वरदान दिया वचन पूर्ण करने के लिए आपका अवतार हुआ है लेकिन अवतरित होने वाले सच्चिदानंद मैं तो यह मानता हूं मानती हूं कि आप मेरे अंतःकरण में आत्म स्वरूप से अवतरित होने को और बाहर नंद गोप कुमार रूप में मुझे सुख देने को विघ्न और बाधाएं हरने को य अवतरित हुए हे कृष्णा कुछ लोग यूं भी कहते हैं कि स्वार्थी चारी समाज शोषक और सीधे साधों का उत्पीड़न करने वाले जब आसुरी वृति के लोग बढ़ जाते हैं
तो पृथ्वी बार से पीड़ित होती और आपके यहां पृथ्वी गौ रूप लेकर प्रार्थना करने आई और पृथ्वी का बाहर उतारने आप आए हैं लेकिन मैं तो यह समझती हूं कि मेरे हृदय का बाहर उतारने के लिए ही आपका अवतार हुआ है मेरा आपके चरणों में प्रणाम है [संगीत] कुछ लोग यह कहते हैं कि अविद्या कामना से दुखी समाज का दुख दूर करने के लिए आपका अवतरण हुआ है लेकिन आप तो मेरा यदुवंश से जो मोह है उसको काटने के लिए अवतर हुए हो श्री कृष्ण मेरा आपके चरणों में प्रणाम है महाभारत के युद्ध के दिनों
में कौर न पक्ष के दुर्योधन ने भीष्म पितामह को उभारा कि आप इच्छा मृत्यु वरदान प्राप्त पुरुष है आप बाल्यकाल में धनुर्विद्या सीख रहे थे किसी पर्वत से गिरे जिस चट्टान पर गिरे उस चट्टान के दो टुकड़े हुए आपको रोज तक नहीं आई फैक्चर तक नहीं हुआ आप इतने लोह पुरुष और मेरे सेना नायक फिर भी कौरव पक्ष के धे और कौरवों के भाई दुर्योधन के भाई मारे जा रहे और पांडवों का एक भी भाई अभी तक यमपुरी नहीं पहुंचा पितामह आपके ओज के आगे आपकी धनुर विद्या के आगे आपके सामर्थ्य आगे इन पांडवों की
क्या विषद है कि वे जीवित रहे आप हमारे सेना नायक है फिर भी आपके हृदय में क्या पता दुर्य के लिए इतनी उपेक्षा क्यों और आप सत्य निष्ठ पुरुष है और मैं यह नहीं कहता कि आप झूठ मुट लड़ रहे हैं फिर भी आप अगर चाहे तो दुर्योधन को विजय बना सकते और पांडवों को दिन के तारे दिखा सकते हैं उभारा उस दुष्ट ने बूढ़े को और बूढ़ा आ गया उसके चक्कर में निकाले पांच बाण मैं गंगा पुत्र प्रतिज्ञा करता हूं [संगीत] इन पांच बाणों से कल श्याम का सूर्यस्त पांडव नहीं देख सकेंगे अगर कृष्ण
ने हथ्यार ना लिया तो श्रीखंडी मेरे सामने ना आया तो संध्या के समय शिविर में किया हुआ संकल्प गुप्त चरों के द्वारा पांडवों तक पहुंच ही गया पांडवों के चित्त में बड़ी खलबली मच गई और पांडव प्रिया चुप कैसे बैठ सकती द्रोपदी दुख से व्याकुल होने लगी दुख में तुलसीदास जी कहते हैं विपत्ति के समय क्या करना चाहिए तुलसीदास जी कहते हैं तुलसी साथी विपत के विद्या विनय विवेक साहस सुकृत सत्य व्रत राम भरोसो एक फिर से कहते विपत्ति तो हर मनुष्य के जीवन में कभी कभार आ ही जाती है यह दोहा आत्मसात करने जैसा
है तुलसी साथी विपत के विद्या विनय विवेक साहस सुकृत सत्य व्रत राम भरोसो एक विपत्ति के समय आत्म विद्या का और लौकिक विद्या का उपयोग करना चाहिए विपत्ति के समय स्वभाव में विनय करना चाहिए अक्र नहीं बनना चाहिए विपत्ति के समय नहीं तो अपने वालों का भी सहकार नहीं मिलता परायो का तो क्या विद्या विनय और विवेक फिर विवेक के बाद तुलसीदास जी कहते साहस विपत्ति में सुकड़ नहीं साहस को जगाओ हिम्मत को जगाओ विपत्ति इतना नुकसान नहीं करती जितना विपत्ति का भय नुकसान करता है मौत इतनी दुखद नहीं जितना मौत का भय दुखद है
बेज्जती इतनी दुखद नहीं जितना बेज्जती का भय दुखद है घाटा है या गरीबी इतनी दुखद नहीं है जितना घाटा और गरीबी का भय दुखद है अपमान इतना दुखद नहीं जितना अपमान का भय दुखद है और मौत इतनी दुखद नहीं है जितना मौत का भय है इसलिए आप साहसी बनिए हो हो के क्या होगा मर जाएंगे ना तो मरने से डरेंगे तो क्या अमर हो जाएंगे कितना भी डरेंगे तभी भी मौत आने वाली है तो फिर मौत से डर डर के सुकड़ सुकड़ के जल्दी मौत क्यों बुलाना जो कल आने वाली हो तो आ जाए और
आज आने वाली है तो अभी आए लेकिन हम मौत को देखने वाले हैं मौत आकर शरीर पर आएगी मुझ चैतन्य सच्चिदानंद आत्मा पर नहीं आएगी ओम मा हरि ओम मा हरि ओम सुकरात को मृत्यु दंड सुनाया गया शिष्य रोने लगे सुकरात कहता है पागल हुए रो मत अभी समझो जीवन भर जी करर देखा अब मर कर भी मैं देखूंगा सुकरात उठे जहर घोटने वालों को जाकर कहा कि भाई 5 बज रहे हैं तुम इतना धीरे धीरे सिलबट्टे पर घिस रहे हो समय तो हो गया है घोटने वालों ने कहा अजीब आदमी हो हम चाहते कि
तुम्हारे जैसा अच्छा आदमी दो स्वास और ले ले हम थोड़ी सी लेट कर ले बोले दो स्वास ज्यादा लेने से क्या हो जाएगा करोड़ों स्वास लेकर देख लिया तो दो शवास अगर तुम्हारी मेहरबानी से ज्यादा ले लिया तो क्या बन जाएगा टाइम टू टाइम करो भाई जल्दी करो समय हो रहा है प्याला घोटने वालों ने घूट कर दे दिया सुकरात जैसे आप हम पानी पीते ऐसे वो पी गए शिशु में हैश हैश मच गया सुकरात कहता है नहीं तुलसी साथी विपत के भले वह दोहा नहीं कहा सुकरात ने लेकिन बात वही कही विपत्ति के समय
साहस होना चाहिए सुकृत होना चाहिए ईश्वर पर आत्मा पर भरोसा करना चाहिए देखो जहर पिया है अब पैरों पर जहर की असर हुई अब घुटनों और कमर तक पहुंची है अब मैं लेट ही रहा हूं देखो जहर की असर नाभी पर जठरा पर अपनी मरोड़ मार रही है अब जहर की असर हृदय तक आ रही है पूरे शरीर में फैल रही है शरीर को जहर मारेगी लेकिन शरीर मरेगा शरीर की मृत्यु में देख रहा हूं जो मृत्यु को देख रहा है उसकी मृत्यु कभी नहीं होती पागलों तुम यह सीख लेना तुम भी मृत्यु को देखना
तालियां तो आपने बजा ली आपको बात अच्छी लगी लेकिन मेरी प्रार्थना पक्की स्वीकार करो कि आपकी मृत्यु होने वाली है और मृत्यु होने वाली है कभी ना कभी उस समय आप मृत्यु से डरेंगे नहीं मृत्यु को देखेंगे और जो मृत्यु को देखता व मृत्यु के सिर पर पैर रखकर अमर आत्मा की यात्रा करने में सफल होता है आप दुख को भोगी मत दुख को देखिए दुख मन में आता है पीड़ा शरीर में आती है राग और द्वेष बुद्धि में आता है भूख और प्राणों को लगती है काला और गोरा चमड़ा होता है मोटा और पतला
चर्बी होता है ठना और लंबा और नाटा हड्डियों का ढांचा होता है लेकिन तुम अमर आत्मा हो साहस करके अपने आत्म भाव को जगाए रखना बरकरार रखना तुलसी साथी विपत के विद्या विनय विवेक साहस सुकृत सत्य व्रत राम भरोसो एक द्रोपदी विबल हो गई पांडवों के चित्त में भी थोड़ी खलबली तो मचती है आखिर द्रोपदी ने राम भरोसो उस केशव के भरोसे को दरया के हे कृष्ण कृष्णाय वासुदेवाय देवकी नंदनाया नंद गोप कु माराय गोविंदाय नमो नम अब विपत्ति के समय तो तुम्हारी प्रार्थना तुम रा सहयोगी तो हमें चाहिए पुकारा और श्री कृष्ण मुस्कुराते हुए
सामने आ रहे द्रोपदी कहती केशव केशव तुम्हें पता है भीष्म ने प्रतिज्ञा कर ली है तुम्हें पता है पांच बाण उठाकर उन पांच बाणों से पांचों पांड पांडवों को कल कल युद्ध के मैदान में स्वर्ग भेज देंगे तुमने वो प्रतिज्ञा सुनी है पितामह की प्रतिज्ञा कृष्ण ठका मार के द्रोपति इतना क्यों घबराती है इतना क्यों डरती है सुनिए केशव तुम्हारी बहन कल इस समय अपना सुहाग गवा बैठेगी और तुम ह हो कृष्णा कहते कि पगली अभी तो रात है कल सुबह होगा सूर्योदय होगा युद्ध होगा तब होगा अभी तू क्यों डरती है गम की अंधेरी
रात में दिल को ना बेकरार कर सुबह जरूर आएगी सुबह का इंतजार कर कोई न कोई रास्ता निकल जाएगा साहस कर सुकृत कर ईश्वर का भरोसा कर अपने अंतर आत्मा की प्रेरणा ले पगली दुख की बात को याद कर कर के अपना हौसला गवा मत अीत दुख हारी अपने आत्मा का चिंतन करके अपना हौसला बुलंद कर तू काहे को अपना हौसला गवा रही है यह कृष्ण और द्रोपदी की कथा आप ही की कथा है जय राम जी की आपका आत्मा कृष्ण है और आपकी मति द्रोपदी है उस आत्मा से अपनी मति रूपी बहन पति को
सत प्रेरणा देना ना कि वो बिचारी फिसले और तुम भी उसके साथ डूबते चले जाओ नहीं नहीं सत्संग ने के लिए है तारने के लिए है दुखों के सिर पर पैर रखने के लिए सत्संग है सुखों को बांटने के लिए दुखों के सिर पर पैर रखने के लिए और अपने परमात्मा स्वभाव को जगाने के लिए सत्संग है उठो सोने वाले जगाने वाला आ [संगीत] गया संग जगाने के लिए आए तुलसीदास जी कहते हैं मोह निशा सब सोवन हारा देख ही स्वपने अनेक प्रकारा हम लोग मोह की निशा में सो रहे वास्तव में जो हम नहीं
है उस शरीर को हम मैं मानते हैं और वास्तव में जो हमारा नहीं है उसको हम हमारा मानते हैं वास्तव में जो हम है वोह अपने आप का हमारा वियोग नहीं होता है लोग बोलते त्याग दिया त्याग दिया किसका त्याग जो तुम्हारा नहीं है उसका तुमने क्या त्याग किया जय राम जी की जो तुम्हारा नहीं है उसका वह तो सदा त्याज्य है और जो तुम वास्तविक में हो तुम्हारा वास्तविक में उसका तुम त्याग नहीं कर सकते हो केवल बेवकूफी से जिसको मेरा मान लिया है उसका ही त्याग करना पड़ता है वास्तव में त्याग क्या है
जय राम जी बोलना पड़ेगा ये त ज्ञान की दर्शन शास्त्र की ऊंची अनुभव की बात है जो तुम्हारा नहीं उसको तुमने क्या त्यागा और जो तुम्हारा वास्तव में है उसको तुम कभी त्याग नहीं सकते हो लेकिन बेवकूफी से जिसको तुमने मेरा माना है उसी को ही त्यागना पड़ता है समझकर अगर समझ के नहीं त्यागो ग तो प्रकृति थप्पड़ मार करर त्याग करवा देगी तो समझ के त्याग दो बस तुम्हारे हाथ की [संगीत] बात शरीर तुम्हारा नहीं है तुम्हारा होता तो तुम्हारे कहने में चलता तुम नहीं चाहते चपड़ा सफेद हो जाए लेकिन हो जाता है ना
तुम नहीं चाहते हो कि झुरिया पड़े पड़ जाती है तुम नहीं चाहते हो बूढ़ा हो जाए हो जाता है तुम नहीं चाहते हो मर जाए मर जाता है तुमने मान रखा है मैं हूं खाली मान्यता का ही तो त्याग करना है जो तुम्हारा नहीं है उसको तो तुम्हें त्यागना ही नहीं है और जो तुम्हारा वास्तव में है वह तो तुम्हारा कोई छीन नहीं सकता और जो तुमने बेवकूफी से तुम्हारे मनने मान रखा है वह टिकेगा नहीं जो टिकेगा नहीं उसको अभी से नहीं मान लो बस अब तो जय राम जी बोलना पड़ेगा भाई द्रोपदी चिंता
ना करो सुबह आएगी तब ना हा साहस सुकृत और अंतरात्मा की प्रेरणा का भरोसा लो देखो द्रौपदी एक युक्ति है दुर्योधन की पत्नी रोज सुबह उस बूढ़े को प्रणाम करने जाती और वह होलसेल में आशीर्वाद देते हैं आज सुबह तू जाएगी वह प्रणाम करने पहुंचे उसके कुछ क्षण पहले तुम पहुंच जाना और प्रणाम करना और प्रणाम करते समय अपनी चूड़ियों की झनकार कर देना ताकि उसको पता चले कि प्रणाम हो रहा है फिर वोह बोलेगा अखंड सौभाग्यवती भव और तू बोलना पितामह तुम्हारा प्रभात कालीन संकल्प सत्य हो आपके मुंह में गी शक्कर लेकिन कल रात
के संकल्प का क्या होगा बस इतना तोत करना बाकी की भूमिका में अपने आप स्टेरिंग में संभाल लूंगा डोंट वरी यह मैंने मिलाया डोंट वरी जय राम जी [संगीत] की अभी निश्चिंत होकर आराम कर दप पांडव आराम करते हैं लेकिन आज की रात का आराम इतना तगड़ा नहीं सुबह होने के पहले ही कई बार सुबह हो गई थी जय राम जी की द्रोपदी उठी कृष्ण रास्ते में मिले हे कृष्णा ठहर तूने जो पद त्राण पहरे हैं अर्थात आज के जमाने में कह दो जुती चप्पल तूने जो पद त्राण पहरे हैं उस पद ण की आवाज
से अगर वह सावधान हो गया तो बाजी बिगड़ जाएगी तेरे पद प्राण मुझे दे दे द्रोपदी के जूते अपने पीतांबर में संभाले हैं कैसा है यह गीता का भगवान के भक्तों के जूते संभालने में उसे संकोच नहीं होता उसके अपने बड़पन में कोई खतरा नहीं होता है आज तो लोग न जाने कितनी उधारी डिग्रियां लेकर उधारा बड़पन लेकर काड छपा छपा के घूमते और संतों के पास भी अपना परिचय देने वाले दो चमचों को आगे धर देते और अपना बड़पन दिखाते लेकिन तुम्हारा जो उधारा बड़पन है उसकी संत की निगाह में कोई वैल्यू नहीं तुम्हारा
असली बड़पन संत जानते कि तुम परमात्मा के सनातन सत्य हो उस असली बड़पन को दबाने की बेवकूफी क्यों करते हो संतों के पास यह फलाने उद्योगपति ये फलाने समाज के आगे वाने फलाने है डिंगड़ी तुम्हारे छोटे-छोटे ू पूछड़े संत को इंप्रेस क्या करेंगे संत तो तुम्हारी महिमा जानता है कि तुम ईश्वर के अमृत पुत्र हो उससे बढ़कर तुम्हारे टाइटल की कोई कीमत नहीं जानता है जय राम जी की और मुझे जहां तक अनुभव है जितने भी बड़े लोग आते हैं खाली आते हैं और गरीबों का लाया हुआ प्रसाद लेकर चले जाते हैं और जितने मिडियम
क्लास के लोग आते हैं भरे हाथ आते हैं प्रसाद दे जाते और थोड़ा ले जाते हैं जय राम जी की तो मैं फ उन बड़े लोगों से ज्यादा उम्मीद भी नहीं रख सकता हूं जय राम जी की विवेकानंद कहा करते थे कि जितने भी दिखने में बड़े-बड़े लोग हैं वे तो शोभा के गांठी हैं और धर्म के यश का फायदा उठाने के लिए ही धक पड़ते हैं बाकी तो मध्यम क्लास के लोग ही धर्म की सेवा करते हैं और धर्म का लाभ लेते हैं कहलाने वाले बड़े तो खाली दिखावटी होते हैं जय राम जी बोलना
पड़ेगा यह विवेकानंद का अनुभव बिल्कुल मेरा अनुभव उनकी बराबरी का ही है जय राम जी की मैंने देखा जितने भी बड़े लोग है बस ठीक है अच्छा है बड़े लोग थैंक्स धन्यवाद लो प्रसाद अच्छा है आप बहुत बड़े वाह भाई वाह हम कर देते लेकिन हमें वो बड़पन का परिचय देने वाले लोगों से उतना आनंद नहीं आता जितना सहज स्वभाव में आकर मिलते उन लोगों से मुझे आनंद आता है बापू ये इनकम टैक्स कमिशनर है मैं क बापू ये फलाने मैं क वाह भाई ठीक है लो प्रसाद फिर बोलता अच्छा आप निकल जाओ क्योंकि आप
बड़े आदमी है बड़ा काम होगा आप यहां तो हम लोग बैठेंगे आराम से जय राम जी बोलना पड़ेगा नारायण हरि ना ये बाहर के बड़े पूछड़े विचारों को आराम से सत्संग में भी नहीं बैठने देते कैसा बड़पन है ये बड़े में बड़ा जो ईश्वर है उसके ईश्वर के सत्संग में नहीं बैठने देता है बड़पन ये बड़ किस काम का खैर फिर भी उनको मुबारक है बड़े लोगों से भी हमारा विरोध नहीं है जय राम जी की हमारा किसी से कोई विरोध नहीं है सत्संग में सत्य बात कहना हमारा कर्तव्य है नारायण हरि नारायण श्री कृष्ण
ने जुती संभाल ली कृष्ण को अपना बड़पन का हो जाने का डर नहीं है आज हमारे पास कोई सुख सुविधा या कोई पद आ जाता है तो बिना ड्राइवर के हमारे हौसले गायब हो जाते हैं अरे ड्राइवर नहीं आ तो खुद चला लो नौकरानी नहीं आए तो खुद बतन माज लो धोबन नहीं आए धोबी नहीं आए तो खुद कपड़े धो डालो क्या बड़ी बात है आज तो वाशिंग मशीन खत्म खराब हो गई वाशिंग वाशिंग मशीन खराब हो गई या नौकरानी नहीं आए लेकिन तेरी खोपड़ी या नियत खराब क्यों हो तू अपने शरीर से थोड़ा काम
करके घर का काम टनाटन कर मैया नियत खराब मत कर खोपड़ी खराब मत कर नारायण हरि मैंने पहले दिन कहा था कि मैं भगवान की कथा तो करूंगा लेकिन तुम्हारी कथा किए बिना नहीं रहूंगा जय राम जी यह तुम्हारी कथा है पद त्राण संभाले हैं उसके शव ने और द्रोपदी गई द्रोपदी प्रणाम कर चुरिया [संगीत] हिला पितामह कहते हैं अखंड सौभाग्यवती भवन द्रोपति कहती है पितामह तुम्हारा वचन सत्य हो लेकिन कल शाम पांच पांडवों को स्वर्ग पहुंचाने का संकल्प किया था उस संकल्प का और इस सं संकल्प का विरोधाभास हो रहा है पितामह मैं तो
चाहूंगी कि आपका प्रभात कालीन वचन सत्य हो बोले अरे द्रोपति कृष्णा तू इस समय इस प्रभात को आज यहां कैसे सच बता तुझे भेजने वाला कहां छुपा है सच बता तुझे यह सिखाने वाला कहां छुपा है इतने में कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते आए बोले पितामह बोले केशव तुमने क्या कर दिया अगर मैं पांडवों को मारता तभी भी मेरी प्रतिज्ञा प्रभात वाली झूठी होती है अगर प्रभात की प्रतिज्ञा सत्य करता हूं तो कल शाम की प्रतिज्ञा मेरी मिट्टी में मिलती है केशव मुझे मिट्टी में मिला दो तो मैं सहन कर लूंगा लेकिन मेरे वचन को मिट्टी
में ना मिलने दो केशव मेरे वचन की रक्षा करो मेरी प्रतिज्ञा की रक्षा देखो भक्तों के भक्त क्या करते हैं केशव कहते कि हां पितामह आप चिंता ना करो आपने प्रतिज्ञा में शर्त रखा था कि कृष्ण ने हथियार ना लिए तो और मैंने प्रतिज्ञा की थी कि मैं हथियार नहीं उठाऊंगा लेकिन मैं अपनी प्रतिज्ञा झूठी कर लेता हूं तुम्हारी प्रतिज्ञा सत्य करने के लिए मैं हथियार उठा लूंगा और क्या [संगीत] है जैन धर्म अहिंसा की प्रधानता से चलता है बौद्ध धर्म में करुणा की प्रधानता है इस्लाम धर्म में यकीन की प्रधानता ता है ईसाई धर्म
में प्रेयर की प्रधानता है लेकिन सनातन धर्म में यकीन माना श्रद्धा भी है अहिंसा भी है प्रार्थना भी है करुणा भी है लेकिन सनातन धर्म में एक विशेषता है कि हित की प्रधानता से चलता है सामने वाले का हित जिसमें अधिक से अधिक होता हो और कम से कम अहित में काम बनता हो तो वह काम किया जाता है जय राम जी की अगर भगवान बुद्ध को कहो कि मेरे रथ की बाग डूर संभालो बुद्ध कहेंगे कि पागल हुए हो करुणा करो भगवान महावीर को कह दो कि चलो युद्ध की घोड़ा गाड़ी संभालो बोले अहिंसा
परमो धर्मा जय राम जी की लेकिन कृष्ण तो भाई अहिंसा और हिंसा दोनों का विभाग जानते हैं अपनी आत्मा का आघात करके शरीर की रक्षा करना यह कोई अहिंसा नहीं है आत्मा के विकास के लिए शरीर की बलि देनी पड़े तो दे डालो अंगूठे पैर की रक्षा के लिए अंगूठा स्वाह करना पड़े तो कर दो और पूरे शरीर के बचाव के लिए पैर कटाना पड़े तो कटा दो और पूरे समाज की रक्षा के लिए गिने गिनाए दुर्योधन विभाग को स्वाह करना है तो कर दो समाज रूपी ईश्वर की सेवा हित महत्त्वपूर्ण [संगीत] है युद्ध करना
कि ना करना यह विषय नहीं था था युद्ध तो अवश्य भावी था लेकिन युद्ध किस ढंग से करना किसके द्वारा करना यह कृष्ण ने चूम डाला के अर्जुन जैसा व्यक्ति ही युद्ध करेगा तो ठीक राज्य करने के वही अधिकारी है जिनको राज्य भोग की वासना नहीं है यश के वही अधिकारी है जिनको यश भोग की इच्छा नहीं है जय राम जी की सत्ता के वही अधिकारी है जिनको सत्ता की लोलुपता नहीं है जय राम जी की सौंदर्य के वही अधिकारी है जिनको सौंदर्य का गर्व नहीं है और ईश्वर को पाने के वही अधिकारी है जो
ईश्वर के सिवाय और किसी में सत्य मति नहीं रखते हैं जय राम जी की मैंने सुना कि किसी पुराने कुल खानदान में एक साज पड़ा था कई दिवालिया चली गई और साज जगह रो के रखा था इस दिवाली को साज को निकालकर बाहर फेंक दिया गार्बेज में कचरा पेटी में एक जूना जमाने का साधु वहां से निकला और साज को साधु ने पहचान लिया साधु ने साज खोला और बस अपनी उंगलियां घुमाई और साज से जो जो संगीत छिड़ा लोग चौराहे पर खड़े हो गए घर के लोग भागते आए बोले बाबा जी बाबा जी य
साज हमारा है बाबा जी ने कहा गलत बात तुम्हारा होता तो घर में पूजा जाता उपयोग होता पागलों साज उसी का है जो बजाना जानता है साज उस उसी का है जो बजाना जानता है गीत उसी का है जो गाना जानता है आश्रम उसी का है जो रहना जानता है और परमात्मा उसी का है जो पाना जानता है है तो सबका सबके हृदय में है लेकिन उसी का है जो पाना जानता है ऐसा नहीं कि मेरे हृदय में ईश्वर और आपके यहां ठन ठन पाल है नहीं कृष्ण के हृदय में आत्मा परमात्मा था और आप
ऐसे ही है नहीं नहीं जो श्री कृष्ण के हृदय में था उतने का उतना वैसे का वैसा वही का वही अभी इस समय तुम्हारे हृदय में है लेकिन सास उसी का है जो बजाना जानता है गीत उसी का है जो गाना जानता है आश्रम उसी का है जो रहना जानता है और प्रभु उसी का है जो पाना जानता पितामह को श्री कृष्ण ने शांतोना दी युद्ध का समय हुआ न सेना है आमने सामने भीष्म दक्षण बाण चलाए जा रहे हैं लेकिन सारथी कृष्ण है रथी अर्जुन है जीव रथी है आदेश देने वाला और ईश्वर आदेश
मानने वाला है एक कैसा है भारतवासियों का भगवान जय राम जी की ऐसा भगवान या खुदा मैंने और किसी मजहब में आज तक देखा सुना नहीं है पढ़ा भी नहीं कैसा प्यारा है जीव की आज्ञा मान रहा है अर्जुन आज्ञा कर रहा है दो सेनाओं के बीच मेरा रथ ले चलो और कृष्ण बिल्कुल आलाकर धर देता है स स आज्ञा भगवान जीव की इसलिए मान लेता है कि शायद यह जीव भी मेरी आज्ञा मानकर मेरे असली स्वरूप को जान ले स स नखरे समाज के संत लोग स्वीकार कर लेते हैं 100 स बातें समाज की
संत लोग मान लेते ताकि संत की बात मानकर समाज भी संत के प्रसाद को पा ले 100 स बच्चे की तोतली भाषा है मां-बाप स्वीकार कर लेता और तोतली भाषा बोलता है ताकि बच्चा मेरी सीधी भाषा समझ ले और पकड़ ले नहीं तो मां को पता है पानी को पानी बोला जाता है लेकिन बेटा पानी को आई बोलता है तो मां बोलती है बेटा आई पिएगा मम खादा पतोला था फल तो था ला तातो तु तातो अब काका को ताता बोल रही मां क्योंकि बच्चा ताता की भाषा समझता है ऐसे जी जो भाषा समझता है
और साधक जो भाषा समझते हैं संत और भगवान वही भाषा हमारे हित के लिए बोलकर देर सवेर हमें जगाने के लिए प्रयत्न करते हैं बाण चले ण बाण अपना काम कर रहे हैं बाणों की वर्षा आमने सामने होती गई युद्ध तो ईमानदारी से करना ही था श्री कृष्ण की कोमल उंगलियों में भीष्मा के तीक्षण बाण लग जाते थे अर्जुन को जो बाण लगते कृष्ण अपने ओज और तेज से भीष्म के बाण को खारिज कर देते ऐसे सुंदर सारथी थे कि विघ्न बाधा और जीव लेवा तीरो से बचाकर अपने प्रिय अर्जुन को यश और सफलता दिलाई
पितामह सर सया पर पड़े और कहते कि मुझे तकिया चाहिए दुर्योधन और करण रुई के कोमल तकिया ले आए सिराना ले आए भारत का योद्धा कहता है कि नहीं यह तकिया नहीं चाहिए अर्जुन को बुलाओ मुझे अर्जुन तकिया देगा अर्जुन को बुलाया अर्जुन को कहा कि फिर से और तीन बाण मारे अर्जुन ने और सिर से पीछे की तरफ निकले उसी का तकिया लेकर यह भारत का योद्धा मरने वाले शरीर को मरने वाला मानता और अमर आत्मा को असंग जानता है योद्धाओं को उपदेश दिए जा रहा है कि तुम शरीर नहीं हो पीड़ा जिसको होती
वह तुम नहीं हो जय राम जी की आपको जरा सा पीड़ा हो ना करिए मैं मर गया नहीं पीड़ा हाथ को हुई पैर को हुई पेट को हुई कमर को हुई किडनी को हुई आप उससे बिल्कुल थोड़े अलग है तो पीड़ा के समय भी आप पीड़ा से प्रथक रहने का अभ्यास करिए दुख के समय मन से जड़ोगर मन में दुख आया है चिंता आई है आप उससे पथक होने का अभ्यास करिए क्योंकि वास्तव में आप पथक है पांडवों को यह राज्य करने के लिए श्री कृष्ण ने प्रेरणा की युद्ध में विजय हुए हो पांडव राज्य
काज करते एक दिन युधिष्ठिर श्री कृष्ण के यहां गए तो कृष्ण ध्यान मग्न युधिष्ठिर पूछते कि कृष्ण तुम किसका ध्यान कर रहे हो बोले बाणों की सया पर पड़े हुए [संगीत] पितामह मेरे ध्यान में मग्न है मेरे मुझे याद करें इसलिए मैं उनको याद कर रहा हूं आप मकान को याद करो मकान आपको याद नहीं करेगा आप गहनों को याद करो गहने आपको याद नहीं करेंगे आप गाड़ी मोटर को रुपए पैसों को याद करो यह जड़ चीजें आपको याद नहीं करती है लेकिन आप ईश्वर को याद करो तो ईश्वर आपको याद किए बिना कभी नहीं
रहता है भले आप कीड़ी की चाल से चलोगे तो वह गरुड़ की चाल से आएगा और आप कंगाल की रीत से उसका स्वागत करोगे तो वह अपनी तरफ से तुम्हारा स्वागत करेगा फायदा तो आपको ही है कंगाल की और सम्राट की दोस्ती हो जाए तो फायदा कंगाल को है कीड़ी की और गरुड़ की दोस्ती हो जाए तो फायदा तो कीड़ी को है ऐसे जीवात्मा और परमात्मा की प्रीति हो जाए तो फायदा तो जीवात्मा को ही है भा हमेशा बुद्धिमान बड़े लोगों से प्रयत्न करके दोस्ती रखते संबंध रखते भाई बड़े आदमी कभी काम आ जाएंगे तो
उन सारे दुनिया के बड़े आदमियों के बड़ों का बड़े बाप उनके बापों का बाप पुरखों का पुरखा तो तुम्हारा परमात्मा है और वह आत्मा होकर बैठा है उसके साथ संबंध जोड़ना कोई कठिन नहीं है क्योंकि उसके साथ तो तुम्हारा बिल्कुल पक्का संबंध है देह के साथ तो माना हुआ संबंध है और समाज के लोगों के साथ तो बनाया हुआ संबंध है और उसके सा तुम्हारा शाश्वत संबंध है [संगीत]