ब [संगीत] [प्रशंसा] आज बाडोली की भूमि पर डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी और प्रिय मुरारी बापू सरदार साहब के स्मरण की त्रिवेणी में हमें मज्ज करवाएंगे पटेल जी को महान होने के लिए इसकी जरूरत नहीं कि हम किसी को नीचा करके दिखाए व वैसे ही बहुत बड़े हैं शंकर भगवान ने एक बार विष पिया सरदार ने तीन बार विष पिया मेरा मानना है कि उस समय कांग्रेस में कोई माइक लन को हरा नहीं सकता था अपने रामचरित मानस के साथ जिस रूप में सरदार साहब को पेश किया दध कुछ लोग ऐसे होते कि दुश्मन को
पवित्र सजा देते वो दुश्मन को भी पाकीजा सजा देते हैं वोट हिलते नहीं नजरों से गिरा देते हैं साहब [प्रशंसा] नमस्कार सरदार साहब के साध शताब्दी वर्ष के अवसर पर ऐतिहासिक तीर्थ बारडोली में सरदार संगोष्ठी आज 13 में मुकाम पर पहुंची है इस अवसर पर सरदार साहब को शाब्दिक प्रेमांजलि देने हेतु डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी और प्रिय मुरारी बापू उपस्थित है इनका स्वागत करने हेतु डॉक्टर सुरेश सिंघवी जी तथा स्वराज आश्रम बाडोली के प्रमुख श्री बखा भाई पटेल से अनुरोध करता हूं आज बाडोली की भूमि पर डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी और प्रिय मुरारी
बापू सरदार साहब के स्मरण की त्रिवेणी में हमें मज्ज करवाएंगे आज हमारे बीच सिविल सर्विस से जुड़े विशेष व्यक्तित्व उपस्थित है हमारा सद्भाव सरल और मानव मूल्यों को समझने वाले निष्ठावान भूतपूर्व आईएएस अधिकारी डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी हमारे बीच उपस्थित है डॉक्टर विकास जी केवल एक शिक्षक ही नहीं पर एक मार्गदर्शक प्रेरक और युवा हृदय में जीवन मूल्य प्रस्थापित कर बदलाव लाने वाले स्तंभ है हम सबने ल्थ फेल मूवी के माध्यम से उन्हें जिंदगी को रीस्टार्ट कैसे की जाए यह समझाते हुए देखा है भारत के युवा मानस पर उनके बहुमूल्य योगदान को नमन करते
हुए सरदार संगोष्ठी में वक्तव्य देने हेतु सादर आमंत्रित करता हूं डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी आदरणीय मुरारी बापू निरंजना जी आदरणीय प्रजना जी डॉक्टर सुरेश सिंघवी और सभी गणमान्य अतिथि आज से करीब एक साल पहले मतलब मैं माफी चाहता हूं कि मैं गुजराती में नहीं बोल पाता हूं मुझे हिंदी में बोलना पड़ेगा पर मुझे अंदाजा है कि गुजरात में हिंदी का सम्मान बहुत ज्यादा है इस गुजरात से ही महात्मा गांधी ने हिंदी का आंदोलन शुरू किया इसी गुजरात से दयानंद सरस्वती ने हिंदी भाषा में सत्या प्रकाश लिखा तो मैं हिंदी का विद्यार्थी हूं और मुझे
इस बात का ठीक से अनुमान है कि हिंदी का सम्मान हिंदी क्षेत्र के अलावा जहां सबसे ज्यादा है वह गुजरात ही है तो मुझे ईर्ष्या होती है कि आपको गुजराती और हिंदी दोनों आती हैं मुझे सिर्फ हिंदी आती है तो ये हीनता की बात है दुख की बात है पर हिंदी समाज में जो बच्चे पैदा होते हैं उनका दुर्भाग्य है कि उनको कोई दूसरी भाषा सीखने का उतना अच्छा मौका नहीं मिलता है शायद यह वजह होगी क्योंकि मैं महाराष्ट्र जाता हूं वहां लोग मराठी हिंदी दोनों बोलते हैं गुजरात में गुजराती और हिंदी बोलते हैं पर
हिंदी क्षेत्र में पैदा होने वाले हिंदी ही बोल पाते हैं साथ में थोड़ी अंग्रेजी तो इस क्षमा याचना के साथ में हिंदी में अपनी बात रखूंगा क्योंकि गुजराती में मुझे सिर्फ केमछो बोलना आता है और वो बोलने का कोई खास विषय है नहीं आज से करीब एक साल पहले मेरे पास एक फोन आया मैं मंच पर तो बोल लेता हूं वैसे निजी जीवन में बहुत ही संकोची व्यक्ति हूं बहुत ही अंतर्मुखी हूं और मुझे कोई खींच के बाहर ना लाए तो मैं एक एक महीना अपने रूम में बैठ के पढ़ता रहता हूं मुझे मुझे लगता
है कि एकांत में जो सुख है वह सुख मुझे मिलता नहीं बाहर तो मैं पार्टियों में जाने वाला व्यक्ति नहीं हूं किसी का जन्मदिन किसी की शादी में मुझे बुलावा है तो मैं तुरंत सोचता हूं कि क्या बहाना लगाऊ कि ना जाना पड़े मुझे तो मैं ऐसा हूं दरअसल हूं यह मेरा स्वभाव है और मेरी टीम को यह पता है कि जब भी कोई इन्विटेशन आए आमंत्रण आए तो कैसे मना करना है उनको पूरी उसकी विधि पता है मना करने की कि किसी का अपमान भूल के भी ना हो पूरे सम्मान के साथ विनम्रता के
साथ कैसे मना करना है तो विधि हमने बना रखी है तो एक साल पहले एक फोन आया हमारे साथी के पास और उन्होंने मुझे कहा कि गंगाराम अस्पताल के एक बहुत सीनियर डॉक्टर हैं वह मिलना चाह रहे हैं डॉक्टर सुरेश सिंघवी मैं ईमानदारी से बता रहा हूं कि जैसे ही मुझे पता लगा गंगा राम के वरिष्ठ डॉक्टर हैं तो मेरे मन में एक लालच का भाव पैदा हुआ मुझे लगा मेरी उम्र 50 अब मैं 51 का हूं तब 50 का था मुझे लगा कुछ साल के बाद जरूरत पड़ेगी गंगाराम की मुझे तो अगर गंगाराम में
एकद सीनियर डॉक्टर से परिचय हो जाएगा तो ठीक ही रहेगा जब नौबत आएगी तो सीधे एंट्री मिल जाएगी एडमिशन सीधे मिल जाएगा तो मैंने कहा ऐसा है तो मिल लेते हैं तो मुझे लगा कि मैं जाकर मिल लूंगा लेकिन डॉक्टर साहब इतने विनम्र है कि वो मिलने आए मुझसे तो मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं मेरे मन में एक ही लालच था कि वह आएंगे और मैं इतनी नेटवर्किंग कर लूंगा कि बुढ़ापे में दिक्कत आए तो मेरा इलाज ठीक से हो जाए बाकी जरूरत मुझे पड़ती नहीं है एक ही जरूरत लगती है कभी डॉक्टर
की जरूरत पड़ेगी तो रास्ता निकल जाएगा खैर वो आए और जो मैंने सोचा था चीज उससे एकदम अलग थी आधे घंटे की बातचीत में वह प्रसंग खत्म नहीं हो गया कि मेरी जरूरत क्या है जब उन्होंने बताया इस पूरे कार्यक्रम के बारे में बताया कि सरदार पटेल जिस आश्रम में सरदार बने थे उस आश्रम में एक संगोष्ठी होने वाली है उससे मुरारी बापू रहने वाले हैं और जब सारा वर्णन किया निरंजना जी का बताया कि कैसे उनके पिता जुड़े थे पटेल जी से वो खुद भी बचपन में जुड़ी रही तो मेरे मन में लालच बहुत
बढ़ गया अब वह लालच खत्म हो गया डॉक्टर वाला अब दूसरा लालच बढ़ गया क्योंकि मुझे सबसे ज्यादा सुख मिलता है ऐसे स्थानों पर जाकर जहां कोई महान व्यक्ति अपना समय गुजार के गया हो जैसे मैं आज से कुछ साल पहले कर्म सद गया था जहां सरदार पटेल का जन्म हुआ था उस घर में एक दो घंटे रहा छत से लेकर जमीन सारा एक एक कमरा देखा वहां पर साबरमती आश्रम भी गया था दांडी भी गया था गुजरात आया तो लोथल भी गया सब जगह गया बारडोली मुझसे छूट गया था शायद नियती थी जानबूझ के
छुड़वाया होगा नियती ने तो जब मुझे पता लगा कि बारदोली के या बारडोली के आश्रम में जाकर वहीं उसी घर में रहने का मौका मिलेगा या बैठने का मौका मिलेगा जहां सरदार पटेल रहते थे जहां महात्मा गांधी भी आते थे तो मुझे लगा इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है बोलना तो ठीक है मैं अध्यापक हूं बोल ही देता हूं तो मैंने कहा ठीक है मैं आऊंगा लेकिन इससे मेरा लाभ ज्यादा है आपका लाभ कम है और जब से आज मैं सुबह से आया हूं मैं कल रात को सूरत आ गया था आज सुबह यहां
आया और जब से आया हूं तो वह मेरा भाव बढ़ता ही जा रहा है ऐसा लग रहा है कि बड़े शहरों की चकाचौंध में हम लोग बहुत कुछ छोड़ देते हैं जो ऐसी जगह पर आकर समझ में आता है कि जीवन का असली मतलब क्या होता है तो पश्चिम में एक प्रसिद्ध दार्शनिक हुए थे मुझे सुरेश जी ने कहा कि डेढ़ घंटा मुझे बोलना है तो मैं बड़ा फुरसत के मूड में हूं अगर आप लोग लगे कि कम बोलने तो इशारा कर दीजिएगा मैं चुप हो जाऊंगा बीच में ही नहीं तो मैं तो ज्यादा बोलने
का अभ्यस्त हूं कम बोलना मुश्किल लगता है मुझे तो आज जब मैं आया तो यहां मुझे सरदार पटेल पर बोल रहे मैं उन पर आऊंगा थोड़ी देर के बाद पहले मैं आज का अनुभव डिस्कस करना चाह रहा हूं तो जैसे ही कार आश्रम के अंदर घुसी तो जिसको बोलते हैं आजकल मनोविज्ञान के बच्चे की वाइब्स आती हैं जो जनजी है आज की जनरेशन है उसकी भाषा में वाइब्स आती है हमारी भाषा में एक वातावरण होता है हर जगह का उस वातावरण का अपना मूल्य होता है और वातावरण ऐसे नहीं बनता बहुत सारे अच्छे लोग जब
एक साथ रहेंगे तो वहां माहौल बनता है उसको हम वातावरण कहे वाइब्स कहे वाइब्रेशन कहे जो भी कहे वो हर किसी को समझ में आता है तो जैसे ही मैं उस स्कूल के अंदर घुसा मुझे लगा कि यह कुछ तो अलग है पहले मुझे लगा कि क्योंकि मैं दिल्ली से आया हूं और दिल्ली में दीपावली के एक दो महीने बाद तक जो मौसम रहता है आपको पता है कि पोल्यूशन बहुत ज्यादा वहां पर होता है सांस लेना अपने आप में चैलेंज होता है वहां पर तो मुझे लगा शायद यहां हवा साफ सुथरी है और क्योंकि
मैं दिल्ली से आया हूं इसलिए मुझे बहुत ज्यादा अंतर महसूस हो रहा है पर मामला सिर्फ बाहर की हवा का नहीं अंदर की हवा का भी है और दिल्ली में जो लोग हैं उनके बाहर के साथ साथ अंदर की हवा भी खराब हो जाती है एक शायर ने दिल्ली के बारे में बड़ा अच्छा लिखा है जो मैं हर दीपावली के बाद अपने घर में सुनाता रहता हूं सबको चेहरे पर सारे शहर के गर्द और मलाल है गर्द का मतलब है धूल मिट्टी और मलाल मतलब दुख पीड़ा वेदना बेचैनी परेशानी तो चेहरे पर सारे शहर के
गर्द और मलाल है दुख है और धूल मिट्टी है कितना सुंदर कहा चेहरे पर सारे शहर के गर्दों मलाल है जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है तो पूरी की पूरी दिल्ली ये गर्द जो है धूल मिट्टी तो दीपावली के बाद दो महीने होती है लेकिन जो अंदर की धूल मिट्टी है साल भर रहती है और मैं थोड़ा पढ़ लिख गया हूं ज्ञान की बातें कर लेता हूं लेकिन धूल मिट्टी तो मेरे अंदर भी उतनी ही है जितनी बाकी लोगों में होती है यहां के एक अलग ही सुकून महसूस हुआ उन बच्चों
के चेहरे पर जो भाव थे फिर मैंने स्कूल देखा ध्यान से मैं इतने साल से 26 साल से काम कर रहा हूं भारत सरकार में काम किया अपनी एक कंपनी चलाता हूं जिसमें करीब दो सवा हजार लोग काम करते हैं मेरे साथ में और अचानक मैंने एक ऑफिस देखा स्कूल का जिस ऑफिस में प्रिंसिपल से लेकर क्लर्क तक सब एक ही कमरे में बैठते हैं कोई राकी ही नहीं है और मुझे लगा कि मेरी सारी किताबें जो राकी सिस्टम से प्रशासन कैसे चलता है वह अचानक बेकार साबित हुई बिना सोपान क्रम के कोई व्यवस्था चल
सकती है हम तो नहीं सोचते थे पर यहां चल रही है फिर मैंने देखा कि स्कूल के बच्चे उन सबकी एक एक अलमारी है उसी में उनको अपना सामान रखना है किताबें रखनी है कपड़े रखने हैं सबने बड़ा सहेज के रखे हुए हैं मुझे अपने बच्चे याद आए कमरा तो उनके पास भी है पर वो इतना साफ तो कभी नहीं होता जब तक कोई थर्ड पार्टी आग साफ ना कर करे उसको या तो मम्मी साफ करे पापा साफ करे या कोई और साफ करे इतना करीने से कैसे बच्चे रह सकते हैं और किसी की अलमारी
पर कोई ताला भी नहीं है तो मैंने पूछा कि ताला नहीं होने की वजह तो बताया गया कि हम चाहते हैं कि बच्चे खुद ही सीखें कि अगर हम किसी की चोरी करेंगे तो कोई हमारी भी तो करेगा और चोरी नहीं करनी है यह स्वभाव का हिस्सा बन जाए यह इसकी ट्रेनिंग है इसका प्रशिक्षण है बच्चे अपना खाना भी खुद बना रहे हैं बर्तन भी खुद धो रहे हैं दसवीं के बच्चे दिल्ली में यह कह कह के आतंक पचाए रखते हैं कि मेरा दसवीं का एग्जाम है तो ना मैं खाना खाना तो खर बनाने का
सवाल ही पैदा नहीं होता है बर्तन धोने का तो मसला ही नहीं है उनके सामने उनसे तो आप यह भी कहे कि एक गिलास पानी लाकर दो दवी का एग्जाम बीच में आ जाता है तो यह बच्चे दसवीं का एग्जाम भी दे रहे हैं खाना बना रहे हैं बर्तन धो रहे हैं अपना सब कुछ कर रहे हैं स्वावलंबन जो महात्मा गांधी कहा करते थे उसका जीता जागता उदाहरण और उसके बाद बच्चों के चेहरे पर ऐसा सुकून है जो सुकून दिल्ली के वीडियो गेम खेलते बच्चों के चेहरे पर कभी नहीं दिखता है तो मुझे कभी-कभी क्या
होता है मैं जिक्र कर रहा था कि पश्चिम दार्शनिक हुआ हाइडेगर नाम के 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ही जर्मनी की बात है जब जर्मनी विश्व युद्धों की दुनिया में आ गया था उस समय की बात है उन्होंने एक बड़ी गहरी बात कही उन्होंने कहा कि हम लोग जिंदगी जीते रहते हैं किसी से लड़ते हैं किसी से प्यार करते हैं फिर झगड़ा करते हैं लड़ते हैं सफल होते हैं किसी को हराते हैं किसी से हारते हैं हारते हैं तो नफरत पाल लेते हैं हराते हैं तो यह भाव मन में आता है कि मैंने हरा दिया
मैं विजेता हूं इसी सब तिकड़म भरे अनुभवों को हम मिलाकर एक शब्द बोलते हैं जिंदगी लाइफ लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है जिंदगी में कि अचानक कोई इंसिडेंट होता है वह इंसिडेंट क्या होता जैसे मान लीजिए कि मैं और मेरा दोस्त सड़क पर जा रहे हैं अचानक एक ट्रक की कार ब्रेक फेल हुई उसे टक्कर मारी और मेरे साथ जो मेरा दोस्त था उसकी मौत हो गई और मैं बच गया अब जो मुझे एहसास होगा उस एहसास का मतलब है नथिंगनेस शून्यता उस मोमेंट में उस क्षण में यह लगता है कि क्या है जिंदगी में ऐसा
और मैं जो इकट्ठा करने में लगा हूं मैं जो ताकत के पीछे भाग रहा हूं मैं जिस आठ साल बाद की प्रमोशन के लिए अभी से रात दिन जुटा हुआ हूं यह सब तो एक सेकंड का खत्म होने का वारा खेल है जिस जिंदगी का एक सेकंड बात का अता पता नहीं है भरोसा नहीं है कल सुबह में उठूंगा भी या नहीं यह भी नहीं पता है और मैं ऐसी जिंदगी जी रहा हूं जो 10 साल बाद में यह बन जाऊंगा 18 साल बाद मेरी प्रमोशन यह होगी मैं सेक्रेटरी बन जाऊंगा या मैं हाई कोर्ट
के जज बन जाऊंगा इस अनुभव में जो लोग थोड़े ज्यादा सेंसिटिव हैं संवेदनशील हैं वह इस अनुभव को झेल नहीं पाते और उनके लिए इसी बिंदु पर टर्निंग पॉइंट आता है और वह जीवन का रास्ता मोड़ लेते हैं कि जब जीवन में कुछ भरोसा नहीं तो मैं इन निरर्थक चीजों के पीछे क्यों भागता रहूं क्यों ना मैं किसी ऐसी सार्थक चीज की तलाश करूं जो अंततः मुझे सुकून देती हो और हम जीवन क्यों जीते हैं मैं दर्शन विषय का विद्यार्थी हूं पढ़ाता भी हूं भारत के दुनिया के सब दार्शनिकों को पढ़ने पढ़ाने की प्रक्रिया में
मैंने पाया कि अंततः सभी के मन में एक ही बात है अलग-अलग शब्दों से कहते हैं और वो यह है कि जीवन का अंत इसी बात प कि मुझे सुकून मिले मुझे आनंद मिले मुझे सुख मिले और सारे भौतिक सुखों के बाद देश की राजधानी की सारी ताकत को देखने समझने के बाद अगर उससे ज्यादा सुकून बारडोली के आश्रम में है तो इसका मतलब है कि जीवन का सही अर्स तो यहां के खुलेगा वहां तो नहीं खुलेगा तो मैं बहुत कृतज्ञ हूं सिंघवी साहब का डॉक्टर साहब का कहां डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब आपका बहुत कृतज्ञ
हूं कि आपने अब मैं आपसे कोई काम नहीं बोलूंगा कि मुझे इलाज करवा दीजिए वो मैं कभी नहीं बोलूंगा वो तो मेरा शुरुआती लालच था जो मैंने आपको बताया भी नहीं अब तक पर मन में था और मुझे लगता है कि सच बोल देने से मुक्ति रहती है झूठ बोलने में बड़ी दिक्कत है सच बोल देने से अभी मुक्त रहता है तो मेरा शुरुआती आपसे जो संवाद था व लालच की बदौलत था अब तो हम अच्छे दोस्त हो गए तो मैं कृतज्ञ हूं कि आपने मुझे यहां बुलाया और इतने सुंदर संसार के बीच में आने
का मौका दिया मैंने ज स्कूल को देखा मुझे लगा कि टैगोर महात्मा गांधी और पटेल जैसे एक हो गए हो टैगोर के शांति निकेतन में जो सबसे सुंदर कांसेप्ट मैंने देखा कि क्लासरूम के अंदर पढ़ाई नहीं करनी है पेड़ के नीचे बैठना है खुले में बैठना है प्रकृति में बैठकर पढ़ना है मैंने देखा कि यहां क्लासरूम में चेयर्स है ही नहीं केवल छोटे से स्टूल है वह उठाना है और पेड़ के नीचे चले जाना है और जहां मन करे वहां बैठ के पढ़ना है क्यों एक चार दिवारी के अंदर बैठ के ही हम पढ़ाई करेंगे
महात्मा गांधी ने बहुत अच्छा विचार दिया था बुनियादी तालीम का बुनियादी शिक्षा का जो स्वावलंबन में जोर देता है स्किल्स की ट्रेनिंग पर जोर देता है मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देता है और मैंने पाया कि वह सारे के सारे सिद्धांत इस स्कूल के अंदर ठीक वैसे ही चल रहे हैं और सरदार पटेल का तो आशीर्वाद आश्रम को मिला ही है तो उनके प्रति तो कृतज्ञ होना वैसे भी बनता है दूसरा मैं थोड़ा सा मुरारी बापू साथ में उनका जिक्र करके फिर मैं अपने मूल विषय पर आता हूं सरदार पटेल पर मेरा आज तक ऐसा
सौभाग्य नहीं हुआ कि मैं किसी कथा में जाकर सुन सकूं पर और मैं बहुत संदेह करने वाला व्यक्ति हूं मैं बहुत विश्वास करने वाला व्यक्ति हूं नहीं मैं ईश्वर को लेकर भी उतना आग्रह नहीं हूं मुझे फिलॉसफी पढ़ते ज्यादा संदेह मन में रहता है बहुत ज्यादा ईश्वर भी है या नहीं है है तो कैसे हैं वह सब सवाल मेरे मन में बहुत ज्यादा चलते हैं पर मैं नास्तिक नहीं हूं मैं अजवादी हूं अजवाद का मतलब होता है कि मुझे पता नहीं ईश्वर है या नहीं है तो कैसे हैं पर मैं संभावना मानता हूं कि वह
है और अगर दुनिया चल रही है तो हो सकता है कि उन्हीं के बदौलत चल रही होगी इस संभावना को मानता हूं मैं यह भी महसूस करता रहा हूं कि जो संत का एक सुंदर अर्थ होता है मैं संत कबीर का बहुत सम्मान करता हूं मैंने कबीर दास को अच्छे से पढ़ने का प्रयास किया है और बहुत प्रेरित होता हूं उनसे उनकी बातों से सीखता हूं संत रादास को मैंने अच्छे से पढ़ने का प्रयास किया कई बार किया तो मैं अक्सर सोचता हूं कि संत का मतलब क्या होता है तो एक बार एक किताब में
मुझे बड़ी सुंदर बात मिली एक उम्र तक मैं थोड़ा सा लेफ्ट आइडियल जीी की तरफ काफी झुका हुआ था तो मुझे धर्म संत इन सब से लगभग अरुचि सी थी नफरत तो नहीं कहूंगा पर अरुचि जैसा भाव रहता था मेरे पेरेंट्स भी परेशान थे क्योंकि मैं कुछ अतिवाद के रास्ते पर उस समय चलता था मुझे लगता था कि संत वो लोग हैं जो दुनिया के संघर्षों को छोड़कर भाग गए हैं अरे भाई मैं बुद्ध को पढ़ता था महावीर वर्धमान महावीर को पढ़ता था मुझे लगता था कि क्यों ऐसा करते हो भाई सब लोग स्ट्रगल कर
रहे हैं रोजी रोटी का संकट सबके सामने सबके बच्चे उनकी शादी होगी नहीं होगी करियर होगा नहीं होगा इतना इतना स्ट्रगल है उस स्ट्रगल से हम तटस्थ हो जाए यह मुक्ति कैसे हो सकती है फिर एक बार मेरे हाथ में किताब लग गई क्योंकि मुझे किताब पढ़ने का शौक है और मेरे सबसे अच्छे दोस्त अगर कोई है तो किताबें ही है और एक किताब इसी विषय पर मैंने पढ़ी कि संत होने का मतलब क्या होता है तो उसमें बड़ी सुंदर एक व्याख्या थी कि संत वह नहीं है जो दुनिया की मुख्य धारा से भाग गया
है संत वह है जो जानता है कि अगर वह मुख्य धारा में उतर गया तो शायद सबको हरा देगा पर वो उतरने से पहले ही जानता है कि सबसे जीत के भी कुछ हासिल नहीं होगा और इसी बात को कुछ और लोगों ने दूसरी भाषा में कहा द मोस्ट इंटरेस्टिंग थिंग अबाउट द रेट रेस ट इवन इफ यू विन यू आर स्टिल ए रट चूहों की दौड़ की सबसे रोचक बात यह है कि अगर आप जीत भी जाए तो भी चूहे ही रहते हैं और जिसने समझ लिया कि चूहा होना ही नहीं है तो चूहों
की दौड़ में दौड़कर किसको जीत के दिखाना है अगर मैं अगर मैं जी दिखा भी दूं अगर मैं जीत के दिखा दूं किसको दिखाना है क्या कोई इतना महत्त्वपूर्ण है कि उसको दिखाने के लिए मैं अपने 10 साल खराब कर दू या 20 साल खराब कर दूं क्यों दिखाओ और अंततः तो साक्षी भाव से खुद को ही देखना है और यदि मैं अपनी चेतना के सही रास्ते पर नहीं हूं तो दुनिया की नजर में कितने भी सही रास्ते पर हूं व सही रास्ता कैसे हो सकता है मेरा सही रास्ता तो मेरी चेतना मेरी अंतरात्मा तय
करेगी और यदि मेरी अंतरात्मा इस बिंदु पर सुकून महसूस करती है कि मुझे उस चूहों की दौड़ में शामिल होना ही नहीं है तो नहीं होना है और मैं कल से मुझे डॉक्टर सिंघवी साहब ने कई जिक्र किए बापू के कि कैसे उनकी कथा में लोग और गुजरात के लोग कितने दानी है वह भी पता लगा सूरत के बारे में विशेष रूप से पता लगा कि 50 करोड़ 100 करोड़ का दान हुआ एक अस्पताल बन गया फिर कथा हुई फिर 125 करोड़ का दान हो गया एक और अस्पताल बन गया इतना कंट्रीब्यूशन तो बड़े-बड़े मंत्री
नेता और आईएस नहीं कर पाते तो उससे लाग गुना अच्छा है कि हम संत बनके ही अपना काम करें और समाज के लिए जो कर सकते हैं वही करें तो मैं बापू बहुत कृतज्ञ हूं कि मैं मैं तो इस लालच में था कि मैं ज्यादा सुनूंगा पर मुझे बताया गया कि मुझे सुनाना ज्यादा है सुनना कम है यह वैसे ज्याती है बहुत बहुत ज्याती है आपकी कि मुझे ज्यादा समय दिया आपने और बापू कम बोल रहे हैं इसका उल्टा होना चाहिए था पर ठीक है आपने अपना कुछ वह सोची होगी इसके पीछे अब मैं सरदार
पटेल पर आता हूं जो मेरा मूल विषय है सरदार पटेल के बारे में आजकल जब लोग बोलते हैं तो एक अजीब सा भाव बहुत प्रचलित हो गया है कि जब तक हम महात्मा गांधी और नेहरू जी की चार बुराइयां ना कर दे लोग वो सोचते हैं कि पटेल की तारीफ हो नहीं पाई ठीक से तो मैं उस तरह का आदमी नहीं हूं मैं पहले स्पष्ट कर रहा हूं आप अगर य उम्मीद कर रहे हैं कि मैं गांधी जी को चार लाइने सुनाऊंगा और नेहरू जी के बारे में चार गलत बातें बोलूंगा मैं ऐसा नहीं करूंगा
मेरा मानना है कि एक बहुत बड़ी लड़ाई एक व्यक्ति नहीं लड़ता है एक टीम लड़ती है और टीम में हर व्यक्ति का अपना चरित्र होता है अपना व्यक्तित्व होता है अपनी भूमिका होती है हम यह नहीं कह सकते कि एक ही व्यक्ति पर्याप्त था बाकी सब यूं ही थे ऐसा नहीं सबकी अपनी अपनी महत्ता थी अपनी भूमिका थी एक बहुत बड़े रंगमंच पर हर व्यक्ति का अपना किरदार होता है और उस किरदार को करीने से निभाना यही उसकी मानता होती है मैं यह जरूर मानता हूं कि सरदार वल्लभ भाई पटेल जितने सम्मान के हकदार थे
उतना हमारी पीढ़ियों ने उनको दिया नहीं यह हमारी पीढ़ियों पर लानत की बात है यह मैं जरूर मानता हूं और यह हमें सुधारना चाहिए क्यों सुधारना चाहिए मैं कुछ ऐसी बुनियादी बातें आपसे कहूंगा क्योंकि मैं पीएससी के लिए पढ़ता पढ़ाता हूं तो इतिहास पर लंबा लेक्चर देना तो सामान्य बात है पर आज जो ऑडियंस मैंने पूछा पहले कौन लोग रहने वाले हैं तो बताए कि स्कूल के बच्चे होंगे कुछ समाज के लोग होंगे तो मैं ये मान के आया था कि हमें बहुत आसान बातें करनी है मुश्किल बातें नहीं करनी है मुझसे कोई पूछे कि
सरदार पटेल को आप किस रूप में देखते हैं बल्कि आज से चार पाच साल पहले मेरी माता जी का देहांत 2018 के अंत में हुआ नवंबर में और जब ऐसा हुआ तो स्वाभाविक सी बात है कि मेरे पिताजी जिनकी उम्र लगभग 80 साल है वह काफी अकेले हो गए थे टूट से गए थे वह भी भी बहुत एक्टिव हैं पढ़ते लिखते हैं किताब हर महीने किताब लिखते हैं एक मैगजीन निकालते हैं मुझसे ज्यादा युवा है मैं तो उनकी तुलना में बूढ़ा हूं तो मैंने उनसे पूछा अगले साल मैंने कहा पिताजी आपका जन्मदिन आने वाला है
मतलब माता जीी की मृत्यु के शायद तीन महीने बाद की बात दो महीने बाद की बात है तो मैंने कहा आपका जन्मदिन आने वाला है आप क्या चाहते हैं कैसे मनाए मुझे लग रहा था कहीं वो यह ना कहे कि मेरा मन नहीं है मनाने का या कुछ ऐसा उन्होंने कहा कि मुझे ना जो सरदार पटेल की प्रतिमा बनी है वहां ले चलो तो मेरे मन में इच्छा थी इसी बहाने उनका मन भी बहला तो हम वहां गए और वहां जो बच्चा उस समय एसडीएम था उससे बड़ा सहयोग किया आज वो बल्कि आया भी है
शद से मिलने भी मिलेंगे मुझे वो थोड़ी देर में आएंगे मेरे बड़े अच्छे दोस्त बन गए वहां उस दिन सब लोग उस दिन में म्यूजियम देखा कम सत तो मैं अपने पिताजी और मां दोनों को लेकर गया था पत्नी भी गई थी सब लोग गए थे उनका घर देखने के लिए तो कोई मुझसे पूछता है कि सरदार पटेल को लेकर आपके मन में क्या भाव सबसे पहले आता है मेरे मन में एक ही भाव आता है कि नेतृत्व का जो गुण किसी व्यक्ति में सबसे बेहतर हो सकता है सबसे बेहतर हो सकता है उसके साक्षात
मूर्ति देखनी है तो मैं सरदार पटेल को याद करूंगा अगर मुझे किसी एक व्यक्ति का नाम बोलना हो तो सरदार पटेल का नाम बोलना चाहूंगा क्यों बोलना चाहूंगा उसकी वजह अलग है शायद वह वजह थोड़ी सी इतिहास में आपको अलग लगे पर मैं आपको दो तीन वजह बता के बात समाप्त करूंगा और क्योंकि मुरारी बापू है राम कथा वो कर तो मैं बीच बच में भगवान राम का जिक्र भी लाऊंगा ताकि थोड़ा सा पर्सपेक्टिव और सही तरीके से हम समझ सके भगवान राम के बहुत सारे रूप हैं वाल्मीकि के रामायण में अलग रूप है भवभूति
के उत्तर राम चरित में अलग रूप है उसके बाद गोस्वामी तुलसीदास ने जब लिखा रामचरित मानस उसमें काफी नया रूप वो लेकर आए और जो अवतारी राम थे वह मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनकर हमारे सामने ने और जिन राम को हम जानते हैं वह आमतौर पर गोस्वामी तुलसीदास ने जिस राम के चरित्र का निर्माण किया उनको हम ज्यादा जानते हैं मैं हिंदी साहित्य का विद्यार्थी भी हूं हिंदी साहित्य में उसके बाद भी चीजें होती रही हैं 20वीं सदी की शुरुआत में महात्मा गांधी के समय में ही मैथी शरण गुप्त ने साकेत लिखा उसमें राम का नया
रूप सामने रखा जिसमें वोह प्रश्न कर रहे हैं राम तुम ईश्वर हो मानव नहीं हो क्या या राम तुम मानव हो ईश्वर नहीं हो क्या और वो कह रहे हैं कि हे राम इस देश को मत भूलना राम तुम्हें यह देश ना भूले धाम धरा धन जाए भले ही यह अपना उद्देश्य ना भूले और भगवान राम राष्ट्र भक्त नायक के रूप में उभरते हैं साकेत नाम की रचना में 20वीं सदी की शुरुआत में फिर 1936 में हिंदी के सबसे बड़े कवि निराला राम की शक्ति पूजा एक कविता लिखते हैं वहां फिर का एक नया चेहरा
सामने आता है बहुत ही उदात्त स्वरूप सब्लाइम स्वरूप गरिमा से भरा व्यक्तित्व फिर आजादी मिलने के बाद नरेश मेहता ने एक और पुस्तक लिखी संशय की एक रात वह राम के एक और रूप को सामने लेकर आता है जिसमें राम को दुविधा है और एक बड़े व्यक्ति को दुविधा होनी चाहिए उनको दुविधा यह है कि सीता की मुक्ति तो मेरी निजी लड़ाई है मेरी पत्नी का अपहरण हुआ तो लड़ना मेरा धर्म बनता है न उस लड़ाई में मैं इस पूरे समाज को पूरी सेना को झूक दूं यह उचित है या अनुचित है और रात भर
वो इस दुविधा में रहते हैं और उसके बाद उनको इस प्रश्न का सही उत्तर मिलता है उसी बिंदु पर संशय की एक रात पूरी कविता समाप्त होती है तो मुझे जो पूरी भारतीय परंपरा में एक सबसे महान आदर्श नजर आता है अलग-अलग रूपों में वो भगवान राम का है और मैं महसूस करता हूं कि जब हम पटेल को समझे और थोड़ा सा दोनों व्यक्तित्व की तुलना करके समझे तो बात और गहरे से हम महसूस कर सकते हैं कि पटेल का पटेल राम के रामवन नजदीक है इन दोनों में कितनी गहरी समानताएं हैं एक प्रसंग से
बात शुरू करते हैं जिस प्रसंग पर लोग नाराज रहते हैं पर मैं यहां नाराजगी जाहिर करने नहीं आया हूं मैंने आपसे पहले ही कहा कि मैं ना नेहरू जी के बारे में एक गलत वाक्य बोलूंगा ना गांधी जी के बारे में बोलूंगा और पटेल जी को महान होने के लिए इसकी जरूरत नहीं है कि हम किसी को नीचा करके दिखाए वो वैसे ही बहुत बड़े हैं किसी को मैं छोटा क्यों करूं उसके लिए भगवान राम का प्रसंग यह है कि वह भी युवा होने के कागार पर हैं और उनके पिता राजा दशरथ कह रहे हैं
कि बेटा मेरी इच्छा है कि अब तुम राजा बनो राम खुद नहीं कह रहे हैं दशरथ कह रहे हैं राम तो यहां तक कह रहे हैं कि पिताजी उचित बात नहीं है हम चार भाई हैं कहने कहने का उम्र का अंतर है एक ही दिन तो पैदा हुए थे आधे एक घंटे के अंतर को बड़ा भाई छोटा भाई क्या होता है सब साथ साथ पैदा हुए थे अब जन् में एक संघ सब भाई भोजन सन केली करि काई वो पूरा चौपाई कहते तुलसीदास जी विमल वंस यह अनुचित एकू बंधु बिहाई बड़े ही अभिषेक इतने महान
वंश में ये उचित बात नहीं है कि अभिषेक सिर्फ मेरा हो रहा है क्यों भाई बड़पन यही तो है कि जब सत्ता चरणों में रखी हो तब कोई कहे कि मुझे क्यों मैं क्यों राजा बनू और पिता समझा रहे हैं कि बेटा तुम संयोग से सबसे बड़े तो हो ही भाई आधे घंटे का भी अंतर है तो बड़े तो हो ही ना भाई और तुम्हारा व्यक्तित्व भी ऐसा है कि मेरे पास हर जायज वजह है कि मैं तुमको राजा बनाऊ तुम बस मना मत करना तब राम कह रहे ठीक है आप कह रहे तो मैं
आपकी बात कैसे टाल सकता हूं राम के राज्याभिषेक की तैयारिया चल रही हैं और यदि हम राम को मनुष्य थोड़ा सा बनाकर देखें केवल भगवान ना समझे तो हम सोच सकते हैं कि उनको भी कुछ कुछ तो उत्सुकता हो ही रही होगी अच्छा लगही रहा होगा कि अब मैं राज कात संभा लूंगा शायद सीता और राम के बीच में बातें भी होती होंगी सीता कहती होंगी आप राजा बनेंगे मुझे भूल तो नहीं जाएंगे राम कहते कैसी बात करती हो ऐसी बातें होती होंगी चहल बाजी तो पति पत्नी में होती है होती होगी उनमें भी खुशी
का माहौल होगा और अचानक एक प्रसंग घटता है मंथरा ककई को समझाती है कि क्या तुम जानती हो क्या होने वाला है क कई बहुत खुश है क कई कह र कि हां मेरा बेटा राजा बन रहा है राम राजा बन रहा है क्योंकि उस समय तक क कई को इस बात का इल्म तक नहीं है कि मेरा बेटा भरत और राम में क्या अंतर है एक ही बात तो है और तब मंथरा अपनी बुद्धि से कह रही है कौन रिप हो हम कहानी चेरी छाड़ नहीं होब रानी कोई भी राजा बने मुझे क्या नुकसान
है मैं तो नौकरानी हूं रानी थोड़ा बन जाऊंगी पर तुम्हें फर्क पड़ेगा तुम्हारा बेटा राजा नहीं बन रहा है कौशल्य का बेटा बन रहा है और फिर जैसा होता है जिसको हम कहते भड़काना वह सब चीजें हुई ककई की बुद्धि फिर गई ऐसा कह सकते हैं उनको दो वरदान अपने उन्होंने अपने पति से वरदान मांग लिए दशरथ धर्म संकट में है एक तरफ बेटे का मोह जिस बेटे के लिए व जान दे सकते हैं इतना प्रेम करते हैं उस बेटे से उसको राजा बनाने वाले हैं और दूसरी तरफ है रघुकुल के ही रघुकुल रीत सदा
चली आई प्राण जाए पर वचन ना जाई वचन भी नहीं जाना चाहिए खुद ही वचन दिया था कि तुमने मेरी रक्षा की है तो मैं तुम्हें दो चन देता हूं अब रघुकुल का राजा अपना वचन तोड़ दे तो यह उसके कैरेक्टर के खिलाफ है चरित्र के खिलाफ है बेटे को कहा है कि तुम राजा बनोगे उससे कैसे पीछे हटे और दशरथ इतने दुख में है अंत में अपने बेटे से कहते हैं कि ऐसा हुआ मैं सोचता हूं कल्पना करता हूं अगर राम कह देते क्योंकि राम अकेले बेटे तो है नहीं इस दुनिया में इसी दुनिया
में शाहजहां का बेटा औरंगजेब भी था इसी दुनिया में बिम बिसार का बेटा आजाद शत्रु भी था और इन दोनों बेटों ने अपने बाप को मरवा दिया था बेटे तो ऐसे भी होते हैं दिल्ली में 10 दिन पहले घटना हम सबने देखी है कि जब कोई बच्चा अपने मां बाप बहन की हत्या कर देता है ऐसे बच्चे आज ही थोड़ ना हो रहे हैं हर दौर में हुए हैं और मैं इमेजिन करता हूं कि अगर राम कहते कि पिताजी पूरे सम्मान के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं आपकी यह बात नहीं मानूंगा प्रजा
तय करेगी तो अयोध्या की प्रजा क्या तय करती उस समय क्या अयोध्या की प्रजा राम को जाने देती नहीं जाने देती कुछ ऐसा होता जो सारी की सारी पौराणिक परंपरा को बदल चुका होता पर राम को पता था कि मेरा असली उद्देश्य क्या है सत्ता य अपने पिता का सम्मान अपनी वंश परंपरा का सम्मान और अपने पिता अपनी वंश परंपरा के सम्मान के सामने सत्ता क्या चीज है दो कोड़ी की चीज है और पिता शर्मिंदा है और वो कह रहे हैं कि पिताजी आप चिंता मत कीजिए मैं वन में जाऊंगा 14 साल के लिए इतना
भी तनाव मत लीजिए फिर उनकी पत्नी ने कहा कि मैं भी जाऊंगी लक्ष्मण ने कहा मैं भी जाऊंगा कितना बड़ा पन है अब यहां से दृश्य को काट दीजिए और आ जाइए 1946 में 1940 के बाद कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है क्योंकि 1942 का भारत छड़ आंदोलन हुआ फिर विश्व युद्ध चल रहा था 1919 39 से 45 तक विश्व युद्ध के दौरान कांग्रेस का इलेक्शन कैसे हो 1946 का समय आ गया है अप्रैल का महीना है विश्व युद्ध के बाद परिस्थितियां स्पष्ट है कि अंग्रेज भारत छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं
छोड़ेंगे ही छोड़ेंगे 1946 का चुनाव हो चुका है चुनाव में कांग्रेस भारी मोहबत से जीत चुकी है सबको पता है कि कांग्रेस का जो अध्यक्ष होगा प्रधानमंत्री बनने का न्यता उसी को मिलेगा अंतरिम सरकार में अभी भारत आजाद नहीं हुआ है आजादी 1947 में मिलनी है मैं 46 की बात कर रहा हूं एक साल पहले की बात कर रहा हूं सबको पता है कि जो कांग्रेस का अध्यक्ष है उसी को भारत का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाएगा यह सब जानते मौलाना अबुल कलाम आजाद 6 साल से कांग्रेस के अध्यक्ष हैं स्वाभाविक सी बात है उनके
मन में होगा कि इलेक्शन ना ही हो मैं ही चलता चलू उन्होंने ईमानदारी से अपनी आत्मकथा में लिखा भी है उनकी मृत्यु के बाद 1959 में शायद आत्मकथा छपी उनकी उसम उन्होने लिखा कि हां मेरे मन में ऐसा भाव था ईमानदारी से सच बोलना ठीक है डॉक्टर साहब कि लालच था तो ठीक रहता उसमें मतलब बोझ खत्म हो जाता है तो अब्दुल कलाम आजाद ने ईमानदारी से लिखा इस बात को तो इलेक्शन कांग्रेस का होगा यह घोषणा हो गई अप्रैल महीने के अंत तक फॉर्म भरने हैं यह भी स्पष्ट हो गया फॉर्म भरने का तरीका
यह नहीं था कि आप उठे जाकर फॉर्म भर दिया कि मैं बनूंगा अध्यक्ष उस समय का नियम था कि कांग्रेस की 15 जो प्रांत स्तरीय समितियां है जिसको पीसीसी बोलते थे प्रदेश कांग्रेस समिति प्रदेश कार्य समिति कांग्रेस समिति वो नॉमिनेशन भेजेंगे कि हमारी ओर से इसको अध्यक्ष पद का उम्मीदवार माना जाना चाहिए यह नियम था तो चल रहा था 15 प्रदेश समितियों में से 12 ने सरदार वल्लभ भाई पटेल का नाम भेजा कि इनको अध्यक्ष बनाया जाए बाकी तीन ने किसी का नाम नहीं भेजा एब्सन किया कि हम किसी का नाम नहीं भेजेंगे यानी कुल
मिलाकर एक ही नाम आया कोई दूसरा नाम ही नहीं आया अब मामला फस गया 29 अप्रैल की डेट सामने आ रही थी दूसरा कोई नाम ही नहीं आ रहा था फिर कहते हैं कि कुछ लोगों ने कोशिश की कि नेहरू जी का नाम भी उसमें आना चाहिए कृपलानी जी इस मुख्य भूमिका में थे उन्होंने दिल्ली की जो कांग्रेस कार्य समिति है कांग्रेस वर्किंग कमेटी सीडब्ल्यूसी उसके कुछ मेंबर्स के माध्यम से उनका नॉमिनेशन करवाया जो कि जहा तक मेरी जानकारी है मैं इतिहास का बहुत गंभीर शोधार्थी नहीं हूं पर जितना मैंने पढ़ा है उस समय के
नियमों के तहत शायद वो संभव नहीं था तो नियम थोड़े लचीले किए गए उसके लिए उनका नॉमिनेशन हुआ अब इलेक्शन होने वाला है पूरी कांग्रेस की सारी समितियां पटेल के नाम पर एकमत है और यह तय है कि जो अध्यक्ष बना वह कुछ महीने बाद भारत का प्रधानमंत्री होने वाला है और तब पटेल महात्मा गांधी के पास पहुंचे उन्होंने कहा कि बापू ऐसे ऐसे स्थिति है आप क्या कहते हैं क्या-क्या सोचा होगा मुझे नहीं पता पर मुझे महात्मा गांधी की नियत पर शक नहीं होता है महात्मा गांधी ने कहा कि तुम इलेक्शन मत लड़ो मैं
फिर सोचता हूं कि अगर बापू राम ना होते मतलब पटेल राम ना होते कहते कि बापू इलेक्शन तो मैं लडूंगा और देख लेते हैं क्या होता है ऐसा भी क्या है मेरा मानना है कि उस समय कांग्रेस में कोई माइका लालन को हरा नहीं सकता था कोई मायका लाल उनको हरा दे इलेक्शन में यह संभव नहीं था और ये 1946 के बात नहीं है 1950 में उनकी मृत्यु हुई आज ही के दिन उसके दो महीने पहले कांग्रेस के अध्यक्ष चुनाव हुआ उसमें भी वही अध्यक्ष बना जिसको पटेल चाहते थे पुरुषोत्तम दस चन न कि कृपलानी
साहब व इलेक्शन बहुत रोचक था नेहरू जी प्रधानमंत्री थे पटेल प्रधानमंत्री और होम मिनिस्टर थे और 1950 में कांग्रेस का चुनाव दुनिया भर के मीडिया में चल रहा था कि यह प्रधानमंत्री और उप प्रधानमंत्री के बीच का झगड़ा है यह इस वर्चस्व का झगड़ा है कि कांग्रेस पार्टी में किसकी चलती है किसको लोग ज्यादा सम्मान देते हैं किसको लोग ज्यादा मानते हैं और जीते कौन पुरुषोत्तम दास डन जिनको पटेल जी का समर्थन हासिल था मैं यह कहना चाह रहा हूं मेरा उद्देश्य नेहरू जी को नीचे दिखाने का बिल्कुल नहीं मेरा उद्देश्य यह बताना है कि
कांग्रेस संगठन पर उनकी पकड़ कैसी थी और वह अपनी मृत्यु के एक दिन पहले तक की बात कर रहा हूं यदि वह उस समय कह देते कि मैं तो चुनाव लडूंगा मेरे शब्दों पर गौर मत कीजिएगा शब्द कड़वे लग सकते हैं लेकिन उस समय इस देश के किसी नेता में इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनको रोक पाता पर बापू ने कहा कि मत लड़ो उन्होंने एक सेकंड भी नहीं लगाया और पीछे हट गए पूछा भी नहीं कि क्यों कह रहे हैं जैसे राम ने दशरथ से पूछा भी नहीं था कि आप क्यों ऐसा सोच रहे
हैं आपने वचन दिया था मेरी मां को ठीक है उन्होंने वचन मांग लिया ठीक है आपने कहा वनवास पर चले जाओ ठीक है पूछना क्या है इसमें आपने कह दिया हो गया बापू आपने कहा है कि मैं पीछे हट जाऊ कोई वजह रही होगी हो सकता है यह वजह रही हो कि मैं 72 साल का हूं आप 76 साल 7 77 साल के हैं और नेहरू जी अभी 56 साल के हैं हो सकता है आपके मन में यह हो कि कम से कम जो प्रधानमंत्री बने 1015 साल कंटिन्यू कर सके हो सकता है आपके मन
में यह हो कि दुनिया भर के देशों में उनकी पहचान ज्यादा है हो सकते है आपके मन में यह हो कि उनकी छवी लिबरल है तो अल्पसंख्यक इनको देश में लेकर चलना भरोसा पैदा करना ठीक होगा जो भी वजह रही हो मुझे स्वीकार ना करने की जो भी वजह रही हो पर मैं तो टीम प्लेयर हूं और टीम के कैप्टन ने अगर कह दिया है कि बैटिंग प नहीं जाना है तो नहीं जाना है सिंपल सी बात है इसलिए मुझे लगता है कि सबसे बड़ा खिलाड़ी वह है जो कप्तान की बात को टीम के लक्ष्य
को ध्यान रख के बड़ी से बड़ी बात को चुपचाप मान ले 99 रन पर खेलते हुए कैप्टन अगर कह दे डिक्लेयर कर दो तो पूछे नहीं कि एक रम बनाने में क्या दिक्कत थी डिक्लेयर कर दे क्योंकि हमेशा ध्यान रखना है कि मेरे लक्ष्य से बड़ा देश का लक्ष्य है पार्टी का लक्ष्य है और मैं यह बात पुरजोर तरीके से कहना चाहता हूं कि इस देश में जितना बड़ा त्याग पटेल ने किया उतना बड़ा त्याग शायद किसी ने नहीं किया मब महात्मा गांधी तो उस रेस में थे ही नहीं लेकिन जो लोग मंत्री बनने की
प्रक्रिया में शामिल थे अगर मैं उनकी बात करूं जिसके सामने थाली सजा के प्रधानमंत्री का पद रखा हो और उनको यह अच्छे से पता था कि 1946 चल रहा है संविधान बनते बन तीन चार पा साल लग जाएंगे 1951 52 में पहली बार इलेक्शन होंगे पहला पीएम बनेगा और तब मेरी उम्र अगर मैं रहा तो 77 के आसपास होगी और 77 की उम्र में प्रधानमंत्री बनूंगा इस इरादे से कोई चलता नहीं है कम से कम यही नियति को शद मंजूर भी था कि वह 75 के आसपास की उम्र में 1950 में दिसंबर महीने में उनकी
मृत्यु हुई और उनकी मृत्यु के एक साल और कुछ महीनों के बाद इस देश के पहले चुनाव हुए और इससे भी बड़ी बात क्या है महात्मा गांधी थे महात्मा गांधी ने कहा कि भाई देखो मैं कह रहा हूं पीछे हट जाओ हट गए पीछे दशरथ ने कहा कि बेटा ऐसा संकट है राम पीछे हट गए राम वन में है और पता लगा कि दशरथ की मृत्यु हो गई है अगर दशरथ की मृत्यु के बाद राम बोलते कि भाड़ में जाए दुनिया मैं वापस आ रहा हूं देखता हूं कौन मना करता है कौन मना कर लेता
पर नहीं मेरे पिताजी का वायदा था वायदे के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं मतलब एक बहुत प्रसिद्ध गजल का शेर है जैसे एक लाइन है मैं कुछ भी हूं पर एहसान फरामोश नहीं मैं कुछ भी हो सकता हूं एहसान फरामोशी नहीं कर सकता अगर पिताजी को वचन दे दिया और पिताजी की मृत्यु हो गए तो भी वचन पूरा होगा गांधी जी 1948 की जनवरी में इस दुनिया से चले गए थे जिन गांधी जी के वचन का सम्मान था वह तो नहीं है और पटेल 1950 के दिसंबर में गए 22 महीने थे और यदि
वह उस समय ठान लेते कि अब तो गांधी जी है ही नहीं अब कौन रोकेगा पर वही बात है कि वचन दिया है तो दिया है निभाना है तो निभाना है और इसलिए किसी बड़े व्यक्ति की पहचान इससे नहीं होती कि उसने खेड़ा सत्याग्रह किया बडोली सत्याग्रह किया वो तो किया बड़ी बातें है पर सीखने की असली बात होती है चरित्र किरदार कि उस व्यक्ति के अंदर ऐसा क्या था और पूरे स्वाधीनता संग्राम में शायद इतना बड़ा दिल इतना बड़ा जिगर मुझे नहीं लगता किसी और के पास रहा होगा ये उनकी पहली पहचान दूसरी बात
नेता बनना हमें लगता है बहुत आसान काम है मेरा मानना है कि इस दुनिया का सबसे मुश्किल प्रोफेशन नेतागिरी करना है सबसे मुश्किल काम है अच्छा हम जब तक पॉलिटिक्स में नहीं जाते हमको लगता है कि मजाक चल रहा है सब क्या है ऐसे ही है तो लूट जाते हैं लूटते हैं लुटेरे हैं डाकू हैं ये हैं वो है कहना बड़ा आसान होता है एक बार इलेक्शन लड़ के देखिए तब समझ में आता है कि इलेक्शन क्या है पॉलिटिक्स क्या है मुझे आज से सात आ साल पहले कई दोस्तों ने कहा कि तुम पॉलिटिक्स में
चले जाओ तो मेरा पहले मन था पॉलिटिक्स में जाने का जब मैं कॉलेज में आया ही था तब तो एक ही मन था कि पॉलिटिक्स में ही जाना है धीरे धीरे मुझे लगा नहीं उतना अच्छा नहीं है उससे अच्छा पढ़ना पढ़ाना ज्यादा अच्छा है पर मैंने एक प्रयोग करके देखा जिस मोहल्ले में रहता था उस मोहल्ले का इलेक्शन लड़ के मैं वहां का अध्यक्ष बन गया एक ही दिन में इलेक्शन प्रचार के लोग मुझे सम्मान करते थे सब जितवा दिया उनको भी लगा कि फ्री में कार्यकर्ता मिल रहा है तो ठीक है करवा लेते काम
तो फिर मैंने डेढ़ साल काम भी किया और मैंने डेढ़ साल में समझ लिया कि बहुत ही टेढ़ी खीर है लोगों की वैध अवैध उम्मीदें जो कभी खत्म होती ही नहीं उन सबको पूरा करने की नैतिक जिम्मेदारी वेतन आपको मिलना है नहीं वहां से मतलब जिस पद पर मैं था कम से कम वहा तो वेतन भी नहीं मिलता है ऊपर से आप कितने भी ईमानदार हो कीचड़ उछलना ही उछलना है आप अपनी जेब से पैसा खर्च करके कुछ बनवा देंगे तो भी क्या कहा जाएगा जरूर कहीं से कमीशन मिल रहा होगा इतनी गालियां इतनी आलोचनाएं
इसीलिए कहते हैं कि स्टील की नर्व्स हो तो ही पॉलिटिक्स में आना चाहिए चमड़ी बहुत मोटी हो खाल बहुत मोटी हो तो ही पॉलिटिक्स में आना चाहिए वरना नहीं आना चाहिए बहुत मुश्किल होता है मैं तो कल्पना करता हूं कि अगर कभी राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल अखबार पढ़ ले या सोशल मीडिया पर चले जाए और देख ले कि इा पर ट पर उनके बारे में क्याक चल रहा है या ट देख ले एक दिन म किसी बीजेपी वाले का ट किसी दिन राहुल गांधी के हाथ में पड़ जाए एक दिन के लिए और उसमें
देखे कि उनको कहां कहां से क्लिप काट काट के कैसे जोकर साबित किया हुआ है कितना सदमा होता होगा हमें तो चार लोग बुरा बोलते हैं नींद नहीं आती रात को आपको पता लगे कि 150 करोड़ की आबादी में से आधी आपके बारे में ऐसा बोल रही है तो उसके बाद कहां सो पाएंगे क्या नींद आएगी आपको बहुत मुश्किल है इसलिए मेरे मन में तो नेताओं को लेकर अगाध श्रद्धा है अगाध सम्मान है कि जितना यह झेलते हैं उतना दुनिया में कोई नहीं झेल है पूरी दुनिया जो आती है मजाक बना के चली जाती है
जिसका मन करता है वीडियो बना देता है इनके बारे में मतलब पब्लिक प्रॉपर्टी कि जो आएगा थूक देगा जो आएगा एक लगा के चला जाएगा इतना झेलना कोई मजाक थोड़ ना होता है इसके लिए चाहिए कि ऐसा व्यक्तित्व कि आप अपनी भावनाओं पर इतना कंट्रोल करना जानते हो कि आपको क्लियर रहे कि मुझे इन भावनाओं में बहना नहीं है बल्कि अपना उद्देश्य ध्यान रखना है यह सब तो लगा रहेगा और जब आप लोक जीवन में है तो निंदा तो होती है आलोचनाएं होती है झेलनी पड़ेंगी आदत डालनी पड़ेगी और या फिर हम तुलसीदास जी की
तरह इस बात पर सीधे आ जाए हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ कि हानि होगी या लाभ होगा जिएंगे या मरेंगे यश होगा या अपयश होगा यह नियती के हाथ में है मेरे हाथ में नहीं है तो अपयश हो रहा है तो हो रहा है कभी यश भी हो जाएगा ऐसा क्या है पर यह कहना बड़ा आसान है इसको जीना बहुत मुश्किल है कहना तो बहुत आसान है मैंने कहा आपने सुना तालिया बज गई मजा आ गया पर जब अप होता है ना तब ये याद नहीं आता है उस समय तो दिल की
धड़कने बढ़ जाती हैं बीपी बढ़ने लगता है बेचैनी होती है एंजाइटी होती है नींद नहीं आती है और पता नहीं क्याक होता है राम की स्थिति सोच के देखिए बापू मैं बारबार राम का जिक्र कर रहा हूं पटेल जी को समझाने के लिए राम वन के अंदर है और सीता जी ने कहा कि मुझे हिरण चाहिए मैंने स्वर्ण हिरण देखा है व उस समय शायद नहीं समझ पाए कि एक जाल है व लक्ष्मण जा रहे हैं लक्ष्मण ने रेखा खींची है पर जैसा कि नियति है उसमें उनका अपहरण हो जाता है रावण आके अपहरण करता
है और राम वापस आए हैं तुलसीदास जी के यहां राम अपनी पत्नी से इतना प्रेम करते हैं देखिए यह जो भगवान राम है भगवान कृष्ण है ये एक जैसे नहीं है वाल्मीकि के इनका व्यक्तित्व अलग है भवभूति के य अलग है तुलसीदास जी के य अलग है निराला के अलग है क्योंकि कवि अपने समय के हिसाब से अपने आराध्य के व्यक्तित्व को भी बदलता है और अच्छा बनाता है तुलसीदास जी के राम अपनी पत्नी से इतनी मोहब्बत करते हैं इतना प्रेम करते हैं मतलब इतना मजबूत व्यक्ति जो पिता के कहने पर बिना एक सेकंड लगाए
सत्ता छोड़ दे और उसकी आंख में आंसू तक ना आए कोई आंसू नहीं है कुछ नहीं है दो कोड़ी की चीजें छोड़ दी उसम ऐसा क्या है पर वन में अकेले हैं केवल एक भाई के साथ ना सेना है ना हाथी है ना घोड़े हैं ना कुछ है और पत्नी का अपहरण हो गया है अभी राम को यह पता भी नहीं कि क्या हुआ है वो तो देख रहे कि सीता मिल नहीं रही इतना भावुक आपने राम को शायद ना देखा हो बांगला भाषा में एक रामायण है कृति वास रामायण उसमें राम बहुत भावुक है
आंसू के साथ रोते हैं उसमें वह कई बार रोए हैं पर हिंदी के समाज में जो राम है उनकी छवि रोने वाली नहीं है उसमें व रोते नहीं है मजबूत रहते हैं लेकिन रामचरित मानस में भी एक बार उनकी आंखें भर आई है इस मौके पर इतने परेशान है कोई मिल दिरा किससे पूछे जंगल में और अंत में पक्षियों से पूछ रहे हैं हे खग मृग हे मधुकर श्रेणी हे पक्षी हे हिरण हे मधुक की पंक्ति हे भवर की पंक्ति तुम देखी सीता मृग न नहीं क्या तुमने देखा है सीता को जिसकी आंखें मृग जैसी
है यह भगवान राम है इतना मजबूत व्यक्ति जो सत्ता जाने पर एक सेकंड को हिल तक दे रहा है जिको सत्ता का लोभ है ही नहीं जब उसकी पत्नी उसको नहीं मिल रही है तो भावनाओं में बहकर पक्षियों से हिरणों से भवर से पूछ रहे हैं कि क्या तुमने सीता को देखा है और फिर थोड़ी देर बाद पता लगता है जटायु से कि दुनिया के सबसे ताकतवर राजा ने उसका अपहरण किया है वो राजा जिसको भगवान शिव का वरदान हासिल है वह राजा जिसका बेटा मेघनाथ इंद्र को हरा चुका है उस राजा ने इनकी पत्नी
का अपहरण किया है और यह जंगल में है वनवास के नियम के तहत अयोध्या की सेना को भी नहीं बुला सकते हैं उस राजा से समुद्र पार करके लड़ना है बिना सेना के लड़ना है और नहीं लड़ेंगे तो सीता की मुक्ति कैसे होगी 1908 में आ जाइए पटेल का विवाह थोड़ा जल्दी उम्र में हुआ जैसा कि उस दौर में होता था सबका ही होता था तो उनका भी हो गया था बहुत जिक्र नहीं मिलता लेकिन ऐसा माना जाता है कि वह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे सम्मान भी करते थे उनकी पत्नी को तबीयत
खराब हुई कुछ इंफेक्शन हुआ मुंबई लेकर गए 1908 में कामा अस्पताल वहां का अच्छा बड़ा अस्पताल था वहा उनका एडमिशन हुआ डॉक्टर ने कहा कुछ दिन दवाइया देंगे ठीक हो जाएंगी तो सर्जरी करनी पड़ सकती है लेकिन कुछ दिन दवाइयों पर चलेगा दवाइयां होने लगी कुछ ठीक होने लगी इतने में आनंद से एक जानकारी आई कि उनका एक परिचित उसके ऊपर सरकार ने हत्या का मुकदमा लगा दिया है और उसने कहा कि आप क्योंकि पटेल इंग्लैंड से पढ़ के बैरिस्टर थे कोई मजाक तो था नहीं उनकी तूती बोलती थी अपनी वकालत में मित्र ने कहा
कि आप आएंगे तो बच पाऊंगा वरना तो इस सरकार का इरादा कुछ सही लग नहीं रहा है तो पत्नी को ठीक स्थिति में देखकर यह कह के कि मैं दो चार दिन में छुड़ा के आता हूं आनंद आ गए वापस संयोग से उसके दो दिन के बाद डॉक्टर ने पाया कि आज स्थितियां ठीक है सारे जो पैरामीटर से ठीक है आज ही सर्जरी करना ठीक रहेगा तो सर्जरी कर दी उनकी एब्सेंट में कर दी और शाम को तार भेजा कि ऑपरेशन हो गया है आपकी पत्नी ठीक है तो इनको भी सुकून था अगले दिन भी
कोर्ट में तारीख लगी हुई थी उस मुवक्किल को बचाने की अगले दिन यह अदालत में केस लड़ रहे हैं अपने मुवक्किल को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और ठीक उस समय उनकी पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ी और देहांत हो गया मृत्यु हो गई 33 34 की उम्र थी उस समय सरदार पटेल की उतनी सी उम्र में उनके पत्नी की मृत्यु हो गई वहां से तार हुआ तार पहुंचा और यह अदालत में केस लड़ ही रहे हैं और एक परिचित ने आकर उनके हाथ में तार थमा दिया और उस समय वह अपने दोस्त को बचाने
के लिए दूसरे पक्ष के गवाह का क्रॉस एग्जामिन कर रहे हैं तार पढ़ा तार में लिखा है कि आपकी पत्नी की मृत्यु हो गई है लगभग वही स्थिति है ऐसे में कौन काम करना चाहेगा कोई भीय चाहेगा कि फिलहाल मैं यहां से जाऊं दुख अपना कम करूं परिवार के साथ बैठूं और उनके दिल में एक ही बात आ रही है कि मेरा निजी दुख तो अपनी जगह है लेकिन अगर मैं इस बिंदु पर हट गया तो वह तो चली गई ऐसा ना हो कि यह भी चला जाए और एक दो मिनट का अंतराल मन ही
मन में अपने आप से बातचीत तार को मोड़ के जेब में रखा जिरह की दोस्त को बचाया और कार्यवाही खत्म होने के बाद दोस्त ने पूछा क्या तार आया था और तब पहली बार किसी को पता लगा इतनी बड़ी बात हो गई है यूं मुझे लगता है कि पत्नी की मृत्यु पर इतना कोई कैसे निष्ठुर हो सकता है लेकिन जब बड़ा उद्देश्य सामने हो तो हमें शायद ये हक भी नहीं होता कि हम निजी दुखों को किसी दूसरे के भावी संकट की तुलना में तरजीह दें ज्यादा महत्व दें जिसमें अपनी भावनाओं पर इतना नियंत्रण करने
की सामर्थ्य होती है सच्चा नेता वही होता है यह हर किसी के बस की बात नहीं है बहुत ताकत चाहिए ऐसा होने के लिए अब ऐसे व्यक्तित्व से जुड़ा व्यक्ति जब स्वाधीनता संग्राम में उतरेगा तो सीधी सी बात है वह छोटे कद का तो नहीं होगा जो इंग्लैंड से पढ़कर आया हो जिसको सिगार पीना भी आता हो और जिसको शाम के समय अंग्रेजों की संगत में होकर कोट पेंट पहन के सिगार पीने और अंग्रेजी बोलने का लहजा भी आता हो और उसी को अगली सुबह बारडोली के किसानों के साथ आप बैठे हुए देखें बैलगाड़ी में
धोती पहने हुए एकदम गांव के आदमी की तरह तो आपको समझ में आता है कि एक व्यक्ति के कितने रूप कितने चेहरे हो सकते हैं जो सिगरेट पीने का आदि हो किंतु जेल में जाए और जेल का जेलर अंग्रेज जेलर कहे कि मैं आपके लिए सिगरेट की व्यवस्था कर दूंगा और वो कहे आपसे सिगरेट लेने से बेहतर है आज के बाद ना ही पिऊ और जिंदगी भर ना पिए उसके बाद वो बड़ी बातें तो दुनिया जानती है लेकिन जो बातें किसी के किरदार को बनाती हैं असली बातें तो वो है और 1947 में वह घड़ी
आती है जो भारत के आज तक के इतिहास का सबसे मुश्किल समय है 1947 में हम आजाद हुए वो तो ठीक है आजाद हुए पर आजाद होना घटना नहीं है एक प्रक्रिया है एक प्रोसेस है लंबा प्रोसेस है जो कई साल चलता है और वो कई साल यूं ही नहीं निकलते हैं उसको निकालने के लिए बहुत बहुत लोगों को बहुत कुर्बानियां देनी पड़ती हैं अंग्रेज 1942 47 से ही भड़काने में लगे हैं कि रियासतों के राजाओं की मर्जी है कि भारत का हिस्सा बनना चाहे पाकिस्तान का हिस्सा बनना चाहे या आजाद रहना चाहे और जो
भारत आज आप देख रहे हैं वह भारत ऐसा नहीं था यह सूरत भी आजाद ना होता अगर पटेल ना होते तो यह सूरत इसी सूरत की बात कर रहा हूं मुझे नहीं पता कि यह जगह सूरत जिले में आती है नहीं पर मैं सूरत की बात कर रहा हूं उस समय के भारत में अंग्रेजों का भारत तो एक हिस्सा था 50 से 60 पर समझ लीजिए जिसको आज हम भारत कहते हैं उसका मुश्किल से 55 से 60 प्र हिस्सा अंग्रेजों के हाथ में था 40 प्र हिस्सा ऐसा था जो रियासतों के पास था राजाओं के
पास था उन राजाओं को अंग्रेजों ने गारंटी दी हुई थी कि अगर तुम पर किसी ने हमला किया या अंदर से विद्रोह हुआ तो हम बचाएंगे तुम्हें इसे बोलते प्रोटेक्टरेट कि तुम हमारे प्रोटेक्टरेट हो हम तुम्हें बचाएंगे लेकिन राजा तुम रहोगे सुरक्षा हम देंगे इसके बदले हम इतना पैसा देते रहो तो हम तु परेशान नहीं करेंगे और अब अंग्रेज कह रहे हैं कि हम तो छोड़ देंगे रियासतों का रियासत खुद जाने फिर कुछ इलाके फ्रांस के हाथ में थे पॉन्डिचेरी जिसको हम कहते हैं आजकल माहे है ककल है यन है चंद्रनगर जो पश्चिम बंगाल का
हिस्सा है यह सब फ्रांस के हाथ में था पुर्तगाल के इलाके थे आपका पड़ोस का इलाका दमन दीव दादानगर हवेली गोवा यह सब पुर्तगाल के पास थे यह कैसे मिलेंगे भारत को और रियासतों में से कई रिस मन बना चुकी हैं कि हम तो भारत का हिस्सा नहीं बनेंगे भाई कुछ भारत के भूगोल में होकर कह रहे कि पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे जूनागढ़ आपका पड़ोस का हैदराबाद सबसे बड़ी रियासत जिसके कुछ हिस्से आजकल तमिलनाडु में है कुछ हिस्से तेलंगाना में है कुछ हिस्से कर्नाटक में कुछ महाराष्ट्र में है इतनी बड़ी रियासत थी देश की सबसे
बड़ी रियासत उसका निजाम कह रहा है कि हम तो आजाद रहेंगे क्योंकि पाकिस्तान ने उसे सपोर्ट किया कि हम साथ देंगे तुम्हारा उधर कश्मीर कश्मीर तो बॉर्डर पर है फिर भी एक संभावना बनती थी कि पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा भारत का बनेगा पर हैदराबाद कैसे सोच सकता था 562 के आसपास रियासतें हैं उधर केरल में त्रावणकोर की रियासत कोचीन की रियासत अलग-अलग वह आजाद होने के मूड में है क्योंकि अंग्रेज कह रहे कि तुम्हारे पास न्यूक्लियर मटेरियल है तुम्हारी जमीन के नीचे हम तुम्हें सपोर्ट करेंगे उनको परमाणु बनाने हैं और वो जो उसका रॉ मटेरियल
चाहिए वो तण के नीचे दबा हुआ है इधर राजा को शौक चढ़ गया कि हम तो अलग रहेंगे जितने राजा उतने शौक उन सबको मनाना है नेहरू जी और पटेल जी की तुलना मैं करने से बचता हूं लेकिन नेहरू जी के आदर्श बड़े सुंदर हैं पर यथार्थ की जमीन पर कैसे मैनेज करना है उस मामले में पटेल का कोई मुकाबला नहीं था कोई मुकाबला नहीं था और महात्मा गांधी ने खुद कहा है कि यह काम इस देश में एक ही इंसान कर सकता था और वह थे सरदार वल्लभ भाई पटेल कोई और कर नहीं सकता
था और इसलिए 1947 में एक मंत्रालय बनाया गया जिसको स्टेट मतलब रियासती मंत्रालय हिंदी में बोल देते हैं वह एक एडिशनल मिनिस्ट्री दी गई पटेल को वीपी मेनन उसके सचिव बने सेक्रेटरी बने और इनका काम क्या था भारत को एक करना है जो 19 सेंचुरी में इटली में मेजनी गैरीबाल्डी और कवू ने किया था जो 19 सेंचुरी के अंतिम हिस्से में बिसमार्क ने जर्मनी में किया जर्मन भाषी लोगों को थोड़ा डेनमार्क से लिया थोड़ा अलग से लिया थोड़ा प्रशा से बात करके लिया और किसी तरह से जर्मनी को बना दिया जर्मनी ठीक वैसे ही जो
1776 के आसपास जॉर्ज वाशिंगटन ने अमेरिक के 13 राज्यों को मिलाकर अमेरिका बनाया था और जब 18610 राज्यों ने छोड़ के नया देश बना लिया और अब्राहम लिंकन ने युद्ध लड़ के उन सातों राज्यों को वापस अमेरिका का हिस्सा बना के अमेरिका को एक रखने की हिम्मत दिखाई थी अब भारत के सामने कुछ कुछ वैसी ही ऐतिहासिक चुनौती थी कि यह देश एक बन पाएगा या नहीं बन पाएगा मैं कल्पना करता हूं कि अगर पटेल ना होते उस समय और मुझे दिल्ली से यहां आना होता तो वीजा लेकर आना पड़ता सूरत का वीजा और यदि
कार से आता तो बीच में पांच वीजा और लगवाने पड़ते भोपाल का अलग वीजा लगता सूरत का अलग वीजा लगता हैदराबाद जाऊ तो वहां का वीजा अलग इन सब देशों के पास अपनी सेनाएं होती पुलिस नहीं सेनाएं सबकी अपनी अपनी करेंसी होती और युद्ध भारत पाकिस्तान में नहीं होता भारत और भोपाल में हो रहा होता भारत और हैदराबाद में युद्ध हो गया और सूरत भारत के साथ है ऐसी खबरें सुन रहे होते हम लोग मेरे पास भारत का पासपोर्ट होता आपके पास सूरत का पासपोर्ट होता अगर वह नौबत नहीं आई है और आप कश्मीर से
कन्याकुमारी बेधड़क घूम सकते हैं तो इसके लिए जो प्रैक्टिकल विजडम थी ना कैसे मनाना है प्यार से मनाना है चाबुक भी रखना है साथ में लेकिन मनाना प्यार से है अलग-अलग राजा को अलग-अलग प्रपोजल देक प्रलोभन देके डॉक्यूमेंट अलग-अलग बना के जोड़ना है बड़े राजाओं को यह ना लगे कि छोटे राजा के बराबर कैसे मान लिया हमें तो उनको संविधान में प्रमुख पद राज्य प्रमुख का अलग से बनाकर देना है वो सब करना है और 562 में से 559 में केवल बातचीत से कोई समाधान कर ले इसको 99.9 पर रिजल्ट कहते हैं 562 में 559
को बिना एक भी लाठी मारे समझा देना कि भारत का हिस्सा बन जाओ और बाकी तीन में से दो को पता भी ना चले क्या हुआ जूनागढ़ और हैदर आज तक परेशान है हैदराबाद में क्या हुआ एक साल के स्टैंड सेल एग्रीमेंट के बाद जब पटेल समझ गए कि मामला नहीं सुलझे कहते हैं कि नेहरू जी की भी सहमति लिए बिना आमतौर पर उ सहमति रहती थी हर मामले में इस मामले में कहते हैं कि थोड़ी तकरार हुई तकरार होती थी होनी भी चाहिए भाई दो लोग एकदम एक सा सोचेंगे तो फिर दो क्यों है
एक ही काफी है दो पॉइंट ऑफ व्यू है तभी तो दो लोग हैं दो लोग कमरे के अंदर झगड़ा करें फिर एक बिंदु पर आए बाहर निकल के वही काम करें यही होता है इलेक्शन और यही होती है मंत्रिमंडल की नीति और सेना को घुसा दिया हैदराबाद के अंदर तीन दिन का काम था काम खत्म हुआ और जब तक सिक्योरिटी काउंसिल में पहुंचे नवाब साहब निजाम साहब तो पटेल ने कहा नहीं नहीं सेना नहीं गई थी पुलिस गई थी पुलिस एक्शन था भाई और तब तक हैदराबाद भारत का हिस्सा हो चुका था कि जहां बातचीत
से काम नहीं बनेगा वहां लाठी का इस्तेमाल भी करेंगे लेकिन देश को एक करने का उद्देश्य छोटी मोटी नीतियों से कि हिंसा अहिंसा य सेकेंडरी बात है पहली बात है कि देश एक है तो हम है वरना व सब बेईमानी बातें हैं जिस लक्ष द्वीप में प्रधानमंत्री कुछ दिन पहले गए और जिसको लेकर मौल दिवस बहुत परेशान हो गया आपको आश्चर्य होगा कि वो आज भारत में क्यों है इसकी अकेली वजह है कि सरदार पटेल को ध्यान आ गया कि पाकिस्तान की नियत खराब हो सकती है उस समय तो लक्षद्वीप क्योंकि वहां ट्राइबल लोग रहते
हैं उनको ना भारत पता था ना पाकिस्तान पता था बस यह था कि वो जिस लोकेशन पर है उस लोकेशन पर अगर पाकिस्तान होता तो भारत के लिए खतरा हमेशा बन जाता और उसके पास तर्क था लक्षद्वीप के 90 पर से ऊपर लोग बल्कि 99 के आसपास मुसलमान लोग हैं तो हम हमारा होना चाहिए सरदार पटेल ने भाप लिया कि इनके दिमाग में क्या चल रहा होगा तुरंत नौसेना को आदेश दिया कि जाक कब्जा करो सेना गई तिरंगा झंडा गाड़ा और दूर देखा पाकिस्तान के जहाज आ रहे थे पर तिरंगा देख केर लौट गए लक्षद्वीप
भारत सिर्फ इसलिए है कि सरदार पटेल को समय रहते ध्यान आ गया था और आदेश देकर सेना को भेज दिया था और जब देश आजाद हुआ उनका अंतिम कंट्रीब्यूशन क्योंकि जब मुझे आमंत्रित किया गया तो मन संचालक करण करण नाम आपका है ना करण जी ने कहा कि सिविल सेवाओं में सरदार पटेल की बहुत बड़ी भूमिका है और आज एक सिविल सेवक खुद आए हैं तो उस पर बात होनी चाहिए तो एक अंतिम जिक्र करके मेरे ख्याल समय हो भी गया होगा ठीक ठाक तो उसके बाद बात समाप्त करते हैं उस समय एक सर्विस चलती
थी आईसीएस आपके जो बड़े बूढ़े लोग हैं माता-पिता हैं वो जानते होंगे इंडियन सिविल सर्विस अंग्रेज लोग चलाते थे इंग्लैंड में एग्जाम होता था ट्रेनिंग इंग्लैंड में थोड़ी भारत में होती थी कलकाता में फोर्ट विलियम कॉलेज में भी होती थी ट्रेनिंग और वो लोग इस पूरे देश को चलाया करते थे ऐसे ही एक ब्रिटिश सिविल सेवक से पटेल का पहला झगड़ा अहमदाबाद म्युनिसिपल में संभवत हुआ था और उनको समझ में आ गया था कि सिविल सेवाओं को हैंडल किए बिना यह देश चल नहीं पाएगा नेहरू जी के मन में भी स्पष्ट था कि सिविल सेवक
अंग्रेजों का वेतन लेते हैं और यह भारत के नहीं है जो अंग्रेज है वह तो हैं ही जो भारत के लोग सिविल सेवक हैं वह भी भारतीय नहीं है दिमाग से अंग्रेज लोग हैं उनको देश से मतलब नहीं है वह अंग्रेजों की तरफ से भारतीय स्वाधीनता संग्राम के खिलाफ खड़े हुए थे यही बात पुलिस के लिए थी जिसको आज आईपीएस बोलते हैं उस समय उसको आईपी बोलते थे इंडियन पुलिस आजादी जैसे जैसे पास आ रही थी सारे कांग्रेस के नेता नेहरू जी खासतौर पर इस आईसीएस और कुछ हद तक आईपी को लेकर बहुत नेगेटिव मानसिकता
से हुए थे कि यह लोग देश को चला नहीं पाएंगे इनको हटाना बहुत जरूरी है शुरू में पटेल भी ऐसा सोचते थे विशेष रूप से गोरे सिविल सेवकों को लेकर जो विदेश से आए थे पर मैंने कहा ना कि पटेल के अंदर एक खास बुद्धि थी जो यथार्थ समस्याओं का यथार्थ समाधान ढूंढ पाती थी हवाई बात करना बहुत आसान होता है लेकिन प्रैक्टिकल सिचुएशन में जाकर चीज को हैंडल करना समा करना उसके लिए अलग स्किल्स चाहिए होती पटेल होम मिनिस्टर थे देश संभालना उनको था पाकिस्तान बनने का फैसला हो गया था बहुत सारे मुसलमान यहां
से पाकिस्तान जा रहे हैं बहुत सारे हिंदू पाकिस्तान से भारत आ रहे हैं यह वेस्ट पाकिस्तान में भी हो रहा है ईस्ट पाकिस्तान में भी हो रहा ईस्ट पाकिस्तान जिसको बांग्लादेश कहते हैं उसमें भी हो रहा है और बार-बार उस समय तो खबरें जानने का बहुत कम साजन थे और ऐसी अफवाह बारबार उड़ रही है कि य इतने मुसलमान मार दिए गए य इतने हिंदू मार दिए गए और एक अफवा उड़ते ही दंगा शुरू होता था हजारों लोग मर जाते थे क्योंकि अफवा उड़ गई है उन अफवाहों के बीच में देश के हर नागरिक को
सुरक्षित रखना भारत के मुसलमानों को सिखों को यहूदियों को पारसियों को जैनों को यह विश्वास दिलाना कि आप भारत में सुरक्षित है यह होम मिनिस्टर के जिम्मेदारी है और होम मिनिस्टर य कैसे करेगा जब तक उसके पास ऐसे प्रशासक ना हो जिनको एक जिला संभालना आता हो एक राज्य संभालना आता हो जिन्होंने पिछले 20 30 साल तक यही काम किया हो 40 पर के आसपास सिविल सेवक उस समय जा चुके हैं वापस इंग्लैंड आधी सिविल सेवक बचे हुए हैं जो एक जिला संभाल सकता है वह तीन-तीन जिलों का इलाका संभाल रहा है और ऊपर से
रोज कांग्रेस गालिया खा रहा है कि देश दोही लोग हैं और पटेल साफसाफ देख रहे हैं कि अगर यह लोग हट गए उन्होंने कहा कांग्रेस के लोगों से कि अगर आपको लगता है कांग्रेस के स्वयंसेवक जिले चला लेंगे तो चलवा के देख लीजिए एक तो चलवा के देखिए पहले यह मजाक नहीं है प्रशासन चलाना जिनको 202 303 साल का अनुभव है वो नहीं संभाल पा रहे और आप चलवा जाएंगे इन स्वयंसेवकों से संविधान सभा की बैठक चल रही है ऑल इंडिया सर्विसेस आईएस आईपीएस पर बात चल रही है नौ सर्विसेस में से सात को हटाने
की सहमति बन चुकी है ऑल इंडिया सर्विस का मतलब यह होता है वह सर्विस जो केंद्र सिलेक्शन करता है और राज्यों में लोग काम करते हैं जो बात पटेल ने कही थी मैं भी आपसे कह रहा हूं पाकिस्तान एक देश नहीं बचा है वह पाकिस्तान है और बांग्लादेश है कुछ भरोसा नहीं कि बलूचिस्तान भी हो जाए युगोस्लाविया के छह देश बन चुके हैं चेकोस्लोवाकिया के दो टुकड़े हो चुके हैं यूएसएसआर के 15 हिस्से हो चुके हैं और यह सब कुछ पिछले 50 से 100 साल में हुआ है भारत एक ही है अब तक जो सिक्किम
भारत में नहीं था वह सिक्किम भारत में आ गया है उसमें इंदिरा गांधी की बड़ी भूमिका थी उनका सम्मान करना चाहिए हमें नागालैंड आजादी के समय से ही भारत से अलग होने का प्रयास कर रहा था नाराज था आज तक भारत में बना हुआ है मेघालय में मिजोरम में बहुत विवाद हुए पर भारत में है केरल तमिलनाडु में भी कभी-कभी छोटे मोटे विवाद हुए पर भारत में ही है और इन सबके भारत में होने के पीछे ना कोई नारा काम करता है ना बड़ी बड़ी बातें काम आती हैं जो चीज सबसे ज्यादा काम आती है
वह है ऑल इंडिया सर्विसेस आईएएस आईपीएस और बाद में एक आईएफएस बनी जिसको हम फॉरेस्ट सर्विस वन सेवा कहते हैं क्यों क्योंकि आपको सेंट्रल सर्विस स्टेट सर्विस ऑल इंडिया सर्विस का अंतर शायद ना पता हो सेंट्रल सर्विस की सेवा है केंद्र के काम केंद्र के लोग केंद्र का ही काम करेंगे राज्य की सेवा स्टेट सर्विस स्टेट की सर्विस है राज्य सिलेक्शन करेगा राज्य ट्रेनिंग देगा राज्य नौकरी पर रगा ट्रांसफर करेगा पोस्टिंग करेगा रिटायरमेंट होगी पेंशन देगा सब कुछ राज्य करेगा राज्य चाहते थे कि केंद्र के लोग हम पर दखल ना दे पटेल देख पा रहे
थे कि अगर केंद्र का कंट्रोल नहीं हुआ तोय राज्य भारत में रहेंगे ही नहीं और उन्होंने दुनिया का सबसे अनूठा कांसेप्ट दिया ऑल इंडिया सर्विस जो दुनिया के किसी और देश में नहीं केवल भारत में और व कांसेप्ट क्या है आईएस और आईपीएस पहले न सर्विसेस से सात तो चले ग दो बज आईस और आईपीएस सिलेक्शन केंद्र करेगा ट्रेनिंग केंद्र करवाएगा मसूरी और हैदराबाद में उनकी पोस्टिंग राज्य में होगी हर राज्य में दो तिहाई आईएएस और आईपीएस अन्य राज्यों के होंगे उस राज्य के नहीं होंगे किसी भी राज्य में एक तिहाई से ज्यादा होम कार्डर
के लोग नहीं हो सकते दो तिहाई बाहर के ही होंगे और किसी भी राज्य के प्रशासन के सारे ऊंचे पद डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर या जिसको आप डीसी कहते होंगे या जो भी नाम कलेक्टर चलता होगा जो भी चलता होगा कहीं डीएम बोलते हैं कहीं कलेक्टर बोलते कहीं डीसी बोलते हैं बात जिले का हड जो होता है जिले का हेड जिले का पुलिस का हेड एसपी और उनसे ऊपर के प्रशासन और पुलिस के सारे पद केवल आईएस और आईपीएस के पास होते हैं लगभग 90 पर से ऊपर अगर भारत एक है तो इसलिए है कि चाहे नागालैंड
हो मैं किसी राज्य के बारे में गलत नहीं बोलना चाह रहा हूं सारे राज्य भारत के उतने ही हिस्से हैं जितने हम लोग हैं पर जहां जहां आंदोलन हुए मैं इसलिए कह रहा हूं चाहे जम्मू कश्मीर हो चाहे नागालैंड हो चाहे कोई भी राज्य हो उस राज्य के प्रशासन के और पुलिस के सबसे ऊंचे पदों पर बैठे हुए हर तीन में से दो अन्य राज्यों के लोग हैं और उनके होते हुए उस राज्य के नेता बहक भी जाएं तो भी प्रशासन देश के हित में रहता है और अगर इतनी गहरी सोच उस समय पटेल ना
लाते हालांकि य सोच कुछ मात्रा में पहले से आ रही थी अंग्रेज भी ला रहे थे लेकिन संविधान सभा अड़ी हुई थी कि आईसीएस को नहीं चलने देना है ऑल इंडिया सर्विस को लेकर राज्य अड़े हुए थे कि हम केंद्र का नियंत्रण अपने ऊपर नहीं चाहते हैं संविधान सभा में पटेल साहब के भाषण से पहले तक माहौल यह था कि नहीं चलेगा और अक्टूबर 1900 47 की मेरे ख्याल से बात है नहीं 48 की शद बात है अगर आपने सरदार पटेल की वो स्पीच नहीं पढ़ी है तो संविधान सभा की बहसों में से ढूंढ के
पढ़ी है उनकी स्पीच थी और उसके बाद इस संविधान का अनुच्छेद 312 और 314 संविधान सभा ने सर्वसम्मति से पास किए और पास कर दिए तो आज तक हम है नहीं तो तो आज मैं वीजा लेकर यहां पर आता मेरे ख्याल से मैंने पर्याप्त बात अपनी तरफ से कर ली है मैं बहुत धन्यवाद करूंगा फिर से धन्यवाद करूंगा डॉक्टर साहब का इतने सुंदर माहौल में आपने मुझे बुलाया मेरे मेरे आने से आपको कितना लाभ हुआ मुझे नहीं पता पर मेरे लिए यह दिन अपने जीवन के सबसे पवित्र दिनों में से एक है और मैं उसके
लिए बहुत शुक्र गुजार सरदार साहब के चरित्र का जो दर्शन डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी ने हमें करवाया है उसके लिए मरहूम शायर फहम बदाय जी याद आ रहे हैं अच्छे खासे कफस में रहते थे जाने क्यों आसमान दिखा दिया सर आपका तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं विचार यज्ञ के आचार्य पद्मश्री डॉक्टर गुणवंत शाह यह कहते हैं कि मुरारी बापू के अस्तित्व काल में हम है यह हमारा सभागार पहले स्वराज आश्रम के यही मैदान पर सरदार सवास और उत्तमचंद शाह शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रिय बापू ने हमारे बीच उपस्थित रहकर आशीर्वचन दिए
थे प्रिय बापू ने सरदार स्मरण में मानस लोह पुरुष राम कथा का गान किया विश्व भर में राम रूपी सत्य का बीज बोकर अपनी करुणामय वाणी से उसका सिंचन करके मानव मन में प्रेम की खेती करने वाले प्रिय बापू के लिए हम क्या कहे नगीन बापा हमेशा कहते थे कि मुरारी बापू यानी मुरारी बापू यानी मोरारी बापू गोस्वामी तुलसीदास जी कृत वैराग्य संदीपनी की एक चौपाई कहना चाहता हूं अति शीतल अति ही सुखदाई समदम राम भजन अधिका जड़ जी वन को करे सचेता जग मह बचर है ही हेता विश्व मानव समुदाय को सत्य प्रेम और
अहिंसा की प्रस्थान त्रय से सचेतन करने वाले प्रिय मुरारी बापू को सरदार संगोष्ठी में आशीर्वचन के लिए प्रार्थना करता हूं प्रिय मुरारी बापू श्री रामचंद्र शरणम प्रप श्री राम दूतम शरणम प्रप सबसे पहले सरदार पटेल साहिब की परम चेतना को प्रणाम करता हूं विश्व वंद्य महात्मा गांधी बापू का भी स्मरण कर रहा हूं और इतनी सालों से य सात्विक कार्यक्रम चल रहा है इसमें जो मूल आधार है ऐसी पूजनीय मां आपको प्रणाम करता हूं इस संस्था के प्रमुख श्री आदरणीय वडील और आप आपकी पूरी टीम आप सभी मेरे भाई बहन और भगवत कृपा से आज
हम सबको एक ऐसे वक्ता को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ ऐसे डॉक्टर दिव्य कीर्ति जी साहब मैं इतनी सालों से निरंतर बोल रहा हूं और निरंतर वक्ताओं को सुन रहा हूं लेकिन इतनी मधुर भाषा में किसी को भी जरा ठेस ना लगे और डिटेल में जरा भी विषयात हुए बिना जो प्रवचन आज एक श्रोता के रूप में मुरारी बापू ने सुना ऐसे प्रवचन कम सुनने को मिलता है यह मेरी श्रवण भक्ति कहती है क्योंकि समझदार को श्रवण करना यह केवल सुनना नहीं है भजन है भक्ति है तो मैंने आपको पहली बार अच्छे ढंग से सुना
में बहुत प्रसन्नता व्यक्त करता हूं तो आप सभी को मैं प्रणाम करता हूं एक शेर सुनाना चाहता हूं कि [संगीत] यहां कोई आया भी है और अभी ठहरा भी है कोई यहां आया भी है और अभी ठहरा भी है क्योंकि घर की देहलीज पर उजाला है बहुत सरदार पटेल साहब यहां आए थे और ठहरे भी है आज भी अखबार में मैंने पढ़ा कि कुछ भारतीय अपने भाई बहनों ने ऐसी मांग की है आज क्योंकि आपका निर्वाण दिन है कि दिल्ली में सरदार पटेल का कोई ऐसा समाधि स्थान अथवा तो कोई ऐसी जगह होनी चाहिए वह
तो अच्छी बात है लेकिन इन भाई बहनों को मैं कहूंगा कि हो तो बहुत अच्छी हम जाएंगे वहीं लेकिन ना हो तो आप बारडोली आ जाना यहां अनबिल्ट जिसका कोई नक्शा नहीं है जिसकी कोई रूप रेखा नहीं है ऐसा बारडोली स्वयं यह स्वराज आश्रम मेरी दृष्टि में उपाधि का स्थान नहीं है समाधि का स्थान है और यहां जो उपाधि प्रकट तो समझना हम सरदार को समझ नहीं पाए यह उसकी समाधि का स्थान है तो ऐसी भूमि पर मैं आता हूं य मेरे लिए बहुत मंगल सगुन है आपने कहा कि इस परिसर में मैंने प्रवेश किया
बच्चों को देखा यह सब देखा और आप इससे बहुत आपको अच्छा लगा और दिल खोलकर आपने यह बातें बताई तो इस स्थान मेरी समझ में क्योंकि मैं उसी कमरे में इतनी सालों से रह रहा हूं जहां सरदार सोते थे बैठते थे सोचते थे कि क्या करना है तो मेरे लिए यह स्थान स्वच्छ ही नहीं स्वच्छ तो है ही डॉक्टर बहुत ध्यान रखती है कमरे स्वच्छ तो है ही शुद्ध भी है लेकिन मुरा बापू को कहने दो मेरे लिए स्थान बहुत पवित्र है और यहां मुझे बोलना नहीं चाहिए क्योंकि मैं भी मां की तरह इस संगोष्ठी
का एक यजमान हूं मैं क्या कहूं और मैं सरदार के बारे में कुछ बातें कर लेता हूं व कभी-कभी जय भाई को सुनकर कभी-कभी आपने जो किताबों में उल्लेख किया है उसका अवलोकन करके कभी बदरा भाई ने किया हो कभी गांधी काल के जो वरिष्ठ महानुभावों ने सरदार के प्रति अपना जो भाव पेश किया हो अथवा तो आदरणीय गुणन भाई शाह ने कुछ बताया हो यह सबको पढ़ते अथवा र नगीन बापा अथवा मां से कोई बात करते करते तो वह मैं अवलोकन करता रहता हूं इसमें से जो कुछ मिलता है वह मैं आपके सामने थोड़े
समय के लिए पेश कर देता हूं रामचरित मानस लेकर दुनिया में घूम रहा आपकी शुभना शुभकामना से तो मैंने महापुरुषों के बारे में जो कुछ पढ़ा हो सुना हो इनमें से एक में निर्णय मैंने एक मूर्ति गड़ी है केवल प्रतिमा नहीं एक प्रतिभा का दर्शन किया है जिसमें पांच वस्तु हो वह मेरी दृष्टि में मेरे लिए एक विभूति कही जाए पांच वस् जैसे हमारे शरीर में पंच तत्व होते हैं वैसे कई कई विग्रह में यह पांच वस्तु एक साथ विद्यमान होती मुझे हिंदी में बोलना है कि गुजराती में बोलना अच्छा हिंदी में हिंदी में हमारा
हिंदी गुजराती हिंदी होता है तो मुझे लगा कि यह पांच वस्तु ऐसी विभूतियों में होती है और यह पांच वस्तु मुझे सरदार नामक विभूति में भी दिखती है प्रतिमा तो में कई बार कई प्रतिमाओं का अनावरण करने जाना पड़ता है प्रतिमा तो किसी धातु से हम बना लेते हैं श्रीमद् भागवत जी में कई प्रकार की प्रतिमाओं का उल्लेख है कि बालू की आप बना सकते हैं मिट्टी के जैसे हम छोटे थे शिवलिंग बालू का बनाते थे सावन महीने में फिर विसर्जित कर देते थे बालू की भी प्रतिमा बन सकती मिट्टी की भी प्रतिमा बन सकती
बनाते हैं लोग धातुओं की बनती है पंच धातुओं की बनती है सक्षम लोग स्वर्ण की बना देते हैं हीरा हीरो की बना देते हैं जगन्नाथ पुरी में जगन्नाथ लकड़ी से बने हुई है तो कई प्रकार से प्रतिमा तो बन जाती है प्रतिभा का क्या प्रश्न है प्रतिभा कैसे निर्माण और आप आपके बारे में जो मुझ कुछ बता बताया गया मैं मेरा पहला परिचय है पर मैं कुछ ज्यादा मुझे पता नहीं लेकिन मुझे जो बताया गया कि आप जो जो काम कर रहे हैं जितना आपके बारे में मैंने सुना बाबा भी बता रहे थे आप सुनते
होंगे मुझे तो यह नसीब नहीं मिला तो मुझे लगता है कि आप भी विकास मुख से दिव्य मूर्ति का निर्माण करने का एक एक प्रोग्राम लेकर यह एक सकारात्मक दृष्टि से आप यूथ को जो अपनी ओर खींचते हैं एक बड़ा यज्ञ कर्म है आपका उसके बारे में मैं क्या क तो प्रतिभा बनाना है और किसकी प्रतिभा जो स्टेचू ऑफ यूनिटी का येय तो अद्भुत य जिस ढंग से हमने बनाई अद्भुत है मैं तो वहां एक नव दिन का अनुष्ठान करने वाला हूं नव दिन के क इतने बड़े तीर्थों में तो कथा होनी ही चाहिए तो
हम वहा एक कथा सरदार जी को समर्पित करते हुए वहा एक कथा का गायन जब योग बनेगा तो विभूतियों में पांच प्रकार की उसकी जो प्रतिभाएं हैं उसमें य पांच चीजें विशेष होती हैं ऐसा मेरा समझना है रामचरित मानस का दर्शन करते गुणगान करते श्रवण करते मेरी समझ में य आया व पांचों मुझे सरदार में दिखती है एक विचार वल्लभ भाई न ज विचा ी ना पांच वकार में तमारी पासे मकवा से ने ज शिव थ लने मात्रा भेद होई सके क्याक वधारे क्या को छ कुछ ज्यादा कुछ कम पर वल्लभ भाई पटेल में पहला
व तलगाना की दृष्टि में विचार विचार वान व्यक्ति थे य बहुत कभी-कभी हमारे यहां कहा जाता है कि विचार छोड़ो विचार में मत उलझो नहीं विचार बहुत महत्व का है दुनिया में जगत बिगड़ा है कुछ मात्रा में तो विचारों से बिगड़ा है और कुछ सुधरा है तो भी विचारों से ही सुधरा है इसलिए विचार की बड़ी महिमा है एक ही चीज खल के पास चली जाए और उसके विचार के कारण उसकी दिशा और दशा दोनों बदल जाती है वही चीज एक भल आदमी के पास पहुंच जाए तो उसका परिणाम मैं सुबह ही बाबा को कह
रहा था विद्या विवादाय धन मदाय शक्ति परेशान परि पड़ नाय लस साधु विपरीत तद ज्ञाना दाना रक्षय ऐसा एक सुभाषित हमारे यहां है तो सरदार साहिब में विचार है यहां बैठे-बैठे कोई कोने में इस महापुरुष ने राम का विचार कितना किया यद्यपि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि आखिर में भगवत गीता और रामचरित मानस और वह कहते थे कि वोह वोह आकाशवाणी में गाया हुआ पद गाव जिंदगी चंद रोज चंद रोज चंद आखिर में वो सुनते सुनते वो गए तो संगीत का भी उसमें एक तत्व पड़ा था तो यहां बैठे बैठे जो विचार उसकी
विचार भूमि भी है आचार है उच्चार सब है लेकिन विचार विचार होना चाहिए विचार एक देवता है हमने उसको दानव बना दिया एक बात और है लेकिन विचार देवता ब्रह्मा क्या है विचार के देवता है बिना विचार सर्जन नहीं होता ब्रह्मा का एक नाम है रंच विचार रंच का रूप धारण करता है और विचार चतुर्भुज चतुर्मुख होता है एक मुख नहीं विचार वान को चारों मुख से इतने इतने नेत्रों से सबको देख कर के विचार के विचारों को निर्णय तक ले जाना चाहिए तो इस महापुरुष में विचार की एक धातु विचार का एक तत्व था
लेकिन मैं कथाओं में कहता हूं आप मेरे श्रोता जानते कि विचार केवल वचनाम ना रहे रचनात्मक भी हो जाए अपने अपने बहुत विवेक से निवेदन किया मैं बिल्कुल मार्क कर रहा था आपके प्रवचन को तो विचार काली खाली वचनाम ना रहे रचनात्मक भी हो यह बहुत जरूरी और सरदार साहब के विचार रचनात्मक हुए दूसरा सरदार साहिब कभी-कभी क्या है कि विचार वान व्यक्ति इतने गंभीर हो जाते हैं कि ना मुस्कुराते हैं और जो मुस्कुराए उसकी निंदा करते हैं सरदार साहब विचार के देवता होते हुए विनोद के भी देवता उसके कितने विनोदी प्रसंग छोटे बड़े मिलते
जय भाई ने भी अंकित कितनी उसकी जोक कितनी चांधी बापू के साथ उसका जो विनोदी वार्तालाप है साब छोटी छोटी बातें युवान को पढ़ना चाहिए आप दुनिया भर का लिटरेचर पढ़ो मैं आपको नमन करता हूं लेकिन यहां का चको मत ये हाथ का कंगन है रामचरित मानस अपने रामचरित मानस के साथ जिस रूप में सरदार साहब को पेश किया साधु [प्रशंसा] मैं कथा राम चरित मानस की गाथा गाथा कहता हूं कि विवाह मंडप में सीता और राम आमने सामने है सिंदूर दान हुआ है हस्त मिलाप हो गया है और सीताजी जनक की बेटी है पृथ्वी
की कन्या है उसमें तो वो अपना जो कंगन है राम के सामने सीधा तो देख नहीं पाती और इसलिए मर्यादा है दोनों समाज के कुलगुरु बैठे हैं क्या कौन नहीं है वहां उसी समय जो अपने कंगन में राम की छवि दिखती है छाया दिखती हैं तो आचार्य कहते हैं कि कन्या यह करो यह करो तो वो करती नहीं क्योंकि कंगन में राम की छवि दिखती है और उसको लगे कि यह करने जाऊ तो छवि कंगन में दिखेगी नहीं इसलिए वह अपना हाथ जरा भी हिलाती नहीं इसका अर्थ तलगाना ये करता है कि हमारा राम हाथ
अपना हाथ जगन्नाथ य बहुत अच्छा शब्द है आप मंदिर में तो होही लेकिन आपो ईश्वर आपो थग गुजराती नहीं था आगो लेकिन हमारे हमारे हाथ में हमारा ईश्वर होना अयम में हस्तो वेद कहता है अयम में हस्तु भगवान अयम में भगवत मारो हाथ विश्व समस्त बीमारी औषधि देश ऋषि क सके और कोई नहीं क स तो हाथो परमात्मा य या तो आपना जो हाथ वगा चिंत को से आवा विचार को छ ज अटल इतना हमको दे रहे हैं उसको भी पढ़ो उसको भी सुनो मोरारी बापू को आप ज्यादा ज्यादा रस से सुन पाओगे यदि इन
विचारक महानुभव को भी सुनोगे श्रवण करना एक विज्ञान है साहब एक बहुत बड़ा विज्ञान है मेरी दृष्टि से तो विनोदी थे वरना विचार वान इतने गंभीर हो गए इनमें धर्म के बारे में विचार करने वाले तो इतने गंभीर हो गए हैं कि लगे कि इसके सामने बैठना इससे तो बेहतर है एक महीना तिहार जेल में चले जाए क्या गुनाह किया है अरे मुस्कुराओ हमने लाफिंग बुद्धा भी तैयार कर लिया है और मेरा राम तो वो है कि शब्द बोले इससे पहले मुस्कुराहट प्रदान करते थे पहले मुस्कुराते थे तो सरदार पटेल विनोदी थे उसके विनोद के
छोटे छोटे चुटकले बहुत फेमस है बहुत सुंदर लेकिन फिर भी पांच तत्व से शरीर बनता है अंदर का सूक्ष्म शरीर भी पांच ऐसे भावों से बनता है दूसरा विनोद तीसरा मेरी दृष्टि में विश्वास अब यह अग्न वादी थे जैसे आप अग्न वादी की बात कर गए कि मैं भी फिर भी मुझे संभावना तो लगती है इस संभावना का मैं स्वागत करता हूं इसी प्रांगण में अगनि विकास जी हमारे बारडोली के एक बहुत बड़े रेशनल रेशनल जम के जो पिता माने जाए पाठक दादा रमण पाठक दादा वो पूरे नास्तिक मैं ओवर आस्तिक लेकिन यहां मां जब
मैं आता उनके घर जाता का बापू ने एक दो से ज भाई केड़ा नोखा कागड़पतरे कई विचारक साहित्यकार पूछते थे कि मुरारी बापू के साथ आप कैसे जुड़ गए तो एक ना कि मुरारी बापू ने मेरी नास्तिकता कबूल कर ली मैंने उसकी आस्तिक कबूल कर दी और सेतु बन गया यही एक बात थी और य दोनों में हेतु एक अच्छा शब्द सेतु हो जिसमें हमारा कोई हेतु ना हो य ऐसे वाक्य जब सुनने को मिलता है तो मेरे लिए मेरे कारणों में शहद घुल जाता है एक मंत्र की तरह काम हो जाता है यह अच्छा
लगा तो रमण बापा पाठक को मैं मा साक्षी है मैं उसको प्रणाम करने जाता था उसने कहा कि बापू मंदिरों के लिए दवाखानू केशन संस्थाओं के लिए आपने बहुत कथा की आप शौचालय के लिए कथा ना करो देश में शौचालय की बहुत जरूरत है वो समय की बात है यह और मैंने उसी समय संक किया कि बापा आपने कहने पर मैं पूरी कथा शौचालय के कर और हमने की और इसके द्वारा काफी राशि इकट्ठी हुई और कई जगह स्वच्छता अभिनय हर घर में शौचालय इसकी शुरुआत तो बाडोली में हुई से और फिर बहुत अच्छा चल
रहा है उसका स्वागत करता हूं तो एक बार वह आए हम वहां झूले पर बैठे थे तो मैंने कहा बापा तबीयत कैसी है ठीक है बाकी सब ठीक रहा है उसने हाथ ऊपर उठा दिया भगवान की कृपा मैंने कहा भगवान आप में आ गया कहां से संभावना थी संभावना थी संभावना थी आप कहां गए मैंने कहा आपका हाथ ऊपर उठे कहां भगवान हम एक जूले पर बैठते थे लेकिन अग्निवा सरदार पटेल भी ऐसे रहे हो लेकिन विश्वास उ थे विश्वास उसकी प्रतिभा का एक तीसरा तत्व था भगवान पर विश्वास ना हो मुझे कोई चिंता नहीं
है लेकिन गीता पर विश्वास था रामचरित मान अ छोड़ो यह भी जैसे हम विश्वास हो ना हो धर्म ग्रंथ पाठ कर लेते हैं जो पुण्य कमाने के लिए चलो माना लेकिन अब हमने सुना गांधी बापू के वचन पर विश्वास था शंकर भगवान ने एक बार विष पिया सरदार ने तीन बार विष पिया अने कम क्यों शिवर ूप न कह जैसे आपने कहा कि जो पार्टी का अध्यक्ष बने वो भविष्य का प्रधानमंत्री बन जाए वो और ऐसे ऐसे और मूलतः विष पीने की बहुत सी विषम परिस्थिति सरदार के जीवन में आई लेकिन तीन तो ऐसे पड़ाव
है जो पहले में शायद यहां बोल चुका हूं कि ये नीलकंठ बनकर के विष पी गया है पता साहब धर्म पत्नी का निधन हो जाए और यह आदमी ने कितना पी लिया होगा और पूरा वो उसको जिता दिया तो मेरे कहने का तो गांधी पर विश्वास था गांधी पर विश्वास करना सत्य पर विश्वास करना है गांधी पर विश्वास करना अहिंसा पर विश्वास करना और जिस तरह अब राजनीति में है किसके साथ कैसा व्यवहार करना वह सब जानते थे और कुछ लोग ऐसे होते हैं कि वह दुश्मन पर भी पाकीजा सजा दुश्मन को भी पाकीजा सजा
देते हैं कुछ लोग ऐसे होते कि दुश्मन को पवित्र सजा देते हैं वह दुश्मन को भी पाकीजा सजा देते हैं वोट हिलते नहीं नजरों से गिरा देते हैं साहब में ये काबिलियत थी इल्म था सरदार पटेल में क्योंकि उसके पास एक प्रबल विश्वास था ईश्वर पर नहीं तो गांधी पर एक प्रबल विश्वास तो यह तीसरी वस्तु तत्व था सरदार पटेल की प्रतिभा में विचार था विनोद था विश्वास था और मुझे कहने दो मैंने जिस तरह सरदार का दर्शन विवेक बहुत था विनोद में वह कुछ भी कहे लेकिन जो विवेक था विवेक था य गजब का
आपने जिस तरह पॉजिटिव रूप में पेश किया कि महात्मा और पंडित जी इसकी कोई भी बात किए बिना हम सरदार की बात करेंगे लेकिन यह भी सामने आई है बात कि जब नेहरू आते थे तो सरदार खड़े हो जाते थे कि मेरे देश का प्रधानमंत्री आया यह विवेक विचारों में जो भी हो और काठियावाड़ी शब्द का प्रयोग करू मन में क खार न तो साहेब खार मानी खार मानी चुभने वाला कंटक खुशबू से भरा इसलिए सरदार के लिए वजर से भी कठोर और फूल से भी कोमल उसका दिल था हमारे यहां संस्कृत में एक शब्द
है हम जैसे हम कहते ना पुण्य श्लोक नल राजा फला फला पुण्य श सरदार है ना वो पुण्य प्रकोप श्लोक थे पुण्य प्रकोप उनका जो पुण्य प्रकोप था कभी कभी पुण्य प्रकोप श्लोक केवल पुण्य श्लोक नहीं पुण्य प्रकोप तो उसके पास विवेक बहुत था सीखने जैसा युवान भाई बहनों सीखने जैसा विवेक आपके पास था और पांचवा और अंतिम वल्लभ भाई पटेल का पांचवा भी आदमी वैरागी तो आ करण कय आटली एक जोड़ कपड़ी कपड़ा 200 रूपी एक दांडी ने एक डोरी बांधे तु आप कल्पना तो करो भारतवर्ष का उप प्रधानमंत्री और ग्रु मंत्री जिसने देश
को एक बनाया गांधी का कृपा और प्रीति पात्र इसका वैराग तो देखो सा वैराग्य हिमालय में जाने से नहीं फलित होता हय को हिमालय जैसा बनाने से फलित होता है हिमालय में तो कोई भी चलेंग हम कितनी बार हिमालय गए लो मानसरोवर गए न दिन रहे 15 दिन रहे राक्षस ताल गए कैलाश में गए वहां रहे बु सुंडी ताल गए हर कैलाश में बहुत घूमे न न न दिन लेकिन हिमालय दिल हिमालय न बने तो क्या है सरदार का दिल इसलिए वो भागा नहीं स्वयं जागा और देश को जगाया उत्तिष्ठत जाग्रत वरान प्रा रस्य धारा
निशिता दुरतूल साहब वैरागी फकीर था साधु था उसका वैराग बहुत बहुत प्रि लाग तुलसी का पद मुझे तुरंत शुरू हो जाता है कब को यही रहनी र अपने अपने क्यारे आवी रनी जीवन में सीखी क्यारे अपना मा आ वैराग आव सरदार न वैराग तो पांच भी जो है इस विभूति की प्रतिभा को विशेष रूप में आलोकित करते हैं सरदार में मैंने पांच तत्व देखे हैं उनके चरणों में श्रद्धा के रूप में समर्पित करता हूं आपका प्रवचन भी बहुत स्मृति में रहेगा ने प्रवचनों कैसेट मा रिकॉर्ड कर कलेजा में रिकॉर्ड कर कैसेट में तो क्या होता
है हेड बिगड़ जाए पहले की कैसेट जो आती थी तो क्या दशा होती थी मैं पहली बार गया अफ्रीका किट बो पहली बार अफ्रीका गया तो वहां से ज मुझे इन लोगों ने एक टेप रिकॉर्डर दिया और स्वानी की कैसेट दी मैंने कहा कि वहा सिक्योरिटी में कस्टम में मैं ये ले नहीं जाऊ मुझे रोके तो मुझे अच्छा नहीं लगता मैं क्यों ले जाऊ आप आओ तब दे देना बोले नहीं बापू कैसेट और टैप रिकॉर्ड के बारे में कोई पूछता ही नहीं अब मेरे दिमाग में य डाल दिया मैं मुंबई उतरा और कस्टम चेकिंग हुआ
तो उसने कहा ये क्या लाए मैंने कहा गिफ्ट मिले है तो ले आओ नहीं नहीं ऐसा नहीं लाया जा सकता महाराज हो कौन हो मैंने कहा भाई भूल हो गई तो हमने कहा कैसे हम चुका दे जो चुकाना हो एक दो व्यक्ति मुझे लेने आए थे उसको हमने कहा कि से भर दो मेरी यह भूल हो गई है मुझे उसने गलत माहिती दी इसलिए मैं लाया वरना मैं क्यों लाता तो जो 50 कैसेट दी थी इनमें से एक कस्टम वाले जो थे दयालु थे और उदार थे 50 में जितनी थी इसमें से आधी उसने अपने
टेबल में रख ले मेरे मन में दुर्भावना चाहिए था लेकिन पहली बार तेरे टैप रिकॉर्डर का हेड बिगड़ [प्रशंसा] जाएगा अब उसका हेड बिगड़ा कि नहीं लेकिन मेरा हेड तो जरूर बिगड़ा साब ऐसा विचार साधु को नहीं आना चाहिए था ऐसा नहीं आना चाहिए तो मैं कलेजे में टप कर लेता मुझे मेरे लिए एक बाता बन जाता है एक संबल तो विशेष कुछ नहीं कहते हुए आज का य संगोष्ठी दिन रोज रोज मां बढ़ता जा रहा है आप तपस्विनी के रूप में बैठी है बिना बोले कुछ कुछ कभी-कभी व्यक्ति का माउन कितना काम करता है
हमारे एक महात्मा उना के पास तपोवन में थे जिंदगी भर माउन रहे साब और वृक्ष इतने बड़े बनाए तो कोई मुझे पूछे कि वृक्ष इतने बड़े दो साल में मैंने कहा उसके माउन के कारण य वृक्ष बड़े होते जा रहे हैं बड़े होते जा रहे हैं माउन भी बहुत बड़ा का का करता है और सरदार पटेल संस्था के सब ग्रणी भी इसमें बहुत हृदय सेय तो होना ही चाहिए आप कल्पना करो कि बाडोली में ऐसे प्रसंग बंद हो जाएगा तो बाडोली क्या रहेगी क्या रहेगी यहां बाडोली के बदले बार बनाना है सब डोलते रहे इधर
इधर बाडोली में क्या बनाना है बडोली को ब संध्या पूजा वाला बैठा से जिसको संध्या का समय हो चुका है ऑलरेडी हमारे सौराष्ट्र में विकास जी सुबह में कुछ लोग कुछ [संगीत] लोग अफिन अफिन अफीम जो होता है वो उसका नशा करता है और शाम को छाटा पानी प्रातः संध्या और सायम संध्या करते हैं बारडोली में य कार्यक्रम इस तीर्थ को विशेष तीर्थ कृत बनाता है य होना और हो रहा है आप सबके और देखो ना मैं देख रहा हूं वहां नहीं रखा गया प्रोग्राम इतने सालों से हम वहां आश्रम में रखते थे अब यह
संभव नहीं और यह होते होते खबर नहीं यह मैदान भी छोटा पड़ना चाहिए क्योंकि ऐसे विद्वान और और मैंने मैंने देखा सब जागृति पूर्वक कुछ थे विज्ञान से ना कोई ने छोड़ न कुछ विश्राम से सुन रहे थे जबकी ले रहे थे अमु तो बाकी खास कर के युवान लोग बहुत जागृति से सुन रहे य जागृति कायम बनी रहे ऐसी हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना करते हुए मैं अन लोह पुरुष के बारे में मैं लोहा है ना उसको जंग लगता है सोने को जंग नहीं लगता लोहे को लगता है सरदार ने भारत की एकता
के लिए अथवा तो कश्मीर में जो करना पड़े जो जो किया जंग जरूर किया लेकिन लोक पुरुष को जंग नहीं लगा इसको कभी कात थ लाग स एवा एक महापुरुष ने अने हम सब अपना श्रद्धांजलि समर्पित करते हैं और अगली सरदार संगोष्ठी की प्रतीक्षा में हम आज यहां से विदा लेंगे और मां अगली संगोष्ठी में कदाच आना करता है प्रज्ञा क्या बार ये इस सरदार की के प्रति आपकी प्रीति का दर्शन हो रहा है और यह होना ही चाहिए आप सबको मेरा प्रणाम जय प्रिय बापू आपको प्रणाम जय सियाराम विभूति रूप सरदार साहब के पंचतत्व
में पांच वकार के दर्शन करवाकर आपने हमें कृतकृत्य किया है डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जी आप सरदार संगोष्ठी में प्रधा इसलिए हम स विशेष आपके आभारी है यहां से बहुत सारे युवा रीस्टार्ट का मैसेज लेकर आज घर जाएंगे प्रिय बापू के चरणों में वंदन सरदार संगोष्ठी में पधारे आप सभी को [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] प्रणाम ब