सूरज की सुनहरी किरणें जब धीरे-धीरे शहर की तंग गलियों को छूने लगती तो आसिफ अपने कामते हाथों में कुछ ताज़ा गुलाब थामे सड़क के किनारे जा बैठता वह 12 साल का एक मासूम सा गूंगा लड़का था जिसकी खामोशी मानो जोर-जोर से अपने दुख को दुनिया के सामने चीखना चाहती थी पर सुनने वाला कोई ना था हर राहगीर उसे या तो रहम भरी निगाहों से तकता या फिर उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ जाता वह हर सुबह इन निगाहों का सामना करने के लिए तैयार होता मगर उसकी नन्ही आंखों में एक छोटी सी चिंगारी हमेशा जलती रहती
एक ऐसी उम्मीद जिसका मतलब शायद उसे खुद भी ना पता था पर वह जिंदा थी उसके दिल की गहराइयों में सांस लेती हुई एक दिन जब शाम का उजाला मध्यम पड़ने लगा और आसिफ अपने छोटे से झोले में बचे हुए गुलाबों को समेट रहा था उसकी नजर सड़क के उस पार एक खूबसूरत लड़की पर पड़ी वह लड़की बेबसी से सड़क पार करने की कोशिश में थी गाड़ियां तेज रफ्तार से गुजर रही थी और कोई उसे रास्ता देने को तैयार ना था आसिफ के हाथों में थमे गुलाब अचानक उसे बेकार से लगने लगे उसके सीने में
एक अनजान सी बेचैनी जाग उठी जिसे वह अल्फाज़ में नहीं ढाल सकता था वह कुछ देर वहीं खड़ा रहा निगाहें हटाने की कोशिश की पर हर बार नाकाम रहा आखिरकार उसकी आंखें उस लड़की पर जम गई उसका दिल बेकाबू हो उठा जैसे वह हवा में उड़कर उसके पास पहुंच जाए और उसे रास्ता पार करा दे वह खुद आवाज नहीं दे सकता था मगर उसके दिल में रहम का एक दरिया बहता था जब भी वह किसी को तकलीफ में देखता उसका दिल तड़प उठता कि काश वह उसकी मदद कर पाए उसने अपनी छोटी सी जिंदगी में
बहुत सी मुश्किलें देखी थी शायद इसलिए उसके दिल में जज्बात ठूंसे हुए थे लड़की ने आसिफ की तरफ देखा और कुछ लम्हों के लिए उनकी निगाहें एक दूसरे से टकराई आसिफ की सादगी में एक अजीब सा कशिश था जिसने लड़की के दिल को अपनी तरफ खींच लिया वह हल्के से मुस्कुराई और सड़क पार करते हुए सीधे उसके पास आ खड़ी हुई आसिफ की सांसे तेज हो गई पहली बार कोई उसे इस तरह देख रहा था जैसे वह भी अल्लाह की बनाई एक अनमोल चीज हो जैसे उसकी भी कोई कद्र हो लड़की ने खामोशी से एक
गुलाब उठाया और बड़े अदब से उसे आसिफ की तरफ बढ़ाया आसिफ की आंखों में पहली बार एक ऐसी चमक आई जो आंसुओं में बदलने को थी मगर उसने आहिस्ता से मुस्कुरा दिया यह मुलाकात एक आदत बन गई हर शाम वह लड़की आती आसिफ से एक गुलाब लेती और एक रूहानी सी मुस्कुराहट के साथ चली जाती आसिफ की जुबान खामोश थी पर उसकी आंखें अब बोलने लगी थी वह उसके कदमों की हल्की सी आहट को पहचानने लगा था जैसे ही शाम का वक्त करीब आता आसिफ का दिल बेसब्री से धड़कने लगता वह अपने गुलाबों को समेटने
की बजाय उन्हें और खूबसूरत बनाने में जुट जाता इस आस पर कि शायद आज वह कुछ देर ठहर जाए लड़की का अंदाज भी कुछ अलग था हर दिन एक ही वक्त पर आती वही नरम मुस्कुराहट लिए वही अपनाइयत भरा एहसास देती आसिफ की जिंदगी में ऐसे लम्हों की बड़ी कमी थी मामा के घर उसे सिर्फ डांट डपट और तल्खी ही मिलती थी किसी के पास उसके दर्द को समझने का वक्त ना था मगर यह लड़की जैसे उसकी खामोश फरियाद को सुन लेती थी एक दिन आसिफ ने अपनी छोटी सी डायरी में लिखकर उसे दिखाया आप
कौन हैं लड़की ने उसे देखा मुस्कुराई और बिना जवाब दिए वापस मुड़ गई आसिफ कुछ समझ ना सका मगर उसका दिल अगली शाम की राह देखने लगा अगली शाम वह फिर आई एक गुलाब लिया और आसिफ के हाथ में एक छोटा सा कागज थमाया जिस पर लिखा था एक दोस्त आसिफ की आंखें चमक उठी यह पहला मौका था जब किसी ने उसे दोस्त कहा था अब हर शाम उनके बीच कागज के जरिए बातें होने लगी आसिफ अपनी छोटी-छोटी खुशियां अपने गम सब कुछ डायरी में उतार देता और लड़की खामोशी से पढ़कर मुस्कुरा देती कभी कभार
उसकी आंखें भी भीग जाती मगर वह जल्दी से पलकें झपका कर आंसुओं को छिपा लेती आसिफ को लगने लगा कि इन मुस्कुराहटों के पीछे भी कोई अनकाहा दर्द छिपा है पर वह इस राज को ना समझ सका दिन गुजरते गए आसिफ की जिंदगी में कुछ रोशनी के लम्हे आने लगे उसकी दुनिया अब सिर्फ तकलीफें और बेइज्जती तक महदूद ना थी उसके पास एक दोस्त थी जो उसकी खामोशी को समझती थी मगर एक दिन कुछ अजीब हुआ आसिफ ने अपनी डायरी में लिखा आप हर दिन आती हैं पर कभी कुछ कहती नहीं क्यों इस बार लड़की
के चेहरे से मुस्कुराहट गायब हो गई उसने डायरी वापस की और बस इतना कहा तुम भी तो कुछ नहीं बोलते शायद हम एक जैसे हैं यह पहली बार था जब आसिफ ने उसकी आवाज सुनी एक नाजुक मीठी और दुख से भरी आवाज आसिफ हैरान रह गया उस रात वह सो ना सका उसकी जिंदगी में कुछ बदल रहा था मगर वह समझ ना पा रहा था कि यह सब क्या है अगली सुबह जब वह सड़क किनारे बैठा था उसका दिल बेचैनी से भरा था उसे शाम का इंतजार था मगर वह ना आई अगला दिन भी खाली
गुजर गया आसिफ की बेचैनी बढ़ती गई उसकी निगाहें हर गाड़ी पर ठहरती हर कदम की आहट पर दिल जोर से धड़कता पर वह कहीं नजर ना आई आसिफ ने अपनी डायरी में लिखा क्या मैंने कुछ गलत पूछ लिया मगर यह सवाल किसी तक ना पहुंचा कई दिन यूं ही बीत गए और आसिफ की जिंदगी फिर से खामोशी के साए में डूब गई उसकी मुस्कुराहट जो कभी उसके चेहरे की ज़ैनत बन गई थी कहीं खो गई वह फिर वही उदास खामोश लड़का बन गया जो सड़क किनारे बैठा रहता था आसिफ की जिंदगी शुरू से ही आजमाइशों
से भरी थी मां के जाने के बाद वह अपने मामा के रहमोकरम पर था जो उसकी मेहनत की कमाई छीन लेता और रात को बेवजह उसे मारता पीटता आसिफ बोल ना सकता था उसकी आंखों से आंसू बहते थे पर वह अपने दर्द को चीख कर बयां ना कर सकता था हर रात उसकी छोटी सी दुनिया अंधेरे में समट जाती और उसकी खामोश चीखें दीवारों में कैद होकर रह जाती थी वह जानता था कि उसकी जिंदगी में खुशियों की कोई जगह नहीं सिवाय उन लम्हों के जब वह लड़की उसे गुलाब खरीदने आती थी एक रात जब
मामा ने उसे बहुत मारा तो आसिफ के दिल में पहली बार भागने का ख्याल आया उसने सोचा शायद सड़कों की सख्ती इस घर की कैद से बेहतर हो वह चुपके से दरवाजे की तरफ बढ़ा हर कदम आहिस्ता रखा ताकि कोई आवाज ना हो मगर बदकिस्मती से दरवाजा खुलते ही मामा जाग गया आसिफ के चेहरे पर खौफ छा गया वह भागना चाहता था पर मामा के हाथ उसकी गर्दन तक पहुंच गए उसे घसीट कर अंदर ले जाया गया और एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया गया आसिफ ने दरवाजे पर हाथ मारे आंसुओं के साथ खामोशी
से मदद मांगी मगर उसकी आवाज बाहर ना जा सकी अगली सुबह जब वह गुलाब बेचने ना पहुंचा तो सारा लड़की का नाम के दिल में एक अजीब सी घबराहट उठी वह बेंच पर बैठी रही बार-बार वक्त देखती रही आसिफ का ना आना उसे किसी अनहोनी का इशारा दे रहा था उसके दिल में सवाल उठ रहे थे वह कहां है क्या वह बीमार है या कोई मुसीबत में है उसने आसिफ का पता लगाने की कोशिश शुरू की मगर कोई ना जानता था कि वह कहां रहता है सारा कोई आम लड़की ना थी पर उसका राज अभी
दुनिया से छिपा था उसने एक कबूतर से इशारों में बात की कबूतर ने सर हिलाया उड़ गया और शाम तक लौट कर आसिफ के घर का पता बता दिया सारा ने रात के अंधेरे का इंतजार किया और चुपके से आसिफ के घर जा पहुंची वह दीवार की ओठ में खड़ी होकर अंदर झांकने लगी अंदर से मामा की गस्से भरी आवाज गूंज रही थी वह आसिफ को बेवजह पीट रहा था और आसिफ की खामोश आंखों में दर्द और बेबसी झलक रही थी सारा के दिल में गुस्सा और रहम का तूफान उठा वह आगे बढ़कर आसिफ को
बचाना चाहती थी मगर उसे पता था कि अभी वक्त ना आया उसकी ताकत एक राज थी जिसे उसे छिपा कर रखना था वह दूर से देखती रही उसके आंसू बहते रहे पर उसने खुद को रोके रखा वह जानती थी कि एक दिन वह आसिफ को इस कलर से आजाद करेगी मगर अभी नहीं अभी उसे सही वक्त का इंतजार करना था जब उसे अपनी हकीकत जाहिर करनी पड़े अगली सुबह जब आसिफ गुलाब बेचने आया तो उसके चेहरे पर चोटों के निशान साफ थे उसकी आंखों के गिर्द काले हल्के और गालों पर नीले निशान उसकी खामोश चीखों
की गवाही दे रहे थे वह हमेशा की तरह बेंच के किनारे बैठा था मगर आज उसकी आंखों में वह चमक ना थी जो सारा को देखकर आती थी उसके कांपते हाथ और झुकी निगाहें बता रही थी कि रात के साए में फिर से उसकी रूह पर जुल्म हुआ सारा जब उसके पास पहुंची तो एक पल के लिए रुक गई वह कुछ लम्हों के लिए सख्त में आ गई जैसे उसके पांव के नीचे से जमीन सरक गई हो उसके दिल में हमदर्दी और गुस्सा एक साथ उमड़ पड़े आसिफ ने निगाहें उठाई मगर उसके चेहरे पर ना
मुस्कुराहट थी ना खुशी वह आंखों से पूछ रहा था कि आखिर उसके नसीब में सुकून क्यों नहीं सारा खामोशी से उसके पास बैठ गई और उसका हाथ थाम लिया उसने इशारों में कहा सब ठीक हो जाएगा मगर आसिफ की आंखों में कोई यकीन ना था वह जानता था कि यह ऐसी लड़ाई है जिसमें कोई उसका साथ ना दे सकता उसका मामा उसके दर्द को ना समझता था और आसिफ के पास कोई रास्ता ना था सारा के दिल में बेचैनी बढ़ती जा रही थी वह कुछ करना चाहती थी मगर कैसे वह अपनी हकीकत ना बता सकती
थी अभी वक्त ना आया था वह समझती थी कि आसिफ की तकलीफ सिर्फ मामा की सख्ती नहीं बल्कि उसकी अपनी लाचारी भी थी उस रात सारा देर तक जागती रही तारों को निहारती रही उसकी आंखों में आंसू थे और दिल में दुआ उसी रात आसिफ के मामा को एक अजीब ख्वाब दिखा वह देख रहा था कि एक स्याह साया उसके कमरे में घूम रहा है उसे डरा रहा है उसका गला दबोच रहा है मामा की चीखें गूंज रही थी मगर कोई सुनने वाला ना था वह साया कह रहा था अगर आसिफ को फिर हाथ लगाया
तो बुरा होगा मामा खौफ से जाग गया उसका जिस्म पसीने से तर था उसे समझ ना आ रहा था कि यह क्या हो रहा है वह अपनी सांसे काबू में करने की कोशिश कर रहा था मगर उसका दिल तेज-तेज़ धड़क रहा था अगले दिन से मामा की तबीयत बिगड़ने लगी कभी उसे सांस लेने में तकलीफ होती तो कभी लगता जैसे कोई उसके पीछे खड़ा हो आसिफ हैरानी से यह सब देख रहा था उसके दिल में एक अजीब सी राहत थी उसे लग रहा था कि उसकी दुआएं सुन ली गई हैं मगर वह ना जानता था
कि यह सब कैसे हो रहा है सारा रोज आसिफ से मिलती थी उसकी मुस्कुराहट आहिस्ता-आहिस्ता लौट रही थी मगर वह ना जानता था कि यह सब सारा की छिपी ताकत का नतीजा है वह ना जानता था कि जिसने उसकी खामोशी को सुना वह कोई आम इंसान नहीं सारा की आंखों में जो चमक थी वह खास थी उसके लहजे में जो नरमी थी वह अनोखी थी मगर आसिफ अभी इन सब बातों से बेखबर था उसे बस इतना पता था कि उसकी जिंदगी में कुछ बदल रहा है और यह तब्दीली उसके लिए खुशी का पैगाम ला रही
है आसिफ की जिंदगी एक कैदखाने की तरह हो गई थी जहां हर सांस एक अज़ाब थी उसका मामा इतना बेरहम हो गया था कि उसने आसिफ को भूखा रखने का फैसला कर लिया था हर दिन उसके लिए नई मुसीबत लाता उसकी थकी हुई आंखें बेबसी की गवाह थी और उसका कमजोर जिस्म एक बेआज चीख बन चुका था जिसे कोई सुनने को तैयार ना था एक दिन जब आसिफ भूख और थकान से सड़क किनारे बेहोश होकर गिर पड़ा तो उसकी रूह शायद खामोशी से आजादी की दुआ मांग रही थी सारा हमेशा की तरह वहां थी मगर
आज का मंजर देखकर वह हिल गई आसिफ की बेजान सी हालत को देखकर उसका दिल जैसे रुक गया वह तेजी से उसके पास पहुंची और उसे उठाकर एक सुकून भरी जगह पर ले गई जहां वह उसकी देखभाल कर सके पानी की कुछ बूंदे आसिफ के सूखे होठों पर पड़ी तो उसकी सांसे लौटने लगी मगर तभी एक अजीब मंजर सामने आया सारा के हाथों से एक रोशनी निकली जो आसिफ के जख्मों को छूने लगी जैसे ही वह रोशनी उसकी जल्द से मिली जख्म भरने लगे यह मंजर ऐसा था जो आम अकल से बाहर था आसिफ की
आंखें हैरत से फटी की फटी रह गई उसकी सांसे बेतरतीब हो गई मगर जुबान पर कोई लफज़ ना आया वह बस सारा को देखता रहा जो उस लम्हे में खुद भी उलझन में दिख रही थी सारा को जैसे ही एहसास हुआ कि उसकी ताकत का राज खुल सकता है उसने फौरन खुद को संभाला उसने आसिफ को खामोशी से वापस उसी जगह छोड़ दिया जहां से वह बेहोश मिला था जैसे कुछ हुआ ही ना हो सारा के लिए यह जज्बात की जंग थी जहां उसे अपनी हकीकत को छिपाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही थी रात
के सन्नाटे में आसिफ का मामा अपने कमरे के एक कोने में दबक गया वह थर-थर कांप रहा था उसकी आंखें खुली थी मगर अंधेरा उसे निगल रहा था उसे बार-बार एक साया दिखता जो सरगोशी करता इस नन्हे बच्चे को मत सताओ वरना तेरा अंजाम हो जाएगा उसकी चीख गले में अटक जाती कोई उसकी रूह को जकड़ लेता सुबह होते ही वह एक आमिल के पास भागा आमिल ने उसे अजीब निगाहों से देखा और कहा "तुम पर कोई ताकत का साया है मगर यह भलाई के लिए है बचने का रास्ता सिर्फ नेक नियत में है मामा
का चेहरा जर्द पड़ गया मगर उसका गुरूर अभी जिंदा था इधर आसिफ के आसपास अजीब चीजें होने लगी उसके गुलाबों की खुशबू इतनी तेज हो जाती कि लोग हैरान रह जाते दरख्तों की शाखें झुक कर उसे सलाम करने लगती लोग समझने लगे कि आसिफ की मासूमियत में कोई राज है मगर आसिफ इसे महज किस्मत का खेल समझता रहा वह सारा को देखकर हमेशा की तरह मुस्कुराता मगर उसकी आंखों में वही पुराना दर्द अब भी मौजूद था सारा का रवैया भी बदला हुआ लगने लगा था उसके चेहरे पर वह सुकून ना था जो पहले दिखता था
उसकी आंखों में अब एक अजीब सी बेकरारी झलकती थी वह कभी दूर किसी खाली जगह को गौर करती कभी आसिफ को देखकर मुस्कुराती मगर उसकी मुस्कुराहट भी राजशों से भरी लगती थी आसिफ को लग रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है मगर क्या यह वह ना जान पाया एक रात जब आसिफ गुलाब बेचकर घर लौटा तो मामा की आंखों में खौफ साफ दिख रहा था उसने आसिफ को पकड़ कर जमीन पर पटक दिया उसके चेहरे पर नफरत के साए गहरे थे यह सब मेरे साथ क्यों हो रहा है तूने क्या कर डाला आसिफ के
होंठ हिले मगर कोई आवाज ना निकली वह बेबसी से रोने लगा मामा ने उसे अंधेरे कमरे में बंद कर दिया अचानक खिड़की के उस पार से एक रोशनी की किरण आई सारा वहां खड़ी थी मगर उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी उसने आसिफ को इशारों में समझाया तेरी आवाज वहां तक गूंजती है जहां तू सुन नहीं सकता आसिफ की आंखों में हैरत थी वह अपने गले पर हाथ रखकर कुछ कहने की कोशिश करता मगर आवाज ना निकलती सारा ने उसके माथे पर हाथ रखा और आसिफ को लगा कि जमीन कांप रही है एक जोरदार
गूंज के साथ उसके मुंह से चीख निकली मगर वह सिर्फ शोर ना थी यह उसकी बरसों की खामोशी का जवाब थी उसकी आवाज में ऐसा असर था कि दीवारें थर्रा उठी मामा जो दरवाजे के पीछे सुन रहा था जमीन पर गिर पड़ा उसकी चीखें तेज हो गई वह चिल्ला रहा था मुझे बचाओ मुझे माफ कर दो सारा की आंखों में सुकून था आसिफ ने पहली बार बोला यह मेरा मामा नहीं वक्त का सबसे जालिम इंसान है जो मुझे हर रात तड़पाता था वक्त ने अपना फैसला सुना दिया आसपास के लोग जमा हो गए उस आवाज
को सुनकर सब दंग रह गए आसिफ को बोलने की ताकत मिल गई थी उसने मामा को देखा और कहा जुल्म की कोई माफी नहीं मामा को कैद की सजा हुई और आसिफ की जिंदगी में पहली बार राहत आई सारा की आंखों में आंसू थे मगर वह मुस्कुरा रही थी आसिफ ने इशारों में पूछा "आप कौन हैं?" सारा ने हल्के से मुस्कुरा कर कहा "मैं हूं जो तेरी खामोशी को सुनती थी " आसिफ ने पहली बार दिल से मुस्कुरा कर कहा शुक्रिया वक्त ने साबित कर दिया कि जिसका कोई नहीं होता उसके लिए भी कहीं से
मदद आ सकती है जिंदगी के उतार-चढ़ाव में कभी-कभी लगता है कि हम अकेले हैं कोई हमारा हाथ थामने वाला नहीं मगर तारीख और जिंदगी के कई वाक्यात गवाह हैं कि जब इंसान सारे रास्ते बंद देखता है तभी कुदरत का दरवाजा खुलता है अगर आपको यह वीडियो पसंद आई हो तो लाइक करें चैनल को सब्सक्राइब करें और बैल आइकन दबाएं ताकि नई कहानियां आप तक सबसे पहले पहुंचे