ईरान पर हमले से पहले ताकत और तकबुर के नशे के अंदर फिरौनी लहजा रखने वाले इस शख्स का जरा कॉन्फिडेंस देखें। आवर कंट्री विनिंग अगेन इनफिनिंग सो मच वी रियली डोंट नो व्हाट टू डू अबाउट इट। लेकिन जब पलट वॉर के अंदर पहली बार कोई टक्कर का दुश्मन मिला तो इससे मार खाने के बाद इस शख्स की हालत देखें। जैसे एक हारा हुआ और थका हुआ इंसान हो जिसका तकुर टूट चुका हो। खबर यह है कि डोनल्ड ट्रंप ने एस्टिन फाइल्स के अंदर अपनी मजीद लीग से ब्लैकमेल होकर ईरान पर बिना सोचे हमला तो कर
दिया लेकिन जैसा इसने सोचा था वैसा बिल्कुल नहीं हुआ। आयतुल्ला खमीनी की शहादत के बाद ट्रंप और नेतन याऊ का प्लान यह था कि इस मुल्क के अंदर अफरातफरी और खानाजंगी शुरू हो जाएगी जैसे बाकी मिडिल ईस्ट के मुल्कों के अंदर इन्होंने किया था। फिर इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर यहां पर कामयाब किस्म का रिजीम चेंज ऑपरेशन होगा। यहां पर अपनी कोई पपेट हुकूमत लाकर बिठा देंगे। पर हुआ यह है कि आयतुल्लाह खुमीनी अपनी शहादत के बाद इनके लिए मजीद डेंजरस हो गए हैं। और उसके अलावा 280 के करीब छोटी बच्चियों की स्कूल पर बम
गिराकर जिस तरह से शहादत की गई इस अमेरिकन और इसराइली जारियत ने ईरानी आवाम को इकट्ठा कर दिया है और ईरान मजीद ताकत के साथ हर जगह पर हमले कर रहा है। मिडिल ईस्ट के अंदर कोई जगह इसके हमलों से महफूज़ नहीं है। यहां तक कि इसने अमेरिका के इब्राहिम लिंकन बेरी जहाज को भी निशाना बनाया और अमेरिका के F17 तारे ईरान ने इंतहाई चालाकी से गिरवा दिए हैं। इन तैयारों के गिरने के बाद अमेरिका का यह कहना था कि यह फ्रेंडली फायर के अंदर गिर गए हैं। गलती से एयर डिफेंस सिस्टम ने इसको गलती
से मार गिराया है। पर दोस्तों बुरी बात यह है कि ईरान के शाहिद ड्रोन जो कि सुसाइडल होते हैं वह जानबूझकर इन F17 फाइटर जेट्स के पास गए। एयर डिफेंस सिस्टम इनको टारगेट करते हुए। अमेरिका के इन F17 जहाजों को भी उड़ा दे और यह ट्रिक कामयाब रही। दूसरी अहम खबर यह है कि एक-एक करके अमेरिका के इतहादी इसका ईरान पर हमले के लिए साथ छोड़कर जा रहे हैं क्योंकि यूके ने इस जंग के अंदर शामिल होने से इंकार कर दिया है और वह भी अमेरिका के प्रेशर पर अपनी एयर स्पेस देने के लिए हामी
भरी है। इसके अलावा स्पेन ने अपनी एयर स्पेस देने से मना कर दिया और इस जंग के अंदर भी कूदने से साफ इंकार कर दिया है। वो कहता है कि अमेरिका और इसराइल का यह ईरान पर हमला दरअसल इंटरनेशनल कानून के खिलाफ है। इसके अलावा स्पेन ने गजा पीस ऑफ बोर्ड का हिस्सा बनने से भी इंकार कर दिया है। इसके बाद ट्रंप शदीद गुस्से के अंदर है और इससे सफारती ताल्लुकात समेत अपनी ट्रेड भी खत्म करने की धमकी दी है। स्पेन खुलेआम यह साफ तौर पर कह रहा है कि यह तमाम हमला दरअसल सिर्फ इसराइल
को राजी करने के लिए है। दुनिया का इसके अंदर कोई मफाद नहीं है। स्पेन ने मायूस किया। दरअसल मैंने स्कॉट बेसेंट से कहा है कि स्पेन के साथ तमाम मामलात मुतल कर दें। मैं चाहूं तो कल ही या आज ही स्पेन से मुतालिक हर चीज रोक सकता हूं। स्पेन के साथ तमाम इसादी ताल्लुकात खत्म कर सकता हूं। मुझे यह हक हासिल है। मैं ब्रिटेन से भी खुश नहीं हूं। दरअसल ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने एयरबेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करने देने में हिचकिचाहट दिखाई। स्पेन बहुत बुरा रहा है। उसे सारा व्यापार खत्म
करेंगे। उससे कोई लेना देना नहीं है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रोसांचेस ने भी ट्रंप को जवाब दिया है। सिर्फ कुछ लोगों की बदले की कारवाई के डर से हम किसी ऐसी चीज में शामिल नहीं हो जाएंगे जो दुनिया के लिए बुरी है और हमारे मूल्यों और हितों के उलट है। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी जो कि अमेरिका के इत्तहादी समझे जाते हैं। उन्होंने भी मिलिट्री तौर पर अमेरिका की मदद करने की बजाय सिर्फ बयान की हद तक या फिर असले की हद तक उसकी मदद करने का ऐलान किया है। ईरान के मिडिल ईस्ट पर एक के
बाद एक हमले के बाद सुरते हाल यह है कि मिडिल ईस्ट से एक-एक करके यूएसए के जहाज वापस जा रहे हैं क्योंकि वहां पर मजीद कभी भी अटैक हो सकता है। ईरान से बढ़ती कशीदगी के पेशजर अमेरिका ने क़तर बहरेन में अड्डों से अपने से सैकड़ों फौजी निकाल लिए। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा लिखा इदामदाम एतियाती तदाबीर के तौर पर किया गया है। आप जरा सोच के देखें कि क्या कभी आप यह सोच भी सकते थे कि एक इस्लामी मुल्क ईरान अकेले यूएसए वक्त की सुपर पावर की यह हालत कर देगा कि वो वहां
से दुम दबाकर अपने वतन वापस भागेगा। जरा सोचें यह खुद को सुपर पावर कहने वाले मुल्क के लिए कितनी जिल्लत की बात है कि वो अपना बोरिया बिस्तरा उठाकर अपने अड्डों से भाग जाए। और इसराइल की या तिलवी की तो बात ही ना करें क्योंकि वहां पर लगातार ईरान के हमले जारी हैं जो कि कभी क्लस्टर बम्स की सूरत में तो कभी सुपरसोनिक मिसाइल वहां पर तबाही मचा रहे हैं। एररान से मुसलसल मार खाने के बाद इसरली रब्बई रो-रो कर दज्जाल को पुकार रहे हैं। दूसरी खबर यह है कि मोदी साहब ने आखिरकार नेतन याऊ
से अपनी यारी निभा दी है। क्योंकि दो हफ्ते पहले एक ईरानी शिप इंडिया के वसा पट्टनम के अंदर नेवल एक्सरसाइज के लिए इंडिया की दावत पर यहां पर आई थी। लेकिन वो जैसे ही भारत के ज़रे कंट्रोल इंडियन ओशन से वापस जा रही थी, तो इसकी मुखबरी इसने अमेरिका और इसराइल को कर दी। जिसके बाद अमेरिकन शिप्स ने इसको टारगेट करके वहीं पर डिस्ट्रॉय कर दिया। इस ईरानियन शिप के अंदर 87 लोग मारे गए और इसके अंदर सैकड़ों लोग जख्मी और अभी तक लापता हैं। हालांकि ईरान को इस बात का पहले से खतरा था और
इसीलिए इसने जंग की वजह से कुछ दिन यहां पर इंडिया के अंदर इस शिप को रोकने की दरख्वास्त की थी जिसको रिजेक्ट कर दिया गया था। आखिर इस इंकार के बाद यह जहाज श्रीलंका रवाना हुआ तो भारत ने इसकी लोकेशन अमेरिका को दे दी और इसे श्रीलंका के करीब निशाना बनाया गया। पर अभी तक मोदी के मुंह से एक लफ्ज मुजम्मत का नहीं निकला। मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए। यह वही ईरान था जिसने भारत को चाबहार पोट दी थी। सस्ता तेल दिया। भारत को अच्छे हमसाए की तरह ट्रीट किया और इस बंदे ने इस मेहमान नवाजी
का इस एहसान का बदला आज ईरान को दे दिया है। इस वक्त सुरते हाल यह है कि ईरान पर मुसलसल यूएसए और इसराइल की बमबारी जारी है। खासतौर पर असफहान शहर पर लगातार कॉर्पोरेट बॉम्बिंग की जा रही है। जैसा कि इसराइल ने गजा में की थी। ताकि ईरान की मिलिट्री तसीबात और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर ही तबाह हो जाए। लेकिन ऐसा पॉसिबल नहीं है क्योंकि ईरान का इंफ्रास्ट्रक्चर जहां से वो मिसाइल ल्च करता है वो जमीन के नीचे बने हुए हैं। इन दोनों मुल्कों के लिए सबसे बड़ा चैलेंज इनको तबाह करने की बजाय इस इंफ्रास्ट्रक्चर को ढूंढना
है। उससे भी अच्छी खबर यह है कि खबरों के मुताबिक ईरान के अंदर 4.4 मैग्नीट्यूड का जलजला रिपोर्ट किया गया है। जो कि इसराइल और यूएसए के मुताबिक नेचुरल नहीं है। बल्कि दुनिया को यह शक है कि शायद ईरान ने न्यूक्लियर बम बनाकर इसकी टेस्टिंग की है। और यह उसी का धमाका था। देखिए इस वक्त ईरान के पास इतना इनरच यूरेनियम मौजूद है जो कि 99% तक इनरच हो गया तो ईरान सिर्फ एक दो नहीं बल्कि पूरे 11 न्यूक्लियर बम एक साथ बना सकता है और अगर ऐसा होता है तो आप देखेंगे कि पूरी गेम
ही पलट जाएगी। किसी मुल्क की जरूरत नहीं होगी ईरान पर डायरेक्ट जंग करने की। इसके अलावा ईरान के गल्फ कंट्रीज पर हमलों के बाद हम देख रहे हैं कि इन मुल्कों की एयरलाइन बंद होने की वजह से अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। इनकी ट्रेड बंद हो चुकी है। वहां से तेल की सप्लाई नहीं हो रही और यह गल्फ कंट्रीज स्टेट ऑफ हरमोस ब्लॉक होने के बाद मुसलसल ट्रंप पर प्रेशर बना रहे हैं। इसके बाद हम देख रहे हैं कि बैक डोर से ट्रंप मिनतों पर उतर आया है। और खबरों के मुताबिक पाकिस्तान समेत
गल्फ मुल्कों को कह रहा है कि ईरान से हमारी डील करा दो ताकि यह जंग खत्म हो जाए। क्योंकि अगर ईरान ने इस जंग का फायदा उठाकर न्यूक्लियर बम बना लिया तो यह मिडिल ईस्ट के अंदर अमेरिका और इसराइल की मौत है। देखिए आयतुल्ला खुमेनी जब जिंदा थे तो उन्होंने हमेशा यह फतवा देकर कहा कि न्यूक्लियर बम बनाना हराम है क्योंकि इससे आम लोग मरते हैं। ईरान को उन्होंने यह हथियार बनाने से रोके रखा पर अब नहीं क्योंकि जब आयतुल्लाह खुमेनी को शहीद कर दिया गया है तो उस वजह को ही खत्म कर दिया गया
है। और यकीनन ईरान तेजी से इस पर काम कर रहा है। और अमेरिका की दूसरी सरदर्दी यह है कि अमेरिका के पास एयर डिफेंस सिस्टम के जो इंटरसेप्ट मिसाइल मौजूद हैं जो कि ईरान के हमलों को हवा के अंदर ही तबाह कर देते हैं वह आहिस्ता-आहिस्ता खत्म हो रहे हैं। जबकि एरान का कहना है कि हम जितने मिसाइल इनको मार रहे हैं उससे ज्यादा हर दिन बना रहे हैं। यानी हम एक दिन के अंदर 500 मिसाइल भी बना सकते हैं। और मसला सिर्फ यह नहीं है क्योंकि इंटरसेप्ट मिसाइल की कीमत लाखों और मिलियन डॉलर्स के
अंदर भी होती है। जबकि ईरान का मिसाइल सिर्फ $000 के अंदर बन जाता है। तकरीबन 20 से $00 के अंदर। तो अब आप अंदाजा लगाएं कि इस इंटरसेप्ट मिसाइलों की वजह से अमेरिका और इसराइल को मौशी तौर पर कितना ज्यादा नुकसान हो रहा है। सऊदी ऑफिशियल ने लाइव टीवी पर आकर यह कहा कि यूएसए ने जिस तरह से हमें दुश्मनों से प्रोटेक्ट करने का वादा किया था इस वक्त वह सिर्फ इसराइल को ही प्रोटेक्ट कर रहा है। हमारी कोई फिक्र नहीं है। इस बयान से साफ जाहिर होता है कि यूएसए फ्यूचर के अंदर मिडिल ईस्ट
के मुल्कों के अंदर अपना ट्रस्टफ खोता जा रहा है डिफेंस के मामले में। अब बजाहिर तो अमेरिका ने अपने टॉम हॉक मिसाइल से ईरान पर हमला शुरू कर दिया है और साथ-साथ यह भी ऐलान कर दिया है कि हम बहुत जल्द अपनी आर्मी को ईरान के अंदर ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उतार सकते हैं। पर दोस्तों सच यह है कि अगर ऐसा होता है तो यह यूएसए की सबसे बड़ी गलती होगी क्योंकि ईरान, अफगानिस्तान, शाम के अंदर जब यह जमीनी फौज उतारी गई थी, तो सिर्फ यह यूएसए की फौज नहीं थी बल्कि यूनाइटेड नेशन के मुल्कों
की जॉइंट फर्सेस थी। लेकिन इस वक्त यूएसए बिल्कुल अकेला पढ़ चुका है और उसकी वजह साफ है कि यह अमेरिका की या फिर उनके सर्वाइव की जंग नहीं है बल्कि सिर्फ इसराइल के सर्वाइवल की जंग है जिससे उनको कोई फायदा नहीं है और दूसरी बात यह है कि ईरान ने खुलेआम यह धमकी भी दे दी है कि अगर फ्रांस, बर्तनानिया या कोई भी और मुल्क इस जंग के अंदर शामिल होता है तो उसको भी दुश्मन समझा जाएगा और इससे भी इसी तरह से जंग होगी। और यह बात सेंस भी बनाती है क्योंकि यह सब डेवलप
कंट्रीज हैं क्योंकि शेर के मुंह में हाथ डालकर यह अपने मुल्क की तबाही कभी नहीं करवाएंगे। हैरान जख्मी शेर की तरह लगातार हमले कर रहा है। इसके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं है। पर यूएसए समेत इन मुल्कों के पास खोने के लिए बहुत कुछ है। इसलिए बार-बार ईरान को मजाकरात की ऑफर हो रही है। पर इसने जवाब दिया है कि अब सवाल ही पैदा नहीं होता। तो इस चीज से मायूस होकर इसका अगला प्लान जिस पर अमेरिका गौर कर रहा है वो यह हो सकता है कि इराक और शाम के अंदर मौजूद कुर्द
फोर्सेस को हथियार देकर इनको ईरान से जंग के अंदर उलझा दे। ईरान को शिकस्त देने में नाकामी के बाद अमेरिका ने कुर्द जंगजुओं से मदद मांग ली है। अलजजीरा के मुताबिक ईरान के खिलाफ जंग में साथ देने के लिए अमेरिका ने कुर्द जंगजुओं से राब्ता किया। अमेरिका की ईरान में बगावत की कोशिशें। माहरीन के मुताबिक कुर्द फोर्सेस से हाथ मिलाने का मंसूबा ख्ते को गैर मुस्ताहकम करेगा। पर यह इतना आसान नहीं है जितना सुनने में लग रहा है क्योंकि ईरान से लैंड पर कारवाई करना मुमकिन ही नहीं है क्योंकि इसकी वजह इसकी टफ ज्योग्राफी है।
यह चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ी सिलसिलों और समंदर से घिरा हुआ है जो कि जंग की मुश्किलें हद से बढ़ा देती हैं और इसके अलावा इसके सराब बहुत ज्यादा लंबे हैं जो किसी भी जमीनी फौज का कब्रिस्तान बन सकती हैं। और इस सबसे बढ़कर जरा तसवुर करें कि अगर यूएस फोर्सेस ईरान के अंदर दाखिल भी हो गई तो वहां की आवाम जो कि शदीद गुस्से के अंदर है इनका क्या हाल करेगी। हैरान में रिजीम चेंज करने का सिर्फ एक ही तरीका था कि वहां के लोग इस हुकूमत के खिलाफ खड़े हो जाते। लेकिन हमने देखा
कि आयतुल्लाह खुमीनी की शहादत के बाद और छोटी बच्चियों को मारने के बाद उनका गुस्सा मजीद बढ़ गया है। वेस्टर्न मीडिया ने बहुत प्रोपेगेंडा करने की कोशिश की कि यह दिखाएं कि वहां पर आवाम अब सड़कों पर निकल आई है अपनी हुकूमत के खिलाफ और वहां पर लोगों ने जश्न मनाया आयतुल्लाह की वफात के बाद। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। जो लोग खिलाफ थे भी वो भी ईरान और इसराइल के इस हमले के बाद एक होकर एक कौम बन चुके हैं। इस बंदे का ख्याल था, इसका तकुर था कि मेरे पास फिरौन की ताकत
है। मैं कुछ भी कर सकता हूं। पर जब ईरान ने औकात दिखाई और थोड़ी सी हिम्मत दिखाई तो अल्लाह ने इसकी दहशत इस सुपर पावर के दिल में बिठा दी। इस बंदे ने अपना अंजाम सोचे बगैर इस जंग के अंदर सींग फंसा लिए। बस नेतन याऊ से ब्लैकमेल होकर। लास्ट वीडियो में मैंने आपको बताया था कि सऊदी अरेबिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी पर मिसाइल अटैक हुआ है जो कि ईरान ने किया है। पर यह सच नहीं था। क्योंकि सच अब सामने आया है। क्योंकि ईरान ने कहा है कि सऊदी अरेबिया हमारा मुस्लिम भाई है।
हमारा टारगेट सिर्फ यहां के यूएसए के असा से थे। हमने आराम को रिफाइनरी पर कोई अटैक नहीं किया। यह इसराइल ने किया है। जी हां, इसराइल ने। फिर एक और इंकशाफ हुआ है कि अमेरिकन ब्रॉडकास्टर ने खुफिया खबर दी है कि सऊदी अरेबिया समेत कतर समेत गल्फ मुल्कों के अंदर इसराइली जासूसों को पकड़ा गया है जो कि ऐसी ही हसाफ जगहों पर बम लगा रहे थे। इन लोगों का प्लान था कि इन मुल्कों के अंदर धमाका करके इसका इल्जाम भी ईरान पर डाल दें ताकि यह गल्फ कंट्रीज गुस्सा होकर ईरान के खिलाफ खड़े हो जाएं।
इन सुन्नी मुस्लिम मुल्कों को ईरान के खिलाफ जंग के अंदर शामिल होने की वजह दी जाए। इसके अलावा लास्ट वीडियो के अंदर मैंने यह भी बताया था कि मोहम्मद बिन सलमान पर यूएसए की न्यूज़ एजेंसी वाशिंगटन पोस्ट ने इल्जाम लगाया है कि ईरान पर हमले के लिए मोहम्मद बिन सलमान ही लगातार ट्रंप को फोन करता रहा और मैंने आपसे कहा था कि आप देख लेना कि फ्यूचर के अंदर जाकर यह साबित होगा कि यह खबर झूठी थी और यह शिया सुन्नी इख्तलाफ को बढ़ाकर मुसलमानों को तोड़ने की और इनको आपस में लड़वाने की चाल है।
और दोस्तों ऐसा ही हुआ है। अभी-अभी खुद मोहम्मद बिन सलमान का बयान आया है कि यह सब कुछ झूठ है। मैंने ऐसा कभी नहीं कहा। और वैसे भी दोस्तों कॉमन सेंस की बात है कि अगर इन लोगों के पास कोई सबूत होते तो ट्रंप एक मिनट ना लगाता इसको सामने लाने में। और अमेरिका और इसराइल के पास इससे अच्छा मौका और क्या था? अगर इनके पास सबूत होते तो सऊदी अरेबिया को ईरान के खिलाफ करने के लिए। इसलिए अगर आप इन तमाम चीजों पर गौर करें और इन तमाम कड़ियों को मिलाते जाए तो आप समझ
जाएंगे कि यह जंग सिर्फ हथियारों की नहीं है बल्कि मेंटल लेवल साजिशी और प्रोपेगेंडा भी जोरों शोर से इन दोनों मुल्क की खुफिया एजेंसियां चला रही हैं। इसलिए हमें बहुत ही ज्यादा मोहतात रहने की जरूरत है और किसी भी खबर पर यकीन करके रिएक्शन देने के बजाय इंतजार करें प्रॉपर खबर आने का। इसी वजह से मैं दो-ती दिन तक इंतजार करके तमाम सुरते हाल को देखकर खबर कंफर्म करके फिर आपके सामने लाता हूं। अगली खबर यह है कि ईरान ने स्टेट ऑफ हरमोस को ब्लॉक करके बहुत बड़ा स्टेप लिया है जिसको आम बंदा नहीं समझ
सकता। ईरान को इससे कोई नुकसान नहीं होना क्योंकि उस पर पहले से पाबंदी है। वो अपना ऑयल किसी को नहीं भेज सकता। चाइना के अलावा इसका कोई मुस्तकिल कस्टमर ऑयल और गैस का पहले भी नहीं था। लेकिन अगर बात करें मिडिल ईस्ट की या फिर गल्फ कंट्रीज की जैसा कि इराक, यूएई, बहरीन, कतर, सऊदी अरेबिया तो इनका तेल 70 टू 80% इसी स्टेट ऑफ हरमोस के रफ्ते से होकर जाता है जिसको ईरान कंट्रोल करता है। इसका मतलब है कि इन मुल्कों की एक-एक दिन की कमाई बंद हो रही है और पूरी दुनिया के अंदर पेट्रोल
की कीमतें बढ़ने वाली है। स्टॉक मार्केट क्रैश करने वाली है और गल्फ कंट्रीज मजबूर होकर यह जंग किसी भी हाल के अंदर रुकवाएंगे। ज्यादा देर तक अपना नुकसान बर्दाश्त नहीं कर सकते। हालांकि ट्रंप को इस बात का पहले से अंदाजा था कि शाह फैसल के दौर की तरह इनकी ऑयल सप्लाई बंद होने से इनकी यूएस मार्केट क्रैश कर सकती है। तो इसने पहले से ही वेनेजुएला के ऑयल रिजर्व पर कब्जा कर लिया था ताकि अपनी जरियात यहां से पूरी करता रहे और दूसरा इसने यह भी ऐलान किया है कि हम अपनी नेवल शिप्स को भेजकर
इस रास्ते को खुलवाएंगे और इन जहाजों को बाहर निकालेंगे जो कि यहां पर फंसे हुए हैं। एररान ने चाइना के अलावा तमाम बैरी जहाजों को यहां से गुजरने से रोक दिया है क्योंकि चाइना बैक डोर से ईरान को वाकई मदद भी कर रहा है। जबकि रशिया अपनी यूक्रेन जंग की वजह से उसकी मिलिट्री तौर पर तो मदद नहीं कर सकता लेकिन हथियारों की मदद से उसकी काफी हद तक सपोर्ट कर रहा है। और अभी की खबरों के मुताबिक इसने ईरान के साथ हथियारों की खुफिया तौर पर एक बहुत बड़ी डील की है। ईरान ने रूस
के साथ तकरीबन 1 खरब 64 अरब मालियत का दफाई मोहदा कर लिया। मोहदे के तहत ईरान कंधे पर रखकर फायर होने वाला जदीद मिसाइल निजाम हासिल करेगा। ₹9936 मिसाइल फराहम किए जाएंगे। इमकान जाहिर किया गया है कि कुछ यूनिट्स पहले ही ईरान को फराहम किए जा चुके हैं। देखिए अगर ऐसा होता है कि यूएस अपने शिप्स को यहां पर वाकई स्टेट ऑफ हरमोस को खुलवाने के लिए भेज देता है तो यह जंग मजीद फैल सकती है और अबकी बार ईरान इन शिप्स को जरूर टारगेट करेगा। तो यह जंग पूरे ख्ते के अंदर फैल सकती है।
खबरों में यह भी आ रहा है कि हमास ने अभी इसराइल पर रॉकेट से हमला किया है। लेकिन यह खबर अभी तक कंफर्म नहीं है क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया तो इसको रिपोर्ट कर रहा है लेकिन इंटरनेशनल मीडिया नहीं। सबसे पहले आपको बताएं फ़िलस्तीनी मुज़ामती तहरीक हम्मास के इसराइल पर जमीन, समंदर और फ़ज़ा से हमले, 22 इसराइली हलाक, सैकड़ों जख्मी और दर्जनों यगमाल बना लिए गए। अरब मीडिया के मुताबिक हमा्मास की अलसाम ब्रिगेड ने पहले हजारों रॉकेट दागे और फिर पैदल दस्ते सरहदी बाड़ तोड़कर इसराइल में दाखिल हुए। अल कसाम ब्रिगेड के मुज़ामतकार मोटर ग्लाइडर्स के जरिए
फजा से भी इसराइल में दाखिल हुए। इस वक्त पूरी कोशिश की जा रही है कि शिया सुन्नी फसाद को भड़काया जाए और गलतफहमियों में डालकर गल्फ मुल्कों को जिनको दीन का हुक्म था कि काफिरों को दोस्त ना बनाओ। इनको अपना डिफेंस दे रखा था। इन्हें ईरान से नफरत में डालकर लड़वाया जाए। मिसाल के तौर पर लास्ट वीडियो के अंदर मैंने बताया था कि साइपरस यानी तुर्किया के अंदर मौजूद बर्तनानिया की नाटो की एयरबेस पर भी ईरान ने ड्रोन हमला किया था। लेकिन सच यह है कि वो हमला भी ईरान ने नहीं किया था। बल्कि ईरान
के शहीदी ड्रोन जैसा एक ड्रोन था जो कि इसी की तरह दिखता था जिसको इसराइल ने मारा था। और इसका मकसद यह था कि तुर्की समेत यूनाइटेड नेशन के मुल्क भी इस जंग के अंदर ईरान के खिलाफ शामिल हो जाए। अब आप समझ रहे हैं ना कि कितनी ज्यादा साजिशें चल रही है मैदान जंग के अलावा भी। यह जंग इसराइल और अमेरिका ने तब शुरू की जब इन दोनों मुल्कों के दरमियान अमन मुयदा फाइनल हो चुका था और ईरान ने मान लिया था कि हम जोरी हथियार नहीं रखेंगे। हम आईएईए की इंस्पेक्शन टीम को भी
अलव करेंगे। पर अमेरिका को इस जवाब की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उसको तो इसराइल मुसलसल प्रेशराइज कर रहा था कि तुमने हर सूरत ईरान पर हमला करना है। सो अगर यह डील हो जाती तो यह हमला किस तरह से करते। सो इसलिए हमने देखा कि ऐन मजाकरात के दौरान इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया और बहाना यह दिया कि अगर हम हमला ना करते तो ईरान हम पर पहले हमला कर देता। पर मसला यह हुआ है कि अमेरिकन डिफेंस मिनिस्टर ने खुद मीडिया पर आकर यह बता दिया है कि ईरान की तरफ
से किसी भी पेशकी हमले की इंटेलिजेंस रिपोर्ट हमारे पास थी ही नहीं। सो बिल्कुल ऑब्वियस यह है कि इसराइल को यह हमला अमेरिका से करवाना ही था क्योंकि इस ख्ते के अंदर सिर्फ खतरा ईरान, तुर्की और पाकिस्तान से इसराइल को है। जो कि पलट कर जवाब दे सकते हैं अपना डिफेंस करने की सलाहियत रखते हैं। आपने खुद देखा कि जब एक बिजनेसमैन और बेवकूफ शख्स के हाथ के अंदर दुनिया की सबसे ताकतवर मुल्क की कमांड दे दी जाए तो वो इस मुल्क का यही हाल करता है जो कि इस बंदे ने किया है। फाइल्स के
अंदर इसका बिना सेंसर नाम 10 लाख बार आया और इसने इतने घनावने काम किए हैं कि अगर सब सामने आ जाए तो खुद अमेरिकन आवाम इसको चौक पर लटका देगी। बच्चों के साथ जो कुछ ज्यादती की गई उसको इसराइल के अलावा दुनिया का कोई भी मुल्क बर्दाश्त नहीं करता। अमेरिका में इस पर जीरो टॉलरेंस है। अभी अमेरिकन सेनेटर ने भी यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ट्रंप किस वजह से ब्लैकमेल हो रहा है? क्योंकि 40 साल से इसराइल यह हमला हर अमेरिकी सदर से करवाना चाहता था। पर ट्रंप को यह अचानक से किस वजह
से करना पड़ेगा? डेमोक्रेटिक पार्टी के सेनेटर एलिज़बेथ वन ने कहा है कि इसराइल पिछले 40 साल से अमेरिका के जरिए ईरान पर हमला करना चाहता था। लेकिन तमाम अमेरिकी सदर इतने मजबूत थे कि वो इसराइल को नो बोल रहे थे। डॉनल्ड ट्रंप पहला सदर है जो इसराइल के हाथों ब्लैकमेल हो गया। वजह यह थी कि इस बंदे ने एब्सेंट फाइल्स को दबाने के लिए और अगले सदारती इलेक्शन को जो कि इसी साल नवंबर के अंदर है। वाहवाह समेटने के लिए ईरान पर हमला तो कर दिया। पर अब बाहर निकलने की कोई सूरत नजर नहीं आ
रही और यह जंग लंबी तर और महंगी तर होती जा रही है। अब सुरते हाल यह है कि इसराइल को इस तरह का पपेट सदर दोबारा कभी नहीं मिलना था। इसीलिए खासतौर पर इस मौके पर इसको इस हमले के लिए चुना गया। पर अमेरिका की 90% आवाम ईरान पर हमले के हक में नहीं है। और अभी-अभी की खबरों के मुताबिक यूएस सबमरीन ने भरे मजमे के अंदर खड़े होकर कहा कि हमारे फौजियों को इसराइल के लिए मरने क्यों भेज रहे हो? यह हमारी नहीं बल्कि इसराइल की लड़ाई है जिसकी खातिर हमारे फौजियों को मरवाया जा
रहा है। इस बात पर इस बेचारे को जबरदस्ती हॉल से बाहर निकाल दिया गया और इस दौरान इसका बाजू भी टूट गया। सच यह है कि अगर मजीद यह जंग एक महीना भी और चल जाती है तो अमेरिका इकोनमिकली तौर पर बहुत वीक हो जाएगा। क्योंकि अभी की खबरों के मुताबिक एआई का इस्तेमाल करके ईरान के अंदर जिन ठिकानों पर निशाना बनाया गया वो दरअसल कोई मिलिट्री का सामान कोई तारे नहीं थे बल्कि $20 लगाकर 3D पेंटिंग से बनाए गए ये जहाज थे जो कि दिखने के अंदर आसमान से बिल्कुल असली लगते थे। पर अमेरिकन
ड्रॉन्स की एआई ने बेवकूफ बनकर जिनको टारगेट किया वो दरअसल पेंटिंग थी और इस पेंटिंग पर जो बॉम्ब गिराया गया वो $1 मिलियन से ज्यादा कीमत का था। जबकि ईरान ने इस पेंटिंग को बनाया होगा ज्यादा से ज्यादा $10 के अंदर। व्हाट अ स्मार्ट मूव। इस बात से बिल्कुल साफ है कि जिस अमेरिका को मूवीज के अंदर दुनिया के अंदर सुपर पावर होने का भरम बनाया हुआ है, वह काबिले शिक है। इसकी भी कमजोरियां हैं। इस मुल्क को भी घुटनों पर लाना पॉसिबल है। जैसा कि शाह फैसल ने अपने टाइम के अंदर किया था। बस
जरूरत है तो इरादों की। इस वक्त ईरान के अंदर मामलात जिंदगी बिल्कुल नॉर्मल है। हर जगह पर स्टोर खुले हुए हैं। ग्रोसरी स्टोर चल रहे हैं। जरूरत से ज्यादा सामान ग्रोसरी स्टोर्स के अंदर मौजूद है। पेट्रोल पंप पर कोई रश नहीं है। इनकी आर्मी भी नॉर्मल तरीके से काम कर रही है। सलाम वालेकुम। मेरा नाम मोहम्मद है। फिफ्थ मार्च है। मैं तैरान से आपके साथ मौजूद हूं। आयतुल्लाह खामनाई की शहादत की वजह से छुट्टियां भी चल रही हैं। जंग भी है। तो हालात देखते हैं क्या है। लोग कह रहे हैं भाई तैरान में तो कोहराम
मचा हुआ है। हर जगह बम गिर रहे हैं। और खाने को नहीं है लोगों के पास। पीने को नहीं है। रैशनिंग हो रही है। प्लीज यह झूठी खबरों पे आप ध्यान ना दें। यहां पे लाइफ रिलेटिवली नॉर्मल है। मैं अभी ग्रोसरी स्टोर्स में भी जाऊंगा। आपको दिखाऊंगा कि भरे हुए हैं ग्रोसरी स्टोर। भरे हुए हैं। मतलब ओवर सप्लाई है। खरीदने को शायद लोग कम होंगे। लेकिन कोई ऐसी बात नहीं है कि तैरान खाली हो चुका है और यहां कैद पड़ चुका है। और यहां पे कोई लोग जो है वो यहां पे छुप के बैठे हुए
हैं अंदर बंकरों में या प्लीज थोड़ा सा ध्यान रखें। ये बड़ा सेंसिटिव टाइम है। फिफ्थ जनरेशन वॉरफेयर में प्रोपेगेंडा में। आपको बहुत सारी चीजें जो है वो अमेरिका की तरफ से प्रोजेक्ट की जा रही होती है और हम नादान हैं क्योंकि हमने अमेरिका से ही खबरें लेनी है तो जाहिर है हम भी दिखा देते हैं उनको। पर अगर वेस्टर्न मीडिया को देखें तो इनके मुताबिक ईरान हमलों की वजह से तबाह हो चुका है। बस एक प्रोपेगेंडा मीडिया पर मुसलसल चल रहा है। और अभी जब मैं यह वीडियो बनाकर फारग हुआ तो यह खबर मिली कि
अज़र भाईजान पर भी इसराइल ने ड्रोन हमला करके इसका इल्जाम भी ईरान पर डालने की कोशिश की लेकिन फिर से पकड़ा गया। पर सबसे अहम खबर यह है कि अमेरिकन फौज ने भी इस जंग को जंग हरमजदून यानी इनकी मजहबी लड़ाई की आखिरी वर्ल्ड वॉर की शक्ल दे दी है। इंटरनेशनल मीडिया यह रिपोर्ट कर रहा है के जो अमेरिकन फौज के कमांडर्स हैं वो अपने ट्रूप्स को यानी अपने सोल्जर्स को ये कह रहे हैं कि ये जो डोनल्ड ट्रंप ने इसराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया है। ये एक मजहबी जंग है। और एक
गैबी इशारा हुआ है जी डोनल्ड ट्रंप साहब को। और इस हवाले से कहा जा रहा है सम यूएस कमांडर्स टोल्ड ट्रूप्स दी ईरान वॉर इज पार्ट ऑफ गॉड्स डिवाइन प्लान टू ट्रिगर अरगडोन जो कि एक मजहबी जंग का इंग्लिश नाम है। दे साइटेड द बुक ऑफ रेवोल्यूशन टॉकिंग अबाउट दी इमिनेंट रिटर्न ऑफ जीसस क्राइस्ट। वन कमांडर इवन सेड ट्रंप हैज़ बीन गिवन अ ग्लिं्स बाय जीसस टू लाइट दी सिग्नल फायर इन ईरान। कोई इस तरह की बात है जी इसमें। पाकिस्तानी सफी हामिद मीर के मुताबिक अमेरिकन कमांडर अपने फौजियों को यह कह रहे हैं कि
ट्रंप को इशारा हुआ है कि मुसलमानों के खिलाफ आखिरी जंग अज़म की तैयारी करो। जिसके बाद ही ईसा अल सलाम की दुनिया में वापसी होगी। हनीफ जंग को वो मजहबी तौर पर एक जंग डिक्लेअर कर चुके हैं। और यही बात मैंने आपको बार-बार बताई है कि यह सिर्फ ईरान की नहीं बल्कि मुसलमानों की और कुफ की जंग है और खुद इसका इकरार फौजियों को बता-ब बताकर यह लोग खुद कर रहे हैं और साथ-साथ नाकाम भी हो रहे हैं और जाहिर है कि अमेरिका के पीछे इसराइल ही है। अब देखते हैं कि आने वाले टाइम के
अंदर जीत किसकी होती है। हालात किस तरफ रुख लेते हैं क्योंकि यह जंग, ताकत या गरूर जीतता है या फिर जज्बा ईमानी और बदले की आग इसको जीत जाती है। अल्लाह ताला से दुआ है कि वह हमें समझने की और नेक अमल करने की तौफीक अता फरमाए।