[संगीत] नारायण हरि नारायण हरि नारायण हरि नारायण श्रीमद् भागवत महापुराण कहा जाता है वेदव्यास जी ने 17 पुराने की रचना की उन्हें आत्मा संतोष नहीं हुआ लोग दुखी के दुखी थे नारद जी घूमते घूमते उनके आश्रम में गए बोले महाराज आप तो ज्ञानी हो जगत के पारगामी तत्व का आत्मा परमात्मा का अनुभव किया है फिर भी आपके चेहरे पर जो जीवन मुक्त संतो की प्रसन्नता हनी चाहिए उसमें कुछ कमी दिखाई दे रहे अपने मेरा सत्कार किया अदा किया ठीक है [संगीत] शास्त्र कहता है की आपको ऐसे कर्म करने चाहिए की आपको अपने उसे धनबाद विद्या
बाल बुद्धि बाल मनोबल इन सब से पैर स्वभाव बाल आत्मा बाल और आत्मबल का संतोष परमात्मा की प्रताप का संतोष अपने कर्मों का संतोष जब तक नहीं होता तब तक आप कर्म करते रहिए और कर्म में क्या कमी है वो ढूंढते रहिए कर्म ऐसे करिए की आपके करने की आसक्ति मिट्टी जाए करने की शक्ति जन की शक्ति और मान्य की शक्ति जन्मजात सब मनुष्यों को मिली है [संगीत] मम्मी बताते बताते तक जाएगा आप बताते बताते तक जाएगा लेकिन बेटा पूछते नहीं थकता यह क्या है वो क्या है वो बेटा यह चिड़िया मानना पड़ेगा और माने
की शक्ति विधि यह तीन शक्तियां सब इंसानों को किसी भी मजहब का हो किसी भी धर्म का नाम बोलना हूं नमस्कार है जो सिद्ध पुरुष है उनको नमस्कार है जो आचार्य उनको नमस्कार ऑन को नमस्कार [संगीत] कम करने के पहले आदमी के चित में उत्साह होता है कम करते समय पुरुषार्थ होता है और कम जब पूरा होता है तो कम का फल करने की शक्ति का फल अपने हृदय में फलित होता है कुर्सी फलित कुर्सी फल नहीं है लड्डू फल नहीं है लेकिन तुम्हारे दिल में कर्म का फल सुख शांति माधुरी उत्पन्न हुआ की अशांति
ग्लानि और दुख उत्पन्न हुआ कुछ ऐसे भी कर्म होते हैं की करने के बाद लगता है की [संगीत] जैसे आवेश में तो पति पत्नी या लवर लवली ग जाते आपस में एक दूसरे को नचने बाद में ग्लानि पैदा होती है करें की नहीं करें फिर ग जाते समिति के कार्य और कोई अच्छे कम है शांति प्राप्त होती अंतरात्मा का संतोष पैदा होता है तो आपके अंदर करने की शक्ति है करने की शक्ति का सात उपयोग करो ताकि जिससे किया जाता है उसमें मां थोड़ा शांत हो तो परमात्मा सुख प्राप्त और आपकी योग्यता बढ़ेगी करने की
शक्ति का सात उपयोग करोगे तो करने की वासनाएं धीरे-धीरे शांत हो जाएगी और कर्म बंधन कट जाएगा जन की शक्ति का सतुपयोग करोगे तो उसे सत्य को जन के रास्ते जन की शक्ति का सतुपयोग करो की दुख आया चला गया सुख आया चला गया मैं कौन कहां से आया हूं [संगीत] मेरा नाम रख दिया मोहन मेरा नाम रख दिया आंसू माल मेरा नाम रख दिया प्रेमजीत हेमजी हूं लेकिन यह तो शरीर का नाम है मैं कौन मैं कौन हूं उसको जन का उपयोग करते-करते जन की शक्ति का सात उपयोग करोगे तो जिससे सब जाना जाता
है उसे परमात्मा को जानकर मुक्ति का अनुभव हो जाएगा होलसेल में बजाओ परशुराम नहीं करते [प्रशंसा] फिर माने की शक्ति इसको माना उसको माना भगवान को माना ना माना नास्तिक को माना नास्तिक को माना अल्लाह को माना कृष्णा को माना गणपति को माना दोस्त को माना फलाने को माना माने की शक्ति तभी मानते जाते हो जहां से माने की शक्ति आई है उसे सत्य स्वरूप परमात्मा में शांति आनंद और माधुरी मिलता है नारद जी ने पूछा की महाराज आपने 17 17 पुराण लिखे फिर भी आपको अपने कर्म से अभी संतोष नहीं ग रहा है क्या
करण है वेदव्यास ने कहा मुझे संतोष इसलिए नहीं है की मेरे इतने शास्त्रों होने के बाद भी संसार के लोग बिचारे दुखी हैं बीमा है लाचारी है दुखी है मैंने शास्त्र बनाए फिर भी संसारी लोग उन शास्त्रों का आश्चर्य छोड़कर इधर-उधर-करम करते और गलत कर्म करते तो उनको फिर गलत फल मिलेंगे और अभी भी रहते हैं इसलिए मेरे मां में संतोष नहीं की मेरे शास्त्र में भी क्या कमी र गई ताकि लोग दुखी है महाराज जी ने कहा महाराज आपने शास्त्रों में लोगों को धर्म में रुचि हो इसलिए छूट-छाट दे डाली उनको सुविधा दे दिया
उनको पसंद ए जाए ऐसे शास्त्र में आपने दरवाजे रख दे लेकिन महाराज उन दरवाजा के द्वारा यह नरक में जाएंगे आपका उद्देश्य तो इन्हें सुखी करना है स्वर्ग में पहुंचाना ईश्वर में पहुंचाना लेकिन आदमी के जीवन में जब अंदर का सुख भगवान का सुख नहीं मिलेगा तो बाहर की चीजों को बादल सदल के सुखी होने के चक्कर में और दुखी होगा जैसे एक बेटा सुबह घूमने भट्ट है और रात को घर आता है उसका मां आप बोलना है बेटा सर दिन मत घुमा कर 1 घंटा सुबह गम दो घंटे शाम को रोज का ₹100 बिगड़ा
तो मां आप बोलते बेटा ₹10 शाम ₹20 तो अब ₹20 और भड़काने की छुट्टी क्यों दे रहे हैं की ज्यादा भटकन को रॉक ज्यादा बिगाड़ करो के ऐसे आपने छुट्टी दे दिया की मांस खाना हो तो माता को बाली देकर फिर का लेना ताकि रोज रोज ना खाए कभी खाए पीना है तो ऐसे ऐसे करके विधि विधान करके फिर कभी पियो लेकिन वह बोलते हैं की यह पीने की तो शास्त्र ने भी आजा दे दी खाने की तो शास्त्र ने भी आजा दे दिया और ना करने जैसे कर्मों में और ज्यादा करते मनुष्य को चाहिए
सुख उसे सुख कहां है उसे सुख का रस रसमय शास्त्र जब तक नहीं मिला तब तक महाराज यह आपके पुराण या शास्त्र उपयोग लोग अपने मां माना करेंगे इसलिए आप कृपा करके ऐसा एक शास्त्र बना जिसमें भगवान का रस मिले असली रस मिले तो नकली आकर्षण छठ जाए शुद्ध पानी मिले तो गटर की नाली का पानी कौन पिएगा खर पानी कौन पिएगा बढ़िया भजन मिले अमृत भजन मिले तो फिर भी हरण की वह भीख मांगे टुकड़े कौन खाएगा तो लोगों को सच्चा सुख मिले सच्चा आनंद मिले सच्चा माधुरी मिले ऐसा भगवती तत्व है भगवान है
जहां से करने की जन की माने की शक्ति है उसे भगवान का रस पैदा करें ऐसा एक शास्त्र बना महाराज ऐसा शास्त्र तो भगवान के नाम का स्मरण करके आप समाधि लगाओ और जो भगवान ने चरित्र किया हैं उनको ध्यान में देखकर आप उसे ग्रंथ बना व्यास जी को यह बात जैक गई नारद जी का अभिवादन किया भगवान वेद व्यास ने समाधि लगाएं और जो-जो युग युगांतर में कप कल्पांतर में इस युग में नहीं इस कप में नहीं हजारों लाखों वर्ष पहले जहां-जहां जैसे-जैसे उनको देखा उनको श्लोकबद्ध करते गए अब दिखा तो बोलने लगे बोले
तो लिखने के लिए आंख खोलने पड़ेगी तो फिर समाधि टूट जाएगी भगवान गणपति का आवाहन किया गणपति जी पधारे गणपति को व्यास ने प्रार्थना किया की मैं समाधि में भागवत चरित्र देखा हूं और श्लोकबद्ध बोलना हूं आप लिखने जाइए कथा में लिखा है गणपति जी लिखने गए 18000 श्लोक लिखे गए उसके 12 स्कंद बने 335 अध्याय बने उसमें पहले पहले जो श्लोक लिखा गया वह आज आप उच्चारण करेंगे इस भागवत को पढ़कर सुनकर कई प्रेत प्रेत की सड़कती के लिए अर्पण पुण्य किया तो पाटो की सड़कती हो गई अशांति मिटाने वालों ने अशांति मिटाने के
लिए इसका श्रवण किया इस भागवत के कर नाम पड़े 17 तो पुराण लेकिन भागवत को महापुराण कहते दूसरा नाम है इसका श्रीमद् भागवत तीसरा नाम है परमहंस संहिता और चौथ नाम है भागवत कथा आदमी सुनेंगे जी जी भाव से सुनेंगे उनको वह इच्छा वह कल्पना दे साबिर पुरी होगी एक बार जल्दी जल्दी जा रहे थे विशाल पुरी में सकती ऋषियों ने देखा की देवर्षि इतने उदास तुम जल्दी-जल्दी कहां जा रहे हो बोले महाराज क्या बताऊं यह कल जो गाने पर देखा के आदमियों की मतिमंद हो गई आता दाल चावल जोतना में और खाने कमाने में
जिंदगी पुरी कर देते हैं मंद भाग्य कहानी भी महाराज शांति और आनंद हृदय को सुख मिले करने की जन की माने की शक्ति का सात उपयोग करके आदमी मुक्त हो जाए ऐसा कई दिखता नहीं [संगीत] गठन की बटन में जिंदगी खराब कर रहे हैं काशी कयामत द्वारका गया रंग क्षेत्र गया पुष्कर राज गया और कई तीर्थ में घुमा लेकिन देखा तो तीर्थ में भी धर्म के भाई कल जग ने अपने पर पसारे तीर्थ में भी यह भगवान इधर दक्षिण रखो वो रखो बस खींच खींची महाराज कहानी आदमी को शांति मिले हृदय का खजाना खुला सी
जगह तीर्थ में भी आप कल जो के भाई धर्म में रहने नहीं दी लोग बड़े दुखी और उनका दुख देखकर मैं घूमता घूमता महाराज मथुरा पहुंच मथुरा से आगे चला वृंदावन तो मैंने देखा की एक माही रो रही हमारी जुबान और उसके बेटे बुद्ध दो बेटे गॉड में रखकर मैं विलाप कर रही है मत चिंता पिनासर दर्शनाम तवलोकस्य सर्व पाप हराम परम है महात्मा जी क्षण भर ठहर जाइए और मेरी चिंता को भी नष्ट कर दीजिए आपका दर्शन तो संसार के सभी पापोन को सर्वत नष्ट कर देने वाला है मैं उसे माही के नजदीक गया
मैंने पूछा की ये बुद्ध बुद्ध कौन है बोले मेरे बेटे सफेद बाल वाले बेटे हैं तुम्हारे और तुम युवती हो बोले हां इसीलिए तो मैं दुखी हूं यह जो कोई पंखा हैक रही है कोई पानी दे रही है कोई संत बना दे रही है कोई कुछ का रही है यह सब माया कौन है [संगीत] मैं नदियां और तीर्थ है यह गंगा जी है यमुना देवी है सरस्वती विग्रह छोड़कर उनका आदि देवी के स्वर्ग मिलेगा कुंभ का मेला आता है तो तीर्थ ए जाते थोड़े दिन के लिए फिर तीर्थ तो चले जाते लेकिन महाराज कल जो
गाने पर भी मैं नहीं गई क्योंकि भगवान ने कहा की कल जुम्मे तू धरती पे ही रहना कलयुग के जीवन का कल्याण करना मैं अपने बेटों सहित काजुग में घूमती हूं लेकिन महाराज कल जुम्मे मेरे बेटों को बुद्ध बना दिया मेरा नाम अगर आप पूछते हो तो मेरा नाम भक्ति है और ये जो बेटे हैं वो ज्ञान और वही रहा है ऐसे तो हम सूक्ष्म रूप में लोगों के हृदय में रहते लेकिन कभी-कभी आकृति तुम्हारे जैसे संतो के प्रभाव से महाराज कर्नाटक में मैं उत्पन्न हुई देश में सम्मानित हुई बड़ी और महाराष्ट्र में सम्मानित हुई
गुजरात देश में मेरे अंग भांग हो गए वहां पाखंडी लोग पाखंड मेरे अंग भांग कर दी फिर मैं भटकती भटकती बिंद्रा बनाई यहां भक्ति के प्रभाव से कृष्णा की चरण राज के प्रभाव से मैं तो स्वस्थ हो गए लेकिन मेरे बेटे है और वह भी मूर्छित पड़े बुलेट तो आवाज नहीं देते कल जो कहा ऐसा प्रभाव पड़ा मैंने कहा की हिमालय तू चिंता मत कर मैं तेरे बेटों को जुबान करूंगा तेरा दुख दूर करूंगा और है भक्ति देवी मैं तेरे को घर-घर में क्या दिल दिल में तेरी स्थापना करूंगा अगर ना करूं तो मैं भगवान
का दास भी नहीं मैंने शपथ लिया है भक्ति देवी मैं तुझे घर-घर में दिल दिल में स्थापित करूंगा लेकिन जरा सा मोर्चा कुली ना खली फिर आंखें बैंड हो गई मैं बड़ा चिंतित्व के मैंने तो वचन दिया इनको मैं सजा करूंगा [संगीत] अभ्यागत साधुओं के घूमने लगे घड़िया पलटन बना लिए जय जय सियाराम अब मैं इसलिए दुखी हूं की इनका भक्ति को वचन दिया है तो इनका दुख दूर कैसे हो मैं बद्री का आश्रम जा रहा हूं एकांत में तपस्या करूं समाधि लगाऊं उनके दुख दूर करो ध्यान रखना ज्ञान और वैराग्य भक्ति के बच्चे हैं
भक्ति तब तक रोटी रहती है जब तक उसके बच्चे मूर्छित है तुमको भक्ति करना है तो ज्ञान और वैराग्य की मूर्छा हटानी पड़ेगी जिसकी भक्ति करते उसे परमात्मा का ज्ञान सत्संग में मिलेगा जो भक्ति कर रहे वह तुम जो जन की माने की करने की शक्ति रखते हो वो तुम कौन हो उसका तुम्हें ज्ञान मिले इस ज्ञान का आश्रय लेकर आदमी चला है तो उसकी भक्ति सफल हो जाति है मंदिरों में मस्जिदों में चर्चा में सब लोग जाते हैं लेकिन ज्ञान वैराग्य मूर्छित है तो भक्ति उनकी बेचारी रोटी रहती है तो भक्ति तब हमारी पुष्ट
होती है जब ज्ञान और वही रहकर ज्ञान तो आत्मा हम कौन हैं भगवान क्या है कैसे मिले इस प्रकार का ज्ञान चाहिए और वैराग्य जिन चीजों से आसक्ति होती है जन्म मरण होता है दुख होता है उन चीजों से आगे जाए तो भक्ति होगी पुष्ट नारद जी को सुनाया वेदव्यास जी का जो भागवत बना है इस भागवत की कथा सुनने से भक्ति का दुख दूर हो गया ज्ञान वैराग्य सजग होगा और लोकमंगल होगा चारों तरफ लोगों को सुख शांति मिलेगी और भागवत की कथा सुनने से आयु आरोग्य और पुष्टि की प्रताप होती जो दूसरों के
धन से पुष्ट हुए हैं ऐसे पापी लोग भी भागवत कथा से तार जाएंगे माता पिता और गुरुजनों को सताने वाले ऐसे लोग भी अगर भागवत कथा सुनेंगे तो उनके पाप मिट्टी जाएंगे भागवत कथा में जाएगा एक-एक कम चल के जाएगा एक-एक यज्ञ करने का फल होगा और कथा सुनेगा उसको भक्ति का और ज्ञान का लाभ होगा [संगीत]