स्त्री को इन चार लोगों की मदद कभी नहीं लेनी चाहिए वरना बहुत बड़ा धोखा हो सकता है दर्शक बंधुओ एक समय की बात है किसी राजा के बगीचे में एक मोर और मोरनी का जोड़ा रहता था दोनों पत पत्नी बगीचे में टहलते रहते थे और बाग की शोभा को बढ़ाते रहते थे कई बार उनके बीच धार्मिक चर्चाओं का संवाद हुआ करता था मोरनी मोर से जब तब सवाल करती रहती थी और मोर बड़े सुंदर ढंग से मोरनी के सवाल का जवाब दिया करता था एक दिन मोरनी मोर से पूछती है स्वामी स्त्री के लिए अगर
कभी मदद मांगने की जरूरत पड़ जाए तो वह किस किस से मदद मांग सकती है क्या उसे मदद मांगनी चाहिए या नहीं कई बार स्थिति कुछ ऐसी बन जाती है जहां बिना मदद के चलना रहना जीना बड़ा मुश्किल हो जाता है मोरनी बोली बस यही मेरा सवाल है आपसे प्रार्थना है हमारे इस प्रश्न का उत्तर देने की कृपा करें तो दोस्तों मोर कहता है हे प्रिय तुमने जो हमसे यह प्रश्न किया है यह स्त्री जाति के लिए बहुत ही कल्याणकारी प्रश्न है और जीवन उपयोगी भी है आइए हम तुम्हारे इस प्रश्न का जवाब देने से
पहले एक कहानी सुनाते हैं और उम्मीद करते हैं इस कहानी के माध्यम से आपको आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा तुम सिर्फ इस कहानी को बड़े ध्यान से बड़े गौर से सुनना इस कहानी से सीखने को मिलेगा कि किन लोगों से भूलकर भी स्त्री जाति के लिए मदद नहीं मांगनी चाहिए मोरनी कहती है कि हे प्राणनाथ आप अपनी कहानी को शुरू कीजिए मैं आपकी कहानी को बड़े ही ध्यानपूर्वक सुनूंगी इस तरह से मित्रों मोर अपनी पत्नी को एक बड़ी ही रोच और शिक्षा प्रद कहानी सुनाता है एक समय की बात है किसी नगर में एक
बहुत ही गरीब व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ में रहता था वह छोटा मोटा व्यापार करके अपने परिवार की गुजर करता था लेकिन उसकी सही तरीका से गुजर बसर नहीं हो पा रही थी उसके घर में किसी ना किसी बात की समस्या बनी रहती थी उसकी पत्नी जो थी व बहुत ही बुद्धिमान स्त्री थी और सुंदर भी थी पैसों की तंगी से दुखों को झेलते झेलते बहुत दिन व्यतीत हो चुके थे एक दिन उस गरीब आदमी की पत्नी अपने पति से कहती है कि पिया जी इस धंधे से इस नगर में काम चलने वाला नहीं है
इस तरह से अब आगे की गुजर नहीं हो पाएगी आप किसी बड़े शहर में चले जाओ और कोई छोटा मोटा काम शुरू कर लेना ताकि हमारा जीवन सही से कट सके मित्रों वो व्यक्ति अपनी पत्नी की हर बात को मानता था क्योंकि उसकी पत्नी बहुत ही बुद्धिमान स्त्री थी उसने अपनी पत्नी से कहा प्रिय तुम ठीक कहती हो मैं कल ही शहर में जाता हूं और वही अपना कोई काम शुरू करूंगा प्रभु की अगर कृपा रही तो हमारे दिन अच्छे आ जाएंगे दोस्तों अपनी पत्नी से कहने के बाद में वह गरीब आदमी अपने एक मित्र
के पास में जाता है उसका एक बहुत ही घनिष्ट मित्र था उसके पास में जाता है और कहता है कि मित्र कल हम शहर में दूर व्यापार करने के लिए जा और अपनी पत्नी की जिम्मेदारी आपको सौंप करके जाते हैं हमारी पत्नी का ध्यान रखना किसी तरह की कोई परेशानी ना आने पाए वैसे तो हमने जरूरत की सारी वस्तुएं घर में रख दी सबकी व्यवस्था कर दी है खाने पीने की बहुत सी सारी चीजें घर में मौजूद है फिर भी अगर घर पर कोई किसी बात की कमी मालूम पड़े तो तुम हमारी पत्नी की मदद
कर देना और जब मैं वापस लौट कर आऊ तो तुम्हारा जितना भी खचा होगा वो सब चुका दूंगा तो वो कहने लगा मित्र मैं अपनी पत्नी की जिम्मेदारी तुम्हें सौंप कर जा रहा हूं उसकी देखभाल करते रहना अकेली स्त्री तो अकेली ही होती है इसलिए हमारी पत्नी का विशेष ध्यान रखना मोर कहता है हे मोरनी अब ध्यान से सुनना वो गरीब आदमी जैसे ही अपने मित्र से यह बातें कहता है तो उसका मित्र कहता है अरे मित्र तुम चिंता क्यों करते हो आपकी पत्नी हमारी भाभी है हमारे होते हुए अगर उसे कोई तकलीफ हुई तब
तो हमारा होना व्यर्थ है तुम किसी बात की चिंता मत करो और निश्चिंत होकर परदेश जाइए मैं अच्छी तरह से आपकी पत्नी की देखभाल करता रहूंगा किसी तरह की आपकी पत्नी को परेशानी नहीं होने दूंगा आप निश्चिंत होकर अपना व्यापार कीजिए दोस्तों वह गरीब आदमी कहता है मित्र यही हमें तुमसे उम्मीद थी मैं जानता था कि तुम अपनी मित्रता को सही तरीके से निभाओगे इतना कहने के बाद वह गरीब आदमी अपनी पत्नी के पास आता है और अपनी पत्नी को समझाता है कि अगर आपको किसी तरह की कोई परेशानी मालूम पड़े तो मैंने अपने मित्र
से कह दिया है अपनी मदद के लिए तुम उसे बुला लेना तुम्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी इस तरह दर्शक बंधुओ रात होती है तो व गरीब आदमी अपनी पत्नी के साथ सो जाता है और जब सवेरा होता है तो दिनचर्या से निवृत होकर के अपनी पत्नी से कहता है अब हमारे लिए कुछ खाने पीने की वस्तु तैयार कर द ताकि रास्ते में हमें भूख लगे तो हम खा सके उसकी पत्नी भोजन तैयार करती है और अपने पति को भोजन कराती है कुछ भोजन उसके साथ बांध कर रख देती है अपनी पत्नी से
आज्ञा लेने के बाद वह गरीब आदमी नौकरी करने के लिए शहर के लिए चला जाता है दोस्तों उसका जो घनिष्ठ मित्र था जिसे वह अपनी पत्नी की जिम्मेदारी सौंप कर गया था उसका वो मित्र उस गरीब आदमी के घर आने जाने लगा और अपने मित्र की पत्नी को हर तरह से शांतोना देने लगा कि भाभी आप चिंता मत करना तुम्हारा पति मेरा सच्चा दोस्त है और मैं आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दूंगा इस तरह से वह रोज-रोज उसके घर पर आता जाता रहता था और धीरे-धीरे अपने मित्र की पत्नी से घुल मिल
जाता है लेकिन वह पतिव्रता स्त्री जो देखने में बहुत सुंदर थी वो नहीं जानती थी अपने पति के मित्र के बारे में कि उसके पति का मित्र जो है वह भ्रष्ट है उसके मन में लालच है और वो उसके लिए गलत नजर से देख रहा है इसी तरह से कुछ दिन व्यतीत हो जाते हैं फिर उस गरीब आदमी का मित्र जो था अपने मित्र की पत्नी से एक दिन कह ही देता है भाभी आपको ईश्वर ने बहुत सुंदर तरीके से बनाया है आपके समान हमें कोई सुंदर स्त्री दिखाई नहीं देती है मैं आप पर पूरी
तरह से मोहित हो गया हूं और मैं चाहता हूं कि जिस तरह से आप अपने पति के साथ में रहती हो उसी तरह से आप मेरे साथ में रहिए मेरे साथ रात बिताए जब उस गरीब आदमी की पत्नी ने अपने पति के मित्र के मुख से यह बात सुनी कि यह क्या कह रहा है तो उसके पैर तल जमीन खिसक गई उस स्त्री को क्रोध आ जाता है और वह अपने पति के मित्र को डांटते हुए कहने लगी खबरदार अगर दोबारा हमारे घर पर आए तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा तुम्हारी इतनी बड़ी हिम्मत अरे
मैं तुम्हारे एक मित्र की पत्नी हूं और तुम मुझे गलत दृष्टि से देख रहे हो हमारे साथ दुष्टता करना चाहते हो अगर दोबारा हमारे घर पर आए तो यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा उस गरीब आदमी का मित्र कहने लगा यदि आप हमारी बात को नहीं मानोगी और जैसा मैं कहता हूं वैसा नहीं करोगी तो आपके लिए हम पूरे नगर में बदनाम करवा देंगे मित्रों उसकी बात सुनकर वो स्त्री कहती है देखो मैं एक पतिव्रता स्त्री हूं उस गरीब आदमी की पत्नी कहने लगी तुम जो चाहो वो कर लेना लेकिन मैं एक पतिव्रता नारी हूं
और ऐसा कदापि नहीं हो सकती अगर अब तुम अपनी भलाई चाहते हो तो तुरंत ही हमारे घर से निकल जाओ दोस्तों उसके पति के मित्र के अहंकार को बहुत चोट लगी और वह तुरंत ही अपने घर के लिए चला जाता है इधर कुछ समय के बाद में जब उसका पति गरीब आदमी घर पर लौटकर आता है तो जो उसकी पत्नी थी बहुत ही आव भगत करती है उसका स्वागत करती है और साथ ही साथ अपने पति की पूजा भी करती है इधर वो व्यक्ति अपनी पत्नी से कहता है कि तुम भोजन तैयार करो तब तक
मैं अपने मित्र से मिलकर आता हूं उसका पति अपने मित्र के पास चला जाता है मित्र बहुत ही सम्मान करता है और उसे अपने पास बैठा लेता है उसके बाद में उसकी पत्नी के बारे में वो उल्टी सीधी बातें करने लगता है उस पर दोष लगाने लगता है और कहता है अरे तुम शहर में व्यापार करने के लिए क्या चले गए तुम्हारी पत्नी तो बहुत ही पापन है बहुत मक्कार है तुम्हारी स्त्री तो बद चलन है तुम्हारे जाने के बाद में जब मैं तुम्हारे घर पर जाता था तुम्हारी पत्नी किसी समस्या का समाधान करने के
लिए नहीं कहती थी व रात्रि में अपने पास सोने के लिए कहती थी मैं क्या करता मैं बेवस था वो ऐसा प्रस्ताव रखती थी कि हमारे साथ सोइए और जब मैंने ऐसा करने से म किया तो तुम्हारी पत्नी नेने हमें घर से बेइज्जत करके निकाल कर भगा दिया अरे मित्र हमें क्या मालूम कि जिस तरह से तुम्हारी पत्नी भगवान ने सुंदर बनाई है लेकिन सुंदरता के साथ-साथ तुम्हारी पत्नी बहुत ही चरित्रहीन है उसका बहुत ही गंदा चरित्र है दोस्तों अपनी पत्नी के लिए दोष लगाते हुए जब वह अपने मित्र को शब्दों को सुनता है तो
वो जो गरीब आदमी था उसके लिए बहुत ही क्रोध आ जाता है उसने अपने मित्र से तो कुछ नहीं कहा जब शाम हो जाती है तो वो अपने घर पर आता है उसकी पत्नी जो थी भोजन लेकर के आती है लेकिन वो भोजन तो कर लेता है अपनी पत्नी से ठीक से बात नहीं करता है और भोजन करने के बाद में अपने बिस्तर पर सोने के लिए चला जाता है उसकी पत्नी जो थी बहुत ही बुद्धिमान स्त्री थी वह सारी बात समझ जाती है कि जरूर इसके मित्र ने हमारे बारे में कुछ उल्टा सुटा कहा
होगा लेकिन उसने पूछा नहीं कि तुम्हारे मित्र ने हमारे बारे में क्या कहा वो भी जाकर के अपने बिस्तर पर अपने पति के पैर दबाते दबाते सो जाती है इस तरह से अगला दिन हुआ उस दिन भी उसके पति ने सही तरह से बात भी नहीं की अब तो उससे बोलना भी बंद कर दिया उस स्त्री ने अपने पति पर यह दबाव नहीं डाला कि आप हमसे बात क्यों नहीं करते हो लेकिन वह अपने पति की सेवा करती रही एक रात की बात है उसकी पत्नी ने पूछा कि आप आजकल बहुत बले बदले नजर आ
रहे हो आजकल आप ठीक तरह से बात भी नहीं करते हो इतने दिन हो गए क्या बात है तो दोस्तों उस गरीब आदमी को अपनी पत्नी की बात सुनकर इतना गुस्सा आ गया कि उसने डंडा उठाया और अपनी पत्नी को पीटना शुरू कर दिया और पीटते पीटते उसे बेहोश कर दिया पत्नी जब बेहोश हो गई तो उसने समझा कि यह मर गई लेकिन वो मरी नहीं थी कुछ समय के बाद में जब उसे होश आता है तो वो कराती हुई उठती है और उस भयानक अंधेरी रात में घर से निकलकर चल देती है आंखों से
आंसुओं की धारा बह रही थी कराती हुई वह नगर से बाहर गई नगर से बाहर एक मंदिर था और उसी मंदिर में जाकर मूर्ति के सामने बैठ जाती है और दुर्गा मां के सामने रोने लगती है कहने लगी हे माता हमारे कौन से कर्मों की सजा है हमारा कौन सा पाप है जो बिना किए पर मुझे पापी बनाया जा रहा है आज हमारे पति ने हमको इतना मारा ने तो यही सोचकर मारा था कि आज वह हमें खत्म कर देंगे लेकिन मैं आज बच गई हमारे कौन से कर्मों की सजा मिल रही है इस तरह
से मंदिर में बैठकर वह रोती रही और देवी मां से कहती रही दोस्तों उसी रात में उतने ही समय एक सज्जन व्यक्ति जो एक सेठ था अपने नौकर के साथ उसी रास्ते से गुजर रहा था जब उसके कान में किसी स्त्री के करने की आवाज पहुंचती है तो उसने अपने नौकर से कहा कि जाओ मंदिर में देखकर आओ कौन करहा रहा है कोई मुसीबत में मालूम पड़ता है मित्रों तो नौकर भाग कर के जाता है देखता है कि एक स्त्री मंदिर में बैठी हुई रो रही है वह आकर के शेर जी से कहता है कि
कोई स्त्री रो रही है और वह बहुत परेशानी में लग रही है तब सेठ मंदिर में जाता है और उस महिला से कहता है कि आप चिंता मत कीजिए आपका ऐसा हाल किसने किया है दोस्तों वो सेठ कहता है कि आपके लिए कोई मेरी तरफ से परेशानी नहीं होगी आपके लिए अभी इलाज की जरूरत है अगर आपको इलाज नहीं मिला तो आप मर सकती हैं इसलिए आपके बारे में जो भी मुझे जानना है वह मैं बाद में पूछ लूंगा पहले आपका इलाज बहुत ही आवश्यक है मित्रों वह सज्जन व्यक्ति जो सेठ था उस स्त्री को
ले जाता है और उसका इलाज करवाता है कुछ दिनों के बाद में जब वह ठीक हो जाती है स्वस्थ हो जाती है तब उस स्त्री से सेठ कहता है कि अब आप बताइए कि आपका यह हाल किसने किया था आपके शरीर की दुर्दशा किसने की थी और आप कहां की रहने वाली हो तब वो स्त्री अपनी सारी कहानी सेठ को सुनाती है उसकी कहानी को सुनकर सेठ को बहुत बुरा लगता है सेठ कहता है बहन आप चिंता मत करिए यदि आप जाना चाहती हैं तो जा सकती हैं और यदि रहना चाहती हैं तो आप हमारे
घर पर रह सकती हैं दोस्तों उस सेठ का एक छोटा सा बच्चा था उसकी पत्नी गुजर गई थी उस गरीब आदमी की स्त्री ने कहा कि हे भाई अब मैं कहां जाऊंगी मेरा पति तो मुझे मारकर फरार हो गया है और मैं किसके सहारे रहूंगी मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है मैं आपके ही घर पर रहना चाहती हूं मित्रों तब सज्जन व्यक्ति कहता है ठीक है यदि आप हमारे घर पर रहना चाहती हो तो यह हमारा छोटा सा बच्चा है हमारी पत्नी मर चुकी है और इसीलिए आप हमारे इस का पालन पोषण कीजिए इसकी
देखभाल कीजिए यही आपकी जिम्मेदारी है और यही आपका काम है आपको हमारे घर में कोई तकलीफ नहीं होगी मित्रों उसी दिन से वह स्त्री उस सेठ के घर में रहने लगती है और उसके बच्चे की अच्छी तरीका से देखभाल करने लगती है धीरे धीरे कुछ समय बीतता है वह सज्जन व्यक्ति का जो नौकर था व उस महिला को देखकर उस पर मोहित हो जाता है क्योंकि वो स्त्री बहुत सुंदर थी नौकर से मन ही मन चा ने लगता है और उससे शारीरिक संबंध बनाना चाहता है एक दिन की बात है उस नौकर ने जाकर के
उस स्त्री से कहा यदि आप इस घर में रहोगी तो आपके लिए एक काम करना पड़ेगा स्त्री ने पूछा बताइए भाई साहब क्या करना होगा तब नौकर कहता है कि आपके लिए रोजाना रात में हमारे साथ सोना पड़ेगा तब व स्त्री कहती है कि भैया वैसे भी मैं बहुत विपत्ति की मारी हूं और आप सुंदरता पर मोहित हो गए हैं लेकिन आप जो सोच रहे हैं ऐसा कदापि जीवन में नहीं हो सकता क्योंकि मैं अपने पतिव्रत धर्म को निभाती हूं जो आप सोच रहे हो मैं अपने पति के साथ ही कर सकती हूं वरना इस
दुनिया में कोई ऐसा पुरुष नहीं है जो हमारे शरीर को छू पाए मित्रों जब उस स्त्री ने साफ इंकार कर दिया तब नौकर कहने लगा यदि आप हमारी बात को नहीं मानोगी तो आपके लिए अच्छा नहीं होगा उस स्त्री ने कहा आपके मन में जो भी है आप जो सोच रहे हैं वह तो हरगिज नहीं हो सकता चाहे आप कुछ कीजिए दुखी होकर के नौकर वापस आ जाता है और शाम की बात है अंधेरा हो चुका था वह स्त्री सेत के बच्चे को गोद में खिला रही थी इधर काम वासना से पीड़ित होकर के नौकर
हाथ में तलवार लेता है और जाकर के उस स्त्री की गोद से बच्चा छीन लेता है और उस बच्चे की गर्दन काटकर उसे फेंक देता है यह देखकर वो स्त्री घबरा जाती है और और वो नौकर भाग कर के सेठ के पास पहुंच जाता है और कहता है सेठ जी सेठ जी मैं पहले ही सोच रहा था कि यह स्त्री धोखा कर रही है यह महिला विपत्ति की मारी नहीं है यह कोई चालबाज स्त्री है आज उसने तुम्हारे छोटे से बच्चे का कतल कर दिया है तुम्हारे बच्चे को मार दिया है दोस्तों सेठ जब यह
सुनता है तो एकदम से व्याकुल हो जाता है और भाग कर के अपने बच्चे को देखता है उसने देखा कि बच्चे का सर अलग पड़ा है और धड़ अलग पड़ा है सेठ उस औरत से पूछता है कि तुमने यह क्या कर दिया तुमने हमारे बच्चे को क्यों मारा मैंने आपकी इतनी मदद की और आपने हमारे ही बच्चे को मार दिया आपने हमारे साथ ऐसा क्यों किया मैंने आपको ऐसी कौन सी हानि पहुंचाई है आपको ऐसी कौन सी पीड़ा पहुंचाई है जिसे आपने हमारे बच्चे का कत्ल करके बच्चे को मारकर बदला लिया है दोस्तों वो स्त्री
जो थी वो बुरी तरह से रो रही थी और अपनी सफाई में कुछ भी नहीं कह पा रही थी उसने कहा सेठ जी इसमें हमारा कोई दोष नहीं है लेकिन उस सेत ने अपने नौकर की बात पर ज्यादा विश्वास किया और उस स्त्री की बात को सुन कर के उस पर विश्वास नहीं किया ना तो उससे यह पूछा कि बात क्या है वह एकदम से नाराज होता हुआ उस दुखियारी से घर से निकल जाने के लिए कह देता है कहता है जरूर तुम ही पापनी हो इसलिए तुम्हारे पति ने तुम्हें घर से निकाल दिया होगा
आप इसी समय रात में हमारे घर से निकल जाइए दोस्तों वह स्त्री लाचार सेठ के घर से निकल जाती है उस स्त्री पर 10 सोने की मुद्राएं रखी हुई थी अब तो वो रोती हुई चिल्लाती हुई लड़खड़ा हुई उस नगर से बाहर चली जाती है चलते चलते आगे एक छोटा सा जंगल पड़ता था जंगल में पहुंचकर उसने देखा कि एक सौदागर है उसके लिए कुछ डाकू पकड़ कर लाए थे और जंगल में उसे पीट रहे थे डाकुओं का सरदार वही पर बैठा हुआ था सौदागर बुरी तरह से चिल्ला रहा था कह रहा था कि आप
हम पर रहम कीजिए हमें मत मारिए इधर वो स्त्री सौदागर को पिटता हुआ देखती है तो उसे उस पर तरस आ जाता है सौदागर का दर्द उससे देखा नहीं जाता है तब वोन डाकु के पास में जाती है और कहती है कि मैं आपको 10 सोने की मुद्राएं दे दूंगी लेकिन आप सौदागर को छोड़ दीजिए डाकुओ ने अपने सरदार से कहा कि यह स्त्री 10 सोने की मुद्राएं देना चाहती है और इस सौदागर को छुड़ाना चाहती है सरदार ने कहा ठीक है आप वो द सु मुद्राए हमारे लिए दे दो और मैं तुम्हें वचन देता
हूं कि मैं सौदागर को छोड़ दूंगा तो दोस्तों वह पतिव्रता स्त्री जो गरीब आदमी की पत्नी थी उसने दण मुद्राएं उन डाकुओ के सरदार को दे दी और उस सौदागर को छुड़वा लिया सौदागर जो था उस स्त्री के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देने लगा और कहने लगा बहन मैं आपका एहसान कैसे चुका पाऊंगा आप कहां की रहने वाली हो और कहां से इतनी रात में आई हो तब वह स्त्री अपनी सारी कहानी बताती है उस औरत की कहानी सुनकर सौदागर कहता है आप चिंता मत करिए जिस तरह से आपने डाकुओ से मेरी जान बचाई है इसी
तरह से मैं भी वचन देता हूं कि तुम्हारा दुनिया में कोई नहीं है तो मैं तुम्हारा भाई बनकर तुम्हारी पूरे जीवन रक्षा करूंगा आप मुझे अपना भाई समझकर हमारे घर चलिए दोस्तों विपत्ति की मारी हुई वह स्त्री उस सौदागर पर भरोसा करके उसके साथ चलने लगती है चलते चलते आगे एक नदी पड़ती थी उस नदी पर एक नाव चल रही थी नाव में कुछ सवारी बैठी हुई थी सौदागर और व भी जाकर उस नाव में बैठ जाते हैं दोस्तों उ नाव में जो सवार लोग थे वो कोई व्यापारी थे उस सुंदर स्त्री को ब घूर
घूर कर देखने लगे क्योंकि वह स्त्री बहुत सुंदर थी उस स्त्री ने देखा कि यह सब मुझे घूर घूर कर देख रहे हैं कहीं ऐसा ना हो कि हम पर कोई गलत नजर डाल दे यही सोचकर वो नाव के एक कोने में छिपकर जाकर बैठ जाती है इधर एक उसी नाव में एक बड़ा सौदागर था वो उस स्त्री की सुंदरता पर मोहित हो जाता है उसने उस छोटे सौदागर से पूछा कि भाई बताइए ये आपकी स्त्री कौन लगती है तब सौदागर कहता है भाई साहब यह स्त्री हमारी प्रेमिका है बड़ा सौदागर कहने लगा आप इसको
बेचना चाहेंगे तब सौदागर ने कहा अरे नहीं नहीं प्रेम काए कहीं बेची थोड़ी जाती है तब बड़े सौदागर ने अपनी झोली से 50 ण मुद्राएं निकाली और 50 सोने की मुद्राएं निकालकर उसे दिखाते हुए कहता है यदि आप अपनी प्रेमिका को हमें दे दोगी तो ये 50 सण मुद्राएं मैं आपको दे दूंगा मित्रों छोटा सौदागर जो था उसने भाई बन कर के उस स्त्री के लिए वचन दिया था कि मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा लेकिन वो लोभ में फस जाता है और लालच में आकर उसने कहा ठीक है लाइए यह 50 सोने की मुद्राएं मुझे दे
दो मैं यहां से चला जाता हूं और हमारी प्रेमिका को तुम ले जाओ मित्रों 50 सोने की मुद्राएं बड़ा सौदागर उस छोटे सौदागर को दे देता है और उन मुद्राओं को लेकर के वह सौदागर तुरंत ही वहां से चुपचाप नाव से उतर कर चला जाता है इधर कुछ देर के बाद में नाब एक नाव छोड़ देता है नाव जब चलने लगती है तो बड़ा सौदागर जो था वह उस स्त्री के पास में जाता है और कहता है कि चलिए अब आप हमारे साथ चलिए अब तो तुम हमारी गुलाम हो हमारी स्त्री बनकर रहोगी तब वो
स्त्री कहती है कि भाई साहब मैं आपकी गुलाम कैसे हो सकती हूं और आपके साथ कैसे चल सकती हूं तब उस बड़े सौदागर ने कहा कि तुम्हारा जो प्रेमी था जो तुम्हारे साथ आया था वह 50 मुद्राओं में तुमको बेच गया है जवाब दिया मेरा तो कोई प्रेमी नहीं था जवाब दिया वह सौदागर कौन था तब वो स्त्री कहती है वो तो मेरा भाई लगता था जिसने हमारी रक्षा करने के लिए मुझे वचन दिया था जिसकी मैंने डाकुओ से जान बचाई थी बड़ा सौदागर कहने लगा नहीं नहीं वो तेरा भाई नहीं हो सकता वह तो
तेरा प्रेमी था उसने कहा भी था कि तू उसकी प्रेम का है और इसीलिए वह 50 सण मुद्राए हमसे ले गया है और वो नाप से उतर कर चला गया है और तुझे हमारे लिए बेच गया है आज से तू हमारी गुलाम है स्त्री कहने लगी नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता तुम झूठ बोलते हो तब वह बड़ा सौदागर कहता है अगर तुझे विश्वास नहीं है तो तू इस नाव में जितने भी लोग सवार हैं उनसे पूछ ले मित्रों सब लोगों ने कह दिया कि यह बड़ा सौदागर ठीक कहता है तेरे उस प्रेमी ने हमारे
सामने इससे 50 सण मुद्राएं ली थी और तुझे बेच दिया है दोस्तों यह सुनकर के उस पतिव्रता स्त्री के पैरों तले जमीन खसक जाती है उसने फिर ईश्वर से ध्यान लगाया और कहने लगी हे प्रभु अब तेरे सिवा हमारे धर्म की रक्षा करने वाला इस दुनिया में कोई नहीं है मैं कहां तक अपने धर्म की रक्षा करूं जहां भी जाती हो सब हमारी सुंदरता को देखकर हमारी इज्जत को लूटने के लिए तैयार हो जाते हैं चारों तरफ इस शरीर को नोचने के लिए भूखे भेड़िए बैठे हैं हमारे पतिव्रत धर्म को भंग करने के लिए उतावले
हो रहे हैं हे प्रभु आज हमें इस तरे से बचा लीजिए तुम्हारे सिवाय हमें कोई नहीं बचा सकता और नहीं तो आज हमारा पतिव्रत धर्म नष्ट हो जाएगा दोस्तों उस पतिव्रता ने भगवान से विनती की प्रभु हमारी लाज बचा लो मित्रों उस दुखियारी की दुख भरी आवाज भगवान ने भी सुन ली तभी ऐसा क्या होता है कि एक ऐसी पानी की लहर आती है उस पानी की लहर में वह नाव पलट जाती है नाव जब पलट गई तो सारे लोग डूबने लगते हैं सहयोग की बात उस समय एक राजा बाहर घूमने के लिए आया था
शिकार खेलने के लिए वो नदी के किनारे तह रहा था उसने को पलटते हुए देख लिया तो उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि जाओ यह नाप पलट गई है और इसमें जो डूबने वाले लोग हैं तुम उनकी रक्षा करो सैनिक उसी समय जल में कूद जाते हैं पानी में डूबने वाले अनेक लोग थे उनमें से कोई भी राजा के सिपाहियों के हाथ नहीं लगा केवल वह स्त्री उन्हें मिल जाती है वे उस स्त्री को निकालकर बाहर ले आते हैं राजा उस स्त्री को लेकर अपने घर चला जाता है और उससे पूछता है कि आप
कौन हो और इस नाव में कैसे आई आप बहुत दुखी मालूम पड़ती हो कृपया अपना दुख मुझे साफ-साफ बताइए मित्रों तब व स्त्री राजा को अपनी पूरी कहानी सुनाती है और कहती है कि इस तरीका से हमें एक सौदागर ने खरीद लिया था और वह मेरी इज्जत के साथ खेलने वाला था मैंने भगवान से बहुत प्रार्थना की कि हे ईश्वर मेरे धर्म की रक्षा करो ईश्वर ने हमारी पुकार सुन ली भगवान की मेहरबानी से वो नाव बीच वजधार में पलट गई और उसमें बैठे हुए सभी यात्री जल में डूब गए कोई नहीं बचा केवल मैं
ही आपको जीवित मिल गई मित्रों उस राजा ने जब उस महिला की दुख भरी दास्तान सुनी तो उस राजा ने कहा ठीक है आप चिंता मत करिए आज के बाद आप हमारे यहां प्रेम से रहिए दोस्तों राजा भी उस सुंदर स्त्री की सुंदरता पर रीच गया था उसने कहा कि मैं आपको पत्नी बनाना चाहता हूं वो स्त्री कहने लगी राजा साहब ऐसा नहीं हो सकता मैं एक पतिव्रता स्त्री हूं और मेरा पति मुझे मार पीट करके छोड़कर चला गया है तो ऐसा नहीं हो सकता कि मैं किसी दूसरे से विवाह कर लू जब परमात्मा ने
मेरे धर्म की रक्षा की है तो आप भी हमारे धर्म की रक्षा कीजिए आप एक राजा हो और राजा का धर्म होता है कि दीन हीनो की रक्षा करना जिसका कोई ना हो उसकी मदद करना दोस्तो राजा ने कहा ठीक है मैं आपको वचन देता हूं आज आज के बाद आपको हमारे यहां कोई तकलीफ नहीं होगी मित्रों इस प्रकार राजा उस स्त्री को अपने महल में रहने देता है दोस्तों वह स्त्री जो थी जब से उस राजा के यहां गई थी तब से राजा का सारा काम अच्छा ही होता चला जा रहा था राजा जब
भी कोई समस्या में फसता था तो वह राजा उस स्त्री के पास में जाता था और अपनी समस्या को बताने लगता था तुरंत ही उस समस्या का समाधान वो स्त्री कर दिया करती थी एक मंत्री राजा की समस्या का समाधान नहीं कर पाता बल्कि वो स्त्री ही सारी समस्याओं का समाधान कर देती थी कहने का तात्पर्य मित्रों वह स्त्री जब से राजा के राज महल में आकर के रह रही थी तब से राजा बहुत ही सुख में जीने लगा था और उसके राज्य में बहुत कुछ अच्छा हो रहा था धीरे-धीरे समय बीतता गया एक दिन
राजा जो था मरने की कगार पर आ जाता है जब मरने की कगार पर राजा आ गया तो उसने उसी स्त्री को बुलाया और कहा आज के बाद अपने राज्य का भार इस राज्य की जिम्मेदारी मैं तुम्हें सौंप रहा हूं इस तरह से राजा राज की जिम्मेदारी उस महिला को सौंपकर मर जाता है वह स्त्री ही वहां की राजा बन जाती है सारी प्रजा उससे कहने लगी कि आप हमारे राज की मालकिन है महारानी है तो मित्रों एक दिन की बात है उसने अपने मंत्री और संत्री से घोषणा कर दी कि जाओ जहां भी आस
पड़ोस के जितने भी नगर है सब लोगों को हमारे द बार में एक एक करके बुलाया जाए राजा के सैनिक सबके लिए सूचना देते हैं कि कल हमारे दरबार में सभी लोगों को निमंत्रण है हमारे राज्य की जो महारानी है उन्होंने आपके लिए बुलवाया है अगले दिन दोस्तों आज पड़ोस के जितने भी नगर थे सभी लोग स्त्री पुरुष उस राज्य की महारानी के दरबार में पहुंच जाते हैं जब वहां दरबार में पहुंचे तो वहां उसका पति भी था और उसका मित्र भी था और वह सेठ भी वहां पहुंच जाता है और व सौदागर भी वहां
मौजूद था जिसने उसको देखा था दोस्तों जब चारों को स्त्री ने देखा तो सबसे पहले उसने अपने पति को बुलाया और उस पति से कहा कि आपने मुझे पहचाना उसका पति कहने लगा आप हमारे इस राज की महारानी है तब व स्त्री कहने लगी नहीं नहीं आप हमारे पति है और मैं आपकी स्त्री हूं आपने अपने मित्र के कहने के अनुसार हमें इतना पीटा कि मरा हुआ समझ कर के आप हमें छोड़कर चले गई थ और आपके मित्र ने जो हमारे लिए दोष लगाया वह सत्य नहीं था सत्य यह था कि आपका मित्र जो था
वह मुझ पर मोहित हो गया था और हमारे साथ सोने के लिए कह रहा था जब मैंने उसका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया तो उसने यह कहा कि मैं तुम्हारे पूरे नगर में तुम्हें बदनाम कर दूंगा और जब आप लौट कर के आए तो सारा दोष मेरे ऊपर व थोप देता है दोस्तों इस तरह से उसके मित्र को बहुत ही अपने मित्र पर क्रोध आ जाता है दोस्तों इस तरह से उसके को अपने उस धोखेबाज मित्र पर बहुत ही क्रोध आ जाता है वो उसको मारने के लिए दौड़ता है लेकिन वह स्त्री ने मना कर दिया
कि नहीं नहीं इसके लिए सजा अब इसी दरबार में मिलेगी लेकिन इसके लिए क्या सजा मिलेगी वो मैं तय करूंगी आप इंतजार कीजिए दोस्तों उसके बाद में उस स्त्री ने उस सेठ के लिए बुलाया और उस नौकर के लिए बुलाया और कहा कि सेठ जी आपके बच्चे को पता है किसने मारा था फिर सेठ ने कहा बताइए मेरे बच्चे को किसने मारा था जवाब दिया आपके नौकर ने आपके नौकर की मेरे ऊपर गंदी नजर थी और जब मैंने मना कर दिया तब उसने कहा मैं तुम्हें नगर में बदनाम कर दूंगा उस रात में आपके बच्चे
को खिला रही थी तभी यह काम वासना में अंधा होकर मेरे पास आता है और तलवार लेकर के आपके बच्चे की गर्दन धर से उड़ा देता है दर्शक बंधुओ इतनी बात सुनकर के सेठ का गुस्सा साथ में आसमान पर पहुंच जाता है रानी रोकती है और कहती है कि इन लोगों के लिए सजा राज दरबार से मिलेगी आप इंतजार करिए उसके बाद में वह स्त्री उस सौदागर को पहचान लेती है तो सौदागर को बुलाती है और कहती है कि पहचाना मुझे हां आप इस राज की मालकिन है जवाब दिया नहीं मैं वही स्त्री हूं जो
डाकू आपके लिए पीट रहे थे उनसे मैंने आपको बचाया था और आपने मुझे वचन दिया था कि भाई बनकर मैं आपकी रक्षा करूंगा परंतु आपने नाव में एक बड़े सौदागर के हाथ मुझे बेच दिया 50 सड़ मुद्राए के लोभ में फसक तुम वह एहसान भूल गए वह सौदागर जो था रानी की बातें नीचे को मुह लटकाए सुन रहा था उस समय वह कुछ बोलने के लायक नहीं था इधर वह मोर कहता है अपनी मोरनी से कि हे प्रिय उस राज की रानी अपने सैनिकों को आदेश देती है और कहती है कि जाओ अपराधियों को पकड़
कर के आजीवन के लिए कारागार में डाल दो दोस्तों वही हुआ उसके नौकर चाकर ने सिपाहियों ने उसके पति को मित्र को सौदागर को और उस सेठ के नौकर को जेल में डाल दिया उसके बाद सारे लोग अपने नगर में चले जाते हैं और कुछ दिन बाद वह अपने पति को बाहर निकाल लेती है और खुशी खुशी अपने पति के साथ में जीवन जीने लगती है दोस्तों वो मोर कहता है हे मोरनी शायद तुम्हारे प्रश्न का इस कहानी में मिल गया होगा मोर्नी ने कहा स्वामी आपकी कहानी तो बहुत अच्छी थी कहानी में मुझे बहुत
पसंद आई और मुझे को सीख भी मिली लेकिन मैं पूरी तरह से नहीं समझ पाई कि वे चार लोग कौन है जिनसे कभी मदद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए तब मोर कहता है प्रिय आइए मैं आपको बताता हूं वे चार लोग कौन है दोस्तों मोर कहता है हे प्रिय पहला है पति के मित्र पर भी स्त्री के लिए भरोसा नहीं करना चाहिए हालाकि प्रत्येक मित्र एक जैसे नहीं होते जो अच्छे होते हैं उनकी मात्रा बहुत कम होती है और जो बुरे होते हैं उनकी मात्रा बहुत अधिक होती है इसलिए पति के मित्र पर भी भूल
कर के भरोसा नहीं करना चाहिए कभी भी आपके साथ में धोखा कर सकता है और आपका धर्म भ्रष्ट कर सकता है मोर कहता है दूसरा होता है कानों का कच्चा व्यक्ति जो व्यक्ति कानों का कच्चा है उस पर भी कभी मदद नहीं मांगनी चाहिए जैसे कानों का कच्चा वो सेठ था उससे नौकर ने जैसा कह दिया उसने उसी की बात मान ली हालांकि दोष उस स्त्री का नहीं था इसलिए हे प्रिय जो कानों का कच्चा व्यक्ति हो उस पर कभी मदद नहीं मांगनी चाहिए क्योंकि वह भी आपके साथ मदद करने की बजाय आपके साथ धोखा
कर सकता है और तीसरा है अविश्वसनीय व्यक्ति जो व्यक्ति विश्वास के योग नहीं है अपरिचित है उस पर भूलकर भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि उस सौदागर ने जो विश्वास दिया था उसने ही विश्वास घात कर दिया था सिर्फ लोभ की खातिर इसलिए लोभी आदमी को पहले लोभ दिखाकर आजमा लेना चाहिए तभी विश्वास करना चाहिए उससे पहले उससे कोई मदद नहीं मांगनी चाहिए स्त्रियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में ध्यान रखना चाहिए कि वे किससे मदद मांग रही है या कौन उन्हें मदद की दिलासा दे रहा है ऐसे लोगों की मदद पर कभी भरोसा ना करें
जो अश्व लोग जिनका स्वभाव या जिनका गुजरा हुआ कल विश्वसनीय नहीं रहा हो उनसे मदद मांगना जोखिम पूर्ण हो सकता है स्वार्थी लोग जो केवल अपने फायदे के लिए दूसरों की मदद करते हैं उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए किसी अजनबी से मदद मांगने से पहले सावधानी वर्तनी चाहिए नकारात्मक सोच वाले लोग जो हर परिस्थिति में नकारात्मकता ढूंढते हैं वे सही सलाह देने में असफल रहते भावनात्मक रूप से जो लोग शोषक है जो दूसरों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं उनसे मदद मांगने से बचना चाहिए अत्यधिक आलोचक जो हर बात पर नकारात्मक टिप्पणी करते हो और
आत्म सम्मान को ठेस पहुंचा सकते हैं ऐसे मामलों में भरोसेमंद दोस्तों परिवार के सदस्यों या पैसे भरोसे ही मदद लेना बेहतर होगा जो इंसान लोभी लालची है ऐसे व्यक्ति पर भी कभी मदद ना मांगे मोर कहता है हे प्रिय महिलाओं को इस कहानी से इन्हीं बातों को सीखने की जरूरत है वे कभी किसी के हाथों धोखा नहीं खा सकती मोरनी बौली स्वामी मैं आपकी इन बातों को हमेशा याद रखूंगी और सावधानी का पालन करूंगी दर्शक बंधु इस कहानी के बारे में आपके क्या विचार हैं कमेंट में राय प्रस्तुत कीजिए मिलते हैं आपसे अगली कहानी में
एक और चर्चा के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री कृष्णा