कि मुंबई शहर की कहानी काफी यूनीक है बहुत कम लोग जानते हैं मुंबई सिक्सटीज मेक इंडिपेंडेंट स्टेट बनने वाला था इन फैक्ट मुंबई के ऐसा शहर था जिस पर उस वक्त सारे फॉरेन पावर्स टो इंडियन पावर भी अपना हक जताना चाहते थे लेकिन आखिर कैसे मुंबई अंत में महाराष्ट्र के पास गया वह अंग्रेजों के बाद इंडियन सरकार के खिलाफ होने वाला यह सबसे बड़ा मूवमेंट जिसकी कहानी शुरू होती है सत्रहवीं सदी से जब हमारे भारत का नक्शा कुछ ऐसा दिखता था पूरा-पूरा वेबसाइट पहुंचू की और मराठवाड़ा के हाथ में था और इस साइड ब्रिटिशर्स यार
लेकिन बस एक प्रॉब्लम ब्रिटिशर्स के पास ब्रिटेन और वेस्ट बंगाल में मौजूद अपने बेस के बीच वे सिगरेट करने के लिए बस एक ही पॉइंट था जो था भरूच उसके अलावा उन्हें पोचू की स्किन फोर्स के थ्रू टैक्स भरना पड़ता था या फिर ऐसे पूरा इंडियन सबकॉन्टिनेंट घूम के इसमें आना पड़ता था वह बेसिकली मेंटल ऑफ लॉस फॉर ब्रिटिश पर फिर 1661 में एक सुनहरा मौका उनके सामने चलकर आया पॉसिबल की प्रिंसेज कैथरीन और इंग्लैंड के प्रिंस चार्ल्स टू शादी हो गई और शादी में स्किन को मुंबई के सारे साथ आयरलैंड डुमरी में मिल गए
जो पहले से पोचू उसके कंट्रोल में थे अब इन साथ टापू पर मछुआरों के छोटे काव्यों के अलावा और कुछ नहीं था इसीलिए कि ने उन्हें वक्त ले समझकर इस्ट इंडिया कंपनी को लीज पर दे दिया पर फॉर्चूनेटली ईस्ट इंडिया कंपनी को इसकी कीमत समझे अब क्योंकि सूरत में बसे या इसी के कनेक्शंस आलरेडी इंडिया के टॉप बिजनेस कमेटी के साथ थे जिसकी बनी आप बहरा और पारसी तो उन्होंने तुरंत इस आयरलैंड को रिनोवेट करवाना शुरू कर दिया सबसे पहले तो या किसी ने इंडियन बिजनेसमैन के साथ मिलकर मुंबई के साथ डिफरेंट eye Lens को
एक किया और वहां के जो भी लोकल शिफ्ट चेंज के उन सभी को अपने एडमिनिस्ट्रेशन के अंदर ले लिया Enfield आफ कोर्स इन बिजनेसमैन की मदद से धीरे-धीरे करके मुंबई को डिवैलप करना स्टार्ट कर लिया अब इसी दौरान रावण 1765 में बंगाल के बैटल आफ बक्सर के बाद फाइनली या इसी को बंगाल की दीवानी योनि पॉलिटिकल कंट्रोल मिल गया और तब तक या किसी का प्रेजेंस भारत के इन सारे याद में आ चुका था सुसाइड है उन्होंने 100 हुआ था कि अब वक्त आ गया है कि हिंदुस्तान के साथ व्यापार नहीं बल्कि उस पर राज
किया और मुंबई इन सब में इनके लिए मेजर फाइनेंशियल हफ्ता लेकिन इसी इलाके में इनका सबसे बड़ा दुश्मन भी था द मराठा अंपायर मराठों ने 17वीं सदी की शुरुआत से ही डे कंडीशन में स्वराज्य की नींव रख दी थी जिसे भारतीयों के मन में मुगल अतुल के खिलाफ नफरत पनपने लगी प्लस के लिए कोंकण रीजन काफी स्ट्रेटजिकली इंर्पोटेंट एरिया भी थी तो जाहिर सी बात है उस एरिया को ब्रिटिश उसका उनसे छीन ना काफी मुश्किल और इस सबके बीच मराठा ब्रिटिश कॉलोनी इस पर रेगुलरली दहन भी किया करते थे तो जाहिर सी बात है जब
होना तो बिल्कुल जायज था इन फैक्ट इन दोनों के बीच में एक नहीं बल्कि तीन कॉर्ड्स हैं और उसमें से पहले के दो कॉर्ड्स तो ब्रिटिशर्स हार गए थे लेकिन थर्ड एंग्लो-मराठा बोर मराठा हार गए इसके बाद से ब्रिटिश रूल इंडियन सबकॉन्टिनेंट में फाइनली आ गया अब राजाओं को हराने के बाद ब्रिटिश उसने सबसे पहले पूणे मराठा अंपायर को अपने खुद के मिनिस्ट्री आफ कन्वीनियंस हिसाब से रीड डिवाइड कर दिया और इस रिजर्वेशन में उन्होंने मुंबई के साथ-साथ present-day महाराष्ट्र गुजरात भी इनपुट कर लिया एस बंबई प्रेसिडेंसी और फिर उन्होंने अगले 60 70 सालों तक
मुंबई एक्सपेंशन करके प्लेस इन थे नॉर्दर्न कर्नाटका पाकिस्तान का सिणधरी जैन और यह मैनें का एरिया एंड इट्स बाउंड्री तक के पूरे एरिया को अपने कब्जे में ले लिया माइंड यू यह पूरा एरिया बंबई प्रेसिडेंसी तो पहले गाइस कैसे स्टेट्स ओर कंट्रीज टेरिटोरियल एक्सटेंट होने की कोशिश करते थे आज की तारीख में कंट्रीज फाइनेंशली एक्सपेंड होने की कोशिश कर रहे हैं यानी कि न्यू इंडस्टरीज क्रिएट हो रहे हैं और यहां पर आईटी वह सबसे बड़ी इंडस्ट्री अ जो कि क्रिएट हो रही है और सबसे ज्यादा एंप्लॉयमेंट क्रिएट करेंगे इट इज द फ्यूचर लेकिन यह सब
के बीच इसरो इंडस्ट्री में भी लोगों को अच्छे जॉब्स नहीं लग रहे हैं विकेट एक्सप्लोइटेशन हो रहा है तो आपको सही रास्ता सही निरीक्षण मालूम होना चाहिए और यहां पर मेरे साथ ऐसी तैसी जो यह बताएंगे कि उन्हें हाई पैकेज का जॉब कैसे मिल पाया जो ऐसा कह सकते हैं कि रिबल से आपके करियर को काफी फायदा हुआ है डेफिनेटली मेरे करियर को फायदा हुआ है बिकॉज हे वास ऑफ़र्ड टो लोअर इन इंफोसिस बट डीप इंसाइड मुझे पता था कि मैनेजमेंट रोल में ज्यादा एक्सेस कर सकता है ज्यादा अच्छा कर सकता हूं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
स्किल्स एंड ए ओपन जॉब ऑपच्यरुनिटीज फॉर मी और मैं यह जो ओपोसिटी ग्राहक की एंड प्लेस विद थे हेल्प आफ थिस रूट लेवल जैसे आपने कहा कि टेस्ट में आपकी स्किन को चेक किया जाता है वे यहां पर कि आप ऑडियंस कोई टिप्स देना चाहेंगे कि टेस्ट कैसे क्लीयर करें द टेस्टिस बेसिक टेस्ट फर्स्ट प्राइज होता है वहां पर आपका मैथ्स वोकैबलरी इंग्लिश चेक होगा जो सेकंड वहां पर आप स्पेशल एडिशन चेक होगा जैसे आप जिस फील्ड के लिए जॉब अप्लाई कर रहे हो जब फीट 9ice हाउ मच लव यू हैव अबाउट या फिर वह
चेक होगा और थर्ड जब ए सिक पर्सन इंटरव्यू राउंड युवक वेयरिंग हिस रीडर्स एंड एवरी लेवल विल एक्सेप्ट यू एंड अलार्म्स जो पॉसिबिलिटीज फॉर यू ओपन इंटरव्यू दशरथ सुबह इस आयुष हाउ इज इट वास्तु कराकर टेस्ट सौंपी जो एप्लाई करो रिले बल पर एंड आफ्टर इफैक्ट्स लिंक सब्सक्रिप्शन इंवोल्वड कमबैक ट्वीट टॉपिक अब इसी दौरान अराउंड 895 भारत की पहली नेशनल पार्टी द इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना हुई बड़े इंट्रस्टिंग फैक्ट बेसिक यह पार्टी एक्चुअल में एक ब्रिटिश और एवं शूज के इनीशिएटिव्स फॉर हुई थी ब्रिटिश अर्थ इस पार्टी में अपना इनफ्लुएंस पहले से ही चाहते
थे ताकि कल को कोई मैसेज अपराइजिंग इसमें ना हो और अगर हो तो उसकी खबर होने पहले ही पड़ जाएं इसीलिए उस वक्त कुछ लोग इसे ब्रिटिश उसका सेफ्टी वाल्व भी कहते थे बस कैन वे इस पार्टी के परमिशन के ऑलमोस्ट 30yrs बाद यानी कि इस साल 1922 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में पहली बार इंडियन स्टेट को लिंग्विस्टिक बेसिस पर divide करने की मांग रखी गई पर इंट्रस्टिंग लिकर टो पोस्ट इंडिपेंडेंस यही कांग्रेस कमेटी लीडर टेस्को लिंग्विस्टिक बेसिस पर divide करने के अगेंस्ट हो गए देखो रिलेशन बिल्कुल सिंपल है जब ब्रिटिश भारत को छोड़कर गए
थे तब भारत 565 रियासतें और सेवेंटीन प्रांतों में बटा हुआ सूप के भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने बड़ी मुश्किल से इन सभी के रूलर से इंस्ट्रूमेंट आफ एक्सप्रेशन साइन करवाया था और इसीलिए उनका यह मानना था कि अगर भारत को लैंग्वेज के बेसिस पर डिवाइड किया जाएगा तो पूरा हिंदुस्तान एक नहीं रहेगा और सारी डिटेल्स अपने इंट्रस्ट के लिए अलग-अलग कंट्री स्पर्म करने लगेंगे बेसिकली इन सिंपल वर्ड्स इंडिया का बेल के लाइव सेशन हो जाएगा और इसीलिए सब कुछ यथास्थिति में रखने का प्लान था बट ओनली 1958 में सेट ऑफ
मद्रास से पोट्टि श्रीरामुलू नाम के कांग्रेस लीडर ने अपने तेलुगू स्पीकिंग पापुलेशन के इंटरेस्ट को सेंड करने के लिए तैयार लव सीन पोस्टल आंध्र के रीजंस फॉर ए सेपरेट स्टेट बनाने की मांग रखी यह रिजल्ट 2018 के पहले के आंध्रप्रदेश के नीचे से अपनी इस मांग को पूरी करने के लिए पोट्टि श्रीरामुलू ने एक फास्टिंग प्रोटेस्ट होल किया जिसमें अनफॉर्चूनेटली उनकी मौत हो गई अब इसके बाद जाहिर सी बात है पूरे तेलुगू स्पीकिंग पापुलेशन में व्हाइट बैलेंस प्रोसेस होने लगे एंड फाइनली फर्स्ट उबर 1953 के दिन आंध्र प्रदेश लिंग्विस्टिक बेसिस पर सिगरेट हो गया इन
फैक्ट थे स्टेट लिंग्विस्टिक बेसिस पर सेपरेट होने वाला पहला टेस्ट भी बना अब्बास यहां पर क्लियर प्रेसिडेंट सेट हो चुका था एक सेट की ऐसी डिमांड और वह पूरी हो चुकी थी तो दूसरे स्टेट और भी ज्यादा बुखार होने लगे और 19 पेट में से एक स्टेट का महाराष्ट्र अब महाराष्ट्र में 1920 से एक फैमिली एंड फैमिली काफी ज्यादा प्रॉमिनेंट थी उन्हें लोगों की क्लास के साथ मिलकर काफी सारे प्रोटेस्ट वगैरह को लिस्ट करना शुरू कर दिया था डिमांडिंग एंप्लॉयमेंट एंड ठेर राइट्स की पेयजलापूर्ति वाकिंग क्लास और यह सारे प्रोसेस मेजर अली पुणे से ही
लीड हो रहे थे तो इस वजह से महाराष्ट्रीयन के लोगों वाकिंग अपने Android अच्छा खासा इन तुरंत अब आपने पार्टीशन जब आंध्र प्रदेश लिंग्विस्टिक बेसिस पर अलग हुआ सब्जेक्ट ही फैमिली का संयुक्त महाराष्ट्र परिषद भी ऐसे यह डिमांड करने लगा संयुक्त महाराष्ट्र की डिमांड या ने महाराष्ट्र विद मुंबई-गोवा बिलगाव करवर प्रभारी ने पानी और व अब यह सिचुएशन कर रेस्ट ऑफ महाराष्ट्र का लेकिन अगर बात करें सिर्फ मुंबई की तो यहां पर मैक्रो लेवल पर देखें उस सोसायटी के दो सेक्शन से एक है लीड बिजनस क्लास जो ज्यादातर गुजराती कंपनी की स्थिति जैसे पारसी बहरा
और धनिया और दूसरा फंक्शन था जो वर्किंग क्लास जैसे पेसेजंर्स व्हो कंडक्ट राजपूत ज्यादातर lower-caste के दें और इन क्लास के सपोर्ट और राइट के लिए कुछ एक्टिविस्ट और उनकी पार्टी इस कांटेस्ट की फाइट करते रहते थे इसमें तीन पार्टीज काफी प्रॉमिनेंट थी बच्चों में इस पार्टी का प्रचार समाजवादी पार्टी डेफिनेशन कांग्रेस पार्टी एंड थे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के मुद्दे होते थे वह घर ध्यान से देखा जाए तो पुरे में लिप्त करें जुड़े फैमिली के मुद्दों से काफी से मिल हुआ करते थे दोनों पार्टीज मेजर्ली दो चीजों के लिए प्रोटेस्ट कर रहे थे सबसे
पहले तो मुंबई और महाराष्ट्र रिजल्ट में पैदा हुए मराठी लोगों पर गुजरात से आए हुए लोग डॉमिनेट क्यों कर रहे हैं और दूसरा के अपर कास्ट के लोग लो वर्किंग क्लास पर डोमिनेट क्यों कर रहे हैं तो यह सारे भी पार्टीज अपने रिजल्ट्स मैं अपने फॉलोअर्स को इन्हीं मुद्दों पर इंप्रूवमेंट करके एक करके अपना डॉमिनेंस कि इन करती थी लेकिन जब बात मुंबई को महाराष्ट्र के अंदर लेने किया है तब क्वाइट इंटरेस्टिंग लीजेंड फैमिली का संयुक्त महाराष्ट्र परिषद मुंबई के अनुसार पार्टी के साथ मिल गया और इन सभी ने मिलकर फॉर्म कर दिया संयुक्त महाराष्ट्र
समिति अब यह पार्टी वयस्क पूरे मुंबई में लोगों को कष्ट डिफरेंस इस पर और ज्यादा इंंफ्लुएंट करके अपने जेंडर को पुष्ट करने लगी एगजेनडर ऑफिस संयुक्त महाराष्ट्र जिसके लिए यह सभी लोग जान देने तक के लिए तैयार हैं अब इस कहानी को कुछ टाइम के लिए hold करके गुजरात पर थोड़ा सा नजर डालते हैं तुम्हारा की तरफ क्रॉस गुजरात भी अपना एक अलग गुजराती स्पीकिंग टेस्ट चाहता था और इस पूरे मूवमेंट या ने महागुजरात मूवमेंट के पीछे मेन हाथ था इंदुलाल यागनिक हेगे इंदु चाचा का अज्ञान यहां भी गुजरात को सैफ करने के लिए ऑल
व गुजरात कैन प्रोटेक्ट ठेर अल्टीमेट कि स्कूल वंस लेकिन एनी प्रोसेस में से एक बहुत ही मेजर टर्निंग प्वाइंट फॉर 1956 का क्रम भी सत्याग्रह एक्सप्रेस अहमदाबाद के स्टूडेंट्स लाल दरवाजे में स्थित एक लोकल कांग्रेस हाउस के सामने प्रोटेस्ट करने लगे इस प्रोसेस को पॉसिबल मुंबई स्टेट के सीएम मुरार जी देसाई ने दबाने की पूरी कोशिश की जिसके लिए पुलिस ने भी कुछ झूठ इलेक्शंस लिए और इसी दौरान पांच से आंसू प्रिंस की डेथ हो गई जिसके बाद यह महा गुजरात मूवमेंट और भी ज्यादा अट्रैक्ट करोगे ना कमिंग बैक टू महाराष्ट्र तो संयुक्त महाराष्ट्र समिति
के यूनाइटेड महाराष्ट्र की डिमांड पर सोचने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट में तीन बार तीन डिफरेंट कमीशन मिठाई धार कमीशन जेवीपी कमीशन और फजल अली कमिशन इन तीनों कमीशन ने जमीन की डिमांड टो एनालाइज किया तो तीनों ने इनकी डिमांड को खारिज कर दिया और अब यह तो ई फाइनली एक संयुक्त महाराष्ट्र मूवमेंट की छिड़ गया जो पूरे 5 साल चला और आज तक भारत के सबसे ऐतिहासिक मूवमेंट में से एक है इस मूवमेंट के तहत कि सारे प्रोटेस्टर्स और वर्मा कोट स्पेसिफिकली मुंबई चार्ट और फ्लोरा फाउंटेन पर बॉयज प्रोटेस्ट करने लगे रिजर्वेशन इतना बिगड़ गया
था कि जब जवाहरलाल नेहरू ने Bigg Boss सेट किया तब चौपाटी एरिया में उनका स्वागत ब्लैक फ्लैग्स के साथ हुआ था अब इस पर अफसोस जवाहरलाल नेहरू को बहुत गुस्सा आया और उस वक्त उन्होंने क्राउड को शेमलेस एंड हिस लॉयल घोषित कर दिया था चॉप्स इसे पूरा मामला और बिगड़ गया और रिएक्शन में पुलिस फायरिंग में प्रॉमिनेंट एक्टिवेट सी घड़ीगांवकर की मौत हो गई अब यह मौत इन प्रोटेस्ट्स के लिए एक मैजिक ट्रिक था जिसके बाद यह मामला इतना बढ़ गया कि सरकार को हार मान कर इनकी डिमांड के सामने झुकना ही पड़ा एंड फाइनली
इन थे मिडल आफ 1969 महाराष्ट्र और गुजरात को दो सेपरेट स्टेज बनाने का फैसला ले लिया गया और पोस्ट में 1960 को महाराष्ट्र को ऑफिशियली फॉर्म किया गया अलांग विद मुंबई लेकिन यहां पर 15 था गोवा बेलगाम और कर को इंप्रूव नहीं किया गया और आज तक महाराष्ट्र में उसे इंक्लूड नहीं किया गया और इसी लिए अगर आज भी देखो तो कर्नाटक और महाराष्ट्र गवर्नमेंट इन एरियाज को लेकर काफी डिस्प्यूट में रहती है भ्रम और पर वर्ग के दोनों ओर रिविजंस कर्नाटका में तो आते हैं लेकिन यहां की पापुलेशन मराठी स्पीकिंग जाता है तो फ्रेंड्स
यह था पूरा मुद्दा कि महाराष्ट्र और गुजरात अलग कैसे हुआ और बंबई प्रेसिडेंसी कि पहले क्या वैल्यू थी कि क्या तवजू था उसका अब एक बात बताओ अपना पर्सनल ओपिनियन आपको क्या लगता है कि मुंबई यानि मुंबई आज के तारीख में वह महाराष्ट्र में रह कर यादव डिवैलप कर रहा है या फिर गुजरात में होता तो ज्यादा डिवैलप करता वांट यू गाइस थीं अपने उपन्यास को नीचे शेयर करना और अगर इस विडियो से कुछ भी नया सीखने मिला तो एक लाइक जरुर रोकना गैस पाइपलाइन चैनल को भी सब्सक्राइब कर लें और भीषण दबाव के आगे
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