[संगीत] राम से आगे की यात्रा है कृष्ण राम के बचपन का उल्लेख बहुत छोटा है गुटवन चलत रे नुतन मंडित मुख दद लेप किए तुलसीदास जैसे सरस कवि भी भगवान के बचपन को देखने के लिए तरस गए हैं मंगल भवन अमंगल हारी द्रव सु दशरथ अजर ब दशरथ के अजर में दशरथ के आंगन में विहार करने वाले राम को नमस्कार है लेकिन आंगन में क्या विहार क्याक किया इसका ज्यादा वर्णन नहीं है क्योंकि राम कम आयु में अयोध्या की गुप्तचर सेना के अध्यक्ष बन गए और 15 वर्ष की आयु में तो विश्वामित्र उनको ले ही
गए तो राम ने बचपन नहीं जिया और युवताराम भी बहुत अच्छा जिया और जवानी भी बहुत अच्छी जी और प्रणता में तो गीता जैसा नवनीत दिया जैसे दूध जब जम जाता है जब उसमें समस्त प्रकार की संजीवनी शक्ति समा जाती है तब उसके दोहन हो जाने पर जो नवनीत निकलता है महाभारत का युद्ध वह दोहन करने वाली मटकी थी जो स्वयं मटकी फोड़ने वाले ने ही आयोजित की थी और उससे जो नवनीत निकला वह गीता जैसा नवनीत निकला जिसे विश्व भर में आदर दिया जाता है पढ़ा जाता [संगीत] हैम के जीन में अर्थ है और
कृष्ण के जीवन में रस है इसका मतलब यह नहीं है कि अर्थ नहीं है रस ही सबसे बड़ा अर्थ है नित्य करते समय कई बार नर्तक जब स्थिति को भूल जाए कि वह कहां नाच रहा है कलाकार जब पेंटिंग बनाता हु यह भूल जाए कि कितनी देर से उसने पानी नहीं पिया है गायक सुर लगाता हुआ जब यह भूल जाए कि वह चौराहे पर है कि एकांत में है तो उस अनहद सीमा को रस कहा जाता है भगवान कृष्ण 24 घंटे इस रस की सिद्धा अवस्था में रहते हैं यह संकल्प सौंदर्य पैदा होता है कि
जहर के सबसे बड़े प्रतीक जहरीले काले नाग के फन पर चढ़कर भी आप बांसुरी बजाकर डांस कर सकते हैं नत कर सकते हैं तभी अन्यथा तो एक सांप दिख जाए तो सारी इंद्रिया और चेतना सजग हो जाती हैं गाड़ी चलाते समय अचानक सामने से ट्रक मोड़ काट दे तो नाभी के पास सारी चेतना आके केंद्रित हो जाती कितने भी बड़े आप रईस हो हाथ से खाना खाते खाते या पानी पीते पते कांच का गिलास टूट जाए गिर जाए तो एकदम आप छटपटा जाते हैं कि क्या हो गया जबक उस गिलास का कोई मूल्य भी नहीं
है द ब रुप है आपत्ति के आते ही सजग हो जाने का कार्य अर्थ कराता है और आपत्ति संपत्ति अनापत्ति के बीच सजग रहकर बांसुरी बजाने का काम करने वाला कन्हैया कहलाता है सिद्ध कहलाता अब आप कहेंगे की इतना ही सिद्ध है आपका कृष्ण तो रोता क्यों है मां से पिटता क्यों है गालिया क्यों खाता है कुटिलता से मनहर कुटिलता से मुस्कुराता कैसे जब दुर्योधन से कहता है कि हां हां माध यह जगत के रस में स्वयं को निष्णात रखने के लिए लगाए रखने के लिए एक रज्जू है एक रस्सी [संगीत] है आत्महत्या की कगार
पर गए हुए हर व्यक्ति के मन में जो एक बात कॉमन आई है जिसकी मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है वो यह कि पृथ्वी पर जुड़े रहने का उसके कारण समाप्त हो गए हैं कि अपने बच्चों में अपने बुजुर्गों में जीवन का एक रस जरूर छोड़े कलयुग में जिन में संतत उतरा है जिनके माध्यम से विश्व ने शांति पाई है जिनको देखने मात्र से मोक्ष का अनुभव हुआ है जिनके माथे पर हाथ रखने से नरेंद्र विवेकानंद बन जाता था वे रामकृष्ण परमहंस भोजन के बहुत शौकीन थे उन्हें भोजन का बड़ा रस था यह चटनी में नमक
कम है इसमें थोड़ा जीरा और डालती मां उनकी पत्नी जो थी वे भी बड़ी विदुषी थी कलकत्ते के काली मंदिर के मुख्य पुजारी थे रामकृष्ण परमहंस आप जानते हैं और काली से बात करते थे संवाद करते थे सब जानते हैं लेकिन खाना खाते समय बहुत टीका टिप्पणी करते थे इसमें तुमने घी कम डाला अगली बार से बनाओ तो इसे पहले थोड़ी देर सेकना एक दिन गुस्से में उनकी पत्नी ने कहा इतने बड़े विद्वान हो दुनिया भर के लोग तुमसे प्रवचन सुनने आते हैं नरेंद्र जैसे बच्चे तुम्हारा आशीर्वाद लेकर विवेकानंद बन गए और तुम यह 24
घंटे यह शौक में लगे रहते हो कि इसमें स्वाद था और यह बनाओ तो उनका मुख थोड़ा मलान हो गया रात्रि में शयन के समय उन्होंने अपनी पत्नी और मां से कहा जो हमारी मां है उन्होंने कहा कि तू जानती है इस पृथ्वी में बने रहने का मेरा एकमात्र रस भ भोजन है और मैं तुझे एक बात बता रहा हूं जिस दिन मुझे भोजन में रस आना बंद हो जाए उसके एक हफ्ते बाद मैं पृथ्वी छोड़ दूंगा और ऐसा ही हुआ एक दिन उन्होंने खाना खाया उनके बाद मां ने खाना खाया मां ने कहा आप
अजीब आदमी है इस सब्जी में मैं नमक डालना भूल गई आपने बताया ही नहीं उन्होंने कहा मुझे तो पता ही नहीं चला मां ने तुरंत तार भेज के नरेंद्र को बुलवाया कि तुम्हारे गुरुदेव के समय पृथ्वी पर कम रह गया है और छठे दिन बाद रामकृष्ण परमहंस ने स्वामी विवेकानंद की गोद में शरीर छोड़ दिया प्राण छोड़ दिया जीवन का रस बनाए रखने के लिए एक रज्जू डालनी जरूरी है राम से ही यात्रा कल से चल रही है राम के दुख ने विश्व को बांधा है राम के कष्ट ने दुनिया को एक साथ बांध दिया
है वनवास के लिए निकला है वह सुदर्शन युवक तो पूरा विश्व रोया है तापस वेश विशेष उदासी 14 बरस राम वनवासी हमारे उत्तर प्रदेश में गांव में गीत गाया जाता है कौन नरेशवादी गए यह कौन सा राजा है जिसने अपना घर बर्बाद करके इतने प्यारे बच्चों को जंगल भेज दिया है महिलाए बात कर रही है अब पंक्ति आती है कृष्ण पर और राम पर राम के दुख ने विश्व को बांधा है और के आनंद ने विश्व को बांधा है क्योंकि अंतिम यात्रा तो आनंद की ही है कल भी मैंने बताया था भगवान का नाम क्या
है भगवान का नाम है सच्चिदानंद आनंद तो अपराधियों को भी आता है आनंद तो महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार करने वाले पुरुषों को भी आता है आनंद तो गली के कुत्ते को उसके दिवाली के दिन उसकी पूंछ में पटाखे बांधकर उसे कष्ट पहुंचाने वाले लंपट और नालायक बच्चों को भी आनंद तो अपने मां-बाप के सामने अनर्गल बहस करके उनका अपमान करने वाली नालायक संतान को भी आता है आनंद तो विश्व में इतनी बड़ी जनसंख्या का कत्लेआम करने वाले हिटलर को भी आता था लेकिन वह दुखांत आनंद था एक आनंद होता है कि आपके पहुंचने
से लोग प्रसन्न हो जाए मैं आज इस छोटे ठाकुर से यह कहता हूं कि अपने बड़े भाई बड़े ठाकुर से बात करके मुझे सिर्फ इतना साहस प्रदान करे मुझे इतनी आयु प्रदान करे मुझे इतनी चेतना प्रदान करे कि वाम पथ पर जाती हुई एक पूरी पीढ़ी को मैं राम पथ तक ला सक इतना काम हो जाए तो अच्छा हो यह जो सच्चिदानंद है यह जो सत्य के कारण आनंद है इस हॉल में बैठे हुए लोगों आज रात को जाकर सोचना तुम अच्छा जी रहे हो या बुरा जी रहे हो उसकी एक पहचान है क्या तुम्हारे
होने से आसपास सुंदरता पैदा होती है या भय पैदा होता है अगर तुम्हारे होने से तुम्हारे घर में तुम्हारे परिवार में तुम्हारे व्यापार में तुम्हारे शहर में भय पैदा होता है दुख पैदा होता है तो तुम निरर्थक जी रहे हो और अगर तुम्हारे पहुंचने मात्र से गली के लोग मोहल्ले के लोग श्याम समिति के लोग प्रसन्न हो जाते हैं तो सोचो कि तुम आनंद के साथ जी रहे हो सच्चिदानंद के साथ जी रहे हो और कोई ईश्वर और कोई ईश्वर की संभावना नहीं है संकल्पना नहीं है केवल यही संकल्पना है आपके होने मात्र से जगती
में प्रसन्नता का व्यवहार होना चाहिए आप कुछ लोगों को देखिए उनका चेहरा कितना प्रसन्नता से भरा हुआ होता है आपको व एयरपोर्ट पर मिलते हैं आपको वह ट्रेन में मिलते हैं आपको गली में मिलते हैं वो कितने प्रसन्न मिलते हैं ऐसा लगता है कि परमात्मा ने आज इनको कोई बड़ी उपलब्धि दिला दिब ऐसा कुछ हुआ नहीं है और कुछ लोगों को देखिए उनका चेहरा ही ऐसा है कि तिथि के दिन पैदा हुए वोह कष्ट में ही रहते हैं तो यह जो आनंद में रहने की सतत प्रक्रिया है यह आपके अंदर का कृष्ण तत्व है संकल्प
इस परिसर में लेकर जाइए कि आज के बाद आपके होने के कारण आपका समाज आपका जिला आपका शहर दुख नहीं केवल और केवल आनंद अनुभव करेगा तब आनंद क्योंकि आपका जो दुख है आप मुझसे कहेंगे मुझे तो खुद ही बहुत दुख है मेरे तो व्यापार में गाटा हो गया मेरा तो प्रमोशन नहीं हुआ मेरे तो पैर में चोट लग गई आप बहुत सारी बातें करेंगे लेकिन नहीं जितना दुख तुम्हें है सामने वाले का उसका 1 ब 10 दुख कम करके देखो तुम्हारा दो गुना सुख उत्पन्न होगा बहुत सारे लोग केवल कांटे बिछाने के काम में
लगे रहते हैं उन्हें सुख का पता ही नहीं है कि कांटा निकालने का क्या सुख है जो लोग समाज में काम करते हैं जिस समिति ने ये कार्यक्रम कराया है इस समिति ने कांटा निकालने का काम किया है रसखान जैसा पठान सैयद इब्राहिम पठान रसखान वह कहता है कि शासन छोड़ो मैं त्रैलोक्य कुर्बान कर सकता हूं किस चीज पर ब्रज में जो करील के कुंज है जिनके नीचे से कभी कन्हैया निकले हैं अगर यह देखने को मिल जाए तो मैं कल्प वृक्षों का बाग कुर्बान कर सकता हूं और वोह जो लकड़ी है जिसको लेकर वह
अपनी गाय चलाने निकले हैं वह जो उन्होंने अपने कमर में कमरिया बांध रखी है उसके ऊपर मैं तीनों लोकों का राज्य नौ छावर कर सकता हूं अगर भगवान मुझे कहे कि रसखान सुन तुझे आठ सिद्धि और नव निधि प्रदान करता हूं और दूसरी तरफ एक काम यह है कि जहां कन्हैया गाय चराते थे वहीं तुझे गाय चराने का काम देता हूं तो रसखान कहता है कि मैं लपक कर गाय चराने का काम ले लूगा आठो निधि छोड़ दूंगा नव निधि छोड़ तात्पर्य यह है कि जड़ चेतन को रस से भरने वाला वह कृष्ण सही मायनों
में रस की खान है रसखान का वही प्रिय हो सकता है कवि का जो पूरी दुनिया से असंपट जिस पर काम भी असर नहीं करता उस शंकर को भी रास में जो आमंत्रित करके नचा दे उसका नाम कन्हैया है उसका नाम भारतीय स्त्रियों के इतिहास की सबसे दीपित चरित्र है द्रौपदी इस देश को इस समय अलाओ की आवश्यकता नहीं है अपने केशों पर अगर कोई निर्लज्ज हाथ डाल दे तो उसकी छाती फाड़ देने का साहस पैदा करने वाली द्रौपदी की आवश्यकता सोच के देखिए कि रुक्मिणी और राधा जब मिली होंगी तो कैसा दृश्य होगा एक
ने बालक कन्हैया को देखा है और एक ने राजनीतिज्ञ कृष्ण को देखा है एक ने मनमोहक बातों में इस विश्व को फसा लेने वाले एक नायक को देखा है और दूसरे ने अपने हाथ पर चक्र धारण करके इस पूरे विश्व को अनुशासन में ले आने वाले शासक को देखा है महायोद्धा को देखा है कृष्ण राधा के बचपन के दोस्त थे प्रेमी थे लेकिन दुर्भाग्य था कि राधा ने उन्हें विश्व की महाशक्ति रचते हुए नहीं देखा राधिका ने कृष्ण को कुचक्र के जालों को सुलझा हुए नहीं देखा शिशुपाल का वध करते हुए नहीं देखा लेकिन रुक्मिणी
का भी दुर्भाग्य कम नहीं है कि उसने तीनों लोगों को मुक्त हस्त से दान देने वाले को दूसरे के घर में चुपचाप घुसकर कुछ चुराते हुए भी नहीं [प्रशंसा] [संगीत] पहले ही दिन राधा से प्रेम का जो प्रदर्शन प्रभु ने किया है बरसाने से एक 12 साल की लड़की खेलने के लिए पहली बार गोकुल आई सहेलियों के साथ इसे कहते हैं लव एट फर्स्ट साइट पहली बार कृष्ण ने राधा को देखा पहली बार और राधा भी राधा ही है कन्हैया कन्हैया है तो राधा भी तो राधा ही है हजारों रतियां इकट्ठी कर जाए तो भी
ठकुरानी के पैर की सबसे छोटी उंगली के नाखून के बराबर ना पहुंचेंगे इतनी सौंदर्य इतना मठा पहला सवाल कृष्ण ने पूछा बूजत श्याम कौन तू गोरी पहला सवाल पूजत श्याम कौन तू कृष्ण ने पूछा कि कौन हो तुम कहां रहती हो कभी देखा नहीं कभी ब्रज की तरफ आई नहीं पहला सवाल बूजत श्याम कौन तू गोरी बूजत श्याम कौन तू ग कहां रहत काकी तू बेटी कितनी पोलाइट से बात कर रहे है रहत काकी तू बेटी देखी नायक बहु ब्रज खोरी बूजत श्याम कौन तू गोरी पूजत श्याम कौन तू गोरी लेकिन सौंदर्य का भी अपना
एटीट्यूड होता है राधा ने भी पह वो फेंकी जिसमें तीनों गिलिया उड़ गई बोले कि हमको क्या मतलब हम यहां आते ही नहीं है हां लोग बताते रहते हैं कि ये इलाका है यहां एक कोई नंद का लड़का है बड़ा शैतान बड़ा चोर सबका सामान चुराता रहता है काहे को हम ब्रज तनि आवत खेलत रहत आपनी पौरी काहे को हम ब्रज तनि आवत खेलत रहत आपनी पौरी सुनत रहत शव नन नंद लाला सुनत रहत शव नन नंदलाला करत रहत माखन दद चोरी बूजत श्याम कौ तू गोरी झत श्याम कौन तू गोरी अगर पहले ही परिचय
में कोई लड़की इतनी बेज्जती कर दे तो लड़का कहेगा थैंक यू वेरी मच लेकिन यह भी कन्हैया उत्तर देखिए तुमरो कहा चोरी हम ल तुम्हारा क्या चुराया तुमरो कहा चोरी हम ल खेलन चलो संग मिली जोरी सर प्रभु रसिक शिरोमण सूरदास प्रभु रसिक शिरोमण बात भुर राधिका भोरी बूजत श्याम कौन भरी भूत श्याम री इसीलिए प्रेम को प्रेम के गीत से शुरू करने वाला व्यक्ति जब अपनी सोच की प्रोड़ता पर पहुंचा तो उसने गीत के आगे अपनी प्रणता का आकार लगा दिया और गीत कहने वाले ने गीता प्रदान कर [संगीत] द जो गीत नहीं गा
सकता वह गीता भी नहीं गा सकता इसलिए कोई भी प्रोफेसर कोई भी विद्वान मिले जो कहे मुझे गाना पसंद नहीं है मुझे नाचना पसंद नहीं है मुझे पर्यटन पस पस नहीं है मुझे बारिश में भीगना पसंद नहीं है समझ जाना कि यह पूरा ज्ञान ना दे पाएगा क्योंकि जो गीत गा सकता है वही गीता गा सकता है धूप में निकलो बारिश में नहा कर देखो जिंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो कृष्ण ने जब तक गीता गाई है उससे पहले तक आप सोच नहीं सकते कि यही व्यक्ति गीता सुनाएगा जिसने गीत गा और चुना
भी किसे है सांवले ने गोरी चुनी है सांवले ने राधा को चुनी है यह जो योद्धा ने यह जो एक विलक्षण व्यक्ति ने चयन किया है राधा का य अनायास नहीं हुआ है इस पृथ्वी पर जब जब प्रेम जवान होगा इस पृथ्वी पर जब तक जवानी को देखकर बसंत में बहर आएगी जब जब बादल काले और सफेद होकर कृष्ण और राधा की कुटिया के ऊपर महल के ऊपर मंडराएंगी तब तब मुझे इस बात की प्रसन्नता होगी कि जैसा मेरे पास काना है वैसी ही सुंदर मेरे पास राधा है वैसा ही प्रेम से हमारे य एक
कवि हुआ है ब्रज में ठाकुर एक ठाकुर नाम का कवि हुआ है उसने लिखा है कि बरसात में बादल अचानक आ गए होली के दिन जबकि होली में बरसात कम होती है लेकिन उस दिन हो गई तो ब्रज के लोगों ने एक अलग दृश्य देखा कन्हैया के घर के ऊपर तो गोरी घटा बरस रही थी और राधा के घर के ऊपर काली घटा बरस रही [संगीत] थी अपने अपने निज गहन में अपने अपने घर में अपने अपने निज हन में चढ़े दो सनेह की नाव पेरी चढ़े दो सनेह की नाव पेरी चढ़े दो स्नेह की
नाव पेरी अंग नान में भीज प्रेम भरे समझो बलि में बलि जाव पेरी समयो लख में बलि जाव पेरी समयो लख में बलि जाव पेरी कह ठाकुर दो उनकी रुचि से रंग द्वे उमड़े दो उठाव प रंग से उड़े उठाव पेरी सखी कारी [संगीत] घटा सखी कारी घटा बरसे बरसाने पे सखी कारी घटा बरसे बरसाने गोरी घटा नंद गांव पेरी सखी गोरी घटा नंद गांव मेरी सखी गोरी घटा नंद गांव मेरी सखी गोरी घ नंद गाम री सली नंद गाम री इसलिए कृष्ण की कथा का प्रतीक शास्त्र समझाने के लिए बैठा हूं जितना मुझे समझ
में आया मेरी रुचि कन्हैया के माखन चुराने में चीर चुराने में मटकी फोड़ देने में उतनी है जितनी होनी चाहिए इससे आगे की क्या कथा है कृष्ण के पूरे बचपन में एक जिद चली है एक संकट चला है काले होने का यह पश्चिम हमको सिखा रहा है 1990 तक जो दक्षिणी अफ्रीका के ऊपर राज्य करता था यह कह के कि यह काले हैं और हम गोरे हैं यह पश्चिम हमको सिखा रहा है जिसने कालों को वोट डालने का अधिकार नहीं दिया था इस शताब्दी में इस देश में हजारों हजार वर्ष पहले हमारे देवता ने अपनी
इच्छा के चयन पर गोरा हो जाने के बजाय काला होना स्वीकार किया था ताकि सभी रंगों को आदर मिल [संगीत] सके चाहता तो मेरा देवता गोरा भी हो सकता था उसके हाथ में है उसने सृष्टि बनाई है गोरा होकर पैदा हो जाता ना मेरा राम गोरा है ना मेरा कन्हैया गोरा है ना मेरा शंकर गोरा है ताकि रंग के आधार पर पृथ्वी पर घूमता हुआ कोई भी मनुष्य मिले तो हिंदुस्तानी भारत से जाने वाला सनातनी उसे कलेजे से लगा सके कि मेरे भगवान के रंग का है मेरे आराध्य के मैंने 10 साल पहले जन्माष्टमी पर
व्रत में था मैं तो मेरी मां भी पंजी बना र पंजीरी आप जानते हो पंजीरी जानते हो हा सरकार में बहुत बढती [संगीत] है हमारे यहां तो एक ही बार जन्माष्टमी पर कटती है सरकार में 365 दिन बढती है तो मेरी मां पंजीरी बना रही थी वो थाली में डाल के और फिर जब टाइट हो जाती है थोड़ी सी तो उसको तो मैं भी वही बैठा हुआ था उनसे बतरस कर रहा था मुझसे बोली के य मैंने कहा चखा तो दो तो उन्होंने व जिस चाकू से काट रही थी मेरी तरफ इशारा कर दूर हटा
हाथ जब व्रत खुलेगा तब मिलेगी पहले भोग चढ़ेगा अरे मैंने क मैं भी तो कन्हैया ही तुम्हारा दे इसमें क्या दिक्कत है घर में ही मौजूद है वहा क आ जाओगे बो नहीं बकवास नहीं बनाने लगी मुझसे बोली अच्छा चल एक काम कर जा तब मिलेगा जब पहले कृष्ण जी पर कुछ लिख के ला रात को जब व्रत खोलेंगे तब सुनाना मैंने चार पंक्ति कन्हैया प लिख ली राधा की ओर से कि राधा बेचारी इतना प्रेम करा और कृष्ण ने मिले ही नहीं तो मैंने चार पंक्ति लिख दी और मैंने जल्दबाजी में उने सुना दी
दो घंटे बाद ही देखो ये लिखी है पंक्ति आपको भी सुना देता हूं कृष्ण को कहां ढूंढे राधा क्या कह रही है कि हो काल गति से परे चिरंतन अभी यहां थे अभी यही हो हो काल गति से परे चिरंतन अभी यहां थे अभी यही हो कभी धरा पर कभी गगन में बचपन में मां से बोले कन्हैया की मां मैं दाऊ बलराम को चिड़िया दिखा रहा था तो मैंने इधर की हाथ उठाया तो सूरज इधर की तरफ देखने लगा तो मां ने कहा तुझे क्या पता तू जिधर की तरफ उंगली उठा देगा सूर्य और चंद्रमा
को तो दिशा में जाना ही पड़ेगा तुझे क्या पता त कभी धरा पर कभी गगन में कभी कहां थे कभी कहीं हो तुम्हारी राधा को भान है तुम सकल चराचर में हो समाए तुम्हारी राधा को भान है तुम सकल चराचर में हो समाए बस एक मेरा है भाग्य मोहन के जिसमें होकर भी तुम नहीं हो बस एक मेरा है भाग्य मोहन मैंने कहा एक कविता सुन लो राधा की ओर से बोली अरे अच्छा भैया मैं गांव जाती हूं खेत पर जाती हूं हमारे वहां खेत पर हमारे पुरखे रखे हुए उनको जल चढ़ाने तो ट्रैक्टर चलाते
हुए बच्चे आ जाते हैं कि अम्मा यह मोबाइल में भैया की प्रेम की कविता है तू इतना ही प्रेम सीखा कि राधा को कृष्ण नहीं मिले अरे वाह रे मेरे कवि और कहके अम्मा किचन में चली गई मुझे लगा कि अम्मा मुझ पर टोंट मार के गई कि राधा को कृष्ण नहीं मिले मैंने व्रत खोलने से पहले चार पंक्ति और लिखी वो भी स्मरण कर रहा हूं ता द्वारिका में मिले बिराजे ना द्वारिका में मिले बिराजे ना द्वारिका में मिले बिराजे बिरज की गलियों में भी नहीं हो ना योगियों के हो ध्यान में तुम अहम
जड़े ज्ञान में नहीं हो तुम्हे ये जग ढूंढता है का मगर इसे यह खबर नहीं है तुम्हें यह जग ढूंढता है कान्हा मगर इसे यह खबर नहीं है बस एक मेरा है भाग्य मोहन अगर कहीं हो तो तुम यही हो बोल राधा रानी की बस एक मेरा है भाग्य मोहन इसलिए एक बार सच्चे मन से पुकारो तो सही घनश्याम बन के पुकारो तो इसी परिसर में माता का आविर्भाव होगा कैसे के मेरे जीने में मरने [संगीत] में तुम्हारा नाम आएगा मैं सांसे रोक लू फिर भी यही इल्जाम आएगा हर एक धड़कन में जब तुम हो
तो फिर अपराध क्या मेरा अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा और यह मैं कहां कह रहा हूं यह मैं मेवाड़ में कह रहा हूं कोई और जगह होती तो होता लोगों को झूठ लगता है इस मेवाड़ में तो नई नई विवाह होकर आई मेड़ता की एक राजकुमारी ने अपने कक्ष का पट बंद करके विवाह की पहली रात कृष्ण से बात करी तो बाहर ननद को पता चला कि कुवर तुम्हारी पत्नी तो किसी पुरुष से बात कर रही है अंदर से किसी
पुरुष की आवाज आ रही है मैं उस मां मीरा के मेवाड़ में बोल रहा हूं यह कम बड़ी बात है बो ये कभी कृष्ण बनकर अनुभव करो य कभी राधा बनकर अनुभव करो कन्हैया ने भी नहीं सिर्फ कन्हैया बनकर अनुभव किया राधा बनकर अनुभव कम किया इसीलिए माता के प्रति जो प्रेम है हम बेटों का जो लाड़ है उतना कन्हैया से नहीं है उनसे हम शिकायत कर देते हैं इसीलिए राधा से मिलने के लिए जब कृष्ण पहुंचे तो बांग्लादेश के कवि ने बंगाल के कवि ने काजी नजरुल इस्लाम ने जो मौलवी था जो मुजन था
यह होली पर जरा सा गाल पर रंग अमा आपके गाल पर क्या लग जाता है आपकी कौम एकता संकट में आ जाती है तो अच्छी बात नहीं है रसखान से सीखो रहीम से सीखो काजी नजरुल इस्लाम से सीखो सियासत लड़ाती रहे कोई दिक्कत नहीं उसका काम है चुनाव आते जाते रहे हम और वो तो तुम वो हैं कि तुम मेरे गांव में रहते थे शकील मिया तो मैं जब भी निकलता था मैं तुमसे राम राम करता था और तुम भी पलट कर मुझसे राम राम करते थे हम और आप तो वो रिलेशन के नजरुल ने
बंगला में गीत लिखा मैंने उसका हिंदी में अनुवाद किया है अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श्याम महसूस करके देखिए कैसी वेदना है हमारी मां की अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श मेरी तरह रातों में दिन में उन्होंने बांगला में लिखा हमारी मौतो दिवसो निसी दिन मैंने हिंदी करी मेरी तरह रातों में दिन में जपते श्याम का नाम अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श्याम बन फूलों की माल निराली जो पहने घूम रहे हो वन फूलों की माल निराली बन जाती
तब नागन काली कृष्ण प्रेम की भीख मांगने कृष्ण प्रेम की भीख मांगने आते लाख जन्म तुम आते आते इस ब्रजधाम अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा होते श्याम चुपके चुपके चुपके चुपके चुपके चुपके तुम्हरे हृदय में बसता बंसी वाला चुपके चुपके तुम्हरे हृदय में बसता बंसी वाला धीरे धीरे उसकी धुन से बढ़ती मन की ज्वाला पन घट पे तुम नैन लगाए रहते आस लगाए कारे के संग प्रीत लगाकर कारे के संग प्रीत लगाकर हो जाते बदनाम अगर तुम राधा होते श्याम अगर तुम राधा हो होते श्याम अगर तुम
राधा होते श्याम तीन चरित्र और अगला सारा समय केवल इन पर एक रुक्मिणी और एक राधिका एक पटरानी और एक दीवानी और एक दूसरी लुभानी जो चित्तौड़ के किले में नाची पागल होकर नाची ये तीन मेरी माए और इनको थोड़ा थोड़ा समय जितना मेरे पास रस है जितना मेरे पास स्मृति है मैं आपके माध्यम से देखता हूं सूरदास ने एक पद लिखा है कि एक बार जब तीज के मेले में सारी परिवार को लेकर द्वारिका से कन्हैया आए तो ठकुरानी दीवानी से मिली थी सोच के देखिए कि रुक्मिणी और राधा जब मिली होंगी तो कैसा
दृश्य होगा एक ने बालक कन्हैया को देखा है और एक ने राजनीतिज्ञ कृष्ण को देखा है एक ने मनमोहक बातों में इस विश्व को फसा लेने वाले एक नायक को देखा है और दूसरे ने अपने हाथ पर चक्र धारण करके इस पूरे विश्व को अनुशासन में ले आने वाले शासक को देखा है महायोद्धा को देखा है कृष्ण राधा के बचपन के दोस्त थे प्रेमी थे लेकिन दुर्भाग्य था कि राधा ने उन्हें विश्व की महाशक्ति रचते हुए नहीं देखा राधिका ने कृष्ण को कुचक्र के जालों को सुलझा हुए नहीं देखा शिशुपाल का वध करते हुए नहीं
देखा लेकिन रुक्मिणी का भीय दुर्भाग्य कम नहीं है कि उसने तीनों लोगों को मुक्त हस्त से दान देने वाले को दूसरे के घर में चुपचाप घुसकर कुछ चुराते हुए भी रुक्मणी ने ना माकन चोर देखा ना बासुरी देखी ना खल से बंधे हुए कन्हैया को देखा ना गोपिका की शिकायत देखी उन्होंने क्या देखा रुक्मिणी ने देखा दुनिया को चलाने वाला कृष्ण लेकिन गायों को चलाने वाला कृष्ण तो राधिका के हिस्से आया संस्कृत में गौ के तीन अर्थ हैं एक इंद्रिया दूसरा गाय और तीसरा सूर्य के चारों ओर घूमने वाला समस्त सौरमंडल के ग्रह उन्हें भी
गौ कहते हैं रुक्मिणी बहुत सौभाग्यशाली कि पटरानी है लेकिन कैसी पटरानी जिसके हिस्से ना बांसुरी आई माखन आया जो मैंने कल कहा था कि कृष्ण ने जाते हुए कुरुक्षेत्र की तरफ अर्जुन से कहा अरे तू निपट मूर्ख रहा मेरे मित्र सारी सेना तो ले गया दुर्योधन तू अकेला मुझे ले चला माखन ले गया तू छाछ लेकर जा रहा है मुस्कुराते हुए अर्जुन ने कहा कि वो पागल था वो माखन ले गया तो मैं तो माखन चोर को लेकर जा रहा हूं आप सबसे आ गए इस कोई दिक्कत नहीं राधा की जो यात्रा तुम से प्रारंभ
हुई थी और रुक्मिणी की यात्रा आपसे प्रारंभ हुई थी मैं सबसे पहले आपको राधा और रुक्मिणी के संदर्भ में कुछ पंक्तियां सुनाता हूं और यह भी मेरे हृदय के एक बिछड़े हुए टुकड़े का सृजन है जिसे ईश्वर ने आयु कम दी लेकिन यश बहुत दिया देवल ने राधा पर जो लिखा वो मैंने फिर ना सुना उसने राधा और रुक्मिणी के बीच के संवाद को भी लिखा मैं पहला राधा रानी प्र छंद सुना रहा हूं कि राधा ने त्याग का पंथ बुहारा तो पंथ पे फूल बिछा गया कान्हा पंथ पे फूल बिछा गया कान्हा तो पंथ
पे फूल बिछा गया काना राधा ने प्रेम की आन निभाई तो आन का मान बढ़ा गया काना तो आन का मान बढ़ा गया कान्हा तो आन का मान बढ़ा गया कान्हा कान्हा के तेज को भा गई राधा तो राधा के रूप को भा गया कान्हा तो राधा के रूप को भा गया कान्हा तो राधा के रूप को भा गया कान्हा कान्हा को कान्हा बना गई राधा कान्हा को कान्हा बना गई राधा तो राधा को राधा बना गया काना तो राधा को राधा बना गया काना तो राधा को राधा बना गया काना राधा को राधा बना
गया काना राधा को राधा बना गया अब राधा पर सुनिए गोपियां गोकुल में थी अनेक परंतु गोपाल को भा गई राधा परंतु गोपाल को भा गई राधा परंतु गोपाल को भा गई राधा बांध के पास में बांध में पाश में नाग नथैया को काम विजेता बना गई राधा काम विजेता बना गई राधा काम विजेता बना गई राधा काम विजेता को प्रेम प्रणेता को प्रेम पियूष पिला गई राधा प्रेम पियूष पिला गई राधा प्रेम पियूष पिला गई राधा विश्व को नाचना चाहता है जो विश्व को नाचना चाहता है जो उस श्याम को नाच नचा गई राधा
उस श्याम को नाच नचा गई राधा श्याम को नाच नचा गई राधा श्याम को नाच नचा गई राधा श्याम को नाच नचा गई राधा लोगों ने बड़े-बड़े ध्यान किए लोगों ने बड़ी-बड़ी तपस्या की लोग बैठे रहे ग्रंथ पढ़ते रहे गीता पढ़ते रहे उनको नहीं मिली और नाचते नाचते किसे मिला काना त्यागियो में अनुराग में बड़ भागी थी नाम लिखा गई रा बड़ भागी थे नाम लिखा गई राधा भागी थे नाम लिखा गई राधा रंग में कान्हा के ऐसी रंगी रंग कान्हा के रंग नहा गई राधा रंग आ गई राधा का के रहा गई राधा प्रेम
है भक्ति से भी बढ़कर यह बात सभी को सिखा गई राधा बात सभी को सिखा गई राधा बात सभी को सिखा गई राधा संत मेहनत तो ध्या या किए और माखन चोर को भा गई राधा माखन चोर को भा गई राधा माखन चोर को भा गई राधा माखन चोर को भा गई राधा माखन चोर को पा गई राधा अच्छा अपने अपने श्याम किया था तो समिति वालों जब यह मंच बनाया तो भैया मंच बनाया था तो जब कन्हैया का विग्रह लगाने की सोची थी तो समिति के किसी आदमी ने नहीं सोची कि इनके साथ माता
रुक्मिणी को खड़ा कर दे और लोग फिर भी कहते हैं कि राधा को कन्हैया नहीं मिले के ब्याही न श्याम के संग न द्वारिका या मथुरा मिथिला गई या मथुरा मिथिला गई राधा या मथुरा मिथिला गई राधा ब्याही न श्याम के संग न द्वारिका या मथुरा मिथिला गई राधा या मथुरा मिथिला गई राधा या मथुरा मिथिला गई राधा पाईन रुक्मणी साधन [संगीत] वैभव पाईन रुक्मिणी साधन वैभव संपदा को ठुकरा गई राधा ठुकरा गई राधा संपदा को ठुकरा गई राधा किंतु उपाधियों मान गोपाल में रानियों से बढ पा गई राधा रानियों से बड़ पा गई राधा
रानियों से बड़ पा गई राधा ज्ञानी बड़ी ज्ञानी बड़ी अभिमानी बड़ी पटरानी को पानी पिला गई रा पटरानी को पानी पिला गई राधा रानी को पानी पिला गई रा पट रानी को पानी पिला गई राधा नी को पानी पिला राधा सारे कौरवों को इकट्ठा करके जो कुरुक्षेत्र के मैदान में नाश का साधन बना दे वह अपनी प्रेमिका को ब्रज से बुला नहीं सकता था उसने क्या कहा नहीं होगा उसने क्या भेजा नहीं होगा उद्धव जैसे हरों को कि जाकर एक बार राधा से कह के आओ कि अब तो द्वारिकाधीश ने महल बनवा लिया है महारानी
आओ यहां रहो रुक्मिणी के साथ अपनी बहन के साथ लेकिन प्रेम में अना होती है से स्वाभिमान कहते हैं जिस विश्वविद्यालय का कल मैं जिक्र कर रहा था दिल्ली में ज्ञानियों का विश्वविद्यालय है उद्धव लोगों का वहां एक प्रोफेसर मुझसे कह रहा था भाई साहब आपकी राधा रानी कुछ ज्यादा नाजुक है मैंने कहा कैसे बोले गोकुल और मथुरा के बीच में एक यमुना न है उसे पार कर लेती मिल लेती इतना रोना पिटना कैसे है मैंने कहा इसका मतलब तूने डिग्री ली है प्रेम नहीं किया के हार के श्याम को जीत गई अनुराग का अर्थ
बता गई राधा अनुराग का अर्थ बता गई राधा अनुराग का अर्थ बता गई राधा पीर पे पीर सही पर प्रेम को शाश्वत कीर्ति जका गई राधा शाश्वत कीर्ति दिला गई राधा शाश्वत कीर्ति दिला गई राधा कान्हा को पा सकती थी प्रिया कान्हा को स्वा सकती थी प्रिया पर प्रीत की रीत नि गई राधा प्रीत की रीत निभा गई राधा प्रीत की रीत निभा गई राधा कृष्ण ने लाख कहा कृष्ण ने लाख कहा पर संग में ना गई तो फिर ना गई राधा ना गई तो फिर ना गई राधा ना गई तो फिर ना गई राधा
ना गई तो फिर ना गई राधा ना गई तो फिर ना ग राधा रानी की [संगीत] शांति ऐसे नहीं आती शांति नहीं तब तक जब तक सुख भाग नर का सम हो नहीं किसी को बहुत अधिक हो नहीं किसी को कम हो यह कहा अर्जुन ने लेकिन यष्टि ने नहीं मानी बड़े भैया ने नहीं मानी यह जो बड़े भैया लोग होते हैं बड़े शांतिपूर्ण होते हैं शांति शांति शांति हर घर में कुछ युध शों की आवश्यकता भी है लेकिन हर घर में ऐसे लोगों की आवश्यकता है कि अगर कोई निर्लज्ज कुलवधू के आंचल पर हाथ
डालने की कोशिश करे तो वो बिना बड़े भैया से पूछे अपना उठाले और अपनी गदा उठा ले ऐसे लोगों की आवश्यकता यह जो गीता के पारायण से पहले महाभारत में उद्घोष सुनते हो यदा यदा धर्मस्य जन भवति भारत अथान धर्मस्य तदा मानम सज मैं स्वयं को सृजित करूंगा यह जो इन्होंने कहा था यह एक दिन में नहीं कह दिया था इसकी भूमिका लिखी गई थी उस दिन जब गोकल के गौवंश और गोकुल के गौ उत्पादन का शोषण कंस की मार्केट करना चाहते थ यह जो चक्र घुमाता हुआ कृष्ण आपने देखा यह जो अन्याय के खिलाफ
रथ का पहिया उठाता हुआ कन्हैया आपने देखा यह एक दिन में तैयार नहीं हुआ यह ब्रज भूमि में कंस जैसे अहंकारी का बाहर से आतंक और इंद्र जैसे अहंकारी का ऊपर से आतंक इसके बीच लड़ लड़कर जिस योद्धा ने अपने आप को तैयार किया है उस हीरो का नाम उस नायक का नाम कन्हैया है उसका नाम कृष्ण है मैंने अपनी मां से एक भजन सुना बचपन में ऐसे भजन को सुनता था मैं मुझे लगता था इसमें क्या खास है बस मां प्रसन्न है इसलिए गा रही है कन्हैया ने अकेली जाती हुई एक गोपिका को घेर
लिया वो दूध लेकर मथुरा जा रही थी इसे सामान्य व्यवहार में कहे तो ये खराब बात है और उससे कहा दूध वापस और नहीं करेगी तो यह रही गुलेल अभी मारूंगा मटकी फूट जाएगी आज की डेट में अगर कोई भीलवाड़ा में लड़का ऐसा करे कि अकेली जाती हुई लड़की को घेर ले तो आईपीसी की धारा लग जाएगी अब इससे अर्थ क्या निकलेगा जब मैंने कृष्ण पर बोलने का संकल्प करा तो मेरी मां ने कहा हे लाला यह जो तू कथा करेगा इसमें यह वाला भजन भी सुना हो मैंने क ठीक है सुनाऊंगा बोली मैं टीवी
पर सुनूंगी मैंने कहा ठीक है सुनना अब सुन रही होगी अब मेरी टीम ने मुझे कहा सर इस भजन का क्या करेंगे इसमें तो कोई अर्थ ही नहीं है मैंने कहा नहीं आपकी दृष्टि नहीं अर्थ निकालने की इसमें अर्थ है अकेली गोपिका घेली से कहा कि ये दूध तुझे ले जाने नहीं दूंगा यह मक्खन तुझे ले जाने नहीं दूंगा मतलब क्या है इस बात का और अपने भाई अपने दोस्त बुला लिए और मक्खन वापस छीन लिया पूरी दुनिया में यही लड़ाई चल रही है प्राकृतिक संसाधन जिनके हैं पहला अधिकार उनका है सबसे पहला दूध गोकुल
के बच्चों को मिलेगा किसी अहंकारी कंस और उसके दरबारियों को नहीं मिलेगा यह घोषणा है ये जो संसाधनों के वितरण का झगड़ा है एक दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा है दुनिया का सबसे बड़ा सेठ अपना तेल इस्तेमाल नहीं करता तेल कहां से लेता है मिडिल ईस्ट से दुनिया का 17 पर तेल उसकी जमीन के नीचे है एक बूंद तेल नहीं निकाला है पाइप डाल लिया है रिफाइनरी बना ली है यूज नहीं करता तेल किसका ले रहा है दूसरे देशों का ताकि इनका पहले खत्म हो जाए मरे तो ये मरे मैं जिंदा बचू लकड़ी किससे लेता
है ब्राजील से पानी किसका इस्तेमाल करता है कनाडा का कूड़ा कहां फेंक के आता है सोमालिया में और विश्व को बताता है कि शांति कैसे फैले गी मैं दिल्ली से रोज आता हूं तो रोज हसता हूं दिल्ली से आप कभी एयरपोर्ट की तरफ आइए न्याय और अहिंसा पथ के कोने पर एंबेसी है इन दो रास्तों के कॉर्नर पर बनी हुई है जिन दो रास्तों से उनका कोई मतलब ही नहीं है अपनी दुकानदारी चलाने के लिए यूनाइटेड स्टेट बना रखा है जब यह कुंडई करता है तो यूनाइटेड स्टेट कहता है रात आवाज नहीं आ रही भाई
साहब होता है ना जिनको उधार आप दे दो उनसे बोलो यार व 00 दिया था हेलो हेलो भाई साहब नेटवर्क नहीं है और हम जैसे देश हमसे हमारे कश्मीर के बारे में ज्ञान देता है वहां से कि जनमत करा लो यह करा लो है अमन के वास्ते जग में बना यूएनओ यू की य है इसमें बाकी सबकी नो ईनो यह जो संसाधनों के वितरण का झगड़ा है यह कृष्ण का संघर्ष है कि पहले दूध ब्रज के बच्चे पिएंगे पहले मक्खन ब्रज के बच्चे और युवा खाएंगे पहले इस प्राकृतिक संसाधन का इस्तेमाल यहां होगा और लड़ना
किससे है इन सप्लायर से जो जल जंगल और जमीन के असली मालिकों से हक छीनकर इन वाशिंगटन को और इन दुबई हों को देना चाहते हैं मेरी मां का गीत है अब इस तरीके से सुनिए तो आप सत्य सिद्ध मान जाएंगे इकली घेरी वन में आई शम तने कैसे ठानी रे इकली री वन में आई श्याम तने कैसे ठनी रे इकली घेरी वन में आ श्याम तेने कैसी ठानी रे इकली री वन में आई श्याम तने कैसी ठानी रे श्याम तने कैसी ठानी रे श्याम तने कैसी ठानी रे इकली री मन में आ श्याम तन
कैसी ठानी रे श्याम मोहे वृंदावन जानो श्याम मोहे वृंदावन जानो श्याम मोहे वृंदावन जानो श्याम मोहे वृंदावन जानो लौट के बरसाने आनो लौट के बरसाने आनो मेरी कर जोरे की मानो मेरी कर जोरे की मानो जो है जाय मोई देर लड़ेंगी सास जिठानी रे इकली रीन में आए श्याम तने कैसी खानी रे श्याम तने कैसी खानी रे श्याम तने कैसी खानी रे इकली री मन में आ श्याम तेने कैसी खानी रे इली केरी मन में आई श्याम तेने कैसी खानी रे हर सप्लायर पुलिस का भह डर खाता है हर सप्लायर कहता है कि मैं दिल्ली
शिकायत कर दूंगा जयपुर शिकायत कर दूंगा कंस राजा से करू गुहार कंस राजा से करू गुहार बांध के तोय लगावे मार तेरी ठकुरानी का तेरी ठकुराइन का जुल्म करे ना डरे तके तू नार बिरानी रे इली घेरी वन में आए श्याम तने कैसी कानी रे श्याम तने कैसी ठानी रे श्याम तने कैसी ठानी रे इकली री मन में आए श्याम तेने कैसी नी रे एकली री वन में आए श्याम तने कैसी नी रे अब जवाब सुनना हमारे ठाकुर का कंस क्या खसम लगे तेरो कंस का कसम लगे तेरो जा दिन जाए में मैंने घेरो दिन
जाए मैंने घेर मारवा को कर दूंगा केरो मारवा को कर दू केरो याय जन्म भयो मेरो य जन्म भयो मेरो कंस करू निर् बंस मेट द नाम निशानी रे इकली री मन में आए श्याम तने कैसे ठानी रे श्याम तन कैसी ठानी रे श्याम तन कैसी ठानी रे इकली तेरी मन में आई श्याम तने कैसी ड़ रे इकली री मन में आई अकेले कृष्ण से रुक नहीं रहा देखो आप आनंद प्राकृतिक संसाधन की लूट हो रही है हमारा ब्रेन छीन के ले जाया जा रहा है कृष्ण ने क्या कहा ऑर्गेनाइजेशन बनाओ नवयुवक मंडल बनाओ संस्था
बनाओ खड़ा करो आंदोलन इन अत्याचारों के खिलाफ जो देश को लूट रहे हैं आए गए इतने में सब ग्वाल आए गए इतने में सब ग्वाल आए गए इतने में सब ग्वाल आए गए इतने में सब गवाल परे नैनन में डोरा लाल परे नैनन में डोरा लाल झूम के चले अदा की चाल झूम के चले अदा की लुट गयो माखन मार्ग में अजी लुट गयो माखन मार्ग में घर गई खिसियानी रे इकली री मन में आई श्याम तने कैसी खानी रे श्याम तेने कैसी थानी रे गिरधर कैसी थानी रे इकली तेरी मन में आज श्याम तेने
कैसी नी रे निकली तेरी वन में आज श्याम तने कैसी ठानी रे इकली री वन में आज श्याम तने कैसी ठनी रे इकली घेरी वन में आए श्याम तने कैसी नी बोल बांके बिहारी लाल की यह जो प्राकृतिक संसाधन की लूट बचाने वाला व्यक्ति था ना बच्चा यह जो गीता के पारायण से पहले महाभारत में उद्घोष हो यदा यदा धर्मस्य गलाने भवती भारत अभन धर्मस्य तदा मानम सजाम मैं स्वयं को सृजित करूंगा यह जो इन्होंने कहा था यह एक दिन में नहीं कह दिया था इसकी भूमिका लिखी गई थी उस दिन जब गोकुल के गोवंश
और गोकुल के गौ उत्पादन का शोषण कंस की मार्केट करना चाहते आप जो भी पैदा करें उसके लिए मार्केट का निर्माण करें ये तो ठीक है लेकिन मार्केट आपके हिसाब से आपसे पैदा करवाने लगे यह शोषण [संगीत] है हमसे लोग अक्सर कहते हैं कवि सम्मेलन में तो बहुत आरोप लगते थे पैसे बढ़ा दिए आपने और कहां कहां प्रोग्राम होने लगे आईआईटी में होते हैं फला होते हैं तब मैं सदा लड़कों से कहता था अपने जूनियर से कहता हूं कभी यहां बैठे उनसे कहता हूं कविता का बाजार पैदा करो बाजार के लिए कविता मत [संगीत] लिखो
जैसे राजनीति का धर्म होना चाहिए धर्म की राजनीति नहीं होनी [संगीत] चाहिए यह जो चक्र घुमाता हुआ कृष्ण आपने देखा यह जो अन्याय के खिलाफ रथ का पहिया उठाता हुआ कन्हैया आपने देखा यह एक दिन में तैयार नहीं हुआ यह ब्रज भूमि में कंस जैसे अहंकारी का बाहर से आतंक और इंद्र जैसे अहंकारी का ऊपर से आतंक इसके बीच लड़ लड़कर जिस योद्धा ने अपने आप को तैयार किया है उस हीरो का नाम उस नायक का नाम कन्हैया है उसका नाम कृष्ण है राम के जीवन में अर्थ है और कृष्ण के जीवन में रस है
इसका मतलब यह नहीं है कि अर्थ नहीं है रस ही सबसे बड़ा अर्थ है त्य करते समय कई बार नर्तक जब स्थिति को भूल जाए कि वह कहां नाच रहा है कलाकार जब पेंटिंग बनाता हुआ य भूल जाए कि कितनी देर से उसने पानी नहीं पिया है गायक सुर लगाता हुआ जब यह भूल जाए कि वह चौराहे पर है कि एकांत में है तो उस अनहद सीमा को रस कहा जाता है भगवान कृष्ण 24 घंटे इस रस की सिद्धा अवस्था में रहते हैं यह सिद्धा अवस्था आ जाती है तब यह साहस यह संकल्प और सौंदर्य
पैदा होता है कि जहर के सबसे बड़े प्रतीक जहरीले काले नाग के फन पर चढ़कर भी आप बांसुरी बजाकर डांस कर सकते हैं नत कर सकते हैं य तभी से