[संगीत] जिन दिनों साहिबजादे का शहीदी दिवस आता उन दिनों क्लास चल रही थी तो कुछ बच्चे लेट आए क्लास में उनका एटीट्यूड था जैसे देर लीस्ट बॉदर तो मैंने उनसे क्वेश्चन पूछा मैंने कहा तुम 40 बच्चे इस क्लास में बैठे हो अगर इस समय चार टेररिस्ट एके 47 लेके इस कमरे में एंटर कर जाए और तुम्हें बोले कि तुम्हारी यह छोटी उंगली काटेंगे नहीं तो मुसलमान बन जाओ तो क्या करोगे 40 में से 39 लोगों ने बोला हम मुसलमान बन जाएंगे ये पंजाब की बात कर रहा हूं मैं आपसे जैसे ही यूपीए वन आई थी
उन्हें पता था एजुकेशन की कितनी पावर है और उन्होंने एक साल के अंदर-अंदर करिकुलम चेंज करके किताबें छपवा दी अब आप उसका इंपैक्ट नोटिस करके देखिए कि आज हम हैं 2024 में 17 188 वर्ष हो चुके हैं इन किताबों को चलते हुए एक वर्ष में एक करोड़ बच्चा वो किताबें पड़ता तो अगर आप 18 वर्ष की बात करें तो आपने 18 करोड़ ऐसे लोग निकाल दिए जो उस जहरीली किताब को पढ़ के निकल रहे हैं इनकी आपने बहुत सही बात बोली कि इनके इरादे कितने खतरनाक हैं यह लोग उकसा रहे हैं एक सिविल वॉर के
लिए यहां के देश के लोगों को वह चाहते हैं कि एक सिविल अनरेस्ट हो एक सिविल वॉर हो एक गृह युद्ध हो अब देखिए जो कास्ट सेंसस हुआ जिसमें कास्ट और ये जातियों को परिभाषित किया अंग्रेजों ने बेसिकली उनको तो डिवाइड एंड रूल करना था इस चीज को खारिज कर देना चाहिए था स्वतंत्र होने के बाद कोई जाति नहीं है सब हिंदू है इस प्रोसेस को इतना नॉर्मलाइज कर दो कि वोह जो सर तन से जुदा वाली प्रॉब्लम है वो हट ही जाए सर तन से जोदा बोलना ही क्रिमिनलाइज होना चाहिए जो आईपीसी के सेक्शन
है उनके उनको डेफिनेटली उनको एफआईआर करके अंदर करना चाहिए श बी पलाइज रट [संगीत] जब मैंने देखा कि कैसे ब्रेन वाशिंग हुई है तब मुझे हिस्ट्री की इंपॉर्टेंस समझ में आई है तो आप ये जाने निकलिए कि सच्चा इतिहास है क्या जी है ना नहीं मैं ये जानने निकला था कि ये क्यों इसको झूठ पढ़ा रहे हैं अच्छा क्योंकि ने एक टीचर का माइंड कैसे काम करता है कि पढ़ाना है तो मैं सच पढ़ाऊंगा ना सही बात है है ना कोई किसी को कोई मदरसे के टीचर तो है नहीं आप हां मदरसे में तो सच
हो झूठ हो वो किताब पढ़ा नहीं है बिल्कुल ठीक तो ओबवियसली एक शिक्षक का धर्म है ये हा कि बहुत अच्छे से सच्चाई से जो भी है उसको पढ़ाए अपने बच्चों को बिल्कुल सही कहा आपने तो अब कोई झूठ पढ़ाए पहली बात तोय समझ में नहीं आती कि कोई ऑथर किताब में झूठ लिखेगा पहले तो यह नहीं समझ में आता फिर कोई टीचर अपने बच्चे को झूठ पढ़ाए का यह समझ में नहीं आता तो फिर मैंने समझना शुरू किया कि झूठ क्यों पढ़ा रहे हैं तो वो मैं एक एग्जांपल बहुत बार कोट करता हूं एक
बार क्रिकेट कमेंट्री चल रही थी सचिन तेंदुलकर को किसी ने एलबीडब्ल्यू गलत आउट दे दिया शायद स्टीव बकनर है या किसी ने आ आउट दिया था उसे तो तेंदुलकर थोरो जेंटलमैन है वह बिना किसी डिसेंट के वहां से चले गए तो गावस्कर कमेंट्री बॉक्स में बैठे थे वो बोले कि अगर आपका एक कंसीडरेबली लंबा क्रिकेटिंग करियर होता एस बैट्समैन तो आपको यह समझ में आ जाता है कि कुछ फैसले जो अंपायर है वह गलत करेगा क्या आप आउट नहीं है तो भी आउट दे देगा और उल्टा भी होगा आउट है तो भी आपको नॉट आउट
दे देगा तो ओवर अ पीरियड ऑफ करियर ये इवन आउट बैलेंस आउट हो जाते हैं तो इसलिए वो ह्यूमन एरर है कोई भी कर सकता है लाइक वाइज फिजिक्स में भी हम जब एक्सपेरिमेंट कराते हैं बच्चों को तो उसमें भी आपने टेबल के मेजरमेंट लेनी है एक बच्चा लेके आएगा सर यह 20.4 सेंटीमीटर आएगा सिर्फ 20.3 सेमी का है तो वो ह्यूमन एरर है हम जब उसको एवरेज निकाल लेते हैं 100 रीडिंग लेकर एवरेज निकाल लेते हैं तो बैलेंस आउट हो जाता है दिस इज द नेचर ऑफ ह्यूमन एरर लेकिन यहां पर इन किताबों को
जब आप स्टडी करते हैं जो हिस्ट्री बुक्स हैं इनमें सारे का सारा जो टिल्ट है वो किस तरफ है कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी बहुत अच्छे हैं और तुम्हारा देश तुम्हारे देश की परंपराएं और तुम्हारे देश का धर्म जो है वो सब बिल्कुल घटिया है तो यहां पर जो एरर है वो सारा एक दिशा में ही जा रहा है जो आपको बताता है कि ह्यूमन एरर नहीं जानबूझ के किया गया है डेलिब ट है ये और क्यों किया गया फिर जब आप इस्लाम को पढ़ते हैं और क्रिश्चियनिटी को पढ़ते हैं उनका ऑब्जेक्टिव है बाय हुक और
बाय क्रुक पूरे संसार को इस्लामा इज करना या क्रिश्चयनाइजेशन को उसका एक टूल बना लिया है और मार्क्सिस्ट उसमें उनके विलिंग पार्टनर्स हैं दैट इज व्हाई इट इज हैपनिंग बिल्कुल सही कहा नीरा जी हम लोग एक ऐसे देश में ऐसे एक विश्व में रहते हैं कि इस्लाम के बारे में अगर कुछ भी बोले नॉर्मली तो लोग बोलने बोलने से ही डरते हैं तो अगर बोले तो लगता है कि कोई कहीं ऐसा ना हो कि हमारे खिलाफ कोई फतवा जारी हो जाए या सतन से जुदा ये हमारे ऊपर जो है यह फतवा दे दिया जाए लेकिन
आप मैंने देखा कि एक बहुत उन कम लोगों में से हैं और एक यूटर है जो अपनी वीडियोस में खुलकर इस्लाम की उसकी सच्चाई की चर्चा करते हैं आपको कभी डर नहीं लगता इससे जी देखिए जैसी आप बात कर रहे हैं थ्रेट्स वैसे आए भी हैं जो सर काट के लाएगा 10 लाख रुप इनाम देंगे ऐसे ऐसी घटनाए हुई भी है तो लेकिन मुझे भी पता था कि ऐसा होगा तो करें या ना करें क्वेश्चन यह था लेकिन मुझे लगता है कि अगर एक शिक्षक होते हुए मैं झूठ बोलता हूं तो फिर मैं एक शिक्षक
नहीं हूं तो मेरा दायित्व बनता सच बताना और दूसरी चीज यह है कि हमें यह जो समाज मिला है उसके कारण हमारे ऊपर हमारे ऋषियों का ऋण है जो तीन ऋण बताए जाते हैं उनमें से ऋषि ऋण है जो चुकाना हमें चाहिए अगर सारे ऐसे डर जाएंगे कोई बात ही नहीं करेगा तो हम ऋण चुका नहीं पाएंगे तो इसलिए मुझे लगा कि मैं इस पर बात करूंगा और मुझे जब लोग देखेंगे तो और बात करेंगे और अब आप देखें कई लोग आपको बात करते दिखाई देंगे बिल्कुल वो तो आपने ऐसी लॉ जगाई है जी इसलिए
पूछ रहा हूं कि अभी हाल में ही दो साल पहले की बात है नुपुर शर्मा ने कुछ गलत तो कहा नहीं था उसने तो जो सत्य है जो लिखा है वो उसको कोट किया था उसने और आप देखिए कि कितना बबाल किया इन लोगों ने दो चीजें आप देखिए और मैं आपसे जानना चाहता हूं इन्होंने तो जो प्रतिक्रिया की वो तो स्वाभाविक इनकी प्रकृति थी सर तन से जुदा कर ये वो दुनिया भर का कन्हैया लाल का सिर काट दिया है ना दुनिया भर के और कई लोगों को मार डाला बड़ी बर्बरता से लेकिन हैरानी
यह है कि जो हिंदू लीडरशिप है जो हिंदू समाज है जो हिंदू संगठन है जो हिंदू धर्म गुरु है जिनकी बड़े-बड़े जिनकी संस्थाएं हैं संगठन है बहुत बड़े-बड़े ऑर्गेनाइजेशन है यह कोई खड़ा नहीं हुआ उसके लिए नपर शर्मा के लिए ये ये क्या वजह है पहले फिल्में आती थी आपको ध्यान है मुंबई की जिसमें हफ्ता वसूली की जाती थी तो उसमें जो विलन होता था वह हमेशा क्या बताता था कि मैंने अपने डर से यहां पर कब्जा किया मेहनत लगती है डर से लोगों में खौफ बिठा के फिर उनसे हफ्ता वसूली की जाती है यह
जो ऑर्गेनाइज रिलीजन है यह यही काम करते आए हैं कि हमने लोगों को डरा के रखना है सड़कों पर आएंगे गुंडागर्दी करेंगे और लोग डर जाएंगे एज अ रिजल्ट इनको एक स्ट्रीट वीटो मिली हुई थी कि हम ऐसा करेंगे और समाज हमारे सामने झुकेगा दूसरा क्या हुआ यह पिछले 75 साल में जो हमारी ब्रेन वाशिंग की गई सरकारों ने भी की क्योंकि आप याद कीजिए ना हमेशा आपको एक स्टैंडर्ड डायलॉग सुनने को क्या मिलता था कि तो भटके हुए नौजवान है आतंकवादी नहीं है मजहब तो कभी सिखाता ही नहीं यह इस्लाम के नाम पर करें
इस्लाम नहीं है तो इस तरह से ब्रेन है नो रिलीजन हां टेरर हैज नो रिलीजन बकुल ठीक है तो ये पांच छ जुमले थे अब ये टिपिकल प्रोपेगेंडा नी होती है कि आम एक व्यक्ति जो है वह इंटेलेक्चुअली लेजी होता है तामसिक होती है उसकी प्रवृत्ति कि अपने निजी स्वार्थों के बाहर सोचना नहीं चाहता उसे आप पांच छह जुमले दे दीजिए तो उन्हीं के दायरे में सोचता है कि हां यार ऐसा कोई मजहब थोड़ी हो सकता है जो मारने की बात करेगा तो एक तो यह ब्रेन वाशिंग से हमारा जो पुरुषत्व है वह धीरे-धीरे खत्म
किया गया फिर एग्जांपल सेट किए जाते हैं जैसे कश्मीर में जो किया गया कि एक को मार दो तो तो 10 डर जाएंगे दो को मार दो 100 डर जाएंगे तो ये डर से इन्होंने इस तरह का साम्राज्य खड़ा करना शुरू किया और स्टेट ने क्या किया दिवाली की रात को शंकराचार्य को पूजा करते हु समय पुलिस वाले ब ब्रूटली उठा के लेकर जाते हैं तो मैसेज बहुत दूर तक जाता है उसका लोगों में डर बैठेगा स्वाभाविक है लेकिन आपकी बात बिल्कुल ठीक है कि जो सो कॉल्ड नेता है जो हिंदू लीडरशिप है लीडरशिप को
थोड़ी डरना चाहिए बिल्कुल जो धर्म गुरु है उसे छोड़ डरना चाहिए बिल्कुल ये हैरानी ये होती है देख के कि आप एब्सलूट मेजॉरिटी में है एक हिंदू नेशनलिज्म की बात की आपने और आप पावर में है आप लीडर है इतनी बड़ी आपकी लीडरशिप है पूरी सरकार है पूरी व्यवस्था है आप क्यों डर गए और जो हिंदू धर्म गुरु थे वो क्यों डर गए तो यह वही बताया ना कि डर बिठाया जाता है अंदर और अगर हम अपने पूर्वजों की ओर नहीं देखते हैं तो हम उस डर से पराजित हो जाते हैं क्योंकि आप देखि ना
हमारी तो इतनी बड़ी मैंने जब इतिहास पढ़ना शुरू किया तो मैंने देखा कि कैसे एक एक आदमी जो लड़ा था 100 100 से वह क्या सोच के लड़ा होगा बिल्कुल कि जिस समय औरंगजेब भेजता था कि जाओ उस मंदिर को गिरा के आओ अब इनकी सेना जाती थी वहां 20 राजपूत बैठे होते थे उनके पास वेपन भी ज्यादा नहीं होते थे लेकिन वो एक एक अंत तक लड़ता था चार को मार के मर जाता आता था तो मैंने सोचा यार यह कैसे लोग थे और हम इतने कायर कैसे हो गए मैं आपको एग्जांपल शेयर करता
हूं मेरी वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के थ्रू क्लासेस चलती थी फिजिक्स की पंजाब में चल रही थी जिन दिनों साहिबजादे दिवस आता उन दिनों क्लास चल रही थी तो कुछ बच्चे लेट आए क्लास में मैंने कारण पूछा बोले सर वह जोड़ मेला चल रहा था तो इसके कारण हमारी बस रुक गई तो हम लेट पहुंचे तो उनका एक्सप्रेशन ऐसा था कि क्या इन हमारे लिए तो मैंने कहा तुम्हें इस दिन का सिग्निफिकेंट पता है उनका एटीट्यूड था जैसे दे लीस्ट बॉदर तो मैंने उनसे क्वेश्चन पूछा मैंने कहा तुम 40 बच्चे इस क्लास में बैठे हो अगर इस
समय चार टेररिस्ट एक के 47 लेके इस कमरे में एंटर कर जाए और तुम्हें बोले कि तुम्हारी यह छोटी उंगली काटेंगे नहीं तो मुसलमान बन जाओ तो क्या करोगे 40 में से 39 लोगों ने बोला हम मुसलमान बन जाएंगे यह पंजाब की बात कर रहा हूं मैं आपसे एक ने नहीं बोला मैंने उसे खड़ा किया मैंने कहा मैं अगले स्टेप पर चलता हूं वो बोलते हम तेरा एक हाथ काट देंगे तब तू क्या करेगा बोला सर फिर तो मैं बन जाऊंगा मैंने कहा यही फर्क है तुम में और उन साहिबजादे वह दीवार में चिन गए
और ट एट मी थिंकिंग कि हमने तप करना छोड़ दिया हमने ए सोसाइटी अब हमें तपस्या नहीं ही तप नहीं करते हम बच्चे को एसी चाहिए वह बाहर जाकर काम नहीं कर सकता जो हमारे पूर्वजों में तप था ना वह हम शायद खो चुके हैं इसलिए हम इतने कायर बन गए हैं अगर हम अपने पूर्वजों के काम को याद रखेंगे और यह सोचेंगे कि हमने यह जो शिवाजी महाराज का चित्र लगा रखा है उन्होंने किया क्या था वीर सावरकर का चित्र लगाते हैं तो उन्होंने क्या किया था वो अगर हमें याद रहेगा तब हम उनसे
इंस्पायर हो सकते हैं कि वो कर सकते थे तो हम उनका तो कर सकते हैं य यह कमी है आज बहुत सही क इसीलिए इतिहास की किताबों से यह जो महान योद्धा हुए जो इतने शूरवीर योद्धा थे हमारे जो रियल हीरोस थे उनका इसीलिए उनका समूचा उनका कहीं भी वर्णन मिलता ही नहीं है हटा ही दिया है कि कहीं इनको ना रोल मॉडल मान ले आने वाली पीढ़ि इसीलिए ये इवेडर्स का आक्रांता का महिमा मंडन किया गया जी बिल्कुल सही कहा आपने स्वतंत्रता के बाद ये करिकुलम की पुस्तकें आई और भी जो पुस्तकें प्रकाशित हुई
उसमें वैदिक कालीन इतिहास को भी बहुत तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत किया गया है इसका क्या कारण यही वजह है कि इसका क्या कारण है कि एगजैक्टली वही है ना देखिए आपने किसी भी समाज को अगर कन्वर्ट करना है अल्टीमेट ऑब्जेक्टिव कन्वर्ट करना है उनका तो आप तभी कन्वर्ट कर पाएंगे जब उसे अपने आप पर विश्वास नहीं होगा आप उसका कॉन्फिडेंस कैसे खींच कैसे लूज करेंगे आप उसे बताएंगे कि तू घटिया आदमी है तेरा बाप भी घटिया था तेरा दादा भी घटिया था तुम्हारा सारी परंपरा घटिया है यहां तेरे पास य ऑप्शन है दिस इज अ
बेटर ऑप्शन तब वो कन्वर्ट होगा बहुत सही कहा आपने मैं आपको एक अपना अनुभव बताऊ दो तीन साल पहले की बात है दो साल पहले की कि मैं कुछ बच्चों से इंटरेक्ट कर रहा था मतलब दवी 11वीं 12वीं के और ऐसे ही मैंने पूछा भारत में बताओ कि कौन-कौन सी बहुत अद्भुत महान हेरिटेज साइट्स है कौन से वास्तुकला के बड़े उत्कृष्ट उदाहरण है कौन से ऐसे मंदिर हैं आप विश्वास नहीं करेंगे कि उन बच्चों को पता ही नहीं था और किसी ने बस बोला तो ताजमहल बोला है तो मैंने पूछा ऐसे ही फिर हमने पूछा
कि आप लोगों को पता है कि बृहदेश्वर कहां पर है रावती श्वर कहां पर है आप लोगों को पता है जैसे हो स रीशव मंदिर कहां पर है ऐसे मैंने कुछ मंदिरों के नाम लेने शुरू किए उनको कोई आईडिया नहीं था तो मैंने सोचा कि देखिए इस महान देश में इतने अद्भुत महान राजा हुए ऐसे ऐसे साम्राज्य हुए ऐसी उनकी संकल्प शक्ति थी कि कई कई पीढ़ियों तक वह मंदिरों का निर्माण चलता रहा है ऐसी स्थापत्य कला थी उस युग में 1000 साल पहले ऐसे मंदिरों को बनाने आप सोचिए उनका उनकी संकल्प शक्ति देखिए असंभव
है आज नहीं कोई उसको वैसा संकल्प दे सकता है और वो आज भी है हम और किसी को कुछ पता ही नहीं है प्राम इज अबाउट डेडीकेटिंग टू दबाई आवर रिच कल्चरल हेरिटेज द एसेंस ऑफ भारत वी आर ब्रिंगिंग टू लाइफ द एकज ऑफ आवर ग्लोरियस पास्ट वी नीड ऑर्गेनाइजेशंस लाइक प्रयम इट इज ओल्ड एज वेल एज द न्यू राइज प्राम हिंदू के गौरव की गाथा गाता है 60 साल में हमने जो खोया विरासत के रूप में संस्कृति के रूप में उसको वापस लाने का काम कर रहे हैं आवर मिशन गोज बियोंड क्रिएटिंग कंटेंट वी
आर स्पार्किंग कल्चरल रेसेंस प्रच एक उत्तिष्ठत का नाद है हिंदू समाज को जोड़ने के लिए और सच्चाई दिखाने का काम प्रच द्वारा हो रहा है कई दशकों की एक आवश्यकता को प्राम पूरा कर रहा है पम इ पुटिंग आउट ए एन अर्जेंट सिविलाइजेशन इंपरेटिव गुलामी की मानसिकता अगर कहीं पर भी अंदर धसी हुई हो ना उसको उखाड़ फेंकने का काम प्राम का कंटेंट करता है लंचिंग द वर्ल्ड फर्स्ट हिंदू ओटीटी प्लेटफॉर्म इ जस्ट द बिगनिंग वी हैव मच मोर टू अचीव पूरा जनजन सत्य से तथ्य से और यथार्थ से परिचित होगा आपका यह प्रयत्न ईश्वर
की आराधना ही है काउंटर नरेट का आंदोलन आरंभ हो चुका है प्रम इ डूइंग एन एक्सीलेंट जॉप टू गव यू नॉलेज च यू डोंट गट इन स्कू आई एसल ल इट आई एमरी है टू बी पाट ऑफ द प्रम फैमिली आई एक्सटेंड माय बेस्ट विशेस टू यू एंड योर एनटायर टीम एक बहुत बड़ी सनातन की सेवा हो रही है उसके लिए मैं हृदय से प्राम का अभिनंदन करता हूं योर सपोर्ट कैन टर्न दिस विजन इनटू रियलिटी प्रम प्रम प्रम प्राम प्राम प्राम इ डूइंग वेरी वेरी गुड जॉब सनातनी नीड प्राम प आर गोइंग बैक टू
देर रूट्स इट्स इंपोर्टेंट फॉर आवर कंट्री आर्म योरसेल्फ विथ द नॉलेज इट्स ऑलमोस्ट लाइक अ मूवमेंट दिस इज अ विशनरी एवर प्राम को सफलता केलिए साधुवाद अमेजिंग जॉब स्ट्रांग्ली रिकमेंड डू योर कंट्रीब्यूशन सपोर्ट देम सब्सक्राइब देम बाय डोनेटिंग टू प्रियम यू आर जस्ट नॉट [संगीत] गिविंग यू आर इन्वेस्टिंग इन आवर कल्चर आवर फ्यूचर एंड आवर चिल्ड्रन रिचिंग आउट टू द पीपल विद द रिजल्ट्स ऑफ द रिसर्च आई विश देम ऑल द वेरी बेस्ट जॉइन अस ऑन दिस जर्नी डोनेट टुडे एंड बिकम पार्ट ऑफ इट टाइमलेस लेगासी किताबें जो आपने कहा ना कि एजुकेशन एकेडमिका ने
इसको कवर किया बताया ना कभी मीडिया और फिल्मों ने कभी बताया यह भी सिर्फ सबन करते रहे जी तो मीडिया के ऊपर भी कम्युनिस्ट पूरा अपना नियंत्रण बना के रखे रहे हैं कम्युनिस्ट मुझे लगता है कि हम कभी-कभी उन्हें ओवर एजरेट कर देते हैं कि कम्युनिस्टों ने किया एक्चुअली किया तो मुस्लिम्स ने या इस्लामिस्ट ने ही है जिहादियों नेही किया है सिर्फ वो जो फ्रंट है वह कम्युनिस्ट बन जाते हैं अदर वाइज जैसे इरफान हबीब का एग्जांपल है अगर हिस्ट्री में तो वो कहने को कम्युनिस्ट है लेकिन सारा काम तो इस्लाम का ही करता है
सेम जो फिल्म इंडस्ट्री रही है आप देखिए अगर आप यात्रा देखे 1947 से उस समय यूसुफ खान को दिलीप कुमार बनक आना पड़ता है क्योंकि उन्हें पता था कि हम वह लोग हैं जिन्होंने इस देश का विभाजन किया है और इस देश के लोगों में रोश है क्योंकि उस समय तक शत्रु बोध तो जीवित था क्योंकि ताजा-ताजा विभाजन होकर हटा था तो उन्होंने स्ट्रेटेजी अपनी ली हुई थी हर मूवी मुझे याद है हम छोटे-छोटे थे जब ब्लॉकबस्टर मूवीज रिलीज होनी होती थी स्टार स्टडीड मूवीज तो व दिवाली पर रिलीज होती थी अब क्या माहौल बन
गया कि ईद पर फिल्म रिलीज हो रही है हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि इतनी ब्लेट एट हो जाएगी कि ईद पर मूवी रिलीज हो सकती होगी और अब उल्टा करके दिखाने लग गए कि जो एर जो दिलीप था वो ए आर रहमान बन गया और ये जानबूझ के मीडिया के सामने बताया जाता ऐसा हो रहा है तो मूवीज ने तो बहुत ज्यादा य काम किया है फिल्में डेडीकेटेडली बनाई गई इस्लाम को ग्लोरिफाई करने के लिए तो ये एक सोची समझी एक एक साजिश थी षड्यंत्र रहा शुरू से कि इतिहास के साथ ऐसे
छेड़छाड़ करो फिल्मों के साथ ऐसे करो करिकुलम ऐसा बनाओ और शिक्षा मंत्री जानबूझ के वैसे ही रखे गए हैं सेंसर बोर्ड वैसा रखा गया सेंसर बोर्ड वैसा रखा गया पिछले 10 वर्षों में क्या लगता है कि क्या चेंज अब तो शिक्षा मंत्री भी अब हिंदू हैं रहे हैं जो भी रहे इन्होंने कुछ कंस्ट्रक्टिव कदम उठाया आपको ल आप शिक्षक हैं आप बहुत बेहतर जानते होंगे देखिए जहां तक तो शिक्षा का प्रश्न है तो मेरा इंटरेस्ट है हिस्ट्री बुक्स में हिस्ट्री बुक्स में अभी तक एनसीआरटी ने जो चेंजेज किए मैंने आपको बताया कि बिल्कुल मार्जिन प
कुछ ऐड कर दिया इस तरह का 24 पर पैच वर्क किया है जो कि 10 वर्षों में इससे बहुत ज्यादा काम किया जा सकता था तो व नहीं किया अभी पीछे राज्यसभा ने एक स्टैंडिंग कमेटी बनाई थी जिसमें उन्होंने पूछा था लोगों से कि बताइए आप क्या चेंजेज चाहते हैं तो वहां पर जो उसके चेयरमैन थे सहस्र बुद्धे मैंने सहस्र बुद्धे थे मेरी भी भट हुई थी उनसे और हमने उन्हें व दिए थे कि यह ये चेंजेज हम चाहते हैं तो अभी तक तो हम वेट कर रहे हैं अब सुना है कि कमेटी बनी है
जो बुक्स लिख रही है लेकिन कब आती हैं उसका अभी तक मुझे कोई आईडिया नहीं है तो जो हमारे न सोर्सेस है कमेटी बनी है उनका कहना है कि कमेटी बनी है लेकिन जो सच्चे शिक्षक हैं आपकी तरह जो चाहते हैं कि सच्चाई बताई जाए उनकी कुछ नहीं चल रही वहां पे और वहां भी व इस्लामिस्ट लेफ्टिनेंट है जो एक मुखौटा बदल के वहां पर बैठ गया और एक्चुअली वो उन्हीं चीजों को थोड़ा सा और घुमा फिरा के लिख रहा है और यह लोग जो हैं जो लोग प्रणेता है जो चाहते हैं कि सच्चा इतिहास
आए जो जो अपने अपने गौरव की बात उसमें लिखी जाए अपने योद्धाओं के विषय में बता कितने महान राजा कितने महान साम्राज्य हुए इसके विषय में बताए इसके विषय में और क्या हमारे अपने पारंपरिक जो ज्ञान परंपरा है हमने क्या कंट्रीब्यूशन किया है पूरे विश्व में हम किन किन चीजों के हम आविष्कारक रहे हैं जनक रहे हैं हमारे पास कितना उत्कृष्ट और उन्नत और विकसित ज्ञान विज्ञान था इसका वह एक लाइन एक सेंटेंस लिखने नहीं दे रहे उन लोग को यह एक बहुत बड़ी विडंबना है जो मुझे मालूम और यह बहुत विश्वस्त और बहुत ही
हाईली प्लेड सोर्सेस जो बेचारे लगे हैं हमारे सच्चाई के सत्य के हित में सत्य के पक्ष में अपनी बात रखने के लिए उनका कहना है कि यह अनफॉर्चूनेटली यह जो सरकार है यह आइडेंटिफिकेशन से ही यूपीए वन आई थी उन्हें पता था एजुकेशन की कितनी पावर है और उन्होंने एक साल के अंदर-अंदर करिकुलम चेंज करके किताबें छपवा दी अब आप उसका इंपैक्ट नोटिस करके देखिए कि आज हम हैं 2024 में 17 18 वर्ष हो चुके हैं इन किताबों को चलते हुए एक वर्ष में एक करोड़ बच्चा वह किताबें पढ़ता तो अगर आप 18 वर्ष की
बात करें तो आपने 18 करोड़ ऐसे लोग निकाल दिए जो उस जहरीली किताब को पढ़ के निकल रहे हैं और अभी भी अगर आप अपने शुद्र के कारण अपनी छोटी सोच के कारण उन लोगों को नहीं लेकर आते हैं जो सच्चा इतिहास लिख सकते हैं जिन्हें लिखना चाहिए तो यह तो बहुत बड़े दुर्भाग्य की बात होगी और मुझे लगता है अक्षम्य अपराध होगा नहीं करना चाहिए बिल्कुल सही कहा आपने पूरी सबकी उम्मीद रहती है कि प्रधानमंत्री ही सब कुछ करेंगे मोदी यह कर देंगे अरे मोदी क्या क्या करेंगे पूरा एक सिस्टम ऑफ गवर्नेंस है पूरी
कैबिनेट कैबिनेट के अंदर ब्यूरोक्रेसी है सबको अपना कर्तव्य समझ के करना पड़ेगा लेकिन मैं यह बात कह रहा हूं कि यह बात उठनी चाहिए कि यह जो न्यू एजुकेशन पॉलिसी उसकी कमेटी है एक तरीके से आई वश है यह वास्तविक रूप से कोई सुधार नहीं कर पाएगी ना करने जा रही है और ना जो लोग कर सकते हैं उनको यह करने दे रही है एक सेंटेंस नहीं डालने दे रही है जोक सच्चा इतिहास है जिन जिन क्षेत्रों में सैकड़ों साल से हजारों साल से भारत उत्कृष्ट रहा है श्रेष्ठ रहा है आविष्कारक रहा है जिन जिन
ज्ञान विज्ञान दर्शन उसके विषय में वह एक लाइन डालने को तैयार नहीं है उनकी बात को एकदम वह बोलते हैं साफ मना कर देते हैं कि नहीं य बिल्कुल नहीं डालेंगे तो यह यह बहुत चिंता का विषय है जी यह जो पिछले 10 साल बीते हैं मैं बड़े क्लोज ऑब्जर्व कर रहा था कि क्या हो रहा है पहले अब ब्यूरोक्रेसी कैसे काम करती है या जिन लोगों को समझ में नहीं होती सिस्टम की कि कैसे काम करता है या कैसे सब्वर्ट करना है पहले इन्हें झुनझुना पकड़ा दिया कि आप अगर किताब बदलनी है तो पहले
आपको न्यू एजुकेशन पॉलिसी लानी पड़ेगी फिर एनसीएफ नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क बनेगा उसके बाद किताबें बदली जाएंगी ऐसा कोई लॉ नहीं है ऐसा कोई कानून नहीं है ऐसा कोई नियम नहीं है कि ऐसा करना आवश्यक होता है जो पहले एजुकेशन पॉलिसी चल रही थी ऑन पेपर वो बहुत अच्छी पॉलिसी थी उसमें कोई चेंज करने की आपको आवश्यकता नहीं थी बल्कि 2014 में सरकार आती है आप दो साल लगाते कि हम कोई नई पॉलिसी नहीं ला रहे जो पिछली सरकार की पॉलिसी वही चल रही है आप प कोई उंगली भी नहीं उठा सकता कि आप पॉलिसी चेंज
कर रहे हैं करिकुलम फ्रेमवर्क में सारे अच्छे-अच्छे शब्द होते हैं वी हैव टू बी सेकुलर वी हैव टू बी इंक्लूसिव आप सारा वही चीज रख के मेन चीज क्या इफेक्ट करती है जो किताब का कंटेंट होता है जो उसका मटेरियल आपने डाला है जो बच्चा पढ़ रहा है उसका इंपैक्ट होता है आपको वह चेंज करना था और वह चेंज करने के लिए दो साल से ज्यादा का समय लगता ही नहीं है जिसके लिए 10 साल इन्होंने इस चक्कर में लगा दिए कि पहले एजुकेशन पॉलिसी बनेगी फिर एनसीएफ बनेगा व वास नॉट इवन रिक्वायर्ड तो दिस
इज हाउ जो लोग वहां पर जिनके इंटरेस्ट होते हैं व कैसे सिस्टम को सबवर्ड करते हैं आपने ठीक कहा अकेले मोदी जी सारे डिपार्टमेंट्स हैंडल नहीं कर सकते इसके लिए ऐसे लोग चाहिए जो सच में आइडेंटिफिकेशन पर ब्यूरोक्रेट है या कोई कोटरी है जो हमें बेवकूफ बना रही है उन्हें कैसे ओवर रूल करके अपना काम करवाना है जो आपने अभी बोला कि अर्जुन सिंह वहां बैठ गया था करवाने के लिए ऐसा आदमी चाहिए जो वहां बैठा हो कि करो काम हमने ये काम करके देना है बस काम कैसे नहीं होगा बिल्कुल नहीं इसके बारे में
एक अवेयरनेस और जागृति लाना बहुत आवश्यक है बहुत तेजी से समय तो बीतता ही जा रहा है आप सोचिए 10 साल में कितना समय बीत गया है आज से 10 साल पहले आज जो अगर पॉलिटिकली भी अगर आप देखें पॉलिटिकल दृष्टि से देखें तो आज जो 18 साल का बालक है जो वोट देने का अधिकार जिसको मिला है आज से 10 10 वर्ष पहले वह 8 साल का था और अगर वह 10 साल अगर सही इतिहास से अगर सही अपने देश की और संस्कृति के प्रति गौरव की पुस्तकों को पढ़कर अगर वह आता तो वह
सच्चा एक देशभक्त होता है और दूसरी बात यह है कि वो इन जो इनके एजेंडा है फेक नैरेटिव हैले के इस्लामिस्ट के इनका शिकार नहीं होता जो वो किस्ट एजेंडा बहुत तेजी से फैल रहा है वकम हमारे देश में जोक बहुत चिंता का विषय है उस उसका शिकार नहीं होता क्योंकि वो उसके इनोकुलेट हो गया होता उसके प्रति तो यह हमने बहुत बड़ा एक समय गवा दिया इस ना केवल हमने गवा दिया बल्कि हमने उन बच्चों को और वल्नरेबल बना दिया है और अभी इसमें भी जो आपने वोक जम बोला उससे मुझे जो दूसरा फैक्टर
ध्यान में आ रहा है जहां पर बहुत बड़ी गलती पिछले 10 वर्षों में वो क्या है कि जो अमेरिकन मॉडल हम इंपोर्ट कर रहे हैं ये जो एलजीबीटी क्य प्लस प्लस प्लस प्लस जो सारा चल रहा है यह सारे का सारा वहां से इंपोर्ट होके आ रहा है अब उसमें होता क्या है कि हमारे आज भी मैक्सिमम ब्यूरोक्रेट्स और लीडरशिप वेस्ट को अपने से ऊपर देखती है जो वेस्ट करता है उसका अंधानुकरण करेंगे क्योंकि वह शब्दों का चयन ऐसा करते हैं कि लगता है कि सारा कुछ इंक्लूसिव चाहिए इक्विटेबल होना चाहिए चार पांच शब्द ऐसे
सुना देते हैं तो अपने लोग जो ज्यादा अध्ययन नहीं करते वह इनफीरियर कंपलेक्स के मारे उनको फॉलो करते हैं ब्लाइंड फॉलो करते हैं कि वी आर आल्सो वेरी ब्रॉड माइंडेड हम तो कभी संकुचित थे ही नहीं हम तो ऐसा स्वीकार करते हैं उसका परिणाम क्या होता है अब हमारे यहां पहले मेल और फीमेल की ऑप्शन होती थी फॉर्म भरने में अब साथ में ट्रांसजेंडर जुड़ गया देखिए कितने शूड मार्केटिंग की इन्होंने जो किन्नर समाज है हमारा देश ऐसा है हमारा समाज ऐसा है उनका पूरा सम्मान करता है उनका अपना एक इकोसिस्टम बना है कि उन्हें
अपनी पूरे सम्मान से जीने का अधिकार मिलता है वो वैसे ही रहते हैं और शताब्दियों से रह रहे हैं व आम व्यक्ति जो आज सड़क पे है उसे जब आप ट्रांसजेंडर बोलते हैं तो वो सोचता है कि किन्नर की बात हो रही है वो हमने वहां पर जोड़ दिया जबकि जो अमेरिकन कांसेप्ट है जो वेस्ट का कांसेप्ट है ट्रांसजेंडर का वो क्या है इतना हास्य स्पद है कि लड़के के शरीर में बैठा व सोचता है कि मैं लड़की हूं लड़की का शरीर है और वह सोचती है कि मैं लड़का हूं अब यह बहुत सारे बच्चों
के जीवन में एक पासिंग फेज आता है ऐसा कि जब वो बच्चा अपने शरीर के बारे में थोड़ा सा कंफ्यूजन है कुछ हार्मोनल चेंजेज आ रहे हैं तो किसी के मन में ऐसी बात उठ सकती है 5 सा 10 पर बच्चों के मन में ऐसी बात उठ सकती है लेकिन विद पैसेज ऑफ टाइम वह खत्म हो जाती है लेकिन जो यह लेफ्ट के आईडियोलॉग हैं उन्होंने वेस्ट में ट्रांसजेंडरिज्म को फ्रीज कर दिया कि 10 सा का बच्चा है उसे पहले तो बताएंगे कि हो सकता है तू लड़की हो फिर अगर उसने एक बार बोल दिया
तो उसे रिइंफोर्स करते रहेंगे और फिर अल्टीमेटली उसका सर्जरी कराक उसके शरीर का सत्यानाश कर देते हैं वह वहां का ट्रांसजेंडर है अब ट्रांसजेंडर यहां पर फॉर्म में डलवा दिया अब उसके पीछे वो सारे का सारा जो एलजीबीटी क्य प्लस सारी टर्मिनोलॉजी है उसे पुश किया जा रहा है और छोटे-छोटे बच्चों को वही चीज सिखाई जा रही है जिससे कि उनके शरीर का नुकसान किया जा रहा है एक तो यह फॉर्म में गलती की हमने ट्रांसजेंडर को डाल के दूसरा हमने क्या किया कि जो आयुष्मान भारत वाली जो स्कीम है उसमें यह जो सर्जरीज की
जा रही है उनके लिए 5 लाख का प्रोविजन करके दिया हुआ है व्हिच मींस गवर्नमेंट अपने सिटीजंस का शरीर खराब करने के लिए पैसे दे रही है फंडिंग कर रही है उसकी अब यह डेफिनेटली मोदी जी ने तो किया नहीं होगा यह उन्होंने जिसे भी काम डेलीगेट किया होगा वह कोई ऐसा ब्यूरोक्रेट या कोई ऐसा नेता होगा जिस की अपनी बुद्धि नहीं थी कि व अपना विवेक लगाता कि आज जो काम हम भारत में शुरू कर रहे हैं वोह 50 साल पहले अमेरिका में शुरू हुआ था और आज अमेरिका और कनाडा कितनी घटिया स्थिति में
पहुंच गए हैं वो हम सब देख रहे हैं किसी से छिपा हुआ नहीं है तो फेल्ड मॉडल को ला रहे हो उसे आप आयुष्यमान भारत में दे रहे हो और अभी रिसेंटली क्या किया है आईएएस ऑफिसर्स की जो ट्रेनिंग अकेडमी है मसूरी में वहां जो ट्रेनिंग मॉड्यूल है उसमें डाला गया है ये जेंडर सेंसिट इजेशन के नाम प से डाल रहे हैं तो यह एक और बहुत बड़ा रेड फ्लैग है जो मुझे लगता है कि हमारे पॉलिसी मेकर्स को बहुत ध्यान से चलना चाहिए नहीं तो आगे आने वाली पीढ़ियां थूक इनके नाम प बहुत सही
कहा आपने जो हालत है इस समय वेस्ट की आपने जैसा कहा जाए अमेरिका हो कनाडा हो इवन यूरोप हो यूरोप तो रेडी गन यू नो इट इ ऑलमोस्ट कोलप न द व लैप्स और वो जो इनका एजेंडा था ना कि वी विल मेक द सोसाइटीज एंड कंट्री स्टंक यह उसी कगार पर आ गई है चीजें और आप सोचिए कि हम लोग उन्हीं को अंधे होकर उनका अनुसरण कर रहे हैं यह बड़ी यह बहुत हैरानी की बात है दूसरी बात नीर जी एस फिल्म मेकर जो मुझे लगता है कि फिल्मों पे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पे सोशल मीडिया
पे कोई कंट्रोल नहीं है सरकार का आप बॉलीवुड की कोई फिल्म उठा के देखिए netfx3 सेंसर ब डिफंक्ट हैली कोई काम नहीं कर रहे और यह जितने सोशल मीडिया है और जितना भी ओटीटी प्लेटफॉर्म है इस पर तो कोई सेंसरशिप है ही नहीं आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं और किसी भी समाज का सत्यानाश करने के लिए यह डिजाइन किए गए हैं जो प्रोग्राम आ रहे हैं जिनकी आप बात कर रहे हैं आप याद म मैं अपना बचपन याद करता हूं या जब हम कॉलेज में थे अगर हम किसी लड़की के सामने है लड़के की
हिम्मत नहीं होती थी कि व गाली दे दे वह लड़की उस लड़के से कभी बात नहीं करेगी पास बैठना तो दूर की बात है प्लस लड़कों में शर्म होती थी कि यार लड़कियों के सामने हम गाली नहीं दे सकते लेकिन आज देखिए क्या स्थिति है लड़कियां स्वयं मां बहन की गालियां देती हुए आपको दिख जाती है और व इस पर गर्व महसूस कर रही है तो यह 25 साल में इतना बड़ा चेंज कैसे आ गया हमने उसे पहले पुश किया एक्सेप्टेबल बनाया फिर उसे ग्लोरिफाई कर दिया आज वो ग्लोरिफिकेशन तक पहु बहुत सही कहा आपने
गाली गलौच जो है जानबूझ के फिल्मों में डाला जा रहा है मीडिया में डाला जा रहा है इस तरीके के कंटेंट में और से ग्लोरिफाई कर रहे हैं उसको सेम ये एलजीबीटी क्य भी है कि इनिशियली उसे पहले पुश करो फिर उसे एक्सेप्टेबल बनाओ और अब उसकी ग्लोरिफिकेशन हो रही है बहुत सही कहा आपने नी जी हमारे जो हम लोग बात कर रहे थे पाठ्य क्रम की जो पुस्तकें हैं उसमें क्या ऐसा भी है कि इस्लाम को और ईसाई धर्म को बड़ा एक प्रॉमिनेंटली उसको प्लेस किया गया है और जो यहां के बहुसंख्यक हिंदू हैं
हिंदू धर्म को की बात ही नहीं है उसमें हां इसमें तो मैं एक जनरली क खुला चैलेंज देता हूं कि जो 10 किताबें हैं इनमें से मुझे एक ऐसी लाइन निकाल के दिखा दो जहां पर सनातन धर्म को पॉजिटिव लाइट में दिखाया जा रहा हो एक सेंटेंस नहीं मिलेगा आपको ऑन द अदर हैंड कुरान और बाइबल दोनों घृणा से भरी हुई है दोनों बोलती हैं कि महिलाएं पुरुषों से इनफीरियर होती हैं उन्हें सप्रे किया जाना चाहिए सप्रे किया जाता है इस तरह की आयतें उनमें भरी हुई है लेकिन इन दोनों का केवल एक-एक वर्ष एकएक
आयत डाली गई है छठी क्लास की जो किताब है उसमें जहां पर इस्लाम को इंट्रोड्यूस किया है कुरान की केवल एक आयत डाली है जहां बाइबल को इंट्रोड्यूस किया बाइबल की केवल एक वर्स डाली है और उनसे मैसेज ये जाता है कि ये तो बहुत क्वालिटी की बात करते हैं जबकि जहां पर सनातन धर्म की बात आ रही है जैसे आपने वैदिक काल की बात की थी वेदों के बारे में क्या बताया जा रहा है कि उस समय जो लोग थे पानी के लिए लड़ते थे और जमीन के लिए लड़ते थे और लोगों को पकड़
के गुलाम बनाने के लिए लड़ते थे जबकि एक्चुअल में हमारे देश की जो परंपरा रही है एक तो हमारे यहां तो पानी की कभी कमी रही नहीं तो इसलिए पानी के स्रोतों के लिए लड़ना तो वैसे ही हास्यास्पद लगता है यह सारा जो डेजर्ट के कल्चर वहां का जो जितनी कमी है वह इन्होंने वैदिक काल पर थोप दी है गुलाम बनाने की प्रथा हमारे यहां कभी नहीं रही जबकि बाइबल और कुरान दोनों गुलाम प्रथा को ग्लोरिफाई करती हैं उसको कंडोनमेंट वं क्लास की किताब में क्या दिखाने की कोशिश की गई है कि यहां पर जो
सिस्टम था वहां पर तो लोगों को सप्रे किया जाता था लोगों को पढ़ने नहीं दिया जाता था लेकिन जैसे क्रिश्चियन मिशनरीज आए उनके स्कूल खुले तो वहां पर जो लोअर कास्ट थे उन्हें पढ़ने का मौका मिला और फिर वह उठकर उन्होंने रिवोल्ट करना शुरू किया तो यह ठीक वैसा ही प्रोपेगेंडा है जैसा आज से 100 साल पहले रवांडा की बुक्स में डाला गया था और जिसका परिणाम हुआ रवांडा में जेनोसाइड हुआ था आज से 30 साल पहले वही जेनोसाइड हमारे देश में करवाने की कोशिश है क्योंकि सेम मैसेजिंग सेम टेंप्लेट यहां पर यूज किया जा
रहा है क्या हुआ था रवांडा में आप एक बार बताएंगे जरा हमारे दर्शकों के लिए रवांडा अफ्रीका का एक देश है बहुत बड़ा नहीं है वहां पर पहले बेल्जियम का बेल्जियन का रूल हुआ करता था उसके बाद जर्मन का रूल आया वहां पर जो कम्युनिटीज थी वो मवेशी चराने वाले लोग थे मैक्सिमम और कितने मवेशी किसके पास है वह डिसाइड करता था कि उसकी समाज में कितनी प्रतिष्ठा होगी तो वहां पर प्राइमर दो तरह की प्रजातियां प्रजातियां भी नहीं कैटेगरी थी वो टू और कहते थे उन्हे जिनके पास 10 से ज्यादा मवेशी है या पाच
से ज्यादा मवेशी हैं वह ऊंची श्रेणी वाले माने जाते थे उन्हें टूट स कहते थे जो कम मवेशी रखते थे उन्हें हूटू कहते थे इनकी रेशो ऑलमोस्ट 20 80 की थी तो जब यह कॉलोनाइजर वहां पहुंचे अब कॉलोनाइजेशन जब आपको करनी है तो थोड़े से लोग बहुत बड़े लोगों बहुत ज्यादा लोगों को कंट्रोल करते हैं जिसके लिए ब्यूरोक्रेसी चाहिए होती है और ब्यूरोक्रेसी को हर एक चीज लिखित में चाहिए होती है और लिखित में में हर एक चीज कैटेगरी इजेशन में चाहिए होती है तो उन्होंने क्या किया इन सबके आइडेंटिटी कार्ड्स इशू करने शुरू कर
दिए कि ये टू है ये टूट स है ये हु टू है ये टूट स है तो वो जो फ्लूडिटी थी कि आज का हु टू कल का टूट स हो सकता है या वाइस वर्सा हो सकता है अब वो नहीं होगा क्योंकि उसके पास आई कार्ड आ गया ओ फिक्स हो गए और विद इन 30 इयर्स ऐसा हो गया कि कोई जब बाहर से आता था तो उसे लगता था कि टू और टूट्स कास्ट है यह उन्होंने वहां पर क्रिएट कर दिया और साथ में दूसरा इसमें क्या ऐड किया के जो टूट्स जो 20
पर है इनका रंग थोड़ा सा फेयर है यह नॉर्थ की डायरेक्शन से इन्होंने रवांडा पर हमला किया जो यहां के मूल निवासी थे हां ये आपको हंसी आई आपको समझ में आ गया टेंपलेट स्क्रिप्ट तो सेम ही लग र एटली वही है तो उन्होंने यहां पे आए यहां पर उन्होंने अपना सिस्टम क्रिएट किया यहां की महिलाओं के साथ उन्होंने शादियां करनी शुरू की और फिर यहां पर कब्जा करके 80 पर का शोषण करना शुरू कर दिया एगजैक्टली सेम टेंप्लेट यहां है और 1994 में 8 अप्रैल को शायद वहां पर दंगे शुरू हुए थे जो लगभग
तीन महीने चले तीन महीनों में 8 लाख लोगों की हत्या की गई थी और वही टेंप्लेट आज हमारे देश में काम कर रही है प्राम इ अबाउट डेडिकेट टू रिवाइव आवर रिच कल्चरल हेरिटेज द एसेंस ऑफ भारत व ब्रिंगिंग टू लाइफ द एज ऑफ आवर ग्लोरियस पास्ट व नीड ऑर्गना लाक प्रच इट इ ओल्ड ए वेल एस द न्यू राइ प्राम हिंदू के गौरव की गाथा गाता है 60 साल में हमने जो खोया विरासत के रूप में संस्कृति के रूप में उसको वापस लाने का काम कर रहे आवर मिशन गो बंड क्रिएटिंग कंटेंट व स्पार्किंग
कल्चरल रेनेस प्राम एक उत्तिष्ठत का नाद है हिंदू समाज को जोड़ने के लिए और सच्चाई दिखाने का काम प्राम द्वारा हो रहा है कई दशकों की एक आवश्यकता को प्राम पूरा कर रहा है प्रम इ पुटिंग आउट ए एन अर्जेंट सिविलाइजेशन इंपरेटिव गुलामी की मानसिकता अगर कहीं पर भी अंदर धसी हुई हो ना उसको उखाड़ फेंकने का काम प्राम का कंटेंट करता है लंचिंग द वर्ल्ड फर्स्ट हिंदू ओटीटी प्लेटफॉर्म इ जस्ट द बिगनिंग वी हैव मच मोर टू अचीव पूरा जनजन सत्य से तथ्य से और यथार्थ से परिचित होगा आपका यह प्रयत्न ईश्वर की आराधना
ही है काउंटर नरेट का आंदोलन आरंभ हो चुका हैम इ डूइंग एन एक्सीलेंट शॉप टू गिव यू नॉलेज वि यू डोंट गेट इन स्कूल आ एब्सलूट लव इट आई एम वेरी हैप्पी टू बी अ पार्ट ऑफ द प्राम फैमिली आई एक्सटेंड माय बेस्ट विशेस टू यू एंड योर एनटायर टीम एक बहुत बड़ी सनातन की सेवा हो रही है उसके लिए मैं हृदय से प्राम का अभिनंदन करता हूं योर सपोर्ट कैन टन दिस विजन इटू रियलिटी प्रम प्रम प्रम प्रम इ डूइंग वेरी वेरी गुड जब सनातनी नी प्रम आ गोइंग बैक टू रूट्स इट्स इंपोर्टेंट फॉर
आवर कंट्री आर्म योरसेल्फ विथ द नॉलेज इट्स ऑलमोस्ट लाइक अ मूवमेंट दिस इ अ विरी एवर प्रम को सफलता के लिए साधुवाद अमेजिंग जॉब स्ली रिकमेंड डू योर कंट्रीब्यूशन सपोर्ट देम सब्सक्राइब देम बाय डोनेटिंग टू प्रियम यू आर जस्ट नॉट [संगीत] गिविंग यूर इन्वेस्टिंग इन आवर कल्चर आवर फ्यूचर एंड आवर चिल्ड्रन चचिंग आउट टू द पीपल वि रिजल्ट्स ऑफ रिसर्च आई विश देम ल द वेरी बेस्ट जॉइन अस ऑन दिस जर्नी डोनेट टुडे एंड बिकम पार्ट ऑफ ए टाइमलेस लेगासी कष्ट होता है देखिए कि जो करेक्शंस हमें कर लेने चाहिए थे वो अभी तक कर
नहीं पाए हम लोग और अभी जो यह जो लालू यादव राहुल गांधी जो नैरेटिव चला रहे वो एगजैक्टली वही वाला है जो वह अवरण और सवण के बीच में लड़ाई कराने की कोशिश करर एगजैक्टली वही चीज है वही चीज यहां पर ला दी की कास्टम के रूप में है यहां तो कास्ट का तो कहीं वर्णन ही नहीं तो यहां तो वर्ण हमेशा वर्ण कुल जाति अब देखिए माथुर कौन है जो मथुरा का रहने वाला है व माथ बक्षी कौन है उसका एक टाइटल है भंडारी कौन है जो भंडारा संभालता था तो यह कोई ऐसा थोड़ी
था कि कास्ट वो कोई लीज चली आ रही है बहुत सही कहा आपने भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है चातुर्य मया गुण कर्म स्वभाव व तो एकदम स्पष्ट है व तो हम सोचिए कि किस तरीके से इन बातों को भूल के कि ने क्या कहा कृष्ण ने क्या कहा क्या हमारे मूल जो वैदिक संस्कृति है जो हमारी इतनी प्राचीन सभ्यता है उसमें क्या था उसको भूल के किस तरीके से इनके झूठ को हमने स्वीकार कर दिया अब देखिए जो का सेंसस हुआ जिसम कास्ट और ये जातियों को परिभाषित किया अंग्रेजों ने बेसिकली उनको तो
डिवाइड एंड रूल करना था इस चीज को खारिज कर देना चाहिए था स्वतंत्र होने के बाद कोई जाति नहीं है सब हिंदू है है कि नहीं वर्न इ डिवीजन ऑफ लेबर कास्ट तो है ही नहीं कास्ट तो है ही नहीं यह देखिए यह नहीं हुआ और अब कैसे देखिए यह लोग किस तरीके से प्ले कर रहे हैं इनकी आपने बहुत सही बात बोली कि इनके इरादे कितने खतरनाक है यह लोग उकसा रहे हैं एक सिविल वॉर के लिए यहां के देश के लोगों को वह चाहते हैं कि सिविल अनरेस्ट हो एक सिविल वॉर हो एक
ग्रह युद्ध हो य प और लोग आपस में एक दूसरे को लड़ने हटने और मारने के लिए उतार हो जाए यह इनकी इनकी स्क्रिप्ट है जो रवांडा में हुआ चाहते हैं कि यहां पर भी हो एटली री डेंजरस है एक एक और चीज एक हम बात करते हैं शेड्यूल्ड ट्राइब्स की है ना अब यह फिर से अंग्रेजों का दिया हुआ शब्द है शेड्यूल्ड ट्राइब्स कैसे बन गए क्योंकि व एक शेड्यूल तैयार कर रहे थे ट्राइब्स का तो ट्राइब्स कैसे बने वैसे तो हमारे देश में सदा ही ऐसे लोग थे जो वनों में रहते थे मंत
होते थे जब उनका मन करता था कहीं रुके नहीं तो वहां से आगे चले गए लेकिन पिछले 1200 वर्षों में जो चेंज आया वो क्या था कि जैसे ही उत्तर से इस्लामिक इवेडर्स आते थे वो जब हमला करते थे तो एक तो किला होता था किले पर हमला करें क्यों शहर जो थे दीवारों के अंदर होते थे उनकी घेराबंदी करके उन पर कब्जा करते थे प्लस किलों के बाहर या शहरों के बीच-बीच में कहीं पर गांव हुआ करते थे तो गांव में ये क्या करते थे गांव प जा के कब्जा किया जो पुरुष थे उनकी
हत्या कर दी जो महिलाएं और बच्चे थे उनको मंडियों में ले जाकर बेचते थे ये स्टैंडर्ड प्रैक्टिस थी जो अभी आपने देखा होगा जो आईएसआईएस वालों ने यजीद के साथ किया है वही चीज जो यजीदी तो बेचारे थोड़े से बचे हैं यहां पर हमारे देश में तो करोड़ों की संख्या में वोह काम किया इन्होंने तो जैसे ही गांव को पता लगता था कि मुस्लिम सेना वहां तक पहुंच गई है तो गांव का गांव छोड़ के व वनों में चले जाते थे कि हम इनके हाथ नहीं आएंगे हम वन में रहना स्वीकार कर लेंगे और जो
मुस्लिम क्रॉनिकल जो क्रॉनिकल करने वाले हैं उन्होंने यह सारी बातें स्पष्ट लिखी हैं कि गांव खाली होता था वह वनों में चले जाते थे फिर या तो हमारे हाथ व आते ही नहीं थे वह वहीं रहते थे जानवरों की तरह वहां पर पानी इकट्ठा करके वहीं रहना वह स्वीकार कर लेते थे फिर इन्हें स्पेशल इस तरह के टूल बनाने पड़े कि जो यहां का बांस है बांस के जंगल होते थे बांस काट काट के उन तक पहुंच के फिर मर्दों को मारते थे और महिलाओं को उठाकर ले जाते थे जो बच गए वो वहा पर
कबीले की तरह रहना शुरू कर देते तो वह थे जि जिन्ह अंग्रेजों ने आकर शेड्यूल्ड ट्राइब्स बोल दिया अब आजादी के बाद हमें करना क्या चाहिए था हमें इनका इतिहास बताना चाहिए था कि वह लोग हैं जिन्होंने इस्लाम के आगे घुटने नहीं टेके अपने आप को सुरक्षित रखा उनसे लड़े यह हमारे फ्रीडम फाइटर्स हैं य हमारे स्वतंत्रता सेनानी है जो लड़े हैं इसलिए हम इनको आरक्षण दे रहे हैं उससे देखिए फर्क क्या पड़ना था आरक्षण आप आज भी दे रहे हैं तब भी देना था तब उन्हें समान दृष्टि मिलती या कि यह वो लोग हैं
जो लड़े हैं उन्हें आरक्षण इसलिए मिल रहा है अभी क्या किया आपने उन्हें सवर्णों से लड़ाने का शुरू कर दिया कि यार यह तो मेरिट को खा रहे हैं शब्दों का ही चेंज है ना शब्द का हेरफेर है बस बहुत सही कहा आपने नीर जी जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है इसके जो ससंग चालक है मोहन भागवत जी उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया कि चाहे वो मुसलमान हो या हम हो हम सबके पूर्वज तो एक ही है आप कहां तक सहमत है उनकी इस बात से टेक्निकली तो उनकी बात ठीक है कि जो हिंदू शब्द है वह
जियोग्राफिक शब्द है कि जो इंद नदी के इधर रहते हैं वह हिंदू हैं लेकिन उसका जो आगे व निष्कर्ष निकालना चाहते हैं जो मैसेजिंग देना चाहते हैं वह स्वीकार्य नहीं होगी मुस्लिम समाज को स्पेसिफिकली क्योंकि इस्लाम अपने आप में क्या कहता है वह अपने आप को लॉजिकली डिफाइन करता है वो पूर्वजों से डिफाइन ही नहीं करता और उसका सबसे अच्छा एग्जांपल तो मोहम्मद आप है जिसने शुरू किया है इस्लाम उसने क्या बोला था कि जो मेरे मां-बाप हैं क्योंकि उन्होंने इस्लाम नहीं अपनाया था इसलिए वह भी जहन्नुम में है ओ जी अच्छा उससे यहां किसी
ने स्पेसिफिकली क्वेश्चन पूछा कि तुम्हारी मां कहां है तो बोला वो जहन्नुम में है लेकिन तो आगे काउंटर क्वेश्चन हुआ कि वो तो पैगंबर की मां है बोला इसलिए वो सबसे हल्के वाले जहन्नुम में है जहां पर आग सिर्फ टखनों तक रहती है उससे ऊपर नहीं आती अच्छा तो अगर हम यह सोचते हैं कि इस तरह की बातों से उन्हें रिझा लेंगे वह संभव नहीं होगा वो एक पब्लिक पोस्टरिंग के लिए अच्छा हो सकता है कि हम सर्व समावेशी हैं हम उनसे घृणा नहीं करते क्योंकि आरएसएस की अनफॉर्चूनेटली इमेज ऐसी बनाई गई है कि वो
एंटी मुस्लिम है जबकि वो एंटी मुस्लिम नहीं है और शायद इसी इमेज को तोड़ने के लिए उन्होंने इस तरह की स्टेटमेंट भी दी है मेरा कंजेक्चर यह है कि कि वो एक मैसेज दे रहे हैं कि हम तुमसे घृणा नहीं करते हम तुम्हें भी स्वीकार करते हैं और मुस्लिम्स को ये स्वीकार ही नहीं होगा मुस्लिम स्वीकार कर देखिए ना दो चीजें हैं एक तो पहले ही उनके उनके मन में आरएसएस के प्रति घृणा भरी जा चुकी है पॉइंट नंबर वन पॉइंट नंबर टू इस्लाम लॉजिकली इस चीज को स्वीकार कर लेता है कि ठीक है भाई
होंगे हमारे पूर्वज पर हम तो अब इस्लाम अपना चुके हैं तुम अगर हम पहले वहां थे अब हम इस्लाम में चले गए तो हम वापस क्यों आए इसका कोई कारण नहीं ना दे रहे हम इसमें बल्कि हिंदू कंफ्यूज हो जाएंगे और कुछ नहीं हां इसमें हां ये इसमें प्रॉब्लम क्या होती है कि जो 80 पर हिंदू है वो तो क्या बोलते हैं उसे भेड़ बकरियों की तरह है वहां उनको तो मौलाना सिखा देगा कि हमारे तो पैगंबर साहब ने ही बोला था कि मेरी तो मां भी अगर नहीं है तो वो जहन्नम में है तो
इससे हमें फर्क नहीं पड़ता अब जो 80 पर हिंदू है जो सर्वधर्म संभाव का चूर चाट चाट के बड़ा हुआ है वो सोच लेता है कि यार ये भी हमारे जैसे ही है तो ये टे टैक्टिकली एरर है टेक्निकली ठीक हो सकता है टैक्टिकली एरर है बहुत सही कहा आपने अच्छा यह अभी भारत में जो परिस्थितियां चल रही है ऐसा बहुत देखने को मिल रहा है कि बहुत से लोग इस्लाम को छोड़कर इस्लाम धर्म को और हिंदू हिंदू धर्म अपना रहे हैं उनकी संख्या भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है तो क्या यह हिंदुओं के
लिए क्या कोई गर्व की बात है क्या है यह कैसे लेना चाहिए इसको जी इस्लाम को धर्म नहीं कहेंगे हम क्योंकि उसमें धर्म जैसे कोई एलिमेंट्स नहीं है लेकिन आपने ठीक कहा कि एक बहुत बड़ी संख्या है जो अब इस्लाम को छोड़ती जा रही है उनका मोह भंग हो रहा है सोशल मीडिया के आने से पहले जैसे हम पहले भी बात कर रहे थे कि हमें पता ही नहीं था कि इस्लाम के अंदर क्या है कुरान में क्या लिखा है अब व लोगों को पता लग रहा है तो मुसलमानों को भी पता लग रहा है
कई बारी हम जनरलाइजेशन में गलती क्या कर लेते हैं हम सोचते हैं सारे मुसलमान एक जैसे होंगे जबकि मुस्लिम समाज में भी बहुत वैरायटी है वहां पर भी सेंसिबल लोग हैं सेंसिटिव लोग हैं इनफैक्ट मैंने एक लेक्चर दिया था इस टॉपिक पे तो उसके बाद मुझे कई मुसलमानों के मेल आई अरे वाह हां एक ने तो स्पेशली लिखा कि मैं वो सेंसिबल और सेंसिटिव मुस्लिम हूं जो इस्लाम छोड़ चुका हूं और सनातन धर्म को अपना चुका हूं तो हमें इन लोगों तक पहुंचने की आवश्यकता है अब इसमें सबसे सुंदर चीज क्या है कि उन्हें इस्लाम
की एक ऐसी पिक्चर प्रेजेंट की जाती है जो सच्चाई से कोसों दूर है उन्हें बताया जाता है कि मोहम्मद एक बड़ा दया करने वाला आदमी था कुरान में अच्छी-अच्छी चीजें लिखी है लेकिन जब वह मोहम्मद का चरित्र पढ़ते हैं जब वो कुरान पढ़ते हैं तो उन्हें दिखाई देता है या इसमें तो कोई स्वीकार करने वाली चीज ही नहीं तो सारी नफरत सिखाते हैं तब जिनकी चेतना जगती है वह फिर समझ जाते हैं कि यह हमें बुद्धू बनाया जा रहा है वह छोड़ देते हैं इस्लाम को तो इसके लिए जो आपका क्वेश्चन था हिंदुओं को खुश
होना चाहिए डेफिनेटली खुश होना चाहिए क्योंकि मोदी जी स्वामी विवेकानंद को अपना आइकॉन मानते हैं उन्होंने एक बड़ी सुंदर बात बोली थी हमें मुसलमान और ईसाइयों को वापस लाना पड़ेगा क्योंकि यह सारे के सारे तलवार के दम पर कन्वर्ट किए गए हैं जब एक हिंदू में से कन्वर्ट होता है तो एक हिंदू कम नहीं होता एक दुश्मन बढ़ जाता है तो जब यह प्रक्रिया जिसकी आप बात कर रहे हैं यह जब चलती है तो प्रोसेस रिवर्स में हो रहा है कि एक दुश्मन कम नहीं हो रहा एक हिंदू साथ में और बढ़ रहा है तो
हमें इसका स्वागत करना चाहिए इनफैक्ट पॉलिसी लेवल पर सरकार को यह काम करने की आवश्यकता है कि हम आपको बताते हैं कि कुरान के अंदर क्या लिखा है मोहम्मद क्या था बाइबल के अंदर क्या लिखा है यह देखो और हम एक मिनिस्ट्री ऑफ घर वापसी शुरू करते हैं मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन ह्यूमैनिटी या ह्यूमनाए का बजाय इनका मदरसों में शोषण हो बजाय यह नफरत करना सीखें बजाय इसके कि वह जिहाद करना सीखें किता फी सबीला करना सीखें उससे अच्छा है उनको आप हिंदू धर्म ग्रंथ पढ़ाएं उनका शुद्धीकरण करें वापसी करें तो यह समस्या जड़ से निपट
जाएगी तो कितने परसेंटेज लोग हैं होंगे भी जो आ रहे हैं इस तरफ इसका कोई सर्वे तो कि किसी ने किया नहीं है लेकिन पिछले साल मैं केरल गया था वहां आपको यह जानकर बड़ी खुशी होगी वहां पर एक एक्स मुस्लिम्स की ऑर्गेनाइजेशन है जो खुले में काम करती है इस्लाम को छुड़ाने लेकिन वो तो इस्लाम में तो इट इ डेथ पेनल्टी है यही तो बता रहा हूं आपको मैं वहां गया तो आप मार डालेंगे ठीक बात है अच्छा केरल में भी सबसे बदनाम जिला कौन सा मल्लापुरम जहां व मोपला हिंदू नर सार हुआ था
वहां पर ये कॉन्फ्रेंस हुई थी पिछले साल जनवरी में तो मैं वहां गया वहां पर बाहर उन्होंने बोर्ड लगाया कि यहां पर एक्स मुस्लिम कान्फ्रेंस हो रही है पूरा सेमिनार हॉल था 200 लोग बैठे थे लड़कि मलब महिलाएं भी थी और पुरुष भी थे पुरुष ज्यादा थे ऑफकोर्स 80 से 90 पर पुरुष थे तो मेरी उनसे बात होने लगी के पहले तो जब वहां मलापुरम जाना था तो अब क्योंकि मुझे थ्रेट रहती है तो मुझे थोड़ा ध्यान रखना था अपना बोले आप चिंता मत करो मल्लापुरम में आपको कुछ नहीं होने वाला मैंने कहा अच्छी बात
है तो गए वहां अब जो उनसे बात हुई उनका कहना यह है कि केरल में अगर यह डेथ टी वाली प्रॉब्लम ना हो तो ओवरनाइट 60 पर मुसलमान इस्लाम को छोड़ देंगे अच्छा जी तो यह तो बहुत कमाल की आपने बात बताई है जी और यह जो आपका सुझाव है तो मैं चाहूंगा कि ये पॉलिटिकल लीडरशिप में और प्रधानमंत्री तो पहुंचे की एक मिनिस्ट्री फॉर्म करनी चाहिए अगर इतना विल है लोगों के अंदर मिनिस्ट्री ऑफ होम रिटर्निंग घर वापसी हां मिनिस्ट्री ऑफ शुद्धिकरण मिनिस्ट ह्यूना जो मर्जी नाम दे देखिए ना या मिनिस्ट्री ऑफ डी डेमोनाइजेशन
हां बहुत ये स बिल्कुल ठीक है हा बिल्कुल तो ये तो बहुत बढ़िया आपने बात बताई कि इतनी बड़ी अगर संख्या में लोग अच्छा तभी बोले कि आप सेफ है वहां प हां ओ अच्छा मतलब एक बाहर से तो एक अलग ही एक पिक्चर वहां की मालूम चलती है मैं यही कह रहा हां कि लोग सोचते हैं मोनोलिथ है इस्लाम या मुस्लिम कम्युनिटी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मैं तो जितना इनके बीच में जाता हूं मैं उतना ही फील कर रहा हूं कि हमसे हुई हमने इन्ह वहां से निकाला नहीं निकाला नहीं आपने सही कहा
कि वहां भी बहुत अच्छे लोग हैं सेंसिबल लोग हैं सेंसिटिव लोग है और जो रिलेट नहीं कर सकते ये एक किसी डेजर्ट कल्ट की जो बातें है हैना आज से 1400 साल पहले लिखी हु व उसे रिलेट नहीं कर सकते कोई भी कोई भी एक नर्मल अगर होगा तो उसको लगेगा ना कि समथिंग ऑफ है तो ऐसा कुछ होना चाहिए ना कि कोई इनिशिएटिव का कि जो एक्स मुस्लिम्स हो उनको कोई खतरा ना हो व सुरक्षित महसूस करें और वो अपनी स्वेच्छा से अगर आना चाहे तो इस तरफ आ जाए दूसरी चीज जो मेरे मन
में विचार उठता है कि वापस आने का भी एक सिंपल कुछ प्रोसीजर होना चाहिए जी है ना अभी तक वो प्रोसीजर कहीं लेड डाउन नहीं है कहीं डिफाइन नहीं है है ना एक सिंपल सा हो है ना जो थे वो थे लेकिन कोई भी सिंपल अगर प्रोसीजर हम कर द कि हाथ में गंगाजल और तुलसी ले ले कोई एक मंत्र पढ़ के बस आ जाए इतना सिंपल हो किसी भी एक आचार्य किसी भी एक है ना एक कर्मकांडी किसी पंडित के पास बैठ के और एक संकल्प लेक बस उस संकल्प के तहत ही वापस आ
जाए क्योंकि य यह भी अगर बहुत हम सिंपल कर देंगे ना तो और फिर आने का रास्ता जो है और खुल जाएगा बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आप तो क्या आपको लगता है कैसा होना चाहिए प्रोसीजर ये तो मेरे मन में ऐसे ही आया एक विचार क्या होना चाहिए इसका आने का प्रोसीजर अभी तक इसमें देखिए क्या हो रहा है दो तीन जो प्रैक्टिकल प्रॉब्लम्स लग एक्स मुस्लिम्स को क्योंकि मेरे पास तो बहुत बार आते हैं और व बताते हैं कि हमारी क्या-क्या प्रॉब्लम्स है अभी उनकी इच्छा है कि वह एक बहुत बड़ा प्रदर्शन करें
एक रैली निकाले दिल्ली में बताने के लिए कि हम भी एजिस्ट करते हैं और हमें सुरक्षा मिलनी चाहिए जो आपने बात बोली व एक्स मुस्लिम कम्युनिटी ऑलरेडी चाहती है कि ऐसा हो दूसरा जो एक कन्वर्शन का प्रोसेस है इसमें एक तो आर्य समाज कराता है और एक हिंदू महासभा है जिनको इसकी अथॉरिटी मिली है कि वो इस तरह का काम कर सकते हैं सर्टिफिकेट इशू करते हैं लेकिन प्रैक्टिकल प्रॉब्लम इन्हें कहां पे आ रही है इन्हे आती है अपने डॉक्यूमेंट चेंज कराने में आधार कार्ड चेंज कराना है पासपोर्ट चेंज कराना है गजट में नाम चेंज
करवाना है तो प्रक्रिया बड़ी कंबरसम है एक तो कंबरसम है प्लस जो एक गरीब मुसलमान है उसके लिए महंगी भी है लगभग छ साज लग जाते हैं उनके तो एक गरीब आदमी छ साज निकालना उसे कष्ट होता है तो यह सिंपलीफाइड प्रोसीजर होना चाहिए एक सिंगल विंडो होनी चाहिए कि अगर आप आप इस्लाम छोड़ रहे हैं आप क्रिश्चियनिटी छोड़ रहे हैं तो यह विंडो है यहां पर आइए आपके डॉक्यूमेंट हम इस तरह से चेंज कर देंगे एक तो यह होना चाहिए प्लस जो इस प्रोसेस को इतना नॉर्मलाइज कर दो कि वह जो सर तन से
जुदा वाली प्रॉब्लम है वो हट ही जाए सर तन से जुदा बोलना ही क्रिमिनलाइज होना चाहिए जो ये बोल रहा है व सीधा-सीधा धमकी दे रहा है ना वो तो बिल्कुल तो वो क्रिमिनलाइज होना चाहिए छोटे-छोटे काम है जो सरकार को करने पड़ेंगे करने चाहिए वो जो आईपीसी के सेक्शन है उनके उनको डेफिनेटली उनको एफ आई करके अंदर करना चाहिए शुड बी पलाइज रट प्राम इज अबाउट डेडिकेट टू रिवाइव आवर रिच कल्चरल हेरिटेज द एसेंस ऑफ भारत वर ब्रिंगिंग टू लाइफ दज ऑफ आवर ग्लोरियस पास्ट वी नीड ऑर्गेनाइजेशन लाइक प्रम इट इ ओल्ड एज वेल
एस द न्यू राइज प्राम हिंदू के गौरव की गाथा गाता है 60 साल में हमने जो खोया विरासत के रूप में संस्कृति के रूप में उसको वापस लाने का काम कर आवर मिशन गोज बियोंड क्रिएटिंग कंटेंट वर स्पार्किंग कल्चरल रेनेस प्राम एक उत्तिष्ठत का नाद है हिंदू समाज को जोड़ने के लिए और सच्चाई दिखाने का काम प्रम द्वारा हो रहा है कई दशकों की एक आवश्यकता को प्राम पूरा कर रहा है पम पुटिंग आउट ए अर्जेंट सिविलाइजेशन इंपरेटिव गुलामी की मानसिकता अगर कहीं पर भी अंदर धसी हुई हो ना उसको उखाड़ फेंकने का काम प्रम
का कंटेंट करता है लंचिंग द वर्ल्ड फर्स्ट हिंदू ओटीटी प्लेटफार्म इज जस्ट द बिगिनिंग वी हैव मच मोर टू अचीव पूरा जनजन सत्य से तथ्य से और यथार्थ से परिचित होगा आपका यह प्रयत्न ईश्वर की आराधना ही है काउंटर नैरेटिव का आंदोलन आरंभ हो चुका है प्रम इज डूइंग एन एक्सीलेंट जॉप टू गिव यू नॉलेज वि यू डोंट गेट इन स्कूल आई एब्सलूट लव इट आई एम वेरी हैप्पी टू बी अ पार्ट ऑफ द प्राम फैमिली आई एक् माय बेस्ट विशेस टू यू एंड योर एनटायर टीम एक बहुत बड़ी सनातन की सेवा हो रही है
उसके लिए मैं हृदय से प्राच्य का अभिनंदन करता हूं योर सपोर्ट कैन टर्न दिस विजन इनटू रियलिटी प्राम प्राम प्राम प्राम प्राम प्राम इज डूइंग वेरी वेरी गुड जॉब सनातनी नीड प्राम पल आर गोइंग बैक टू देर रूट्स इट्स इंपोर्टेंट फॉर आवर कंट्री आर्म योरसेल्फ विद द नॉलेज इट्स ऑलमोस्ट लाइक अ मूवमेंट दिस इज अ विशनरी एनवर प्राम को सफलता के लिए साधुवाद अमेजिंग जॉब स्ट्रंग रिकमेंड डू योर कंट्रीब्यूशन सपोर्ट देम सब्सक्राइब देम बाय डोनेटिंग टू प्रियम यू आर जस्ट नॉट [संगीत] गिविंग यू इन्वेस्टिंग इन आवर कल्चर आवर फ्यूचर एंड आवर चिल्ड्रन रिचिंग आउट टू
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