अस्सलाम वालेकुम वेलकम टू क्लास नंबर टू बैच 40 अच्छा जी हमने आपसे यह प्रॉमिस किया था कि यह पूरा रिकॉर्ड जो रिकॉर्डिंग है पूरे कोर्स की वो दोबारा से होगी नई होगी और उसको हम बिल्कुल पहली क्लास से स्क्रैच से लेके चलेंगे ताकि वो लोग जो बिल्कुल इस बारे में नए हैं जिनको ट्रेनिंग के बारे में कुछ नहीं पता अलिफ पे भी नहीं पता तो उनको भी यह कोर्स बहुत हेल्पफुल होगा मुकम्मल उनके लिए ट्रेनिंग हो जाएगी जो लोग पहले से कर रहे हैं आप लोगों को मैं बिल्कुल भी नहीं कहूंगा कि आप स्किप कर
दिया करें क्लास या ना देखा करें क्योंकि चीजें आपको पता होंगी मैक्सिमम लेकिन अगर आपको कोई दो चीजें भी ऐसी इस क्लास में पता चल जाती है जो आपको पहले से नहीं पता थी तो आपका फायदा ही होगा और कुछ चीजें रिपीट हो जाएंगी। मुमकिन है कोई कांसेप्ट ठीक ना हो आपका वो ठीक हो जाए तो आप लोग लाजमी लाइव क्लास लाजमी अटेंड किया करें। चलिए जी चलते हैं आज के टॉपिक की तरफ। आज हमारा टॉपिक है व्हाट इज़ फॉरेक्स ट्रेडिंग? फॉरेक्स ट्रेडिंग है क्या? जो आप पढ़ने के लिए आ गए हैं जो आप काम
करते हैं बेसिकली वो है क्या? उसकी टू अंडरस्टैंडिंग क्या है? इसके बारे में हम बात करेंगे। देखिए जी फॉरेक्स ट्रेडिंग सिंपल अल्फाज़ में समझ लें। फॉरेक्स ट्रेडिंग का मतलब ये होता है यह जो वर्ड लिखा है ना फॉरेक्स इसमें जो पहले तीन अल्फाबेट्स हैं यह है फॉरेन के। ठीक है? और यह ex है एक्सचेंज। फॉरेन एक्सचेंज। फॉरेन एक्सचेंज क्या होता है? यानी आप जब किसी दूसरे मुल्क जाना चाहते हैं तो आप एक अपने मुल्क की करेंसी देते हैं और जिस मुल्क में आप जा रहे होते हैं फॉर एग्जांपल आप पाकिस्तान से इंडिया से सऊदी अरब
जाना चाहते हैं तो आप अपने मुल्क की करेंसी देंगे और वहां के रियाल खरीद लेंगे तो ये फॉरेन एक्सचेंज है। ठीक है? हम जो ट्रेडिंग करते हैं ये ऑनलाइन फॉरेक्स मार्केट है। ऑनलाइन ट्रेडिंग करते हैं। इसी चीज की हम करते हैं। आप जब पढ़ने के लिए जाते हैं, यूके जाते हैं तो आपको पाउंड चाहिए। आप अमेरिका जाते हैं, आपको डॉलर्स चाहिए। किसी भी मुल्क में आप सफर करते हैं, तो एक मुल्क की करेंसी जब आप देते हैं और दूसरे मुल्क की करेंसी ले लेते हैं। तो ये सिंपली फॉरेक्स ट्रेडिंग इसी को कहते हैं। ठीक है
जी। अब इसमें बाय सेल कैसे होती है? पूरा ट्रू कासेप्ट क्या है? इसमें बीच में ब्रोकर कैसे इन्वॉल्व होता है? यह सब चीजें आज की इंशाल्लाह हम आज की क्लास में डिटेल से पढ़ेंगे। अभी आप इतना जाने कि फॉरेक्स मार्केट में या फॉरेक्स ट्रेडिंग क्या होती है? एक करेंसी देना और उसके बदले में दूसरी करेंसी को खरीद लेना। इसमें कोर्ट करेंसी क्या उठती है? बेस करेंसी क्या होती है? ये सब चीजें हम पढ़ेंगे इंशा्लाह। अच्छा ये डिफरेंट करेंसीज हैं। अब होता क्या है कि क्या इस मार्केट में आप यह काम कर सकते हैं कि आप
पाकिस्तान में बैठे हैं तो आप पाकिस्तानी करेंसी के अगेंस्ट यूएसडी में काम करें कि आप रुपया दें और डॉलर ले लें। अब वो फिजिकल मार्केट में तो पॉसिबल है। आप रोजाना ये काम होता है। पाकिस्तान में रुपया देते हैं और डॉलर ले लेते हैं। इंडिया में भी होता है। लेकिन फॉरेक्स मार्केट में जो बड़ी-बड़ी दुनिया की जो इकॉनमीज़ हैं उनकी ट्रेडिंग ही ब्रोकर्स ऑफर करते हैं। क्योंकि उन्हीं में वॉल्यूम होता है। उन्हीं में रश होता है। उन्हीं में लोग ट्रेड करना चाहते हैं। ठीक है? यानी मिसाल के तौर पे जो बड़ी इकॉनमीज़ हैं दुनिया की।
मैं आपको एग्जांपल दे देता हूं। जैसे अह अमेरिका है, यूरोप के कंट्रीज़ हैं। जर्मनी है, इटली है, फ्रांस है। उसके बाद जहां पे यूरो चल रहा है। उसके बाद बर्तनानिया है जहां पे पाउंड चल रहा है। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया है जहां पे ऑस्ट्रेलियन डॉलर चल रहा है। न्यूजीलैंड का डॉलर चल रहा है। तो ये वो बड़ी इकॉनमीज़ हैं दुनिया की फॉरेक्स मार्केट में यानी ऑनलाइन जब आप ट्रेडिंग करते हैं। फिजिकल में तो कोई मसला नहीं है। आप रुपया दें और डॉलर ले लें। रुपया दें, रियाल ले लें। ठीक है? लेकिन ऑनलाइन फॉरेक्स मार्केट में जो
ब्रोकर्स होते हैं, ये जो बड़ी करेंसीज होती हैं, बड़ी इकॉनमीज़ होती हैं, इन्हीं को ऑफर करते हैं। ठीक है? तो आप उन्हीं में उनको मेजर पेयर्स कहा जाता है। उन्हीं में फिर आप ट्रेड करते हैं। उसमें आपको ज्यादा फायदा होता है। अब इस मार्केट में सिर्फ और सिर्फ करेंसीज का लेनदेन नहीं होता। करेंसीज के अलावा भी फॉरेक्स मार्केट में बाकी चीजों का भी कमोडिटीज जो होती है उनका भी लेनदेन होता है। कमोडिटीज में क्या चीज आ जाती है? जैसे आप ऑयल की ट्रेड करते हैं, गोल्ड की ट्रेड करते हैं, सिल्वर की ट्रेड करते हैं। तो
बहुत सारी चीज़ बनी हुई है। कॉफी बींस भी है, यहां पे गंदुम भी है, कपास भी होती है। यानी रॉ फॉर्म में खाम हालत में जितनी भी दुनिया की कमोडिटीज हैं वो यहां पे ट्रेड हो सकती हैं। लेकिन फिर बात ये आ जाती है कि ज्यादा वॉल्यूम किसमें है? ब्रोकर्स क्या चीज ज्यादा ऑफर कर रहे होते हैं तो वह ऑइल ऑफर करते हैं क्योंकि ऑयल ग्लोबली यूज़ होता है ना ठीक है और मार्केट बहुत बड़ी है ऑइल की ऑयल यहां पर होता है गोल्ड की मार्केट जो हमारी फेवरेट मार्केट है जिसमें हम काम करते हैं
गोल्ड पे आप करें आप सिल्वर पे करना चाहे सिल्वर पे करेंसी पेयर्स पे करना चाहें उस पे करें इसके अलावा नेचुरल गैस पे नेचुरल गैस पे हमने दो साल पहले बहुत ट्रेड्स की थी ठीक हो गया तो वो भी इसी तरीके से जो फॉरेक्स के ब्रोकर्स होते हैं वो आजकल क्रिप्टो पे ऑफर कर रहे होते हैं आप बिटकॉइन पे भी काम कर सकते हैं इथेरियम पे कर सकते हैं तो ये सब चीजें हालांकि क्रिप्टो मार्केट अलग है फॉरेक्स मार्केट अलग है लेकिन देखा जाए तो इसको अगर आप कलेक्टिवली देखें तो ये एक ही छह तरीके
के नीचे सब चीजें जाती हैं। तो फॉरेक्स मार्केट में लेनदेन होता है करेंसीज का। इसके अलावा कमोडिटीज का। इसके अकेला आप इंडसेज में काम कर सकते हैं। जैसे US 500, US30, US 100 इनमें भी काम कर सकते हैं। इस बारे में इंशा्लाह हम डिटेल से आगे चलके अगली क्लासेस में भी पढ़ेंगे। एक बात आपने याद रखनी है कि जो चीजें आप पढ़ेंगे अब जो स्ट्रेटजीज़ पढ़ेंगे। ठीक है? अब सवाल ये होता है कि जी आपने स्ट्रेटजी बताइए। क्या ये सिर्फ गोल्ड पे काम करती है? तो कोई भी स्ट्रेटजी वॉल्यूम की जो हम आपको पढ़ाएंगे वीएस
की पढ़ाएंगे वो ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ किसी एक चीज पे काम करें और बाकियों पे काम ना करें। ऐसा नहीं होगा। सब पे काम करेगी। गोल्ड पे भी चलेगी वो। वो करेंसीज पे भी काम करेगी, ऑयल पे भी काम करेगी। आप स्टॉक मार्केट में चले जाएंगे वहां पे भी काम करेगी। आप क्रिप्टो पे आ जाएंगे वहां पे भी काम करेगी। आपने उसको बैक टेस्ट खुद करना है। ठीक है? मेरी तरफ से तो इजाजत है। आप इस पे भी जाके बैक टेस्ट उसको कर लें। वो हर जगह पे काम करेगी। स्टॉक मार्केट में थोड़े
से रद्दो बदल के साथ काम करती है स्ट्रेटजी। लेकिन होता उनका मेन जो थीम है वो सेम रहता है। इसी तरीके से गोल्ड पे हमने इसको टेस्ट किया हुआ है। मैं एक चीज़ हमेशा रेकमेंड करता हूं कि एक पेयर पे रहें और एक स्ट्रेटजी पे रह। इसका आपको बेतहाशा फायदा होगा। एक पेयर और एक स्ट्रेटजी। इस पे काम करें। देख आपकी ट्रेडिंग कहां से कहां जाती है। फंसे वो लोग हैं जो जिनके पास अकाउंट भी एक है। उसी पे गोल्ड में घुसे हुए हैं। उसी पे वो करेंसी पे काम कर रहे हैं। उसी पे इंडसे
पे उसी पे क्रिप्टो चलाया हुआ है। तो समझ नहीं आती उनको कि कहां से प्रॉफिट हो रहा है। कहां से लॉस हो रहा है। किसकी समझ आ रही है। किसकी नहीं समझ आ रही। आपने गोल्ड पे काम करना है। आपने एक अकाउंट ओपन कर लिया। एक स्ट्रेटजी रखें और काम शुरू कर दें। आपको गोल्ड की चाल समझ आ जाएगी। आपने ऑयल पे काम करना है। चल इसी अकाउंट पे कर लें। बस दो चीज़ हो गई। अब आप किसी और चीज पे जाना चाहते हैं। आप गैस की ट्रेड करना चाहते हैं। आप उस पे जाना चाहते
हैं। करेंसीज पे जाना चाहते हैं। तो मेरा हमेशा यह है कि अगर उस कोई और स्ट्रेटजी यूज़ कर रहे हैं तो अकाउंट अलग कर लें। सेम स्ट्रेटजी भी यूज़ कर रहे हैं तो भी अकाउंट अलग कर लें। आपको पता होगा कि गोल्ड से आप कितना कमा रहे हैं गोल्ड और ऑयल से और कंसीज से आप कितना कमा रहे हैं तो उसमें आपको कितना होल्ड करना पड़ता है ट्रेड को इसमें कितना होल्ड करना पड़ता है तो जितनी कम चीजों पे ट्रेड करेंगे उतनी आपकी स्पेशलिटी बढ़ जाएगी और उतनी आपकी ट्रेडिंग बेहतर होती चली जाएगी उसमें आपको
पता चलेगा ना कि आपकी स्ट्रेटजी किस हद तक काम कर रही है उस पेयर पे अच्छा जी ये बड़ी चीज है कि हाउ मच इज द डेली टर्नओवर ऑफ़ फर्क लोग ये समझते हैं कि पाकिस्तान में खास तौर पे इंडिया का मुझे नहीं पता मैं इतने लोगों से बात नहीं हुई खास तौर पे पाकिस्तान में जो रिवाज है वो ये है कि जी वो फलाना एक कंपनी आई है उसने ने एक ऐप दी है उसको डाउनलोड कर लें तो इतने पैसे जमा करवाएं तो दो दिन बाद इतने मिलते हैं। वो ऑनलाइन ट्रेडिंग को भी यही
समझ रहे होते हैं कि ये कोई ऐप है या नहीं अक्सर लोग देखते हैं मुझसे पूछ लेते हैं कभी देखने का काम करते हुए कहते हैं कौन सी ऐप है जी ठीक है तो फिर हमको क्या बंदा बताएं कि कौन सी ऐप है कौन सी ऐप नहीं है तो इस चीज से बिल्कुल बाहर निकलना है ये दुनिया की सबसे बड़ी हकीकत है अगर कोई मार्केट में है लोग कहते हैं कि इसका कब्जा नहीं है इसका ये मसला है ये नजर नहीं आ रहा है ये तो नंबर्स की गेम है ऐसा नहीं होता बिल्कुल दुनिया बदल
गई है ये असल मार्केट दुनिया की है। अब इसमें अब क्या लिखा है कि फॉरेक्स मार्केट हैज़ द हाईएस्ट टर्नओवर ऑफ़ ऑल फाइनेंसियल मार्केट्स। ऑल फाइनेंसियल मार्केट्स के आना आसान बात नहीं है। यानी इसमें क्रिप्टो भी आ गई। इसमें स्टॉक मार्केट्स भी आ गई। ठीक है? उसके अलावा इसमें ई-कॉमर्स भी आ गया। यानी जैसे Amazon है, दराज है और बाकी तरह की अलीबाबा है। जितनी भी ऑनलाइन ई-कॉमर्स की वेबसाइट्स हैं वो भी इसमें आ गई। ये सब कुछ ऑनलाइन है ना? तो फाइनेंसियल मार्केट्स जितनी भी दुनिया की फाइनेंसियल मार्केट्स हैं, फॉररेक्स मार्केट उन सबसे बड़ी
है। दिस मींस फॉरेक्स हैज़ द हाईएस्ट ट्रेडिंग वॉल्यूम इन द वर्ल्ड। डेली टर्नओवर ऑफ़ फॉरेक्स कैन रीच अप टू $8 ट्रिलियन। 1 दिन में यह 1 दिन का लिखा हुआ है। डेली टर्नओवर। एक दिन में फॉरेक्स मार्केट में 6 से 8 ट्रिलियन डॉल का कारोबार होता है। अब से 2 साल पहले यह फिगर जो है 5 6 ट्रिलियन पे था। आजकल यह फिगर जो है यह 8 ट्रिलियन डॉलर्स पे पहुंच गया। तकरीबन एक दिन का कारोबारी आपको बता रहा हूं। तो इतनी बड़ी मार्केट है इसीलिए तो इसमें फायदा भी ज्यादा होता है। नुकसान भी ज्यादा
होता है। उसकी वजह क्या है? वजह सिर्फ यह है कि मार्केट इतनी बड़ी है कि इसकी छोटी सी मूवमेंट भी आएगी ना तो आपको बहुत ज्यादा फायदा होगा। या बहुत ज्यादा नुकसान होगा। तो रिस्क मैनेज करना होता है इसमें। वही इसकी कामयाबी की कुंजी है। बहाल आपने याद ये रखना है कि कोई आपको यह कहता है ना कि अच्छा फला ऐप भी इस तरह कर रही थी। फला ऐप पे भी यह काम हो रहा था। वो पैसे इतने दिन बाद इतने देते यहां पे क्या हिसाब है? तो आपको यह पता हो कि ये कोई ऐप
शार्प वाला काम नहीं है। ना ये कोई फ्रॉड है ना कोई इसमें कोई दो नंबर है। हां दो नंबरियां करते हैं वो ब्रोकर्स करते हैं। उसका आपको तरीका बताएंगे कैसे आपने ब्रोकर चूज़ करना होता है। इसके अलावा कोई दो नंबर नहीं है। ना ये मार्केट बंद होने वाली है। सबसे बड़ी दुनिया की मार्केट है। जहां पे अब आप ये देखिए मैंने आपको पिछले स्लाइड में दिखाया था कि गोल्ड का काम यहां पे हो रहा है। गोल्ड का रेट इस मार्केट में तय होता है। आम तेल का जो क्रूड ऑयल जिसे कहते हैं उसका रेट इसी
मार्केट में तय होता है। आज जो रेट होगा कल वो पूरी दुनिया में आ जाएगा। आज गोल्ड की मार्केट जिस रेट पे बंद होगी कल को दुनिया भर की मार्केट्स में छोटे-मोटे फर्क के साथ वही रेट चल रहा होगा। ठीक है? तो अगर इसका कोई इंपैक्ट नहीं है, अग्रेसिव नंबर गेम है, इसका कोई हकीकी दुनिया से ताल्लुक नहीं है, तो फिर यहां पे जो रेट रात को क्लोज होता है, अगले दिन पाकिस्तान में, इंडिया में बल्कि पूरी यूरोप में, अमेरिका में, दुनिया में वो रेट क्यों आ जाता है? इंटरनेशनल रेट है वो। यहीं पे तय
होगा। इस हवाले से बिल्कुल आपको क्लियर रहने की जरूरत है। अब यहां पे देखिए यहां से आपको आईडिया होगा कि फॉरेक्स मार्केट जो है इस तकरीबन 7. ट्रिलियन या आठ को भी टच कर चुकी है मार्केट। 8 ट्रिलियन इसका एक दिन का हुजम है। इसके मुकाबले में जो दुनिया की बड़ी-बड़ी जो स्टॉक मार्केट्स हैं जैसे न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज है या टॉक स्टॉक एक्सचेंज है या लंदन स्टॉक एक्सचेंज है उनके आप वॉल्यूम देखें कि कितने छोटे हैं इसके मुकाबले में। इसके आधे को भी नहीं छू रहे। ठीक है? यानी बिलियंस में और ये ट्रिलियंस में है।
इतना फर्क है इस चीज में। तो जो दुनिया की सबसे बड़ी मार्केट होगी जब आप वहां काम करने के लिए बैठेंगे तो आपको बहुत बड़ा फायदा भी होगा। नुकसान से बचने का तरीका भी आपको बताएंगे कि आपको नुकसान से कैसे बचना है। अब आ जाते हैं इस मार्केट में कि ये मार्केट काम कैसे करती है और कौन-कौन लोग इस मार्केट को चला रहे हैं। ठीक है? आ तौर पे आप लोगों को पता है स्मार्ट मनी का आपने नाम सुना होगा लेकिन क्योंकि एक नए बंदे को चीजें नहीं पता होती तो इसलिए बताना यहां पे जरूरी
है। सबसे पहले तो गवर्नमेंट्स इन्वॉल्व होती है। ठीक है? गवर्नमेंट के फैसले इस मार्केट पे जैसे अब कल को एफएमसी की न्यूज़ है। ठीक है? एक न्यूज़ कैसे देखते हैं वो भी आज आपको बताऊंगा इंशा्लाह। कल को एफओएमसी है। ठीक है? एफएमसी क्या है? जी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी। वो क्या करती है कि इंटरेस्ट रेट जो है अमेरिका में बैंक्स के जो इंटरेस्ट रेट्स हैं उनको तय करती है कि इंटरेस्ट रेट कम होगा, ज्यादा होगा, कब कम करेंगे या कम कर दिया है या नहीं। तो कल को उनकी स्टेटमेंट आनी है। एफएमसी की दो तरह
की न्यूज़ होती है। एक होती है जिसमें वो सिर्फ मीटिंग मिनट्स देते हैं। यानी आज एक मीटिंग हुई है। उस मार्केट हर दुनिया में जो भी ऑफिशियल मीटिंग होती है उसके मिनट्स लिखे जाते हैं कि इस मीटिंग में यह बात हुई है। तो जब उसको रिलीज़ करते हैं तो उसको कहते हैं कि मीटिंग मिनट्स रिलीज़ हुए हैं। उसका कोई खास इंपैक्ट नहीं होता। सम टाइम आ जाता है लेकिन अक्सर नहीं होता। लेकिन एक एफओएमसी जो न्यूज़ होती है जो कि बुध के दिन ही आती है। आमतौर पे महीने के दरमियान में आती है बुध के
दिन। वो ये होती है कि इंटरेस्ट रेट्स का एक्चुअल फैसला क्या हुआ है? बढ़ा दिए या नहीं बढ़ाए या सेम रखे हैं। ठीक है? तो वो जो ऐसी इस तरह की जो न्यूज़ होती है गवर्नमेंट्स के जो फैसले होते हैं वो इस मार्केट में बहुत ज्यादा असर अंदाज होते हैं। उसके अलावा इसके जो पार्टिसिपेंट्स हैं, कमर्शियल बैंक्स हैं। सेंट्रल बैंक्स हैं। यानी सेंट्रल बक्स और कमर्शियल बैंक्स क्या है? पाकिस्तान में सेंट्रल बैंक जैसे स्टेट बैंक हो गया। ठीक है? नेशनल बैंक है। उसके अलावा कमर्शियल बैंक्स हैं। पाकिस्तान में एमसीबी है, एचबीएल है, इंडिया के जो
बैंक्स हैं आप वो देख लें। यूरोप के बैंक्स हैं। इन सब ने अपना पैसा इस मार्केट में लेते हैं और फॉरेक्स मार्केट में लगाते हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनीज़ हैं। ऑटोमोबाइल्स की कंपनीज़ हैं, टेलीकॉम की कंपनीज़ हैं। उनके पैसे भी इसी मार्केट में लगे होते हैं। ठीक है? तो अब आप बैंक को पैसा देते हैं। पाकिस्तान में खास तौर पे बात करता हूं। पाकिस्तान में लोग क्या करते हैं कि बैंक से सेविंग्स सेविंग अकाउंट्स कम खुलवाते हैं। नहीं लेते वहां से पैसा। ठीक है? रिलीजियस वजहात की वजह से नहीं लेते। अच्छा करते क्या है कि
पैसा संभालने के लिए बैंक में रख देते हैं। अब बैंक उन पैसों को क्या करता है? बैंक वो पैसे इन्वेस्ट करता है डिफरेंट आगे बिनेसेस में। उनमें से सबसे बड़ा जो पोर्शन होता है बैंक्स का वॉरक्स मार्केट में होता है। ठीक है जी? ये बात आपने याद रखनी है। ये लोग इसी को स्मार्ट मनी कहा जाता है। यही लोग स्मार्ट मनी है। जो बैंक्स होते हैं यही स्मार्ट मनी है। इसमें छोटे पोर्शनंस भी होते हैं। बड़े भी होते हैं। सेंट्रल बैंक्स कमर्शियल बैंक्स इसका बड़ा पोर्शन रखते हैं। उसके बाद कॉरपोरेशन आ जाती हैं। कॉरपोरेशन क्या
होती स्टेट लॉक भी एक कॉरपोरेशन है। जुबली भी एक कॉर्पोरेशन है। ऊत काफिल भी एक कॉरपोरेशन है। यानी वो ऐसी ऐसी फर्म्स ऐसे इदारे जिनको आवाम अपना पैसा देती है। जैसे इंश्योरेंस कंपनीज़ होती है। अब इंश्योरेंस कंपनी ने अपनी इंश्योरेंस तो कर ली। आपने उसको पैसा भी दे दिया। अब हर साल हजारों लाखों अफराद उनको पैसा देते हैं। तो वो पैसा कहां जाता है? वो पैसा इसी मार्केट में आ जाता है। ठीक है? इसलिए इस मार्केट का हुजम इतना बढ़ गया ना कि यहां भी लोगों ने पैसे दिए। गवर्नमेंट के पैसे भी हो गए। फिर
यहां पे लोगों ने अपने पैसे दिए। कमर्शियल बैंक्स के पास आ गए। सेंट्रल बैंक्स के पास, कमर्शियल बैंक का पैसा आ गया। ठीक है? ये सब पैसा कहां जाएगा? फॉरेक्स मार्केट में। उसके बाद हजारों लाखों की तादाद में लोग इंश्योरेंस कंपनी को अपना-अपना पैसा देंगे। ठीक है? यह पैसा आखिरकार यहां पे आ जाता है। उसके बाद इन्वेस्टमेंट फंड्स होते हैं। यानी ऐसी कंपनीज़ होती हैं जो लोगों को इन्वेस्टमेंट के आइडियाज देती हैं। उनको गाइड करती हैं या उनके फंड्स को मैनेज करती हैं। ठीक है? तो लोग उनको पैसे देते हैं। वो उसका कारोबार करते हैं।
जैसे इसी के धोखे में तो लोग आ जाते हैं ना आमतौर पे। यानी फेक जो कंपनीज़ होती हैं इन्वेस्टमेंट फंड्स जो फेक होते हैं। वो कहते हैं हमारी ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। पैसे देते हैं। दिन बाद डबल हो के आ जाएंगे। तो लोगों को फंसाते हैं। लेकिन यहां पे जो जेन्युइन जो कंपनीज़ होती हैं वो लोगों से पैसे लेती है। इन्वेस्टमेंट फंड्स होते हैं। इंडिविजुअल के भी होते हैं। जैसे एक कंपनी है एक प्राइवेट लिमिटेड है। उसके पास बहुत सारा पैसा है। उसने पैसा कहां लगाना है? अपनी जरूरत के अलावा फॉरेक्स मार्केट में ले
आते हैं। तो इसका पैसा भी यहां पे आ गया। उसके बाद बहुत बड़ी तादाद में ट्रेडर्स जिसको हम रिटेलर्स कहते हैं। इसका पैसा भी यहां पे आता है। अब इसका पैसा यहां पे कैसे आता है? मेरे पास $1000 है। मैंने भी इन्वेस्ट कर दिया। आपके पास 2000 है। आपने इन्वेस्ट कर दिया। हम जैसे लाखों लोग हैं। उन्होंने भी इस मार्केट में इन्वेस्ट कर दिया। तो ट्रेडर्स की पाकिस्तान का नंबर आप देखें तो हैरान रह जाते हैं कि करोड़ों लोग क्रिप्टो में काम कर रहे हैं। ठीक है? ठीक है? ये तो गवर्नमेंट के फिगर्स हैं। इस
तरह इन सब का होता है ये आवाम का पैसा है। लेकिन मुख्तलिफ आप ये समझे कि ये नहरे हैं। ठीक है? ये मुख्तलिफ दरिया है तो वहां से होता हुआ इस समंदर में आ जाता है। उसकी वजह से होता ये है कि इसका हुजम इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि जो दूसरी दुनिया की किसी भी फाइनेंसियल मार्केट से बहुत ज्यादा है। समझ आ गई यहां तक आपको बात? तो ये वो चीजें हैं जो इस मार्केट को चला रहे होते हैं और इनको कहा जाता है इन सबको कलेक्टिवली कहा जाता है कि यह स्मार्ट मनी है।
ये ठीक है? और यह रिटेलर है। दो तरह की कैटेगरीज है। अब यह बात आपने याद रखनी है कि स्मार्ट मनी जो है ना यह कम है। देखने में कम है। ठीक है? देखने में कम क्या है कि मुमकिन है कि सारे मिला के ये 100 फर्म्स हो। ठीक है? दूसरी तरफ ट्रेडर्स जो है वो 1000 हो। लेकिन इनकी ताकत बहुत ज्यादा है। यही इस मार्केट में मूव करते हैं। क्यों ताकत इनकी ज्यादा है? कि ये तादाद में तो कम होंगे। यानी कि सेंट्रल बैंक्स कितने होंगे? मुमकिन है 500 सेंट्रल बैंक्स काम कर रहे हो।
उसके अगेंस्ट जो ट्रेडर्स हैं वो तो 5 लाख होंगे। बहुत ज्यादा ट्रेडर्स होंगे इंडिविजुअल। तो ठीक है? तो देखने में इनकी तादाद कम होती है लेकिन इनके पास पैसा बहुत ज्यादा होता है। तो इनकी पावर बहुत ज्यादा है। दूसरी तरफ जो रिटेलर्स हैं देखने में तो इनकी तादाद ज्यादा है लेकिन इनकी पावर बहुत कम है। इनकी पावर कम है। ये मार्केट को मूव नहीं करवा सकते। ठीक है? लेकिन स्मार्ट मनी जो है वो मार्केट को मूव करवा सकती है इस अपने पैसे के दौर पे। अच्छा आमतौर पे एक मिसकंसेप्शन ये भी है। समझा ये जाता
है कि ये स्मार्ट मनी है। ठीक है? और इस मार्केट में जो मुकाबला हो रहा है वो ये हो रहा है कि स्मार्ट मनी। ठीक है जी? वर्सेस रिटेलर। यह समझा जाता है कि जी बस इनको मारने के लिए आए हैं। ऐसा नहीं होता। असल गेम जो है ना वो इनकी आपस की है। स्मार्ट मनी ही आपस में एक जंग की हालत में कह लें या एक कारोबार की हालत में कह ले वो आपकी मर्जी है। ठीक है? जैसे मार्केट में आप जाते हैं। अब एक हम कहते हैं कि होलसेल की मार्केट है। उस होलसेल
की मार्केट में क्या होता है कि कुछ बड़े सरमाएदार होते हैं। 2025 दुकानें बड़े तगड़े लोगों की होती हैं जिन कार्बो में कारोबार है। अब उसी मार्केट में बाहर आके एक रेडी वाला खड़ा हो जाता है। वो कहता है जी इन सब ने जो दुकानें बनाई है ना मुझे लूटने के लिए बनाई है। ठीक है कि मैं भी कपड़े का कारोबार कर रहा हूं रेडी पे रख के। इनके भी बड़े-बड़े गोदाम है। ये भी कपड़े का कारोबार कर रहे हैं। तो इनका मकसद तो बस मुझे लूटना रह गया सिर्फ। तो ऐसा नहीं है। वो तो
उनके वो तो नोटिस भी नहीं करेंगे उस बंदे को। तो इसी तरीके से यहां पे क्या होता है कि स्मार्ट मनी सिर्फ रिटेलर्स को मारने के लिए नहीं है। ना यह मुकाबला इनके साथ है। कैसे हो सकता है मुकाबला? हां होती है। लिक्विडिटी सी्स होती हैं या जहां पे इनके अब एक ट्रेडर है। ट्रेडर है। ठीक है? एक जगह पे बहुत सारे रिटेल ट्रेडर्स के स्टॉप लॉसेस लगे हुए हैं। प्राइस आती है वहां पे उनको उड़ाती है। उनको बाहर करती है ताकि प्रॉफिट में हिस्सेदार ना बने। ठीक है? ठीक है? फिर प्राइस अपनी मूवमेंट अपने
डायरेक्शन में अपनी मूवमेंट देती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि वो इसी पे चल रहे हैं। वो हमारे $ पे हमारे $000 पे स्मार्ट मनी काम कर रही है। ऐसा नहीं होता। होता क्या है कि इनकी आपस की स्ट्रेटजीस होती हैं। ये आपस में एक दूसरे से मुकाबला कर रहे हैं। अब इनके जो फुटप्रिंट्स होते हैं उसको देख के हम पैसा बना सकते हैं। ठीक है? ये दो बड़े ग्रुप आपस में लड़ रहे हैं। फॉर एग्जांपल अब उनकी लड़ाई से जो चीजें वो छोड़ के चले जाते हैं वो हम उठा लेते हैं। तो
हमारा किरदार इतना है और इतना ही रहना चाहिए। इससे बढ़ के आप इसके मुकाबले में तो आ नहीं सकते। आपके पास फॉर एग्जांपल $00 है। बड़ी अच्छी रकम है आपके पास। $00 है तो क्या आप किसी कमर्शियल बैंक का मुकाबला कर सकते हैं इस मार्केट में? नहीं कर सकते ना? उनके तो एक दराज में पड़े होंगे $00। ठीक है? तो आप नहीं लड़ सकते उनके साथ। तो उसकी बजाय क्या करना है? करना यह है कि जो स्मार्ट मनी के बड़े ग्रुप्स कर रहे हैं। ठीक है? इनके जो फुटप्रिंट्स होंगे उससे आपने प्रॉफिट बनाना है। अब
ये कैसे करना है? ये इंशाल्लाह आगे चलके जो हमारी स्ट्रेटजी है उसमें आप पढ़ेंगे। तो इतनी बात याद रख लें कि स्मार्ट मनी और ट्रेडर्स होते हैं इस मार्केट में। और जो यह करेंगे उसके फुटप्रिंट्स को हम फॉलो करेंगे और जिस तरह वो प्रॉफिट बनाएंगे उस तरह कुछ ना कुछ हिस्सा हम भी अपना ले लेंगे यहां से। अच्छा अब यह सब चीज आपको बता दी कि फॉरेक्स मार्केट क्या चीज है? फिर यह बताया कि फॉरेक्स मार्केट में किन चीजों का कारोबार होता है। स्मार्ट मनी क्या होती है और बाकी चीजें क्या होती है? आप इसमें
कैसे काम कर सकते हैं? आपको इधर किसने या मुझे इधर किसी ने कुछ नहीं दिया? चलिए मैं आपको नहीं कहता मुझे किसने घुसने दिया फॉरेक्स मार्केट में। ठीक है? कैसे काम करती है ये? इस पे बात करते हैं। देखिए होता यह है कि मेरे पास तो इतने कम पैसे हैं कि मुझे इस मार्केट की एक्सेस नहीं दी जा सकती। ठीक है? ये ये फर्ज करें मेन फॉरेक्स मार्केट है। ठीक है जी। यह मैं हूं। अब मेरे पास इतना आप पुराने टाइम पर चले जाए ना अगर आपसे कुछ तहया पीछे चले जाए तो स्टॉक मार्केट्स जो
होती थी वहां पर सिर्फ सरमाएदार ही जा सकते थे जिनके पास अच्छे खासे स्ट्रांग जो होते थे पैसे मश हिसाब से वही लोग उसमें कारोबार कर सकते थे वही लोग वहां पर रजिस्टर कर सकते थे ये तो अब ऑनलाइन हुआ है तो हर बंदा जिसके पास है $10 है वो भी आ जाते ठीक है अच्छी ओपोरर्चुनिटी है ना कि एक अच्छी बड़ी मार्केट में आपको अपर्चुनिटी मिल रही है पहले ऐसा नहीं होता था अब ये काम कैसे करता है अब ये काम इस तरीके से करता है कि मेरे पास है फॉर एग्जांपल $1000 ठीक है
$1000 अब मैं चाहता हूं कि मुझे इस मार्केट की एक्सेस मिले जो कि नहीं दी जाती क्योंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं है। मैं $1000 से क्या खरीदूंगा, क्या बेचूंगा, एक रश पैदा करूंगा मैं इस जगह पे। ठीक है? इससे बेहतर है कि मुझे उसकी एक्सेस ना दी जाए। अब होता यह है कि इस मार्केट में आने के लिए ब्रोकर्स को लाइसेंस दिए जाते हैं। ब्रोकर इन्वॉल्व हो जाता है। ब्रोकर को लाइसेंस दिए जाते हैं। ब्रोकर क्या करेगा कि किसी भी जिस मुल्क से वो रजिस्टर हो रहा है उस मुल्क की जो अथॉरिटी है, जो
रेगुलेट रेगुलेटरी अथॉरिटी है, उसको पैसे देगा। ठीक है? वो उसको लाइसेंस दे देंगे। ठीक है? जी आप यह ब्रोकर है। इसका नाम है एक्स व जेड। ठीक है? इसको एक्सेस मिल जाती है मेन मार्केट की। अभी आप समझे मेन सर्वर की एक्सेस कह लें आप मेन मार्केट की एक्सेस कह लें एक्सचेंज की एक्सेस कह लें उनको इस एक्सचेंज की एक्सेस मिल गई कि ये ब्रोकर जो है इसको लाइसेंस दे दिया ये अब रजिस्टर्ड है हमारे साथ रेगुलेटेड है ये हमारे साथ काम कर सकता है अब यह ब्रोकर क्या करेगा इसने तो यहां पे पैसे जमा
करवाए एक एक रेगुलेशन का एक सर्टिफिकेट ले लिया अब यह क्या करेगा यह आसपास जो मेरे जैसे लोग हैं जिनको यहां पे डायरेक्ट एक्सेस नहीं मिलती थी यह उनसे पैसे लेगा और एक्सेस दे देगा यह कहेगा कि $1000 का अकाउंट मेरे साथ बनाएं मुझे दें $1000 मेरे पास रखें मैं आपको इसकी आगे एक्सेस देता हूं ठीक हो गया फिर यहां से इसी तरह के जैसे मैंने यहां से एक्सेस ली है इस तरह के यहां से हजारों लोग और होंगे। ठीक है? जिनके पास छोटी अमाउंट्स हैं जो इस मार्केट में ट्रेड करना चाहते हैं। अब यह
क्या करेंगे? यह सब लोग अपना पैसा ब्रोकर के हवाले करेंगे। ब्रोकर क्या करेगा? इन सबको इन सब से पैसे लेगा और उसके जवाब में इन सबको यहां पे एक्सेस दे देगा। अब आपको समझ आ रही होगी कि काम कैसे करती है। यानी डायरेक्ट मैं अप्रोच नहीं कर सकता। मैं ब्रोकर को पैसे दूंगा। ठीक है? मैं दूंगा। मेरे जैसे हजारों लोग देंगे। ब्रोकर उनसे पैसे पकड़ेगा और यहां पे इनको एक्सेस दे देगा। यह क्यों देगा ब्रोकर एक्सेस इनको? क्योंकि अब इस मार्केट का मैं मुझसे कोई डायरेक्ट लेना देना नहीं है। ठीक है? मेरा जो भी मसला
परेशानी है वो ब्रोकर के साथ है। मैं ब्रोकर को पैसे दूंगा। ब्रोकर यहां पर ट्रेड मेरी ओपन करवाएगा। उसमें लॉस होगा तो मेरे अकाउंट से पैसे कट जाएंगे। अगर मुझे प्रॉफिट होगा तो मेरे अकाउंट में पैसे जमा हो जाएंगे। ब्रोकर इसमें अपनी फीस लेगा। अब फीस किस सूरतों में लेता है, कैसे लेता है यह भी आपको चल के आगे बताते हैं। यहां तक मुझे उम्मीद है कि आपको यह कांसेप्ट क्लियर हुआ होगा कि काम कैसे करती है मार्केट? ब्रोकर आपको एक्सेस ले रहा है। आपसे पैसे ले रहा है। ट्रेड चलती है आगे चलके। अब उस
ट्रेड में फायदा होता है तो यह आपको जमा कर देगा। आपके अकाउंट में नुकसान होता है तो यह आपके अकाउंट से माइनस कर देगा। समझ आ गई? 22 साल का फैसला आप खुद करेंगे। ब्रोकर उसमें कोई जिम्मेदारी नहीं लेगा। अब होता यह है कि एक ब्रोकर तो नहीं है। इस जैसे हजारों ब्रोकर हैं। सिर्फ दुबई में 5 7000 ब्रोकर हैं। ठीक है? अच्छा रेगुलेटेड जॉइ जो नॉन रेगुलेटेड है वो तो और भी ज्यादा होंगे। बहुत ज्यादा होंगे। अच्छा अब होता ये है कि इसके इससे अब इसमें कंपटीशन की एक फिजा बन जाती है। मुकाबले आ
जाता है ना। यानी एक ब्रोकर यहां पे खुल गया। फिर साथ एक और ब्रोकर खुल गया। फिर एक और ब्रोकर खुल गया। सब अपना काम कर रहे हैं। तो फिर ये क्या करते हैं? ये आप ऑफर करते हैं कि हमसे बड़ी लेबेज दे दें। यानी मैं यहां पे इस जगह पे हूं। मैंने अकाउंट ओपन करना है। तो यह ब्रोकर मुझे कहता है कि आपको मैं लेवरेज दूंगा अप टू 2000 यानी $1 अगर आप इन्वेस्ट करेंगे तो आपको मैं उसको 2000 गुना बढ़ा दूंगा आपकी बाइंग पावर को ताकि आप इजीली ज्यादा से ज्यादा माल खरीद सकें।
यह कहता है जी मैं आपको 1000 की लेवरेज दूंगा। यह कहता है जी मैं यूरोप में काम करता हूं या मैं अमेरिका में काम करता हूं। मेरे पे बहुत सारे रेगुलेशनंस हैं। मैं आपको सिर्फ और सिर्फ 100 की लेवरेज दे सकूंगा। लेकिन इसके पास रेगुलेशन स्ट्रंग है। इसके लेसेंस स्ट्रंग है। ठीक है? तो इस तरह क्या होता है? ये ब्रोकर क्यों ऑफर करते हैं? लोग ये पूछते हैं ना कि ब्रोकर को क्या फायदा लेवेज देके? तो ब्रोकर को फायदा ये होता है कि वो मुझे अट्रैक्ट कर रहा है कि मैं इसके पास जाऊं। अब यह
मुझसे पैसे लेगा और मेरी ट्रेड्स को यहां पर एग्जीक्यूट करेगा। अब यहां पर फिर यह एक बहुत लंबा टॉपिक है। ब्रोकर पहले भी आपको क्लास कर देंगे। यह लंबा टॉपिक है कि ब्रोकर इसका कैसे नाजायज फायदा भी उठाता है। अब आप इसके पास चले गए। अब इसके पास रेगुलेशन स्ट्रांग नहीं है। एक आधा पेपर है इसके पास इसने कोई रेगुलेशन नहीं दी हुई। तो फिर ये क्या करेगा? यह एक बी बुक बना लेगा। एक होगी ए बुक एक होगी बी बुक। ए बुक वो होती है कि जैसे आपने यहां से ऑर्डर लगाया आपने बाय किया।
तो इसने वही ट्रेड आपकी आगे भेज दी। ठीक है? अब उसमें लॉस हुआ, प्रॉफिट हुआ, वापस आपको दे देगा। एक होता है बी बुक। जैसे लोग पाकिस्तान में भी आ तौर पर टैक्स बचाने के लिए कर रहे होते हैं कि इसने आपको आपने बाय का ऑर्डर लगाया। इसको पता है कि इसमें ये बंदा जो है ना इसकी हिस्ट्री कोई नहीं लॉस करता है। उसने ऑर्डर आगे नहीं भेजा। बल्कि यहीं पे आपकी एक फेक एंट्री लगा दी बाय की। उसमें जैसे ही लॉस होगा आपका ये सारे पैसे खुद रख लेगा। हालांकि आगे आपकी ट्रेड गई ही
नहीं थी। यहीं पे आपने लॉस किया प्रॉफिट होगा तो पास से दे देगा। थोड़ा बहुत है लेकिन इसको पता है इवेंचुअली आपने सारा उड़ा देना है पाकिस्तान में इंडिया में बांग्लादेश में जो खास तौर पे ये रीजन है यहां पे लोग बहुत नुकसान करते हैं टिकते नहीं है इस वजह से नुकसान करते हैं अब उसमें क्या होता है कि वो फिर बी बुक में आ जाता है यानी सारे का सारा प्रॉफिट जो था जो आगे एक्सचेंज में जाना चाहिए था ऐसी जगह पे जाना चाहिए था स्टॉक मार्केट में या जो भी फॉरेक्स मार्केट है यहां
पे जाना चाहिए था लेकिन वो ये सारा खुद रख लेता है इसको कहते हैं बी बुक यानी आगे शो ही नहीं करता आपका ऑर्डर सारा कुछ आपका लेन देन खुद ही चला लेता है और कभी दिल करता है नॉन रेगुलेटेड ब्रोकर सारे पैसे लेके भाग भी जाता है इसलिए आपने ब्रोकर बहुत एतियात चूज़ करना होता है इस बारे में इंशा्लाह आपको गायब गायब बताते रहेंगे एक मैं बात आपको बताऊं कल मैंने बताया था कि हम कोई ब्रोकर रिकमेंड नहीं करते ना हमारी कोई जिम्मेदारी है। ठीक है? मैं आपको सिर्फ तरीका बता दूंगा ब्रोकर कैसे चूज़
किया जाता है। कहां उसकी रेगुलेशन देखी जाती है या किस तरीके से या जो आपको बेहतर लगे आप उस पे काम करें। लेकिन हमारी कोई रिकमेंडेशन नहीं है। कल को कोई अच्छा ब्रोकर भी बंद हो सकता है। भाग सकता है। आपके विड्रॉल्स आपके डिपॉजिट्स को रोक सकता है। तो फिर मसला बन जाता है। इसलिए हम इस इस मामले में नहीं पड़ते। हम कहते हैं कि अपने मुल्क के हिसाब से रेगुलेटेड ब्रोकर के साथ काम करें। बस खत्म हो। अच्छा जी। तो यह मैंने छोटा सा कांसेप्ट आपको दे दिया कि ब्रोकर कैसे काम कर रहा होता
है। यह सब चीजें ना अब इंट्रोडक्शन है। इसकी डिटेल्स आगे फिर हम जब सालों आप हमारे साथ रहेंगे महीनों के हिसाब से साथ रहेंगे तो इंशाल्लाह कुछ ना कुछ डेली डिस्कस होता ही रहता है। हाउ ब्रोकर मेक मनी। अब ब्रोकर को कैसे पैसे बचते हैं। ये वो कांसेप्ट आ गया कि यह ब्रोकर की बिल्डिंग है। यह ब्रोकर है। ठीक है जी। अब ब्रोकर मुझसे पैसे लेता है और आगे एक्सचेंज में भेज देता है। यहां पे जो प्रॉफिट लॉस होता है, वह वापस इधर दे देता है। यानी यह एक मिडिल मैन का काम कर रहा है।
यह मिडिल मैन है ब्रोकर। ठीक है? ठीक है? जो आपके पैसे लेता है, आगे लगाता है, जो नुकसान नफा होता है, वो आपको वापस कर देता है। इसका ये काम है। अब ये कैसे पैसे कमाता है? ब्रोकर उसमें से क्या फायदा होता है? ब्रोकर का फायदा आपको मैं समझा देता हूं। पहले ये समझ लें। अच्छा ब्रोकर जो है ना पैसे कमाता है। स्प्रेड की शक्ल में अब स्प्रेड क्या होता है? तो अब ये समझें। ये बड़ी जरूरी चीज है। ये वो चीज बता रहा हूं आपको जो आम तौर पे लोग ट्रेडिंग कर रहे होते हैं।
साल साल से पता ही नहीं होता। इस चीज के बारे में कुछ पता नहीं है बिट क्या है? आस्क क्या है? ना भी पता हो कोई बात नहीं। स्ट्रेटजी आपको आती है। बाय सेल करें, पैसे कमाएं। लेकिन जाहिर है अगर आप एक प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। आपको छोटी-छोटी बारीकियों का पता होना चाहिए। बिट प्राइस क्या होती है? अब देखें जी आपके पास एक चार्ट है। ठीक है जी। यह चार्ट है। आपके पास यहां पर प्राइस आ रही है 100। $ प्राइस आ रही है। आप कहते हैं कि जी मैं जो चीज खरीद रहा हूं। ठीक है?
आप कोई चीज खरीद रहे हैं ना फॉर एग्जांपल यह गोल्ड है। आप यहां पे $ की रेट पे आप खरीदने पे तैयार हो गए। तो इसे कहते हैं बिड प्राइस। द प्राइस अ बयर इज़ विलिंग टू पे फॉर एन एसेट। आप किसी ने कंटिन्यू पिस्तल तो नहीं रखी। ना आप खुद कह रहे हैं कि मैं यहां से बायर हूं। मैं ऐसे खरीद सकता हूं। तो जिस रेट पर आप खरीदने पर तैयार हो जाते हैं। आप एक गाड़ी खरीदते हैं। आप जाते हैं बंदा कहता है जी गाड़ी जो है जी ₹14 लाख की है। आप कहते
हैं नहीं थोड़ा कम करो। 13 देते हैं। आपको कहता है ठीक है जी। तो 13.5 लाख जो आपने उसका रेट लगाया था कि जी मेरी तरफ से यह प्राइस है उसे कहते हैं बड प्राइस। ठीक है कि आप रेडी है इतने पे खरीदने पे। तो जब भी आप कोई चीज खरीदते हैं और अपनी मर्जी से वहां पे पैसा देने पे तैयार होते हैं। उसे कहा जाता है कि यह बिड प्राइस है। द प्राइस अ बायर इज़ विलिंग टू पे फॉर एन एसेट। कोई भी एसेट आप खरीदते हैं, गाड़ी है, घर है, बंगला, प्लाट जो भी
आपके पास है, सोना है, जब आप उसको अपनी मर्जी से कहते हैं कि मैं इतने पैसे दूंगा या मैं रेडी हूं इतने खरीदने पे तो यह आप कहते हैं इसको कहते हैं बड प्राइस। अब आस्क प्राइस क्या होती है? आपने कोई चीज बेचनी है। ठीक है? आपकी गाड़ी है। आप कहते हैं कि मैंने जी इसको बेचना है इस जगह पे इस रेट पे। रेट है आपका जैसे मैंने बताया। आप कहते हैं ₹15 लाख की बेचनी है गाड़ी पे। ठीक है जी। अब ₹15 लाख की आपने गाड़ी बेचनी है। तो, यह आप मांग रहे हैं इतने
पैसे। इसे कहते हैं आस्क प्राइस। द प्राइस अ सेलर इज़ विलिंग टू एक्सेप्ट फॉर एन एसेट। इससे नीचे आप कहते हैं नहीं। बस यह लास्ट है। यह बिल्कुल आखरी है। आप यहां पर आपने शुरू की थी बेचने। आप थे मैं 70 लाख की बेचूंगा। ठीक है? लेकिन कम करते करते चले आप 15 लाख पे आ गए। तो यह आपकी आस्क प्राइस है कि इससे नीचे मैंने नहीं बेचना। लास्ट आपकी प्राइस ये है। इसको कहा जाता है आस्क प्राइस। तो आस्क और बड के दरमियान जो डिफरेंट होता है, जो डिफरेंस आ रहा है, उसे हम कहते
हैं स्प्रेड। अभी आपको समझाऊंगा। अभी आपको सही समझ नहीं आई। अभी आपको डिटेल से समझाने लगा। ठीक है जी? अब इसको समझें। इतनी बात समझ आ गई कि आस्क क्या होता है और बिड क्या होता है। ठीक है? बिड प्राइस वो प्राइस जो आप देने को तैयार हैं। आस्क प्राइस वो प्राइस जो आप कहते हैं कि इससे काम पे मैंने नहीं बेचना। ठीक है जी। उसकी जो आप मांग रहे हैं प्राइस उसको कहा जाता है आस्क प्राइस। अब देखें जी ये चीज ब्रोकर ब्रोकर कैसे पैसे कमाता है? ब्रोकर पैसे ऐसे कमाता है कि आप $
पे खरीदने पे तैयार हैं। आपकी बिट प्राइस है $100। ठीक है जी। आप यहां से खरीदने पे तैयार हैं। आप बाय का बटन दबा देते हैं। यहां पे बटन आ रहा होता है बाय। आपने बाय का बटन प्रेस किया। आपकी जो ट्रेड एग्जीक्यूट होगी ना जो रेट होगा वो आगे फॉर एग्जांपल वो ओपन हो जाता है ₹11 पे ₹101 पे आपने 100 पे बटन दबाया लेकिन आपकी ट्रेड एग्जीक्यूट होती है 101 पे यहां पे जाके ठीक है ये जो $1 का डिफरेंस आ रहा है ना आपकी प्राइस में बिट प्राइस में जो $1 का डिफरेंस
आ रहा है इसे कहते हैं स्प्रेड ठीक हो गया ये स्प्रेड होता है असल में ये स्प्रेड क्या है डिफरेंस आ रहा है थोड़ा सा यानी आपने कहा था कि मैं 100 पे तैयार हूं ब्रोकर आपकी तरफ से उस माल को खरीद लेगा लेकिन 101 का खरीदेगा क्यों 101 का खरीदेगा वो मैं ये आपको एग्जांपल सिर्फ समझाने के लिए दे रहा हूं इतना ज्यादा ज्यादा डिफरेंस नहीं होता एक डॉलर का छोटा सा होता है डिफरेंस पैसों के हिसाब से होता है यानी सेंट्स के हिसाब में होता है इतना ज्यादा नहीं होता तो वो पिप्स के
हिसाब में लेकिन पिप्स अभी मैंने पढ़ाया नहीं इसलिए बता नहीं रहा तो यहां से आपको मिल जो डिफरेंस आ रहा है यह ब्रोकर ने कमा लिए अब आपकी ट्रेड बेशक आपने जो $ से खरीदा था वो 101 से आपको मिला 101 वाला बेशक चला जाए 1110 पे बेशक वापस आ जाए 90 पे यानी आपको प्रॉफिट हो जाता है आपने एक चीज़ खरीदी वो महंगी हो गई आपको प्रॉफिट हो गया या वह लॉस में चली गई आपको नुकसान हो गया ब्रोकर के पास यह एक डॉलर है बस जो उसने आपसे फ़ौरन से कमा लिया। अब ब्रोकर
की तरफ से आप आ रहे हैं। आपको प्रॉफ़िट होता है, लॉस होता है, उससे कोई लेना देना नहीं। समझ आ गई बात? और आस्क प्राइस क्या होता है? या स्प्रेड डाउन साइड कैसे चलता है कि आपने गोल्ड खरीदा था $00 का। यही वाली इसी की बात कर लेते हैं। 100 पे आपने खरीदा था। प्राइस चली जाती है 110 पे। आप कहते हैं जी मैं यहां से बेचूंगा अब। ठीक है? आपने आस्क प्राइस करा दी। आपने कहा आपने सेल का बटन दबा दिया। सिंपल रखते हैं। ज्यादा नहीं डिटेल में जाते। आपने सेल का बटन दबा दिया
कि मैंने यहां पे बेचना है जी। अब ठीक हो गया। आपने बेचा आपका आपने बेचा था 110 पे। लेकिन आपकी ट्रेड स्टार्ट होगी 109 से। ठीक है जी। 109 से आपकी ट्रेड स्टार्ट होगी। क्यों? वह $1 जो कमीशन था या जो कमाई करनी थी ब्रोकर ने उसने आपकी ट्रेड भी तो आगे लगवाई है ना। ना आपको तो एक्सेस कोई नहीं दे रहा था वहां पे। तो आपको एक्सेस किसने दिलवाई है? ब्रोकर ने। उसके बदले ब्रोकर आपसे कुछ ना कुछ तो कमाएगा। तो यहां से ब्रोकर ने आपका जो रेट था 110 उसको खुद ब खुद कम
करके 109 का बेच दिया और नीचे आ गई प्राइस। ठीक है? अब नीचे आएगी तो आपको फायदा है। ऊपर जाएगी आपको नुकसान है। क्योंकि आपने जिस जगह से चीज बेच दी थी जितना नीचे उसका रेट गिरेगा शॉर्ट पोजीशन आपने ली हुई है उतना आपको फायदा है। अब आपको फायदा हो या आपको नुकसान हो। ब्रोकर से कोई लेना देना नहीं। उसने जो $1 आपसे कमाना था उसने यहीं पे शुरू में कमा लिया। इसकी एग्जांपल आप वैसे देखें। आप एक बंदे को कहते हैं कि जी मैंने प्लॉट लिया था ₹50 लाख का। ठीक है? प्लॉट की एग्जांपल
आपको अक्सर देता रहूंगा क्योंकि इससे आपको बात जरा आसानी से समझ आ जाएगी। ₹50 लाख का आपने प्लॉट खरीदा। आपने उसको कहा जी कि उसको बेच दो। ठीक है? मैंने इससे काम पे नहीं बेचना। अच्छा वो जो एजेंट है या जो ब्रोकर है वो आपको कहता है कि जी इसमें से मेरा कमीशन भी होगा। ₹1 लाख मेरा कमीशन होगा। आप उसे कहते हैं जी मैंने कमीशन नहीं देना। मुझे ₹ लाख या 50 लाख ही चाहिए। वो क्या करता है? वो कहता है ठीक है मैं महंगा करके बेच लूं। आप कहते हैं जी बेच लो। उसने
बेच दिया इसको ₹52 लाख का। ठीक है? ₹2 लाख में 2 लाख उसने खुद रख लिए। ₹ लाख आपको दे दिए। यह अक्सर ये तो एक कॉमन चीज है ना। कॉमन प्रैक्टिस है पाकिस्तान में तो बहुत ज्यादा। तो इस तरीके से अब यह ₹2 लाख क्या था? यह उसने कमा लिए। ठीक है? और आपके पैसे आपको दे दिए। तो बस इसी तरीके से यहां पे जब भी आप कोई बाय की ट्रेड लगाते हैं आपने लगाई थी $1 से तो मुमकिन है वो जाके हिट हो आपकी 1.1 यानी $10 पैसे से 10 पैसे बराबर कमा लेगा
बाकी आप जो फायदा होगा सारे का सारा आपका होगा तो बस इस तरीके से आपको पता चल गया कि बिट प्राइस क्या होती है आस्क प्राइस क्या होती है आपको जब आप चार्ट ओपन करेंगे MT5 जब हम पढ़ेंगे तो उसमें MT5 में दो लाइंस आपको नजर आ रही होती है ऐसे एक बिड प्राइस होती है एक आस्क प्राइस होती है ठीक है इस वो इनका इनके दरमियान जो डिफरेंस आ रहा होता है वो स्प्रेड होता है ब्रोकर का यानी आस्क प्राइस माइनस बड प्राइस ये मैं आपको दोबारा रिपीट करवाऊंगा जब हम MT5 पे जाएंगे। वहां
पे आपको मज़ बेहतर समझ आ जाएगा। अभी आपको एक कांसेप्ट मिल गया है कि ब्रोकर कैसे पैसे कमाता है। इसके अलावा भी ब्रोकर पैसे कमाता है। यानी सम टाइम ऐसा होता है कि ब्रोकर आपको एक अकाउंट ऑफर करता है। इसे कहते हैं ज़ीरो स्प्रेड। यानी ब्रोकर आप कहते हैं कि मैंने ₹100 पे बटन प्रेस किया था तो 100 से ही मेरी ट्रेड स्टार्ट हो। ठीक है? ऐसा ना हो कि मैंने ₹100 की कोई चीज़ खरीदी है। आपने मुझे ₹101 की देके दी है। तो फिर आपने तो यहां से पैसे कमा लिए। तो मैं चाहता हूं
कि मैं 100 पे हिट करूं तो 100 पे ही मेरी बाइंग स्टार्ट हो। तो ब्रोकर इस पे भी राजी है। वो कहता है ठीक है यह कर लें। लेकिन एक ट्रेड के हिसाब से फिक्स कमीशन है। मिसाल के तौर पे आपने यह बाय किया तो मेरा फिक्स्ड कमीशन है ₹1। यह आपको बाय हो, सेल हो, ना हो, मैं इतना कमीशन फिक्स करूंगा। आपको उस तरीके से भी ठीक है। लोग उस पर भी काम करते हैं। तो डिफरेंट अकाउंट्स टाइप्स होती हैं। यह फिर आप जब ब्रोकर के अकाउंट बनाएंगे, वैसे तो लोगों ने बनाए होते हैं
पहले ही तो आपको पता चल जाएगा। अब आ जाते हैं जी कि मार्केट काम कैसे करती है? ब्रोकर का तो आपको बता दिया। मार्केट ओपन रहती है हफ्ते में पांच दिन। ठीक है? पांच दिन ब्रोकर्स ओपन रहते हैं और तकरीबन 24 घंटे ही ओपन रहते हैं। आमौर पे ब्रोकर एक घंटे के लिए रात को बंद होता है। लेकिन मार्केट 24 घंटे चलती रहती है। अच्छा अब स्टार्ट कैसे होता है? सुबह को सिडनी हमारे पाकिस्तान के हिसाब से बताने लगा हूं। सबसे पहले सिडनी सेशन स्टार्ट होता है। ठीक है? इसको हम एशियन सेशन भी कहते हैं।
सिडनी स्टार्ट होता है। उसके बाद अब यह चल रहा होता है सिडनी। इससे पहले टोक्यो भी स्टार्ट हो जाता है। ठीक है? टोक्यो चल रहा होता है। लंदन सेशन स्टार्ट हो जाता है। लंदन चल रहा होता है। न्यूयॉर्क सेशन स्टार्ट होता है। जैसे ही न्यूयॉर्क खत्म होता है। दोबारा से सिडनी स्टार्ट हो जाता है। ये जो यहां पे स्टार्ट हुआ होता है। तो ये साइकिल चलता रहता है। ऐसे चलता रहता है। ऐसे मार्केट बंद नहीं होती। दो दिन मार्केट बंद होती है हफ्ता इतवार को बाकी पांच दिन मार्केट 24 घंटे इस हिसाब से खुली रहती
है। अब आपको मैं एक चीज दिखाता हूं कि आप अपने हिसाब से कैसे देख सकते हैं कौन सा सेशन चल रहा है या कौन सा सेशन जो ये चीज होती है ना ये वाली ये देखें अभी लंदन सेशन चल रहा था लंदन सेशन पाकिस्तान में शुरू होता है दिन 12:00 बजे अच्छा लंदन सेशन चल रहा था इसके खत्म होने से पहले शाम को 5:00 बजे न्यूयॉर्क सेशन भी स्टार्ट हो जाता है यानी एक सेशन चल रहा है उसके खत्म होने से पहले एक और सेशन स्टार्ट हो गया न्यूयॉर्क तो ये जो चीज होती है इसको
कहते हैं ओवरलैप ये ओवरलैपिंग है इसमें सबसे ज्यादा वॉल्यूम होता है मार्केट ठीक है इसी तरीके से टोक्यो सेशन चल रहा होता है टोक्यो खत्म होने से पहले लंदन स्टार्ट हो जाता है तो यहां पे ये भी ओवरलैप होता है। तो जहां पे भी दो सेशंस ओवरलैप हो रहे होते हैं, उसकी वोलेटिलिटी बहुत ज्यादा होती है। वहां पे काम करने का आपको मजा आएगा। इसी को एसआईसीटी में किल ज़ों्स भी कहते हैं। यही किल ज़ों्स होते हैं। जहां पे मार्केट ओवरलैप कर रही होती है और मार्केट में वॉल्यूम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। दो सेशंस
के लोग इकट्ठे हो जाते हैं। ज्यादा वॉल्यूम होता है, ज्यादा कारोबार होता है। तो, यहां पे आपको अच्छी ट्रेड्स मिल जाती है। इसलिए कहते हैं कि जब भी सेशन ओपनिंग हो, पहले दो घंटे बहुतेंट होते हैं। तो उसमें आपको अच्छी ट्रेड्स मिल जाती है। ठीक हो गया? ये बातें भी इंशाल्लाह हम देखेंगे डिटेल से आगे चलके। फिलहाल आपको यहां पे अच्छा जी हमारी ट्रेड चल रही है और इसका टीपी भी हिट होने वाला है। यह भी हमने लाइव ट्रेड करवाई थी यहां से। ठीक है? ठीक है। यह ज़ोन मार्क किया हुआ है। यहां से भी
ट्रेड की हुई है। मैंने यहां से भी ट्रेड की हुई है। ऊपर से भी और इसको मेरा ख्याल मैनेज कर लेना चाहिए। सिर्फ मुझे एक सेकंड दें। अच्छा जी। आगे चलते हैं। चल जी। अब आ जाते हैं जी हम आगे। इसमें आपको दिखाना था ये। यह देखिए आप जब जाएंगे इस वेबसाइट पे आप आएंगे फॉर एक्स फैक्टरी पे। साथ ही आपको थोड़ा सा तरीका यह भी बता देता हूं कि आप लोग न्यूज़ कैसे देखते हैं। ठीक है? हालांकि टॉपिक नहीं है हमारा। फॉरेक्स फैक्ट्री पे आएंगे तो यहां पे एक कैलेंडर ओपन होता है। फॉरेक्स फैक्टct.com
पे जैसे ही आप जाएंगे तो आप इस कैलेंडर पे आ जाएंगे। इसमें देखिए ये डेट्स लिखी हुई है और डेट्स के साथ आगे कौन सी न्यूज़ किस वक्त आनी है ये डाटा पे लिखा हुआ है। जैसे आपको अभी एफएमसी की मिसाल दी थी तो ये देखिए ये लिखा हुआ है जी एफओएमसी स्टेटमेंट। स्टेटमेंट सबसेेंट न्यूज़ ये होती है। स्टेटमेंट का मतलब होता है और ये फेडरल फंड रेट। ये दो न्यूज़ है। ये इस रेट्स में बताएंगे कि हमने रेट चेंज कर दिया कि नहीं। इस स्टेटमेंट में ये होगा। ठीक हो गया? उसके बाद ये एफएमसी
स्टेटमेंट जारी होती है। 11:00 बजे स्टार्ट हो जाती है। लेकिन साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है आधे घंटे बाद। तो ये सारा जो ज़ोन है 11:00 बजे से लेकर 11:30 बजे तक ये बहुतेंट होता है। क्योंकि पहले फंड रेट्स अनाउंस होते हैं। रेट्स अनाउंस होने के बाद उसके साथ ही डिटेल स्टेटमेंट जो है वो भी जारी हो जाती है। और उसके बाद 11:30 बजे फिर जो एफएमसी चेयरमैन है वो जो इनके हेड है वो उनकी स्पीच होती है। ठीक है? एक यानी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है तो उस सवाल जवाब होते हैं। अब उन सवाल जवाब
का बड़ा इंपैक्ट होता है। लोग सुन रहे होते हैं जाहिर है। उससे जो एक हवा बनती है उससे जो एक राय बनती है लोगों की उसके हिसाब से मार्केट मूव करना शुरू कर देती है। इसी तरीके से ऑल डे ये जुमेरात को फिर छुट्टी है। तो यहां पे आपको शो हो जाएगी। अब इसका तरीकाकार ये होता है कि आप इस जगह पे जाएं। इस ये जो आपको एक फिल्टर का साइन नजर आ रहा है इस पे क्लिक करेंगे। तो यहां पे मैंने क्या किया हुआ है? क्योंकि अब हम काम करते हैं मैक्सिमम गोल्ड में। सारी
ट्रेडिंग हमारी गोल्ड में होती है। तो अब मुझे गोल्ड के अगेंस्ट यूएस डॉलर होता है। डॉलर वर्सेस गोल्ड में काम कर रहे हैं ना। तो अभी ये चीज़ हमने पढ़नी है। तो मुझे सिर्फ यूएसडी की न्यूज़ चाहिए। ये मैंने बाकी सबको अनचेक किया हुआ है। मुझे कोई न्यूज़ यहां पे नहीं चाहिए। सबको मैंने चेक कर दिया। उसके अलावा मुझे सिर्फ हाई इंपैक्ट न्यूज़ चाहिए। जिसका ज्यादा असर होगा उसको मैंने चेक किया हुआ है। और जिस दिन छुट्टी हो मुझे पता होना चाहिए कि आज छुट्टी है उसको मैंने चेक किया हुआ है। बाकी मीडियम इंपैक्ट न्यूज़
जो ऑरेंज फोल्डर है ये मीडियम इंपैक्ट है। ठीक है? देखिए लिखा आ रहा है मीडियम इंपैक्ट एक्सपेक्टेड और नो इंपैक्ट। ठीक है? लो इंपैक्ट इनको मैंने अनचेक किया हुआ है क्योंकि इनकी मुझे जरूरत नहीं है। सिर्फ हाई इंपैक्ट न्यूज़ पता होनी चाहिए। इसको मैंने कर दिया अप्लाई फिल्टर। प्लाई फिल्टर करने के बाद इस तरह की आपको शक्ल नजर आ रही है और यूएस की जितनी भी न्यूज़ जितने भी डाटा रिलीज़ होने हैं वो सब यहां पे आ रहे हैं। देखिए न्यूज़ दो तरह की होती है। एक न्यूज़ तो यह है। अब इसमें अगर आप देखेंगे
तो यह तो डाटा की न्यूज़ है ना डाटा रिलीज़ है। ये देखें ये तो अगले कई माह का आपको नजर आ जाएगा यहां पे कि किस दिन क्या होना है। किस दिन क्या ये देखें फ्राइडे 4 जुलाई ये इस दिन भी छुट्टी है। बैंक हॉलिडे है। ठीक है जी। इस दिन भी यूएसडी में बैंक हॉलिडे है। जिस दिन बैंक हॉलिडे होती है हम भी लाइव नहीं आते। अच्छा उसके बाद ये तो महीनों के हिसाब से है। कुछ न्यूज़ ऐसी होती है। एक बात और चले साथ बताता हूं। अक्सर लोग आप देखेंगे YouTube पे इसको बोलते
हैं न्यूज़ज़। तो यह गलत वर्ड होता है। न्यूज़ की जमा भी न्यूज़ ही है। इसलिए बता रहा हूं ताकि हमारे जब लाइव में आप बैठे हो तो इस स्टैंडर्ड को मेंटेन करें। बोले भी ठीक। न्यूज़ की जमा भी न्यूज़ होती है। ठीक है? न्यूज़ कोई वर्ड नहीं होता। अच्छा अब होता ये है कि जब एक तरह के डाटा आपको नजर आ गए। दूसरी तरह का जो डाटा होता है या जो न्यूज़ हो सकती है वो ये है जैसे अब आजकल चल रही है। जंग की न्यूज़ है। वार टेरिफ वार थी इससे पहले के फला मुल्क
पे इतना टेरिफ लगा दिया। अमेरिका ने फला पे इतना टेरिफ लगा दिया। इसके अलावा जैसे कोरोना था। ठीक है? ठीक है या कोई मिसक हो जाता है बड़ा दुनिया में तो वो एक और तरह की न्यूज़ होती है वो भी इंपैक्ट करती है तो वो तो उसके लिए हमें वक्त तौर पे न्यूज़ हम देखते रहते हैं क्या चल रहा है दुनिया में क्या नहीं चल रहा हल्की फुल्की नजर आपको होनी चाहिए अमेरिका पे और गोल्ड मार्केट पे बाकी जो है ये डाटा ये तो आपको साथ-साथ में मिलते रहते हैं अब आ चलते हैं नीचे इसमें
यहां पे आ जाए तो यहां पे एक टैब है इस जगह पे ये वाली सेशंस ठीक है आप अपने मुल्क का टाइम आप जब ये वेबसाइट ओपन करेंगे तो बाय डिफॉल्ट मेरा ख्याल है कि ये आपके मुल्क के टाइम के हिसाब से ऑपरेट करेगी बहाल यह पाकिस्तान के हिसाब से अगर आप देखें यहां पे आप टाइम सेट कर सकते हैं तो यहां पे यह 2:00 बजे यह तीन है। इससे पिछला जो साइन था यह 2:00 बजे का है। यहां पे 2:00 बजे सिडनी पाकिस्तान में ओपन होता है। लेकिन ब्रोकर जो है ना 3:00 बजे ऑपरेट
होते हैं। ब्रोकर एक घंटा बंद होता है रात को। एचएफएम की बात कर रहा हूं। वो 1 घंटा रात को बंद होता है। तो 3:00 बजे मार्केट ओपन होती है सिडनी मार्केट सबसे पहले। इसी तरीके से 5:00 बजे 5:00 बजे आप देखते हैं आजकल सुबह-सुबह बड़े वॉल्यूम आते हैं। उसकी वजह क्या है? टोक्यो सेशन ओपन होता है। ठीक है? तो 5:00 बजे टोक्यो स्टार्ट हो जाता है। अब आप इस जगह पे अगर नजर रखें, तो यह 5:00 से लेके और 11:00 बजे तक यह ओवरलैप कर रही है मार्केट। दो सेशंस ओवरलैप कर रहे हैं तो
यह वोलेटिलिटी का टाइम होता है। खास तौर पे 5:00 बजे से लेके 7:00 बजे तक। पहले 2 घंटे किसी भी मार्केट के पहले 2 घंटे बहुतेंट होते हैं। जब वह ओवरलैप कर रही होती हैं। ठीक है? यह बात आपने याद रखनी है। अच्छा अभी टोक्यो सेशन चल रहा होता है। यह आपका क्लोज होना होता है पाकिस्तानी वक्त के मुताबिक दिन 2:00 बजे। लेकिन उससे पहले ही 12:00 बजे लंदन सेशन स्टार्ट हो जाता है। तो जब लंदन सेशन स्टार्ट होता है, तो 12:00 से लेके 2:00 बजे तक। यह भी फिर ओवरलैप का टाइम आ गया। यहां
पर फिर दो सेशन चल रहे हैं। तो जब ओवरलैप करेगी मार्केट फिर वोलेटाइल होगी तो आपको यहां पर पीछे ट्रेड मिल सकती है। यह भी किल जोोन है। अच्छा उसके बाद टोक्यो तो खत्म हो गया 2:00 बजे। लेकिन अभी आपका लंदन सेशन तो चल रहा है। लंदन सेशन स्टार्ट हुआ था आपका दिन 12:00 बजे और इसने खत्म होना था रात को जाके 9:00 बजे। लेकिन इससे पहले शाम 5:00 बजे आपका न्यूयॉर्क सेशन भी ओपन हो जाता है। यह फिर एक ओवरलैप आ गया। यह ओवरलैप 4 घंटे का है। तो 5:00 से लेके 9:00 बजे तक।
इसलिए आपकी क्लास का टाइम 9:30 बजे होता है। ताकि हम ट्रेडिंग से फ्री हो जाएं। ठीक है? और और भी वजूहात हैं। बाकी लोग भी फ्री हो जाए। में काम करते हैं। खवातीन भी फ्री हो जाएंगे किचन से। इसलिए बहाल यह जो चार घंटे होते हैं यह बहुत्ट टाइम होता है ट्रेड करने के लिए। आज जो हमने ट्रेड की है अभी आपको दिखाई है जो चल रही है वो भी इसी टाइम के दौरान हुई है। और बड़े-बड़े जो यूएसडी के डाटास होते हैं वो भी इसी टाइम पे रिलीज होते हैं। तो इसमें आपने सबसे अच्छा
टाइम आपके पास दिन में ये चार घंटे हैं। जो बंदे मसूफ रहते हैं कोई और जॉब करते हैं, कोई और काम करते हैं वो कोशिश ये करें कि या तो इसमें काम कर लें 12:00 बजे से लेके 2:00 बजे तक इसमें काम करें। ठीक है? या इसमें कम से कम मार्केट को देख लें या फिर काम करें 5:00 बजे से लेके रात 9:00 बजे तक। इसके अलावा जो बाकी टाइमिंग्स हैं ये इतनी खास नहीं है। हां ये टाइम अच्छा है। सुबह 5:00 से लेके 6:00 बजे तक या 7:00 बजे तक ये एक अच्छा टाइम है।
इसमें भी आप देख सकते हैं। लेकिन ये बिल्कुल सुबह का वक्त होता है। कुछ लोग जागते हैं कुछ नहीं जागते। तो बल अपने-अपने हिसाब से आप देख सकते हैं। ये मैंने आपको डिटेल से बता दिया कि मार्केट सेशंस में काम करती है। ठीक हो गया जी। यह जी ट्रेड ने टारगेट भी हिट कर दिया। एक तो चल जी। माशा्लाह ये बड़ी बेहतरीन ट्रेड थी और बहुत वेट करने के बाद हमें ट्रेड मिली है। काफी वेट करने के बाद इसका टारगेट पहला यह बताया हुआ था और दूसरा टारगेट अभी यह बताया हुआ है। तो उम्मीद है
इंशाल्लाह दूसरा टारगेट भी हमारा हिट करेगी। अच्छा जी। अब आ जाते हैं जी रिस्क पे। रिस्क मार्केट में इस मार्केट में कितना रिस्क है, कितना नहीं है लोग इसी बारे में कंफ्यूज रहते हैं। लेकिन जी रिस्क अगर देखा जाए तो इतना कंट्रोल रिस्क दुनिया के किसी और कारोबार में नहीं है। जितना आप इसमें कंट्रोल कर सकते हैं। जैसे कि मैं आपको बता देता हूं। मेरा जो अकाउंट पब्लिक है YouTube पे जो आप लोगों ने देखा होगा अक्सर ने उसमें मैंने आपको बताया कि मेरी स्ट्रेटजी यह है कि मैं 1% रिस्क लेता हूं एक ट्रेड पे।
यानी मेरा अकाउंट है फॉर एग्जांपल $20,000 का अकाउंट है। ठीक है जी? तो मैं उस पे 1% रिस्क ले रहा हूं। अब आप मुझे बताएं दुनिया का कोई और कारोबार दिखाएं जहां पर आप कहें कि जी मैंने $000 इन्वेस्ट किए हैं। लेकिन मैंने रिस्क 1% लिया है। चाहे वो चाय का खोखा है चाहे वो सब्जी की दुकान है। चाहे वो कोई एयरलाइन है। ठीक है? चाहे कोई ट्रांसपोर्ट का और बिज़नेस है। चाहे कोई फैक्ट्री है। कहीं पे भी लॉस जब होना शुरू होता है ना फिर वो कैलकुलेटेड नहीं होता। चाहे कोई फैक्ट्री है। एयरलाइन है।
एयरलाइन की सबसे अच्छी एग्जांपल है। कितना महंगा बिज़नेस है दुनिया का। ठीक है? सिर्फ कोई 1% लोग दुनिया के कर सकते हैं इसका जो एयरलाइंस का बिज़नेस कर सकते हैं। अब जब जहाज उड़ता है। अब इंडिया में देख लें कितना मिसप हुआ। तो जहाज उड़ गया। अब जब वो क्रैश किया तो उसमें क्या किसी के पास किसी शख्स के पास यह चांस था कि मेरा 1% टूट जाए बाकी मेरा महफूज़ रहे या मेरा बस सामान चलो चला जाए हमारी जाने जिंदगी के बचे तो नहीं है ना तो फॉरेक्स मार्केट का फायदा यह है कि ये
इतनी सेफ मार्केट है कि आपने अपने हाथ से अपना रिस्क तय करना है अब मसला यह होता है कि लोग इसको बिल्कुल आसान समझ लेते हैं वो रिस्क लेते ही नहीं है यानी कैलकुलेशन ही नहीं करते रिस्क के कितना ले रहे हैं उनको पता ही नहीं है ना इस वजह से आप दुनिया की जो मर्जी स्ट्रेटजी उठाके ले आएं अगर आपका रिस्क मैनेज नहीं है तो मैंने कल आपको बताया था कि आपने उसको ज़ीरो से मल्टीप्लाई कर दिया फिर आपका अकाउंट ज़ीरो होने से कोई नहीं बचा सकता सॉरी अच्छा जी दूसरी तरफ देखा जाए जब
आप इस प्रोटोकॉल को फॉलो करेंगे ना रिस्क मैनेजमेंट रखेंगे तो यह बिल्कुल लो रिस्क बिज़नेस है। इसमें कोई रिस्क नहीं है। आप 1% उरा देते हैं कोई मसला नहीं। अगले दिन आप 2% कमा लेंगे। कल हमारा स्टॉप लॉस हिट हुआ। जब ट्रेड चल रही थी हमने ट्रेड ली हुई थी, कल जो क्लास चल रही थी उस क्लास का स्टॉप लॉस हिट हो गया। लेकिन बिल्कुल छोटा सा रिस्क था। हिट हो गया। कोई बात नहीं। आज जो ट्रेड चल रही है आपके सामने है। उससे डबल कमा लिया। ठीक है? तो अगर आप इसको फॉलो करेंगे तो
बिल्कुल लो रिस्क है। फॉलो नहीं करेंगे तो फिर आप इस कैटेगरी में आ जाएंगे। फिर यह हाई रिस्क है। फिर सारा उड़ेगा। इस तरह बाकी कारोबार का एयरलाइन की एग्जांपल दी है। फिर यहां पर भी आपको कोई नहीं बचा सकता। इसलिए इसका बहुत ध्यान रखना है। रिस्क मैनेजमेंट पे बहुत ध्यान रखेंगे हम। देखा जाए तो अब यह बिल्कुल भी रिस्की नहीं है। दूसरी तरफ अगर आप ड्राइविंग करना रिस्की है। अब आपसे यह मेरा सवाल है। क्या ड्राइविंग रिस्की है? ठीक है? अगर आप प्रॉपर उसको प्रोटोकॉल्स के साथ कर रहे हैं, रूल्स फॉलो कर रहे हैं,
अपनी लेन में रहते हैं, स्पीड लिमिट में रहते हैं, सेफ्टी फीचर्स का ख्याल रखते हैं, तो फिर बिल्कुल भी रिस्की नहीं है। ड्राइविंग पूरी दुनिया कर रही है। अगर आप रॉन्ग लेन में चले जाते हैं, मोटरवे पे घुस जाते हैं, किसी हाईवे पे रॉन्ग लेन में चले जाते हैं। स्पीड बहुत ज्यादा ओवर कर लेते हैं। गाड़ी के टायर्स का ख्याल नहीं रखते, अपने सीट बेल्ट का ख्याल नहीं रखते, तो फिर ड्राइविंग बहुत रिस्की है। तो, यह आपके हाथ में है। दोनों चीजें। आप इसको जिस साइड पे रखना चाहेंगे उस साइड पे चली जाएगी। हमारे लिए
ट्रेडिंग बहुत लो रिस्क बिज़नेस है और बहुत इसकी जो ग्रोथ है वो बहुत तेज है। जैसा मैंने आपको अभी बताया यहां पे बताया था ना कि इसमें आप रिस्क 1% रखते हैं तो बहुत सेफ है और आपको एग्जांपल दी बाकी बिज़नेसेस की कि कोई भी इतना जल्दी ग्रो नहीं करता। इसी तरीके से एक और चीज़ भी है इसमें कि जितनी तेज़ ग्रोथ इस मार्केट में है, इतनी तेज़ ग्रोथ किसी और मार्केट में नहीं है। मैंने जो अकाउंट पब्लिक किया है ना, उसको मैं स्लो करके चलाता हूं ताकि एक एग्जांपल बने वो सबके लिए कि आप
देख लें कि जी कितना अच्छा ग्रो किया। कितने स्लो पेस पे कितनी बड़ी ग्रोथ है। तीन आज तीन माह पूरे हो गए हैं। जो अकाउंट पब्लिक किया हुआ है उसको आज तीन माह पूरे हो गए हैं बने हुए और आज हम उसको चेक कर रहे थे लाइव में 75% ग्रॉस में है। आप मुझे दुनिया का कोई बिज़नेस बताएं कि जिसको आप स्टार्ट करें और तीन माह में आपको 75% वापस भी कर दे। ठीक है? सिर्फ 25% आपका मार्केट में रह गया। बाकी सारा तो आपने वापस ले लिया अपना। अब तो सारा फ्री हो गया आपका
सारा काम ही। यानी वो $2000 का जो अकाउंट था वो अपनी जगह पे है। और उसमें से मैंने 14 15000 $1000 वो मैंने वापस ले भी लिए। वो मैंने कमा लिए। $00 तो अपनी जगह पे लगे हुए हैं। तो कोई बिज़नेस ऐसा नहीं है। इसलिए इसको थोड़ा ध्यान से पढ़ेंगे, ध्यान से करेंगे, रूल्स को फॉलो करेंगे तो इंशाल्लाह कहीं पे भी आपके पैसे नहीं उड़ेंगे। फॉरेक्स रिस्क मैनेजमेंट बस ये आपने याद रख लेनी है। कामयाबी की कुंजी यही है। जिसकी रिस्क मैनेजमेंट अच्छी है वो बहुत जल्दी कामयाब हो जाएगा। जो रिस्क को फॉलो नहीं करेगा
वो उड़ता जाएगा। अच्छा एक चीज़ इंपॉर्टेंट है। लोगों को इसका भी आ तौर पे नहीं पता होता। पिप क्या चीज है? अभी हम इस पे डिटेल में नहीं जाएंगे। ये सिर्फ आपको एक इंट्रोडक्शन है। कल हमारी जो क्लास होगी नेक्स्ट जो कल के बाद जुमेरात को वो क्लास होगी हमारी इंशा्लाह ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पे ट्रेडिंग व्यू के बारे में MT5 के बारे में। तो पिप क्या होता है? जिस तरह हर मार्केट में जैसे लिक्विड है एक उसको नापने के लिए लीटर की इकाई यूज़ होती है। एक पैमाना यूज़ होता है। ठीक है? उसकी छोटी इकाई है
मिलीमीटर। बड़ी है जो मिलीलीटर और बड़ी लीटर है। ठीक है? इसी तरीके से जब आप कोई चीज़ नापते हैं रास्ता नापते हैं तो वो मिलीमीटर से स्टार्ट होता है और किलोमीटर तक जाता है। इसी तरीके से जब आप फॉरेक्स मार्केट में कोई मूवमेंट आती है प्राइस ऊपर उठती है तो अब आप क्या कहेंगे? उसने बल्कि हम हंस रहे थे लाइव में भी एक रील हमने देखी तो उसमें एक बंदा कह रहा था कि जी यह मैंने यहां से ट्रेंड लगवाई है और पता नहीं एक सूत्र का भी फर्क नहीं आया बीच में तो यहां पे
जो सूत्रसर नहीं चलेगा यहां पे ठीक है ना कोई आप इस तरीके से नाप सकते हैं कि प्राइस ने कितना मूवमेंट किया है 2 इंच मूवमेंट की है कि 2 फुट मूवमेंट की है यहां पे जो भी प्राइस में प्राइस की मूवमेंट होगी वो होगी पिप में पिप कहते हैं परसेंटेज इन पॉइंट्स ठीक है परसेंटेज इन पॉइंट्स ये आपने याद रखना है आपको पता होना चाहिए काम की चीज़ है। अब ये है क्या चीज़ द स्मालेस्ट होल यूनिट प्राइस मूव दैट कैन एक्सचेंज रेट कैन मेक बेस्ड ऑन फॉरेक्स मार्केट कन्वेंशन। अब देखिए इसमें होता क्या
है? जब प्राइस मूव करती है किसी साइड पे तो जो सबसे छोटी उसकी नापने की इकाई है उसको पिप कहते हैं परसेंटेज इन पॉइंट। बस इतना आप याद रखना इसकी आपको थोड़ा सा पता होना चाहिए कि इसकी मूवमेंट पिप्स की शक्कर में होती है। पिप को कैसे काउंट करते हैं, कैसे नहीं करते ये इंशाल्लाह आगे चल के हम पढ़ेंगे। आखरी जो चीज है आज की हमारी क्लास की आखरी जो टॉपिक है उस पे आ जाते हैं अब हम। अच्छा जी। यहां पे देखें जरा। दो चीजें हैं। मैंने आपको अभी बताया था आस्क प्राइस और बिट
प्राइस के हवाले से। ठीक है? एक ही चीज और ज्यादाेंट चीज़ देख लें। इस मार्केट में हालांकि ट्रेडिंग व्यू की जो माइक्रोस होगी उसमें भी हम ये पढ़ेंगे। इस मार्केट में जो भी काम होता है वो होता है पेयर की शक्ल में। जैसे मैंने आपको एग्जांपल दी थी रुपए की कि आपने पीकेआर ये आपने दिया। ठीक है? और यूएसडी आपने ले लिया। यूएस डॉलर ले लिया। तो ये एक पेयर बन गया। जो पहली करेंसी होती है जो पहले लिखी होती है जैसे यहां पर गोल्ड पहले लिखा हुआ है उसे आप कहते हैं बेस करेंसी यह
बेस है इसको बेस करेंसी कहते हैं बस याद रखने की बात है और जो दूसरी वैल्यू होती है जो आगे लिखी होती है देखिए ऑब्लिक के बाद जो लिखा हुआ है यूएस डॉलर इसे आप कहते हैं कोर्ट क्यों यू टी कोट ठीक है कोर्ट करेंसी पहली वैल्यू कौन सी होती है बेस करेंसी दूसरी होती है कोर्ट करेंसी अब यहां पे सवाल ये आता है लोग जो नए होते हैं वो कंफ्यूज होते हैं इस बात में बल्कि पुराने भी से पूछता है उसको भी नहीं पता होता आमतौर पे अब मैं कहता हूं कि जी इस जगह
से आज हमने बाय किया यह हमने लेवल देखिए कितना छोटा सा मार्क किया हुआ है कि जी यहां पर प्राइस टैप करे तो बाय कर लें ठीक है? यहीं से हमारी ट्रेड चल रही है अभी भी। अब यहां से बाय कर लिया। प्राइस यहां पहुंच गई। हम ट्रेड से आउट हो गए। यहां पे हमने कहा था इस जगह से बाय कर लें। लेकिन प्राइस अगर हमने बाय नहीं किया हुआ। हमने बाय नहीं किया हुआ। प्राइस यहां पहुंच गई। मैं कहता हूं जी यहां से सेल कर दें। अब अक्सर लोग जो नए आते हैं ना वो
कहते हैं सेल कैसे कर दें? बाय नहीं किया था हमने। यानी मैं आपको कह रहा हूं कि गोल्ड बेच दें। सेल किया मतलब क्या है? गोल्ड का चार्ट है ना? गोल्ड बेच दें। तो यह बिलकुल एक उनका सवाल ठीक होता है। जैसे आप घर पे बैठे हैं मैं आपको कहता हूं मार्केट में जाके गोल्ड बेचें। तो आप कहेंगे भाई गोल्ड तो है नहीं हमारे पास बेचे कहां से इस मार्केट में ऐसे नहीं होता इसमें आप जब बाय का बटन दबाएंगे आपकी बाय की ट्रेड चल पड़ेगी उसको कहते हैं लॉन्ग पोजीशन ठीक है जी लॉन्ग पोजीशन
इसे कहते हैं और जब आपको कहेंगे कि सेल का बटन दबाएं या सेल कर दें तो उसको कहते हैं शॉर्ट पोजीशन एस एच ओ आर टी ये हम डिटेल से पढ़ेंगे इशारा आगे चलके दोबारा भी लॉन्ग पोजीशन और शॉर्ट पोजीशन अब इसमें फर्क क्या होता है जब आपके पास है ही नहीं तो आपने बेच कैसे दिया यहां से लोगों को डाउट्स आना शुरू हो जाते हैं कोई कहता है हराम है कोई कहता है फलाना जब है ही नहीं तो बेचा कैसे अब देखिए इसमें होता यह है यह क्या लिखा हुआ है बेस करेंसी है गोल्ड
कोर्ट करेंसी है डॉलर। ठीक है? इसको हम यहां पे लिख लेते हैं। एक तरफ है जी गोल्ड, एक तरफ है डॉलर। अब चकि ये एक पेयर है। इसकी आप एग्जांपल लें इससे। जैसे बच्चों का शीशा होता है, पार्कक्स में लगे होते हैं झूला। अब जब गोल्ड तो मैं कहता हूं बाय कर लें। ठीक है? आपने गोल्ड खरीद लिया। अब जब दो चीजों में से दो चीज़ों का कंपैरिजन हो रहा है। ठीक है? दो चीज़ मुकाबले में चल रही हैं। उनमें से एक ही वैल्यू बढ़ती है, हम कहते हैं यहां से बाय कर लें। क्यों बाय
करवाया हमने यहां से? क्योंकि हमारे ख्याल में प्राइस को यहां से ऊपर उठना चाहिए था। तो जब यहां से गोल्ड ऊपर उठेगा तो डॉलर कहां जाएगा? ऑटोमेटिकली नीचे जाएगा। सीसा में क्या होता है? एक बच्चा जब ऊपर की तरफ जाता है तो दूसरा बच्चा ऑटोमेटिकली नीचे आ जाता है। इसी उसूल पे मार्केट काम करती है। जब आपने गोल्ड खरीदा गोल्ड के प्राइसेस ऊपर गए तो ऑटोमेटिकली डॉलर की प्राइसेस नीचे गिरेंगी। समझ आ गई? अच्छा चल तो सिंपल कांसेप्ट था। अब मैं कहता हूं गोल्ड बेच दें। ठीक है? अब कहते हैं गोल्ड है ही नहीं। तो
इसका मतलब यह होता है। मैं यह कहता हूं गोल्ड बेचने से मुराद यह है कि शॉर्ट पोजीशन लें। शॉर्ट पोजीशन से मतलब यह है कि जो आपकी कोर्ट करेंसी है दूसरी करेंसी जो है इसके ऊपर जाने के चांसेस हैं। यानी मैं आपको यह अंदाजा लगा के बता रहा हूं कि डॉलर ऊपर जाने वाला है। तो डॉलर जब ऊपर जाएगा तो ऑटोमेटिकली गोल्ड कहां जाएगा? गोल्ड नीचे जाएगा। उसी स्कूल पे काम कर रहे हैं अभी भी सीसा के उसूल पे। जब मैं कहता हूं कि आपकी यह कोर्ट करेंसी जो है यह उठने वाली है। तो मैं
कहता हूं गोल्ड सेल कर दें। गोल्ड सेल का मतलब यह है शॉर्ट का बटन दबा दें। अब शॉर्ट की जगह पे ब्रोकर सेल का बटन देता है। शॉर्ट और लॉन्ग लोगों को समझ नहीं आती। ब्रोकर ने क्या किया? वहां पे बाय और सेल का बटन दे दिया। ठीक है? इसको कहते हैं सेल करना। हालांकि इसको असल में कहा जाता है शॉर्ट। ये देखें यहां पे दिखाता हूं आपको टरे ये देखें क्या लिखा हुआ है लॉन्ग पोजीशन ये लॉन्ग पोजीशन लगा देते हैं ठीक है जी लॉन्ग पोजीशन में क्या है कि जितना ऊपर जाएगी उतना प्रॉफिट
होगा ये हमारी लॉन्ग पोजीशन थी मार्केट जितना ऊपर जा रही है हमें फायदा हो रहा है और दूसरी तरफ ये क्या चीज है ये है जी शॉर्ट पोजीशन ये लो इसमें क्या होता है कि जितना मार्केट नीचे जाएगी उतना फायदा होगा ग्रीन साइड पे जितना मार्केट मूव करेगी उतना हमें फायदा है रेड पे जितना जाएगी उतना हमें नुकसान है यहां से हमने शॉर्ट करना था इस तरह यह हमारी शॉर्ट पोजीशन थी यहां से हमने शॉर्ट किया फॉर एग्जांपल और यह जो यह वाली थी यह हमारी लॉन्ग पोजीशन थी। तो अब आपको यह कांसेप्ट समझ आ
गया होगा कि जब आपके पास गोल्ड है ही नहीं तो फिर आप सेल कैसे कर सकते हैं। असल में तो आप सेल सेल नहीं कर रहे होते। असल में आप पोजीशन लेते हैं कि शॉर्ट पोजीशन है या लॉन्ग पोजीशन है। अच्छा इसको जरा साफ जगह पे ले जाते हैं। आप देखें जी। तो आप इस बात को समझ लें। जब मैं कहूंगा गोल्ड बाय कर लें। चल वो तो सिंपल कांसेप्ट है। गोल्ड बाय कर लें। गोल्ड खरीद लें। इसमें तो कोई परेशानी है ही नहीं ना। जब कहूंगा गोल्ड बेच दें तो उसका मेरा मतलब यह होता
है कि डॉलर ऊपर जाने वाला है तो डॉलर खरीद लें या फिर यह कह लें कि डॉलर खरीद लें। ठीक है? और गोल्ड सेल का बटन सेल दबाएंगे ऑटोमेटिकली। क्योंकि आपका जो भी एक्शन होगा ना वो आपका बेस करेंसी पे इफेक्ट होगा बेस करेंसी पे। आप जो भी करेंगे बेस करेंसी पे करेंगे। बाय सेल बेस करेंसी पे होगा। तो जब मैं कहता हूं बाय कर लें तो खरीद लिया आपने। जब मैं कहता हूं सेल करते हैं उसका मतलब यह है कि ये नीचे जाने वाला है। गिरने वाला है गोल्ड। मतलब क्या हुआ कि उसके अगेंस्ट
डॉलर ऊपर जाने वाला है। तो आप सेल का बटन दबाएंगे आप शॉर्ट एंट्री में आ जाएंगे। इस तरीके से आप सेल भी कर सकते हैं। बाय भी कर सकते हैं। यह परेशानी नहीं होनी चाहिए कि हमने खरीदा है कि नहीं खरीदा। चले जी आपकी आज की क्लास यहां पर एंड हो गई है। यह आपका इंट्रोडक्शन था फॉरेस्ट ट्रेडिंग के बारे में। कैसे होती है, कैसे काम करती है? बेसिक सवालात पे क्या होता है? स्प्रेड क्या होता है? ब्रोकर बीच में कैसे आता है? लेज क्या होती है? लेवरेज के बारे में मजी डिटेल से भी आगे
चलके बताऊंगा। अभी आज थोड़ा सा ही बताया आपको। ठीक है जी। तो इंशा्लाह मिलते हैं नेक्स्ट क्लास में परसों। अब तब तक के लिए अल्लाह हाफिज। मैं एक दफा इसकी रिकॉर्डिंग स्टॉप करके आप लोग मुझे बता दें कि समझ ठीक आ गई या नहीं।