क्या आपने कभी सोचा है कि गौतम बुद्ध की मूर्तियों में उनके हाथ हमेशा एक खास डिजाइन में क्यों होते हैं? क्या वो सिर्फ एक स्टाइल है या कोई गहरा राज? क्या वजह है कि इतिहास के सबसे महान दिमाग चाहे वह अल्बर्ट आइंस्टीन हो या स्टीव जॉब्स सोचते वक्त अपनी उंगलियों को एक अजीबोगरीब तरीके से जोड़कर रखते थे। क्या यह मुमकिन है कि आपके डिप्रेशन, गुस्से और बीमारी का इलाज किसी दवारी में नहीं बल्कि आपकी अपनी हथेली में छुपा हो? अगर मैं आपसे कहूं कि आपका हाथ सिर्फ शरीर का एक हिस्सा नहीं बल्कि आपके दिमाग को
चलाने वाला रिमोट कंट्रोल है तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम उस प्राचीन विज्ञान की धूल हटाएंगे जो आपके जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है। दोस्तों इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी घटता है उसके पीछे एक ऊर्जा काम करती है और आज हम उसी ऊर्जा के सबसे बड़े रहस्य यानी हस्तमुद्रा विज्ञान को डिकोड करने जा रहे हैं। लेकिन आगे बढ़ने से पहले आपकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक डिस्क्लेमर देना आवश्यक है कि यह वीडियो केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए बनाया गया है। इसमें बताई गई बातें प्राचीन भारतीय ग्रंथों, मनोवैज्ञानिक
अध्ययनों और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसलिए अभ्यास से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें। अब जरा गौर से अपनी हथेलियों को देखिए क्योंकि जिसे आप साधारण मांस और हड्डियों का ढांचा समझ रहे हैं। आधुनिक न्यूरोसाइ यानी मस्तिष्क विज्ञान के अनुसार यह आपके शरीर का सबसे जटिल और शक्तिशाली उपकरण है। वैज्ञानिक भाषा में इसे कॉर्टिकल ह्यूमेनस का सिद्धांत कहा जाता है जो यह बताता है कि हमारे दिमाग का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल हमारे हाथों और उंगलियों को कंट्रोल करने में खर्च होता है। जिसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप अपनी उंगलियों में जरा
सी भी हरकत करते हैं तो उसका सीधा असर आपके दिमाग के न्यूरॉन्स पर पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे कीबोर्ड का बटन दबाते ही कंप्यूटर की स्क्रीन पर अक्षर बदल जाते हैं। हजारों साल पहले जब दुनिया में कोई एमआरआई मशीन या सिटी स्कैन नहीं था तब भारत के महान ऋषियों ने हिमालय की कंदराओं में ध्यान करते हुए एक अद्भुत खोज की थी। उन्होंने वेदों और उपनिषदों में विशेषकर घेरंड संहिता और हठ योग प्रदीपिका जैसे ग्रंथों में यह समझाया है कि हमारा शरीर केवल हार्ड मांस का पुतला नहीं है बल्कि यह एक चलता फिरता बायोइलेक्टिक सर्किट
है जिसमें प्राण ऊर्जा यानी बिजली लगातार बह रही है। आमतौर पर यह ऊर्जा हमारी उंगलियों के पोरों से, आंखों से और पैरों से बाहर निकल कर ब्रह्मांड में बिखर जाती है। जिससे हम थका हुआ और शक्तिहीन महसूस करते हैं। लेकिन ऋषियों ने पाया कि अगर हम उंगलियों को एक विशेष आकृति में मोड़ दे या आपस में स्पर्श करा दें, तो हम उस बहती हुई ऊर्जा को बाहर जाने से रोक सकते हैं और उसे वापस शरीर के भीतर उस अंग की तरफ मोड़ सकते हैं, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह ठीक वैसा ही है जैसे
आप पानी के पाइप के आगे अंगूठा लगाकर पानी के प्रेशर को बढ़ा देते हैं। मुद्रा विज्ञान भी शरीर के भीतर प्राण के प्रेशर और फ्लो को बदलकर बीमारियों को जड़ से खत्म करने और दिमाग को सुपर कंप्यूटर बनाने की तकनीक है जिसे आज का मनोविज्ञान सोमैटिक फीडबैक के नाम से स्वीकार करने लगा है। इस विज्ञान की गहराई को समझने के लिए हमें यह समझना होगा कि हम और यह पूरा ब्रह्मांड जिन पांच तत्वों से बने हैं, उनकी चाबी हमारे ही हाथों में है। हमारे प्राचीन सांख्य दर्शन और आयुर्वेद के अनुसार यह सृष्टि पंचमहाभूतों यानी अग्नि,
वायु, आकाश, पृथ्वी और जल से बनी है। और आश्चर्यजनक रूप से हमारी पांच उंगलियां इन्हीं पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा अग्नि का प्रतीक है जो शरीर की गर्मी और मस्तिष्क की जागृत अवस्था को संभालता है। तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर वायु तत्व है जो विचारों की गति और शरीर में गैस को नियंत्रित करती है। मध्यमा यानी सबसे बड़ी उंगली आकाश तत्व है जो हमें ब्रह्मांड की विशालता और खालीपन से जोड़ती है। अनामिका यानी रिंग फिंगर पृथ्वी तत्व है जो शरीर को स्थायित्व और मजबूती देती है और सबसे छोटी उंगली जल तत्व है जो हमारे
खून और भावनाओं के बहाव को संभालती है। जब इन तत्वों का संतुलन बिगड़ता है तभी शरीर में रोग या दिमाग में अशांति पैदा होती है और उंगलियों का सही स्पर्श उस बिगड़े हुए संतुलन को मिनटों में ठीक कर सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ छूने भर से इतना बड़ा बदलाव कैसे हो सकता है? तो इसे एक मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक नजरिए से समझिए। हमारे उंगलियों के पोरों यानी टिप्स पर शरीर की सबसे ज्यादा नर्व एंडिंग्स होती हैं जो सीधे मस्तिष्क के अलग-अलग केंद्रों से जुड़ी होती हैं। जब आप अंगूठे यानी अग्नि को किसी
अन्य उंगली यानी तत्व से स्पर्श करते हैं तो एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्किट पूरा होता है। उदाहरण के लिए जब अग्नि और वायु मिलते हैं तो शरीर में हल्कापन आता है और विचार शुद्ध होते हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आपका हाथ एक स्विच बोर्ड है और आपकी उंगलियां अलग-अलग स्विच हैं। आपको बस यह पता होना चाहिए कि कॉन्फिडेंस का स्विच कौन सा है? याददाश्त का स्विच कौन सा है और गुस्से को कंट्रोल करने का स्विच कौन सा है? यह कोई जादू टोना नहीं बल्कि शुद्ध विज्ञान है जिसे मुद्रा विज्ञान कहा जाता है और इसका
असर इतना सटीक होता है कि कई बार दवाइयां फेल हो सकती हैं। लेकिन यह सर्किट अपना काम करना बंद नहीं करता क्योंकि यह कुदरत के नियम पर आधारित है। लेकिन असली रोमांच तो अब शुरू होता है क्योंकि अगले कुछ मिनटों में हम उन गुप्त मुद्राओं के बारे में बात करने वाले हैं जिन्हें इतिहास के पन्नों में छुपा दिया गया था। क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी भी मुद्रा है जिसे अगर सही तरीके से किया जाए तो वह हार्ट अटैक के असर को भी कम कर सकती है जिसे प्राचीन वैद्यों ने मृत संजीवनी का नाम
दिया था या फिर एक ऐसी मुद्रा जो बुद्धिमत्ता को इतना बढ़ा देती है कि इंसान का दिमाग एक आम आदमी से कई गुना तेज चलने लगता है। यह सब सुनना आपको अभी किसी फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है। लेकिन जैसे-जैसे हम इस वीडियो में आगे बढ़ेंगे और आप इन प्रयोगों को खुद अपने हाथों से करेंगे आपको अपनी हथेलियों में झनझनाहट और दिमाग में एक अजीब सी शांति महसूस होने लगेगी। हम अभी बस सतह पर हैं। गहराई में उतरना अभी बाकी है। जहां हम जानेंगे कि कैसे बड़े-बड़े लीडर्स अनजाने में इन मुद्राओं का इस्तेमाल करके
दुनिया पर राज करते हैं और आप इसे अपनी जिंदगी में कैसे उतार सकते हैं। इस रहस्यमई यात्रा में आगे बढ़ते हुए सबसे पहले उस मुद्रा की बात करते हैं जिसे आपने सबसे ज्यादा देखा है लेकिन समझा सबसे कम है। जिसे ज्ञान मुद्रा या चिन्मय मुद्रा कहा जाता है। जब तर्जनी उंगली जो वायु तत्व और हमारे व्यक्तिगत अहंकार का प्रतीक है। अंगूठे यानी ब्रह्मांडीय चेतना और अग्नि के संपर्क में आती है तो एक अद्भुत सर्किट तैयार होता है। प्राचीन ऋषियों का मानना था कि हमारा मन वायु की तरह चंचल है। हमेशा यहां वहां भटकता रहता है।
लेकिन जैसे ही यह अग्नि के संपर्क में आता है, वायु स्थिर हो जाती है। मनोवैज्ञानिक रूप से यह स्पर्श आपके मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि को एक सिग्नल भेजता है जिससे एकाग्रता और याददाश्त तुरंत बढ़ने लगती है। यह मुद्रा इतनी शक्तिशाली है कि अगर कोई छात्र या मानसिक काम करने वाला व्यक्ति इसे रोजाना सिर्फ 15 मिनट करें तो उसके मस्तिष्क की न्यूरॉन्स फायरिंग की गति बदल जाती है। जिससे कठिन से कठिन विषय भी आसानी से याद होने लगते हैं। बुद्ध की मूर्तियों में यह मुद्रा इसलिए नहीं है कि यह सुंदर दिखती है बल्कि इसलिए है क्योंकि
यह निर्वाण और परम ज्ञान को डाउनलोड करने का एक्सेस कोड है जो मन को बीटा वेव से निकाल कर शांत अल्फा वेव्स में ले जाती है। लेकिन क्या हो अगर आपके शरीर में वायु तत्व बिगड़ जाए और यह दर्द, बेचैनी या गठिया का रूप ले ले। यहां काम आती है वायु मुद्रा जो आधुनिक विज्ञान के पेन किलर्स को भी चुनौती देने की क्षमता रखती है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में 80% दर्द वात यानी वायु के असंतुलन से होते हैं। चाहे वह घुटनों का दर्द हो, गैस की समस्या हो या पार्किंस जैसी बीमारी में हाथों का
कांपना। जब आप अपनी तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में लगा देते हैं और अंगूठे से उसे हल्का सा दबाते हैं तो आप शरीर में बढ़ी हुई फालतू वायु को सप्रेस यानी कम कर देते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप किसी गुब्बारे से एक्स्ट्रा हवा निकाल दें ताकि वह फटे नहीं। इस मुद्रा को करते ही शरीर में रिलैक्सेशन रिस्पांस एक्टिवेट होता है और नर्वस सिस्टम शांत होने लगता है। जिन लोगों को रात में बेचैनी होती है या नींद नहीं आती उनके लिए यह एक प्राकृतिक नींद की गोली जैसा काम करती है क्योंकि
यह दिमाग में चल रहे अनचाहे विचारों के तूफान को शांत कर देती है। अब जरा सोचिए क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे हम अपनी गिरती हुई बैटरी को फिर से चार्ज कर सकें। जी हां। इसे प्राण मुद्रा कहा जाता है जो सीधे तौर पर हमारे इम्यून सिस्टम और आंखों की रोशनी से जुड़ी है। हमारी अनामिका उंगली यानी पृथ्वी और कनिष्ठा यानी जल जब अंगूठे यानी अग्नि के साथ मिलती हैं तो यह जीवन का सबसे बड़ा संगम होता है। पृथ्वी और जल मिलकर जीवन को आधार देते हैं और अग्नि उसे ऊर्जा देती है। यह मुद्रा शरीर
में सोई हुई प्राण शक्ति को जगा देती है। जिसे योग में कुंडलिनी शक्ति के जागरण से भी जोड़ा गया है। अगर आपको बहुत थकान महसूस हो रही हो या आप बीमारी से उठने के बाद कमजोरी महसूस कर रहे हो तो यह मुद्रा आपके शरीर के भीतर एक इन्वर्टर का काम करती है। प्राचीन ग्रंथों में दावा किया गया है कि लंबे समय तक इसका अभ्यास करने से चश्मे का नंबर तक कम हो सकता है क्योंकि यह सीधे मस्तिष्क के विजुअल कॉर्टेक्स को ऊर्जा की सप्लाई बढ़ा देती है जिससे आपकी आभा यानी ओरा भी चमकदार होने लगती
है। इसके बाद आती है एक ऐसी मुद्रा जो हमें ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमई तत्व आकाश से जोड़ती है जिसे शून्य मुद्रा या आकाश मुद्रा कहते हैं। हमारी मध्यमा उंगली यानी मिडिल फिंगर सबसे लंबी होती है और यह शरीर के बीचों बीच रीड की हड्डी और आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। जब हम इस उंगली को अंगूठे के साथ स्पर्श करते हैं तो हम अपने भीतर एक खालीपन या स्पेस पैदा करते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे दिमाग में इतना शोर है कि हम अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन ही नहीं पाते। यह मुद्रा कान
के रोगों जैसे टिनेटस यानी कान बजना या कम सुनाई देने की समस्याओं में जादुई असर दिखाती है। आध्यात्मिक रूप से यह मुद्रा साधक को नाद ब्रह्म यानी ब्रह्मांड की असली ध्वनि सुनने में मदद करती है। जब आप इस मुद्रा में बैठते हैं तो आपको महसूस होगा कि आपके आसपास का शोर गायब हो रहा है और एक गहरा सन्नाटा आपके भीतर उतर रहा है। यही वो अवस्था है जहां बड़े-बड़े आविष्कारक अपने नए आइडियाज प्राप्त करते हैं। लेकिन दोस्तों अभी तक हमने जो जाना वो तो सिर्फ एक झलक थी क्योंकि असली राज तो अब खुलने वाला है।
क्या आप जानते हैं कि हमारे हाथ में एक ऐसी वीआईपी मुद्रा भी है जिसे बड़े-बड़े राजनेता, सीईओ और दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोग इंटरव्यू या भाषण के दौरान इस्तेमाल करते हैं। यह मुद्रा सामने वाले के दिमाग को हाईकैक करने और अपने आत्मविश्वास को लोहे जैसा मजबूत बनाने के लिए जानी जाती है। और उससे भी बढ़कर एक ऐसी संजीवनी विद्या जो डॉक्टर के आने से पहले किसी की जान बचा सकती है। अब हम उस डायमंड कटर मुद्रा और उस हार्ट अटैक रोधक तकनीक का पर्दाफाश करेंगे जो विज्ञान और अध्यात्म का सबसे बड़ा प्रमाण है। तैयार हो
जाइए क्योंकि अब जो आप जानेंगे वो आपको भीड़ से हमेशा के लिए अलग कर देगा और आप समझेंगे कि क्यों इसे ईश्वर की भाषा कहा जाता है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोग चाहे वो स्टीव जॉब्स रहे हो, एलॉन मस्क या फिर प्राचीन समय के चक्रवर्ती सम्राट अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते रहे हैं। इसे उत्तरा बोधी मुद्रा या आधुनिक भाषा में मुद्रा ऑफ एनलाइटमेंट कहते हैं। जब आप अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लेते हैं और केवल तर्जनी उंगलियों को सीधा रखकर ऊपर की ओर जोड़ते हैं तो यह एक विशेष सर्किट बनाता
है जो सीधे आपके फेफड़ों और हृदय को खोलता है। यह मुद्रा एक एंटीना की तरह काम करती है जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा को रिसीव करती है और उसे आत्मविश्वास में बदल देती है। जब आप घबराए हुए होते हैं, या डर लगता है, तो शरीर सिकुड़ने लगता है, लेकिन यह मुद्रा दिमाग को सिग्नल भेजती है कि मैं सुरक्षित हूं और नियंत्रण में हूं। बौद्ध धर्म में इसे सर्वोच्च ज्ञान प्राप्ति की मुद्रा माना गया है जो आपके भीतर के डर को खत्म कर आपको एक अल्फा स्टेट में ले आती है। यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति गहरा
चिंतन करता है या कोई बड़ा निर्णय लेता है तो उसके हाथ अनजाने में इसी मुद्रा में चले जाते हैं। लेकिन क्या हो अगर कोई आपातकालीन स्थिति आ जाए, जैसे अचानक किसी को दिल का दौरा पड़े या घबराहट से सांस रुकने लगे और अस्पताल दूर हो। हमारे ऋषियों ने इसके लिए एक पॉकेट हॉस्पिटल जैसी तकनीक दी है जिसे अपान वायु मुद्रा या मृत संजीवनी मुद्रा कहा जाता है। इसमें तर्जनी को अंगूठे की जड़ में लगाया जाता है और मध्यमा व अनामिका उंगली के पोरों को अंगूठे के पोर से स्पर्श किया जाता है। जबकि छोटी उंगली सीधी
रहती है। ये विन्यास तत्काल हृदय क्षेत्र में वात यानी गैस के दबाव को कम करता है और धमनियों को फैला देता है जिससे रक्त प्रवाह सुचारू हो जाता है। कई आधुनिक होलिस्टिक हीलर्स का मानना है कि यह मुद्रा जीभ के नीचे रखी जाने वाली सॉर्बिट्रेट गोली की तरह ही तेजी से काम कर सकती है। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि शरीर के बायो फीडबैक सिस्टम का उपयोग है जो यह साबित करता है कि अगर सही स्विच दबाया जाए तो शरीर खुद को रिपेयर करने की क्षमता रखता है। हालांकि इन मुद्राओं का लाभ उठाने के लिए एक
महत्वपूर्ण नियम को समझना होगा जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं और वह है समय और धैर्य का नियम। मनोविज्ञान कहता है कि मस्तिष्क के न्यूरल पाथवे को बदलने के लिए लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। ठीक वैसे ही जैसे जिम में एक दिन जाने से बॉडी नहीं बनती। शास्त्रों के अनुसार किसी भी मुद्रा का पूर्ण प्रभाव देखने के लिए उसे एक बार में कम से कम 15 मिनट और दिन भर में 45 मिनट तक करना चाहिए। जब आप उंगलियों को स्पर्श करके रखते हैं तो शुरुआत के कुछ मिनटों में केवल ऊर्जा का प्रवाह बदलता
है। लेकिन असली रासायनिक बदलाव यानी डोपामिन और सेरोटोिन का स्राव 15 मिनट के बाद ही शुरू होता है। इसलिए जो लोग इसे दो-4 मिनट करके छोड़ देते हैं, उन्हें लगता है कि यह काम नहीं करता। जबकि असल में वे उस थ्रेशहोल्ड या सीमा तक पहुंचे ही नहीं जहां जादू शुरू होता है। इस पूरे विज्ञान का सार यथपिंडे तथा ब्रह्मांडे के सिद्धांत में छिपा है। जिसका अर्थ है कि जो इस छोटे से शरीर में है वही पूरे ब्रह्मांड में है। आपकी उंगलियां केवल शरीर का हिस्सा नहीं है, बल्कि वे उस ब्रह्मांडीय कीबोर्ड की कुंजियां हैं, जिससे
आप अपनी किस्मत का प्रोग्राम लिख सकते हैं। जब आप जानबूझकर अपने हाथों का उपयोग करते हैं, तो आप केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं कर रहे होते बल्कि आप अपनी चेतना यानी कॉन्शियसनेस को यह संदेश दे रहे होते हैं कि आप अब ऑटो पायलट मूड पर नहीं हैं बल्कि अपनी जिंदगी की गाड़ी खुद चला रहे हैं। यह विज्ञान हमें सिखाता है कि हम परिस्थितियों के गुलाम नहीं हैं। हमारे पास हर वक्त हर पल अपनी मानसिक और शारीरिक स्थिति को बदलने का औजार हमारे साथ ही मौजूद है। बस हमें उस पर जमी अज्ञानता की धूल को हटाना
था। अंत में मैं आपको एक चुनौती के साथ छोड़ना चाहता हूं। यह वीडियो देखना तो आसान था, लेकिन क्या आप आज से अगले 21 दिनों तक किसी एक मुद्रा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की हिम्मत रखते हैं? चाहे वह याददाश्त के लिए ज्ञान मुद्रा हो या आत्मविश्वास के लिए उत्तरा बोधी मुद्रा। याद रखिए ज्ञान होना शक्ति नहीं है। ज्ञान का प्रयोग करना असली शक्ति है। आपकी हथेलियों में लकीरें जरूर हैं जो शायद आपकी किस्मत बताती हो, लेकिन उन लकीरों को बनाने वाली उंगलियों में वह ताकत है जो उस किस्मत को बदल सकती है। अब
फैसला आपका है कि आप अपने हाथों को सिर्फ जेब में रखकर चलते हैं या उनसे अपना जीवन बदलते हैं। तो क्या आप अपने हाथों के इस जादुई रिमोट कंट्रोल का बटन दबाने के लिए तैयार हैं?