एक समय की बात है एक छोटा सा गांव था जहां एक भिखारी रहता था उस भिखारी का नाम माधव था माधव रोज सुबह उठकर गांव के अलग-अलग हिस्सों में भीख मांगने जाया करता था उसका जीवन भिक्षा पर ही निर्भर था गांव के लोग भी उसे पहचानते थे और कुछ ना कुछ उसे दे दिया करते थे माधव की एक खासियत थी वह अपने साथ हमेशा एक छोटी सी झोली लेकर चलता था जिसमें वह कुछ अनाज के दाने रखता था ऐसा वह इसलिए करता था क्योंकि इतने वर्षों में उसने एक बात समझी थी अगर कोई उसकी झोली
में कुछ ना देखे तो उसे भीख देने में हिचक चाते थे अगर उसकी झोली में कुछ पहले से ही दिखे तो लोग उसे और भीख दे देते थे यह उसकी भीख मांगने की चालाकी थी एक दिन वह सुबह जल्दी उठकर अपने काम पर निकल पड़ा आज वह कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था जैसे आज का दिन कुछ खास होगा जैसे ही वह गांव की मुख्य सड़क पर पहुंचा उसने देखा कि सामने से एक शानदार रथ आ रहा है रथ की चमक और उसकी सुंदरता देखकर माधव को समझ में आ गया कि यह राजा का
रथ है माधव ने सोचा वाह आज तो किस्मत खुल गई अगर राजा की नजर मुझ पर पड़ गई और उसने कुछ दे दिया तो मेरी जिंदगी ही बदल जाएगी वह जल्दी से सड़क के किनारे खड़ा हो गया और राजा के रथ के पास से गुजरने का इंतजार करने लगा जैसे ही रथ उसके पास पहुंचा कुछ अजीब हुआ रथ उसके पास आकर रुक गया माधव हैरान रह गया उसकी आंखें चौड़ी हो गई जब उसने देखा कि राजा खुद रथ से उतरा और उसकी ओर बढ़ने लगा अब उसकी कल्पनाएं और तेज हो गई उसने सोचा अरे आज
तो मैं राजा से कुछ मांगने जा रहा हूं शायद वह मुझे ढेर सारा सोना चांदी या कोई बड़ी चीज दे देगा लेकिन तभी एक और चमत्कार हुआ राजा ने अपनी झोली उठाई और उसे माधव के सामने फैला दी माधव की आंखें फटी की फटी रह गई उसने सोचा यह क्या राजा मुझसे भीख मांग रहा है राजा ने विनम्रता से कहा भाई मुझ पर दया करो और मुझे कुछ भिक्षा दे दो माधव को विश्वास नहीं हो रहा था उसने सोचा यह तो उल्टा हो गया राजा मुझसे भीख मांग रहा है लेकिन राजा ने उसकी ओर देखते
हुए कहा यह मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है हमारे राज्य पर एक संकट आ रहा है और राज ज्योतिष ने कहा है कि अगर मैं इस संकट से बचना चाहता हूं तो मुझे पहले व्यक्ति से भीख मांगनी होगी जिसे मैं आज सुबह देखूं और तुम वह व्यक्ति हो कृपया मुझे कुछ दान दो अब माधव असमंजस में था वह सोचने लगा क्या मैं राजा को कुछ दे दूं लेकिन मैं खुद तो एक भिखारी हूं मेरे पास तो खुद ही कुछ खास नहीं है अगर मैंने राजा को कुछ दे दिया तो मेरे पास बचेगा क्या काफी सोच विचार
के बाद उसने अपनी झोली से एक छोटा सा अनाज का दाना निकाला और राजा की झोली में डाल दिया राजा ने मुस्कुरा हुए सिर झुकाया और अपनी झोली बंद कर ली फिर वह वापस अपने रथ की ओर चला गया माधव ने देखा कि राजा तो बिना कुछ बोले चला गया लेकिन उसके मन में खट्टापन था वह सोचने लगा क्या मैंने सही किया राजा खुद भी तो इतना अमीर है वह मुझे कुछ मूल्यवान दे सकता था और मन ही मन राजा को बुरा भला कहने लगा दिन भर माधव को बहुत भिक्षा मिली उसकी झोली में अनाज
पैसे और कपड़े भर गए लेकिन उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी उसे राजा से मिलने का मौका मिला था और उसने उस मौके को व्यर्थ जाने दिया शाम को जब वह घर पहुंचा उसकी पत्नी ने उसकी ओर देखा और बोली आज तो तुम्हारा नाम पूरे गांव में फैल गया है लोग कह रहे हैं कि राजा ने तुमसे भीख मांगी वाह तुम कितने महान हो लेकिन माधव को खुशी नहीं हुई वह गुस्से से बोला तुम्हें क्या पता राजा ने मुझसे भीख मांगी थी भला मैं राजा को क्या दे सकता था और मैंने उसे केवल
एक दाना दिया अगर मैंने उसे ज्यादा दिया होता तो शायद मेरा और नाम होता उसने अपनी झोली गुस्से में उठाई और उसे जमीन पर फेंक दिया सारी चीजें जमीन पर बिखर गई जैसे ही अनाज जमीन पर गिरा माधव की नजर एक चमकते हुए दाने पर पड़ी यह वही दाना था जो उसने राजा को दिया था और अब वह सोने का बन चुका था माधव यह देखकर हक्का बक्का रह गया वह सोचने लगा अगर मैंने राजा को सिर्फ एक दाना देकर सोने का दाना पाया है तो अगर मैंने उसे ज्यादा दिया होता तो मेरा पूरा जीवन
बदल सकता था वह जमीन पर बैठ गया और रोने लगा वह समझ चुका था कि उसने अपनी लालच के कारण एक बड़ा मौका खो दिया यह कहा एक बहुत महत्त्वपूर्ण सीख देती है हमें अवसरों को पहचान कर बिना स्वार्थ के दान देना चाहिए माधव की गलती यह थी कि उसने लालच और डर के कारण अपने पास मौजूद चीजों को बांटने से परहेज किया अगर वह दिल खोलकर राजा को दान देता तो उसे बहुत बड़ा लाभ मिल सकता था इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि जब भी हमें कुछ देने का मौका मिले तो हमें
निस्वार्थ भाव से देना चाहिए यही दान हमें जीवन में असली सफलता और खुशी दिलाता है