बिस्मिल्लाह रहमा रहीम अस्सलाम वालेकुम नाजरीन आप YouTube चैनल देख रहे हैं। मैं इमरान खान हूं जिसको गुमसान की लड़ाई कहते हैं वो अब शुरू हो गई है। डॉनल्ड ट्रंप ने एक ऐसा हुक्मनामा दिया है जिसके बाद सुरते हाल मशरिक वस्ता की बहुत ज्यादा खराब हो जाएगी क्योंकि ईरान ने पहले बताया था कि जो हमारे साथ किया जाएगा वही पूरे ख्ते में होगा। ईरान ने कहा था कि अगर हमारी एनर्जी की साइट्स को तबाह किया गया या हमारी रिफाइनरीज को नुकसान पहुंचाया गया या हमारी उन फैसिलिटीज को जिनके जरिए से हम तेल निकालते हैं और पहुंचाते
हैं उनको तबाह किया गया तो बाकी ख्ते का भी कुछ नहीं बचेगा। अब ये ईरान ने पहले कह दिया था। अब इस वक्त जो खबर आ रही है वो बड़ी खौफनाक है। डॉनल्ड ट्रंप का पहले अनाउंसमेंट मैं आपको पढ़ के सुना देता हूं। ट्रंप ने कहा कि कुछ देर पहले मेरी हिदायत पर अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने मशरिक वस्ता की तारीख ताकतवर तरीन बमबारी की कारवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। यानी सादा बात यह है कि डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट की तारीख में कभी इतनी खौफनाक बमबारी नहीं हुई जितनी खौफनाक
बमबारी अभी मेरे हुक्म पे अमकी फौज ने की है। ईरान का एक जजीरा जो है वो ताज कहलाता है। यानी यह बड़ा खास जजीरा है ईरान का। मैं इसके बारे में आपको थोड़ा सा बताता हूं। जजीरा खर्क इसका नाम है और यह आबनाए हुरमत से तकरीबन कोई 300 मील के फासले पर है। यानी अगर आप पर्शियन गल्फ देखें ना तो जहां पे आबना हुरमत है उससे अगर आप पाकिस्तान के अपोजिट साइड पे जाएं दूसरे मुालिक जहां पे सऊदी अरब है, यूएई है, ओमान है, ऊपर जाके क़तर है। इस तरफ अगर आप जाए तो आपको यहां
पे यह जजीरा मिलता है। ये जजीरा खर्क अगर आप नक्शे के अंदर देखें तो ये आपको इस जगह पे दिखाई दे रहा है। यह 300 मील दूर है आबना-ए-हुत से और ईरान की जो मेन लैंड है जो ईरान की मेन सरजमी है वहां से यह लगभग समुंदरी रस्ते से 25 कि.मी. के फासले पर है। और ये जजीरा तो छोटा सा है। 20 मुरब्बा कि.मी. इसका जो टोटल रकबा है। यानी इतना बड़ा जजीरा नहीं है। लेकिन ये ईरान के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। मुख्तलिफ आलमी रिपोर्टें के मुताबिक ईरान की ये वो फैसिलिटी है जहां से वो
पूरी दुनिया को पेट्रोल भिजवाता है। जब भी वह पेट्रोल एक्सपोर्ट करते हैं, जहां भी जाता है, उनके शिप यहां से जाते हैं। वो यहीं से फैसिलिटेट करते हैं। और कुछ अंदाजों के मुताबिक ईरान का 80 से 90% तक पेट्रोल। और कुछ रिपोर्टें कहती है कि 80% और कुछ कहती है कि 90% वो यहां से जाता है तो ईरान की जो आमदन है उसका ज्यादा इनसार भी पेट्रोल के ऊपर है और अगर यहां पे चोट लगाई है अमेरिका ने तो वो रिस्क ले लिया है जिसके बाद एक बड़ी खौफनाक सूरतेहाल पैदा हो सकती है। ये अमेरिका
के बी टू बमबर्स हैं जो रवाना हुए थे। इनके दो मिशन बताए गए थे और डॉनल्ड ट्रंप ने जब अनाउंस किया तो डॉन्ड ट्रंप ने बताया कि जनाब मैंने यह कर दिया है। लेकिन साथ ही उसने कहा कि मैंने ऑयल के इंफ्रास्ट्रक्चर को अभी तबाह नहीं किया। लेकिन जब रिपोर्ट आएगी तो पता चलेगा इन्होंने कितनी तबाही की है और किस नयत की तबाही की है। और इन्होंने यह भी कहा डॉन्ड ट्रंप ने कि मेरे हथियार बड़े शानदार है। मेरी फौज बड़ी शानदार है। मैंने बहुत ज्यादा फौज को सपोर्ट किया है। बहुत ज्यादा फौज को मुनजम
किया है। ईरान के पास ऐसी कोई सलाहियत नहीं है जिससे वह हमसे बच सके। अब ईरान को वो कह रहे हैं हम इतना तबाह करेंगे कि वह दुनिया को धमका नहीं सकेगा। खास तौर पर मश वस्ता की बात कर। देखिए डॉन्ड ट्रंप ने अपने आप को गुजस्ता चंद दिनों में यह मैं वैसे ही आपको बता रहा हूं एक इनफेशन कि डॉनल्ड ट्रंप ने अपने आप को इसराइल से थोड़ा सा अलग किया है। गुजस्ता चंद दिनों में पहले डॉनल्ड ट्रंप अपने हर स्टेटमेंट के अंदर इसराइल का तस्करा करता था। अपने हर स्टेटमेंट के अंदर नेतन या
की बात करता था। अपनी दोस्ती की बात करता था। अपने दोस्तों की बात करता था। इसराइल के साथ ताल्लुक की बात करता था। इसराइल की हिफाजत की बात करता था। लेकिन अब डॉनल्ड ट्रंप ये बात नहीं कर रहा। बल्कि एक इंटरव्यू में डोनल्ड ट्रंप ने यहां तक कहा कि इसराइल एक अलग मुल्क है। उसकी अपनी एक अलग पॉलिसी है और हम एक अलग मुल्क है। हमारी अपनी एक अलग पॉलिसी है। और ये कहने के पीछे जो डॉनल्ड ट्रंप की मजबूरी है वो ये है कि डॉनल्ड ट्रंप पे ये एलगेशन लग गया अमेरिका में कि ये
लड़ाई तो इसराइल की लड़ाई थी। अमेरिका ने इस लड़ाई को किस खुशी में लड़ा है और अमेरिका अपने फौजियों की कुर्बानियां इस लड़ाई में किस खुशी में दे रहा है। अगर ईरान से खतरा था तो इसराइल को था। अमेरिका को तो नहीं था। तो अमेरिका क्यों ये कुर्बानी दे रहा? अब अमेरिका जो है वो मश वस्ता का नाम लेता है। खलीजी मुालिक का नाम लेता है। आलमी मंडियों का नाम लेता है। आबना हुरमस का नाम लेता है। बल्कि शुरू में वो इसराइल का नाम लेता था। अब वो नहीं लेता। अब ये जो अटैक किया गया
है इसके बाद ईरान का रद्दे अमल बड़ा खौफनाक होगा। क्योंकि देखिए ईरान ने अभी तक जिसज रद्दे अमल का कहा उन्होंने वह रद्दे अमल दिया। ईरान ने कहा कि अगर आप हमारी जो जो चीज आप जैसेजैसे तबाह करेंगे अगर आप हमारा तबाही का इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह कर देंगे और बिजली बंद कर देंगे पूरे ईरान की तो हम पूरे मुशरिक वस्ता की बिजली बंद कर देंगे। ये ईरान ने कहा था। धमकी लगाई थी और उसके बाद अमेरिका ने वो नहीं किया। ईरान ने कहा कि अगर आप हम पे अटैक करेंगे तो हम आपके अमकी अड्डों पे अटैक
करेंगे। उसने किया। ईरान ने कहा आप हमारे मालियाती इदारों पे अटैक करेंगे। हम आपके करेंगे। उसने वो किया। ईरान ने कहा कि अगर आप ये ये चीजें करेंगे तो हम आप नए हुमस को बंद कर देंगे। उसने बंद किया। ईरान ने कहा कि अगर आप ईरान के एटमी साइट्स के ऊपर या बाकी जो मिसाइल साइट्स हैं उनके ऊपर अटैक करेंगे और सिविलियंस को निशाना बनाएंगे तो हम इसराइल की ईंट से ईंट बजाएंगे। और उसने ये करके दिखाया। आज के दिन में जो इसराइल से मनाजरि आए हैं वो इससे पहले नहीं आए। बड़ा ही खौफनाक अटैक
किया ईरान ने। ये क्लस्टर्ड बम थे और उसके अलावा बैलेस्टिक बम थे। ईरान ने तिलुल बीब ऐसा लग रहा था कि हर तरफ बम गिर रहे हैं। जगह-जगह आग लगी हुई थी। जगह-जगह धमाके हो रहे थे। और अब जो इतलात आ रही है वो ये है कि वो जो बंकर्स बनाए हुए हैं इसराइल ने वो भी इन मिसाइलों और बमों से उतने महफूज़ नहीं है जितने समझे जा रहे थे। और इसराइल के अंदर चंद अहम लोगों के मरने की इतलात भी आ रही है। अब ये सिचुएशन है। डॉनल्ड ट्रंप ने बड़ा खौफनाक अनाउंसमेंट किया है
और बकायदा वो उसके ऊपर एक पोस्ट करके दुनिया को बता भी दिया कि मैंने ये काम कर दिया है। अब इसका रद्दे अमल ईरान की जानिब से क्या आता है? अगर यह रद्दे अमल उसी तरह आया जैसे एरान ने कहा था तो याद रखिएगा कि पेट्रोलियम मसत की कीमतें बहुत ऊपरंगी और पूरी दुनिया के लिए एक लंबे अरसे के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी और यह डोनाल्ड ट्रंप के शौक में हो जाएगी जिन्हें पाकिस्तान अमन का नोबल इनाम देना चाहता है। अब एक और काम किया अमेरिका ने। अमेरिका ने 10 ऐसे ईरानी शहरी हैं या
लीडर्स हैं जिनके ऊपर इनाम रख दिया है। अमेरिका ने कहा इन 10 लोगों के बारे में बताएगा जो भी 10 में से किसी एक के बारे में बताएगा तो एक करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलेंगे। यानी 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर का इनाम हर एक के सर पर रख दिया कि हमें बताएं सिर्फ कि यह कहां पे है? इसकी इनफार्मेशन दें और हमसे पैसा लें। ये अमेरिकन से कहा। इसमें जो सबसे टॉप के ऊपर सबसे पहला नाम रखा गया वो आयतुल्लाह मुस्तबा खामनई का नाम रखा गया जो नए सुप्रीम लीडर है ईरान के। अच्छा इनके बारे में ना
अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट ने यह कहा कि नए सुप्रीम लीडर जख्मी है और हम यह बात जानते हैं। जबकि ईरानी हुकाम ने यह बताया कि जी बिल्कुल वो जख्मी है लेकिन वो अपने दफ्तरी काम कर रहे हैं और मामूली जख्मी हैं। और उनका एक बयान भी आपने ऑडियो बयान भी उनका आ चुका है। और ईरान के अंदर जो फैसले आमन वो अपनी शोरा के साथ मिलकर कर रहे हैं। तो ये जेडी वेंस ने कहा कि इससे दबाव पड़ता है ना कि हमें पता है वो जख्मी है। लेकिन जवाब ईरान का आया कि नहीं वाकई जख्मी
है लेकिन वह अपना काम कर रहे हैं। इस पर फिक्र वाली बात कोई नहीं है क्योंकि लगातार अटैक्स हो रहे हैं। उनमें से किसी एक हमले में आयतुल्लाह मुस्तफा खामनाई जो है वो जख्मी हो गए थे। अब नाजरीन इनाम रख दिया। एक तो आयतुल्लाह खामनाई पे एक करोड़ डॉलर मिलेंगे जो बताएगा इन देगा। फिर और लोग हैं इनमें जो ईरान के इराकीची हैं उनका भी है और बहुत सारे लोग हैं उनके नाम है। ये सारे आपको टीवी पे सारा दिन नजर भी आते हैं। और ज्यादातर लोग जो है आप जानते हैं और चार लोग ऐसे
हैं जिनका अमेरिकनंस को नाम भी नहीं उन्होंने दिया और ना उनकी तसावीर है अमेरिकन के पास लेकिन वो कहते हैं जी हमें इनके बारे में बताया जाए। अब देखते हैं कि ये अमेरिका को इसका फायदा होता है या नहीं होता। क्योंकि इससे पहले तो जो इसराइल का एक नेटवर्क था ईरान के अंदर जासूसी का उसके जरिए से वह पता करवा लेते थे कि कहां-कहां पे कौन-कौन है। लेकिन जासूसी का नेटवर्क बहुत बुरी तरह एक्सपोज हुआ है। इन्होंने बहुत सारे लोगों को फांसियां दी थी। पकड़ा था। 2025 में भी और 2026 में भी। तो अब शायद
वो नेटवर्क वैसे काम नहीं कर रहा। तो इन्होंने फिर इनाम रख दिया सर पे। दूसरी जानिब एक अपील जो है वो ईरानियों ने भी कर दी है। ईरानी फौज ने और हुकूमत ने अपील की है कि हम अपने अरब भाइयों से अपील करते हैं कि वो निशानानदेही करें कि 11,000 अमकी फौजी कहां-कहां छुपे हैं। उन्होंने ये कहा कि जब हमने अटैक शुरू किए अमकी अड्डों पर तो एक पॉलिसी के तहत अमकी फौजियों को निकालकर आबादी वाले इलाकों में छुपाया गया। उन्हें निजी होटलों में और निजी जगहों पर मुंतकिल किया गया और वो हमारे अरब भाइयों
को ढाल बनाना चाहते हैं। तो हमारी गुजारिश है कि उन्हें किसी जगह पे अरब भाई पनाह ना दें और उनके बारे में हमें आगाह करें कि यह कहां-कहां छुपे हैं ताकि इन्हें निशाना बनाया जा सके। अब एक तरफ एक अपील की है अमेरिका ने और दूसरी तरफ एक अपील कर दी है ईरान ने भी। एक खबर और है इसके साथ आप जोड़ के देख लें। वो यह है कि बहुत बड़ी तादाद में मजीद फर्सेस को पहुंचाने की तैयारी की जा रही है गल्फ में यानी खलीजी इलाकों में और डॉनल्ड ट्रंप ने इस वक्त जो इतला
आई है उस इतला के मुताबिक लगभग एक मजीद जंगी बेड़ा वो जा रहा है। अमकी मरींस की एक बड़ी तादाद जा रही है। 5000 अमकी फौजी जो है वो इस ख्ते में मजीद पहुंचाए जाएंगे। और इसके अलावा एयरफोर्स और बैरी जहाज ये सारी चीजें वहां पर वो करीब लेकर जा रहे हैं और उनका यह कहना है कि वो ईरान के ऊपर मजीद हमले करना चाहते हैं। अब अमेरिका के अंदर शदीद मुखालफत हो रही है तो डोनल्ड ट्रंप इतना बड़ा रिस्क कैसे ले सकता है? क्या वाकई वो अपनी फौज को ईरान की सर जमीन पे उतारना
चाहते हैं क्योंकि देखिए यूरेनियम के हवाले से उनके पास कोई मंसूबा है नहीं। ईरान के पास जो तैयार यूरेनियम है जिसको वो एटम बम बनाने में इस्तेमाल कर सकता है। लगभग 450 किलो उनके पास है। इस पर पटन ने एक ऑफर दी है डॉनल्ड ट्रंप को जो रूसी सदर हैं उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप को कहा कि हम यह यूरेनियम उठाकर रशिया ले जाते हैं अगर आपको प्रॉब्लम है तो। तो डॉनल्ड ट्रंप ने कहा नहीं जी ये नहीं होगा। यह ऑफर डॉनल्ड ट्रंप ने मुस्तरद कर दी। और ईरान से तो अभी बात ही नहीं हुई इस बारे
में। ईरान अपनी यूरेनियम देता भी है या नहीं देता यह भी कोई नहीं जानता। लेकिन वो यूरेनियम है कहां? वो जहां भी है वो इतनी महफूज़ है कि जमीन की बहुत नीचे तय के अंदर उन्होंने रखी है कहीं। देखिए अमेरिका का जो सबसे बेहतरीन बम बार तैयारा है वो B2 बमबर तैयारा B52 ये तैयारे हैं। इनके जो बम है वो स्ट्रक्चर्स को तोड़ देते हैं और वो बंकर तोड़ देते हैं। बंकर बस्टर्स हैं। यानी वो जाते हैं और जाकर जो ज़रे जमीन स्ट्रक्चर बने हुए हैं उनको तोड़ देते हैं। लेकिन अगर ज़रे जमीन स्ट्रक्चर बहुत
नीचे है जमीन के अंदर तो फिर उसको वो नुकसान नहीं पहुंचा सकते। सैकड़ों फुट नीचे जो है वह ईरान ने और वह मिट्टी की लेयर है। कंक्रीट की लेयर जो है उसको वो तोड़ देते हैं मिसाइल्स। मट्टी की लेयर के अंदर घुसना वो बहुत मुश्किल होता है। और जो मिट्टी है या जो कुदरती जो अवामिल है उनके अंदर से गुजरना बम का इतना आसान नहीं होता। जो कंक्रीट का स्ट्रक्चर होता है उसको तोड़ने के लिए बम डिजाइन किया जाता है। तो अब जो बम्स हैं वो भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे जहां पे ईरान
ने अपने मिसाइल्स, अपने ड्रोंस या अपना जो उनके पास एटम बम बनाने की सलाहियत का जो सिस्टम है या जो उनके पास यूरेनियम है उसको जहां रखा हुआ है वहां अमेरिका की एक्सेस नहीं हो पा रही। उन्हें जमीन पे उतरना पड़ेगा, जमीन पे आना पड़ेगा। क्या अमेरिकनंस इसके लिए तैयार हैं? क्योंकि ईरानी तो कह रहे हैं कि जमीन पे उतरे तो हम इनके साथ लड़ाई करेंगे। कि हम तो इनका इंतजार कर रहे हैं 50 साल से और ईरानियों ने ऐसा लगता है बड़ा लंबा अरसा तैयारी की है इस जंग की जिस तरीके से उन्होंने मिसाइल
मारे फिर फाइनेंसियल टाइम्स की एक रिपोर्ट आई है। ये रिपोर्ट जरा आप देखें। इस रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के जवाबी हमले ने अमकी हुकाम को हैरान कर दिया और हिला कर रख दिया है। तेहरान ने खलीजी मुालिक पर 3000 से ज़ायद मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। 3000 से जायद। जबकि इसराइल की तरफ से सैकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। अमकी ऑफिसर्स जो है मिलिट्री के और साबिका ऑफिसर्स वो यह कह रहे हैं कि ईरानियों ने बहुत कम वसाइल से बहुत ज्यादा कुछ करने का कारनामा सर अंजाम दे दिया है। जिसकी मिसाल बहुत कम मिलती है।
सस्ते शहीद ड्रोन ने रडार, बंदरगाह, फौजी अड्डे और तेल की तसीबात को निशाना बनाने में बड़ा जबरदस्त किरदार अदा किया है। अमरी हुकाम अब मान रहे हैं कि हमने यह नहीं सोचा था कि ईरानी इस तरह का रद्दे अमल देंगे और अभी एक और बहुत बड़ा नुकसान हो गया और यह नुकसान हुआ है सऊदी अरब में। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर अमेरिका के जहाज खड़े हुए थे। और यह वही जहाज हैं जो रिफ्यूलिंग करते हैं जहाजों में। और बड़े कीमती जहाज है ये। इससे पहले आपको याद है ना कि एक दिन पहले इराक
के अंदर इन्होंने कहा जी एक हादसा हो गया और दो जहाज आपस में टकरा गए। एक को लैंड कर दिया गया। वो उसको ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। दूसरा तबाह हो गया। उसके अंदर छह अमरीकी सवार थे। वो छह के छह मारे गए। अब ये तो अमेरिका मान रहा है कि उनका ये नुकसान हुआ। लेकिन इसी तरह के पांच जहाज जो हैं वो तबाह हो गए हैं। कुछ मुकम्मल और कुछ जुबी तौर पे और ये रिफ्यूलिंग करने वाले तैयारे थे और इसके ऊपर जो रिपोर्ट दी है वो रिपोर्ट दी है व्फ ट्रीट जर्नल ने। वो ये
बता रहे हैं जनाब के एयरफोर्स के तैयारों को नुकसान पहुंचा है और ये वो तैयार हैं जो रिफ्यूलिंग का काम करते हैं बाकी तैयारियों के लिए। अब नाजरीन डॉनल्ड ट्रंप की परेशानियां ना एकदम लगातार बढ़ती चली जा रही है। उसकी वजूहात मैं आपके सामने रख देता हूं। सबसे पहले तो यह है कि एक वाकया ऐसा हुआ कि डॉनल्ड ट्रंप का जो वजीर खजाना है अमेरिका का सेक्रेटरी खजाना आप इसे कहते हैं। स्कॉट बेसेंट ये एक इंटरव्यू दे रहा था। लाइव इंटरव्यू में अचानक से इसे आवाज आती है कि डॉनल्ड ट्रंप आपसे बात करना चाहते हैं
और डॉनल्ड ट्रंप ने सदर ने आपको बुलवाया तो यह जब सदर को मिलकर आया और वापसी पर आकर बैठा तो पहला क्वेश्चन सदर से मुलाकात के हवाले से किया गया कि क्या वो ठीक है तो इसमें ये जो सेक्रेटरी खजाना है यह बहुत ज्यादा घबराया हुआ था और इसकी आवाज में काफी लर्जिश थी यानी वो कॉन्फिडेंस ही नहीं था। अगर वो आप सुने इंटरव्यू का हिस्सा निकाल के तो मैंने सुना वो एक नॉर्मल आदमी लग ही नहीं रहा था। ऐसा लग रहा था कि बहुत शदीद परेशान है। ये चीजें बताती है कि सदर के आसपास
बड़ा टेंशन का माहौल बना हुआ है और चीजें नॉर्मल नहीं है। जिस किस्म के हमले वो कर रहे हैं। फिर नेतन याू के हवाले से अफवाएं आ रही है कि नेतन याू पता नहीं कहां चला गया। अब नेतन याू इसराइल में तो मौजूद नहीं है। यह तो बहुत सारे सोर्सेस कह रहे हैं और कोई दावा नहीं करता कि वो इसराइल में है। यह कहा जाता है कि नेतन याू या तो हवा में ट्रेवल करता रहा है पिछले दिनों या अब किसी और जगह पे महफूज़ जगह पे चला गया है। और नेतन याू की एक जो
वीडियो आई है उसके बारे में कहा जा रहा है कि यह नेतन याू है ही नहीं। ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है और बाज लोग बड़े वसूक से दावा कर रहे हैं कि इसमें इसकी कभी छह उंगलियां नजर आती है, कभी पांच नजर आती हैं और दांतों का डिजाइन और बाकी चीजें तो वो उसको एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कारवाई करार दे रहे हैं। ये तो बहुत आगे है ना अमेरिका और इजराइल तो बहुत आगे है इस टेक्नोलॉजी में। हम लोग तो अभी बहुत पीछे हैं। बहुत वो हमसे कई साल आगे हैं। बहुत आगे हैं। तो अब ये
दावा किया जा रहा है। लेकिन देखिए अभी तक ये अफवाएं हैं। इनकी कंफर्मेशन नहीं दी जा सकती। फिर डॉनल्ड ट्रंप के लिए एक और जो बहुत बड़ा इशू है वो इशू है एस्टीन फाइल्स का। अब इसमें अलहान उमर आप जानते हैं खातून को और ये बड़ी शानदार पॉलिटिशियन है। अमेरिका से इनका ताल्लुक है। उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया है। उन्होंने कहा है जी किन फाइल्स में डॉनल्ड ट्रंप का नाम 38,000 मर्तबा आया है। अंदाजा करें आप। एक आदमी का 38,000 मर्तबा नाम आ गया एस्टीन फाइल्स में। और आप सब जानते हैं यह फाइल्स क्या है। यह
मासूम और कम उम्र लड़कियों के साथ जुल्म और ज्यादती की एक पूरी दास्तान है। दुनिया के अमीर तरीन और ताकतवर तरीन लोग अपनी अय्याशी के लिए मुंह काला करते रहे। ये वो दास्तान है। मैं इससे ज्यादा क्या बताऊं आपको? लेकिन ये चीज है कि 38,000 मर्तबा डोनाल्ड ट्रंप का उसमें नाम आया और वो कहती है कि आप कह सकते हैं कि ट्रंप पेडू फाइल्स प्रोटेक्शन पार्टी का सरबराह है। ये अलहान उमर ने ये कांग्रेस वूमन है। इन्होंने डोन्ड ट्रंप के खिलाफ ये बात की और पूरे अमेरिका के अंदर इस वक्त ये एक तासुर है कि
डॉन्ड ट्रंप ने ये जो जंग शुरू की है इसकी वजह एस्टीन फाइल से तवज्जो हटाना है। फिर जो ईरान में बच्चियों के कत्ल वाले मामले पे डॉनल्ड ट्रंप ने झूठ बोला ना वो गले पड़ गया। अब हर तरफ से ना सिर्फ मीडिया पे ये सवालात हो रहे हैं बल्कि सियासतदान भी ये कह रहे हैं कि अमकी सदर कैसे झूठ बोल सकता है? जब अमकी वजीर दफा से या बाकी लोगों से पूछा जाता है कि कितने अमकी फौजी मारे गए अब तक इस लड़ाई में या कितने जख्मी हुए नुकसान बता दो तो वो उसके बारे में
नहीं बता रहे। फिर हालत डोनल्ड ट्रंप की ये हो गई है कि ईरान की फुटबॉल टीम को धमकी लगा दी। कहते जी मैं वेलकम करता हूं ईरानी टीम को लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो अपनी हिफाजत के पेशज़ यहां पे आएंगे। अब अंदाजा करें आप कि अमकी सदर को यह दावा करना चाहिए था कि ईरानी टीम खुलकर आए हम उसको प्रोटेक्शन देंगे और यही एक बड़े लीडर की निशानी होती है। लेकिन अमन के नोबेल इनाम के हकदार लीडर ने ये कहा कि फुटबॉल की टीम को भी धमकी लगा दी। यानी खेलों को तो आप दूर
रखते हैं जंग से सियासत से। लेकिन फुटबॉल टीम को भी धमकी लगा दी डोनल्ड ट्रंप ने। यह हालात है। अब आ जाए नाजरीन पाकिस्तान के अंदर एक वाकया हुआ है और इसमें दो ड्रोंस रावलपिंडी में मार गिराए गए। पहले इतला आती है कि कुछ खैबर पख्तून खान के अंदर ड्रोनस हैं। उनके ऊपर फायरिंग वायरिंग हो रही थी। खैबर पख्तून खान में लकी मरबत में दहशतगर्दी का बड़ा अफसोसनाक वाकया भी हुआ। सात अफराद जाबाहक हुए और यह रूटीन बनती जा रही है बलचिस्तान में और खैबर पख्तून खान में दहशतगर्दी बढ़ती जा रही है। क्योंकि दहशत गर्दों
को बाय डिज़ लाकर पाकिस्तान में बसाया गया और यह काम पाकिस्तान की जनरलों ने किया था। जनरल बाजवा ने और जनरल नदीम अंजुम ने यह डिजाइन किया था। जनरल फैज भी एक दौर में इसका हिस्सा था। इमरान खान ने मना किया तो इमरान खान की हुकूमत गिरा कर शबाज शरीफ के जरिए से दहशतगर्दों को पाकिस्तान में ले आए। अब भुगत रही है पूरी कौम? तो मामला यह है कि ये जो दो ड्रोन रावलपिंडी तक पहुंचे ये रावलपिंडी तक आए कैसे? इनकी रफ्तार कोई जेट तैयार जितनी तो नहीं है। ये इतना तेज तो नहीं आता। रास्ते
में बहुत सारे एसेट्स हैं। बहुत सारी चीजें हैं। ये एयरपोर्ट पे गिर सकते थे। ये किसी जहाज को निशाना बना सकते थे। यह किसी और तनसीब को निशाना बना सकते थे। ये यहां तक पहुंचे कैसे? पहला सवाल तो यह है। और ये आए कहां से? दूसरा सवाल यह भी है। अभी तक सिक्योरिटी फोर्सेस ने ये नहीं बताया। देखिए पाकिस्तान का मीडिया तो फितनातुल हिंदुस्तान डायरेक्ट चला देता है ना। वो तो आसरा ही नहीं करता। उनको तो आर्डर दिया हुआ है जनाब जो भी चीज हो पाकिस्तान में पटाखा चले। फौरन आपने खाते में डाल। लेकिन मामला
ये है कि कोई कन्फर्मेशन तो आए ना। बताया तो जाए इसके पीछे कौन है? तंजीम कौन सी है? दाइश वाले हैं। अलकायदा वाले हैं। तहरीक तालबान पाकिस्तान है। तहरीक तालिबान अफगानिस्तान है। कौन है इसके पीछे? जो भी है उसका फिर नाम इसके पीछे इसराइल है। मूसाद है। कौन है? नाम लेना चाहिए ना। रॉ है इसके पीछे। तो ये पाकिस्तान की सिक्योरिटी फर्सेस की रिसोंसिबिलिटी है। एक तो ये इंटेलिजेंस का फेलियर होता है बार-बार। और ये इस तरह ड्रोन रावलपिंडी तक पहुंच जाए तो बड़ा अफसोसनाक है। लेकिन ये ड्रोन इतने वो काबिल ड्रोन नहीं थे। फारग
किस्म के ड्रोन थे। तो इनका कोई तया पहुंचा करना मुश्किल नहीं था। तो यह दो ड्रोन गिरा दिए गए हैं। इनके पीछे कौन है? जिम्मेदारी किसकी है? इसके बारे में अभी तक कोई इतला नहीं आई। अच्छा ख्वाजा आसिफ ने इमरान खान को ताना दिया है कि इमरान खान ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ अभी तक कोई स्टेटमेंट नहीं दिया। ख्वाजा आसिफ साहब 20 दिसंबर को इमरान खान साहब की आखिरी मुलाकात हुई थी और उनका ट्वीट आया था। यह जंग शुरू हुई है 28 फरवरी को। यानी इमरान खान साहब की आखिरी मुलाकात होने के भी सवा
दो महीने के बाद यह जंग शुरू हुई है। तो इमरान खान इस पर स्टेटमेंट कैसे दे दे? इमरान खान का तो लगभग कोई ढाई महीने हो गए हैं। पौने तीन महीने हो गए हैं। कोई एक स्टेटमेंट बाहर नहीं आया। वो इसके ऊपर स्टेटमेंट कैसे दे दे? अखबार उसको नहीं मिलता। टीवी उसको नहीं मिलता। तो वो कैसे इसके ऊपर स्टेटमेंट दे दे? माजी में उसने हमेशा स्टेटमेंट दिया। खुलकर स्टेटमेंट दिया। लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि आपका लीडर नवाज शरीफ तो बाहर है। अखबार भी पढ़ता है, टीवी भी देखता है और सांस भी लेता है।
बेहतरीन है। अपने रिश्तेदारों से पार्टी वालों से मिलता भी है और शानदार जिंदगी गुजार रहा है। तो जो आपका लीडर है उसने अमेरिका को डोनल्ड ट्रंप को अभी तक तनकीद का निशाना क्यों नहीं बनाया? आपके लीडर ने अभी तक इसराइल को बरा तनकीद का निशाना क्यों नहीं बनाया? और शबाज शरीफ ने अभी तक बोर्ड ऑफ पीस से निकलने का फैसला क्यों नहीं किया? और शबाज शरीफ ने अभी तक अमेरिका और डॉनल्ड ट्रंप को तनकीद का निशाना क्यों नहीं बनाया? और अमन का नोबेल इनाम वापस लेने का ऐलान क्यों नहीं किया? जब ईरान के अंदर 168
मासूम बच्चियां जिनकी उम्र सात साल से लेके 12 साल तक है। उन्हें बेदर्दी के साथ मिसाइल मार के कत्ल कर दिया गया। ये तो बाहर है ना। जरदारी तो बाहर है, नवाज शरीफ तो बाहर है, फजल रहमान तो बाहर है, एएनपी बाहर है, एमक्यूएम बाहर है, शबाज शरीफ बाहर है, बिलावल बाहर है। मरियम कोई तो बोलो। कोई तो बोलो लेकिन नहीं बोलेंगे। इमरान खान से तवकको करेंगे वो जेल के अंदर बैठा हुआ है। उसकी मुलाकातें बंद की जरा छोड़ के देखो। बाहर निकालो और 2 घंटे के अंदर ले लो जो स्टेटमेंट लेना है। जो सवाल
पूछोगे डट के उसी वक्त जवाब देगा। आप भी जानते हैं इमरान खान को। हम भी जानते हैं और पूरा पाकिस्तान उसको जानता है क्योंकि पाकिस्तान किसी और का वाकिफ है या नहीं। इमरान खान का ठीक-ठाक वाकिफ है। अब तक के लिए इतना ही। अपना ख्याल रखिएगा अपने चैनल का भी।