कैसे हैं दोस्तों? मैं फैसल वच आपके साथ आज ईरान के ऊपर अमेरिका और इसराइल की जंग को 36 दिन 36 डेज मुकम्मल हो चुके हैं। और आज जब हम आपसे यह बात कर रहे हैं। अब से कुछ देर पहले डोनल्ड ट्रंप ने 993 993 कैपिटल लेटर्स की वार्निंग जारी की है ईरान को जो वो मुख्तलिफ ट्वीट्स मुख्तलिफ बयानात और मुख्तलिफ अंदाज से धमकियां देते रहते हैं। और इस धमकी के अल्फाज जो है वो सबसे दिलचस्प है। इस खबर को सबसे पहले हमने इसीलिए रखा है क्योंकि इस धमकी में उन्होंने कुछ नई बात भी की है।
वो कहते हैं कि इसके बाद मैं इस इनके इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आपसे इसके बारे में इसकी डिटेल जो आज की वन लाइनर है उसके बारे में डिस्कस करूंगा। इस सोशल मीडिया पोस्ट पे ट्रुथ सोशल पोस्ट पे उन्होंने जो बात की है उन्होंने कहा कि रिमेंबर तुम लोगों को याद है व्हेन आई गव ईरान 10 डेज टू मेक अ डील 10 दिन की मैंने वार्निंग दी थी ईरान को कि वो एक डील कर ले या फिर ओपन अप द हॉर्मस स्ट्रेट या मुझसे डील कर ले या आबना होमस खोल दे इन दोनों में
से कोई एक चीज कर ले ये मैंने उसको ऑफर की थी रिमेंबर आपको यह मैंने उसको कहा था उसके बाद वो लिख रहे हैं कि टाइम इज रनिंग आउट। 6 अप्रैल की उनकी वार्निंग थी। अब उन्होंने कहा है कि टाइम इज रनिंग आउट। टाइम अब खत्म हो रहा है। 48 डेज बिफोर ऑल 48 डेज रह गए हैं बिफोर ऑल हेल विल रेन डाउन ऑन देम। आप देख ले ये इन्होंने रेन के स्पेलिंग भी बहाल हम ये तो नहीं कह सकते कि उनके स्पेलिंग ठीक नहीं है। जाहिर है कोई और उनके लिए लिखता होगा। वो कुछ
खुद बताते होंगे। लेकिन जब उन्होंने लिखा तो अक्सर औकात विच को विच दूसरी वाली जादूगरनी वाली विच लिख देते हैं या फिर रेन को इन्होंने यहां पर रेन अहद वाला लिख दिया। बल वो कह रहे है कि 48 आवर्स बिफोर ऑल हेल विल रेन डाउन ईरान के ऊपर एक जहन्नुम गिरा दूंगा अगर उन्होंने मेरी वार्निंग को ना माना। ग्लोरी टू गॉड ये है इनके इस पोस्ट का आज की अहम बात। ग्लोरी टू गॉड मीन उन्होंने नारा तकबीर बुलंद किया है। ग्लोरी टू गॉड अल्लाहू अकबर काइंड ऑफ थिंग जो क्रिश्चियंस इसको बोलेंगे जब वो अल्लाहू अकबर
को इंग्लिश में बोलेंगे इस तरह तो वो उस इस उस एक्सप्रेशन को इस तरह से बयान करेंगे प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे ट्रंप कैपिटल लेटर्स ये उन्होंने कुछ देर पहले अब से चंद मिनट पहले दो दो घंटे से कुछ पहले उन्होंने ये पोस्ट किया अब ये पहला मौका है कि उन्होंने अपनी तहरीर में भी धमकियों में इस तरह के मजहबी एलिमेंट्स डालना शुरू कर दिए आप जस्ट इमेजिन करें कि ईरानियन प्रेसिडेंट या ईरानियन जो आईआरजीसी चीफ है वह जब इस तरह के के ट्वीट करते हैं तो उनको यह कहा जाता है कि यह रिलीजियसली ये मजहब को
सियासत में लेकर आ रहे हैं और एक मजहबी जंग कर रहे हैं। ये जिहादी हो गए और अब डोन्ड ट्रंप मुसलसल इस तरह की गुफ्तगू कर रहे हैं। पीट हैक्स हेक्स लिख रहे हैं। और अब डोन्ड ट्रंप ने इस वार्निंग को 48 डेज की अपनी वार्निंग को उन्होंने कैपिटल लेटर्स में नारा तकबीर के साथ अपने अल्फाज में उन्होंने बुलंद कर दिया है। यह वार्निंग है जिसके बाद उन्होंने कहा कि मैं इन पर जहन्नुम गिरा दूंगा। क्या मतलब? मतलब यह कि मैं आपके सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करूंगा जिसका कि उन्होंने वादा किया हुआ है जिसके बारे
में उन्होंने पहले बात की थी कि अगर मेरी बात ना मानी गई तो मैं सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर जो कि एक एक का उन्होंने नाम लिखा वाटर प्लांट्स, एनर्जी प्लांट्स, पावर प्लांट्स, पुल तमाम चीजों को तबाह कर दूंगा जो कि उन्होंने किए भी। यह एक और भी बात बात बता रही है इनकी यह ट्वीट कि यह जो जंग है यह अनकरीब बिग ब्यूटीफुल लॉन्ग वॉर होने वाली है और 48 डेज की वार्निंग के साथ ही उन्होंने बेबी को भी एक इशारा किया है। अभी जब हम इस खबर को आपके सामने लेकर आने लगे थे लाइव को तो
यह खबर आई टाइम्स ऑफ इसराइल पीछे यानी डोनल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट किया पहले स्टॉक एक्सचेंज में ये कुछ अपना असर असर दिखाते हैं। वहां कुछ इन्वेस्टमेंट करते हैं। उसकी सेटिंग करते हैं। फिर ये ट्वीट करते हैं यानी पोस्ट करते हैं। साथ ही इसराइल में एक प्रिपरेशन एक स्टार्ट होती है। तो पूरा एक सर्कल है जो उन्होंने अपनी इकॉनमी के लिए बनाया हुआ है कमजोर मुालिक के खिलाफ। लेकिन यहां उनको एक सख्त सख्त सुरते हाल का सामना है। तो बहाल इनके इस खबर के कुछ देर बाद टाइम्स ऑफ इसराइल पर ये खबर छपी कि इसराइल
जो है वो ईरानियन एनर्जी साइट्स पर यानी सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के लिए तैयार है और यूएस ग्रीन लाइट का वेट कर रहा है। यानी कब कब उसको यूएस इसकी इजाजत देगा और वो ये हमला स्टार्ट कर देंगे। अब ये दोनों चीजों को आप साथ मिलाएं। ये ये उनका उनका ऐलान के हम तैयार हैं। जैसे ही हमें अमेरिका बताएगा और साथ ही डोनाल्ड ट्रंप का ये कि आपके पास 48 और रह गए हैं। मतलब वो जो नेगोशिएशन वाली बात है वो जो गुफ्तगू वाली बात है वो कहीं नहीं है। जैसे 27 फरवरी को नहीं थी।
यहां भी वो मौजूद नहीं है। क्योंकि डोन्ड ट्रंप जो बात कह रहे हैं ऑलरेडी उससे पहले वो कर रहे हैं। पुलों को तबाह कर रहे हैं ईरान में और ये धमकियां दे रहे हैं। और ये ऐसा वक्त है जब कुछ देर देर पहले चंद मिनट पहले मतलब कल की बात है। खैर जब उन्होंने धमकियां दी। उस वक्त साथ ही पाकिस्तानी जो इनसे मैसेजिंग कर रहे थे ईरान के साथ उनके के जरिए से जब इनका एक इनके दो तैयारे तबाह हुए तो डोन्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी इनगोशिएटर्स के जरिए यानी मैसेजिंग जो हो रही है उनके जरिए
ईरान को ये रिक्वेस्ट की कि आप 40 डेज आवर का सीज फायर कर लें क्योंकि हमने अपने पायलट्स तलाश करने हैं जो आपके मुल्क में बमबारी करने आए हुए थे। व्हाट अ बिग ब्यूटीफुल ऑफर। मतलब आप एक मुल्क को तबाह कर रहे हैं। वहां आपके दो पायलट आपके मिसिंग है। उनमें से एक आपको मिल गया और सेकंड के लिए आप रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि 48 आवर की मुझे सीज फायर दिया जाए ताकि मैं अपना पायलट तलाश कर लूं। ईरान ने उसको रिफ्यूज कर दिया। जिसके बाद फिर उन्होंने आज ये ट्वीट की है। ये पोस्ट
किया है के मैं 48 डेज में 48 आवर्स में एक जहन्नुम का दरवाजा खोल दूंगा। अब्बास इराचीकि पहले से जानते हैं कि अमेरिका और इसराइल जेनो एप्सिस के लिए तैयार है। लिहाजा वो इस इस तरह के हमलों का और इस तरह की की धमकियों का कई बार जवाब दे चुके हैं। जैसे कि यह उन्होंने दो दिन पहले ही इसका जवाब दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्ट्राइकिंग सिविलियन स्ट्रक्चर इंक्लूडिंग अनफिनिश्ड ब्रिजेस विल नॉट कंपेल ईरानियंस टू सरेंडर। आप अगर सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हिट करेंगे, हमारे ऊपर जहन्नुम मुसल्लत करेंगे, अनफिनिश्ड ब्रिजेस को या चीजों को
तबाह करेंगे, तो यह चीज हमें ईरानियंस को सरेंडर करने पर मजबूर नहीं कर सकती। इट ओनली कन्वस द डिफीट एंड मोरल कोलप्स ऑफ एन एनिमी इन दिस अरे। यह एक दुश्मन की इखलाकी शिकस्त और उसकी शिकस्त का मैसेज और उसके उसके उसके कोलैप्स होने का मैसेज दे मैसेज दे रहा है। ऐसा ऐसी आर्मी जो डिसरे है बिखरी बिखर गई है और किसी डलजन में है। एव्री ब्रिज एंड बिल्डिंग विल बी बिल्ड। अब ये लाइन थी अहम। एव्री ब्रिज एंड बिल्डिंग विल बी बिल्ड बैक स्ट्रांगर। हम हर ब्रिज और हर बिल्डिंग दोबारा उससे ज्यादा मजबूती से
बना लेंगे। लेकिन व्हाट विल नेवर रिकवर जो चीज दोबारा नहीं बन सकेगी वो अमेरिका की स्टैंडिंग है। वो डैमेज है जो अमेरिका की स्टैंडिंग को उसकी इंटरनेशनल पावर को हो चुका होगा। अब ये वो बात है जो कि हम आपसे शुरू दिन से बात कर रहे हैं कि जब ये जंग खत्म होगी तो उस दिन ये देखा जाएगा कि इस जंग से शुरू होने से पहले 27 फरवरी 2026 को 2026 को ईरान कहां खड़ा था? इंटरनेशनली उसकी स्टैंडिंग क्या थी और अमेरिका की 27 फरवरी 2026 को क्या थी? जंग जब खत्म होगी तो इन दोनों
मुल्कों में से जो 27 फरवरी से बेहतर पोजीशन में होगा वो विक्टर होगा। जो उससे वर्स्ट पोजीशन में होगा स्टैंडिंग में वो फाते होगा। जो बेहतर पोजीशन में होगा। जस्ट फॉर एन आर्गुममेंट मैं आपके सामने यह बात रखूं के 27 को अमेरिका के सामने ये ऑप्शन ही नहीं थी। ये बात ही उसके सामने नहीं थी कि उसने अपनी जो 13 प्लस बेसिस है उनमें से किसी एक में इंस्टॉलेशनंस करने से पहले ईरान से कोई मुजाकरात करने हैं। ये क्वेश्चन ही नहीं था। आज अमेरिका को अपनी 13 बेसिस पर अपने सोल्जर्स को वापस लाने के लिए
इंस्टॉलेशन के लिए ईरान से मुजाकरात जरूरी है। इश्क बता भी है हमें जो वफा के साथ डूबेंगे क्या कि उभरे हैं उभरेंगे क्या कि डूबे हैं संग के साथ जिस दिन ये जंग खत्म होगी अमेरिका अपने अड्डे वापस नहीं ला सकता जब तक के वो ईरान से एक जबरदस्त किस्म की डील ना कर ले ये है इस जंग ही वो बात है जो उस जंग की हार और जीत का फैसला करेगा तो वन लाइनर आज तक का ये है 36 दिन का। आज जो मुझे महसूस हुआ सारी खबरें देखते हुए और डोन्ड ट्रंप के ट्वीट्स
और धमकियां उनकी देखते हुए कि अमेरिका के पास एक बहुत नैरो अपोरर्चुनिटी बहरहाल आज है। बहुत नैरो अपोरर्चुनिटी वो क्या है? और ये वो है जो उनको एक बेस्ट डील ऑफर कर सकती है। लेकिन ऑप्शन वो फिर भी वर्स्ट ही है। जैसे दो ऑप्शन मैंने कहा था कि डॉनल्ड ट्रंप के पास है। दोनों बुरी है। लेकिन बहाल ऑप्शन है। आज उनके पास एक ऑप्शन है और वो वर्स्ट ऑप्शन है। वो क्या है? नेवर फॉर नेवर। यानी अमेरिका ईरान के साथ एक ऐसी डील करे जिसमें इंटरनेशनल गारंटर्स हो और उसकी प्रैक्टिकल टर्म्स तय की जाए ताकि
पहली टर्म के वायलेट होने पर ही वो मोहदा खत्म हो जाए। वो है नेवर फॉर नेवर। यानी यूएस दोबारा किसी सूरत ईरान पर अटैक नहीं करेगा और और ईरान किसी सूरत अमेरिकन बेसिस पर उसके बिजनेस इंस्टॉलेशनंस पर इसमें खलीज में अटैक नहीं करेगा और ईरान के ऊपर उसके बदले तमाम पाबंदियां खत्म होगी। नेवर फॉर नेवर कभी अमेरिका अटैक नहीं करेगा और अमेरिकन बेसिस को कभी ईरान अटैक नहीं करेगा। सिंपलेस्ट डील है जो इस वक्त डोन्ड ट्रंप आज की डेट में हासिल कर सकते हैं। हर गुजरते दिन के साथ यह डील भी इसका इसकी ये नैरो
ऑप्शन भी खत्म होती जाएगी। क्यों खत्म होगी? क्योंकि ईरान में जिन लोगों ने डील करनी है वो सबसे अहम बंदे डील करने वाले तो पहले ही खत्म उन्होंने कर दिए। उसके बाद ये ईरान का जितना नुकसान करते जाएंगे उतना ही इस डील से भी दूर होते जाएंगे। और ये गलतफहमी अगर डोनल्ड ट्रंप को अमेरिका को या किसी को है कि ईरानियन हथियार डाल देंगे तो ये पॉसिबल ही नहीं है। ये आईआरजीसी जो लड़ रहे हैं ये कभी भी हथियार नहीं डालेंगे। अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सोल्जर्स बचा रहा है। तो इन ये ये सोल्जर्स को
बचाने का मतलब यह है कि आप बेसिकली ईरान को भी बचा रहे हैं। यूएस ऑर्डर भी अगर यहां पर बचना है तो उसके लिए भी फिर अमेरिका को ईरान को बचाना होगा। या तो फिर अपने सोल्जर्स और अपनी मिलिट्री को इस जहन्नुम में फेंकने के लिए तैयार हो जाए कि फिर जितनी भी कुर्बानियां हो जितनी भी जाने जाए हम तैयार हैं। अमेरिका इसके लिए तैयार हो। अपनी इंडस्ट्री को वॉर इंडस्ट्री पर शिफ्ट करे। फिर एक जंग जंग लड़े जिस जितनी चाहे जाने जाए फिर एक चांस होगा कि कभी शायद ईरान को उस जगह पर ले
आए कि ईरान हथियार डाल दे। लेकिन जिस तरह जिस तकनीक से जिस आईडियोलॉजी पर जिस मैकेनिज्म से अमेरिका इस वक्त जंग लड़ रहा है कि मैं हवा से बम मार मार के पुल गिरा के हॉस्पिटल गिरा के हेल्थ सेंटर गिरा के 168 बच्चियों को कत्ल करके मैं हथियार डलवा लूंगा ये तारीख में ईरान की नहीं हुआ ये कोई भी सिविलाइजेशन किसी भी सिविलाइजेशन ने आज तक इस तरह हथियार नहीं डाले और फॉर सिक्योरिटी गारंटीज दोनों को इस अगर नेवर फॉर नेवर जो डील एक मैंने मेरा एक एक एनालिसिस है कि अमेरिका के पास एक वेरी
नैरोस्ट चांस है। उसके मुताबिक अमेरिका और ईरान दोनों को कुछ ग दोनों एक दूसरे को गारंटीज दें कि हम इन मेयर्स को अगर लेंगे तो उसका मतलब होगा कि हम डील से बाहर जा रहे हैं। लिहाजा दोनों अपने ऊपर कुछ रिस्ट्रिक्शंस लगाएंगे। ये एक डील है जो विनविन डील होगी जो अमेरिका का यह प्रॉब्लम सॉल्व कर देगी उसने इस जंग से कैसे ऑफ रैंप लेना है लेकिन द प्रॉब्लम इस वक्त जो है वो है अमेरिकन टैक्स पेयर्स का बेबी जो अमेरिकन अमेरिकन जो हाईएस्ट 40% टैक्स टैक्स देते हैं जो देते हैं सैलरीड लोग वो सारी
की सारा टैक्स जो है वो भी बिलियंस ऑफ डॉलर ऑलमोस्ट ट्रिलियन ट्रिलियन डॉलर से ऊपर कुछ अमेरिकन सेटर्स के उनके उनके मुताबिक तो दो बिलियन डॉलर रोज का लेकिन हमारे ख्याल में एक मोहतात अंदाजा बिलियन डॉलर से ऊपर रोज का खर्च हो रहा है। तो ये सारा पैसा अमेरिकन टैक्स पेयर्स ने अमेरिका को अपनी गवर्नमेंट को इसलिए नहीं दिया था कि आप बेबी के शौक पूरे करें। तो अगर इसको अमेरिकन टैक्स पेयर्स को और अपना मिड टर्म इन्होंने बचाना है डॉनल्ड डोन्ड ट्रंप ने तो उसकी एक ही सूरत है कि इस नेवर फॉर नेवर डील
को ले लें। क्योंकि यह डील इस वक्त ऑन पेपर है, ऑन टेबल है। चाइना, पाकिस्तान, तमाम अरब मुालिक और अमेरिका खुद इस डील पर एग्री होगा। सिर्फ इसमें एक प्रॉब्लम है कि अमेरिका यहां से जब निकलेगा तो फिर बेबी और बेबी के बेबी को बचाने वाला शायद यहां पर कोई ना हो। लेकिन अमेरिकन एसेट्स बच जाएंगे। अमेरिकन बेसिस बच जाएंगी। जो कि इस डील को अगर फरी तौर पर ना लिया गया तो फिर नहीं बचेंगे। फिर अमेरिका को शिकस्त दिलवानी पड़ेगी या फिर अपनी बेसिस पर कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा या फिर या फिर या फिर ईरान
की तमाम पाबंदियां खत्म करने के बाद उसको कुछ और लिवरेजेस देनी पड़गी जो के जो कि फिर ईरान को अगले 101 साल में इस जीते हुए मोराल के साथ एक बड़ी ताकत मिडिल ईस्ट की बना देगा। याद रखिए सिविलाइजेशंस को बड़े-बड़े बड़े-बड़े मुालिक को फाइनेंसियल लॉस तबाह नहीं करते। उनको जो चीज तबाह जो चीज उनको उनको तबाह करती है तकक्सम करती है वो वो वो एक कोलैप्स मोराल है जो उनको तबाह करता है। अमेरिका बर्तनानिया अमेरिका तो नहीं बर्तनानिया और और फ्रांस और इटली वगैरह सेकंड वर्ल्ड वॉर में तबाह हो गए थे। फ्रांस वर्ल्ड वॉर
जीता था सेकंड लेकिन उसका इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह तबाह हो चुका था। इसके बावजूद वो उसने अपने को बेहतर बिल्ड कर लिया। सो जो कौमें बेशक अपनी तबाही के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही के बाद भी अपनी स्ट्रांग विल के साथ सर्वाइव कर जाती है तो यह विल उनको रिबिल्ड कर देती है। उस वक्त जब जंग उन्होंने खुद भी नहीं शुरू की होती उनके पास मोरल हाई ग्राउंड भी होता है। सो अमेरिका के पास वन लाइनर ये है कि नेवर फॉर नेवर डील है लेकिन इसका वक्त भी गुजरता जाएगा। यह डील अगर यह डील नहीं होती देन
डोनल्ड ट्रंप इज एक्चुअली ऑन द पाथ ऑफ मेकिंग ईरान ग्रेट अगेन वो जो कहते हैं मीगा तो यह मीगा है अगेंस्ट स्लेव रूलिंग क्लास ऑफ यूएसए जो के चार पांच एस्टैब्लिशमेंट पिलर्स की इस वक्त स्लेव बनी हुई है। हां अगर ये ये ईरान को क्रिपल करना चाहते हैं वाकई तो फिर इनको कुछ और करना पड़ेगा। जैसे मैंने आपको आपको पहले बताया पूरी वॉर इंडस्ट्री और पूरी फौज यहां पर शिफ्ट करना पड़ेगी। वो फिर एक और पॉलिसी है और अगर वो इसके लिए तय और वो भी उसके बाद भी सवाल ये है कि अगर ये उसमें
कामयाब होते हैं। असल में पिटिकली इस वक्त तक ईरान ने जिस तरह से जंग लड़ी है उसमें आईआरजीसी की एक पॉलिटिकल सक्सेस भी हो चुकी है जो कि अनफॉर्चूनेट है इस ख्ते के लिए और ईरानियंस के लिए क्योंकि वो इस गवर्नमेंट से कोई खुश नहीं थे। लेकिन उसके बावजूद जिस तरह अमेरिका इसराइल ने जेनो एप्स ने इस मसले को हैंडल किया है अपने अपनी नॉनसेंस अपनी नॉनसेंस में उसने एक पिटिकल बहुत बड़ी फेवर आईआरजीसी को ईरानियन रिलीजियस गवर्नमेंट को दे दी है कि अगर ईरान में कोई रियल अपोजिशन थी ऑन ग्राउंड और वो इस काबिल
थी कि वक्त के साथ ईरानियन आयतुल्लाह गवर्नमेंट को बदल सके उसको टोपल टोपल कर सके या उससे उसको अपनी मर्जी पर लाने के लिए मजबूर कर सके। अब वो सारे इंकलाबी भी रिथिंक कर रहे हैं। यह पिटिकल विक्ट्री है जो आईआरजीसी को जेनो एप्स ने लेकर दी है। आप इनके इस प्रिंसिपल को याद रखें कि ये हमेशा हार्ड लाइनर्स को ज्यादा सपोर्ट करते हैं क्योंकि उसके बाद इनको लिवरेज मिलती है उन जगहों पर पोक करने की, उन जगहों पर अटैक करने की, वहां पर अपनी अपनी पॉलिसीज अप्लाई करने की। सो इनकी पिटिकल सक्सेस यह है
कि अगर कोई रेवोलशनरी ग्रुप ईरान में सोच भी रहा था कि हम इनको टॉपल करेंगे या इनको सियासी तौर पर पीसफुल मैनर से से इनको मजबूर करेंगे तो वो भी रास्ते से हट चुका है या कम से कम लंबे अरसे के लिए अभी सामने नहीं आएगा। फ्यूचर रीजनल ऑर्डर जो भी बनेगा यहां वो ईरान के डोमिनेंस पर बनेगा। यूएस बेसिस जो है ये 27 फरवरी 2026 की पोजीशन पर कभी वापस नहीं आएंगी जब तक डील नहीं होती। उसके बाद एक मिलिट्री और जो स्टैंडिंग को लॉस हुआ है सबसे बड़ा वो यह है कि अमेरिका की
एयर डोमिनेंस चैलेंज हुई है एक अनप्रेसिडेंटेड वे में यूनाइटेड स्टेट्स का बिगेस्ट एयर फोर्स लॉस हुआ है पिछले 36 साल में 1991 के बाद इतना बड़ा कलेक्टिव एग्रीड 100% कंफर्म लॉस जो है सिर्फ सिर्फ और सिर्फ अगर हम उसको देखें डायरेक्ट लॉस नॉट टेक्निकल लॉस ये 36 साल साल में सबसे बड़ा अमेरिकन एयरफोर्स को उसके प्रेस्टीज को उसके मिलिट्री माइट को ट्रिलियन डॉलर मिलिट्री बजट वाली फौज को हुआ है। 1991 में जब इराक में ऑपरेशन डेजर्ट स्ट शुरू किया गया था। यूनाइटेड स्टेट ने उसको लीड किया था तो उसमें 39 एयरक्राफ्ट अमेरिका के तबाह हुए
थे। वो सबसे ज्यादा सबसे बड़ा फिगर था। 39 39 एयरक्राफ्ट तमाम छोटे बड़े मिला के तबाह हुए थे और पायलट्स भी हलाक हुए थे। और यह तमाम के तमाम ग्राउंड फर्सेस ने हिट किए थे। एयर डिफेंसेस ने ईरान के सॉरी इराक के उसके बाद फिर 99 में अमेरिका ने जब कोसोवा वॉर मुखस अरसे के लिए लड़ी तो उसमें दो उसके जेट गिरे थे। एक F16 और एक F17 नाइट हॉक बमर था उनका स्टेल्थ था और ये तारीख का पहला स्टेल्थ प्लेन बनाया था अमेरिका ने। फर्स्ट स्टेल्थ प्लेन यह पहला स्टेल्थ प्लेन था। अमेरिका का दावा
था कि इसको कोई नहीं गिरा सकता। लेकिन कोसोवो में इसको गिरा दिया गया 99 में। लेकिन जाहिर है ये दो जेट्स थे। यानी 99 में 91 में 39 एयरक्राफ्ट क्राफ्ट्स गिरे। उसके बाद 99 में दो गिरे जिनको ग्राउंड से सरफेस टू एयर मिसाइल मारकर अटैक कर अटैक किया गया। लास्ट टाइम फिर फिर अमेरिका का सिर्फ एक एट बमबर जो कि अभी हमने कल परसों आपको दिखाया था कल दिखाया था कि वो कैसे ग्लाइड करता है बॉर्डर के साथ-साथ निचली निचली निचली परवाज करता है ये 2003 में एक इराक में गिरा था जब दोबारा ये आए
गल्फ वॉर में ऑपरेशन इराक की इराक फ्रीडम था वो 7 अप्रैल 2003 को ये था एक तारा यानी पहले 39 फिर दो और फिर एक तब से अमेरिका का ऑलमोस्ट उसका कोई तारा इस तरह से डायरेक्ट अटैक में नहीं गिरा। लेकिन अब क्या हुआ है? कोहे कैलोविया बोराद इस तरह का नाम है ईरानियन सूबे का लंबा सा तवील सा नाम है। शायद दो नामों को जमा करके बनाया गया है। कोहे कैलोविया ये उसका पहला वर्ड है। तो इस इस सूबे में अमेरिका के एक दिन में दो प्लेन हिट हुए। अब ये कंफर्म किल्स हैं। F15
ई वन और A10 टू। यह दोनों हिट हुए। एक दिन में कंफर्म किल हुई। यह गिरे और अमेरिका ने इसको तस्लीम किया। दो इसको इस उसके लिए जो जो सर्च एंड एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर गए वो भी हिट हुए। और उनके क्रूस जख्मी भी हुए। उनके मेंबर्स को उनके पायलट्स को जख्म भी आए। यह मैं आपको जिसका दिखाना चाह रहा हूं। आई थिंक दिस इज यस। जो हेलीकॉप्टर्स इनके रेस्क्यू के लिए गए यानी पायलट्स के लिए उनके ऊपर भी हमले हुए और उनके लोग भी इन हेलीकॉप्टर्स में जो पायलट्स थे वो जख्मी भी हुए। F1-15 इनका
एक बेस्ट फाइटर मल्टी रोल फाइटर जेट है। 1980 में हमने आपको बताया था कि ल्च हुआ। लेकिन आज ये 100 मिलियन का एक बीस्ट है। 10 करोड़ डॉलर का एक इसकी हाईएस्ट प्राइस है। ये बेहतरीन मिलिट्री वेपन है इनका। इनका बेहतरीन फाइटर जेट है। यूएस सक्सेस जो है ये मैसिवली उसने उसने 1999 के बाद जितने भी ऑपरेशन किए हैं इसका बहुत बड़ी कंट्रीब्यूशन ये और इस जैसे तैयारों की की मदद से 15,000 से ऊपर अमेरिका और इसराइल सॉर्ट कर चुके हैं। यानी हमले कर चुके हैं। इतनी फ्लाइट्स कर चुके हैं। तमाम तैयारों की जमा करके।
डिफेंसेस जो जो कैपेबिलिटी है अमेरिका की वो इतनी वीक हो चुकी है कि पहले जो काम 36 साल में नहीं हो पाया था। यानी 91 के बाद से इतनी बड़ी तादाद में उसके तैयारे हिट नहीं हुए थे। अब हो रहे हैं और कुल किल्स जो है सात है। कंफर्म। हालांकि इससे ज्यादा है लेकिन कंफर्म जो 100% श्योर है वो सेवन है। मोर देन इंडियन प्लेेंस मोदी डोनाल्ड ट्रंप को कह सकते हैं बेफिक्र होके क्योंकि ये कंफर्म सेवन किल्स है। इब्राहम लिंकन 1000 किलोमीटर बैटल फील्ड से दूर जा चुका है। पहले सिर्फ उन्होंने अपने बस के
उसको पास रखा। फिर थोड़ा सा पीछे ले गए। फिर गल्फ ऑफ उमान से भी से भी पीछे ले गए। अरब में चले गए। शायद उससे भी पीछे ले गए। 1000 किलोमीटर दूर अमेरिका ने अपना मेन फाइटर एयरक्राफ्ट कैरियर जो बेसिकली सपोर्ट करता है कैरियर स्ट्राइक स्ट्राइक ग्रुप है उसके साथ एक मुकम्मल उस सारे को ये वापस ले जा चुके हैं 1000 किलोमीटर दूर ये ताकत की नहीं कमजोरी की अलामत है एहतियात की अलामत है मोहतात होने की अलामत है और जो सुपर पावर हो और ईरान के मुकाबले में उसने इतने बड़े-बड़े दावे किए हो ये
उसकी कमजोरी दिखा रहा है जो रडफोर्ड आपको पता है फॉरएवर वो वापस चला उसके लिए रिपेयरिंग के लिए अब अब कहा जा रहा है शायद उसको रिपेयर करके लाया जा रहा है लेकिन वो चटी की रफ्तार से आएगा इतनी जल्दी नहीं पहुंचेगा सेवन प्लेन जो अब तक कंफर्म अमेरिका के हिट हो चुके हैं उनमें चार यही F15 है एक A10 है एक रिफ्यूलिंग प्लेन है जो कि बहुत बड़े बड़े साइज का उधर आपने देखा कि इराक में भी हिट हुआ और इधर भी जख्मी हुआ सऊदी अरब में और वो जो एक तैयारा आपने देखा था
बीच में से जिसकी कमर टूटी हुई थी अवाक्स वो तबा तो ये सात तारे हैं जिनको सीएनएन ने भी कन्फर्म किया है। लेकिन इसके अलावा एक F35, एक F16, टू हेलीकॉप्टर्स और कुछ उनके क्रू जो है वो शदीद जख्मी हुए और पांच रिफ्यूलिंग प्लेेंस के बारे में ईरान का दावा है। जिसमें से दो के बारे में अमेरिका ने कन्फर्मेशन ही नहीं की। तो अगर हम इन सों को जमा करें तो ये 16 से ऊपर बंदे हैं लेकिन कम से कम सात तो अमेरिका तस्लीम कर चुका है। सो ये ये उसका उसका इनविंसिबिलिटी उसकी जिस बुरी
तरह से चैलेंज हुई है ये इस जंग से पहले सुरते हाल नहीं थी। यूएस ने इसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया हुआ है। लेकिन आप जानते हैं कि अब तक एक सिर्फ पायलट को जो मेन पायलट था वो आ गया है। लेकिन जो वेपन वेपन चलाने वाला पीछे बैठता था पायलट के वेपन जो अटैक के लिए पीछे को पायलट था वो अभी तक इनको नहीं मिला। हालांकि यह रेस्क्यू ऑपरेशन बहुत स्पेशलाइज है। एक तरह से आप कह सकते हैं कि उसके रेस्क्यू के लिए जो अमेरिकन हेलीकॉप्टर्स आ रहे हैं और कहा जा रहा है कुछ
कुछ चैनल्स में आया है अमेरिकन चैनल्स में और इसरली चैनल्स में कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बूट्स ऑन ग्राउंड भी है यानी कमांडोस भी वहां पर ऑपरेशंस कर रहे हैं। अब ये जो पायलट्स है हालांकि ये बड़ा जबरदस्त किस्म का इनका मैकेनिज्म है। टू वे मैकेनिज्म यानी सिर्फ इस पायलट की सीट में और इसकी वर्दी में ही जब ये इजेक्ट करते हैं उसके बाद ऐसा नहीं है कि यह गुम हो जाते हैं। इंजेक्शन एक मुकम्मल एक प्रोसेस है जिसमें उसकी सीट और उसकी उसकी बॉडी में जीपीएस है। वो इंक्रिप्टेड कम्युनिकेशन कर सकता है जिसको कि
सिर्फ उसकी टीम सुन सकती है और ये सेटाइट से इसकी लोकेशन लिंक्ड है। एिमी इनके सिग्नल डिटेक्ट नहीं कर सकता क्योंकि इंक्रिप्शन है। उसमें सीट में उसकी उसकी बॉडी के के साथ को पायलट की भी मेडिकल किट होती है। फूड का एक पैकेट इंस्टॉल होता है। ऐसी फूड इस तरह की फूड जो हाई कैलोरीज है। एनर्जी बार्स होती है। वाटर प्यूरिफिकेशन उसमें टेबलेट आएंगे। कहीं से पानी पानी मिलेगा उसमें एक टेबलेट फेंकेगा। उसको साफ करके पी सकता है। मतलब इतनी फूड है और इतना उसका बेहतरीन सिस्टम है उस पायलट के साथ कि 72 घंटे कम
से कम तीन दिन वो कम से कम तीन दिन अमेरिकन पायलट जो है वो एक्सट्रीम कंडीशन एक्सट्रीम हॉट और एक्सट्रीम कोल्ड इन दोनों कंडीशन में 72 घंटे तक सर्वाइव कैसे करेगा विद कम्युनिकेशन यह उसके साथ प्रोटोकॉल्स हैं। कोई अमेरिकन पायलट जब रिजेक्ट करता है अपनी सीट से तो इसके बावजूद एक पायलट अभी तक नहीं मिल रहा या कम से कम उसकी खबर नहीं आ रही ना ईरान की तरफ से और ना ही अमेरिका इसराइल की तरफ से अगर ये इनमें से ये अगर रेस्क्यू हो गया होता तो इसकी खबर आ जानी हमारा ख्याल है कि
एक एक इमेज जो ऑनलाइन चल रहा है आपको पता है कि यहीं से बहुत कुछ बनाया बनाया जा रहा है जिसमें एक अमेरिकन तनुमंद पायलट को इस तरह बांध के बैठाया कि वो फेक है उसकी कोई ऑथेंटिसिटी नहीं है क्योंकि जितनी अच्छी उसमें लाइटिंग है इतनी अच्छी लाइटिंग रियल लाइफ में नहीं होती आजकल एक एंगल ये भी है एआई को पहचानने का अगर आपको उसकी उंगलियां लोगों की फिर भी ठीक लग रही है तो उसके बाद सेकंड उसका स्टेप ये है उसकी लाइटिंग पे आप आप गौर किया करें अमूमन एआई इमेज की लाइटिंग परफेक्ट होती
है। सो इसके अलावा भी उसमें साइंस थे। मैंने उस इमेज को गौर से देखा है और मुझे वो रियल नहीं लगा। आई कैन बी रोंग लेकिन मेरी ज्यादा जो है मेरी ज्यादा स्ट्रांग असेसमेंट यही है कि वो इमेज यही है। वो नहीं दस्तियाब हुआ। अगर आ गया अगर वो ईरानियन के पास आ गया तो जंग की कैलकुलेशन ही बदल जाएगी। डोन्ड ट्रंप के लिए नए मसले पैदा हो जाएंगे। फिर उनको और बूट्स ऑन ग्राउंड करने पड़ेंगे। फिर वो यहां से भाग नहीं सकेंगे। अच्छा पायलट जो अमेरिकन है इस को पायलट के पास भी एक रिफ्लेक्टर
भी होता है एक सिग्नल सिग्नल मिरर जिससे आप एक फ्लेयर जनरेट कर सकते हैं और एक बल्कि एक स्माल फ्लेयर भी उसके पास है जिससे वो लाइटिंग लाइटनिंग कर सकता है इनफ्रारेड उसके पास फ्लैश लाइट्स लाइट्स होती है जो सिर्फ और सिर्फ जो उसको टीम रेस्क्यू करने आएगी उनको उनको नाइट विज़ गोगल्स में उनको जो जो भी डिवाइसेस वो लेके आएंगे उनमे नजर आएगा सर्वाइवल किट भी उसके उसके उसके पास है लाइट वेट एक थर्मल थर्मल थर्मल उसके पास एक ब्लैंकेट भी होता है अपनी अपनी बॉडी को हीट और कोल्ड रखने के लिए हॉट एंड
कोल्ड कोल्ड रखने के लिए जो जैसी भी सिचुएशन है तो ये सारा कैमोफ्लाज सिस्टम उसके पास है अभी तक किसी को नहीं मिला इसका मतलब है कि 72 घंटे का अगर वो है तो जाहिर है इनकी अपनी भी ट्रेनिंग होती है तो ये कई दिन तक छुपा रह सकता है और याद रखें ये जो एरिया है ये बहुत माउंटेनस है बल्कि मैं आपको दिखा देता हूं आई थिंक दिस इज द मैप हां ये है मैं आपको ये एरिया दिखाता हूं जहां पर यह पायलट पायलट मिसिंग है। यह है एरिया। यह हाईली माउंटेनस एरिया है। जहां
पर यह देखिए। यह है वह एरिया। अब मैं इसको अगर 3D में आपको दिखाऊं तो यहां आपको आपको ज्यादा बेहतर नजर आएगा। बल्कि थोड़ा और लोग यह देखिए यह इस तरह का एरिया है जहां पर पायलट मिसिंग आई। बहुत ज्यादा नशेबो फराज है। बहुत ज्यादा यहां किसी को ढूंढना किसी एक शख्स ये वो कोहे जागोस की पूरी एक पट्टी है जिस जगह पर वो पायलट घुम है। और यहां किसी को ढूंढना इस बयाबो गया में सेरा टाइप कुछ पहाड़ों में बहुत मुश्किल है। सो यहां वो कहीं छुपे हुए हैं। अमेरिकन पायलट एक जैसे कि अभी
तक बताया जा रहा है और उनकी तलाश जारी है। यह है मुश्किल ट्रेन और यहां अमेरिका ने ठीक-ठाक उसके लिए इनाम रखा है सॉरी ईरान ने लेकिन मुझे यकीन है कि जितना भी इनाम ईरान उनके पकड़ने के लिए उस पायलट के पकड़ने के लिए ऐलान कर चुका है उससे ज्यादा अमेरिकन देने के लिए तैयार होंगे क्योंकि जाहिर है अमेरिका तो कभी नहीं चाहेगा कि उसका एक पायलट अरेस्ट हो क्योंकि इससे जंग की कैलकुलेशन बदल जाएगी और थोड़ा सा जंग और हॉट हो जाएगी और और साथ डर्टी भी होगी क्योंकि अमेरिका बड़ी बड़ी पावर है तो
वो इस जंग को फिर नेक्स्ट लेवल पर ले जाना चाहेगा। हाई ट्रेन जो उसकी फर्सेस है उसके स्पेशलाइज्ड फोर्सिंग फर्सेस जो रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए है वो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स में इस शख्स को इस एक को पायलट को ढूंढ रही है वेपन ऑपरेटर को। C130 भी देखे देखे गए हैं। आपने उसके इमेज देखे होंगे। लेकिन ये फर्सेस जो है अब अगर यह ढूंढ रही है तो इनकी भी कैजुअल्टी हो सकती है क्योंकि ग्राउंड से मुसलसल इनके ऊपर फायर आ रहा है और इनके हेलीकॉप्टर में जो इनका क्रू है वो डैमेज भी हो रहा है। पाकिस्तान
और यूएई के रिलेशंस के ऊपर कल परसों से बहुत बात हो रही है क्योंकि एक तो उन्होंने 3.5 बिलियन डॉलर जो उनका हमने कर्जा देना था उस से कुछ वापस वापस मांग लिया है डॉन के के मुताबिक और Jio न्यूज़ के मुताबिक 3.55 बिलियन डॉलर है कुछ कह रहे है 2 बिलियन बिलियन डॉलर लेकिन जितना भी है वो यूएई ने वापस मांगा है और इसके ऊपर मुख्तलिफ तरह की क्या सराइयां हो रही है क्या सराइयां ये है कि ये क्यों वापस वापस मांगा गया है कि एक तो सबसे पहली बात तो यह कि एक तो
बहुत एक नॉनसेंस किस्म का एक मैंने खबर देखी किसी की सोशल मीडिया पे ये कहा जा रहा था कि शायद ये इसलिए मांगा जा रहा है कि यूएई ने पाकिस्तान से ये मुतालबा किया कि आप मेरे बिहाफ पे ईरान के ऊपर हमला करें। वहां बम मारे जब पाकिस्तान ने इंकार किया तो उसने कहा कि मेरे पैसे वापस करें। अच्छा ये बहुत ही नॉनसेंस किस्म की बात है। ये हो ही नहीं सकता क्योंकि पहली बात ये कि पाकिस्तान और और यूएई के बीच में ऐसा कोई अरेंजमेंट नहीं है। ये कोई सीरियस आर्गुममेंट ही नहीं है। हमारे
दरमियान कोई एग्रीमेंट कोई स्ट्रक्चर कोई फ्रेमवर्क ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान यूएई के बिहाफ पर कहीं लड़ने जाएगा या कहीं पर अटैक करेगा या पाकिस्तान ने यूएई की कोई कोई गारंटी कभी ली है। तो अगर कोई ऐसा है भी तो वो सऊदी अरब के साथ तो है किसी हद तक यूएई के साथ कोई भी नहीं है। वैसे भी कई साल से उसके साथ हमारे ताल्लुकात सरद गर्म चल रहे हैं। इसके अलावा और भी बहुत सी थी बातें कि उसनेकि इसराइल में इन्वेस्टमेंट करनी है और जाहिर है वो वो हम उसको जाहिर है इस सूद दे
रहे थे। ये कर्जा कोई फ्री का नहीं था। लेकिन उसने कहीं किसी ने उसको कहा होगा कि मैं इससे ज्यादा मुनाफा तुम्हें तुम्हें दूंगा। तीन से छ% तक अगर पाकिस्तान दे रहा है तो उससे ज्यादा की ऑफर की होगी तो फिर इसको वहां पर शिफ्ट करना मकसूद है। ये थोड़ी सी रीज़नेबल आर्गुममेंट है। लेकिन आज हमारी वज़ारते हमारे हमारी मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर ने इस क्लीयरेंस जारी की। उन्होंने एक डिटेल में एक खबर जारी उन्होंने अपना बयान जारी किया जिसमें उन्होंने क्लियर किया बताया तो नहीं कि वजह क्या है लेकिन खैर मैं ये सारी पढ़
के आपका वक्त जाया तो नहीं करूंगा लेकिन उसमें उन्होंने कहा कि लेट शेख ज़द बिन सुल्तान नाहियान जो है हम उनकी बड़ी इज्जत करते हैं मौजूदा का के बारे में उन्होंने यहां पर आखरी पैराग्राफ में नहीं लिखा आखरी से पहले वाले में लेकिन उन्होंने पिछले की बहुत बहुत तारीफ की और बताया कि हम उनके लिए बहुत रिगार्ड रखते हैं हमारी दोस्ती है और ये स्पेशल अफेक्शन थी उनकी पाकिस्तान के ये आखरी आखरी लाइन है पाकिस्तान रिमेन फुली कमिटेड टू फदर स्ट्रेंथनिंग दिस इंड्यूरिंग रिलेशनशिप फॉर अ शेयरर्ड प्रोस्परस फ्यूचर हम आइंदा भी पाकिस्तान और यूएई आइंदा
भी बेहतर मुस्तकबिल के लिए एक दूसरे से ताुन करते रहेंगे ये पूरी स्टेटमेंट जो है इसमें कुछ सब्सटेंस नहीं है ये वो साइक्लोस्टाइल एक लिखी हुई एक रटी रटाई एक जुबान है जैसे थानों में हुआ करती है वो उसी तरह के सारे अल्फाज है इसमें इसमें कोई इस मिनिस्ट्री ऑफ़ फॉरेन अफेयर में क्लीयरेंस फिर नहीं ली गई कि हमसे क्यों इस वक्त जगी हालात में जब पाकिस्तान ऑलरेडी आईएमएफ के इतने दबाव में है जब ऑलरेडी इतनी महंगाई है पाकिस्तान के रिजर्व भी बहुत बहुत कम है उस वक्त यही पाकिस्तान से मांगा गया हमारे आई थिंक
16.3 163 बिलियन डॉलर के रिजर्व है। ऐसे में पाकिस्तान से 325 बिलियन डॉलर वापस मांगना मतलब जाहिर है ये बात ऐसे तो नहीं है कि उन्होंने वो कहीं गरीब हो गरीब है इस वक्त उनको तो वो फरी तौर पर तो कहीं इन्वेस्टमेंट करने नहीं जा रहे और ये कर्जा तो पुराना था और हम इस पर सूद भी अदा अदा कर रहे थे तो ऐसा नहीं है कि ये कोई बुरी बात है जो आज आपने जिससे कर्जा लिया जाहिर है आपने उसको वापस पे करना है लेकिन इस वक्त उनको ऐसा क्या मसला दरपेश था ये ना
यूएई ने क्लियर किया है ना हमने किया कोई पाबंद भी नहीं है कोई मुल्क लेकिन अगर जितने अच्छे इस फॉरेन मिनिस्ट्री ने ये लिखा है हमारी कि हमारे इतने अच्छे ताल्लुकात है इस तरह क्या यूएई वालों ने भी लिखा है अगर इतने अच्छे ताल्लुकात थे तो जाहिर है कुछ ना कुछ तो वो वो जवाब जवाब देंगे। इतने अच्छे अगर अगर रिलेशन हो तो जवाब दिया जाता है। अब आप देखेंगे पाकिस्तानी वर्कर्स बहुत बड़ी बड़ी तादाद में है जीसीसी में गल्फ में ऑलमोस्ट 5 मिलियन कम से कम 50 लाख से ऊपर है। अजीरा ने जो एक
फिगर दिया है 9 मार्च को उन्होंने एक फिगर दिया था। 50 लाख से ऊपर है। 50 लाख से ऊपर एक्सपर्ट्स है वो पाकिस्तानी है जो कि गल्फ में अखजी मुालिक में काम करते हैं। तकरीबन इसमें 22 लाख है सऊदी अरेबिया में 2.2 मिलियन और तकरीबन 19 लाख है यूएई में। तकरीबन आप समझे 20 लाख के करीब। यानी सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा यूएई में फिर हमारे कतर में है एक लाख हजार ओमान में है तो दो 70 70 हजार कुवैत में है 3 लाख 400 और बैरीन में एक एक लाख लेकिन यूएई में तकरीबन
1.9 मिलियन है 20 लाख से कुछ कम तो ये भी एक हमारा इंटरेस्ट है ये एक ये रेमिटेंस का एक बड़ा जरिया है पाकिस्तान में रेमिटेंसेस भेजते हैं जिससे पाकिस्तान की इकॉनमी को बड़ा सहारा मिलता है सो अगर ये रेमिटेंसेस ना भेजें और आईएमएफ कर्जा ना दे तो जाहिर पाकिस्तान के लिए एक मुश्किल सुरते हाल होगी। लिहाजा मिनिस्ट्री ऑफ़ फॉरेन अफेयर ने ये जो क्लीयरेंस दी है ये जस्ट उन्होंने एक गुड जेस्चर दिखाया है ताकि पाकिस्तान की गवर्नमेंट की तरफ से कोई ऐसी सुरते हाल सामने ना आए। कुछ ऐसा ना हो कि यूएई को हम
नाराज करें और जो हमारे तकरीबन 20 लाख वर्कर्स वहां है उनको वो वापस वापस भेज दे और या फिर इस हद तक जाए क्योंकि यूएई का पाकिस्तान के साथ अब वो रिलेशन नहीं रहा जो था पहले क्योंकि सऊदी अरब के साथ उसका रिलेशन बहुत खराब हुआ और पाकिस्तान के साथ बहुत बहुत बेहतर हुआ तो ये उस तरफ बात जारी है कि जहां ये रिलेशन टूट भी सकता है अगर इसको संभालना आज ईरान ने इसराइल और यूए में काफी अटैक्स किए हैं। यूएई में तो आपको पता है सबसे ज्यादा अटैक हुए हैं और यूएई के बाद
सबसे ज्यादा अगर किसी मुल्क में अटैक हुए हैं तो वो सऊदी अरेबिया है। कुछ दोस्तों को लगता है कि शायद सऊदी अरेबिया में अटैक कम हुए हैं। लेकिन सऊदी अरेबिया में सेकंड नंबर पर सबसे ज्यादा अटैक हुए हैं। आई थिंक मैंने आपके लिए एक ग्राफ भी निकाला था। मुझे यहां अभी मिलता है। मैं आपको दिखाता हूं। आई थिंक दिस यस दिस इज हां इसको रिमूव करते हैं। हां ये ये है ईरानियन अटैक्स ऑन गल्फ कंट्रीज। यूए इज द मोस्ट टारगेटेड। ये ये जो है तुर्की की साइट है। इन्होंने कंफर्म इनकी रिसर्च है। 1090 अटैक हुए
हैं सऊदी अरेबिया पे। यूएई में हुए हैं 2228 और यह डाटा है 29 मार्च तक का। आई थिंक 29th ऑफ मार्च यस। तो आज भी यह अटैक्स का सिलसिला जारी रहा। कल एक अटैक हुआ था यूएई ने सॉरी इसराइल की एक बहुत बड़ी टेक कंपनी जो बेसिकली उनकी मिलिट्री के साथ मिलकर सबसे ज्यादा काम करती है एरोसोल। इसके बहुत से फिर इसकी इसकी सब्सिडरीज हैं। इसके लिए इसकी इसके लिए मैन्युफैक्चर करते हैं। असेंबल करते हैं। बहुत से और ऑफिस है। ये ड्रोंस बनाते हैं। रेडार्स बनाते हैं। पायलट के हेड गियर बनाते हैं। एंटीनास बनाते हैं।
इनका दावा है एरोसोल का बियों्ड एक्सपेक्टेशंस। बियों्ड एक्सपेक्टेशंस। हम यानी तैयार करते हैं वो माल और वो टेक्नोलॉजी जो कि आप एक्सपेक्ट नहीं कर रहे उससे बेहतर। ये एरोसोल का दावा है। तो इसको ईरान ने बड़े अरसे से टारगेट करना शुरू किया हुआ है। ये इंटेलिजेंस गैदरिंग के लिए ड्रोन बनाता है। ये पॉइंट बहुत अहम है। गो के इस हमले में ये इंडस्ट्री का जो एक हिस्सा था एक उसका पार्ट था। इसकी सब्सिडरी थी। एरो एरोसिनल इसका नाम था शायद। हां यही नाम था। एरोन बल्कि इसका आपको इमेज भी दिखाता हूं। इसका आई थिंक मैंने
एक इमेज भी लोड करके रखा हुआ है। आई थिंक लेट मी शो यू गिव मी सेकंड ये यस दिस इज ये देखिए ये है इस इस प्रोडक्शन फैसिलिटी को एरोसोल की उससे मिली हुई उससे मुसलिक उन्होंने एक फैसिलिटी को तबाह किया ये पोस्ट की खबर है एक ईरान ने एक बैलेस्टिक मिसाइल और यहां पर इंटेलिजेंस गैदरिंग ड्रोन बनते थे आपको याहिया आपको इस्माइल इस्माइल हानिया और कुछ ईरानियन सीनियर लीडर्स के की टारगेट किलिंग के वाक्यात याद करने चाहिए जिनके लिए ड्रोंस आए थे ईरान के अंदर से तो ये स्मॉल ड्रोंस है जो ये एरोसल जो
जो कंपनी है जिसके ऊपर ईरान ने हिट किया है ये तैयार करती है और ये वो प्रोडक्शन है जो के चार से पांच किलोमीटर दूर बैठ के इसको कंट्रोल किया किया जाता है यानी कि जहां इस ड्रोन ने इंटेलिजेंस गैदरिंग गैदरिंग करनी है। उसका रिमोट कंट्रोल उस एरिया से चार से पांच किलोमीटर में होगा। यानी वो जो ईरान के अंदर गद्दार बैठे हैं या एसेट्स है इसराइल के या स्लीपिंग से है वो इस ड्रोन को ऑपरेट कर रहे होते थे ईरान में। और ये 400 किलोग्राम तक का जो यहां पर लगा है ब्लास्टिक मिसाइल। ये
चार किलो किलोग्राम ड्रोनस ये जो लेके जाते थे ड्रोन उसका भी तकरीबन चार किलो किलोग्राम का जो ईंधन था वो लेके जा सकते थे ये ये ड्रोन ये दो किस्म के ड्रोन है सर्लेंस वाले भी और अटैक वाले और इंटेलिजेंस वाले भी ये सब ये एरोसोल कंपनी तैयार करती थी ये जो पूरा पैकेज था जिससे गाबन गलबन ईरान के अंदर ईरानियन लीडर्स पर और व आने वाले मेहमानों की जासूसी की जाती थी इसको 400 किलोग्राम वॉर हेड के साथ ईरान के बलिस्टिक मिसाइल ने हिट किया है और उसको तबाह कर दिया है। इस कंपनी की
वेबसाइट पर ये लिखा है कि हम पांच मिनट में एक ड्रोन तैयार करते हैं यानी असेंबल करते हैं। तो इसको हिट करना एक 100% लेजिटमेट टारगेट है। गो के उन्होंने बड़ा रिजोल्व शो किया है इसराइल ने और आपको पता है कि वो पूरी एक वॉरियर ने वॉरियर नेशन है। उन्होंने उसको रिबिल्ट करना शुरू कर दिया है। जैसे के ईरानियन भी अपने तबाह होने वाले अपने डीप को फौरन ही बिल्ड करना शुरू कर देते हैं। तो यह ड्रोन मैंने यह स्टोरी आपके सामने इसलिए लाकर लाकर आज दोबारा रखी है डिटेल इसकी कि गालिबन इसमें वो वाले
ड्रोन तैयार तैयार होते हैं जिनको कि ईरान के अंदर इस्तेमाल किया जा रहा है स्लीपिंग सेल्स के जरिए और ये सस्ते से बहुत सस्ते चीप ड्रोन है पांच मिनट में तैयार हो जाते हैं और और मुसलसल इनको जितना चाहे हजारों की तादाद में इस्तेमाल कर ले और ये कर रहे हैं। तो टारगेट किलिंग जो इन्होंने मोहसन फखरीजादा से लेकर आज तक यहां पर की है उनमें इस तरह का जो इक्विपमेंट है एरोसोल का इस्तेमाल हो रहा आज इसके अलावा हफा में यानी नॉर्थ ऑफ इसराइल में ईरान ने अटैक किया उनकी पावर सप्लाई भी कुछ देर
के लिए मोतल हुई क्लस्टर बम्स उसने मारे हैं आईडीएफ के जो उनका उनका कारा हेड क्वार्टर है तलवेफ के पास वहां पर काफी तबाही हुई है कुछ बिल्डिंग बिल्डिंग बिल्डिंग्स गिरी है इससे ज्यादा डेथ्स वगैरह वगैरह नहीं हुई कुछ इंजरी हुई है। इसराइल लिंग एक वेसल भी आज आराम में हिट की गई है। जब बाकी जहाज थोड़े बहुत गुजर रहे थे कोई पाकिस्तान के झंडे के साथ कोई इराक के झंडे के साथ तो बीच में एक इसरली वेसल ने भी गुजरने की की कोशिश की तो उसको फिर आईआरजीसी ने हिट किया और इस खबर को
भी तमाम एंगल से कन्फर्म किया गया कि हां वो हिट हुई है और वो इसराइलली की वेसल थी। इसरली अखबारात ने उसको कन्फर्म किया। उसके अलावा दो और साइड्स पर ईरानी क्लस्टर बम्स आज गिरे इसराइल में। तो ये आज ईरान ने वहां पर डैमेज किया है। लेकिन ईरान के अंदर भी आज बहुत बड़ा एक डैमेज हुआ है। बहुत से हुए हैं। मसल उनकी पेट्रो केमिकल फैसिलिटीजान में हिट हुई है। वहां पर इसराइल ने का दावा है कि हमने एक मिसाइल फैसिलिटी को मुकम्मल तबाह कर दिया। उनका दावा है लेकिन वहां पर अटैक हुआ है पेट्रोकेमिकल
फैसिलिटी पर जिसकोान में जिसको कहा जा रहा है इसराइल की तरफ से कि वहां पर एक एक मिसाइल फैसिलिटी थी सीमेंट फैक्ट्री को आज हिट किया गया ईरान में और उससे भी बड़ा जो एक एक सिंबॉलिक अटैक था जिसके ऊपर उसने डोमिक एनर्जी कमीशन ने भी अपनी बात एक की है कि हमें इस पे तशवीश है वो ये है कि बुशहर जो इनका न्यूक्लियर न्यूक्लियर प्लांट है बिल्कुल परर्शियन गल्फ के ऊपर यानी समंदर के पास जिसको रशियन चलाते हैं और रशियन की मदद से ईरान ने ये न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया हुआ है। इसके करीब इसराइल
ने आज हिट किया है जिससे गार्ड मर गया और एक बिल्डिंग वहां पर तबाह हुई मॉस्को ने अपने लोगों को यहां से अपने इंजीनियर्स को निकालना भी शुरू कर दिया है। क्योंकि तकरीबन 200 से कुछ कम 198 रशियन यहां पर काम करते थे। उनमें से कुछ को निकालना शुरू कर दिया है। शायद इससे ज्यादा हो लेकिन 198 को वो रेस्क्यू कर रहा है। अब्बास इराकची ने इस पर वर्न किया है। फिर उन्होंने कहा है के आई थिंक मैंने कहा ट्रीट आपके लिए रखा है। नहीं वो ट्वीट नहीं है। ओके अच्छा अब्बास इराकची ने कहा हां
यस आई यस ये देखिए अब्बास इराकची ने इस पर एक ट्वीट किया वजीर खारजा क्योंकि इस वक्त वही ईरान की तरफ से बेसिक कम्युनिकेशन इंटरनेशनली कर रहे हैं। उन्होंने कहा उन्होंने इस पर वर्न किया। उन्होंने कहा के आप याद रखें के जपोशिया जो है जो यूक्रेन का एक पावर प्लांट है वहां परशिया सूबे में इस रीजन में सॉरी वहां पर यूक्रेन के जब हिट हुआ तो वेस्ट में बहुत आउटरच था कि ये बड़ा जुल्म हो रहा है और अब इसराइल अमेरिका ने हमारे एक उसी तरह के न्यूक्लियर प्लांट पर चार दफा अटैक कर दिया रेडियो
एक्टिव फॉल आउट अगर हुआ तो ये जीसीसी के जो कैपिटल्स है जो पर्शियन गल्फ के ऊपर है वो तबाह होंगे तैहरान तबाह नहीं होगा ये आप याद रखें इन्होंने उसकी लोकेशन के ऐतबार से खबरदार किया कि आप में इतनी डॉनसेंस नहीं है कि आप देखें जिसको आप ये आप इसके इमेज में भी देख जो उन्होंने लगाया बाची ने आपको इसके पीछे समंदर नजर आ रहा यानी बिल्कुल साहिल के ऊपर है। अगर ताबकारी हुई तो यह समंदर के रास्ते फैलेगी और ये जो इसकी दूसरी साइड पर जो अमेरिकन एयरलाइ है उनके जो उनके जो कैपिटल्स और
अहम अहम शहर है वो उस तरफ है। ये मैं आपको मैप पे भी एक दफा दिखा देता हूं। अच्छा फिर उन्होंने ये मैप दिखाने से पहले मैं आपको आखरी लाइन उनकी उनकी बता दूं। उन्होंने लिखा अटैक्स ऑन आवर पेट्रो केमिकल्स आल्सो कन्व रियल ऑब्जेक्टिव। यह एक धमकी भी है। जब मैं आपको मैप दिखाता हूं कि वो यह वो बात क्या कह रहे हैं। आप इस मैप पर आए दोबारा हम इसको स्टेज पर ले आते हैं। ये ईरानियन मैप है। ये देखिए ये है वो इलाका मुझे ये ये देखिए ये है बुश ऐप ये आप इस
वक्त मैप पे देख रहे हैं। अब मैं इसको जरा इसको इसको 3D में लाके थोड़ा सा इसको परस्पेक्टिव में लाके आपको इसको ज़ूम बैक करके हम इसको इसको मोड़ के आपको दिखाते हैं। यह देखिए। अब यह देखें आप इस इस एंगल से देखें। यहां से अगर इसके ऊपर इस शहर पर अटैक होता है जहां के उनकी न्यूक्लियर फैसिलिटी है। न्यूक्लियर पावर पावर प्लांट है। ये ऑलमोस्ट समंदर के अंदर है प्लांट। और ये सामने आपको नीला पूरा पूरा समंदर नजर आ रहा है। इस समंदर के पार दूसरी तरफ क्या है? ये देखिए। दूसरी तरफ अलजबल है,
बहरीन है, दमाम है, सऊदी अरब का शहर कतर है, दोहा है। ये आपको नजर आ रहा है। और उसके साथ इस तरफ यूएई है, दुबई है। तो अगर वो शहर पर अटैक होता है तो उनका कहना यह है कि इसके सामने जो मुालिक है जो समंदर है उसके साहिल के ऊपर वो तमाम बड़े-बड़े शहर और और वो वो कैपिटल है जो कि अमेरिकन इत्तहादी है। अगर आप इस शहर को तबाह करेंगे यानी इस एटमी पावर प्लांट को आप तबाह करेंगे तो इससे जो ताबकारी फैलेगी वो आपके इत्तहादियों को ज्यादा मुतासिर करेगी। हमें कम मुतासिर करेगी।
ये वो अपनी इस ट्वीट में मैं आपके सामने फिर एक दफा रख देता हूं। यह इसमें दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। एक-एक काम एक-एक अटैक जो अमेरिका और इसराइल दोनों जनप्स कर रहे हैं। उसका डायरेक्ट इफेक्ट अमेरिकन एयरलाइंस पर इस रीजन पर और बहुत लंबे अरसे के लिए इस जगह पर आ रहा है। ये अमेरिका ना सिर्फ अपनी ताकत खो रहा है बल्कि साथ-साथ अमेरिका अपनी सेंस भी खोता चला जा रहा है। आप देखिए अमेरिका ताकत खो रहा है। इसके बहुत सी निशानियां हमारे सामने है। गो के हम ये नहीं चाहते। ये बात आप
ज़हन में रखें। ये नेगेटिविटी हमारे अंदर नहीं है कि हम कहे कि फला मुल्क तबाह हो जाए। फला फला मुल्क मुल्क मुल्क खत्म हो जाए। अभी हम कर रहे हैं सिर्फ एनालिसिस कि कौन क्या गलती कर रहा है उसका उसको क्या नुकसान हो सकता है। हमारे नजदीक एक पीसफुल दुनिया ही सबके लिए बेहतर है। किसी को खत्म नहीं होना चाहिए। सबको ग्रो करना चाहिए। लेकिन यू नो नेचर वोंट वर्क दिस वे। नेचर इस तरह काम नहीं करती। अमेरिका के ऊपर इस वक्त 37 37 ट्रिलियन डॉलर से जायद का एक कर्जा है जो कि रोजाना के
हिसाब से जो कि हर शहरी पर मिलियंस ऑफ डॉलर का खर्चा बनता है का एक कर्जा बनता है हजारों डॉलर का हर शहरी पर कर्जा बनता है कम से कम हजारों डॉलर पर शहरी अगर रोजाना ऑलमोस्ट एक रफ एस्टीमेट के मुताबिक एक मिलियन डॉलर भी ये ये कर्जा अदा करना शुरू किया जाए तो ऑलमोस्ट दसियों हजारों साल लगेंगे एक लाख साल के करीब लग जाएंगे यह कर्जा उतारते यह तेजी से जो उसका बढ़ता हुआ उसका कर्ज है यह एक्चुअली इसकी इकॉनमी को इसकी डॉलर की वैल्यू को उसकी बेस उसके बेसिस को कमजोर कर रहा है
क्योंकि पेट्रो डॉलर के बाद उसके पास इस 37 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी और उस डेप्ट को आगे ट्रांसफर करने में अगले साल में में ट्रांसफर करने के और डेप्ट डेप्ट सीलिंग बढ़ाने का कोई ऑप्शन नहीं रहेगा क्योंकि उतने नोट छापने के लिए आपके पास उतना ऑयल पेट्रोल डॉलर नहीं होंगे क्योंकि ऑलरेडी नहीं है ऑलरेडी वो वो एक फेक वैल्यू पर खड़ा है और अब अगर पेट्रोल डॉलर भी खत्म हो गया तो फिर ये जो फेक उसकी पावर है वो बहुत ही कम रह जाएगी। खत्म नहीं होगी लेकिन खत्म कम होगी और उसके बाद 37 ट्रिलियन
डॉलर के असल नुकसान अमेरिकन इकॉनमी को शुरू होगा बल्कि पूरी दुनिया को शुरू होगा और अमेरिका में फिर वो महंगाई का दौर आएगा जिसको झेलने के लिए वहां की आवाम तैयार नहीं और ये सब कुछ इस तरह की डॉनसेंस की वजह से होगा। उसके बाद डॉलर को दूसरा मसला है इसको अमेरिकन इकॉनमी को ये है कि डॉलर भी चैलेंज हो रहा है सिर्फ पेट्रोल डॉलर के एंगल से नहीं पूरी दुनिया में क्योंकि इस वक्त प्रोडक्शन अमेरिका के अलावा बाकी दुनिया में ज्यादा हो रही है तो वो अब आहिस्ताआहिस्ता स्टेप बाय स्टेप अपनी एक्सपोर्ट्स जो है
वो डॉलर के बजाय अपनीप करेंसीज में करने लगे हैं। जो मुल्क जितनी जिस चीज को ज्यादा एक्सपोर्ट करता है बटरल एग्रीमेंट्स के तहत अब मुालिक डॉलर के अलावा ट्रेड कर रहे हैं। क्योंकि डॉलर में ट्रेड करने का नुकसान सबसे बड़ा सामने ये आया है कि अमेरिका जब चाहे पाबंदियां लगाकर डॉलर रोक देता है। तो ओवर यूज़ ऑफ पावर आप जानते हैं कि ताकत दिखाने के लिए होती है। इस्तेमाल करने के लिए नहीं। जितनी ज्यादा आप ताकत इस्तेमाल करेंगे बेसिकली ताकत कम होती जाएगी। तो अमेरिका ने डॉलर की पावर को इतना ओवर यूज़ किया है कि
अब वो खत्म होने लगी और जीडीपी जैसेजैसे बढ़ेगा इनकी महंगाई और ये कर्ज बढ़ेगा तो वो उसकी जीडीपी से वैल्यू उसकी फर्क आएगी तो उनकी महंगाई और करेंसी में बहुत शदीद फर्क आएगा। फिर मुसलसल इनकी खारजा पॉलिसी जो है वो मुसलसल इस तरह डिक्लाइन का शिकार है कि सिवाय बम मारने के अमेरिका को कोई मसला हल करने का कोई सेकंड ऑप्शन समझ ही नहीं आता। मुसलसल जंग मुसलसल तनाज 10 10 11 20 साल और ये जंग पता नहीं कितनी कितनी लंबी जाएगी अगर इस जंग में सिर्फ और सिर्फ पूरी दुनिया का नुकसान इनवॉल्व ना हो
तो मैं आपको सेफली कह सकता था कि ये जंग सालों तक जाएगी लेकिन अब मुझे जो जब मैं एक एक ये लफ्ज सालों का इस्तेमाल नहीं करता सिर्फ ये बोलता हूं कि ये जंग कई महीनों तक जाएगी तो उसकी वजह सिर्फ ये है क्योंकि इस जंग से पूरी दुनिया मुतासिर हो रही है सिर्फ अमेरिका नहीं तो शायद बाकी बाकी दुनिया मिलके कोई हल हल अपने अपने बचाव के लिए निकाल ले। वरना अमेरिका ने जिस जिस जिस मसले में हाथ हाथ डाल दिया, जिस मसले को पैदा कर दिया है, जो मसला दुनिया में था ही नहीं
ये महीनों तक चलेगा। तो ये उसकी खारजा पॉलिसी की बहुत बड़ी नाकामी है जो कि इसकी ताकत को कम कर रही है। उसके बाद दूसरा सबूत कि इसकी खारजा पॉलिसी मुसलसल कमजोर हो रही है। वो ये कि इसकी सप्लाई चेन मुसलसल मुतासिर है। क्योंकि तेल पहले कहीं और से आता था। रॉ मटेरियल कहीं और से आता था। उन सब में अच्छा चाइना से रेयर अर्थ से इसके मिनरल्स आते थे। रशिया से भी कुछ चीजें आया करती थी। पूरी दुनिया से एक सप्लाई चेन थी जो के इसकी खारजा पॉलिसी में खामियां और जंगे ना होने की
वजह से बड़ी रवानी से चल रही थी। कामयाबी से काम कर रही थी। लेकिन खारजा पॉलिसी में मुसलसल दुश्मन पैदा करने की की वजह से वो सारी सप्लाई चेन मुतासिर हो चुकी है। सिलिकॉन से लेकर रेयर अर्थ मटेरियल से लेकर ऑयल से लेकर इसके एलआई की पावर से लेकर एक एक चीज में अब खारजा पॉलिसी नाकाम खारजा पॉलिसी की वजह से मसाइल आ रहे हैं। थर्ड थर्ड पॉइंट के अमेरिका मुसलसल डिक्लाइन का शिकार है। वो ये है कि वो अपनी अब अपना मिलिट्री बजट बढ़ा रहा है। 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की कोशिश कोशिश कर रहा
है। 1500 अरब डॉलर और एजुकेशन और हेल्थ में कट लगा रहा है। मैं उस खबर का कट नहीं ले सका लेकिन मैंने उसको दिखाया उसके उसका स्क्रीनशॉट लिया था पता नहीं कहां होगा। लेकिन इन मारल ट्रस्ट मी कि वो एजुकेशन और हेल्थ पर कट लगा रहा है इसी जंग के बीच में और मिलिट्री बजट बढ़ा रहा है। ये किसी मुल्क के कमजोर होने की बहुत बड़ी निशानी है कि उसको अपने डिफेंस के लिए इस सुरते हाल में जो दुनिया की सबसे बड़ी पावर है उसको एजुकेशन से बजट निकालना पड़ रहा है। ये ना सिर्फ कमजोरी
की बल्कि हमाकत की अलामत भी है जो हम भी कर रहे हैं। लेकिन बल हम तो हम तो कभी सेटल हुए ही नहीं है। पाकिस्तान का मसला तो आप साइड पे इसलिए रख सकते हैं। हमने खुशहाली का कोई दौर लंबा गुजारा ही नहीं। कम से कम तीन नस्लें चाहिए होती है किसी कौम को में एक खास खुशगवार तब्दीली आने के लिए। जब तीन नस्लें खुशहाली की गुजरती है तो फिर एक एक कौम आपको बहुत मुजब नजर आना शुरू होती है। वरना जंगो जद गैर यकीनी सड़कों के ऊपर एक दूसरे को देखकर आपकी भवे तन जाती
है। क्योंकि आपने एक अनस एक इनसिक्योरिटी हर वक्त आपके सामने होती है। कल का कुछ पता नहीं होता। ना मुल्क का ना अपने जरिया रोजगार का लेकिन जब दो तीन तीन नस्लों तक आ तौर पर हिस्टोरियंस ने कैलकुलेट किया है कि अगर किसी कौम में कोई माशी खुशहाली हो तो फिर वो बहुत पोलाइट मुजब और धीमे लहजे में बिहेव करना शुरू कर देते हैं। अगर उनको उनके ऊपर कोई और आकर काबिज नहीं हो जाता। तो पाकिस्तान ने भी ऐसा दौर नहीं गुजारा। लेकिन अमेरिकनंस तो यह दौर कई दफा गुजार चुके हैं। अब वो तारोपद उसके
बिखर रहे हैं। फिर उसके बाद आखरी पॉइंट पॉइंट ये है कि अमेरिका एक डिक्लाइन पावर है कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट जो दो पार्टीज जिसको अमेरिका की ताकत कहा जाता था वो उसमें इतनी शदीद दराड है कि रिपब्लिकन पार्टी एस ए पार्टी खत्म हो चुकी। अब बाहर से आकर कोई थर्ड मैन आकर उस पार्टी को रूल कर रहा है। पूरी पार्टी उसकी होस्टेज बन के रह गई है। वो शख्स जो कभी सेनेटर था ना कभी रिप्रेजेंटेटिव था ना कभी गवर्नर था। कुछ भी नहीं था। अटनी जनरल नहीं था। कुछ भी नहीं था। वो अमेरिका पर अमेरिकन
प्रेसिडेंट दो दो दफा सिर्फ इसलिए इसलिए बन गया कि वो अपनी मार्केटिंग बेहतर कर रहा था और उसने एस्टब्लिशमेंट से एक धड़े से यानी गस से उसने डील एपक से डील कर ली थी। ने कैंपेन चलाई, झूठ बोला और बन गया। तो रिपब्लिकन एक एक रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में से दो टू पार्टी सिस्टम जिसको दुनिया में एक आइडियल समझा जा रहा था वो कोलैप्स कर गया और एक पार्टी अपने एसेंस के तौर पर एक एक एक प्रेसिडेंट देने की सलाहियत से ही खत्म हो गई। फार हो गई। अभी भी आपको उनमें कोई और नजर आएगा।
मार्को रूबियो के बारे में कहा जा रहा है वो आएगा और अगर वो आएगा तो एक और जंग में जाएंगे क्योंकि वो आपको पता है कि क्यूबा के ऊपर अटैक करने के लिए सबसे स्ट्रांग है। अच्छा डेमोक्रेट्स के पास इस वक्त इलाफ की और खड़े होने की स्टैंड लेने की एतेजाज करने की उसकी पॉलिसी के मुकाबले पे खड़े होने की कोई हिम्मत ही नहीं है। उसके बावजूद दोनों में बेपनाह इलाफ आ चुका है। एक एक मामले में तो ये उसको कम कमजोर कर रहा है। वो जो बाय पार्टीजन एक एक चीज में सपोर्ट थी वो
भी आहिस्ताआहिस्ता कम होती जा रही है। टैक्स पर और टेफ टेफ टेरफ पॉलिसीज पर बहुत से आपस में तराजत है इनके। उन्होंने टेरिफ लगाया डोनाल्ड ट्रंप ने और कल फाइनशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट थी कि उस उन्होंने डिटेल में यह बात बताई कि अमेरिकन कैसे हर चीज एक एक चीज को 1.5 से 78% तक महंगी अब खरीद रहे हैं जिसमें सिर्फ टेरेफ है अभी ऑयल की बात नहीं है ऑयल से पहले की बातें है यानी कम से कम भी जो चीज महंगी हुई है 1.5 और जो मैक्सिमम हुई है वो 8% तक टेररफ की वजह
से डायरेक्टली जो इफेक्ट आ रहा है आ रहा है टेरेफ का आखरी साइन आखरी साइन ये है कि अमेरिकन अब अपनी गवर्नमेंट के साथ उस तरह कॉन्फिडेंस में नहीं है क्योंकि वो हर जंग की हिमायत में शुरू में हुआ करते थे लेकिन अब के खिलाफ असल में अगर आप इस बात को यू समझे तो कोई बड़ी पावर कोई बड़ी इमारत एकदम नहीं गिरती बल्कि दबाव जंगे और तकसीम आहिस्ता आहिस्ता प्रेशर्स वॉर्स और आपसी तकसीम आहिस्ता आहिस्ता उन्हें गिराता है खुदा करे की वो दिन आए लेकिन अमेरिका उस तरफ जा रहा है अमेरिका अपने आप को
कमजोर कर रहा है जो वर्ल्ड स्टेबिलिटी के लिए खतरनाक बात है। ये वो वो एक एक तारीख का सफर है जो हमने बार-बार देखा है। सिर्फ यहां नहीं देखा। हमने रोमन एंपायर में देखा। हमने स्पेनिश एंपायर में देखा। हमने ब्रिटिश एंपायर में देखा। तमाम अंपायर इनके ज़वाल पजीर होने का एक पूरा प्रोसेस है। ये सब इससे गुजरी। दोस्तों ये आज की मेन खबरें थी जो मैंने आपके सामने रखी। अब मैं आपके कुछ क्वेश्चन लूंगा। सब कुछ क्वेश्चन लिखे आपने ओके गुड अजमल शाह आबनाए हुरमस ईरान के कंट्रोल में चला जाए तो पाकिस्तान और बाकी दुनिया
की इकॉनमी पर क्या असर पड़ेगा? क्या कोई असर पड़ेगा? देखिए अभी तक जो जो प्रोटोकॉल ईरान ओमान से मिलकर तय कर रहा है जिसको बनाने की कोशिश कर रहा है वो ये है के तीन किस्म के होंगे मुल्क एक वो जो आपके दोस्त हैं एक वो जो न्यूट्रल है और एक वो जो हॉस्टाइल है जो उसके खिलाफ जंग में शरीक तो वो कह रहा है कि जो दोस्त हैं वो तो यहां से फ्री में जाएंगे जो न्यूट्रल है वो उनके ऊपर टैक्स लगेगा आप जानते हैं कि 2 मिलियन डॉलर तक वो पैसे लेकर रकम लेकर
जहाजों को गुजरने दे रहा है और ईरान इस जंग में 36 दिन से ऊपर हो गए हैं। अच्छा खासा पैसा कमा चुका है जो कि पहले नहीं कमा रहा था और वो युवान में ले रहा है। यानी वो पैसे सेव है। उसके ऊपर अमेरिका पाबंदी भी नहीं लगा सकता और जो होस्टाइल होंगे उनको गुजरने ही नहीं दिया जाएगा। तो ये वो बात कर रहा है। पाकिस्तान को दोस्त समझता है। आज तक अभी बास राक्षी ने जो उन्होंने एक ट्वीट किया था उसमें उन्होंने पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया था। ये मैं आपको दिखा भी देता हूं
और फिर इसार ने भी उस पर जवाब जवाब दिया। एक शुक्रिया उन्होंने फिर उसके ऊपर अदा किया कि आपने शुक्र है क्लियर किया के हम आपके साथ है। बहुत से दोस्त इस तरह की बात कर रहे थे बड़े-बड़े हमारे दोस्त साफी भी के ये मुजाकरात खत्म हो चुके है। हमने आपको बताया था कि ये इस तरह से खत्म नहीं हो सकते। हां इसमें तातु आएगा। लेकिन ये मुजाकरात है ही नहीं। मैसेजिंग है जो कि कैसे कैसे ख़ होंगे? ईरान पाकिस्तान से भी खुद को दूर कर लेगा तो कोई भी मैसेज कैसे भेजेगा कैसे ट्रस्ट करेगा
कि जो वो मैसेज भेज रहा है वो पहुंच भी रहा है तो आखिर कोई तो उसका दोस्त दोस्त दोस्त हो ना जो जिसप वो ट्रस्ट कर सके कि ये मेरा मैसेज भेज देगा उन्होंने अब सिराशी ने इसमें क्लियर किया था कि हम जो नहीं आ रहे इस्लामाबाद तो उसकी वजह सिर्फ ये है हमें अमेरिकन पर और जेनो एप्स की जो जो शरायत है उन पर ट्रस्ट नहीं है क्योंकि वो शरायत ही इस तरह की तो ये उन्होंने उन्होंने कहा है और पाकिस्तान का ग्रेट डीपली ग्रेट डीपली ग्रेटफुल टू पाकिस्तान का है। हम बहुत तहे दिल
से पाकिस्तान के शुक्रगुजार है। सो पाकिस्तान को ये मैंने इसलिए ट्वीट दिखाई उनके बासराची की कि वो शुक्रगुजार है पाकिस्तान। इसका मतलब वो पाकिस्तान को दोस्त समझते हैं। तो पाकिस्तान के ऊपर शायद कोई असर इसका ना पड़े। लेकिन मसला ये है कि जहां से ऑयल आना है वो कंट्रीज इसके बाद क्या सलूक रखेंगे कि पाकिस्तान के साथ कतर जो है वो क्या सलूक रखता है पाकिस्तान के साथ? सऊदी अरब का तो होपफुली हमसे ताल्लुक ठीक ही होगा। तो अगर उनका ठीक रहा तो ईरान की तरफ से कम से कम पाकिस्तान के एंगल से अब तक
की सुरते हाल ये है कि हम उसकी किसी भी कैटेगरी में होस्टाइल नहीं है। न्यूट्रल भी नहीं है। वो हमें अपने साथ समझता है। पाकिस्तान पर तो नहीं पड़ेगा लेकिन दुनिया की इकॉनमी पर असर पड़ेगा कि ईरान एक ताकतवर मुल्क के तौर पर उभरेगा। एतजाज हुसैन साहब हैं। आप कहते हैं ट्रंप से बेहतर कोई सामने आएगा। लेकिन शायद अमेरिका की तारीख अमेरिका में आए। लेकिन तारीख बताती है कि हर अमेकी सदर ऐसे ही काम करता है। बस वो ट्रंप से ज्यादा मोहतात होते। मेरा ख्याल है कि हर सदर ऐसे ही करता है। ये इस तरह
स्वीपिंगली हम नहीं कह सकते क्योंकि अमेरिका ने दो वर्ल्ड वॉर से गुजरा है। अमेरिका एक चार साल की सिविल वॉर से से गुजरा है। दो ग्रेट सेशन से गुजरा है। तो इन सब के बाद आने वाले प्रेसिडेंट्स ने अमेरिका को बहुत सहारा दिया। अमेरिका के अंदर एक डेमोक्रेटिक सिस्टम एस्टेब्लिश है। अमेरिका के सिस्टम्स बड़े स्ट्रांग थे। अभी आके डोनल्ड ट्रंप ने और मिसलॉन मस्क ने आकर स्मॉल और स्मार्ट गवर्नमेंट के नाम पर उन सिस्टम्स को ब्रेक किया है। उनको तोड़ा है। वो जो चेक्स थे जिसकी वजह से काम तो स्लो होता था लेकिन सिस्टम टूटने
से बच जाता था। और अगर एक डॉन सेंस वाला बंदा आ गया है। एक डोनल्ड ट्रंप आ गया तो उसके बाद फिर कोई आइजन हावर भी आ जाया करता था। कोई लिंकन भी आ जाया करता था। आपको पता है कि लिंकन से जो पहले थे प्रेसिडेंट क्या उनका नाम था मेरे से नाम निकल गया उनका हुसैन साहब उनका नाम नाम देखिएगा जरा इब्राहिम लिंकन से जो पहले प्रेसिडेंट थे उनको अमेरिकन हिस्ट्री का सबसे नाकाम और सबसे नापसंदीदा प्रेसिडेंट कहा जाता है और उनके दौर में भी यही बात बात कही जा रही थी कि अमेरिका अब
खत्म हो जाएगा लेकिन फिर अमेरिका ने बिल्कुल इमचोर शख्स को कर लिया इब्राहिम लिंकन को और देखिए फिर उन्होंने अमेरिका को वहां से निकाला अपनी जान देकर उन्होंने वहां से लिखा हां यस यस जेम्स प्रेसिडेंट जेम्स आए थे जेम्स वन जेम्स जेम्स यस जेम्स तो इनको ये उस दौर में 19वीं सदी के डोनल्ड ट्रंप ही थे तो इन उस वक्त मैं अमेरिका की हिस्ट्री दो तीन बार उसके उसको देख देख चुका हूं कुछ बुक्स पढ़ चुका हूं और आपके लिए मैंने एक बड़ी डिटेल हमारी टीम ने एक सीरीज उसके ऊपर बनाई है हिस्ट्री अमेरिका जरूर
देखें क्योंकि उस हमने बहुत डिटेल से कोलंबस के अमेरिका दरियाफ्त करने में सो कॉल्ड उसको दरियाफ्त करने से पहले से लेकर जब अमेरिका में सबसे पहली आबादी बनी जिसको आज अमेरिका कहते हैं उसकी वजह से तो वो उस उन कॉलोनीज के बनने से पहले और कॉलोनीस के बनने के बाद बराक ओबामा तक के अमेरिका की हिस्ट्री हमने आपके लिए बनाई है। देखो सुनो सुनो जानू पर आप आप जरूर देखिए क्योंकि वर्ल्ड पावर सुपर पावर सुपर पावर के स्टेट स्टेटस तक कैसे पहुंची एक छोटे से जेम्स टाउन से वहां तक कैसे आया अमेरिका यहां तक ये
हम सबको स्टोरी पढ़नी चाहिए क्योंकि हमारी हमारे दौर में हमारी में यही सबसे ताकतवर मुल्क है इसके सफर को पढ़ना बहुत कुछ सिखाता है विस्पोची अमरीगो विस्पोशी थे वो जिनके नाम पर अमेरिका को अमेरिका कहा जाता है क्योंकि उन्होंने इसके गर्द चक्कर लगा के एक मैप बनाया था और फिर इसकी इसके बारे में असल में बताया था कि कितना कितना बड़ा मुल्क है। सो ये सवाल किनका था? एजाज हुसैन साहब वो ये कि अमेरिका में ऐसे सदर भी है जो फिर आके जिनोंने फिक्स की है। सरफराज अली यूक्रेन के सऊदी अरब और कतर से दफाई
मोहदे का पाक सऊदी मोहदे जंग पर क्या फर्क पड़ेगा? देखिए यूक्रेन ने एक जबरदस्त काम किया है। शानदार रेिलियंस उसने एक शो की है कि उन्होंने उन्होंने रशियन ड्रोंस का तोड़ निकाला है। छोटे उन्होंने स्माल ड्रोंस ऐसे सस्ते बनाए हैं जो वो एक दिन में हजारों की की तादाद में उनके बकल तैयार कर सकते हैं। फिर उन्होंने शहरों के ऊपर खास किस्म की वायरिंग की है जिससे के रशियन ड्रोंस आकर वहां अटैक नहीं कर सकते। फिर उन्होंने अपने कॉन्वस के लिए ऐसे महफूज रास्ते बनाए है जिनको के रशियन ड्रोंस आके डिटेक्ट नहीं कर सकते। कल
की वीडियो में मैं आपको इमेज भी उसके जरूर दिखाऊंगा। मुनीब नोट करना यार कल को कल की वीडियो में हमने इमेज दिखाने है कि यूक्रेन ने कैसे महफूज़ बनाया। तो ये चीज गल्फ गल्फ कंट्रीज सीखना चाह रहे हैं फरी तौर पर क्योंकि अभी उनके पास खुद इनोवेशन का टाइम नहीं है। उनको फरी तौर पर एक हेल्प चाहिए। ऐसी हेल्प जो स्पेसिफिकली यूक्रेन ही कर सकता है। पाकिस्तान के पास रशियन क्योंकि रशिया भी जो है ईरान के शायद शायद ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है। तो वो और उसको बेहतर करके वो खुद भी बना रहे है बड़ी
तादाद में तो उसका मुकाबलाकि यूक्रेन कर रहा है। लिहाजा हर लॉजिक यही बताती है कि अरब कंट्रीज को अगर फरी कोई मदद मदद चाहिए ड्रोंस के मुकाबले में तो वो यूक्रेन से ले और इवन ये पाकिस्तान के लिए साइन ऑफ रिलीफ है। इसलिए कि अगर अगर यूक्रेन नहीं यहां पर मदद करेगा फिर पाकिस्तान को कुछ करना पड़ेगा जो कि आप समझते हैं कि पाकिस्तान के लिए बैड चॉइस होगी जब उसको ईरान और सऊदी अरब में से एक चूस करना पड़ेगा। सो अगर सऊदी अरब के साथ यूक्रेन ने एक वायदा किया है ड्रोन के एंगल से।
सो इट इस गुड थिंग फॉर अस। अच्छी बात है। वहां से ले हेल्प फिर उसने ईरान ने जो जो यूक्रेन से करना है शुरू खुद करे। जो यूक्रेन ने ईरान के साथ करना है वो करे हमारी जान छोड़े तो ये हमारे लिए बेहतर है बहुत अच्छा होता है काराने फिक्र साहब है कोई सर डोन्ड ट्रंप जैसा डॉन सेंस इंसान इतना बड़ा लीडर कैसे बन गया अच्छा ये एक बिल्कुल और सवाल है साइकोलॉजी का फिलॉसफी का एंथ्रोपोलॉजी का यानी इंसानों इंसान सोचते कैसे हैं इंसान बशियत इंसान क्या है वो किन बातों से मुतासिर होता है ये
सवाल इस सवाल का ताल्लुक वहां से है देखिए इसका इस वक्त टाइम नहीं है मेरी एक वीडियो बल इस है लेकिन बस मैं आपको बताऊ कि ह्यूमन इंसानों में खामी है कि इंसान फेक और रियल कॉन्फिडेंस में आम तौर पे फर्क नहीं कर सकते यही वजह है कि बड़ा झूठ ज्यादा चलता है कुछ झूठ तो 2000 साल चल गए हैं बल्कि अभी तक चल रहे तो कुछ झूठ जितना बड़ा झूठ होगा उतना उतना ही और जितने कॉन्फिडेंस से आप उसको बोलेंगे वो उतने उतना कामयाब और उतना तवील सफर करेगा। ह्यूमन इंटेलिजेंस आम तौर पर बहुत
कम लोग हैं जो झूठे कॉन्फिडेंस और रियल कॉन्फिडेंस में फर्क कर सकते हैं। आपने अपने इर्दगिर्द ही आप देखिए बहुत से ऐसे दोस्त आपको लोग मिलेंगे जो बहुत बड़ी-बड़ी बातें करके अपनी इज्जत बनाए हुए हुए होते हैं और सिर्फ उनके बहुत करीबी लोग ही इस बात को जानते होते हैं कि ये झूठ बोल या बोल रही है। तो डोन्ड ट्रंप ने उनका पूरा जो सफर है वो एक बिल्डिंग की रनोवेशन से शुरू होता है। जिसमें उस दौर के न्यूयॉर्क मेयर ने उनको पूरा सपोर्ट किया। बरसा बरस के लिए उनके टैक्सेस माफ किए और उस रनोवेशन
के लिए भी सारी फंडिंग दी क्योंकि दोनों ने मिलजुल के काम करना करना था 70 की थी। लेकिन उसको यू प्रेजेंट किया गया कि जैसे ये डॉन्ड ट्रंप ने जीरो से एक होटल होटल ल्च किया। फिर उसको बहुत महंगा बेचा गया और उसमें फिर डोन्ड ट्रंप कई साल तक फ्री फ्री फंक्शन करते रहे और उसको खुद बुकिंग पे देते रहे। उसके बाद उन्होंने एक वो फिर फेल हुए वहां से तो फिर इन्होंने एक कसिनोस का जाल पूरे मुल्क में बिछाया बुरी तरह वहां भी नाकाम हुए लेकिन उसकी मार्केटिंग अपने उन पार्टनर्स के साथ जिनकी मैं
बात कर रहा हूं उसके साथ इन्होने खूब दौलत उन्होंने कमाई फिर उन्होंने जाली डिग्रिया बेची उसके साथ फिर इन्होने काफी दौलत बनाई नाम कमाया और हर चीज को मार्केट यू करते रहे जैसे इनकी कामयाबी है तो यहां से उन्होंने एक फेक कॉन्फिडेंस सीखा हासिल किया कि कैसे धोखा दिया जा सकता है। अब देखिए वो पूरे कॉन्फिडेंस से जब अमेरिकियों से ये बात कहा करते थे कि मैं आऊंगा और एक हफ्ते में एक महीने में मैं तो यूक्रेन की जंग बंद बंद करवा दूंगा तो बहुत से लोग ये बात करते थे कि ये नहीं हो सकता
लेकिन वो जिस कॉन्फिडेंस से बात कर रहे थे आप जो है सफरा आप कारवान फिकर साहब आपकोकि कारवान है और फिक्र है तो आप समझ सकते हैं लेकिन आम तौर पे ज्यादातर इंसान हमारे जैसे वो नहीं समझ सकते फेक और रियल कॉन्फिडेंस में फर्क तो लोग इस धोखे में आ जाते हैं लोगों के पास इतना वक्त नहीं होता कि वो बात की तह में जाकर हकीकत जानने की की कोशिश करें या किसी शख्स के क्लेम को जाकर जांचने के लिए मेहनत करें। ज्यादातर लोग जो उनको अच्छा लगता है उसको मान लेते हैं और किसी को
अच्छा लगवाना अक्सर लोग इसके एक्सपर्ट हो जाते हैं और डोनाल्ड ट्रंप उन शोदाबाजों में से एक है ये आपको और हमें मानना पड़ेगा और इस तरह इस तरह के बहुत है लेकिन देखिए जैसे ही रियल टेस्ट आया ही फेल्ड इन टेरर ही फेल्ड इन यूक्रेन वॉर ही इस फेलिंग इन ईरान वॉर तो वो कंप्लीट फेलर उनकी लाइफ का ऐसे ही है लेकिन इस वक्त भी इस जंग को अपनी फतह कह के बेच रहे हैं सो ये है वो चीज जिससे बहुत से लोग बड़े जगहों पर पहुंच जाते हैं। लेकिन जब उनको रियल चैलेंज आता है
वहां वो शिकस्त खाते हैं। हमारे दोस्त हैं सरदार साहब। इन्होंने एक सवाल सवाल भेजा है के फैसल साहब एक सफी ने अपने प्रोग्राम में खबर दी है कि शुमाली कोरिया ने 500 बैलेस्टिक मिसाइल्स बैलेस्टिक मिसाइल 500 चाइना के रास्ते ईरान पहुंचा दिए। चाइना के रास्ते चाइना के रास्ते पता नहीं कैसे पहुंचा दिए। इसका मतलब है चाइना इन डायरेक्ट जंग में शामिल हो। देखिए चाइना और और रशिया जंग में शामिल है सरदार साहब लेकिन 500 मिसाइल शुमाली कोरिया चाइना के रास्ते भेजेगा किस्सा महालस्त पहली बात तो ये कि इतनी बड़ी तादाद में शुमाली कोरिया जो ऑलरेडी
अंडर सर्वेंस है वहां से जहाजों का आना 500 बैलस्टिक मिसाइल्स लेकर ये एक मजाक वाली बात है पहले शायद भेजे हो उस जंग से दूसरी बात ये है कि चाइना के रास्ते तो आने का सवाल ही पैदा नहीं होता कोई रास्ता अगर है तो रशिया का और कैस्पियन ओशन के साथ है कि ईरान के नॉर्थ से आ जाए। ये एक चांस है। लेकिन ये 500 का नंबर जिसने भी कहा है उसको कुछ रैशन देना चाहिए कि ये कैसे आया और कैसे सारी दुनिया की आंखों से बच के पहुंच गए। और फिर चाइना के रास्ते चाइना
से आना पॉसिबल नहीं है। इतनी बड़ी तादाद में नंबर्स का। ये एक ही तरीका है कि या तो रशिया से आए जो झील है कैस्पियन ओशमी कैस्पियन सी या लेक जो भी आप उसको कहे वहां से जिसके मैप मैंने आपको कई बार दिखाए हैं या फिर ये इस जंग से कुछ पहले आया होगा और खबर अब लीक हुई है इन दोनों में से तो कोई बात हो सकती है। दूसरी बात ये के जब ये इस वक्त अगर ये आया होगा तो आपको और मुझे ढूंढना नहीं पड़ेगा। ये खबर सबके सामने होगी। यह सूरज की तरह
सबके सामने आ जाएगी क्योंकि 500 बस्टिक मिसाइल्स की खबर नहीं छुपाई जा सकती और कोई शख्स एक और बात आप याद रखें अपने ज़हन में रखें कि अगर कोई शख्स कोई खबर देता है इस तरह की जिसके साथ वो कोई रैशन या कन्फर्मेशन या उसका कोई ऐसी लॉजिक नहीं देता कि उस खबर को माना जाए वो खबर थोड़ी मशक होती है। फिर उसको बताना चाहिए कि ये काम कैसे हुआ। चाइना के रास्ते ईरान में 500 नहीं आ सकते किसी सूरत। अच्छा मुर्तजा जुबैर पाकिस्तान मखान कॉरिडोर पर कब्जा क्यों नहीं करता? क्योंकि इससे वस्ती एशिया का
क्योंकि अगर कब्जा कर ले तो इससे वस्ती एशिया का रास्ता खुल जाएगा। अच्छा देखिए कब्जा क्यों नहीं करता? अब उसके जाहिर इसलिए नहीं करता कि ईरान के फिर आप अफगानिस्तान के साथ एक मुस्तकिल वॉर में चले जाए। क्योंकि ये एक ऑक्यूपेशन होगी। और जब आप ऑक्यूपेशन करते हैं तो फिर ऑक्यूपेशन को होल्ड करना होता है। उस होल्ड करने में फिर आपकी फतह या हमेशा के लिए शिकस्त होगी। अगर आपने उस पर कब्जा रखा तो आप उस वक्त तक जब तक दुनिया और वो मुल्क नहीं मान लेता आप काबिज है और अगर आप उसको छोड़ते हैं
तो ये आपकी कंप्लीट शिकस्त है मोराल की भी और आपकी नेशन की भी लिहाजा पाकिस्तान के लिए वाइज ऑप्शन यही है की उसप कब्जा ना करे और अगर करना है खुदा ना खास्ता तो फिर इसकी सेटलमेंट किसी और तरीके से से करनी पड़ेगी और आई डोंट थिंक के हमारे साथ चाइना इस वक्त इस तरह के कोपेशन के लिए तैयार हो आई कैन बी रोंग लेकिन मेरा ख्याल यही है कि इस वक्त चाइना हमें सपोर्ट नहीं करेगा इस तरह के किसी कब्जे के लिए और ये वो अफगानिस्तान का बॉर्डर है बहुत थोड़ा सा सही लेकिन चाइना
के साथ लगता है। लिहाजा ये एक वाइज ऑप्शन है कि हम उस पर कब्जा ना करें। हां वहां पर अपना कंट्रोल जैसे के अपने एलआई ढूंढ ले जो कि वहां आपकी सपोर्ट करें। कोई कॉरिडोर बनाए पीस पीस कॉरिडोर तो कब्जे की जरूरत शायद ना रहे और ना करना चाहिए। वैसे ही अफगान आवाम हमसे बहुत बहुत नाराज रहती है वहां के लोग किसी भी वजह से तो हम एक और उनको ऑप्शन क्यों दे खुद से नाराज हो? अली खटक साबिक इसरली वजीरे आजम ने कहा है कि अगला टारगेट तुर्की है तो क्या तुर्की के पास ईरान
जैसे तुर्की बहुत ताकतवर मुल्क है तुर्की ईरान से कई गुना ताकतवर है लिहाजा इस बात का कोई दूरदूर तक ऑप्शन ऑप्शन नहीं है वो भी एक सिविलाइजेशन है एक साबिक एंपायर है और वो अपना रिजोल्व फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में बहुत अच्छी तरह दिखा चुके हैं कि जब वो वो लड़ते हैं तो फाते ताकतों को भी शिकस्त दे देते हैं सो वो एक हिस्ट्री है एक पूरी जिसको सब जानते हैं और आज उनकी ताकत को भी सब जानते हैं। आपको आपको पता है कि वो नाटो का इस वक्त मेंबर भी है और वो दुनिया के एक
बहुत अहम जगह पर उसकी उसकी जियोग्राफी बेहतरीन जग्राफी में से है कि यूरोप का रास्ता है और एक बहुत बड़ा एक एक पैसेज जो है उसके ऊपर बैठा है। ये मैं आपको बल्कि मैप में आपको दिखाता हूं ताकि आपको बेहतर तौर पे ये बात समझ आएगी। यह अगर आबरा हुस पर है ईरान तो यह देखिए टर्की जो है स्तंभू ये देखिए यह वो पतला सा एक समंदर है पतला सा एक रास्ता है ये देखिए ये गल्फ है जहां पर जो रास्ता है जो ईस्ट को वेस्ट से मिलाता है यहां है ये है टर्की तो जो
कैपेबिलिटी और जो लिवरेज ईरान के पास है टर्की के पास ज्योग्राफिकल लेवरेजेस इकोनमिक लेवरेजेस और मिलिट्री मिलिट्री पावर उससे बहुत ही ज्यादा है। बहुत ही ज्यादा है और टर्की जो है ये बिल्कुल इसराइल के ऊपर है। बिल्कुल बीच में सिर्फ सिर्फ थोड़ा सा लिबरान का एरिया है थोड़ा सा सीरिया का और टर्की लाइफ लाइन भी है इसराइल के लिए क्योंकि इसराइल का बहुत उसका मेजर पोर्शन ऑफ ऑल जो उसका फ्यूल है जो के अज़र भाईजान से आता है वो टर्की के रास्ते आता है। आई थिंक एक क्वेश्चन और लेते हैं। शकूर साहब अच्छा दो लिख
दिए जना साहब। हुसैन साहब दो लिख दिए आपने। नो इसके नीचे तो नहीं है। ओके शकूर साहब आपके ख्याल में जंग कब तक बंद हो सकती है? कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि डोन्ड ट्रंप जंग छोड़कर जा सकते हैं। लेकिन उनके पास ये ऑप्शन नहीं है क्योंकि इस ऑप्शन को लेने का मतलब ये है कि वो अपनी 13 प्लस मिलिट्री बेसिस दोबारा रिवाइव पहली पोजीशन पर नहीं कर सकेंगे। उनको उनको रिवाइव करने के लिए या इनको एक मुकम्मल जीत चाहिए। यानी ईरान को मुकम्मल शिकस्त देना होगी या कोई डील करना होगी। दोनों का ऑप्शन मुझे
करीब करीब कहीं नजर नहीं आ रहा। कहीं दूरदूर तक नजर नहीं आ रहा। सो अफसोसनाक बात है लेकिन इस जंग का इख्तताम अभी सामने नहीं है। जब इसकी स्लाइटेस्ट होप नजर आएगी तो उस दिन मैं वीडियो स्टार्ट ही यहां से करूंगा कि ये होप हमें नजर आ रही है। अफीफा का क्वेश्चन है। पाकिस्तान अपनी ऑयल सप्लाई लाइन बाहर क्यों नहीं रख पा रहा? हालांकि सदिया भी एक रास्ते से भेज रहा है और ईरान भी जहाज को जाहिर है वो उस नंबर्स में नहीं है जिसमें पाकिस्तान के पास पहले ऑयल आ रहा था उससे बहुत कम
है और उसके बाद रिजर्व आपके पास एक एक ऑलमोस्ट एक मंथ के है तो और फिर जो आ रहा है वो बहुत तवील एक साथ में आ रहा है उस तसलसुल से नहीं आ रहा जैसे पहले आ रहा था अभी वहां पर सैकड़ों जहाज ऐसे ऐसे फसे हैं जिनमें पाकिस्तान का सामान है दोनों तरफ रेड सी में भी और परर्शियन में भी जिन्होंने पाकिस्तान से होकर जाना है और फिर वो है जो यहां से वापस जाएंगे और फिर आएंगे क्योंकि कंटेनर्स शिप्स है ना वो तो वो उनका उनकी एक सप्लाई चेन है जो कि बुरी
तरह से मुतासिर है तो अगर एक दिन में 20 आ रहे हैं या 50 आ रहे है तो ये तो उसका नंबर नहीं था यहां तो सैकड़ों में था नंबर तो लिहाजा वो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन मुतासिर है सिर्फ पाकिस्तान की नहीं है पर हम आज का इ्तताम करते है बहुत शुक्रिया और इस उम्मीद के साथ की ये जंग जल्दी खत्म होगी और पाकिस्तान खुश खुशहाल मुल्क बनेगा और जो मिडिल ईस्ट में और गल्फ में जो हमारे पांच फाइव मिलियन लोग हैं जैसे जंग खत्म होगी वो वापस जाएंगे ताकि उनका रोजगार मुतासिर ना हो
और पाकिस्तान की जो एक्सपर्ट्स मदद करते हैं फॉरेन रेमिटेंस से उसको हम बचा पाए। शुक्रिया।