कि अ [संगीत] ए रुक नारायण नारायण नारायण नारायण है अरे ओ मोस थे रियल ओम ओम कर दो थे रियल ओम ओम [संगीत] कि जन्माष्टमी की का जन्म क्या है एक अव्यक्त वस्तु का व्यक्ति होना उसको बोलते जन्म मां-बाप में बच्चा छुपा था प्रगट हो गया हो गया जन्म और दिखने वाला बुड्ढा अब अदृश्य हो गया हो गई मृत्यु वास्तव में अदृश्य है वह मरा नहीं कि पृथ्वी पृथ्वी में जल जल में तेज में वायु में आकाश आकाश में पानी भूत हार देवात्मा अपनी महिमा में अपने कर्मों में है तो अव्यक्त को व्यक्त होना ऐसी
का नाम जन्म है अब अज्ञात व्यक्ति होते दो प्रकार से एक तो जीव अव्यक्त है व्यक्ति होता है तो उसका जन्म माना जाता है और जो परब्रह्म परमात्मा है अव्यक्त व्यक्ति होते हैं तो उसका अवतार माना जाता है तो जो माया उपाधि में सहित अन्य व्यक्ति होता है है उसको भूलते अवतार अवतार भी कई प्रकार के होते नित्य उतारने में टिकाव तार आवेशावतार प्रवेश अवतार है [संगीत] कि कोई तार होते तो चैतन्य उसमें अवतरित होता है नित्य अवतार संतों का माना जाता है जो छुपा हुआ ब्रह्मा चैतन्य परमात्मा साधन भजन गुरु कृपा से उनके अंतःकरण
में अवतरित हो गए हो हां कभी कभी ये कभी ना कभी शंकराचार्य का भी है श्री रामानुजाचार्य ही आदि तो यह नित्य अवतार माना जाता है संतों का और कंस को रावण को नियमित करके जो अवतरित होता है उसको नैमित्तिक अवतार माना जाता है है और हम सब कर्म करते तो कभी कभी सच्चिदानंद परमात्मा की सच्ची और दिव्य प्रेरणा होती है उसको प्रेरणा अवतार माना जाता है कभी-कभी आप सोच भी नहीं सकते हैं सीधी में प्रणव तीव्र सच्चा ही होता है तो प्रेरणा अवतार है और फिर अर्चना अवतार होता है आप जिस देवी देवता कि
भगवान की मूर्ति का अर्चना करते अर्चना करते करते एक आकार हो गया एकलव्य पुष्पेंद्र पुत्र चेतना का अवतरण हो गया अ अर्जुन से भी धनुर्विद्या में आगे निकल गए लव यू इसको बोलते अर्चना गुप्ता अपने गुरु की अर्चना कर रहा था प्रणाव लॉर्ड कृष्ण अवतार आवेश अवतार ने से पहुंच को बहुत दुख मिला है है तो भगवान नृसिंह रूप में आवेश अवतार से प्रकट हुए और द्रोपदी को बाहर के शहरों से सुरक्षा नहीं देखी तो वह आपके सारे सहारे छोड़कर द्वारिका द्वारिका बोले तब वह द्वारिका अमित देश अवतरित तो गैस साड़ियों दुशासन ने द्रौपदी की
साड़ियां खींचता व्याख्या हाथों का सबल था कि थक जाता है और वह तो बेचारे को कि खड़ी की नाईं फैमिली और वह कि जा रहा है यह नारी है कि नारी है कि नारी साड़ी है तेरे बाप का अवतार है तो मनुष्य जीवन कितना ऊंचा भगवान् का अवतरण करा सकता है मैं अपनी बुद्धि में भगवान् का अवतरण अपने अंतःकरण में भगवान् का अवतरण अपने स्वामी भगवान का अवतरण हो गया तो फिर साक्षात्कार हो जाता है निष्काम कर्म करते हो तो कर्म में भगवान् का अवतरण होता है जैसे गांधी जी कार्य होने लगा अंग्रेजों भारत छोड़ो
इतना शासन और अकेला इतना खफा कुटिलता और साम-दाम-दंड-भेद की नीति में कुशल हाय से अंग्रेजों को गांधी जी बोलते हैं कि अंग्रेज भारत छोड़ो कितना सांस होगा यह कर्म अवतार निष्काम भाव से कर्म करते तो भगवान की चेतना उतर जाता है कि गांधी जी को रोकने समझाने से टूटने वाले और उम्र में का पितरों गवर्नमेंट के विद्रूप गांधी जी की निंदा करने वालों की कमी नहीं थी लेकिन भगवत अवतरण पूरा गांधी जी सफल हो गए थे हुआ है और नित्य अवतार नैमित्तिक अवतार हाय कई प्रकार के अवतार होते आप मनुष्य को दुख तीन बातों से
होता है तो खान से दुख होता है हुआ है मैं मथुरा के लोग दुखी होते और यह नगर ही यह संसार ही मथुरा है कंठ से दुख होता है काल से दुख होता है और अज्ञान से दुख होता है कि कंस की दो अवस्थाएं होती है ए टोबो ही अवस्था में में हरेक आभ्यंतर अवस्था ऐसे कॉल की थी 13 अवस्था होती है कि श्रीकृष्णावतार मतलब आपके हृदय में व्रत Avatar कैसे हो यह जन्माष्टमी का पर्व सत्संग के द्वारा तुम्हारे हृदय में कृष्ण अवतार कराना चाहता है कितना हमारा सोभाग्य श्रीकृष्ण का नाम का अर्थ क्या पता
है और शक्ति आपको क्रश अधि ए लिटिल कृष्णा जो कर्षित कर दे आकर्षित कर दे आनंदित करते उसको कृष्ण मूर्ति आप सुख और आनंद से आकर्षित होते हैं हर जहां सूखे इस जिसमें सुख होता है उस अवस्था से आप आकर्षित होते हर उस परिस्थिति सीधे पीर आप आनंदित होते हैं लेकिन यह भाई अवतार आकर्षित आकर्षित कर आनंदित होने वाला है अ कृष्ण का वास्तविक स्वरूप सत्संग से समझ में आ जाए तो की बंसी बजाते आकर्षित होकर चित्तौड़ थे और फिर अब अंश भक्ति और कुछ लीला करते आनंदित होते हैं ऐसा हो कि बदल जाता है
लेकिन कृष्ण का तात्विक अवतार जैसे अर्जुन के अंतःकरण में हुआ तो अर्जुन सदा के लिए बाहर हो गए किसी जिस जिस को पी के अंतर्गत में कृष्ण का तात्विक अवतरण महर्षि दूसरी प्रश्न देखते हैं का दिने दिने नाम नाम दाणी नमामि नंदा नंदनम दिने-दिने नवम नाम आनंद आनंद आनंद अम्म अ कि वह आनंद स्वरूप नंदनंदन दीनदयाल आनंद सूर्य पुराणपुरुषोत्तम है लेकिन हर रोज सूर्य नया उमंग लाता है ने यह लगता है उसके दर्शन से उसको जल अर्पण करने से नई स्फूर्ति नया लाभ होता है चंदा पुराणपुरुषोत्तम है लेकिन घरों चंदा नया-नया सुहावना सुंदर और हद
लेफ्ट ऐसे वह परमात्मा आत्मा होकर अनादिकाल से बैठ लेकिन न जाने किस-किस निमिष हार समय नया-नया आनंद नया उत्साह नए-नए उमंग उसी के झंडों से आते तो यह जेलों से जो आनंद आता है उसमे कि माया का अविद्या का मिश्रण है वे केंद्र में का पूर्ण ज्ञान से जो आनंद आया है पूर्ण प्रेम से जो आनंद आ जाए हर कोई अपना स्वरूप दिखे इसको बोलते साक्षात्कार आ आ है तो हम कान से फंसे हैं काल से फंसे हैं अज्ञान से फंसे हैं और इनको निवृत्त करने के लिए कृष्ण अवतार चाहिए योग दर्शन में व्यास जी
ने कहा था है ना नु पा ल य भूतानि भोगना संभव होती है मैं कितना भी कि कुछ मिल जाए पेट ना भरे दूसरे का जो होना वाला हो लेकिन मेरे को भोग मिले मेरे को यश मिले मेरे को पद मिले सब कुछ मैं ही मैं हूं इसी का नाम है कंसल यहां तक कि ग्वाल-गोपियां अपने बच्चों को मक्खन नहीं दे सकती कंस इतना टैक्स बचा हुआ था कानून के मक्खन ठहरोगे इस साम्राज्य में भरपाई करो फोन समाना अपने भूख के लिए अपनी सफलता के लिए अपने अहंता के लिए लिए कुछ भी करने को तैयार
हैं यह है कंस और कृष्ण का अवतार है लोगों के लिए सभी के लिए मंगलमय मंगल खबर मंगल आनंद मंगल माधुरी जगाने के लिए चाहे कुछ भी करना पड़े इसका नाम है कृष्णा बहुजन हिताय बहुजन सुखाय आया बहुजन के विकास के लिए चाहे नंद बाबा का बेटा बनना पड़े वसुदेव चैनल श्रवण ना किसी रूप में किसी और बाप का बेटा ना हो जाए आरोप लगे हैं कुछ गंदगी और फिर भी लोग मांग करते रहे हैं यह संत अवतरण और श्री कृष्णा तरफ अंतर है कि कल जन्माष्टमी का फायदा उठा इसलिए आज बता देता हूं कि
पाप मुक्ति के लिए और तिल मिश्रित जल से कल स्नान कर सको तो अच्छा है का गोबर लीप कर अपने शरीर को मल कर स्नान कर सको तो अच्छा है goals learn गौ मूत्र शरीर को रगड़ के स्नान कर सको तो उस पुष्टि दायक पापनाशक होगा अ है तो गुरु तीर्थं परम ज्ञान अन अ तीर्थं न विद्यते ज्ञान न तीर्थं परम तीर्थं ब्रह्म तीर्थं सनातनम ध्यान दे रहे हैं आप बहुत ऊंची बात सुनने को मिल रही है कि गुरु रोटी तीर्थ है मुझे लीलाशाह बापू तीर्थ में जानने को मिला तो सारे तीर्थ मेरे सफल होंगे
फिर मैं तीर्थों में नहीं बैठा था कि ब्रह्म ज्ञान देने वाले ग्रुप इस मिल गए तो मेरे सारे तीर्थ सफल हो गए थे कि गुरु प्रसाद गुरु ज्ञान ग्रुप में भक्ताे साधना रूपी मंदिर मिल गया तो मेरा सब मंदिरों में जाना सफल हो गये अब अंधेरों में मैंने जाता था कि गुरु पी तीर्थ से परमात्मा का ज्ञान प्राप्त होता है इसलिए इससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है ज्ञानतीर्थ सर्वश्रेष्ठ है और ब्रह्मातीर्थ सनातन है यह जो सूंड है वह ज्ञानतीर्थ और जिसमें बुध पहुंचेंगे वह ब्रह्मातीर्थ सनातन है कि तुम कंस के दूर रूप एक तो देख
लें और खपड़े खपड़े खपड़े खपड़े खपड़े में खप जाए और दूसरे का चाहे कुछ भी हो जाए ध्यान न दें प्रभुका अंश का हैं स्थूल रुपए है हुआ है है दूसरा है कि कंस कातिल कि सूक्ष्म रूप में धनवान हु में इस सप्ताह वाहन मेरा राज्य मेरा वैभव मुझसे बड़ा कोई अंदर में भाव होता है ऐसे आज काल इस काल के तीन भेद होते हैं का काल माना यह कलयुग का काल है इसके तीन स्थान है एक तो समय कल जोकर समय दूसरा वस्तुओं आज काल अमुक-अमुक वस्तुओं में होता है अमुक-अमुक समय में अमुक अमुक
वस्तु ने अमुक अमुक स्थान में व्यक्ति दुख बात है यह शराब कांड है वैशाख रहा है झगड़ा करने वाले लोगों का संग्रह है दूषित काल है प्रदोष काल है तो उस काल में व्यक्ति पीड़ा पाता है दुख पाता है वस्तुओं से व्यक्ति देख पाता है जैसे शराब है कब है और दूसरी भी हानि पहुंचाने वाली व्यसन फैशन आने क्रेडिट कार्ड आदि ले लिया और बाय करो खरीदों खरीदो फिर दुख पाता है अ के पास प्रॉब्लम है खा लिया तू खा लिया लेकिन अब आगे चलकर क्या बीमारी होगी खड़े-खड़े खूब नाचे खूब मिर्च और फिर ठंडा
पिया पैरों की बेडियां दर्द करेंगी उकाल करके दुख है मैं का रुख अभी तो कभी है लेकिन समय पाकर दुख होगा अभी तो नींद आ कर ली सुन ली लेकिन समय पाकर अशांति होगी दुखों बैनर को में पढेंगे आपस में लड़ेंगे ऊपर होगा अ हुआ है है तो वस्तु का स्थान और समय हैं तीसरा उपाय है अंजनी अधिक एक तो कंस का दुख दूसरा काल का दुख कल के दिन मिलोगे तीसरा है अज्ञान का दुख ज्ञान क्या है कि हम जो है उसको हम नहीं जानते और हम जो नहीं है उसको मैं मानते हैं है
तो आज्ञानुसार मृतम यौन उत्तेजना मोहंती रंधावा रस्सी को हम नहीं जानते मामलों एक मनुष्य है उसने दारू पी लिया है कि आप अपने को भीख मंगवा मानता है यहां अपने को कुंठित भंगेड़ी घोषित करता है कि आपने को पशु मानता है तो अपने उसने अपनी मनुष्यता भूल गया है और पशुता का आरोग्य ऐसे हम अपने चैतन्य स्वभाव को भूल गए और शरीर को मैं मानने लगे और शरीर की सुविधा में अपने को सूखी मानते आज सुविधा में अपने को दुखी मानते लेकिन यह पता नहीं कि सुख और दुख आता है फिर भी अपन तो जो
कहते रहते हैं कि ने बचपन आए कितनी मृत्यु आई कितने जन्म आए और बह है तो अपन नित्य है चैतन्य है शाश्वत है अमर है इस बात को न जानना ही अज्ञान है और फिर उसे उल्टा ज्ञान हो गया जिस शरीर में हुए उसी के कर्म और उसी का व्यवहार सच्चा मार्ग तो धन से छुटकारा कलयुग से कार से छुटकारा और अज्ञान से छुटकारा ही यह है कृष्ण अवतार का उद्देश्य है जो तु श्री कृष्ण कंस को तुम मारते हैं और सुना होगा भागवत में कंस को श्रीकृष्ण मारते हैं हुआ है आज काल से अपने
भक्तों की रक्षा करते और ज्ञान से अज्ञान हर के भक्तों को ब्रह्म ज्ञान देते हैं यह कृष्ण अवतार है [प्रशंसा] कि जिस वस्तु के लिए जो प्रबल प्रमाण है वहीं माना जाता है अब मेरे को कुछ देखना है तो आंख प्रमाण है मेरे देखने में कान प्रमाण नहीं होगा नाक जी व्यास त्वचा प्रमाण नहीं होगी देखना है तो सबल प्रमाण आंख अगर सुंगना है तो नाम है अगर सुनना है तो इसका आवाज दुकान है आंख से इसका आवाज नहीं सुनाई पड़ेगा नाक से इसका आवाज नहीं सुनाई पड़ेगा ना कि अगर इसका स्वाद चखना है गुलाब
का तो इसका प्रमाण नाक आंख कान नहीं हो सकते जीव इसका प्रमाण केवल आपका यह बात इसकी अम्लता और कठोरता देखनी हो तो त्वचा इसका प्रमाण है है है तो ऐसी ओर से ब्रह्म परमात्मा को जानने के लिए आंख माने जा सकते नाक से व परमात्मा कौन सुन नहीं सकते जीव से चकित नहीं सकते हैं को हाथ से छू नहीं सकते अंजाना देश है और अमला पिया है एक अनजाना देश है और अन मिलाकर पिया है तो इसको हम कैसे पहचाने बोले वेदवाक्य प्रमाण वेदों का ज्ञान जिन्होंने पाया है वेद वाक्यों के अनुसार जो हमें
ज्ञान देते हैं वह ही वैदिक ज्ञान प्रमाण है कि अगर गाय भैंस चराने वाला था कोई राजनेता मुझे उपदेश देता तो मुझे परमात्मा प्राप्ति संभव नहीं है कि अगर जनक को जन अधिकार न कोई विघ्न के पदाधिकारियों प्रदेश नेता तो जन्नत को ज्ञान नहीं होता लेकिन वे ब्राह्मण से जिनको आत्मानुभव वह अगले जन्म के गुरूप्रसाद शर्मा के घर में प्रगट हो गया ऐसे 12 साल के अष्टावक्र कुरूप शरीर से लेकिन अंदर परम सौंदर्य था ज्ञान परम संधिकाल के सिर पर पैर रखने का और परम संधा खंगार उपयोग वासना रूपी कंस को पहुंचाने वाला तो अष्टावक्र
भी एक व्यक्ति हैं जब एक व्यक्ति है बाहर से दिखता है लेकिन जनक है तब तक व्यक्ति जब तक अष्टावक्र की कृपा नहीं मिली जनक को अष्टावक्र की कृपा मिली तो जन्नत का व्यक्तित्व कि जैसे लहर का व्यक्तित्व समुद्र में मिल गया घड़े का घटाता संगठन कौशल तो महाकाश में मिल गया ऐसे अष्टावक्र गुरु की कृपा से जन्नत का आम का व्यक्तित्व हम जन्म विकसित ऊपर ऊपर से रहा लेकिन अंदर से गुरु के ज्ञान से उसका व्यक्तित्व ब्रह्म में विलीन हो गया तो जनक जीवन मुक्त हो गए जीवन्मुक्त कैसे कहते हैं धोखा है लेकिन दुखी
मैं हूं इससे वह बाहर हो सुखाय मैं सुखी हूं उससे व्यापार हो गए चिंता हुई और मैं चिंतित उससे व्यापार हो गए तो चिंता से दुख से सूख से अशांतियों से पार होकर अपने परमात्मा स्वभाव में जो पहुंचते हैं उन अपने जीवन धन्य हो जाता है और मनुष्य जीवन में यह ही उपलब्धि है कुछ भी बाहर का उपलब्ध हो अगर इस उपलब्धि को छोड़ दिया भूल गए तो यह सारी उपलब्ध यही रहते हुए जाती हैं कि राजे-महाराजे बेचारे फिर छोटी-छोटी योनियों में जन्म लेते हैं सुना शास्त्रों में कई होंगे जीवन में अगले जनम की वार्ता
सुनाई पड़ती है तो क्या करना है कि अपना उद्देश्य बना लें और कि कृष्ण अवतार ओ ओ कि हमारे अंतःकरण में भागवत अवतार हो भगवत ज्ञान का प्रकाश भगवत्सुख का प्रकाश शुरू हो है तो भगवता कार्यवृत्ति पैदा होगी जैसे घटा कार रुकती से घट घट देखता है कि हीरो मालाकार प्रति बनेगी तब रोमांच दिखेगा है है ऐसे ही भगवदाकार वृत्ति बनेगी ब्रह्माकार वृत्ति बनेंगे तब अपना ब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार होता है इसलिए ब्रह्म ज्ञान का सुनना सत्संग में ब्रह्म ज्ञान का मनन करना और ब्रह्म ज्ञान में विश्रांति पाना तो भागवत ज्ञान भगवत्प्रेम और भगवत विश्रांति
सारे दुखों को सदा के लिए उखाड़ कर रख देते फिर बाहर से दुख के समय दुखी जैसा दिखेगा सूखे समय सूखी जैसा दिखेगा लेकिन अंदर अनुभव पूर्ण i-day भाई लक्ष्मण और राम जी दिखे लेकिन अंदर से राम जी जानते कि अंतःकरण का खेल है कि व सिद्ध योगा क्या है जहां कृष्ण अवतार होता है देव की क्या है वह सुखमय हो कि निर्मल अंतःकरण में भगवान विश्वास करते अवश्य देवें है है और निर्मल बुद्धि ईश्वर को धन्यवाद देने वाली विपत्ति यशोदा यादव की जो जो कुछ भला यह बढ़िया है यशोदा प्रभु वापस आया तो हमारा
अंधकार मिटाने वासना मिटाने के लिए बेचता है वह प्रभु सुइयां तो हमें उदार बनाने के लिए सुविधाएं देता है वह आप जो भगवान को धन्यवाद देते हुए हर परिस्थिति का सदुपयोग करें है कि महादेव की है यशोदा है आज शुद्धता खड़े वासुदेव है अथवा नंदी बाबा नंद घर आनंद सवायो स्वभाव के अंतर्मन में अंदर का आनंद आता है निंदक भाव में आनंद नहीं आएगा श्रीकृष्ण को शुद्ध वाले ग्वाल-गोपियां और वक्त देखते तो आनंदित हो जाते हैं लेकिन कंस के पट्ठे देखते हैं तो नाराज हो जाते यह क्या बंसी बजाना यह क्या गाय चराना कृष्ण इनसे
तो अच्छे हम अ मैं तो परेशान हो रहे हैं शकुनी कृष्ण को देखकर आनंदित नहीं होता दुर्योधन श्री कृष्ण का दर्शन करके आल्हादित नहीं होता लेकिन सुदामा और पौधों श्री कृष्ण का दर्शन करके आनंदित होते आल्हादित होते और पूर्ण तक की यात्रा भी कर लेते कृष्ण दुबई के वह है जो मनुष्य में जो आपने आत्मा का ज्ञान है वह वैदिक ज्ञान से मिटता है ये सब तो विशुद्ध मन और वसुदेव अक्षत युद्धम भागवत के चौथे स्कंद तीसरे अध्याय 23 में इस लोक में शुद्ध अंतःकरण वसुदेव-देवकी ए सर्वे देवता हां दस मास के अंदर पहला अध्याय
के छप्पनवें श्लोक देव की सर्व देव मई बुद्धि है देवत्व जिस बुद्धि में प्रकट वासुदेव की माताएं देव की मां बनने से काम नहीं चलेगा अभी अपनी मति को माता महादेव की जय श्री मती बना लो वासुदेव जैसा आकृति बनाकर यहां यूनिफार्म पहन के काम नहीं चलेगा कृष्ण अवतार करना अभी अपने अंतःकरण को भगवत प्राप्ति की इच्छा से शुद्ध बना दो तो अपने अंतः कोणों और अपनी बुद्धि को वासुदेव और देवकी बना लो तो आपके अंतर्मन में भगवान कृष्ण का अवतरण हो जाएगा और वासना का हम मर गए का या कंस को ही अंतर्यामी परमात्मा
तत्व मारवाड़ का यह अपने कपड़े खबर यार मैं यह ऊंचाई दूसरे का जो कुछ रोए ऐसी जो दूर वासना है वह मिट जाएगी है के अंधेरे को मिटाने तो प्रकाश चाहिए गरीबी को मिटाना है तो धन चाहिए है लेकिन प्रधान को मिटाना है तो ज्ञान चाहिए दुखों को मिटाना है तो दुख हारी हरी की प्रीति हरे का ज्ञान हरिप्रसाद अनुभव करने वाली मति चाहिए घुमती मार्केट में नहीं बनती है काम धंधे करने से वह मत ही नहीं बनती है जो सत्संग से मति बनती है कि हम अगर सत्संग में नहीं होते गुरु जी के चरणों
में सत्संग नहीं सुनते और सत्संग का विचार नहीं करते तो हमारी अनुमति पर हमारा तक ऐसा नहीं बनता है है इसलिए बार-बार याद दिलाता हूं कि सब काम छोड़कर भोजन कर ले हजार काम छोड़कर स्नान कर ले लाख काम छोड़कर सब कर्म और दान-पुण्य करने और कुंठित व्यक्ति द्वारा हरि भज ले हरी का ज्ञान और हरी घास बधाइयां को टिकट वाली बजे तो लहरी का ज्ञान और के बयान से क्या हो जाएगा अरे क्या बाकी बड़े सुधार स्थाई सुधार समाज के उन महापुरुषों के द्वारा हुए जिन्होंने आ आपाधापी छोड़कर यह सत्संग सुनाओ के एकांत में
उसका मनन निदिध्यासन क्या बुध सात वर्ष एकांत में नहीं गुजार थे तो बुद्धत्व का खजाना दुनिया को नहीं मिलता महावीर एकांत बयान में नहीं गुजार थे तो जैन धर्म को महावीर महापुरुष टाइम है ऐसे मेरे लीलाशाह प्रभुजी एकांत में नहीं रहते तो आसुमल को आसाराम नहीं बनने का मौका मिलता मैं एकांत में नहीं रहता है सात वर्ष तो आसुमल से आसाराम नहीं हुई तो आप अपने घर में एक ऐसा कैमरा बना लीजिए और कुछ घंटे एकांत में मिठाई कभी-कभी कुछ दिन एकांत में मिठाई समझो शनिवार रात को आप उस कमरे में गए अथवा रविवार सुबह
को और सोमवार सुबह निकलूंगा तो कि इधर-उधर की बातों का संपर्क ना रहे इसलिए फोन और यह समाचार देने वाली TV दूर रहे और आप फिर कि सत्संग देने वाली TV तो जरूर हैं उसे तो बारे में रहेगा लेकिन दूसरा जो मन को विकसित करते तो फिर आप अपना जो गुरु ने साधन बताया है अगर नहीं बताया तो इस उन बिलों जिस भगवान को मानते हुए उसके सामने दिया जला दो कि दिया चलाओगे तो आप के संकल्प को व्यापक होने में मदद मिलेगी तो जैसे वस्तु धरती में जाती है बीच धरती में जाता है तो
कई गुना हो जाता है अगर पानी में मिला हो तो वह ज्यादा व्यापक होता है लेकिन उसी वस्तु को जब अग्नि का संपर्क होता है तो उस कि उसका प्रभाव दूर तक जाता है जरा सा जीरा राई मीठी क्यों बघार रूपी अग्नि का संग मिलता तो कितने स्प्रेड होता है ऐसे मंत्र द्विज अपडेट समय ध्यान करते समय भगवान की पूजा करते समय है जो धूप दीप भक्त हम करते हैं तो ऐसा ने कि भगवान जरा राजी हो जाए भगवान खुश हो जाएं भगवान को मस्का भरने के लिए धूप दीप नहीं है और भगवान आपके धूप-दीप
के भूखे भी नहीं है और भगवान के यहां अंधेरा भी नहीं है और दुर्गंध भी नहीं है दुर्गंध होती बाथरूम में तो लोग कई गंदी-गंदी केमिकल रखते हैं दुर्गंध आती लेकिन वह केमिकल तो नुकसान करती हैं कि पिछले को धारण से बाथरूम साफ करना तो ठीक है बाकी केमिकल से दुर्गंध मिटाना तो दूसरी अगर दिलाना है है तो सुगंधिम पुष्टिवर्धनम जैसे फूलों की सुगंध है अपने बयान के कमरे में रखे तुलसी की गंध है यह ज्ञान तंतुओं को पोस्ट भर दिया जला दिया धूपबत्ती सात्विक कर दी गाय के गोबर का कंडा काहे धूप कर दिया
जरा सा पानी की बूंदें लगा कर दो में आए छोटी सी चम्मच गाय के गोबर के कंडे पर अगर धीरे-धीरे बूंदे वह कि आपने वह धूप आए तो एक टर्न जीवनी शक्ति देने वाला बलवान प्राणवायु बनता है और हो सके तो इसका फायदा उठाना सबसे उत्तम भोजन क्या है कि शुद्ध वायु और यह गाय के कंधे पर गाय के घी का धूप इससे बढ़कर शुद्ध और शक्तिशाली कोई भोजन नहीं है 128 लेट्रिन बाथरूम वाले कमरे में तो बहुत कमजोर भोजन मिलता है मनुस्मृति को शरीर को के अंदर कमरे में शुद्ध होती रहे और उसमें भी
कभी-कभी यह दो होता है तो आप जाकर रूम में संसार-व्यवहार ना हो अरे कमरा ना रख दिया जाए ध्यान भजन के लिए वहां भगवान के सामने दिया जलाओ और प्राणायाम करके हरिओम की लंबी धर्म करो तो हरी और आखिरी महंगा मां उसके बीच आपका मन संकल्प-विकल्प रही दुर्गा अंतकरण वसुदेव बनने लगेगा अब जयराम बोलना पड़ेगा जो भी घरों में प्रदेशों में देख रहे हैं सुनना है को तो अंधा कानून बनेगा वासुदेव अथवा नंदबाबा और फिर आंखों की पलकें ना गिरे तो अच्छी तो हरकत नहीं लेकिन आंख की पुतली दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे नए डायरेक्टर कि भगवान
में अथवा दिए महत्व किसी चीज में लगी कम से कम 6 मिनट तक तो एक ट्रैक्टर देखो फिर जितना बढ़ा सकते हो तो आपकी मत कि देव की बन जाएगी आपकी मत यशोदा बन जाएगी और आपके अंतः करण में और मति में कृष्ण अवतार उन्हें को राज्य बुलाएगा बिल्कुल बकवास भूतकाल में जाओ मैं नहीं चाहता हूं और भविष्य के लिए ज्यादा इंतजार करो मेरे वश का नहीं आप तो वर्तमान में वसुदेव-देवकी को को तैयार कर लो अंत तक अवधि को और कृष्ण का अवतरण दही में मक्खन लगाकर नहीं डाला जाता है थोड़ा मक्खन के पास
ही नहीं ले जाते हुए दही मक्खन प्रगट होता है ऐसे तुम में से ही परमात्मा प्रकट होता है ला ला लिया देवियां [संगीत] ब्राह्मी स्थिति प्राप्त कर कार्य रहे ना शेष श्री गुरुवर की आ जाएंगे इस जय हिंद कि [संगीत] मीडिया पूजा लुट कि [प्रशंसा] भाड़ में कि गैर के जाणा कि व्यवहार सुकोमल से आसाराम हो सकते हैं तो फिर जीवात्मा माहिम भाई अपने अंतर्मन को बासमल अपने अंतर्मन को वसुदेव बना सकते हैं अपनी बुद्धि को देव की मां यशोदा बना सकते तो तुम क्यों नहीं बना सकते हैं राम जी बोलना पड़ेगा लिया नारायण नारायण
हरि ओम नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण तो चलो फिर गीता के चौथे अध्याय के करीब जाते हैं चौथे अध्याय का 17 वां श्लोक भगवान कहते जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्व तरह त्याग एवं पुनर्जन्म नेटिव मय थिस वर्जन आफ अर्जुन मेरा जन्म दिव्या है साधारण जीव कर्म बंधन से वासना बंधन से जन्म लेता है और सुख लेने की लार अच्छे कर्मों को है लेकिन भगवान और भगवत्प्राप्त महापुरुषों जो कारक पुष्प चढ़ाते हैं है तो कर्म बंधन से नहीं आते करुणा से आते हैं ही समाज का उत्थान उन्नति करने को आदि इनको नित्य अवतार
कहते हैं से उच्च कोटि के संत बाहर डिग्री ना हो लेकिन फिर भी तुकाराम महाराज को हजारों लोग मानते सुनते ही डिग्री नहीं है सर्टिफिकेट नहीं और कबीर जी को हजारों लाखों लोग जानते मानते अभी करोड़ों-करोड़ों ऐसे महापुरुषों का जन्म और कर्म दिव्य हो जाता है है हाई नीस कबीर जी के जीवन में नाटक जी के लीलाशाह बापू जी के जीवन में और भी कारक पुरुष महापुरुषों के जीवन में उनके कर्मों की ओर जन्म की दिखा देता हूं में भक्तों को महसूस होती है हुआ है है तो भगवान के जन्म को और कर्म को जो
दिव्या जानता है उसका जन्म और कर्म भी दिव्य हो जाता है ऐसा भगवान कहते हैं लोग स्वागत जान लो अपने आप पर बाप का क्या बिगड़ता है कि भगवान का जन्म दिव्या है ऐसा दृढ़ता से मान लो क्योंकि भगवान अपने सुख के लिए अपने भले के लिए अपने कर्म बंधन से नहीं आए हैं ऐसे ही आपका आत्मा भी कर्म बंधन से नहीं आया आपका हम कर्म बंधन से आया है आपकी वास मार्कर मदद से आए हम कौर वासना को दूर फ्रेंडों में भगवान का भगवान मेरे तो आपका भी जन्म कर्म दिव्या होने लग जाएगा ने
भाई साहब जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्व अर्थात दृढ़ता से मानते हैं यह त्यौहार एवं पुनर्जन्म व श्राद्ध छोड़ने के बाद नीच योनि में पुनर्जन्म में नहीं चाहेगा इस का जन्मदिवस है उसी को पाए जिसके कर्म दिव्य है उसी परमेश्वर को पावर मुक्तात्मा हो जाएगा लाइव अलोन बट मालदार अपंग हुए भी तो मन मन का उसकी माला है आपका मन माला बन जाएगा तनुष्का एक शिवाला है जब देखो भोला भाला है हम तक निर्दोष विधायक और पति में आ जा सोढा हो जाए कि वह प्रभु जू आंवला इतना बड़ा अ है वातरोग नया
वड़े हावड़ा हावड़ा वाह वाह प्रभु तो कल सु देता है काल दुख देता है अज्ञान दुख देता है तो ज्ञान मिटा ज्ञान से हरबंस के साथ की दोस्ती मिटानी है तो कृष्ण का आह्वान काल के प्रभाव से बचना तो अंत तक अनुमति को ऐसा अभिनव के काल का प्रभाव न पड़े समय का प्रभाव न पड़े वस्तु का प्रभाव न पड़े कष्ट का प्रभाव पड़े साक्षी चैतन्य का प्रभाव ईमानदारी का प्रभाव गांधी जी को कितने लोग मिलेंगे तुमको बिसरा बना दे तुमको यह डेढ-डेढ तुम्हारा नाम हो जाएगा लेकिन गांधी जी पर लांच रिश्वत का प्रभाव नहीं
पड़ा का प्रभाव नहीं पड़ा अंग्रेज लोग शोषण करते देशवासियों को विचारों को दुखी कर है ऐसे कंस कि प्रजा को शोषण करते मैं बड़ा में बड़ा तस्वीर कृष्ण माखन चोर कंपनी बनाई और घर घर का मेंबर रखा था हमारे घर में बलों ना हो रहा है वह आर्मी कंस के पास जाएगा उसके पहले अध्यापन दारुडा पाते इक्वल गोपी अरे गोपी बड़ी चंद्र थी प्रभावती यह कृष्ण पकड़ में नहीं आते हैं मैं तो कृष्ण को पकड़ो घी अर्थात जगत में व्यवहार में कुशल बुद्धि प्रभावटी मुंबई डाइज पाता लुटी खड़े हो कुछ तो बोलो ना करके मक्खन
तैयार क्या चीज़ है मेरा हर बेटे को बोला के जाकर बोलते हैं हमारे घर में हुआ लोन हुआ अ चारों तरफ रस्सियां बांध के उसमें घंटे लगाकर किसी के घर में छुपे बैठे हम बच्चे आए कृष्णा ने भी देखा यह तो कावतरा है लेकिन कोई बात नहीं कृष्ण ने अपना दिव्यता का अनुभव दिया नाद ब्रह्म ऋषि को कोई हिला डाला है तो भी मंत्री नहीं बनने चाहिए और जॉर्डन वीटो पावर लेकिन लड़के खड़े हो पर लड़कियों के लड़कों का बाप ने उठाया मटकी में से आज तक तो बंदरों को दूसरों को खिलाकर फिर खाते थे
लेकिन करें कि है क्या पता कि धतूरा मथुरा नगर के एक मकान में जरा देखो आ जा मुसीबत प्रॉब्लम आता है वहां कृष्णा आगे और जहां सफलता और यश मिलता है वह कृष्ण पीछे दूसरों को देते आज क्या होता है या कुर्सी और सफलता होती वहां नेता साहब आगे और जनरेट और कुछ होता है कृष्ण जैसा नेतृत्व बहुत-बहुत मंगल कार्य नो मक्खन जो होठों पर आया तो घंटे लगातार मॉनिटरिंग है कृष्ण दिखाए शब्द ब्रह्म चाहत मेरी आज्ञा का उल्लंघन कैसे करता है मैंने कहा था उन्मत्त बजे घंटे आवाज नहीं होना चाहिए कैसे आवाज हो गया
शब्द ब्रह्म का अधिष्ठाता देवता प्रकट हो गया ऐसा अवतार कराने की ताकत हिंदू धर्म में है दूसरे में जब वह मैंने देखी नहीं सुनी भगवान को साकार प्रगट करना है कि भगवान के आदेश है जो शब्द ब्रह्म का अधिष्ठाता देव प्रकट हो प्रभु मैं आपके आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता हूं कि अब वो लगन राम राया इतना आवाज हुआ प्रभु वेद-शास्त्रों प्रमाण है इसमें कहा गया है कि और समय घंटी बजे बजे जिम हो तो घंटी बजने ही चाहिए मक्खन का भोग लगा लिया था पहुंच गया ठाकुर तो ठाकुर जी का सबके लिए होता
है कि हम कृष्णन को क्या है लेकिन यह घटना परमात्मा की प्राप्ति में साहब के चित्र को कि प्रॉडक्ट करते इसलिए हर वर्ष जन्माष्टमी मनाते और हर वर्ष की जन्माष्टमी अपने आपने है का नवाब बनना है कि नित्य नवीन सूर्य नित्य नवीन चंद्र नित्य नवीन ऐसे जन्माष्टमी का उत्सव नित्य नवीन को कि तमाम इन थम कल सुबह उठना है कि उसने मिट्टी है सत्संग आज संबंधों के जाऊं तिल का उबटन बनाकर स्नान करोगे तो कल के दिन विषबाधा अथवा गाय का गोबर अथवा कि संविधान में ही थोड़ा जॉब मिला दिया ने से भी अनुकूल पड़े
हैं कि घनश्याम देखिए हम अर्थात शोषक तत्वों से हम दुखी है कि शोषक और अहंकार से भरे हुए लोग न जाने कब कप क्या-क्या करवा दे जड़े करवा दे दुकान करवा दे ग्राहक राधे हड़ताल करवा दे क्या-क्या करवाते गांधी के लिए कुर्सी चली इस अब कंस का तरफ से हम किसी की निंदा नहीं करते हैं उनको दो सत्संग करने के लिए व्याख्या करनी पड़ती है है जो भोग से देते समाज के शोषण से बड़ा बनता है समझो कनिष्क रास्ते पर है मैं तो कल से मस्जिद रूखी त्वचा रूखी काल से दुखी और अज्ञान से दुर्भाग्य
अपने असली स्वरूप को नहीं चाहिए इन दिनों के दुख से बचना हो वासुदेव रूबी हैं अब बात और नंद रूबी जी को अपना अंतः करण को उन्नत करना पड़ेगा ऐ है अरुंधति यशोदा रूपी बुद्धि को अथवा देव की बुद्धि को इस दिव्य बनाना पड़ेगा उसी के लिए साधन है मंत्र दीक्षा उसी के लिए प्राणायाम के स्वास्थ्य स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए प्राणायाम अनुलोम-विलोम कुंग फू करो ठीक लेकिन परिणाम हैदर भगवत नाम रख डाल देते हो तो वासुदेव की पोस्ट होते अर्थात अंतर्ग्रहण अनुमति पुष्ट होते शुध्दि तुम्हें जब भी दिशा देता हूं तुम्हें प्रणाम करवाता हूं
और कहता हूं भगवन्नाम-जप शरीर स्वस्थ तो इतना ही नहीं हमारा मन और बुद्धि भी पुश टो का नाम जपत मंगल दिशा-दशा हूं भगवान के नाम से दसों दिशाओं में मंगल होता है मेरे पिता के दोस्त बड़े-बड़े धनाडय लोग थे साधु-संतों के दैवी कार्य में उनका हाथ नहीं बैठा था मेरे पिताजी साधु-संतों के गुरु जी को तो घर पर ही रहते थे कुलगुरु को अगर पर आयोग ने की भी सेवा चाकरी करते थे उस समय थाऊमल बुद्धू लगते थे कितना समय इतना शक्ति हे गुरु के पीछे एक साधु के पीछे गए परशुराम के पीछे लगा रहे
हैं एक ऐसा कुछ होता है ऐसा कुछ होता है ऐसे चतुर लोग तो उनके बेटे कंगालों क कोई ट्रक चला रहा है तो कोई और टो चला रहा है और थर्मल का बेटा बापू करें हम सत्संग कर रहे दुनिया जानती है [प्रशंसा] कि आप शुरू करते हैं तो आपके बेटों और पोतों और परपोतों तक साथ वीडियो तक उसके शुभ प्रभाव रहता है और आप ही शहंशाह शुरू करके कंस के रास्ते जाते हैं तो इसका कुप्रभाव भी सात सात पीढ़ियों तक जाता है जहां सुमति तहं संपति नाना ज्ञान की संपत्तिहै यश की संपत्ति है सूझबूझ की
संपत्ति है साधकों के मन मस्तिष्क मेरी सारी संपत्ति है देशभर में मेरी संपत्ति है कि कई फार्म हाउस मेरे हैं एक-दो नहीं जहां भी हाथ रख उंगली दिखा तो वह सेठ लोग तैयार मेरे लिए सुरेश के लिए कई घर में रह हैं तुम्हारे किसी भी घर को मैं अपना घर बना कर दो दिन 5 दिन 10 दिन रहना चाहिए तो कौन बना कर सकता है तैयार है तो आप ऊपर करो हमें भी संपत्ति इनकम टैक्स वाले ले जाओ है करता हूं ओम नारायण नारायण नारायण जहां सुमति तहं संपति नाना जहां कुमति वह द्विखंडित क्वेश्चन है
वहां विजय भूत िदलाने थी जहां धन सेवा पर आ जाए और शांति शोषण है वहां शांति शोषण है वह विपत्र शोषण है वह बंदूक है शोषण अव्ाध्ोश है कृष्ण में दिख रहे हैं शोषक अ और जिनको गाल गोप नंद बाबा यशोदा देवकी-वसुदेव देखकर आधी तो पर आनंदित होते उसी कृष्ण को शाम को नहीं देख कर परेशान हो रहा है तो क्या श्री कृष्ण करने में परेशानी थी कि उनके चित्त में थी उनके पुत्र अमित ऐसे महापुरुष को भक्त देखकर आनंदित आराधितो पर और मिनट तक तेज कर दो कि मुंबई करते हैं हैं तो उनके अपनी
है मुंबई करने की सौगात उनके रास्ते में आ कि कबीरा निंदक ना मिलो पापी मिलो हजार एक निंदक के माथे पर लाख पापिन को भार है मैं तो सभी में छुपे हुए कृष्ण तक तो कोण में हारने वाली नजरिया देने वाली जो जन्माष्टमी का उत्सव आर आज 7up कि कालाष्टमी है कि ऐसी सुंदर व्यवस्था है हुआ है हुआ है कि सातम को ठंडा खाया जाता है है अष्टमी को उपवास ताकि बेस पर जो बोलना पड़ा हो शुद्धीकरण है कि चोटी सातम बड़ी साथ थम एवरी साथ कि आज तो राइट वन इलेक्ट्रॉनिक पूरा डिवाइस कहां पर
है में निकाले भिक्षु वास शुभ माना समीप वास्तव में धारण अपने सच्चिदानंद कृष्ण के समीप वास करने का दिन जन्माष्टमी या उपवास है तो फिर क्या गुड जी रखा है विशुद्ध है कि यह सीजन है वायु की जीरा वायुनाशक दुबई वायुनाशक प्रसाद मिश्र गिरे की पंजीरी यह कैसी सुंदर व्यवस्था है कि सावन महीना है कि बिल्ली के पत्ते चढ़ाव बिल्ली का पत्ता पानी में डालकर ना हो हितकारी मिले का पत्ता मसलकर थोड़ा तरफ और वह प्रगाढ़ करना होगा आज मैसेज नहीं आया है कि शरीर के स्वास्थ्य का मन की प्रसन्नता कार बुद्धि में बुद्धिदाता का
प्रकाश राय ऐसी जन्माष्टमी महोत्सव की व्यवस्था और भगवान कहते जन्म कर्म च मे दिव्यम एवं विधि एवं यो वेत्ति तत्व त्याग एवं पुनर्जन्म अंतिम में 30 अर्जुन हर जुर्म देखे या फिर उसको का जन्मदिन उन पर में भटकना नहीं पड़ता जन्म ऐसे नहीं मिलता मां के गर्भ में मूर्ति का तो ठीक नहीं तो वह गया नाली में पेशाब में बातें कितनी बार बातें चढ़ते फिर कहीं जन्म होता है और जन्म का दुख भी होता है प्रसूति के समय बीमारियों का दुख भी होता है जवानी में काम क्रोध आदि का तो होता है शत्रुओं का होता
है चिंता टेंशन दुख होता है और सब इकट्ठा किया हुआ छोड़कर मरना पड़ता वो मरने का दुख भी होता है मिला क्या है मैं कितना भी हेरा फेरी पाप कर्म करके बचाओ बचाओ लेकिन आखिर कब तक साथ में चलेगा पड़ा रहेगा माल खजाना छोड़ प्रयास उधर जाना है कर सत्संग उस सच्चिदानंद कृष्ण का संकर अपने हृदय में घर सत्संग अभी से प्यारे नहीं तो फिर पछताना है खिला-पिला कर दें बनाए वह बढ़ाएं हो भी अग्नि में जलाता है यह शरीर अग्नि की डिपोजिट है बेटियां जमाई की डिपोजिट है बेटे-बहू के डिपोजिट एसेट शरीर अग्नि की
डिपोजिट तेरा आत्मा परमात्मा का था है और रहेगा उधर को चलना ओम नमो भगवते वासुदेवाय ॐ और सुनिए आधा वासुदेवाय ॐ आधी देवाया माधुर्य देवनारायण आनंद सेवा है मेरे मामा देवा हे अंतर्यामी देव आए थे की सूरत ना डे वायव्य कि विश्वदेवा एवं सरवाना देवा प्रभु देवा ओम नमो हु लुट लुट [संगीत] हुआ था लुट यह तो समाज तीन कारणों से देखिए एक तो धन से दुखी है दूसरा काल से दुखी और तीसरा अध्ययन से दुखी है कंस के दो रूप कहे शास्त्रों ने आदि बहुत थिक रूप जो वसूल चीजें आती मेरी सकता मेरा वैभव
प्रजा पर इतना टैक्स डाला के बाहर बच्चों के मुंह से नहीं और मक्खन बचाकर कंस को टैक्स में देना पड़ता था अत इस संक्रामक अतिभावुक दूसरा है देखो मैं मान न देखे बड़प्पन को अपना बड़प्पन चाणक्य कंस के दो रूप वर्णन है काल अर्थात स्थान हर शुद्ध वस्तु शुद्ध और मान्यता शुद्ध जैसे शराब-कबाब वस्तुओं अशुद्ध है कि कैसे इस समय जो शुद्ध होता है प्रदोष काल इस कारण व्यक्ति की चेष्टा दुखदाई हो जाती है तीसरा है अज्ञान अपने स्वरूप का ज्ञान नहीं और अपने को उल्टा मानना जैसे मनुष्य है तो मन शराब पीकर अपनी मनुष्यता
भूल गए अपने को हम पशु मानने लग जाए तो अपने को बुलाया और कुछ मान लिया यह अज्ञान के ₹2 है एक तो अज्ञान और दूसरी मान्यता का अहंकार इंधन के कारण मनुष्य जाति दुखी है और इन आंखों को नियुक्त करने के लिए अर्थात अपन सर्कल और अज्ञान की निवृत्ति पर कृष्ण का अवतरण होना चाहिए और प्रश्न का उत्तर होगा वसुदेव देवकी के यहां सिध्दांत आंकड़ों वासुदेव है और समतावाद अनुमति अजय को कि देव की है अपने अंतःकरण को शुद्ध और अपनी मति को क्षमतावान तो आपके हृदय में श्रीकृष्ण तो प्रकट होगा अ कृष्ण तो
प्रगट होने से कल जो के 200 और दुखों का अंत करने वाली मति-गति हो जाएगी नारायण नारायण नारायण नारायण हरि ओम ओं कि हरि ओम ओम ओम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम लखन शिवा शिवा शिवा शिवा वास लाउड कानूड़ा मारा कन्हैया कृष्ण कंहैया लाल की जय हो को कम करो श्री कृष्णा कन्हैया बंसी बजैया बिंद्रावन की कुंज गलियों में में में भक्तों की दिल की गलियों में ठुमक-ठुमक कर राष्ट्र चाहिए अ कि श्रीमद्भागवत के चौथे स्कंध तीसरे अध्याय 23 में श्लोक में कहा गया है
अत तुम विशुद्ध वासुदेव चावला अधिकतम अर्थात शुद्ध अंतःकरण वासुदेव है आपके पास अंतर कर रहे उसको भजन से जब से दीक्षा शिक्षा से शुद्ध बनाई देव के का स्वरूप कहा गया दशमस्कंध पहला अध्याय के छप्पनवें श्लोक देव वक्रीय सर्वदेवता हां देव की अर्थात सर्व देव मई जो बुध है बुध की में जो सत्य संपन्नता है वह देव की है सृष्टि में धर्माधर्म वासना और विक्षेप आदि है इससे बचने के लिए जन्माष्टमी का उत्सव हर साल यह दिनेश दिनेश नवं नवं नवं इन थम कि हर साल नई चेतना नई खबर नई उन्नति की बातें जन्माष्टमी उत्सव
डे जाता है भगवान कहते हैं जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तप त्याग एवं पुनर्जन्म नए मामले में तीसरे चौथे अध्याय का 17 वां श्लोक मेरा जन्म दिव्य है मेरे कर्म दिव्य है ऐसा जो जानता है वह शरीर छोड़ने के बाद मुझे प्राप्त होता है उसको दूसरे जन्म मरण के दुख में नीच योनियों में नहीं जाना पड़ता है हम पुनर्जन्म ने उन्हें पुनर्जन्म नहीं होता और मुझे प्राप्त हो तो भगवान का जन्म वासना प्रधान उप प्रधान अरुण प्रधान भगवान कर्म अहम सजाने के लिए नहीं है और दुख काटने के लिए तो आपके कर्म भी
हम सब अपने के लिए ना हो और को सताने के ना हो लेकिन हमको भगवान में मिलाकर समाज रूपी देवता की सेवा में आपके कर्म दिव्य हो जाए तो [प्रशंसा] कि माता-पिता गुरुजन समाज के ओर लोगों को सेवा करें लेकिन मैं करता हूं मैंने सेवा क्या यह भावना आए तो आपके कर्म दिव्य हरिजन हमने और मरने वाला शरीर में हूं इस बात को बुलाकर इस शरीर के पहले जो था अभी जो है मरने के बाद भी जो रहेगा वह सच्चिदानंद आत्मा मैं हूं तो आपका जन्म कर्म दिव्या होने लगी है [संगीत]