अभी गीता का ज्ञान सुनना है। हम देख ले गीता का श्लोक एक श्लोक सुनने से भी हजारों कपिला गोदान करने का फल होता है। मैं अभी सुनाता हूं। तुम बोलना पड़ेगा। मैं बुलवाता हूं। पक्की बात है। पक्की बात मैं बुलवाऊंगा। बोलेगा पक्की बात। रखो मुझ पे हाथ। माया तुम भी रखो ना। क्या है? राखा राखा हम भगवान के भगवान हम चाय गारगी राजा जनक के दरबार में गई तो पंडितों ने बोला अरे अबला आ गई विद्वानों के बीच तो गार्गी ने मूछ पे हाथ घुमाया मैं अबला नहीं अबला तो तुम हो के मंदिर में भगवान