हेलो व्युअर्स हैं MP3 कोट हूं मेरा नाम राजेश तैलंग है और मैं एक एक्टर हूं कि मैं पहले दोनों बातें बोलने में शर्म करता था है क्योंकि राजेश नाम आप जानते हैं ना कमल नाम है कि भाड़ में पत्थर मारेंगे तो सीधा किसी राजेश कोई लगेगा कि पूनम इतना को मैंने जैसे कुत्तों में टॉमी मोती है या कोई अगर राजेश हों तो मैं मैं सिंपैथीज आपकी जो राज्य है और एक्टर जवाब एक्टर बोलते हैं घर में अपने घर में बोलने की हिम्मत करते हैं दोस्तों को बोलने की हिम्मत करते हैं तो वह बड़े ऐसे नजरों
से देखते ना आपकी तरफ 250 गलती की अपनी हीरो बनेगा मैं तुम्हें कभी so-called रोज ऐसा था भी नहीं अभी भी नहीं हूं है लेकिन कि बचपन में बा बिल्कुल भी नहीं था वह क्या कहते हैं बड़ा मिस्टेक था शर्मीला था आप नोटिस करेंगे अवसर एक्ट्रेस होते हैं शामिल नहीं होते हैं ज्यादा था अ हैं तो इसलिए हमेशा क्या होता था कि मैं भाइयों बहनों से भी कटवा रहता था अपने दोस्तों से भी - रहता था मोहल्ले के लोगों से भी कटवा रहता था तो ऐसे शर्मीले मिसफिट इंसान को अपना एक घर में कोण तलाशना
होता है कई गुणा ढूंढ लेता था वहां पर बैठ जाता था कोई चीजें जोड़ता था तोड़ता था हर घड़ी को खोलकर देखने की कोशिश करता था कैसे चलती है ट्रांजिस्टर मिलता था उसको खोलकर देखा था इसके अंदर भी अनुसार बैठा है कि बैठा है है और इस तरह की चीजें करता था तो इस वजह से मुझे बोलने लगे यह सब लोग की बड़ा उदमी है युद्ध में जानते हैं या शैतान तो कि मैं अपने अब मैं अपने पुराने उस वक्त को देखता हूं मैं उसके बारे में सोचता हूं तो मुझे लगता है कि मेरा वह
इसलिए में कि वह काल था जो वह जो समय था बच्चे के तौर पर मैं अकेले बिता रहा था वह रियल ई वांट अरविंद और चिपका था वह है क्योंकि होता क्या है डोंट वो सिर्फ एक कुछ नई चीज करने की कोशिश करना एक कुछ खाली कुछ नया वर्ल्ड है उसको भरने की कोशिश करना कुछ नया जोखिम लेना कुछ करने की कोशिश करना तो ऐसा ही कुछ कर रहा था और नाम भी मुझे उस दौरान मेला अवधि और आपने जानते हैं कि वह धीमी शब्द जो है वह संस्कृत के उद्यमी शब्द से का अपभ्रंश है
अनुठी उद्यमी टेक्नोलॉजी अगर आप देखेंगे तो वह दाम ही शहर उद्यमी का मतलब भी का हंटर भंडार होता है तो मुझे लगता है अगर कुछ भी आपको जिंदगी में करना है तो उधर ही होना बहुत जरूरी है में गरल घर में सिर्फ मेरे एक सदस्य थे मेरे बाबूजी मेरे पिताजी जिन्होंने मेरी बात समझी मेरे ऊधम को समझा कि इसके पीछे कुछ है थे और उन्होंने इस ऊधम का साथ देते हुए उन्होंने देखा कि यह कुछ तोड़ता है जोड़ता है कुछ करता है तो उन्होंने मुझे कुछ चीजें बताने शुरू की वह कुछ साइंटिफिक एंड आफ माइंड
थे और मैं भी थोड़ा ऐसा लग रहा था नेट तो उन्होंने एक पिन होल कैमरा बनाना सिखाया तो वह इटली पिनहोल नहीं था बड़े यह जो कांच जो गिलास होते हैं उसका कोई एक लेंस लेकर उसके पीछे इमेज प्रोजेक्ट करके और डिब्बे के अंदर बनाकर सर के डिब्बे में तो उसको करके एक कुछ लिमिट प्रोजेक्ट की तो मुझे बड़ा अच्छा लगा था है और बाबूजी भी मैं अपने आप कोई फेल डोंट ओपन और बोलता हूं क्योंकि उससे सीखने को बहुत कुछ मिलता है तो बाबूजी भी मेरे उसी तरह के थे बहुत सारे चीजें करते रहते
थे कभी भी पूरी तरह से हर चीज में पूरी तरह से सक्सेसफुल नहीं हुए तो उनकी प्रिंटिंग प्रेस हुई थी तो प्रिंटिंग प्रेस हमारी बीकानेर राजस्थान का रहने वाला हूं मैं तो वहां छोटा सा शहर है जापान बिकॉज थे तो उस पिक्चर और के टिकट पर यात्रा करते थे तो मुझे हमेशा वह अपने साथ ले जाते तो पिक्चर हॉल में और पिक्चर ऑल में मुझे बैठा देते तो सेक्शन विनोबा है मैं स्टूल पेर तो कि छोटी-छोटी कृपया होती है उससे मैं बच्चा था तो देखता था कि यह डांसिंग स्लाइड प्रोजेक्टर की और उसके थ्रू फिल्म
को देखता था तो एक फिल्म का रोमैंटिसिज्म साथ ही साथ फिल्म का साइंस भी जो साइंस एंड फिल्म की खाली उस अ मेक बिलीव दुनिया में नहीं होता था वह कैसे पैदा हो रही है प्रोजेक्टर की साउंड के आ रही है उसकी गंद कैसी है वह सब टेक्नोलॉजी जानने की कोशिश करता था तो यह शायद बचपन का अच्छी तरह उसकी वजह से फिर पिताजी को लगा कि इसको बहुत शौक है तो उन्होंने मुझे एक दिल्ली में आते रहते थे अपने प्रिंटिंग प्रेस के लिए सामान खरीदने के लिए तो यहां से यह हैंड ऑपरेटेड प्रोजेक्टर लाकर
दिया था है जो है न प्रॉपर्टीज प्रोडक्ट प्रोडक्ट है उसके साथ फिल्म स्टूडियो मिलती हैं जो टूटी-फूटी फिल्म शूटिंग किलो के भाव मिलती है चांदनी चौक में अब तो पता नहीं और सामान्य मिला करती थी तो वह फिल्म इसको लगाकर मैं फिर मैंने अपना ढेर से शुरू किया आप कि घर में मैं उससे प्रोजेक्टर करके चलाता था 10 पैसे की टिकट हुए 2 बच्चों को दिखाया करता था तो फिर आगे जाकर वह रजिस्टर खराब हो गया तो मुझे ख़याल आया कि पिनहोल कैमरा इससे कुछ किया जाए तो पिनहोल कैमरा से वह बैलेंस लगाया आंगन में
परफॉर्मेंस की और अंदर अंधेरे कमरे में उसका प्रोजेक्शन दिखाई और लेस लगाया सीधी मिर्च की और वह करना शुरू किया तो यह एक्टिंग की शुरुआत हुई तो साइंस और एक्टिंग दोनों मिलाकर यह पहला शुरू आओ और उसी दौरान नाटक भी तैयार कि मैंने जो छोटा था और अपने ही कुछ दोस्तों जो मेरी तरह ही थोड़े से मिसफिट थे वहीं है मेरे साथ और उसके बाद मुझे लगा कि यह एक्टिंग मेरे पर क्यों आसानी से आ जा रही है उसको मेरे दादाजी तिरुपतिनगर थे हवेली संगीत जिसको बोलते हैं और एक मंदिर था दो धनराज जी का
उसमे वह गाया करते थे तो हमें जन्माष्टमी के बाद नंद के आनंद भाई एक कार्यक्रम होता है उसमें ले जाते थे कि मुझे सकी बनाते थे तो मैं सखियों के कपड़े पहनकर करता था यह स्त्री का रूप करने का शुरुआत हुई उसके बाद मैं मेरे assistant तीन वह कभी भी बाजार जाती थी उनके बच्चे रोते थे तुम्हें सिस्टम के कपड़े पहनकर उनको यह करता था कि मैं बहन यही हूं मम्मी हैं इस तरह के है मेरे चाचा जी ने इस मामले की चौकी में एक नाटक करवाया महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह भाइयों के बीच की
कुश्तियां प्रताप संबोधित करके तो इस नाटक का एक डायलॉग मैं छोटा सा मुझे आज भी याद है वह भोजन के घमंड में मतवाले हुवण अपनी उद्दंडता का उचित दंड पाने के लिए तैयार हो जाओ तो इस तरह से में का मेरा बचपन है कुछ चलता रहा उसके बाद मैंने यहां दिल्ली आता रहा तो नेशनल स्कूल आफ ड्रामा की चिल्ड्रन सौंप दी है वह जॉइन कि उसके बाद मिर्च और थिएटर करने लगा राजस्थान में ही और फिर एडिट का जो फुल टाइम पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स होता है एक्टिंग का वह किया 1993 में उसके बाद पहला इंडिया
विल हफ्ता शांति और उसके बाद जो यह पच्चीस छब्बीस साल उतरें वह सारे के सारे एक आम एक्टर की शक्ल वाली कहानियां कि मैं इस स्टाइल की कहानी में नहीं जाऊंगा क्योंकि स्ट्रगल की कहानी में वही उतार-चढ़ाव हैं और वह उससे ज्यादा मैं आपके साथ शेयर करना चाहूंगा कि इस उतार-चढ़ाव के दौर में मैंने क्या सीखा और क्या पाया वह कहानी तो कभी भी मेरे ख्याल से यह कहानी तब सुनाई जानी चाहिए जब कोई कहीं पहुंच गया वह मुझे लगता है मैं भी स्ट्रगल कर रहा हूं और पहुंचने बहुत पकते हैं तो कि मुझे लगता
है यह उसमें इन 25 26 सालों में मैंने जो उतार चढ़ाव में पाया या पिछली चीजों को समझ आ और उसको दोबारा से ऐनालाइज किया तो मुझे लगा कि दो तरह के एजुकेशन मुझे काम आए एक जो फॉर्मल एजुकेशन होता है और एक्टिंग का जो क्वेश्चन होता है और उन दोनों एजुकेशन में ऐसा है कि अगर आपको जिंदगी की समझ है तो एक्टिंग की समझ पैदा होती है और अगर आपको एक्टिंग की समझ है तो जिंदगी जीने की कला में भी आपको सहायता मिलती है ए फॉर्मल एजुकेशन का जो निचोड़ मैं समझ पाया वह मुझे
लगता है सिर्फ दो ही चीज हैं कि प्रोसेसिंग इंफॉर्मेशन एंड हैंडलिंग और इमोशंस ओं कि अगर आपके अंदर इंफोर्मेशन को सही तरीके से प्रोसेस करने की कला है और अपने आपके इमोशंस को आप मैनेज कर सकते हैं हैंडल कर सकते हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं कि आज कल का जमाना तो टिप ऑफ द थिंग घर में आपको इतनी सारी इन्फॉर्मेशन है तो एक और जिम्मेदारी बनती है कि वो टर्न ऑफ इंफॉर्मेशन यह सीकिंग आप किस तरह इन्फॉर्मेशन ढूंढना चाहते हैं वह आपको तय करना जरूरी है फिर उसको प्रोसेस करना है और इमोशंस
को किस तरह से मैनेज करना है आप आपके काम का बोझ ही आपके परिवार पर नहीं आना चाहिए और आपस में जो अगर एक मसालेदानी होती है उसमें हल्दी नमक में नहीं जानी चाहिए और नमक जिले में नहीं गिरा होना चाहिए यह कंपार्टमेंटलाइज्ड करना और यह दोनों चीज़ें एक्टिंग भी बेसिक यही है ना थॉट्स एंड इमोशंस हम हमेशा टाइपिंग करते हुए सोच रहे होते हैं कि एक्टर क्या शो यह कैरेक्टर इस वक्त क्या सोच रहा है और क्या महसूस कर रहा है अगर आप इन दोनों में मतलब इन्फॉर्मेशन और इमोशन में आप एक तालमेल बिठाते
हैं तो जिंदगी भी एक तालमेल में पहुंचती है है और एक्टिंग का एक सबसे बेसिक जो चीज है वह है कि कि एक्टिंग शब्द बना है एक्शन से कि आप कोई एक्ट करते हुए एक्शन करते हैं एक्शन हम ह्यूमन फितरत यह है कि कोई भी एक्शन हम बिना स्वार्थ के नहीं करते हैं कुछ ना कुछ हासिल करना होता है तो एक्शन करते हम तो उस सेक्शन को करने के लिए एक मोटिवेशन होता है और उस एक्शन को फुल होने उस मोटिवेशन तक पहुंचने में बहुत सारी हॉस्पिटल सोती हैं और वह ऑब्सटेकल्स जो पूरी पार करके
उस क्षण तक के मोटिवेशन अपनी डोंट तक पहुंचता है वहीं रोक सकता है कहानी दुनिया की कोई भी कहानी आप उठा लीजिए उसके अंदर यही होगा कि एक को ई वांट है और उसको कोई हासिल करना चाह रहा है और उसके बीच में बहुत सारी बाधाएं हैं वह बाधाएं दो तरीके की होती हैं जिनको ऑब्सटेकल कहते हैं आप वांट टो डियर कनफ्लिक्ट कह लें वह इंटरनल भी हो सकता है एक्सटर्नल भी हो सकता है टोटल कॉन्ट्रैक्ट परिस्थितियां हो सकती हैं कोई विलीन हो सकता है और इंटरनल कनफ्लिक्ट्स आपकी अंदर चलने वाले कांटेक्ट आपकी मोरालिटी हो
सकती है बहुत सारी इश्यूज सो सकते हैं सबसे बड़ा इंटरनल कनफ्लिक्ट का तो है उदाहरण शिविर में लिखा हुआ है मिनट के लिए दुबई और नॉट टू दैट इज द क्वेश्चन तो इंटरनल ओर एक्सटर्नल थ्रेट्स को लड़ते हुए आप अगर आगे आगे तक पहुंचते हैं तो यही एक्टिंग से मैंने जिंदगी के बारे में जाना है हमारे टीचर थे कि विवेकानंद साहब बहुत बड़े ट्रैक्टर और मेडिसिन थे वह हमेशा कहते थे कि सिद्धि के पीछे भागो प्रसिद्ध अपने आप मिलेगी है कि आप सक्सेस के पीछे ना भाग्य कॉन्फिडेंस के पीछे भागे ग्रोथ और इवॉल्व होने में
जो फर्क होता है तो हमेशा कोशिश है कि आज भी कोशिश करता हूं कि सिद्धि के पीछे भागो प्रसिद्धि के पीछे न भागें इसलिए आज भी जब खाली होता हूं मैं हमेशा कहता हूं कि आई माय बेस्ट ऑफ लक विटामिन ए व फ्री कि मैं हमेशा जब खाली होता हूं तो कुछ एम दो ही चीज़ें कर रहा होता हूं किधर है बिल्डिंग समथिंग और एंड क्रिएटिंग समथिंग तो कुछ नया सीख बनाने की कोशिश कर रहा हूं या कुछ नया सीखने की कोशिश कर रहा हूं तो जैसे कि बच्चे कर रहे होते हैं वक्त आप अगर
बच्चों को देखेंगे तो दो ही चीज़ें कर रहे होते हैं हम लोग उनको फोर्स करते हैं कुछ और करने के लिए बच्चे हमेशा या तो कुछ सीख रहे होते हैं या कुछ बना रहे होते हैं हम उनको बिगाड़ हमारे जैसा बनाते हैं को उच्चतम बचाते हैं वह युद्ध में लर्निंग घर क्रिएटिंग ए के समथिंग या और लेकिन दुग्धम् की जो ऊर्जा है उसका इस्तेमाल करके यहां पर मुझे मैं देखा हूं ज्यादातर यंग लोग हैं तो उस उधम का इस्तेमाल आप तेज बाइक चलाने में ना करें एक सीनियर होने के नाते कि और कानून तोड़कर बिना
हेलमेट पहन के उस सुझाव का इस्तेमाल आप लर्निंग मोर क्रिएटिव में कुछ करें तो है और हमारे यहां पर गलतियां करें गलतियों से सीखा है हमारे एक्टिंग में जब भी शूटिंग हो रही होती है तो दो ही तरह के टैक्स हैं जो शॉट लेते हैं तो दो तरह के होते हैं उसको बोलते हैं जी या फिर ओके को एनजीटी का मतलब नॉट गुड और ओके ओके लेकिन जो दुनियां तक पहुंचता है वह हमेशा ओके टेकी पहुंचता है हमारे सारे टैक्स एंड जिसमें गलतियां गई थी वहीं के वहीं दफन हो जाते किसी अ टाइम है आप
तो हमारी जिंदगी में भी ऐसे होता है जब सीख रहे हैं कुछ बनाने की कोशिश कर रहे थे भगवान जी देख सकते हैं ओके टैक्स दुनिया तक पहुंचते हैं और आप मेरा तो नाम है और जरिए 68-ए लिए भेजी है है तो आप लोग अगर कोशिश करें मतलब मैं मेरा कहना यह है कि अच्छा काम मुझे ऐसा लगता है कि कि यह आपकी जो एनर्जी लर्निंग और क्रिएटिंग होती है वह आप अकेले कमरे में चाय कर रहे होते हैं लोग चाहे उसे नहीं देख पा रहे होते हैं है लेकिन वो मुकाम ऐसा होता है कि
वह दिखाइए भले ना दें उसकी खुश्बू लोगों तक पहुंचती है मैं चाहता हूं आप हम सब लोग मिलकर मेहनत करते रहें तो हमारी खुशबू पहुंचे थे का प्रयोग अच्छा