नमस्कार प्यारे बच्चों नमस्कार उत्तर प्रदेश आप सबका स्वागत है उत्तर प्रदेश बोर्ड की सबसे बड़ी क्लास में बेटा आज आपके यूपी बोर्ड एग्जाम का डर दूर करने का सबसे सटीक समय है। सबसे उचित समय है। तो आ जाओ सब लोग और इतिहास को बनता देखो क्योंकि आज की क्लास में जो भी बच्चा पढ़ने वाला है वो बोर्ड एग्जाम में 95 प्लस स्कोर पहले पेपर में करने वाला है और इसी के लिए यह 12 घंटे की क्लास आपके लिए है। यहां एक सवाल लिखा है और मैं चाहता हूं कि हर एक बच्चा जो मुझे देख रहा
है इस सवाल का उत्तर कमेंट सेक्शन में लिखें कि प्यारे बच्चों क्या आप टॉपर बनने के लिए तैयार हो अगर हां तो आ जाओ आज बहुत धमाकेदार तरीके से आपको पूरा सिलेबस पढ़ाएंगे। केवल सिलेबस ही नहीं आप बोर्ड एग्जाम में लिखोगे कैसे? चाहे पुरानी वाली कॉपी हो या नई वाली कॉपी दोनों लिख करके लाया हूं। हर एक चीज आपको बताऊंगा। सब कुछ यहां से एक्सप्लेन करूंगा। तो सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो। हर एक बच्चा अपने WhatsApp की स्टेटस पर इस क्लास को लगा दे जिससे मैं पूरे उत्तर प्रदेश के जनजन की
आवाज बन सकूं। हर एक बच्चे के डर को दूर कर सकूं जो बोर्ड एग्जाम को लेकर संकतित है। डरा हुआ है। आपका यह अंतिम एग्जाम है। जहां आपके परसेंटेज मैटर करेंगे। जहां आपसे पूछा जाएगा कि आपको कितने परसेंट मिले। और मैं यकीन से कह सकता हूं कि आज की क्लास में मैं हर एक बच्चे को उसका मनचाहा परसेंटेज दिलवाने के लिए तैयार कर दूंगा। तो अब देर मत करो शुरू हो जाओ। आज की क्लास के कुछ चरण है। उन चरणों की बात मैं तुमसे करूंगा। कौन-कौन से चरण आज की क्लास में हैं? आज हम लोग
पूरा सिलेबस कवर करने वाले हैं। लेकिन बड़े खूबसूरत तरीके से बिल्कुल जहां और आपको कोई टेंशन ना हो और जब आप पढ़ के अपने क्लास को एंड कर रहे हो तब आपको पता रहे। इसलिए बेटा एक बात और तुमसे कहनी है। आज 12 घंटे की क्लास साथ में देखनी पड़ेगी। तो मोबाइल चार्ज कर लो। चार्जिंग पे लगा दो। खाना ववाना खा लिया है। नहीं खाया तो मम्मी से कह दो वहीं पर लाकर दे जाएं। क्योंकि अब ना तो समय है और ना ही समय तुम्हारा इंतजार करने के लिए तैयार है। 18 फरवरी से एग्जाम है।
आज 15 फरवरी है। पहला चरण क्या होगा इस क्लास का? पहले चरण में हम गद्य के विकास के ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन करेंगे। फिर गद्यांश पर आधारित प्रश्न करेंगे और फिर उसी गद्य के लेखकों का साहित्यिक परिचय पढ़ेंगे। इस प्रकार से हम गद्य खत्म कर चुके होंगे। उसके बाद दूसरे चरण में हम आ जाएंगे। जिसमें हम सबसे पहले काव्य साहित्य के विकास के ऑब्जेक्टिव सवाल करेंगे। इसका यह तुम्हारा रोड मैप है आज का। उसके बाद उसी पर पद्यांश पर आधारित सवाल करेंगे जो 10 नंबर का आता है। फिर कवियों का साहित्यिक परिचय करेंगे। इस प्रकार हम गद्य
और काव्य खत्म कर चुके होंगे। फिर हम आ जाएंगे कहानी पर जिसके लिए तुम्हें डर लगता है। चार कहानियां हैं। चारों पढ़ाऊंगा लेकिन इंपॉर्टेंट बताते हुए कि कौन सी पढ़ लोगे तो पेपर में आ जाएगा। फिर तुम्हारा है खंड काव्य। जहां पर मैं तुम्हें सारे खंड काव्य तुम्हारे जिलों के अकॉर्डिंग और वही सवाल जो बोर्ड एग्जाम में पिछले 10 सालों से आ रहे हैं। उसके बाद संस्कृत दिगदर्शिका फिर चौथे चरण में हम लोग हिंदी व्याकरण की ओर कूच करेंगे और पत्र पढ़ेंगे फिर निबंध पढ़ेंगे। ये खूबसूरत चरण सारे चरण पहले चरण से ऐसे ही मान
लो कि ये तुम्हारा ये तुम्हारा कौन सा समय है? यह तुम्हारी बाल्यावस्था है। यह तुम्हारा गृहस्थ आश्रम है। यह तुम्हारा वानप्रस्थ है। और यहां पर तुम सन्यास लेकर पेपर देने चले जाओगे। तो आ जाओ सभी लोग शेयर कर दो। हम लोग बिना देरी के शुरू करते हैं। सबसे बस एक रिक्वेस्ट है मेरी कि आप लोग इस सेशन को अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा देना। सब जगह शेयर कर देना। मैं भी कर देता हूं। शुरुआत में दो-ती मिनट जो हमें लग रहे हैं। उसके बाद जब हम क्लास शुरू करेंगे बेटा तो हम रुकेंगे नहीं। हर
एक क्वेश्चन का रिवीजन करना है। और मैं अपने हर एक बच्चे से रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि क्लास में जब बने हो ना तो कमेंट सेक्शन में ए बी सी डी मत लिखना। उत्तर लिखने की कोशिश करना जिससे मैं ये समझ पाऊं और तुम भी ये समझ पाओ कि जो तुम लिख रहे हो वो कितना अच्छा है और कितना सही है। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर करेंगे बेटा और हम इस सेशन की शुरुआत करेंगे बहुत धमाकेदार तरीके से। चलिए तो अब हम शुरू करते हैं। प्रथम चरण अपना शुरू करते हैं। हम हर एक
चरण खत्म करके उस चरण की संस्तुति उस चरण की समाप्ति को की घोषणा यहां से करेंगे। फिर दूसरे चरण पर चलेंगे। पहला आपका गद्य का विकास है। बहुत सारे सवाल आप कर चुके हो। पिछले पांच सात सालों के जितने भी सवाल हैं उसको मैं लेकर के आया हूं। और एक चीज और ये तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना इस 12 घंटे के बाद ही सबसे सार्थक होगी। जहां पर 16 फरवरी, 17 फरवरी और 18 फरवरी इन तीन दिनों में आप सबसे बेमिसाल क्लास करोगे। आप इसका स्क्रीनशॉट ले लो। 16, 17, 18 और 16, 17, 18 क्यों?
15 फरवरी से ये स्टार्ट होगी। कब से? 15 फरवरी से। 15, 16, 17 ये तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना और 18 को सुबह 5:00 बजे तुम्हें आना है। तो चलो अब हम बिना देरी के सवाल शुरू करते हैं। हर एक बच्चे का आंसर मुझे चाहिए। गद्य का विकास में कौन-कौन से टॉपिक से सवाल आते हैं? हिंदी गद्य का उद्भव एवं विकास से आता है। शुक्ल युग से, शुक्लोत्तर युग से, हिंदी गद्य की प्रमुख विधाओं से जो कि है निबंध, उपन्यास, कहानी और आलोचना इनसे सवाल आता है। इन सभी सवालों का जवाब तुम्हें देना है। चलो
शुरू करते हैं पहले सवाल से। हर एक बच्चा अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए अपनी आस्थाओं को जागृत करते हुए सवाल का उत्तर देना शुरू करेगा। आप किसी भी धर्म से आते हो, किसी भी जाति से आते हो, किसी भी वर्ण व्यवस्था से आते हो, हमारे ईस्ट हमेशा हमारी सहायता करते हैं। तो आइए शुरू करते हैं। भगवान ने चाहा तो इस बार तुम्हारे मार्कशीट पर स्वर्ण अक्षरों में ये अंकित होगा कि तुमने अंतिम दिनों में जो मेहनत की वो ईमानदारी से की। तो आ जाओ। सभी लोग कमेंट कर दो कि तुम तैयार हो चुके
हो इस क्लास के लिए। पहला क्वेश्चन तुम्हारे सामने है। भाषा योग वशिष्ठ के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। भाषा योग वशिष्ठ के लेखक कौन है? इसका कमेंट नहीं चल रहा भाई। भाषा योग वशिष्ठ के लेखक कौन है? आपको बताना है। सभी लोग बताएंगे। इसमें से बहुत सारे सवाल आप जानते होंगे। जो जानते हो उसका रिवीजन कर लो। राम प्रसाद निरंजनी समय नहीं है 12 ही घंटे हैं। 12 ही घंटे हैं। पढ़ाना तो मैं 16 चाहता हूं। 18, 20, 24 लेकिन क्या है ना कि YouTube इतनी इजाजत नहीं देता। तो जितनी देता है उतना लेके
चलते हैं। निम्नलिखित में से कौन सी रचना हिंदी गद्य की प्रारंभिक रचनाओं में गिनी जाती है? कौन सी रचना हिंदी गद्य की प्रारंभिक रचनाओं में गिनी जाती है? गोरख वाणी, चर्या पद, सत्यवती कथा नहीं उक्ति व्यक्ति प्रकरण और देखो एक बात मैं तुम्हें बता दूं। ना तो अब तुम्हारे पास यह समय है कि तुम बोर्ड एग्जाम के लिए पीडीएफ पढ़ सको। तुम्हारे पास समय बस इतना है कि तुम इन सवालों का जवाब देकर अपने आप को तैयार कर सको। अगला सवाल तुम्हारे लिए क्या है? अस्तयाम के रचनाकार कौन है? अस्तयाम यानी अस्तयाम जो कृति है
उसके रचनाकार कौन है? सभी लोगों को बताना है। हर एक बच्चा आंसर करेगा। गोकुलनाथ, वल्लभाचार्य, नाभादास या तुलसीदास? सभी लोग बताएंगे। गोकुलनाथ, वल्लभाचार्य, नाभादास या तुलसीदास? मेरे सामने कमेंट नहीं चल रहा है। तो मैं एक बार खोल लेता हूं कमेंट सेक्शन। एक बार आप मुझे कमेंट करके यह बता दो बेटा क्या मेरी आवाज आप तक पहुंच रही है। सभी लोग बताएंगे और सभी लोग सेशन को लाइक कर लो बेटा। जितने भी बच्चे मुझसे जुड़ चुके हैं एक बार सेशन को लाइक कर लीजिए। आज के क्लास की लाइक का टारगेट 1 लाख लाइक है। ठीक है?
1 लाख बच्चे इस क्लास को लाइक करने वाले हैं। आप अगर कर चुके हैं तो अच्छी बात है। नहीं किया है तो आप कर दीजिए। सभी लोग जल्दी-जल्दी। चलिए हम लोग आगे बढ़ते हैं। अगले सवाल पर चलते हैं। तो इसका सवाल का उत्तर क्या होगा? सभी लोग बताइए। जल्दी-जल्दी बताएंगे इस सवाल का उत्तर। सभी लोग कमेंट सेक्शन मुझे दिख नहीं रहा है। एक बार तो मैं एक सेकंड भाई कमेंट क्या उत्तर दे रहे हो? अरे तुलसीदास कौन दे रहा है भाई? तुलसीदास नहीं है नाभादास हैं। चलो अगला सवाल। साहित्यचन गद्य की विधा क्या है? साहित्यचन
गद्य की विधा क्या है? क्या ये नाटक है? उपन्यास है आलोचना निबंध है। देखो ये सवाल डायरेक्टली तुम्हारे पेपर में आएंगे। तो अगर इनका कमेंट सेक्शन में तुम नाम लिखते रहोगे। जैसे बहुत सारे बच्चे लिख रहे हैं नाभादास षष्टयाम ये सब तो तुम्हारा बहुत सटीक हो जाएगा। साहित्यचन क्या है? साहित्य आलोचन। अगर तुम इसका संधि विच्छेद देख लो ना साहित्य धन आलोचन तो तुम्हें वैसे ही पता चल जाएगा ये आलोचना है। अगला सवाल इंद्रजाल कहानी संग्रह के लेखक कौन है? इंद्रजाल कहानी संग्रह ध्यान रखना। ये ऐतिहासिक कहानियों का एक संग्रह है। इतिहास से जुड़ी हुई
कहानियां। तो ऐतिहासिक कहानियां कौन लिखता है ज्यादा? जयशंकर प्रसाद लिखते हैं। अगले सवाल पर चलते हैं और मैं बार-बार यह कह रहा हूं कि यह क्लास 12 घंटे की क्लास तुम्हारे इस साल की अंतिम क्लास होने वाली है जिसमें तुम अपने सिलेबस को ठीक से कवर कर सकते हो। तुम्हें भी पता है कि टाइम टेबल ऐसा बना है कि और कोई क्लास तुम 12 घंटे नहीं कर सकते। ना तो किसी क्लास को करने का टाइम है ना किसी क्लास को करने में तुम्हें इतना समय मिलेगा। तो सभी लोग क्लास को जल्दी से लाइक कर लो।
सेशन को शेयर कर दो और सभी बच्चों तक इस क्लास को पहुंचा दो बेटा। कोई एक बच्चा भी वंचित ना रह जाए आज की क्लास से क्योंकि ये तुम्हारी क्लास है। ये यूपी की क्लास है यार। और सभी लोग एक बार मुझे कमेंट करके बताओ किस-किस जिले से मुझे देख रहे हो? सब बच्चे कमेंट करेंगे। चलिए अगला सवाल क्या है बेटा? द्विवेदी युगीन लेखक कौन है? तो राय कृष्ण दास नहीं है। चतुरसेन शास्त्री नहीं है। उदय शंकर भट्ट नहीं है। कौन है? अध्यापक पूर्ण सिंह है। 11th में आपके निबंध भी था एक अध्यापक पूर्ण सिंह
का। अगर नाम याद हो तो कमेंट कर देना। अध्यापक पूर्ण सिंह का निबंध था। अगला सवाल अशोक के फूल निबंध किसका है? अशोक के फूल निबंध है। कैसा निबंध है? क्या यह मनोवैज्ञानिक है? क्या यह ललित है? क्या यह बुद्धि प्रधान है? क्या यह ऐतिहासिक है? अब अशोक के फूल तो तुमने पढ़ा नहीं होगा। पढ़ा है क्या? है ना सिलेबस में? चलो। किसने लिखा है? कौन लेखक है अशोक के फूल? निबंध का जरा कमेंट करके बताओ। कौन लेखक है अशोक के फूल का? और ये एक ललित निबंध है बेटा। कौन लेखक है इसका? सभी लोग
कमेंट करके बताओ। कौन है? जल्दी से बताओ। लिख दूं यहां पे नाम? चलो। कौन है हजारी प्रसाद द्विवेदी? हजारी प्रसाद द्विवेदी। लेकिन एक बात और जान लो। हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम लिखते हुए सबसे पहले आचार्य जरूर लिखना। बड़ी मेहनत की है हिंदी साहित्य के लिए इन्होंने। हरिऔध की ठेट हरिऔध अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की रचना ठेट कैसी रचना है? क्या विधा है इसकी? कहानी है, उपन्यास है, जीवनी है या फिर नाटक है? सभी लोग कमेंट करके बताएंगे। आज की यह महा रिवीजन योजना तुम्हारे जीवन की अंतिम रिवीजन योजना होने जा रही है और यह
क्लास तुम्हें सालों तक याद रहेगी। उपन्यास है बेटा सभी लोग। अच्छा अगर तुम्हें नहीं आता कॉपी पेन लिया है ना तुरंत लिख लो। अगर नहीं आता तुरंत लिख लो। ये सारी पीडीएफ तुम्हारे पास अगर चली भी जाएगी ना पढ़ने का समय नहीं है। आज 12 तारीख है। कल आज 13 है। कल 14, 15, 16, 17, 18 को पेपर है। कोई और विषय नहीं पढ़ोगे। केवल इसी की 1200 पेज की पीडीएफ पढ़ोगे। नहीं। क्लास साथ में करना है। क्वेश्चन साथ में करना है। श्रृंगार रस मंडन के रचनाकार कौन है? बेटा सभी लोग बताइए। श्रृंगार रस मंडन
के रचनाकार कौन है? गोसाई विट्ठलनाथ, राधा चरण, गोस्वामी, महादेवी, वर्मा, भारतेंदु हरिश्चंद्र। तो ये दोनों तो नहीं है। गोसाई विट्ठलनाथ हैं। बिल्कुल ग वाला आंसर सही है। कितने लोगों का ये आंसर सही है। एक बार कमेंट सेक्शन में दिल रिएक्ट करो। कितने लोगों का? हमारा कंप्यूटर महोदय एक तो मेरे सामने क्लास खोल के चला गया और उसमें कमेंट सेक्शन की जगह लिख के आ रहा है समथिंग वेंट रोंग। अब कमेंट मुझे बार-बार मोबाइल में देखना पड़ रहा है। मैं यहां पे तुम्हारा कमेंट खोल के बैठा हूं। अरे भाई इतना तो अत्याचार मत करो। सबसे बड़ी
क्लास यूपी की सबसे बड़ी क्लास का कमेंट नहीं दिख रहा है मुझे। ये कैसे पॉसिबल है? चलिए सभी लोग सेशन को शेयर करते रहिए। और बेटा सेशन को लाइक कर लो। जितने भी बच्चे हैं सब लोग एक बार सेशन को लाइक कर लेंगे। अगली क्लास प्रेम सागर के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे प्रेम सागर के लेखक कौन है? अब प्रेम सागर के लेखक सदलल मिश्र हैं, सूरदास हैं, राम प्रसाद निरंजनी है या लल्लू लाल हैं? कौन है प्रेम सागर? ध्यान रखना प्रेम सागर? ये सवाल बहुत बार पूछा गया है। सदल मिश्र नहीं है, सूरदास
भी नहीं है बेटा। रामप्रसाद निरंजनी भी नहीं है। मैं इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि तुम्हें बताने का मौका दे रहा हूं। लल्लू लल्लू लाल है। अगला सवाल क्या है? मेरे साथ सवाल करना है। कलम का सिपाही हिंदी गद्य की कौन सी विधा के अंतर्गत आता है? अब देखो कलम का सिपाही क्या है? कलम का सिपाही क्या है बेटा? ध्यान से देखना। कलम का सिपाही क्या है? कलम का सिपाही जीवनी है। क्या है? जीवनी है। किसने लिखा है? कृष्ण किसने लिखा है? अमृत राय ने लिखा है। अमृत राम अमृत राय कौन है? प्रेमचंद के बेटे
हैं। प्रेमचंद के बेटे हैं। ठीक है? प्रेमचंद के बेटे हैं। तो मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया कि ये जीवनी है तो कोई बात ही नहीं है। लेकिन तुम्हें अब रचनाकार भी पता चल गया कि रचनाकार कौन है? रचनाकार हैं। सभी को आवाज वगैरह आ रही है बेटा एक बार कमेंट करके बता दो। देखो मैं तुम्हारे सामने मोबाइल में कमेंट देख रहा हूं यार और इसमें भी आ नहीं रहा। सेशन को एक बार सभी लोग शेयर कर देंगे और सभी लोग कमेंट करते रहेंगे। अमृत राय हां रचनाकार अमृत राय हैं। नाम याद रहना चाहिए। हिंदी
का प्रथम मौलिक उपन्यास कौन सा है? हिंदी का प्रथम मौलिक उपन्यास ध्यान रखिएगा। प्रथम मौलिक उपन्यास किसका है? चलो लेखक का भी नाम बताना है। लेखक का भी नाम बताना है। लेखक का भी नाम बताना है। भाग्यवती नहीं कंकाल नहीं पुनर्नवा नहीं क्या है? परीक्षा गुरु है। लेखक कौन है? लेखक कौन है? लाला श्रीनिवास दास सही बताओ। क्या सच बोल रहे हो? अगर हां तो फिर से कमेंट करके मुझे बताओ। चलिए अगला सवाल। मैला आंचल उपन्यास किसका है? यह तो 100% तुमको नहीं पता होगा। पता है तो दिल रिएक्ट करके बताओ कि सर पता है
इलाचंद्र जोशी किशोरी लाल गोस्वामी नागार्जुन फणीश्वरनाथ रेणु कौन है इसका लेखक मैला आंचल मैला आंचल फणीश्वरनाथ रेणू का है ये बहुत सुंदर आंचलिक कहानियां आंचलिक कहानी और उपन्यास लिखते हैं आंचलिक कहानी और उपन्यास बहुत सुंदर लिखते हैं बहुत सुंदर लिखते हैं कौन बहुत सुंदर लिखता है फंडेश्वर नाथ रेडू तुम्हारे सिलेबस में भी एक कहानी फंडेश्वर नाथ रेडू की है जरा कमेंट कर दो यार कौन सी कहानी है एक बार हम लोग प्रेमी जोड़ों को याद कर लें। पंच लाइट की मुनरी और पंच लाइट का गोधन। हमारे सभी मुनरिया और गोधन कमेंट करके बताएंगे। और सभी
लोग सेशन को लाइक कर लो बेटा। जितने भी बच्चे लाइव हैं सेशन को लाइक करते रहना। आज की तुम्हारे गुरु दक्षिणा यही होने वाली है। और दूसरी बात हमारा 2 मिलियन पूरा होने वाला है आज। तो सब लोग सब्सक्राइब कर लेना। यह तुम्हारा परिवार आज 2 मिलियन का हो जाएगा। तो खुशी की बात है बढ़ते रहने चाहिए। खुशी बढ़ती रहनी चाहिए और बढ़ती ही जाएगी। तुम टॉपर भी बनोगे। सच्ची वीरता नामक निबंध किसका है? सच्ची वीरता नामक जो बेटा निबंध है वो किसने लिखा है? देखो सरदार पूर्ण सिंह ने लिखा है। मैं क्यों बता रहा
हूं सरदार पूर्ण सिंह ने इसलिए बता रहा हूं क्योंकि बहुत कम निबंध लिखे इन्होंने। आपको कमेंट करके बताना है कि सरदार पूर्ण सिंह ने कितने निबंध लिखे? कितने निबंध? और अगर आपको नाम याद हो एक दो का तो वो भी बता दीजिएगा। बहुत कम। पांच सात आठ कुछ लिखे होंगे। जितने भी लिखे हैं कमेंट करके बता दो। तो ग वाला यानी डी वाला सही हो जाएगा। अगला सवाल फणीश्वर नानाथ रेणू की कृति ठुमरी किस विधा पर आधारित है? मैंने बता दिया एक बच्चा पूछ रहा है कि सर क्या पढ़ा रहे हैं? मैंने बता दिया है
बेटा पहले गद्य का विकास के क्वेश्चन कराऊंगा। फिर गद्यांश पर आधारित प्रश्न करवाऊंगा। उसके बाद गद्य के साहित्यिक परिचय यानी लेखकों के साहित्यिक परिचय करवाऊंगा। फिर काव्य का विकास के क्वेश्चन करवाऊंगा। काव्यांश पर आधार यानी पद्यांश पर आधारित क्वेश्चन करवाऊंगा। फिर कवियों के साहित्यिक परिचय करवाऊंगा। मैं शुरू से ही एक ऐसी स्ट्रेटजी ले चल रहा हूं जिससे ना तुम्हें कंफ्यूजन हो और ना बोर्ड एग्जाम में तुम्हारे सवाल गलत हो। चलो फनीश्वर नाथ रेणु की जो कृति ठुमरी है बेटा वो कैसी है वो कहानी है यात्रा संस्मरण है उपन्यास है या रिपूरताज है सब लोग बताएंगे
एक बार सभी लोग कमेंट करते रहिए और जो नए बच्चे जुड़े हैं इस क्लास की लिंक अपने WhatsApp के स्टेटस पर लगा दो सबके साथ शेयर कर दो जिससे सब लोग इस क्लास को अच्छे से कर पाएं चलिए तो ये क्या है बेटा कहानी है ये कहानी है अगला सवाल स्मृति की रेखाएं किस विधा की रचना है आज की क्लास के लाइक का टारगेट 1 लाख है यही तुम्हारी डिजिटल गुरु दक्षिणा स्मृति की रेखाएं किस विधा की रचना है? अब अगर तुम ध्यान से पढ़ो इसको स्मृति की रेखाएं तो स्मृति माने होता है याद। याद
की रेखाएं तो याद की रेखाएं किस विधा में आएगा? संस्मरण में आएगा। यानी कुछ पहले बीत चुका है उसको लिखा जा रहा है। इसे अंग्रेजी में मेमोयर कहते हैं। कोई घटना तुम्हारे जीवन में बीत चुकी हो उसको आज लिखना संस्मरण है। तुम्हारे पाठ में एक संस्मरणात्मक निबंध है। तुम्हारे पाठ में एक संस्मरणात्मक निबंध है। क्या नाम है उसका? संस्मरणात्मक निबंध है। क्या नाम है उसका? उसका नाम है रॉबर्ट नर्सिंग होम में। रॉबर्ट नर्सिंग होम में वो एक संस्मरणात्मक निबंध है। किसने लिखा है? कोई बच्चा क्या मुझे इस पाठ के लेखक का नाम बता सकता है?
कोई बच्चा क्या इस पाठ के लेखक का नाम मुझे बता सकता है? सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बताएंगे। और एक बात एक बात मैं तुमसे बहुत क्लियर कहना चाहता हूं। भरोसा रखना खुद पर। तुम्हारा डर मैं दूर कर दूंगा। लड़ना सिखा दूंगा। बस खुद पर भरोसा कर लो। एग्जाम टाइम पर तुम्हारा दुश्मन तुम्हारी पढ़ाई नहीं होती। तुम्हारा डर होता है और आज वही दूर होगा। अगला सवाल सभी लोग आंसर करेंगे। इनमें से कोई बच्चा ना हो जो इस सवाल का आंसर ना करे। इनमें से आत्मकथा विधा की रचना कौन सी है? 2014 में 204 में
ये क्वेश्चन आया था और 2024 वाले सेशन में मैंने ये क्वेश्चन नहीं पढ़ाया था। तो एक क्वेश्चन पूरे सात सेट में सात सेट में 70 क्वेश्चन थे। मैंने 69 क्वेश्चंस करवाए थे। एक क्वेश्चन यह वाला मेरा पढ़ाया नहीं आया था। अर्धकथा वाला। चलो तो इनमें से आत्मकथा विधा की रचना क्या है? अर्धकथा। अगला सवाल माधुरी पत्रिका किस युग से संबंधित है? सभी लोग बताएंगे। तो माधुरी पत्रिका तुम्हारी लखनऊ से प्रकाशित होती थी। अब किस युग से संबंधित है? तुम मुझे बता दो। और अगर नहीं पता तो लिख लेना। कॉपी में लिख लेना। कलम से नोट
कर लेना। क्या है भैया? माधुरी पत्रिका किस युग से प्रकाशित है? तो द्विवेदी युग से प्रकाशित है। किस युग में प्रकाशित है? द्विवेदी युग में। अगला सवाल सरस्वती पत्रिका के संपादक कौन है? सभी लोग मुझे बताएंगे एक बार। सरस्वती पत्रिका के संपादक कौन है? बेटा सभी लोग मुझे बताएंगे। सरस्वती पत्रिका के संपादक कौन है? सारे बच्चे मुझे कमेंट करके बताएंगे। अब यहां पर नाम देखो डॉ. संपूर्णानंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, वासुदेव शरण अग्रवाल, रामचंद्र शुक्ल। तो इसका सही उत्तर क्या होगा बेटा? आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी कब से संपादित करना शुरू किया? 1903 से। अच्छा द्विवेदी युग
का नाम किसके नाम पर पड़ा? आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पे। तो ये सब सवाल इंपॉर्टेंट है द्विवेदी जी के नाम से। इसको तुम्हें याद रखना है। अगला सवाल उस पर चलते हैं। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर देंगे। सभी लोग बेटा सेशन को एक बार शेयर कर देंगे जिससे मैं सभी बच्चों को उत्तर प्रदेश के पढ़ा पाऊं जो कि मेरी इच्छा है। चलिए अगले सवाल पर चलते हैं। अगला सवाल आवारा मसीहा की रचना विधा क्या है? आवारा मसीहा किस विधा की रचना है? आवारा मसीहा किस विधा की रचना है? बताइए। आवारा
मसीहा क्या है? संस्मरण है, रेखाचित्र है, जीवनी है, आत्मकथा है। तो आवारा मसीहा बेटा जीवनी है। अगला सवाल मातृभूमि के लेखक कौन है? अब ये सवाल तो तुम्हें नहीं पता होगा। पता है तो कमेंट करके बताओ और दिल रिएक्ट करके जाना कि सर मुझे पता था। वासुदेव शरण अग्रवाल आवारा मसीहा के लेखक हैं। अगला सवाल अपनी खबर आत्मकथा के लेखक कौन है? अपनी खबर नामक जो आत्मकथा है, अपनी खबर लेना। अपने आप से पूछना कि भाई ठीक हो? अच्छा लग रहा है खुश हो? कभी-कभी पूछ लिया करो खुद से। अकेले में बैठ के कभी-कभी खुद
से पूछ लिया करो कि खुश हो और अगर नहीं हो तो क्या परेशानियां है कि तुम्हें खुश नहीं होने दे रही हैं। ठीक? और उन्हें दुरुस्त करो क्योंकि जीवन में कितना भी कमा लोगे, कितना भी खा लोगे, कितना भी उड़ा लोगे जब तक तुम अपनी परेशानियों को दूर नहीं करोगे, खुशी नहीं मिलेगी। किसका है? पांडे वेचन शर्मा उग्र का है। बेटा निम्नलिखित में से प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना कौन सी है? सूरज का सातवां घोड़ा नहीं है। आलवाल नहीं है। मैंने सिल पहुंचाई नहीं है। मेरे विचार केवल उनकी रचना है। अगला सवाल निम्नलिखित में
से हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना कौन सी नहीं है? तो देखो हिंदी साहित्य की भूमिका उनकी है। विचार और वितर्क उनकी है। साहित्य का मर्म उनका है। बिल्लेसुर बकरिया उनकी रचना नहीं है। सभी लोग मुझे कमेंट करके बताओ कि बिल्लेसुर बकरियाहा किसकी रचना है? सभी लोग मुझे कमेंट करके बताओ। भाई कंप्यूटर महोदय चलिए अगला सवाल अग्नि की उड़ान पुस्तक के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे अग्नि की उड़ान पुस्तक के रचनाकार कौन है? सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयनज्ञ पंडित दीनदयाल उपाध्याय धर्मवीर भारती डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अग्नि की उड़ान सबको पता है कि कौन है इसके लेखक?
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इसके लेखक हैं। बेटा अगले सवाल पर चलते हैं। काशी नागरी प्रचारणी सभा के संस्थापक कौन है? मैं फिर से बता देता हूं। केवल यही क्लास नहीं है। फिर से मैं बता देता हूं एक बार। बार-बार आप लोग पूछ रहे हो कि तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना क्या यही है? नहीं। ये आज 12 घंटे का वार्म अप है तुम्हारा। उसके बाद 15 फरवरी, 16 फरवरी, 17 फरवरी को तुम्हारी तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना चलेगी और 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे। 15 फरवरी को सुबह 6:00 बजे आना है तुमको। क्या होगा? वहीं
पर बताऊंगा। 15 फरवरी सुबह 6:00 बजे कॉपी में नोट कर लो कि 15 फरवरी सुबह 6:00 बजे से 18 फरवरी सुबह 5:00 बजे तक ऋषि सर के साथ रहना है। कहीं नहीं जाना है। कुछ नहीं खाना है। किसी को नहीं देखना है। किसी से बात नहीं करनी है। अगला सवाल काशी नागरी प्रचारणी सभा के संस्थापक इस समय तो वमेश शुक्ल जी हैं काशी नागरी प्रचारणी सभा के प्रधानमंत्री। करंट टाइम में अभी जो हैं। लेकिन किसने स्थापना की थी? आप सबको बताना है। किसने किया था? तो काशी नागरी प्रचांडणी सभा की स्थापना श्याम सुंदर दास ने
की थी। अगला सवाल द मैडम मैन का पगला नाम से हिंदी में अनुवाद किसने किया? ये सवाल तो तुमको पता है। मैंने बहुत बार इसको मजाक में तुम्हें बताया है। द मैडम पगला कौन है इसका अनुवाद करने वाला? वासुदेव शरण अग्रवाल नहीं भाई साहब डॉ. संपूर्णानंद बिल्कुल नहीं। प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी नहीं नहीं राय कृष्ण दास हैं। कितने बच्चों का यह सवाल सही है? हर एक बच्चा मुझे सवाल का उत्तर देगा। बिल्कुल पहले गद्य का विकास पढ़ेंगे फिर गद्यांश पर आधारित प्रश्न फिर गद्य के लेखकों के साहित्यिक परिचय तब दूसरे चरण में चलेंगे काव्य वाला
चरण दूसरा है पहला ये चरण है अगला सवाल आखिरी चट्टान रचना की विधा क्या है सभी लोग बताइए आखिरी चट्टान जो रचना की विधा है वो क्या है ये एक निबंध संग्रह है ये एक यात्रा वृतांत है ये एक उपन्यास है एक कहानी संग्रह है तो आखिरी चट्टान से क्या समझ पा रहे हो कि कोई आदमी चलते-चलते जा रहा है अचानक से देखता है कि एक आखिरी चट्टान है यानी यात्रा कर रहा है यानी यात्रा विवरण हो जाएगा जाएगा। अगला सवाल मेरी असफलताएं किस विधा की रचना है? अब ये तो तुम बहुत बार पढ़ चुके
हो। मेरी असफलताएं तुम इसके रचनाकार बताओ। लेखक कौन है मेरी असफलताओं के? सभी लोग बताएंगे। मेरी असफलताएं किसका है? बाबू गुलाब राय। बाबू गुलाब राय क्या है ये बाबू गुलाब राय का? ये आत्मकथा है बाबू गुलाब राय की। अगला सवाल चिंतामणि किस लेखक की रचना है? यह सवाल तीन तरह से पूछा जा सकता है। चिंतामणि किस लेखक की रचना है? चिंतामणि के रचनाकार कौन है? चिंतामणि निबंध संग्रह के लेखक कौन है? ये तीनों सवाल आपसे पूछे जा सकते हैं घुमा फिरा कर। देखो यहां जो भी सवाल कर रहे हो आएगा वही। हो सकता है थोड़ा
घुमा दे। बस और कुछ नहीं बदलेगा। सेशन को सभी लोग शेयर कर दीजिए। सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर लिंक को लगा दीजिए बेटा जिससे सभी बच्चे इस क्लास का लाभ ले पाएं जो कि उनके लिए बहुत जरूरी है। सभी लोग समझ रहे हो कि नहीं? नहीं समझ रहे हो? तो समझ जाओ। चलो सेशन को शेयर कर दो और जितने बच्चे भी लाइव हैं सभी लोग सेशन को लाइक कर लेंगे एक बार सभी लोग एक बार सेशन को लाइक कर लेंगे बेटा जितने भी बच्चे हैं आज के क्लास के लाइक का टारगेट 10,000 लाइक
1 लाख लाइक है 10,000 कह दे रहा हूं छोटा अमाउंट कहता ही नहीं हूं मैं देखो जैसे मैं तुम लोगों से कहता हूं वैसे तुम लोग भी ईश्वर से मांगो और शाहरुख खान का एक डायलॉग है कि अगर हम कोई चीज शिद्दत से चाहें तो यह कायनात उसे मिलाने में लग जाती है अगर तुमने चाह लिया कि तुम टॉपर बनो किसी की क्या मजाल जो तुमको रोक पाए यार इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूं मत बुझाओ जब जलेगी आग तो मुझसे जलेगी ठीक है चलो सभी लोग इस सवाल का जवाब देंगे बहुत प्रसिद्ध
व्यक्ति हैं आचार्य रामचंद्र शुक्ल अच्छा इन्हीं के नाम पर शुक्ल युग का नाम पड़ा है। इन्हीं के नाम पर शुक्ल युग का नाम पड़ा है। यह भी याद रखना है। चलो अब आगे बढ़ते हैं। पर्दा कहानी के लेखक कौन हैं? सभी लोग कमेंट में बताएंगे। पर्दा कहानी के लेखक कौन हैं? कोई भी बच्चा गलत नहीं करेगा। कोई भी बच्चा सवाल गलत नहीं करेगा। पर्दा कहानी के लेखक कौन है? सबको बताना है। कोई भी बच्चा सवाल गलत ना करे। ध्यान रखो। चलो अगले सवाल पर चलते हैं। अगले सवाल पर चलते हैं। पर्दा कहानी के लेखक कौन
है? सभी लोग बताएंगे बेटा। पर्दा कहानी किसकी लिखी हुई है? तो पर्दा कहानी यशपाल की लिखी हुई है। बहुत प्यारी कहानी है। अगला सवाल डिप्टी कलेक्टर के लेखक कौन है? बताइए डिप्टी कलेक्टर के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। वासुदेव शरण अग्रवाल नहीं, प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी नहीं, डॉ. जय प्रसाद द्विवेदी नहीं। अमरकांत हैं। और यह भी बताओ तुम्हारे सिलेबस में अमरकांत द्वारा लिखी गई कौन सी कहानी है? तुम्हारे सिलेबस में अमरकांत द्वारा लिखी गई कौन सी कहानी है? यह भी बताना है तुम्हें। अगले सवाल पर जीवन और दर्शन के रचनाकार कौन है? जीवन और
दर्शन के। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर देंगे। जितना आंकड़ा अभी लाइव में है सभी लोग इसको डबल करेंगे अभी शेयर करके। एक-एक बच्चा सबको शेयर करेगा सभी लोग। चलो सभी लोग चलिए जीवन और दर्शन के रचनाकार कौन है? बेटा सभी लोग बताओ। जीवन और दर्शन कुछ महक रहा है। अच्छा ये महक रहा है। इसको बंद कर देते हैं। जी ओ भाई साहब बोर्ड बंद हो गया। चलिए सभी लोग बताते रहिए जीवन और दर्शन के रचनाकार कौन है? सब लोग बताते रहिए। बोर्ड में थोड़ा सा इशू आ गया है। कुछ मुझे लगता है
दोस्तों परेशान बिल्कुल भी नहीं होना है। जीवन और दर्शन के रचनाकार कौन है? बताइए। जीवन और दर्शन सबका कमेंट आना चाहिए। बस 30 सेकंड में यह ऑन हो जाएगा। इसकी चिंता आपको नहीं करनी है। ठीक है सभी लोग? और इस बात का ध्यान रखना है कि सभी लोग सेशन को शेयर कर दें। 15, 16, 17 ये तीन दिन हमारी तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना चलेगी। और इसी तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना के साथ कमेंट क्यों नहीं दिख रहा है भाई? और ये तुम्हारा बोर्ड भी बंद हो गया। ठीक है? तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना के
साथ तुम लोग अपनी पूरी तैयारी कर लोगे। ये सब चुनौतियां तो आती रहेंगी जीवन में। यह मत करो। हां। हां वहां से खोलना। चलो जीवन में ऐसी छोटी-छोटी चुनौतियां आती रहती हैं। तो इससे डरना घबराना बिल्कुल भी नहीं है भाई। चलो तो आपका 15, 16, 17 या तीन दिवसीय महारजन योजना चलेगी जिसके माध्यम से आप अपने पूरे सिलेबस को कवर कर पाएंगे और उसमें से कोई भी ऐसा क्वेश्चन नहीं होगा जो आपके बोर्ड एग्जाम से बाहर का हो या आपके पेपर में कोई ऐसा सवाल नहीं होगा जो आपके बोर्ड एग्जाम में ना आता हो। सभी
लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो बेटा तब तक यह खुल जाएगा। चलिए चलिए बिल्कुल खुल रहा है। देखो नोट 30 34 नोटबुक्स हूं। क्या हुआ? चल गया। अरे वाह भाई साहब कमेंट दिख रहा है मुझे। तो जश्न मनाने का समय है आ गया लोग हो गया हम अच्छा बहुत बड़ा पीपीटी है ना तो समय लगेगा खुलने में चलो चलो ये खुल जाएगा खुल जाएगा कब तक खुलेगा चारप दिन ना लग जाए भाई सभी लोग सेशन को शेयर कर दो तब तक बेटा और सभी लोग सेशन को लाइक कर जल्दी से सेशन को सभी
लोग लाइक कर लेंगे और सेशन को शेयर कर देंगे। आपकी जो 12 घंटे वाली क्लास है यह लास्ट तक चलेगी और हमें साथ में बैठ के देखना है। हमें साथ में बैठ के देखना है। ये यार ये तो काम गबड़ा गया। अरे भाई बहुत तेज चल रहा हूं मैं। हमारा बोर्ड भी नहीं संभाल पा रहा हमें। क्या करना चाहिए दोस्तों? घबराना नहीं है। बस हो जाएगा सब। कोई बात नहीं। कोई बात नहीं। तो कौन सा सवाल था हमारा? कौन सा सवाल था? जीवन और दर्शन के लेखक कौन है? सभी लोग बताइए। जीवन और दर्शन के
लेखक कौन है बेटा? सभी लोग बताएंगे। जीवन और दर्शन के लेखक कौन है? यह देखो वहीं से खुल गया। देखो सारे सवाल टिक हैं जो हमने करवाए हैं। बहुत तेज नहीं जाना है दोस्तों। ये लो जीवन और दर्शन के लेखक कौन है? डॉक्टर संपूर्ण। अरे वाह खुल गया। एक बार सभी लोग दिल रिएक्ट कर दो कमेंट सेक्शन में। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। तुम्हारी किस्मत में सितारे टांके जा चुके हैं दोस्तों। किस्मत तो खुलने वाली है। चलो सभी लोग दिल रिएक्ट करेंगे। आगे बढ़ेंगे। हिंदी साहित्य की भूमिका के लेखक कौन है? हिंदी साहित्य की भूमिका
के लेखक कौन है बेटा? डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी। अब जो समय खत्म हो गया मैं खराब हो गया। उसको कवर करेंगे ना। चलो जल्दी-जल्दी सवाल करेंगे। मैं तुम्हारा बोर्ड तोड़ दूंगा भाई। बाद में मुझे मत कहना। ऐसे मार दूंगा ऐसे पेन वैन। ठीक है। यह सवाल नहीं बदल जा रहा है दोस्तों। यह क्या हुआ? बस बस बस कुछ काल नेम भी आ गए हैं मेरी क्लास में तो इस वजह से थोड़ा डिस्टर्ब हो रहा है। घबराओ नहीं। घबराना बिल्कुल भी नहीं है दोस्तों। फिर से वही खुल गया क्या? एक ही बार क्लिक करना है कि
दोबारा। कुछ ज्यादा ही प्यार करता हूं इन लोगों से। तो कुछ ज्यादा ही लंबी पीपीटी बना लेता हूं। भूल गया? रुक जाऊं क्या थोड़ी देर? लुसुर लुसुर चल रहा है। घबराओ नहीं यार सब पूरा हो जाएगा यार। चलो सभी लोग बस जल्दी-जल्दी आंसर देते रहो। अगला सवाल कौन सा था? हिंदी साहित्य की भूमिका के लेखक कौन है? ये तो मैंने बता दिया था कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। सभी लोग बस जल्दी-जल्दी इसका आंसर करते रहो और तब तक जब तक क्लास नहीं चल रही है सेशन को शेयर करके आ जाओ। सभी लोग अपने WhatsApp
की स्टेटस पर लगा के आ जाओ जिससे जिससे सभी बच्चे आ जाए जल्दी-जल्दी। अरे यार दोस्तों कोई हैक कर लिया है झूठ बोल दूं क्या जैसे लोग रोते हैं ये कोई हैक कर लिया है क्लास आ गया आ गया आ गया भाई अब धीरे-धीरे कराऊंगा तेज-तेज़ नहीं दौडूंगा चलो आ जाओ अरे अरे दादा मेरा बोर्ड में हैंग हो गया। अब मैं क्या करूं? हजारी प्रसाद देवी अगला सवाल धीरे से। ब्राह्मण पत्रिका के संवाद धीरे से छूंगा। ब्राह्मण पत्रिका के संपादक हर एक बच्चे का कमेंट आना चाहिए। हर एक बच्चे का कमेंट कमेंट सेक्शन में आना
चाहिए और तुम लोग यार तुरंत चल देते हो। सभी लोग जल्दी से आ जाओ। सबका कमेंट मुझे कमेंट सेक्शन में मिलना चाहिए। हर एक बच्चा और सेशन को शेयर कर दो बेटा। क्योंकि यही समय है जब तुम्हें सबसे ऊपर दिखना है। यही समय है जब तुम्हें सबसे ऊपर दिखना है और सबसे ज्यादा सवाल हल करने हैं। ब्राह्मण पत्रिका के संपादक प्रताप नारायण में से ऐसा क्यों हो रहा है? मेरा लैपटॉप लाओ। आधा-आधा कर दूं? चलो तब तक तुम तब तक तुम अगला सवाल का जवाब दो। हिंदी प्रदीप के संपादक पत्रिकाओं के संपादन से हो तब
तक मैं पीपीटी को सेट कर देता हूं। आधा-आधा कर दूं ना। चलो तब तक हो जाएगा। तुम चिंता मत करो यार। ये सब तो मेरे बाएं हाथ का खेल है। यही तो मैं करता हूं। ये काम है मेरा दोस्तों। चलिए हिंदी प्रदीप पत्रिका के संपादक कौन है? हिंदी प्रदीप अथवा हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्रिका किस साहित्यकार द्वारा निकाली जाती थी? एक और सवाल जोडूंगा। किस युग की पत्रिका है? किस युग की पत्रिका है? यह भी बताना है। किस युग की पत्रिका है? तुम्हारे प्यार से कुछ भी संभव है। किस युग की पत्रिका है? यह भी
आपको बताना है। बेटा सभी लोग आंसर करो। तब तक मैं इसको दो भागों में फाड़ देता हूं। ठीक है? दो भागों में फाड़ देता हूं जिससे पार्ट वन। ठीक है? हो गया। अब चलो बताओ सभी लोग। तो ये बालकृष्ण भट्ट की पत्रिका है। ये पता है सबको बेटा। नेक्स्ट सवाल पे चलते हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना कौन सी है? स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना कौन सी है? सभी लोग बताएंगे। स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना कौन सी है? 500 पेज ठीक है। स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना कौन सी है? बताइए सभी लोग। स्वामी दयानंद सरस्वती
की रचना कौन सी है? बताइए। सभी लोग बताएंगे स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना कौन सी है? सभी लोग बताएंगे। हम नहीं वो तुम्हें नहीं करना है। स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना बेटा सत्यार्थ प्रकाश है। अगला सवाल डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना कौन सी है? सभी लोग बताएंगे डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना इसमें से कौन सी है? आवारा मसीहा विचार प्रवाह तट की खोज 10 द्वार से सोपान तक कौन सी रचना है उनकी सभी लोग बताएंगे यहां इसको पकड़ो यहां पे ऐसे डिलीट पे ऐसे क्लिक किया करो सारी जब हो जाए नीचे वाली सारी
डिलीट हो जाए ना 500 तक ऊपर है केवल डिलीट पे क्लिक करना है तुमको जब तक सारी नीचे डिलीट ना हो जाए डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना कौन सी है सभी लोग कमेंट करके बताएंगे बेटा आवारा मसीहा नहीं है विचार प्रवाह उनकी रचना है अगला सवाल निम्नलिखित में से प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना कौन सी है सभी लोग बताएंगे निम्नलिखित में से प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की कौन सी रचना है? हिंदी साहित्य की भूमिका साहित्य और समाज लैंग्वेज। अच्छा नहीं है। नहीं है। कौन सी रचना नहीं है उनकी? हर एक बच्चा बताएगा मजा
आ रहा है कि नहीं? और मजा नहीं भी आ रहा है तो बोर्ड एग्जाम तो फोड़ना है ना। इस बार यूपी में दबदबा होना चाहिए सबका। तो शेयर कर दो सभी बच्चों को। और जितने भी बच्चे लाइव हैं सभी लोग सेशन को लाइक कर लेंगे। हर एक बच्चा सेशन को लाइक कर लेगा। निम्नलिखित में से प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना नहीं है। तो भैया हिंदी साहित्य की भूमिका उनकी नहीं है। बाकी ये तीनों उनकी रचना है। तो ये वाला सवाल सही हो जाएगा यहां पे। अगले सवाल पर चलते हैं। क्या है अगला सवाल? निम्नलिखित
में से प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना नहीं है? चलो ये दो टाइप से सवाल आया। फिर से देख लो। ये भी वही सवाल है। कौन सी रचना प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की नहीं है। मेरे विचार उन्हीं की है। साहित्य और समाज उन्हीं की है। लैंग्वेज प्रॉब्लम इंडिया उन्हीं की है। धरती के फूल उनकी रचना नहीं है। सर हमें बताने का समय दो। चलो 10 सेकंड देता हूं सबको। 10 सेकंड वासुदेव शरण अग्रवाल की कृति टिक टिक वन टिक टिक टू टिक टिक थ्री टिक टिक फोर टिक टिक फाइव टिक टिक सिक्स टिक टिक सेवन
टिक टिक एट चलो जल्दी-जल्दी आंसर करो। सबको बताने का समय दे रहा हूं। वासुदेव सर अग्रवाल की कृति कौन सी है? मेरी असफलताएं नहीं। मातृभूमि नहीं। आधे अधूरे नहीं नहीं। आखिरी चट्टान नहीं। कौन सी है? मातृभूमि है। इतनी देर में तो आंसर दे दोगे ना। अगला सवाल मर्यादा पत्रिका का संपादन किसने किया? सभी लोग बताओ। चलो जल्दी-जल्दी बताओ। तुम्हें समय दे रहा हूं उत्तर देने का। मर्यादा पत्रिका का संपादन किसने किया? क्या हुआ भाई? कंप्लीट। तो कुछ मत करो तुम। अब जब हैंग होगा फिर से हम लोग 500 लगाएंगे। मोबाइल में आ गया। मेरे लैपटॉप
बंद कर दो। ओो सेट हो गया वो। मर्यादा पत्रिका का संपादन किसने किया? मर्यादा। अरे भाई एआई के जमाने का टीचर हूं। लाओ मुझे दे दो। मैं रख देता हूं। ऐसे थोड़ी ना है। बोर्ड पे लिख के पढ़ाऊंगा। चलो मर्यादा पत्रिका किसने प्रकाशित की? बताइए बेटा। मर्यादा पत्रिका का संपादन किसने किया? जयशंकर प्रसाद ने नहीं। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने नहीं। इन्होंने सरस्वती का किया। अज्ञेय ने नहीं। इन्होंने किसका किया? तार सप्तक का। मर्यादा पत्रिका डॉ. संपूर्णानंद की है। अगला सवाल हिंदी की प्रथम कहानी किसे माना जाता है? हिंदी की प्रथम कहानी किसे माना जाता है?
बेटा सभी लोग बताएंगे। हिंदी की प्रथम कहानी किसे माना जाता है? हर एक बच्चा बताएगा समय दे रहा हूं तुमको उत्तर देने का। हिंदी की प्रथम कहानी रानीत की कहानी धुलाई वाली इंदुमती 11 वर्ष का समय। सभी लोग बताओ किस कहानी को हिंदी की प्रथम कहानी माना जाता है? तो देखो वैसे तो माना जाता है इंदुमती को हिंदी की प्रथम कहानी। लेकिन जब तुम यूपीएससी वगैरह की तैयारी करोगे तो वहां हिंदी की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी हो जाती है। क्यों? इस पर बाद में चर्चा करेंगे। मजदूरी और प्रेम किस विधा की रचना है? मजदूरी
भी करना है और प्रेम भी करना है। वो शायरी सुनी है ना कि कुछ इश्क किया, कुछ काम किया। इश्क काम के आते आड़ा रहा। आड़े आता रहा। काम इश्क के आड़े आता रहा। हमने दोनों को अधूरा छोड़ दिया। तो मजदूरी और प्रेम किसकी रचना है? अच्छा विधा पूछा है। मजदूरी और प्रेम किस विधा की रचना है? तो बेटा ये निबंध है। मजदूरी और प्रेम क्या है? निबंध है। अगले सवाल पर चलते हैं। अगला सवाल क्या है? वासुदेव शरण अग्रवाल द्वारा लिखित निबंध राष्ट्र का स्वरूप किस निबंध संग्रह से लिया गया है? बताइए कौन सा
निबंध संग्रह भैया ये तो तुम नहीं जानतेगे कैसे जानोगे 12th में थोड़ी ना पढ़ते हो पढ़ते हो तो बता दो कौन सा आंसर सही है और जिसकोजिसको पता है सभी लोग लव रिएक्ट करेंगे दिल रिएक्ट कर देंगे कमेंट सेक्शन में सभी लोग आ जाओ बेटा जल्दी-जल्दी सभी लोग जल्दी-जल्दी क्लास में आ जाएंगे और एक बार सभी लोग क्लास को शेयर कर देंगे बेटा और सेशन को लाइक कर लेंगे सभी लोग क्लास को शेयर कर देंगे और सेशन को लाइक कर लेंगे। सभी लोग जितने भी बच्चे यहां पर क्लास को देख रहे हैं सभी लोग क्लास
को शेयर कर देंगे और सेशन को लाइक कर लेंगे। वासुदेव शरण अग्रवाल द्वारा लिखित निबंध राष्ट्र का स्वरूप किस निबंध संग्रह से लिया गया है? तो यह पृथ्वी पुत्र से लिया गया है। अगला सवाल भारतवर्षोन्नति कैसे होती है? हिंद की हिंदी गद्य की विधा बताइए। भारत की वर्षोन्नति कैसे हो सकती है? सबसे पहले बताओ लिखा किसने है इसको? सबसे पहले बताओ किसने लिखा है इसको? सभी लोग बताओ। किसने लिखा है इसको? तुम्हें पता है ना? भूत पिचास निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे नासे रोक दे किसने लिखा है चलो 10 के क्रॉस हो गया
भैया मैं लाइव वाइब देखता नहीं हूं सामने खोल के भी नहीं रखता हूं क्योंकि कमेंट सेक्शन खुला है और मैं अपने आप को देख रहा हूं बस मुझे इससे नहीं मतलब है लेकिन मैं चाहता हूं कि आज 500 लाइव हो अब तुम लोग कैसे करोगे मुझे नहीं पता कहां तक शेयर करोगे किसके पास भेजोगे मैं नहीं जानता तुम जानते हो यही है डिजिटल गुरु दक्षिणा गाइस आज तुम लोग तुम लोग दोगे डिजिटल गुरु दक्षिणा मुझे तो सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर लिंक लगा दो। भारतवर्ष कैसे हो सकती है? तो भैया यह भारतेंदु हरिश्चंद्र
का एक भाषण है। भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक भाषण है। एक भाषण जो उन्होंने किस मेले में दिया था? बरेली के मेले में। किस मेले में? 11th में था तुम्हारे। और बाद में ये निबंध के रूप में छप गया। अगला क्या है? निम्नलिखित में से हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना कौन सी है? निम्नलिखित में से कौन सी रचना हजारी प्रसाद द्विवेदी की है? आप लोगों को बताना है कल्पवृक्ष है, पूर्वोदय है, कल्पलता है और अंत में बताइए कौन सी रचना है? तो इसमें से केवल एक रचना कल्पता हजारी प्रसाद द्विवेदी की है। आप सबको पता है।
पोल लगवा दूं? पोल लगवा दूं क्या? पोल वाले में थोड़ी समस्या हो जाती है। बार-बार तुम लोग पोल पे आंसर करते हो। मैं चाहता हूं कि कमेंट सेक्शन में उत्तर लिखो। राजा भोज का सपना के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे। राजा भोज का सपना के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे। राजा भोज का सपना के रचनाकार कौन है? किशोरी लाल गोस्वामी, शिव प्रसाद सितारे हिंद, इंसा अल्लाखा या रामचंद्र शुक्ल? तो शिव प्रसाद सितारे हिंद राजा भोज का सपना के लेखक हैं। शिव प्रसाद सितारे हिंद राजा भोज का सपना के लेखक हैं। चलो सभी लोग
शेयर कर दो बेटा। एक बार सेशन को लाइक कर लेना। आज के क्लास की लाइक का टारगेट 1 लाख है। ना ना 1 लाख है। सभी लोग निंदा रस निबंध के रचनाकार। यह तो तुमको पता ही नहीं होगा यार। तुम क्लास 12th में थोड़ी ना पढ़ते हो। तुम क्लास 12th में पढ़ते ही नहीं हो। और अगर पढ़ते हो तो बता दो फिर। बता दो तो जानू कि निंदा रसबंध के रचनाकार कौन है? नहीं बता पाओगे। केवल मैं बता पाऊंगा। कहो तो बता दूं। हरिशंकर परसाई देखो बता दिया और तुम नहीं बता पाए। कोई बता पाया
क्या? जिसने बता पाया हो एक बार दिल रिएक्ट करो। अच्छा पोल लगवा दूं। आओ कंप्यूटर महोदय भाई साहब। कंप्यूटर महोदय आओ बैठो। आओ बैठो। आओ तुम्हारे जीवन को आज मैं काम में लगाता हूं। चलो पोल लगाओ दोस्तों। आओगे तो दो लोग आओगे। नहीं आओगे तो कोई नहीं आओगे दोस्तों। क्या बात? सेना लेके चलते हो तुम। चलो लगाओ। यार पढ़े लिखे हो भाई। रानी केत की कहानी के लेखक कौन है? सवाल बदल तो नहीं दिए हो। चलो रानी केत की कहानी के लेखक कौन है? सभी लोग बताओ। रानी केत की कहानी के लेखक कौन है? चलो
पोल लग गया। कोई दिक्कत नहीं है दोस्तों। सब सही है। ए बी सी डी ही देना है। रानी केत की कहानी के लेखक कौन है? मुंशी प्रेमचंद सदल मिश्र इंशा्लाह खान या मुंशी सदा सुखलाल कौन है? इंशा अल्लाह खान भैया। इंशा्लाह खान है। रानी केत की कहानी के लेखक? अगला सवाल गेहूं और गुलाब गेहूं और गुलाब रचना किसकी है? गेहूं और गुलाब रचना किसकी है? गेहूं बनाम गुलाब या गेहूं और गुलाब? चलो सबको समय दे रहा हूं। सबके पास 10-10 सेकंड का समय है उत्तर देने का। कोई बच्चा ऐसा ना हो जो उत्तर ना दे
और सेशन को सभी लोग शेयर कर देना बेटा। आज की क्लास मैं चाहता हूं यूपी बोर्ड की सबसे बड़ी क्लास बने। इससे बड़ी क्लास कोई होनी नहीं चाहिए। और एक बात तुमसे कह रहा हूं कि इसे उत्तर प्रदेश के हर घर के दरवाजे तक पहुंचाओ। यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। बाकी पूरा सिलेबस पढ़ाऊंगा। यह मेरी जिम्मेदारी है। मैं अपना काम करता हूं। तुम अपना काम करो। और इन हां चलो गेहूं और गुलाब किसकी है? रामवृक्ष बेनीपुरी की है। अगला सवाल जल्दी-जल्दी करते हैं। आरोहण प्रमुख स्वामी जी के साथ मेरा आध्यात्मिक सफर कृति के रचनाकार कौन है?
राहुल सांकृत्यायन है। डॉ. एप.पीजे अब्दुल कलाम है। फेणीश्वर नानाथ रेणु है, भारतेंदुच हैं। आरोहण प्रमुख स्वामी जी के साथ मेरा सफर की बात हो रही है। आरोहण प्रमुख स्वामी जी के साथ मेरा सफर किसकी रचना है? राहुल सांकृत्यायन की नहीं है बेटा। यह डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की है। किसकी है? डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की। देखो आंसर देते रहो। मैं पोल इसलिए नहीं लगवा रहा था क्योंकि मैं चाहता था कि तुम कमेंट सेक्शन में लिखो। कमेंट सेक्शन में लिखने से तुम्हारा तैयार हो जाएगा, रिवाइज हो जाएगा। नेक्स्ट लगाओ। नेक्स्ट लगाओ। ठीक ठीक। कोई दिक्कत नहीं।
भारतेंदु युग में किस पत्रिका का प्रकाशन हुआ है? सभी लोग कमेंट सेक्शन में लिखेंगे। भारतेंदु युग में किस पत्रिका का संपादन हुआ है? भारतेंदु युग में किस पत्रिका का प्रकाशन हुआ है? सभी लोगों को बताना है। सारे बच्चे कमेंट करके बताएंगे। भारतेंदु युग में किस पत्रिका का प्रकाशन हुआ है? आनंद कादंबिनी, हंस धर्म युग या दिनमान? आनंद कादंबिनी? बिल्कुल यह किसकी है? यह किसकी है? आनंद कादंबिनी बताइए। किसकी है? आनंद कादंबिनी किसकी पत्रिका है? मुझे कमेंट करके बताओ। बद्री नारायण चौधरी प्रेमघन बद्री नारायण चौधरी प्रेमघन की है। किसकी है? बद्री नारायण चौधरी प्रेमघन की। हंस
और धर्म युग और दिनमान ये किसकी पत्रिकाएं हैं? आपको कमेंट करके बताना है। सही आंसर ये हो जाएगा। अगला सवाल विकलांग श्रद्धा का दौर। निबंध संग्रह के लेखक कौन है? सभी लोग सेशन को शेयर करेंगे। और मैं तुम्हें प्रॉपर समय दे रहा हूं कमेंट करने का। विकलांग श्रद्धा का दौर। हां बिल्कुल। सबसे पहले हम गद्य का विकास पढ़ेंगे बेटा। उसके बाद गद्यांश पर आधारित सवाल पढ़ेंगे। उसके बाद लेखक का साहित्यिक परिचय देखेंगे और उसके बाद फिर से काव्य का विकास पढ़ेंगे और उसके बाद पद्यांश पर आधारित प्रश्न देखेंगे और फिर कवियों का लेख साहित्यिक परिचय
देखेंगे। समझ लो यही फ्लो रहने वाला है। प्रथम चरण का विकलांग श्रद्धा का दौर हरिशंकर परसाई की रचना है बेटा। अगला कबीर पुस्तक के लेखक कौन है? कबीर नामक एक पुस्तक लिखी गई। बहुत प्यारी सी पतली सी किताब है। कबीर पर वो किताब जब लिखी गई तब सबसे मजेदार किताब बनी। वो किसने लिखा है? हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है। अगला सवाल प्रगतिशील लेखक संघ का प्रथम अधिवेशन हुआ। कब हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का? सभी लोग सेशन को लाइक करते रहना। मैं सबका पीडीएफ भेज दूंगा। मुझे पता है कि तुम पढ़ नहीं पाओगे लेकिन फिर
भी मैं भेज दूंगा। मैं बस इतना कह रहा हूं कि क्लास साथ में करना। उसके बाद जो तुम्हारा मन करे वो करना। सेशन को एक बार लाइक कर लो सभी लोग जितने बच्चे लाइव हैं। प्रगतिशील लेखक संघ का प्रथम अधिवेशन कहां हुआ था? तो प्रगतिशील कब हुआ था? समय प्रगतशील लेखक संघ का प्रथम अधिवेशन कब हुआ था? मैंने तुमको बताया था कि प्रगतिशील लेखक संघ का प्रथम अधिवेशन 1936 में हुआ था। यहीं से प्रगतिवाद की शुरुआत मानी जाती है। यहीं से प्रगतिवाद की शुरुआत मानी जाती है और प्रगतिवाद का सीमांकन होता है 1936 से 1943
क्योंकि 1943 में तार सप्तक का प्रकाशन हुआ और तार सप्तक के प्रकाशन से यहां से प्रयोगवाद शुरू हो गया। तार सप्तक का प्रकाशन किसने किया? अज्ञेय ने किया। अज्ञेय ने किया। ठीक है? चलिए अगले सवाल पर चलते हैं। भारत की एकता के रचनाकार कौन है? डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, फणीश्वरनाथ रेडू, रामधारी सिंह दिनकर या वासुदेव शरण अग्रवाल। भारत की एकता के रचनाकार कौन है? यह सवाल बहुत सरल है। तुम्हें पता है। सर नमस्ते। खुश रहो बेटा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पीछे हो क्या? पीडीएफ मिल जाएगी। दो मत, लेकिन पहले क्लास कर लो। अभी दे दूं
क्या? क्लास बंद करके पीडीएफ दे दूं क्या? चलो। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो एक बार बेटा। सभी लोग सेशन को शेयर करेंगे। भारत की एकता के लेखक रचनाकार कौन है बेटा? वासुदेव शरण अग्रवाल हैं। अगला सवाल अतीत के चलचित्र किस विधा की रचना है? आपको बताना है। अतीत के चलचित्र किस विधा की रचना है? तुम लेखक भी बता सकते हो। अतीत के चलचित्र आर्ट्स वाले भी क्लास कर सकते हैं। यही ऑब्जेक्टिव उनमें भी आता है। ठीक है? साइंस वाले तो कर ही रहे हैं। चलो अतीत के चलचित्र रेखा चित्र है बेटा। अतीत के
बारे में बात हो रही है। अगला सवाल। खड़ी बोली हिंदी की प्रथम रचना खड़ी बोली की प्रथम गद्य रचना किसे माना जाता है? अथवा आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी गद्य की प्रथम पुस्तक माना है। किसे माना है? आंसर करते रहो क्योंकि यह आंसर जरूरी है। चाहे जिस प्रकार से सवाल पूछा जाए, तुम्हें इसका उत्तर देना आना चाहिए। तुम्हें बोर्ड एग्जाम में प्रश्न यहीं से आएंगे। ध्यान रखना एक भी प्रश्न बाहर से नहीं आने दूंगा। चंद छंद वर्णन की महिमा चाहे मुझे पेपर खुद ही छापना पड़े। खानावाना खा के बैठे हो कि नहीं? मम्मी से कह
देना कि माता जी आज थोड़ा पढ़ लेने दो। एग्जाम आ गया है। और मेरी प्यारी बेटियों और मेरी प्यारी बेटियों एक बात तुम समझ लो। आज घर में कोई तुमसे कोई काम करने को कहे तो उसे मेरे कैमरे के सामने लाकर खड़ा कर देना। मोबाइल की स्क्रीन के सामने और कमेंट कर देना। ठीक है कि कुछ काम करने को कह रहे हैं। बाकी मैं देख लूंगा। चंद छंद वर्णन की महिमा के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बेटा मैं चाहता हूं तुम कमेंट सेक्शन में आंसर करो। पोल पर आंसर करने से तुम कमेंट
सेक्शन में नहीं करोगे तो तैयार नहीं होगा। ए बी सी डी नहीं लिखना होता पेपर में। उत्तर लिखना होता है। घुमक्कड़ शास्त्र के रचनाकार कौन है? तुम्हारे 11th में एक पाठ था। अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा किसका था? अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा। किसका पाठ था? अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा बताइए। तो अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा राहुल सांकृत्यायन का है। यानी घुमक्कड़ शास्त्र भी राहुल सांकृत्यायन का है। क्योंकि यह पाठ इसी का हिस्सा था। अगला सवाल क्या है बेटा तुम्हारा कि रॉबर्ट नर्सिंग होम की रचना विधा क्या है? रॉबर्ट नर्सिंग होम की रचना विधा क्या है? तुम नहीं जानते हो। मैं 100%
श्योर हूं कि इस सवाल का तुम उत्तर नहीं दे सकते हो। क्या दे सकते हो? अगर हां तो कमेंट करके दे दो। राहुल सांकृत्यायन के बाद अगला सवाल रॉबर्ट नर्सिंग होम की रचना विधा क्या है? कहानी है, उपन्यास है, नाटक है या निबंध है? बताइए। अभी शुरुआत में मैंने थोड़ा हिंट दिया था। अगर तुम्हें पता हो तो शुरुआत में मैंने थोड़ा हिंट दिया था तुमको। शुरुआत में मैंने क्या हिंट दिया था? बताइए। शुरुआत में मैंने क्या हिंट दिया था तुम्हें? शुरुआत में मैंने हिंट दिया था बेटा कि यह एक निबंध है। कैसा? संस्मरणात्मक निबंध है।
अगला सवाल मुंशी प्रेमचंद ने उपन्यास लिखा है। कौन सा उपन्यास लिखा है मुंशी प्रेमचंद ने? चंद्रकांता नहीं। परीक्षा गुरु नहीं। नौका डूबी नहीं उन्होंने लिखा है गोदान उनके अन्य उपन्यासों के नाम है गगन निर्मला रंगभूमि ठीक है ये उनके अन्य उपन्यासों के नाम है अगला सवाल अशोक के फूल की रचना विधा क्या है अशोक के फूल ये पाठ तो तुमने पढ़ा होगा शायद अगर तुम कक्षा 12 में हो तो पढ़ा होगा क्या हो तुम क्लास 12th में कितने लोग क्लास 12th में है बताइए कमेंट करके सभी होंगे ना यार तो सभी लोग कमेंट कर करते
रहो। अशोक के फूल की रचना विधा क्या है? क्या है रचना विधा? अशोक के फूल की कविता है। नहीं भाई साहब रेखाचित्र भी नहीं है। कहानी भी नहीं है। अशोक के फूल निबंध है। कैसा निबंध है? फिर से मैं बता दूं। यह एक ललित निबंध है। कैसा निबंध है? ललित निबंध है। अगला सवाल। अगला सवाल। शुक्ल युगीन लेखक हैं। कौन है शुक्ल युग का लेखक? सभी लोग बताएंगे। शुक्ल युग का लेखक इसमें से कौन है? उदयशंकर भट्ट, महावीर प्रसाद द्विवेदी, राधा चरण गोस्वामी या फिर बालकृष्ण भट्ट कौन है? सभी लोग बताएंगे इसमें से कौन ऐसा
है जो शुक्ल युगीन लेखक हो? सभी लोग बताएंगे कमेंट करके कौन ऐसा है जो शुक्ल युगीन लेखक हो? क्या महावीर प्रसाद द्विवेदी हैं? नहीं भैया ये द्विवेदी युग के हैं। क्या तुम्हें पता है या नहीं? तो उदयशंकर भट्ट हो जाएंगे। शुक्ल युग के कौन है? उदयशंकर भट्ट। यह वाला टिक कर लो। अगला सवाल आवारा मसीहा के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे आवारा मसीहा के लेखक कौन है? सब लोग बताएंगे। कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर नहीं नहीं भैया प्रभाकर मिश्र बिल्कुल नहीं लक्ष्मी नारायण मिश्र नहीं नहीं विष्णु प्रभाकर हैं। आवारा मसीहा एक जीवनी है जिसके लेखक
विष्णु प्रभाकर हैं। क्लियर है सभी को? सभी लोग बताओ क्लियर है? अगला सवाल राष्ट्र का स्वरूप निबंध के लेखक कौन है? डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित दीनदयाल, उपाध्याय, डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी। अभी 10,000 लाइक भी कंप्लीट नहीं हुआ और आज के लाइ क्लास की लाइक का टारगेट 1 लाख है। तो जितने भी बच्चे लाइव हो सभी लोग सेशन को लाइक कर लो और सेशन को शेयर कर दो। आज 2 मिलियन पूरा होने वाला है। तो सब्सक्राइब जरूर कर लेना अगर आप नए बच्चे हो और मुझे पहली बार देख रहे हो। यह परिवार
अब तुम्हारा हो गया है। तुम ही इसके कर्ताधर्ता हो। तो लाइक कर लो। राष्ट्र का स्वरूप निबंध के लेखक कौन है? तुम्हें नहीं पता है। मैं बता देता हूं। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल भाग्य और पुरुषार्थ के लेखक कौन है? देखो तुम्हारी कहानियों के लेखकों से भी सवाल बनता है। अब भाग्य और पुरुषार्थ तुम्हारे पाठ में एक कहानी है। क्या नाम है उसका? ध्रुव यात्रा। उसके लेखक कौन है बेटा? उसके लेखक हैं जैनेेंद्र कुमार। कौन है? जैनेेंद्र कुमार और इसके भी लेखक जैनेंद्र कुमार ही हैं। अगला सवाल ध्रुवस्वामिनी की रचना विधा क्या है? ध्रुवस्वामिनी क्या है?
एक ऐतिहासिक क्या है? नाटक के उपन्यास ऐतिहासिक नाटक है। अच्छा इसके लेखक कौन है? इस नाटक के रचनाकार कौन है? मुझे बताओ 2 मिलियन होने वाला कितना बचा है? कहीं अचानक से ना हो जाए और मैं जान ही ना पाऊं तब क्या होगा? चलो ध्रुवस्वामिनी की रचना विधा क्या है बेटा? तो ध्रुवस्वामिनी की रचना विधान नाटक है। अगला सवाल आधुनिक हिंदी एकांकी का जनक किसे माना जाता है? या हिंदी एकांकी के जनक माने जाते हैं। अब तुम्हें अगर याद हो तो कक्षा नौ या 10 में तुमने एक एकांकी पढ़ी होगी जिसका नाम था उसमें पन्ना
धाए थी दीपदान उसका नाम था दीपदान और उसे लिखा था डॉ रामकुमार वर्मा ने राम कुमार वर्मा ने और भाई साहब यही रामकुमार वर्मा एकांकी के जनक भी माने जाते हैं। चलिए अगला सवाल क्या है? बाणभट्ट की आत्मकथा किस विधा की रचना है? अब यह सवाल तो तुमको आता ही नहीं होगा क्योंकि मैंने केवल 10 ही बार पढ़ाया है इसको तो तुमको कहां से आता होगा? जो सवाल मैंने केवल 10 बार पढ़ाया है वो सवाल तुमको कैसे आ सकता है? सभी लोग एक बार कमेंट कर दो। सभी लोग एक बार कमेंट करके मुझे बता दो
और सेशन को शेयर करते रहो। सभी लोग सेशन को शेयर कर लेंगे और सेशन को लाइक कर लेंगे। किस विधा की रचना है बाणभट्ट की आत्मकथा? तो बेटा बाणभट्ट की आत्मकथा एक उपन्यास है। इसे किसने लिखा है? सभी लोग बताओ। किसने लिखा है? हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है। किसने लिखा है बेटा? हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है। ध्यान रखना इस बात को। अगला सवाल सुख सागर के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। सुख सागर के लेखक लल्लू लाल, मुंशी सदा सुख लाल, इंशा्लाह खान, सदल मिश्र। हां इस बात को ध्यान रखना भाई 15 फरवरी,
16 फरवरी और 17 फरवरी। ठीक है? ये तीन दिन तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना चलेगी बेटा। कोई नई रफ खरीद लेना, नई कॉपी खरीद लेना। जो मन में आए कर लेना। बस यह तीन दिन मुझे दे देना। यह तीन दिन मुझे दे देना। मैं इस तीन दिन में तुम्हारा हिंदी का एक-एक टॉपिक कवर करवा दूंगा। आज की क्लास वार्म अप है। आज की क्लास उस लड़ाई की शुरुआत है और आज के बाद इन तीन दिनों में हम लोग वो झंडे गाड़ेंगे जो आपके बोर्ड एग्जाम में 95 प्लस लिख देगा। चलो और तुमको पता है जिसका
हिंदी में 100 में 100 आएगा उसे एक बहुत अच्छा सा फोन मिलेगा मेरी तरफ से। कौन सा? यह वाला नाम नहीं लूंगा दोस्तों। कुछ लोग तो इतने दाम में सोचते हैं कि फर्स्ट रैंक का टॉपर खरीद लूंगा। खैर खरीदने वालों का क्या है पढ़ा पाते नहीं। चलो कोई बात नहीं। सुख सागर सुख सागर की बात करते हैं दोस्तों। सुख सागर की बात करते हैं। सुख सागर की बात करते हैं और सुख सागर के लेखक की बात कर लेते हैं। तो भैया सुख है अगर तो सुख किसके पास होगा? जिसके पास सदा सुख रहता हो। जिसके
पास हमेशा सुख रहता हो वही सुखी रहेगा। अगला सवाल अज्ञेय की रचना कौन सी है? पृथ्वी पुत्र नहीं है। विचार प्रवाह भी नहीं है। मेरे विचार भी नहीं है। यह शेखर एक जीवनी जो है ये एक प्यारा सा उपन्यास है और जिसको लिखा है सच्चिदानंद हीरानंद वाज सैनज्ञ ने। अगला सवाल रामचंद्र शुक्ल की रचना कौन सी है? अच्छा मुझे दिल से ईमानदारी से कमेंट करके बताओ कि इस बार कितने प्रतिशत नंबर का टारगेट कर रहे हो? कितने प्रतिशत नंबर का टारगेट कर रहे हो? कितने प्रतिशत टारगेट है तुम्हारा? ईमानदारी से बताना सभी बच्चे कमेंट करना
कि कितने प्रतिशत नंबर इस बार टारगेट कर रहे हो। रामचंद्र शुक्ल की रचना कौन सी है? इसमें से आप लोगों को बताना है क्योंकि जरूरी है अगर पहले से अगर पहले से वो चीज तुम करके नहीं रखोगे तो परेशान हो जाओगे। ठीक है? पहले से अगर तुमने तय कर रखा है तो सब अच्छा होगा। रामचंद्र शुक्ल की रचना कौन सी है बेटा? त्रिवेणी है। अगला सवाल पुनर्नवा उपन्यास के लेखक कौन है? सभी लोग बताइए। पुनर्नवा उपन्यास के लेखक कौन है? तो पुनर्वा उपन्यास के एक बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। महावीर प्रसाद द्विवेदी टिक कर दूं? नहीं
नहीं वादेव शरण अग्रवाल नहीं। रामवृक्ष बेनीपुरी भी नहीं है भैया। हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। यह वाला सही होगा। पुनर्नवा के लेखक यही हैं। समझ लो इस बात को समझ रहे हो? जितना भी तुम आज कमेंट कर दोगे उतना जान लो तुम्हारे मस्तिष्क में जुड़ जाएगा। डॉक्टर संपूर्णानंद को मंगला प्रसाद पारितोषिक पुरस्कार किस रचना पर मिला? मंगला प्रसाद पारितोषिक पुरस्कार किस रचना पर मिला? डॉक्टर संपूर्णानंद को तो किस पर मिला था? गणेश पर। नहीं नहीं चिद्विलास पर। बिल्कुल नहीं। आर्यों का आदि देश पर। नहीं नहीं। किस पर मिला था? समाजवाद पर मिला था। बेटा कितने बच्चों
को यह सवाल पता था? एक बार दिल रिएक्ट करके बताएंगे। कितने बच्चों को यह सवाल पता था? एक बार दिल रिएक्ट करके बताएंगे सभी लोग। अगले सवाल पर चलते हैं बेटा। कफ़न किस विधा की रचना है? कफ़न की बात करते हैं। कफ़न किस विधा की रचना है? कफ़न किसका लिखा हुआ है? मुंशी प्रेमचंद की कहानी है। मुंशी प्रेमचंद। उसमें दो पात्र हैं। घीसु और माधव। क्या नाम है पात्रों का? घीसु और माधव। तुम में से कितने बच्चे यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं? मुझे बताओ। यूपीएससी की तैयारी कितने बच्चे करना चाहते हैं? यूपीएससी की तैयारी
में एक ऑप्शनल सब्जेक्ट लेना पड़ता है। कौन सा सब्जेक्ट है? ऑप्शनल। उसमें तुम लोग ले लेना हिंदी और मैं तुम्हारे पूरे हिंदी की तैयारी करवा दूंगा। वहां तुम्हें घीसु और माधव मिलेंगे। वहां तुम्हें मिलेंगे तुम्हारे घीसु और माधव। कफ़न किस विधा की रचना है बेटा? तो कफ़न एक कहानी है। ठीक है? कफ़न एक कहानी है। अगले सवाल पर चलते हैं। रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित कहानी कौन सी है? ये बड़ा इंटरेस्टिंग मामला है। क्या हुआ कि रामचंद्र शुक्ल से किसी ने पूछा कि भैया हिंदी की प्रथम कहानी कौन सी है? तो इनको कोई कहानी बढ़िया मिली
नहीं हिंदी की प्रथम कहानी। तो इन्होंने क्या किया? इन्होंने एक कहानी लिख डाली खुद से। कहानी का नाम दिया 11 वर्ष का समय। लेकिन जब सुबह स्कूल पहुंचे और पता लगा कि प्रथम कहानी बच्चों को पढ़ाई जाएगी। 11 वर्ष का समय। तब तक किसी ने आकर बताया कि अरे अरे एक माधवराव सपरे हैं मध्य प्रदेश की एक पत्रिका में। उनकी एक कहानी छपी है। नाम है टोकरी भर मिट्टी। तो थोड़ा दुखी हो गए। लेकिन उनकी रामचंद्र शुक्ल की कहानी क्या थी? 11 वर्ष का समय। बहुत अच्छी कहानी है। मतलब बहुत अच्छी नहीं कह सकते लेकिन
कहानी कला के तत्वों को समावेशित करती कहानी है। अंधेर नगरी के रचनाकार कौन है? अंधेर नगरी, चौपट राजा, टके शेर बाजी, टके शेर ख्वाजा। कौन है इसके रचनाकार? सभी लोग बताओ। जलेगी लगेगी आग तो आएंगे घर कहीं जद में इस बस्ती में केवल हमारा मकान थोड़ी है अगर पढ़ोगे और क्लास शेयर होगी तो पूरा उत्तर प्रदेश देखने आएगा केवल तुम ही थोड़ी ना हो सभी लोग अपने-अपने जिलों का नाम एक बार कमेंट करो कमेंट सेक्शन में चलो और एक बार सभी लोग सब्सक्राइब कर लो बेटा सेशन को लाइक भी कर लेना 2 मिलियन आज तुम
ही लोग पूरा कर दो अंधेर नगरी के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे। अंधेर नगरी के रचनाकार कौन है बेटा? सभी लोग बताएंगे। तो एक लाइन है तुमने कक्षा पांच में पढ़ा होगा। अंधेर नगरी चौपट राजा टके शेर भाजी टके शेर खाजा ये लिखा है भारतेंदु हरिश्चंद्र ने। अगला सवाल पंडित प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्रिका कौन सी है? सभी लोग बताएंगे। पंडित प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्रिका कौन सी है? तो हिंदी प्रदीप किसकी है? बालकृष्ण भट्ट की है। बालकृष्ण भट्ट की है। ब्राह्मण किसकी है? प्रताप नारायण मिश्र की है। सरस्वती किसकी है? सरस्वती
पत्रिका किसकी है? सभी लोग मुझे कमेंट करके बताओ। सरस्वती पत्रिका किसकी है? बेटा सभी लोग मुझे बताएंगे। कमेंट करके सरस्वती पत्रिका किसकी है? सब लोग बताएंगे। कोई ऐसा बच्चा ना हो जो सरस्वती पत्रिका के बारे में मुझे ना बता रहा हो। बताइए सरस्वती पत्रिका किसकी है? तो भैया सरस्वती पत्रिका बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति की है। महावीर प्रसाद द्विवेदी और महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 1903 में इसका प्रकाशन किया। यह द्विवेदी युग की पत्रिका है। यह द्विवेदी युग की पत्रिका है। यह दोनों भारतेंदु युग की हैं। और मर्यादा पत्रिका डॉक्टर संपूर्णानंद की है। किसकी है? डॉक्टर संपूर्णानंद की
है। पत्रिका से सवाल आता है इसलिए इसे नोट कर लेना अलग कहीं। अगला सवाल शिक्षा का उद्देश्य निबंध के लेखक कौन है? कक्षा 11 में यह निबंध तुम्हारे था। कक्षा 11 में किसने लिखा है? डॉक्टर संपूर्णानंद ने लिखा है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के जीवन में क्या होना चाहिए? अगला सवाल रामचंद्र शुक्ल के निबंधों का संग्रह क्या है? चिंतामणि अतीत के चलचित्र भाग्य और पुरुषार्थ पद के साथी कौन सा है उनके निबंधों का संग्रह? तो निबंधों का संग्रह कौन सा है? एक बार मुझे कमेंट करके बताओ और सभी लोग सेशन को लाइक कर लो।
अभी 10,000 लाइक पूरा नहीं हुआ और आज की क्लास के लाइक का टारगेट 1 लाख है। 10,000 पूरा हो गया क्या? अरे इसको 11,000 करो भाई जल्दी से। चलो रामचंद्र शुक्ल के निबंधों का संग्रह बेटा क्या है? चिंतामणि है। अगला सवाल मोहन राकेश रचनाकार हैं। मोहन राकेश की कौन सी रचना है? अच्छा किस समय के रचनाकार हैं? पूछ रहा है। तो मोहन राकेश किस समय के रचनाकार हैं? मोहन राकेश बहुत बाद के रचनाकार हैं। ये मतलब वही शुक्ल युग के बाद के हैं। तो ये शुक्लोत्तर युग में आएंगे बेटा मोहन राकेश। इनकी एक बहुत प्रसिद्ध
रचना है। क्या है? मोहन राकेश नाटक बहुत अच्छा लिखते हैं। कालिदास पर इनका एक नाटक है। नाम भूल रहा हूं मैं। उसमें एक स्त्री पात्र है। वो कहती है कि मां मैंने भावना में भावना का वर्णन किया है। आगे बढ़ो। अगला सवाल का उत्तर दो। कितने प्रतिशत सवाल सही हो रहे हैं तुम्हारे? कितने प्रतिशत सवाल सही हो रहे हैं? मुझे बताते रहो। सन्नाटा के लेखक कौन है? सन्नाटा भैया एक पत्र छपता था बहुत पहले और लेखक लोग उससे डर जाया करते थे। इतनी खतरनाक बातें उसमें होती थी। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो जल्दी
से और सेशन को लाइक कर लो और चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना क्योंकि आज 2 मिलियन करना है। अज्ञेय की रचना है। अगला सवाल संपूर्णानंद द्वारा प्रकाशित पत्रिका कौन सी है? संपूर्णानंद द्वारा प्रकाशित पत्रिका। डॉ. संपूर्णानंद ने किस पत्रिका का संपादन किया? धर्म युग का धर्मवीर भारती ने किया। हंस का प्रेमचंद ने किया। सरस्वती का हजारी प्रसाद द्विवेदी ने किया। मर्यादा का संपूर्णानंद ने किया। तो यह वाला उत्तर सही हो जाएगा। अगला सवाल निज भाषा उन्नति है सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे नहीं कोसूल। तो इस रचना की यह काव्य
पंक्ति किसकी है? निज भाषा उन्नति है। किसकी भाषा उन्नति करेगी? तो भारतेंदु हरिश्चंद्र की भाषा उन्नति करेगी और वही सब उन्नतियों का मूल होगा। आंसर सबको करते रहना है। ना गलत नहीं गलत नहीं चलेगा। नहीं आता है तो लिख लो एक बार लेकिन गलत नहीं चलेगा। बहादुर कहानी के लेखक कौन है बेटा? सभी लोग बताएंगे। बहादुर कहानी के लेखक। ये कहानी तो तुमने पढ़ी ही नहीं होगी। पढ़ी है क्या? ये कहानी पढ़ी है क्या? सभी लोग बताओ। ये कहानी पढ़ी है क्या? बहुत प्यारी कहानी है। एक दिल बहादुर नाम का लड़का है जो नौकरी करने
के लिए आया हुआ है। कहां पर? नेपाल से भारत में एक मध्यवर्गीय परिवार में पहले प्रेम मिलता है। बाद में मारापीटी गाली गलौज मिलता है। बहुत डांटा जाता है। चोरी का इल्जाम भी लगता है। जो लोग उसे नौकर रखे हैं बड़े छोटे दिल के लोग हैं। बहुत पैसा नहीं है तो उसकी सैलरी देना भी बंद कर देते हैं। ठीक है बेटा देखो आज ये ऑब्जेक्टिव की अंतिम क्लास है। तो अब आप यह कह रहे हो कि सर ऑब्जेक्टिव कब तक कराएंगे? आप पहले गद्य का विकास के ऑब्जेक्टिव कर लोगे। गद्य का विकास के मुझे लगता
है 210 या 205 ऑब्जेक्टिव हैं तो हम सारे कर लेंगे आज ही कर लेंगे जिससे दोबारा हमें ना करना पड़े कई बार थोड़ी ना तैयारी कर पाओगे और हर दिन क्या एक ही चीज पढ़ोगे क्या बेटा हर दिन एक ही चीज पढ़ोगे क्या तो इसके कौन हो जाएंगे बेटा इसके अमरकांत हो जाएंगे बहादुर कहानी के लेखक अमरकांत हो जाएंगे अगला सवाल बालकृष्ण भट्ट द्वारा संपादित पत्रिका कौन सी है इसमें से बालकृष्ण भट्ट द्वारा संपादित पत्रिका कौन सी है सभी लोग बताइए और जल्दी-जल्दी आंसर कीजिए भाई सभी लोग बताइए और जल्दी-जल्दी आंसर कीजिए। बालकृष्ण भट्ट द्वारा
संपादित पत्रिका कौन सी है? कव वचन सुधार नहीं। हिंदी प्रदीप उनकी संपादित की हुई पत्रिका है। अगला सवाल हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास कौन सा है? बताइए। त्यागपत्र रंगभूमि पुनर्नवाद तट की खोज हजारी प्रसाद द्विवेदी का कौन सा उपन्यास है? आप सभी लोग बताएंगे। अभी मैंने थोड़ी देर पहले बताया था। अभी मैंने थोड़ी देर पहले आपको बताया था कि हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास पुनर्नवा है। क्या है? पुनवा हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास है। अगला अंधा युग रचना के लेखक कौन है? अंधा युग जो आपकी रचना है उसके लेखक कौन है? सभी लोग आंसर करेंगे।
जो जो क्लास करने का में एंजॉय कर रहे हो एक बार कमेंट सेक्शन में दिल रिएक्ट करेंगे। ठीक है? चलिए अंधा युग रचना के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। अंधा युग रचना के लेखक कौन है? तो अंधा युग के रचना के लेखक बेटा धर्मवीर भारती हैं। अगला सवाल कहते क्या है? चिंतामणि की गदविधा क्या है? चिंतामणि। चिंतामणि किसका है? मैंने अभी बहुत बार बताया है रामचंद्र शुक्ल का है चिंतामणि। किसका है? रामचंद्र शुक्ल का। अब रामचंद्र शुक्ल की रचना अगर चिंतामणि है तो ये क्या होगी? निबंध संग्रह होगी। अगले सवाल पर चलते हैं। वासुदेव
शरण अग्रवाल लेखक हैं। किसके लेखक हैं वासुदेव शरण अग्रवाल? अकाल पुरुष गांधी के, भारत की एकता के, विवर्तक के या धरती के फूल के? भारत की एकता के लेखक हैं। आज के सारे सवाल तुम्हारे जीवन में सर मम्मी काम को बोल रही है। अरे माता जी पढ़ लेने दो। दो-तीन दिन की बात है। काम करवा लेना। जिंदगी भर काम है करवाना है। भाई यह वीडियो दिखा दो। उनको कह दो कि ऋषि सर हाथ जोड़ रहे हैं कि पढ़ लेने दो। माता जी बच्चों को हैं। मतलब क्या ही कहें यार महिला आंचल उपन्यास किसका है कैसा
उपन्यास है बेटा आंचलिक है ऐतिहासिक है मनोवैज्ञानिक है धार्मिक है आंचलिक है क्योंकि इसमें गांव क्षेत्र की कहानी है अंचल की कहानी है अगला सवाल की बात करते हैं निंदा रस निबंध के लेखक कौन है निंदा रस की रचना किसकी रचना है या निंदा रस के लेखक कौन है सभी लोगों को बताना है सभी लोग बताओ जल्दी-जल्दी इसका आंसर करेंगे सब लोग सभी लोग जल्दी-जल्दी इसका आंसर करेंगे बहुत जल्दी हम लोग ऑब्जेक्टिव खत्म करने वाले हैं बेटा। बस मुश्किल से 20 मिनट आपका ऑब्जेक्टिव और चलेगा। निंदा रस निबंध के लेखक कौन है? लेकिन यह 20
मिनट अगर कोई ऑब्जेक्टिव मैंने छोड़ दिया और एग्जाम में वही आ गया तब तो तुम आ जाओगे कहने कि सर पढ़ाया नहीं था। अभी कह रहे हो कि नहीं सर ऑब्जेक्टिव थोड़ा ही करा दो। क्यों थोड़ा करा दें? चलो सभी लोग। निंदा रस निबंध के लेखक कौन है? बेटा? निंदा रस निबंध के लेखक कौन है? निंदा रस निबंध के लेखक हरिशंकर परसाई हैं। चलो अगले सवाल पर। अगला सवाल। अगला सवाल एक भी सवाल छूटना नहीं चाहिए। द्विवेदी युग के साहित्यकार कौन है? द्विवेदी युग के साहित्यकार कौन है? डॉ. श्याम सुंदर दास, भगवती चरण वर्मा, भारतेंदुच
या यशपाल। तो डॉ. श्याम सुंदर दास द्विवेदी युग के रचनाकार हैं। अगला क्या है बेटा? शुक्लोत्तर युगी इन रचना इसमें से कौन सी है? कौन सी रचना इसमें से ऐसी है जो शुक्लोत्तर युग में लिखी गई है? सभी लोग बताएंगे। तो भैया रेल का टिकट विकट खेल। रेल का विकट खेल कंकाल गोदान निराला की साहित्य साधना ये वाला जो आपका है ये शुक्लोत्तर युग की रचना है। परीक्षा गुरु रचना विधा है। परीक्षा गुरु क्या है? तो बेटा यह हिंदी का प्रथम मौलिक उपन्यास है। ठीक है? सभी लोग शेयर करके आओ यार। जितने भी लोग YouTube
पर इस समय मोबाइल चला रहे हो सबको बुला के ले आओ। सबको बुला के ले आओ बेटा। सबको बुला के ले आओ। चलो बस 20 मिनट और बस 20 मिनट जोश के साथ सभी लोग एक बार कमेंट करो। सभी लोग एक बार कमेंट करो कि इस बार मैं बोर्ड एग्जाम में टॉपर बनूंगा। सभी लोग कमेंट करो बस बस 20 मिनट और उसके बाद ऑब्जेक्टिव खत्म हो जाएगा। परीक्षा गुरु की रचना क्या है? तो यह हिंदी का प्रथम मौलिक उपन्यास है। अगला सवाल जहाज का पंछी रचना जहाज का सभी लोग बताएंगे। देखो अब कौन सा सवाल
आ जाएगा तुम्हें पता है? पता है बता सकते हो। ठीक है? चलो। जहाज का पंछी क्या है बेटा? तो जहाज का पंछी आपकी कौन सी रचना है? जहाज का पंछी कहानी है? नई नहीं उपन्यास है। सभी लोग ध्यान देंगे एक-एक सवाल पर। हिंदी का प्रथम नाटक कौन सा है? अब यह सवाल अगर तुमको नहीं पता है तो परेशान हो जाओगे। देखो हिंदी की प्रथम कहानी क्या है? सभी लोग कमेंट करके बताओ। हिंदी का प्रथम उपन्यास क्या है? कमेंट करके बताओ। हिंदी का प्रथम नाटक कौन सा है? नहुस है। चलो अब हिंदी की प्रथम कहानी और
हिंदी का प्रथम उपन्यास कमेंट करके सभी लोग बताओ। ठीक है? चलिए अगला सवाल। कन्यादान निबंध के लेखक कौन है? मोहन राकेश, भारतेंदु हरिश्चंद्र, रामवृक्ष बेनीपुरी या सरदार पूर्ण सिंह। कन्यादान के लेखक कौन है बेटा? तो कन्यादान के लेखक कौन है? सरदार पूर्ण सिंह हैं कन्यादान के लेखक। अगला सवाल शेखर एक जीवनी रचना की विधा क्या है? शेखर एक जीवनी रचना की विधा उपन्यास है। चलो जल्दी-जल्दी करा देता हूं। ऑब्जेक्टिव तुम्हारे जल्दी-जल्दी करा देता हूं। बस 15 से 20 मिनट में सारे ऑब्जेक्टिव खत्म हो जाएंगे। मैं एक भी ऑब्जेक्टिव नहीं छोडूंगा। बाकी अगर तुम्हें नहीं पास
होना है तो कोई बात नहीं है। चलिए अगले सवाल पर चलते हैं। कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर की रचना कौन सी है? विचार प्रवाह, माटी हो गई, सोना। कौन सी रचना उनकी है? तो बहुत सिंपल सा सवाल है। उनका उनकी रचना के बारे में सबको पता है। माटी हो गई सोना उनकी रचना है। सभी लोग इस बात को ध्यान में रखेंगे। माटी हो गई सोना उनकी रचना है। ठीक है? माटी हो गई सोना उनकी रचना है। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो। हां, दो मिनट हो गए मैं जानता हूं। माटी हो गई, सोना
उनकी रचना है। चलिए अगला सवाल। शांतनिकेतन में हिंदी के अध्यक्ष पद पर कौन थे? शांतनिकेतन जो कि बंगाल में था वहां पर हिंदी के अध्यक्ष के पद पर डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी थे। अगला सवाल राहुल सांकृत्यायन का वास्तविक नाम क्या है? राहुल सांकृत्यायन का वास्तविक नाम क्या है? ठीक है। 2 मिलियन हो गए। अच्छा 2 मिलियन हो गए क्या? अभी नहीं हुए हैं भाई। अभी नहीं हुए हैं। सेशन को एक बार शेयर कर दो सभी लोग और बच्चों को बुला लो। सबसे सब्सक्राइब करवा दो हो जाएंगे। अभी नहीं हुए हैं दो मिनट। चलो राहुल सांकृत्यान
का वास्तविक नाम क्या था बेटा? केदारनाथ पांडे था। अगला रसज्ञ रंजन कृति के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे रसग रंजन कृति के लेखक कौन है? जल्दी-जल्दी करेंगे। महावीर प्रसाद द्विवेदी हैं। अगला सवाल क्या है बेटा? महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित पत्रिका कौन सी है? कवि वचन सुधा किसकी है? भारत इंद्र की है। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती का संपादन किया। किसका किया? सरस्वती का संपादन किया। हां, सभी लोग लाइक कर लो, शेयर कर दो। 2 मिलियन हो जाए तुरंत। ठीक है? बोर्ड वाले बिल्कुल। कौन-कौन इस बार बोर्ड परीक्षा को हैक करने जा रहा है?
कौन-कौन इस बार बोर्ड परीक्षा को हैक करने जा रहा है? बिल्कुल जाके हैक कर लो बोर्ड परीक्षा को बेटा जाओ जाओ लेकिन कहां जाओगे मेरे ही पास तो आओगे बोर्ड परीक्षा हैक करने हां तो यहीं आओ यही हैक करेंगे सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन किस युग में हुआ अब यह सवाल किसको नहीं आता है यार द्विवेदी युग में हुआ अगला सवाल यदि गद्य कवियों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है यह कथन किसका है किसका ही होगा विद्वान आदमी का होगा आचार्य रामचंद्र शुक्ला का और यह सवाल आया है तुम्हारे बोर्ड एग्जाम में तुम्हारे
बोर्ड एग्जाम में यह सवाल आया है बेटा अगर तुम सन कहोगे तो वो भी मैं खोज करके दिखा दूंगा तुमको यह सवाल आया है अगर तुम 2025 वाला पेपर देखोगे तो तुम्हें मिल जाएगा। अगला सवाल बाल बोधिनी के संपादक कौन है? बाल बोधिनी पत्रिका के संपादक कौन है? बताइए पावर ऑफ विद्याल पावर ऑफ यूपी बोर्ड पावर ऑफ विद्याल कंट्रोल हमारा ही है दोस्तों। बालबोधनी के संपादक कौन है? तो बालबोधनी पत्रिका प्रकाशित की गई बालाबोधनी पत्रिका यह महिला उत्थान के लिए थी महिला उत्थान के लिए पत्रिका प्रकाशित हुई थी और इसको प्रकाशित किया भारतेंदु हरिश्चंद्र ने।
अगला सवाल नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना कब हुई? तो नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना बेटा द्विवेदी युग में हुई थी। नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना। द्विवेदी युग के आसपास ही हुई थी। इसलिए हम लोग इसे द्विवेदी युग में मानते हैं। अच्छा अगला सवाल सरस्वती के प्रथम संपादक कौन थे? अब यह सवाल मैं बार-बार जब भी मैं क्लास लिया हूं और मैंने तुमसे कहा है कि जब भी सरस्वती का प्रथम संपादक पूछा जाए तो तुम्हें क्या बताना है? श्याम सुंदर दास बताना है। श्याम सुंदर दास ने 1903 में महावीर प्रसाद द्विवेदी को ट्रांसफर कर दिया। 23
24 साल का चरहरा नौजवान रेलवे की नौकरी छोड़ के आता है और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक सूर्य के समान चमकता है। ठीक है? एक ऐसा सूर्य जिसकी जिसके किरणों का प्रकाश मात्र पाकर के बहुत सारे बड़े-बड़े कवियों ने अपने आप को निखार लिया। मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्या सिंह, उपाध्याय, हरऔद ये सब बड़े लोग थे। चलो चलिए अगले सवाल की बात करते हैं। बेटा। परीक्षा गुरु के लेखक कौन है? परीक्षा गुरु के लेखक कौन है? परीक्षा गुरु के लेखक कौन है? अब यह बताइए। परीक्षा गुरु क्या है? हिंदी का प्रथम मौलिक उपन्यास है। हिंदी का
प्रथम मौलिक उपन्यास है। क्या है बेटा? प्रथम मौलिक उपन्यास है। है कि नहीं है? कमेंट करके बताओ यस और नो। यस और नो। सभी लोग कमेंट करेंगे। यस और नो। है कि नहीं है? मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके हौसलों में जान होती है। पंख होने से कुछ नहीं होता। छत से कूदने से उड़ान होती है। छत के कूदने से उड़ान होती है दोस्तों। और ये हो जाएगा लाला श्रीनिवास दास। अगला सवाल इंदुमती क्या है? प्रथम कहानी, प्रथम उपन्यास, निबंध या इनमें से कोई नहीं। इंदुमती क्या है? बताइए मुझे। इंदुमती क्या है? इंदुमती क्या है
दोस्तों? तो इंदुमती प्रथम कहानी है। परीक्षा गुरु प्रथम उपन्यास था। अगला सवाल संस्कृत के चार अध्याय पुस्तक के लेखक कौन है? संस्कृत के चार अध्याय पुस्तक के लेखक कौन है? संस्कृत के चार अध्याय पुस्तक के लेखक कौन है? रामवृक्ष बेनीपुरी, विद्यानिवास मिश्र, रामधारी सिंह दिनकर या वासुदेव शरण अग्रवाल? कौन है? रामधारी सिंह दिनकर है बेटा संस्कृत के चार अध्याय के लेखक? अगला सवाल हिंदी साहित्य का इतिहास के लेखक कौन है? हिंदी साहित्य का इतिहास के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे हिंदी साहित्य का इतिहास के लेखक कौन है? 18 फरवरी को सुबह पांच सुबह 5:00
बजे आऊंगा। 4:00 बजे नहीं इतना भी सुबह नहीं उठाना है तुम्हें। 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे आ जाऊंगा बेटा। सुबह 5:00 बजे और तुम्हें वो दूंगा जिसकी तुम्हें जरूरत है। और उसके पहले 15, 16, 17 यह तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना। कौन-कौन इसके लिए तैयार है? तीन दिवसीय महा रिवीजन के लिए कौन-कौन तैयार है? मुझे कमेंट करके बताओ। तीन दिवसीय महा रिवीजन के लिए कौन-कौन तैयार है? जितने भी नए बच्चे हैं सेशन को लाइक करते रहो बेटा और चैनल को सब्सक्राइब कर लो क्योंकि 2 मिलियन पूरे होने वाले हैं। सभी लोग आज के क्लास
की लाइक का टारगेट 10,000 लाइक है। आपको पता है। आज के क्लास की लाइक का टारगेट 10,000 लाइक है। आपको पता है। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हैं। हिंदी साहित्य का इतिहास के लेखक कौन है? हिंदी साहित्य का इतिहास के लेखक रामचंद्र शुक्ल हैं। बेटा अगला सवाल बस 10 मिनट और 10 मिनट में एक सारा खत्म हो जाएगा। पृथ्वी पुत्र निबंध संग्रह के लेखक कौन है? अब ये तो तुम जानते ही नहीं होगे। मैं ही बताऊंगा तभी जानोगे। डॉ. वसुदेव शरण अग्रवाल। क्या तुम
जानते थे यस या नो? कमेंट सेक्शन में लिखो। क्या तुम्हें इस सवाल का उत्तर पता था? अगर यस तो लिख ना भाई। लिख ना भाई बेटा यह सबके लिए जरूरी है। यह सभी के लिए जरूरी है। सबके क्वेश्चन आते हैं। सर 11 के ऑलरेडी। अरे बच्चा 1 लाख करना। वो कहता है 11 के हैं। एक बच्चा कह रहा है सर लाइक क्यों करना है? मेरा मोटिवेशन कहां से आएगा? जब मुझे लगेगा ना कि उत्तर प्रदेश के 1 लाख बच्चों ने इस क्लास को देखा है। तब तो मैं जागूंगा। तब तो खाने के बिना मेरी एनर्जी
खाने से एनर्जी नहीं आती है। एनर्जी जोश से आती है। यूपी बोर्ड के इतिहास में सबसे ज्यादा बच्चे पढ़ाने वाला टीचर हूं मैं। तो मुझे तो भूख है ना पिछली बार पेपर के दिन 76,000 बच्चा लाइव था। कितना? 76,000 समझ रहे हो? इस बार कितना होने वाला है? 3 लाख। चलो निम्नलिखित में से कौन ललित निबंधकार माना जाता है? इसमें निम्न में से कौन ललित निबंधकार माना जाता है? सबको पता है यह सवाल। यह सवाल मैं तुमको 2020 बार करा चुका हूं। कौन है ललित निबंध वाला? बताइए। तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना के लिए आग
लगा दो। चलो कुबेर नाथ राय है। इसका सही जवाब। उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पद को अलंकित करने वाला साहित्यकार भैया एक साहित्यकार था। पहली बार इतिहास में हां 76,000 अभी तुम लाइव सेक्शन में पॉपुलर वाली वीडियो जाके देख लो। वही वीडियो है और उसमें 155,000 लाइक है। ठीक है? तो अब ये तो कह ही सकते हो वो 3 घंटे की क्लास थी। क्या भाई? क्यों? क्यों? क्यों चौधरी बन रहे हो? निकलो बाहर। उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री और उत्तर शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पद को अलंकृत करने वाले साहित्यकार कौन हैं?
कौन है बेटा? डॉक्टर संपूर्णानंद हैं। अगला सवाल अजात शत्रु किस विधा की रचना है? अजात शत्रु किस विधा की रचना है? यह एक ऐतिहासिक नाटक है। चलो उत्तर तो मैंने ही दे दिया। तुम्हें बस क्या करना है? तुम्हें बस क्या करना है? तुम्हें इसका लेखक बता देना है। तुम्हें इसका लेखक बता देना है। तुम्हारा एक गलत हो गया। किसका एक गलत हो गया? किसका एक गलत हो गया? लॉन्ग आंसर लॉन्ग आंसर आता ही नहीं है। 2 मिलियन हो गया। बार-बार यह कमेंट मत करो। मुझे खुश मत करो यार। मैं भाग भाग भाग के जा के
देख रहा हूं। ये नाटक है बेटा। लिखा है इसको जयशंकर प्रसाद ने। ठीक है। 100 अजान एक सुजान के लेखक कौन है? 100 अजान एक सुजान के। जितने भी नए बच्चे हैं आज जो पहली बार मेरी क्लास कर रहे हैं। एक बार लव रिएक्ट करेंगे। एक बार दिल रिएक्ट करेंगे। जितने बच्चे पहली बार मेरी क्लास देख रहे हैं 100 अजान एक सुजान के लेखक और जो पहली बार देख रहे हैं सर गोंडा में आपका घर कहां पे है? हां मैं गोंडा का रहने वाला हूं। मेरा गोंडा में घर धनेपुर में है। अब धनेपुर में कहां
है? ये मत पूछना। मैं Google मैप का लिंक शेयर कर दूंगा तुम्हें। हैं तुम लोग कहां से हो? सभी लोग अपने जिलों का नाम कमेंट करोगे एक बार कमेंट सेक्शन में। 100 अजान एक सुजान के लेखक कौन है? बालकृष्ण भट्ट हैं बेटा ये सवाल भी तुमको आता है। अधेर नगरी चौपट राजा टके शेर बाजी टके शेर खाजा किस विधा की रचना है अभी लेखक पूछा था आपसे अभी विधा पूछ रहा है सभी लोगों ने चैनल सब्सक्राइब कर लिया कि नहीं ये भी कर लेना और लाइक कर लेना ठीक है ये मेरा काम है देखो देखो
यार तुम अपना काम ये डिजिटल गुरु दक्षिणा है तुम क्या देते हो बताओ मुझे YouTube पर तो तुम फ्री में पढ़ रहे हो कोई पैसा नहीं लग रहा फिर भी तुमको बेस्ट कंटेंट मिल रहा है तो मैं तुमसे क्या कह रहा हूं मुझे डिजिटल गुरु दक्षिणा दो लाइक करो शेयर करो सब्सक्राइब करो यही तो काम है तुम्हारा पढ़ाना मेरा काम है। हिंदी अंधेर नगरी किस विधा की रचना है? तो बेटा यह नाटक है। अगला सवाल नदी के द्वीप किस विधा की रचना है? नदी के द्वीप किस विधा की रचना है? नदी के द्वीप के लेखक
आपको बताने हैं। विधा मैं बता देता हूं। उपन्यास है नदी के द्वीप की विधा। समझ गए? चलिए, अगला सवाल। वर्तमान युग में हिंदी गद्य की प्रमुख भाषा क्या है? जो भाषा मैं बोल रहा हूं, यह भाषा कौन सी भाषा है? बताओ। कौन सी भाषा है? यह सभी लोग बताएंगे। कौन सी भाषा है यह? वर्तमान युग में हिंदी गद्दी की प्रमुख भाषा कौन सी है? खड़ी बोली है बेटा। अगला सवाल देवबंद सहारनपुर में किसका जन्म हुआ था? देवबंद सहारनपुर में किसका जन्म हुआ था? सभी लोग बताएंगे। देवबंद सहारनपुर में किसका जन्म हुआ था? सारे बच्चे बताएंगे।
कोई बच्चा ऐसा ना हो जो इसका उत्तर ना दे। देवबंद सहारनपुर में किसका जन्म हुआ था? तो देवबंद सहारनपुर में कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर का जन्म हुआ था। तुम्हारे सिलेबस में इनका एक पार्ट है जिसका नाम है रॉबर्ट नर्सिंग होम में। तुम्हें लगता है उससे ऑब्जेक्टिव नहीं आता? देखो आ गया ऑब्जेक्टिव। ऐसे ही उससे ऑब्जेक्टिव आता है। ठीक है? ऐसे ही उससे ऑब्जेक्टिव आता है। देवबंद सहारनपुर वाला सवाल आ गया तुम्हारा। अगला सवाल क्या है? अगला सवाल है डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास। इसमें से कौन सा है? सूरज का सातवां घोड़ा धर्मवीर भारती का
है। त्यागपत्र इनका नहीं है। भूले विषय चित्र भी इनका नहीं है। अनामदास का पोथा इनका है। अगला सवाल केदारनाथ पांडे का वास्त केदारनाथ पांडे वास्तविक नाम था। किसका वास्तविक नाम केदारनाथ पांडे था? अब देखो अभी इससे पहले दूसरे तरीके से यह सवाल पूछा था। अब दूसरे तरीके से यह सवाल पूछ रहा है। समझ रहे हो? हम बनारसी हैं गुरु। अरे वाह बनारसियों को बनारस का अलग ही मजा है ना बनारस प्रयागराज मथुरा देखो कितना अद्भुत राज्य है उत्तर प्रदेश सारे भगवान उत्तर प्रदेश में पैदा हुए राम पैदा हुए कृष्ण पैदा हुए सारे बड़े तीर्थ उत्तर
प्रदेश में मत बड़े कह सकते हैं राम मंदिर कृष्ण मंदिर भगवान शिव जब उतरे तो काशी में उतरे बनारस में उतरे। अगर कोई नगरी अपने त्रिशूल पे बसाई तो काशी बसाई। ठीक है? चलो सभी लोग आंसर करेंगे। केदारनाथ पांडे, राहुल सांकृत्यायन का नाम है। अगला क्या है? नाटक नहीं है। इसमें से कौन सा ऐसा है जो नाटक नहीं है? सभी को बताना है। इसमें से कौन सा ऐसा है जो नाटक नहीं है? अपना-अपना भाग्य। नाटक नहीं है। ये बहुत प्यारी कहानी है। अपना-अपना भाग्य। इसमें एक बच्चा है मतलब एक व्यक्ति है जो सीढ़ियों पर बैठा
रहता है और ठंडे से उसकी मृत्यु हो जाती है और लेखक बाद में निकलता है तो उसको देखता है अपना अपना भाग्य बहुत प्यारी कहानी मैंने बहुत बचपन में पढ़ी थी इसको मेरी जीवन यात्रा जो आत्मकथा है बेटा किसकी है मेरी जीवन यात्रा आत्मकथा किसकी है वियोगी हरि की है राहुल सांकृत्यायन की है रामवृक्ष बीनीपुरी की है महादेव वर्मा अब देखो राहुल सांकृत्यायन बहुत घूमते रहते थे यात्रा करते रहते थे घुमक्कड़ जिज्ञासा लिखते थे घुमक्कड़ शास्त्र लिखते थे तो यात्रा इनके जीवन की यही यही लिखेंगे। अगला सवाल नूतन ब्रह्मचारी के रचनाकार कौन है? नूतन ब्रह्मचारी
के रचनाकार बेटा बालकृष्ण भट्ट हैं। कौन है नूतन ब्रह्मचारी का रचनाकार? बालकृष्ण भट्ट है। अपना-अपना भाग्य हां कानपुर का तो अलग माहौल है। बलिया जिले वालों का तो भैया बलिया बलिया मिर्जापुर। अच्छा मिपुर मूवी तो मिर्पुर वाली जो वेब सीरीज आई उसने मिर्पुर का अलग ही भौकाल बना दिया। ठीक है सभी लोग सेशन को शेयर कर दो बेटा और सभी लोग चैनल को सब्सक्राइब कर लेना सर आपके भरोसे पर हैं सब हम पहली बार पढ़ रहे हैं आज हिंदी इस साल 95% नंबर मिलेगा तुम्हें बस तुम पढ़ना अब मजाक अब मत करना अभी तक नहीं
पढ़े कोई मतलब नहीं है कितने बच्चे ऐसे हैं जो हिंदी आज पहली बार पढ़ रहे हैं या जिनको कुछ नहीं आता हिंदी में एक बार मुझे कमेंट करके बताओ चलो अगला सवाल श्री चंद्रावली नामक जो नाटक है बेटा इसके लेखक कौन है? श्री चंद्रावली नामक जो नाटक है इसके लेखक कौन है बेटा? जयशंकर प्रसाद है, हरिकृष्ण प्रेमी है, श्रीनिवास दास हैं या भारतेंदु हरिश्चंद्र है? सब लोग बताएंगे कौन है बेटा? भारतेंदु हरिश्चंद्र है। अगला सवाल चारुचंद लेख की विधा क्या है? चारुचंद्र लेख किस विधा की रचना है? आपको बताना है। चारुचंद्र लेख किस विधा की
रचना है? आपको बताना है। सभी बच्चे कमेंट करेंगे। कहानी है, उपन्यास है, निबंध है या नाटक है? तो चार चंद्र लेख एक कहानी है। ध्यान रखना क्या है चार चंद्र लेख? एक कहानी है बेटा बिजनौर सर पहली बार प्रयागराज पीलीभीत आजमगढ़ लाइव्राइबर चला दीजिए वो मुझे लॉग इन करना नहीं आता बेटा मैं नहीं कर पाऊंगा बस्ती से हो बाबागंज से हो अच्छा आप मेरे घर के पास बाबागंज से हो अच्छा अच्छा मुंशी प्रेमचंद द्वारा संपादित पत्र बेटा तो हंस मुंशी प्रेमचंद द्वारा संपादित है मर्यादा डॉ संपूर्णानंद धर्मय धर्मवीर भारती समझ समझ लो इसको। 11 वर्ष
का समय के रचनाकार कौन है? अब इस सवाल का जवाब जिसे जिसे आता हो कमेंट सेक्शन में उत्तर देने से पहले दिल रिएक्ट कर दो। मेरा दिल पीला होता है दोस्तों क्योंकि मैं पीली पेन से लिखता हूं। मेरे पास लाल दिल वाला कोई नहीं है। लोग ब्लॉक करके चले जाते हैं। तुम्हें लगता होगा तुम्हारी जिंदगी में लोग ब्लॉक कर रहे हैं। मेरी जिंदगी में भी लोग ब्लॉक कर रहे हैं। ठीक है। लेकिन जो एक बार ब्लॉक कर दे ना दोबारा उसके पास मत जाना तुझे। आज कौन सा डे है? आज कौन सा डे है? प्रॉमिस
डे है। हग डे है। किस डे है? कौन सा डे है आज? बताओ। डे हो तो पता होगा ना सुबेरे स्टोरी लगा के तब आए होंगे स्नैप चैट पे 11 वर्ष का समय रामचंद्र शुक्ल की रचना है बेटा अगला सवाल सरदार पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबंध नहीं है इसमें से कौन सा निबंध सरदार पूर्ण सिंह का नहीं है तो ये तीनों निबंध बेटा सरदार पूर्ण सिंह के हैं। ये तीनों निबंध किसके हैं? सरदार जी के हैं। यह वाला कालिदास की निरंकुशता महावीर प्रसाद द्विवेदी का है। महावीर प्रसाद द्विवेदी का है। अच्छा एक और निबंध है
कालिदास की लालित्य योजना वो हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। आचार्य जी चंदौली से हूं। अच्छा आज किस डे है? 1000 बच्चे बचे हैं। अच्छा ऐसा क्या है? मुझे नहीं पता भाई। जब 2 मिलियन हो जाए तो मुझे बता देना। सब्सक्राइब कर लो। और हां यार पीला वाला दिल ज्यादा अच्छा लगता है लाल के देख लाल वाला तो प्यार्यार वाला दिल है ना लखीमपुर खीरी गोरखपुर गोरखपुर से तो थोड़ी दुश्मनी है मेरी पंडित प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्रिका है पंडित प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्रिका आनंद कादंबिनी बद्री नारायण चौधरी प्रेमग हिंदी प्रदीप बालकृष्ण भट्ट
ब्राह्मण किसकी है पंडित प्रताप नारायण मिश्र की अगला सवाल क्या है पैरों में पंख बांधकर यात्रा वृतांत किसका है? पैरों में पंख बांधकर यात्रा वृत्तांत किसका है? बेटा पैरों में पंख बांधकर यात्रा वृतांत किसका है? पैरों में पंख बांधकर यात्रा वृत्तांत किसका है? तो ये राम वृक्ष बेनीपुरी का यात्रा वृतांत है। अच्छा तुम सब तुम लोग बताओ तुम लोग तो खूब इमोजी वगैरह का प्रयोग करते होगे। अब तो भाषा बदल रही है ना। अब तो हम लोग ज्यादातर इमोजी में रिप्लाई कर रहे हैं। मुझे यह बात बताओ कि तुम लोगों को किस कलर का दिल
पसंद है? मुझे तो लाल और पीला पसंद है। मुरातगंज से हूं। मुराकगंज कहां है सर? मैं बदायूं से हूं। अच्छा बदायूं। बदायूं तो मैं कभी नहीं गया हूं लेकिन जाऊंगा। संत कबीर नगर हां उत्तर पुस्तिका के बारे में बताऊंगा। कॉपी मेरे पास रखी हुई है। वसुधा मासिक पत्रिका का संपादन किसने किया? बेटा हरशंकर परसाई ने किया। सवाल का उत्तर देते रहो। चिद विलास के रचनाकार कौन है? वासुदेव शरण अग्रवाल नहीं है। डॉक्टर संपूर्णानंद चिद विलास के रचनाकार हैं। सभी लोगों को पता होना चाहिए भैया काला दिल किसको पसंद है यार? काले लोगों को काला दिल
पसंद है जो काले काम करते हैं। चलो सभी लोग आंसर करो जल्दी-जल्दी। पहा आजमगढ़ उत्तर प्रदेश किसका जन्म स्थान है? पहा में कौन पैदा हुआ भैया? पहा में पही पैदा हुए। पही कौन है? राहुल सांकृत्यायन पहा में पैदा हुए और फिर पूरी दुनिया घूम डाले। रामचंद्र शुक्ल देखो हिंदी साहित्य के जितने बड़े लेखक हैं वह सब उत्तर प्रदेश हैं। इस पर भी गर्व करो भाई साहब। दिल्ली से हूं सर। दिल्ली से हूं। दिल्ली से हूं के बाद कुछ और लगता है। रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया निबंध कौन सा है? बेटा कविता क्या है? अशोक के
फूल किसका है? हजारी बाबा का। रास का स्वरूप वासुदेव बाबा का। वासुदेव बाबा। हजारी बाबा। अगला सवाल। मुद्रा राक्षस नाटक के रचनाकार कौन है? मुद्रा राक्षस नाटक के रचनाकार कौन है? एक-एक बच्चे का जवाब चाहिए मुझे। मुद्रा राक्षस के रचनाकार भारतेंदु हरिश्चंद्र। अच्छा मुद्रा राक्षस का इन्होंने हिंदी अनुवाद किया है। खुद से नहीं लिखा है। ध्यान रखना कई बार आ जाएगा आपसे कि मुद्रा राक्षस किसका अनुदित नाटक है? तो तुम्हें लिखना पड़ेगा भारतेंदु हरिश्चंद्र का इन्होंने संस्कृत से हिंदी में अनुवाद किया। वोलगा से गंगा कहानी संग्रह किसकी है? वोलग से गंगा कहानी संग्रह। कल ब्लैक
डे है। चलो कल ब्लैक डे है। तो कल ब्लैक डीपी रहेगी सबकी। ठीक है? सभी लोग इसका जवाब दे दो बेटा। बस कुछ सवाल और बचे हैं। मुझे लगता है थोड़े से सवाल और हैं। बस बोलगा कहानी संग्रह लाहू सांकृत्यायन का मैं कुछ छोड़ना नहीं चाहता यार। तुम कहोगे तो मैं अभी बंद कर दूंगा इसको ऑब्जेक्टिव। लेकिन फिर जब तुम्हारा कोई दूसरा आ जाएगा ना और तुम नहीं कर पाओगे तो सबसे ज्यादा दुख मुझे होगा। तुम्हारे स्कूल में 250 सुविधा शुल्क के रूप में मांग रहे हैं। यार स्कूल वाले भाई कितना ठगेंगे यार। कितना ठगेंगे
स्कूल वाले? बेचारे प्रैक्टिकल में कलेजा चीर के निकाल लेते हैं। गोंडा से कौन-कौन है? एक बार कमेंट करो। भाग्यवती उपन्यास के लेखक कौन है? बेटा भाग्यवती जो उपन्यास है उसके लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। भाग्यवती उपन्यास के लेखक कौन है? भाग्यवती उपन्यास के लेखक श्रद्धाराम सिल्लोरी हैं। अगला सवाल बेटा चंद्रकांता संतति रचना है। किस युग की रचना है चंद्रकांता संतति? आपको बताना है। किस युग की रचना है चंद्रकांता संतति? तो चंद्रकांता संत द्विवेदी युग की रचना है। बेटा ये इतिहास की एकमात्र रचना है जिसके लिए अंग्रेजों ने हिंदी सीखी। अंग्रेजों ने जिसके लिए हिंदी
सीखा। ठीक है? अगला सवाल आधुनिक काल के प्रारंभिक डायरी लेखक कौन है? आधुनिक काल के प्रारंभिक डायरी लेखक कौन है? सबको बताना है। आर आरंभिक काल के शुरुआती समय के प्रारंभिक डायरी लेखक कौन है? शमशेर बहादुर सिंह। अगला सवाल क्या है? शेखर एक जीवनी के लेखक कौन है? शेखर एक जीवनी के लेखक कौन है? हे बार-बार मत लिखो कि 2 मिलियन हो गया। डर जाता हूं मैं। डर जाता हूं मैं। डर जाता हूं मैं बेटा। क्लास में आ जाओ सब लोग। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो। एक बार सभी लोग सेशन को
शेयर कर दो बेटा। एक बार सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। ठीक है? सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर क्लास की लिंक को लगा दो। ठीक है। सभी लोग अपने क्लास की स्टेटस पर क्लास की लिंक को लगा दो और सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। अभी नहीं हुआ 2 मिलियन। बहुत मारूंगा। सभी लोग लाइक कर लो क्लास को। सभी लोग क्लास को लाइक कर लो बेटा। चलो शेखर एक जीवनी के लेखक सच्चिदानंद बादशाहज्ञ फिर से मत कहना कि 2 मिलियन हो गया मैं फिर से देखने चला जाऊं आनंद कादंबिनी के संपादक
कौन है तो भैया आनंद कादंबिनी के संपादक बद्री नारायण चौधरी प्रेमघन है अगला सवाल जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था अच्छा ये सवाल आता है क्यों क्योंकि जलियांवाला बाग हत्याकांड तुम्हारे सिलेबस में एक बहुत इंपॉर्टेंट घटना को रेखांकित करता है और वो घटना क्या है कोई मुझे बताओ 1920 से 1922 के बीच क्या हुआ युग बदल गया भारतेंदु युग ने करवट ली। क्यों करवट ली? क्योंकि जरूरी था। द्विवेदी युग। द्विवेदी युग ने करवट ली। जरूरी था। उसके बाद छायावाद कब से शुरू होता है? छायावाद का अंत 1936 है। शुरुआत कब है? वही 18 से 22
के बीच का समय। 1918 से 1922 के बीच का समय। छायावाद की शुरुआत का समय है। किसी एक दिन से छायावाद शुरू नहीं होता। प्रवृत्तियां बदलती रहती हैं। 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। चलो। सरदार पूर्ण सिंह किस युग के लेखक हैं? द्विवेदी युग के। चलो अगला सवाल। पाणिन्य कालीन भारत के लेखक कौन है? तुम नहीं जानते हो। अगर जानते हो तो बता के दिखाओ। हिम्मत है तो इस सवाल का उत्तर कमेंट सेक्शन में लिख दो। लिख दो इस सवाल का उत्तर। सर दो से ढाई के बीच आपके 2 मिलियन हो जाएंगे। ये कौन कहता?
हो सकता है अभी एक घंटे में हो जाए। पाणिन्य कालीन लेखक तुम लोग सब्सक्राइब कर लो तो अभी हो जाएंगे। सभी लोग कर लो। वासुदेव शरण अग्रवाल। ये वासुदेव शरण अग्रवाल का शोध ग्रंथ है। बेटा। अगला सवाल वारिस कहानी संग्रह किसका है? वारिस कहानी संग्रह किसका है? कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर का, प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी का, मोहन राकेश का या अज्ञेय का? बताइए वारिस कहानी संग्रह किसका है? सभी लोग बताएंगे। कोई गलती नहीं करेगा। मोहन राकेश का? आषाढ़ का एक दिन। इनकी एक बहुत प्रसिद्ध रचना है। आषाढ़ का एक दिन। चलिए सेशन को सभी लोग
शेयर कर दो। भारत की मौलिक एकता निबंध संग्रह के लेखक कौन है? भारत की मौलिक एकता निबंध संग्रह के लेखक कौन है? तो भारत की एकता भारत की मौलिक एकता पृथ्वी पुत्र ये सारे निबंध किसने लिखे हैं? वासुदेव शरण अग्रवाल ने लिखे हैं। अगला सवाल साहित्य और समाज के निबंध के लेखक कौन है? साहित्य और समाज निबंध के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। साहित्य और समाज निबंध के लेखक कौन है बेटा? साहित्य और समाज किसने लिखा? कन्हैया लाल मिश्राकर नहीं, हजारी प्रसाद द्विवेदी नहीं, प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी ने। कितने बच्चों को यह सवाल आता
है? कितने बच्चों को यह सवाल आता है? सर, मेरे स्कूल में ₹1200 लिया। एक ही संकल्प एक ही नारा। इस बार 495 नंबर हमारा। एक ही संकल्प एक ही नारा। इस बार 495 नंबर हमारा। ठीक है? 95 नंबर यार 490 नहीं भाषा और आधुनिकता निबंध के रचनाकार कौन है भैया? यह सवाल तो तुमको पता ही नहीं होगा क्योंकि तुमने यह पाठ पढ़ लिया है इसलिए नहीं पता होगा। यह पाठ है प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी का। अगला सवाल। अगला सवाल। हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना है। कौन सी रचना हजारी प्रसाद द्विवेदी की है? बड़े-बड़े लेखक हैं
भैया। कुटज। कुटज एक ललित निबंध है। क्या है? कुटज एक ललित निबंध है। मेरे बेटे कितने लोग ऐसे हैं जो इसको बता सकते हैं? चिंतामणि क्यों कितने कितने बच्चे ऐसे हैं जो चिंतामणि के लेखक के बारे में जानते हैं? किसका है? रामचंद्र शुक्ल का। कितने बच्चे ऐसे हैं जो पंच परमेश्वर कहानी के लेखक के बारे में जानते हैं? पंच परमेश्वर कक्षा पांच में थी। किसने लिखा है? मुंशी प्रेमचंद ने। सही है? सही है कि नहीं? अगर सही है तो दिल रिएक्ट कर देना। अगर गलत है तो बता देना। किस कृति के रचनाकार हरिशंकर परसाई हैं?
इसमें से कौन सी रचना ऐसी है जिसको हरिशंकर परसाई ने लिखा है? बताइए तुम लोगों ने प्रैक्टिकल में कितने-कितने रुपए दिए हैं? सच बोलना। झूठ मत बताना। सच बताओ। प्रैक्टिकल में तुमसे कितना रुपया लिया है? सच बताओ। बेटा कोशिश तो हमने की लेकिन वही है ना कि समाज का भी कुछ योगदान होता है और समाज उस चीज के लिए तैयार ही नहीं है। सेशन को सभी लोग लाइक कर लेंगे बेटा। बहुत जल्दी 10,000 लाइक पूरे हो गए। बहुत जल्दी 20,000 लाइक पूरे होने वाले हैं। फिर 50,000 लाइक पूरे होंगे और आपको पता है 15, 16,
17 ये तीन दिवसीय ये तीन दिन, यह तीन दिन मैं तुम्हें 100 में 100 हिंदी में दिलवा दूंगा। 100 में 100 मिलना शुरू भी हो गए हैं। कौन सी है? रानी नागमती की कहानी। चलो नागफनी की कहानी। अगला। हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखे निबंध ग्रंथों में से हिंदी साहित्य के इतिहास से संबंधित ग्रंथ नहीं है? कौन सा ऐसा ग्रंथ है जो हिंदी साहित्य के इतिहास से संबंधित नहीं है? आपको बताना है। सभी लोग बताएंगे कोई गलती नहीं करेगा। कौन सा ऐसा निबंध है जो हिंदी साहित्य के इतिहास से संबंधित नहीं है। तो चारु चंद्र लेख
नहीं है। बाकी सब में हिंदी साहित्य हिंदी साहित्य है तो ये सही हो ही नहीं सकता। अगला सवाल वासुदेव शरण अग्रवाल की रचना कौन सी है? अन अंतराल त्रिशंकु तट की खोज या वागधारा कौन सी है? मैं बार-बार तुमको बता चुका हूं कि वागधारा हम लोग पढ़ते हुए कई बार देख चुके हैं वागध और बोर्ड एग्जाम में सवाल यहीं से आएगा। याद रखना बदलना नहीं है किसी को। ₹10,000 लिए हैं। प्रैक्टिकल के ₹10,000 भी लिए हैं क्या? अरे यार कोई ₹21,000 कोई 10,000 ले रहा है। फिर मुझे झूठ लग रहा है। 10,000 और 21,000 कुछ
ज्यादा हां000 2100 चलता है। 10,000 बहुत ज्यादा होता है भाई। बहुत ज्यादा 10,000 होता है। समस्मरण विधा की रचना कौन सी है? कौन सी इसमें से रचना ऐसी है जो समस्मरण विधा की है? सभी लोग बताएंगे कौन सी रचना ऐसी है जो समस्मरण विधा की है? दीप जले शंख बजे बाजे पायलिया के घुंघरू अरे यावर रहेगा याद तब की बात और थी। तो दीप जले शंख बजे या समसरण विधा की रचना है। निम्न में से कौन सा उपन्यास जैनेंद्र द्वारा लिखित है? तो इसमें से इरावती, ऋतुचक्र और निर्मला ये तीनों नहीं है। सुनीता उपन्यास जैनेंद्र
कुमार ने लिखा है। अगला सवाल पुनर्नवाकृति की विधा क्या है? पुनर्नवाकृति की विधा क्या है? सभी लोग बताएंगे। पुनर्नवाकृति की विधा क्या है? बेटा सभी लोग बताएंगे। बस ये तुम्हारा टॉपिक कंप्लीट होने वाला है। ये टॉपिक तुम्हारा कंप्लीट होने वाला है बेटा। तो सभी लोग तैयार हो जाओ। यह टॉपिक कंप्लीट होते ही हम देखो हमारा जो चरण है याद रखना। हमने अपनी बात क्लियर कर रखी है। हमने अपनी बात क्लियर कर रखी है भाई। हमने अपनी बात कि पहले गद्य का विकास के एमसीक्यू करेंगे। फिर गद्यांश पर आधारित सवाल करेंगे। फिर लेखकों का साहित्यिक परिचय
करेंगे। फिर काव्य साहित्य का इतिहास करेंगे। फिर पद्यांश पर आधारित प्रश्न करेंगे। फिर कवियों का साहित्यिक परिचय करेंगे। फिर कहानी करेंगे। फिर खंड काव्य करेंगे। फिर संस्कृत दिग्दर्शिका करेंगे। फिर हिंदी व्याकरण करेंगे। फिर पत्र करेंगे। फिर निबंध करेंगे। ये तैयार हो कि नहीं हो? हो कि नहीं हो? हो कि नहीं हो? यस या नो? यस या नो? यस या नो? लिख दो कमेंट सेक्शन में। यस या नो? यस या नो? यस या नो? यस या नो? यस या नो? यस या नो? पुनर्नवा कृति की विधाय क्या है? पुनर्नवा बेटा एक उपन्यास है जो हजारी प्रसाद
द्विवेदी ने लिखा है। अगला सवाल। बाबूराव बाबू गुलाब राय की आत्मकथा कौन सी है? बाबू गुलाब वो लग रहा है कि. 1.5 लाख मेरे तुम लोग ना बताने पे आ जाओ। वह वाली बात हो जाती है ना कि जब कोई यूपीएससी यूपीएससी क्वालीफाई हो जाता है तो जब पत्रकार उसके पास जाते हैं मुंह में माइक लगाते हैं कि कैसे आपने तो कहता है हमारे पास खाने को नहीं था खाने को नहीं था इसी तरह पढ़े हैं अब पता लगता है कि बाप प्रधान था पिछले 50 सालों से पूरा गांव लूट के रख लिया है ठीक
है क्योंकि इससे इमोशनल गेम अब तुम 1 लाख के दो ओ माय गॉड 1 लाख की और दादा वो वाली बात आ जाएगी ना बाबू गुलाब राय की आत्मकथा क्या है बेटा मेरी असफलताएं हैं अगला सवाल माधव विलास के लेखक कौन है माधव विलास जो रचना है उसके लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे माधव विलास के लेखक कौन है भैया? 2 मिलियन हो जाए तो बता देना मैं देख नहीं पा रहा हूं। 2 मिलियन हो जाए तो बता देना मैं देख नहीं पा रहा हूं। ठीक है? समझ रहे हो कि नहीं? तो 2 मिलियन हो
जाए तो बता देना। चलिए और सेशन को सभी लोग लाइक करते रहिए। सेशन को सभी लोग लाइक करते रहिए। सेशन को शेयर करते रहिए सभी लोग। ठीक है? सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा दीजिए। माधव विलास के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताइए। माधव विलास। माधव विलास के रचनाकार कौन है? लल्लू लाल है भाई। विट्ठलनाथ नहीं है यार। तुम लोग गलत आंसर मत दो। वर्ण रत्नाकर के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे। वर्ण रत्नाकर ध्यान रखना। यह सवाल पूछता है। ज्योतिश्वर हैं इसके सवाल के जवाब। लक्ष्मीपुरा के लेखक कौन है? कुछ ऐसे सवाल
हैं बेटा। मैं पिछले देखो। मैं पिछले पांच सालों के पेपर करवाता था। मैं अब इस बार तुम्हारे सात साल के पेपर को लेके आया हूं। तो 7 साल का मतलब हो गया 7 * 7 = 49 49 सेट के सवाल लेके आया हूं तुम्हारे लिए। सर 2 मिलियन में कितना बाकी है? मेरे पास नहीं है वो डाटा। लक्ष्मीपुरा के लेखक कौन है? सभी लोग बताइए। लक्ष्मीपुरा के लेखक बेटा शिव शिवदान सिंह चौहान हैं। अगला सवाल क्या भूलूं? क्या याद करूं? किस विधा की रचना है? क्या भूलूं? क्या याद करूं? किस विधा की रचना है? चलो
सभी लोग बताओ। किस विधा की रचना है? क्या भूलूं? क्या याद करूं? किस विधा की रचना है? क्या भूलूं? क्या याद करूं? सभी लोग बताएंगे क्या भूलूं क्या याद करूं किस विधा की रचना है। ठीक है सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। क्या भूलूं क्या याद करूं? किस विधा की रचना है भैया? अब मैं भूलूं और याद करूं कि अगर बात करूंगा तो मैं पूछ रहा हूं ना कि क्या भूलूं? क्या याद करूं गाइज? तो ये हो जाएगा आम गधा क्योंकि मैं अपनी बात कर रहा हूं। अगला
सवाल नासिकेत व्याख्यान के लेखक कौन है? कौन है नासिको वाख्यान के लेखक? बता दीजिए। सभी लोग आंसर करके बता दीजिए। नहीं पता हो तो यहां देख लीजिए। सदल मिश्र है नासिकेत व्याख्यान के लेखक। अगला सवाल बालमुकुंद गुप्त किस युग के लेखक थे? बालमुकुंद गुप्त किस युग के लेखक थे? भारतेंदु युग के, द्विवेदी युग के, छायावादी युग के, प्रतिवादी युग के? किस युग के लेखक थे? भारतेंदु बालमुकुंद गुप्त किस युग के लेखक हैं? बालमुलकुंद गुप्त मुझे बताइए। ये बालकृष्ण भट्ट नहीं है। ये बालमुकुंद गुप्त हैं। लेकिन है भारतेंदु युग के ही। अगला सवाल सभी लोग बताओ।
श्याम सुंदर दास की शैली है। कैसी शैली में लिखते हैं? सर पीडीएफ दे देना बस एमसीक्यू की। पहले सभी लोग उत्तर दे दो। मुझे मैं अगर तुम लोग आज क्लास को शेयर करके लाइक करके मुझे खुश कर दिए क्योंकि डिजिटल गुरु दक्षिणा तुम्हारा काम है। आज की क्लास में 20,000 बच्चा लाइव आ गया और कम से कम 1 लाख लाइक हो गया तो मैं तुम्हें पीडीएफ दे दूंगा। पूरी पीडीएफ दे दूंगा जितनी मैंने बनाई है। तो बस तुम्हें करना क्या है? तुम्हें करना है कि तुम्हें एक बार इस सेशन को अपने WhatsApp स्टेटस पर लगा
देना है। देखो कुछ पाने के लिए तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा। बाकी मैं पढ़ा तो सब दे रहा हूं। श्याम सुंदर दास की शैली कैसी है? व्यास शैली है। ये भी सवाल आता है। अगला सवाल किसके हिंदी खंड गद्य में करुण संवेदना की प्रधानता है? कौन ऐसा व्यक्ति है जो लिखता है गद्य? लेकिन उसमें होती है करुण संवेदना की प्रधानता। कौन ऐसा लिखता है बताइए? कौन ऐसा लिखता है जिसके करुण संवेदना की प्रधानता है? तो भाई गद्य और काव्य में मैं नीर भरी दुख की बदरी। हां मेरी तो ये हो जाएगा महादेव वर्मा। अगला सवाल।
अगला सवाल। निबंध प्रौढ़तम स्तर पर कब पहुंचा? यह सवाल पूछा गया है तुम्हारे सिलेबस में। निबंध प्रौढ़तम स्तर पर कब पहुंचा? तुम्हें नहीं भरोसा है तो 2018 का तुम अनसॉल्वड पेपर उठा के देख लो। और 2020 का और 2021 का ठीक है। तीन साल यह सवाल पूछा गया है। निम्न निबंध प्रौढ़तम स्तर पर कब पहुंचा? तो शुक्ल युग में क्योंकि आचार्य रामचंद्र शुक्ल बड़े अच्छे निबंधकार थे। उन्होंने चिंतामणि लिखा। कवि वचन सुधा के संपादक कौन है? भैया कवि वचन सुधा के संपादक कौन है? बालकृष्ण भट्ट है। नहीं नहीं इनकी पत्रिका तो कौन सी है? हिंदी
प्रदीप इनकी पत्रिका है। सभी लोग कमेंट करके बताओ कि प्रताप नारायण मिश्र की पत्रिका का क्या नाम है? प्रताप नारायण मिश्र की पत्रिका का क्या नाम है? क वचन सुधा के संपादक भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं। 15 16 17 ये तीन दिन याद रखना। 15 16 17 ये तीन दिन याद रखना क्योंकि इस तीन दिन में तुम्हारी किस्मत बदल दूंगा मैं। नीड़ का निर्माण फिर के लेखक कौन है? अथवा नीड़ का निर्माण फिर किसकी कृति है? नीड़ का निर्माण फिर नेह का आवान फिर। यह कविता भी है और यह आत्मकथा भी है। किसकी? हरिवंश राय बच्चन की
आत्मकथा है। हरिवंश राय बच्चन अमिताभ बच्चन के पापा हैं। कौन है? पापा। चलिए यार तुम लोग बार-बार कमेंट मत करो कि 2 मिलियन हो गए। मुझे डर लगता है। मैं जान भी नहीं पाया अगर 2 मिलियन हो गए तो क्या करूंगा मैं? चलो आगे बढ़ते हैं। बेटा अगले सवाल पर चलते हैं। आलोचना साहित्य से संबंधित कृति कौन सी है? कौन सी रचना आलोचना साहित्य से संबंधित है? विचार प्रवाह, हिंदी साहित्य का आदिकाल, साहित्य सहचर, संदेश रासक। आलोचना की बात हो रही है। सभी लोग बताएंगे कि आलोचना में कौन सा सफल है? यानी आलोचना की कौन
सी रचना है? सभी लोग बताएंगे बेटा। तुम्हें कोई और देखे तो जलता है दिल। बड़ी मुश्किलों से फिर संभलता है दिल। किसने-किसने सेशन को शेयर कर दिया? एक बार कमेंट सेक्शन में लिखो। आलोचना साहित्य बेटा साहित्य सहचर है। चलो सरल सवाल होता है। दीप जले शंख बजे के लेखक कौन है? अब तुम जानते हो दीप जले शंख बजे के लेखक कौन है? लेकिन तुम बताना नहीं चाहते तो मैं क्या कर सकता हूं। दीप जले शंख बजे के लेखक कौन है? तो तुम बताना ही नहीं चाहते। ठीक है? दीप जले संगजे के लेखक कौन है? तुम
बताना ही नहीं चाहते। तुम्हारे सिलेबस में एक पार्ट है रॉबर्ट नर्सिंग होम में। इसी का लेखक है कन्हैया लाल मिश प्रभाकर। अगला सवाल हिंदी के प्रथम के डायरी के लेखक कौन है? हरदेव शास्त्री, वेदतीर्थ, सुंदरलाल त्रिपाठी, घनश्याम दास बिड़ला, धीरेंद्र वर्मा कौन है भाई साहब? कौन है हरदेव शास्त्री वेद तीर्थ हिंदी के प्रथम डायरी लेखक? चलिए अच्छा अगर नरदेव शास्त्री होंगे तो भी यही होगा क्योंकि मैं हरदेव नरदेव में कंफ्यूज हो जाता हूं कभी-कभी। दोनों नाम एक ही है। बालकृष्ण भट्ट की आत्मकथा के लेखक कौन है भैया? हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। अगला सवाल निम्नलिखित में
से किस निबंध संग्रह की रचना हरशंकर प्रसाई द्वारा रची गई है? बताइए कौन सी कौन सा निबंध संग्रह है जो हरिशंकर प्रसाई ने लिखा है? सभी लोग बताएंगे कौन सा है बेटा? पगडंडियों का जमाना। चलो स्कंदगुप्त नाटक के लेखक कौन है? जयशंकर प्रसाद। स्कंदगुप्त भी एक ऐतिहासिक नाटक है। सवाल आ सकता है। निम्न में से ऐतिहासिक नाटक कौन सा है? हो सकता है उसमें यही हो। अगला सवाल। कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर की बाजे पायलिया के घुंघरू किस विधा की रचना है? बाजे पायलिया के घुंघरू किस विधा की रचना है? सभी लोग बताएंगे। बाजे पायलिया के
घुंघरू किस विधा की रचना है? तो यह ललित निबंध है। अगला सवाल निम्न में से हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास नहीं है। देखो चार चंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोता तट की खोज। इसमें से तट की खोज उनका नहीं है। बाकी तीनों उनके हैं। तट की खोज उनका नहीं है। बाकी तीनों उन्हीं के हैं। बाकी तीनों उन्हीं के हैं। चारचंद्रलेख, पुनर्नवा और अनामदास का पोता। बालभट्ट की आप 2 मिलियन हो गया। अरे वाह गाइस 2 मिलियन कंप्लीट हो गया है। मुकेश सर को फोन लगाया जाए। मुकेश सर को कॉल करके खुशखबरी दी जाए। मुकेश सर को
यह खुशखबरी दी जाएगी दोस्तों लाइव क्लास से कि 2 मिलियन का टारगेट हमने कंप्लीट कर लिया और यह इतिहास भी इसी क्लास में लिखा गया और इस बार तुम्हारे टॉपर बनने का इतिहास भी इसी क्लास में लिखा जाएगा क्योंकि यह क्लास ऐतिहासिक क्लास है। यह क्लास यूपी बोर्ड के सबसे बड़े चैनल पर यूपी बोर्ड की सबसे बड़ी क्लास है जिसमें आप सभी लोग जुड़ चुके हो और आप सभी लोग आनंद ले रहे हो। एक बार सभी लोग दिल रिएक्ट कर देंगे जल्दी से। सभी लोग जल्दी-जल्दी रिएक्ट कर देंगे। अच्छा हां एक सवाल बेटा आपका था।
कहां गया? ठीक है? श्याम सुंदर दास की शैली व्यास और भावात्मक दोनों है। लेकिन प्रमुखता उसमें व्यास शैली की है। आप भाव भावात्मक शैली की है। तो जब व्यास और भावात्मक दोनों पूछा जाए तो आप भावात्मक पे कमेंट करोगे और मुकेश सर बेटा हम लोगों के साथ कॉल पर जुड़ चुके हैं। सर आपको बहुत-बहुत बधाई सर दो मिलियन पूरा हो गया है। अरे सर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कहां गए किसी स्टूडियो से आप? सर मैं चार नंबर में हूं और यूपी बोर्ड के सबसे बड़े चैनल पर यूपी बोर्ड की सबसे बड़ी क्लास चल रही है सर। आइए
आइए स्वागत है सर और प्यारे बच्चों एक बार सभी लोग दिल रिएक्ट कर दो पूरा कमेंट सेक्शन लालाल हो जाए हो गया सर वो खुला ही नहीं है हो गए तो खुला कैसे वो बच्चे बताए कमेंट सेक्शन में अच्छा तुम लोग बता रहे हां भाई थैंक यू सो मच प्यारे बच्चों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद कि हमारा ये परिवार आज 2 मिलियन का पहुंच गया है क्लास चलते चलते मुझे डर लग रहा था कि पता ही ना चले हिंदी से यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम का इतने चैनल हो गए आपके पास बेटा ये सब तुम्हारा प्यार है
कि आज हमारा परिवार 2 मिलियन का हो गया थैंक यू सो मच बेटा थैंक यू सो मच आप सभी का और बहुत-बहुत धन्यवाद यह हमारा परिवार आज 2 मिलियन का हो गया है कहां जाता है भैया बहुत कुछ हो गया एक सेकंड खुल जा भाई जी खुल जाओ। वाह थैंक यू सो मच बेटा। थैंक यू सो मच। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। आज ये परिवार 2 मिलियन हो गया। पहला यूपी बोर्ड के नाम पर यूपी बोर्ड का पहला एक यूपी बोर्ड के नाम पर पूरे यूपी का एक पहला चैनल है जो कि 2 मिलियन हुआ।
और सर ये लोग यूपी बोर्ड की सबसे बड़ी क्लास में जुड़े हैं। सबसे बड़ी क्लास में सबसे बड़ा चैनल बन चुका है ये। तो एक बार इस सेशन को बेटा देखो उत्तर प्रदेश के अब हर घर की चौखट तक इसे पहुंचाओ। यह खुशी तुम्हारी है। मेरी नहीं है। हमारी नहीं है। हम लोग इस साल सबसे ज्यादा बच्चे यहीं पे पढ़ने वाले हैं। हर साल यहीं पढ़ते हैं क्योंकि अंतिम विश्वास अंतिम तैयारी फाइनल तैयारी विद्या कुल की जिम्मेदारी होती है। तो प्यारे बच्चों तैयारी यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम पे ही हो गई ना सर यूपी बोर्ड। सर
मैं केक केक की व्यवस्था कराता हूं आपके लिए। बढ़िया केक। बढ़िया वो कौन सा केक खाओगे? बताओ। वैनिला, चॉकलेट, रेड वेलवेट कौन सा केक खाओगे बताओ? वो रहने दीजिए। वो रहने दीजिए। रहने दीजिए। ना नहीं ठीक है। चलो तो आ जाओ बेटा। यह बहुत बड़ी खुशखबरी है। मैं हटा देता हूं। मैं हटा दूंगा। तुम यह मत सोचो कि तुम नीचे जाने लगोगे तो मैं हटाऊंगा नहीं। हटा दूंगा मैं तुरंत पट से हटा दूंगा। चलो सभी लोग सेशन को शेयर कर दो बेटा जल्दी से और सेशन को लाइक कर लो। तुरंत 20,000 लाइक पूरे हो जाने
चाहिए। अगले सवाल पर हम लोग चलते हैं। हमारा अगला सवाल क्या है बेटा? हमारा अगला सवाल क्या है? हम लोग आगे आ गए थे। थोड़ा एक सवाल पर मुझे थोड़ा डाउट हुआ तो मैं वापस गया। निम्न में से मेरे विचार कृति के लेखक कौन है? इनमें से जो मेरे विचार कृति है उसके लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। तो मेरे विचार प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी का है। इतिहास ऐसे ही बनते हैं बेटा। एक दिन मैं मैं कसम से बताऊं ये ऑनलाइन की दुनिया है। मैं बहुत दिनों से इससे जुड़ा हूं। मुझे भरोसा है। एक दिन
तुम लोगों तुम सबके पास दो-दो मिलियन का एक चैनल होगा। मुझे यह भरोसा है क्योंकि ये ऑनलाइन की दुनिया है और ऑनलाइन की दुनिया में एक बार तुम मोबाइल उठाओगे और ऐसे अपना वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू करोगे, ब्लॉग बनाना शुरू करोगे। अपने गांव, खेत, बगीचे दिखाना शुरू करोगे। ब्लॉग का इतना ट्रेंड है। मुश्किल से 6 महीने साल भर लगेगा 1 मिलियन होने में। बहुत तेजी से बढ़ता है। तुम्हारा भी चैनल 2 मिलियन का होगा। यह आशीर्वाद है मेरा। जाओ। ठीक है। चलिए। चलिए सभी लोग क्वेश्चन का आंसर करते रहिए बेटा और सेशन को चलिए मेरे
विचार प्रोफेसर जी सुंदर रेड्ड के निम्न में से हरशंकर परसाई की रचना कौन सी है? निम्नलिखित में से हरिशंकर परसाई का निबंध संग्रह कौन सा है? सभी लोग बताएंगे। हरिशंकर परसाई का निबंध संग्रह निम्न में से कौन सा है? बताएंगे आप कौन सा है तब की बात और थी जो केक कह दो रेड वेलवेट चॉकलेट वैनिला इतना ही जानता हूं बाकी तीन नाम जानता हूं चौथा नहीं जानता ठीक है बाकी के लिए थोड़ा पूछना पड़ता है मुझे चैट जीपीटी से लेकिन नहीं पूछूंगा ठीक है पूछ लेता हूं पूछ लूं क्या चैट जीपीटी से चलो चंद्रगुप्त
नाटक के लेखक कौन है चंद्रगुप्त क्या है बेटा एक ऐतिहासिक नाटक है चंद्रगुप्त एक ऐतिहास सिक नाटक है। इतना खुश हो गया हूं मैं कि समझ ही नहीं पा रहा हूं क्या करूं। चलो चंद्रगुप्त एक ऐतिहासिक नाटक है। बताओ क्या है? जयशंकर प्रसाद का नाटक है चंद्रगुप्त। अगला सवाल डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल का निबंध संग्रह कौन सा है? डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल का सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बताएंगे। चलो मातृभूमि है। वो कह रहा है शुगर फ्री। अरे भैया शुगर से मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आलोचनात्मक कृति कालिदास की लालित्य योजना के
लेखक कौन है? तो अभी मैंने तुमको बताया था कालिदास की निरंकुशता महावीर प्रसाद द्विवेदी और कालिदास की लालित योजना किसकी डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी। अगला सवाल निम्नलिखित में से किस उपन्यास की रचना हरशंकर परसाई द्वारा की गई? तो इसमें से हरिशंकर पर प्रसाई ने कौन से उपन्यास की रचना की है? रानी नागफनी की कहानी पुनर्नवा हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। निर्मला प्रेमचंद का है। अगला सवाल कुटज निबंध संग्रह के लेखक कौन है? तो कुटज निबंध संग्रह के लेखक कौन है बेटा? हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। सभी लोग जल्दी-जल्दी बताते रहो। थैंक यू बेटा। थैंक यू। थैंक
यू। थैंक यू बेटा। लव यू। लव यू। सर आपकी क्लास के लिए ब्रेकअप कर दिया। अरे दादा। ठीक है। चलो। कुटाज निबंध संग्रह के लेखक कौन है बेटा? कुटाज निबंध संग्रह के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। बेटा अभी कोई नहीं आएगा क्लास में क्योंकि क्लास डिस्टर्ब होगी। मैं नहीं चाहता हूं कि आज की क्लास में आपको कोई डिस्टरबेंस मिले। ठीक है? तो सभी लोग क्लास करो। लास्ट में सब लोग केक काटने आएंगे। आपके सुमित सर आपके संकल्प सर आपके सोमेश सर आपके शिवम सर मुकेश सर तो आएंगे ही आएंगे ठीक है चलिए अगला सवाल दीप
जले शंख बजे दीप जले शंख बजे दीप जले शंख बजे बताइए दीप जले शंख बजे क्या है दीप जले शंख बजे क्या है बेटा किस क्या है कहानी है नाटक है संस्मरण है रेखाचित्र है तो ये संस्मरण है अगले सवाल पर चलते हैं संयोगिता स्वयंबर किसकी रचना है सभी लोग बताइए संयोगिता स्वयंबर किसकी रचना है सब लोग बताएंगे संयिता स्वयंवर किसकी रचना है? सब लोग बताएंगे। संयोगिता स्वयंवर किसकी रचना है? क्या भाई? 2 मिलियन हो गया। 2 मिलियन कंप्लीट। अरे क्या देखोगे तुम रे? अरे मोबाइल मोबाइल YouTube नहीं खुलता। 2 मिलियन कंप्लीट कर लिया मैंने।
संयोगिता स्वयंवर किसकी रचना है? आज तो भैया यूपी बोर्ड का सबसे बड़ा शिक्षक यूपी बोर्ड के सबसे बड़े क्लास में और यूपी बोर्ड के सबसे बड़े चैनल पर। क्या बात कर रहे हो? ठीक है। संयोगिता स्वयंवर किसकी रचना है बेटा? लाला श्रीनिवास दास की रचना है। इंदुमती कहानी के लेखक कौन है? किशोरी लाल गोस्वामी बेटा इंदुमती कहानी के लेखक हैं। अगला सवाल मृगनयनी उपन्यास के लेखक कौन है? मृगनयनी मुकेश सर गए आए थे अभी हम मृगनयनी उपन्यास के लेखक कौन है? सभी लोग बताओ। आज तो मजा आने वाला है बेटा। आज तो मजा आने वाला
है। फोन आने शुरू हो गए हैं मेरे फोन पे। ठीक है? बधाई देने के लिए। ठीक है। हां हां। चलो ठीक है। जिसका जिसका भी चैनल हो कमेंट सेक्शन में अपने चैनल का नाम लिख दो। जिसका जिसका भी चैनल हो कमेंट सेक्शन में अपने चैनल का नाम लिख दो। मृग नयन उपन्यास के ले तुम्हारे लिए तो अच्छा है। तुम इसी चैनल की क्लिप काटो अपने चैनल पे अपलोड करो साल भर में तो वैसे ही तुम्हारा 10,000 1 लाख हो जाएगा। और यहां से कोई स्ट्राइक नहीं मारी जाती बेटा ना बच्चों के चैनल पे ना किसी
भगोड़े के चैनल पे। चलो कोई बात नहीं। मृगनयनी उपन्यास के लेखक कौन है? मृगनयनी उपन्यास के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। मृगनयनी उपन्यास के लेखक वृंदावन लाल वर्मा हैं। विचार प्रवाह के लेखक कौन है? विचार प्रवाह के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे विचार प्रवाह के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। विचार प्रवाह के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बताएंगे विचार प्रवाह के लेखक कौन है? पता है? अब जब किसी को फोन करो ना तो उसका नाम लिख के आता है। अभी एक फोन आ रहा है मेरे पर जिसका नाम कल्लो
है। उसके आधार कार्ड में जो नाम लिखा होता है वही दिखता है। तो यहां कल्लो लिखा हुआ है। के ए डबल एल ओ इसी का आधार कार्ड में नाम होगा। विचार प्रवाह के लेखक कौन है बेटा? सभी लोग बताइए। तो विचार प्रवाह महावीर प्रसाद द्विवेदी का नहीं है भाई। हजारी प्रसाद द्विवेदी का है विचार प्रवाह। अगला सवाल प्रताप पत्रिका के संपादक कौन है? अब प्रताप पत्रिका पूछा जा रहा है। प्रताप नारायण मिश्र को नहीं पूछा जा रहा है। तो प्रताप पत्रिका के संपादक कौन है बेटा? गणेश शंकर विद्यार्थी। कौन है? गणेश शंकर विद्यार्थी और बहुत
बड़ा नाम है पत्रकारिता के समय युग में गणेश शंकर विद्यार्थी। चलो चलो अगले सवाल पर चलते हैं। जन्मेजय का नाग यज्ञ नाटक के रचनाकार कौन है? फिर से जयशंकर प्रसाद हैं। यह एक सांस्कृतिक ये सांस्कृत संस्कृतिहासिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक नाटक सांस्कृतिक ऐतिहासिक अ और ए ए और क ठीक है। चलिए अब मैं सबसे यही बताऊंगा कि 2 मिलियन हो गया मेरा। प्रेमचंद का उपन्यास कौन सा है बेटा? ये चैनल मेरा है ना? ये चैनल मेरा है। हां, मेरा ही है। मेरा ही चैनल है। ठीक है। चलो प्रेमचंद का उपन्यास कौन सा है बेटा? गोदान प्रेमचंद का
उपन्यास है। अगला सवाल। पागलपथिक किस विधा की रचना है? सभी लोग कमेंट करके बताएंगे। पागलपथिक किस विधा की रचना है? सभी लोग बताएंगे बेटा। पागलपथिक किस विधा की रचना है? सभी लोग बताइए। सर 2 घंटा हो गया। बस 2 घंटा हो गया तो मुश्किल से 5 मिनट और। 5 मिनट बस। 5 मिनट और। ठीक है। 5 मिनट और चलो। पागलपथिक किस विधा की रचना है? तो पागलपथिक बेटा गद्य गीत है। पागलपथिक गद्य गीत है। क्या है? पागलपथिक गद्य गीत है। चलो अगला पढ़ते हैं। अगला सवाल। किशोरी लाल गोस्वामी की रचना कौन सी है? इंदुमती किशोरी
लाल गोस्वामी की रचना है। इंदुमती गोस्वामी किशोरी लाल गोस्वामी की रचना है। चलिए अगला सवाल। अगला सवाल वासुदेव शरण अग्रवाल द्वारा लिखित कृति कौन सी है? वासुदेव शरण अग्रवाल ने कौन सी रचना लिखी है? पृथ्वी पुत्र लिखा है बेटा। अगला सवाल तुम्हारा क्या है? प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी लेखक हैं। किसके? साहित्य का श्रेय और प्रेस, सदाचार, ताबीज, मेरे विचार मंथन मेरे विचार के लेखक हैं। मेरे विचार के लेखक हैं। अगला सवाल क्या है तुम्हारा? निराला की साहित्य साधना के लेखक कौन हैं? निराला की साहित्य साधना के लेखक कौन है? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला नहीं। महादेवी वर्मा
नहीं करें। डॉ. रामविलास शर्मा निराला की साहित्य साधना के लेखक हैं। आलोचनात्मक कृत साहित्य सहचर के लेखक कौन है? साहित्य सहचर के लेखक बेटा हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। साहित्य सहचर कॉल मत करो। कॉल मत करो। कॉल करोगे तो कैसे उठाऊंगा? क्लास ले रहा हूं जो क्लास के बाद करना। बद्री नारायण चौधरी प्रेम गंधरा संपादित पत्रिका कौन सी है? कितने बच्चे जानते हैं? क्या तुम्हें यह उत्तर पता है? अगर यस तो यस लिखो। अगर नो तो नो लिखो। सभी लोग कमेंट करके लिखेंगे। सभी लोग जल्दी-जल्दी कमेंट करेंगे बेटा। सभी लोग जल्दी-जल्दी कमेंट करेंगे। सभी लोग जल्दी-जल्दी
कमेंट करेंगे। सभी लोग जल्दी-जल्दी कमेंट करेंगे। सभी लोग अगर तुम्हें पता है तो यस लिखो। अगर नहीं पता है तो एक बच्चा कह रहा है सर क्या 95% ले आऊंगा? तुम आज की क्लास में जितने परसेंट कमेंट कर दोगे तुम्हारे उतने परसेंट नंबर आ जाएंगे। कभी खुद पर भरोसा करो। कभी पॉजिटिव मैनिफेस्टेशन करो। ठीक है? ये कह रहे हैं। देखो हमारा बोर्ड चलने लगा। ये चलने लगता है बीच-बीच में। आनंद कादंबिनी। चलो अगला सवाल। ध्रुवस्वामिनी नाटक के लेखक कौन है? कितने बच्चों को ध्रुवस्वामिनी नाटक का नाम पता है? कितने बच्चों को पता है ध्रुवस्वामिनी नाटक
के लेखक का नाम? सभी लोग बताओ। बस बस हो गया। हो गया। हो गया। बिल्कुल हो गया। बिल्कुल हो गया। अबाउट टू एंड है। अबाउट टू एंड जिसे कहते हैं। ध्रुवस्वामी नाटक के लेखक कौन है? जयशंकर प्रसाद हैं। ठीक है? प्रेमचंद की कहानी का नाम क्या है? गुंडा किसकी है? गुंडा जयशंकर प्रसाद की है। रोज किसकी है? रोज अज्ञेय की है। ठीक है। गुंडा और रोज अज्ञेय की है। चलो। ठीक है। सर आपका सब नंबर कहां से पा गए। पता नहीं कहां से पा गए। कौन सा? ये तुम्हारे लिए ही फोन है बेटा। इसमें इस
में मैं इस फोन से मैं किसी से बात नहीं कर पाता। इस फोन में दिन भर अभी देखो फोन आ रहा है। लगातार फोन आता है तो मैं किससे ही बात करूंगा और अच्छा लगता है मुझे कि चलो यूपी बोर्ड के सभी बच्चों का नंबर के पास एक नंबर है। रात में कभी-कभी मैं फोन उठाता हूं। जब तक क्लास नहीं होती है तब तक नहीं उठा। क्लास होती है तो उठा नहीं पाता। प्रेमचंद की कहानी का नाम क्या है? बेटा कफ़न है। गुंडा और रोज नहीं है। अगला क्या है? विद्यानिवास मिश्र निबंधकार हैं। विद्यानिवास मिश्र
निबंधकार हैं। कैसे निबंधकार हैं विद्यानिवास मिश्र? आप सबको बताना है विद्या निवास मिश्र कैसे निबंधकार हैं? आप सबको बताना है। तो ललित निबंध के निबंधकार हैं। इनके बहुत अच्छे-अच्छे निबंध हैं। मेरे पास इनकी दो किताबें बड़ी प्यारी-प्यारी हैं। क्या लिख रहे हो? वाली सर स्कूल में आपके ऐप का प्रमोशन कर दूंगा। भाई कर देना भाई। चलो अगला। कल कल्पता के लेखक कौन है? कल्पलता के लेखक कौन है बेटा? सभी लोग बताएंगे। कल्पता के लेखक कौन है? कल्पता तो कल्पलता के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। अच्छा हरिशंकर परसाई कि जैसे उनके दिन फरे किस विधा की
रचना है? जैसे उनके दिन फिरे क्या है? कहानी है बेटा। अगला सवाल बस बस बहुत जल्दी कंप्लीट होने वाला है। बहुत जल्दी थोड़ा सा धैर्य रखना है। एक बार सभी लोग दिल रिएक्ट करो। बस थोड़ा सा धैर्य थोड़ा सा बस मुश्किल से पांच मिनट और बस पांच मिनट। 5 मिनट में इतिहास फिर से लिखने वाले हैं हम लोग। यूपी बोर्ड का सबसे बड़ा चैनल तुम्हारे लिए तैयार है। नंबर तो नहीं दे सकता यहां पे। Instagram की आईडी ले लो। Instagram पे जाओगे तो तुम्हें नंबर मिल जाएगा मेरे WhatsApp का। ऋषि सर विद्या कुल फॉलो कर
लेना। 1 लाख फॉलोअ यहां भी पूरे होने वाले हैं। जाके कंप्लीट करवा देना। चलो क्या भूलूं? क्या याद करूं? आत्मकथा किसकी है? सभी लोग कमेंट करके बताइए। क्या भूलूं? क्या याद करूं? किसकी आत्मकथा है? हरिवंश राय बच्चन की। हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा चार भागों में प्रकाशित हुई है। चार भागों में प्रकाशित हुई है। समझ गए? उसमें एक नाम क्या बोलूं? क्या याद करूं? एक है नीड का निर्माण फिर। ठीक है? निम्न में से हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध संग्रह कौन सा है? तो इसमें से हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध संग्रह बेटा आलोक पर्व है।
अगला क्या है? विषस्य विषम्म औषधम। विषस्य विषम्म औषधम जो गद्य विधा है वो क्या है? विष्य विषधम जो रचना है उसकी गद्य विधा क्या है? तो उसकी गद्य विधा नाटक है बेटा। नाटक है। नाटक किसने लिखा है? भारतेंदु दरिश्चंद्र ने। ने हजारी प्रसाद द्वारा लिखित साहित्य सहचर की विधा क्या है? साहित्य सहचर जो पुस्तक है बेटा वो आलोचना विधा की है। किसकी है? आलोचना विधा की है। आलोचना विधा की है। साहित्य सहचर क्या है? आलोचना विधा की है। मत करो फोन। क्यों कर रहे हैं? हैं सभी लोग जो बच्चे नए हैं चैनल को सब्सक्राइब कर
लो जय महादेव इस चैनल का पुराना नाम था सेशन को लाइक कर लो एक बार शेयर कर दो अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा दो यह 2 मिलियन का चैनल तुम्हारा है तुम्हारा परिवार है जो चाहो इसके साथ करो तदियम वस्तु गोविंदम त्वभमेव समर्प तुमसे मिला है तुम्ही को समर्पित है हमारा कुछ नहीं है एक शेर है कि कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले हमसे बेहतर कहने वाले तुमसे बेहतर सुनने वाले आने वाले समय में इस चैनल पर आपको बहुत अच्छे-अच्छे टीचर पढ़ाने के लिए मिलेंगे। जीवन भर मैं ही थोड़ी ना पढ़ाऊंगा।
एक उम्र के बाद मैं भी अपने रास्ते जाऊंगा और यहां पर मेरी जगह कोई और खड़ा होकर तुम्हें पढ़ा रहा होगा। लेकिन यह संस्था हमेशा ऐसे ही चलती रहेगी जैसे चल रही है। आई लव यू सर। ठीक है? तो आपको बिल्कुल परेशान नहीं होना है, घबराना नहीं है और बार-बार कमेंट करके मुझे मत बताओ कि 2 मिलियन हो गया यार। मुझे पता चल गया है। क्यों बता रहे हो? जैसे उनके दिन फिरे मुझे मेरा मन कर रहा है कि मैं थोड़ा पार्टी वार्टी करूं लेकिन देखो क्लास है। जैसे उनके दिन फिरे निम्न में से किसका
कहानी संग्रह है? जैसे उनके दिन फिरे निम्न में से किसका कहानी संग्रह है? हरिशंकर परसाई का है। बेटा ध्यान रखना। चलो। निम्न में से कौन प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना है? कौन सी है? साहित्य और समाज भारत की एकता वैचारिक शोध और बोध मेरे विचार प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी की रचना कौन सी नहीं है होना चाहिए मेरे विचार भी उन्हीं की है। वैचारिक की शोध और बोध भी उन्हीं की है। नहीं है लिखो। भारत की एकता ये उनकी नहीं है। अगला सवाल बेटा पिताजी संस्मरण के लेखक कौन है? पिताजी संस्मरण के लेखक कौन है?
पिताजी नाम से संस्मरण किसने लिखा है? सभी लोग बताएंगे। सर पेपर कब लीक होगा? 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे। 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे पेपर लीक होगा। सात के सातों सेट ऐसा पढ़ाऊंगा ना कि वही आएगा तुम्हारे पेपर में। तो पढ़ लो। और 15, 16, 17 याद रखना। तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना रेडी होना। इसके लिए कॉपी खरीदना, कलम खरीदना, किताब खरीदना, कपड़े भी नए खरीद लेना इसके लिए क्योंकि यह किसी नेता की नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के एक शिक्षक की योजना है जो पूरी होती है और सफल बनाती है। 100 में
100 अगर तुम चाहते हो तो तुम्हारे मन की मुराद पूरी की जाएगी। चलो। पिताजी संस्मरण के लेखक कौन है? कन्हैया लाल मिश प्रभाकर हैं। अगला सवाल कौन सा है? कला और संस्कृति के लेखक। अब ये सवाल तो तुमको नहीं आता होगा। और अगर आता है तो कमेंट सेक्शन में कहो कि यस सर आता है और इसका उत्तर केवल मैं दे सकता हूं। लेकिन मैं भी जानता हूं वासुदेव शरण अग्रवाल मैं तुमसे पहले बता दूंगा। तुम कुछ नहीं कर पाओगे। अगला सवाल ज्ञानोदय पत्रिका के संपादक कौन है? सभी लोग बताएंगे जल्दी-जल्दी। ज्ञानोदय पत्रिका के संपादक कौन
है बेटा? लगातार फोन करोगे तो क्या क्लास में फोन उठाऊं क्या? ज्ञानोदय पत्रिका के संपादक कौन है बेटा? कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर हैं। अगला सवाल निम्न निम्नलिखित में से जयशंकर प्रसाद की कृति कौन सी है? कौन सी रचना जयशंकर प्रसाद की है? ध्रुवस्वामिनी जयशंकर प्रसाद की है। आषाढ़ का एक दिन मोहन राकेश का है। कुटज हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। तो ये सारी रचनाएं हैं। बस बस बस 5 मिनट 5 मिनट 5 मिनट बस। ध्रुव यात्रा कहानी के लेखक कौन है भैया? जैनेंद्र कुमार। ध्रुव यात्रा कहानी के लेखक हैं। अगला सवाल। आचरण की सभ्यता निबंध
के लेखक कौन है भैया? सरदार अध्यापक पूर्ण सिंह आचरण की सभ्यता के लेखक हैं। हिंदी नई चाल में ढलिया कथन किस लेखक का है? हिंदी नई चाल में ढली। अब जो ढालेगा वही तो कहेगा। भारतेंदु हरिश्चंद ने कहा होगा। बात खत्म। उसने कहा था। उसने कहा था भैया आज के जमाने में लोग फ्रेंड जोन हो रहे हैं। फ्रेंड जोन का समझते हो? मतलब काम तो तुम सारे करोगे। लेकिन बॉयफ्रेंड वाला ट्रीटमेंट तुम्हें नहीं मिलेगा। लेकिन एक आदमी आज के 100 साल पहले फ्रेंड जोन हो चुका था। उसका नाम था लहना सिंह और उस पर आधारित
कहानी लिखी चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने। कौन सी कहानी? उसने कहा था बहुत प्यारी कहानी है यार। क्या ही कहानी है। कलम का सिपाही के रचनाकार कौन है? अब कलम का सिपाही जीवनी है। किसकी? प्रेमचंद की। लिखा किसने? उनके बेटे अमृत राय ने लिखा है। बेटा। अगला सवाल। निम्नलिखित में से आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया निबंध। आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया निबंध केवल एक है। कविता क्या है? अशोक के फूल। हजारी प्रसाद द्विवेदी राष्ट्र का स्वरूप वास देखो शरण अग्रवाल तुम चंदन हम पानी तुम बता दो एक तो बता दो ₹10 दे दूं ले
लेना पहले सेशन को लाइक करो 15000 लाइक अब तक हो जाने चाहिए थे मैं देखता हूं कितने हैं 15000 लाइक हो जाने मैं बता दे रहा हूं अगर सेशन खत्म होते-होते 12 घंटे में 1 लाख लाइक हो गया यह पूरी की पूरी पीडीएफ तुम्हारी और नहीं तो मुझसे मत कहना क्योंकि देखो भैया डिजिटल गुरु दक्षिणा बहुत जरूरी है जो डिजिटल गुरु दक्षिणा नहीं देता उसकी पढ़ाई कैसे सफल होगी? बताओ। चलो अगला चलते हैं। अज्ञय की रचना कौन सी है? मेरे विचार किसकी? प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी। पृथ्वी पुत्र किसकी है? किसकी है पृथ्वी पुत्र? वासुदेव शरण
अग्रवाल शेखर एक जीवनी किसकी है? अज्ञेय की रचना है। अगला सवाल असदल मिश्र की रचना इसमें से कौन सी? कौन सी रचना इसमें से? सदल मिश्र की है। बस बस बस बस बिल्कुल हो गया हो गया हो गया हो गया हो गया हो गया। घबराना नहीं है। हो गया। 13,000 नहीं 1 लाख की बात हो रही है। 13,000 इतना छोटा पेट नहीं है मेरा। 2 मिलियन पूरा किया हूं अभी-अभी और तुम कह रहे हो 13,000 पे खुश हो जाऊं। क्या बात कर रहे हो यार? अभी तो मैं तुमसे ये नहीं कह रहा हूं कि 2
मिलियन लाइक होने चाहिए। एक दिन वो भी कह दूंगा और तुम्हें करवाना पड़ेगा क्योंकि तुम मुझसे प्रेम करते हो। और तुम बिना करवाए नहीं रह सकते दोस्तों। चलो नासिकेन। चंद्रकांता संतति कृति की विधा क्या है? चंद्रकांता संतति एकमात्र एकमात्र रचना यह है। चंद्रकांता संतति जिसके लिए अंग्रेजों ने हिंदी सीखी। ऐसे चार लेखक हो जाते तो यूरोप में हिंदी बोली जा रही होती आज। लेकिन नहीं हो पाए क्योंकि काम चोर हैं। चलो क्या है बेटा? उपन्यास है यह। उपन्यास है। अगला सवाल विचार और वितर्क के लेखक कौन है? विचार और वितर्क के लेखक कौन है? सभी
लोग बताओ। विचार और वितर्क के भैया मत फोन कर विचार और वितर्क लेख के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। तो भैया विचार और वितर्क के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। अगला सवाल अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिओठ की रचना कौन सी है? तो अयोध्या से उपाध्याय आर्योध की रचना बेटा ठेठ हिंदी का ठाट है यही है ठेठ हिंदी का ठाट माटी हो गई सोना तट की खोज कल्पृक्ष उनका नहीं है अगला सवाल मीण का निर्माण फिर रचना की विधा क्या है यह आत्मकथा है किसकी हरिवंश राय बच्चन की कहां फॉलो कर दिया मुझे Instagram पे भी
मेरे 1 लाख फॉलोवर पूरे होने वाले हैं। ठीक है? और उस सबको ₹10 दे दीजिए। अरे ₹10 दे दूंगा यार। ₹10 तो जब चाहोगे तब दे दूंगा। 10,000 मत मांगना नहीं दे पाऊंगा। हिंदी की प्रथम पत्रिका उददंड मार्तंड के संपादक कौन है भैया? उददंड मार्तंड हिंदी की पहली पत्रिका थी उददंड मार्तंड। इसका पहला पेज अभी भी मेरे पास रखा हुआ है। मैंने बहुत कोशिश करके उस पहले पेज को ₹21,000 में खरीदा था। उदंड मार्तंड का पहला पेज मैंने ₹21,000 में खरीदा था। मतलब जो छपा था ओरिजिनल वाला वह वाला बहुत महंगा मिलता है भाई साहब।
ठीक है? तो सभी लोग बताओ हिंदी के प्रथम पत्रिका उदंड मार्तंड के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। कोई बच्चा ऐसा ना हो जो ना बताए। उददंड मार्तंड किसका है? युगल किशोर शुक्ल का है। चलिए प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्र। कोई बता दो। हिंदी प्रदीप किसका है? बालकृष्ण भट्ट का है। बालकृष्ण भट्ट। अब कोई कह दे इसमें से किसी एक के संपादक का नाम तुमको ना पता हो तो बताओ। अगर पता है तो दिल रिएक्ट करो कमेंट सेक्शन में यार। रुके क्यों हो? इसका क्या है? महावीर प्रसाद द्विवेदी। महावीर प्रसाद द्विवेदी। मर्यादा पत्रिका किसकी
है? संपूर्णानंद डॉ. संपूर्णानंद की है। संपूर्णानंद की है। ब्राह्मण पत्रिका किसकी है? प्रताप नारायण मिश्र की है। प्रताप नारायण मिश्र की है। मुकेश सर केक लाने गए हैं। ला रहे हैं। तुम्हारे घर पार्सल करवा दूंगा केक बेटा। ठीक है। तुम भी खाना, मम्मी को भी खिलाना, पापा को भी खिलाना। लेकिन अच्छा हो कि टॉपर बन जाओ। टॉपर बन जाओ तो तुम्हारे घर के एकक लेके मैं खुद ही आ जाऊं। हैं हां 100 में 100 आएगा अगर हिंदी में देखो टॉपर वाला बात नहीं है यहां पे टॉपर को तो 10-15 लाख जो मुकेश सर देंगे देंगे।
मेरा उसमें कुछ नहीं है। मतलब मुझसे भी कहेंगे दो 4 लाख दे दूंगा। पैसे बहुत लेकिन भाई तुम्हारा हिंदी में 100 में 100 आएगा तो गिफ्ट मेरी तरफ से रहेगा। चाहे फिर तुम्हारा बाकी सब्जेक्ट में कुछ ना आए। मुझे हिंदी में 100 में 100 चाहिए और कम से कम 1000 बच्चों का चाहिए। इस बार भारत दुर्दशा नाटक के रचनाकार कौन है? भारत दुर्दशा नाटक के रचनाकार कौन है? मुझे बताओ। कमेंट करके बताओ। भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं। बस बस बस हो गया। बस थोड़ा सा थोड़ा सा। इनमें से गद्य की किस विधा में काल्पनिक प्रसंगों का स्थान
नहीं है? गद्य की कौन सी विधा में काल्पनिक प्रसंग अर्थात बनावटी बातें किस विधा में नहीं होती हैं? तो भैया कहानी में भी हो सकती हैं। उपन्यास में भी, नाटक में भी। लेकिन आत्मकथा में जब मैं अपनी कहानी लिखूंगा तो उसमें बनावटी बात तो कोई लिखूंगा नहीं। आज 2 मिलियन दिल जुड़ गए। सोचो 2 मिलियन लोग 2 मिलियन कितना होता है पता है? 20 लाख इस प्लेटफार्म पर 20 लाख लोग जुड़े हैं। 20 लाख अगर एक जगह खड़ा करना हो ना सोचो कितनी बड़ी जगह चाहिए। चलो अगला सवाल बेटा भारतेंद हरिश्चंद्र द्वारा संपादित पत्रिका कौन
सी है? तो भारतेंद हरिश्चंद्र द्वारा संपादित पत्रिका कवि वचन सुधा है। हिंदी प्रदीप बालकृष्ण भट्ट की है। आनंद कादंबरी बद्री नारायण चौधरी प्रेमगन की है। ब्राह्मण प्रताप नारायण मिश्र की है। अगला सवाल श्रद्धा और भक्ति निबंध के लेखक कौन है? भैया रामचंद्र शुक्ल हैं। श्रद्धा और भक्ति के निबंध के लेखक। कविता क्या है? भी इन्हीं का निबंध है और ये दोनों निबंध चिंतामणि नामक पुस्तक में संग्रहित हैं। अगला सवाल कितने बच्चे हो गए? कितना लाइक हो गया? कमेंट करके बताओ कितना लाइक हो गया? सेशन को शेयर करते रहो। सभी लोग सेशन को सभी लोग शेयर
करते रहो और सेशन को लाइक करते रहो। सभी लोग सेशन को शेयर और लाइक करते रहो बेटा। सभी लोग सभी लोग सेशन को शेयर और लाइक करते रहो। चलो आगे बढ़ते हैं। रंगभूमि उपन्यास के लेखक कौन है? रंगभूमि उपन्यास के लेखक बेटा प्रेमचंद हैं। अगला सवाल कर्मनासा की हार कहानी के लेखक कौन है? बहुत प्यारी कहानी है। कर्मनासा की हार शिव प्रसाद सिंह हैं। कर्मनासा की हार कहानी साहित्यिक हिंदी वालों में है। सभी लोग जल्दी से 15,000 करवाओ इसको जल्दी से सभी लोग और सभी लोग सेलिब्रेशन अभी होगा। सेलिब्रेशन होगा जो तुम कहोगे वो होगा।
और तुमको एक बात कह दूं चाहे जो करना पड़े इस 2 मिलियन का पूरा करने के उपलक्ष में तुम्हें पेपर मिलेगा। बोर्ड एग्जाम में जाने से पहले सारे पेपर का सॉल्यूशन तुम्हारे पास होगा। 15, 16, 17 या तीन दिन 18 को सुबह 5:00 बजे। मिल जाएगा। ठीक है। चलो अगला सवाल क्या है? धर्मवीर भारती द्वारा लिखित उपन्यास कौन सा है? सूरज का सातवां घोड़ा एक और है धर्मवीर भारती का जो बहुत प्रसिद्ध है आजकल कोई मुझे बता सकता है गुनाहों का देवता गुनाहों का देवता की रील किसने किसने देखी है गुनाहों का देवता की रील
किसने किसने देखी है भैया चंदर चंदर जो भयंभे रोता है जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखित नाटक नहीं है कौन सा नाटक जयशंकर प्रसाद ने नहीं लिखा है कौन सा लिखा है नहीं पूछ रहा है कौन सा नहीं लिखा है यह पूछ रहा है कौन सा नहीं लिखा है जयशंकर प्रसाद ने यह पूछ रहा है सभी लोग बताइए कौन सा नहीं लिखा है भारत सौभाग्यम नहीं लिखा है अगला सवाल यात्रावृत्त संबंधी गद्य कृति अरे यावर रहेगा याद के लेखक कौन है अरे यावर रहेगा याद के लेखक कौन है बेटा अरे यावर रहेगा याद के लेखक अज्ञेय हैं
सच्चिदानंद धीरानंद वात्स अज्ञे हिंदी का प्रथम यात्रा वृतांत सरयू पार की यात्रा किसने लिखा भारतेंद हरिश्चंद्र ने लिखा गजब आदमी थे भाई एक बार सरयू पार चले गए किताब लिख दी पांच एमसीक्यू आठ एमसीक्यू और हैं आठ बस आठ एमसीक्यू और हैं बेटा वो मेरे बस में नहीं है। वो YouTube करता है। YouTube हमेशा जब भी लंबी क्लास चलती है या कोई भी क्लास चलती है तो YouTube अपनी तरफ से ऐड लगाता है। चलती हुई क्लास में कोई ऐड नहीं लगाता। वो YouTube अपनी तरफ से लगाता है। वो हमारी तरफ से नहीं हो रहा है।
गुनाहों का देवता कृति किसकी है? धर्मवीर भारती की है। बेटा अगला सवाल। भूले बिसरे चेहरे कृत के लेखक कौन है? भूले भूले बिसरे चेहरे कृति के लेखक कौन है? भूले बिसरे चेहरे कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर हैं। ये तुम्हारे रॉबर्ट नर्सिंग होम के लेखक। आचरण की सभ्यता अध्यापक पूर्ण सिंह का है। आचरण की सभ्यता आचरण की सभ्यता अध्यापक पूर्ण सिंह का है। महके आंगन चहके द्वार रचना किसकी है? महके आंगन चहके द्वार रचना किसकी है? महके आंगन चहके द्वार रचना किसकी है? बेटा मेरे जी मुझे एक बार कमेंट करके बताओ। महके आंगन चहके द्वार किसकी है?
कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर की है। अगला सवाल निम्नलिखित में से कौन सी रचना अज्ञेय का यात्रा वृत्तांत है? अज्ञेय का यात्रा वृतांत। एक बूंद सहसा उछली। अज्ञय कहते हैं कि मैं एक बूंद हूं और अचानक से उछल गया मैं। समझ रहे हो? चलो सेशन को एक बार शेयर कर दो और सभी लोग लाइक कर लो। सभी लोग सेशन को लाइक कर लेंगे बेटा। चलिए अगला सवाल। क्षण बोले कण मुस्काए कृति के लेखक कौन है? क्षण बोले कण मुस्काए कृति के लेखक कौन है? क्षण बोले कण मुस्काए कृति के लेखक कौन है? सभी लोग बताएंगे। क्षण
बोले कण मुस्काए सभी लोग बताएंगे बेटा क्षण बोले कण मुस्काए कन्हैया लाल मिश प्रभाकर का है अगला सवाल भारतेंदु युग की पत्रिका नहीं है कौन सी पत्रिका इसमें से भारतेंदु युग की नहीं है तो सरस्वती जो पत्रिका है बेटा वो भारतेंदु युग की नहीं है सरस्वती पत्रिका आपकी भारतेंदु युग की नहीं है यह बात ध्यान रखिएगा सरस्वती पत्रिका कब की है मुझे बताओ कोई मुझे बता सकता है कि सरस्वती पत्रिका कब की है कोई मुझे बता सकता है कि सरस्वती पत्रिका कब की है कोई बच्चा हे पुरुष हे महिला मुझे बताओ सरस्वती पत्रिका किस युग
की है? तो यह द्विवेदी युग की है। द्विवेदी युग की है। द्विवेदी युग और एक बार फिर से तुम लोग कमेंट सेक्शन को भर दो दिल से क्योंकि एक पहले चरण का पहले चरण का पहले चरण का एक टॉपिक हमने बहुत अच्छे से कवर कर लिया है। पहले चरण का पहला टॉपिक ये देखो गद्य का विकास हो गया बेटा। तुमने कहा कि सर बंद कर दीजिए एमसीक्यू। मैंने चुपके से सारा करवा दिया। तुम्हें पता भी नहीं चला और सब करवा दिया। देखो अब आ जाएंगे गद्य पर गद्यांश पर आधारित प्रश्न पर। एक भी सवाल छूटा
अगर तो जान लो तुम्हारा भविष्य आने वाले 18 फरवरी को गलत तरीके से लिख जाएगा। तुम अपनी पीठ ठोको, पीठ थपथपाओ। बैठे हुए कुर्सियों पर और जमीन पर तुम्हारे पैर की हड्डियां जम रही होंगी। एक जगह बहुत लंबे समय तक बैठने से बहुत दिक्कत होने लगती है। लेकिन यकीन मानो लड़ाई को जीतने के लिए संघर्ष के इसी चरण से गुजरना पड़ता है। सुखार्थिन कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिना सुखम सुखार्थी वात्यजेत विद्याम विद्यार्थी वात त्यजेत सुखम सुख चाहिए छोड़ दो पेपर 18 फरवरी नहीं किसी फरवरी में पेपर मत देना और अगर विद्या चाहिए अगर सफलता तुम्हारे सामने
खड़ी रहे ऐसा दिन चाहते हो तो फिर विद्या के लिए सुख का त्याग करो इस शरीर को जितना सुख दोगे उतना यह तुमसे सहजता मांगेगा उतना कोमल हो जाएगा युद्ध लड़ने वाले चले आराम नहीं करते हैं दोस्तों। चलो गद्य गरिमा की ओर कूच करते हैं। आक्रमण राष्ट्र का स्वरूप भैया पहला पार्ट है तुम्हारा। प्रस्तुत निबंध राष्ट्र का स्वरूप इसके इनके पृथ्वी पुत्र नामक निबंध संग्रह से लिया गया है। इस निबंध में लेखक ने यह बताया है कि राष्ट्र का स्वरूप तीन तत्वों से मिलकर बना है। ये तीन तत्व पृथ्वी, जन और संस्कृति पृथ्वी को माता
के रूप में मानना और स्वयं को पृथ्वी का पुत्र मानना राष्ट्रीयता की भावना के उदय के लिए आवश्यक है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन का दृढ़ संबंध होना चाहिए। इसके साथ संस्कृति के विषय में भी लेखक ने मार्मिक विचार प्रकट किए हैं। लेखक अनु के अनुसार सहृदय व्यक्ति प्रत्येक संस्कृत के आनंद पक्ष को स्वीकार करता है और उससे आनंदित होता है। एक बात मैं बता दूं कितने बच्चे ऐसे हैं जिनके पास किताबें हैं हवा में फेंक दो। घर के बाहर फेंक दो। छत पर बैठे हो तो नीचे फेंक दो। अब तुम्हें किताबों
की जरूरत नहीं है। अगर तुमने एक लाइन भी नहीं पढ़ी तो इस क्लास को देखने के बाद अगले 5 मिनट में तुम सबसे कॉन्फिडेंट व्यक्ति होगे जो ये कहोगे कि सर सारा सवाल कर लूंगा। किताब की कोई जरूरत नहीं है। तो तैयार हो तो एक बार दिल रिएक्ट करो और शुरू करते हैं। तैयार हो तो एक बार दिल रिएक्ट करो। शुरू करते हैं। चलो यहां पर एक पैराग्राफ लिखा है। भूमि का निर्माण देवों ने किया है। वह अनंत काल से है। उसके भौतिक रूप सौंदर्य और समृद्धि के प्रति सचेत होना हमारा आवश्यक कर्तव्य है। भैया
बी मोस्ट इंपोर्टेंट सवाल है। बी मोस्ट इंपोर्टेंट सवाल बी मोस्ट इंपोर्टेंट सवाल। जितना स्टार बना पाओ बना लो। उसके भौतिक रूप सौंदर्य समृद्ध के सचित होना हमारा आवश्यक कर्तव्य है। भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति हम जितने अधिक जागृत होंगे उतना ही हमारी राष्ट्रीयता बलवती हो सकेगी। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचारधाराओं की जननी है। जो राष्ट्रीयता पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह निर्मूल होती है। राष्ट्रीयता की जड़े पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी उतना ही राष्ट्रीय माओं का अंकुर पल्लवित होगा। नया टॉपिक हो रहा है। शुरू हो रहा है 30 सेकंड में। सभी
लोग जाओ लिंक को अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा के आ जाओ और क्लास को लाइक कर लो। जो नए बच्चे हैं। कितना लाइक हुआ? जल्दी से बताओ और सेशन को शेयर कर दो एक बार बेटा। अभी केवल 14,000 हुआ यार। अब तक 20,000 हो जाना चाहिए। चलो। चलो ठीक है अब देखो अब क्या करना है तुमको तुमको जैसे ही तुम गद्यांश देखना अपने पेपर में उसको 1 2 3 4 5 6 ऐसे मार्क कर देना आ जाना सवालों पर बेटा उपर्युक्त गद्यांश के शीर्षक और लेखक का नाम एक बार मुझे बता दो इसका शीर्षक
क्या है और लेखक का नाम क्या तुम्हें पता है क्या तुम्हें पता है अगर हां तो बताओ तुरंत कमेंट सेक्शन में लिखो ये सवाल नहीं छूटेगा दो नंबर फ्री का मिल रहा है जितने सवाल इससे बन सकते हैं उतना सब लेके आया हूं देखो कैसे तुम्हें करना है। आओ दिखाएं तुम्हें अंडे का फंडा। ठीक है? मैं बहारों का अकेला वंशधर हूं। मैं खेलूंगा तब नई बगिया खेलेगी। याद रखना इस बात को और यह तुम सबके लिए है। तुम बहारों के अकेले वंशधर हो। अपने परिवार और समाज के लिए तुम बहारों के अकेले वंशधर हो। तुम
खिलोगे तब नई बगिया खिलेगी। लिख लो अपनी कॉपी में यह बात। क्योंकि जितना तुम्हारा विकास होगा उतना ही तुम्हारे परिवार और समाज का विकास होगा। ठीक है? ये राष्ट्र का स्वरूप से है। यह राष्ट्र का स्वरूप से है। लास्ट तक कोई भी बच्चा यह नहीं कह पाएगा कि सर गद्यांश पहचान नहीं पा रहा हूं। बस रुके रहो। बस रुके रहो। राष्ट्र का स्वरूप। लेखक कौन है? लेखक कौन है भाई? कमेंट सेक्शन में लेखक का नाम फेंक के मारो। फेंक के मारो सभी लोग। लेखक का नाम फेंक के मारो। तुरंत फेंक के मारो। ऐसे मारना कि
चोट लग जाए उसको। पहला सवाल हो गया। दो नंबर मिल गए। दो नंबर मिल गए तुमको। कितने लोगों को दो नंबर मिल गए? एक बार अपने लिए। जिन-जिन बच्चों को दो नंबर मिल गए हैं। कमेंट सेक्शन में बताओ। दिल रिएक्ट कर दोगे। सर दो नंबर मिल गए। इस पैराग्राफ को सॉल्व करने के बाद बेटा तुम्हारा डर खत्म हो जाएगा गद्यांश को लेकर। यकीन मानो। और जो बच्चे मुझसे पढ़ चुके हैं, वह जानते हैं। कौन-कौन जानता है यह बात कि इस गद्यांश के बाद किताब जला देनी चाहिए। कौन-कौन मेरी इस बात पर एग्री करता है कि
इस गद्यांश को समझने के बाद किताब जला देना पड़ेगा। आओ राष्ट्रभूमि के प्रति हमारा आवश्यक कर्तव्य क्या है? सिंपल सवाल है। बोर्ड एग्जाम में पूछा गया है। वापस चलते हैं। 1 2 3 4 5 6 छह लाइनों में एक शब्द यहां पर है। आवश्यक कर्तव्य। किस लाइन में लिखा हुआ है? मुझे बताओ जरा। इन छह लाइनों में किस लाइन में आवश्यक कर्तव्य लिखा है? बताओ जरा। तुमने नहीं पढ़ाई की है लेकिन अक्षर पढ़ लेते हो। मुझे बस ये बताओ कि आवश्यक कर्तव्य किस लाइन में लिखा है? सभी लोग बताएंगे। सभी लोग बताएंगे किस लाइन में
आवश्यक कर्तव्य लिखा है? बताओ। दूसरी लाइन में लिखा है। मान लेते हैं। कहां है? यह देखो यह आवश्यक कर्तव्य। ठीक है? राष्ट्रभूमि के प्रति हमारा आवश्यक कर्तव्य क्या है? तो उसके भौतिक रूप, सौंदर्य और समृद्धि के प्रति सचेत होना हमारा आवश्यक कर्तव्य है। जिस लाइन में वो शब्द मिल गया, वही लाइन उस सवाल का उत्तर हो गया। क्या एग्री करते हो? क्या मानते हो? क्या ये उत्तर सही है? यस या नो? कमेंट करो यस या नो क्या यह उत्तर सही है बेटा उसके लिए YouTube वालों को गरियाओ मुझे मत कुछ कहो ठीक है वो देख
रहे हैं ना कि यूपी का सारा बच्चा बैठा है तो वो सोच रहे होंगे कि 10 ऐड दिखा दूं तो ज्यादा पैसे कमा लूं फट से लाइक कर लो सब लोग फट से लाइक कर लो बेटा सभी लोग फट से लाइक कर लो हो गया समझ में आ गया चलो समझ में अगर आ गया है तुमको तो बस अब समझ जाओ यही गेम है दोस्तों यही गेम खेलना था और खेल गया देखो कैसे अगला सवाल अगला सवाल किस प्रकार के राष्ट्रीयता को लेखक ने निर्मूल रूल कहा है। चल भैया चल तैयार हो जा मेरे बेटे
बेटियों मेरे बच्चियों मेरे बाबूओं मेरी भैया दीवियों अब इसमें इस इनमें कौन सी लाइन में निर्मूल है पहली दूसरी तीसरी चौथी पांचवी छठी निर्मूल किस में है पहले पैराग्राफ में थोड़ा समय लगेगा लेकिन उसके बाद जो मजा आने वाला है तुमको चुटकियों में ऐसे खारिज कर दोगे सब कुछ कौन सी लाइन में है सर केक नहीं आया आ रहा है बेटा आर्डर दिया गया होगा ना उसमें 2 मिलियन लिख के आएगा पैसा खर्च कर रहे हैं आज मुकेश सर। मैंने कहा था भैया दो-तीन फ्लोर का केक लाना। अब देखो कौन सा ले आते हैं। इतना
भी नहीं खर्च करेंगे। यह भी मैं जानता हूं। एक बच्चा कह रहा है चौथी लाइन में है। पहला दूसरा, तीसरा, चौथा। ये देखो निर्मूल। अब देखो यहां से उठा लो। जो राष्ट्रीयता पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह निर्मूल होती है। किस प्रकार की राष्ट्रीयता को लेखक ने निर्मूल कहा है? क्या इसका उत्तर यह है? अगर हां, तो यस लिखो। अगर हां, तो यस लिखो। मैं सच बता रहा हूं। लोग तुम्हें पढ़ाते हैं, मैं सिखाता हूं। लोग तुम्हें उत्तर बताने आते हैं। मैं उत्तर खोजना सिखाता हूं। और जाके क्लास देख लेना तुम। किसी की भी कहीं
भी। अगर तुम्हें इस तरह से पढ़ते हुए पढ़ इस तरह का कंटेंट मिल जाए या इस तरह की समझदारी मिल जाए तो बताना। प्रॉपर तो तुम बनोगे। मैं बना लूंगा यार। तुम अपनी चिंता छोड़ो। तुम मेरे साथ हो। बना लूंगा मैं। चलो। तो अब ये हो गया। चलो तीसरे सवाल पर टूट पड़ते हैं। तीसरा सवाल चलो रेखांकित अंश वाला अभी पहले यह वाला है। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में क्या है? शब्द क्या है? सच्चे अर्थों। शब्द क्या है? सच्चे अर्थों। शब्द क्या है? सच्चे अर्थों। चलो वापस आ जाओ। खोजो सच्चे अर्थों किस लाइन में है?
खोजो। सच्चे अर्थों किस लाइन में है? किस लाइन में है? सच्चे अर्थों। सच्चे अर्थों किस लाइन में है? सर क्या पी रहे हैं? अरे यह नींबू वाली चाय है। बहुत प्यारी लगती है नींबू वाली चाय। सच्चे अर्थों सच्चे अर्थों सच्चे अर्थों चलो एक भी बच्चा गलत जवाब नहीं देगा। सच्चे अर्थों सच्चे अर्थों सच्चे अर्थों चलो सच्चे अर्थों। अब सच्चे अर्थों कहां मिल गया? कहां पे? तीसरी लाइन में है। पहली, दूसरी, तीसरी कहां है? यह देखो सच्चे अर्थों में मिल गया। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचारधाराओं की जननी है। क्या इस सवाल का यही
उत्तर है? क्या इस सवाल का यही उत्तर है? हां। यार देखो अब मैं तुम्हें पढ़ा रहा हूं। तो अगर कोई कमेंट सेक्शन में बदतमीजी करे तो उसका इलाज तुम्हें ही करना है। मुझे पढ़ाने दो। अगर मैं करने लगा तो समस्या होगी। तुम ही कर दो। ठीक है? कोई तुम्हें उलजूल फालतू बात करता दिखे निपटा दो उसे। ठीक है? चलो। या पृथ्वी सच्चे अर्थों में क्या है बेटा? तो यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचारधाराओं की जननी है। अच्छा रेखांकित अंश वाला थोड़ा रुक करके करेंगे क्योंकि इसको अलग तरीके से बताना है मुझे। पहले आ
जाओ। भूमि का निर्माण किसने किया और कब से है? अब भूमि का निर्माण शब्द क्या है? भूमि का निर्माण। बताओ भूमि का निर्माण शब्द कहां है? भूमि का निर्माण शब्द किस लाइन में है? संस्कृत में। अभी तक गद्यांश में लगता था ना? चुटकियों में दूर हो गया। कोई ऐसा बच्चा है जो गद्यांश के सवालों से डर रहा है? कोई ऐसा बच्चा है जो गद्यांश के सवालों से डर रहा है? बताओ। हो लगता है डर? कोई डर है गद्यांश के सवालों का? कर लिया सवाल। पढ़े थे नहीं पढ़े थे। कोई फर्क पड़ा? कोई फर्क पड़ा पढ़ने
ना पढ़ने का? पड़ा। बताओ। चलो। भूमि का निर्माण देवों ने किया है। वह अनंत काल से है। यही तो पूछ रहा है भैया। यही तो पूछ रहा है। भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति जागरूक रहने का परिणाम क्या होगा? भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति जागरूक रहने। भूमि के पार्थिव स्वरूप शब्द क्या मिला? पार्थिव स्वरूप। आ जाओ वापस। पार्थिव स्वरूप खोजो। पार्थिव स्वरूप खोजो। पार्थिव स्वरूप किस लाइन में है? पार्थिव स्वरूप किस लाइन में है? इतनी मेहनत करके पढ़ा रहा हूं तुम्हें फिर भी एकको सवाल गलत हो गया ना बोर्ड एग्जाम का तो वहीं सेंटर
वे पे आके पूछ दूंगा तुरंत ये रहा पार्थिव स्वरूप भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति हम जितने अधिक जागृत होंगे उतनी ही हमारी राष्ट्रीयता बलवती हो सकेगी क्या यह उस सवाल का उत्तर हुआ हां या ना हां या ना हां या ना लिख ना भाई यस या नो लिखो क्या यह उस सवाल का उत्तर है एक बात मुझे बताओ अभी मैंने रेखांकित अंश नहीं बताया है अभी मैंने रेखांकित अंश नहीं बताया है अभी मैंने रेखांकित अंश नहीं बताया है दिल से बताना ठीक है नहीं समझ में आया तो ना लिख देना आ गया तो हां
लिख देना दिल रिएक्ट कर देना बताओ क्या गद्यांश के सवालों के उत्तर देने के लिए तुम्हें तुम्हें मेरी क्लास करनी चाहिए या किताब पढ़नी चाहिए? बताओ। मेरी क्लास करनी चाहिए या किताब पढ़नी चाहिए? बताओ। बताओ एक बात। अब मैं आ रहा हूं रेखांकित अंश वाले पे। तुम्हें बहुत डर लगता है ना कि रेखांकित अंश कैसे करूंगा? डर लगता है कि नहीं? किसको-किसको डर लगता है कि रेखांकित अंश कैसे करूंगा? किसको-किसको डर लगता है छोड़ो बातें खत्म आज आर या पार आर समंदर पार समंदर बीच में है नैया रेखांकित अंश कैसे सॉल्व होगा आज बताएंगे भैया
और फंसेगा बोर्ड एग्जाम में ये क्वेश्चन ठीक है चलो आ जाओ आ जाओ रेखांकित को निपटाते हैं यार साथ में चलो तुमको जिंदगी जीत के दे दूंगा राष्ट्रीयता की जड़े पृथ्वी में अधिक जितनी अधिक गहरी होंगी राष्ट्रीयता मतलब मतलब राष्ट्र प्रेम की जड़। पेड़ की जड़ होती है। राष्ट्र प्रेम की जड़। पृथ्वी में जितना गहरा होगी, जितना नीचे घुसी हुई होगी, राष्ट्रीय भावों का अंकुर पल्लवित होगा उतना। यानी उतना ज्यादा हमारे राष्ट्र प्रेम में अंकुर निकले हुए होंगे या हमारे राष्ट्र उतना ज्यादा हमारा राष्ट्र प्रेम बड़ा होगा। देखो अब एक बात समझो। पहले दो चीजें
समझो। जब कोई जैसे जब मैं लिखता हूं तो मैं अपनी पढ़ाई के अनुसार लिखता हूं। जब तुम लिखते हो तो तुम अपनी पढ़ाई के अनुसार लिखते हो। जो एग्जामिनर है वो जानता है कि तुम क्लास 12th के बच्चे हो तो तुम वैसे ही लिखोगे। चलो आ जाओ। राष्ट्रीयता की जड़े पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी उतना ही राष्ट्रीय भावों का अंकुर पल्लवित होगा। इसलिए पृथ्वी के भौतिक स्वरूप यानी पृथ्वी के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र का की आद्य उपांत आदि और अंत तक पूरी जानकारी प्राप्त करना उसकी सुंदरता और उपयोगिता और महिमा को पहचानना हमारा आवश्यक धर्म है।
अच्छा तुम्हारे पापा ने कहा कि जाओ अपनी मम्मी से एक चाय ले आओ। ठीक। तो तुम मम्मी के पास जाओगे और कहोगे कि मम्मी पापा ने कहा है कि एक चाय दे दो। दोनों एक ही बात हुई ना? एक तुमने अलग तरीके से सुनी थी, तुमने कही अलग तरीके से लेकिन बात में कोई अंतर नहीं आया। तो लेखक ने लिखा है अपने तरीके से। तुम्हें कॉपी में अपने तरीके से लिख देना है कि भैया मेरे राष्ट्र प्रेम की जड़ इस धरती में जितना अधिक गहरी घुसी हुई होगी, उतना ज्यादा मैं अपने इस राष्ट्र से प्रेम
कर पाऊंगा और उस मुझे अपने राष्ट्र से प्रेम करने के लिए अपने राष्ट्र को समझना पड़ेगा। शुरू से अंत तक हर चीज जाननी होगी और कितना महान है मेरा देश मेरी मेरा राष्ट्र कितना सुंदर है और कितना ज्यादा मेरे लिए उपयोगी है ये सब मुझे जानना पड़ेगा ये सब मुझे जानना पड़ेगा मैंने अपनी भाषा में ये बात कह दी क्या तुम इन तीन लाइनों को अपनी भाषा में कह सकते हो क्या तुम इन तीन लाइनों को अपनी भाषा में कह सकते हो बताओ क्या तुम इन तीन लाइनों को अपनी भाषा में कह सकते हो क्या
तुम इसे अपनी भाषा में लिख सकते हो? क्या तुम इसे अपनी भाषा में लिख सकते हो? एक बार दिल रिएक्ट करो यार। जोर से बोलो कि सर लिख सकता हूं। मेरी क्लास में हो तुम। जिंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा जंग लाजिम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते युद्ध लड़ा जाता है और इस बार बोर्ड एग्जाम में अगर एक भी सवाल तुम्हारा छूट गया तो फिर मेरे पढ़ाने का कोई मोल है नहीं और अगर तुम लोग चाहते हो कि उत्तर प्रदेश के हर बच्चे का सवाल सही हो तो तुम्हें बस इस क्लास को
सबके साथ शेयर कर देना है। आज की क्लास मैं चाहता हूं उत्तर प्रदेश बोर्ड से पढ़ने वाले हर बच्चे की मोबाइल में हो क्योंकि सब हिंदी मीडियम से हिंदी में पढ़ते हैं। सबको हिंदी का पेपर देना होता है हर एक बच्चे से। चलो अब अगले पैराग्राफ पर चलते हैं। उसका उत्तर तुम खुद बताओगे। लेकिन यही काम खत्म नहीं होगा। मैं तुमको इसका आंसर भी दूंगा। पहले तो मैं तुम्हें लिखना सिखाऊंगा। फिर तुम्हें आंसर भी दे दूंगा कि तुम्हारा बिल्कुल रिवीजन हो के मजबूत हो जाओ तुम। चलो। उपर्युक्त गद्यांश के शीर्षक एवं लेखक का नाम लिखिए।
तो गद्यांश का शीर्षक भैया राष्ट्र का स्वरूप है। इसके लेखक वासुदेव शरण अग्रवाल हैं। अच्छा राष्ट्रभूमि के प्रति हमारा आवश्यक कर्तव्य क्या है? तो राष्ट्रभूमि के प्रति हमारा आवश्यक कर्तव्य उसके भौतिक रूप, सौंदर्य और समृद्धि के प्रति सचेत होना है। किस प्रकार की राष्ट्रीयता को लेखक ने निर्मूल कहा है? लेखक ने कहा है कि जो राष्ट्रीयता पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह निर्मूल होती है। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में क्या है? तो यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचारधाराओं की जननी है। अब देखो तुमने एक बार खुद से खोज लिया, दोबारा पढ़ लिया। क्या
तैयार हुआ कि नहीं? हां बेटा यह सामान्य हिंदी है। लेकिन तुम्हें पता है साहित्यिक हिंदी में भी सामान्य हिंदी का पूरा सिलेबस है। समझ रहे हो? चलो रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। राष्ट्रीयता की जड़े पृथ्वी में जितनी अधिक गहरी होंगी उतना राष्ट्रीय भावों का अंकुर पल्लवित होगा। ये मैंने अपनी भाषा में लिखा है। तुम अपनी भाषा में लिखोगे कि भैया हमरे राष्ट्रीयता के जरिया धरतिया में जितना घुसी रही उतने ज्यादा हम राष्ट्रवादी रहा। अब अवधि में लिख दो अवधी में नंबर काटेगा मत लिखना। खड़ी बोली हिंदी में लिखना। ठीक है? भूमि का निर्माण किसने किया
भैया? भूमि का निर्माण देवों ने अनंत काल से किया है। भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति जागरूक होने पर का परिणाम राष्ट्रीयता की भावना की प्रबलता है। चलो अब आ जाओ अगले पैराग्राफ पर। इसका उत्तर तुम खुद दोगे। आओ देखते हैं। मातृभूमि पर निवास करने वाले मनुष्य राष्ट्र का दूसरा अंग है। पृथ्वी और मनुष्य ना हो तो राष्ट्र की कल्पना असंभव है। पृथ्वी और जन दोनों के सम्मेलन से ही राष्ट्र का स्वरूप संपादित होता है। एक बच्चा कह रहा है सर आपका नाम क्या है? यार मेरा नाम बता दो गाइस। मुझे मुझे आप लोग मेरा
नाम बता दीजिए। मैं ही पूछ लेता हूं। वह पूछते हैं कि गालिब कौन है? कोई हमें बतलाए कि हम बतलाएं क्या? सर आगे बढ़ाएं। चलो 15, 16, 17 याद रखना। ऐसे ही तैयार करूंगा इन तीन दिनों में तुमको और 18 को सुबह 5:00 बजे। चलो। मातृभूमि पर निवास करने वाले मनुष्य राष्ट्र का दूसरा अंग है। पृथ्वी और मनुष्य ना हो तो राष्ट्र की कल्पना असंभव है। पृथ्वी और जन दोनों के सम्मेलन से। अब मुझे लग रहा है कि तुम मेरी वीडियो सब तक पहुंचा रहे हो। क्योंकि अब नए बच्चे आ रहे हैं जिनको मेरे बारे
में पता ही नहीं है। लेकिन अब वो जानेंगे कि सबसे अच्छी हिंदी कहां पढ़ाई जाती है। सबसे अच्छी यूपी बोर्ड के एग्जाम की तैयारी कहां करवाई जाती है। चैनल सब्सक्राइब कर लेना और लाइक कर लेना। तो भैया पृथ्वी और जन दोनों के सम्मेलन से ही राष्ट्र का स्वरूप संपादित होता है। जन के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है। पृथ्वी माता है और जन सच्चे अर्थों में पृथ्वी का पुत्र है। माता भूमि पुत्र हम पृथ्वी भूमि माता है और मैं उसका पुत्र हूं। जन के हृदय में इस सूत्र का अनुभव ही राष्ट्रीयता की
कुंजी है। इसी भावना से राष्ट्र निर्माण के अंकुर उत्पन्न होते हैं। ध्यान रखना इस बात का। हां, 2 मिलियन हो गया। मेरा नाम ऋषि द्विवेदी है। और मैं आपका हूं। गुनाहे इश्क रिहा होते ही करेंगे फिर गवाह बनना नहीं। मुखबदिगरी नहीं करनी। ठीक है? चलो अब आ जाओ। चलो इसके सवाल देखते हैं। इसके सवाल देखते हैं। पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम। तो भैया जहां राष्ट्र आ जाए, जहां राष्ट्रीयता आ जाए, लिख ले भाई। जहां माता भूमि आ जाए, जहां पृथ्वी पुत्र आ जाए, लिख ले भाई। ठीक है? वहां जब क्या होगा? वहां राष्ट्र
का स्वरूप होगा। पाठ का शीर्षक कितने लोगों को पता है? लेखक का नाम कितने लोगों को पता है? दो नंबर यहीं पक्का कर लिए बेटा। दो नंबर तो यहीं पक्का कर लिए। इस बार तुम ही खोजोगे। इस बार तुम ही खोजोगे। राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? बिल्कुल बिल्कुल राष्ट्र का स्वरूप ही है बेटा। राष्ट्र का स्वरूप और लेखक है महादेव शरण का। राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? बताओ मेरे मेरे बेटे। मेरे बेटे मेरे बेटे मेरे बेटे। राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? उत्तर यहां खोजेंगे। एक दो तीन चार पांच। चलो। किस लाइन में?
राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? किस लाइन में है इसका जवाब? बताओ मुझे। राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? असंभव शब्द खोजो। किस लाइन में उसका उत्तर है? मुझे बताओ। इसका उत्तर तुम लोग दोगे और इसका उत्तर जिसने भी दे दिया बोर्ड एग्जाम क्वालीफाई। यहां पृथ्वी हो और मनुष्य ना हो तो राष्ट्र की कल्पना असंभव है। बहुत अच्छा। अपनी पीठ थपथपाओ बेटा। अपनी पीठ तुमने सही बताया है। चलो अगला सवाल। पृथ्वी और जन दोनों मिलकर क्या करते हैं? पृथ्वी और जन इसमें खोजो पृथ्वी और जन किस लाइन में है और दोनों मिलकर क्या करते हैं
सभी लोग खोजो तुम लोग बताओगे इसका उत्तर मैं नहीं बताऊंगा भैया मेरा काम खत्म हो गया मैंने बता दिया समझ लो मैंने बता दिया मैं मेरा नाम मेरा पूरा नाम आचार्य ऋषि द्विवेदी है ठीक है आधुनिक द्विवेदी युग जो हिंदी साहित्य में आएगा आधुनिक द्विवेदी युग ठीक है या इसका नाम ऋषि युग रख देंगे इस बार जो हिंदी हिंदी का युग मेरे नाम पर रखा जाएगा उसे ऋषि युग रख देंगे उसका नाम। दूसरी लाइन में कह रहे हैं बच्चे पृथ्वी और जन दोनों के सम्मेलन से ही राष्ट्र का स्वरूप संपादित होता है। ओह माय गॉड
सब उत्तर कैसे सही बता सकते हो? पृथ्वी कब मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है? बताओ पृथ्वी कब मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है? बताओ बताओ इसका उत्तर कहां मिलेगा मुझे? पृथ्वी कब मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है? बताओ। मैं कहानी बताऊंगा। सर ऋषि सर आपकी शादी हो गई। नहीं बेटा इस बार सन्यासी इस इस जन्म में सन्यासी रहना है। सर आप किस क्लास को पढ़ा रहे हैं? मैं क्लास पूछ रहा है आप किस क्लास को पढ़ा रहे हैं? भैया किस क्लास को पढ़ा रहा हूं? जरा कमेंट कर दो एक बार। जरा कमेंट कर दो एक
बार। चलो जन के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है। तीनों सवाल हो गए। रेखांकित अंश की व्याख्या देख लेते हैं। क्या है रेखांकित अंश? मा पृथ्वी माता है और जन सच्चे अर्थों में पृथ्वी का पुत्र है। माता, भूमि, पुत्र पृथ्वी। लेखक कहता है कि जब व्यक्ति धरती को अपनी मां मान लेता है और अपनी मां की तरह उससे व्यवहार करता है। उसके सारे संसाधनों को ऐसे इस्तेमाल करता है जैसे उसकी मां उसे दूध पिला रही हो। तब जाकर अब उसका संबंध उस धरती से बनता है। उसका प्रेम उस धरती से बनता है।
क्या भाई? हेलो क्लास कर लो बेटा ठीक है बहुत मारूंगा नहीं तो चलो तो अब ये समझ गए पृथ्वी माता और पुत्र है अरे ये जन जो है वो पुत्र है उसका अब मुझे एक बात बताओ मुझे एक बात बताओ सब लोग सच बताना सब लोग सच बताना दो नंबर इसका दो नंबर इसका दो नंबर इसका दो नंबर इसका पूरा सवाल तुम लोगों ने सॉल्व किया है मैंने कुछ नहीं किया है कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका 10 में 10 आया कितने ऐसे ऐसे हैं जिनका आठ 10 में आठ आया। कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका 10
में छ आया? कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका 10 में चार आया? कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका 10 में दो आया? कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका 10 में ज़ीरो आया? क्योंकि दो-दो नंबर के सवाल है ना तो दो-दो नंबर में बढ़ेंगे। दो 4 6 8 10 ऐसे मिलेंगे। कमेंट करके मुझे बताओ। कमेंट करो सभी लोग जल्दी-जल्दी। हां, विद्याल ऐप पे तुम्हारा एडमिट कार्ड अपलोड हो रहा है। तो एक बार कर देना वहां पर। ये मैं अपना ब्रेसलेट दे दूंगा तुम्हें। यह मैं दे दूंगा। जब सम्मान समारोह में आओगे तो ले लेना मुझसे। यह अच्छा है। बहुत
प्यारा है। हां, साहित्यिक हिंदी पढ़ लो भैया। साहित्यिक हिंदी पढ़ लो। कोई दिक्कत नहीं। साहित्यिक हिंदी में भी ये आता है। तुमको जब अपना सिलेबस नहीं पता है। ये क्लास सामान्य हिंदी वालों की है। लेकिन साहित्यिक हिंदी वालों को ये सोचना चाहिए कि राष्ट्र का स्वरूप अशोक का कपूर तुम्हारे भी सिलेबस में तो है। सवाल ऐसे ही तो आता है गद्यांश का। काहे नहीं लिख पाते हो? हां। हां मैंने कहानी लिखी है। मैं तुमको अपना वो शेयर कर दूंगा। अ वेबसाइट तब पढ़ लेना। चलो चलो पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम। प्रस्तुत गद्यांश के
पाठ का शीर्षक राष्ट्र का स्वरूप है और इसके लेखक का नाम वासदेव शरण अग्रवाल है। राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है? पृथ्वी और मनुष्य ना हो। कुछ कॉन्फिडेंस आ रहा है? कुछ कॉन्फिडेंस आ रहा है आप लोगों को? कुछ कॉन्फिडेंस आप लोगों को आ रहा है? बताओ मुझे कुछ कॉन्फिडेंस पैदा हो रहा है। ब्रेक सर नमाज पढ़ना है। बेटा आप चले जाओ। मैं देखो अब मैं एक बात कहना चाहता हूं तुमसे बहुत प्रेम से। तो मैंने 12 घंटे की क्लास का प्रण लिया है और मैंने ये आज ये सोचा था कि मैं 12 घंटे लगातार
पढ़ाऊंगा। जो बच्चे नमाज पढ़ने जाने वाले हैं आप जाकर के नमाज पढ़ सकते हो और उसके बाद आ सकते हो। जहां से लाइव से आप जाओगे वहीं से आकर जुड़ जाना। क्लास आराम से उस देखते रहना वो कंप्लीट हो जाएगी। ठीक है? ठीक। पृथ्वी और जन दोनों मिलकर क्या करते हैं? पृथ्वी जन दोनों मिलकर राष्ट्र के स्वरूप को संपादित करते हैं। पृथ्वी कब मृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है? पृथ्वी मातृभूमि पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा जन के कारण ही प्राप्त करती है। अगला सवाल रेखांकित रंस की व्याख्या कीजिए। जिस प्रकार माता हमें जन्म देती है, पालन-पोषण
करती है, हमें प्यार करती है, उसी प्रकार पृथ्वी हमें आन देती है, इसकी धूल में हम खेलकर बड़े होते हैं। इसकी हवा में हम सांस लेते हैं। पृथ्वी एक माता के समान, हमारा पालन पोषण करती है, तथा पृथ्वी एक माता के समान है और मनुष्य सच्चे अर्थों में पृथ्वी का पुत्र है। देखो भैया मैं तुम्हें हर एक सवाल करवा रहा हूं। हर एक सवाल करना बता रहा हूं। कॉन्फिडेंस तुम में आ रहा है। कितने बच्चे ऐसे हैं जिनको लग रहा है कि अब हम कर लेंगे। बेटा मैं कॉपी देखो जिनको हेडिंग लिखना नहीं आ रहा
है। रुको दिखाता हूं। देखो यह तुम्हारा पेपर है। यह कब मिलेगा? 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे। यह तुम्हारी नई वाली कॉपी है। देखो पूरी कॉपी लिखी हुई है। ये तुम्हारी पुरानी वाली कॉपी है। ये देखो पूरी कॉपी लिखी हुई है। ठीक है? तुम्हें कैसे लिखना है वो सब मैं बताऊंगा। अभी तुमको केवल क्लास करना है। अभी तुमको केवल क्लास करना है। अभी मैं बताऊंगा तुमको कैसे लिखना है। उसके लिए मैं कॉपी अपलोड करवा दूंगा। प्रैक्टिस करवाऊंगा। कुंजी बैच में यही तो हो रहा है। चलो जल का प्रवाह अनंत है। सहस्त्रों वर्षों से भूमि के
साथ राष्ट्रीय जन ने तादात्म प्राप्त किया है। जब तक सूर्य की रश्मियां नित्य प्रातः काल भवन को अमृत से भर देती हैं। अच्छा एक बात मुझे बताओ एक बात सभी लोग कमेंट करके बताएंगे। क्या अब तुम तैयार हो? क्या अब तुम कर लोगे? हां बिल्कुल साहित्यिक हिंदी वाले पढ़ सकते हैं। बेटा पूरे उत्तर प्रदेश बोर्ड की जो भी हिंदी है सब पढ़ सकते हैं। सामान्य हिंदी वालों का सिलेबस सभी में शामिल है बेटा। ठीक है? चलो जन का प्रवाह अनंत होता है। शास्त्रों वर्षों से भूमि के साथ राष्ट्रीय जन ने तादात्म प्राप्त किया है। जब
तक सूर्य की रश्मियां नित्य प्रातः काल भवन को अमृत से भर देती हैं। तब तक राष्ट्रीय जन का जीवन भी अमर है। इतिहास के अनेक उतार-चढ़ाव पार करने के बाद भी राष्ट्रीय निवासी जन नई उगती लहरों से आगे बढ़ने के लिए अजर अमर हैं। जन का संततवाही जीवन नदी के प्रवाह की तरह है। जिसमें कर्म और श्रम के द्वारा उत्थान के अनेक घाटों का निर्माण करना होता है। अब देखो इस पर आधारित मैंने नौ प्रश्न बनाए हैं जो पिछले सालों में इस पैराग्राफ को दे देकर पूछे गए हैं। किसी साल पांच सवाल पूछे गए अलग
प्रकार के, किसी साल पांच सवाल अलग प्रकार के। कुल मिलाकर यह नौ सवाल बनते हैं। इनका उत्तर देख लो। जन का प्रवाह कैसा होता है? जन का प्रवाह अनंत होता है। अब देखो अब मैं तुम्हें उत्तर बताऊंगा। तुम खोजना जान गए हो। सभी लोग खोजना जान गए कि नहीं? एक बार कमेंट करके बताओ। एक बार दिल रिएक्ट कर दो। मैं समझ जाऊंगा कि तुम्हें खोजना आ गया। लगातार फोन कर रहे हो तुम लोग। यार मैं मैं नहीं उठाऊंगा। फोन क्लास का क्लास करते। फ़ोन मत करो यार। देखो 93400 फॉलोअ हो गए हैं Instagram पे। 6000
बचे हैं। जाके कर लेना। रीसिं सर विद्या गुल 1 लाख पूरा करवा देना भाई। क्लास के बाद लेकिन अभी नहीं सर विद्यार्थी चलो जल का प्रवाह कैसा होता है? जन का प्रवाह अनंत होता है। पाठ का अच्छा बहुत सारे बच्चे मुझसे कह रहे हैं पीडीएफ दे दीजिए। पीडीएफ दे दीजिए। कब पढ़ोगे पीडीएफ? कब पढ़ोगे बताओ? आज तुम्हारी 12 घंटे की क्लास है। कल 14 तारीख को तुम्हारी क्लास होगी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स की या और किसी सब्जेक्ट की। जब गैप नहीं है तो अगर आज बराबर साथ-साथ क्लास नहीं करोगे तो कब पढ़ोगे पीडीएफ? तो क्लासें कर
लो बेटा अच्छे से समझ में आ जाए। चलो पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम भैया प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक राष्ट्र का स्वरूप है और इसके लेखक का नाम वादेव शरण अग्रवाल है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। रेखांकित अंश क्या है? प्रत्येक राष्ट्र का इतिहास निरंतर बदलता रहता है। उसमें अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। तुम्हें अपनी भाषा में लिखना है राष्ट्र रेखांकित अंश। किंतु राष्ट्र के निवासियों की श्रृंखला निरंतर चलती रहती है। मनुष्य पीढ़ी दर पीढ़ी अपने राष्ट्र के साथ जुड़ा रहता है। इसी कारण हजारों वर्षों से मनुष्य ने अपनी भूमि के साथ-साथ
तादात स्थापित किया है तथा विभिन्न दृष्टियों से एकरूपता बताई है। जब तक राष्ट्र रहेगा और राष्ट्र की प्रगति होती रहेगी तभी तक राष्ट्रीय जन का जीवन भी रहेगा। ध्यान रखना WhatsApp, फोन और अरे Instagram सब जगह फोन कर लो तुम। कर लो तुम। कर लो। पढ़ाऊं ना मैं मत तुमको बेटा। मैं तुमको बात करूं कोई तुमसे। सूर्य की रश्मियों का क्या प्रभाव पड़ता है? तो भैया सूर्य की रश्मियों के प्रभाव से राष्ट्रीय जनन का जीवन भी अमर है। घाटों का निर्माण का आशय स्पष्ट कीजिए। यहां पर घाटों के निर्माण का आशय मनुष्य अपने कर्म और
श्रम के द्वारा विकास के लिए नए पद चिन्ह बनाता है। संतत वाही का क्या अर्थ है? संतत वाही का अर्थ है सदा प्रवाहित होना या स्थाई। देखो 200% तो यह पक्का है कि यही पैराग्राफ आएंगे। लेकिन अगर 200वां प्रतिशत आ जाए और कोई दूसरा मतलब कोई अलग तरीके का इसी पैराग्राफ से कोई घुमा के सवाल पूछ ले तो तुम उसको अपने मन से लिख लेना। 18 फरवरी को सुबह 6:00 बजे आ जाना। चाहे साहित्यिक हिंदी के हो, चाहे सामान्य हिंदी के। तुमको वो मिल जाएगा जो तुम चाहते हो। गुरु जी सुनाएं। गुरु जी सुनाएं। आप
ऋषि सर आधुनिक किस युग का? मैं आधुनिक युग का लेखक हूं। आपकी कहानी का क्या नाम है? मेरी कहानी का नाम है। मैंने एक कहानी लिखी थी। प्रेम कहानी है वो मैं लिंक भेज दूंगा Telegram में। Telegram जाइन कर लेना। ऋषि सर हिंदी ऋषि सर हिंदी Telegram चैनल ज्वाइन कर लेना। वहां तुम्हें पीडीएफ मिल जाएगी। ऋषि सर हिंदी यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम विद्याल वाले Telegram में तो जुड़े ही होगे। हमारा दो telegram चैनल है। एक यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम विद्याल या वो जो पिन यहां पे कमेंट सेक्शन में देखोगे तो एक लिंक पिन है उस
पे क्लिक करोगे Telegram में जुड़ जाओगे और ऋषि सर हिंदी पर भी कर सकते हो। सर ऐसी ही क्लास हमें इंग्लिश में भी चाहिए। बिल्कुल मिल जाएगी। इंग्लिश में भी ऐसी ही क्लास मिल जाएगी बेटा 12 घंटे की। अब अगला चैप्टर बेटा रॉबर्ट नर्सिंग होम में। प्रस्तुत लेख रॉबर्ट नर्सिंग होम में लेखक ने इंदौर के रॉबर्ट नर्सिंग होम की एक साधारण घटना को इस मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया है कि वहां हमें सच्चे अर्थात मानव सेवा और क्षमता का पाठ पढ़ाने वाली बन गई है। वहां इन्होंने तीन सेवार्थी ईसाई महिलाओं को देखा। मदर मार्गेट, मदर
टेरेजा, सिस्टर क्रिसल। ये आदमी सिस्टर क्रिसल पर लाइन मार रहा था। पक्का देखना तुम पढ़ लेना। मदर मार्गेट अत्यंत बूढ़ी थी। मदर टेरेजा अधेड़ आयु की और सिस्टर क्रिसल पूर्ण मदर टेरेजा फ्रांस की थी और सिस्टर क्रिस हेल्ड जर्मनी की। दोनों ही देश दो विश्व युद्धों में विरोधी देश रहे हैं। पर मदर टेरेजा और सिस्टर क्रिस हेल्ड इस संकीर्ण राष्ट्रीयता से मुक्त थी। उन्हें एक ही ईसाई धर्म से उदार मानवता और निस्वार्थ मानव सेवा का पाठ प्राप्त हुआ था। इस प्रकार लेखक ने अपने उदार मानवीय दृष्टिकोण की इस लेख में उदार मानवीय दृष्टिकोण को इस
लेख में प्रकट किया है। चलो अब इसका भी देखते हैं। नस्तर तेज था छुपन गहरी। ध्यान से पढ़ना। अगर तुमने पैराग्राफ ध्यान से पढ़ लिया तो जान लो कि तुम्हारा आधा सवाल सॉल्व। नस्तर तेज था चुबन गहरी पर मदर का कलेजा उससे अछूता रहा। बोली हिटलर बुरा था। उसने लड़ाई छेड़ी पर उससे इस लड़की का भी घर ढह गया और मेरा भी। हम दोनों एक। हम दोनों एक मदर ट्रेज़र में झूमने झूम में इतने गहरे डूब कर कहा कि जैसे मैं उनसे उनकी लड़की को छीन रहा था। कितने लाइक हो गए? 20,000 पहुंचे कि नहीं?
मुझे दिखाई नहीं पड़ रहा है। हां, सॉल्व करके मिलेगा। तुम्हें कॉपी भी मिलेगी, क्वेश्चन पेपर भी मिलेगा। चलो 20,000 लाइक पहुंचे कि नहीं पहुंचे? जल्दी से 20,000 उन्हें करो और सेशन को सभी लोग शेयर कर दो। चैनल को सब्सक्राइब करते रहना। ठीक है? हम दोनों एक मदर टेरेजा ने झूम में झूम में इतने डूब कर कहा कि जैसे मैं उनसे उनकी लड़की को छीन रहा था। उन्होंने पहले ही दांव में मुझे चारों खाने दे मारा। मदर चली गई। मैं सोचता रहा मनुष्य मनुष्य के बीच मनुष्य ने ही कितनी दीवारें खड़ी की हैं। ऊंची दीवारें, मजबूत
फौलादी दीवारें, भूगोल की दीवारें, जाति वर्ग की दीवारें, कितनी मनहूस, कितनी नगण पर कितनी अजय? समझ लो। अब इस पर आधारित सवालों को देखते हैं। उपर्युक्त गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम। इस गद्यांश को पढ़ के तुम्हें क्या लगता है? यह किस पाठ का होगा? बताओ तो एक बार यार। तुम पहचानना नहीं चाहते। तुम्हें सब आता है। तुम पहचानना नहीं चाहते। तुम्हें सब आता है। तुम बस पहचानना नहीं चाहते। सभी लोग जल्दी-जल्दी कमेंट करो। सभी लोग जल्दी से 20,000 लाइक कर दो बेटा। चलिए अब इस पर आधारित सवाल देखते हैं बेटा। यह सवाल तुम्हारे
पेपर में आएंगे। 100% आएंगे। ठीक है? तुम इसकी चिंता मत करो। जब तक हम खड़े हैं तब तक तुम्हारे पेपर का एक भी सवाल कोई गलत नहीं कर सकता। और यह भी जान लो कि जब तक हम खड़े हैं तब तक तुम कभी भी बिना पेपर सॉल्व किए एग्जाम सेंटर पर नहीं जाओगे। तो खुश रहो और मेहनत करो। उपर्युक्त गद्यांश के लेखक हम पाठ का नाम लिखिए। तो उपरोक्त गद्यांश के लेखक कन्हैया लाल मिश प्रभाकर हैं। इस पाठ का नाम रॉबर्ट नर्सिंग होम में है। अच्छा इसको खोजते हैं। मनुष्य मनुष्य के बीच दीवारें किसने खड़ी
की हैं? बताइए दीवारें किसने खड़ी की हैं? इसका उत्तर इस पैराग्राफ में कौन सा होगा? मनुष्य मनुष्य के बीच दीवारें किसने खड़ी की हैं? किस लाइन में उत्तर है बताइए? किस लाइन में उत्तर है भाई? एक बच्चा लिख रहा है कि सर प्लीज कॉल उठा लो। कुछ पर्सनल है। बेटा इन 10,000 बच्चों के सामने पर्सनल बात बताओगे तुम क्या? क्योंकि मैं तो हैंड फ्री करके बात करूंगा। चलो अब इसका उत्तर यहां पर मैंने सबका लिख दिया है। मनुष्य मनुष्य के बीच दीवारें किसने खड़ी की हैं बेटा? तो लेखक के अनुसार मनुष्य मनुष्य के बीच दीवारें
मनुष्य ने ही खड़ी की हैं। लेखक के प्रश्न के उत्तर में मदर टेरेजा ने क्या कहा है? तो लेखक के प्रश्न के उत्तर में मदर टेरेजा बोली, हिटलर बुरा था। उसने लड़ाई छेड़ी उससे इस लड़की का भी घर ढह गया और मेरा भी। फिर भी हम दोनों एक हैं। प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस ओर संकेत किया है? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस बात का संकेत किया है? तो प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मानव की भेदभावना की ओर मानव एक दूसरे से कितना विरोधी विरोध करता है। ठीक है सर इस क्लास का कुछ क्लिप
स्टोरी पर लगाएं। इस क्लास का पूरा क्लिप स्टोरी पर लगा दो। कोई दिक्कत नहीं है। केक आ रहा है भैया। मुकेश सर को फोन करूं क्या? गुरु जी कहानी दे दो प्लीज। कहानी दे दूंगा। ब्रेकअप हो गया इसलिए कहानी दे दूं? अच्छा रुको। अगला सवाल रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। तुम लोग एक बात बताओ। मैं अगर तुम्हें सारे गद्यांश बता दूं तो क्या तुम एग्जाम में लिख लोगे? क्या तुम इतनी मेहनत कर सकते हो कि उसका सबका उत्तर याद करके एग्जाम में लिख लोगे? अगर हां, तो तुम्हारा जान लो पेपर लीक हो रहा है यह।
यह वही सवाल है जो डायरेक्ट तुम्हारे पेपर में आने वाले हैं। अब मैं तुमको सारा पेपर दिखा के यहां जेल तो जाऊंगा नहीं। तो ऐसे मिक्स करके दिखाऊंगा ना। तो जहां पर मैं कह दूं कि इंपॉर्टेंट है वहां पर समझ लो कि इंपॉर्टेंट है। लेखक ने मदर डरेजा से पूछा कि आप फ्रांस की हैं, फ्रांस की हैं और सिस्टर क्रश आपके शत्रु देश जर्मनी की फिर भी आप उससे प्यार करती हैं। तुम एक बात समझ लो अगर यहां पे मेरे पास रखा हुआ है ये। तो अगर मुझे इसको दिखाना होता तो पांच मिनट दिखा देता।
लेकिन यह भी तो है ना दोस्त कि पूरा पढ़ाना भी है। लोगों को लगे कि पढ़ा रहा हूं। अगर लोग यह कह रहे पेपर लीक करता तो बवाल हो जाएगा ना। पेपर लीक करता है तो लेकिन करेंगे तो दोस्त ऐसा पढ़ाएंगे कि पेपर लीक हो जाएगा। फिर भी आप उससे प्यार करती हैं। इसके प्रति में मदद टेरेजा ने कहा कि हम दोनों ईश्वर के लिए काम करती हैं। अतः हम दोनों एक हैं। मदर टेरेजा के जाने के पश्चात लेखक ने सोचा कि मानव ने ही मानव से लड़ने के लिए भौगोलिक एवं जाति वर्ग आदि की
अनगिनत दीवारें खड़ी कर दी हैं। अन्यथा ईश्वर ने तो सभी को समान बनाया है। अगला सवाल मैंने बहुतों को रूप से पाते देखा था। बहुतों को धन से और गुणों से भी बहुतों को पाते देखा था। पर मानवता के आंगन में समर्पण और प्राप्ति का यह अद्भुत शौम्य स्वरूप आज अपनी आंखों से देखा कि कोई अपनी पीड़ा से किसी को पाए और किसी का उत्सर्ग सदा किसी की पीड़ा के लिए सुरक्षित रहे। इस पर आधारित पांच सवाल लेखक का नाम एवं पाठ का नाम। कितने बच्चे ऐसे हैं जिनको यह दो नंबर मिल जाएगा? एक बार
दिल रिएक्ट कर दो कमेंट सेक्शन में। कितने बच्चे ऐसे हैं जिनको यह मिल जाएगा? कहीं जाना नहीं है अगर तुम गए। तुम लोग अगर अपने सीनियर्स से एक बार पूछोगे ना कि क्या हाल था पिछली साल तो तुम्हें पता चलेगा सात के सात में से कोई ऐसा सेट नहीं था जो ना फंसा हो। चलो चलो सवाल का उत्तर प्रस्तुत गद्यांश के लेखकों पाठ का नाम लिखिए। ये तो प्रसिद्ध गद्यांश के लेखक कन्हैया लाल मिश प्रभाकर हैं तथा पाठ का नाम रॉबर्ट नर्सिंग होम में है। प्राय गुणी व्यक्ति का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है बेटा?
तो प्राय गुणी व्यक्ति का लोगों पर यह प्रभाव पड़ता है कि वह अपने गुणों से के द्वारा दूसरों को अपना बना लेते हैं। प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस भाव को व्यक्त किया है? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मदर टेरेज़ा के मानवतावादी दृष्टिकोण को व्यक्त किया है। लेखक ने किसके संबंध में विचार व्यक्त किया है? लेखक ने मानव सेविका मदर टेरेजा की सेवा भावना एवं आत्मत्याग के संबंध में विचार व्यक्त किया है। अगला सवाल गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। तो लेखक का लेखक कहता है कि मैंने संसार में ऐसे बहुत से लोगों को
देखा जो अपनी विशिष्टताओं से लोगों को अपना बना लेते हैं और अपार यश अर्जित करते हैं। कुछ लोग अपने रूप सौंदर्य द्वारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। तो कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके पास अपार धन होता है और वे उसके बल पर लोगों को प्रभावित करते हैं या उन्हें आत्मीय बनाने में समर्थ होते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनमें कोई विशिष्ट गुण होता है और वह अपने गुणों के द्वारा बहुत कुछ प्राप्त कर लेते हैं। परंतु आज लेखक ने ऐसे अद्भुत नारी को देखा जिसने मानवता के लिए सर्वस्व समर्पित करके दूसरों
की श्रद्धा और आदर को प्राप्त किया। एक बच्चा कह रहा है कि सर ऐसे कुछ भी बता रहे हैं। जहां पर मैं स्टार मार्क कर दूं वो करके रख लेना और एग्जाम देके जब आना मत पढ़ना कुछ। एग्जाम दे के जब आना तो मुझसे बता के जाना सर कहा तो बहुत था कि आपने पढ़ लो लेकिन मैंने कुछ पढ़ा नहीं था तो पेपर नहीं हो पाया अच्छे से। ठीक है? हां हां सभी लोग सब्सक्राइब कर लो। सेशन को लाइक कर लो। 20,000 लाइक हो गए कि नहीं? 3 घंटे हो गए। यह अभी नहीं हुआ। अभी
नहीं हुआ 3 घंटे। दो मिनट बाकी है। यह अनुभव कितना चमत्कारी है। यहां जो जितनी अधिक बूढ़ी है और अगर आज यह गद्यांश नहीं करोगे फिर पढ़ करने का मौका नहीं मिलेगा। फिर करने का मौका नहीं मिलेगा। यह अनुभव कितना चमत्कारी है। यहां जो जितनी अधिक बूढ़ी है, वह उतनी अधिक उत्फुल और मुस्कानमय है। यह किस दीपक की ज्योत है? जागरूक जीवन की, लक्ष्यदर्शी जीवन की, सेवा निरत जीवन की, अपने विश्वासों के साथ एकाग्र जीवन की, भाषा के भेद रहे हैं, रहेंगे भी। पर यह ज्योत विश्व की सर्वोत्तम ज्योति है। अब इस पर आधारित पांच
सवालों को देखो। उपरोक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। कौन सी ज्योत विश्व की सर्वोत्तम ज्योति है? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस प्रसंग का वर्णन किया है? लेखक ने नर्स का जीवन कैसा बताया है? गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। पांच सवाल हैं। इनमें से कितने सवाल तुम खुद से कर सकते हो? एक बार मुझे कमेंट करके बताओ। इनमें से कितने सवाल तुम खुद से कर सकते हो? अगर मैंने तुमको करना सिखाया है तो तुम बताओ कितना कर सकते हो? ठीक है? उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। क्या सरल संदर्भ है? दो नंबर फ्री का मिल
जाएगा तुमको। प्रस्तुत गद्यांश रॉबर्ट नर्सिंग होम नामक पाठ से उद्रित है। इसके लेखक कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर हैं। कौन सी ज्योति विश्व की सर्वोत्तम ज्योति है? तो भैया लेखक के अनुसार सबके हृदय में सेवा भावना और प्यार की जोत विश्व की सर्वोत्तम ज्योति है। बहुत सरल थोड़ा सा ध्यान दोगे राइटिंग खराब नहीं होगी बेटा। राइटिंग अगर खराब है तो थोड़ा दूर-दूर लिखना। थोड़ा दूर-दूर लिखना कि एग्जामिनर साफ-साफ पढ़ पाए। राइटिंग का बहुत नंबर नहीं कटता लेकिन घुसघुचा के लिख दोगे। अब जैसे देखो अगर तुम्हारी राइटिंग खराब है तो राम ऐसे लिख दो। अब अगर तुम्हारी
राइटिंग खराब है तो राम ऐसे मत लिख देना। ऐसे राम मत लिख देना। नहीं तो नंबर काट लेगा। समझ रहे हो? तो थोड़ा दूर-दूर लिखना। प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस प्रसंग का वर्णन किया है? तो प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मदर टेरेसा की सेवा भावना एवं उनके व्यक्तित्व की महिमा का वर्णन किया है। लेखक ने नर्स का जीवन कैसा बताया है? लेखक ने नर्सों के जीवन को अलौकिक और सर्वोत्तम ज्योति वाला बताया है। अगला सवाल गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक कहता है कि वृद्ध नर्सों के अंदर कोई अलौकिक तेज है जिनसे
इनका जीवन सजग बन गया है। ये सब किसी किसी लक्ष्य केंद्रित सेवा प्राण जीवन के प्रकाश को विकर्ण करने वाले प्राणियों का समूह है। इनमें अद्भुत विश्वास भरा हुआ है। इनका जीवन एकाग्र साधना का जीवन है। आज भी यह भयंकर रोग से पीड़ित रोगियों को अपनी मुस्कान भरी सेवा से। अपनी मुस्कान भरी सेवा से इसी में डाल। पानी तो है। अपनी मुस्कान भरी सेवा से कहां था मैं? जीवित रहने का अमर संकल्प देती हैं। यद्यप यहां पर रहने वाली नर्सों के देश अलग-अलग हैं। भाषाएं भिन्न-भिन्न है। किंतु उनके मन में जलने वाली प्यार और सेवा
की ज्योति अद्भुत एवं सर्वोत्तम है। अगला पाठ अशोक के फूल। बोर्ड एग्जाम में यहीं से सवाल आएंगे। दो पाठ सबसे इंपॉर्टेंट हैं। राष्ट्र का स्वरूप और अशोक के फूल। ये दोनों पाठ बहुत इंपॉर्टेंट हैं। अशोक के फूल ये दोनों पाठ बहुत इंपॉर्टेंट है बेटा। ये दोनों पाठ बहुत इंपॉर्टेंट है। 2 मिलियन हो गया मिठाई बांटूंगा। कुछ सेलिब्रेशन एक बात बताओ। एक बात बताओ तुम पढ़ने आए हो सेलिब्रेशन के लिए आए हो। बताओ यार तुम लोग गधे। सेलिब्रेशन नहीं होगा। ये गुस्साए जा रहे हैं कि सर सेलिब्रेशन क्यों नहीं हो रहा है? कंधर्व के पांच प्रमुख
पुष्पों में से एक है अशोक का फूल। कालिदास कालीन साहित्य में अशोक का प्रचुरता से उल्लेख मिलता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं यह है कि उदास नहीं है। 2000 वर्ष पूर्व कालिदास के समय में जब उसे बहुत सम्मान मिला था। जैसा प्रसन्नित था वैसा अनादरित होकर है। लेखक का मानना है क्या मानना है लेखक का? लेखक का मानना है कि अशोक में परिवर्तन नहीं आया। किंतु समय की मनोवृत्त में तो परिवर्तन आया ही होगा। लोग बदल गए हैं दोस्तों। क्या हुआ है? लोग बदल गए हैं। दोस्तों प्राचीन संस्कृत की तरह इस वृक्ष की हमेशा से द्विवेदी
जी चिंतित हैं। प्राचीन संस्कृत की ही तरह इस वृक्ष की उपेक्षा से द्विवेदी जी चिंतित हैं। वर्तमान में भारतीय संस्कृति ने अशोक के वृक्ष को अशोक के पेड़ की उपेक्षा के माध्यम से प्राचीन संस्कृति के विस्मरण के प्रति अपनी चिंता दिखाई है। एक लड़का लग रहा है सर मेरा एक YouTube चैनल है फ्री फायर खेलता हूं फ्री फायर खेलता हूं ठीक है तो अपने YouTube चैनल को मेरे Instagram पे भेज देना मैं प्रमोट कर दूंगा स्टोरी पे लगा दूंगा लोग सब्सक्राइब कर लेंगे रविंद्र नाथ जिस भी व्यक्ति का YouTube चैनल या Instagram हो वो वो
मेरे YouTube Instagram पर जाएगा ऋषि सर विद्या कुल पर मुझे फॉलो करके मैसेज बॉक्स में अपनी आईडी भेज देना। मैं उसको स्टोरी पर लगा दूंगा या फिर मुझे स्टोरी में टैग कर देना। मैं लगा शेयर कर दूंगा। रविंद्र नाथ ने इस भारतवर्ष को महामानव समुद्र कहा है। विचित्र देश है। वह असुर आए, आर्य आए, शक, हुण आए, नाग आए, यक्ष आए, गंधर्व आए। न जाने कितनी मानव जातियां यहां आई और आज के भारतवर्ष को बनाने में अपना हाथ लगा गई। जिसे हम हिंदू रीति नीति कहते हैं। वह अनेक आर्य और आर्य उपादानों का अद्भुत मिश्रण
है। एक-एक पशु एक-एक पक्षी न जाने कितनी स्मृतियों का भार लेकर हमारे सामने उपस्थित है। अशोक की भी अपनी स्मृति परंपरा है। आम की भी है, बकुल की भी है, चंपे की भी है। सब क्या हमें मालूम है? यह पाठ किसने लिखा है? यह पाठ किसने लिखा है? बेटा सभी लोग मुझे बताओ यह पाठ किसने लिखा है? सभी लोग कमेंट करके बताएंगे यह पाठ किसने लिखा है? और अभी 20,000 लाइक पूरे नहीं हुए हैं। तो तुम लोग यह जो कर रहे हो ना गद्दारी मेरे साथ ठीक नहीं है। मैं चिल्ला रहा हूं और तुम इसको
शेयर करके 20,000 नहीं पहुंचा रहे हो। चलो उक्त पद्यांश के अनुसार पाठक का नाम और लेखक एवं पाठ का नाम तो प्रस्तुत पद्यांश के लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं तथा इस गद्यांश का नाम इस गद्यांश के पाठ का नाम अशोक का फूल है। भारत में कौन-कौन सी जातियां आई? तो भैया भारत में असुर आई। यह पैराग्राफ भैया इंपॉर्टेंट है। अनसॉल्व उठा के देख लो कितना इंपॉर्टेंट है। असुर आए, आर्य आए, शक आए, हुण आए, नाग आए, यक्ष आए, गंधर्व आदि जातियां भारतवर्ष में आई। रविंद्रनाथ ने भारतवर्ष को किसकी संज्ञा दी है? तो रविंद्र नाथ
ने भारतवर्ष को महामानव समुद्र की संज्ञा दी है। प्रस्तुत गद्यांश में किस प्रसंग का वर्णन है? प्रसुद्ध गद्यांश में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के स्वरूप का वर्णन किया गया है। आगे बढ़ते हैं। गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। हिंदू के विषय में ऐसी मान्यता रही है कि किसी समय में भारत आई आर्य जाति के लोग हिंदू कहलाए। लेखक इस बात से सहमत नहीं है। उनका मत है कि प्राचीन काल में असुर, आर्य, शक, हुण, नाग, यक्ष और गंधर्व आदि जातियां आकर बस गई। कालांतर में इन सभी जातियों की परंपराएं, विश्वास, रीति और नीति परस्पर
एक दूसरे से प्रभावित हुई। जिससे यहां इन सब की एक मिलीजुली संस्कृति विकसित हो गई। यह संस्कृत ना सुद्धासुरी थी ना सुधार्य ना सकी ना हुड़ी नागी ना यक्षी और ना गंधर्व बल्कि यह सभी संस्कृतियों के धारणीय तत्वों का आदर्श समन्वित रूप थी। यही हिंदू संस्कृति के नाम से जानी गई। यह यहां आई आर्य और आर्यत्तर जातियों के जीवनपयोगी तत्वों का अद्भुत मिश्रण है। समझ गए सभी लोग? समझ गए इस बात को? अभी-अभी प्रवेश पत्र ले आए हो? सभी सभी लोग सेशन को जो बच्चे अभी-अभी प्रवेश पत्र लेकर के आए हैं, वह सभी लोग सेशन
को शेयर कर दें। सेशन को लाइक कर लो बेटा। 20,000 लाइक नहीं पूरा हुआ अभी। राम का बाण तुम्हारी मुश्किलों का पर तीर मार रहा है। खचाक खचाक। अगला सवाल क्या है? मुझे मानव जाति की दुर्दम निर्मम जीविसा। भैया रे, हे दा भैया, सारा गद्यांश बता दे रहा हूं। तुम्हारी जिम्मेदारी है। तुम पढ़ो ना पढ़ो मैं नहीं जानता। एग्जाम के बाद आकर यह 12 घंटे की क्लास मिला लेना और सिर पर हाथ रख के पछता लेना कि गुरु जी कह तो आप बहुत रहे थे लेकिन मैं थोड़ा एटीट्यूड में था। एटीट्यूड में था तो आपका
बताया बात माना नहीं। अब बुरा लग रहा है क्योंकि फेल हो गया हूं। अगर यह नहीं कहना चाहते हो तो क्लास कर लो। मुझे मानव जाति की दुर्दम निर्मम धारा के हजारों वर्षों का रूप साफ दिखाई दे रहा है। मनुष्य की जीवनी शक्ति बड़ी निर्मम है। वह सभ्यता और संस्कृति के व्यथा मोह को रौंदती चली आ रही है। क्या करती चली आ रही है? रौंदती चली आ रही है। न जाने कितने धर्माचारों बस जल्दी-जल्दी सभी लोग लाइक कर लो। बस होने वाले हैं 16,000। ना जाने कितने धर्माचारों विश्वासों उत्सव और व्रतों को धोती बहाती यह
जीवनधारा आगे बढ़ी है। संघर्षों से मनुष्य ने नई शक्ति पाई है। ध्यान रखना 15, 16, 17 ये तीन दिन तीन दिवसीय महार रिवीजन योजना चलेगी। तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना और इससे तुम्हारा वो भी टॉपिक वो भी कवर हो जाएगा जो कोई नहीं पढ़ाता। और 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे मुझसे पेपर ले लेना। संघर्षों से मनुष्य ने नहीं शक्ति पाई है। हमारे सामने समाज का आज जो रूप है वह ना जाने कितने ग्रहण और त्याग का रूप है। देश और जाति की विशुद्ध संस्कृति केवल बाद की बात है। सब कुछ में मिलावट है। सब
कुछ अविशुद्ध है। शुद्ध है केवल मनुष्य की दुर्द जीवशा वह गंगा की अबाधित अनाह धारा के समान सब कुछ को हजम करने के बाद भी पवित्र है। प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए। मनुष्य की जीवनी शक्ति कैसी है? हमारे सामने आज समाज का स्वरूप कैसा है? मैं आज फिर कह रहा हूं। मैं तुम लोगों सर आप कुछ भूल रहे हैं। क्या बोल रहे हो? इस पाठ अच्छा एक बात बताओ कौन सा ऐसा पाठ है जिसको पहचान पहचानने की ट्रिक मैं टेलीग्राम में भेज चुका हूं अगर तुम्हें नहीं मिली है तो एक बार मुझे दिल रिएक्ट कर
दो मैं फिर से भिजवा दूंगा शाम को क्लास खत्म होने के बाद पहचानने वाली ट्रिक फिर भिजवा दूंगा बताओ कितने लोगों को पहचानने वाली ट्रिक नहीं मिली है एक बार दिल रिएक्ट करो और तुम्हें tlegram चैनल सब्सक्राइब कर लेना है ऋषि सर हिंदी वाला tlegram चैनल हिंदी वाला ज्वाइन कर लेना ऋषि सर हिंदी वाला ऋषि सर हिंदी सर्च करोगे स्पेस बिना दिए तो तुम्हें मिल जाएगा। 10,000 बच्चे जुड़ चुके हैं। यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम विद्या कुल पे तो जुड़े ही होंगे। 11,000 लोग हो गए। ऐसा चैनल दिखाई देता है कुछ-कुछ। ठीक है? चलो मैं पहचानने
वाली ट्रिक भेज दूंगा। अरे यार वो दो पन्ने की पीडीएफ है। उसके लिए मैं यहां 10 मिनट क्यों खराब करूं अपना। चलो आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हैं बेटा। प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रस्तुत गद्यांश आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित निबंध अशोक के फूल नामक निबंध से उदित है। मनुष्य की जीवनी शक्ति कैसी है? मनुष्य की जीवनी शक्ति अत्यंत निर्मम है। हमारे सामने आज समाज का स्वरूप कैसा है? हमारे सामने आज के समाज का स्वरूप विभिन्न सभ्यता संस्कृतियों के ग्रहण और त्याग का रूप है। लेखक ने मनुष्य की जिजी को किस रूप में प्रस्तुत
किया है? लेखक ने मनुष्य की जिजवि को शुद्धता एवं पवित्रता के रूप में प्रस्तुत किया है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। भैया बोर्ड एग्जाम में यहीं से सवाल आएगा। मैं बार-बार कह रहा हूं। तुम्हें पछताना ना पड़े। तुम्हें लौट के ना कहना पड़े ब्रेक ले लेना बेटा 6 घंटे हो जाए 6 घंटे हो जाए फिर 5 मिनट का ब्रेक लेंगे 6 घंटे हो जाने दो ठीक 6 घंटे हो जाने दो सत्यम तिवारी ने फोन पे मुझे ₹1 भेजा है अरे सत्यम दुई भेज देता है रे ₹1 ₹11 भेज दे ब्राह्मणों को पैसा भेजो भला होगा
तुम्हारा ठीक इस संसार में व्यक्ति को एक सबसे प्रिय कोई वस्तु है तो वह उसके प्राण है। अपने प्राणों को सुरक्षित बनाए रखने की लालसा के कारण ही वह संसार यह संसार चल रहा है। व्यक्ति सदैव अपने प्राणों की रक्षा के लिए प्रयत्नशील रहता है। इसकी रक्षा के लिए वह कितना भी क्रूर निर्मम पाप पूर्ण घृणित कार्य कर सकता है। उसका अपने प्राणों के प्रति यही मोह उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। जिसे जीवनी शक्ति कहा जाता है। लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी कहते हैं कि आज व्यक्ति का जीवन छल चंद से परिपूर्ण हो गया
है। इसलिए उसके अपने आचरण से लेकर दैनंदिन के कार्यों में कोई पवित्रता अथवा शुद्धता नहीं रह गई है। यही कारण है कि आज प्रत्येक वस्तु में मिलावट मिलती है। व्यक्ति का चरित्र भी उससे अछूता नहीं रह गया है। लूटपाट, रिश्वतखोरी, छेड़छाड़, कदाचार आदि के दिनों दिन बढ़ते जाने का कारण भी यही है। जो व्यक्ति क्लास नहीं कर रहा है। आज अगर एग्जाम के बाद वह आकर मुझसे कहा सर जी दीवाल की व्याख्या कैसे करते हैं बताऊंगा। सर जी रोटी खानी है मुझे। एक लड़के एक अविनाश यादव लड़का हेलो भेज रहा है। तुम सभी लोग एक
एक मुझे भेज दो। यही करो तुम लोग। एक एक रुपया मेरे फोन पे तो पे भेजो। ये क्या सिस्टम निकाले हो यार तुम लोग। अशोक का वृक्ष जितना भी मनोहर हो, जितना भी रहस्यमय हो वो वो करते नहीं है वो वाले। एक एक लाइव आता है रात में अक्सर देखो तो वो ऐसे कुछ करते रहेंगे पढ़ते रहेंगे एक बुड्ढा सा आदमी है पढ़ता रहता है और वो अपना क्यूआर कोड ऐसे दिखाता दिखाए रहता है कि वो सुबह स्कैन करके भेज दो अशोक का वृक्ष कितना मनोहर हो जितना भी रासमय हो जितना भी अलंकारमय हो परंतु
है वह उस विशाल सामंत सभ्यता के परिष्कृत रुचिका ही प्रतीक जो साधारण प्रजा के परिश्रमों पर पली थी उसके रक्त के संसार कणों को खाकर बड़ी हुई थी और लाखों करोड़ों की उपेक्षा से जो समृद्ध हुई थी वह सामंत दुखड़ गए सामंत समाज ढह गया और मदनोत्सव की धूमधाम भी मिट इस पर आधारित सवाल को देखो। एक लड़का कह रहा है सर आप गलत पढ़ा रहे हैं। बहुत मारूंगा तुम लोगों को यार। सामंत सभ्यता की परिष्कृत रुचि का प्रतीक कौन है? लाखों करोड़ों की उपेक्षा से कौन समृद्ध हुई थी? आज उस सामंती सभ्यता की क्या
स्थिति है? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। पाठ काशीर का लेखक का नाम उल्लेख लिखिए। चलो पहला सवाल। सामंत सभ्यता की परिष्कृत रुचिका प्रतीक क्या है भैया? इंपॉर्टेंट सवाल है। टिक कर लो। टिक मार्क कर लो तुरंत। सामंत सभ्यता की पुरस्कृत रुचि का प्रतीक अशोक का वृक्ष है। लाखों करोड़ों की उपेक्षा से कौन समृद्ध हुई थी? तो भैया लेखक के अनुसार लाखों करोड़ों की उपेक्षा से सामंतवाद सामंतवाद समृद्ध हुआ था। आज उस सामंत सभ्यता की क्या स्थिति है? तो लेखक के अनुसार आज सामंती सभ्यता की स्थिति यह है कि वह उखड़ गए। उनका समाज रह गया
और उनके विलासितापूर्ण जीवन की धूमधाम मिट गई। सभी लोग ध्यान दो। चलो मैं रिचार्ज कर दूंगा। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक का कहना है कि संसार का नियम है जो वस्तु अथवा परंपरा है वह उस समय के साथ वह समय के साथ परिवर्तित होती है। कुछ समय पश्चात उसके स्वरूप में आमूलचूल परिवर्तन होकर वह एक दिन भिन्न रूप में अपने सामने होती है। यही बात संस्कृत के संदर्भ में भी होती है। यही कारण है कि कभी सन्नाटों और सम्राटों और सामंतों ने जिस विलासी और चाटुकार संस्कृति को जन्म दिया था, वह मन को लुभाने
वाली व्यक्ति को उन्मत्त करने वाली संस्कृति धीरे-धीरे समाप्त हो गई। पता है बोलने से क्या होता है? इतना तुम लोगों को बोल के पढ़ाता हूं। तो ये वाला पार्ट है। बोलने से तो यह वाला पार्ट दर्द होता है। एक तो मैं थोड़ा तेज बोलता भी हूं। मैंने देखा है कि हमारे गोंडा के जितने भी लोग हैं उनकी आवाज ऑटोमेटिकली तेज है। जिन्हें भी सीयूईटी की तैयारी करनी है वो सीयूईटी विद्याल चैनल सब्सक्राइब कर लेंगे। सीयूईटी विद्या कुल चैनल वो सब्सक्राइब कर लेंगे। सीयूईटी विद्याल चैनल पर आपकी पूरी तैयारी करवाई जाएगी। पाठ का शीर्षक और लेखक
का नाम उल्लेख कीजिए। पाठ का शीर्षक अशोक के फूल है। लेखक का नाम हजारी प्रसाद द्विवेदी है। अब चलो भाषा और आधुनिकता। अगला चैप्टर आ गया। आपके गद्य में छह चैप्टर हैं। हम लोग चौथे पर पहुंच गए हैं। छह हैं। हम चौथे पर पहुंच गए हैं। जल्दी-जल्दी हो जाएगा। चलो। भाषा की समस्या विद पर विद्वानों ने बहुत लिखा है परंतु भाषा और आधुनिकता पर विशेष रूप से नहीं लिखा गया है। विद्वान लेखक ने वैज्ञानिक दृश्य भाषा और आधुनिकता पर विचार किया है। भाषा परिवर्तनशील होती है। इसका इतना ही अर्थ है कि भाषा नए भाव, नए
शब्द, नए मुहावरे तथा लोकोक्तियां, नई रीतियां सदैव आती रहती हैं। इन सबका प्रयोग ही भाषा को व्यवहारिकता प्रदान करता हुआ भाषा में आधुनिकता लाता है। विद्वान लेखक का मत है कि हम वैज्ञानिक शब्दावलियों को ज्यों का त्यों हमें वैज्ञानिक शब्दावलियों को ज्यों का त्यों लेना चाहिए। व्यावहारिकता की दृष्टि से प्रोफेसर सुंदर रेड्डी का यह सुझाव विचारणीय है। चलो पहला सवाल पहला पैराग्राफ रमणीयता और नित्य नूतनता अन्योन्याश्रित हैं। जैसे ही तुमको एक पैराग्राफ मिले जिसकी हिंदी बहुत कठिन हो। तुरंत जान लो भाषा और आधुनिकता है। रमणीयता के अभाव में कोई भी चीज मान्य नहीं होती। नित्य
नूतनता किसी भी सजक की मौलिक उपलब्धि की प्रमाणिकता सूचित करती है और उसकी अनुपस्थिति में कोई भी चीज वसुता जनता व समाज के द्वारा स्वीकार नहीं होती। सड़ी गली मान्यताओं से जकड़ा हुआ समाज जैसे आगे बढ़ नहीं पाता वैसे ही पुरानी रीतियों और शैलियों की परंपरागत लीक पर चलने वाली भाषा भी जन चेतना को गति देने में प्राय असमर्थ ही रह जाती है। भाषा समूचे युग चेतना की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। ठीक है? यह पैराग्राफ किस पाठ का है? सभी लोग कमेंट करो। क्या तुम्हें पता है? क्या तुम इसका उत्तर दे सकते हो
कि यह पैराग्राफ किस पाठ का है? क्या तुम इसका उत्तर दे सकते हो? बेटा सभी लोग बताओ और सेशन को कितने लाइक हुए? अभी 15,000 लाइक हुए बेटा। जल्दी से इसको 16 करना है सभी को। जल्दी-जल्दी कर दो। जल्दी से लाइक करो। कहीं मत जाओ आज। आज की क्लास नहीं करोगे तो बहुत पछताओगे फिर। चलो उपर्युक्त गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम लिखिए। प्रस्तुत गद्यांश के लेखक प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी हैं तथा इस गद्यांश के पाठ का नाम भाषा और आधुनिकता है। रमणीयता और नित्यन नूतनता किस प्रकार अन्योन्याश्रित हैं? तो रमणीयता और नित्य नूतनता
एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह एक दूसरे पर आधारित है। अगला सवाल है सवाल देखो ध्यान से। उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने किस बात पर बल दिया है? तो भाषा की नवीनता पर बल दिया है ना? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने इस बात पर बल दिया है कि जिस प्रकार सौंदर्य में नवीनता होनी चाहिए उसी प्रकार भाषा में नवीनता आती रहनी चाहिए। लेखक ने किसे अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम माना है? तो लेखक ने भाषा को युग चेतना की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम माना है। ठीक है? गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या
कितने बच्चे ऐसे हैं जो गद्यांश का रेखांकित अंश लिखने में सक्षम हो गए हैं? बेटा किताब उठाओ अपनी और देखो केवल इंपॉर्टेंट गद्यांश ही करवा रहा हूं। सारे नहीं करवा रहा हूं। सारे नहीं करवा रहा हूं। केवल मोस्ट इंपॉर्टेंट ही करवा रहा हूं। किताब उठा के मिला लेते तो पता चल जाता। पढ़ना लिखना तो है नहीं कुछ। लेखक का कहना है कि भाषा की नवीनता ही उसकी सुंदरता और रमणीयता की दतक है। जो वस्तु रमणीय होगी वह नवीन होगी। जो नवीन होगी उसमें रमणीयता भी होगी। इस प्रकार नवीनता और रमणीयता एक दूसरे पर आश्रित है
तथा आश्रित है अथवा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना रमणीयता के कोई भी वस्तु महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। उसका मौलिकता की मान्यता उसके मौलिकता की मान्यता भी नहीं मिल सकती। भाषा स्वयं संस्कृत का एक अटूट अंग है। सांस्कृतिक परंपरा से निस्तृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नई संस्कृति नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत प्रयोग पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नए प्रयोगों की नई भाव योजनाओं को व्यक्त करने के लिए
नए शब्दों के खोज की महती आवश्यकता है। नए शब्दों के खोज की महती आवश्यकता है। उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। कितने बच्चे ऐसे हैं जो संदर्भ लिखकर दो नंबर प्राप्त कर लेंगे? बताओ कमेंट करके। किसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है? उपर्युक्त गद्यांश में किस प्रसंग का प्रतिपादन किया गया है? भाषा किसका अभिन्नंग है और क्यों? गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। इन सवालों का जवाब आपको देकर के 10 नंबर मिलते हैं। कितने नंबर मिलते हैं, बेटा? 10 नंबर मिलते हैं। इन सवालों का जवाब दे के। सभी लोग सेशन को लाइक
कर लो जितने बच्चे नए हैं और चैनल को सब्सक्राइब कर लेना। आज की क्लास के लाइक का टारगेट 1 लाख लाइक है। केक आ रहा है। केक आ रहा है। केक दोस्तों आ रहा है केक। प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रसिद्ध गद्यांश प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी द्वारा लिखित भाषा और आधुनिकता नामक निबंध से उद्रित है। किसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है? तो भाषा संस्कृत की परंपरा से निश्चित होने के बावजूद विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। उपरित्त गद्यांश में किस प्रसंग का प्रतिपादन किया गया है? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक
ने संस्कृति के विकास में भाषा के महत्व को प्रतिपादित किया है। भाषा किसका अभिन्नंग है और क्यों? भाषा संस्कृति का अभिनंग है क्योंकि संस्कृत की अभिव्यक्ति का माध्यम भाषा ही है। चलिए सभी लोग जल्दी-जल्दी कमेंट करेंगे। आगे बढ़ते हैं। गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक का कहना है कि भाषा संस्कृत का अभिन्नंग है क्योंकि संस्कृत की अभिव्यक्ति का माध्यम भाषा ही है। संस्कृत की रचना और विकास परंपराओं द्वारा होता है। परंपराएं क्योंकि परिवर्तनशील होती हैं। इसलिए संस्कृति भी एक जैसी नहीं रहती। वह भी परंपराओं की तरह बदलती रहती है। इस रूप में हम
कह सकते हैं कि संस्कृति गतिशील होती है। संस्कृति कैसी होती है? गतिशील होती है। दोस्तों एक मारूंगा मैं। अभी तक यह कुल मिले फ़ोन कर रहे थे मुझे। अब यह कुल मिले एक एक रुपया भेजा। अरे यार इतने भाई मैं इतना गरीब नहीं हूं रे। इतना गरीब नहीं हूं मैं। हम चलो। आगे। भाषा की साधारण इकाई शब्द है। शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व ही ध्रुव है। यदि भाषा में विकसनशीलता शुरू होती है तो शब्दों के स्तर पर ही दैनंदिन सामाजिक व्यवहारों में हम कई ऐसे नवीन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जो अंग्रेजी, अरबी,
फारसी आदि विदेशी भाषाओं से उधार लिए गए हैं। वैसे ही नए शब्दों का गठन भी अनजाने में अनायास ही होता है। ये शब्द अर्थात उन विदेशी भाषाओं से सीधे अवकृत ढंग से उधार लिए गए शब्द भले ही काम चलाऊ माध्यम से प्रयुक्त हो। साहित्यिक दायरे में कदापि ग्रहणीय नहीं है। यदि ग्रहण करना पड़े तो उन्हें भाषा की मूल प्रकृति के अनुरूप साहित्यिक शुद्धता प्रदान करनी पड़ती है। यहां प्रयत्न की आवश्यकता प्रतीत होती है। मैं गरीब नहीं हूं। मेरी मम्मी मुझे खूब पैसे देती हैं। लेकिन होता है ना कि सबके घर में एक लड़का ऐसा एक
लड़का या लड़की ऐसा होता है जिस पे सबसे ज्यादा पैसे खर्च किए जाते हैं। होता है कि नहीं? तुम्हारे घर में भी होगा कि हां यह वाला नारा बहुत दिन हो गया। देखिए आचार्य इसी के शासन में 100-100 नंबर बटेंगे राशन में। यह 2024 में बच्चों ने बनाया था। ठीक है? यह 2024 में बच्चों ने बनाया था। तो 1500 की कमाई हो जाएगी। 1500 की नहीं वो मैं कह रहा था तो मैं उनमें से एक हूं। मेरे घर में मेरे घर वालों ने मुझ पर बहुत पैसा खर्च किया। खैर उनका पैसा बर्बाद ही हुआ। लेकिन
या मैं अपने घर का बड़ा लड़का था। तो मेरे पिताजी ने सोचा कि इसको पढ़ाऊंगा। खूब पढ़ लेगा। लेकिन मैं दोस्तों पढ़ ही नहीं पाया। मैं अनपढ़ ही रह गया और फिर इस अनपढ़ को जिम्मेदारी मिली उत्तर प्रदेश के बच्चों को पढ़ाने की। अगला सवाल देखो सवाल का उत्तर देखो। पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लीकर यही बनते हैं बेटा। प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक भाषा और इसके लेखक का नाम प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी है। भाषा की विकसनशीलता कैसे शुरू होती है? लेखक के अनुसार भाषा की विकसनशीलता शब्दों के स्तर पर ही शुरू
होती है। अविकृत ढंग और मूल प्रकृति का क्या आशय है? ढंग और मूल प्रकृति का आशय है विदेशी भाषाओं के अवकृत स्वरूप और भाषा का वास्तविक स्वरूप। साहित्यिक दायरे में विदेशी भाषा के शब्दों को किस रूप में ग्रहण करना पड़ता है? साहित्यिक दायरे में विदेशी भाषा के शब्दों को भाषा की मूल प्रकृति के अनुरूप ग्रहण करना पड़ता है। अगला सवाल रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक कहता है कि शब्द किसी भाषा की मूलभूत इकाई है। इसके अभाव में भाषा का अस्तित्व असंभव है। वस्तुतः किसी भाषा का विकास शब्द के स्तर से ही आरंभ होता है।
भाषा में शब्दों के आगम तथा निर्माण अनायास और सायास दोनों विधियों से होते हैं। अनायास विधि में तो किसी वस्तु पदार्थ अथवा क्रिया को देखकर जो ध्वनि हमारे मुख से उत्पन्न होती है। वही कालांतर में उस वस्तु पदार्थ अथवा क्रिया के रूप में रूढ़ होकर उसके लिए नाम शब्द के रूप में प्रयुक्त होने लगती है। इस प्रकार नए शब्द का आगम अथवा निर्माण भाषा में हो जाता है। नए शब्द का आगम अथवा निर्माण भाषा में हो जाता है। अब मैं भैया जिसका नाम दिख गया वो मां बहू मारूंगा। आई लव यू। आई लव यू। तुम
सबको बहुत प्यार करता हूं मैं। तुम ही मेरे मंदिर, तुम ही मेरी पूजा, तुम ही देवता हो। तुम ही देवता हो। कोई मेरे दिल से नए शब्द, नए मुहावरे एवं नई रीतियों के प्रयोग से युक्त भाषा को व्यावहारिकता प्रदान करना ही भाषा में आधुनिकता लाना है। दूसरे शब्दों में केवल आधुनिक युगीन विचारधाराओं के अनुरूप नए शब्दों के गणने मात्र से ही भाषा का विकास नहीं होता। वरन नए पारिभाषिक शब्दों को एवं नूतन शैली प्रणालियों को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है। उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। किसके
प्रयोग से भाषा में आधुनिकता लाई जा सकती है? किसके गढ़ने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता? उपर्युक्त गद्यांश के माध्यम से लेखक ने किन बिंदुओं पर प्रकाश डाला है? ये सारी चीजें आप लोगों को पता होनी चाहिए। कितने बच्चे हैं जिनको ये सारी चीजें पता हैं? जरा मुझे एक बार कमेंट करके बताना बेटा। कितने बच्चे हैं जिनको ये सारी चीजें पता हैं? जरा एक बार मुझे कमेंट करके बता दो। जरा एक बार मुझे कमेंट करके बता दो और सेशन को शेयर कर दो। चलो इस पाठ का नाम बताओ। इस पाठ का गद्यांश का संदर्भ
कितने लोग लिख लेंगे? संदर्भ कितने बच्चे लिख लेंगे बेटा? संदर्भ कितने बच्चे लिख लेंगे? बताओ मुझे। प्रस्तुत गद्यांश प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी द्वारा लिखित भाषा और आधुनिकता नामक पाठ से उद्रित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। आधुनिक युग की विचारधाराओं के अनुरूप अनेक व्यक्ति नवीन शब्दों का प्रयोग करना ही भाषा के विकास की दृश्य पर्याप्त मानते हैं। परंतु इस प्रकार की धारणा उचित नहीं है। केवल नवीन शब्द गढ़कर ही भाषा को आधुनिक नहीं बनाया जा सकता। वरन भाषा को आधुनिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम नवीन पारिभाषिक शब्दों एवं नवीन लेखन शैलियों पर
आधारित लेखन पद्धतियों को प्रयुक्त करें। नवीन शब्दों एवं नवीन शैलियों को साहित्य से लेकर विद्यालयों में निर्धारित पाठ्य पुस्तकों तक प्रयुक्त किया जाना चाहिए। इस प्रकार के नवीन शब्दों एवं शैलियों को शिक्षित अथवा अशिक्षित व्यक्तियों या जहां से भी मिले खोजकर भाषा में प्रयुक्त करना चाहिए। ऐसा करके ही भाषा को व्यावहारिक आधुनिक अथवा प्रगतिशील बनाया जा सकता है। अगला सवाल किसके प्रयोग से भाषा में आधुनिकता लाई जा सकती है? तो भाषा में आधुनिकता लाने के लिए यह आवश्यक है कि हम नवीन पारिभाषिक शब्दों एवं नवीन लेखन शैलियों पर आधारित लेखन पद्धतियों को उपयुक्त करें। किसके
गणने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता? तो लेखक का कहना है कि केवल नवीन शब्दों को गढ़ने मात्र से ही भाषा का विकास नहीं होता। उपर्युक्त गद्यांश के माध्यम से लेखक ने किन बिंदुओं पर प्रकाश डाला है? तो प्रसुद्ध गद्यांश में लेखक ने नवीन पारिभाषिक शब्दों, नवीन मुहावरों, नवीन लेखक शैलियों आदि बिंदुओं पर प्रकाश डाला है। सभी लोग तुम लोग सेशन को लाइक कर लिए। मुझे अभी बस अगले 5 मिनट में 20, 20,000 लाइक हो जाना चाहिए। अगले 5 मिनट में 20,000 लाइक हो जाना चाहिए। यार इस तरह तुम लोग मत करो। मेरा अकाउंट
ब्लॉक हो जाएगा। ठीक है? ऐसे हजार जगह से पैसा आएगा मेरा अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा। ये मत करो यार तुम लोग भाई। सच में ब्लॉक हो जाएगा यार। तुम लोग समझ क्यों नहीं रहे हो? और ये कौन सा चलन है रे? सभी लोग अगले 5 मिनट में 20,000 लाइक हो जाना चाहिए। यह क्या कर रहे हो यार? बुरा लग रहा है मुझे। निंदा रस आ गया बेटा। पांचवा चैप्टर प्रस्तुत संकलन में निंदा रस निबंध व्यंग की दृष्टि एक सुंदर कलाकृति है। अनेक व्यक्ति एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या भाव से निंदा करते रहते हैं। कुछ व्यक्ति
अपने स्वभाव वश अकारण ही निंदा में रस लेते हैं। कुछ व्यक्ति अपनों को बड़ा सिद्ध करने के लिए बड़ों की निंदा में निर्लिप्त भाव से मग्न रहते हैं। कुछ मिशनरी निंदक होते हैं और कुछ अन्य भाष भावों से प्रेरित होकर निंदा कार्य में रत रहते हैं। इस निबंध में परसाई जी ने निंदकों की अच्छी खबर ली है और उन पर करारी चोट की है। प्रहार तीव्र होते हुए भी पढ़ने में रुचि बनी रहती है। इस बात का आप लोगों को ध्यान रखना है। एक बूंद सहसा उछली अज्ञय का यात्रा वृतांत है। चलो इस पर आधारित
सवाल ऐसे मौके पर हम अक्सर अपने पुतले को आकावर में दे देते हैं। बस बहुत जल्दी बस 15 मिनट में मुश्किल से गद्यांश खत्म होने वाला है। ऐसे मौके पर हम अपने अक्सर अपने पुतले को आकावर में दे देते हैं। हम अलग खड़े देखते रहते हैं। का से क्या मैं गले मिला पर क्या मुझे क्या मुझे उसने समेट कर कलेजे से लगा लिया? हरगिज़ नहीं। मैंने अपना पुतला ही उसे दिया। पुतला इसलिए उसकी बहुत भुजाओं में सौंप दिया कि मुझे मालूम था कि मैं धृतराष्ट्र से मिल रहा हूं। पिछली रात को एक मित्र ने बताया
कि क मुझे अपनी क अपनी ससुराल आया है और ग के साथ बैठकर शाम को दो-तीन घंटे तुम्हारी निंदा करता रहा। इस सूचना के बाद जब आज सवेरे वह मेरे गले लगा तो मैंने शरीर से अपने मन को चुपचाप खिसका दिया और निस्नेह कटेली कटीली देह उसकी बाहों में छोड़ दी। भावना के अगर कांटे होते तो उसे मालूम होता कि वह नागफनी को कलेजे से चिपकाए है। छल का धृतराष्ट्र जब आलिंगन करे तो पुतला ही आगे बढ़ाना चाहिए। छल का धृतराष्ट्र आलिंगन करे तो पुतला ही आगे बढ़ाना चाहिए। हां S25 अल्ट्रा S25 अल्ट्रा। S25 नहीं
S26 जब तक तुम लोग पास होगे तब तक S26 आ जाएगा। यह फोन उसे मिलेगा जो हिंदी में 100 में 100 लाएगा। यह फोन उसे मिलेगा जो हिंदी में 100 में 100 लाएगा। ठीक है? चलो अब इस पर बस बस 5 मिनट में खत्म होने वाला है गद्यांश तुम्हारा। सारे इंपॉर्टेंट गद्यांश करा दे रहा हूं। बेटा इससे बाहर से सवाल आना नामुमकिन है। इससे बाहर से सवाल आना नामुमकिन है। चलो उपर्युक्त गद्यांश के लेखक पाठ का नाम लिखिए। प्रसिद्ध गद्यांश के लेखक हर शशंकर प्रसांगिता। इस पाठ का नाम निंदास है। ईर्ष्या द्वेष की भावनाओं से
युक्त मित्र से कैसे गले मिलना चाहिए? तो ईर्ष्या और द्वेष से युक्त व्यक्ति को धृतराष्ट्र एवं भीम की भांति मिलना चाहिए। अर्थात बेमन से मिलना चाहिए। प्रस्तुत गद्यांश में किस भाव को व्यक्त किया गया है? प्रस्तुत गद्यांश में लेखक शिष्टाचार के नाते अपने मित्र क से मिलता है और उससे मिलने के समय उत्पन्न अपने आंतरिक भावों को व्यक्त करता है। लेखक ने किस पर व्यंग किया है? तो लेखक ने आजकल की मित्रता एवं सभ्यता दोनों पर व्यंग्ञात्मक शैली में कटाक्ष किया है। क्या किया है? व्यंग्ञात्मक शैली में कटाक्ष किया है। मैं भैया एक मैं पुरापाषाण
काल से पढ़ा रहा हूं। सर आपका दांत कैसे टूट गया? ये दांत मेरा टूटा नहीं है। ये मेरी जगह है यहां दांत में। मेरे गुरु जी थे बालकृष्ण तिवारी। श्री बालकृष्ण तिवारी मेरे हॉस्टल वार्डन थे। जीआईसी फैजाबाद में। तो वो मुझे एक श्लोक सुनाते थे कि छिद्र दंतो क्वचित मूर्खा क्वचित खलवा निर्धन। जिनके दांतों में जगह होती है वो मूर्ख नहीं होते। और जो टकले होते हैं वो निर्धन नहीं होते। खैर आजकल जो टकले होते हैं वो निर्धन होते हैं क्योंकि उनके बाल टूट जाते हैं। गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक का कहना
है कि कुछ पारस्परिक सम कुछ व्यक्ति पारस्परिक संबंधों में भी छलपूर्ण नीति का प्रयोग करते हैं। वह अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर स्नेह एवं प्रेम का स्वांग रचते हैं तथा किसी भी अवसर पर दूसरों का अहित कर देते हैं। झूठा विश्वास और प्रेम प्रदर्शित कर दूसरों को धोखा देना और अपने स्वार्थ की पूर्ति करना ही इस प्रकार के व्यक्तियों का स्वभाव होता है। ऐसे व्यक्तियों के धोखे में आकर कभी भी उनके प्रति भावुक नहीं होना चाहिए। उनके साथ सदैव ऊपरी मन से ठीक उसी प्रकार मिलना चाहिए जिस प्रकार भीम ने धृतराष्ट्र को अपना शरीर सौंपने
के स्थान पर अपना पुतला ही सौंपा। अन्यथा ईर्ष्यालु धृतराष्ट्र उसे गले लगाने के बहाने उसकी हत्या कर देगा। अगले सवाल पर चलते हैं। निंदा का उद्गमहीनता और कमजोरी से होता है। निंदा का उद्गम हीनता और कमजोरी से होता है। मनुष्य अपनी हीनता से दबता है। वह दूसरों की निंदा करके ऐसा अनुभव करता है कि वह सब निकृष्ट हैं। वह सब निकृष्ट हैं और वह उनसे अच्छा है। उसके अहम की इससे तुष्टि होती है। माइक चेक कर लेना एक बार। बड़ी लकीर को कुछ मिटाकर छोटी लकीर बड़ी बनती है। ज्यों-ज्यों कर्म क्षीण होता जाता है त्यों-तों।
जी मुझे लग रहा है कि गद्यांश गद्यांश पहचानने वाली ट्रिक तो मैं टेलीग्राम में भेज दूंगा। वह इतनी बड़ी नहीं है। चलो एक बार मुझे कमेंट करके बता दो मेरी आवाज सही से आ रही है। एक बार मुझे आप कमेंट करके बता दो बेटा मेरी आवाज सही से आ रही है। ठीक है सभी लोग। चलो अगला क्या है? हां। हां तो इंद्र बड़ा ईर्ष्यालु माना जाता है क्योंकि वह निठल्ला है। स्वर्ग में देवताओं को बिना उगाया अन्न बे बनाया महल और बिन बोए फल मिलते हैं। अकर्मण्यता में उन्हें अप्रतिष्ठित होने का भय बना रहता है।
इसलिए कर्मी मनुष्यों से इन्हें ईर्ष्या होती है। अब इस पर आधारित ये पांच सवाल देख लो। निंदा रस का ये सबसे इंपॉर्टेंट पैराग्राफ है। तुम अंसार उठा के देख लो। कम से कम 10 सेट में पिछले पांच सालों में यह तुम्हें मिल जाएगा। सवाल का उत्तर बहुत ध्यान से देखना। बहुत ध्यान से देखना। गद्यांश के सभी भैया गद्यांश के सभी मोस्ट इंपॉर्टेंट ही करवा रहा हूं। पूरा गद्यांश नहीं करवा रहा। जो पिछले पांच सालों में पांच बार से ज्यादा रिपीट हुआ है। उसी को लेकर के आया हूं। उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रसुद्ध गद्यांश प्रसिद्ध
व्यंकार हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित निंदा रस नामक पाठ के शीर्षक से उद्रित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। निंदा की प्रवृत्ति का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए लेखक कहता है कि मनुष्य के हीन भावना और उसकी कर्महीनता से निंदा का जन्म होता है। जब व्यक्ति में हीनता की भावना प्रवेश करती है तब वह आलसी हो जाता है और उसकी कर्म शक्ति क्षीण हो जाती है। तब वह निंदा का आश्रय लेकर स्वयं को ऊंचा दिखाने का प्रयास करता है और अपनी हीनता छिपाने का प्रयास करता है। इस प्रकार व्यक्ति आत्महीनता के बोझ से दबा रहता है। हीन
भावना से ग्रस्त व्यक्ति दूसरों की निंदा करके तथा उन्हें तुक्ष और निकृष्ट बताकर अपने अहम की तुष्टि करता है। वे समझते हैं कि इस प्रकार वे समाज को अपने महत्व का की स्थापना कर वे समाज में अपने महत्व की स्थापना कर रहे हैं। सभी लोग काला दिल भेजें। यह क्या बात होती है? मुझे गोरा दिल पसंद है। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। और मम्मी से कह दो कि कुछ खाने वाने को देने पानीानी पीते रहो। ठीक है? कॉपी वाफी ले बैठे रहो। क्या भाई आवाज सही है?
चलो आवाज सही है। थोड़ा सा मस्ती कर लेते हैं। चलो बेटा थोड़ा मस्ती कर लेते हैं प्यारे बच्चों। थोड़ा मस्ती कर लेते हैं। चलो थोड़ा मस्ती कर लेते हैं। क्या है मस्ती? सवाल का उत्तर। निंदा की प्रवृत्ति कब बढ़ती है? लेखक का कहना है कि जैसे-जैसे व्यक्ति कर्महीन होता जाता है, वैसे-वैसे उसमें निंदा की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है। देवताओं को भय बना रहता है। देवताओं को कर्महीनता की स्थिति में अप्रतिष्ठित होने का भय बना रहता है। निंदा रस का उद्गम कब होता है? निंदा रस का उद्गमहीनता और कमजोरी से होता है। अगला क्या है? निंदा
कुछ लोगों की पूंजी होती है। बड़ा लंबा चौड़ा व्यापार फैलाते हैं। वह इस पूंजी से कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक कथाओं के पारायण पर आधारित होती है। बड़े रस विभोर होकर वे जिसकी सत्य कल्पित कलंक कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने की तुष्टि का अनुभव करते हैं। निंदा किसकी पूंजी होती है? कुछ लोगों की प्रतिष्ठा का आधार क्या होता है? सत्य कल्पित कलंक कथा का अर्थ स्पष्ट कीजिए। रेखांकित का अर्थ स्पष्ट कीजिए। पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए। चलिए अगले सवाल पर आते हैं। निंदा किसकी पूंजी है?
निंदा कुछ लोगों की पूंजी होती है। कुछ लोगों की जो निंदा करते हैं। कुछ लोगों की प्रतिष्ठा का आधार क्या होता है? कुछ लोगों की प्रतिष्ठा का आधार इसलिए प्राप्त होता है कि वे दूसरों की निंदा करने में सक्षम होते हैं। सत्य कल्पित कलंक कथा का अर्थ स्पष्ट कीजिए। सत्य कल्पित कलंक कथा का अर्थ है सत्य काल्पनिक कलंकपूर्ण घटना। सत्य काल्पनिक कलंकपूर्ण घटना है। सभी लोग इस बात को ध्यान से समझ लो। सभी लोग इस बात को ध्यान से समझ लो बेटा। सभी लोग इस बात को ध्यान से समझ लेंगे। किसी बच्चे का कोई भी
सवाल गलत नहीं होना चाहिए। आपको सारे सवाल सही करने हैं। इस बात का आपको ध्यान रखना है। चलिए आगे बढ़ते हैं। रेखांकित अंश का अर्थ स्पष्ट कीजिए। कुछ लोग निंदा को उसी प्रकार महत्व देते हैं जैसे व्यापारी अपनी पूंजी को देता है। वह निंदा को समझते हुए ही निंदा को पूंजी समझते हुए ही अपना व्यापार बढ़ाने में लगे रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। सर जी अगर हिंदी में 99 आए तो हिंदी में 99 आए तो 99 आए तो क्या करूंगा मैं? 99 आया तो तुम्हें 3 दिन के लिए
मैं बनारस पूरा घुमाऊंगा। बनारस या पहाड़ों पर जहां घूमना चाहते हो। जितने बच्चों के 99 आएंगे उन्हें तीन दिन की ट्रिप फ्री। तीन दिन की ट्रिप पहाड़ों पर पहाड़ों पर मेरे साथ चलो। प्रत्येक व्यक्ति की अधिक से अधिक सर्वत्र निंदा करना ही उनके जीवन का प्रमुख लक्ष्य होता है। उनकी यह धारणा होती है कि जितना अधिक निंदा करेंगे उतना ही लाभ प्राप्त होगा। देखो बेटा जो सवाल जैसे आता है वो सवाल वैसे ही पढ़ाना पड़ेगा। अब तुम्हें किसी सवाल में मजा आ रहा है तो तुम पढ़ रहे हो। किसी में मजा नहीं आ रहा है
तो नहीं पढ़ रहे हो। ऐसे नहीं चलेगा। बिल्कुल नहीं चलेगा। क्योंकि तुम्हें सब पढ़ना पड़ेगा। भैया पेपर 100 के 100 नंबर का लिखना है ना। ऐसा तो है नहीं कि ऑब्जेक्टिव करके छोड़ दोगे। ऑब्जेक्टिव के बाद गद्यांश नहीं करोगे क्या? साहित्यिक परिचय नहीं करोगे क्या? कहानी नहीं करोगे क्या? खंड काव्य नहीं करोगे क्या? पहले ही पेपरवा में फेल हो जाओगे। अगले पेपरों में जाने का मना नहीं करेगा। और एक बात जान लो हिंदी और इंग्लिश का दोनों पेपर पहले ही है। ये सरल भी होते हैं लेकिन ये मेहनत भी मांगते हैं। और अगर पहले दोनों
पेपर खराब हो गया तो तुम हजार लोग कोशिश कर लो तीसरा पेपर नहीं सही हो सकता है। क्योंकि क्लास मोटिवेशन से सही होती है। चलो प्रस्तुत पद्यांश के पाठ का शीर्षक निंदार रसता है। इसके लेखक हरिशंकर परसाई हैं। लास्ट पार्ट है। गद्यांश का लास्ट पार्ट तेजस्वी मन के संपादित अंश। अब यहां पर लेखक इस लेख में युवाओं के साथ अपने संबंधों की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि वे विशेष रूप से छात्रों से ही क्यों मिलते हैं। उनका मानना है कि युवाओं को यह विश्वास होना चाहिए कि वे एक समृद्ध और विकसित भारत के नागरिक
बनने के योग्य हैं। वह यह भी कहते हैं कि समृद्ध और आध्यात्म एक दूसरे के विरोधी नहीं है और भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत बात नहीं है। बसशर्ते वे संतुलित दृष्टिकोण से की जाए। लेखक के अनुसार जैसे प्रकृति पूरी ऊर्जा से काम करती है। वैसे भी हमें भी जीवन में पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनका संदेश यह है कि युवाओं को अच्छे भरे पूरे जीवन के लिए सपने देखने चाहिए और उन्हें सच्चे दिल से अपने आकांक्षाओं की दिशा में काम करना चाहिए। यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपने भीतर के
आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ जीवन जिए ताकि ना केवल वह स्वयं सफलता और सुख पा सके बल्कि अपने आसपास सकारात्मक प्रेम और खुशियां फैला सके। ठीक है? समझ में आ रहा है सभी को? समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है? समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा? 20,000 लाइक हुए कि नहीं हुए? मैं केवल मोस्टेंट ही करा रहा हूं। मैं पहाड़ों पर घुमाऊंगा। बनारस नहीं घुमाऊंगा। बनारस घुमाऊंगा तो बनारस वालों को मजा ही नहीं आएगा। Apple का लैपटॉप मेरा ही ले लेना। यह बेकार सा लैपटॉप मेरे पास रखा है। इसका
कोई यूज़ नहीं बहुत बेकार लैपटॉप होता है अपन का। यही ले लेना। ठीक है? चलो मैं यहां मान मैं यह नहीं मानता कि समृद्ध आध्यात्मिक एक दूसरे के विरोधी है। भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का उपभोग करते हुए जीवन बिता रहा हूं। लेकिन मैं सर्वत्र समृद्ध की कदर करता हूं। क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षाता विश्वास लाती है। जो अंतता हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है। आप अपने आसपास देखेंगे तो पाएंगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे अधूरे मन से नहीं करती।
बिना बगीचे में जाइए। अ किसी बगीचे में जाइए मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी अथवा ऊपर की तरफ ही देखें यह ब्रह्मांड आपके आपको अनंत तक फैला दिखाई देगा आपके यकीन से भी परे उत्तर देखते हैं एक-एक सवाल का बेटा पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक हम और हमारा आदर्श था इसके लेखक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम है लेखक समृद्ध और आध्यात्म को आपस में विरोधी क्यों नहीं मानता? लेखक के अनुसार समृद्ध और आध्यात्म एक दूसरे के पूरक हैं। क्योंकि आध्यात्म ही समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता
है। समृद्धि से हमें क्या लाभ मिलता है? समृद्धि से हमें सुरक्षा और विश्वास प्राप्त होता है जो हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है। समृद्धि से यही लाभ है। प्रकृति का कोई काम पूर्ण मनोयोग से होता है। इसका आशय स्पष्ट कीजिए। लेखक का कहना है कि प्रकृति का कोई भी कार्य आधे अधूरे मन से नहीं करती। प्रकृति अपना कोई भी काम आधे अधूरे मन से नहीं करती। साहित्यिक हिंदी वाले भी पढ़ सकते हैं बेटा। तुम्हारे में एपीजे अब्दुल्लाह का नाम नहीं है क्या? एक बच्चा कह रहा है सर धीरे पढ़ाओ। 12 घंटे है बेटा
42 घंटे नहीं आई मिस यू बेटा कल कुंजी बैच का लास्ट क्लास था भाई यार ऐसे मुकेश सर ऐसे इमोशनल बातें करने लगे मैं रोने लगा इतना रोया मैं भो करके बाद मैंने वीडियो देखा मुझे लगा कितना रोया मैं सर केक नहीं आया है केक लाया जाए चलो चलो केक आएगा केक आएगा रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से लेखक का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को सफल होने के लिए सभी हर संभव प्रयास करने चाहिए जो वह कर सकता है। किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। प्रकृति के कार्यों से
सीख लेनी चाहिए। क्योंकि इस दृश्य जगत में प्रकृति ने कोई भी कार्य आधे अधूरे मन से नहीं किया है। बल्कि पूर्ण मनोयोग से किया है। इसके लिए प्रकृति में आपको बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे जो कि पूर्ण होते दिखेंगे। आप किसी फूलों के बगीचे में पहुंच जाइए। 15, 16, 17 फरवरी और 18 फरवरी सुबह 5:00 बजे पूरे यूपी बोर्ड को बता देना कि ऋषि सर की महा तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना शुरू हो गई है। और जो बच्चा इस क्लास में क्लास करता है टॉपर बनता है तो परेशान मत होना बस जान लगा के तैयारी
करनी है बेटा जान लगा के तैयारी करनी है न्यूनतम और अनंत का क्या अर्थ है न्यूनतम का अर्थ है सबसे कम और अनंत का अर्थ है जिसका अंत ना हो अर्थात विस्तृत अगला क्या है जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविन्द ने कहा है कि हम ऊर्जा के ही अंश हैं। इसलिए जब हमने यह जान लिया कि आत्मा और पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा है। वे एक दूसरे से पूरा तादाद में रखे हुए हैं तो हमें यह एहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थों
की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक नहीं है। ठीक है? किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक नहीं है। उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए। चलिए प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का नाम हम और हमारा आदर्श है। इसके लेखक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम है। लेखक ने अस्तित्व का हिस्सा किसे माना है? तो लेखक ने आत्मा और पदार्थ दोनों को अस्तित्व का हिस्सा माना है। e = mc² होता है। कितने लोग e = mc² वाला फार्मूला जानते हैं? बताइए मुझे। e = mc² कितने लोग जानते हैं? प्रस्तुत गद्यांश का क्या प्रसंग है? प्रस्तुत गद्यांश में
बताया गया है कि संसार के सभी प्राणी ऊर्जा के स्वरूप हैं। प्रस्तुत गद्यांश के लेखक के किस संपाद प्रस्तुत गद्यांश लेखक के किस संपादित पुस्तक का अंश है? तो प्रस्तुत गद्यांश लेखक के तेजस्वी मन के संपादित अंश नामक पुस्तक का अंश है। अगला गद्य गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। लेखक एपीजे अब्दुल कलाम कहते हैं कि इस संसार में हम जो कुछ भी देख रहे हैं, वह ऊर्जा का ही रूप है। महर्ष अरविंद ने भी यही कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। पूरा जगत ऊर्जा से ही संचालित है। बिना ऊर्जा
के प्राणियों का जीवित रहना संभव नहीं है। ठीक है। सर हिमालय चलेंगे। हिमालय की तरफ ले चलूंगा तुम लोगों को। चलो बेटा अपनी पीठ ठोक लो। सभी लोग अपनी पीठ थपथपा लो। लेखकों का साहित्यिक परिचय आ गया। चलो लेखकों का साहित्यिक परिचय यानी जो गद्यांश हमने पढ़े उनको लिखने वाले लेखकों का साहित्यिक परिचय। कितने लेखक हैं तुम्हारे में बेटा? सभी लोग ध्यान से देख लो। कितने लेखक हैं तुम्हारे में? कितने लेखक हैं तुम्हारे में? तो तुम्हारे में छह लेखक हैं वासुदेव शरण अग्रवाल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिशंकर परसाई, कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर। अब देखो अब
देखो इसमें से इंपॉर्टेंट कौन सा है? शुरुआत के चार शुरुआत के चार सबसे इंपॉर्टेंट हैं। अगर शुरू के चार तुम याद कर लोगे कोई रोक नहीं सकता तुम्हारा नंबर। शुरुआत के चार। शुरुआत के चार। मैं आपको सभी बताऊंगा लेकिन शुरुआत के चार तुम देख लेना। और शुरुआत के चार देख के चले जाओगे। एक भी नहीं कटेगा। रेलवे रेल रेड वेलवेट वाला केक चाहिए। रेड वेलवेट रेड वेलवेट वो निब्बी निब्बियों का केक होता है। साहित्यिक परिचय कैसे लिखा जाता है? मैंने तुमको ट्रिक बताई थी। संक्षिप्त परिचय प्लस साहित्य में योगदान और देखो 80 से 100 शब्द
में लिखना इससे ज्यादा ना हो। सबसे पहले तुम्हें लिखना है संक्षिप्त परिचय। जैसे यहां हेडिंग डालोगे वासुदेव शरण अग्रवाल जन्म स्थान मेरठ उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु 7 अगस्त 1904 से 27 जुलाई 1967 पिता श्री विष्णु अग्रवाल माता श्रीमती सीता देवी अग्रवाल शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए पीएचडी डीलिड कमेंट करके बताओ कितने लेखकों का साहित्यिक परिचय तुम्हें याद है? कितने लेखकों का साहित्यिक परिचय तुम्हें याद है? साहित्यिक हिंदी वालों में भी यही साहित्यिक परिचय लिखना है। हां सब लोग पढ़ सकते हो बेटा जो मेरी क्लास में आए हो सब पढ़ सकते हो। शैली कैसी है?
विचारात्मक गवेनात्मक व्याख्यात्मक भाषा कैसी है? विषयनुकूल प्रौढ़ और परिमार्जित खड़ी बोली प्रमुख रचनाएं कैसी है? पृथ्वी पुत्र भारत की एकता कल्पवृक्ष माता भूमि वागधारा वासुदेव शरण अग्रवाल का हो गया। अगला क्या है? इनका साहित्य में योगदान या साहित्यिक परिचय। इसको कैसे लिखोगे? ऐसे लिखोगे। भारतीय संस्कृति पुरातत्व और प्राचीन इतिहास की ज्ञाता होने के कारण डॉ. अग्रवाल के मन में भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक और अनुसंधान की दृष्टि से प्रकाश में लाने की इच्छा थी। अतः इन्होंने उत्कृष्ट कोटि के अनुसंधानात्मक निबंधों की रचना की थी। निबंध के अतिरिक्त इन्होंने संस्कृत अल प्राकृत के अनेक ग्रंथों का संपादन
किया। भारतीय साहित्य और संस्कृति के गंभीर अधता के रूप में इनका नाम देश के विद्वानों में अग्रणी है। इन्होंने वैदिक साहित्य, दर्शन, पुराण और महाभारत पर अनेक गणेशात्मक लेख लिखे हैं। इनके निबंधों में भारतीय संस्कृति का उदारात रूप व्यक्त हुआ है। इनके कथन प्रमाणिक हैं और इनकी शैली में आत्मविश्वास की झलक मिलती है। इनकी शैली का प्रधान रूप विवेचनात्मक है। हिंदी साहित्य के इतिहास में ये अपने मौलिक विचारशीलता और विध्वता के लिए चिर मौलिकता अपने मौलिकता विचारशीलता और विध्वता के लिए चिरस्मरणीय रहेंगे। सर मेरा एडमिट कार्ड नहीं याद नहीं होता। याद कैसे नहीं होता यार?
इतना छोटा-छोटा तो तुमको दे रहा हूं। यह 80 से 100 शब्दों में परफेक्ट लिखा हुआ है। तुमको कैसे याद नहीं होता यार? कैसे तुमको? यह सब मत कहा करो भाई। याद नहीं करोगे तो कैसे काम चलेगा? सर हम भी इंसान नहीं। सर हम भी इंसान नहीं खा सकते क्या रेड वेलवेट नहीं बेटा रेड वेलवेट इंसान नहीं खा सकते उसको निब्बा निब्बी खाते हैं और रेड वेलवेट का केक केवल दिल के आकार का आए तभी माना जाएगा रेड वेलवेट नहीं तो नहीं माना जाएगा ऐसा नियम है ऐसा मेरे लोगों ने मुझे बताया है मुझे नहीं पता
था मेरे लोगों ने मुझे बताया है कि रेड वेलवेट माने दिल के आकार का आचार्य जारी प्रसाद द्विवेदी जन्म स्थान बलिया जिले का दुबे का छपरा गांव जन्म मृत्यु सन 1907 से 1989 पिता अनमोल द्विवेदी माता ज्योतिष्मती शिक्षा कास हिंदु विश्वविद्यालय से ज्योतिष आचार्य की उपाधि भाषा शुद्ध व्याख्या परिमार्जित प्रौढ़ और सरसखड़ी बोली प्रमुख रचनाएं अशोक के फूल कुटज विचार प्रवाह विचार और प्रतक कल्पता आलोक पर्व पुरस्कार पद्म भूषण साहित्य अकादमी पुरस्कार पद्म भूषण साहित्य अकादमी ये तुम्हारा संक्षिप्त परिचय हो जाएगा यह तुम्हारा संक्षिप्त परिचय हो जाएगा बेटा साहित्यिक परिचय यानी साहित्य में योगदान क्या
होगा आचार्य जारी प्रसाद द्विवेदी का हिंदी के उच्च स्तरीय ललित निबंधकारों में आचार्य द्विवेदी का प्रथम स्थान है आत्मा व्यंजना के साथ-साथ आत्मा आत्मा अभिवंजना के साथ-साथ सांस्कृतिक संस्कृति प्रकृति सुषमा लोक जीवन और समकालीन समस्याओं का मिलाजुला रस आस्वादन कराने में इनकी शैली अभिनव है। इनका उन्मुक्त व्यक्तित्व रहकर इनके निबंधों में विनोद की हिलोर उठाता चलता है। देश प्रेम और मानव प्रेम का व्यापक चित्र इनके साहित्य के पटल पर अंकित है। उनमें इतिहास, पुरातत्व, ज्योतिष, दर्शन और शास्त्रों का सुगमसार संग्रह है। आचार्य द्विवेदी की भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ उर्दू, फारसी एवं
अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों का प्रयोग हुआ है। इनकी शैलियों में विचारात्मक, गवेशणात्मक, व्यंग्यात्मक, सूत्रात्मक, भावात्मक, अलंकारिक, वर्णनात्मक आदि के रूप दिखाई पड़ते हैं। बेटा देखो अब मान लो तुमको पता है 1904 तो तुम 1904 लिख दो। अगर तुमको 17 दिसंबर 1904 पता है तो लिखो। नहीं पता है तो केवल सन लिख दो काम चल जाएगा। सर मेरा एडमिट कार्ड क्या हो गया? साहित्यिक हिंदी हो गया है। कोई बात नहीं साहित्य तुम सामान्य हिंदी पढ़ लोगे। साहित्यिक हिंदी में 80 से 85% नंबर तुम्हें मिल जाएगा। सामान्य हिंदी में जो सामान्य हिंदी का सिलेबस है वो साहित्यिक
हिंदी का लगभग 80% साहित्यिक हिंदी का सिलेबस सामान्य हिंदी में है। चलो अगला क्या है बेटा हरिशंकर परसाई जन्म 22 अगस्त 1924 जन्म स्थान जमानी होशंगाबाद संपादन वसुधा मासिक पत्रिका का अब देखो तुमसे सवाल ये भी पूछ सकता है कि वसुधा मासिक पत्रिका का संपादन किसने किया ऑब्जेक्टिव में पूछ लेगा बताना पड़ेगा ठीक है लेखन विधा व्यंग तुमसे पूछ लेगा सबसे प्रसिद्ध व्यंगकार कौन है ऑब्जेक्टिव में पूछ लेगा बताना पड़ेगा भाषा सरल प्रभावमई खड़ी बोली शैली व्यंग्यात्मक आत्मपरख प्रमुख रचनाएं सदाचार चार का ताबीज रानी नाथ बनी कहानी जैसे उनके दिन फिरे तब की बात और
थी यह भी लिख दो तब की बात और थी तुमसे पूछ लेगा सदाचार का ताबीज किसकी रचना है बताना पड़ेगा मृत्यु 10 अगस्त 1995 को हुई यह तुम्हारा संक्षिप्त परिचय है ठीक है साहित्यिक परिचय क्या होगा अब देखो इसका स्क्रीनशॉट तुम ले सकते हो जो जो मैंने इंपॉर्टेंट बताया चार मैंने इंपॉर्टेंट बताया तुम चार का स्क्रीनशॉट ले सकते हो चार का तुम स्क्रीनशॉट ले सकते हो। बाल्यावस्था में इन्होंने लेखन में रुचि लेना प्रारंभ कर दिया। अध्यापन के साथ-साथ साहित्य सृजन भी करते रहे। दोनों कार्य साथ-साथ ना चलने के कारण अध्यापन का कार्य छोड़कर साहित्य साधना
को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। इन्होंने जबलपुर में वसुधा नामक पत्रिका के संपादन में एवं प्रकाशन का कार्य प्रारंभ किया। लेकिन धन के अभाव में यह बंद करना पड़ा। इनके निबंध और व्यंग पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। इन्होंने नियमित रूप से धर्म युग और साप्ताहिक हिंदुस्तान के लिए अपनी रचनाएं लिखी। परसाई जी की शैली व्यंग प्रधान है। एक प्रकार से परसाई जी व्यंग लेखक ही हैं। इनके व्यंग के विषय सामाजिक और राजनीतिक हैं। बोलचाल के शब्दों, तत्सम और विदेशी शब्दों का चुनाव उत्तम है। कहां कौन सा शब्द अधिक चोट करेगा? कौन
सा शब्द बात को अधिक अर्थवत्ता प्रदान करेगा? इसका ध्यान प्रसाई जी को सदा रहता है। भाषा में व्याहिकता लाने के लिए इन्होंने उर्दू एवं अंग्रेजी के शब्दों का भी प्रयोग किया है। समझ गए? तो यह हरिशंकर प्रसाई का हो गया। कोई चिंता की बात नहीं है बेटा। कोई चिंता की बात नहीं है। देखो हम अपना पहला चरण पूरा करने के बहुत करीब हैं। हम अपना पहला चरण पूरा करने के बहुत करीब हैं। अपना पहला चरण अपना पहला चरण कंप्लीट करने के बहुत करीब हैं। तो सभी लोग बस बने रहो। अगला क्या है? अगला क्या है?
कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर। अगला क्या है बेटा? सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। जितने नए बच्चे हैं सेशन को लाइक कर लें और अपने WhatsApp की स्टेटस पर शेयर कर दो। सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर क्लास की लिंक को शेयर कर दो। मैं भी कर देता हूं। जो बच्चे छूट छाट गए हो आ जाएंगे। ठीक है? तुम भी कर दो। मैं भी कर देता हूं। आ जाओ आ जाओ चलो कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर इनका पूरा नाम है जन्म तिथि 29 मई 1906 जन्म स्थान देवबंद सहारनपुर मृत्यु 9 मई
1995 भाषा हिंदी है लेखन शैली वर्णनात्मक भावात्मक औरत्रात्मक शैली का प्रयोग किया है लेखन अह प्रमुख रचनाएं निबंध संस्मरण और रेखाचित्र प्रमुख रचनाएं बाजे पायलिया के घुंघरू अब गद्य में गद्य का विकास में कैसे सवाल पूछेगा? पाजे पायलिया के घुंघरू किसकी रचना है? दीप जले शंख बजे किसकी रचना है? माटी हो गई सोना किसकी रचना है? नई पीढ़ी के विचार किसकी रचना है? जिंदगी मुस्काई किसकी रचना है? आकाश के तारे किसकी रचना है? तो ये बताना पड़ेगा। कन्हैया लाल मिश्र की रचना है। साहित्य में योगदान देखते हैं। सभी लोग ध्यान से देखना। सभी लोग ध्यान
से देखना। साहित्य में योगदान देखते हैं। बेटा सभी लोग ध्यान से देखना। साहित्य में योगदान देखते हैं। चलो प्रभाकर जी का गद्य उनके जीवन से ढलकर आया है। उनकी रचनाओं में कालगत आत्मप्रकता, और संस्मरणात्मकता की प्रमुखता दिखाई देती है। इन्होंने एक गद्य को नए मुहावरे, नई लोकोक्तियां और नई सूक्तियां दी हैं। कविता इन्होंने नहीं लिखी। पर कवि की भावुकता और करुणा इनके गद्य में छलकती है। इसलिए इनके शब्द निर्माण में जगह-जगह चमत्कार है। वार्तालाप में विदता है और परिचित चित्रण में नाटकीयता है। इनके व्यक्तित्व की दृढ़ता, विचारों की सत्यता, अन्याय के प्रति आक्रोश, सहदयता और
उदारता, मानवीय करुणा की झलक इनकी रचनाओं में मिलती है। अपने विचारों में ये उदार, राष्ट्रवादी और मानवतावादी हैं। प्रभाकर जी की भाषा सामान्यत, तत्सम, शब्द प्रधान, शुद्ध और साहित्यिक खड़ी बोली है। इन्होंने उर्दू, अंग्रेजी आदि भाषाओं के साथ देश शब्दों एवं मुहावरों का भी प्रयोग किया है। सरलता, मार्मिकता, चुटीलापन, व्यंग और भावों को व्यक्त करने की क्षमता इनकी भाषा की विशेषताएं हैं। वर्णनात्मक भावात्मक नाटक शैली के रूप में इनकी रचना नाटक शैली के रूप में इनकी रचनाओं में देखने को मिलते हैं। ठीक है? अब मैंने शुरू में तुमको चार इंपॉर्टेंट बताया था। शुरू में चार
इंपॉर्टेंट बताया था। ये चारों मैंने करवा दिया। स्टार मार्क कर लो। स्टार मार्क कर लो। स्टार मार्क कर लो। गुरु जी दो नहीं करवाए। करवाऊंगा वो भी बिना करवाए नहीं जाऊंगा। लेकिन तुम लोग इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट करते हो ना? तो इंपॉर्टेंट बता दिया। चलो। प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी 1919 में पैदा हुए। आंध्र प्रदेश में पैदा हुए। आंध्र प्रदेश में विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। व्यक्तित्व कैसा प्रभावशाली था। प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत एवं तेलुगु से हुई। लेखन विधा हिंदी और तेलुगु भाषा साहित्य भाषा विषय और भाव के अनुरूप शैली विवेचनात्मक विवेचनात्मक आलोचनात्मक प्रमुख रचनाएं। अब सवाल
कैसे पूछेगा? गद्य का विकास में कैसे सवाल पूछेगा? सर नींद आ रही है। मुंह पे पानी मार के बैठो। नींद आ रही है। मुंह पर पानी मार के बैठो। नींद आ रही है इनको। सभी लोग जल्दी से तैयार हो जाओ। चलो चलो जल्दी से लेखन विधा हिंदी और तेलुगु भाषा साहित्य भाषा विषय और प्रभाव के अनुरूप शैली विवेचनात्मक गवेचनात्मक आलोचनात्मक प्रमुख रचनाएं साहित्य और समाज मेरे विचार दक्षिण की भाषाएं उनका साहित्य मृत्यु सन 2005 में आगे आ जाते हैं साहित्यिक परिचय श्री रेड्डी हिंदी साहित्य सेवा साधना एवं निष्ठा सराहनीय श्री रेड्डी की साहित्य सेवा साधना
एवं निष्ठा सराहनीय है तमिल तेलुगु कन्नड़ और मलयालम के साहित्य और इतिहास का सूक्ष्म विवेचन करने के साथ-साथ साथ हिंदी भाषा और साहित्य से भी इनकी तुलना करने में यह पर्याप्त रुचि लेते रहे हैं। हिंदीतर प्रदेश के निवासी होते हुए भी प्रोफेसर रेड्डी ने हिंदी भाषा पर अधिकार प्राप्त कर लिया है। इनकी भाषा परिमार्जित तथा सशक्त है। शैली विषय के अनुरूप ढल जाती है। भाषा को संपन्न बनाए रखने के लिए इन्होंने अपनी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ उर्दू, फारसी एवं अंग्रेजी भाषा के शब्दों का भी प्रयोग किया है। इनकी शैली के विवेचनात्मक
विवेचनात्मक प्रश्नात्मक आलोचनात्मक आदि रूप दिखाई पड़ते हैं। कठिन से कठिन विषयों को सरल एवं सुबोध ढंग से प्रस्तुत करना इनकी अपनी विशेषता है। प्रोफेसर रेड्डी ने हिंदी साहित्य को बड़ी आशाएं प्रोफेसर रेड्डी से हिंदी साहित्य को बड़ी आशाएं रही हैं। प्रोफेसर रेड्डी से हिंदी साहित्य को कैसी आशाएं रही हैं? बड़ी आशाएं रही हैं। चलिए, अगला क्या है? यह श्रेष्ठ विचारक, समालोचक एवं निबंधकार हैं। इनका व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यंत प्रभावशाली है। कई वर्षों तक यह आंध्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। यह वहां के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं अनुसंधान विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर भी
रहे हैं। इनके निर्देशन में हिंदी और तेलुगु साहित्य के विविध प्रश्नों के तुलनात्मक अध्ययन पर शोध कार्य भी हुआ है। ठीक है? अब मैंने तुमको पांच करवा दिया बेटा। पांच करवा दिया। मैं केवल एपीजे अब्दुल कलाम का छोड़ रहा हूं। तुम्हें याद केवल चार करने हैं। बाकी कोई नहीं करना। इनमें से कोई भी चार याद कर लेना तुम्हारे पेपर में आ जाएगा। और इस प्रकार मुझे घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमने पहला चरण पूरा कर लिया। हमने प्रथम चरण पूरा कर लिया। एक बार तुम लोग अपने लिए दिल रिएक्ट करोगे। एक
बार तुम सभी लोग अपने लिए दिल रिएक्ट करोगे। हमने पहला चरण बहुत अच्छे से पूरा कर लिया। सभी लोग सेशन को लाइक करेंगे। 4 घंटे पूरे हो गए। पहला चरण पूरा हो गया। कितनी अच्छी बात है। चलो अब हम लोग द्वितीय चरण पर करेंगे। चलेंगे काव्य साहित्य का विकास गद्यांश पद्यांश पर आधारित प्रश्न और कवियों के साहित्यिक परिचय की तरफ। चलो मूव करते हैं। आक्रमण बोलो। सभी लोग कमेंट सेक्शन में लिखेंगे आक्रमण। चलो काव्य साहित्य का विकास में कहां से सवाल आता है? तो बेटा काव्य साहित्य का विकास में केवल आधुनिक काल से तुम्हारे सवाल
आता है। आधुनिक काल में कई भाग हैं। जैसे भारतेंदु युग है, द्विवेदी युग है, छायावाद है, प्रगतिवाद है, नई कविता है। कौन-कौन तैयार है? कौन-कौन तैयार है? मजा आ गया दोस्तों। इसे कहते हैं दमदारी से क्लास करना। एक चरण पूरा कर लिया। ब्रेक रुक जाओ। मैंने क्या कहा था? 6 घंटे हो जाएंगे तब ब्रेक लेंगे। अरे यार इतना क्या कमजोर होना भाई? 3 घंटे पेपर देना 3 घंटे के बीच में ब्रेक लोगे। जब यहां घर पे 6 घंटे बैठे रहोगे तब तब ब्रेक मिलेगा तुमको वहां पे। कोई ब्रेक नहीं होता। ठीक है? कोई ब्रेक नहीं।
4 घंटे होने में अभी 40 सेकंड बाकी है। 4 घंटे होने में 40 सेकंड बाकी है। चलो शुरू करते हैं। चलो शुरू करते हैं। पहला सवाल तुम्हारे सामने है। विनय पत्रिका के रचयिता कौन है? सभी लोग बताओ। पहला सवाल तुम्हारे सामने है। बस जैसे ही 6 घंटे पूरे होंगे हम लोग 5 मिनट का ब्रेक लेंगे। चलो जल्दी से। पहला सवाल तुम्हारे सामने है। विनय पत्रिका के रचयिता कौन है? विनय पत्रिका के रचयिता कौन है? सूरदास, कबीर दास, तुलसीदास या मलिक मोहम्मद जायसी? तुलसीदास हैं विनय पत्रिका के रचयिता। कौन है बेटा? तुलसीदास हैं विनय पत्रिका के
रचयिता। अगला सवाल गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित विनय पत्रिका की भाषा क्या है? गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित विनय पत्रिका की भाषा क्या है? सभी लोग बताइए। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित विनय पत्रिका की भाषा क्या है? सब लोग बताएंगे। तो भैया वो ब्रज भाषा है। कौन सी भाषा है? ब्रज भाषा है। अगला सवाल छायावाद की रचना इसमें से कौन सी नहीं है? तो कामायनी छायावाद की है। जयशंकर प्रसाद ने लिखा है। कामायनी को किसने लिखा है? जयशंकर प्रसाद ने। छायावाद की है। साकेत यह मैथिलीशरण गुप्त की है। तो यह द्विवेदी युग में चली जाएगी। सरोज स्मृति नौका
विहार ये भी छायावाद की है। तो यह वाला सही हो जाएगा। यह वाला। अगला सवाल। अगला सवाल। महादेवी वर्मा की रचना कौन सी है? धूप के धान, पल्लव, सांदगीत या उर्वशी? तो उर्वशी है। उर्वशी है। कहे उर्वशी रहा हूं। टिक लगा सागी पर रहा हूं। तो घबराना नहीं है गाइज़। सबके साथ शेयर कर दो। सबके साथ शेयर कर दो। अगला सवाल। रामचंद्रिका रचना है। रामचंद्रिका किसकी रचना है? केशवदास की रचना है। रामचंद्रिका। रामचंद्रिका केशवदास की रचना है। यार एक चरण पूरा हो गया। यस। मजा आ जाएगा यार आज की क्लास का। बहुत मन था मुझे
12 घंटे की क्लास लेने का और मैंने बहुत मन से क्लास लगाया था। हां सागीत ही बताया हूं। वही टिक किया हूं उर्वशी मजाक कर रहा था। मेरा बहुत मन था कि एग्जाम से पहले 12 घंटे एक क्लास लगाऊंगा। अब वो क्लास चल रही है। मैं अपने सपने को जी रहा हूं। जो मैंने सोचा वही कर रहा हूं। चलो कामायनी में श्रद्धा सर किस सर्क के बाद आता है? कामायनी में श्रद्धा सर् किस सर्ग के बाद आता है बेटा? तो कामायनी में श्रद्धा सर्ग आशा सर्ग के बाद आता है। अष्टछाप के कवि नहीं है। अष्टछाप
का इनमें से कौन कवि नहीं है? नंददास चीत स्वामी भिखारीदास या सूरदास कौन अष्टछाप का कवि नहीं है? तो भैया नंददास भी है, छीतस्वामी भी है, सूरदास भी हैं। भिखारीदास अष्टछाप के कवि नहीं है। अगला सवाल रस कलश की रच किसकी रचना है या रस कलश कृति के रचयिता कौन है? रस कलश के रचयिता कौन है? आप सबको बताना है। सभी लोग बताइए। तो जिसकी पवन दूतिका है उसी का रस कलश है। जिसकी पवन दूतिका है उसी का रस कलश है। किसकी पवन दूतिका है किसका रस कलश है? अरे यार ये तो शायरी बन गई।
जिसकी पवन दूतिका है उसका रस कलश है। किसकी पवन दूतिका है किसका रस कलश है? जिसकी पवन दूतिका है उसी का रस कलश है। वाह क्या बात है। क्या बात है। वाह वाह दोस्तों बहुत अच्छी शायरी बना दी मैंने। चलो अगला सवाल। अगला सवाल। निम्नलिखित में से सच्चिदानंद हीनंद वात्सयनज्ञ का काव्य संकलन कौन सा है? सच्चिदानंद हीरानंद वाचनज्ञ जैसे ही कोई बहुत अतरंगी बड़ा प्यारा सा बड़ा सा नाम मिले टिक कर दो हरी घास पर क्षण भर बावरा अहेरी आंगन के पार द्वार इंद्रधनुष रौदे हुए से कितनी नाव में कितनी बार नदी के पार द्वार
बहुत बहुत प्यारी-प्यारी रचनाएं हैं अज्ञय की। अगला नदी के द्वीप के रचनाकार कौन है? फिर से नदी के द्वीप के रचनाकार अज्ञय ही हो जाएंगे दोस्तों। अगला परमाल रासो किस काल की रचना है? परमाल रासो किस काल की रचना है? बताइए। परमाल रासो किस काल की रचना है? परमाल रासो किस काल की रचना है? सभी लोग बताइए। परमाल रासो किस काल की रचना है बेटा? परमाल रासो तो भैया आदिकाल की रचना है परमाल रासो। परमाल रासो रासो काव्य है। रासो काव्य आदिकाल में लिखे गए। छायावादी काव्य की वृहत्रय वृहत्रय छायावादी काव्य की वृहत्रय के रचनाकार
नहीं है। महादेवी वर्मा। महादेवी वर्मा बेटा लघुत्रई में है। लघुत्तई में है। वृहत्रय में नहीं है। अगला सवाल पल्लव के रचयिता कौन है? पल्लव के रचयिता कौन है? सभी लोग बताएंगे। पल्लव के रचयिता कौन है? पल्लव के रचयिता कौन है भैया? पल्लव के रचयिता। पल्लव के रचयिता। तो पल्लव के रचयिता सुमित्रानंदन पंत हैं। अगला सवाल निम्न में से भारतेंदु युगीन अब ये हमारा दूसरा चरण चल रहा है। दूसरा चरण अपनी पीठ ठोक लो और जुड़ जाओ मेरे साथ। सेशन को सभी लोग लाइक कर लेंगे। जितने बच्चे हैं सभी लोग सेशन को बेटा लाइक कर लेना
क्योंकि अब हमें 20,000 लाइक चाहिए। निम्न में से भारतेंद युगीन कवि कौन है? तो भारतेंदु युगीन कवि हैं प्रताप नारायण मिश्र। अगला सवाल हिमालय से निम्न में से किसकी काव्यकृति है? हिमालय से। हिमालय से महादेवी वर्मा की है। हिमालय से महादेवी वर्मा की है। ठीक है? हिमालय से किसकी है बेटा? महादेवी वर्मा की है। अगला सवाल। अगला सवाल क्या है? निम्नलिखित में से मैथिली, शरणगुप्त की रचना है। कौन सी रचना है? कान, कुसुम, उत्तरा और दीपशिखा ये नहीं है। सिद्धराज उनकी रचना है। अगला सवाल निम्नलिखित में से छायावाद युगीन कवि कौन है? तो छायावाद युगीन
बेटा ना तो जगन्नाथ दास, रत्नाकर हैं, ना रामधारी सिंह, दिनकर, ना कबीर दास कौन है? जयशंकर प्रसाद है नहीं नहीं कर पाऊंगा चलो रीतिकालीन महाकाव्यात्मक कृति कौन सी है रीतिकालीन महाकाव्यात्मक कृति की बात हो रही है बेटा रीतिकालीन महाकाव्यात्मक कृति कौन सी है रीतिकाल की महाकाव्यात्मक कृति वैदेही वनवास साकेत या रामचंद्रिका अब वैदेही वनवास द्विवेदी युग में लिखा लिखा गया है अयोध्या उपाध्याय आर्य के द्वारा साकेत मैथिशरणगुप्त के द्वारा द्विवेदी युग में लिखा गया है। पृथ्वीराज रासो आदिका काल में लिखा गया है। अगर तुमको तीनों का काल पता है तुम्हें पता चल जाएगा कि रीदिकाल
की केवल रामचंद्रिका है। अगला सवाल निम्न में से कौन छायावादी कवि नहीं है? निम्न में से कौन छायावादी कवि नहीं है? तो भैया छायावादी कवि मैथिलीशरण गुप्त कैसे हो सकते हैं? ये तो द्विवेदी युग के हैं ना? ये तो द्विवेदी युग के हैं ना तो यही नहीं यही हो जाएगा। चलो सवाल का आंसर सबका आना चाहिए। कोई एक बच्चा ऐसा ना हो जो सवाल का आंसर ना कर रहा हो। कोई बच्चा ऐसा ना हो जो सवाल का आंसर ना कर रहा हो। बेटा और सेशन को लाइक करते रहो। हम लोग अपने दूसरे चरण में चल
रहे हैं। पहला चरण हमने बहुत सफलतापूर्वक पूरा किया और यकीन मानो गद्य का विकास से ना तुम्हारा क्वेश्चन गलत होगा ना गद्यांश से गलत होगा और ना साहित्यिक परिचय से। अभय वरदान देता हूं तुम्हें। जाओ और सफलता मिलेगी तुम्हें। कोई रोक नहीं सकता। यूपी बोर्ड नहीं इस सिलेबस से तुम्हारे बनाने बनने वाले पेपर कोई भी बना दे तुम्हारा सवाल नहीं गलत होगा जब तक मैं यहां खड़ा हूं। ठीक है? चलो तार सप्तक का प्रकाशन वर्ष सब जानते हैं। 1943 में हुआ और यहीं से प्रयोगवाद की शुरुआत हुई। यहीं से प्रयोगवाद की शुरुआत हुई। प्रकाशन किसने
किया? अज्ञेय ने किया। सभी लोग ध्यान देना। अगला सवाल निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि कौन है? भूषण, सुमित नंदन पंत बिहारी और अज्ञेय। जब अज्ञेय का नाम लिखा है तो यही तो टिक करोगे ना। चलो अगला सवाल। नई कविता काव्य संकलन के संपादक कौन थे? नई कविता जो काव्य संकलन प्रकाशित हुआ उसके संपादक कौन थे? कोई मुझे बताएगा? कोई वीर योद्धा मुझे बताएगा कि नई कविता काव्य संकलन क्या गिर गया? कौन थे बताइए? डॉ. जगदीश गुप्त, रासूप चतुर्वेदी और यह सवाल तुम्हारा तुम्हारे सिलेबस में आया हुआ है। ये सवाल तुम्हारा तुम्हारे सिलेबस में आया हुआ
है बेटा। ये सवाल तुम्हारा तुम्हारे सिलेबस में आया हुआ है। ठीक है? अगला आगे चलते हैं। आए आगे चलते हैं। प्रगतशील लेखक संघ की स्थापना कब हुई? बस वही। 1936 और 38 में थोड़ा कंफ्यूजन होगा तुमको। 1936 और 38 में कंफ्यूजन होगा। लेकिन कंफ्यूज मत होना। मैंने तुम्हें बताया है कि 1936 में क्या हुआ? प्रगतिशील लेखक संघ प्रगतिवाद की शुरुआत हुई और प्रगतिवाद की शुरुआत इस संघ की स्थापना से ही हुई। तो 1936 ही टिक करोगे ना। 1938 क्यों करोगे? चलो अगला। निम्नलिखित में से कौन छायावादी कवि है? क्योंकि कई बार आप देखते हो। ये
लिखा हुआ मिल जाता है कि छायावाद की समाप्ति 1938 में हुई। नहीं। अरे नहीं भाई तो चला जाएगा फिर आएगा पागल हो क्या निम्नलिखित में से कौन छायावादी कवि है बताइए निम्नलिखित में से कौन छायावादी कवि है बताइए सूर्यकांत त्रिपाठी निराला भूषण बिहारी या रामधारी सिंहकर कौन छायावादी कवि है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ही तो हैं। अगला उपमान मैले हो गए हैं। किसकी काव्य पंक्ति है? उपमान मैले हो गए हैं। किसकी काव्य पंक्ति है भाई? तुम लोग कुछ खातेवाते रहना। पता लगे भूख लग जाए और तुम्हारे घर वाले मुझे फोड़ डालें। चलो उपमान मैले हो गए
हैं। किसकी काव्य पंक्ति काव्य पंक्ति है बताइए। उपमान मैले हो गए हैं। किसकी काव्य पंक्ति है? उपमान मैले हो गए हैं। इन प्रतीकों के देवता कर गए हैं कूच। यह अज्ञय की पंक्तियां हैं। प्रयोगवाद को परिभाषित करती हुई अभिनव मनुष्य काव्यांश के रचनाकार कौन है? अभिनव मन अभिन पुरवा, उर्वशी और अभिनव मनुष्य रामधारी सिंह दिनकर हो जाएगा। कामायनी किस युग की रचना है? कामायनी महाकाव्य किस काल की कृति है? कितने बच्चे इस सवाल का जवाब दे सकते हैं? वो दिल रिएक्ट करें। कितने बच्चे इस सवाल का जवाब दे सकते हैं? यह छायावादी युग की रचना
है। किसने लिखा है? लेखक का क्या नाम है? जयशंकर प्रसाद। जयशंकर प्रसाद। अगला क्या है? रीतिकाल की प्रमुख विशेषताएं प्रकृति चित्रण, ईश्वर वंदना, युद्धों का सजीव वर्णन, मुक्तक काव्य रचना। क्या है? बताइए। सभी लोग कमेंट करेंगे। बेटा देखो हमारा पहला चरण बहुत सफलतापूर्वक पूरा हुआ। कोई हिलना मत। सारे चरण यहीं पर बैठे-बैठे पूरा करेंगे। क्या है? रीतिकाल में युद्ध हुए ही नहीं। रीतिकाल में युद्ध हुए ही नहीं। रीतिकाल में मुक्तक रचनाएं हुई। घनानंद जैसे कवियों ने खूब लिखा। निम्नलिखित में से कौन सा ग्रंथ रासो परंपरा का श्रेष्ठ महाकाव्य है? तो पृथ्वीराज रासो। रासो परंपरा का
सबसे बड़ा और सबसे श्रेष्ठ है पृथ्वीराज रासो। अगला क्या है बेटा? तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की है। ब्रज भाषा में, भोजपुरी में, अवधि में या खड़ी बोली में? 6 घंटे पूरे होते ही 5 मिनट का ब्रेक दे दूंगा। ब्रज में नहीं है भाई। अवधी में है। परिमल के रचनाकार कौन है? परिमल के रचनाकार कौन है? बताइए। परिमल के रचनाकार कौन है? 20,000 लाइक पूरा हुआ कि नहीं पूरा हुआ? परिमल के रचनाकार कौन है बेटा? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं। अगला सवाल कबीर के दोहों को नाम से जाना जाता है। कबीर के दोहों को किस नाम
से जाना जाता है? बताइए। कबीर के दोहों को किस नाम से जाना जाता है? तो उनकी तीन चीजें हैं। साखी, शब्द, रमयनी। साखी में सारे दोहे संग्रहित हैं। तो साखी हो जाएगा। अगला सवाल निम्नलिखित में से अयोध्या, उपाध्याय, आर्यों द्वारा निम्नलिखित महाकाव्यात्मक रचना कौन सी है? अगर तुम क्लास छोड़ के जा रहे हो, तुम अपना नुकसान कर रहे हो। 18 फरवरी को पेपर देना है बेटा बच नहीं सकते उससे नहीं दोगे तो अगले साल दोगे अच्छा पेपर हो जाए इसके लिए पढ़ लो रोज रोज तो पढ़ने को कहता नहीं हूं साल भर तो मैंने 12
घंटे क्लास ली नहीं ठीक है तो उनका कौन सा उनकी हो जाएगी वैदेही वनवास उनकी महाकाव्यात्मक रचना है त्रिवेदी युग के कवि कौन है केदारनाथ अग्रवाल सर्वेश्वर दयाल सक्सेना रामनरेश त्रिपाठी जी कौन है द्विवेदी युग का लेखक? तो आप लोगों को बताना है द्विवेदी युग का रामनरेश त्रिपाठी हैं। अगले पर चलते हैं। साकेत की नायिका कौन है? यशोधरा, उर्मिला, राधा या द्रोपदी? साकेत की नायिका कौन है? सभी लोग बताओ। कोई मुझे बता सकता है साकेत की नायिका कौन है? कितने बच्चे बता सकते हैं मुझे कि साकेत की नायिका कौन है? साकेत की नायिका बेटा उर्मिला
है जिनके पति लक्ष्मण हैं। चलो जल्दी-जल्दी करेंगे। दिनकर को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला? दिनकर को किस रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला? सभी लोग बताएंगे। दिनकर को किस रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है? सभी लोग बताएंगे। उर्वशी पर मिला है। अगला सवाल निम्नलिखित में से किस काव्य कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला? निम्नलिखित में से किस काव्य कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला? देखो तुमको उत्तर साफ दिखाई देगा। किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला? चिदंबरा कितनी नाव में कितनी बार? उर्वशी या प्रिय प्रवास? तो प्रिय प्रवास पर नहीं मिला है भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार।
अगला वेदना की प्रतिमूर्ति किस कवयत्री को कहा जाता है? वेदना जो पीड़ा में हो। मैं नीर भरी दुख की बदरी मैं नीर भरी दुख की बदरी महादेवी वर्मा अगला सवाल तीसरे तार सप्तक का प्रकाशन कब हुआ? पहले का 1943 में दूसरे का 1951 में तीसरे का 1959 में। तो 1959 कर दो यहां पर। तीसरे का प्रकाशन 1959 में हुआ। साकेत महाकाव्य के रचयिता कौन है? कितने लोग इस बात को जानते हैं? साकेत महाकाव्य के रचयिता के बारे में कितने लोग जानते हैं? साकेत महाकाव्य के रचयिता के बारे में कितने लोग जानते हैं? बताओ। साकेत महाकाव्य
के रचयिता के बारे में कितने लोग जानते हैं? बताओ। चलो साकेत महाकाव्य के रचयिता कौन है बेटा? मैथिलीशरण गुप्त हैं। अगला सवाल। कौन सी रचना रामधारी सिंह दिनकर की नहीं है? रामधारी सिंह दिनकर हुस् हुस्न नहीं भाई कौन सी रचना रामधारी सिंह दिनकर की नहीं है हमें पढ़ातेपढ़ते बहुत चित्र उनकी नहीं हुंकार रसवृति और रेणुका उन्हीं की है। एकांतवासी योगी किसकी रचना है? एकांतवासी योगी किसकी रचना है? सब लोगों को बताना है। एकांतवासी योगी मैथिलीशरण गुप्त की है, श्रीधर पाठक की है, बालमुकुंद गुप्त की है या फिर भारतेंदु हरिश्चंद्र की है? किसकी है? तो ये
श्रीधर पाठक की है। किसकी है? श्रीधर पाठक की। अगला सवाल मैथिलीशरण गुप्त की काव्य कृति है त्रिकाल संध्या, इत्यालयम, सिद्धराज, नीलकुसुम। मैथिलीशरण गुप्त की इसमें से कौन सी काव्य कृति है? कौन सी रचना इसमें से मैथिलीशरणगुप्त की है? बताइए। त्रिकाल, इत्यालयम, सिद्धराज या नीलकुसुम? तो सिद्धराज उनकी रचना है। अगला सवाल, अनामिका के रचनाकार कौन है? अनामिका के रचनाकार कौन है? बताइए। अनामिका के रचनाकार कौन है? अज्ञय, निराला, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत। अनामिका के रचनाकार कौन है? बताइए। अनामिका बिना नाम वाली कौन है? तो निराला है। अनामिका के रचनाकार निराला हैं। बेटा अगला सवाल निम्न में
से कौन सा ग्रंथक्तिकाल का है? कौन सा ग्रंथ इसमें सेक्तिकाल का है? आप लोगों को बताना है। कौन सा ग्रंथ इसमें सेक्तिकाल का है? आप लोगों को बताना है। कौन सा ग्रंथक्तिकाल का होगा बेटा? पृथ्वीराज रासो विनय पत्रिका साकेत कामायनी तो विनय पत्रिका है यह आदिकाल का है यह और यह द्विवेदी युग का है आधुनिक काल मतलब और छायावाद आधुनिक काल का है क्लियर है अगला सवाल हिंदी साहित्य का इतिहास लिखने वाले सर्वप्रथम विद्वान कौन हैं? हिंदी साहित्य का इतिहास सबसे पहले किसने लिखा बेटा? तो गारसा द तासी ने लिखा है। हिंदी साहित्य का प्रथम
उपन्यास गारसा द तासी ने लिखा है। अब पहली बार तुम पढ़ रहे होंगे गारसा द तासी किताब खोल के देखते तो उसमें मिल जाता तुमको। अगर तुम किताब खोल के देखते तो तुम्हें मिल जाता गारसतासी के बारे में सब कुछ। चलिए आगे बढ़ते हैं दोस्तों। आगे बढ़ते हैं दोस्त। अगले सवाल पे चलते हैं। हां 15, 16, 17 भटकना नहीं है। आपको तीन दिवसीय महारिजन योजना में आ जाना है। तीन दिवसीय महवीजन योजना में आ जाना है। यहीं पर आपका कल्याण हो जाएगा। मलिक मोहम्मद जायसी को किस धारा का कवि माना जाता है? तो मलिक मोहम्मद
जायसी भक्तिकाल में निर्गुण और सगुण और निर्गुण में दो एक प्रेमाश्रय और ज्ञानाश्रय तो ये प्रेमाश्रय को ही सूफी काव्यधारा कहते हैं। तो सूफी काव्यधारा के थे। नौका विहार कविता किस कृति से अवतरित है? नौका विहार कविता शांत स्निग्ध ज्योत्सा उज्जल पलक अनंत नीरव भूतल शत सैया पर दुग्ध धवल तन्वंगी गंगा अग्री स्मिरल लेटी है शांत क्लांत निश्चल कहां से है? गुंजन से है बेटा। चलो अगला सवाल। दूसरा सप्तक के कवि कौन है? इसमें से देखो तार सप्तक जो प्रकाशित होता था तीन ठो हुआ उसमें दूसरे सप्तक से इनमें से कौन सा कवि दूसरे सप्तक
में शामिल था? तो एक कविता है आज पानी बह रहा है। बहुत पानी बह रहा है। आज पानी बह रहा है। बहुत पानी बह रहा है। चलिए अगले सवाल पर चलते हैं। बेटा। छायावाद युग का समय कब से कब तक माना जाता है? तो छायावाद का समय माना जाता है बेटा 1918 छायावाद छायावाद आया है आधुनिक काल में और आधुनिक काल में 1850 शुरू होता है तो 1900 से 1922 ये द्विवेदी युग का हो जाएगा 1918 से 1938 ये हो जाएगा सी वाला 1918 से 1938 ये हो जाएगा छायावाद का चलो झरना के रचयिता कौन
है? झरना के रचयिता कौन है? झरना झरना आंसू झरना इन सब के रचयिता कौन है? इन सब के रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। अगला सवाल प्रिय प्रवास महाकाव्य के रचयिता कौन है? अब ये तो तुमको नहीं पता होगा। ये इसलिए तुमको नहीं पता होगा क्योंकि नौका विहार वाला जो पाठ है वो इन्हीं का लिखा हुआ है। तुम कहां इनके बारे में जानते होगे? जानते हो क्या? जानते हो क्या? प्रिय प्रवास महाकाव्य के रचयिता प्रिय प्रभास महाकाव्य के रचयिता अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिओध हैं बेटा अगला सवाल हिंदी साहित्य में किस काल को श्रृंगार काल कहा जाता है
तो हिंदी साहित्य में रीतिकाल को श्रृंगार काल कहा जाता है पहला चरण हमने बहुत सफलतापूर्वक पूरा किया है कौन-कौन मेरे दूसरे चरण में मेरा साथ देने के लिए तैयार है एक बार कमेंट सेक्शन में दिल रिएक्ट करो कौन-कौन मेरे दूसरे पहला चरण पूरा किया दूसरे चरण में साथ दो टॉपर बना दूंगा जमीन से उठाकर आसमान में बिठा दूंगा दोस्तों ज्ञानाश्रय भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं कौन है ज्ञानाश्रय भक्ति शाखा का प्रतिनिधि कवि सभी लोग बताइए कौन है ज्ञानाश्रय भक्ति शाखा का प्रतिनिधि कवि आप बताइए मुझे सभी लोग बताएंगे ज्ञानाश्रय भक्ति शाखा का प्रतिनिधि कवि
कौन है तो देखो निर्गुण सगुण निर्गुण में ज्ञानाश्रय और प्रेमाश्रय ज्ञानाश्रय में सबसे प्रमुख कबीर हैं प्रेमाश्रय में बिहारी कृष्णाश्रय में सूरदास और रामाश्रय में तुलसीदास मैथिलीशरण गुप्त की महाकाव्यात्मक कृति कौन सी है? मैथिलीशरण गुप्त की महाकाव्यात्मक कृति के बारे में बताइए आप। तो उनकी महाकाव्यात्मक कृति साकेत है। जहां से आपका कैकई का अनुताप लिया गया है। कैकई का अनुताप कोई किसी को याद है कैकई का अनुताप कुछ भी एक भी लाइन एक भी लाइन आपको याद हो गई कई काउंट की तदंतर बैठी सभा उटज के आगे नीले वितान के तले दीप बहु जागे टकटकी
लगाए नैन सुरों के थेवे परिणाम उत्सुकन भयाों के थेवे उद्फुल करौदी कुंज वायु रहरह करती थी सबको पुलक पूर्ण महम कर वह चंद्रक था वहां चांदनी वैसी प्रभु बोले गिरा गंभीर नीर रहने दी जैसी। चलिए कबीर दास प्रमुख कवि हैं। कबीर दास किस धारा के प्रमुख कवि हैं भैया? तो निर्गुण काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं। अगला सवाल रीतिबद्ध काव्य के कवि कौन है? रीतिबद्ध काव्य के कवि कौन है? बताइए रीतिबद्ध के कवि कौन है? तो कौन रीति में बंधा हुआ था? केशवदास रीति में बंधे हुए थे। रीतिकालीन कवि इसमें से रीतिकालीन कवि कौन है? जगनिक,
विद्यापति, जगन्नाथ दास, रत्नाकर नहीं मतिराम है बेटा। अगला सवाल उर्वशी के रचनाकार कौन है? ये सवाल तो तुमको पता ही नहीं हो सकता। ये सवाल तुम्हें नहीं आता। ये सवाल तुम्हें नहीं आता। ये इसका उत्तर तुम नहीं दे पाओगे। इसका उत्तर तुम नहीं दे पाओगे बेटा। इसका उत्तर तो पॉसिबल ही नहीं है तुमसे। मैं ही बता देता हूं। रामधारी सिंह दिनकर जानते हो क्या? जानते हो? अगर जानते हो तो कमेंट सेक्शन में यस लिखो ना भाई। चलो चैलेंज कर दो मुझे। चलिए अयोध्या से उपाध्याय आर्य की रचना कौन सी है? अयोध्या से तुम जानते ही
नहीं हो इसके बिना इसका ये भी नहीं पता होगा तुम्हें। ये तो बिल्कुल नहीं पता होगा। अगर पता है तो कमेंट सेक्शन में यस लिखो। कामायनी नहीं भैया जयशंकर प्रसाद की है। वैदेही वनवास। हां भैया अयोध्या से उपाध्याय हरिऔद की वैदेही वनवास है चलो वही है ही वही नई कविता के कवि कौन है इसमें से इसमें से नई कविता का कवि कौन है तो बहुत क्लियर है अज्ञेय तो नहीं है रामधारी सिंह दिनकर भी नहीं है सुमित्र नंदन पंत भी नहीं है तो नरेंद्र शर्मा ही तो बचे यही हो जाएंगे छायावाद की मुख्य विशेषता क्या
थी क्या थी छायावाद की मुख्य विशेषता तो छायावाद में प्रकृति का सूक्ष्म वर्णन किया गया है। कैसे और वह मुख पश्चिम के वम बीच जब गिरते हो घनश्याम अरुण रवि मंडल उनको भेद दिखाई देता हो छवि क्या ही सुंदर लिखा है। प्रकृति का वर्णन चेहरे की सुंदरता सूर्य और बादलों और उसकी किरण के माध्यम से ऐसा अद्भुत मैंने कहीं नहीं देखा। आदिकाल की रचना कौन सी है? अखरावट कुमार रासो छतसा दीप्सिका कुमार रासो भैया रासो साहित्य आदिकाल में ही लिखा गया है। भूख लग गई है अकेले ही खा रहे हैं। मैं कहां कुछ खा रहा
हूं भैया? मैं पानी पी रहा हूं इतनी देर से। मैं 12 घंटे बाद अन्न ग्रहण करूंगा। रीतिकालीन रचना कौन सी है बेटा? रीतिकालीन रचना कौन सी है? प्रिय प्रवास नहीं ये द्विवेदी युग की है। पृथ्वीराज रासो ये आदिकाल की है। गीतावली ये गीतावली कब की है?क्तिकाल की है। बिहारी सत सही हो जाएगा रीतिकाल की रचना। आगे बढ़ो। बिहारी लाल ने प्रमुख रूप से किस छंद में रचना की है? तो बिहारी लाल ने बहुत ज्यादा दोहे लिखे हैं। तो प्रमुख रूप से दोहों में रचना की है। ये कोई नहीं लिखेगा। अब हमने प्रथम चरण बहुत अच्छे
से पूरा किया है। दूसरा चरण हम लोग एक-एक क्वेश्चन करके पूरा करेंगे। भैया ना कोई भागेगा ना हटेगा। झगड़ा हो जाएगा। मारपीट दंगा फसाद समझ लो पटकी पटका निम्न में से रीतिकाल के किस कवि ने वीर रस में रचना की है तो रीतिकाल के किस कवि ने वीर रस में रचना की है भूषण ने छत्रसाल दशक शिवराज विजय साज चतुरंग सैन अंग में उमंग धारी सरजा शिवाजी जंग जीतन चलत हैं भूषण भनत नाद बिहद नगारन के नदी नद मद गबरन के रलत हैं क्या ही लिखा है ठीक है रीतिकाल में लिख रहे थे जब सब
सौंदर्य लिख रहे थे ये वीर लिख रहे थे। ऐसे ही होता है जब कुछ लोग अपने निब्बा निब्बी बाबू सोना को खाना खिलाने में लगे होंगे। कुछ लोग किस डे को किस कर रहे होंगे। हग डे को हग कर रहे होंगे। प्रॉमिस डे को प्रॉमिस कर रहे होंगे। रोज डे को रोज दे रहे होंगे। तो एक वीर योद्धा अपने छत के किसी कोने में चिराग की रोशनी में बैठा किताब खोले हुए बोर्ड परीक्षा के आगमन की तैयारी कर रहा होगा और 18 फरवरी को चीर फाड़ के पेपर फेंक देगा। चलो। प्रयोगवादी काव्यधारा के कवि कौन
है? प्रयोगवादी काव्यधारा के कवि। प्रयोगवाद में कौन है? सुमित्रा नंदन पंत हो ही नहीं सकते छायावाद के हैं। महादेवी हो ही नहीं सकती छायावाद के हैं। निराला हो ही नहीं सकते छायावाद के हैं। तो बसते तो गिरजा कुमार माधुरी है भैया। बसते तो गिरजा कुमार माथुरी है ना। चलो कई बार एलिमिनेशन भी काम कर जाता है। नौका विहार कविता का संबंध किस नदी से है? शांत स्निग्ध ज्योतना उज्जल अपकंत नीरव भूतल सहकत सैया पर दुग धवल तनवंगी गंगा ग्रीस स्मिरल लेटी है शांत क्लांत निश्चल तापस बाला गंगा निर्मल सच मुख से दीपित मृदु करतल कहीं
कोई नदी का नाम आया? आया नदी का नाम ना गंगा। तापस बाला गंगा निर्मल। तो कविता पढ़ोगे सब हो जाएगा। नई कविता का आरंभ कब से माना जाता है? किस सन से नई कविता का? तो नई कविता को साठोत्तरी कविता कहते हैं। यानी 1960 के बाद वाली कविता नई कविता है। उसी के पहले थोड़ा अकविता का दौर आया था। अकविता मतलब बहुत बेकार कविता। चलो। गोस्वामी तुलसीदास के बचपन का नाम क्या था? तुकाराम आत्मारा नाम सीताराम राम बोला क्या था उनके बचपन का नाम कोई कहीं नहीं जाएगा ठीक है सेशन को शेयर कर दो सब
लोग लाइक कर लो 20000 पूरे हुए कि नहीं कितने लाइक पूरे हो गए मुझे एक बार कमेंट करके बताओ कितने लाइक पूरे हो गए कितने लाइक पूरे हो गए ना ना ना करो गोस्वामी तुलसीदास के बचपन का नाम क्या है? राम बोला है। अगला मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य संग्रह कौन सा है? मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य संग्रह मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य संग्रह कौन सा है? बेटा बताओ। मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य संग्रह भारत भारती है। जल्दी से उसे 20,000 कंप्लीट करो। हिंदी काव्य के किस कालखंड को स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह कहा
जाता है? स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह किस काल को कहा जाता है? बताइए। तो ये छायावाद को कहा जाता है बेटा। ऐसे सवाल तुम्हारे बोर्ड एग्जाम में आते हैं। आए हैं 2024 में ही ये सवाल पूछा गया है। निम्न में से कौन कवि प्रगतिवादी नहीं है? इसमें से कौन सा कवि प्रगतिवादी नहीं है? आपको बताना है कमेंट करके। कौन प्रगतिवादी नहीं है नागार्जुन? यह तो है ही। बहुत दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास। बहुत दिनों तक का कुतिया सोई उसके पास। बहुत दिनों तक चूल पड़ी छिपकलियों की गस्त कुछ ऐसा है। केदारनाथ अग्रवाल
भी हैं। केदारनाथ सिंह भी है। त्रिलोचन शास्त्री नहीं है। जगन्नाथ दास रत्नाकर की कृति कौन सी है? अरे भैया यह तो उद्धव शतक है। तुम्हारे साहित्यिक हिंदी वालों कितने बच्चे यहां साहित्यिक हिंदी के हैं? जरा कमेंट करो एक बार। छिपे बैठे हो तुम लोग। तुम्हारे में उद्धव है नहीं उद्धव शतक भेजे मन भावन के उद्धव के आवन की सुधि ब्रज गावन में आवन जब लगी कहे रत्ना करे ग्वालिन की झोर झोर दौड़ दौड़ नंद पोरी आवन तब लगी और उझकी उझक पद कंजनी पे पंजनी के पैरों के पंजों पर उछलउछल कर उझकी उझक कज प
उझकी उझक पद उझकी उझक की पद कंजन पे पंजन के पे की पे पाती छाती छह छब लगी हमको लिखो है कहां हमको लिखो है कहां हमको लिख्यो है कहां कहां सब लगी सामान्य हिंदी वालों देखो तुम्हारे बीच में ये जासूस बैठे हुए हैं साहित्यिक हिंदी वाले ये भी चुपके-चुपके अपना थोड़ा सा सिलेबस पूरा कर ले रहे हैं भाईचारा बढ़ाओ दिल भेज दो इन लोगों को तार सप्तक के प्रवर्तक कौन है तार सप्तक के प्रवर्तक भैया चिल्ला चिल्ला के बताया हूं। प्रयाग नारायण मिश्र सुमन राजे या धर्मवीर भारती नहीं नहीं अज्ञय बाबा हैं। सच्चिदानंद बादशाह
अज्ञय प्रयोगवाद के प्रवर्तक कौन है? कौन प्रयोगवाद का प्रवर्तक है? बेटा बताइए कौन प्रयोगवाद का प्रवर्तक है? सभी लोग जल्दी से लाइक करके उसे 20,000 20,000 पहुंचाओ। प्रयोगवाद का प्रवर्तक कौन है भैया? तो प्रयोगवाद के प्रवर्तक अज्ञेय हैं। अगला सवाल पृथ्वीराज रासो के रचनाकार कौन है? तुलसीदास कौन है? तुलसीदास हैं क्या? नहीं चंद्रबरदाई है बेटा। पृथ्वीराज रासो के रचनाकार चंद्रवरदाई हैं। चंद्रवरदाई पृथ्वीराज चौहान पर लिखा है इन्होंने। आधुनिक युग की मीरा किसे कहा जाता है? आधुनिक युग की मीरा मैं नीर भरी दुख की बदली। स्पंदन में चिर निस्पंद बसा क्रंदन में आहत विश्व हसा नैनों
में दीपक से जलते पलकों से निर्झरनी मछली मैं नीर भरी दुख की बदली चलिए निम्नलिखित में से छायावाद उत्तर काल के कवि कौन है छाया छायावादोत्तर छायावाद के बाद वाला जो युग आया उसके कवि कौन है? भारतेंदुच हो ही नहीं सकते। मैथिली शरण गुप्त हो ही नहीं सकते। इसी में 50-50 का देख लो भैया। इसी में 50-50 का देख लो। कोई बता दो मुझे। कोई बता दो मुझे। राम त्रिपाठी नहीं है बेटा। शिव मंगल सिंह सुमन है। अगला सवाल नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना की थी। किसने की थी? यह गद्य वाले में भी आया था।
पद्य वाले में भी आ रहा है। क्यों? क्योंकि गद्य और पद्य में नागरी प्रचारणी तो सेम ही है ना? वहां कविता वाले भी हैं, कहानी वाले भी हैं। निम्नलिखित में से मैथिलीशरण गुप्त की रचना नहीं है। कौन सी रचना मैथिली शरण गुप्त की नहीं है? बताइए निम्नलिखित में से कौन सी रचना मैथिलीशरण गुप्त की नहीं है? बताइए भाई। इत्तलेलम नहीं है। किसकी है ये? यह भी बताओ हितेलम किसकी रचना है? रीति मुुक्त काव्यधारा के कवि कौन है? रीति मुुक्त काव्यधारा के कवि कौन है भैया? इसमें से अपने मन से नहीं। इसमें सेनापति बिहारी वृंदा घनानंद
घनानंद है दादा। चलो अगला सवाल। रणकता नामक स्थान यार तुमको सब दे दूंगा। चिंता मत करो। बस भटकना मत। 15, 16, 17 या तीन दिन 18 को सुबह 5:00 बजे। ठीक है? रणकता नामक स्थान पर किसका जन्म हुआ? भैया? रुणकता में सूरदास का जन्म हुआ है। रीतिकाल का अन्य नाम क्या है? श्रृंगार काल है। रीतिकाल का अन्य नाम। यह नाम तो पता ही होगा सबको। सभी लोग सेशन को लाइक करते रहो। सेशन को शेयर करते रहो और डरो मत। मैं क्लास तुम्हें पढ़ाने के लिए नहीं लेता। तुम्हारा डर दूर करने के लिए लेता हूं। साहित्यिक
हिंदी है कि सामान्य हिंदी? सामान्य हिंदी है ये। कवि पंत समाजवाद की ओर उन्मुख हुए। कवि पंत किस रचना से समाजवाद की ओर उन्मुख हुए? आहा ग्राम में जीवन भी क्या है? क्यों ना उसे सब लोग सराहें। आहा ग्राम्य जीवन भी क्या है? ग्राम्या से निहार कृति निहार नीजा सांधगीत महादेवी वर्मा की है बेटा कामायनी में सर्गों की संख्या कितनी है? 15 15 सर ₹21 डाल दो। ₹21 डाल दूं? क्यों? क्यों ₹2 डाल दूं? बेटा सुनो हमने पहला चरण बहुत सफलतापूक पूरा किया है। हम काव्य के भी सारे एमसीक्यू करेंगे। फिर पद्यांश पर जाएंगे। फिर
कवियों के साहित्यिक परिचय करेंगे। जल्दबाजी में भागो मत इधर-उधर। ठीक है? आज के बाद तुमसे मैं इतनी लंबी क्लास करने को नहीं कहूंगा। लेकिन ये अंतिम क्लास है जो इतनी लंबी हो रही है और बहुत जरूरी क्लास है। हर जगह कभी-कभी अपने जीवन में थोड़ा संघर्ष कर लिया करो। ठीक है? समझ रहे हो? हर जगह वो आसानी मत खोजो कि बस दाल भात मिल जाए लपेटो समेटो खा लो निकल लो समझ रहे हो हां बस जो कह रहा हूं मानो और सभी लोग लाइक कर लो 20000 पूरा करो सुमित्रानंद पंत ने नौका विहार कविता की
रचना किस स्थान पर रहकर की थी काला कांकर ये प्रतापगढ़ में है काला कांकर ये प्रतापगढ़ में एक राजभवन है काले पत्थरों का बना हुआ हिंदी साहित्य के आदिकाल की रचना नहीं है हिंदी साहित्य के आदिकाल की रचना नहीं है देखो पृथ्वीराज रासो परमाल रासो विद्या एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड विद्यापति पदावली विद्यापति कब हुए ये आदिकाल औरक्तिकाल के बॉर्डर पे उन्हें आदिकाल का माना जाता है भक्तिकाल का नहीं विद्यापति तो हुए हैंक्तिकाल और रीतिकाल के उस पर पद्मावत यहां पर सही होगा बाकी मैं इस क्वेश्चन पद्मावत इसका आंसर तो
पद्मावत सही है। कठिन काव्य का प्रेत किसे माना जाता है? केशवदास को कठिन काव्य का प्रेत रामचंद्रिका के रचयिता पेपर लीक कब करेंगे? 18 फरवरी को सुबह 5:00 बजे। लेकिन अगर जो भी तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना ज्वाइन नहीं करेगा उसको वहां कुछ समझ में नहीं आएगा। तुम्हें लगता है कि 10 मिनट में तुम्हें पेपर मिल जाए। मैं कह रहा हूं अगर तुम्हारा 3:00 बजे 2:00 बजे से पेपर है। अगर तुम्हें 12:00 बजे भी पेपर मिल जाए ना तुम पूरा पेपर नहीं सॉल्व कर पाओगे। साहित्यिक हिंदी वाले पढ़ सकते हो बेटा? बिल्कुल पढ़ सकते हो।
लेकिन मैं पूरा पेपर पढ़ा रहा हूं सामान्य हिंदी वालों का। अब देखो जैसे मान लो यह साहित्यिक हिंदी का सिलेबस है। उसी में से इतना सिलेबस लेकर के सामान्य हिंदी बना दिया गया है। तो अगर साहित्यिक हिंदी वाले पढ़ने आएंगे तो इतना उनका कवर हो जाएगा। बाकी संधि समास वगैरह अलग से कवर करना पड़ेगा। प्रसाद का काव्य प्रवृत्त निवृत्त मिश्रित है। अथवा प्रसाद की कृति जिसके नायक मनु है। इन दोनों का उत्तर क्या होगा? कामायनी ही तो होगा। मनु इसी की तो है। कौन तुम संस्कृत जल ने तीर तरंगों से फेंकी मणि एक कर रहे
निर्जन का चुपचाप प्रभा की धारा से अभिषेक। मधुर विश्रांत और एकांत जगत का सुलझा हुआ रहस्य। चलिए आगे बढ़ते हैं। छायावाद युगीन कवि है। कौन है? छायावाद युगीन कवि अयोध्या चक्र उपाध्याय हर प्रताप नारायण मिश्र जयशंकर प्रसाद श्रीधर पाठक। कौन है छायावाद युगीन? छायावाद युगीन कवि कौन है भैया? यह द्विवेदी युग के यह भारतेंदु युग के जयशंकर प्रसाद छायावाद युगीन है। अगला सवाल प्रेमाश्रय सूफी काव्यधारा का संबंध किससे है? प्रेमाश्रय सूफी सूफी काव्यधारा निर्गुण भक्तिधारा की है। निर्गुण भक्तधारा में दो शाखाएं प्रेमाश्रय और ज्ञानाश्रय। प्रेमाश्रय सूफी काव्यधारा उसी में है। अगला सवाल पद्मावत का रचना
काल है। क्या है? पद्मावत का रचनाल कोई मुझे बता दे। कोई तुम में से यह बता दे कि पद्मावत का रचना काल क्या है? तो मैं उसे उसका तुरंत ₹20 उसके अकाउंट में भेज दूं। पद्मावत का रचनाकाल बता दो तुम। हे वीर योद्धा हे वीर योद्धा पद्मावत का रचना काल बता दो। पद्मावत का रचना काल का क्या है बेटा? पद्मावत आदिकाल में लिखी गई है। नहीं नहीं लिखी गई है।क्तिकाल में सूफी काव्यधारा में जायसी ने लिखा है पद्मावत। सरोज स्मृति के रचयिता निराला। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने सरोज स्मृति लिखी है। अपनी बेटी के निधन पर
यह एक शोक गीत है। सरोज स्मृति क्या है? एक शोक गीत है। धन्य में पिता निरर्थक था। बड़ी-बड़ी अद्भुत लाइनें हैं इसमें। निम्नलिखित कवियों में से कौन छायावादी कवि नहीं है? नागार्जुन, सुमितानंद पंच, जय शंकर प्रसाद महादेव वर्मा। नागार्जुन छायावादी नहीं है। नागार्जुन प्रगतिवादी कवि हैं। ध्यान रखना इस बात का। चांद का मुंह टेढ़ा है के रचनाकार कौन है? चांद का मुंह टेढ़ा है। एक कविता संग्रह है। ये लिखा है मुक्तिबोध ने। और जब तुम यूपीएससी की तैयारी करने जाओगे और हिंदी साहित्य ऑप्शनल लोगे तो इसमें की एक कविता तुम्हें पढ़नी पड़ेगी। ब्रह्म राक्षस और
बिहार पीसीएस की तैयारी करने वाले जो बच्चे हैं अब तो उनका ऑप्शनल हट गया। पहले हिंदी साहित्य ऑप्शनल में उनकी एक कविता थी अंधेरे में वो भी इसी कविता संग्रह की थी। तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना 15, 16, 17 को चलेगी। 15, 16, 17 और 18 को सुबह 5:00 बजे तुमको वरदान दिया जाएगा। इसी का निचोड़ आ जाना। मुक्तिबोध की यह रचना है। आगे बढ़ते हैं। रामधारी दिनकर को उनकी काव्यकृत उर्वशी पर कौन सा पुरस्कार मिला था? तो रामधारी सिंह दिनकर को उनकी काव्यकृत उर्वशी पर कौन सा पुरस्कार मिला? बताइए। ज्ञानपीठ की मंगला प्रसाद पारितोषिक
कौन सा मिला? जो बता दोगे वही लगा दूंगा। उर्वशी पर कौन सा पुरस्कार मिला बेटा? उर्वशी पर कौन सा पुरस्कार मिला? चलो तो उनको कौन सा पुरस्कार मिला था बेटा? ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। अगले सवाल पर चलते हैं। अगला सवाल क्या है? समन्वय पत्रिका के संपादक कौन है? समन्वय पत्रिका के संपादक कौन है? सभी लोग बताएंगे। समन्वय पत्रिका के संपादक कौन है? जीवन परिचय कौन सा याद करें? मैंने तुम्हें लेखक वाला बता दिया। लेखक में चार याद करने हैं। कवि वाला अभी इसके बाद बताऊंगा। हमारा दूसरा चरण चल रहा है ना? तो दूसरे चरण में
पहले काव्य के विकास के क्वेश्चंस फिर पद्यांश पर आधारित प्रश्न और फिर कवियों का साहित्यिक परिचय। चलो समन्वय पत्रिका के संपादक बताओ कौन है? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं। अगला सवाल हरिऔध का प्रिय प्रवास है। संयोग पर आधारित महाकाव्य नहीं। शांत रस पर आधारित खंड काव्य नहीं। विप्रलंब श्रृंगार पर आधारित। विप्रलंब मतलब वियोग श्रृंगार। राधा और कृष्ण का वियोग है उसमें। सच्चिदानंद हींद वात्सयनज्ञ किस सप्तक में संग्रहित है? सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयनज्ञ किस सप्तक में संग्रहित हैं? बताइए किस सप्तक में? तार सप्तक में, दूसरा, तीसरा, चौथा सप्तक तार सप्तक में। ठीक है? पहले वाले में पलासमन काव्य
संकलन के प्रणेता कौन है? पलाशवन काव्य संकलन के प्रणेता कौन है? बताइए। पलाशवन काव्य संकलन संकलन के प्रणेता कौन है? यह सवाल तुम्हारा पूछा गया था 204 में, 25 में, 19 में और 2001 में। चलो पलासमन काव्य संकलन के प्रणेता कौन है भैया? 2001 में भी पेपर होता था। तो नरेंद्र शर्मा हैं और वही सवाल घूम-घूम के पूछ रहा है तुमसे। किस महाकाव्यात्मक कृति में 12 सर्ग हैं? किस महाकाव्यात्मक कृति में 12 सर्ग हैं? बताइए किस महाकाव्यात्मक कृति में 12 सर्ग हैं? कामायनी, प्रिय प्रभास, साकेत, वैदेही वनवास किस में 12 सर्ग हैं? मुझे लगता है
साकेत में 12 सर्ग हैं। हां बिल्कुल साकेत में क्योंकि कामायनी में तो 15 सर्ग हैं। साकेत में 12 सर्ग होंगे। सभी लोग आंसर करेंगे बेटा। अभी हम आधे पर भी नहीं पहुंचे हैं। हमें इसको पूरा करना है। हमें इसको पूरा करना है। अभी आधे पर भी नहीं पहुंचे हैं। सारे क्वेश्चन करेंगे तब आगे जाएंगे। यह मत सोचना कि आधे पे छोड़ के भाग जाऊंगा तुम्हारे कहने से। छायावाद की प्रमुख विशेषता क्या है? छायावाद की प्रमुख विशेषता क्या है? स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह अभी बताया हूं। अगला सवाल दिल्ली हिंदी का प्रथम कवि कौन माना
जाता है? दिल्ली का प्रथम नहीं हिंदी का प्रथम कवि कौन माना जाता है? सरहपा। किसने कहा था ऐसा? राहुल सांकृत्यायन ने। राहुल सांकृत्यायन ने कहा कि हिंदी का प्रथम कवि सरापा है। अगला सवाल भारत भारती के रचनाकार कौन है? भारत भारती के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताइए। भारत भारती मैथिलीशरण गुप्त की रचना है बेटा। भारत भारती ऐसी रचना है जिसने उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दिलवाई। अगले सवाल पर चलते हैं। चिदंबरा के रचनाकार कौन है? चिदंबरा के रचनाकार कौन है? आपको बताना है। तो चिदंबरा किसकी रचना है? किसकी है? मैथिलीशरण गुप्त की। नहीं। सुमित्रानंदन पंत
की रचना है। चिदंबरा चिदंबरा सुमित्रानंदन पंत की रचना है। अगला सवाल हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए बीज वपन काल नाम दिया। किसने दिया? हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए बीज वपन काल नाम किसने दिया? सभी लोग मुझे बताइए। बीज वपन काल नाम किसने दिया? आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने। कितने लाइक हो गए भाई? कितने लाइक हो गए? मुझे कमेंट करके बताओ। चलो हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए बीज विपन काल नाम किसने दिया हजारी प्रसाद महावीर प्रसाद द्विवेदी ने दिया। बिहारी लाल ने मुख्य रूप से किस छंद में रचना किया है? बिहारी लाल ने
मुख्य रूप से किस छंद में? तो दोहा छंद में किया है। मैंने बिहारी सत्स आपको बताया ही। अगला भवानी प्रसाद मिश्र कवि के रूप में संग्रहित हैं। भवानी प्रसाद मिश्र दूसरा सप्तक में है। अब मुझे लगता है मेरा गला खराब होने वाला है क्योंकि उस पे खिंचाव आने लगा ना अष्टछाप कवियों का संबंध है। भक्त भक्त भक्त भक्त भक्त भक्त भक्त भक्त भक्त भक्तिकाल की किस शाखा से? अष्टछाप के कवियों का संबंधि काल की कृष्ण भक्ति छाप शाखा से है। इसमें आठ कवि थे जो कृष्ण की भक्ति का पद गाया करते थे। इसमें से रीति
मुुक्त कवि कौन है? इसमें से रीति मुुक्त कवि कौन है? आपको बताना है। इसमें से रीति मुक्त कवि कौन है? तो मैं अभी आपको बता चुका हूं कि घनानंद रीति मुुक्त कवि हैं। अच्छा रामचंद्र शुक्ल ने जिस काल को रीतिकाल कहा उसे श्रृंगार काल नाम दिया या रीतिकाल को श्रृंगार काल नाम किसने दिया? सर प्लीज बता दो। एक बच्चा पूछ रहा है सर क्लास कब से चल रही है? सुबह 10:00 बजे से चल रही है। बेटा लेकिन दूसरा चरण अभी-अभी शुरू हुआ है। तो तुम लोग इसको कर रीतिकाल को श्रृंगार काल नाम दिया। रीतिकाल को
श्रृंगार काल नाम किसने दिया? बताइए। रीतिकाल को श्रृंगार काल नाम किसने दिया? सभी लोग बताइए। क्या भाई? मुकेश सर कहां गए? नहीं भाई। रीतिकाल को श्रृंगार काल नाम किसने दिया बेटा? हां केक आ रहा है तुम्हारा। विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने दिया। अगला क्या है? श्रृंगार और वात्सल्य रस के अमर कवि कौन है? श्रृंगार और वात्सल्य रस के अमर कवि सूरदास हैं। अगला सवाल तुम्हारा क्या है? अगला सवाल झांसी की रानी कविता किसकी है? झांसी की रानी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। अगर गला आज ही खराब हो गया तो अगले चार दिन
क्लास कैसे लूंगा दोस्तों? तो धीरे-धीरे बोलूंगा। झांसी की रानी कविता किसकी है? तो झांसी की रानी कविता बेटा सुभद्रा कुमारी चौहान की है। मेरी आवाज आ रही है ठीक से सबको? सुमित्रानंदन पंत को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। किसके लिए मिला? कला और बूढ़ा चांद के लिए। चिदंबरा के लिए, लोकायतन के लिए। किसके लिए मिला था? तो चिदंबरा के लिए मिला था। चिदंबरा के लिए मिला था। अगला सवाल अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की रचना कौन सी है? अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की रचना कौन सी है? साकेत पल्लव प्रिय प्रवास केक वापस हटा दीजिए। चलो अगला सवाल
तो पैसा मत दीजिए उसको बेटा देखो तुम लोग दुआ करो कि मेरी आवाज खराब ना हो छायावाद के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं जयशंकर प्रसाद कामायनी इनकी रचना है ध्यान रखिएगा अगला क्या है अमीर खुसरो रचना के रचनाकार कौन है अमीर खुसरो रचना के रचना अमीर खुसरो किस रचना के रचनाकार हैं ये होना चाहिए तो खलिकबारी इनकी रचना है क्या है खलिक बारी इनकी रचना है। अगला सवाल निम्न में से छायावादी कवि नहीं है। कौन निम्न में से छायावादी कवि नहीं है? निम्न में से कौन छायावादी कवि नहीं है? बताइए। तो सुमितानंद पंत महादेव वर्मा
हैं। रामकुमार वर्मा मैथिली शरण गुप्त द्विवेदी युग के हैं। बेटा मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के हैं। ध्यान रखिएगा। मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के हैं। उसके बाद कविता विवर्धनी सभा। कविता वर्धिनी सभा के संपादक संपादक कौन रहे? भारतेंदु हरिश्चंद्र कवितावर्धिनी सभा के संपादक भारतेंदु हरिश्चंद्र रहे। इन्होंने इसके लिए सभा बनाई थी कि लोगों को कवियों को कविता लिखने में आसानी हो। गंगावतरण काव्यकृत के रचयिता कौन है? ये भी गंगावतरण के रचयिता भी जगन्नाथ दास रत्नाकर ही हैं। जैसे उद्धव शतक है वैसे गंगावतरण का भी कुछ हिस्सा साहित्यिक हिंदी में है। अगला सवाल रामधारी सिंह दिनकर की
रचना नहीं है। कौन सी रचना रामधारी सिंह दिनकर की नहीं है? रस्मरथी चक्रवाल या सुनहरे सहवाल या परशुराम की प्रतीक्षा तो ये तीनों तो उनकी है। सुनहरे सहवाल उनकी नहीं है। अगला सवाल सभी लोग हर एक सवाल पर ध्यान देंगे। हर एक सवाल पर ध्यान देंगे क्योंकि बेटा कोई भी सवाल तुम्हारे एग्जाम में आ सकता है। ठीक है? अज्ञेय को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। किस रचना पर मिला? कितनी नावों अब देखो। अज्ञय की रचनाओं के नाम देखो। अज्ञय की रचनाओं के नाम देखो। अज्ञय की रचनाओं के नाम। कितनी नाव में कितनी बार? अरिओ करुणा प्रभामय
आंगन के पार द्वार ऐसा कोई घर आपने देखा है पर। ठीक है? ऐसा कोई घर आपने क्या नाम है इनकी कविताओं के? किस पे मिला? कितनी नाव में कितनी बार पर मिला? अगला सवाल सूरसागर का वर्ण विषय क्या है? अर्थात सूरसागर जो रचना रची गई उसको किस ग्रंथ को आधार बनाकर रचा गया? वह है श्रीमद् भागवत। अगला सवाल अज्ञय द्वारा संपादित दूसरा सप्तक का प्रकाशन वर्ष है। क्या है दूसरे सप्तक का प्रकाशन वर्ष? सभी लोग बताइए क्या है दूसरे सप्तक का प्रकाशन वर्ष? सभी लोग बताएंगे क्या है दूसरे सप्तक का प्रकाशन वर्ष? बताइए। 1951 है
बेटा। पहला 1943 दूसरा है 1951 तीसरा 1959 बिहारी सत्सई में दोहों की संख्या कितनी है? बिहारी सत्सई में दोहों की संख्या कितनी है? तो बिहारी सत्सई में दोहों की संख्या 713 है। ये सवाल इसीलिए पूछा पूछा जाता है कि सत्सई माने 700 हुआ। अब सत्सई पूछ लेंगे तो बच्चा 700 टिक करेगा तो नंबर काट लेंगे। लेकिन तुम मुझसे पढ़े हो तुम 700 13 पे टिक करना। ठीक है? सुमित्र नंदन पंत को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था किस पर? लोकायतन पर नहीं। चिदंबरा पर नहीं। कला और बूढ़ा चांद पर। सुमित्रानंदन पर को सुमित्रानंदन पंत को साहित्य
अकादमी किस पर मिला? कला और बूढ़ा चांद पर मिला। मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के हैं बेटा। मैथिलीशरण गुप्त कब के हैं? द्विवेदी युग के हैं मैथिली शरणगुप्त। चलो अगले पर चलते हैं। परशुराम की प्रतीक्षा काव्य कृति है। परशुराम की प्रतीक्षा काव्य कृति है? गजानन माधव मुक्तिबोध की रामधारी सिंह दिनकर की, गिरजा कुमार माथुर की या धर्मवीर भारती की? तो रामधारी सिंह दिनकर की है? परशुराम की प्रतीक्षा किसकी है बेटा? रामधारी सिंह दिनकर की है। अगला सवाल मैथिलीशरण गुप्त की रचना में राष्ट्र प्रेम की भावना परिलक्षित होती है। वही रचना जिससे इनको राष्ट्रकवि का सम्मान मिला।
कौन सी है? भारत भारती। भारत भारती इनकी शुरुआती रचनाओं में से है जिनसे इनको बहुत सम्मान मिला। चलिए सभी लोग। हां हां बिल्कुल Instagram शेयर कर देना मेरा। हां ऋषि सर विद्या कुल ऋषि सर विद्या कुल मेरा Instagram है बेटा और इस पर भी 1 लाख फॉलोवर पूरे होने वाले। Instagram 1 लाख पर कुछ देता है क्या बटन वटन? Instagram भी बटन वटन दे तो मंगवा लूं फिर ला के तुम लोगों को दिखाऊं लेकिन ये देता ही नहीं है। ठीक है। आदिकाल को वीरगाथा का नाम वीरगाथा का नामांकरण दिया। आदिकाल को वीरगाथा का नाम किसने
दिया? आदिकाल को वीरगाथा काल का नामकरण दिया। किसने दिया? आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने। मैथिली शरण गुप्त की रचना इसमें से कौन सी है? साकेत है। प्रिय प्रवास अयोध्या उपाध्याय रियोध की है। कामायनी किसकी है? किसकी है? कामायनी कमेंट करके बताओ। कामायनी किसकी है? कमेंट करके बताओ। सर जी जब आप थक जाओगे तो बोल देना। मैं सभी लोगों को पढ़ा दूंगा। अच्छा बहुत अच्छी बात है। सारे सवाल तैयार कर लो बेटा। और देखो हर चीज रटनी नहीं है। अगर एक दो बार भी तुम्हारे आंखों के सामने से गुजर गया ना तो एग्जाम में तुम्हें याद रहेगा।
भक्ति आंदोलन का श्रेय किसे दिया जाता है? भक्ति आंदोलन का श्रेय रामानुजाचार्य को दिया जाता है। बिल्कुल सही है। प्रयोगवाद को नई कविता की संज्ञा दी है। प्रयोगवाद को नई कविता की संज्ञा किसने दी है? अज्ञेय ने दी। प्रयोगवाद को नई कविता की संज्ञा दी है अज्ञेय ने। अगला चिंतामणि कवि हैं। चिंतामणि रीतिसिद्ध है। रीति मुक्त हैं। रीति रहित हैं। क्या है चिंतामणि? बताइए। रीतिबद्ध वर्ग के कवि हैं। चिंतामणि रीति गुरुवर जयशंकर प्रसाद। क्या हो गया? तुम्हारे स्कूल में क्या हुआ? हम मैं थकूंगा नहीं बेटा। थकूंगा नहीं। मैं थकूंगा नहीं। मैं रुकूंगा नहीं। मैं चलता
रहूंगा। अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। चलो। सुमित्रानंदन पंत की रचना नहीं है? कौन सी रचना है इसमें? सुमित्रानंदन पंत की नहीं है। कौन सी रचना इसमें से ऐसी है जो सुमित्रानंदन पंत की नहीं है? तो भैया पल्लव उनकी वीणा उनकी लोकायतन उनकी रसवंती उनकी नहीं है। ध्यान रखना आंसू के रचनाकार कौन है? पहली नजर में बता दो। जयशंकर प्रसाद आंसू के रचनाकार हैं। ध्यान रखो। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो बेटा। कितने हो गए? कितने हो गए? 20,000 पूरे हुए कि नहीं? 20,000 पूरे हुए कि नहीं? अभी 17,000 हैं यार। लाइक करो भाई। लाइक करो। चलो
अगला। साहित्य लहरी के रचनाकार कौन है बेटा? साहित्य लहरी के रचनाकार कौन है? किसने साहित्य लहरी की रचना की है? सभी लोग बताएंगे। साहित्य लहरी के रचनाकार कौन है? कबीर दास, सूरदास, तुलसीदास या नाभादास? तुम बताओ जल्दी से कमेंट में लिखो। सूरदास हैं। अगला सवाल। यामा रचना है किसकी है? जयशंकर प्रसाद की, सुमितान पंत की? अच्छा सुमित है नहीं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रामकुमार वर्मा की महादेव वर्मा की यामा किसकी है निहार निरजा यामा सांदगीत ये सब महादेव वर्मा की रचनाएं हैं अगले सवाल पर चलते हैं रामधारी सिंह दिनकर की रचना कौन सी है परशुराम
की प्रतीक्षा ऐसा कोई घर आपने देखा है पृथ्वी पुत्र स्वर्ण किरण तो भैया रामधारी सिंह दिनकर की परशुराम की प्रतीक्षा ही ऐसा कोई घर आपने देखा है यह अज्ञेय की रचना है ठीक है। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। चलो बहुत तेजी से तुम्हारे लिए बहुत तगड़ा केक आ रहा है। यशोधरा के रचनाकार कौन है? यशोधरा के रचनाकार कौन है? बेटा बताइए यशोधरा के रचनाकार कौन है? सभी लोग बताएंगे यशोधरा के रचनाकार कौन है? अयोध्या सिंह उपाध्याय, हरिऔद, मैथिली शरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर। कौन है यशोधरा का रचनाकार? तो यशोधरा का रचनाकार द्विवेदी युग
का एक आदमी है जिसका नाम है मैथिलीशरण गुप्त। चलो आगे बढ़ो। सुमित्रानंदन पंत की रचना कौन सी नहीं है? कौन सी नहीं है? पल्लव शरणधूल ग्रंथ या रसवंती बताइए। सर मैं आपका YouTube चैनल सब्सक्राइब कर रहा हूं। कर लो कर लो सभी लोग कर लो। जितने नए बच्चे हैं YouTube सब्सक्राइब कर लो और सभी लोग लाइक कर लो सेशन को। सुमित्रानंदन पंत का सुमित्रानंद पंत की रचना कौन सी नहीं है? बताइए बताइए। सुमित्रानंदन पंत की रचना कौन सी नहीं है? बेटा सुमित्रानंदन पंत की रचना कौन सी नहीं है? रसवंती। अगला सवाल क्या है? अयोध्या से
उपाध्याय आर्य की रचना है। रस कलश युगांतर ग्राम्या हुंकार। तो ना तो युगांतर ना ग्राम्या ना हुंकार। रस कलश उनकी रचना है। अगला सवाल क्या है? कला और बूढ़ा चांद के रचनाकार कौन है? तो सुमित्रानंदन पंत हैं कला और बूढ़ा चांद के रचनाकार। सभी लोग जानते हैं इस बात को। एक बार सभी लोग कमेंट सेक्शन में दिल रिएक्ट करोगे। बहुत अच्छी स्पिरिट से आप लोग पढ़ रहे हो बेटा। बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हो। मजेदार बात यही है ना कि ये मेहनत बस दो दिन बाद फल लाने वाली है। अब इस मेहनत को फल लाने
में बहुत दिन नहीं बचा है। सभी लोग सेशन को लाइक करो। सभी लोग तुरंत सेशन को लाइक करो। एक बार सभी लोग एक बार तुरंत सेशन को लाइक करो करो फट से करो 18000 तुरंत लाइक पूरे करो फिर 1 लाख की तरफ चलेंगे निम्न में से कौन मैथिलीशरण गुप्त की एक अनुदित रचना है एक ऐसी रचना जिसका अनुवाद मैथिलीशरण गुप्त ने किया है एक ऐसी रचना जिसका अनुवाद मैथिलीशरण गुप्त ने किया है बताइए कौन सी रचना है कौन सी ऐसी रचना है जिसका अनुवाद मैथिली शरण गुप्त ने किया है तो वो मेघनाथ वध है। अगली
रचना क्या है? भारतेंदु युगीन रचना इसमें से कौन सी है? कौन सी रचना भारतेंदु युग की है? तो भारतेंद युग की रचना आनंद अरुणोदय नहीं है। कामायनी नहीं साकेत नहीं। 12 मासा भारतेंदु युग की रचना है। अगला सवाल अज्ञेय द्वारा संपादित सप्तकों की संख्या बेटा। तार सप्तक से एक सवाल जरूर आएगा। तार सप्तक से एक सवाल फिक्स है आना। एक सवाल तार सप्तक से फिक्स है आना। समझ लो तो उस सवाल को पकड़ लो, कर लो, सॉल्व कर लो, जो करना है कर लो। अज्ञय द्वारा संपादित सप्तकों की संख्या क्या है? तो अज्ञय द्वारा कुल
सप्तक कितने प्रकाशित किए गए बेटा? तो कुल सप्तक तीन प्रकाशित किए गए। तीन की ज्यादा चर्चा है। चार भी किए गए थे लेकिन तीन की ज्यादा चर्चा है। तीन बहुत लाइमलाइट में रहा। अज्ञय जी को निम्न में से किस वाद का प्रवर्तक माना जाता है? तो तार सप्तक के प्रकाशन से उन्होंने शुरू किया प्रयोगवाद। अगला सवाल कवि हरिऔध का रस कौन सा है? सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो। सभी लोग एक बार अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा के चले आओ। जो बच्चे भटक गए हो, जो बच्चे क्लास से चले गए हो
वो फिर से आ जाए। एक बार सभी लोग बुला लाओ सबको और सेशन को शेयर कर दो। बेटा आज की क्लास ना रोज नहीं हो पाएगी। अब हो गया। आ गया बोर्ड एग्जाम। ठीक है? आ गया बोर्ड एग्जाम। अब समय नहीं है। कवि हरिऔध का रस कौन सा है? कवि हरिऔध का रस कौन सा है? सभी लोग सेशन को शेयर करो। कवि हरिऔध का बेटा श्रृंगार रस है। श्रृंगार रस वियोग श्रृंगार उसमें आता है। चित्रधारा काव्य की भाषा क्या है? चित्रधारा जो काव्य है उसकी भाषा क्या है? सभी लोग बताएंगे। चित्रधारा काव्य की भाषा क्या
है? अवधी है, ब्रज है, कन्नौजी है या भोजपुरी है? अवधी है, ब्रज है, कन्नौजी है या भोजपुरी है? तुम लोग यार थक बहुत जल्दी जाते हो भाई। अच्छा एक बात बताओ क्या 33 नंबर से काम चल जाएगा? 33 नंबर से काम चल जाए तो छोड़ दो। रहने दो। एक दिन अगर तुमको एक विषय को देखना पड़े देना पड़े तो तुम लोग नहीं दे पाते हो। यार करना तो पड़ेगा भाई। ऐसे नहीं चलेगा। ऐसे नहीं हो पाएगा कि तुम लोग एक दिन भी ना दे पाओ और उम्मीद करो सबसे बेस्ट नंबर लाने की। ऐसे नहीं चलेगा।
ठीक है। चलो। हिंदी साहित्य को आदिकाल के लिए सिद्ध सामंत काल नाम दिया है। किसने दिया आदिकाल को? सिद्ध हिंदी के लिए आदिकाल को सिद्ध सामंत काल नाम किसने दिया? बताइए किस आदमी ने हिंदी सिद्ध सामंत काल नाम दिया? राहुल सांकृत्याय ने नहीं। रामचंद्र शुक्ल ने नहीं। रामकुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य के आदिकाल को सिद्ध सामंत काल कहा है। मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित कृति कौन सी है? इसमें से प्रदक्षिणा, दान लीला, अंतिमा या रसकलस कौन सी है? तो उन्होंने लिखा है बेटा प्रदक्षिणा। सर जी आपने 12 मासा वाली रचना गलत है। अच्छा 12 मासा
वाली रचना गलत बता रहे हो तुम। कहां है बारामासी? अभी बताता हूं तुम्हें। मूड फोड़ता हूं तुम्हारा। यह वाली रचना तुम करो। भारतेंदुगी रचना की बात कर रहे हो। यह भारतेंदु रचना की बात कर रहे हो। इसमें बारामासा गलत है। कामायनी छायावाद की है। साकेत कब की है? बताओ जरा मुझे साकेत कब की है? बताओ। साकेत कमेंट करके बताओ। ठीक। छायावाद की है। अच्छा भाई साहब आनंद अरुणोदय बद्रीनायण चौधरी प्रेमघन की है। हां यार सही कहा तुमने लव यू आनंद अरुणोदय किसकी है? बद्रीनाथ चौधरी प्रेमघन की। तो यह तो भारतेंदु की रचना हो जाएगी। यू
आर राइट। यू आर राइट। यू आर राइट बेटा यू आर राइट। यू आर राइट। तो बिल्कुल सही है। ठीक है। चलो बहुत सही। बहुत सही। चलिए। अज्ञय द्वारा संपादित सप्तकों की संख्या कितनी है? सच्चिदान धीर। अच्छा ये तो हो गया। चलो। मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित रचना कौन सी है? मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित रचना कौन सी है? मैं मतलब जोश में आया था कि डांटूंगा। पता चला नहीं मैंने सही कर दिया। एक सवाल तो गलत हो ही जाता है दोस्तों जोश में समझ रहे हो एक सवाल भी ना गलत हो तो फिर क्या पढ़ाएगा और चलिए
मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कृति कौन सी है मैथिलीशरण गुप्त ने कौन सी रचना लिखी है तो प्रदक्षिणा चलिए आगे बढ़ते हैं अगला सवाल हिंदी साहित्य के किस काल को स्वर्ण युग कहा जाता है तो बेटा भक्तिकाल को हिंदी साहित्य के भक्तिकाल को उसका स्वर्ण युग कहा जाता है समझ लीजिए हिंदी साहित्य के भक्तिकाल को उसका स्वर्ण युग कहा जाता है। वीरगाथा की प्रमुख विशेषता क्या थी? वीरगाथा काल में प्रमुख विशेषता यह थी कि वहां पर युद्धों का सजीव वर्णन किया था किया जाता था। छपक छप्पक तले चले तलवार ऐसा कुछ निम्नलिखित में से कौन प्रेमाश्रय
शाखा के कवि नहीं है? तो प्रेमाश्रय शाखा के कवि प्रेमाश्रय के सूरदास नहीं है बेटा। सूरदास किसके हैं? कृष्णाश्रय के हैं। निर्गुण में दो शाखाएं ज्ञानाश्रय प्रेमाश्रय। प्रेमाश्रय में मंजन कुदवन जायसी। ठीक है? कौन सी रचना अज्ञेय की नहीं है? बावरा अहरी तलयम सुनहरे शैवाल रेणुका रेणुका अज्ञेय की नहीं है। रेणुका रामधारी सिंह दिनकर की है। रेणुका अज्ञेय की नहीं है। ठीक है? समझ में आ गया आपको? समझ समझ? चलिए। रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित ग्रंथ कौन सा है? तो धूप के धान उनका नहीं है। कालजई नहीं है। चित्रधारा नहीं है। हुंकार रामधारी सिंह दिनकर
का ग्रंथ है। हुंकार हुंकार क्या है? रामधारी सिंह दिनकर का ग्रंथ है। जयशंकर प्रसाद कृत कामायनी किस प्रकार का काव्य है? जयशंकर प्रसाद कृत कामायनी किस प्रकार का काव्य है? बताइए। महाकाव्य है भैया। निम्नलिखित में से रीतिबद्ध रीतिबद्ध धारा के कवि कौन है? निम्नलिखित में से रीतिबद्ध धारा के कवि कौन नहीं है? कौन नहीं है? है। रीतिबद्ध धारा के कवि कौन नहीं है? तो इसमें से जो द्विजदेव हैं, यह रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि नहीं है। सभी लोग आंसर सही करेंगे। अगर तुम चाहते हो बस करिए बस करिए। बेटा अगर तुम्हें तुम्हें देखो यार तुम्हारी जितनी
क्षमता हो उतने नंबर लाने तक पढ़ लो। जहां से तुम्हारी क्षमता छोड़ दे कि भैया यहां से मैं नहीं हो पाएगा मेरे से। मैं 33 ही लाना चाहता हूं। वहां से चले जाओ या फिर से सेशन को शेयर कर दो और लोगों को बुला लो। देखो मैंने पहला चरण बहुत आराम से पढ़ाया है। पहला चरण पूरा अच्छे से कंप्लीट किया है तो यहां भी पूरा कंप्लीट करूंगा। छोड़ के नहीं जाऊंगा। और मुझे लगता है थोड़ा सा बचा हुआ है। आधे घंटे और लगेगा बस। और आधे घंटे के लिए मैं एमसीक्यू करवाना छोडूंगा तो नहीं। ठीक
है? यह नहीं कूद-कूद के नहीं पढ़ाता हूं मैं। जिस दिन पढ़ाता हूं पूरे मन से पूरा सिलेबस पढ़ाऊंगा। ठीक है? चलो। जयशंकर प्रसाद की काव्यकृति इसमें से कौन सी है? कौन सी रचना जयशंकर प्रसाद की है? अनामिका, चित्रधारा कौन सी रचना है उनकी? अनामिका, चित्रधारा, ग्राम्या या दीपशिखा? तो चित्र उनकी है जयशंकर प्रसाद की। अगला क्या है? कविता में चार चांद लगाने वाली शब्द शक्ति कौन सी है? व्यंजना। व्यंजना या लक्षणा? दोनों में से एक बताओ। अच्छा तुम लोग यह जानते ही नहीं हो। खैर जाने दो। लक्षणा कह दो। अभिधा व्यंजना लक्षणा तीन प्रकार की
भाषा होती है। पपीहों की वह पीन पुकार किसकी पंक्ति है? पपीहों की वह पीन पुकार ये तुम्हारे सिलेबस में है। कक्षा 12 में ये कविता है। कक्षा 12 में ये कविता है। मुझे बताओ कौन सी कविता है ये कक्षा 12 की? कमेंट करके मुझे बताओ। अगर तुमने पहचान लिया तो मेरी तरफ से ₹21 का नगद इनाम दिया जाएगा तुम्हें। नगद इनाम दिया जाएगा दोस्तों पपो पपीहो की वह पीन पुकार बताओ नहीं बता पाए ना सुमित्रानंद पंत की रचना है परिवर्तन कविता पढ़े थे निम्नलिखित में से कौन सी रचना महाकाव्य नहीं है इसमें से कौन सी
रचना महाकाव्य नहीं है आप लोगों को बताना है कामायनी नहीं है रस्मरथी नहीं है साकेत नहीं है क्या महाकाव्य नहीं है इसमें से आप सब बताओ भैया ये कोई सवाल है हां है सवाल तो इसमें से कामायनी महाकाव्य है पद्मावत महाकाव्य है साकेत भी महाकाव्य है रस्मरथी खंड काव्य है क्योंकि तुम्हारे सिलेबस में रस्मरथी खंड काव्य है इतना तो कर ही लोगे ना इतना तो तुक्का मार ही लोगे इतना तो तुक्का मार ही लोगे जयशंकर प्रसाद के काव्य की सिद्धावस्था है जयशंकर प्रसाद का काव्य कहां पर जाकर सिद्ध हो गया कामायनी पर जयशंकर प्रसाद का
काव्य कामायनी पर जाकर सिद्ध हो गया। मतलब व्यवस्थित कवि बन गए। बड़े कवि बन गए। अगला सवाल हारे को हरि नाम काव्य ग्रंथ के रचनाकार कौन है? हारे को हरि नाम काव्य ग्रंथ के रचनाकार कौन है? बताइए जयशंकर प्रसाद हैं या अयोध्या सिंह उपाध्याय हरऔद या फिर सच्चिदानंद हीरंद वासनज्ञ या फिर रामधारी सिंह दिनकर? तो इसके उत्तर रामधारी सिंह दिनकर हो जाएंगे। इसका उत्तर क्या हो जाएगा बेटा? रामधारी सिंह दिनकर हो जाएगा। यह वीडियो रिकॉर्डिंग हो रही है। हां यह वीडियो नहीं आज तो मुझे लगता है मैं 12 14 घंटे पढ़ाऊंगा तो क्लास केवल लाइव
लाइव में रहेगी वीडियो में नहीं रहेगी मतलब अपलोड नहीं होगी हट जाएगी क्योंकि 12 14 घंटे की क्लास है YouTube 12 घंटे के जात से ज्यादा की क्लास नहीं अपलोड करता है तो जो बच्चे इसे लाइव में देखेंगे देखेंगे नहीं तो यहां क्लास हट जाएगी अज्ञय जी की रचना कौन सी है कुरुक्षेत्र हरिदास पर क्षणभर रस्मरथी हुंकार मैंने कहा जहां बड़ा नाम दिख जाए अज्ञय वहां पर खड़े हैं अगला सवाल छायावादोत्तर काल के कवि कौन है? कौन है छायावादोत्तर काल का कवि? जगन्नाथ दास रत्नाकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सच्चिदानंद धीरानंद वासनज्ञ या फिर मैथिलीशरण गुप्त तो
भैया निराला रत्नाकर, सच्चिदानंद धीरेंद्र वास सैनज्ञ्य ये देखो यह प्रयोगवाद के हैं। प्रयोगवाद किस में आता है? छाया उत्तर में ही तो है। बात खत्म। निम्न में से किन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है? यह भी एक दर्द है भैया। निम्नलिखित में से किसे ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला? महादेवी को मिला था, सुमित्रानंदन पंत को मिला था, रामधारी को मिला था, जयशंकर प्रसाद को नहीं मिला। जयशंकर प्रसाद द्वारा ब्रज भाषा में रचित काव्य ग्रंथ कौन सा है? लहर, आंसू, चित्रधारा, कामायनी। कौन सा ग्रंथ ऐसा है जो ब्रज भाषा में रचित है? देखो कामायनी तो नहीं है, लहर
भी नहीं है, आंसू भी नहीं है, चित्रधारा है। कामायनी तो हम सब ने पढ़ी है। कौन तुम संस्कृत जल ने तीर्थ तरंगों के कौन सा सवाल? अष्टछाप के कवि वाला उत्तर गलत कैसे हो सकता है? मैंने क्या बता दिया भैया? तुम लोग इतना दुखी हो जाते हो। अष्टछाप में मैंने बताया है कि भिखारीदास नहीं है। जहां तक मुझे याद आ रहा है और भिखारीदास अष्टछाप में नहीं है बेटा। भिखारीदास अष्टछाप में नहीं है। ठीक है? अष्टछाप के सारे कवियों के नाम मैं यहां पर लिख दूंगा। हो गया तुम्हारा। ठीक है? अष्टछाप के सारे कवियों के
नाम मैं लिख दूंगा। मुझे पता चल गया। भिखारी दास नहीं है उसमें। ठीक है? दास लिखा होने से सब अष्टछाप में नहीं हो जाते। वैदेही वनवास काव्यकृति है। क्या है वैदही वनवास? वैदही वनवास भी एक महाकाव्यात्मक काव्य कृति है। क्या है? एक महाकाव्यात्मक काव्यकृति है। वैदेही वनवास किसकी है? किसकी है? अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔद की है। बेटा महाकाव्यात्मक है। लेकिन है तो खंड काव्य ही छोटी है। समझ गए सभी लोग? चलिए अगले सवाल पर चलते हैं। सही आंसर कीजिएगा। सही आंसर सभी लोग करेंगे। ग्रंथ काव्य संग्रह ग्रंथ काव्य संग्रह के रचयिता कौन है? ग्रंथि काव्य
संग्रह के रचयिता कौन है? सभी लोग बताएंगे। ग्रंथि काव्य संग्रह के रचयिता कौन है? सभी लोग बताएंगे। समझ गए सभी लोग? बेटा ग्रंथ काव्य संग्रह के रचयिता कौन है? सभी लोग बताएंगे। सभी लोग कमेंट करके मुझे बताएंगे ग्रंथ काव्य संग्रह के रचयिता कौन हैं? ग्रंथ काव्य संग्रह के रचयिता बेटा सुमित्रानंद पंत हैं। अगला सवाल आंगन के पार द्वार किसकी रचना है? आंगन के पार द्वार किसकी रचना है? बताइए। आंगन के पार द्वार सभी लोग बताएंगे। आंगन के पार द्वार मैंने कहा कि जैसे ही बड़ा नाम मिलेगा गे पर टिक कर दो। हां, जब तक मैं
पढ़ाऊंगा तब तक पढ़ने की कसम खा लो। सभी लोग। हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए चारण काल नाम किसने दिया? हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए चारण काल नाम किसने दिया? बताइए मुझे। हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए चारण काल नाम किसने दिया था? चारण काल किसने कहा था कि भैया आदिकाल नहीं है वो चारण काल है। तो वो रामकुमार वर्मा ने कहा था बेटा। अगला सवाल बादल को घिरते देखा है। नागार्जुन की कविता का युग क्या है? बादल को घिरते देखा है। तो नागार्जुन प्रगतिवाद में है तो प्रगतिवाद ही तो हो जाएगा। निम्नलिखित में
से नई कविता के कवि कौन है? तो नई कविता के कवि बेटा सच्चिदानंद धीरानंद वात्सनज्ञ हैं। चलो अगला सवाल नई कविता के यही है। अगला सवाल क्या है? हिंदी काव्य साहित्य के किस युग को जागरण सुधार काल कहा जाता है? तो जागरण सुधार काल किसको कहा जाएगा? अब देखो जाग तो चुके हम भारतेंदु युग में हैं लेकिन सुधारा जा रहा है द्विवेदी युग में तो जागरण सुधार काल द्विवेदी युग हो जाएगा। अगला सवाल कामायनी रचना है किसकी रचना है कामायनी? क्या कोई मुझे बता सकता है कामायनी किसकी रचना है? क्या कोई मुझे बता सकता है
कि कामायनी किसकी रचना है? क्या कोई मुझे बता सकता है कि कामायनी किसकी रचना है? सभी लोग बताएंगे बेटा। क्या कोई मुझे बता सकता है कि कामायनी किसकी रचना है? बताइए केक आ रहा है बेटा बनने गया है। बहुत तगड़ा केक बनने गया है। एक केक आया मुकेश सर ने उसको रिजेक्ट कर दिया। नहीं नहीं अच्छा केक लाओ। केक लाओ। अच्छा केक लाओ। हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए बीज वपन काल नाम दिया। हिंदी साहित्य के आदिकाल के लिए बीज वपन काल नाम किसने दिया? महावीर प्रसाद द्विवेदी ने। बीज वपन काल नाम कौन दे सकता
है? जो महान आदमी होगा। तो महान आदमी कौन है? कितनी नाव में कितनी बार काव्यकृति किसकी है? मैंने कहा बड़ा नाम अद्भुत नाम सच्चिदानंद बादशाहज्ञ निम्नलिखित में से कौन प्रेमाश्रय शाखा के कवि नहीं है? तो प्रेमाश्रय शाखा के कवि जायसी हैं मंजन है कुतबन है नंददास नहीं है। ठीक है? जायसी मंदन कुदबंद सब हैं। अज्ञेय की रचना कौन सी है? आंगन के पारद, कुरुक्षेत्र अपरा झंकार। मैंने कहा बड़ा नाम और अद्भुत आंगन के पार द्वार। अज्ञय की रचना हो गई। निम्न में से किन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है? अब यह बहुत जरूरी सवाल होता है।
अरे यार तुम लोग फोन क्यों कर रहे हो इतना? किन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला? तो जाहिर तौर पर निराला को नहीं मिला है ज्ञानपीठ पुरस्कार। इनमें से निराला को नहीं मिला है। हरिघास पर क्षणभर कृति निम्न में से किसकी? हरिघास पर क्षणभर तो अज्ञेय की रचना है। अगला सवाल निम्न निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि है? कौन प्रयोगवादी कवि है? बताइए। कौन प्रयोगवादी कवि है? बताइए। 12 घंटे पूरा पढ़ाऊंगा बेटा। ठीक है? और क्लास कर लो। अच्छे से कर लो। मैं यहां खड़ा हूं। मैं बोल रहा हूं और तेज बोल रहा हूं। और तुम केवल आराम
से बैठे हो और फिर भी तुम्हें केवल सवाल देखने में और समझने में परेशानी हो रही है। मैंने कहा कि जब 6 घंटे हो जाएगा तब 5 मिनट का ब्रेक लूंगा। 6 घंटे के बाद 5 मिनट का ब्रेक लूंगा मैं। ठीक है? चलिए। हां। 15 16 17 याद रखना है। 15 16 17 को तुम्हारी तुम्हारा तीन दिवसीय महा रिवीजन होगा। तीन दिवसीय महा रिवीजन। ठीक है? निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि कौन है? तो प्रयोगवादी कवि अज्ञेय हैं बेटा। चलो अगला सवाल। छायावाद काल का छायावाद काल का काल निर्धारण तो छायावाद शुरू होता है 1918 से
रहता है 1938 तक। 1936 38 तक क्योंकि 36 में प्रयोग प्रगतिवाद शुरू हो जाता है। प्रगतिवाद का मुख्य आधार क्या है? प्रगतिवाद का मुख्य आधार क्या है? बताइए सभी लोग। प्रगतिवाद का मुख्य आधार क्या है? तो प्रगतिवाद का मुख्य आधार क्या है? साम्यवाद है जो कि रूस से प्रभावित है। इसीलिए पुराने कवियों को तुमने देखा होगा खूब रूस जाते थे। पुराने लोगों ने एक आध चक्कर तो रूस का लगाया ही लगाया है। कीर्ति लता के रचनाकार कौन है? कीर्ति लता के रचनाकार कौन है? विद्यापति हैं बेटा कीर्ति लता के रचनाकार। अगला सवाल हरिऔध जी की
कृति नहीं है। कौन सी रचना इसमें से हरिऔध जी की नहीं है? एक तो बातचीत करते रहो तो तुम लोगों को बाद में प्रॉब्लम होती है। क्लास लगातार पढ़ा रहा हूं। 6 घंटे से मैं लगातार पढ़ा ही रहा हूं। बीच में कहीं एक दो मिनट बातचीत की हो तो की हो। नहीं तो लगातार पढ़ा रहा हूं। हरिया जी की काव्य कृति कौन सी है? चोखे नहीं है। चोखे चौपादे चुभते चौपादे वैदेही वनवास प्रिय प्रवास सब उनकी है। चित्रधारा जयशंकर प्रसाद की है जो ब्रज भाषा में है। निम्न में से किस समय सीमा को द्विवेदी युग
के नाम से जाना जाता है? तो 1900 से 1918 को द्विवेदी युग के नाम से जाना जाता है। आदिकाल का एक अन्य नाम क्या है? आदिकाल का एक अन्य नाम सिद्ध सामंत काल है। चारण काल भी है, बीज वपन काल भी है। ठीक है? यह सारे नाम आदिकाल के हैं। चलो निम्नलिखित में से राम भक्ति के कवि नहीं है। राम भक्ति शाखा के कवि नहीं है। नाभादास, अग्रदास, तुलसीदास, चतुर्भुज दास कौन नहीं है? तो राम भक्ति शाखा के कवि चतुर्भुज दास नहीं है। चतुर्भुज दास राम भक्ति शाखा के कवि नहीं है। ठीक है? सूफी अब
उसके बाद क्या होता है? सूफी काव्यधारा के कवि कौन हैं? सूफी काव्यधारा के कवि कौन है? रस खान रहीम जायसी नानक कौन है सूफी काव्यधारा का तो जायसी हैं सूफी काव्यधारा के बाकी ये सब लोग संत काव्यधारा के हैं नानक जाय नानक कबीर रैदास दादू दयाल चलो मैथिलीशरण गुप्त किस युग के कवि हैं बेटा? मैथिलीशरण किस युग के हैं? द्विवेदी युग के कवि हैं मैथिलीशरण गुप्त। अगला सवाल। चुभते चौपादे के रचनाकार कौन है? चुभते चौपादे चोखे चौपादे वैदेही वनवास रुक्मणी परिणय प्रिय प्रवास ये सब अयोध्या सिंह उपाध्याय हरऔध का है। अगला सवाल भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा
प्रकाशित पत्रिका कौन सी है? कवि वचन सुधा है भारतेंदु हरिश्चंद्र की हरिश्चंद्र चंद्रिका कवि वचन सुधा बालबोधिनी और कविता कवितावर्धिनी ये सब हरिश्चंद्र भारतेंदु हरिश्चंद्र की है। पृथ्वीराज रासो का रचना काल क्या है? वीरगाथा काल पृथ्वीराज रासो का रचनाकाल है। आदिकाल जिसे कहते हैं। राम की शक्ति पूजा एवं सरोज स्मृति कविता के रचयिता अथवा राम की शक्ति पूजा कृति के रचनाकार कौन है? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं। सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा बड़ी अच्छी कविताएं हैं। अद्भुत कविताएं हैं। ठीक है? सबको नोट डाउन करते रहो। सबको टिक करते रहो। सबको देखते रहो। जो पता
हो उसको आगे जाने दो। जो ना पता हो उसको कमेंट करके पक्का कर लो। रिवाइज कर लो। रिवीजन कर लो। यार 93000 हो गए 893000 900 चलिए आगे। सुमित्रानंदन पंत सुकुमार कवि हैं। किसके? प्रकृति के। सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि हैं। अगला सवाल। कामायनी के प्रथम सर्ग का क्या नाम है? कामायनी का प्रथम सर्ग चिंता सर्ग है। हिमगिर के उत्तुंग शिखर पर बैठ शिला की शीतल छाव। एक युवक भीगे नैनों से देख रहा है प्रलय प्रवाह। प्रलय है चारों तरफ उसी को मनु एक ऊंचे पहाड़ के शिला पर बैठकर देख रहे हैं। यहीं से
शुरुआत होती है कामायनी की। विनय पत्रिका किस काल की रचना है? विनय पत्रिकाल की है क्योंकि इसकी रचना तुलसीदास ने की है। किस भाषा में की है? ब्रज भाषा में की है। ध्यान रखना है। अगला सवाल छायावाद की विशेषता क्या है? छायावाद की विशेषता कोई मुझे बताओ। कोई मुझे बताओ। छायावाद की विशेषता क्या है? कोई मुझे बता दो बेटा। कोई एक बच्चा मुझे कमेंट करके बता दो कि छायावाद की विशेषता क्या है? मैं नहीं जानता हूं छायावाद की विशेषता। बस कंप्लीट होने वाला है। मैंने क्या कहा? 20 मिनट और बस 20 मिनट में हो जाएगा।
ये क्या हुआ? अपने आप क्यों चल गया? अपने आप चला था ना? भूत है क्या भाई? अपने आप बदला था। बदला था ना? वो देखो मैं बोल रहा हूं। अपने आप बदला था। अपने आप बदला था पक्का। सौंदर्य और प्रेम होगा। निम्नलिखित में से एक चंपू काव्य। चंपू काव्य क्या होता है? जिस काव्य में कविता भी हो और गद्य भी हो उसे चंपू काव्य कहते हैं। कविता हो और गद्य भी हो। तो इसमें से चंपू काव्य कौन है? कोई मुझे बता सकता है। इसमें से चंपू काव्य कौन है? कोई मुझे बता सकता है। पंचवटी नहीं
पंचवटी में तो केवल कविता है। पंचवटी में क्या है कि चार चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल थल में स्व चांदनी बिछी हुई है ओनि और अंबर तल में। यशोधरा हो जाएगा बेटा। अगला सवाल। हिंदी का प्रथम महाकाव्य क्या माना जाता है? इसमें से किस का महाकाव्य को हिंदी का प्रथम महाकाव्य मानते हैं? इसमें से किसे हिंदी का प्रथम महाकाव्य मानते हैं? बताइए। तो पृथ्वीराज रासो को हिंदी का प्रथम महाकाव्य मानते हैं। ऐसा मत कर देना कि तुम उसको लगा दो। हिंदी साहित्य के किस काल को पूर्व मध्यकाल कहा जाता है? पूर्व मध्यकाल
और उत्तर मध्यकाल दो हैं। तोक्तिकाल को पूर्व मध्यकाल और रीतिकाल को उत्तर मध्यकाल कहा जाता है। इस बात को भी आपको ध्यान रखना है। आ रहा है केक। बेटा एक केक मुकेश सर ने बनवाया था तो वो खराब बन गया। दूसरा बनवा के ला रहे हैं। अरे केक का इंतजार करते-करते थोड़ा पढ़ ले मेरे बच्चे। थोड़ा पढ़ ले। थोड़ा पढ़ ये क्या हुआ? ये क्या हो रहा है भाई? हो क्या रहा है यार? भूत आ गया क्या? अपने आप चला है। देखो मैंने कुछ किया नहीं है। सुमित्रानंदन पंत को चिदंबरा कृति पर कौन सा पुरस्कार
मिला? भूत आएगा उसको मारूंगा। भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था बेटा। अगला सवाल निम्न में से कौन मैथिलीशरण गुप्त की रचना है? कौन सी मैथिलीशरण गुप्त की रचना है? आंगन के पार द्वार ये नहीं है। युगवाणी ये भी नहीं है प्रशांत। अनक मोबाइल कांप रही है। अब हो क्या रहा है मेरे साथ? सेशन को सभी लोग शेयर कर दो। लाइव क्लास में भूत आ गया बेटा। लाइव क्लास में भूत आ गया। सेशन को शेयर कर दो। चलो। निम्नलिखित में से कौन खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है? खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य प्रिय प्रभास है बेटा। चलो
गीत संकलन पारिजात किसकी कृति है? पारिजात गीत संकलन किसकी कृति है? बताइए। तो पारिजात किसकी है? नहीं मैथिलीशरण गुप्त की नहीं है भैया। अयोध्या से उपाध्याय आर्य की और द्विवेदी युग की ही है। निम्न में से जसं प्रसाद की काव्य कृति कौन सी है? तो चित्रधार चित्रधार है ब्रज भाषा में जो लिखी गई है। चित्रधार जो ब्रज भाषा में लिखी गई है। अगला सवाल सुमित्रानंदन पंत को सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार सोवियत में लैंड करके नेहरू पुरस्कार किस कृति पर मिला था? तो लोकायतन पर मिला था। सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार। अपने आप चला था भाई। तुम
लोग देखे हो यार गवाही हो। किसको-किसको लगता है कि क्लास में भूत आ गया? किसको-किसको लगता है कि क्लास में भूत आ गया? किसको-किसको लगता है क्लास में भूत आ गया बेटा? सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। निम्नलिखित में से जयशंकर प्रसाद की काव्यकृति नहीं है। इसमें से कौन सी जयशंकर प्रसाद की नहीं है? देखो चित्रधारा उनके इत्तलय उनकी नहीं है। चित्रधारा उनके इत्तलय उनकी नहीं है। ठीक है। चलो। निम्नलिखित में से छायावाद के कवि कौन है? निम्नलिखित में से छायावाद के कवि हैं। कौन इसमें से छायावाद का कवि है? परमानंद दास, सूरदास, चतुर्भुदास,
मुकुट बिहारी पांडे कौन है? तो परमानंद दास, सूरदास, चतुर्भुदास ये तीनों नहीं है। मुकुट बिहारी पांडे हैं। अगला सवाल बेटा। अगला सवाल बहुत इंपॉर्टेंट सवाल है। तुम्हारे बोर्ड एग्जाम में इस बार आने वाला है। तो भैया थोड़ा मुझे शक्ति भेजो जिससे मैं भूत से लड़ पाऊं। भूत आकर मुझे खा जाएगा। बंधु टू टू कर रहा है। निम्नलिखित में से कौन सा छायावाद युग का कवि नहीं है? निम्नलिखित में से कौन सा छायावाद युग का कवि नहीं है इसमें से? तो भैया महादेवी वर्मा है। जयशंकर प्रसाद हैं। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं। ये भाई साहब प्रयोगवाद के
हैं। छायावाद उत्तर में चले जाएंगे। रस्मरथी किस कोटि की रचना है? रस्मतिथी तुम्हारे सिलेबस में खंड काव्य लगा हुआ है मेरे बेटे इतना तो जानते ही हो बादल को गिरते देखा है रचना किसकी है बादल को गिरते गिरते देखा है अ है बादल को गिरते देखा है नागार्जुन की रचना है मैं कवि पंक्ति याद करने की कोशिश कर रहा था रामधारी सिंह दिनकर प्रमुख कवि हैं प्रयोगवाद के प्रगतिवाद के रामधारी सिंह दिनकर किसके प्रमुख कवि हैं प्रयोगवाद के प्रगतिवाद के निर्गुण ज्ञानाश्रय के या सगुण के तो प्रगतिवादी काव्यधारा के मुख्य कवि हैं नागार्जु रामधारी सिंह
दिनकर बिहार की रचनाओं बिहारी की रचनाओं का छंद है बिहारी की रचनाओं का बहुत मुख्य छंद कौन सा है यह सवाल बहुत बार आ चुका दोहा है अगला सवाल छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है यह कथन किसका है जितने प्रकार के सवाल बनते हैं सब देख लो क्योंकि कोई भी आ सकता है जब एक बार आ गया तो दोबारा भी आ जाएगा थोड़ी देर बस थोड़ी देर और ठहर जा सोए मैं तुझे पद्यांश करा दूंगा थोड़ी देर और ठहर जा सोए मैं तुझे पद्यांश करा दूंगा तुरंत यहां पर पद्यांश करा दूंगा थोड़ी देर
और ठहर जा चलो प्रगति के प्रगतिवाद के सशक्त कवि कौन है तो प्रयोगवाद के सशक्त कवि कौन होंगे भैया नागार्जुन होंगे बहुत दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास बहुत दिनों तक का गुदिया सोई इसके पास मास्को अभी दूर है के रचयिता मास्को अभी दूर है मास्को तो दूर है ही हम भारत में खड़े हैं भैया मास्को दूर है मास्को को अभी दूर है। सारे कवि रूस से प्रभावित थे। भैया शिव मंगल सिंह सुमन आ रहा है। आ रहा है। मैथिली शरण गुप्त की काव्य कृति कौन सी है? प्रेमा प्रवाह त्रिपथगा लहर ग्राम्या मैथिली शरणगुप्त
की काव्य कृति बताइए। प्रेमा प्रवाह त्रिपदगा लहर ग्राम्या ग्राम्या है। यहीं से इन्होंने समाजवाद की ओर मुख किया। आहा ग्राम्य जीवन भी क्या है? अगला सवाल हिंदी साहित्य के आधुनिक काल की रचना कौन सी है? हिंदी साहित्य के आधुनिक काल की रचना कौन सी है बेटा? हिंदी साहित्य के आधुनिक काल की रचना पद्मावत, सूरसागर, रामचंद्रिका, चांद का मुंह टेढ़ा है। तो चांद का मुंह टेढ़ा है। आधुनिक काल की रचना है। अगला हरिऔध का पूरा नाम क्या था? अब यह तो तुम लोग नहीं जानतेगे। कितने बच्चे ऐसे हैं जो हरिऔध का पूरा नाम जानते हैं? एक
बार कमेंट सेक्शन में बताओ। कितने बच्चे ऐसे हैं जो हरऔध का पूरा नाम जानते हैं? कितने बच्चे ऐसे हैं जो हरिऔध का पूरा नाम जानते हैं? अयोध्या सिंह उपाध्याय हरऔध प्रकृति का सुकुमार कवि किसे कहा गया? प्रकृति का सुकुमार कवि किसे कहा गया? मुझे कहा गया यार प्रकृति का सुकुमार कवि किसे कहा गया? सुमित्रानंदन पंत को कहा गया। अगला सवाल गिरजा कुमार माथुर किस काल के कवि हैं? तो गिरजा कुमार माथुर। अब तुम्हें खुशबू के शिलालेख याद है? खुशबू के शिलालेख याद है? किसको? किसको खुशबू के शिलालेख याद है? बताइए मुझे। आधुनिक काल के कवि
हैं। चलिए आगे बढ़ते हैं। प्रगतिवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं। प्रगतिवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि ना तो सूरदास हो सकते हैं ना तुलसीदास ना चंद्रबरदाई। केदारनाथ अग्रवाल होंगे। इनकी एक कविता है। अह केदारनाथ सिंह अच्छी कविताएं लिखते हैं। अग्रवाल की भी कुछ कविताएं। लहर काव्य काव्य कृति के रचनाकार कौन है? लहर काव्य कृति के रचनाकार कौन है? सभी लोग मुझे बताएंगे। लहर काव्य कृति के रचनाकार कौन है? लहर, आंसू, झरना, चित्रधार ये सब जयशंकर प्रसाद की रचनाएं हैं। उर्मिला का विरह वर्णन साकेत के किस सर्ग में हुआ है? साकेत के किस सर्ग में है? तो
नवम सर्ग में उर्मिला का विरह वर्णन है। ध्यान रखिएगा आपके सिलेबस में तीन गीत तीन गीत हैं उर्मिला के। आपके सिलेबस में उर्मिला के तीन गीत हैं। ध्यान रखिएगा परिवर्तन किस कवि की रचना है? सुमित्रानंदन पंत, निराला, रत्नाकर या धूमिल? परिवर्तन बापू के प्रति और नौका विहार? ये तीनों सुमित्रानंदन पंत की है। अगला सवाल क्या है? इनमें से किस काव्य कृति पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला? किस कृति पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला? कौन-कौन बता सकता है? बोर्ड एग्जाम बहुत नजदीक है बेटा। कितने परसेंट का टारगेट कर रहे हो? जरा बताओ। शेर सुनोगे? शेर शेर। पांव घायल है
फिर भी चलना है। तुम्हारे लिए यह शेर है। तुम लोग थके हुए हो। कंटेंट नहीं है यूपी बोर्ड के बच्चों के पास। टाइम टेबल आयोग ने ऐसा बनाया है कि तैयारी करने का समय नहीं दिया। तो तुम्हारे लिए यह लाइनें हैं कि पांव घायल है फिर भी चलना है। हार को जीत में बदलना है। पांव घायल है फिर भी चलना है। हार को जीत में बदलना है। रात में जुगनू टिमटिमाते हैं। रात में जुगनू टिमटिमाते हैं। हम तो सूरज हैं। दिन में जलना है। आप सबको संघर्ष करके ही आगे निकलना है। बेटा सीबीएसई आईएससी वाले
पहले से बैठे हैं तुम्हारा रास्ता रोके उनको मार के जब निकलोगे तभी आगे निकल पाओगे मार थपड़िया चट चट चट चट देखो बेटा अगर रिकॉर्डेड बची रह गई तो दे देंगे मुझे तो लगता नहीं है कि बची रह पाएगी लेकिन देखते हैं इनमें से काव्य किस काव्यकृत पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला इनमें से कौन सी रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था मुझे बताइए कौन सी रचना इसमें से है जिस पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था ठीक है लोकायतन इस पर नहीं मिला अग्निखा इस पर भी नहीं मिला। रसवंती पर भी नहीं मिला। कितनी नाव में कितनी बार
पर मिला है। अगला सवाल भारतेंदु युग के कवि कौन है? प्रेमघन महादेवी वर्मा, भवानी प्रसाद मिश्र, नरेंद्र मिश्र। देखो प्रेमघन तो द्विवेदी युग के हैं। महादेवी वर्मा भी अ छायावाद की हैं। भवानी प्रसाद मिश्र भारतेंदु युग इसमें से अच्छा बद्री नारायण चौधरी प्रेमघन यह तो भारतेंदु युग के हैं। भैया आनंद कादंबिनी इनकी पत्रिका है। मुझे इनको पढ़ के याद आ गए थे। मैथिलीशरण गुप्त थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो। अभी जब बीत जाएगा ना, अभी जब ये टाइम बीत जाएगा ना, तब मजा आएगा कि चलो बहुत कुछ सीख लिया। अभी तुम्हारे हिसाब से पढ़ाने नहीं आया
हूं। अगर तुम्हारे हिसाब से पढ़ाना होता तो तुम तो अपने हिसाब से कब का पढ़ लिए होते। तो मेरे हिसाब से पढ़ लो। हां, मैं पीडीएफ दे दूंगा, करवा दूंगा, तभी दूंगा। जितने एमसीक्यू करवा पाऊंगा, उतने मैं जितने करवा के आ पाऊंगा, पूरे करवाऊंगा। ठीक है? पूरे करवाऊंगा। समझ लो इस बात को। समझ लो इस बात को। ठीक? चलिए हुंकार काव्य के रचयिता कौन है? हुंकार काव्य के सुमित्रानंदन पंत, सच्चिदानंद धीरानंद वात्सनज्ञ रामधारी सिंह दिनकर या मुक्तिबोध कौन है बेटा? तो हुंकार के रामधारी सिंह दिनकर हैं। अगला सवाल क्या है? प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि
कौन है? प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि कौन है? प्रयोग कौन सबसे ज्यादा कर रहा है? तो प्रयोग सबसे ज्यादा कर रहे हैं। वैसे हैं तो अज्ञय प्रमुख कवि लेकिन अज्ञय का तो इसमें नाम ही नहीं है। तो अज्ञेय का नाम नहीं है तो केदारनाथ अग्रवाल तो हो जाएंगे प्रगतिवाद के। त्रिलोचन भी प्रगतिवाद के हैं। नागार्जुन भी शमशेर बहादुर सिंह। शमशेर बहादुर सिंह हो जाएंगे प्रयोगवाद के। पल्लव से उित कविता परिवर्तन के रचयिता कौन है? परिवर्तन कविता तुम्हारे सिलेबस में है। इसके लेखक कौन है? परिवर्तन कविता तुम्हारे सिलेबस में है। इसके लेखक कौन है? आज एक
दिन मुझे दे दो। कल तुम कर लेना तैयारी। परिवर्तन कविता के रचयिता कौन? पल्लव से उतरित कविता परिवर्तन सुमित्रानंद पंत की है। मैथिलीशरण गुप्त की रचना इसमें से कौन सी है? भारत भारती है। ठीक है? अगला सवाल। महावृक्ष के नीचे काव्य कृति है। महावृक्ष के नीचे यह भगवान बुद्ध को टारगेट करते हुए महात्मा बुद्ध को टारगेट करते हुए लिखी गई रचना है। और इसका उत्तर आपको देना है। रचना क्या है? महावृक्ष के नीचे महावृक्ष वही वृक्ष जो जिसके भगवान जी जिसके नीचे बैठे थे। सच्चिदानंद धीरानंद वास। अगला सवाल सुमित्रानंद पंत का काव्य संकलन कौन सा
है? तो सुमित्रानंद पंत का काव्य संकलन वीणा है। वीणा वीणा। अगला प्रयोगवादी कवि नहीं है। कौन इसमें प्रयोगवादी कवि नहीं है? तो मुक्तिबोध प्रयोगवादी कवि नहीं है। प्रगतिवादी कवि है। मुक्तिबोध मुक्तिबोध प्रगतिवादी कवि हैं। नहीं मुक्तिबोध ने तो प्रयोगवाद में रचनाएं लिखी है। शिव मंगल सिंह सुमन। चलो अगला सवाल। कुकुरमुत्ता के रचयिता कौन है? कुकुरमुत्ता के रचयिता कौन है? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं। अगला सवाल। निशा निमंत्रण के रचनाकार कौन है बेटा? तो निशा निमंत्रण के रचनाकार हरिवंश राय बच्चन है। कौन है? हरिवंश राय बच्चन है। चलिए सभी लोग बताएंगे। अगला सवाल आपके सामने आ रहा
है। बस बस हम लोग पहुंच गए बेटा बस खत्म होने वाला है। बिल्कुल खत्म होने वाला है। छायावाद युग की कृति कौन सी है? छायावाद की। तो साकेत तो द्विवेदी युग का है। प्रिय प्रवास भी द्विवेदी युग का है। रामचंद्रिका तो रीतिकाल की है। केशवदास की। कामायनी द्विवेदी युग की कामायनी छायावाद कब पवन दूतिका काव्यांश के रचयिता कौन है? पवन दूतिका काव्यांश के रचयिता कौन है? हां पवन दूतिका काव्यांश के रचयिता कौन है? महादेव वर्मा नहीं जयशंकर प्रसाद बिल्कुल नहीं सुमितानंदन पंत बिल्कुल नहीं अयोध्या सिंह उपाध्याय आर्य धर्म के प्रति आस्था तथा शोषक वर्ग के
प्रति घृणा किस वाद की प्रमुख विशेषता है धर्म के प्रति अनास्था यानी धर्म में अना आस्था ही नहीं है और शोषक वर्ग जो शोषण करता है उसके प्रति घृणा ये प्रगतिवाद में है बेटा अगला क्या है प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता की बात कह रहा है प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता क्या है प्रकृति का मानवीकरण प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता है। प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता प्रकृति का मानवीकरण कैसे हो सकता है? अति बौद्धिकता नहीं इसे कह सकते लेकिन अति बौद्धिकता तो होगी बौद्धिकता तो है व्यक्तिवाद भी है बौद्धिकता है उपमानों और प्रतीकों
की नवीनता भी है अच्छा ओह माय गॉड नहीं है पूछा है वही मैं कह रहा हूं यार कि ये तो सारे हैं। प्रकृति का मानवीकरण नहीं है। प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता प्रकृति का मानवीकरण नहीं है। नहीं पूछा है ना वह मैं देख नहीं पाया था। ऐसे ही तुम लोग भी सवाल गलत कर दोगे। निम्न में से कौन प्रगतिवादी कवि नहीं है? तो इसमें से कौन प्रगतिवादी नहीं है? नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल, त्रिलोचन या गिरजा कुमार माथुर कौन प्रगतिवादी नहीं है? आपसे पूछा जा रहा है। तो केदारनाथ अग्रवाल प्रगतिवादी नहीं है। अगला सवाल क्या है? छायावाद के
कवि कौन है? तो छायावाद के कवि महादेवी वर्मा है बेटा। भवानी प्रसाद मिश्र नहीं, गजान माधु मुक्त, रमेश रमेश्वर कुमार शुक्ल नहीं। और एक बार अपनी पीठ थपथपा लीजिए। दोस्तों आपने काव्य का विकास के सारे आयोग द्वारा जारी किए गए क्वेश्चन सॉल्व कर लिए हैं। अब आपको कोई और क्वेश्चन सॉल्व करने की जरूरत नहीं है। सारे क्वेश्चन सॉल्व हो चुके हैं। अब बस आपको धैर्य से बैठना है और पद्यांश से आने वाले सवाल जो कि पूरे के पूरे 10 नंबर के आते हैं वो करने हैं। कितने प्रतिशत क्वेश्चन सही हुए? एक बार मुझे कमेंट में
करके बता दीजिए और एक बार खुश हो जाइए। एक बार खुश हो जाइए सभी लोग। सभी लोग दिल रिएक्ट करेंगे कमेंट सेक्शन में। मैं थोड़ी पानी पी लेता हूं। अ रुक जाओ भाई थोड़ी देर में 6 घंटे पूरे हो जाएंगे। मेरी आवाज प्रॉपर आ रही है? अब देखो पवन दूतिका तुम्हें बैठ के सुनना है बस। इससे सवाल के उत्तर करा दूंगा। थोड़ा सुनना है। सुन लो एक बार थोड़ी सी। चलो। बैठी खिन्ना यक दिवस वे खिन्ना माने दुखी। यक दिवस माने एक दिवस माने दिन गेह माने घर बैठी खिन्ना यक दिवस वह गेह में थी
अकेली अच्छा मैं अंडरलाइन करके अर्थ बताऊंगा लिख लेना आंखें आंसू दृग दृग माने आंखें युगल माने दोनों दोनों आंखों में आंसू आ रहे थे थे धरा को भिगोते और पृथ्वी को भिगो रहे थे आई धीरे इस सदन में धीरे से आई सदन माने घर में पुष्प सद्ग को ले फूलों की अच्छी सुगंध को लेकर प्रातः वाली सुपवन प्रातः की सुंदर हवा इसी काल वातायनों से संतापों को विपुल बढ़ता देख के दुखता हो अपने संतापों को अपने दुख को विपुल यानी बहुत अधिक बढ़ता देखकर दुखी हो गई कौन राधा जी और दुखी होकर धीरे बोली किससे
धीरे बोली कैसे बोली सदुख दुख के साथ बहुत दुख के साथ धीरे से बोली उससे किससे पवन से क्या कौन बोली श्रीमती राधिका श्रीमती राधिका ने धीरे से अपनी बात पवन से कही प्यारी प्रातः पवन इतना क्यों मुझे है सताती हे प्यारी प्रातः कालीन पवन इतना क्यों मुझे सता रही हो क्या तू भी कलुषित हुई काल की क्रूरता से क्या तुम तुम भी कलुषित हो गई हो। क्या तुम भी संक्रमित हो गई हो? क्या तुम भी प्रभावित हो गई हो? समय की कठोरता क्या तुम्हारे अंदर भी उतर गई है? जिस प्रकार समय मुझ पर कठोर
है? सभी लोग एक बार बताओ मेरी आवाज सही से आ रही है? मेरी आवाज सही से आ रही है? मेरी आवाज सही से आ रही है या नहीं? बेटा सभी लोग बताएंगे। मेरी आवाज आ रही है? मुझे तो लग रहा है आ रही है भाई तुम्हें देखती है यह पागल निगाहें चलो अब इसका एक बार पूरा अर्थ देखते हैं। एक दिन राधा जी अपने घर में दुखी अकेली बैठी थी और उनके दोनों आंखों में आंसू थे जो धरती पर गिर रहे थे। उसी समय खिड़की से सुबह की मंद सुगंधित हवा प्रवेश करती है और उस
मंद सुगंधित हवा के प्रवेश करने से राधा जी का जो दुख है वह और बढ़ जाता है। राधा जी अपने दुख को बढ़ता हुआ देखकर धीरे से पवन से कहती हैं कि हे पवन तुम मुझे इतना क्यों सता रही हो? क्या तुम भी समय की कठोरता के जैसे क्या तुमने भी समय से कठोरता उधार लेकर के स्वयं को कठोर बना लिया है? स्वयं को संक्रमित कर लिया है? इस पर आधारित सवाल देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ कितने लोग इसका संदर्भ लिख लेंगे? एक बार दिल रिएक्ट करो। कितने लोग इस पाठ का संदर्भ लिख लेंगे?
बेटा पढ़ना नहीं है। पीडीएफ मिलेगी तो सोने पे सुहागा। जो लास्ट तक रुकेगा मुझे पता है। YouTube पर एक एप्लीकेशन एक फैसिलिटी है। आपने अपना चैनल बनाया होगा। 1 मिलियन का हो जाएगा तो आपको भी मिल जाएगा। जब आप क्लास बंद करते हो तो जितने बच्चे क्लास में उस टाइम पर रहते हैं उनकी मेल आईडी होती है और उन पर आप कोई भी मैसेज मेल कर सकते हो तो हम पीडीएफ उनको मेल कर देते हैं जो लास्ट तक क्लास में रुकते हैं और ड्यूरेशन दिखाता है वहां पर जैसे वहां पर फिल्टर कर सकते हो कौन
केवल 30 मिनट कौन पूरी क्लास में रहा कौन 3 घंटे से ज्यादा रहा कौन 4 घंटे से ज्यादा रहा वहां पूरा आता है प्रस्तुत अध्ययन हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित अयोध्या उपाध्याय द्वारा रचित पवन दूध का शीर्षक कविता से उदित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कवि कहता है कि एक दिन जब राधा उदास खिन्न मन के साथ घर में अकेली बैठी हुई थी और उनकी दोनों आंखों से आंसू बहकर जमीन पर गिर रहे थे। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने राधा की किस स्थिति का वर्णन किया है? अब मैंने तुमको पूरी कविता की हिंदी बता
रखी है। तो तुम बता सकते हो कि प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने राधा की विरोगावस्था का वर्णन किया है। ठीक है? है। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने विरह अवस्था के कारण दुखी नायिका का वर्णन किया है। जिसके नैनों से अस्त्रुओं की धारा बह रही है तथा मन को हर्षित एवं आनंदित करने वाली प्रातः कालीन पवन भी नायिका को दुखी करती है। नायिका की इस स्थिति का वर्णन कवि ने किया है। नायिका ने पवन को क्रूर क्यों कहा है? तो नायिका का मन खिन एवं उदास था। उसके नैन अश्रुओं से भरे हुए थे। नायिका की इस
दैन्य दशा में प्रातः कालीन पवन जब सभी में उमंग एवं उत्साह का संचार करती कर रही थी। तब वह नायिका के हृदय विदारक उसके दुख को बढ़ा रही थी। इसलिए नायिका ने उसे क्रूर कहा है। प्रस्तुत पद्यांश की रस योजना पर प्रकाश डालिए। प्रस्तुत पद्यांश में वियोग श्रृंगार रस है। इस पद्यांश में कवि ने नायिका की विरावस्था का वर्णन किया है। ध्यान रखना। अगला फिर कविता आती है मेरे प्यारे नवजलद से कंज से नेत्र वाले। मेरे प्यारे नवजलद से कंज से नेत्र वाले जाके आए नमधन से और ना भेजा संदेशा। मैं रो-रो कर प्रिय विरह
में बावली हो रही हूं। जाके मेरी सब दुख कथा श्याम को तू सुना दे। धीरे-धीरे पढ़ा रहा हूं। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो बेटा। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। मेरे प्यारे नवजलद से कंज से नेत्र वारे मेरे प्यारे जो कृष्ण हैं नए भैया मैं केवल एक बात सुन लेना सब लोग सभी भाइयों बहनों बेटे बेटियों मैं केवल इंपॉर्टेंट पद्यांश करा रहा हूं। इसमें से फ़िल्टर मत करना कि इसमें से भी फिल्टर करने लगो और एक-एक पढ़ो। फिर तुम 33% वाले में जाना। फिर मेरे प्यारे
नवजलद से नवजलद से नए बादल के समान। नवजलद से यहां उपमा अलंकार होगा। मेरे प्यारे नवजलद से कंज से कंज माने कमल के समान। फिर से यस सेवाचक शब्द है। उपमा अलंकार होगा। नेत्र वाले। मेरे प्यारे नवजलत से कंज से नेत्र वाले। मेरे जो प्यारे कृष्ण हैं जो नए बादल के समान है और जिनकी कमल जैसी आंखें हैं। जाके आए नमन से और ना भेजा संदेशा। वह मधुबन से चले गए और लौट कर नहीं आए। कोई संदेश भी नहीं भेजा। मैं रो-रो के प्रिय विरह से बावली हो रही हूं। मैं प्रिय के विरह में रो-रो
कर पागल हुई जाती हूं। मैं अपने प्रियतम के विरह में रो-रो कर पागल हुई जाती हूं। जाके मेरी सब दुख कथा श्याम को तू सुना दे। हे पवन तुम चली जाओ और मेरी सारी दुख की कथा सारी दुख की कहानी कृष्ण को सुना के चली आओ। जो ही मेरा भवन तज तू अल्प आगे बढ़ेगी। तज माने छोड़कर अल्प माने थोड़ा जैसे ही तुम मेरा भवन अर्थात घर छोड़कर थोड़ा सा आगे जाओगी शोभा वाली सुखद कितनी मंजू कुंजे मिलेंगी वे वहां पर तुम्हें सुंदरता से युक्त मुलायम हां पूरा ऑब्जेक्टिव फंस जाएगा सुंदरता से युक्त मुलायम कुंजे
मिलेंगी झाड़ियां मिलेंगी प्यारी छाया मृदुल स्वर से मोह लेंगी तुझे वे प्यारी छाया मृदुल स्वर से वह अपनी प्यारी छाया और मृदुल स्वर से तुम्हारा मन मोह लेंगी। वह अपनी प्यारी छाया और मृदुल स्वर से तुम्हारा मन मोह लेंगी। ठीक है? तो भी मेरा दुख लक वहां जाना विश्राम लेना। तो भी तुम यार वहां जाकर विश्राम मत करने लगना। प्लीज मेरी बात पहुंचा देना। ठीक है? चलो सभी लोग सेशन को लाइक कर लेना बेटा एक बार। संदेश प्रेषिका ने नव जलत से कंज से नेत्र वाले शब्द किसके लिए प्रयोग किया है? क्या कोई बच्चा मुझे
यह बता सकता है? बेटा ऐसे ही सवाल आते हैं और यह जान लो पहला और दूसरा चैप्टर हर एक किताब का सबसे इंपॉर्टेंट होता है और तुमको मैं केवल इंपॉर्टेंट पैराग्राफ करवा रहा हूं। 6 घंटे बाद 10 मिनट का ब्रेक लेंगे। संदेश प्रेषिका ने नव जलत से कंज से नेत्र वाले शब्द श्री कृष्ण के लिए प्रयोग किया है। मधुबन जाकर किसने कोई संदेश नहीं भेजा? मधुबन जाकर किसने कोई संदेश नहीं भेजा? तो मधुबन जाकर कृष्ण ने मधुबन से जाकर मधुबन से जाकर कृष्ण ने कोई संदेश नहीं भेजा। बावली और अल्प शब्दों का क्या अर्थ है?
बावली माने पागल, अल्प माने थोड़ा तो तुम्हें किसी को कहना हो थोड़ा पागल तो कह दो। ऐसे अक्सर लोग बात करते हैं। गारंटी है ऑब्जेक्टिव की और केवल ऑब्जेक्टिव की गारंटी नहीं है। अगर बात गारंटी लेने की हो तो सुन लो। 13 तारीख की क्लास 15, 16, 17 की क्लास उसके बाद 18 को सुबह 5:00 बजे। अगर एक भी क्वेश्चन इससे बाहर से आ गया तो पढ़ाना छोड़ दूंगा। गारंटी अगर चाहिए तो इस तरह गारंटी लो कि अगर इन पांच दिनों से बाहर से एक सवाल दिया गया एक सवाल एक शब्द तो तुम मुझे फिर
पढ़ाते नहीं देखोगे। समझ रहे हो? थोड़ा सा बस चलते रहिए। चलते रहिए कि चलते रहने से चलते रहिए कि चलते रहने का सिलसिला हूं मैं। ठीक है रेखांकित अंश की व्याख्या अब क्या है रेखांकित अंश ध्यान से देखना मैंने अर्थ पूरे का बताया है जो ही मेरा भवन तज तू अल्प आगे बढ़ेगी शोभा वाली सुगत कितनी मंजुक कुंजे मिलेंगी जैसे ही मेरा घर छोड़कर तुम थोड़ा आगे जाओगी राधा पवन से रास्ते में आने वाले विभिन्न प्राकृतिक सौंदर्य से सचेत रहने के लिए कहते हुए आगे कहती हैं कि मेरे घर से कुछ ही दूर जाने के
बाद तुम्हें अत्यंत मनोहर और सुख प्रदान करने वाली कुंजे मिलेंगी। प्रयुक्त पद्यांश का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए। पद्यांश का शीर्षक बेटा पवन दूतिका है और कवि का नाम अयोध्या सिंह उपाध्याय हरधे। कितने बच्चों को लगता है कि उनसे हो जाएगा? कितने बच्चों को लगता है कि उनसे हो जाएगा? कितने बच्चों को लगता है कि उनसे हो जाएगा? यह पैराग्राफ कितने लोग सॉल्व कर लोगे? सेशन को शेयर करते रहो सभी लोग। जोश बना रहना चाहिए दोस्तों। जातेजाते अगर पथ में क्लांत कोई दिखावे। अगर जाते-जाते रास्ते में कोई थका हुआ दिखाई पड़े तो जाके सनिकट
उसकी क्रांतियों को मिटाना। तो उसके करीब जाकर उसकी थकान को मिटा देना। धीरे-धीरे परस करके गात उतताप खोना। धीरे-धीरे उसके शरीर को स्पर्श करके गात उतप शरीर की गर्मी को समाप्त करना। सद्गंधों से श्रमित जन को हर्षित सा बनाना। खुश कर देना। अपनी सुगंध से उसको लज्जा शीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आवे। यदि कोई लज्जाशीला महिला रास्ते पर जा रही हो होने देना विकृत वसना तो ना तू सुंदरी को तो उस सुंदरी के वस्त्र खराब मत होने देना। जो थोड़ी भी श्रमितवा हो गोद ले श्रांतिक होना। अगर वह थोड़ी थकी हुई दिखाई पड़े तो
गोद में लेकर उसकी थकान मिटा देना। होठों की यो कमल मुख की लानताएं मिटाना। उसके होठों की और उसके कमल के समान मुख की थकान को समाप्त कर देना मिटा देना। राधा पवन को क्लांत व्यक्ति के संबंध में क्या समझाती हैं? तो राधा पवन को क्लांत व्यक्ति के संबंध में समझाती हैं कि मार्ग में तुम्हें कोई थका हुआ व्यक्ति मिला है। मिल जाए तो तुम उसके पास चली जाना। फिर धीरे-धीरे उसके शरीर पर स्पर्श कर उसके दुख संताप को मिटा देना। राधा ने पवन को पथिक महिला के साथ कैसा व्यवहार करने के लिए निर्देश दिया?
तो राधा ने पवन को पथिक महिला के साथ सद व्यवहार करने के लिए निर्देश दिया कि हे पवन यदि मार्ग में तुम्हें कोई लज्जावंती पथिक स्त्री मिले तो तुम उसके बालों को मत उड़ाना यदि वह बात थकी हुई लगे तो उसे अपनी गोद में लेकर उसकी थकान मिटा देना। अब चलते हैं अगले पर। कमल मुख में कौन सा अलंकार है? तो कमल मुख में उपमा अलंकार है। यहां मुख की तुलना कमल से की गई है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। अब रेखांकित अंश का अर्थ मैंने तुमको पूरे का बता दिया है। तो तुम रेखांकित अंश
की व्याख्या अपने आप आराम से कर सकते हो। कर सकते हो कि नहीं कर सकते हो? कमेंट करके बताओ। कर जब बता दिया तब तो कर ही लोगे ना भाई। सर जी अपना परिवार 2 मिलियन का हो गया। हां भाई 2 मिलियन भाई। 2 मिलियन हो गया भाई। 2 मिलियन 20 लाख 20 लाख हो गया दोस्तों। 20 लाख 20 लाख हो गया। चलो आगे बढ़ते हैं। उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश के पाठ का शीर्षक पवन दूतिका है तथा कवि का नाम अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध है। पवन दूतिका और कवि
का नाम अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध है। लज्जा शीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आवे होने देना विकृत वसना तो न तू सुंदरी को जो थोड़ी भी श्रमितवा हो गोद ले शांति खोना होठों की और कमल मुख की मलानताएं मिटाना लज्जा शीला परत एक महिला जो कहीं दृष्टि आवे कोई लज्जा से यहां तक तो हो गया कोई क्लांता आकृषक ललना खेत में जो दिखावे कोई किसान की पत्नी अगर थकी हुई खेत में दिखाई पड़े धीरे-धीरे परस उसकी क्लांतियों को मिटाना तो धीरे-धीरे स्पर्श करके उसकी थकान को मिटा देना जाता कोई जलद यदि हो वम में तो
उसे ला छाया द्वारा सुखित करना तप्त भूतांगना को तो अगर कोई आ बादल का टुकड़ा आकाश में उड़ता हुआ जा रहा हो तो उसे ले आना और छाया द्वारा तप्त करना सुखद छाया द्वारा सुखित करना तप्त भूतांगना को और पृथ्वी को छाया द्वारा सुखी करना बस थोड़ी देर रुक जाओ थोड़ी देर थोड़ी देर रुक जाओ थोड़ी देर रुक जाओ बस थोड़ी देर और रुक जा सोनिए। पानी तो मैं पी लिया हूं थोड़ा सा लेकिन गले में थोड़ी-थोड़ी दिक्कत होने लगी है। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित अयोध्या संघ उपाध्याय
आर्यों द्वारा रचित पवन दूत का शीर्षक कविता से उद्रित है। प्रस्तुत पद्यांश का केंद्रीय भाव लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने नायिका के द्वारा पवन को कही गई बातों के माध्यम से परोपकार की भावना को महत्व दिया है। नायिका द्वारा स्वयं की पीड़ा से पहले दूसरों की पीड़ा एवं कष्टों को दूर करने का संदेश दिया गया है। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। नायिका पवन से लज्जाशील महिला के प्रति कैसा आचरण अपनाने के लिए कहती है? अब यह बोर्ड के लिए कौन उचित जरूरी सवाल है? अगर तुमने अर्थ समझ लिया तो तुम लिख लोगे। अगर तुम
अर्थ नहीं समझ पाए तो नहीं लिख पाओगे। इसीलिए मैं अर्थ बताता चल रहा हूं। हां बिलकुल रेस्ट देने वाला हूं तुरंत यार। रेस्ट क्यों नहीं दूंगा? तो मेरे प्यारे भाइयों थोड़ी देर हो गया। 2 मिनट 20 मिनट और 20 मिनट और मैं सोच रहा था ना तुम्हारा केक आ जाए कट जाए तब मैं रेस्ट लूं। 100 में 100 दिलवा देंगे यार। हिंदी में 100 में 100 आ जाए। चलिए नायिका पवन से लज्जाशील महिला के प्रति कैसा आचरण अपनाने के लिए कहती है? तो नायिका पवन से लज्जाशील महिला के प्रति स्नेह एवं प्रेम का आचरण अपनाने
के लिए कहती है कि यदि उसे मार्ग में कोई लज्जाशील महिला मिले तो वह उसके वस्त्रों को ना उड़ाए। यदि वह उसे थोड़ी थकी हुई लगे तो उसे अपने गोद में लेकर उसकी थकान और मुख की मलिनता को हर ले। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। राधा पवन से यह भी कहती है कि तुम्हें मार्ग में खेत में काम करने वाली कोई थकी हुई स्त्री दिखे तो तुम धीरे-धीरे उसके पास पहुंचकर अपने स्पर्श से उसकी थकान को मिटा देना। प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प सौंदर्य का संक्षेप में वर्णन कीजिए। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने तत्सम शब्दावली युक्त
खड़ी बोली का प्रयोग किया है। प्रबंध शैली में नायिका की वियोगावस्था का वर्णन किया है। रूपक पुनरुत प्रकाश व मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करके पद्यांश के भाव सौंदर्य में वृद्धि कर दी है। जो प्यारे मंजू पोन या वाटिका में खड़े हो छिद्रों में जाणित गरना वेणु साकीचकों को यो होवेगी सूरत उनको सर्व गोपांगना की जो है बंसी श्रवण रुचि से दीर्घ उत्कंठ मोती लाके फूले कमल दल को श्याम के सामने ही थोड़ा-थोड़ा विपुल जल में व्यग्र हो डुबोना केवल इंपॉर्टेंट करवा रहा हूं केवल इंपॉर्टेंट करवा रहा हूं मेरे बच्चे केवल इंपॉर्टेंट करवा रहा हूं कोई
और नहीं करवा रहा हूं तो घबराने की जरूरत त नहीं है। जितना बता रहा हूं उतना पढ़ लोगे तो कोई दिक्कत नहीं होने वाली है तुमको। जितना बता रहा हूं उतना पढ़ लोगे। जो प्यारे मंजुकन या वाटिका में खड़े हो छिद्रों में छिद्रों में जाणित करना वेणुसा कीचकों को। अगर मेरे प्यारे कृष्ण किसी सुंदर से उपवन या बगीचे में खड़े हो तो वहां पर जो कीचकों कीचक हैं। कीचक माने होता है बांस। जो बांस हैं उनके उन्हें क्वित करना अर्थात बजाना। कैसे बजाना? वेणुसा। अब यहां पर उपमा अलंकार होगा बांसुरी के समान बजाना। बांसुरी के
समान बजाना। कहां कैसे छिद्रों में प्रवेश करके तुम हवा हो। तुम बांस के छिदों में प्रवेश करोगी तो वह बांसुरी के समान बज उठेंगे। यो होवेगी सुरति उनको सुरति माने याद आना। इस प्रकार उन्हें याद आएगी सर्व गोपांगना की। इस प्रकार उन्हें सभी गोपियों की याद आएगी। जो है बंसी श्रवण रुचि से दीर्घ उत्कंठ होती। जो बंसी को सुनने की इच्छा से दीर्घ उत्कंठ होती हैं। लाके फूले कमल दल को श्याम के सामने ही और खिले हुए कमल के एक दल को खिले हुए कमल के पत्ते को ले आना और कृष्ण के सामने ही थोड़ा-थोड़ा
विपुल जल में जहां पर बहुत सारा जल हो वहां पर उस पत्ते को थोड़ा-थोड़ा जल्दी-जल्दी डुबोना व्यग्र हो डुबोना मतलब व्याकुल होकर के डुबोना यो देना ए भगिनी बतला भगिनी माने बहन हे बहन इस प्रकार उन्हें जतला देना जना देना बता देना एक अंबोज नेत्रा कमल के समान आंखों वाली एक बालिका आंखों को ही विरह विधुरा में बोलती है। वह वियोग से पीड़ित है और वियोग के आंसुओं में ही अपने आप को डुबोती रहती है। ठीक है? अब इस पर आधारित सवाल देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश का शीर्षक था रचनाकार का नाम लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश का
शीर्षक पवन दूतिका तथा रचनाकार का नाम अयोध्या से उपाध्याय हर्योधय। राधा स्वयं विरावस्था से श्री कृष्ण को अवगत कराने के लिए पवन को क्या उपाय सुझाती हैं? तो राधा श्री कृष्ण को स्वयं की विरावस्था एवं पीड़ा से अवगत कराने हेतु पवन से कहती हैं कि श्री कृष्ण के समक्ष उपस्थित कमल के पत्तों को पानी में डूबाना ताकि उस दृश्य को देखकर श्री कृष्ण कमल के नैनों वाली राधा की वियोगावस्था को पहचान लें। ठीक है? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। राधा आगे कहती है कि मेरे प्रियतम के समक्ष ही खिले हुए कमल की पंखुड़ियों को व्याकुल
होकर थोड़ा-थोड़ा जल में डूबाना ताकि ए बहन यह देख कृष्ण को इसका आभास हो जाए कि कमल नेत्रों वाली राधा वियोग में व्यथित होकर अपने नेत्रों को आंसुओं में बोए रखती हैं। अर्थात दिन रात रोती रहती हैं। पद्यांश की रस योजना पर प्रकाश डालिए। पद्यांश में श्री कृष्ण के मथुरा से द्वारिका आ जाने के कारण ब्रज की गोपियों व राधा की विरावस्था का वर्णन किया गया है। इस पद्यांश में वियोग श्रृंगार है। जब प्रेमीप्रेमिका अलग होते हैं। जब नायक नायिका अभी पीडीएफ दे दूं? क्लास बंद करके पीडीएफ दे दूं? अरे यार दे दूंगा भाई। रोने
लगते हो आगे। चलो श्री कृष्ण को गोपियों का स्मरण कराने के लिए राधा पवन से क्या कहती हैं? श्री कृष्ण को गोपियों का स्मरण कराने के लिए राधा पवन से कहती हैं कि अगर तुम्हें कृष्ण उपवन में दिखाई दें तो तुम बांस में प्रवेश करके उसे बांसुरी की तरह बजाना जिससे श्री कृष्ण को उनकी बांसुरी की मधुर आवाज सुनने के लिए लालायित गोपियों की याद आ जाए। आगे बढ़ते हैं। नीले फूले कमल दल सी गात की श्यामता। नीले खिले हुए कमल दल के समान कृष्ण के शरीर का गात माने शरीर। श्यामता मतलब नीलापन। दलसी दलसी
मतलब दल के समान दल के समान अब यहां फिर से उपमा अलंकार हो गया तो जिस प्रकार नीले खिले हुए कमल का दल होता है उसी प्रकार कृष्ण का नीला शरीर है और पीला प्यारा वसन पीला प्यारा वस्त्र कट में कट माने कमर में पहनते हैं फबीला अपने कमर में पीला प्यारा सुंदर वस्त्र पहनते हैं छूटी काली अलक मुख की कांत को है बढ़ाती उनके चेहरे की शोभा को उनके चेहरे की शोभा को छूटी काली अलक बाल बांधते समय वह तुम लोग भी लड़कियां करती हैं ना ऐसे बाल बांधते हुए ऐसे बाल का एक टुकड़ा
आगे गिरा लेती हैं। ऐसे बाल का एक टुकड़ा आगे गिरा लेती हैं। वैसे ही कृष्ण भी गिरा लेते हैं और वह छोटी काली अलक जो है उनके मुख के कांत को सुंदरता को शोभा को बढ़ाती है। सद वस्त्रों में नवल तन की फूटती सी प्रभा है। सदवस्त्रों माने सुंदर वस्त्रों में नवल तन की नए ऐसा उनका शरीर लग रहा है जैसे नया शरीर है। नए शरीर की फूटती सी प्रभा है। मतलब उनके शरीर की प्रभा है चमक चमक चमकदार शरीर है उनका। चमकदार शरीर है उनका दोस्तों। ठीक है? सांचे ढाला सकल वपु है। वपु माने
फिर से शरीर होगा। सांचे ढाला सकल वपु है। दिव्य सौंदर्यशाली। सकल वपु संपूर्ण शरीर उनका सांचे में ढाला हुआ प्रतीत होता है। सत पुष्पों सुगंधित पुष्पों के समान सुरभ महक स पवित्र पुष्पों के समान महक उसकी प्राण संपोषिका है। उस शरीर की महक कैसी है? पवित्र पुष्पों के समान है और वह हमारे प्राणों को पोषित करने वाली है। दोनों कंधे वृषभ से हैं बड़े ही सजीले। दोनों कंधे कैसे हैं? दोनों कंधे कैसे हैं? वृषभ से। वृषभ से हैं दोनों कंधे। दोनों कंधे वृषभ से हैं बड़े ही सजीले। दोनों कंधे ऐसे हैं जैसे बैल के कंधे
होते हैं। वृषभ बैल के कंधे जैसे होते हैं। वैसे दोनों कंधे बहुत सजीले बड़े सुंदर हैं। श्रेष्ठ बैलों के उर माने श्रेष्ठ। विषभ माने बैल। होता तो वो है सांड। सांड नहीं हां सांडे सांड के समान श्रेष्ठ सांडों के समान उनके दोनों कंधे हैं और लंबी बाहें उनके हाथ की जो बाहें हैं वह लंबी है। कैसी व लंबी कलभकर्ष हाथी के सूड के समान लंबी है और शक्ति की पेटिकाएं उनमें शक्ति भरी हुई है। इस पर आधारित सवाल को देखें। देखो अर्थ बताता चल रहा हूं। कंफ्यूजन कहीं नहीं होगा। राधा पवन से कृष्ण को पहचानने
का उपाय बताती हैं। राधा पवन से कृष्ण को पहचानने का उपाय बताती हैं कि उनका शरीर नीले खिले हुए कमल के समूह के समान सांवला और मनोरम है। वे कमर पर पीला वस्त्र पहनते हैं जो अति शोभायमान लगता है। उनके बालों से लटकती एक लट उनके मुख की शोभा बढ़ाती है। अलक तथा सकल शब्द का अर्थ लिखिए। अलक का अर्थ सिर के लटकते बाल तथा सकल का अर्थ संपूर्ण है। पद्यांश में यह दोनों शब्द श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं। अगले सवाल पर बात करें। कलभकर्षि में कौन सा अलंकार है? कलभर्षि पंक्ति में उपमा
अलंकार है। यहां कृष्ण की भुजाएं उपमेय की हाथी की सूड उपमान से समानता समानता दिखाई गई है। इसके कारण उपमा अलंकार तथा सी वाचक शब्द है। यह तो मैंने तुम्हें बताया था। ये पेपर किसको-किसको चाहिए बताओ? ये पेपर किसको-किसको चाहिए? आज की दुनिया बड़ी विचित्र नवीन। प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन। है बंधे नर के करों में वार्य विद्युत भाप। हुक्म पर चढ़ता उतरता है पवन का ताप। चलिए रेखांकित अंश का भावार्थ लिखिए। श्री कृष्ण के दोनों कंधे दिखने में ऐसे प्रतीत हो रहे हैं जैसे वह उत्तम कोटि के सांड के कंधे हो। यहां
कहने का भाव यह है कि श्री कृष्ण के कंधे अति बलिष्ठ हैं। उनकी भुजाएं हाथी की सूड के समान बल की पिटारी अर्थात अत्यंत शक्तिशाली हैं। अतः कृष्ण के बलशाली रूप का वर्णन इन पंक्तियों में किया गया है। पाठ का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक में संकित अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिओ द्वारा रचित पवन दूत का शीर्षक कविता से उित है। चलो कैकई का अनुताप आ गया दोस्तों। कैकई का अनुताप पढ़ लेते हैं। तदंतर बैठी सभा उज के आगे नीले वितान के तले दीप बहु जागे टकटकी लगाए नैन सुरों के
थेवे। परिणामोत्सुकन भयातुरों के थेवे। उत्फुल करौदी कुंज वायु रहकर करती थी सबको पुलक पूर्ण महम कर वह चंद्रलोक था। वहां चांदनी वैसी प्र बोले गिरा गंभीर नीर जैसी पहली बात तो अभी 6 घंटे पूरा नहीं हुआ दूसरी बात है कि मुकेश सर आ रहे हैं थोड़ी देर में तो मैं तुम्हें 5 मिनट का ब्रेक दे दूंगा आ जाने दो आ जाने दो 5 मिनट नहीं रुक सकते हो तुम लोग पांच मिनट 5 मिनट रुक मेरे लिए 5 मिनट नहीं रुक सकते हो क्या ऐसे कह दूं क्या कब आएगा केक मैं मैं भी यही सोच रहा
हूं सही सही बताऊं। मैं भी यही सोच रहा हूं कब आएगा केक यार ये लोग मतलब ऐसा बुरा धोखा कौन देता है। केक का कह के चले गए। पता नहीं कहां से केक मंगवा रहे हैं। तदंतर बैठी सभा उटज के आगे। उटज माने कुटिया होती है। उसके आगे सभा कुटिया के सामने बैठ गई। नीले वितान के तले दीप पहुगे और नीले आसमान के नीचे वितान वितान माने कैनोपी होता है। अब वहां पे आसमान फैला हुआ है। तो मैं नीला आसमान ही कहूंगा। नीले आसमान के नीचे बहुत सारे दीपक जल गए। और उन दीपकों को देखकर
क्या लगता है कि टकटकी लगाए नैन सुरों के थेवे। उन दीपकों को देखकर ऐसा लगता है जैसे वे दीपक नहीं हो बल्कि देवताओं की आंखें हो जो टकटकी लगाए देख रही हो और परिणाम सुकुंद भयातुरों के थेवे और दीपक की लौ बीच-बीच में लहरा जाती है। तो ऐसा लगता है कि वे लोग डरे हुए हैं। भय से आतुर हैं और परिणाम की इच्छा रख रहे हैं। ठीक है? उतफुल्ल करौदी कुंज वायु रहरह कर वहीं बगल में एक करौदी का बगीचा है। कौन-कौन करौदा खाया है? कोई कोई करौदा खाया है। बस थोड़ी देर रुक जाओ मैं
दे रहा हूं। उतफुल्ल करौदी कुंज वायु रहरह करती थी सबको पुलक पूर्ण मैं कर। बगल में ही करौदी का बगीचा था। वहीं से हवा वहीं से गुजर रही थी और जब वहां से गुजर के सबके पास आ रही थी तो बड़ा हरा सा माहौल लग रहा था। 20,000 लाइक पूरे हो गए। 20,000 लाइक पूरे हुए। अभी 18,000 हुए हैं। ये लोग धोखेबाज हो तुम लोग यार। ये कोई ये बिल्कुल ये ये बिल्कुल पसंद नहीं करूंगा मैं। ये नहीं हां तो 1000 लाइक वाली बात। ठीक है। चलो। उतफ्फुल्ल करौदी कुंज वायु रहकर करौंदे के कुंज से
वाह हवा रहकर बह रही थी वहां से और करती थी सबको पुलकपूर्ण मैं पर और वह सबको पुलकित कर रही थी। खुश कर रही थी। अह महक से सबको जागृत कर रही थी। वह चंद्रलोक था। वहां चांदनी वैसी भगवान बैठे हैं यार। तो चंद्रलोक तो रहेगा ही। वह चंद्रलोक था। कहां चांदनी वैसी जैसी चांदनी वहां पर बिखरी हुई थी वैसी चांदनी कहीं नहीं होती क्योंकि वह चंद्रलोक था। प्रभु बोले गिरा गंभीर भगवान ने अपनी वाणी को गंभीर किया और बोले कैसे बोले नीर निधि जैसी जैसे समुद्र बोलता है गर्जन करता है। तो यहां पर जैसी
फिर से वही बात आ जाएगी। उपमा अलंकार हो जाएगा। जैसीवाचक शब्द के रूप में प्रयोग प्रयुक्त होगा। उत्तर देखते हैं। संदर्भ संदर्भ सबको याद होगा। प्रस्तुत गद्यांश प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित साकेत महाकाव्य से हमारी पाठ्य पुस्तक काव्यांजलि में संकलित कैकई का अनुताप शीर्षक से उित है। आगे क्या हो जाएगा? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। पंचवटी में तारों से परिपूर्ण चांदनी रात में सभा हो रही थी। उस सभा में अयोध्या से भारत के साथ आए हुए सभी लोग शांति से बैठे हुए थे। उपस्थित सभी लोग उस सभा में होने वाले निर्णय के परिणाम
को जानने के लिए उत्सुक थे। उस सभा के मौन को तोड़ते हुए राम ने भरत को संबोधित करते हुए कहा कि हे भरत अब तुम अपनी इच्छा को बताओ। राम के द्वारा अत्यधिक गंभीर वाणी में बोलने से सभा को ऐसा प्रतीत हुआ कि समुद्र का जल गंभीर गर्जन कर रहा हो। प्रतीकात्मकता है। भरत किसे लेने चित्रकूट आए थे? भरत किसे लेने चित्रकूट आए थे? भरत किसे लेने चित्रकूट आए थे? तो भरत राम को लेने चित्रकूट आए थे। अगला सवाल अयोध्या राम का राज्य किसे मिला था? तो अयोध्या का राज्य भरत को मिला था। अगला सवाल
प्रभु बोले गिरा गंभीर नीर निज जैसी में कौन सा अलंकार है? तो इसमें उपमा है अनुप्रास है। गिरा और गंभीर ग की आवृत्ति है। गो की आवृत्ति गो सर फोन स्विच ऑफ हो रहा है। होने वाला है। चार्ज कर लो बेटा मेरे बेटे। पिछले एक हफ्ते से मुझे पता चला है कि नमक शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। NaCl सोडियम कहते आते थे यही अभी नरदेही माता न कुमाता पुत्र कुपुत्र भले ही अब कहे सभी यह हाय विरुद्ध विधाता है पुत्र पुत्र ही ग्रहे कुमाता माता बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न
देखा मृदुल गात्र ही देखा परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा युग युग तक चलती रहे कठोर कहानी रघुकुल में थी एक भागिन रानी अमेरिका से केक आ केक अमेरिका से नहीं आ रहा है केक में ये लोग कर रहे हैं टिटिम्मा टिटिम्मा ऐसे कर रहे हैं कि पहले इन लोगों ने केक बनवाया तो बेटा वो डिजाइन सही बना नहीं और 2 मिलियन पूरा हुआ है तो डिजाइन बिना बने कैसे एक आ जाएगा कहते आते थे अभी यही नरदेही कैकई बहुत दुखी है और कहती हैं कि अभी
तक नर की देह धारण करने वाले मनुष्य मात्र यही कहते आ रहे थे कि माता नुमाता पुत्र कुत्र भले ही माता कुमाता नहीं हो सकती पुत्र भले माता बुरी नहीं हो सकती पुत्र भले ही बुरा हो जाए पर अब कहे सभी यह हाय विरुद्ध विधाता लेकिन अब सभी विधाता के ब्रह्मा के विरुद्ध यह बात कहेंगे कि है पुत्र पुत्र ही रहे कुमाता माता कि पुत्र तो बहुत अच्छा होता है माता ही कुमाता होती है बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा मैंने क्या भैया इसका बाह्य मात्र ही देखा। दृढ़ हृदय न देखा। मृदुल गात्र ही
देखा। कई-कई कहती है मैंने इनका इसका बाहरी शरीर ही देखा। राजा का बेटा राजकुमार था। मैंने इसका मजबूत हृदय नहीं देखा। मैं मृदुल कोमल गात्र माने शरीर देखा। परमार्थ न देखा। दूसरों का भला करने की जो इच्छा इसमें है वो मैंने नहीं देखी। पूर्ण स्वार्थ ही साधा। मैंने स्वार्थ साध लिया। जो आपकी इच्छा तुम मुझसे कुछ मत पूछो दोस्त तुम्हारा जो मन करे आज मैं खुश हूं नहीं अचानक नहीं पता था सबको कुछ बताया नहीं बताया नहीं वो अलग बात दृढ़ हृदय न देखा मृदुल गात्र ही देखा परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थी ही साधा इस
कारण ही तो हाय आज यह बाधा युग युग तक चलती रहे कठोर कहानी रघुकुल में थी एक अभागिन रानी युग युग अब तक ये कहानी चलती रहेगी कि रघुकुल में एक अभागिन रानी थी। आगे बढ़ते हैं। इस पर आधारित प्रश्नों को देखते हैं। संदर्भ लिखिए। इसका प्रस्तुत पद्यांश एक बार सभी लोग सेशन को शेयर कर दो और सेशन को लाइक कर लो बेटा। सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। जितने बच्चे भी लाइव हैं सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। कोई भी बच्चा ऐसा ना हो जिसने सेशन को लाइक ना किया हो। सभी लोग
सेशन को लाइक कर लो और सेशन को शेयर कर दो। ठीक है। प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित साकेत महाकाव्य से हमारी पाठ्य पुस्तक काव्यांजलि में संकलित कैकई का अनुताप शीर्षक से उदित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कैकई श्री राम से कहती हैं कि आज तक मनुष्य यही कहते आते थे कि पुत्र कितना ही दुष्ट क्यों ना हो परंतु माता उसके प्रति कभी भी दुर्भाव नहीं रखती है। अब तो मेरे चरित्र के कारण लोगों का इस उक्ति पर से विश्वास अड़ जाएगा और संसार के लोग यही कहा करेंगे कि माता दुष्टतापूर्ण व्यवहार
कर सकती है। परंतु पुत्र कभी कुपुत्र नहीं हो सकता। आगे बढ़ते हैं। पद्यांश के अनुसार आज तक लोग क्या कहते आए थे? आए थे। पद्यांश के अनुसार आज तक लोग यही कहते आए हैं कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कुमाता नहीं हो सकती। किस किसने प्रायश्चित किया है कि मैंने पुत्र का कोमल शरीर ही देखा। उसका दृढ़ हृदय नहीं देखा। कैकई ने प्रायश्चित किया है कि मैंने पुत्र का कोमल शरीर ही देखा। उसका दृढ़ हृदय नहीं देखा। इन पंक्तियों में कैकई को किस बात पर पश्चाताप हुआ? कैकई ने प्रायश्चित किया है कि मैंने
पुत्र का कोमल शरीर ही देखा। उसका दृढ़ हृदय नहीं देखा। मेरा ब्रेसलेट खुल के गिर गई। शिवाजी बनवाल केक खुल के गिर गया भाई केक केक वापस लड़के कह रहे हैं कि केक अमेरिका से मंगवा रहे हैं क्या बहुत भैया देखो बहुत अच्छी चीज आ रही है और चीजों में समय लगता है चलिए निज जन्मजन में सुने जीव यह मेरा बेटा 500 का केक नहीं आ रहा है। केक अच्छा आ रहा है इसलिए देखो मुकेश सर आके बता के खुद गए हैं तो परछाई देख सकते हो तुम निज जन्मजन में सुने जीव यह मेरा धिक्कार
उसे था महास्वार्थ ने घेरा 100 बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत सा भाई 100 100 बार धन्यवा एक लाल की माई पागल सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई निज जन्म जन्म में सुने जीव यह मेरा कैकई कहती है मेरा जो जीव है मेरी जो जीवात्मा है यह हर जन्म में यही सुनेगी कि धिक्कार उसे था महास्वार्थ ने घेरा एक रानी जो थी रघुकुल की उसको महास्वार्थ ने घेर लिया था भगवान दुखी हो गए भगवान बोल पड़े कि 100 बार धन्य वह एक लाल की माई वह एक बेटे की
मां तो 100-100 बार धन्य है जिसने भरत जैसे भाई को जन्म दिया है पागल सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई इतना दुखी थी कैकई इतना रो रही थी कि पूरी सभा भगवान के साथ चिल्ला उठी कि 100 बार धन्य भाई एक लाल की माई इस पर आधारित सवाल देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित साकेत महाकाव्य से हमारी पाठ्य पुस्तक काव्यांजलि में संकलित कैकई का अनुताप शीर्षक से उदित है। अच्छा एक बात बताओ संदर्भ तो सब लोग लिख लोगे ना सर सभी सब सर को बुला लेना। हां सबको बुलाऊंगा भाई। सबको बुलाऊंगा। रेखांकित
अंश की व्याख्या कीजिए। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो बेटा। सबको बुला लो। बहुत सारे बच्चे अब सोच रहे होंगे स्कूल से लौटे होंगे या कहीं बाहर से लौटे होंगे। वह अब आए होंगे तो एक बार अपने WhatsApp की स्टेटस पर लिंक को लगा दो। सबको बुला लो। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कैकई स्वयं को धिक्कारती हुई कहती हैं कि मैं सद्गति ना पाऊं और जन्म जन्मांतर में प्राण यही सुनते रहे कि रकुल की उस रानी को धिक्कार है जिसे घोर स्वार्थ ने घेर कर ऐसा अनुचित कर्म कराया कि उसने धर्म का विचार बिल्कुल
छोड़ दिया और अधर्म का आचरण किया। समझ रहे हो? कैकई स्वयं को धिक्कारती हुई क्या कहती हैं? कैकई स्वयं को धिक्कारती हुई कहती है कि मैं सद्गति ना पाऊं और जन्म जन्मांतर तक मेरे प्राण यही सुनते रहे। एक टाइप के प्रश्न है दोनों। ठीक है। कैकई के प्रायश्चित के उपरांत श्री राम उनसे क्या कहते हैं? बताइए। कैकई के प्रायश्चित के उपरांत अगर तुम राम की जगह होते तो क्या करते? अगर तुम राम की जगह होते तो क्या करते? ठीक है। कैकई के प्रायश्चित के उपरांत राम उनसे कहते हैं कि तुम अभागिन नहीं हो। वरन वह
माता तो 100-100 बार धन्य है जिसने भरत जैसे भाई को जन्म दिया। प्रभु राम के साथ कैकई के अपराध का अपमार्जन करती हुई सभा क्याक चिल्ला उठी। अपमार्जन मतलब प्रक्षालन धुलती हुई समाप्त करती हुई। ठीक है? प्रभु राम के साथ कैकई के अपराध का अपमार्जन करती हुई सभा चिल्ला उठी कि भरत जैसे महान धर्मशील पुत्र को जन्म देने वाली माता 100-100 बार धन्य है। सबको बुला लूंगा बेटा। तुम भी अपने पूरे घर वालों को बुला लेना क्योंकि तुम्हारे चैनल पर पूरा हुआ है। चलो आगे बढ़ते हैं। दुर्बलता का ही चिन्ह विशेष शपथ है। यह बहुत
इंपॉर्टेंट है बेटा। इस स्टार मार्क कर लो। दुर्बलता का ही चिन्ह विशेष शपथ है। कैकई कहती है कि स्त्रियों के लिए पर अबलाजन के लिए कौन दुर्बलता का ही चिन्ह विशेष शपथ है। शपथ माने कसम खाना। कसम खाना दुर्बलता की निशानी है। कमजोरों की निशानी है। कि भैया कसम खाई दे भैया। हम गलती ना की भैया कसम खाए भैया। कोनो गलती ना की भैया माफ़ कर भैया। दुर्बलता का ही चिन्ह विशेष शब्द है। पर अबलाजन के लिए कौन सा आप है? अबलाजन के लिए कौन सा शपथ है? लेकिन अबलाजन अबलाजन माने स्त्रियां स्त्रियों के लिए
और दूसरा कौन सा शपथ है? हम कसम नहीं खाएंगे तो अपनी बात को कैसे सिद्ध करेंगे? कौन सा रास्ता हमारे लिए बचता है? यदि मैं अब उसके बाद कसम खाती हैं कि यदि मैं उकसाई गई भरत से हूं। हे राम यदि हे राम हे सभा हे समाज यदि मुझे भरत ने उकसाया हो तो पति समान ही स्वयं पुत्र को खोऊं। तो जिस प्रकार मैंने अपने पति को खो दिया वैसे ही मैं अपने पुत्र को खो दूं। अच्छा अब जब यह बात कहती हैं तो लोग गांव में होते हैं ना अरे का कहती हूं का कहती
हूं ठीक नहीं कहती हूं। ये ना ही ठीक है उचित नहीं है। ये सब नहीं कहा जात गांव में सब कहने लगते हैं। तो कैकई इस पे कहती हैं कि ठहरो मत रोको मुझे कहूं सो सुन लो। पाओ यदि उसमें सार उसे सब चुन लो। करके पहाड़ सा पाप मौन रह जाऊं। राई भर भी अंताप न करने पाऊं। कैकई कहती है कि रुको जन कही तो तुम बात साफ-साफ सुन लो। जो कह रही हैं वो सुन लो। करके पहाड़ सा हां आप तुम्हारा कमेंट दिख रहा है बेटा। मेरा कमेंट दिखता है। अच्छा सा आपको मेरा
कमेंट दिख रहा है। अच्छा लगा सर आपको मेरा कमेंट दिखता है। अच्छा ये कह रहे हो कह रहे हैं रुको। मुझे रोको मत। मेरी बात सुन लो। ठहरो मत रोको। मुझे कहूं सो सुन लो। पाओ यदि उसमें सार उसे सब चुन लो। करके पहाड़ सा पाप। इतना बड़ा पाप किया है मैंने। इतना बड़ा पाप करके मौन रह जाऊं। राई भर भी अनुताप ना करने पाऊं इतना भी दुख ना जाहिर करने पाऊं थी सनक क्षत्र ससिसा ओस टपकाती रोती थी नीरव सभा हृदय थपकाती उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी सब में भय विस्मय और क्रोध
भरती थी नहीं क्रोध नहीं खेद है क्या कर सकती थी इनकी मंत्र राशि तो थी सन क्षत्र शशि निशा शशि शशि माने चंद्रमा सनक्षत्र चंद्रमा था आसमान में तारों के साथ पूरी चांदनी रात थी चांद और तारे निखिले हुए थे ओस टपकाती और ओस टपक रही थी रोती थी नीरव सभा हृदय थपकाती और पूरी सभा इस वार्तालाप को सुनकर अपना हृदय थपकाते हुए शांति से आंसू बहा रही थी रो नहीं रही थी उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी रानी दिशा दीप्त करती थी रानी दिशाओं को प्रकाशित कर रही थी कैसे जैसे उल्कापिंड करता है
उल्कापिंड जानते हो क्या होता है? कौन-कौन जानता है? उल्कापिंड क्या होता है? जरा कमेंट करके मुझे बताओ। मैं बताता हूं उल्कापिंड क्या होता है? तुम लोग बताओ कौन-कौन जानता है? आसमान से जब ग्रहों उपग्रहों के टुकड़े जमीन पर गिरते हैं तो वह वायुमंडल में प्रवेश करते समय हवा के घर्षण से जलने लगते हैं। तो उनका प्रकाश चारों तरफ फैल जाता है। हाउ इज द जोश बॉयज? हाउ इज द जोश? हाय सर। हाउ इज द जोस? हाय सर। उल्का सी रानी दिशा दीप्त कर दी थी। अरे दे देंगे भाई ब्रेक यार एक बार अनब्रेकेबल हो जाओ
आज अनब्रेकेबल हो जाओ दोस्तों कोई ब्रेक नहीं एक बार में कूद के चीर दो फाड़ दो चलो सब में भय विस्मय और खेद क्या कर सकती थी मरी मंथरा दासी मेरा ही मन रह न सका निज विश्वासी कैकई कहती है कि मरी मंथरा दासी क्या करती मेरा ही मन विश्वासी सी नहीं था। मुझे ही विश्वास नहीं था। मरी मंथरा दासी का क्या दोष है? उसने तो उंगली की। भड़की तो मैं भड़की तो मैं भाई भड़की तो मैं। अच्छा एक बात बताओ तुम लोग कैकई को बुरा मानते हो कि अच्छा मानते हो? सभी लोग मुझे बताओ
तुम लोग कैकई को बुरा मानते हो कि अच्छा मानते हो? सभी लोग कमेंट करो और सेशन को शेयर कर दो बेटा। 20,000 लाइक अब तक हो जाने चाहिए थे। उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी। सब में भय विश्व। दिए गए पद्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए। दिए गए पद्यांश के कवि और कविता का नाम लिखिए। सभी लोग लिखेंगे। दिए गए पद्यांश के कवि और कविता का नाम लिखिए। सारे बच्चे लिखेंगे। सभी लोग लिखेंगे। ठीक है? दिए गए पद्यांश के कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं। तथा इस कविता का नाम भैया कैकई का प्रताप है।
इतना आप तो सब जानते हो। सर क्लास में भूत आ गया है। क्लास में भूत है क्या? बदल दिया क्या फिर से? अभी बदल रहा था भाई। दुर्बलता का ही चिन्ह विशेष शपथ है। इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि प्रायः अपनी बात को सिद्ध करने के लिए लोग शपथ खाते हैं। यह प्रवृत्ति शपथ खाने वालों की दुर्बलता को स्पष्ट करती है। इस पद्यांश में किस भाव को व्यक्त किया गया है? तो प्रस्तुत पद्यांश में कैकई के पश्चाताप के भाव को कवि ने अपूर्व ढंग से व्यक्त किया। मतलब जैसा
पहले कभी ना किया गया हो। उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी। इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है? तो भैया सी वाचक शब्द है उपमा अलंकार का। तो उपमा अलंकार है। क्या लिख रहे हो भैया? गुस्साए गुस्सा आए। वो मुंह बना के लड़का एक लिख रहा है। रुको मैं वहां कमेंट देखता हूं भाई। क्यों गुस्सा आए हो बेटा? क्या हो गया बेटा? ओ मेरे बेटे क्या हो गया तुमको? कुछ भी कर लो बेटा। पेपर तो यहीं से फंसेगा। सर आपके साथ में दिल्ली में अतुल मिश्रा गोंडा के पढ़ते थे। मेरे भैया हैं। अच्छा ओके
ओके आपके लिए जान दे देंगे सर जान दे देंगे जान नहीं चाहिए जान नहीं चाहिए प्यार चाहिए तुम्हारा प्यार दो मुझे दिल से भर दो कमेंट सेक्शन कवि कहता है कि प्राय लोग अपनी बात सिद्ध करने के लिए शपथ खाते हैं या प्रवृत्ति शपथ खाने वाले की दुर्बलता को स्पष्ट करती है शपथ खाना व्यक्ति की कमजोरी का निशानी है तथा मुझ अबला मुझ अबला के लिए शपथ खाकर अपनी बात को प्रमाणित करने के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है। इस प्रकार सौगंध खाते हुए कैकई ने कहा कि वास्तविकता यह है कि इस कार्य के लिए
भरत ने मुझे उकसाया है। यदि कोई इस बात को सिद्ध कर दे कि मुझे भरत ने इस कार्य के लिए प्रेरित किया है तो मैं पति के समान ही अपने पुत्र को खो दूं। ठीक है? गीत पढ़ना जरूरी नहीं है। गीत रहने देते हैं। गीत रहने देते हैं। गीत उतने जरूरी नहीं है बेटा। अ मैं तुम्हें श्रद्धा मनु पढ़ा देता हूं। और श्रद्धा मनु वाला जो गीत है। अरे बोर्ड करंट मारो। हे भैया आज कुछ तो हो रहा है यार मेरे काफी स्टूडियो। मेरे साथ कुछ तो हो रहा है आज। कमिंग सून। यह गलत बात
है यार। यह गलत बात है। मेरे साथ कुछ तो हो रहा है। कुछ तो बुरी शक्तियां घुसी हुई है यहां पर। निकाल फेंको उनको। चलो सबसे पहला गीत है। गीत श्रद्धा मन वाला गीत बहुत इंपॉर्टेंट है बेटा। श्रद्धा मन वाला गीत बहुत इंपॉर्टेंट है। इस गीत को पढ़ते हैं। गीत क्या है? बीती विभावरी जागरी। बीती विभावरी। बीत गई है। क्या? विभावरी। विभावरी माने रात जागरी बीती विभावरी जागरी हे सखी रात बीत गई है जाग जाओ बीती विभावरी जागरी एक लेखक कहता है कि एक सखी दूसरे सखी से बात कर रही है क्या कर रही है
बात कर रही है बात करते-करते क्या कहती है बात करते-करते कहती है कि बीती विभावरी जागरी हे सखी रात बीत गई है जाग जाओ क्या कहती है रात बीत गई है जाग जाग जाओ। अब तुम्हारा जागना ही उचित है। अब कोई और दूसरा कारण नहीं हो सकता। अब तुम्हें जागना पड़ेगा। अंबर पनघट में डुबो रही ताराघट उषा नागरी। अंबर रूपी पनघट में तारों से भरे घड़े को उषा रूपी नायिका डुबो रही है। प्रतीकात्मक बात कही गई है कि भैया गगन रूपी पनघट में उषा रूपी नायिका नक्षत्र रूपी घड़े घड़े को डुबो रही है। अर्थात सूर्य
के उगते ही सुबह के होते ही सारे तारे आसमान में गायब हो गए हैं। उसके बाद खग कुल कुल कुल सा बोल रहा किसलय का आंचल डोल रहा। खग कुल पक्षियों का खग माने पक्षी कुल माने परिवार खी पक्षियों का जो परिवार है कुलकुल सा बोल रहा हो कलर कर रहा है और किसल का आंचल डोल रहा ये जो नए पत्ते निकले हुए हैं इन ये ऐसे डोल रहे हैं जैसे किसी साड़ी का आंचल डोल रहा हो लो यह लतिका भी भर लाई और देखो ये नईनई लता ये नईनई लता है दोस्तों ये नईनई लता
है दोस्तों ये नईनई लता है दोस्तों थैंक यू मैम आप आप क्यों लेके आई हैं। लेके आई मत सोचिए सर लोग को मेरा भी प्यारे बच्चों आइए आइए इधर आ जाइए। प्यारे बच्चों आज के लिए हमारे जो क्या कहते हैं मैम जो आप अंग्रेजी में बताइए बहन हो छोटी इतना तो अरे बहन छोटी पहले तो बहन छोटी सबसे पहले तो वो वेटर होती है। छोटी बहन छोटा भाई वेटर ही होता है बेटा। उससे ज्यादा कुछ नहीं होता वो। अब कुछ नहीं ले आऊंगी। जो कुछ मंगाया ना मना कर दूंगी सबकी। मैंने यही जान लो। ये
जरूरी है। तुम भी अपने छोटे बहन छोटे भाइयों को से काम कराओ। अत्याचार करो उनके ऊपर। नहीं सर आप पढ़ा रहे काफी थैंक यू। थैंक यू। आराम से पढ़ाइए। कितने घंटे हो गए? कितने हो गए? हो गए छ घंटे। 6 भाई साहब केक एक घंटे से आ रहा है। हमें बच्चे लिख रहे हैं सर अमेरिका से आ रहा है केक। ये बनवाए थे केक। हमने देखा कैसा था वो? तो इन ये अच्छा केक बनवाएंगे। ये उम्मीद थी पहले से क्या? आ गया केक। नहीं आकाश को। वो गए हैं लेने आकाश। क्या? कंटिन्यू करिए सर आप
पहने लोग को। चलिए प्यारे बच्चों तो खग कुल कुलकुल सा बोल रहा पक्षियों का जो परिवार है वो कुलकुल सा बोल रहा कलर कर रहा है किसल का आंचल डोल रहा और किसलेल का पत्तियों को पत्तियां ऐसे डोल रही है जैसे आंचल डोल रहा हो लो यह लतिका भी भर लाई ये जो नईनई लता भी खिली है यह भी भर लाई क्या मधु मुकुल नवल रस गागरी छोटी-छोटी कलियां खिलाई है इसमें नए रस से भरी हुई मधु से भरी हुई कलियां खिलाई हैं। ऐसा लगता है कि रस से भरी हुई नईनई गागर लेके आ गई
है। ठीक है? अधरों में राग अमंद पिए और तुम मेरी बात जो नहीं सुन रही हो। तुम अपने होठों में अधरों में अमंद राग पिए हुए अलकों में मलयज अपने बालों में मलयज मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित हवा को अपने बालों में कैद करके सो रही हो। तू अब तक सोई है आली। हे सखी तुम अब तक सोई हुई हो। आंखों में भरे विहागरी तुम अपनी आंखों में स्वप्न भरे हुए सो रही हो। विहाग माने स्वप्न ही होता है। 20,000 लाइक पूरे हो गए। रुको देखने दो। नहीं हुआ 20,000 अभी बदतमीज कहीं का लालच
देता है मुझे। झूठ बोल के बताता है। जाकर लाइक करो। 20,000 करवाओ। प्रस्तुत पद्यांश के कवि और शीर्षक का नाम उल्लेख कीजिए। तो प्रस्तुत पद्यांश छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित बीति विभावरी जागरी गीत से उद्रित है। अगला अंबर पनघट में डुबो रही ताराघट उषा नागरी। इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से नायिका की सखी उसे सुबह होने के विषय में बताते हुए कहती है कि उषा रूपी नायिका आकाश रूपी पनगट में तारा रूपी घड़े को डुबो रही है। अर्थात रात्रि का समय समाप्त हो गया और सुबह हो गई है। लेकिन
वह अभी तक सोई हुई है। ठीक है? प्रभात का वर्णन करने के लिए कवि ने किन-किन उपादानों का प्रयोग किया है? तो प्रभात का वर्णन करने के लिए कवि ने आकाश में तारों के छिपने, सुबह-सुबह पक्षियों के चहचहाने, पेड़ पौधों पर नए पत्तों के ऊ हिलने, समस्त कलियों के पुष्पों में परिवर्तित हो जाने, पराग से युक्त हो जाने होकर पराग संयुक्त होने आदि उपादानों का प्रयोग किया है। प्रसुत पद्यांश के कथ्य का वर्णन कीजिए। प्रस्तुत पद्यांश में सुबह होने के पश्चात भी नायिका के सोने के कारण उसकी सखी उसे जगाने के लिए आकाश के तारों
के छिपने, पक्षियों के चहचहाने आदि घटनाओं का वर्णन करते हुए उसे जगाने का प्रयास करती हैं। वह उसे बताना चाहता है कि सर्वत्र प्रकाश होने के कारण सभी अपने कार्यों में संलग्न हो गए हैं। किंतु वह अभी भी सोई हुई है। प्रस्तुत गद्यांश में मानवीकरण अलंकार की योजना पर प्रकाश डालिए। मानवीकरण अलंकार में प्राकृतिक उपादानों के क्रियाकलापों का वर्णन मानवीय क्रियाकलापों के रूप में किया जाता है। प्रसुत पद्यांश में सुबह की नायिका के रूप में वर्णन पत्तों का आंचल टोलना, लताओं का गागर भरकर लाना आदि पद्यांश में मानवीकरण अलंकार के प्रयोग पर प्रकाश डालते हैं।
अब आ गया तुम्हारा श्रद्धा और मन। ए भाई इधर आओ। कौन है यहां पर? ओ उनको भेज सुनाई नहीं पड़ता भाई। पब्लिश चलो चल रहा होगा ना ठीक चलो चलो सभी लोग कौन तुम संस्कृत जल नित तीर तरंगों से फेंकी मणि एक कर रहे निर्जन का चुपचाप प्रभा की धारा से अभिषेक मधुर विश्रामंत और एकांत जगत का सुलझा हुआ रहस्य और करुणा में सुंदर मौन यही जीवन मन का आलस्य चलो चलो कौन तुम संस्कृत जल तीर श्रद्धा मनुष्य से पूछती है कि हे आदमी हे जंगली कौन हो तुम संसार रूपी सागर के द्वारा फेंकी गई
संसार रूपी सागर के किनारे तरंगों द्वारा फेंकी गई मणि के समान इस निर्जन स्थान को अपने होने से प्रकाशित करने वाले हे जंगली कौन हो तुम मधुर विश्राम ांत और एकांत जगत का सुलझा हुआ रहस्य एक करुणामय सुंदर मौन और जीवन मन का आलस्य थके हुए प्रतीत होते हो चेहरे पर आलस्य है तुम्हारे ऐसा लगता है जैसे तुम्हारा चंचल मन आलसी हो गया है तुम्हारे चेहरे पर तुम्हारा चेहरा रहस्यमई है और ऐसा लगता है तुमने उस रहस्य को सुलझा भी लिया है दुखी हो कुल मिला के दुखी हो क्या बात है क्या बात है दोस्तों
इसका सवाल पाठ का शीर्षक और कवि का नाम। कितने बच्चे ऐसे हैं जो इसका उत्तर दे लेंगे? पाठ का शीर्षक और कवि का नाम? सर सब शॉपिंग करने में बिजी हैं। बेटा ठीक है। एक बात बताऊं तुमको। आज के 5 साल बाद या तो तुम अपने बच्चों को मतलब आज के 10 साल बाद आज के 15 साल बाद या तो तुम अपने बच्चों को यह बता रहे होगे कि बेटा घर पे शादी थी। इस वजह से मेरा बोर्ड एग्जाम खराब हो गया था। या तो तुम यह बता रहेगे कि बेटा घर पर शादी थी लेकिन
मैंने बोर्ड एग्जाम में टॉप किया। हो सकता है चार फोटो में मैं नहीं आया लेकिन मैंने टॉप किया। दोनों में से चुनाव तुम्हारा है। जाओ शॉपिंग कर लो कोई दिक्कत नहीं है। पाठ का शीर्षक और कवि का नाम बताओ। प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक सामान्य हिंदी के श्रद्धा मन नामक शीर्षक से उित है। यह हंस कामायनी महाकाव्य से लिया गया है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद जी हैं। अगला सवाल प्रस्तुत पद्यांश में संस्कृत जल निधि किसे कहा और वह क्यों कहा गया है? अब देखो प्रस्तुत पद्यांश में संस्कृत जल नात संसार रूपी सागर से निकली हुई
अमूल्य निधि मनु को कहा गया है। क्योंकि जिस तरह सागर की तरंगे अपने भीतर की अमूल्य मणियों व मोतियों को किनारे पर लाकर छोड़ देती हैं। उसी प्रकार जल प्लावन की घटना ने मनु को इस संसार में छोड़ दिया है। चलिए आगे बढ़ते हैं दोस्तों। हाउ इज द जोश गाइस? प्रस्तुत पद्यांश में किसके मन की व्याकुलता को उजागर किया गया है? तो प्रस्तुत पद्यांश में जल प्लावन की घटना के पश्चात संपूर्ण संसार में नीरवता छा गई है। लेकिन उसके पश्चात भी इस निर्जन संसार में मनु के रूप में मनुष्य को देखकर श्रद्धा के मन में
उसके विषय में जानने की व्याकुलता थी। श्रद्धा के मन की इसी व्याकुलता को कवि ने काव्यांश में उजागर किया है। मन को देखने के पश्चात श्रद्धा को कैसी अनुभूति होती है? देखो भैया ये सब बहुत इंपॉर्टेंट सवाल हैं। ठीक है? किस-किस जिले से हो? अपने जिले का नाम बताओ। अपने जिले का नाम बताओ सभी लोग। थोड़ा जाग जाओ यार। जाग जाओ। 6:30 4:00 बज रहा है दिन का और तुम लोग सो रहे हो। ठीक है? वह समुद्र से निकली हुई मणियों की मात्र प्रतीत होती है जो किनारे पर पड़ा होकर समुद्र तट को अपनी आभा
से आलोकित करता है। साथ ही वह उसे मधुरता और निरवता से परिपूर्ण संसार में सुलझे हुए रास की तरह दिखाई देता है। आगे बढ़ते हैं। पद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है बेटा? पद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है? प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने सागर की लहरों द्वारा फेंकी गई मणि से मन की तुलना करते हुए फेंकी गई मणि से मन की तुलना करके उसके एकांकी जीवन को निराशा और कर्म विरत स्थिति का चित्रण किया है। जिसे वह श्रद्धा द्वारा यह कहलवाकर प्रकट करते हैं कि तुम्हारे चंचल मन से मन ने आलस्य ग्रहण कर लिया है। तुम्हारे
चंचल मन ने आलस्य ग्रहण कर लिया है। बस्ती आजमगढ़ महोबा सबसे ज्यादा किस जिले के बच्चे हैं? गोंडा से कितने लोग हैं? इस बार मैं गोंडा आऊंगा। सबसे मिलूंगा। दुखन नाथ मंदिर पे आना है सबको। दुखनाथ मंदिर पे सबको आना है। आना है। होली वाले दिन होली वाले दिन। होली वाले दिन नहीं। दुखरानाथ वाले मंदिर पर आना है। चलिए नील परिधान बीच सुकुमार खुल रहा मृदुलदुलांग। श्रद्धा ने नीले कपड़े पहन रखे हैं। नीला वस्त्र पहन रखा है। और उस नीले वस्त्र के पहनने के बाद जैसे देखो मेरा हाथ खुला हुआ है। ऐसे ही कुछ अंग
श्रद्धा के दिखाई पड़ रहे हैं। और वह मृदुल अंग जो हैं उनको देखकर ऐसा लगता है जैसे नीले कपड़े यानी नीले बादलों के बीच में बिजली का फूल खिला हुआ हो। मेघ बन बीच गुलाबी रंग। मेघों के मेघों के जंगल के बीच में गुलाबी रंग का बिजली का फूल खिला हुआ हो। और उसके बाद मुख की सुंदरता की बात आती है। ओहो वह मुख पश्चिम के वोंम। क्या लिखा है जयशंकर प्रसाद ने कि और जब श्रद्धा का मुख देखा तो कैसा प्रतीत हुआ कि जैसे पश्चिम के आकाश में बीच जब घिरते हो घनश्याम जब कभी-कभी
पश्चिम दिशा में शाम के टाइम बादल घिराते हैं और उन बादलों को छेद करके सूर्य हल्का सा चमकता है वैसी लग रही है श्रद्धा खूब सारे बाल हैं श्रद्धा के उसमें से उनका प्यारा सा छोटा कुट्टू सा चेहरा दिख रहा क्यूट सचिन ऐसा लगा मैं श्रद्धा अरे यार जाने दो ठीक है तो ओवा मुख पश्चिम के वम में जब गिरते हैं वो घनश्याम पश्चिम में बादल छा जाते हैं उसमें जो घनश्या जो गिरता है और अरुण रवि मंडल उनको भेद दिखाई देता हो चविधाम अरुण रवि सूर्य का जो आभा मंडल है वह उसको भेद कर
जब दिखाई देता हो। ठीक है। अब इस पर आधारित सवाल देखते हैं। पाठ का शीर्षक और कविता नाम लिखिए। तो प्रस्तुत पाठ का शीर्षक श्रद्धा मनुन है और इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद है। उपर्युक्त कविता में किसके रूप का वर्णन किया गया है? उपर्युक्त प्रस्तुत कविता में श्रद्धा के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है। बिजली के फूल से क्या तात्पर्य है? बिजली के फूल का तात्पर्य श्रद्धा का आकर्षक गौर वर्ण से युक्त सुंदर शरीर है। उपर्युक्त में कौन सा अलंकार है? प्रस्तुत काव्यांश में उत्प्रेक्षा है, रूपक है, विरोधाभास अलंकार है। ठीक है। सर केक सर
केक सर केक केक आ रहा है भाई। मैं मुकेश सर को फिर से फोन कर लूं क्या? ब्रेक दे दूंगा बेटा। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो। ब्रेक दे दूंगा। अभी केक आ जाएगा तब मैं ब्रेक दूंगा। केक आ जाएगा तब मैं ब्रेक दूंगा। चलो रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। रेखांकित अंश की व्याख्या क्या है? श्रद्धा अपने शरीर पर पीले रंग नहीं भाई साहब। नीले रंग। नीले रंग का मेष चर्म धारण किए हुए हैं। मेष चर्म मतलब भेड़ की खाल। उसने उनकी वेशभूषा में
कहीं-कहीं उनके कोमल और सुगमा रंग दिखाई दे रहे हैं और उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो नीले बादलों के वन में गुलाबी रंग का सुंदर बिजली का फूल खिला हुआ हो। अगला सवाल एक तुम यह विस्तृत भूखंड प्रकृति वैभव से भरा आनंद कर्म का भोग भोग का कर्म यही जड़ चेतन का आनंद। अकेले तुम कैसे असहाय यजन कर सकते तुक्ष विचार। तपस्वी आकर्षण से हीन कर सके नहीं आत्मविस्तार। जब तक तुम में सौंदर्य के प्रति चेतना नहीं जागेगी तब तक सौंदर्य तुमको लुभाएगा नहीं तब तक ये दुनिया सुंदर नहीं बनेगी। एक तुम और
ये पूरी फैली हुई पृथ्वी प्रकृति वैभव से भरा आनंद ये चारों तरफ प्रकृति से वैभव से भरे हुए भंडार जो तुम्हारे लिए हैं कर्म का भोग भोग का कर्म यही जड़ चेतन का आनंद। किसी जड़ रूपी या चेतन रूपी जो जीव है उनके जीवन का विभाजन यही से है कि जो चैतन्य है वो कर्म करके भोग करता है और फिर उसे भोगने के बाद पुनः उसे कर्म करना पड़ता है। अकेले तुम कैसे असहायजन कर सकते तुम अकेले कैसे तुमने कैसे सोच लिया कि तुम इस मानवता रूपी संसार में सांसारिक यज्ञ को अकेले कर पाओगे नहीं
कर पाओगे तपस्वी आकर्षण से हीन कर सके नहीं आत्मविस्तार हे तपस्वी अगर आप आकर्षण से हीन हो गए तो कभी आप अपना विस्तार नहीं कर पाएंगे। कोई भी तपस्वी जो आकर्षण से हीन हुआ वह आत्मविस्तार नहीं कर पाया। 20,000 लाइक पूरे नहीं हुए हैं। जल्दी से करवा दो मैं भूम मारूंगा। प्रस्तुत पद्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए बेटा। तो प्रस्तुत पद्यांश के रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। इस कविता का नाम श्रद्धा और मनु है। संसार में सभी जड़ चेतन किससे परिपूर्ण हैं? तो संसार में सभी जड़ चेतन आनंद से परिपूर्ण है। इस प्रसंग का
इस पद्यांश का प्रसंग क्या है? किस बारे में बात हो रही है सर आपने मेरा कमेंट नहीं पढ़ा पढ़ तो लिया भाई नॉट ब्रेक ओनली क्रैक तोड़ते हैं पेपर खटाक तोड़ दे पेपर पेपर तोड़ दे गुटखा खा के लोग कैसे बोलते हैं अरे भैया बनारसी पान खाए हैं हम। बहुत मजा आ रहा है। समझ रहे हो? आओ बताओ तो पेपर लीक कर दे। बताओ कर दे पेपर लीक। कितना पेपर चाहिए तुमको? सातों से दे दे क्या? सात के सातों दे देते हैं। देख लो उसमें से जो तुम्हारे वहां जाए कर लेना। बाकी ठीक है। बाकी
जो बच जाए वो हमें दे देना वापस। मजा आ गया। प्रस्तुत पद्यांश में श्रद्धा निराश मनु में आशा का संचार करने का प्रयास कर रही हैं। आशा का संचार करने का प्रयास कर रही हैं। प्रकृति वैभव से भरा आनंद इस पंक्ति का क्या अर्थ है? प्रकृति वैभव से भरा मन। इस पंक्ति का अर्थ है कि विभिन्न प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण यासार पृथ्वी तुम्हारे उपभोग के लिए ही तो है। तुम अपने कर्म और कठोर परिश्रम के द्वारा इस संपूर्ण प्रकृति का उपभोग कर सकते हो। रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए। श्रद्धा मन को इस कर्म के लिए
प्रेरित उत्प्रेरित करती हुई कहती हैं कि हम अपने वर्तमान जीवन में पूर्व संचित कर्मों का भोग करते हैं और आगामी भोगों के लिए निरंतर कर्म करते हैं। इस प्रकार यह प्रकृति जड़ होकर चैतन्य प्राणी के समान आनंद प्राप्त कर रही है। जिसे जिस प्रकार किसी भी प्रेरणा के बिना अपने समय पर वृक्षों में फल फूल लग जाते हैं। उसी प्रकार पहले किए हुए कर्म भी अपने फल भोग के समय का उल्लंघन नहीं करते। अर्थात उपयुक्त समय पर आकर हमारे सामने खड़े हो जाते हैं। जिस प्रकार तेल समाप्त होने पर दीपक बुझ जाता है, उसी प्रकार
कर्म के क्षीण हो जाने पर भाग्य भी क्षीण हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को कर्म पथ पर निरंतर अग्रसर होते रहना चाहिए। मन को तो मजा आ ही गया होगा। इतनी सुंदर लड़की जंगल में मिल जाए। मतलब ऐसा ऐसा मेरे को यार तुम लोग गंदा बुलवा देते हो मुझसे। मैं कह रहा हूं मतलब जैसा कि कोई अकेला आदमी है यार जंगल में बैठा है कोई दुनिया खत्म हो गई है तो ऐसे में अगर कोई सहारा मिल जाए और उसके बाद ऐसा सहारा मिल जाए कि सीधा प्रपोज ही कर दे कि भैया चलो शादी कर लेते
हैं तो थोड़ा अच्छा लगता है मतलब समझो अच्छा लगता है भाई यार जंगल है एक तो कोई बात नहीं सॉरी गाइस चलो नौका विहार परिवर्तन और बापू के प्रति इस पर आ जाते हैं जितने भी इंपॉर्टेंट गद्यांश से वही करवा रहा हूं। जोज्यों लगती नाव पार उमे आलोकित शत विचार इस धारा साही जग का क्रम शाश्वत इस जीवन का उद्गम शाश्वत है शाश्वत है है गति शाश्वत संगम शाश्वत नव का नीला विकास शाश्वत शशि का यह रचत हास शाश्वत लघु लहरों का विलास हे जग जीवन के करण धार चिर जन्म मरण के आर पार शाश्वत
जीवन नो का विहार मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान जीवन का यह शाश्वत प्रमाण करता मुझको अमृत दान। लेखक कहता है कि जैसे-जैसे नाव किनारे की ओर जा रही है, मेरे उर में, मेरे हृदय में आलोकित हो रहा है, प्रकाशित हो रहा है। क्या? शत विचार। सैकड़ों विचार प्रकाशित हो रहा है। इस धारा सा ही जग का क्रम। जैसे इस नदी की धारा है, निरंतर बहती हुई, वैसा ही इस दुनिया का क्रम है। इस जग का क्रम है, शाश्वत इस जीवन का उद्गम। और वैसा ही इस जीवन का उद्गम भी है। हमेशा बना रहने वाला शाश्वत
हमेशा बना रहने वाला शाश्वत है गति जो हमारे जीवन की गति है यह भी शाश्वत है। एक आएगा एक जाएगा एक आएगा एक जाएगा एक आएगा एक जाएगा। शाश्वत संगम और यहां पर जो मेल मिलाप हो रहा है वह भी शाश्वत है। मैं नहीं रहूंगा। कोई यहां पर रहेगा। भूत ने मालती माधवम में लिखा कि उत्प्सते तुम कोप समान धर्म कालो हे निर्ध विपला पृथ्वी मेरे जैसे विचारों वाले और लोग पैदा होंगे पृथ्वी रत्न गर्भा है और समय का कोई अंत नहीं है कालो हेम निर्ध विपुलाच पृथ्वी यार मैंने सोचा था किसी दिन संस्कृत पढ़ाऊंगा
तुम लोगों को मैं सोच रहा हूं नेट वालों को संस्कृत पढ़ा दूं बहुत ज्यादा ज्ञान ले लिया मैंने आपके अंदर अब खत्म ही नहीं हो रहा है तुम लोगों को यही पढ़ाता हूं बस। शाश्वत नव का नीला विकास। लेखक कहता है कि भैया जो आसमान का विकास है यह हमेशा नीला ही रहेगा। शाश्वत है हमेशा रहने वाला है। शाश्वत शशिकाया रजत हास जो ये चांदनी जैसी हंसी है चंद्रमा की ये हमेशा रहने वाली है। शाश्वत लघु लहरों का विलास। ये छोटी-छोटी लहरें कूद फाद रही है, खेल रही हैं। ये हमेशा रहने वाला है। हे जग
जीवन के करणधार। अब यहां पर दो प्रतीक हैं। एक तो नाव चलाने वाला जो नाव खेह रहा है वह नाव का कर्णधार है। जग जीवन का कर्णधार ईश्वर है। तो हे जग जीवन के कर्णधार चिर जन्म मरण के आर पार इस जन्म मृत्यु के आरपार शाश्वत जीवन नौका विहार जो हमारा जीवन है यह इसी नौका विहार के समान है। मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान इतना मैं सोच रहा था तो मैं अपना अस्तित्व का ज्ञान ही भूल गया था। जीवन का यह शाश्वत प्रमाण मैं इस जीवन के शाश्वत प्रमाण में खो गया। करता मुझको अमृतान जो
मुझे अमर कर रहा था जो मेरे अस्तित्व को परिभाषित कर रहा था कि भाई जितना समय मिला है एंजॉय कर लो नोटिस जारी है लीक मत बोलो क्या होगा बेटा जेल भेज देंगे लीक शब्द है एक लीक माने होता है लीक करना पेपर को लीक कर रहा हूं इसीलिए तुमको इतना पढ़ा रहा हूं इसी में छुपा के दे दूंगा पता ही नहीं चलेगा किसी को उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं शीर्षक कविता का नाम लिखिए क्या है? उपर्युक्त पद्यांश के कवि सुमित्रानंदन पंत है। शीर्षक नौका विहार कविता है। जग का क्रम कैसा है? तो जग कवि
कहता है कि जग का क्रम गंगा जी की जलधारा के समान शाश्वत है। इस पद्यांश के अनुसार क्या-क्या तथ्य शाश्वत है? प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार संसार का क्रम, जीवन का उद्गम, गंगा की जलधारा के समान, जीवन की गत तथा मिलन, आकाश, चंद्रमा आदि ये सभी शाश्वत हैं। रजत हास और कर्णधार का क्या अर्थ है? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। रजतहास का अर्थ है चांदनी के समान हसीन कणधार का अर्थ है नाव चलाने वाला अर्थात नाविक या ईश्वर जीवन की नाव तो ईश्वर चला रहा है रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए कवि कहता है कि जिस प्रकार
गंगा की यह धारा अनादिका काल से प्रवाहित होती चली आ रही है उसी प्रकार यह संसार भी अनादिकाल से चला आ रहा है। जिस प्रकार गंगा के जल का उद्गम प्रवाह एवं सागर में मिलना शाश्वत है। उसी प्रकार जीवन का उद्गम होना, उत्पन्न होना, गतिशील होना और अंत में विराट तत्व में विलीन हो जाना शाश्वत है। ठीक है? संस्कृत का बताऊंगा। सेशन को सभी लोग एक बार शेयर कर दो बेटा। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो। जब पहुंची चपला बीच धार चपला माने नाव। जब नाव धारा के बीच में पहुंच गई। छिप
गया चांदनी का कगार तो जो रेतीला कगार था वो छिप गया। दो बाहों से दूरस्थ तीर दोनों किनारे दो बाहों के समान प्रतीत होने लगे। आलिंगन करने को अधीर और ऐसा लगा जैसे दोनों बाह एक दूसरे का आलिंगन करने के लिए परेशान हो। अति दूर क्षितिज पर बिटप माल और बहुत दूर क्षतिज पर जहां पर धरती आसमान मिलते हुए प्रतीत हो रहे थे वहां पर वृक्षों की माला थी। लगती भ्रू रेखा सी अराल जो आकाश की भौहों के समान प्रतीत हो रही थी। अपलक बहुत इंपॉर्टेंट चैप्टर है। बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट चैप्टर है। ध्यान देना। नव
नील न विशाल मां के उर पर शिष्या समीप सोया धारा में एक दीप उर्मिल प्रवाह को कर प्रदीप वह कौन विहग क्या विकल कोक उड़ता हरने निजविरा शोक छाया की कोकी को विलोक समझ रहे हो इस पर आधारित सवाल देखते हैं प्रस्तुत पद्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए देखो पद्यांश से तुम्हारे 10 नंबर के सवाल आते हैं ठीक है? और यह संभव बहुत सरल होते हैं। खोना नहीं है। समझ रहे हो? चलो। प्रस्तुत पद्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। नौका विहार के समय कवि को दूर से
दिखने वाले तट कैसे प्रतीत होते हैं? कवि वृक्षों को देखकर कैसा प्रतीत? कवि को वृक्षों को देखकर कैसा प्रतीत हुआ? धारा के बीच स्थित द्वीप कैसा दिखाई पड़ता है? प्रस्तुत पद्यांश के कवि सुमित्रानंदन पंत और कविता का शीर्षक नौका विहार है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। चांदनी रात में गंगा और उसके समीपस्थ प्राकृतिक सुषमा का मनमोहक चित्रण करते हुए कवि पंत कहते हैं कि जब हमारी नौका गंगा की बीच धारा में पहुंची तो हमारी दृष्टि से चंद्रमा की चांदनी में चमकता हुआ रेतीला कगार ओझल हो गया। उस समय दूर-दूर तक स्थित गंगा के दोनों तट
फैली हुई दो बाह के समान प्रतीत हो रहे थे। वे गंगा की धारा के क्षीण काय कोमल नारी शरीर से आलिंगनबद्ध होने के लिए अधीर थे। समझ रहे हो? सर मैं आपको 10:00 बजे सही फॉलो कर रहा हूं। आपने अभी तक मेरा कमेंट नहीं पढ़ा। लो पढ़ लिया बेटा। कार्तिक पांडे व्लॉग। अगला क्या है? नौका विहार के समय कवि को दूर से दिखने वाले तट ऐसे प्रतीत हो रहे हैं जैसे व्याकुल होकर गंगा की धारा रूपी नायिका के पतले कोमल शरीर का आलिंगन करना चाहते हो। कवि को दूर क्षितज पर कतारव वृक्षों को देखकर ऐसा
लग रहा है। मानो वे नीले आकाश के विशाल नेत्रों की तिरछी भोएं हैं और धरती को अपलक निहार रही हो। ठीक है। आज रुकना नहीं है। चलते रहिए कि चलते रहने का सिलसिला हूं मैं। सेशन को सभी लोग शेयर कर दो। 20,000 लाइक हुआ कि नहीं हुआ? 20,000 लाइक हुआ कि नहीं हुआ? सेशन को सभी लोग शेयर कर दो। सेशन को सभी लोग लाइक कर लो बेटा। जल्दी से। सेशन को सभी लोग जल्दी से लाइक कर लो। ठीक है? गंगा की धारा के बीच द्वीप ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे मां के वक्षस्थल में चिपक कर
कोई नन्हा सा बालक सो रहा हो। अगला सवाल शांत स्निग्ध ज्योत सा उज्जवल पलक अनंत नीरव भूतल सगत सैया पर दुबल तन वंगी गंगा ग्री सरल लेटी है शांत क्लांत निश्चल तापस बाला गंगा निर्मल शशि मुख से दीपित मृद करतल शशि मुख से दीपित मृदु करतल शशि मुख से दीपित मृदु करत तल लहर उर पर कोमल कुंतल गोरे अंगों पर सिहर सिहर लहराता तार तरल सुंदर चंचल अमचल सा नीलांबर साड़ी सी सिकुड़न सी जिस पर शशि की रेशमी विभा से भर सिमटी है वह तुल में लहर शांत स्निग्ध ज्योत्सना उज्जल शांत स्निग्ध ज्योत्सना उज्जल अरे
ब्रेक मिल जाएगा रुक जाओ ठीक है इस पर आधारित सवाल को देखते हैं यही इंपॉर्टेंट अंतिम इंपॉर्टेंट पैराग्राफ इस पाठ का है ठीक है उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए प्रस्तुत पद्य पद्य पंक्तियों में किसका चित्रण किया गया है गंगा भालू के मध्य बहती हुई कैसी प्रतीत हो रही है प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने अपने आसपास कैसा वातावरण का वर्णन किया है? अब चलो इसका अर्थ देखो। शांत स्निग्ध ज्योतना उज्जल। पृथ्वी शांत है और बहुत तरल चांदनी फैली हुई है। अपलक अनंत नीरव भूतल अनंत यानी आकाश अपलक शांत पृथ्वी को। नीरव
भूतल शांत पृथ्वी को देख रहा है। सैकत सैया पर दुग्ध धवल तनवंगी गंगा ग्रीस विरल। सैकत सैया पर बालू की सैया पर जो दुग्ध धवल है। दूध के समान सफेद है। तनवंगी गंगा ग्रीस विरल जो कृषकाय गंगा है वे गर्मी के कारण दूर-दूर हो गई है विरल हो गई है लेटी है श्रांत क्लांत निश्चल वह थकी हुई कुमलाई लेटी हैं में गोरे अंगों पर सिहर-सिहर लहराता तार तरल सुंदर गोरे अंगों पर सियर-सिहर गोरे अंगों पर सिहर-सिहर कांप-कांप कर लहराता तार तरल सुंदर ऐसा लगता है कि उस गोरे शरीर पर जैसे वो जल है वो लहरा
रहा है उस शरीर को टच कर करके छू कर करके चंचल अंचल सा नींबर तो ऐसा लग रहा है कि जैसे शरीर को छू करके आंचल जैसे लहराता है वैसे लहरा रहा हो साड़ी सी सिकुड़न सी जिस स्पर्शकी रेशमी विभा से भर पानी की करवटें सिलवटें जो हैं उसको देखकर लग रहा है कि वह साड़ी की सिलवटें हैं और उनके बीच चंद्रमा को चमक चंद्रमा जब चमकता है तो ऐसा लगता है कि साड़ी रेशमी साड़ी की सिलवटें हैं जो रहरह कर चमक जा रही हैं। सिमटी है वर्तुल मृदुल लहर। लहर ऐसे वर्तुल होकर सिमट गई
है कि वहां पर रेशमी साड़ी का प्रतीकात्मक चित्रण हो रहा है। ठीक है? इसका अर्थ देखते हैं। इसका उत्तर देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता संकलन गुंजन से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित नौका विहार शीर्षक से उतरित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कवि सुमित्रानंदन पंत कहते हैं कि चारों ओर शांत, स्निग्ध और उज्जवल चांदनी छिटकी हुई है। आकाश टकटकी बांधे हुए पृथ्वी को देख रहा है। पृथ्वी शांत और शब्द रहित है। ऐसे मनोहर और निस्तब्ध वातावरण में ग्रीष्म के कारण मंद और क्षीणधारा वाली गंगा बालू के बीच मंदमंद बहती हुई ऐसी
प्रतीत हो रही हैं। मानो कोई छरहरे दुबले पतले शरीर वाली सुंदर युवती दूध जैसी सफेद शैया पर गर्मी से व्याकुल होकर थकी मुरझाई और शांत लेटी हुई हो। ठीक है। प्रस्तुत पद्यांश में एक कवि ने चांदनी रात में अपनी मित्र मंडली के साथ गंगा में किए गए नौका विहार का चित्रण किया है। गंगा बालू के बीच बहती हुई ऐसी प्रतीत हो रही है मानो कोई छरहरे दुबले पतले शरीर वाली सुंदर युवती दूध जैसी सफेद सैया पर ग्रीष्म गर्मी से व्याकुल होकर थकी मुरझाई एवं शांत लेटी हुई हो। कवि के अनुसार शांत एवं स्निग्ध एवं उज्जवल
चांदनी छिटकी हुई है। आकाश टकटकी बांधे पृथ्वी को देख रहा है। पृथ्वी अत्यधिक शांत एवं शब्द रहित है। समझ में आ रहा है? वो कह रहा है केक दूसरी दुनिया से आ रहा है। केक दूसरी दुनिया से नहीं आ रहा है। यहीं से आ रहा है। सेशन को सभी लोग शेयर कर दो बेटा। सेशन को सभी लोग शेयर करेंगे और सेशन को सभी लोग लाइक कर लेंगे। हां मैं पता ही कर रहा हूं भाई। तुम्हें ढूंढती हैं ये पागल निगाहें। यह पागल निगाहें मैं जिंदा हूं लेकिन कहां जिंदगी महादेवी वर्मा के गीत पढ़ लेते हैं।
महादेवी वर्मा का गीत पढ़ लेते हैं। देखो जो सबसे इंपॉर्टेंट पैराग्राफ है वो करा रहा हूं। जो सबसे इंपॉर्टेंट है ध्यान रखना। चूक मत जाना गाइज। गाइज चूकना नहीं गाइज। आ मजा आ गया गीत चिर सजग आंखें नींदी आज कैसा व्यस्त बाना जाग तुझको दूर जाना महादेवी वर्मा कहती हैं कि हे मेरे प्राण तुम्हारी आंखें सज सजग रहती थी जागती रहती थी आज उनमें नींद कैसे भरी है यह तुम्हारा वस्त्र आज खराब कैसे है व्यस्त बाना बाना माने वस्त्र आज तुम्हारा वस्त्र अस्त-व्यस्त कैसे है? जाग जाओ। तुम्हें बहुत दूर तक जाना है। अचल हिमगिरी के
हृदय में आज चाहे कंपले। कभी ना हिलने डुलने वाला जो हिमगिरी है जो बर्फ का पहाड़ है उसके हृदय में आज चाहे कंपन हो जाए या प्रलय के आंसुओं में मौन अलसित वम रोले। वम माने होता है आकाश। चाहे आकाश प्रलयंकारी वर्षा करने लगे। बिजली गिरा दे। आज पी आलोक की डोले तिमिर की घोर छाया आज चाहे पूरे प्रकाश को आलोक माने प्रकाश आज पूरे प्रकाश को चाहे अंधकार पी जाए आज चाहे पूरे प्रकाश को अंधकार निगल जाएग या विद्युत शिखाओं में निट तूफान बोले आज चाहे बिजली कड़के तूफान उठे बिजली गिरे सब कुछ ध्वस्त
हो जाएग जाओ तुम पत्र लेखन की ट्रिक बता दूंगा सभी लोग सेशन को शेयर कर दो जल्दी से लाइक कर लो पर तुझे है नाश पथ पर चिन्ह अपने छोड़ छोड़ा ाना। लेकिन तुम्हें क्या करना है? इस नाशवान पथ पर अपने चिन्ह छोड़ आने हैं। अपनी पहचान छोड़ानी है। ठीक है? जाग तुझको दूर जाना। जाग जाओ तुम्हें दूर तक जाना है। इस पर आधारित सवालों को देखते हैं। पहला सवाल क्या है? प्रस्तुत पद्यांश की कवयत्रियों एवं कविता का नाम लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश श्रीमती महादेवी वर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह सांध्य गीत में संकलित गीत एक शीर्षक
कविता से उ्रृत है। प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवयत्री ने पथिक को क्या प्रेरणा दी है? प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवयित्री ने पथिक को निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जाने की प्रेरणा दी है। प्रस्तुत पंक्तियों में किसका उल्लेख किया गया है? प्रसुत पंक्तियों में महादेवी ने एक सच्ची साधिका के रूप में साधना के मार्ग में आने वाली विविध बाधाओं का प्रतीकात्मक शब्दावली के रूप में उल्लेख किया है। अचल हिमगिरी के हृदय में आज चाहे कंपले इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है? अचल हिमगिर के हृदय में आज चाहे कंपले इस पंक्ति में प्रकृति
का मानवीकृत रूप दिखाया गया है। मानवीकृत रूप का वर्णन किया गया है। अतः यहां मानवीकरण अलंकार होगा। देखो सारे प्रश्नों को ध्यान से देख लेना। ये वही प्रश्न है जो इस बार तुम्हारे बोर्ड एग्जाम में आने वाले हैं। ये वही प्रश्न है। ठीक है? समझ लो सभी लोग। चलो अगला सवाल। क्या हुआ? चलो भाई केक कहां है? आ रहा है। ऋषि सर Instagram पर एक्टिव है। भाग मैं Instagram अच्छा Instagram खुला रखा है। देखो 94,000 फॉलोअ हो गए हैं। 6,000 बचा है 1 लाख होने में। इसे भी तुम लोग पूरा करवा दो। रेखांकित पंथ की
व्याख्या कीजिए। महादेवी वर्मा अपने साधना पथ में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहती हैं कि हे प्राण चाहे आज हिमालय कंपित हो जाए या फिर आकाश से प्रलय काल की वर्षा होने लगे अथवा घोर अंधकार प्रकाश को निगल जाए और चाहे चमकती और कड़कती हुई बिजली में से तूफान बोलने लगे तो तुम्हें उस विनाश वेला में अपने चिन्हों को छोड़ते चलना है और साधना पथ से विचलित नहीं होना है। अच्छा चलो आगे बढ़ते हैं। कहना ठंडी सांस में अब भूल वह जलती कहानी। आग हो उ में कहना ठंडी सांस में अब भूल वह
जलती कहानी। जो जीवन में कठिनाई हो गई हो गई भूल जाओ उसे। अब उसे बार-बार मत कहो। उसको बार-बार अपनी चेतना में मत लाओ। आग हो उर में तुम्हारे हृदय में जब आग होगी ना तभी दृग में सजेगा आज पानी तभी आंखों में आज पानी सजेगा हार भी तेरी बनेगी मान नीज जय की पताका और इतना संघर्ष करने के बाद अगर तुम हार भी गए ना तो तुम्हारी जो हार है वह भी विजय पताका के समान सम्मानित होगी राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी पता है तुम्हें कि दीपक ही अमर होता है
जो पतंगा उसके चारों ओर घूमता है वो जल के राख हो जाता है तुझे अंगार शैया सैया पर मृदुल कलियां बिछाना तुम्हें अंगार सैया पर तुम्हें अंगारों के बिस्तर पर कोमल कलियां बिछाना है जाग जाओ तुम्हें दूर जाना है जाग जाओ यार कुछ नमकीन चाहिए ये नहीं अच्छा है दे रहा हूं भाई। इस पर आधारित सवाल देखते हैं। संदर्भ कितने बच्चे लिख लेंगे? सभी लोग दिल रिएक्ट करो। कितने बच्चे ऐसे हैं जो संदर्भ लिख लेंगे? संदर्भ कौन-कौन लिख लेगा? तो प्रस्तुत पद्यांश श्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह सांद गीत में संकलित गीत एक शीर्षक
कविता से उित है। प्रस्तुत काव्य पंक्तियों से कवत्री का क्या आशय है? प्रस्तुत काव्य पंक्तियों से कवत्री का आशय है कि साधना के कष्टों से घबराकर साधक को हार नहीं मानना चाहिए। साधना के मार्ग पर चलने से मिली सफलता भी गौरव का ही कारण बनती है। भाई तुम लड़ाई लड़े। अरे धोखेबाज नहीं हूं। दे रहा हूं ब्रेक। धोखेबाज हूं। धोखेबाज नहीं हूं बेटा। धोखा तो मैंने उसे नहीं दिया जिसने मुझे ब्लॉक कर दिया। तुम्हें कहां धोखा दे दूंगा? तुम्हें क्यों धोखा दूंगा? सा चलो अगला आगे बढ़ते हैं। मनुष्य को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने
के लिए क्या करना चाहिए? कवत्री महादेवी वर्मा जी कहती हैं कि मनुष्य को जीवन में आने वाले दुखों एवं कठिन परिस्थितियों आदि को भूलकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। प्रस्तुत पंक्तियों में कवित्री ने किसका आवाहन किया है? तो प्रस्तुत पंक्तियों में महादेवी वर्मा ने मनुष्य की आत्मा को साधना पथ पर बढ़ते रहने की प्रेरणा देते हुए आत्मबल को जगाने का आवाहन किया है। अरे यार कब आ रहा है भाई? हे भाई मैं अब नहीं कहूंगा। हम चलिए रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए। प्रस्तुत पंक्ति में एकनिष्ठ एवं सच्चे प्रेम के
परिणाम के संदर्भ में महादेवी जी कहती हैं कि यदि किसी के हृदय में अज्ञात प्रियतम के प्रति सच्चा प्रेम है तथा इसके हृदय में अपने प्रियतम से मिलने की एकनिष्ठ छटपट विद्यमान है तो इस स्थिति में व्यक्ति की हार भी जीत ही मानी जाएगी। भाव यह है कि प्रेम की सफलता इसी में है कि हम एकनिष्ठ भाव से अपने प्रेम को प्रदर्शित करते रहे। चाहे हमारा अपने प्रियतम से मिलन हो या ना हो। पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला। महादेवी वर्मा कहती हैं कि पंथ होने दो अपरिचित। पंथ माने रास्ता। अपरचित माने अनजान।
रास्ते को अनजान रहने दो। मेरे प्राणों को अकेला ही छोड़ दो। मेरे प्राणों को परेशान मत करो। उन्हें अकेला ही छोड़ दो। घेर ले छाया अमावन। चाहे आज अमावस्या की रात बनकर छाया मुझे घेर ले। आज कज्जल अश्रुओं में रिमझिमा ले या गिरागन। आज चाहे काजल लगी आंखों से इतनी बारिश हो जाए जैसे बादलों से रिमझिम बारिश होती है और होंगे नयन सूखे वे लोग और होंगे जिनके आंखों की नजर सूख गई आंखों का पानी सूख गया तिल बुझे और पलक रूखे जो तिल तिल बुझ गए और जिनकी पलकें रूखी हो गई आद्र चितवन में
यहां शत विद्युतों में द्वीप खेला आद्र चितमवन में बरसात में यहां पर सैकड़ों विद्युत विद्युत सैकड़ों बिजलियों के बीच में मेरा दीप जलता रहा है। इस पर आधारित सवालों को देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश श्रीमती माधवी वर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह दीप शिख से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित गीत टू शीर्षक से उद्रित है। कवित्री को साधना पथ पर बढ़ने से कौन नहीं रोक सकता? तो कवित्री को साधना पथ पर बढ़ने से कवयत्री को मार्ग में आने वाली बाधाएं साधना पथ पर आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती हैं? प्रस्तुत पद्यांश में
लेखिका किस पथा पर आगे बढ़ने का आवाहन करती हैं? तो प्रस्तुत पद्यांश में लेखिका साधना के अपरिचित पथ पर बिना घबराहट एवं हिचकिचाहट के आगे बढ़ने का आवाहन करती हैं। इस पद्यांश में कवत्री किस भावना को व्यक्त किया गया है? इस पद्यांश में कवत्री ने वेदना भाव को व्यक्त किया है। किसको व्यक्त किया है? वेदना भाव को। रेखांकित पंत की व्याख्या कीजिए। से महादेवी वर्मा का उद्देश्य अज्ञात प्रियतम से मिलने हेतु निरंतर अपने लक्ष्य पथ पर चलते रहना है। इसी संदर्भ में वे कहती हैं यदि कोई भी लक्ष्य पथ पर उनके साथ ना चले और
उनकी बाधाएं भी उन्हें अकेले ही पार करनी पड़े तो भी वह निरंतर अपने लक्ष्य पर चलती रहेंगी। अच्छा तुम लोग यार कितने प्रतिशत नंबर लाना चाहते हो? सही बताओ। मतलब ऐसा किस कितने बच्चों को लगता है कि अगर मैं इतने प्रतिशत नंबर ले आऊं तो अच्छा है। पहली बार खा रहा हूं सुबह से। अभी तक कुछ खाया नहीं है। रुक जाओ। बस केक आ जाएगा तभी ब्रेक दूंगा। भाई केक कटने वाला टाइम ब्रेक का टाइम होगा। मुझे सच बताऊं मुझे केकवेक से कोई मतलब है नहीं। मैं जब केक कटने लगेगा वही टाइम ब्रेक का होगा
फिर पढ़ाना शुरू करूंगा। ठीक है। दो मिलियन मैं नीर भरी दुख की बदली। महादेवी कहती है कि मैं नीर भरी मैं जल से भरी हुई दुख की बदली के समान हूं। जैसे बादल होता है जल से भरा हुआ उसी प्रकार मैं भी हूं। स्पंदन में चिरस्पंद बसा। जिस प्रकार बादल एक जगह ठहरे हुए कंपन करते रहते हैं, उसी प्रकार मेरे भी अंदर एक स्थाई ठहराव आ गया है। मैं जीवन तो जी रही हूं, चल फिर तो रही हूं, हिल ही डुलर तो रही हूं, लेकिन एक स्थाई भाव मेरे अंदर है। क्रंदन में आहात विश्व हंसा
और जिस प्रकार बादलों के गड़गड़ाने पर लोग हंसते हैं। उसी प्रकार मेरी भी अभिव्यक्ति पर लोगों को आनंद मिलता है। वह कहते हैं क्या ही गीत लिख दिया। वाह वाह वाह वाह। नैनों में दीपक से जलते और मेरे नैनों में हमेशा दीपक सा जला करता है। ऐसा लगता है कि हमेशा आग जल रही हो। पलकों में निर्झरनी मचली और मेरी पलकों से हमेशा नदी की धारा प्रवाहित होती रहती है। सर एक सवाल था वह आपको छोड़कर क्यों गई? ज्यादा समझदार थी पढ़ी लिखी एक शेर है ना कि यह रास्ते जो चमकदार नजर आते हैं। सब
तेरी ओढ़नी के तार नजर आते हैं। कोई पागल ही मोहब्बत से सवारे। कोई पागल ही मोहब्बत से नवाजेगा मुझे। आप तो खैर समझदार नजर आते हैं। ठीक है? अब इस पर आधारित सवालों को देखते हैं। उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ प्रस्तुत पद्यांश श्री महादेव वर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह सांध्य गीत से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित गीत तीन शीर्षक से उद्रित है। कवत्री के निरंतर रुदन का क्या कारण है? प्रीतम से मिलने की व्याकुलता कवित्री के निरंतर रुदन का कारण है। प्रस्तुत पंक्तियों में कवित्री ने स्वयं को क्या बताया है? प्रस्तुत पंक्तियों में कवित्री ने स्वयं
को दुख की बदली बताया है। ठीक है? नैनों में दीपक से जलते इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है? प्रस्तुत पंक्ति में उपमा अलंकार है। ठीक है? रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए। महादेव वर्मा ने अपने जीवन की तुलना बदली से करते हुए कहती है कि मैं नीर भरी दुख की बदली हूं। अर्थात मेरा जीवन दुख की बदलियों से भरा हुआ है। जिस प्रकार बदली पानी से भरी हुई रहती है। उसी प्रकार अथाह विरह की वेदना के कारण मेरी आंखों में आंसू भरे हुए रहते हैं। ठीक है? विस्तृत नभ का कोई कोना मेरा ना कभी अपना
होना। इस फैले हुए आकाश का कोई भी कोना कभी मेरा नहीं होगा। जिस प्रकार बादलों का कोई कोना कभी नहीं होता। बादल आते हैं बारिश करके चले जाते हैं। उसी प्रकार मेरा भी कोई कोना इस दुनिया में नहीं होगा। मेरा न कभी अपना होना मेरा कभी अपना नहीं होगा। परिचय इतना इतिहास यही उमड़ी कल थी मिटाज चली। मेरा परिचय और इतिहास बादलों के समान बस इतना ही है कि उमड़ी कर थी आवाज नहीं आ रही है क्या मेरी आवाज आ रही है सबको आ रही है आवाज ना तुझे वॉइस वाइस पता नहीं कौन कमेंट कर
रहा है बेवकूफ परिचय इतना इतिहास है ही उमड़ी कल मिटा आज चली मेरा इतना परिचय इतना ही इतिहास है कि कल मैं उमड़ी थी आज जा रहे हो जैसे बादल आते हैं बारिश करके चले जाते हैं इस पर आधारित सवालों को देखते हैं पद्यांश की कवित्री एवं पाठ का नाम तो प्रस्तुत पद्यांश श्रीमती महादेवी वर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह सांध्य गीत नामक काव्य संग्रह से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित गीत तीन शीर्षक कविता से उित रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। बदली के माध्यम से अपने जीवन की व्याख्या प्रस्तुत करती हुई महादेवी कहती हैं कि बदली
आकाश में रहती है किंतु विस्तर्ण आकाश का कोई भी कोना उसका अपना नहीं होता। वह तो मात्र इधर-उधर भ्रमण करती रहती है। उसका परिचय और इतिहास तो केवल इतना ही है कि वह कभी-कभी कभी अभी-अभी उमड़ती थी और देखते ही देखते मिट गई। इस प्रकार महादेवी वर्मा अपने जीवन के विषय में कि इस विस्तृत संसार का कोई विभाग मेरा अपना नहीं है। मेरा तो केवल इतना ही परिचय और यही इतिहास है कि मैं कल आई थी और आज जा रही हूं। प्रसुत पद्यांश में अलंकार योजना बताइए। प्रसुत पद्यांश में अनुप्रास अलंकार है और मानवीकरण अलंकार
है। अनुप्रास है और मानवीकरण है। ठीक है? कवत्री अपने जीवन की तुलना किससे करती हैं और वह क्यों करती हैं? तो प्रस्तुत पद्यास में कवत्री अपने जीवन की तुलना बदली से करती हैं क्योंकि उनका परिचय और इतिहास यही है कि वह क्षणभंगुर है। काव्य पंक्तियों के अंत में कवत्री अपना परिचय किस रूप में प्रस्तुत करती हैं? तो काव्य पंक्तियों के अंत में कवत्री महादेव वर्मा जी कहती हैं कि मेरा तो केवल इतना ही परिचय है और इतिहास है कि मैं कल आई थी और आज जा रही हूं। अर्थात मेरा जीवन क्षणिक है। सर प्लीज दो
मिलियन के लिए ब्रेक दे दीजिए। बस दो थोड़ी देर रुक जाओ। थोड़ी देर और रुक जाओ। 20,000 लाइक करवा दो। फिर ब्रेक मांगो। चलो हो हो गया दो मिनट आ रहा अब पुरवा आ गया बेटा पुरवा आ गया और मेरा गला गया मेरा गया गला और पुरवा आ गया ठीक है मेरा गला गया और पुरवा आ गया गला खराब हो गया ना एग्जाम टाइम पर गला ना खराब हो तो फिर क्या खराब हुआ मर्द मानव की विजय का सूर्य हूं मैं हे बहुत सुंदर कविता है मर्तमानों की विजय का तूर हूं मैं उर्वशी हां यार
याद आ गई भाई तुम लोगों ने पूछ लिया तो याद आ गई मर्त मानव के विजय का सूर्य हूं मैं मरणशील मनुष्यों के विजय का संघनाद हूं उर्वशी अपने समय का सूर्य हूं मैं हे उर्वशी मैं मानवता के मस्तक पर प्रकाशित अपने समय का सूर्य हूं अंधतम के भाल पर पावक जलाता हूं मैं अंधेरे के मस्तक पर अग्नि प्रज्वलित कर देता हूं। बादलों के शीश पर चंदन चलाता हूं। मैं बादलों के सिर पर रथ चला देता हूं। पर न जाने बात क्या है। लेकिन मुझे पता नहीं चल रहा क्या बात हो रही है मेरे साथ।
इंद्र का आयुध पुरुष जो झेल सकता है। जो पुरुष इंद्र के वज्र को झेल सकता है। सिंह से बाहें मिलाकर खेल सकता है। जो पुरुष सिंह से बाहें मिलाकर लड़ सकता है। फूल के आगे वही असहाय हो जाता। वही पुरुष फूल के आगे बड़ा कमजोर सा हो जाता है। शक्ति के रहते हुए निरुपाय हो जाता। वही पुरुष शक्ति के रहते हुए बड़ा कमजोर हो जाता है। वृद्ध हो जाता है सहज बंकिम नैन के बाण से और बहुत सहजता से विध माने बंध जाता है। बंकिम नयन के बाण से तिरछी आंखों से कोई लड़की देख ले
तो पुरुष वैसे ही बंध जाता है। ऐसा है तुम लोगों के साथ भी? कोई तुम्हें तिरछी आंखों से देख ले तो बंध जाते हो क्या? हैं भाई। वो लिख रहा है जय हिंद जय कॉमर्स। सभी लोग अपना रियल नाम बताओ। तुम्हारे साथ तो ऐसा नहीं होता होगा। जीत लेती रूप सी नारी उसे मुस्कान से। चलो आगे बढ़ते हैं। उपर्युक्त पद्यांश के एक कवि एवं शीर्षक का नाम लिखिए। पुरवा उर्वशी को अपना परिचय किस रूप में देती है? तो शीर्षक का नाम क्या है? प्रस पद्यांश रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित महाकाव्य उर्वशी से हमारी पाठ्य पुस्तक
में संकलित पुरवा शीर्षक से संकलित है। पुरवा उर्वशी को अपना परिचय किस रूप में देती हैं? तो पुरवा उर्वशी के समक्ष अपनी सामर्थ्य का परिचय देते हुए कहता है कि मैं नश्वर मनुष्य की विजय का शंखनाद हूं। समय को आलोकित करने वाला सूर्य हूं। मैं अंधकार के मस्तक पर अग्नि शिख प्रज्वलित कर उसका विनाश करने में सक्षम हूं। मैं बादलों के ऊपर अपना रथ चलाता हूं। अर्थात मेरी गति सर्वत्र एवं बाधा रहित है। अगला प्रश्न क्या है? पुरुष और फूल जैसी कोमल नारी के सामने क्यों असहाय हो जाता है? चंदन और आयुध शब्दों का क्या
अर्थ है? पुरुष फूल जैसी कोमल नारी के सामने इसलिए असहाय हो जाता है क्योंकि बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष सुंदर युक्ति की तिरछी चितनी एवं मुस्कान के सामने नतमस्तक हो जाते हैं। चंदन का अर्थ है रथ। आयुध का अर्थ है शस्त्र। अगला क्या है? रेखांकित अंश की व्याख्या नारी सौंदर्य के सामने अपने असहाय दशा को प्रकट करते हुए पुरवा कहते हैं तुम में से कितने लोग भैया प्रभावित हो जाते हो बोर्ड एग्जाम तक मत होना 15 16 17 तीन दिन बस नारी के सौंदर्य के सामने अपनी असहाय दशा को प्रकट करते हुए पूर्णमा कहते हैं
कि आज ना जाने क्यों मैं इतना शक्तिहीन हो गया हूं जो व्यक्ति इंद्र के वज्र को झेल सकता है। सिंह को अपनी भुजाओं के बल से पराजित कर सकता है। वही पुरुष के सामने सुकोमल नारी के सामने असहाय पुरुष के समान पुष्प के समान सुकोमल नारी के सामने असहाय हो जाता है। पुष्प के समान सुकोमल नारी के सामने असहाय हो जाता है। ठीक है? शक्ति होते हुए भी उसे कोई उपाय नहीं सूझता। शक्तिशाली और बलशाली व्यक्ति भी सुंदरी की स्वाभाविक दृष्टि के बाण से घायल हो जाते हैं और सुंदर युवती एक मुस्कान से उसके हृदय
को जीतकर अपने वश में कर लेती है। अतः कवि इस मनोवैज्ञानिक तथ्य को स्पष्ट करते हुए कहता है कि बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष नारी की कटाक्ष चितवन के सामने नतमस्तक हो जाते हैं। मैं नाम गोत्र से रहित पुष्प अंबर में उड़ती हुई मुक्त आनंद शिखा इतिवृत्तन सौंदर्य चेतना की तरंग सुरनर किन्नर गंधर्व नहीं प्रियमय केवल अप्सरा विश्व नर के अतृप्त इच्छा सागर से समुद्भूत ठीक है चलिए इस पर आधारित तीन सवाल है अब इसका अर्थ क्या होगा यह तो उसका है उर्वशी का है यह उर्वशी का है मैं नाम गोत्र से रहता हूं उर्वशी
कहती है कि मेरा कोई नाम और गोत्र नहीं है सर सभा से कुछ खाया नहीं है। मैंने भी तो कुछ नहीं खाया है। तुम्हारे साथ ही तो हूं। 20,000 लाइक हुए कि नहीं? 500 करो उसको तुरंत। चलो। मैं नाम गोत्र से रहित पुष्प। मैं बिना नाम और गोत्र वाला पुष्प हूं। अंबर में जैसे मुक्त आनंद शिख उड़ती है। जैसे अग्नि की ज्योति उड़ती रहती है। वैसे मैं उड़ रही हूं। इतिवृत्तन मेरा कोई इतिहास नहीं है। इतिवृत्तन सौंदर्य चेतना की तरंग मैं सौंदर्य चेतना की तरंग हूं। ठीक है? सुर नर किन्नर गंधा तो मैं देवता हूं।
नर हूं ना किन्नर हूं ना गंधर्व हूं। प्रिय मैं केवल अप्सरा प्रिय मैं केवल अप्सरा हूं। अ विश्व विश्व नर के अतृप्त इच्छा सागर से समुदभूत मैं इस दुनिया के क्या बेटा सर जी 2000 लाइव हो गए आपका ब्रेक दे दीजिए अरे थोड़ी देर रुको बस केक आ रहा है जब केक आ जाएगा मैं ब्रेक दे दूंगा आ जाने दो सुबह 10 घंटे अरे तो देखो देखो पहली बार 10 घंटे पढ़ो अच्छा लगेगा ना पहली बार 10 घंटे पढ़ के मजा आएगा बैठ के पढ़ो ठीक है चलो उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रसुत का पंक्तियों
में उर्वशी किस्से क्या कह रही है? तो संदर्भ क्या हो जाएगा? प्रस्तुत पद्यांश रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित महाकाव्य उर्वशी से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित उर्वशी शीर्षक से उद्रित है। प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में उर्वशी किससे कह रही हैं? तो प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में उर्वशी पुरवा से कह रही हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? तो प्रस्तुत पद्यांश में मानवीकरण एवं अनुप्रास अलंकार है। इस पद्यांश का क्या प्रसंग होगा और रेखांकित अंश की व्याख्या। इस पद्यांश में पूर्व उर्वशी पुरवा के समक्ष अपने भावों को प्रकट कर रही हैं। उर्वशी पुरवा से कहती हैं कि
मेरी गणना ना तो देवताओं में है और ना मनुष्यों में ना किन्नरों में ही। हे प्रिय मैं तो केवल एक साधारण अप्सरा हूं। जिनका जन्म सांसारिक प्राणियों और ब्रह्म की इच्छाओं के सागर से हुआ है। तात्पर्य यह है कि उर्वशी केवल बिहार में ही रुचि रखती हैं। अर्थात घूमने में ये नहीं ये मत समझ लेना कि उर्वशी केवल बिहार राज्य में रुचि रखती हैं और उत्तर प्रदेश के बच्चों का कोई ख्याल नहीं रखेंगी। ना ना तुम्हारी उर्वशी अलग होगी ना। इस दुनिया में किसके पास उर्वशी नहीं है? मिलती नहीं है। कई बार हमें अपनी उर्वशियां
खोज के रखनी पड़ती है। हमें पता होता है कि हमारी कौन उर्वशी है लेकिन कभी मिलती नहीं है। ठीक है? दर्द भरे दिल से एक जाम पिलाया जाए। आज फिर उनको उनकी उड़ीसी से मिलाया जाए। वाह शेर बन गया। चलो जिनका जन्म सांसारिक प्राणियों वहां ब्रह्म की इच्छाओं सागर तात्पर्य है कि उर्वशी के बिहार में रुचि रखती हैं और उसी को महत्व देती हैं और उसी स्वयं अपना परिचय देते हुए स्वयं को सांसारिक इच्छाओं का परिणाम बताती हैं। अगला मेरे सम्मुख नत हो रहते गजराज मत मेरे सम्मुख नत हो रहे रहते झुक कर रहते हैं।
गजराज मत नशे में चूर हाथी भी मेरे सामने झुक के रहता है। झुक के रहता है। केसरी सर शारदूल भूल निज हिंस भाव केसरी केसरी कोसरी को शेर भालू चीता जितने भी हिंसक जानवर हैं वह अपना हिंस भाव त्याग कर मेरे घर में गृह मृग समान जैसे घर में रहने वाला मृग होता है उसी के समान निर्वष बिना विष के अर्थात बिना किसी बुराई के अहिंस बनकर जीते और अहिंसा से जीते हैं। मेरी भ्रू स्मित को देख चकित विस्मित विभोर और मेरी भ्रू स्मृति मेरी भौहों के संचालन को देखकर चकित विस्मित विभोर भाव विभोर होकर
चकित होकर विस्मय में भरकर सुरमा निमिष खोले अहक रह जाते निमिष माने होता है पलकें तो सुरमा पलकें खोले अयास आयुष गोरखपुर वाले लव यू बेटा बिना खाए पिए ही संघर्ष होता है सुरमा आंखें खोले अबाक रह जाते हैं स्लत हो जाता स्वयमेव सिंजनी का कसाब स्लत हो जाता स्वयमेव सिंजनी काक साहब संश्रस्त करों से धनुष बाण गिर जाते हैं। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए। संशस्त कर संशस्त माने ढीले हाथों से धनुष बाण गिर जाते हैं। प्रस्तुत पद्यांश रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित महाकाव्य उर्वशी से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकरित उर्वशी शीर्षक से उद्रित है।
उर्वशी बहुत सुंदर थी यार। इतना सुंदर मुझे कोई दिखता ही नहीं। उर्वशी अपने भाव को प्रकट करती हुई कहती है कि मेरे सामने मतलब कोई ऐसा आदमी हो जिसके सामने तुम जाओ ऐसे ऐसे हो जाओ। कभी कोई मिला है? बताओ। कभी कोई मिला है? उर्वशी कह रही है कि मेरे सामने कोई सुरमा वीर योद्धा आ जाता था। ऐसे देखने लगता था। पागल क्या? कोई ऐसा एक सुंदर आदमी मुझे मिल जाए। एक से एक नाक लढेड़ के आ जाते हैं लोग। YouTube पर पढ़ाने। देख के मन खराब है। क्या? बहुत मन खराब हो गया यार। क्या
सोच लिया मैंने? ओ छी। तो उर्वशी अपने भाव को प्रकट करते हुए कहती है कि मेरे सामने बड़े-बड़े मदमस्त हाथी वृष फिर सिर झुका कर रहते हैं। सिंह, सर और चीते आदि सभी हिंसक पशु भी अपना हिंसावृत्ति को त्याग कर मेरे समक्ष पालतू हिनर के समान बन जाते हैं। कवि के कहने का भाव यह है कि नारी के रूप एवं सौंदर्य के आकर्षण के समक्ष बड़े-बड़े योद्धा नतमस्तक हो जाते हैं। अगला सवाल क्या है? उर्वशी के समक्ष वीरों के धनुष की डोरी की क्या दिशा हो जाती है? उर्वशी को देखकर बड़े-बड़े वीरों की बोलती क्यों
बंद हो जाती है? उर्वशी के समक्ष वीरों के धनुष की डोरी ढीली पड़ जाती है और उनके कांपते हुए शिथिल हाथों से धनुष बाण गिर जाते हैं। उर्वशी के भृकुट संचालन को देखकर बड़े-बड़े वीरों की बोलती बंद हो जाती है। उर्वशी के सामने सिंह, सरब और चीते आदि सभी हिंसक पशु सदृश्य, बड़े-बड़े योद्धा अपनी हिंसावृत्ति को त्याग कर पालतू हिरण के समान बन जाते हैं। देवालय में देवता नहीं केवल मैं हूं। उर्वशी कहते हैं कि देवालयों में कोई देवता होता नहीं। फालतू बात है। मैं हूं। मैं प्रेम रूप में उस देवालय में विद्यमान हूं। देवालय
में देवता नहीं केवल मैं हूं। और क्या है? मेरी प्रतिमा को घेर। अब अब उसे 500 करो। अब उसे 500 करो। 500 फिर 1 लाख। हां। इस वीडियो का टारगेट 1 लाख था ना? देवालय में देवता नहीं केवल मैं हूं। बधाइए सभी लोग जो बच्चे शुरू से देख रहे हो 10:00 बजे से वह एक बार दिल रिएक्ट करें। मुझे पता चलना चाहिए कौन-कौन शुरू से देख रहा है। नींबू पानी जिंदा रखता है दोस्तों। देवालय में देवता नहीं केवल मैं हूं। मेरी प्रतिमा को घेर उठ रही है गुरगंध। बज रहा अर्चना में मेरी मेरा नुपुर। मैं
भू नव संगीत नाद मेरे नसीम प्रणय का है सारी कविता जयगान एक मेरी त्रैलोक विजय का देव उर्वशी कहते हैं देवालों में देवता नहीं है केवल मैं हूं मेरी प्रतिमा को घेर उठ रही अगुरगंध अगुर गंध अब यहां तुम ऐसे लिख सकते हो कि मेरी ही प्रतिमा को घेर कर अगरबत्ती की सुगंध उठ रही है बज रहा अर्चना में मेरी मेरा नपुर मेरी अर्चना में मेरी साधना में मेरी पूजा में मेरा ही नपुर बज रहा है भू लभ का भू मतलब पृथ्वी इंड मतलब आकाश का सब संगीत नाद सारे संगीत सारी ध्वनियां सर पेपर के
बाद मैं गुस्सा नहीं भूवका सब इस पृथ्वी का आकाश का सारा संगीत सारा नाद मेरे निसीम प्रणय का है। मेरे असीमित प्रेम का पर्याय है। सारी कविता जयगान एक मेरी त्रैलोक विजय का है। सारी कविता जयगान एक मेरी त्रैलोक विजय का है। कविता जयगान है। चलो सभी लोग उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए बेटा उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ क्या होगा? क्या होगा संदर्भ? प्रस्तुत पद्यांश रामधारी सिंह धनका द्वारा रचित महाकाव्यव उर्वशी से हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित उर्वशी शीर्षक से उित है। अगला सवाल अगला सवाल क्या है? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। चलिए उर्वशी कहती हैं
कि देवालयों में देवता के स्थान पर मैं ही विद्यमान हूं। मेरी प्रतिमा को घेरकर अगुर नामक सुगंधित द्रव्य की सुगंध उड़ती रहती है और मेरी अर्चना में मेरा ही नपुर बज उठता है। उर्वशी ने स्वयं को कण-कण में व्याप्त बताया है। अगला सवाल उर्वशी ने मंदिरों में किसका वास बताया है? तो उर्वशी ने मंदिरों में स्वयं का वास बताया है। अगला सवाल संगीत, नृत्य आदि समस्त कलाओं की प्रेरक शक्ति कौन है? प्रस्तुत पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? तो संगीत, नृत्य आदि समस्त कलाओं की प्रेरक शक्ति उर्वशी है। और प्रस्तुत पंक्तियों में उपमा, रूपक एवं
उत्प्रेक्षा अलंकार है। क्या कह रहे हो? क्या हमारी अधूरी कहानी पैर दर्द होता है बेटा लेकिन क्या ही कर सकते हैं बहुत सारी चीजें बहुत सारे सैक्रिफाइस के बाद मिलती है यह लघु ग्रह भूमंडल वम यह संकीर्ण अभिनव मनुष्य वाला आ गया अभिनव मनुष्य यह भी बहुत इंपॉर्टेंट है बेटा अभिनव मनुष्य से बहुत आते हैं पैराग्राफ यह लघु ग्रह या छोटा सा भूमंडल वम यह संकीर्ण या संकीर्ण आकाश चाहिए नर को नया कुछ और जो हो और जग विस्तर्ण मनुष्य को कोई नया कोई और फैली हुई दुनिया चाहिए। यह मनुज ब्रह्मांड का सबसे सुरम्य प्रकाश
मनुष्य मानता है कि वह दुनिया का यह पूरे ब्रह्मांड का सबसे सुरम्य सबसे सुंदर प्रकाश है। कुछ छिपा सकते ना जिससे भूमि या आकाश। अब तो ऐसी स्थिति आ गई है कि मनुष्य से आकाश और पृथ्वी कुछ नहीं छिपा सकते। यह मनुष्य जिसकी शिखा उदाम यह मनुष्य ऐसा है जिसकी शिख उदाम यानी जिसका जिसकी प्रज्ञा जिसकी चेतना बहुत ऊंची है कर रहे जिसको चराचर भक्ति युक्त प्रणाम जिसको चर और अचर दोनों भक्ति भाव में भरकर प्रणाम कर रहे हैं। यह मनुष्य जो सृष्टि का श्रृंगार यह मनुष्य पूरी सृष्टि का श्रृंगार है। ज्ञान का विज्ञान का
आलोक का आगार यह संपूर्ण ज्ञान विज्ञान और आलोक का आगार है। ठीक है। क्या कह रहे हो भाई गुस्सा हो के? मैं तेरे को इसमें चेक कर देता हूं। मुझे क्या हो गया? अरे जिसके साथ बच्चों का प्यार उसे कुछ हो सकता है। आग लगा देंगे। चलो बेटा सवाल लगाते हैं आग लगाने से पहले प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए। संदर्भ क्या होगा? प्रस्तुत पद्यांश रामधारी सिंह धनकर द्वारा रचित अभिनव मनुष्य नामक कविता से उदित है। अगला सवाल आज मनुष्य संपूर्ण सृष्टि के शोभा क्यों है? तो भैया आज का मनुष्य ज्ञान विज्ञान से युक्त अनंत प्रकाश
एआईओआई चला लेता है। एआईओआई देखो सत्यपाल भाई मत करो फोन। रुको मैं तुम्हें चैट जीपीडी दिखाता हूं। चैट जीपीडी से यह वाला सवाल पूछते हैं। ए चैट जीपीटी मेरी बात सुनो। हां कहो कैसे मदद करो? अरे मेरे किताब में एक सवाल है कि आज मनुष्य संपूर्ण सृष्टि की शोभा क्यों है? और इसका उत्तर तुम्हें देना है। बताओ मनुष्य को संपूर्ण सृष्टि की शोभा इसलिए माना जाता है क्योंकि उसके पास अद्वितीय बुद्धि, विवेक और रचनात्मकता है। वो सृष्टि को समझने और उसमें परिवर्तन करने की क्षमता रखता है। जिससे यह और भी समृद्ध और सुंदर बनती है।
क्या आप इस बारे में कुछ और जानना चाहते हैं? नहीं ठीक वह आकाश से पाताल तक संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ है। ठीक है। कवि के अनुसार मानवता क्या है? तो कवि के अनुसार मानव धर्म, परोपकार एवं सहृदयता ही मानवता है। ठीक है? चलो इस पद्यांश में कवि ने किस भाव को स्पष्ट किया है? रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। तो इस पद्यांश में जातीय धार्मिक वैज्ञानिक मतभेदों को दूर करना ही सच्चा ज्ञान विद्युता और मान होता है। इसके बिना कोहरा बौद्धिक ज्ञान व्यर्थ है। यही स्पष्ट किया गया है। रेखांकित अंश की व्याख्या में बताया
गया है कि मानो अपने लिए कोई नया क्षेत्र चाहता है। वह चाहता है कि उसे कोई नया और व्यापक संसार प्राप्त हो। इस प्रकार मानो नए और विस्तृत संसार को खोजने के लिए प्रयत्नशील है। समझ गए? सर पेपर के बाद आपका स्केच बनाने वाला हूं। अच्छा यह लिख हे भगवान इतनी देर से वो आदमी लिख रहा है कि पेपर के बाद आपका स्केच बनाने वाला हूं और उसमें गुस्से वाला इमोजी लगा दिया। अब मैं सोच रहा हूं भैया ये गुस्सा क्यों है? क्या हो गया इसको? जब मैं ऐसे नेता की आंख उसका कमेंट पढ़ा तो
मन किया ऐसे चक से मार दूंगा। ठीक है बेटा। दिल वाला इमोजी लगा देते ना इसके साथ। चलो। अगला क्या है? मैंने आहुति बनकर देखा। बहुत प्यारी कविता है। मैंने आहुति बनकर देखा। मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने। मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने। मैं कब कहता हूं जीवन मरु नंदन कानन का फूल बने। कांटा कठोर है, तीखा है। इसमें उसकी मर्यादा है। मैं कब कहता हूं वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने। देखो हम लोग पद्यांश भी खत्म करने वाले हैं। पद्यांश भी खत्म होने
वाला है। ठीक है। मैं कब कहता हूं वाघटकर प्रांतर का? लेखक कहता है मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने। अर्थात यह दुनिया यह जो मेरी कठिन जीवन यात्रा है इसके इसके अनुकूल क्यों हो जाए? मैं कब कहता हूं जीवन में? मैं कब कहता हूं कि मेरा जो जीवन रूपी रेगिस्तान है वह देवताओं का बगीचा बन जाए। अगर कांटा कठोर है, तीखा है तो वो मर्यादा है ना उसकी। जैसा मैं हूं वैसा मैं हूं। अगर मैं फूल बनने की कोशिश करूंगा तो यह तो मेरा अपमान होगा। मैं कब कहता हूं युद्ध
में मुझे युद्ध में कहीं ना तीखी चोट मिले। लेकिन कहता है कि मैं कब कह रहा हूं कि भाई मैं लड़ाई लड़ूं और मुझे चोट चोट ही ना लगे। सबको लगेगी चोट। मैं कहा लाडले यह कौन कह रहा है भाई? मैं कहा लाडले मैं कहा लाडले मुझे नहीं पसंद है मैं कब कहता हूं युद्ध करूं और मुझे नती की चोट मिले। अरे भैया लडूंगा तो चोट लगेगी। लडूंगा तो चोट लगेगी ना। मैं कब कहता हूं प्यार करूं और मुझे प्राप्त की वोट मिले। हमेशा प्यार करने पर जैसे तुम लोग क्या करते हो? तुम लोग किसी
को प्रपोज करते हो। ठीक है? तुम लोग कहते हो आई लव यू। किसी से मैसेज बॉक्स में ही कहते हो तो तुम्हारा मन होता है कि भैया वो आई लव यू टू कहे। अगर वो नहीं कहेगी तो तुम गुस्सा हो जाओगे। ये कोई बात होती है? ये कोई बात होती है? अरे यार सामने तुम्हारा मन था प्रेम करने का। तुमने कर लिया। सामने वाला का एक्सेप्ट करने का होगा। वो करेगा। जी। अरे रुक ठीक है तो जैसे तुम प्यार करोगे तो प्राप्त की ओठ हमेशा नहीं मिलेगी कभी मना भी किया जाएगा मैं कब कहता हूं
विजय करूं मेरा ऊंचा प्रासाद बने भैया कब कहता हूं कि मैं जीतू और मेरा बहुत बड़ा घर हो या पात्रग की श्रद्धा की मेरी धुंधली सी याद बने या हमेशा लोग मेरे विजय यात्रा को याद रखें और मेरी यादों को अपने दिमाग में संजोए रखें। अब इस पर आधारित सवालों को देखते हैं। प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार का नाम बताइए। तो प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्सज्ञ जी हैं और रचना मैंने आहुति बनकर देखा है। प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कैसा व्यक्ति वास्तविक जीवन जीता है। तो कवि ने मानव जीवन की सार्थकता
बताते हुए स्पष्ट किया है कि दुख के बीच पीड़ा सहकर अपना मार्ग प्रशस्त करने वाला तथा दूसरों की पीड़ा हैकर उनमें प्रेम का बीज बोने वाला व्यक्ति ही वास्तविक जीवन जीता है। कांटा कठोर है, तीखा है। इसमें उसकी मर्यादा है। पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि जिस प्रकार कांटे की श्रेष्ठता उपवन में उपवन के तुच्छ फल में परिवर्तित हो जाने में नहीं वरन अपने कठोरपन एवं नुकीलेपन में निहित है। उसी प्रकार जीवन की सार्थकता संघर्ष एवं दुखों से लड़ने में है। ठीक है। ठीक है। प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट
कीजिए। प्रस्तुत पद्यांश में दुख सुख की तरह। असफलता को सफलता की तरह और हार को जीत की तरह स्वीकार कर कार्य पथ पर अडिग होकर चलने का भाव व्यक्त किया गया है। अगला क्या है? अनुकूल और नेतृत्व शब्दों में क्रमशः उपसर्ग एवं प्रत्यय बताइए। अनुकूल में बेटा अनु उपसर्ग है। देखो उपसर्ग क्या होता है? उपसर्ग जो शब्द के आगे अरे यार यह क्या हो रहा है? अच्छा यहां हाथ रखा हूं क्या? जो शब्द के आगे लगता है प्रत्यय जो शब्द की पीछे अनुकूल में अनु उपसर्ग है। नेतृत्व में त्वा प्रत्यय है। समझ गए? चलो। कितने
लोग उपसर्ग प्रत्यय पहले से जानते थे? मुझे कमेंट करके बताओ। कितने लोग उपसर्ग प्रत्यय पहले से जानते थे? मुझे कमेंट करके बताओ। चलो वह रोगी होंगे। प्रेम जिन्हें अनुभव रस का कट प्याला है। वे मुर्दे होंगे। प्रेम जिन्हें सम्मोहनकारी हाला है। मैंने विदग्ध हो जान लिया। अंतिम रहस्य पहचान लिया। मैंने विदग्ध हो जान लिया। अंतिम रहस्य पहचान लिया। मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। समझ रहे हो? मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। मैं कहता हूं मैं बढ़ता हूं।
मैं नभ की चोटी चढ़ता हूं। कुचला जाकर भी धुली सा आंधी सा और उमड़ता हूं। मेरा जीवन ललकार बने। असफलता ही यशधार बने। इस निर्मम रण में पगपग पर रुकना ही मेरा वार बने। अब देखो इस चीज को। वह रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव रस का कुट प्याला है। बहुत सारे लोगों के जीवन में उनका ब्रेकअप हो जाता है। वे ब्लॉक कर दिए जाते हैं। तो वह कहते हैं कि भैया प्रेम मत करना। जीवन बर्बाद हो जाएगा। तो लेखक कहता है कि वह लोग रोगी हैं जिनका प्रेम का अनुभव कट रहा। कड़वा रहा। अच्छा प्रेम
नहीं कर पाए। वे रोगी हैं। और दूसरे प्रकार के लोग भी हैं। एक लोग प्यार कर लिए तो पता चला बोर्ड परीक्षाएं चौपट कर लिए। केवल बाबू को खाना खिलाते खिलाते जिंदगी बर्बाद हो गई। तो लेखक कहता है वह मुर्दे होंगे। वह मुर्दे के समान है। जिनके लिए प्रेम सम्मोहनकारी हाला है। जिनके लिए प्रेम विष के समान है, नशे के समान है, शराब के समान है। वह मुर्दे लोग हैं। मैंने विदग्ध हो जान लिया। मैंने स्वयं को जला करके यह जान लिया है। अंतिम रहस्य पहचान लिया। मैंने अब इस जीवन का अंतिम रहस्य पहचान लिया
है। मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। मैंने स्वयं को जब आहुति बनाया तब मुझे पता चला कि यह जो जीवन है यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। ठीक है। मैं कहता हूं, मैं बढ़ता हूं। मैं नब की चोट नहीं चढ़ता हूं। लेखक कहता है कि मैं कहता हूं कि मैं आगे जाऊंगा। मैं आगे जाता भी हूं। मैं आसमान में पहुंच जाता हूं। कुचला जाकर भी धुली सा आंधी सा और मढ़ता हूं। अरे दे रहा हूं ब्रेक यार दो मिनट। मुझे लगता है
ना कि आ जाने दो। मैं चाहता हूं कि मुकेश सर आ जाए तब मैं ब्रेक दूं। अब देखो 8 घंटा पूरा कर लेते हैं। 15 मिनट बचा है और उसके बाद पक्का ब्रेक दूंगा। चाहे मुकेश सर आए चाहे ना आए। ठीक है भैया पता नहीं वो मुझे लगता है विलायत से केक मंगवा रहे हैं। मुझे भी बुरा लगने लगा है भाई। इतनी बार आकर बता गए केक आ रहा है कि मुझे खुद बुरा लग रहा है यार। तुमसे ज्यादा लग रहा है। क्या बात कर रहे हो? कुचला जाकर भी धुली सा आंधी सा और उमड़ता
हूं। कुचला जाता हूं। बिल्कुल कुचल दिया जाता हूं। लेकिन फिर भी धूल के समान आंधी के समान और उमड़ने लगता हूं। मेरा जीवन ललकार बने। असफलता ही असधार बने। मेरा जीवन ललकार बने। मैं मेरा जीवन ऐसा बने कि लोग उसे ललकार की तरह इस्तेमाल करें। मेरा जीवन प्रतीक बने लोगों के लिए। इस निर्मम रण में पग पग पर रुकना ही मेरा वार बने। इस कठिन युद्ध में इस निर्मम रण में हर कदम पर रुकना ही मेरा वार होना चाहिए। ठीक है। 15, 16, 17 और 18 की सुबह 5:00 बजे आ जाना। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ
लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक काव्यांजलि में संकलित सच्चिदानंद हीनंद वात्सन गेंद द्वारा रचित मैंने आहुति बनकर देखा शीर्षक कविता से उद्रित है। रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कवि कहता है कि उसने अनेक बाधाओं एवं कठिनाइयों की आग में जलकर जीवन के अंतिम रहस्य को समझ लिया है। जब वह स्वयं आहुति बना तब उसे प्रेम रूपी यज्ञ की ज्वाला का पवित्र कल्याणकारी रूप दिखाई दिया। विभिन्न विभिन्न कठिनाई एवं बाधाओं को पार करके वह आज विकास एवं प्रगति के शिखर पर पहुंचा है। कुचला जाकर भी धली सा आंधी सा और मणता हूं। पंक्ति का भाव स्पष्ट
कीजिए। कुतला जाकर भी धली सा आंधी सा और मणता हूं। पंक्ति का भाव यह है कि जिस प्रकार धूल लोगों के पैरों तले रौदी जाती है फिर भी हार नहीं मानती और उल्टे ही आंधी का रूप धारण कर रौदने वाले का को पीड़ा पहुंचाने लगती है उसी प्रकार कवि अपने जीवन के संघर्षों से पछाड़ खाकर कभी हार नहीं मानता और आशान्वित एवं उत्साहित होकर आगे की ओर बढ़ता ही जाता है। प्रेम की वास्तविक अनुभूति से कैसे लोग अभिज्ञ रह जाते हैं? प्रेम को जीवन के प्रेम को जीवन के अनुभव का कड़वा प्याला मानने वाले लोग
सकारात्मक दृष्टिकोण के नहीं होते। अपितु वे मानसिक रूप से विकृत होते हैं। किंतु वे लोग भी चेतना विहीन निर्जीव की भांति ही जिनके लिए प्रेम की चेतना तो लुप्त करने वाली मदिरा है। क्योंकि ऐसे लोग प्रेम की वास्तविक अनुभूति से अभिज्ञ रह जाते हैं। इस निर्मम रण में पगपग पर रुकना ही मेरा वार बने। प्रस्तुत पंक्ति में कौन सा अलंकार है? तो प्रस्तुत पंक्ति में पगपग शब्द की पुनरावृति हुई है। अतः यहां पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। समझ रहे हो? अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है क्या वह क्या वह केवल अवसाद मलिन
झरते आंसू की माला है? वह रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव रस का कट प्याला है। वह मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहनकारी हाला है। मैंने विदग्ध हो जान लिया। अंतिम रहस्य पहचान लिया। मैंने आहुति बनकर देखा वह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। चलो अपने जीवन का रस देकर जितनो जिसे जिसको यत्नों से प्याला है क्या वहां अवसाद मलिन जरते आंसू की माला है वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव रस काकट प्याला है वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहनकारी हाला है मैंने विदग्ध हो जान लिया अंतिम रहस्य पहचान लिया मैंने आहुति बनकर देखा। यह प्रेम यज्ञ की
ज्वाला है। मैं कहता हूं मैं बढ़ता हूं। मैं नती चोटी चढ़ता हूं। लेखक कहता है कि भैया यह तो मैंने तुम्हें बताया था चढ़ता हूं। प्रेम यज्ञ की ज्वाला ये तो बता दिया। प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए। प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक काव्याजलि में संकलित सच्चिदानंद धीरान वात्सज्ञ द्वारा रचित मैंने आहुति बनकर देखा शीर्षक कविता से उद्रित है। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने अपनी कैसी इच्छा को व्यक्त किया? तो प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने की यह तीव्र इच्छा है कि मेरा जीवन ललकार बन जाए और असफलता तलवार की धार बन जाए जिसमें मैं असफलता को
काट सकूं। ठीक है? कवि ने धूल से क्या प्रेरणा ली है? तो कवि ने धूल से प्रेरणा लेते हुए कहा है कि जिस प्रकार धूल पैरों से कुचली जाती है किंतु कुचलने से वाले के सिर पर सवार हो जाती है। उसी प्रकार मैंने भी बाधाओं से हार नहीं मानी है। बाधाओं से हार नहीं माना है। दोस्तों आवाज नहीं आ रही है क्या? आवाज नहीं आ रही है? यूपी बोर्ड के लिए ही है बेटा यह कह रहा है कि यूपी बोर्ड वाले यही टॉपिक तैयार करेंगे पूरा पाठ टूट गया पढ़ा इन पंक्तियों के आधार पर कवि
का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए। तो प्रस्तुत पंक्तियों पर कवि अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहता है कि जीवन केवल सुखों का संचय ही नहीं अपित उनकी वास्तविक शक्ति कष्टों विघ्न बाधाओं तथा विरोधी परिस्थितियों के साथ संघर्ष करने से विकसित होती है। ठीक है आगे बढ़ते हैं। रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए। तो व्याख्या प्रेम के सच्चे स्वरूप और उसे प्राप्त करने के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए कवि कहते हैं कि प्रेम जीवन में माधुर्य और सरसता का संचार करता है तथा व्यक्ति में एक नवीन चेतना और उत्साहित करने वाली नवप्रेरणा प्रदान करता है। या निष्प्राण व्यक्ति में
प्राण डाल देता है। मैंने स्वयं अनुभूत करके प्रेम से सच्चे स्वरूप और उसकी महत्ता को जान लिया है। मुझे प्रेम का यह तत्व अथवा रहस्य ज्ञात हो गया है कि प्रेम यज्ञ की उस ज्वाला के समान पवित्र और कल्याणकारी जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से व्यक्ति के लिए आवश्यक और मंगलकारी है। साथ ही प्रेम की इस मंगलकारी स्वरूप की अनुभूति तथा प्रेम रूपी यज्ञ की ज्वाला के दर्शन उसी समय संभव हो पाते हैं जब व्यक्ति स्वयं प्रेम रूपी यज्ञ में अपनी आहुति देता है। इस प्रकार कठिनाइयों और बाधाओं को पार करके तथा संघर्ष
में तप कर ही हम प्रेम के तत्व को पहचान सकते हैं। हिरोशिमा कविता की बात करते हैं। हिरशिमा कविता छायाएं मानव जन की दिशाहीन क्या हुआ कि अमेरिका ने आवाज स्लो है एक सेकंड मैं चेक करवाता हूं। भाई आवाज थोड़ा चेक करो। आवाज चेक करो। उसमें मोबाइल पे चेक करो कि सही आ रही है कि नहीं? आवाज बढ़ रही है। छाया मानव जन की दिशाएं सब ओर पड़ी। क्या हुआ कि जापान में जापान के दो शहरों पर जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर क्या हुआ परमाणु बम गिरा दिया परमाणु बम किसने अमेरिका ने
और जब हिरशिमा पर परमाणु बम गिराया तो उसी का वर्णन कर रहे हैं। इसके बाद कहानी पढ़ाऊंगा। इसके बाद जस्ट कहानी पे ही चलता हूं। छायां मानव जन की दिशाएं सबसे अंतिम कविता है। छायां मानवों की जो लोग वहां बैठे हुए थे जब ऐसे परमाणु बम गिरा तो जो इधर बैठा इधर बैठा इधर बैठा इधर बैठा सब जल भुन गए। राख हो गए। सब ओर पड़ी। वह सूरज नहीं उगा था पूर्व में। वो जो सूर्य उगा था वो पूर्व दिशा में नहीं उगा था। सूर्य थोड़ी ना था बम था। वह बरसा सहसा बीचोंबीच नगर के
वह अचानक से नगर के बीचोंबीच में बरस गया। काल सूर्य के रथ के पहहिए के जो अरे टूट कर बिखर गए हो दशों दिशाओं में काल सूर्य के भयावह सूर्य के रथ के पहहिए ज्यों टूट कर बिखर गए हो दसों दिशाओं में। ठीक है? ऐसा लगा जैसे जो सूर्य है वह आ रहा था और अचानक से उसका रथ टूट गया। उसके पहिए बिखर गए और वो अचानक से धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा और सब कुछ जला के राख कर दिया। प्रस्तुत गद्यांश के रचनाकार और रचना का नाम बताइए। तो प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार सच्चिदानंद
धरा वात्स नग हैं। यह अवतरण हिरशिमा कविता से अवतरित है? प्रस्तुत पद्यांश में किस समय का वर्णन किया गया है? प्रसुत पद्यांश में द्वितीय विश्व युद्ध की उस भीषण तबाही का उल्लेख किया गया है जब अमेरिका द्वारा हिरशिमा पर परमाणु बम गिराया गया था। ठीक है? हिरशिमा नगर में परमाणु बम विस्फोट के परिणाम क्या हुई? तो हिरशिमा नगर के जिस स्थान पर परमा पर परमाणु बम गिराया गया था, वहां की भूमि बड़े-बड़े गड्ढों में परिवर्तित हो गई जिसे फटी मिट्टी कहा गया। वहां बहुत अधिक मात्रा में विषैली गैस निकल रही थी और उससे निकलने वाली
ताप से समस्त प्रकृति झुलस रही थी। विस्फोट के दौरान निकली विकिरणें मानव के अस्तित्व को मिटा रही थी। ठीक है? काल सूर्य के रथ के पहियों के जो अरे टूट कर बिखर गए हो। पंक्ति से कवि का क्या आशय है? परमाणु विस्फोट के पश्चात सूर्य का उदय प्रतिदिन की तरह पूर्व दिशा से नहीं हुआ था। प्रतिदिन की तरह पूर्व दिशा से नहीं हुआ था। उसका उदय अचानक ही हिरशिमा के मध्य स्थित भूमि से हुआ था। उस सूर्य को देखकर ऐसा आभास हो रहा था जैसे काल अर्थात मृत रूपी सूर्य रथ पर सवार होकर उदित हुआ
हो और उसके पहियों के डंडे टूट कर इधर-उधर दसों दिशाओं में जा बिखरे हो। ठीक है? अब आगे चलते हैं। काल शब्द के तीन पर्यायवाची बताइए। पर्यायवाची आपके सिलेबस में भी आता है। अनेकार्थी शब्द आता है। ध्यान रखना। अनेकार्थी शब्द आता है। ठीक है? अनेकार्थी शब्द आता है। वॉइस बहुत स्लो आ रही है क्या? सभी लोग बताओ एक बार। आवाज स्लो आ रही है क्या? मैं खुद चेक करता हूं। आवाज स्लो आ रही है क्या? एक सेकंड रुको। क्या होगा? ऐसा बने कि लोग उसे ललकार की तरह मेरा बार बने। इस कठिन सच्चे से और
उसकी को जान लिया मुझे प्रेम का आवाज स्लो आ रही है क्या बेटा मुझे एक बार कमेंट करके बताओ मुझे कुछ नहीं होगा मैं अमर हूं मानव का रचा हुआ सूरज मानव को बाप बनाकर सोक गया। आवाज स्लो आ रही है क्या बेटा? बढ़िया तो आ रही है यार। इतनी तेज क्लीन बिल्कुल चिक चिकचिकाती आवाज आ रही है। मानव का रचा हुआ सूरज मनुष्यों के द्वारा बनाया गया था वह बम। मानव को भाप बनाकर। हां यार यह तगड़ी चीज लाए हो। यह कुछ बढ़िया चीज है। मुकेश सर कहां है? भाई उनका केक आज ही आएगा।
बच्चे पूछ रहे हैं कि भैया आप अमेरिका से मंगवा रहे हो। पिछले तीन घंटे से मंगवा रहे हैं मुकेश सर। बेटा मैं स्पीचलेस हूं। मानव का रचा हुआ सूरज मानव को बाप बनाकर सोख गया। मानव के द्वारा जो बम बनाया गया था ना वो मानव को सोख गया भैया आदमी भाप बन के उड़ गया लिटरली तुम्हें लगता है ना कि तुमने कभी तुम सोच के देखो इस बात को तुम्हें क्या लगता है क्या कभी ऐसा हो सकता है कि आदमी भाप बन जाए रुको यार थोड़ा पानी पी लूं। चलो अरे यार आ रहा है तो
ये लोग इतना मुझे मानव को बाप बनाकर सो गया। पत्थर पर लिखी हुई जली हुई छाया मानव की साखी है। साखी माने साक्षी मतलब जैसे मान लो कि तो यह एक लोहे की मेज है। ठीक? इस पर कुछ लोग बैठे हुए हैं। ठीक है? और अचानक से वह बम गिरा और वो भाप बन गए और इसमें चिपक गए। बिल्कुल। उनकी परछाई जलती हुई इसमें चिपक गई। अरे बहुत भयाव दृश्य है। प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार और रचना का नाम बताइए सभी लोग। कितने बच्चे ऐसे हैं जो इसका पद्यांश का रचना और रचनाकार का नाम लिख लेंगे?
बताओ। प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार सच्चिदानंद्ञ तथा अवतरण धीरशिमा कविता से अवतरित है। अगला सवाल रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। कब अमेरिका द्वारा हिरशिमा नामक नगर पर अणुबम गिराए जाने के परिणाम स्वरूप उस भीषण नरसंहार और विनाश का चित्रण करते हुए क्या कहता है? कहता है कि परमाणु बम के रूप में मनुष्य ने मानो कृत्रिम सूरज की रचना कर ली है। इस विस्फोट में सूरज के समान अत्यधिक ताप उत्पन्न होता है। अमेरिका ने जब यरोशिवा नगर पर परमाणु बम गिराया तो विस्फोट के समय उससे इतना ताप और प्रकाश उत्पन्न हुआ कि लगा आसमान से टूट कर
सूरज धरती पर आ गिरा हो। अरे किसी सेनापति को फोन नहीं करना पड़ेगा यार। मैं मैं क्या बताऊं मैं? मुझे पहले ही मना कर देना चाहिए था। तुम लोगों ने इतना ज्यादा पूछ लिया उस चीज को। ठीक है? अमेरिका ने जब हिरशिमा पर परमाणु बम गिराया तो विस्फोट के समय इससे उतना ताप और प्रकाश उत्पन्न हुआ कि लगा आसमान से टूट कर सूरज ही धरती पर आ गिरा हो। उस समय मनुष्य भाप बनकर उड़ गए और उसकी राख तथा तक शेष ना रही। सूर्य में भी इतना ही ताप है कि उसके पास पहुंचकर कोई भी
वस्तु ठोस अवस्था द्रव अवस्था में नहीं रहती। वरना वह गैस में परिवर्तित हो जाती है। ऐसा हीरोशिमा के परमाणु बम विस्फोट के समय हुआ था। जहां पर बम गिराया गया वहां अधिकांश वस्तुएं विशेषकर पेड़-पौधे जीव-जंतु अत्यधिक ताप के कारण भाप बनकर उड़ गए। यह वैज्ञानिक प्रगति के महाविनाश का प्रथम प्रमाण था। ठीक है? उम्मीद नहीं कर सकते हो तुम लोग इतनी बड़ी विभीषिका थी। तुमने पानी को भाप बनते देखा होगा। मनुष्य को भाप बनता है। तुम सोच भी नहीं सकते। आलोक वृत्त पढ़ाऊंगा। सब पढ़ाऊंगा। प्रस्तुत पद्यांश में कौन सा रस है बेटा? करुण रस है।
आज के महा आज भी महाविनाश के गवाह कौन है? अनुबम की आग ने मानो तो मानो पत्थर तक को जलाकर काला कर डाला। जो आज भी उस महाविनाश की गाथा का गवाह है। मानव का रचा हुआ सूरज क्या है? मानव का रचा हुआ सूरज अनुबम है। खत्म हो गया दोस्तों। एक बार अपनी पीठ थपथपा लीजिए। आप साहित्यिक परिचय के पास पहुंच गए हैं। कौन से साहित्यिक परिचय? कवियों के साहित्यिक परिचय। और हमने पूरे-पूरे 8 घंटे कंप्लीट कर लिए हैं। अब मुझे थोड़ी-थोड़ी भूख लगना शुरू हो गई है। चलो सभी लोग बताओ चलो जल्दी-जल्दी आंसर करो
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध मैथिली शरण गुप्त जयशंकर प्रसाद सुमित्रा नंदन पंत महादेवी वर्मा रामधारी सिंह दिनकर कितने हैं सात हैं इन सातों में से कितने पढ़ने पड़ेंगे कोई पांच पढ़ने पड़ेंगे बेटा सात में से कोई पांच छह में से कोई चार पढ़े थे ना सात में से कोई पांच लेकिन मैं तुम्हें पूरा पढ़ाऊंगा सबसे पहले चलते हैं अयोध्या सिंह उपाध्याय आर्योत पर सिस्टम स्लो क्यों चल रहा है एक सेकंड रुको पीपीटी वाला नाटक ही खत्म कर देते हैं पीपीटी छोटी कर लेते हैं ना चलो जब तक ये हो रहा है तब तक इसी में करते
हैं। अयोध्या सिंह उपाध्याय हरऔध जन्म 15 अप्रैल 1865 को हुआ है। कब हुआ? जन्म हुआ 15 अप्रैल 1865 को। जन्म स्थान निजामाबाद आजमगढ़ पिता भोला सिंह उपाध्याय माता रुक्मणी देवी शिक्षा स्वाध्याय से विभिन्न भाषाओं का ज्ञान भाषा ब्रज भाषा एवं खड़ी गोली शैली प्रबंध एवं मुक्तक प्रमुख रचनाएं प्रिय प्रवास चौखे चौपायदे चुपते चौपायदे वैदेही वनवास रुक्मणी पर्णय मृत्यु 6 मार्च 1947 को कब हुई मृत्यु 6 मार्च 1947 को तो तैयार रहो सारे सवालों के उत्तर देने हैं तुमको साहित्य में योगदान क्या लिखेंगे हरिऔद जी द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि और गद्य लेखक हैं देश प्रेम
धर्म और संस्कृति में आस्था लोक मंगल की भावना इनके काव्य की प्रमुख विशेषताएं हैं। प्रिय प्रवास खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है। इसके लिखने पर इनको मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ। इससे इसमें वर्णित कृष्ण चरित्र का आधार श्रीमद् भागवत महापुराण है। खड़ी बोली के महाकवियों में हरिऔद जी का विशेष स्थान है। खड़ी बोली से काव्य भाषा के रूप में प्रयुक्त करके नवीन छंद विधान करके एवं राधा को लोक सेविका के रूप में प्रस्तुत करके इन्होंने हिंदी कवियों में विशेष स्थान बना लिया है। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने इनके संबंध में लिखा है। खड़ी बोली के उस
काल के कवियों में पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की काव्य साधना विशेष महत्व की ठहरती है। सहृदयता और कवित्व के विचार से भी यह अग्रगण है। इनके समस्त पद औरों की तुलना में अधिक मधुर हैं जो इनकी कवित्व शक्ति के परिचायक हैं। रुक जाओ बस पांच मिनट रुक जाओ पांच मिनट। ठीक है। आगे बढ़ते हैं। मैथिलीशरण गुप्त जन्म 3 अगस्त 1886 जन्म स्थान चिरगांव झांसी पिता सेठ रामचरण गुप्त मुख्य रचनाएं साकेत भारत भारती यशोधरा द्वापर पंचवटी सिद्धराज शिक्षा घर पर ही हुई इनकी भाषा खड़ी बोली सरल सुसंगठित प्रसाद तथा ओजगुण संयुक्त शैली कैसी है? उपदेशात्मक
शैली, प्रबंधात्मक शैली, नीति शैली, वर्णनात्मक शैली, मृत्यु 12 दिसंबर 1964 को। आगे बढ़ते हैं। साहित्य में योगदान देखते हैं। हिंदी साहित्य के इतिहास में व खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आरंभ में ब्रज भाषा में काव्य सृजन किया और संस्कृत छंदों में अन्योक्तियां लिखी। राष्ट्रीय चेतना, धार्मिक नैतिकता और मानवीय उत्थान उनके काव्य का उत्स रहा है। मुख्य विषय रहा है। उनकी कृतियों में देश का अतीत, वर्तमान और भविष्य बोलता है। वह मानववादी, नैतिक और सांस्कृतिक काव्यधारा के विशिष्ट कवि थे। राष्ट्र प्रेम गुप्त जी की कविता का मुख्य स्वर है। भारत भारती में
प्राचीन भारतीय संस्कृति का प्रेरणा पद चित्रण हुआ है। इस रचना में व्यक्त स्वदेश प्रेम ही इनकी परवर्ती रचनाओं में राष्ट्र प्रेम और नवीन राष्ट्रीय भावनाओं में परिणत हो गया है। इनकी कविता में आज की समस्याओं और विचारों के स्पष्ट दर्शन होते हैं। गांधीवा तथा कहीं-कहीं आर्य समाज का प्रभाव भी उन पर पड़ा है। अपने काव्यों की कथा वस्तु गुप्त जी ने आज के जीवन से न लेकर प्राचीन इतिहास अथवा पुराणों से ली है। यह अतीत की गौरव गाथाओं को वर्तमान जीवन के लिए मानवतावादी एवं नैतिक प्रेरणा देने के उद्देश्य से अपनाते हैं। क्लियर है? सभी
लोग सेशन को शेयर कर दीजिए। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो बेटा और सेशन को लाइक कर लो। ठीक है। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो और सेशन को लाइक कर लो। चलो जयशंकर प्रसाद को पढ़ते हैं। तुम्हारे ऋषि सर बेटा जितना पढ़ा देंगे उतना ही तुम्हारे पेपर में आएगा। एक भी बाहर का नहीं आएगा। यह हमेशा ध्यान में रखना। तो जितना भी आज तुम्हें मिल रहा है उतना ही पढ़ना है। ब्रेक नहीं मिल रहा है तो ब्रेक नहीं लेना है। अगर मिल जाएगा तो ले लेना है। जितना पढ़ा रहा हूं उतना ही
सिलेबस में पढ़ लो। तुम्हारे ऋषि सर ने अगर उंगली रख दी तो रख दी। बस जन्म स्थान 30 जनवरी 1889 जन्म स्थान काशी पिता देवी प्रसाद साहू लेखन विधा काव्य नाटक उपन्यास निबंध भाषा संस्कृत खड़ी बोली शैली वर्णनात्मक भावात्मक अलंकारिक सूक्ति परक प्रतीकात्मक पुरस्कार प्रमुख रचनाएं कामायनी आंसू लहर झरना चित्र कान कुसुम प्रेमपदिक पुरस्कार मंगला प्रसाद पारितोषिक कामायनी के लिए मृत्यु 14 जनवरी 1937 हां अगर तुम्हारे ऋषिजर ने कह दिया कि यह साहित्यिक परिचय आएगा तो आएगा तुम्हारे ऋष ने कह दिया यह साहित्यिक परिचय नहीं आएगा तो नहीं आएगा। बात सही कि नहीं? बताओ। चलिए
आगे बढ़ते हैं बेटा। आगे बढ़ जाते हैं। प्रसाद जी छायावादी कवि थे। प्रेम और सौंदर्य उनके काव्य का प्रधान विषय है। मानवीय संवेदना उसका प्राण है। प्रकृति को सचेतन अनुभव करते हुए उसके पीछे परम सत्ता का आभास कवि ने सर्वत्र किया है। प्रसाद का रहस्यवाद भाव सौंदर्य से संचालित प्रकृति का रहस्यवाद है। लाक्षणिकता और प्रतीकात्मकता से युक्त प्रसाद जी की भाषा में अद्भुत नाद सौंदर्य है। यूपी बोर्ड में हिंदी मतलब ऋषि सर लिख लो यह कहीं पर। 15, 16, 17 तीन दिन यह ऋषि सर की तीन दिवसीय महा रिवीजन योजना है जो इस साल की
नई योजना नहीं है। पिछले कई सालों से चल रही योजना है। ठीक है? और इस बार तो कक्षा 10 वाले बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा क्योंकि गुलशन सर भी तीन दिवसीय महार योजन योजना चला रहे हैं। ठीक है? अगर मैंने मैं जहां धर दूं कदम वहां राजपथ है। पांव मेरे देखकर दुनिया चलेगी। प्रसाद का जो दृष्टिकोण है बेटा ना वह बहुत ज्यादा मानवतावादी है और कामायनी में इन्होंने आध्यात्मिक आनंदवाद की प्रतिष्ठा की है। यह जीवन की चिरंतन समस्याओं का कोई चिरंतन उपाय खोजना चाहते थे। इच्छा, ज्ञान और क्रिया का सामंजस्य ही उच्च मानवता है।
उसी की प्रतिष्ठा प्रसाद जी ने की है। प्रवृत्ति और निवृत्ति का यह समन्वय ही भारतीय संस्कृति की अनुपम देन है और कामायनी से यही संदेश प्रसाद जी ने संपूर्ण मानवता को दिया है। हिंदी साहित्य में नाटक को नई दिशा देने के कारण जयशंकर प्रसाद को प्रसाद युग का सूत्रधार कहा जाता है। क्या कहा जाता है? प्रसाद युग को प्रसाद युग का सूत्रधार कहा जाता है। जन्म और मृत्यु लिखोगे क्यों नहीं? यहां पर लिखा तो हुआ है। 20 जगह रिपीट करोगे क्या? 20 जगह नहीं रिपीट करना है। संक्षिप्त परिचय में जन्म मृत्यु लिख दो। साहित्यिक परिचय
में जन्म और मृत्यु नहीं लिखा जाता। सुमित्रानंदन पंत का जन्म 1900 में जन्म स्थान कौसानी कुमायूं। पूर्व नाम गोसाई दत्त पिता गंगादत्त पंत संपादन रूपाभ का भाषा संस्कृत निष्ठ खड़ी बोली शैली छायावादी भाषा काव्य शैली प्रमुख रचनाएं युगवाणी लोकायतन चिदंबरा स्वर्ण किरण उत्तरा और अंतिमा मृत्यु सन 1977 में पंत जी स्वभावतः आत्मनिष्ठ हैं। इसलिए मार्क्स के बहिर्मुखी तथा भौतिकतावादी दर्शन में इनका मन अधिक समय तक नहीं रमा और श्री अरविंद के आध्यात्मवादी दर्शन से परिचित होते ही उसके प्रति अनुरक्त हो गए। अरविंद के जीवन दर्शन में भारतीय आध्यात्म और पाश्चात्य विज्ञान का अनोखा समन्वय है।
गांधी जी की रचनाओं में इस दर्शन के प्रभाव के फलस्वरूप इसी समन्वित जीवन दृष्टिकोण वाणी मिली है। आज भी इनकी रचनाएं अरविंद दर्शन की इस दिव्य चेतना से ओतप्रोत हैं और नई मानवता की प्रतिष्ठा के लिए सचेष्ट हैं। पंत जी की भाषा सदा ही बड़ी चित्रमयी रही है और बड़े ही मनोरम बिंबों की योजना करती है। उपमा रूपक उत्प्रेक्षा आदि सादृश्य मूलक अलंकार इन्हें विशेष प्रिय हैं। लेकिन वे सजावट के रूप में नहीं इनकी अनुभूति से अंतरंग होकर कविता के अंग जैसे लगते हैं। कैसे लगते हैं? आ रहा है। इनकी काव्य रचनाओं को पढ़कर यह
निर्णय नहीं हो पाता कि ये कवि अधिक हैं, विचारक या शिल्पी। पंत जी की काव्य दृष्टि के विकास में इनके काव्य संकलन पल्लव की रचना परिवर्तन का विशेष महत्व है। पंत जी अपनी इस रचना में सुंदरम के कवि के रूप में नहीं इस जगत के जीवन प्रवाह के कठोर यथार्थ के दृष्टा के रूप में प्रकट होते हैं। ध्यान रखो यह बहुत जरूरी है। तुम्हारे सभी इंपॉर्टेंट साहित्यिक परिचय मैं करा दे रहा हूं। सर कहानी पढ़ाओ। टाइम कम है। कहां? मुझे पता है कितना टाइम है। तुम्हें पता है कितना टाइम है। अभी मेरे पास 4 घंटे
हैं। साहित्यिक परिचय खत्म होने के बाद कहानी पढ़ा दूंगा। खंड काव्य पढ़ा दूंगा। संस्कृत दिगदर्शिका पढ़ा दूंगा। उसके बाद एक घंटे में पत्र और निबंध हो जाएगा। खत्म हो गया। क्यों परेशान हो यार? अभी मैं जिंदा हूं ना। महादेवी वर्मा जन्म स्थान फर्रूखाबाद उत्तर प्रदेश। जन्म एवं मृत्यु सन 1907 से 1987। पिता गोविंद सहाय माता श्रीमती हेमरानी देवी शिक्षा संस्कृत विषय से परासनातक प्रयागराज विश्वविद्यालय से आंदोलन छायावाद भाषा संस्कृत निष्ठ खड़ी बोली प्रमुख रचनाएं निहार निरजा सांदगीत रस्म और दीपशिका पुरस्कार पद्म भूषण पद्म भूषण ज्ञानपीठ मंगला प्रसाद पारितोषिक महादेवी वर्मा जी ने अपने काव्य में
मानव के हृदय की पीड़ा को वाणी देने का प्रयास किया है। करुणा महादेवी की चिर संगिनी है। महादेवी जी के व्यक्तित्व का निर्माण करुणा की भावुकता तथा दार्शनिकता की आधारशिला पर हुआ है। हिंदी साहित्य जगत में जिस किसी ने अपने काव्य में करुणा, विरा एवं वेदना को चित्रित किया तो उनमें महादेवी जी का नाम ही सर्वोच्च है। महादेवी जी के काव्य में पीड़ा, वेदना, कसक टीस आदि की प्रधानता है। इसलिए उन्हें आलोचकों ने आधुनिक मीरा की संज्ञा दी है। महादेवी वर्मा जी की करुणा की भावना संपूर्ण साहित्य में मुखरित हुई है। महादेवी जी को पीड़ा
से बहुत प्रेम है क्योंकि यह पीड़ा अथवा वेदना साधारण ना होकर अपने प्रिय का दिया हुआ वरदान है। बहुत रोना आ रहा है। क्यों रोना आ रहा है तुम्हें? रोना क्यों आ रहा है बेटा? बेटा। ओ बेटा बेटा तुम्हें रोना क्यों आ रहा है बेटा? हम्म। चलो चलो अब ब्रेक देंगे इसके बाद चलो रामधारी सिंह दिनकर जन्म स्थान सिमरिया मुंगेर बिहार जन्म 30 सितंबर 1908 ईस्वी मृत्यु 25 अप्रैल 1974 सभी लोग सेशन को बेटा एक बार शेयर कर दो जितने भी बच्चे यहां है सभी लोग सेशन को शेयर कर दो और पढ़ाई पे ध्यान दो
ठीक है आराम रोज करना है आज आराम का समय नहीं है क्या बोल रहा हूं अभी आया नहीं मेरे बच्चे केक के लिए परेशान है मुकेश सर लहरका लगा के चले गए हैं यार मैं मैं इनको मना भी नहीं कर पा रहा कि यार बस बंद कर केक की बातें अरे हमको फोटो दिखा के ललवा दी खुद ही बैठी हूं मैं डर लेंगे केक खाने के लिए। ऊपर से काजू कतली का अलग मुझे वो नहीं है। ओह माय गॉड। काजू कतली आ रही है दोस्तों। पिता रवि सिंह जोश आ गया मुझ में। सभी लोग एक
बार सेशन को शेयर कर दो। सुबह से आ रही है। सुबह से आ रही है। चलो सभी जितने भी तुम्हारे पास टेलीग्राम WhatsApp ग्रुप हो सब में जाके शेयर करके आओ। ऐसा गुलशन सर ने अभी-अभी 10थ के बच्चों से कहा है और मुझे सुनाई पड़ा है। तो तुम भी ऐसा करके आओ दोस्तों। चलो शिक्षा पटना कॉलेज से बीए भाषा परिष्कृत खड़ी बोली प्रमुख रचनाएं उर्वशी गुरुक्षेत सामधेनी रेणुका परशुराम की प्रतीक्षा पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार अगर आज एक दिन आराम नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा लेकिन बोर्ड एग्जाम में अगर नंबर नहीं आए तो रोते-रोते रह जाओगे
समझ लो इस बात को दिनकर की काव्य प्रतिभा का चरमोत्कर्ष उनके नाटकीय कथा काव्य उर्वशी में दृष्टिगत होता है। इनका इस रचना का कथा प्रसंग तो कालिदास के नाटक विक्रम सीसीएम से लिया गया है। लेकिन उसका प्रस्तुतीकरण आधुनिक भूत से अनुप्राणित है। दिनकर ने अपनी रचनाओं में अपनी विद्रोहशील मनोवृत्ति और सौंदर्य चेतना को वाणी देने के अतिरिक्त कुछ अन्य प्रवृत्तियों को की भी को भी अभिव्यक्त प्रदान की है। इनके नीम के पत्ते संकलन में आज के राजनेताओं पर भरे तीखे व्यंग हैं। आत्मा की आंखें में अंग्रेजी की कुछ नई प्रयोगशील कविताओं के अनुवाद हैं। दिनकर
प्रारंभ से ही लोक के प्रति निष्ठावान सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग और जनसाधारण के प्रति समर्पित कवि रहे हैं। तभी तो इन्होंने छायावादी कवियों की भांति काव्य रचना न करके रेणुका का आलोक छिटकाया है। इस प्रयास के अनंतर दिनकर जी ने स्वयं भी इस दिशा में कुछ प्रयोग किए हैं। व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन की समस्याओं तथा आपदाओं के कारण एवं दुर्दैव के कठोरतम आघात युवा प्रति युवा पुत्र की मृत्यु के कारण इनका ओजस्वी वर्चस्वी और मनस्वी व्यक्ति छोटी-छोटी अतुकांत कविताओं में टूट-टूट कर पिघल पिघल कर बह गया निकला है। इनका अंतिम काव्य संकलन हरे को हरि
नाम ऐसी ही करुण निराशा दीन आतुर आत्मा की विनय पत्रिका है। सभी लोग यार एक दिन की छुट्टी चाहिए तुमको आज बस। ठीक है। tlegam का नाम क्या है? ऋषि सर हिंदी। चलिए सच्चिदानंद हीरानंद वात्सनज्ञ की बात करते हैं दोस्तों। सच्चिदानंद हीरानंद वात्सज्ञ जन्म 1911 में कश्मीर में हुआ। पिता का नाम पंडित हीरानंद शास्त्री है। शिक्षा लाहौर से बीएससी एवं एमए पूर्वद अंग्रेजी से कृतियां तलम हरी घास पर क्षण भर बाबरा आहरी आंगन के पार द्वार कितनी नाव में कितनी बार विपदगा शेखर एक जीवनी नदी के द्वीप अपनेपने अजनबी और परंपरा उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय गोल्डन रीत
पुरस्कार साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मानित मृत्यु 1987 में हुई यह किसका है सच्चिदानंद हीरानंद वासन का है उन्होंने स्वाध्याय सहित अंग्रेजी, हिंदी, फारसी, बांग्ला और संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन किया। स्वतंत्रता संग्राम व कांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण इन्हें चार वर्षों तक कारावास में तथा दो वर्षों तक धजरबंद रखा गया। वर्ष 1936 ईस्वी के दौरान अज्ञेय ने सैनिक एवं विशाल भारत नामक पत्रपत्रिकाओं का संपादन किया। इन्होंने इलाहाबाद से प्रतीक पत्रिका निकाली। इन्हें दिन साप्ताहिक नव भारत टाइम्स अंग्रेजी पत्रवाक तथा एवरीमेंस पत्र पत्रिकाओं का संपादन करने का सु अवसर भी प्राप्त हुआ।
सभी लोग जाओ अपने WhatsApp के स्टेटस पर इसकी लिंक लगा के आओ क्लास की। सबको शेयर करके आओ। सबको बुला के लाओ। ये तुम्हारी जिम्मेदारी है। अगर मैं तुम्हारे लिए तुम्हारे सर इतनी मेहनत कर रहे हैं तो इतना तो तुम कर ही सकते हो यार। कम से कम 10,000 बच्चा तो लाइव होना ही चाहिए तुरंत। चलो। साहित्य एवं संस्कृत को चढ़ा बढ़ावा दिए जाने के उद्देश्य से इन्होंने वत्सल नामक न्यास की स्थापना की। ब्रिटिश सेना और आकाशवाणी में अपनी सेवा देने वाले इस साहित्यकार ने जोधपुर विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य भी किया। अज्ञेय
ने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, यात्रा, वृत्तांत, संस्मरण, डायरी, साहित्य की अनेक विधाओं में लेखन कार्य किया। अज्ञेय उन रचनाकारों में से हैं जिन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को एक नया आयाम, एक नया सम्मान, एक नया गौरव प्रदान किया। हिंदी साहित्य को आधुनिक बनाने का श्रेय अज्ञेय को दिया जाता है। अब हम लोग आ गए कहानी पर। हमारे सभी प्यारे बच्चे अपनी-अपनी पीठ थपथपा लो बेटा। इस संघर्ष का परिणाम दिखाऊं तुमको। तुमने क्या-क्या कंप्लीट किया है? पहला और दूसरा चरण हमारा कंप्लीट हो गया। गद्य का विकास, गद्यांश पर आधारित प्रश्न, लेखों के साहित्यिक परिचय। यहां देखो यहां
देखो काव्य का विकास, पद्यांश पर आधारित प्रश्न और कवियों के साहित्यिक परिचय। क्या-क्या कंप्लीट कर लिया? दो चरण हमने कंप्लीट कर लिए हैं और दो चरण के बाद हम तीसरे चरण की कहानी की ओर चल रहे हैं। तो सभी लोग आ जाओ। अब हम चलते हैं कहानी की ओर बेटा और ये कहानी जो आपके सिलेबस में इस बार सवाल के रूप में आने वाली है। केवल वही पढ़ेंगे जो सवालों के रूप में आपको दिखाई पड़ने वाला है। कुछ भी अतिरिक्त नहीं पढ़ा जाएगा। उन्हीं की बात होगी जैसे सवाल आते हैं और इस बार थोड़ा सा
पैटर्न में परिवर्तन हुआ है। उसकी बात करेंगे। देखो सबसे पहले तो यह समझ लो कि तुम्हारे सिलेबस में है चार कहानियां। अगर हम एक कहानी को हटा दें क्योंकि अथवा करके सवाल आता है तो हम तीन में प्रोबेबिलिटी पर खेलते हैं तीन में खेलते हैं। हम अगर तीन में बात करें तो पंचलाइट लाठी बहादुर तीन कहानियां हैं। रहने दो रहने दो भाई मैं देखना ही नहीं चाहता हूं। ठीक है? पंचलाइट बहादुर और लाठी तीन कहानियां हैं। इन तीन कहानियों से कैसे-कैसे प्रश्न आते हैं? तो यहां पर मैं तुम्हें बाबा प्रश्न नहीं आएगा। अब केक आएगा।
अब केक आया है। बहुत प्रतिष्ठित केक बेटा। सुबह 8 घंटे की मेहनत के बाद यह हमारा केक बना हुआ है। और मतलब सरप्राइज है इस केक में। कैसा लगा केक हमारा? तगड़ा है। बहुत बेटा इस केक की आप पहले फोटो कैमरामैन अपना फ़ोन दे दो। अपना फ़ोन दे दो। अपना दे दो। हां ठीक है। दे दो दे दो दे दो। पहले हम इस केक की फोटो खींचे कि बहुत प्यारा केक बना है। मतलब बड़ी मेहनत से बस बस दिखा रहे दिखा। अरे बस अरे बिगड़ जाएगा इससे। अरे नहीं बिगड़ेगा भाई। सही फोटो खींचेगी ना भाई।
हां प्यारी है। बहुत प्यारी पूरे केक में सिर्फ अच्छा लग रहा है तो 2 मिलियन अच्छा लग रहा है। बेटा सोचो 2 मिलियन पीछे दो मिलियन खोली सर। उसमें उसमें दो दो मिलियन खोल। ये खुला हुआ है। इसको रिफ्रेश कर। चलो गुरु वो देखो। अरे कर दूं? कर दूं बाबा। अरे नहीं करेंगे। अरे वो नेक्स्ट हो गया। हां ना ना खोलो खोलो खोलो खोलो खोलो 2 मिलियन खोलो हां हां खोलो 2 मिलियन खुल गया नहीं खुला बाबा लॉग इन प्यारे बच्चों इतना शानदार सा केक मांग रहा है दो मिलियन खोल पहले पहले लॉग इन करो
मैं अपना फोड़ दूंगा आप भी मत फोड़ ये मैं मुझे याद अरे ठीक है उधर उसमें डाल दो अरे अरे भाई भाई अभी रुक जाइए नहीं खड़ा हो जाए खड़ा हो जाए खराब हो जाएगा बेटा थोड़ा सा अभी हम लोग रुकेंगे में रह लो ना आप हम दे देंगे आराम आपको लेकिन इस वक्त तो रहने लेना एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड सर सर अभी अभी मत फोड़िएगा नहीं पूरा केक खराब हो जाएगा हिस्टोरिकल मूवमेंट रुक बेटा ये केक बनाने के लिए बहुत मतलब मैंने सुबह से लगातार सर एक सेकंड हट ये इसको हटा दो
ना एक सेकंड हां अभी कुछ ना बाद में हटा देंगे सर छोड़ के पहले बच्चों को दिखाइए केक एक सेकंड एक सेकंड बेटा ये केक आपको दिखाएंगे हम लोग पूरी कोशिश करेंगे आज का केक ऐसे मत हटाओ ठीक है और इसकी पहले फोटो खींच लेते हैं। बहुत शानदार केक आया। इतना प्यारा केक है। और बेटा थैंक यू सो मच। आप सबके इस ऐतिहासिक क्लास के दौरान ही हमारा 2 मिलियन का परिवार पूरा हुआ। हमें बहुत खुशी हो रही है आप सबके साथ आज इस क्लास के दौरान। एक्सेप्ट करो। ठीक है। हां हो गया भाई। डन।
ओपन हो गया। और देखते हैं अभी 2 मिलियन से अब काफी ऊपर जा चुके होंगे इस समय। हमने डाल दिया। उसका वो कहां गया? क्या नाम है? अरे इसका कट करने वाला है उसमें डिब्बा उसमें होगा ऊपर शायद चैट खोल दो भैया चैट सामने खोल दो हां जी प्यारे बच्चों चलो और सुबह से आप लोग जिस जोश खरोश के साथ जुड़े हो बेटा उसी जोश खरोश से आज ये केक कटेगा ठीक है और थैंक यू सो मच कि आज ये हमारा परिवार यूपी बोर्ड का हमारा परिवार 2 मिलियन का हो चुका है। 2 मिलियन मतलब
पूरे-पूरे बेटा 20 लाख बच्चे इस परिवार से जुड़ चुके हैं। ठीक है? की आबादी के बराबर होनी है और यूपी यूपी बोर्ड के नाम पर ऐसा चैनल हमारा है कि जो यूपी बोर्ड के नाम पर इस पर 20 लाख से भी ज्यादा बच्चे विश्वास किए हुए हैं। हमने पहले वन डे वन से आपको यूपी बोर्ड यूपी बोर्ड कह के पढ़ाया है। खुल गया भाई खुल गया। चलो हां जी। तो प्यारे बच्चों अभी तक में ये संख्या हमारी पहुंच चुकी है दो 203082। बहुत-बहुत धन्यवाद प्यारे बच्चों आप सब उधर उधर उधर उधर रखिए उधर रखिएगा इधर
ना आने इधर ना आने आएगा इधर आएगा अब नहीं आएगा नहीं ठीक है तो प्यारे बच्चों थैंक यू सो मच मैं बताता हूं मैं बताता हूं मैं बताता हूं ये बच्चों के लिए इधर देखिए इधर दिख दो भाई तो बेटा आप सबके लिए ये ठीक है ये आप तक पहुंच रहा है और बहुत-बहुत धन्यवाद अब केक कैसे दिखाया जाए बहुत महंगा केक भाई हल्का सा हल्का सा है यार क्या यार एक बार ओबीएस ओबीएस दिखाओ ओबीएस से हो जाएगा ओबीएस ज़ूम हो जाएगा क्या ज़ूम करके बेटा इस कंसंट्रेट कर दो ज़ूम करके देख लो ओबीएस
से एक बार दिखाओ से बेटा बाकी मैं इसकी फोटो डाल दूंगा थोड़ा सा गिरे नाके ठीक है ये देखिए बेटा दो मिलन दिख रहा है यहां पे और थैंक यू सो मच ये दो मिलन स्टोरी यार Instagram पे आके विद्या कुल के टैग कर दो थैंक यू सो मच बेटा सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद यही नहीं हुआ 2 मिलियन प्लस आप सबके प्यार से हुआ है। फोटो खींच लेना हर जगह मेंशन करना और बाकी इसके की प्यारी सी फोटो बेटा मैं आपके लिए पोस्ट कर दूंगा कहां पर? कम्युनिटी पोस्ट में और Instagram हर जगह। ठीक है
तो आप सभी लोग एक बार फोटो ले लीजिए इसकी। हां ले लीजिए भाई। भाई तुम भी खींच लेना कैमरामैन एक दो फोटो। आप नहीं आ रही है मैम। थोड़ा भाई ज़ूम कर दो उसको यार। एक दो फोटो खींच लेना। उसको ज़ूम करो थोड़ा। आइए आइए आइए आइए आइए आइए। आइए आइए आइए आइए आइए। हमें कुछ और बताना है। अरे बेटा आपके भैया जी भी आ गए हैं। हेलो हेलो हेलो हेलो एवरीवन। 2 मिलियन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं बिना आपके सपोर्ट के बिना आपके प्यार के बिलकुल पॉसिबल नहीं था कि अच्छा बनवाया सर। 2 मिलियन थैंक यू
सो मच गाइस इतना सारा प्यार देने के लिए विश्वास देने के लिए। नहीं नहीं कटेगा। कटेगा कटेगा। सब इसका सबसे अच्छा 2 मिलियन लग हां। ठीक है। बदलने वाला है। तो प्यारे बच्चों 2 मिलियन प्लस अभी वाली क्लास चली है अभी भी अभी चलती है। अब हम लोग एक केक को काटेंगे। किधर से काटे आइए आइए ऋषि सर ऋषि सर 12 घंटे से आइए सुमित सर। काटिए काटिए सर। आइए आइए सर सर सर। हैप्पी बर्थडे टू यू मिलियन डअ गाइस। बेटा सबसे पहले यह आप लोगों को आप जहां पर भी बैठे हैं आप सबके प्यार
और सपोर्ट के बिना नहीं संभव था और काफी देर से सुबह से तुम लोग बहुत इंतजार कर रहे थे बहुत इंतजार कर रहे थे कि कहां से केक आ रहा है कहां से केक आ रहा है तो बेटा ये आपका केक है आप सबके ठीक है और ये सबसे पहले री सर को भाई 12 घंटे बाबा है सर हम लो बाबा तो आप भी लेडी है ना पहले होता था विजय सर लेडी भैया मैं बता रहा हूं और प्यारे बच्चों आज जो आपने प्यार सपोर्ट ऋषि सर को दिखाया यह प्यार सपोर्ट बनाए रखिएगा इस वर्ष
सबसे ज्यादा बच्चे मैं तो आज का आंकड़ा देख कर के मेरी जो उम्मीद है वो पूरी तीन ओके चलो बोल दो ना पूरे 3 लाख बच्चे YouTube के अंदर इस साल लाइव आएंगे पूरा भरोसा अरे यार मुकेश भाई ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक अरे क्या हुआ मेरे बच्चों ने सर 2 घंटे से यह कह र कह रहे हैं लोग कि सर अमेरिका से केक आ रहा है क्या चार बार यह लोग वादा करके गए कि केक लेके आ रहे हम लेकिन बेटा देखो अच्छा आया ना जो भी आया अच्छा आया जो भी आया बहुत पांच
मिनट मुझे पांच मिनट आप लोग बच्चों का था वो मेरा कहा था कहां जा रहे हो आप और बेटा ये आप सबके प्यार सपोर्ट के बिना संभव नहीं था आप सब ने जो अपना प्यार सपोर्ट दिखाया है मैम मैम मैम मैं मैम मैम मैम मैम बच गई नहीं उधर से नहीं है अभी बिगाड़िए मत केक इतना प्यारा केक है यार सही बात सर अभी इसकी फोटो शूट बाकी क्लोज क्लोज अप हम मैम जाग अरे गजब ये वाला बैकग्राउंड लगा देना भाई शॉट्स काटना तो ये लगाना राता जाग जाग के थैंक यू सर अरे यार लाइन
भूल गया मेहनताना की है अब बेटा ये लाइन लगाना तुम लोग जो है मेहनत करना आज से आज हम लोग क्लास के बीच में कई बार आने की हिम्मत कर रहे थे लेकिन नहीं आए क्योंकि इस समय तुम्हारा समय बहुत इंपॉर्टेंट है और ऋषि भाई ने आज बहुत मन से पढ़ाया साल भर की जो भी क्लासेस थी सबसे प्यारी क्लास आज मुझे लग रही थी तुम लोग सुबह से इतने साथ पढ़ रहे हो और आज यूपी बोर्ड में यूपी बोर्ड यूपी बोर्ड में सबसे ज्यादा बच्चे लाइव आए हैं। 1415000 बच्चा लाइव होना अभी एग्जाम के
15 पांच दिन छ दिन पहले बहुत बड़ी बात है और हमें पूरा विश्वास है इस वर्ष हम लोग कम से कम लाख प्लस बच्चा पढ़ाएंगे और ये सब आप सबके प्यार सपोर्ट से संभव हो सकेगा। घबराना नहीं है। जिन विषयों में बेटा एक-ए दिन का गैप है उन विषयों की कल 6 छ घंटे की क्लास है। जैसे आपकी फिजिक्स की 6 घंटे क्लास है। केमिस्ट्री की 6 घंटे क्लास है। सुबह 6:00 बजे बाबा की और शाम में 6:00 बजे भी बेटा आपके लिए क्लास है। तो जिन विषयों में एक-एक दिन का गैप है। फिजिक्स, केमिस्ट्री
और क्या है? एक इंग्लिश हां तीन विषयों की। कल आपको 6-6 घंटे क्लास मिलेगी और परसों से संपूर्ण रूप से आप ऋषि सर से हिंदी पढ़ रहे होंगे। और इस वर्ष बेटा गैप बहुत कम है। जिस मैथ में 7 दिन का गैप मिला करता था उस मैथ में इस वर्ष दो दिन का गैप है। तो अब तुम लोग घबराना नहीं डरना नहीं। बस आराम से पढ़ो। सब कुछ अच्छा होगा। ठीक है? और अपना प्यार सपोर्ट बनाए रखना। ये 2 मिलियन तो एक झांकी है। अभी 2.2 मिलियन 2.3 मिलियन इसी एग्जाम में हो जाएगा। ये पूरा
भरोसा है। क्योंकि जब पूरा उत्तर प्रदेश यहां पर उमड़ता है। आता है सैलाब। सैलाब के तौर पर तो फिर ये पूरा परिवार सबसे बड़ा और बेटा एक तुम्हें अपना हंसी बात बता दूं कि यूपी बोर्ड के नाम पर यह यूपी बोर्ड का पहला चैनल है। किसी ने आज तक यूपी बोर्ड बोल के नहीं पढ़ाया। हमने डे वन से अब तक केवल यूपी बोर्ड यूपी बोर्ड यूपी बोर्ड बनाए। यूपी बोर्ड का सबसे बड़ा चैनल बनाने के लिए आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद। शुद्ध रूप से शुद्ध रूप से प्योर यूपी बोर्ड का शुद्ध नहीं है। हमने पूरा
शुद्ध रूप से कल बाबा सुबह 6:00 बजे मिल रहे हैं। हां भाई सर आप दो माइक लिए ये ये वाला ये एक माइक उसका तो साथियों ऐसा है कि रसायन विज्ञान की जो भी समस्याएं हैं कल उनका समाधान करने के लिए हम सुबह 6:00 बजे आ रहे हैं और 6 घंटे के लिए आ रहे हैं। यानी कल सुबह 6:00 से 12:00 बजे तक अध्याय एक से लेकर आखिरी यानी जैव अणु तक सारी की सारी केमिस्ट्री तोड़ के रख देंगे। तो कल आप लोग तैयार रहना। आज तो आप ऋषि सर के साथ हो काफी मेहनत कर
रहे हो और कल भी 6 घंटे मेहनत करने के लिए तैयार रहना रसायन विज्ञान का जो डर है उसको भगाने का काम करेंगे कल तीन क्लास रहेगी तो फालतू में रील वगैरह मत देखना डाटा बचा के रखना भाई डाटा बचा के रखना ठीक है अब रील देखने का समय कहां है सर अब तो रील देखने का समय नहीं है जितना हो सकता है तो बेटा कल आप लोग आ जाइएगा आराम से 6 घंटे लगातार हम लोग पढ़ने वाले हैं अरे 18 घंटे छे छे छे तीन 18 घंटे लगातार इतना कोई नहीं पढ़ाता पूरे यूपी बोर्ड
में कोई नहीं पढ़ाता हिम्मत ही नहीं है बेटा इतने इस पढ़ा इस तरह की पढ़ाई की पढ़ाने के लिए कलेजा चाहिए और वो कलेजा केवल विद्या कुल परिवार के पास है। ठीक है? और बस मन लगा के पढ़ते रहो। सारे विषय की संपूर्ण तैयारी फाइनल तैयारी सिर्फ विद्या कुल की जिम्मेदारी है और विद्या कुल निभा एक रैंडम कॉल आती है। कहते हैं सर आपको ऐसा नहीं लगता कि आप लोग एक 15 दिन में पढ़ा के बच्चों को पास करा के पाप कर रहे हो। मका अगर ऐसे पाप से बच्चों का भविष्य बनता है तो मैं
सातों जन्म ये पाप करने के लिए तैयार हूं और लगातार पाप करता रहूंगा। तो बेटा अगर आपने कुछ भी नहीं पढ़ा है तो अब आप लगातार क्लासेस को ज्वाइन करो और लगातार पढ़ो। सारे क्वेश्चंस यहीं से फसेंगे। एक सवाल की दम नैना कि वो बाहर से आ जाए और बेटा बस आप लेकिन एक समस्या ये है कि आपको पढ़ना पड़ेगा। मतलब हवा में नहीं चलना पड़ेगा। आपको सीरियस हो के पढ़ना पड़ेगा। एक बच्चे ने कुछ पैसे देके कुछ लिखा है। एक बारी देख ले। कुछ अच्छा लिखा हो तभी पढ़ेंगे। बेटा थोड़ा क्लिक करने कहां लिखा
है? पैसा दिया है। चलिए लोग पैसा वापस भी तो ले लेते हैं। पैसे वापस लेते हैं। सर जी पैसा वैसा मत लिया करो बेटा। फिजिक्स में अभी तक कुछ नहीं पढ़ा है। तैयारी नहीं उसी हिसाब से तो पढ़ा रहे हैं भैया। उस हिसाब से पढ़ा रहे। कल एक छ घंटे की क्लास है। फिजिक्स की आ जाना बेटा। केमिस्ट्री की क्लास है। इंग्लिश की क्लास है। सर कल सारी क्लास करने आ जाना। ठीक है। घबराना नहीं मजा आती है। ठीक है। सभी लोग आएंगे बेटा। सभी लोग यहीं पर हैं। भाई थोड़ा आराम से आराम से आराम
से। अरे अब क्या करें सर? पूरा ऑफिस केक। अब सामने रखे हुए हैं तो भाई खाने की चीज सामने हो। अभी तो पूरा यूपी पूरा यूपी बोर्ड खाएगा। इससे अभी जूनियर वाले बच्चों को दिखाना है। तुम्हारे छोटे भाई बहनों का चैनल भी 1 मिलियन पूरा होने वाला है। यूपी बोर्ड हाई स्कूल विद्या कुल। देखा मतलब मैम 10 में पढ़ाती है और 10 वाले बच्चों को लेकर मैम की केयर देखी। तुरंत मैम ने कहा कि सर अभी वो वाली क्लास में जाना है। तो बेटा हर टीचर अपने स्टूडेंट को लेकर चालू हो जाता है। तो आप
लोग अजीब लग रहा है। मजे करते रहो बेटा। एग्जाम का समय है। मैं फिर से आपको बैक टू बैक आपको रिमाइंडर दे रहा हूं। एग्जाम का समय बेटा ऐसे वक्तों पे आपको एग्जाम को लेकर बहुत पॉजिटिव रहना है। बहुत सारे लोग कमेंट करने आएंगे कि कुछ नहीं पढ़े हो तो फेल हो जाओगे। नंबर खराब हो जाएगा। पिताजी की प्रेशर होंगे कि भाई अगर इतने परसेंट नहीं आएंगे तो बाहर नहीं पढ़ने जाने देंगे। वो सारी जिम्मेदारी अब हमने उठा ली है। वो चिंताएं हमारी है। रातों में नींद नहीं आती है कि बेटा आपके पेपर में कौन
सा क्वेश्चन आ जाएगा। कहीं आधे घंटे ज्यादा सो लेने से ना निकल जाए। वो आ रहे हैं पांच मिनट। थोड़ा सा रेस्ट लेने पांच मिनट। देखो भैया आर समंदर पार समंदर बीच में है नैया आर समंदर पार समंदर और बीच में है नैया जल्दी-जल्दी क्लास कर लो क्वेश्चन यहीं से लड़ेगा भैया ये बात याद रखना और सुबह-सुबह उठ जाना तैयार रहना ठीक है हम केक खा के तैयार हैं बस और इस समय की क्लासेस के नोट्स बना लो जरूरी है ठीक है इस समय की क्लासेस क्यों आपको रिवीजन में फायदा करेगा तो कॉपी पेन लेके
बैठोगे तो क्लास बीच-बीच में छोड़ के भागोगे सर ये क्या है ये गोल गोल की आदत होती है वो सितारे क्या है सितारे हैं ये मतलब शुक्रिया ये बच्चे हैं भाई जो ये जो 2 मिलियन है वो सितारे हैं हमारे बच्चे उन्हीं से मिलकर तो उन्हीं को हम लोगों ने स्प्रेड करवा दिया। ऋषि सर आ रहे हैं बेटा बस थोड़ा सा बीच में रेस्ट करने के लिए चले गए हैं और देखो बिल्कुल भी परेशान नहीं होना है। परसों से बेटा आप सभी को केवल यहीं पढ़ना है। ध्यान दीजिएगा सुबह से परसों से आपको यहीं से
पढ़ना है। सर ये YouTube लाल वाला खाया जाता है। नहीं नहीं नहीं अभी नहीं। अभी रखे भाई आप इधर मत छेड़ना थोड़ा सा। अभी छोटे बच्चों को दिखा रहे हैं। यार है ना? बाबा कंट्रोल नहीं हो। बाबा भूखड़ा आदमी YouTube तो खा सकता नहीं इसका स्वाद अलग आ गया ना तो दो मिनट उधर कुछ बच्चों को बता दीजिए उनका वक्त जाए ना जाए तो प्यारे बच्चों सबसे जरूरी बात ये है कि जो मैंने नोट्स वाली बात कही नोट्स बना लेना क्योंकि आपके एग्जाम टाइम फास्ट टैग रिवीजन में वो हेल्प करेगा और कॉपी पेन लेने का
फायदा ये होता है आप बीच में क्लास छोड़ के भागते नहीं सबसे ज्यादा वो छोड़ के भागते हैं जो बिना कॉपी पेन के आते हैं फैशन में लगा अच्छा जो स्कूल में कभी-कभी बच्चे होते थे ना जो बैग लेकर नहीं आते थे। सिंगल कॉपी लेकर आते थे भैया। तो आप लोग कॉपी पेन लेकर बैठना जिससे कि हो जाए। पढ़ाई करिए। आपका समय बहुत कीमती है। और एक बार फिर से एनर्जेटिक गाइस जो कि यहां पे 12 घंटे का ट्रेंड सेट करने वाला लड़का खा लो खास हटवा के। हां पूरा हटवा खाएंगे। नहीं वो कुछ नहीं
खाएगा। हम लोग चल रहे हैं। तो भाई थैंक यू। धन्यवाद। आपको एक बार पहले देखो भाई 6:00 बजे तैयार रहना सुबह। ठीक है। मैं तुम लोगों के लिए रात भर सोऊंगा नहीं कंटेंट बनाऊंगा और 6:00 बजे सब लोग आ जाना रसायन विज्ञान अपना विलियन से लेकर जयवाणु तक जो भी चीजें छूटी हैं जो भी तुमको लगता है डर जो ऑर्गेनिक में जो तुमको समस्या होती है जो भी चीजें हैं सारा का सारा कंप्लीट करेंगे। ठीक है? तो कल तैयार रहना। मिलेंगे सुबह 6:00 बजे। लव यू सर। इसमें क्या लिखा है? इसमें कुछ नहीं लिखा है
पता नहीं। वही है वही है। वही है। बेटा मेरी आवाज आ रही है? एक बार कमेंट करके बता दो। उसको नीचे कर दीजिए। हां। उसको नीचे कर दीजिए। वो जो दिख रहा है। ना ना वो नहीं वो नहीं। अरे उससे माउस से माउस से इससे वो है। अच्छा देखना नहीं है आपको। बस मेरी आवाज आ रही है? एक बार बता दो। संकल्प सर बेटा घर चले गए हैं। आपको पता है कि उनके पिताजी का थोड़ा तबीयत ठीक नहीं है तो वो जाते रहते हैं थोड़ा। संकल्प सर बेटा अभी आएंगे थोड़ी देर में। आएंगे तो क्लास
में आएंगे। हां। संकल्प सर थोड़ा घर पे वो मेरी शर्ट पहन के चले आए थे तो मैंने उनको वापस कर दिया था कि सर मेरी शर्ट चेंज करके आइए अभी आए नहीं है थोड़ी देर इंतजार कर लीजिए आ रहे हैं अभी ठीक है हां बुलाए हैं थोड़ा शायद पापा घर पे हैं तो उनका देखभाल करना होता तो हो सकता है 10 मिनट रुक गए हो अभी आएंगे तो उनको क्लास में भेजते हैं ओके ओके सर चलो बेटा ये बहुत अच्छा लगा जो दो मिलियन पूरा हुआ यह ऐतिहासिक क्लास इसको रहने दो ना वो कहां से
लाए थे? वो ये कहां से लाए थे? ले आओ अगर वो तो चलो दो मिनट सभी लोग मौन धारण करेंगे और फिर से आ जाएंगे अपने टॉपिक पे। चलो हो गई मस्ती। हो गई मस्ती बेटा। बहुत मस्ती हुई और यह 2 मिलियन का जो इतिहास है ये तुमने बनाया है। तो ये तुम्हें ही सुपुर्द किया जाएगा। तो हम लोग तीन कहानियां पढ़ेंगे। तीन कहानियों के कौन-कौन से सवाल पढ़ेंगे? ध्यान से देखो। तुम्हारे सिलेबस में ऐसे सवाल आते हैं। देखो ये समीक्षा वाला इस बार जोड़ा गया नया टॉपिक है बेटा। ये समीक्षा वाला इस बार जोड़ा
गया नया टॉपिक है। पहला टॉपिक क्या होता है? उद्देश्य का। पहला सवाल आता है उद्देश्य से। पहला टॉपिक उद्देश्य से आता है। दूसरा टॉपिक आता है सारांश या कथावस्तु। कथावस्तु और सारांश एक ही चीज है। दूसरा आता है कथा वस्तु या सारांश से। तीसरा आता है समीक्षा से। तीसरा आता है समीक्षा से। ध्यान देना। तीसरा आता है समीक्षा से। ये तीन प्रकार के प्रश्न तुमको तैयार करने होते हैं। ये तीन प्रकार के प्रश्न तुमको तैयार करने होते हैं। अच्छा जूम कर दूं। ओके ओके ओके समझ गया बेटा। समझ गया। रुको। चलिए चलिए ज़ूम हो गया।
अब देखिए अब देखिए हम शुरू करेंगे अपनी पहली कहानी से। क्या है हमारी पहली कहानी पंच लाइट? सभी लोग तैयार हैं। एक बार सभी लोग दिल रिएक्ट कर दो बेटा। मैं फिर से पुनः अपने सुबह वाले जोश में वापस आ गया हूं। और ये जो आगे आने वाले 3 घंटे 4 घंटे होने वाले हैं। ये बहुत धमाकेदार होने वाले हैं। कोई रोक नहीं सकता है इसको धमाकेदार होने से। कोई रोक नहीं सकता है बेटा इसको धमाकेदार होने से। तो सभी लोग एक बार शेयर कर दो और अपने WhatsApp की स्टेटस पे लगा दो। और मैं
तुम्हें मैं तुम्हें वो देने जा रहा हूं जिसके लिए तुम लाला हो। एक बार सभी लोग कमेंट सेक्शन में दिल रिएक्ट करेंगे। मैं थोड़ा पीपीटी को चेंज कर लूं क्योंकि क्या दिक्कत है ना कि जो बहुत बड़ी पीपीटी हो गई है तो ये बार-बार क्या हो रहा है कि बार-बार बोर्ड को थोड़ा सा धीरे प्रोसेस करने में हो रहा है। तो मैं शुरुआत की जो नई पीपीटी है कहानी से लगा लेता हूं। बाकी तुमको पीपीटी पूरी मिलेगी। उसके लिए घबराना मत। तो हम लोग सबसे पहले कहानी पर आ जाएंगे। कहानी हम लोग पंचलाइट पढ़ेंगे। पंचलाइट
कहानी में सबसे पहले हम पंचलाइट कहानी के पात्रों के बारे में जानेंगे। पंचलाइट कहानी के कौन-कौन से पात्र हैं बेटा? सभी लोग इस बात को समझ लो। पंचलाइट कहानी के कौन-कौन से पात्र हैं? सबसे पहले हम उस पर बात करेंगे। पंचलाइट कहानी में सबसे पहले तो एक गुलरी काकी हैं जो गांव में सबसे बूढ़ी हैं। गुलरी काकी इनका नाम है। गांव में सबसे बूढ़ी हैं। इनकी एक बेटी है जिसका नाम है मुनरी बेटा और मुनरी गोधन से प्यार करती है। गोधन मुनरी से प्यार करता है। मुनरी की एक सहेली है कनेली जो गोधन के बारे
में जानती है। अच्छा। एक सरदार जी हैं और एक दीवान हैं। सरदार और दीवान दोनों कौन हैं? ये पंचायत के सदस्य हैं। बेटा एक फुटंगी झा हैं। फुटंगी झा कौन है? ब्राह्मण टोली के सदस्य हैं। एक अग्नू महतो हैं। अग्नू महतो कौन है? वैसे मैं तुम्हें बताऊं गांव में अग्नु नाम नहीं होता। गांव में नाम होता है हगनु। गांव में क्या नाम होता है? हगनू। लेकिन क्योंकि ये साहित्य है तो यहां पर थोड़ा अच्छा करने के लिए उनको अग्नु कह दिया गया है। तुमने कभी अग्नु किसी का नाम सुना है? मैंने तो नहीं सुना। भैया
मैंने हगनु सुना है और हगनू ही होता है। मैं मानूंगा ही नहीं कि अग्नु होता है। चलो हो गया हो गया पीपीटी हो गई सही हो गई सही हो गई बस आ रही है बस आ रही है बस एक सेकंड रुक जाओ। एक सेकंड रुक जाओ बस। बस एक सेकंड मुझे दे दो। बस एक सेकंड बेटा बस हो गया। तो भैया गांव में नाम होता है हगनू। लेकिन यहां है अग्नू। अग्नू महतो हमारे गांव में थे एक हगनू। ठीक है? रुदल शाह गांव का बनिया है। ये बनिया भाई साहब ये इनका नाम रुदल शाह है।
और एक जने मूल गए हैं। तुमने देखा होगा आजकल गांव में कीर्तन मंडली होती है रामचरितमानस का पाठ करने वालों की। ठीक है? ठीक है? तो ये मूलगैन भाई साहब जो हैं ये कीर्तन मंडली के सदस्य हैं। मूलगैन भाई साहब कौन है? कीर्तन मंडली के सदस्य हैं बेटा मूलगन भाई साहब। और मूलगन भाई साहब मूलगन भाई साहब हो गया क्लीन चलो बहुत बढ़िया अब मजा आएगा बहुत स्मूथ चलेगा अब क्या हुआ है होता है ये थोड़ा सा जब बहुत ज्यादा पेज हो जाते हैं ना तो ये थोड़ा डल पड़ जाता है अब देखो अब यह
तगड़े से चलेगा अब कोई रुकावट नहीं आएगी इसमें ठीक है? तो यह मूलगैन भाई साहब जो हैं यह भैया कीर्तन मंडली के सदस्य हैं। मूलगैन भाई साहब कीर्तन मंडली के सदस्य हैं। मैं कॉपी दे दूंगा। सबको कॉपी दे दूंगा। पीपीटी कॉपी सब दे दूंगा यार। कहां लेके जाऊंगा मैं बताओ? कहां लेके जाऊंगा मैं? चलो। ठीक है। चलो अब यहां पर आ जाते हैं हम लोग। अब ये हमारे सदस्य हो गए। तीन प्रकार के सवाल इससे आते हैं। कितने प्रकार के सवाल आते हैं? सभी लोग कमेंट करके बताओ कितने प्रकार के सवाल आते हैं बेटा? कितने
प्रकार के सवाल आते हैं? तीन प्रकार के सवाल आते हैं। सभी लोग ध्यान दो। सभी लोग ध्यान दो और आवाज ना आ रही हो तो कमेंट कर देना। प्यारे बच्चों तीन प्रकार के सवाल कहानी से आते हैं। कितने प्रकार के आते हैं? तीन प्रकार के सवाल कहानी से आते हैं। और वह कौन-कौन से प्रकार हैं? एक तो सारांश का, दूसरा उद्देश्य का, तीसरा समीक्षा का। तीनों तुम्हें लिख के बताने जा रहा हूं। केक पा गया हूं। थोड़ा खा लूं। चलिए सबसे पहले देखते हैं देखो जिनको भी टेलीग्राम नहीं मिल रहा हो वो ये क्यूआर स्कैन
कर लो इंडिया आर ऋषि सर हिंदी सर्च कर लो तुमको मिल जाएगा आगे आ जाते हैं पंच लाइट कहानी का सारांश क्या है बेटा देखो मैं फिर से अपने पुनः जोश पुराने जोश में वापस आ गया हूं ये बस एक मिनट झंडा गाड़ देंगे यूपी बोर्ड हमारा है। दबदबा था है और रहेगा। ठीक है? याद रखो और इतिहास में लिख दो। इतिहास ये साहित्य नहीं इतिहास की किताबों में पढ़ाया जाएगा कि साहित्य में दो लोगों का दबदबा था। देखो कैसे लिखोगे। ऐसे ही लिखना है बेटा। रुको यार इसको केक को खा के खत्म कर देता
हूं। बार-बार डिस्ट्रक्शन से साफ हो गया मैं। मैं किसी को कोई टिश्यू पेपर दे दे टिशू पेपर सरकार तुम लोग ना चलो चलो चलो पंचलाइट कहानी का सारांश लिखें। कहानी में बिहार के एक पिछड़े गांव के परिवेश का सुंदर चित्रण किया गया है। महतो टोली में अशिक्षित लोग हैं। उन्होंने रामनवमी के मेले से पेट्रोमक्स खरीदा जिसे वह पंच लाइट कहते हैं। पंच लाइट को ये सीधे देखो कॉपी में ऐसे लिखना है। कोई बदलाव नहीं करना। कुछ भी ज्ञान नहीं दिखाना है तुमको। कोई चौधड़ाहट नहीं करनी है। तुम्हारे ऋषि सर ने जितना कहा उतना पढ़ना है।
जैसे कहा वैसे लिखना है और यह हमारी गारंटी है कि तुमको 100 में 100 मिले। चलो उन्होंने रामनवमी के मेले से पेट्रोमैक्स खरीदा है जिसे वह पंचलाइट कहते हैं। पंच लाइट को सीधे साधे लोग सम्मान की चीज समझते हैं। पंचलाइट को देखने के लिए टोली के सभी बालक औरतें और मर्द इकट्ठा हो जाते हैं। सरदार अपनी पत्नी को आदेश देता है कि शुभ कार्य को करने से पहले वह पूजा-पाठ का प्रबंध कर ले। सभी उत्साहित हैं। परंतु समस्या उठती है कि पंचलाइट जलाएगा कौन? सीधे-साधे लोग पेट्रोमैक्स को जलाना भी नहीं जानते। इस टोली में गोधन
नाम का एक युवक है। वह गांव की मुनरी नाम की एक युवती से प्रेम करता है। मुनरी की मां ने पंचों से गोधन से शिकायत की थी कि उसके मुनरी की मां ने पंचों से गोधन की शिकायत की थी कि वह उसके घर के सामने से सिनेमा का गाना गाता हुआ निकलता है। इस कारण पंचों ने उसे बिरादरी से निकाल रखा है। मुनरी को पता है कि गोधन पंचलाइट जला सकता है। वह चतुराई से यह बात पंचों तक पहुंचा देती है। पंच गोधन को पुनः बिरादरी में ले लेते हैं। सर खुद भुक्कड़ है। क्या करूं
भाई? भूकड़ तो हूं। मैं बहुत ज्यादा खाता हूं। फिर भी देखो तुम लोगों को 12 घंटे पढ़ाई चक्र में कितना कम खाया हूं। इतनी देर में चार बार खाता। मैं सुबह खाता हूं। मैं सुबह दोपहर होने से पहले खाता हूं। दोपहर खाता हूं। दोपहर होने के बाद खाता हूं। शाम खाता हूं। रात में खाता हूं। छह बार खाता हूं। वह पंच लाइट को जला देता है। मुनरी की मां गुलरी काकी प्रसन्न होकर गोधन को शाम के भोजन पर निमंत्रण देती हैं। सोचो कि तुम्हारी होने वाली सास तुम्हें खाने पर बुलाए। कैसा लगेगा? हैं? तुम्हारी होने
वाली सास तुम्हें खाने पर बुलाए और खाना तुम्हारी होने वाली बीवी बनाए। जो तुमसे और जिससे तुम प्यार करते हो। कैसा लगेगा? चलो। पंच भी अति उत्साहित होकर गोधन को कह देते हैं तुम्हारा साथ खून माफ खूब गांव सलीमा का गाना। पंच लाइट की रोशनी में लोग भजन कीर्तन करते हैं तथा उत्सव मनाते हैं। अब कितने लोग ऐसे हैं जो सारांश लिख लेंगे? वो मंगवाया था उस समय सर ने कहा था। कितने लोग सारांश लिख लेंगे बताओ मुझे। अच्छा बाकी लोग तुम्हारे लिए इंपॉर्टेंट नहीं है। केवल एक आदमी इंपॉर्टेंट है तुम्हारे लिए। अब सारांश लिख
लोगे या नहीं? बताओ मुझे फणीश्वर नाथ रेणू हिंदी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध आंजलिक कथाकार हैं। उद्देश्य की बात करते हैं। आखिर इस कहानी के लिखे जाने का उद्देश्य क्या है? यह कहानी क्यों लिखी गई? तो फणीश्वर नाथ रेणू हिंदी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध कथाकार हैं। ग्रामीण अंचलों से उनका निकट का संबंध रहा है। परिचय रहा है। बिहार के अंचलों के सजीव चित्र उनकी कथाओं के अलंकार हैं। ये इतना पीछे क्यों चल रहा है? इसको जरा देखो। जो रही बसमध ठीक हो ले उत्सव के नाम पर इन लोगों ने जो माहौल काटा है दोस्तों अब देखो
ये कहानी का उद्देश्य क्या होता है कोई कहानी क्यों लिखी जाती जाती है। समझो फणीश्वर नाथ रेणू हिंदी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध आंचलिक कथाकार हैं। ग्रामीण अंचलों से उनका निकट का परिचय रहा है। बिहार के अंचलों के सजीव चित्र उनकी कथाओं के अलंकार हैं। पंचलाइट भी बिहार के परिवेश की कहानी है। कहानीकार ने ग्रामीण अंचल का वास्तविक चित्र खींचा है। आवश्यकता किस प्रकार बड़े से बड़े संस्कार और निषेध को अनावश्यक सिद्ध कर देती है। इसी केंद्रीय भाव के आधार पर कहानी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है। गोधन द्वारा पेट्रोक्स जला
देने पर उसकी सब गलतियां माफ कर दी जाती हैं। उस पर लगे सारे प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं तथा उसे मनचाहे आचरण की छूट दे दी जाती है। ग्रामवासी जाति के आधार पर अनेक टोलियों में बंट जाते हैं। वे आपस में ईर्ष्या द्वेष के भाव से भरे रहते हैं। इसका बड़ा सजीव चित्र कहानी में प्रस्तुत किया गया है। कहानीकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस आधुनिक युग में अभी भी कुछ गांव और जातियां पिछड़ी हुई हैं। रेणू जी ने अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम सुधार की प्रेरणा भी दी है। समझ रहे हो? सही है। किसको
आई लव यू बोल रहे हो बेटा? किसको आई लव यू बोल रहे हो बेटा? चलो। पंच लाइट कहानी की समीक्षा लिखिए। अब देखो यह तुम्हारा तीसरा वाला सवाल जो इस बार जोड़ा गया है। तो मैं सभी कहानियों की तुम्हें समीक्षा भी बताऊंगा। अगर आ गया तो क्या करोगे? कलरफुल पेन से नहीं लिख सकते हो। काली और नीली पेन का प्रयोग करना है बस। ठीक है? चलिए। समीक्षा की बात करते हैं बेटा। देखो कहानी की समीक्षा कहानी कला के तत्वों के आधार पर की जाती है। तो सबसे पहले इसके कथानक पर बात करेंगे। बिल्कुल ऐसे ही
लिखना है जैसे लिखा हुआ है। कुछ बदलना नहीं है। अपने शब्दों में कर सकते हो इसको। बाकी हेडिंगवेडिंग कुछ मत बदलना। कथानक कहानी में पंच लाइट की खरीद के माध्यम से ग्रामीण समाज की मानसिकता दिखाई गई है। मां तो टोली पंचलाइट तो खरीद लेती है पर उसे जलाना नहीं जानती। दूसरी टोली से सहायता लेना अपमान माना जाता है। अंततः गोधन जिस पर पंचायत का प्रतिबंध था तो अंचलाइट जला देता है। आवश्यकता के आगे जातीय निषेध टूट जाता है। पात्र परिचय की बात करें। कहानी समूह चरित्र पर आधारित है। पर गोधन मुख्य पात्र के रूप में
उभरता है। सरदार, दीवान, फुटंगी, झा, गुलरी, काकी और मुनरी जैसे पात्र ग्रामीण मानसिकता, रूढ़ और सरलता को दर्शाते हैं। सभी पात्र स्वाभाविक और जीवंत हैं। संवाद शैली कैसी है? संवाद सरल है, स्वाभाविक और आंचलिक जीवन के अनुरूप है। इनमें ग्रामीण बोली और स्थानीय मुहावरों का प्रयोग है जो कहानी को जीवंत बनाता है। संवादों के माध्यम से ग्रामीणों की अज्ञानता, हास्य और मानसिकता स्पष्ट होती है। देश काल और वातावरण कहानी बिहार के ग्रामीण परिवेश को सजी सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। घटनाओं और पात्रों के माध्यम से गांव का वातावरण स्वयं उभर आता है। अंधविश्वास, जातिगत
अहंकार और सामूहिक जीवन शैली स्पष्ट दिखाई देती है। भाषा शैली भाषा आंचलिक बोलचाल की और हास्य व्यंग से युक्त है। लेखक ने ग्रामीण उच्चारण शब्द का प्रयोग कर स्वाभाविक उपयोग किया है। इससे कथा का यथार्थ और प्रभाव बढ़ जाता है। उद्देश्य क्या है? कहानी का उद्देश्य ग्रामीण समाज की रूढ़िवा जातिगत संकीर्णता और अज्ञानता पर व्यंग करना है। साथ ही यह संदेश देना है कि आवश्यकता बड़े से बड़े सामाजिक प्रतिबंध को निरर्थक सिद्ध कर देती है। शीर्षक क्या है? पंच लाइट शीर्षक है। इसका अत्यंत सार्थक है। पूरी कथा पंच लाइट की खरीद, प्रतिष्ठा और उससे जुड़ी
घटनाओं पर आधारित है। इसलिए शीर्षक आकर्षक उचित और पूर्णतः सफल है। मुझे एक बार कमेंट करके सभी लोग बताओ। क्या तुम्हें समझ में आया कि तुम्हें कैसे अपनी कहानी लिखनी है? क्या तुम्हें समझ में आया? अगर पंचलाइट कहानी से सवाल आ जाएगा तो तुम कर लोगे? मुझे एक बार कमेंट करके बताओ। अगर पंचलाइट कहानी से सवाल आ जाएगा तो तुम कर लोगे। बेटा सभी लोग मुझे कमेंट करके बताओ। पंचलाइट कहानी से अगर सवाल आया तो तुम सॉल्व कर लोगे। मुझे बताओ और सभी लोग सेशन को लाइक कर लो। ठीक है? आज की क्लास की लाइक
का टारगेट 500 था। अभी कुछ नहीं पूरा हुआ है। ठीक है? मैंने 1 लाख से 500 कर दिया। अब और क्या चाहता है रे? समझ रहे हो कि नहीं? समझ रहे हो कि नहीं बेटा? चलो सभी लोग ध्यान दो। सभी लोग ध्यान देंगे। सभी लोग ध्यान दो सेशन को शेयर कर दो बेटा सेशन को सभी लोग शेयर कर दो सभी लोग सेशन को शेयर कर दो चलो अगला अगला है बहादुर बेटा देखो बहादुर अमरकांत ने लिखी है बहादुर कहानी किसने लिखी है अमरकांत ने लिखी है आज की क्लास तुम्हारे ऋषि सर के द्वारा दिया गया
आशीर्वाद है यह क्लास नहीं है बेटा अगर ऋषि सर ने कह दिया कि पेपर फंसेगा तो फंसेगा अगर कह दिया कि इस क्लास से आएगा तो इसी क्लास से आएगा। कह दिया कि पेपर दे दिया तो दे दिया। तो तुम लोगों को बस धैर्य से क्लास करनी है। भटकना नहीं है। अगर भटकोगे तो परेशान हो जाओगे। देखो मेरा कोई मुझे तो YouTube पे पढ़ाना है ना। मैं तो तुम्हें कोई एक चीज गलत बता के या बरगला के तो काम कर नहीं सकता। ठीक है? कुछ लोग तो बोलना भी नहीं जानते हिंदी ठीक से। वो भी
पढ़ा रहे हैं। खैर मैं उनको रोक भी नहीं पाऊंगा। मेरी क्या क्षमता कि मैं उनको जाके रोकूं। ठीक है? मैं उनसे निवेदन भी नहीं कर सकता कि ना बताओ बढ़ाओ। समझ रहे हो? हमारे यहां तो आप लोग इस बात का पूरा ध्यान रखो और कोई कुछ बात कोई बात नहीं काम कर लो बाद में दो घंटे देख लेना कोई दिक्कत नहीं है बेटा अपना काम कर लो पिताजी का हाथ बटा लो देखो यार जब जो परिस्थिति है वो परिस्थिति है उससे थोड़ी ना भाग सकते हैं बहादुर कहानी में कौन-कौन पात्र है बेटा एक लेखक है
जो कहानी का वक्ता है। एक निर्मला है जो लेखक की पत्नी है। एक किशोर है जो निर्मला और लेखक का बड़ा बेटा है। एक साले साहब हैं जो निर्मला के भाई हैं और लेखक के साले साहब हैं। एक दिल बहादुर है जो नौकर के रूप में निर्मला और लेखक को मिलता है और किशोर को मिलता है। यही पांच मुख्य पात्र हैं। अच्छा तीन प्रकार के सवाल आते हैं इससे भी। सारांश, उद्देश्य और समीक्षा। अब चलो देखते हैं। सारांश क्या है? ये कहानी कैसी है? कहानी तुमने पढ़ी किसी कोई बच्चा यहां पे ऐसा है जिसने कहानी
पढ़ी हो। बहादुर कहानी। कोई बच्चा ऐसा जिसने बहादुर कहानी पढ़ी हो? मुझे बताओ। कोई बच्चा ऐसा जिसने बहादुर कहानी पढ़ी हो। बताओ कोई बच्चा ऐसा जिसने बहादुर कहानी पढ़ी हो? सेशन को शेयर कर दो बेटा। ठीक है। चलो। अमरकांत द्वारा लिखित कहानी बहादुर एक नेपाली बच्चे के यथार्थ की कहानी है। एक नेपाली बच्चे की सच्चाई है जिसका बाप मर चुका है। और मां के कर्कस व्यवहार के कारण कर्कस शब्द का अर्थ क्या होता है? सामान्य अर्थ कह सकते हो बुरा। बुरे व्यवहार के कारण बहादुर अपने घर से भाग आया है। लेखक को अपने किसी रिश्तेदार
के माध्यम से बहादुर घर के काम के लिए मिल जाता है। आरंभ में तो बहादुर की खूब आओ भगत होती है। आओ भगत क्या होता है? आओ भगत। प्यार मिलना। या सम्मान मिलना। ठीक है? लेखक को अपने किसी रिश्तेदार के माध्यम से बहादुर मिल जाता है। आरंभ में तो इसकी खूब आवगत की गई। लेकिन दिन बीतने के साथ इसमें कमी आती गई। लेखक की पत्नी निर्मला किशोर लेखक का बड़ा लड़का तो मानो बस बहादुर को पीटने के बहाने ढूंढते रहते। बहादुर का बाल मन जबतब आहत होता रहता। परंतु अगले दिन फिर हंसता खेलता बहादुर पूरे
घर के लिए चक्कर घिनने की तरह घूम फिर कर काम करने लगता। एक बार मेहमानों के रुपए खो जाने पर जब घर वालों ने बहादुर पर चोरी का आरोप लगाकर उससे दुर्व्यवहार किया तब बहादुर के स्वाभिमान को चोट पहुंची और एक दिन बिना किसी को बताए बहादुर अचानक घर छोड़कर चला गया। ठीक है? ये बहादुर कहानी का सारांश है। इतनी ही बहादुर कहानी है। ये सारांश तुम्हें 80 शब्दों में लिखना होता है। मैंने तुम्हें शुरुआत में ही तुम्हारे पेपर की कटिंग दिखाई थी। कोई भी कहानी कितने शब्दों में लिखनी होती है? शब्द सीमा 80 शब्द
मिलता कितना नंबर है? पांच नंबर। तो मैंने तुमको ये दिखा रखा है। तो अब तुम यह नहीं कह सकते कि सर बड़ा लिख दें। सर छोटा लिख दें। सर ऐसा लिख दें सर वैसा लिख दें। जैसा तुम्हारे ऋषि सर बता रहे हैं वैसा लिख दो। उसके जाने के बाद घर में मातम छा जाता है। सारे घर वालों ने अपनी गलती स्वीकार कर पश्चाताप करने की ठानी। परंतु उस पश्चाताप को स्वीकार करने उन्हें माफ करने वाला बहादुर जा चुका है और ढूंढे नहीं मिल रहा है। ठीक है? तो जैसा ऋषि सर ने कहा वैसा लिख देना
है। अगर तुमने ऐसा लिखा और तुम्हारा एक नंबर भी किसी ने काट लिया तो आयोग की खैर नहीं मैं देख लूंगा। ठीक है? चलो कर लो। कर लो तुम लोग। कर लो। जो कर रहे हो तुम कमेंट सेक्शन में कर लो। पढ़ना नहीं है। बाप मेहनत मजदूरी करके तुमको पढ़ा रहा है। मोबाइल खरीद के दिया है। बदतमीज कहीं के। धार्मिक उन्माद फैला रहे हो तुम लोग। चलो बहादुर कहानी का उद्देश्य क्या है बेटा? तो कहानी का उद्देश्य क्या होता है? यानी कहानी क्यों लिखी गई है? उद्देश्य का अर्थ है कहानी क्यों लिखी गई है? कोई
भी काम करने के पीछे कोई कारण होता है। लिखी गई है। कारण क्या है? वही उद्देश्य होता है। ठीक। इस कहानी का उद्देश्य समाज में उत्पन्न वर्ग संघर्ष को मानवीय सहानुभूत द्वारा समाप्त करने का संदेश देना है। शोषितों के प्रति मानवता एवं प्रेम का व्यवहार ऊंचनीच के भेद के कारण दिलों में पड़ी दरार को भर देता है। बहादुर भी मानवीय स्नेह एवं संवेदनाओं का भूखा है। मालिक द्वारा पीटे जाने और प्रतिक्रिया स्वरूप उसके द्वारा घर छोड़ दिए जाने पर परिवार के सभी लोगों को पश्चाताप का अनुभव होता है। वह स्वयं को दोषी महसूस करते हैं।
धनी और निर्धन का वर्ग भेद मानवीय भावनाएं ही कम कर सकती हैं। लेखक का मुख्य उद्देश्य दोनों के हृदय का परिवर्तन है और सबके प्रति सहानुभूत व्यवहार बनाए रखने का संदेश देना है। बहादुर कहानी अत्यंत मार्मिक कहानी है। यह आत्मकथात्मक शैली में प्रस्तुत की गई है। अमरकांत जी ने बड़े सटीक और सुंदर ढंग से कहानी को प्रस्तुत करके पाठकों के मन पर अमित छाप छोड़ी है। कहानी कला के तत्वों की दृष्टि से यह एक सफल कहानी है। समझ रहे हो? समझ रहे हो? कहानी का पीडीएफ अलग दे दीजिएगा। ठीक है? मैं हर पार्ट का पीडीएफ
अलग-अलग बना के दे दूंगा। समझे? बहादुर कहानी क्यों लिखी गई है? समझ में आया? बहादुर कहानी क्यों लिखी गई है? समझ में आया? तुम जब गरीब हो तो तुम पर बहुत अत्याचार होगा। लेकिन जो अत्याचार करने वाले हैं वह कभी नहीं सोचेंगे कि वो अत्याचार क्यों कर रहे हैं। ठीक है? सबसे बड़ी चीज ये कोई किसी भी पर अत्याचार करता है तो उसका कोई कारण होता है। अगर आप बिना कारण के किसी पर अत्याचार कर रहे हो क्योंकि वह तुमसे कमजोर है। तो हां पेपर लीक हो जाएगा। चुप रहो ये सब बात बार-बार मत करो।
अच्छा स्क्रीनशॉट लेना है ले लो। इस पर आधारित एक और सवाल बनता है। बहादुर कहानी की समीक्षा वाला। समीक्षा केवल बहादुर और पंचलाइट कहानी की तुम्हें बता रहा हूं क्योंकि इन्हीं दो की आने की संभावना है। कथानक क्या है? यह कहानी बहादुर नाम के एक नेपाली किशोर की है जो गरीबी और मां की डांट से भागकर शहर आता है। वह एक मध्यवर्गीय परिवार में नौकर बनता है। जहां पहले उसे बहुत प्यार मिलता है। लेकिन धीरे-धीरे वह मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार होने लगता है। पात्र परिचय की बात करूं। बहादुर जहां मानवीय निष्ठलता और धैर्य
का प्रतीक है वहीं निर्मला और किशोर मध्यवर्गीय समाज की उस संवेदनहीनता को दर्शाते हैं जहां दिखावा और अहंकार रिश्तों की गरिमा पर हावी हो जाते हैं। बहादुर का अपमान सहकर भी मुस्कुराना उसकी चारित्रिक महानता को सिद्ध करता है। मध्यवर्गीय मानसिकता पर प्रहार लेखक ने यह दिखाया है कि मध्यवर्ग अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए नौकर तो रख लेता है लेकिन उसे इंसान नहीं समझता। दूसरों के पास नौकर है तो मेरे पास भी होना चाहिए। यह दिखावे की भावना ही बहादुर के दुखों का कारण बनती है। कहानी स्पष्ट करती है कि यह वर्ग भीतर से कितना खोखला
और संवेदनहीन है। भाषा और ये क्या हुआ? भाषा शैली अमरकांत जी ने बहुत ही सरल, सहज और बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है। कहानी उत्तम पुरुष शैली में लिखी गई है। जिससे पाठक स्वयं को घटनाक्रम से जुड़ा हुआ महसूस करता है। आंचलिक शब्दों के प्रयोग ने कहानी को सजीव। बेटा देखो अगर समीक्षा आ गई तो ऐसे ही लिखना है। कोई शब्द का बदलाव नहीं करना है। अगर कह दिया तो कह दिया बात खत्म। बेटा खंड काव्य भी है। देखो सारे खंड काव्य हैं। देखो कहां गया? सारे खंड काव्य हैं। ठीक है? और बहुत विस्तृत
हैं। ठीक है? लेकिन खंड काव्य हम सबसे अंत में करेंगे और खंड काव्य का पीडीएफ तुम्हें जरूर दूंगा क्योंकि खंड काव्य को लेकर तुम लोग बहुत परेशान हो। मानवीय संवेदना और पछतावा कहानी का अंत बहुत मार्मिक है। जब बहादुर चला जाता है और सबको अपनी गलती का एहसास होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। बहादुर का सामान, पुरानी कमीज, गोलियां, ताश की गड्डी वहीं रह जाता है जो उसकी मासूमियत की याद दिलाता है। घर के सदस्यों का पछतावा यह सिद्ध करता है कि इंसान की कीमत उसके चले जाने के बाद ही समझ
आती है। निष्कर्ष क्या है? बहादुर कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रेम और सहानुभूति के बिना कोई भी रिश्ता जीवित नहीं रह सकता। यह पाठकों के मन में यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या हम अपने आसपास के बहादुरों के साथ न्याय कर पा रहे हैं? यह इसका की समीक्षा है। ठीक है? ये इसकी समीक्षा है। पीडीएफ कब आएगा? अभी भेज दूं क्या? अभी भेज दूं? बंद कर दूं क्लास। पीडीएफ कब आएगा? नहीं। पीडीएफ आपको क्लास करनी है कीजिए। मैं पीडीएफ नहीं दूंगा। पीडीएफ किसी को नहीं मिलेगी। तुम लोग इतनी यार मैं कह रहा
हूं क्लास खत्म हो जाएगी पीडीएफ दे दूंगा लेकिन क्लास में कोई कोई एक बच्चा मुझे नहीं लग रहा कि जिसका मन लग रहा हो पढ़ने में तुम्हें पीडीएफ चाहिए पहले पागल लोग ध्रुव यात्रा ध्रुव यात्रा के भी देखो सवाल ध्रुव यात्रा के भी कर लेते हैं सवाल ध्रुव यात्रा के भी कर लेते हैं आपको फोकस करना है तीन कहानियों पर बहादुर लाठी और पंचलाइट पर कहानी के पात्र तीन हैं राजा रिपुदमन उर्मिला आचार्य मारुति की पुत्री तथा राजा रपदमन की प्रेमिका आचार्य मारुति ख्याति प्रसिद्ध मनोचिकित्सक और उर्मिला के पिता तीन प्रकार के इसमें भी प्रश्न
आएंगे सारांश के उद्देश्य के और समीक्षा के ध्रुव यात्रा कहानी का सारांश देखते हैं। राजा रिपुदमन उत्तरी ध्रुव की यात्रा सफलतापूर्वक कर यूरोप के विभिन्न नगरों से होते हुए लौटे। जहां-जहां वे रुके उनका भव्य सम्मान हुआ। अखबारों में छपी इस खबर को पढ़कर उर्मिला ने प्रसन्न होकर अपने सोते शिशु का माथा चूमा को चूम लिया या माथा चूम लिया। कई दिनों तक ध्रुव यात्रा की खबरें छपती रही। रिपु दमन मुंबई पहुंचे। फिर शिष्ट मंडल के आग्रह पर दिल्ली आए। वे सबसे सौजन्य पूर्वक मिले और उनके चेहरे पर किसी गहरे विचार की छाया थी। एक संवाददाता
ने लिखा कि वह उपस्थित होकर भी कहीं दूर प्रतीत होते थे। यह पढ़कर उर्मिला ने अखबार अलग रख दिया। यूरोप में रहते हुए रिपदमन ने आचार्य मारुति की ख्याति सुनी थी। अवकाश मिलते ही वह उनसे मिले और अपनी अनिद्रा व मानसिक अशांति की बात कही। दोनों के बीच लंबा संवाद हुआ। रिपदमन विवाह को बंधन मानता था पर प्रेम से इंकार नहीं करता था। एक दिन सिनेमा हॉल के एक बॉक्स में रिपमन और उर्मिला मिले। उर्मिला उसकी प्रेमिका और उसके पुत्र की मां थी। यह रहस्य उन्हीं दोनों तक सीमित था। मतलब बिना विवाह हुए हां साहित्यिक
हिंदी वाले भी क्लास कर सकते हैं। चलिए बच्चे का नाम रिदममन माधवेंद्र बहादुर रखा गया। उर्मिला ने पूछा कि वह अपना कार्य बीच में छोड़कर क्यों आया? रिपदमन ने कहा कि वह केवल उसी का है। उर्मिला ने गर्व से कहा कि उसका अगला लक्ष्य दक्षिणी ध्रुव होना चाहिए और उसे अवश्य जाना होगा। आचार्य मारुति ने उर्मिला से विवाह का आग्रह किया पर वह तैयार नहीं हुई। मारुति ने रिदममन को बताया कि उर्मिला उसकी सगी पुत्री है। विवाह की इच्छा होते हुए भी उर्मिला के हट के कारण रिपुदमन ने तीसरे दिन दक्षिणी ध्रुव के लिए प्रस्थान
का निश्चय कर लिया। कुछ ही दिनों बाद अखबारों में सनसनी फैल गई। राजा रिपुदमन मृत पाए गए। कनपटी के आरपार गोली का निशान था। तकिए के नीचे विलेय पत्र में लिखा था यह यात्रा निजी थी। वचन निभाने जा रहा था। ध्रुव पर भी बचना नहीं था। अब भी नहीं बचूंगा। ईश्वर मेरे प्रिय और मेरी आत्मा की रक्षा करें। ठीक है? अब ध्रुव यात्रा का सारांश थोड़ा बड़ा है। इसीलिए मैं कह रहा था कि ध्रुव यात्रा के सारांश से बचो। ठीक है? तीन कहानी पढ़ के जब काम हो जाए तो चारों पढ़ने की क्या जरूरत है?
पढ़ लो बेटा। पढ़ लो। जो तुम कर रहे हो ना वो कभी मेरा भी करता था। खैर उससे कुछ खराब नहीं होता मामला। मेहनत करने मेहनत कर लो यार। अच्छा परसेंटेज आ जाएगा। मैं कभी टॉपर नहीं बन पाऊंगा। तुम बन जाओगे। मा ध्रुवयात्रा कहानी का उद्देश्य क्या है? ये कहानी क्यों लिखी गई? इस पर अगर बात करें तो मारुती रिपदमन को बताता है कि उर्मिला उसकी सगी पुत्री है। उसे विवाह करके साथ रहना चाहिए। नहीं अच्छा यह गलत हो गया। यह यह उद्देश्य वाला सवाल भटका हुआ था। पहले से मैंने मैं इसको सही नहीं कर
पाया। चलो कोई बात नहीं। ध्रुव यात्रा कहानी की समीक्षा पर देखो बात कर लेते हैं। यह इसकी समीक्षा थोड़ी बड़ी है क्योंकि कहानी बड़ी है। जैनेंद्र कुमार हिंदी के महान कथाकार हैं। वे व्या व्यक्तिवादी दृष्टिकोण से पात्रों के सूक्ष्म मनोविश्लेषण में अत्यंत कुशल हैं। यद्यप वह प्रेमचंद की परंपरा के अग्रगामी लेखक माने जाते हैं। तथापि उन्होंने हिंदी इस कथा साहित्य को नवीन शिल्प, गहन मनोवैज्ञानिकता तथा दार्शनिक गंभीरता प्रदान की है। ध्रुव यात्रा उनकी एक सामाजिक मनोविश्लेषणात्मक एवं यथार्थवादी कहानी है। कहानी कला के प्रमुख तत्वों के आधार पर इसकी समीक्षा निम्नलिखित है। शीर्षक की बात करें
कहानी का शीर्षक ध्रुव्यात आकर्षक सार्थक तथा जिज्ञासा पूर्ण है। यह शीर्षक प्रतीकात्मक भी है और कथ्य के साथ पूर्णतः सामंजस्य स्थापित करता है। कहानी का प्रारंभ नायक राजा रघुदधमन को ध्रुव यात्रा से लौटने से होता है तथा अंत ध्रुव यात्रा पर पुनः जाने से पूर्व उसके जीवन समापन पर होता है। इस प्रकार संपूर्ण कहानी ध्रुव यात्रा के भावबोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है। अतः शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त संक्षिप्त एवं सारगर्भित है। तुम अगर अभी नहीं पढ़ना चाहते तो कोई बात नहीं मत पढ़ो। लेकिन तुम एक बात सोचो कि अगर आज नहीं पढ़ोगे तो कब पढ़ोगे? 13 तारीख
खत्म होने वाली है। 14, 15, 16, 17 चार दिन। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स, बायोलॉजी एक-ए दिन का गैप है। एक एक दिन का गैप। बोर्ड एग्जाम में से कुचल के निकल जाएगा। कुचल के कुछ नहीं बचेगा अफसोस करने के अलावा। बाकी तुम्हारे ऊपर है। सारांश 80 से 100 शब्द में लिख सकते हो। लेकिन भाई जो कहानी बड़ी है उसका सारांश भी बड़ा होगा। कथानक श्रेष्ठ कथाकार जयेंद्र कुमार ने इस कहानी को आधुनिक कहानी कला के अनुरूप सशक्त कथानक प्रदान किया है। कहानी की कथा वस्तु का आरंभ राजा रिपुदमन की ध्रुव यात्रा की वापसी से होता है।
कथानक का विकास रिपुदमन और आचार्य मारुती के संवाद तत्पश्चात रिपुदमन और उसकी विवाह अविवाहिता प्रेमिका उर्मिला के संवाद तथा उर्मिला और आचार्य मारुति के बीच हुए संवाद के माध्यम से होता है। कहानी के मध्य में यह रहस्य उद्घाटित होता है कि उर्मिला आचार्य मारुति की सगी पुत्री है। कथावाचक का चरमोत्कर्ष कथानक का चरमोत्कर्ष राजा रिपुदमन के आत्मघात के साथ होता है जो कहानी को अत्यंत मार्मिक बना देता है। कहानीकार ने एक सुस सुसंस्कारित युवती के उत्कृष्ट और त्याग पूर्ण प्रेम की पराकाष्ठा को प्रस्तुत किया है। अब भैया सुसंस्कारित कैसे है? जब विवाह के पहले बच्चा
पैदा कर ले रही है। तो सुसंस्कारित कहां से हो गई? लेकिन अब वही बात है कि समाज जो चाहे कह ले। प्रेम को सामाजिक बंधनों से ऊपर सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया है। कहानी के सभी पात्र कर्तव्य और नैतिकता कर्तव्य, नैतिकता और आत्म संयम के प्रति निष्ठावान दिखाई देते हैं। मनोवैज्ञानिक गहराई, दार्शनिकता और संवेदनात्मकता के कारण यह कहानी पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है। निष्कर्षतः ध्रुव यात्रा एक अति अत्युत्कृष्ट कथानक वाली कहानी है। उद्देश्य क्या है इसका? प्रस्तुत कहानी के माध्यम से जयेंद्र कुमारी स्पष्ट करते हैं कि प्रेम एक पवित्र
और आत्मिक बंधन है। जबकि विवाह एक सामाजिक बंधन है। सामाजिक व्यवस्था है। प्रेम में पवित्रता, त्याग और समर्पण होता है। जबकि विवाह में सामाजिक उत्तरदायित्व और कभी-कभी स्वार्थ का प्रवेश भी हो सकता है। प्रेम व्यक्ति को उसके लक्ष्य तक पहुंचने की प्रेरणा देता है। उर्मिला के शब्द हां स्त्री रो रही है। प्रेमिका प्रसन्न है। अब ये पागलपन भैया। इस कहानी को जब तुम पढ़ोगे, कहानी पढ़ते-पढ़ते तुम पागल हो जाओगे। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो। सभी बच्चे जो भी क्लास को देख रहे हैं, एक बार अपने ऋषि सर के लिए डिजिटल गुरु
दक्षिणा के रूप में सेशन को शेयर कर दो। सभी लोग सेशन को शेयर करेंगे। सभी लोग सभी लोग सेशन को शेयर कर दो बेटा। चलो एक बार सभी लोग सेशन को शेयर करो। सभी लोग बुला के लाओ। सभी साथियों को अपने साथियों को बुला के लाओ। अपने साथियों को बुला के लाओ। अपने सभी साथियों को बुला के लाओ। चलो स्त्री की ममता सुन मत सुनना। मैं भी पुरुष की नहीं सुनूंगी। दोनों जने प्रेम की सुनेंगे। प्रेम जो अपने सिवा किसी दया को किसी को कुछ नहीं जानता। कहानी के केंद्रीय भाव को सशक्त रूप से व्यक्त
करते हैं। निष्कर्षता कहा जा सकता है कि प्रेम को सर्वोच्च मानवीय मूल्यों के रूप में प्रतिष्ठित करना इस कहानी का मुख्य उद्देश्य है। जिसमें कहानीकार पूर्णतः सफल रहा है। निष्कर्ष क्या है? ध्रुव यात्रा मनोवैज्ञानिक गहराई नैतिक द्वंद दार्शनिक दृश्य और संवेदनशीलता संवेदनशील प्रेम भावना से युक्त एक उत्कृष्ट कहानी है। यह जयंत कुमार की कथा प्रतिभा का सशक्त उदाहरण है। लास्ट वाला क्या है बेटा? लाठी जो है लेखिका शिवानी है। इसकी लाठी की लेखिका कौन है? शिवानी है। लाठी कहानी का सारांश देखते हैं। कप्तान जोशी अपनी तपेदिक पीड़ित व ट्यूबरक्लोसिस टीवी पीड़ित पत्नी बानो की सेवा
के लिए गोठिया सेनेटोरियम के तीन नंबर बंगले में दुगना किराया देकर उसके साथ रहते हैं। वे दिन रात पूरी निष्ठा और प्रेम से उसकी देखभाल करते हैं। दवाइयां कुछ गड़बड़ा गया है क्या? नहीं सही। वह दिन रात पूरी निष्ठा और प्रेम से उसकी देखभाल करते हैं। दवाइयां देना, तापमान लिखना, उसे प्रसन्न रखने का प्रयास करना उनके जीवन का उद्देश्य बन जाता है। परिवार के विरोधाभा विरोध और माता-पिता के भावुक पत्रों का भी उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सेनेटोरियम में भर्ती नेपाली भाभी कप्तान के त्याग और समर्पण की खुले मन से प्रशंसा करती हैं। विवाह
के कुछ दिन बाद ही कप्तान को युद्ध के कारण दूर जाना पड़ता है। उनके ना होने पर बानो, ससुराल के अत्याचार, तानों और कठोर श्रम से टूट जाती है और अंततः क्षय रोग से ग्रस्त हो जाती है। युद्ध से लौटकर कप्तान जब बानो को देखता है तो उसकी जजर अवस्था देखकर स्तब्ध रह जाता है। डॉक्टर के आदेश पर उसे घर ले जाने की तैयारी होती है। पर अगले ही दिन बानो लापता हो जाती है और नदी घाट पर उसकी साड़ी मिलने से उसके आत्महत्या करने का अनुमान लगाया जाता है। समय बीतने पर कप्तान पुनर्विवाह कर
लेता है। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। ठीक है? और मेजर के पद तक पहुंचता है। अंत में वह बानू लाठीक नामक स्मृति विहीन स्त्री के रूप में पहचान लेता है। पर वह ना बोल पाती है और ना ही अपने अतीत को याद कर पाती है। यहीं इस करुण और विडंबना पूर्ण कहानी का अंत हो जाता है। ठीक है? करुण और विडंबना पूर्ण कहानी का अंत हो जाता है। आगे बढ़ते हैं। लाठी कहानी का उद्देश्य लिखें। उद्देश्य क्या है? इस कहानी का ये कहानी क्यों लिखी गई? सुप्रसिद्ध लेखिका जो शिवानी द्वारा रचित कहानी लाठी
घटना प्रधान तथा आदर्श प्रेम पर आधारित एक मार्मिक कहानी है। यह कहानी नारी त्रासदी को केंद्र में रखती है। लेखिका ने समाज की असंवेदनशीलता का अत्यंत सहज और यथार्थ चित्रण किया है तथा मध्यवर्गीय समाज में पति की अनुपस्थिति में रहने वाली स्त्री के जीवन की पीड़ा को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया है। कहानी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनेक अवसरों पर स्त्री ही स्त्री के शोषण का कारण बनती है। लेखिका समाज की रूढ़िगत मानसिकता को बदलना चाहती है। देखो तुम्हारे घर में तुम भी तुम्हारे भी बहनें होंगी। तुम्हारे भी भाई होंगे। सभी
लोग इस चीज को समझो। तुम्हारी मां यह जरूर चाहेगी कि तुम्हारी अगर तुम बेटी हो तो तुम्हारा विवाह ऐसे घर में हो जहां तुम बेटी की तरह रखी जाओ। लेकिन तुम्हारी मां कभी तुम्हारे भाई के पत्नी को बेटी की तरह नहीं रखेगी। यानी कोई भी मां अपने बहू को बेटी की तरह नहीं रखती है। लेकिन वो हर मां चाहती है कि मेरी बेटी बेटी की तरह रखी जाए दूसरों के घरों में। क्यों भाई? तुम भी तो करो वैसा। तो यह समाज में बहुत गहरी दबी हुई बुराई है। बहू को वही प्रेम और स्नेह और सम्मान
मिलना चाहिए जो अपनी सगी बेटी को दिया जाता है। लेखिका यह भी प्रतिपादित करती है कि छय रोग कोई असाध्य रोग नहीं है। रोगी को सेनेटोरियम भेजने के स्थान पर यदि प्रेम सहयोग और विशेष देखभाल दी जाए तो उसे बचाया जा सकता है। पति के अभाव में स्त्री का ससुराल में कोई सम्मान नहीं रह जाता और उसे शारीरिक तथा मानसिक यातनाओं का शिकार होना पड़ता है। इन सामाजिक सच्चाइयों से पाठक को अवगत कराना ही इस कहानी का मुख्य उद्देश्य है। अच्छा खंड काव्य को हम बाद में करेंगे। हम थोड़ा सा एक टॉपिक और पढ़ेंगे। हमने
कहानी खत्म कर ली है दोस्तों। आपके सिलेबस में वाक्यांश के लिए एक शब्द है। आपके सिलेबस में वाक्यांश के लिए एक शब्द है। ठीक है? वाक्यांश के लिए एक शब्द। चलो सभी लोग इसका उत्तर देंगे। सभी लोग इसका उत्तर देंगे। सभी लोग ऑब्जेक्टिव सवाल का उत्तर देंगे। जिसकी गणना ना की जा सके वो क्या है? जिसकी गणना ना की जा सके वो क्या है? सभी लोग कमेंट सेक्शन में उत्तर दो। चलो पहले हिंदी व्याकरण के छोटे-छोटे टॉपिक पढ़ के खत्म कर लेते हैं। फिर आगे चलते हैं। जिसकी गणना ना की जा सके। सभी लोग इसका
उत्तर देंगे। कोई एक बच्चा ऐसा भी ना ऐसा ना हो जो इसका उत्तर ना दे रहा हो। ठीक है सभी लोग बताओ यहां पर देर से दिख रहा है बाकी जगह सही दिख रहा है बच्चे आंसर कर रहे हैं यहां पे आंसर अभी खुल ही नहीं पाया है क्या हां अब सही हुआ है शायद। चलो तो जिसकी गणना ना की जा सके वह क्या हो गया? अगणनीय हो गया। अगला अगला क्या है बेटा? जंगल की आग को क्या कहते हैं? जंगल की आग को क्या कहते हैं? जंगल की आग को क्या कहते हैं? बताइए। जंगल
की आग को क्या कहते हैं? तो जठराग्नि तो बेटा कहते हैं पेट की आग को। पेट की आग। यह होती है जठराग्नि। बड़वाग्नि कहते हैं समुद्र की आग को। समुद्र की आग इसे कहते हैं बड़वाग्नि। दावाग्नि किसे कहते हैं? यह होती है जंगल की आग। ठीक है? वनाग्नि नहीं वनाली नहीं होती ना ही वनाग्नि होती है। नेक्स्ट क्वेश्चन जो ईश्वर में विश्वास करता हो। जो ईश्वर में विश्वास करता हो। देखो सबसे पहले तो यहां कृतज्ञ दिया है। कृतज्ञ माने क्या होता है? किए गए उपकार को मानने वाला मानने वाला कृतज्ञ होता है। जो ईश्वर में
विश्वास करता है वह आस्तिक होता है। जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता वो नास्तिक होता है। तो यह वाला सही सही हो जाएगा। सही है? आई लव यू बेटा। आई लव यू। सभी लोग सेशन को शेयर करेंगे। एक बार सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर इसे लगा देंगे और सेशन को लाइक कर लीजिएगा सभी लोग। आज के इस क्लास के लाइक का टारगेट 1 लाख लाइक है। जो गलत कार्य के लिए हट करे। देखो गलत कार्य के लिए हठ करना। हां, गलत कार्य के लिए हठ करना को दुराग्रह कहा जाएगा। और गलत कार्य के
लिए हठ करने वाला ये कहा जाएगा दुराग्रही ठीक है। ठीक है। समझ गए? सत्याग्रही क्या हो जाएगा? सत्य के लिए आग्रह करने वाला जिसका कोई शत्रु पैदा ना हो। अजय कौन होता है? अजय होता है जो जीता ना जा सके। अजय होता है। अजात शत्रु होता है जिसका कोई शत्रु पैदा ना हो। अजन्मा जिसने जन्म ना लिया हो। अनंत जिसका कोई अंत ना हो। समझ गए? बी विल बी द राइट आंसर। चलो जो बहुत कुछ जानता हो। देखो सर्वज्ञ क्या होगा? जो सब कुछ जानता हो बहुश्रत जिसने बहुत कुछ सुना हो बहुपथ जिसने बहुत खुश
हूं पढ़ा हूं। ठीक है? बहुज्ञ जो बहुत कुछ जानता हो। समझ गए? सभी लोग आंसर करेंगे। सभी लोगों का आंसर मुझे दिखना चाहिए कमेंट सेक्शन में और सभी बच्चे शेयर कर देंगे एक बार बेटा। सभी बच्चे एक बार शेयर कर देंगे सेशन को। इतना नहीं कर सकते तुम मेरे लिए। द्रोणाचार्य ने तो अंगूठा ही मांग मांग लिया था। मैं तो अंगूठा भी नहीं मांग रहा हूं। नहीं भाई जिसका ज्ञान कम हो अब देखो अज्ञेय जिसे कोई ना जानता हो अनजान जो कुछ ना जानता हो अक्षम जो कुछ भी करने में सक्षम ना हो। अल्पज्ञ जिसका
ज्ञान कम हो। देखो सारे उत्तर तुमको लिखते इसलिए रहना है बेटा क्योंकि कोई भी सवाल आ सकता है। एक ऑप्शन से चार ऑप्शन मैं इसलिए बना रहा हूं कि कल को तुम्हें कोई चुनौती ना झेलनी पड़े। समझ रहे हो? चलो किए गए उपकार को ना मानने वाला अब देखो मैंने तुमसे कृतज्ञ का क्या बताया था कृतज्ञ का कृतज्ञ का क्या बताया था इसका उत्तर दो सभी लोग किए गए उपकार को मानने वाला कृतज् कौन होता है कृतज्न होता है। किए गए उपकार को ना मानने वाला। परोपकारी कौन होता है? दूसरों पर का दूसरों का उपकार
करने वाला। ठीक है? दूसरों का उत उपकार करने वाला। दूसरों का उपकार करने वाला। ठीक है। अरे सर घृणा के योग्य घृणित घृणा के योग्य कौन है सर? घृणा के योग कौन है? अब मैं थोड़ा थकने लगा हूं। सर बूढ़ा हो रहा हूं। जो ट्रेलर दिखाया ना सर क्या ट्रेलर दिखाया? ट्रेलर जो ट्रेलर था देखे? हां आपका देखे? आज के सेशन में सर ये तो अभी ट्रेलर वो नहीं उदित वाला ट्रेलर नहीं देखे वो इससे तगड़ा है वो इससे तगड़ा तो वही 18 तारीख वाला होगा तगड़ा तो वही 18 वो नहीं उदित जो ट्रेलर यही
बना जो उदित ट्रेलर में दिखा बना रहा है बहुत तगड़ा है अब आप है तो तगड़ा ऐसा नहीं है भाई आगे ऐसे अरे यार क्या है तो तगड़ा रहेगा आप लोगों को वैसे भी मुकेश सर को कौन जानता है यूपी में केवल मुझे लोग जानते हैं इतना सच नहीं बोलना तो आज आप चली गई आदमी अब गई आवाज आ तो गई आवाज उभर आएगी सर जब भीड़ बढ़ेगी तो आवाज आपकी उभर के निकलेगी दहाड़ेंगे सर आप मार्केट वाले सब छुप के बैठ के देखेंगे दहाड़ रहा छिप जाओ भाई देखिए सर मैं साल भर तो उतनी
मेहनत नहीं करता हूं लेकिन मुझे लगता है कि जब बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत है तब इन्हें कोई बरगला ना पाए इन्हें कोई बेवकूफ अच्छा मानते हैं कि साल भर आप नहीं मानते। नहीं यह मानते ना मानते मैं जानता हूं ना कि मैं इनको साल भर नहीं खींचता हूं कि नहीं आओ हिंदी पढ़ो यह करो वो करो। मैं मैं जुलाई में 12 घंटे की क्लास नहीं लगाऊंगा। लेकिन मैं एग्जाम के 2 दिन पहले 12 घंटे की क्लास लूंगा। जब जरूरत होगी जब इनको भूख होती है। हां जब इनको भूख होती है और तब जब इनको
कोई बरगला ना पाए। साल भर से वही वही 50 क्वेश्चन करते-करते वही भाई समस्या इस बात की है। मैं मैं इस चक्कर में इस इस समस्या से पीड़ित हूं। चला तुम जुलाई में भी वही 200 क्वेश्चन पढ़ाए हो। तुम अगस्त में भी वही पढ़ाए हो, सितंबर में भी वही पढ़ाए हो। अक्टूबर में भी वही, नवंबर में भी वही आता उसमें से एक को नहीं है। और तुम कल भी वही पढ़ा रहे हो। और ये बैठ के वाहवाह कर रहे हैं क्योंकि इनको पता नहीं है। जब ये पेपर देखेंगे तब इनकी आंख फट जाएगी। हां। और
फिर यही कहते हैं कि बेटा बेटा मतलब जबरदस्ती वाली बात आती है। फिर वही आके कह देते हैं बेटा हमने फंसा दिया। हमें ये दिखा दिया। अरे हमने वही 200 में से दिखा दिया। अब कोई नहीं आता सर। अमित जी बच्चे हैं सब भोले। लेकिन इस बार से सोचा हूं। हम् माहौल बदलने वाला है सर। बदल गया है सर। बदलने वाला शुरुआत कर दी आपने। बदल गया सर। माहौल। अभी तो ये ये तो अभी मैंने कदम बढ़ाए थे। यार ये एक कब लिख जाएगा? अरे यार सामने रख के हाथ ऐसे करते हो तुम लोग। नहीं
अभी तो मोबाइल स्विच ऑफ थी। थक गए। थक गया। पांच मिनट तुम लोग शिवम सर से पढ़ोगे? बताओ। पांच मिनट शिवम सर से पढ़ लो। योग जो घना योग अरे फिजिक्स के इंपॉर्टेंट टॉपिक बता दीजिए। मैं वीडियो अभी जा रहा हूं सर रिकॉर्ड करने। नहीं तो यही बता। इंपॉर्टेंट टॉपिक बता दीजिए। पांच मिनट शिवम सर से पढ़ दूंगा। कोई नहीं पांच मिनट से कोई हिंदी पेपर है सर हिंदी आपसे पढ़ ले भाई फिजिक्स पेपर 25 तारीख को पढ़ाऊंगा आय हाय हाय यस सर यस सर यस सर यस सर ये ले अरे यार पांच मिनट पांच
मिनट पांच मिनट आप तब तक फिजिक्स के इंपॉर्टेंट टॉपिक बता दीजिए कि कौन-कौन से चैप्टर से ज्यादा सवाल आते हैं वेटेज क्या है सब बता दीजिए मैं आपको कटवा कट कटवानी है कटवा पक्का हां ठीक है पांच मिनट में डन हां तो भाई देखो दिल दिमाग और जो डाटा है तीनों को सेव कर लो क्योंकि ये तो अभी ट्रेलर है पिक्चर बाकी है और पिक्चर हम शुरू करेंगे पिक्चर की शुरुआत होगी बेटा ये जो पिक्चर की शुरुआत होने वाली है ये कहां से होगी ये मेरे भाई 18 18 फरवरी से स्टार्ट हो रही है। यह
पिक्चर कब से स्टार्ट हो रही है? 18 फरवरी से। और यह कब तक चलेगी? यह 27 फरवरी को। तो कमर की पेटी बांध करके आपको बैठ जाना है। यह इतने दिन तक यह क्या चलेगा? आपका यह द बिग शो चलेगा। द बिग शो चलेगा जो सिर्फ और सिर्फ आप दो देखोगे और इसके बाद पेपर देने के बाद सिर्फ और सिर्फ आप क्या मनाओगे? आप मनाओगे जश्न मनाओगे। क्या मनाओगे बेटा? तो पेपर देने के बाद आप लोग सिर्फ जश्न मनाओगे। और यूं ही नहीं कह रहे जब आप हिंदी का यानी यह वाला यहां से पिक्चर देखने
के बाद फिर इस पिक्चर के देखने के बाद जब कहानी लिख के आओगे पिक्चर देखने के बाद इस पिक्चर की आप जब सारांश लिख के आओगे तो उसके बाद क्या करोगे आप सीटियां बजाओगे उसके बाद बेटा क्या बजाओगे आप लोग सीटियां बजाओगे और आपके जो लोग हैं बाकी पिक्चर यू ही आप देखते रह जाओगे हां ऐसा है क्या कुछ अरे सफर जी बाकी तो मैं नहीं जानता लेकिन इस बार इस बार अगर आप सिर्फ खिसकाने के चक्कर में नहीं पड़ोगे कि सिर्फ खिसकाना है वही आवेश के मात्रक में वही वैदुत फ्लक्स के मात्रक में अगर
आप नहीं पढ़ोगे तो सीरियसली इस बार फिजिक्स का पेपर आप जब 25 से पढ़ना शुरू करोगे ना जब 25 फरवरी से पढ़ना शुरू करोगे केमिस्ट्री के पेपर देने के बाद 25 फरवरी को आ जाना है और 26 25 को पूरी रात और 26 को पूरी क्या करते हैं 26 को पूरे दिन और 27 की सुबह ये तीन वक्त लेंगे और इस तीन वक्त में अगर आप साल भर भी कुछ नहीं पढ़े होंगे तो भी आप लिख के चले जाओगे और बेहतरीन नंबर पाओगे और यह अगर आपको ऐसा लगता है तो ठीक है नहीं 18 को
अभी 18 तक देख लो 18 के बाद आओगे तो आप लोग खुद ही कहोगे जरूरत ही नहीं पड़ेगी किसी और को बताने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कहीं और जाके झांकने की क्योंकि जो 100 चलेगा 18 से 27 तक ये सिर्फ यहीं चलेगा। अब बात आती है मैं बात करता हूं तो ये आपका फिजिक्स 25 फरवरी को रहेगा। फिजिक्स 25 फरवरी को पूरा पूरी रात चलाएंगे। जैसे पेपर देके आओगे थोड़ा अपने आप को माइंड को रिलैक्स करोगे। और इसके बाद जैसे आपको रिलैक्स फील होगा देन इसके बाद हम 7:00 बजे से 8:00 बजे से अपना
सेशन शुरू कर देंगे। और 7:00 से 8:00 बजे से जब शुरू करेंगे तो बेहतरीन पूरी रात जब तक आप एनर्जी में रहोगे जब तक आपको लगेगा देखिए भाई रिलैक्स भी जरूरी है। आप अब चाहे कि हम पूरी रात पढ़ाएं नहीं। आपके माइंड को रिलैक्स चाहिए और थोड़ा सा आप रिलैक्स फील करेंगे। देन इसके बाद सुबह-सुबह आले सुबह मुंह धो के मंजन करके बैठ जाना है। नाश्ता बिना किए फिर नाश्ता करने का वक्त देंगे फिर आपको और उसके बाद नाश्ता करिए फिर जुड़ जाइए। धमाकेदार अंदाज में तैयारी करें और धमाकेदार पेपर को फाड़ के आइए क्योंकि
कहीं नहीं मिलेगा यार। नहीं मिलेगा। ये गारंटी है। पूरा दिन पूरा रात वक्त लेकर के माइंड को रिलैक्स छोड़ करके फिर लगे रहोगे। फिर कहोगे दुनिया जीत लेंगे यार। और तुम लोग साथ रहोगे तो दुनिया जीत के दिखाएंगे। सुमित सर साथ रहेंगे तो दुनिया नहीं पर आकाश पाताल सब जीत के दिखाएंगे। है कि नहीं? है ना? बाकी आप तो सर कयामत उठाते हैं सर। देखिए यही है। ये सिर्फ आप ही कर सकते हैं। क्या हालचाल? एक आवाज पे चाहो तो यार कुछ नया है। बताओ कुछ नया बताइए यार। ये सब मानव की ये तो कॉपी
है सब मैं बताऊं ठीक यार सब कॉपी का अच्छा नहीं कॉपी नहीं कुछ नहीं बता रहा ये कहां का भाई है क्या बता रहा मैं बता रहा हूं बहुत मतलब करोड़ों में बात करते हैं तुम रूठना तो ऐसा रूठना कि मैं तुम्हें मना ना सकूं तुम रूठना तो ऐसे रूठना कि मैं तुम्हें मना ना सकूं और तुम्हें ना मना पाने के दुख में मैं पल-पल मरूं पल-पल मरूं और फिर मर जाऊं। वाह सर क्या बोला आपने सर ये नया था सर ये सर नया था ये मेरा सर आप कहीं पे भी सर्च कर लो कहीं
नहीं मिलेगा हां ऐसे नहीं कहता आवाज पे चाहूं तो निशाने लग जाए और जो सुना दो ये पुराना है अरे पुराना है मेरे मुंह से हर बार नया है पूरा अरे इसका पूरा बताइए सर एक आवाज पे चाहूं तो निशान है इससे पहले क्या मैं आज सुना हूं बहुत कुछ इसके इसी इसी एक आवाज के पहले एक आवाज के पहले क्या था मैं पूरी लाइन बताइए Instagram पे@ कर लेना शिव सर पहले ये है ये सारा शो हम दिखा दें डिफेंस एग्जाम विद्याल YouTube चैनल डिफेंस एग्जाम विद्याल YouTube चैनल पर Instagram में शिवम सर विद्या
ये फॉलो कर लेना साथ में शिवम सर सुमित सर को @ सुमित सर और ऋषि सर को अनफॉलो कर देना नहीं तो 1 लाख पे आ जाएंगे तो जिंदा नहीं रहने देंगे किसी को खा जाएंगे सब दूसरी बात भैया एक फोटो खींच साथ में मेंशन कर देना दोनों को एक फोटो तगड़ी सी बैठ जाओ 12 घंटे से हिंदी पढ़ रहे हो तुम लोग थक गए होगे और मैं कुछ नहीं कहना चाहता चाहता हूं इसीलिए कि कहीं यह लोग यह ना कहे कि सर 12 घंटे से पढ़ रहे हो। सुबह सर क्या-क्या दिए? इसलिए मैं जा
रहा हूं। मैं एक बहुत तगड़ा पढ़ने जा रहा हूं। कल डिफेंस एग्जाम विद्यापुर YouTube चैनल पे एक वीडियो आएगी। जाके सब्सक्राइब करवा दे। हां सब्सक्राइब करा दो और ले जाके मार दना कूद पड़ो। डिफेंस एग्जाम भाई कल सर जा रहे हैं। पता है कल कुछ है। वीडियो वही आएगा। लेकिन मैं रहूंगा। डिफेंस एग्जाम मैं कतई कहीं नहीं जाऊंगा। वीडियो आएगा जो मनाने जा रहा हूं हम वैलेंटाइन डे जो मनाने वीडियो आएगा कि लाइव आएंगे आप उसमें वीडियो आएगा उसमें पूरा पूरा आएगा अच्छा क्योंकि हमारे जीवन में कल वैलेंटाइन डे नहीं कल हमारे जीवन में कुछ
कल जो मैं वैलेंटाइन डे के लिए जा रहा हूं वो वीर से श्रद्धांजलि मिलेंगे कल डिफेंस एग्जाम YouTube चैनल पे और आप मिलते रहेंगे हर दिन ठीक है और लव यू अब आगे मैं अगर आपको बताऊं फिजिक्स की बात अभी से आपकी प्लानिंग क्या होनी चाहिए फिजिक्स में अभी की आपसे अब अभी से प्लानिंग आप लोगों की क्या होनी चाहिए आपके पास आपने ध्यान दिया होगा क्या है फिजिक्स में क्या है फिजिक्स में डेरिवेशन है ना फिजिक्स में क्या है डेरिवेशन है ना कुछ किए दूर कर न्यूमेरिकल है क्या पढ़ा रहे फिजिक्स में बता रहा
हूं कि मतलब इनके डर क्या है फिजिक्स में मैथ में बेटा मैथ में मैं कुछ नहीं बताऊंगा मैथ में मैं जो पढ़ाऊंगा सब फंस जाएगा चिंता मैथ की चिंता बिल्कुल मत करना एक-एक सवाल जितना यहां लिखा जाएगा सब बोर्ड में मिलेगा इसीलिए मैं बहुत चिल मूड में हूं एकदम चिल गाइस एकदम चिल अरे यार पूरा पूरा खत्म करके चले गया यार भेजो उनका बेटा न्यूमेरिकल है और डेरिवेशन है और इसके बाद क्या है थ्योरी अब क्या है इसके अलावा कुछ है आपने देखा इसके अलावा कुछ है इसके अलावा कुछ है तीन सेशन की जरूरत है
एक में अगर मैं आप सोचो इस थ्योरी में क्या होता है आपका कांसेप्ट छिपा होता है अगर मैं चाहूं आपको एक सेशन ऐसा ले आऊं एक सेशन ऐसा ले आऊं जिसमें जो 6 घंटा, यह 6 घंटा और जो 6 घंटा क्या यह आपका पूरा कंप्लीट नहीं हो जाएगा? क्या कंप्लीट नहीं हो जाएगा? और आप इतना पढ़ लो यार अलग-अलग छांट करके इतना पढ़ लो। सत्ता में सत्तम मिल जाएगा। क्या दिक्कत है? सत्तम में सत्तम मिल जाएगा। जब इतना पढ़ोगे ध्यान से सोचो। फिजिक्स में कुछ नहीं है। डेरिवेशन न्यूमेरिकल कासेप्ट। डेरिवेशन न्यूमेरिकल का्सप्ट और आप उसी
में उलझे रहते हो। और कल आपको शाम 6:00 बजे क्या आपको तैयार रहना है कल अब अंतिम लड़ाई है बेटा कल शाम 6:00 बजे सभी तक पहुंचा देना है ये क्या आने वाली है इसके बाद संपूर्ण फिजिक्स मैं सब पढ़ाऊंगा संपूर्ण क्या होगा भौतिक विज्ञान शाम 6:00 बजे यह कंप्लीट होगा और फिर 26 को सिर्फ प्रैक्टिस होगा। 25 को सिर्फ पढ़- प्रैक्टिस होगा। 25 को सिर्फ इंपॉर्टेंट चाहे डेरिवेशन हो, चाहे न्यूमेरिकल हो, चाहे थ्योरी। आराम से पेन कॉपी ले कर के बैठना। आराम से दो दिन समय दे दोगे। अब इसके बाद फिजिक्स पढ़ने की जरूरत
नहीं पड़ेगी। ठीक है? बाकी अभी फिलहाल पढ़ लो। हिंदी पढ़ लो। जरूरत इसकी मेरे सर बुरा मान जाएंगे। इसको खोल के गिर गया। खोले कहे थे? कुछ कर लीजिए सर सर खाते हैं अरे भाई आज दो मिलियन पूरा हुआ उसी की पार्टी चलो सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो बेटा और हम लोग शुरू चलो घृणा के योग्य अब देखो यहां घृणित है। घृणित क्या हो जाएगा? घृणित क्या हो जाएगा? ध्यान से देखना। अगर कोई व्यक्ति घृणा के योग्य है तो वह घृणित हो जाएगा। अगर कोई वस्तु या कार्य घृणा के योग्य है।
तो घृणास्पद हो जाएगा। ठीक है? समझ गए? अगला सवाल। सभी लोग उत्तर दो। तुम लोगों की पार्टी एग्जाम के बाद होगी। तुम लोगों की पार्टी एग्जाम के बाद होगी। अनुकरण तो इसका अनुकरणीय हो जाएगा। अनुकरण करने योग्य कोई है तो अनुकरणीय हो जाएगा। जो कभी मरे ना वह अमर हो जाएगा। जो कभी बूढ़ा ना हो वो अजर हो जाएगा। जो कभी समाप्त ना हो वो अक्षय हो जाएगा। समझ गए? वन में रहने वाला तो देखो वन में रहने वाला वनवासी होगा। क्या होगा वन में रहने वाला बेटा? इंग्लिश मीडियम में भी यही हिंदी आती है।
इंग्लिश मीडियम में भी यही हिंदी आती है। ठीक है? नगरीय क्या हो जाएगा? नगर में रहने वाला। ग्रामीण क्या हो जाएगा? गांव में रहने वाला। पहाड़ी क्या हो जाएगा? पहाड़ पर रहने वाला। जो जीता ना जा सके। मैंने अभी बताया था अजय। जो मरे ना वह अमर, जो बूढ़ा ना हो अजर, जो समाप्त ना हो अक्षय। रास्ता दिखाने वाला सभी लोग कमेंट करके बताओ रास्ता दिखाने वाला क्या होगा? सभी लोग कमेंट करके बताओ रास्ता दिखाने वाला क्या होगा? और एक बार सेशन को शेयर कर दो बेटा सभी लोग सभी लोग एक बार सेशन को शेयर
कर दो। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर देंगे। मैं भी कर दे रहा हूं। तुम भी कर दो। सभी लोग एक बार सेशन को शेयर कर दो। सारे बच्चे एक बार सेशन को शेयर करेंगे। रास्ता दिखाने वाला पथ प्रदर्शक जिसके पास ज्ञान हो वह ज्ञानी हो जाएगा। जिसके पास जानकारी हो वह जानकार हो जाएगा। जो सब कुछ जानता हो वह सर्वज्ञ हो जाएगा। अगला सवाल 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाला 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाला क्या होगा? 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाला क्या होगा? मुझे बताओ एक बार। 100
वर्ष की आयु पूरी करने वाला सतायु हो जाएगा। जिसकी आयु लंबी हो वो दीर्घायु हो जाएगा। जिसकी आयु छोटी हो छोटी हो वो अल्पायु हो जाएगा। जिसका ईश्वर में विश्वास ना हो। जो ईश्वर में विश्वास ना करता हो। क्या हुआ? क्या बोला है सर? आपके लिए दिल मेरे होठ सूख रहे हैं। सर फिज एक सेकंड मैं कमेंट तुम्हारा मोबाइल में देखूंगा। ऐसे करो। फिजिक्स वाले सर बोल रहे थे आपको अनफॉलो करने पर जलने वाले जला करते हैं बेटा नास्तिक हो जाएगा जिसका ईश्वर में विश्वास हो वह आस्तिक हो जाएगा जो किए गए उपकार को मानता
हो कृतज्ञ हो जाएगा जो किए गए उपकार को ना मानता हो कृतज्ञ हो जाएगा जो सब कुछ जानता हो सर्वज्ञ हो जाएगा जो बहुत कुछ जानता हो जो बहुत कुछ जानता हो वह बहुज्ञ हो जाएगा। जो बहुत कम जानता हो वो अल्पज्ञ हो जाएगा और जो जिसके पास ज्ञान हो वो ज्ञानी हो जाएगा। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। हां बिल्कुल हां और ऋषि सर विद्या कुल को फॉलो कर लेना। 1 लाख फॉलोवर पूरे होने वाले हैं। ठीक है। चलो। जल में लगने वाली आग। तो जल में लगने वाली आग। शुरुआत में बताया था।
बड़वाग्नि। दावाग्नि क्या है? जंगल में लगने वाली आग। जठराग्नि क्या है? पेट में लगने वाली आग। ठीक है? ठीक है बेटा। हो जाएगा। मैं बात कर लूंगा मुकेश सर। से हो जाएगा। सभी लोग आंसर करो। अन्न को पचाने वाली पेट की आग कैसी होती है? अन्न को पचाने वाली पेट की आग की बात हो रही है। अन्न को पचाने वाली पेट की आग होती है। क्या होती है अन्न को पचाने वाली पेट की आग? तो जठराग्नि होती है अन्न को पचाने वाली पेट की आग। दावाग्नि क्या होती है? जंगल की आग। और बड़वाग्नि क्या होती
है? समुद्र की आग। यह सब तुम्हें पता है। कितने बच्चे संस्कृत पढ़ना चाहते हैं? एक बार कमेंट करो। कितने बच्चे संस्कृत पढ़ना चाहते हैं? एक बार दिल रिएक्ट करेंगे। ठीक है? अगर आप हिंदी की बात कर रहे हो तो मैं आपसे कह रहा हूं कि आज की क्लास आप कर रहे हो। उसके बाद 15, 16, 17 ये तीन दिन मुझे दे देना। तुमने कुछ भी नहीं पढ़ा है तो भी मैं तुम्हें 100 में 100 पर लाकर खड़ा कर दूंगा। तुम जितना लिख पाओगे। जितने लोग संस्कृत पढ़ना चाहते हो, एक बार कमेंट कर दो। अगर आप
संस्कृत पढ़ना चाहते हो, तो मैं संस्कृत पढ़ा दूंगा। पूरी संस्कृत लेकिन उसके लिए बस तुम्हें शेयर करना पड़ेगा। अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगाना पड़ेगा। बच्चों को बुलाना पड़ेगा। जिसके हृदय में ममता ना हो निर्मम हो जाएगा। जिसके मन में दया ना हो। दया ना हो वो दया निर्दयी हो जाएगा। समझ गए? जिसका कोई अंत ना हो अनंत हो जाएगा। जिसकी चलो इसके बाद संस्कृत पढ़ेंगे। जिसकी कोई सीमा ना हो सीमा ना हो वो असीम हो जाएगा। जिसकी कोई सीमा ना हो वो असीम हो जाएगा। बेटा समझ लो आगे बढ़ते हैं। आशा से अधिक आशातीत
हो जाएगा। आशा से अधिक आशातीत हो जाएगा। जानने की इच्छा रखने वाला यह वाला तुम लोग बताओ मुझे। जानने की इच्छा रखने वाला क्या होता है? जानने की इच्छा रखने वाला सर संस्कृत पढ़ाओ। बस इसके बाद संस्कृत पढ़ाऊंगा। यह खत्म हो जाएगा। उनको बोल दूं कि चलो मत बराबरी करो। मैं यह नहीं बोलूंगा। छोटा आदमी गुंडई करता है तो कर लेने दिया जाता है। हर चीज में विरोध नहीं किया जाता। जानने की इच्छा रखने वाला जिज्ञासु होता है। ठीक है? किए गए उपकार को ना मानने वाला देखो मैंने तुम्हें बताया था तो कृतज् होता है।
किए गए उपकार को जो नहीं मानता उसे क्या कहते हैं? कृतज्न कहते हैं। क्या कहते हैं? कृतज्न कहते हैं। सभी लोग लाइक कर लो जल्दी-जल्दी। बहुत कम बोलने वाला कौन होता है? बहुत कम बोलने वाला मितभाष होता है बेटा। बहुत अधिक बोलने वाला। बहुत अधिक बोलने वाला। क्या होता है? वाचाल होता है। कई भाषाओं को जानने वाला। कई भाषाओं को बोलने वाला। बहुभाषी होता है। जो वंदना करने योग्य हो। इसका उत्तर क्या होगा? यह सरल है। जो वंदना करने योग्य हो इसका उत्तर क्या होगा? बताइए आप लोग। और सभी लोग सेशन को शेयर करते रहो
बेटा। सभी लोग सेशन को शेयर कर लो। जल्दी-जल्दी। सभी लोग सेशन को शेयर कर दो। जल्दी-जल्दी। सभी लोग जल्दी-जल्दी सेशन को शेयर कर दो। ठीक है? वंदनीय हो गया हो जाएगा। जो पूजा करने योग्य हो। पूजनीय हो जाएगा। जो सम्मान करने योग्य हो। सम्माननीय हो जाएगा जो आदर करने योग्य हो। आदरणीय हो जाएगा। जो जीता ना जा सके अजय हो जाएगा। अमर अजर अनंत आप जानते हो। जो मरे ना अमर, जो बूढ़ा ना हो अजर और जो जिसका अंत ना हो अनंत हो जाएगा। सर आप किस यूनिवर्सिटी में पढ़ते पढ़े थे? मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में
पढ़ा था बेटा। मैं देखो मैं कई यूनिवर्सिटी में पढ़ा हूं। मैं संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में भी पढ़ा हूं। मैं अवध यूनिवर्सिटी में पढ़ा हूं। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी पढ़ा हूं। मैं जेएनयू में नहीं पढ़ पाया। मेरा मुझे मेरी पीएचडी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से चल रही है। तो अब आप कह सकते हो कि मैं डीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी की बात करूं तो मैं सेंट्रल यूनिवर्सिटी डीयू में पढ़ा हूं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ ही रहा हूं। पीएचडी मेरी चल रही है। और अ संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी और अवध यूनिवर्सिटी ये दोनों स्टेट यूनिवर्सिटी हैं। ठीक है? जिसके
भीतर की हवा का तापमान सम स्थिति में रखा गया हो। अब तुम लोग फिजिक्स के स्टूडेंट हो तो इसका अच्छे से उत्तर दोगे। जिसके भीतर की हवा का तापमान सम स्थिति में रखा गया हो। बताइए तो यह बेटा समतापी हो जाएगा। समतापी हो जाएगा। चलिए अगले पर बात करते हैं। पीने की इच्छा रखने वाला। इसका बताओ। पीने की इच्छा रखने वाला। सभी बच्चे बताएंगे। ब्लैक बैकग्राउंड पर ले आऊं। सही बैकग्राउंड तो है। दिख नहीं रहा है क्या? यह दिख नहीं रहा क्या? बैकग्राउंड खराब दिख रहा है क्या? 47 मिनट पीछे था। आ गया। बहुत अच्छी
बात है। पीने की इच्छा रखने वाला क्या हो जाएगा बेटा? पिपासु हो जाएगा। ठीक है? जो कम बोलता हो। कम कौन बोलता है? कम कौन बोलता है? जो मितभाष होता है। बातूनी कौन होता है? जो बहुत बात करता है? मेरी हेयर स्टाइल खराब है क्या? बताओ सही कर लूं। यार तुम लोग सेशन को शेयर नहीं कर रहे हो। अपने ऋषि सर के लिए इतना तो कर ही सकते हो। तुम्हारे लिए सर यह स्टाइल पता नहीं क्या करें तो क्या लिख रहे हो आई लव यू सर सर क्यों हम लोग निकल पाएंगे यूनिवर्सिटी का अगर तुम
लोग बिल्कुल आराम से निकाल पाओगे सीयूईटी का सर हेयर स्टाइल चेंज कर लीजिए अच्छा नहीं लग रहा है हेयर स्टाइल अच्छी नहीं लग रही है चलो कल चेंज हो जाएगी जो तुम लोग कह दो। चलो जो बूढ़ा ना हो अजर अब देखो अजर बताया था अमर जो मरे ना अनंत जिसका अंत ना हो जिसका कहीं अंत ना हो वो अनंत होगा। ठीक है? बिल्कुल निकाल लोगे बेटा। सीयूईटी का एग्जाम होता है। सीयूईटी का एग्जाम देकर आप किसी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले सकते हो। और सिलेबस आपके 12th वाला ही पूछा जाता है। जिसके समान
कोई दूसरा ना हो अद्वितीय हो जाएगा। जो अनुकरण करने योग्य हो अनुकरणीय जो गरीब हो वो अकिंचन हो जाएगा। किए गए उपकार को मानने वाला देखो किए गए उपकार को जो नहीं मानता है वह कृतज होता है। जो मानता है वह कृतज्ञ होता है। जो दूसरों का उपकार करता है परोपकारी होता है। जो बहुत अच्छा आदमी होता है वह सज्जन होता है। जिसके पास कुछ ना हो। जिसके पास कुछ ना हो। इसका कौन सा सही होगा? दो घंटे बचे हैं। इसके बाद हम संस्कृत पढ़ लेंगे। संस्कृत और खंड काव्य। ठीक है? अकिंचन हो जाएगा। अगला
क्या है? वह पत्र जिसमें किसी को कोई काम करने का अधिकार दिया गया हो। वह पत्र जिसमें किसी को तो अधिपत्र हो जाएगा। अनुमति पत्र हो जाएगा। बताइए क्या हो जाएगा? बताओ क्या होगा इसका उत्तर? सभी लोग कमेंट करो यार। तुम लोग थक गए क्या? घर पे बैठे-बैठे थक गए। मैं खड़े-खड़े नहीं थका हूं। ठीक है? अधिपत्र हो जाएगा बेटा। जिसे समझना कठिन हो। जिसे समझना कठिन हो वो क्या हो जाएगा? जिसे समझना कठिन हो वो क्या हो जाएगा? दुर्बोध हो जाएगा। जिसे समझना कठिन हो। अगला सवाल। किसी बात का गढ़ रहस्य जानने वाला जो
किसी बात का बहुत गूढ़ रहस्य जानता हो। अब मैं आलोक वृत्त पढ़ा दूंगा। मैं सब पढ़ा दूंगा। पहले संस्कृत फिर खंड काव्य समझ लो क्योंकि खंड काव्य मैं पढ़ाऊंगा तो किसी अब जैसे मैंने मान लो खंड काव्य पढ़ाना शुरू किया तो एक आदमी का ही तो खंड काव्य पढ़ा पाऊंगा सबका तो पढ़ा नहीं पाऊंगा तो आधे बच्चे जिनका नहीं पढ़ाऊंगा वो भाग जाएंगे तो इससे पहले हम लोग संस्कृत पढ़ लें लास्ट में हम लोग खंड काव्य पढ़ेंगे मर्मज्ञ की बात कर लेता हूं मर्मज्ञ किसी बात का गुण रहस्य जानने वाला और जो शिक्षा देता हो
वह कौन होता है मैं क्या हूं मैं क्या हूं तुम्हारा तुम्हारे ऋषि सर तुम्हारे क्या हैं चलिए जो शिक्षा देता हो बेटा वो शिक्षक हो जाता है। अच्छा अब आओ संस्कृत पढ़ लेते हैं। कितने बच्चे संस्कृत पढ़ने के लिए तैयार हैं? एक बार दिल रिएक्ट करो। कौन-कौन संस्कृत पढ़ने के लिए तैयार है? एक बार दिल रिएक्ट करो। सभी लोग। सभी लोग एक बार दिल रिएक्ट करो। कौन-कौन संस्कृत पढ़ने के लिए तैयार है? चलो सबसे पहले भोजस सौदार्यम से शुरू करते हैं। राजा भोज की उदारता पूरे पाठ का जो संदर्भ होगा भोज सौदार्यम के पूरे पाठ
का संदर्भ क्या होगा? भोज सौदार्यम के पूरे पाठ का संदर्भ क्या होगा? प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक इसमें श्लोक भी है। तो श्लोक जहां आएगा वहां श्लोक लिख लेंगे। हमारी पाठ्य पुस्तक संस्कृत दिगदर्शिका के भोज सौधार्यम नामक पाठ से उित है। चलो अब यहां से शुरू करते हैं। ततः कदाचित द्वारपाल आगत महाराजम भोजम प्राह तत्पश्चात द्वारपाल ने आकर महाराज भोज से कहा। अब देखो ऊपर एक लाइन पढ़ो, नीचे एक लाइन पढ़ो और तुम्हें उसका अर्थ पता चल जाएगा। देखो एक-एक शब्द के अर्थ को रटने का समय चला गया है। दो दिन बाद एग्जाम है।
2 दिन बाद एग्जाम है तो अब आपके पास यह चुनौती तो नहीं है। ठीक है? 2 दिन बाद एग्जाम है तो आपके पास तो यह चुनौती है ना कि अब आप एक-एक लाइन रट नहीं सकते। तो आपको क्या करना होगा? आपको बस उसकी तैयारी अच्छे से करनी है और उसके लिए सबसे व्यवस्थित तरीका मैंने बता दिया है क्या? एक लाइन का अर्थ और एक लाइन ऊपर उसका अर्थ देव हे देवात्मा राजन कॉपीना अवशेषों कॉपीिन अवशेषो। तो कॉपी अवशेष का मतलब क्या होगा? जिसके तन पर केवल लंगोटी शेष है उसको कॉपीना अवशेष कहते हैं। कोपीना अवशेषो
द्वारी वर्तते हे राजन द्वार पर ऐसा विद्वान खड़ा है विद्वान द्वारवर्तते जिसके तन पर कॉपी ना अवशेषो केवल लंगोटी शेष है। ठीक है। राजा प्रवेशः राजा बोले राजा इति प्राह। राजा बोले प्रवेशः प्रवेश कराओ। राजा प्रवेशः इति प्राह राजा बोले प्रवेश कराओ। समझ में आ रहा है? एक-एक लाइन समझ में आ रही है। एक-एक लाइन समझ में आ रही है या नहीं? सभी लोग बताओ। एक-एक लाइन समझ में आ रही है? समझ में आ रही है? एक-एक लाइन। सर जी रिकॉर्डेड वीडियो है। क्या रिकॉर्डेड वीडियो है? नहीं रिकॉर्डेड वीडियो नहीं है बेटा। रिकॉर्डेड वीडियो कैसे
होगी? चलो तथा प्रविष्ट तब प्रवेश करके सह कवि वह कवि भोज आलोक्य राजा भोज को देखकर अ में आज मेरी दरिद्र नाशो दरिद्रता नष्ट भविष्यति इति हो जाएगी ऐसा मत्वा मानकर तुष्टो संतुष्ट होकर हर्षण हर्ष के आंसू मुमोच बहाए ठीक है उस तब उस कवि ने भोज को देखकर यह मानकर कि आज मेरी दरिद्रता दूर हो जाएगी। प्रसन्नता के आंसू बहाए। ठीक है? ऊपर एक लाइन संस्कृत, नीचे एक लाइन हिंदी। तुम्हें बहुत आसानी से समझ में आएगा और बाद में तुम प्रैक्टिस भी कर पाओगे। राजा तम आलोक्य प्राह राजा ने उसे देखकर कहा ये मेरी
तरफ से आपके लिए और अगर आप नहीं लेंगे तो मैं नस काट लूंगा। प्यारे बच्चों ये ऋषि सर के लिए मैं लेकर आया हूं। बहुत महंगा है। प्राइस भी बता दूं 300 का। सर बहुत प्यारा लग रहा है। अच्छा लग रहा है ना सर? थैंक यू सर। देखने दीजिए। सर प्यारा है ना प्यारे बच्चों? ऐसे छोटे-मोटे गिफ्ट मैं ऋषि सर को देता रहता हूं और वीर सिंह आप कॉल कर रहे हैं। अब दे दो भाई यार पूरे सुना लो यार। भाई मैं मजाक कर रहा हूं। इधर रख देता हूं। अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है। ये
ऋषि सर अब मैं जा रहा हूं। ठीक है। हे भाई ये सर आपके लिए है। हां तो मेरे लिए आपने जो 12 घंटे की मेहनत की है ना ये आप यू गौर से देखो इस चेहरे का महा यूपी का एक अकेला साम्राज्य का उत्तराधिकारी मैं खड़ा हो जाता हूं कुछ चैनल बड़ा बन जाता है भाई ये आदमी जिस चैनल से आया है उस चैनल को बड़ा बना यही है यही इसी चैनल से नहीं वो भी वही 1 मिलियन होने वाला है यार मेरी मुझे क्यों सबसे तेज ग्रोथ हो रहा है क्यों टोकते हो भाई ये
वो व्यक्ति है बेटा ये जहां कदम रख दे वो सोना हो जाए मिट्टी उठाकर फेंक दे चांदी हो जाए क्योंकि चांदी महंगी है इस समय और सोना तो सर कुछ भी कर सकता है ये आपके लिए थैंक थैंक यू गाइस लव यू प्यारे बच्चों ये आपसे मिला है आपके कारण मिला है और आपका क्रेडिट आपके आपकी रिकॉग्निशन है तदय वस्तु गोविंदम त्यमेव समर्पय आपका दिया हुआ है आपको समर्पित है मेरा क्या है एक गरीब ब्राह्मण एक गरीब शिक्षक अपने जीवन के अंतिम समय में हिमालय के किसी कंदरा में अपने जीवन को व्यतीत करता हुआ गोलोकवासी
हो जाएगा आप अनंत तक इस शिक्षा को प्राप्त करते रहे कहते हैं बहुभूत ने मालती माधवम में लिखा है कि उत्पत्सते तुमम कोप समान धर्म कालोयं निर्ध विपला च पृथ्वी मेरे जैसे विचारों वाले अनेक लोग पैदा होंगे। उसी को बाद में श्लोक में ढाला गया कि उत्पत्ते तुमको समान धर्मा। पृथ्वी रत्न गर्भा है और समय का अंत नहीं है। तो प्यारे बच्चों अब इसको रख देता हूं इधर। अब क्लास को फिर से कंटिन्यू करते हैं और सुमित सर आपको वेरी वेरीरी थैंक यू सर। आपने रिकग्नाइज किया मेरी मेहनत को। अभी तो और भी बहुत बेटा
बूढ़े लोग जब आपकी मेहनत को रिकॉग्नाइज करें चट्टान पत्थर पुराने चावल हो चुके लोग जब आपकी मेहनत को रिकॉग्नाइज करें तो आपको अच्छा लगता है बहुत तगड़ा कवे किम रोदि कवि क्यों रोते हो ततः कविरा तब कवि ने कहा राजन हे राजन आकर ध्यान लगाकर सुनो मत गृहम स्थितिम मेरे घर की स्थिति को ध्यान लगाकर सुनो कैसे सुनो मेरे मेरे घर की स्थिति को ध्यान लगाकर सुनिए। कैसे सुनिए? देखिए अब वह श्लोक में अपनी बात कहता है अला जान पथिव वचन माकरण गणीस करणौ यत सुपहित दीन वदना मणो पाए य कृतम दष बहुले तद दंतः
शल्यम तमस पुनरुद्ध तुमचिता लव यू बेटा लव यू सभी लोग शेयर एक बार शेयर कर दो सभी को बुला लो जाओ यार बुला के लाओ तुम लोग दूसरों को बुला नहीं पाते हो बताओ ये नहीं कह पाते हो कि ऋषि सर की क्लास चल रही है चलो क्लास कर लो हैं कब तक 5000 लोगों को पढ़ाऊं 500 कब होंगे ठीक है ऐ लाजाही अरे लाजा ले लो पति वचन आकरण गणी मार्ग में ऊंचे ऊंचे स्वर में अरे खील ले लो सुनकर दीन मुख वाली मेरी पत्नी जो है सिसो कर्णो यतनात सुपतवती दीनवदना अब इन दोनों
लाइनों का देखो मैं शब्द देखो मैं बहुत संस्कृत पढ़ा चुका हूं कई वीडियोस पढ़ी हुई है शब्द बाय शब्द पढ़ना है तो तुम कई वीडियो देख सकते हो यहां पर एग्जाम के पॉइंट ऑफ व्यू से मैं बताऊं तुमको तो इन दोनों लाइनों का अर्थ क्या होगा ऐला जान पतिवचन माकरण गड़ी मार्ग पर ऊंचे स्वर में खील ले लो सुनकर दीन मुख वाली मेरी पत्नी ने बच्चों के कान सावधानी पूर्वक बंद कर दिए म क्षणो पाए य कृतम दशावस बहुले म क्षणो पाए मैं क्षण उपाय वाला यत कृतम दशावसले जिसकी तरफ उसने जब आंखों में आंसू
भर के देखा तदंत शल्यम में तो वह आंखें मेरे हृदय में शूल की तरह चुभ गई है तुमस पुनरुद्ध तुमचित जिसे निकालने में आप ही सक्षम हो समर्थ हो जिसे आप ही ठीक कर सकते हो चलो राजा शिव शिव इति उरेन प्रत्यक्षरम लक्षम दत्त्वा प्राह राजा ने कहा शिव शिव बहुत सुंदर बहुत सुंदर कहते हुए इति उदिरन ऐसा कहते हुए प्रत्यक्षरम लक्षम दत्त्वा हर एक अक्षर के लिए श्लोक के हर एक अक्षर के लिए एक लाख देते हुए प्राह कहा क्या कहा त्वरितम गक्षगे गहं त्वरितम गक्ष गहम शीघ्र घर जाओ तद गणी खिन्ना वर्तते तुम्हारी
पत्नी दुखी है समझ में आ रहा है समझ में आ रहा है कि नहीं सभी लोग समझ पा रहे हो कि नहीं समझ पा रहे हर एक लाइन का अर्थ इसीलिए आपके लिए बता रहा हूं। तदता शलम में तमस पुनरुद्ध तुमचिता इसीलिए उसके बाद इन्होंने कहा कि शिव शिव बहुत सुंदर बहुत सुंदर और ऐसा कहते हुए प्रत्येक अक्षर के लिए एक एक लाख दे दिया और कहा कि त्वरितम गगहम गम धातु लोट लकार मध्यम पुरुष एकवचन का रूप है। तुरंत घर जाओ तद गणी खिन्नावर्तते तुम्हारी पत्नी दुखी होगी। अन्यदा अन्य एक दिन भोज राजा भोज
श्री महेश्वरम नमितुम भगवान शिव को नमस्कार करने के लिए शिवालयम अभी रक्षत शिवालय की ओर गए थे तदा तब कोपि ब्राह्मण कोई ब्राह्मण राजान शिव सन्निधो प्रह राजा को शिव के पास देखकर बोला देव हे देवात्मा अब इसका अर्थ देखो भोज अगले दिन श्री महेश्वर भगवान शंकर को नमन करने के लिए शिवालय गए तब शिव के समीप राजा ने किसी राजा से किसी ब्राह्मण ने कहा हे राजन आगे क्या कहा बहुत सुंदर श्लोक है अर्धम दानवणा गिरिजया अप्यधम शिवस्यातम बेटा पेपर तो तुम्हारा यहीं से फंसेगा यहीं से सारा पेपर लौड़ जाएगा समझ रहे हो पेपर
सारा तुम्हारा यहीं से लौड़ जाएगा घबराना नहीं बिल्कुल लड़ा देंगे पेपर ठीक है घबराना बिल्कुल नहीं है तो अर्धम दानो वैरणा गिरजया अप्यधम शिवस्या हृदम कवि ने कहा कि अर्धम दानो वैरणा आधा दानो वैरी अर्थात विष्णु जी उठा ले गए अपर्धम गिरया और आधा जो बचा हुआ था उसे पार्वती जी चुरा ले गई विष्णु जी चुरा के हरिहर रूप बना लिए पार्वती जी चुरा के अर्धनारीश्वर रूप बना ली किसका ये दोनों लोग किसे चुरा ले गए ये दोनों लोग चुरा ले गए शिव जी को आधा भाग शिव जी का पार्वती जी चुरा ले नहीं आधा
विष्णु जी चुरा ले गए और देवेथम जगती तले पुरहर अभावे समुलति अच्छा भैया जब शिव जी को चुरा लिया इन्होंने तो जगती तले पृथ्वी पर शिव जी का अभाव हो गया शिव जी का अभाव जगती पर हो गया अब पढ़ो इसको शिव का आधा भाग दानो वैरी अर्थात विष्णु जी ने तथा आधा भाग पार्वती ने चुरा लिया जिसके कारण भूतल अर्थात पृथ्वी पर शिव जी की कमी हो गई अब जो शिव जी के साथ रहते थे वो चले जाएंगे क्या करेंगे बताओ ठीक है गंगा गंगा सागर अंबरम शशिकला नागाधिपक्षमातलम गंगा सागर अब गंगा सागर में
चली गई और चंद्रमा अंबर में चला गया जो शिवजी के मस्तक में रहता था नागाधिपक्षमातलम और जो सांप उनके साथ रहता था वो पृथ्वी के अंदर अपने दिल में चला गया सर्वज्ञतम अधीश्वरत्व मगमत और हे राजन सारा ज्ञान और अधीशस्वरता आप में आ गई किसकी शिवजी की शिवजी का सारा ज्ञान और अधिश्वरता आप में आ गई तम माम तो भिक्षाटनम और मुझ में क्या आ गया मुझ में उनका भिक्षाटन आ गया भिक्षा मांगना उनका मेरे अंदर आ गया शिव के चले जाने से उसके उनके साथ रहने वाले गण भी अपनेपने स्थान पर चले गए गंगा
सागर में चंद्रकला आकाश में तथा नागराज भूतल में समा गए सर्वज्ञता और अधिश्वरता आप में तथा विच्छाटन मुझ में आ गया अगला क्या है राजा तुष्ट राजा राजा संतुष्ट हुए। तस्मै प्रत्यक्षरम लक्षमदौ। राजा ने संतुष्ट होकर उसे भी प्रत्येक अक्षर के लिए एक एक लाख दे दिया। राजा विद्वान से बहुत प्रभावित हुए। हां, मैं ठीक हूं बेटा थोड़ा गले में अब दिक्कत होने लगी है। चलो संस्कृत खत्म कर दूं। उसके बाद खंड का है। बस यही दो चीज पढ़ाऊंगा। बाकी 15 16 17 तीन दिन है ही हमारे पास पढ़ने के लिए। सभी लोग ऋषि सर
विद्या कुल को फॉलो कर लेना और शेयर कर देना जिससे जल्दी से मेरे 1 लाख्राइबर पूरे हो जाए। 5000 बचे हैं बस। अन्यथा राजा समसिताम सीताम प्राह अन्यदा अन्य किसी दिन राजा समुपसिताम सीताम प्राह अपने बगल में बैठी हुई सीता से बोले देवी हे देवी प्रभातम वर्ण प्रभात का वर्णन करो। सीता प्राह सीता बोली अब सीता ने एक श्लोक कहा। क्या कहा? विरल विरला स्थूलला तारा कला विव सज्जन विरल विरला स्थूला तारा जो आकाश में बड़े-बड़े तारे थे वे विरल हो गए हैं दूर-दूर हो गए हैं। कलावस सज्जना जिस प्रकार कलयुग में सज्जन लोग दूर-दूर
हो गए हैं। अब एक जगह नहीं मिलते वैसे ही आकाश के तारे दूर-दूर हो गए हैं। मन इव मुने सर्वत्रव प्रसन्नम भूभ आकाश और पृथ्वी प्रसन्न हो गए हैं। जिस प्रकार मुनियों के मन प्रसन्न हो जाते हैं। आकाश में बड़े तारे बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। जैसे कलयुग में सज्जन मनुष्य बहुत ही कम बचे हैं। सारा आकाश मुनियों के मन के समान निर्मल और पवित्र हो गया है। ठीक है? प्रसन्न हो गया है। हां अपसरति च ध्वनता चित्तताव दुर्जन अपसरति चताम और अंधकार मिटता जा रहा है चित्तामि दुर्जन जैसे सज्जनों के मन से दुर्जन
अंधकार मिटता जा रहा है जैसे सज्जनों के मन से दुर्जन वजत च साक्षप्रम और रात्रि तेजी से बीत रही है लक्ष्मी रन्याम नामव जैसे कुछ काम न करने से बहुत धन बहुत तेजी से खर्च होता है। उसी प्रकार रात्रि बीत रही है। अगर तुम्हारे पास कमाने का स्रोत ना हो और तुम ₹10,000 लेके बैठे हो। चार दिन में खर्च हो जाएगा। मुंह बना के बैठ जाओगे। अब देखो बौराहा लोग कैसे होते हैं? बौराहा लोग कैसे होते हैं? एक बच्ची है। उसने मुझे स्क्रीनशॉट भेजा है। मैंने बड़वाग्नि को जल में लगने वाली आग पर क्लिक किया
है और दावाग्नि को गोला करके बताया था कि वो जंगल में लगने वाली आग है। लेकिन उसने केवल इसको देखा स्क्रीनशॉट लिया मुझे भेज दिया। सुना नहीं है उसने। सुना नहीं है। क्योंकि सुनी होती ऐसे ही तुम लोग पढ़ते हो और उसके बाद एग्जाम में जाकर गलती करते हो। सोचो अगर मेरे जैसा टीचर ना हो जिसे सब कुछ याद रहे तो तुम लोग हर एक चीज को गलत कह दो। हैं? बहुत हुआ यार जादूगर आदमी हो। ठीक है। उसके बाद क्या हुआ? राजा को बहुत मजा नहीं आया। तो राजा तस लक्षम दत्त्वा राजा ने उसे
₹1 लाख मुद एक लाख मुद्राएं देकर कालिदासम प्रा कालिदास से कहा। राजा को बहुत मजा नहीं आया। तो कालिदास ने उसे ₹1 लाख दे दिया। कालिदास को कालिदास ने उनको ₹1 लाख दिया। और कहा मित्र तुम भी प्रभात का वर्णन करो। तब कालिदास ने कहा तब कालिदास ने कहा तथा ततः कालिदास प्रब कालिदास बोले सखे तुम्हें प्रभात वर्ण मित्र तुम भी प्रभात का वर्णन करो तथा कालिदास अप तब कालिदास बोले अभूत प्राची पिंगा हो गई है प्राची पूर्व दिशा पिंगा पीली सुनहरी पीली हो गई है रसपति प्राप्तकम सूर्य की सुनहरी किरण को प्राप्त करके पूर्व
दिशा सूर्य की पहली किरण को प्राप्त करके करने के कारण पारे के समान लालिमा युक्त हो गई है चंद्रमा वैसे ही कांतही हो गया है जैसे अज्ञानी की सभा में विद्वान चुपचाप बैठे रहते हैं। क्षणम क्षणा तारा नपतय इवादम पराह और क्षणम क्षणास्तारा तारे क्षण भर में क्षीण हो गए हैं। नृपतय इवादम पराह जो अनुद्यमी राजा होते हैं जो अपने प्रजा के लिए कुछ नहीं करते कमाई के लिए कुछ नहीं करते। ऐसे राजाओं की भांति जो तारे हैं वह क्षीण हो गए हैं। न दीप राजते और दीपक भी शोभायमान नहीं हो रहे। द्रविण रहता ना
गुणा तारे अनुदमी कायर राजाओं की भांति क्षणभर में क्षीण हो गए हैं। सवेरा होने पर उसी प्रकार दीपक व्यर्थ हो जाता है। जैसे दरिद्र व्यक्ति के गुणों को ढक लेते हैं। तो न दीप राजते दीपक भी शोभायमान नहीं होते। हो रहे द्रविड़ रहता ना गुणा। जिस प्रकार धन से रहित गुणवान व्यक्ति के गुणों पर कोई चर्चा नहीं करता उसी प्रकार सभी लोग एक बार कमेंट करके बताओ यार तुम लोग सेशन को शेयर करो 15 16 17 ये तीन दिन बेटा ये तीन दिन तुम्हारे जीवन के सबसे खास दिन होने वाले हैं क्योंकि इन तीन दिनों
में मैं सब कुछ पढ़ाने वाला हूं राजा अदितुष्ट तस से लक्षम प्रत्यक्षम लक्षम ददऊ राजा ने संतुष्ट होकर उनको प्रत्येक अक्षर के लिए लाख-लाख स्वर्ण मुद्राएं दे दी। किसको? किसको दे दी? लाख-लाख स्वर्ण मुद्राएं। किसको दे दी? लाख लाख स्वर्ण स्वर्ण मुद्राएं अपने मित्र कालिदास को। चलो संस्कृत भाषा या महत्वम पर बात करते हैं। पूरे पाठ के लिए संस्कृत महत पूरे पाठ संस्कृत भाषा या महत्वम के लिए संदर्भ क्या होगा? प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश। आपको पता है कि आपको किताब में पेपर में केवल संदर्भ और अनुवाद लिखना होता है। संदर्भ आपका दो नंबर का होता है।
अनुवाद पांच नंबर का। टोटल संस्कृत आपका सात नंबर का एक हिस्सा होता है। सात नंबर का गद्यांश सात नंबर का श्लोक 14 नंबर की संस्कृत होती है। समझ में नहीं आ रहा है। एक-एक लाइन बता रहा हूं, बेटा फोकस नहीं करोगे तो कैसे काम चलेगा? तुम्हें भी पता है कि संस्कृत थोड़ी कठिन है। मुझे भी पता है। तो क्यों फोकस नहीं कर रहे हो? ध्यान से देख लो ना बेटा। मैं सच बता रहा हूं। ऑफलाइन में या कहीं और तुमको इस इतने अच्छे से नहीं पढ़ाया जाएगा। यकीन मानो। केवल वाहवाह करने के लिए कहीं भले
ही चले जाओ। लेकिन देखो मुझे भी पता है ये एक अलग भाषा है बेटा। हम लोगों को तो हिंदी भी ठीक से नहीं आती। उसके बाद जब एक नई भाषा उसको इंट्रोड्यूस करना पड़े तो सोचो कि कितना कठिन होता है वो। धन्य भारत देश धन्य है यह भारत देश यत्र जहां समुल्यसति सुशोभित होती है जनमानस पावनी जन के मानस को जन के मन को पावन करने वाली भव्य भाव उद् भावनी अच्छे भावों को पैदा करने वाली शब्द संदेह प्रसनी शब्द के संदोह को अर्थात शब्दकोश को पैदा करने वाली सुर भारती देववाणी या भारत देश धन्य
है। जहां मनुष्य के चित्त को शुद्ध करने वाली, अच्छे भावों को उत्पन्न करने वाली, शब्द के समूह को जन्म देने वाली देववाणी सुशोभित है। विद्यमानु निखिलेश्वप वांगमयेषु विद्यमान संपूर्ण साहित्यों में अस्या वांग्मयम इसका साहित्य वांगमय माने साहित्य होता है। सर्वश्रेष्ठम सर्वश्रेष्ठ है। सुसंपन्नम च वर्तते और सुसंपन्न है। विद्यमान संपूर्ण साहित्यों में इसका साहित्य सर्वश्रेष्ठ और सुसंपन्न है। इसीलिए एक लाइन ऊपर लिखा हूं। उसके नीचे उसका अर्थ लिखा हूं कि जब भी तुम देखो हां एनडीए का बैच है बेटा डिफेंस एग्जाम विद्या कुल पर चले जाना देख लेना। सीयूईटी की तैयारी करनी हो तो सीयूईटी विद्याल
पर चले जाना। हां जो मैंने निबंध का पीडीएफ दिया है वही रिवीजन कर लो। चलो यमेव भाषा यह भाषा संस्कृत नाम लोके प्रथस्त यही भाषा संस्कृत नाम से भी संसार में प्रसिद्ध है अस्माकम रामायण महाभारत ऐतिहासिक ग्रंथा चत्वारो वेदा सर्वा उपनिषद अष्टादस पुराण अन्यानी च महाकाव्य नाट्यादिन अस्याम भाषाया लिखित सं अस्माकम रामायण हमारे रामायण महाभारत आदि ऐतिहासिक ग्रंथ चतवा चारो वेद सर्वाह उपनिषदा सभी उपनिषद अष्टाद पुराण 18 पुराण अन्यानीच महाकाव्य नाट्याधीन अन्य और अन्य अनेक महाकाव्य और नाटक अस्यामव भाषायाम लिखितान संधि इसी भाषा में लिखे हुए हैं। हमारे रामायण महाभारत आदि ऐतिहासिक ग्रंथ चारों वेद
समस्त उपनिषद 18 पुराण तथा अन्य महाकाव्य नाटक आदि इसी भाषा में लिखे गए हैं। आगे बढ़ते हैं। यमे भाषा यह भाषा सर्वासाम आर्य भाषाणाम जननी मन्यते भाषा तत्व विधि इस भाषा को सभी आर्य भाषाओं की जननी मानते हैं। भाषा तत्व विधि भी यानी भाषा वैज्ञानिक इसी भाषा को समस्त आर्य भाषाओं की जननी मानते हैं। देखो पेपर के टाइम पे यही करना है तुमको। एक लाइन देखो उसका अर्थ देखो। कहानी को अपने दिमाग में बिठाओ। क्योंकि ऐसे ही कर पाओगे। अर्थ निकालना लास्ट में नहीं सीखा जा सकता। उसके लिए मैंने और तमाम क्लासेस पढ़ाई है। वहां
जाकर देख सकते हो। सर केक आया ही नहीं। कहां चले गए? सो गए थे क्या? इतना बढ़िया केक आया था। इतना बढ़िया केक आया था। संस्कृतस गौरव संस्कृत का गौरव संस्कृत का गौरव बहु विज्ञानश्रयत्व बहु ज्ञानश्रत उसका विविध प्रकार के ज्ञान का आश्रय होना व्यापकत्व च तथा इसकी व्यापकता न कस्या दृष्ट विषय किसी के आंखों से छिपा हुआ नहीं है किसी के दृष्टि से छिपा हुआ नहीं है समझ रहे हो संस्कृतस गौरव एव संस्कृत के गौरव को ही दृष्टि पथ मानीय ध्यान में रख के सम्यक उत्तम उचित ही कहा है। आचार्य प्रवरेण दंडना आचार्य प्रवर
दंडी ने संस्कृतम नाम देवी वाकवाख्याता महर्षि भी संस्कृत को महर्षियों ने ईश्वर की वाणी कहा है। संस्कृत के गौरव को देखते हुए ही मार्स दंड ने कहा कि संस्कृत महर्षियों ने संस्कृत को देववाणी कहा है। ठीक है सर कितना टाइम और चलेगी क्लास? अभी तो यार 10:00 बजे तक चलेगी क्लास। ठीक है। आगे बढ़ते हैं। संस्कृतस साहित्यम सरसम व्याकरण सुनिश्चितम संस्कृत का साहित्य सरस है। व्याकरण सुनिश्चित है। तस्य गद्य पद्य चा लालित्यम उसके गद्य और पद्य में लालित्य है यानी सौंदर्य है। भाव बोध सामर्थ्यम भाव की अभिव्यक्ति का सामर्थ्य है। अद्वितीय श्रुति माधुर्यम चाचा और
अनुपम श्रुति माधुर्य है। संस्कृत को सुनने में बड़ा अच्छा लगता है। सर 12वीं के बाद मेरी 13वीं में आना। हट बदतमीज आदमी। सभी लोग कमेंट करो यार यार तुम लोग। कह रहा है सर कितना प्यारा आदमी है किम बहुना अधिक क्या ही कहें चरित्र निर्माण याद सत प्रेरणा संस्कृत वांगमय ददाति न तादशी किंचिंच धन्यत अधिक क्या ही कहें चरित्र निर्माण की जैसी अच्छी प्रेरणा संस्कृत साहित्य देता है वैसा कोई अन्य साहित्य नहीं देता है आगे बढ़ते हैं मूलभूत नाम मानवीय गुणा नाम मूलभूत मानवीय गुणों की यादृशी विवेचना जैसी विवेचना संस्कृत साहित्य वदे संस्कृत साहित्य में
है नान्य त्रितादर्शी मूलभूत मानवीय गुणों की जैसी विवेचना संस्कृत साहित्य में है वैसी विवेचना और कहीं नहीं है वैसी और कहीं नहीं है ठीक है। दया दानम सौचम औदार्यम अनुसुए क्षमा अन्यच अनेक गुणा दया यानी दया दान माने दान शौचम माने पवित्रता औदार्य माने उदारता अनुसुय माने ईर्ष्या ना करना क्षमा माने क्षमा अन्यच अनेक गुणा तथा अन्य अनेक गुण अस्य साहित्यस अनुशीलनेन संजायंते इसके साहित्य के अध्ययन मात्र से तुम्हारे अंदर आ जाते हैं। समझ रहे हो? ठीक है? संस्कृत साहित्य से संस्कृत साहित्य के आदिवि वाल्मीकि आदि कवि वाल्मीकि महर्षि व्यास महर्षि व्यास कवि कुल गुरु
कालिदास कवि कुल गुरु कालिदास अन्य च अन्य अनेक भाषभूतदयो महाकविवय भाष भारभ जैसे महाकवि स्वकीय ग्रंथ रत्न अपने ग्रंथ रत्नों से अद्याप आज भी पाठ का नाम हृदय विराजते पाठकों के हृदय में विराजमान रहते हैं। अर्थ देखो संस्कृत साहित्य के आदि कवि वाल्मीकि महर्षि व्यास कवि कुल गुरु कालिदास तथा अन्य कवि भाष भारत विभवभूति आदि महाकवि अपने ग्रंथ रत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान रहते हैं। यम भाषा अस्माभि यह भाषा हमारे लिए मातृसम माता के समान सम्माननीय सम्माननीय है वंदनीय च और वंदनीय है यतो क्योंकि भारत मातु स्वतंत्र्यम भारत माता की
स्वतंत्रता गौरव गौरव अखंडत्वम अखंडता सांस्कृतिकम एकत्वम चा और सांस्कृतिक एकता संस्कृत नैव संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित शकते सुरक्षित हो सकती है। यह भाषा हमारे लिए माता के समान सम्माननीय और वंदनीय है क्योंकि भारत माता की स्वतंत्रता गौरव अखंडता तथा सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित हो सकती है। इयम संस्कृत भाषा यह संस्कृत भाषा सर्वासु भाषासु सभी भाषाओं में प्राचीनतमा श्रेष्ठा च अस्ति प्राचीन और श्रेष्ठ है। तथा सुस्तुक्तम इसीलिए उचित ही कहा गया है। भाषा सुमुख्या मधुरा दिव्या गिरवाणी भारती भाषाओं में मुख्य मधुर और दिव्य क्या है? गिरवाणी भारती देव भाषा है। ठीक है?
आज की क्लास देख रहा हूं। महामाना मालवीय का गद्यांश बता दीजिए। आज की क्लास देख रहा हूं। बता रहा हूं। उसी को वहीं पर पहुंच रहा हूं। वहीं पर पहुंच रहा हूं। चलो अब यह पाठ खत्म हो गया। यह पाठ खत्म हो गया। अब इस पाठ के बाद हम लोग पढ़ेंगे जातक कथा। इस पाठ के बाद हम लोग क्या पढ़ेंगे? जातक कथा। जातक कथा पढ़ते हैं। पूरे पाठ जातक कथा के लिए संदर्भ क्या होगा बेटा? प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक संस्कृत दिग्दर्शिका के जातक कथा नामक पाठ से उद्रित है। जातक कथा में एक श्लोक
भी है। तो जब श्लोक आएगा तो आप लिख दोगे संस्कृत श्लोक। समझ गए सभी लोग? यहां तक क्लियर है सभी का? कोई किसी को कोई दिक्कत? सर, हिस्ट्री और सिविक्स का पेपर भवान क्या है? कंबल से कवर कर लो खुद को। क्यों कंबल से कवर करना है खुद को भाई? सर आप बिरयानी खाते हैं? नहीं बेटा मैं नहीं खाता हूं। मैं ब्राह्मण आदमी हूं। वैष्णव ब्राह्मण हूं। मेरे पिताजी ने कभी मुझसे कुछ कहा तो नहीं है। लेकिन उनके संस्कारों का की धज्जियां उड़ाना हो जाएगा। अगर मैं बिरयानी खाऊं। बेज बिरयानी खा लेता हूं। ठीक है।
चलो थोड़ा थक जाता हूं तो रुक जाता हूं। उलूक जातकम अतीते प्रथम कल्पे प्राचीन काल में प्रथम कल्प के जना लोगों ने एकम अभिरूपम एक विद्वान यानी सुंदर अभिरूपम माने होता है सुंदर विद्वान लिख दिया है सौभाग्य प्राप्तम सौभाग्यशाली सर्व कार्य परिपूर्णम एवं सर्वगुण संपन्न पुरुषम पुरुष को राजाना मुकुरबन राजा बनाया देखो जैसे लाइन वैसे हिंदी जैसे लाइन वैसे हिंदी ठीक है समझ रहे नहीं मैं मैं किसी के धर्म पर कोई टिप्पणी नहीं करता और मैं सभी को प्रेम करता हूं। जितने मेरे मित्र हैं, जितने मेरे दोस्त यार हैं, जितने मेरे भाई हैं, मैं सबको
प्रेम करता हूं और मैं धर्म के नाम पर विभाजन को बहुत ज्यादा निकृष्ट चीज मानता हूं। मैं मानता हूं कि भारत में रहने वाला हर भारतवासी हमारा भाई है। हमारा उससे खून का रिश्ता है। आज नहीं तो 10 साल पहले का है। लेकिन है वो रिश्ता। उस रिश्ते से हमको कोई अलग नहीं कर सकता। कोई करना भी चाहे। कितना भी कोई कह दे कि नहीं भाई हम मैं मतलब आप कैसे किसी चीज को विभाजित करोगे? अलग-अलग करोगे बताओ। ठीक है? चतुष्पदा चतुष्पदा मतलब चार पैर वालों ने चौपाइों ने अप भी सनपत्य इकट्ठा होकर एक एकम
सिंघम एक शेर को राजाना मुकुरबन जंगल का राजा बनाया ततः तब शकुनगणा पक्षियों के समूह ने हिमवत प्रदेश एकस्मिन पाषाण सनपत हिमवत प्रदेश में एक पत्थर पर इकट्ठा होकर मनुष्य राजा प्रज्ञा मनुष्य में राजा जाना जाता है तथा चतुष्पदेशचा और चार पैरों वालों में भी ऐसा ऐसा कहा ठीक है और क्या कहा उसके बाद हिमालय प्रदेश में एक चट्टान पर एकत्रित होकर पक्षी गणों ने मनुष्य में राजा जाना जाता है और चौपाइयों में भी अस्माकम पुरंतरे राजा नास्ति हमारे बीच राजा नहीं है अस्माकम पुरंतरे राजा नास्ति हमारे बीच राजा नहीं है ऐसा कहा अस्माकम पुरंतरे
राजा नास्ति हमारे बीच राजा नहीं है अराजको वासो नाम नवरतते अराजको मतलब बिना राजा के रहना ठीक नहीं है एको राजस्थान स्थापतव्य एक राजस्थान की स्थापना करनी चाहिए इत उत्तम ऐसा कहा किंतु हमारे बीच कोई राजा नहीं है। बिना राजा के रहना उचित नहीं है। हमें भी एक को राजा के पद पर बिठाना चाहिए। ऐसा कहा अथते परस्परम अवलोकता उसके बाद उन्होंने एक दूसरे को देखा। एकम उल्लूकम दृष्ट्वा एक उल्लू को देखकर कहा अयं नरोचते हमें यह पसंद है। अब सोचो कैसे लोग रहे होंगे कि उन्होंने इधर-उधर देखा और एक उल्लू मिला और उल्लू को
देखकर कहा कि अयं नरोचते यह हमें पसंद है। क्या यह तुम्हें सही लगता है? क्या यह तुम्हें सही लगता है? हैं बोलो। सभी लोग सेशन को एक बार शेयर कर दो बेटा। अथका शकुनी सर्वेशाम मध्यादासाय ग्रणार्थम तत्वा अस्रावत अथैक अथ एक तब एक शकुनी पक्षी ने सर्वेशाम सभी के बीच सर्वेशाम सभी के मध्य आदासाय ग्रहणार्थम सभी के मध्य आदेश को ग्रहण करने के लिए त्रिक श्रावेत खड़ा होकर तीन बार बोला क्या बोला तीन बार घोषणा की तत्पश्चात सबका विचार जानने के लिए एक पक्षी ने तीन बार घोषणा की ततः एक काका उ्थाए तब एक कौवा
उठकर बोला तष्तावत थोड़ा ठहर अस एतस्मिन राज्याभिषेक काले एवं रूपम रूपम मुखम राज्याभिषेक के समय इसका ऐसा मुख है क्रोधस्य चकी दृषम भविष्यति क्रोधित होने पर कैसा होगा अनेन ही क्रोधेन अवलोकित िता इसके क्रोधित होकर देखने पर वयं हम सब हम सब तप्त कटाहे गर्म कढ़ाई में प्रक्षिप्ता तिला गर्म कड़ाए प्रक्षिप्ताह तिला मतलब फेंके गए तिल के समान इव तत्र तत्रव खड़कम तिल सा जहां के तहां जल जाएंगे ठीक है फेंके गए तिल के समान जहां के तहां जल जाएंगे ई दिस राजा ममो जी ठीक है बेटा इधर दशो राजा महम न रोचते इशो राजा
महम न रोचते मुझे ऐसा राजा नहीं पसंद इत्या इस प्रकार कहा नमे रोचते भद्रम वह उकस्याचनम नमे रोचते भद्रम हे भद्र लोगों हे महान लोगों हमें यह अच्छा नहीं लगता उल्लू कस्या विशेषण इस उल्लू का राज्याभिषेक करना हमें अच्छा नहीं लगता अक्रुद्धस मुखम पस बिना क्रोधित हुआ मुख देखो इसका कथम क्रो भविष्यति जब क्रोधित होगा तो कैसा लगेगा ठीक है स एव मुक्त्वा वह ऐसा कहकर महम नरोचते वह ऐसा कहते हुए कि मुझे नहीं अच्छा लगता मुझे नहीं अच्छा लगता इत विरुवन ऐसा कहते हुए आकाश से उदत आकाश में उड़ गया उसके बाद क्या हुआ
ऐसा कहकर वह मुझे नहीं पसंद मुझे नहीं पसंद चिल्लाता हुआ आकाश में उड़ गया उकोप उ्थाए एन मनधावत उल्लू ने भी उसका पीछा किया उल्लू भी उड़कर उसके पीछे दौड़ गया उल्लू भी उड़कर उसके पीछे दौड़ गया तत आरभ्य तऊ अन्योन्य वरणो जातो तब से आरंभ करके वह दोनों एक दूसरे के शत्रु बन गए। तभी से वह दोनों परस्पर एक दूसरे के शत्रु बन गए। शकुन अप और पक्षी लोगों ने क्या किया भाई साहब स्वर्ण हंसम राजान कृत्वा सोने के हंस को राजा बनाकर पक्षी गण भी चले चल पड़े अब बताओ। एक बात बताओ। एक
बात मुझे समझाओ तुम लोग। मैं नहीं समझ पा रहा हूं। अह एक बात मुझे बताओ। यार जब वहां पर सुनहरा राजहंस बैठा हुआ था। जब वहां पर सुनहरा राजहंस बैठा हुआ था तो क्या जरूरत थी उल्लू को राजा बनाने की? अरे पागल आदमी एक लड़का। अब अब देखो अब सीधी सी बात है। अब सीधी सी बात है। अब जब वहां पे उल्लू बैठा हुआ है एक बच्चा मुझे मैसेज कर रहा है कि सर आप क्लास ले रहे हैं और मुझे रोना आ रहा है। तीन दिन बाद आपकी क्लास नहीं मिलेगी। मैं फिर से रुलाओगे मुझे
क्या कल इतना रोया हूं। भूम पूरा भाई साहब मैं इतना मेरी आंख बिल्कुल लाल-लाल हो गई थी। लाला लाल हो गई थी आंख एक घंटे बाद आंख सामान्य हुई है। नृत्य जातक इसी का एक हिस्सा है नृत्य जातक बेटा अतीते प्रथम कल्पे चतुष्पदा सिंघम राजाना मुकुरवन प्राचीन काल के प्रथम युग में पशुओं ने शेर को राजा बनाया मत्स्याह मछलियों ने आनंद मत्स्यम मछलियों ने आनंद मछली को राजा बनाया शकुनः स्वर्ण हंसम और शकुनियों ने मतलब पक्षियों ने स्वर्ण हंस को सुनहरे सुनहरे हंस को राजा बनाया मछलियों ने आनंद मछली को तथा पक्षियों ने स्वर्ण हंस
को राजा बनाया तस्य पुनः स्वर्ण राजहंस दुहिता हंस पोतिका का अतिव रूपती आसीत उसके बाद स्वर्ण राजहंस जो था जो सुनहरा राजहंस राजा बनाया गया था सर मैं आ गया पानी लगा के चलो क्लास करो बैठ के स्वर्ण हां अब बताओ लोग कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के बच्चों को के लिए संघर्ष ना करो मैं क्यों ना करूं कोई मुझे इसका जवाब दे दे एक बच्चा जो अपने खेत में पानी लगाने जाता है उसके बाद लौट के आता है उसकी उम्मीद भी मैं हूं उसकी उम्मीद भी यह विद्याल परिवार है उसे भी मुझे मुझे टॉपर
बनाना है। मैं उसे भी पीछे छोड़ के नहीं जा सकता। शिखर पर बैठे हुए लोगों को मैं जीवन भर चुनौती देता रहूंगा। इसलिए क्योंकि मेरे अपने जो जमीन पर बैठे हुए हैं उनको सीढ़ियां चढ़ाना है मुझे। मैं नहीं जानता ये कैसे होगा लेकिन होगा। ठीक है। सर अपना रूम दिखा दो। बेटा कैमरा माउंट है वहां पे निकल नहीं सकता। तो स्वर्ण राजहंस जो सुनहरा राजहंस था उसकी एक बेटी थी। अह हंस पोतिका नाम था उसका। बहुत सुंदर थी। हंस पोतिका बहुत सुंदर थी। उसके बाद क्या हुआ? सह तस्य वरमदात तो स्वर्ण राजहंस ने अपनी बेटी
हंस पोतिका को वरदान दिया। क्या वरदान दिया? यत सा आत्म निश्चितचम स्वामिकम कि वह आत्म निश्चितम अपने मन के पति का वरण कर सकती है। मतलब अपने मन के लड़के से शादी कर सकती है। तुम में से कितने लोग ऐसे हैं जो अपने मन के लड़के या लड़की से शादी करना चाहते हैं। कितने लोग ऐसे हैं बताओ मुझे? इमोशनल होने की बात नहीं है। सच है बेटा। सच है। मैं अपने गांव को जानता हूं। मैं जानता हूं कि बहुत सारे बच्चे आज भी एक तय उम्र के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। खेती करने लगते हैं
या कमाने के साधन। मेरे क्षेत्र के बहुत सारे बच्चे दिल्ली, सूरत, मुंबई में हैं। उन्होंने एक अच्छी पढ़ाई की होती या उनको एक अच्छे पढ़ाई का एक एक अच्छी स्किल अगर उनकी डेवलप करवाई गई होती तो वो भी कहीं कुछ कंप्यूटर सीखकर कोई काम कर लेते। यहां से 800 900 किलोमीटर दूर पड़े उनको ₹1000 2000 मिलता है ना खाने को ठीक से मिलता है ना परिवार के पास रहते हैं ना छुट्टियों में आप आते हैं ठीक है थोड़ा पानी पी लो बेटा चलो बेटा आ गया पानी पी के हंसराज तस्य वरम दत्तवा हंसराज ने उसे
वर वरदान देकर के हिमोति शकुन संकेत सन्य पतन उसे वर देकर हंसराज पक्षियों के समूह में हिमालय पर उतर गया 15 16 17 ये तीन दिन याद रखना बेटा 15 16 17 मैं तुम्हारी किसी भी परिस्थिति से तुमको निकालकर 9500% पर खड़ा खड़ा कर दूंगा और अगर नहीं कर पाया तो पढ़ाना छोड़ दूंगा मैं। अगर नहीं कर पाया इन तीन दिनों में तुमको तुम्हारी परिस्थिति मत निकालकर 100 पे 100 पे खड़ा कर देने में तो कोई मतलब नहीं है मेरे पढ़ाने का। ठीक है? साल भर तुम इसलिए पढ़ाई करते हो क्योंकि तुम योग्य बन जाओ।
केवल परीक्षा पास करना ही मुख्य धेय नहीं होता। साल भर तुमने इसके लिए पढ़ाई की है। बेटा मैंने गोंडा में धनेपुर से हूं। लेकिन मैं तुम्हें यह वचन देता हूं कि परीक्षा में तुम्हारे नंबर मेरे पेपर में इसलिए नहीं कटेंगे क्योंकि तुमने पढ़ा नहीं होगा। इसलिए कटेंगे क्योंकि तुम लिख नहीं पाओगे। अगर तुम लिख ले गए तो 100 में 100 तुमको मिलेगा। चलो नाना प्रकार हंस मयूरादया श मयरा शकुनगढ़ समागत एकस्मिन पाषाण तले सनपत्य विविध प्रकार नाना प्रकार विविध प्रकार के हंस मयूरादया हंस और मोर शकुनगढ़ा पक्षियों के समूह समागत आकर के एकस्मिन महति पाषाण
तले सन्य पदत एक बहुत बड़े पत्थर के ऊपर बैठ गए। पाषाण तले उसके नीचे पाषाण के नीचे बैठ गए। ठीक है? आ गया लाइव 37 मिनट पीछे था। बहुत अच्छी बात है। हंस राजा हंसराज आत्मनाचितम स्वामिकम आगत हंसराज ने अपनी बेटी से कहा अहंस राजा दुहितम आदिदेश हंसराज ने अपनी बेटी को आदेश दिया कि आगत आओ आत्मना चित्रचितम स्वामिकम वृयायात अपने मनपसंद पति का वरण करो। हंसराज ने अपनी पुत्री को आदेश दिया कि वह आए और अपने मनपसंद पति का वरण करें। सा शकुरी संग अवलोकती मणिवर्ण ग्रीव चित्र प्रेक्षण मयूरम दृष्ट्वा अय स्वामी को बहुत
भाषत हंस की पुत्री ने पक्षी समूह पर दृश्य डालते हुए मणि के रंग सदृश्य गर्दन तथा रंग बिरंगे पंखों वाले मोर को देखकर कहा यह मेरे स्वामी होंगे ठीक है मयूरा अब भैया देखो फिर से मैं तुम्हें बता दे रहा हूं एक गढ़ बात बताऊं कितने लड़कों लड़कों ध्यान देना लड़कों ध्यान देना लड़कों ध्यान दो भैया जोश में मत आना अगर अगर तुमको कोई लड़की पसंद कर ले तो ये मोर की तरह जोश में मत आना। मोर भाई साहब ने कहा अद्याप तमन तावन में बलम नपस्यसि अभी तुमने मेरा बल नहीं देखा है इति अति
गर्भेण ऐसा घमंड के साथ कहकर लज्जित्वा और अपनी लज्जा को त्याग कर अपनी लज्जा को त्याग त्याग कर तावन महत शकुन संगस से उस बहुत बड़े पक्षियों के समूह के मध्य बीच में पक्ष प्रासार्य पंख को फैलाकर नर्तित मारधवा नाचना शुरू कर दिया। नृत्य और नाचते हुए अप्रत्यक्षोभूत और नाचते हुए नंगा हो गया। अब भैया तुमको कोई लड़की पसंद कर ले। उसका बाप भी बैठा हो पूरा गांव बैठा हो और तुम कहो कि नहीं रुको अभी तुमने मेरी शक्ति नहीं देखी और तुम चड्डी उतार के नाचने लगो नंगे हो के। कितना बुरा लगेगा यार। कितना
बुरा लगेगा। ऐसा मत करना। ऐसा मत करना। ऐसा बिल्कुल नहीं करना है। ठीक है? समझ गए? अब तक तुम्हें तुमने तुम्हें मेरा पराक्रम का आभास नहीं है। यह कहकर मोर ने अति गर्भ सहित लज्जा को त्याग कर पक्षियों के उस विशाल समूह के मध्य नृत्य करना आरंभ कर दिया और नृत्य करते-करते नग्न हो गया। स्वर्ण राजहंसा सोने का राजहंस लज्जित लज्जित हो गया। असयु हृती इसमें ना तो लज्जा है न बरहणाम समुत्थने लज्जा। इसे ना तो शर्म है और ना लोगों के सामने इसे लज्जा आती है। नास्मत पाए ध्वतरम दास्यामि मैं इस निर्लज्ज को अपनी
बेटी नहीं दूंगा। इत अकथैत ऐसा कहा। किसने कहा? सुनहरे राजहंस ने कहा। और लड़कियों तुम भी ऐसे लड़कों से शादी मत करना जो तुम्हारे स्वीकार लेने के बावजूद चौधरी बनने लगे कि अरे तुम तो अब जानती ही नहीं हो। मेरे पास यह पैसा है। ये गाड़ी है। मेरे पिताजी के पास इतना खेत है। जो अपनी संपत्ति गिनाए बच्चियों तुम जान लो। आगे चलकर तुम्हारे सामने ये चुनौतियां आएगी। तुम्हें कोई भी अगर अपनी संपत्ति गिना रहा है उससे दूर हो जाओ। वो तुमसे तुम्हारे मन से प्रेम नहीं करता। वो तुम्हारी दौलत से प्रेम करता है। वो
दौलत से जो अपना चरित्र दौलत से बनाएगा वो हमेशा दौलत से ही प्रेम करेगा। जरूरत पड़ने पर तुम्हें छोड़ देगा। हंसराज हंस राजा तद परिषद मध्य हंसराज ने उसी परिषद के मध्य में आत्मन भगने आए अपनी बेटी के बेटे हंसपोतकाय हंसपोतक को दुई तरह मददात अपनी बेटी दे दी अर्थात अपने बेटी के बेटे से विवाह कर दिया उसी सभा के मध्य हंसराज ने अपनी पुत्री अपने भांजे हंसपोतक को दे दी मयूरो हंसपोतकाम अप्राप्य लज्जित तस्मात स्थानात पलायतः जब मोर को हंसपोतिका नहीं मिली तो लज्जित हो गया और उस स्थान से उड़ गया हंसराजों के हंसराज
भी हृष्ठ मानसा खुशी-खुशी स्वगह मगच्छत हंसराज भी खुशी-खुशी अपने घर चला आया गुरु जी मेरे वाली की शादी हो गई अरे दादा हाय हम लो तुम्हारे लिए रो दिया मैं शादी हो गई तुम लोग 12 में पढ़ते हो और तुम्हारी वाली भी है इतना समय कहां मिलता हम बेटा सबको पता है कि उत्तर प्रदेश का सबसे ज्यादा बच्चा मुझसे पढ़ता है तो सबका ऐड मेरी ही क्लास में दिखेगा और क्या करेंगे वह लोग ठीक है सुभाषित रत्नानी सुभाषित रत्नानी पढ़ लें चलो सुभाषित रत्नानी सारे श्लोक देख लेते प्रस्तुत संस्कृत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक संस्कृत दिगदर्शिका
के सुभाषित नामक पाठ से उित है। चलो भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गिरवाणी भारती भाषास मुख्या मधुरा दिव्या गिरवाणी भारती भाषास मुख्या भाषाओं में मुख्य मधुर और दिव्य है। कौन सी भाषा देव भाषा संस्कृत तस्याही मधुरम काव्यम उसमें भी उसका काव मधुर है का तस्याही तस्मादपि सुभाषितम उसमें भी जो उसके सुभाषित है सुंदर उक्तियां है वो बहुत अच्छी हैं भाषाओं में देववाणी संस्कृत सर्वश्रेष्ठ मधुर और दिव्य है निश्चय ही उसका काव्य अर्थात साहित्य मधुर है तथा काव्य से भी अधिक मधुर उसकी सुंदर उक्तियां या सूक्तियां हैं। सुखार्थिना कुतो विद्या कुथो विद्यार्थिन सुखम सुखार्थी जो सुख की
इच्छा करते हैं। जैसे तुम लोगों में बहुत सारे बच्चे ऐसे होंगे सर आपकी शादी हो गई। नहीं बेटा मैंने इस जन्म में शादी ना करने की कसम खाई है। मैं इस जन्म में शादी नहीं करूंगा। सुखार्थिना कुतु विद्या कुतु विद्याना सुखम अगर तुम सुख चाहते हो भैया तो तुमको विद्या नहीं मिलेगी। अगर तुम विद्या चाहते हो तो तुमको सुख नहीं मिलेगा। सुखार्थी वाते जेत विद्याम। अब सुख की इच्छा रखने वाले को विद्या त्याग देनी चाहिए। विद्यार्थी वातेजेत सुखम और विद्या की इच्छा रखने वाले को सुख त्याग देना चाहिए। सुख चाहने वाले व्यक्ति को विद्या कहां
प्राप्त हो सकती है तथा विद्या चाहने वाले व्यक्ति को सुख कहां प्राप्त हो सकता है? सुख की इच्छा रखने वाले को विद्या प्राप्त करने की इच्छा त्याग देनी चाहिए और विद्या की इच्छा रखने वाले को सुख त्याग सुख का त्याग कर देना चाहिए। जल बिंदु निपातेन क्रमस पुरते घट सह हेतु सर्व विद्या नाम धर्मस च धनस च बूंदबूंद जल गिरने से घड़ा भर जाता है। यही सभी विद्याओं धर्म तथा धन प्राप्त करने का माध्यम है। यहां कहने का तात्पर्य यह है कि यह विद्या धर्म एवं धन की प्राप्ति के लिए उद्यम के साथ-साथ धैर्य का
होना भी आवश्यक है। क्योंकि इन तीनों का संचय धीरे-धीरे ही होता है। काव्य शास्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम। ठीक है? काव्य शास्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमता व्यसने च मूर्खा निद्रया कलनवा जल बिंदु निपातिन जल बिंदुओं के क्रम से गिरने से घड़ा भर जाता है स हेतु यही कारण है सभी प्रकार की विद्या को प्राप्त करने का धर्म का को प्राप्त करने का धन को प्राप्त करने का समझ गए काव्य शास्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम धीमताम मतलब महान लोग विद्वान लोग जो होते हैं उनका समय कालो गच्छति उनका समय बीतता है कैसे काव्य शास्त्र विनोदेन काव्य
और शास्त्रों की चर्चा का आनंद उठाने में उनका समय व्यतीत होता है। व्यसने न मूर्खाणाम और मूर्खों का समय नशा करने में व्यतीत होता है। निद्रया कलहनवा नशा करने, झगड़ा करने और नशा करने, सोने और झगड़ा करने में मूर्खों का समय व्यतीत होता है। 15 16 17 का टाइम टेबल उसी दिन अपडेट हो जाएगा। बस चैनल को सब्सक्राइब कर लो। 15 16 17 तुम्हें मन नहीं मिलता पुरोहित कुंडली तो मिल गई है। मन नहीं मिलता पुरोहित क्या सफल परिय रहेगा? वैसेने न चमूर्घाणा निद्रया कलहनवा समझ गए। चलो आगे बढ़ते हैं। यह हो गया। न चौर
हार्यम नच राजहार्यम नभाज्यम नच भारकारी न चौहार्यम न चोर चुरा सकता है। नच राजहार्यम सर विद्या कुल का सेंटर कहां है? प्रयागराज में है और गुड़गांव में है। बड़े पापा हम भी शादी नहीं करेंगे। ठीक है हम तुम दोनों लोग चलेंगे। हिमालय वं रहा जाएगा कुटिया बना के। न चौरहार्यम न राजहार्यम ना चोर चुरा सकता है ना राजा छीन सकता है न भ्रातिभाज्यं नच भारकारी और ना भाई बांट सकता है ना भार ही प्रतीत होता है व्यय कृते वर्धतेव नित्यम व्यय करने से बढ़ता है व्यय करने से बढ़ता है विद्या धनम सर्व धन प्रधानम विद्या
रूपी धन सभी धन प्रधान है ठीक है परोक्षे कार्य हंतारम पीठ पीछे कार्य काम को खराब करने वाला पीठ पीछे काम को खराब करने वाला प्रत्यक्ष प्रियवादिनम और सामने बहुत मीठा बोलने वाला बहुत सारे तुम्हारे मित्र होंगे जो पीठ पीछे तुमको गरियाते होंगे और तुम्हारे मुंह पे आके कहते होंगे कि अरे यार तुमसे अच्छा तो कोई है ही नहीं है तुम्हारे लिए हर जगह तो मैं बात करता हूं तुम्हारी तारीफ ही तो करता हूं और गरिया के आए होंगे तुमको वर्ज तादम मित्रम ऐसे मित्रों को छोड़ देना चाहिए त्याग देना चाहिए वर्ज वर्ज देना चाहिए
कि भैया जाओ नहीं हो पाएगा धन्यवाद धन्यवाद वर्ज तादम मित्रम विश्वकुंभम पयोमुखम वर्ज तादम मित्रम वह एक घड़े के एक घड़ा जिसमें विष भरा हुआ है उसके मुख पर लगे विष के समान है। चलो उदयति सविता ताम्र ताम्र ए वास्तमेति च उदयति सविता ताम्र ताम्र ए वास्तमेति च संपत्त च विपत्त च महताम एक रूपता उदयति सविता ताम्र महान अब देखो उदयति सविता ताम्र जब सूर्य उदय होता है तो तांबे के रंग का होता है जब सूर्य डूबता है तब भी तांबे तांबे के रंग का होता है संपत्त च विपत्तचा उसी प्रकार चाहे संपत्ति हो चाहे
विपत्ति महान लोग एक रूपता में रहते हैं एक जैसे रहते हैं। इस कंडीशन को स्थित प्रज्ञ होना कहते हैं। गीता में इसकी बड़ी सुंदर व्याख्या की गई है स्थित प्रज्ञ होने की। अगला श्लोक क्या है? विद्या विवादाय धन मदाय शक्ति परेशा परपीनाय खलस साधो विपरीत ज्ञानाय दानाय चक्षणाय दुष्ट व्यक्ति की विद्यावाद विवाद तर्क वितर्क के लिए संपत्ति घमंड के लिए एवं शक्ति दूसरों को कष्ट पहुंचाने के लिए होती है। इसके विपरीत सज्जन व्यक्ति की विद्या ज्ञान के लिए संपत्ति दान के लिए और शक्ति रक्षा के लिए होती है। ध्यान रखना इस चीज को। विद्या विवादाय
धन मदाय शक्ति परेशाम प्रप पीडनाय कलस साधु कभी अपनी शक्ति का गलत प्रयोग मत करना ईश्वर तुम्हें बहुत धन देगा बहुत शक्ति देगा लेकिन कभी-कभी कोई गरीब आदमी कोई तुमसे कमजोर आदमी अगर तुम्हारी शक्ति से प्रभावित हुआ मुझे एक बात याद आती है मेरे घर पर झगड़ा हुआ तो मेरे पिताजी ने एक लोगों से जमीन का विवाद था तो मेरे पिताजी ने कहा रिश्ते ले लेते हैं तो मेरी माताजी आर्डर प्रतिबंधात्मक आदेश लेना के समझदारी भरा कदम हो सकता है। इससे विवादित संपत्ति या स्थिति को स्टेटस को बनाए रखने में मदद मिलती है ताकि कोर्ट
की कारवाई के दौरान कोई नया बदलाव ना हो सके। लेने के लिए आपको का ध्यान रखना चाहिए। क्या आपके सिविल लॉयर आपके पास अगर सक्षम कोई भी चीज है तो उसको खराब नहीं करना चाहिए। पता नहीं क्या बोलने लगे। खैर मैं कॉन्टेक्स्ट भूल गया। मेरे स्कूल मेरी क्लास में आज भाई हैकर आए हुए हैं। हैकर अगला क्या है? सहसा विधत नकयाम अचानक से कोई कार्य नहीं करना चाहिए। अविवका परम मापदाम पदम अविवेक अज्ञानता। अचानक से बिना सोचे बिचारे किया गया काम बहुत बड़ी आपदा को निमंत्रित कर सकता है। वृणते ही विमस कारण स्वयमे संपदा जो
अह संपत्तियां होती हैं। वह गुणवान व्यक्तियों का स्वयं ही वरण कर लेती हैं। उसके लिए प्रयास नहीं करना चाहिए। बिना सोचे विचार कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। अज्ञान घोर संकट का स्थान है। सोच विचार कर कार्य करने वाले व्यक्ति का गुणों की लोभी अर्थात गुणों पर रीझने वाली संपत्तियां स्वयं वर्णन करती हैं। अर्थात ठीक उसी ठीक प्रकार से विचार कर किया गया कार्य ही फलीभूत होता है। अति शीघ्रता से बिनाचारे किए गए कार्य का परिणाम हमेशा अहितकर होता है। वज्रादप कठोराण मृदुन कुसुमादपि लोकोत्तराणा चेतस को न विद्यात मरहति महान मनुष्यों के मन वज्र से
भी अधिक कठिन तथा सामान्य स्थितियों में फूल से भी ज्यादा कोमल होने के कारण उन्हें कोई नहीं समझ सकता। देखो इनको ऐसे ही याद कर लेना जैसे यह हैं। इनको ऐसे ही याद कर लेना जैसे ये है। ठीक है? इसमें कोई बदलाव मत करना। ठीक है? जिसे भी मुझसे बात करनी है, वह आप अपनी परेशानी को मैसेज बॉक्स में लिख करके भेज दें। अ इससे क्या होगा कि मैं समय मिलते ही आपको रिप्लाई कर पाऊंगा। आपसे कॉल पर कनेक्ट होना मेरे लिए मुश्किल भरा है। क्योंकि मेरे पास बहुत सारे फोन कॉल्स आते हैं। इट इज़
नॉट अबाउट आई एम अ बिग टीचर। मैं बहुत बड़ा शिक्षक नहीं हूं। बट क्या है ना कि बेटा जब मेरे पास मेरा नंबर 10-15 बच्चों के पास था तो उनके फोन आते तो मैं सबसे बात कर लेता था। दिन भर में अगर मैं तुम्हें नंबर दिखा सकता तो दिखाता कम से कम ढाई से 3000 फोन 4000 फोन आते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश के लगभग सभी बच्चों के पास मेरा नंबर है। ठीक है? तो कोशिश करो कि कॉल मत करो। अपना मैसेज लिख करके अगर मुझे भेज दोगे तो मेरे लिए थोड़ी आसानी हो जाएगी कि मैं
तुमको रिप्लाई कर पाऊंगा समय पर। ठीक है? तो अपना मैसेज लिख के भेज देना। तो जब मुझे समय होगा मैं तुम्हें रिप्लाई कर दूंगा। बहुत सारे बच्चे मैसेज करते हैं कि सर आप बहुत घमंडी हो। यह है वो है। जब मेरी स्थिति में आओगे ना जब तुम्हारे पिताजी कभी-कभी कहते होंगे कि जब बाप बनोगे तब जानोगे। तो वही बात है। जब मेरी स्थिति में आओगे ना हजार काम रहेंगे। 12 घंटे का कंटेंट बना रहा। चार्ट वीडियो तुम्हारे रिकॉर्ड करनी रहेगी। सुबह उठना भी रहेगा, रात में सोना भी रहेगा, खाना भी खाना रहेगा। उसी में फोन
पे फोन, फोन पे फोन, फोन पे फोन तुम्हें भी समझ में आएगा। तो तुमको भी चार लोग घमंडी कहेंगे। चलो काम दुग्ध विप्रकर्ष लक्ष्मी काम दुग्ध विप्रकर्ष लक्ष्मी कीर्ति सुते दुष्कृतम यास्त शुद्ध शताम मातरम मंगल नाम धेनु धीरा सुनता वाचमाहु ठीक है सभी लोग सेशन को शेयर कर दो कब आएगा केक केक आ के चला गया मां का लाडला विद्यार्थी की सबसे जरूरी चीज है क्या है जो वाणी कामनाओं को पोषित करती है दरिद्रता को दूर भगाती है कीर्ति को जन्म देती है और दुष्कर्मों का नाश करती है वह वाणी पवित्र शांत और मंगल की
जन बुद्धिमान लोग उस सत्य प्रिय मधुर वाणी को दुख देने वाली गाय कहते हैं। व्यतिसति पदार्थ कोप हेतु व्यतिसति पदार्थ कोप हेतु न खलब रूपाधीन प्रीतय संसयते विकसति पतंगसदय पुंडरीकम द्रवति चहस्मा वदते चंद्रकांतः पदार्थों के आपसी व्यवहार में कोई ना कोई आंतरिक कारण होता है। प्रेम, आकर्षण या प्रतिक्रिया कभी भी केवल बाहरी कारणों पर निर्भर नहीं होता। तुमसे, तुम किसी से प्रेम केवल उसको सुंदर देख के नहीं करते हो। बहुत सारे उसमें और भी कारण होते हैं। सूर्य के उदय होते ही कमल खिल जाता है और चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रकांत मणि पिघलने लगती
है। समझ गए? सर मेरे पास आपका नंबर नहीं है। चलो बहुत अच्छी बात है। तुम Instagram पे मैसेज कर देना। Instagram की आईडी मैं किसी को भी दे सकता हूं। नंबर भी किसी को दे सकता हूं। ऐसा नहीं है कि नंबर किसी को मैं नहीं दे सकता। लेकिन फिर वही बात है। फोन नहीं उठेगा। मैसेज करोगे तो जैसे रात में क्या होता है जब मैं लेटता हूं तो मैं कोशिश करता हूं कि जितने मैसेज मेरे पास आए हो 250 300 400 मैसेजेस का मैं वॉइस मैसेज में रिप्लाई कर दूं। तो तुम जितना अच्छे से अपनी
परेशानी लिख सकते हो लिख दो। ठीक है? और ऋषि सर हिंदी वाला Telegram चैनल ज्वाइन कर लो। ऋषि सर हिंदी Telegram पे सर्च करोगे मिल जाएगा। और एक काम करना क्या करना है तुम्हें? इट्स वेरी सिंपल टू अंडरस्टैंड बेटा। सिलेबस बहुत बड़ा नहीं है। यू कैन हैंडल एनी सिचुएशन इन थ्री और फोर डेज विद हिंदी और इंग्लिश। बट तुम्हें वही बात है ना कि आपको उसको मैनेज करना आना चाहिए। आपको पता होना चाहिए। अब देखो तुम्हें नहीं पता है कि तीन दिन में कैसे हो जाएगा। बट मुझे पता है मैं 15, 16, 17 में तुम्हारी
पूरी हिंदी करवा दूंगा। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स साल भर पढ़े ही हो। इंग्लिश हो ही जाएगा। दो दिन की छुट्टी है निंदंतु नीति निपुणा यदि वास्तुंतु लक्ष्मी समाविस गच्छतम अववा मरणमस्तु युगरेवा न्यायात पथ प्रचलंत पदम धीरा चाहे नीति के ज्ञाता लोग मेरी निंदा करें या प्रशंसा चाहे लक्ष्मी आए या अपनी इच्छा से चली जाए चाहे मृत्यु आज ही आ जाए या युगों के बाद आए धीर व्यक्ति न्याय के मार्ग से एक कदम भी विचलित नहीं धीर व्यक्ति न्याय के मार्ग से एक कदम भी विचलित नहीं होते। प्री प्रीत सुचित पितम सुपुत्र य भरत हितमेक्ष ततलत्रम तन
मित्र पामति तनित तन मित्र तन मित्रम आपदी सुखे समक्रियम यत्रय जगति पूर्ण कृतो लभते क्या पढ़ पढ़ रहा हूं मैं। जो अपने सदाचार से पिता को प्रसन्न करता है वही सच्चा पुत्र है। जो अपने पति का ही हित चाहती है वही सच्ची स्त्री है। पत्नी है। जो विपत्ति और सुख दोनों में समान भाव से साथ निभाए वही सच्चा मित्र है। ऐसे पुत्र, पत्नी और मित्र यह तीनों संसार में केवल पुण्यवान लोगों को ही प्राप्त होते हैं। कल वाली कुंजी बैच की क्लास में कौन-कौन था? कल वाली कुंजी बैच की क्लास में कौन-कौन था? मेरा बनाए
सन से बेकार तेरी आंखों के कुछ ऋषयो राक्षसी माहु वाच उन्मत दृप्त ऋषयो राक्षसी माहु ऋषियों ने उन्मत्त और दर्प युक्त वाणी को राक्षसी कहा है। सयोनिह सर्व वैराणा वह योनि है। वह जन्मदात्री है। सभी प्रकार के झगड़ों की साही लोकस्य निरति और वही संसार के विनाश का कारण भी बनती है। ठीक है? चलो। अब महामना मालवीय देख लेते हैं। महामना मालवीय पूरे पाठ के लिए महामना मालवीय के लिए संदर्भ क्या होगा? देखो इसमें एक श्लोक भी है। एक श्लोक के लिए श्लोक हो जाएगा। प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक संस्कृत दिग्दर्शिका के महामना मालवीय
नमक पाठ से उद्रित है। महामनसिना मदन मोहन मालवीयस जन्म प्रयागे प्रतिष्ठित परिवार भवत। अस पिता पंडित ब्रजनाथ मालवीय महामनसिना महान मनस्वी मदन मोहन मालवीय का जन्म प्रयाग में प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। अस पिता इनके पिता पंडित बृजनाथ मालवीय संस्कृत से सम्मान्य विद्वान आसीत संस्कृत के बहुत सम्मानित विद्वान थे। अयं इन्होंने प्रयाग प्रयाग में एव ही संस्कृत पाठशाला संस्कृत पाठशाला में राजकीय विद्यालय राजकीय विद्यालय में म्योर सेंट्रल महाविद्यालय च और म्योर सेंट्रल महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त शिक्षा प्राप्त करके अत्रैव यहीं पर राजकीय विद्यालय राजकीय विद्यालय में अध्यापन आरबधमान पढ़ाना शुरू कर दिया। सभी लोग एक
बार कमेंट करो कितने लोग क्लास में हैं। सभी लोग एक बार कमेंट करेंगे। सभी लोग एक बार दिल रिएक्ट करेंगे। मैं जानना चाहता हूं कितने लोग क्लास में हैं। मैं सामने केवल कमेंट सेक्शन खोल के रखता हूं। मुझे ना तो लाइक दिखता है, ना तो लाइक दिखता है। मैं मैं देखना ही नहीं चाहता। इट इज माय काइंड ऑफ स्ट्रेटजी यू कैन से बट मैं नहीं देखना चाहता उस चीज को तो या तो मैं अपने मोबाइल में देख लेता हूं या तो तुम लोग कमेंट करते रहते हो जब तुम्हारा कमेंट तेज चलता रहता है तो मैं
कॉन्फिडेंट रहता हूं कि बच्चे हैं अभी आपका जन्म 1975 जब भी खाली टाइम होता है अभी से मैं नहीं कितना बच्चा लाइव दिखा रहा है सेशन को लाइक कर लो बेटा अभी आज की क्लास का लाइक टारगेट 1 लाख था। सेशन को लाइक कर लो सभी लोग। महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म प्रयाग के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनके पिता पंडित बृजनाथ मालवीय संस्कृत के सम्माननीय विद्वान थे। इन्होंने प्रयाग में ही संस्कृत पाठशाला राजकीय विश्वविद्यालय तथा मेर सेंटर महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर यहीं राजकीय विद्यालय में अध्यापन प्रारंभ कर दिया। ठीक है? युवक
मालवीय युवक मालवीय स्वकीयन प्रभावपूर्ण भाषण अपने प्रभावपूर्ण भाषण से जना नाम मनास अमोहयत लोगों के मन को मोह लिया। युवा मालवीय ने अपने प्रभावपूर्ण भाषण से लोगों के मन को मोह लिया। अतः इसलिए अस सुहृददा इनके जो सुहृद थे इनके चाहने वाले थे इनके शुभचिंतक थे। तम इन्हें प्राड विवाहक पद्म वकालत की पदवी प्राप्त करके देशस देश की श्रेष्ठतम सेवाम करतुम देश की श्रेष्ठ सेवा करने के लिए प्रेरित प्रेरित किया। तदनुसारम उसके अनुसार अयम इन्होंने विधि परीक्षा उत्तीर्ण विधि की परीक्षा उत्तीर्ण करके प्रयागस्थ प्रयाग में स्थित उच्च न्यायालय उच्च न्यायालय में प्राड विवाहक कर्म करतुम
आरभत प्राड विवाहक वकालत का कर्म करना प्रारंभ किया विदेह कानून के प्रकष्ट ज्ञानेन कानून के बहुत बढ़िया ज्ञान के कारण मधुर आलापेन और मधुर आलाप के कारण उदार व्यवहारेण च और उदार व्यवहार के कारण अयम इन्होंने शीघ्रमेव यह इन्हें शीघ्र मेंवाव मित्रणा शीघ्र ही मित्रों एवं न्यायाधीश मित्रों एवं न्यायाधीशों के सम्मान भाजनम सम्मान के पात्र बन गए। युवा मालवीय ने अपने प्रभावपूर्ण भाषण से लोगों का मन मोह लिया। अतः इनके शुभ चिंतकों ने इन्हें अधिवक्ता की पदवी प्राप्त कर राष्ट्र की श्रेष्ठतम सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उसी के अनुसार इन्होंने कानून की परीक्षा उत्तीर्ण
कर प्रयाग स्थित उच्च न्यायालय में वकालत प्रारंभ कर दी। विधि के उत्कृष्ट ज्ञान, मृद वार्तालाप तथा अपने उदार व्यवहार से शीघ्र ही मित्रों एवं न्यायाधीशों के सम्मान के पात्र बन गए। महापुरुष महापुरुष लौकिक प्रलोभने सुबद्धा महान जो लोग होते हैं वह लौकिक प्रलोभनों में बंधकर नियत लक्षण कदापि भ्रश्यती। अपने निश्चित किए गए लक्ष्य को कभी नहीं भूलते हैं। देश सेवा अनुरक्तो युवा देश सेवा अनुरक्तोम युवा राष्ट्र सेवा में लीन यह युवक उच्च न्यायालय से परिधव स्थनोत उच्च न्यायालय की सीमा में नहीं बंध सका। पंडित मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय प्रवृत्त भी पंडित मोतीलाल नेहरू और
लाला लाजपत राय जैसे अन्य राष्ट्र नायक अन्य राष्ट्र नायकों के सहसा साथ सोपी देशस्य यह भी देशस्य देश की स्वतंत्र संग्राम अवतीर्ण देश के स्वतंत्रता संग्राम में उतर पड़े। किस में उतर पड़े? देश के स्वतंत्रता संग्राम में उतर पड़े। सर कल कितने बजे क्लास स्टार्ट करेंगे? बेटा कल मुझे लगता है मुकेश सर ने बताया नहीं था कल फिजिक्स, केमिस्ट्री और इंग्लिश की क्लास है। मेरी क्लास 15, 16, 17 तीन दिन चलेगी। 15, 16, 17 तीन दिन चलेगी मेरी क्लास। ठीक है? इन तीन दिनों में पूरी हिंदी पढ़ाऊंगा। तुम्हें कोई और देखे तो जलता है दिल
बड़ी मुश्किलों से फिर संभलता है दिल क्या क्या जतन करते हैं तुम्हें क्या पता ये बेकरार कितना ठीक है। महापुरुष सांसारिक प्रलोभनों में फंसकर निश्चित लक्ष्य से कदाप विचलित नहीं होते। राष्ट्र सेवा में लीन यह युवक न्यायालय की सीमा में नहीं बन सका। पंडित मोतीलाल नेहरू लाजपत राय जैसे अन्य राष्ट्रनायकों सहित यह भी देश के स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। ठीक है? देहल्याम दिल्ली में देहल्याम दिल्ली में कांग्रेस त्रयोवंसति तमे कांग्रेस अधिवेशन त्रयोवंस तमे 23वें कांग्रेस के के 23वें अधिवेशन में अयम इन्होंने अध्यक्ष पदम अलंकृतवान अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। रोलेट एक्ट इत्याख्यस विरोधस्य रोलेट
एक्ट कानून के विरोध के ओजस्वी भाषणम श्रुरत्वा ओजस्वी भाषण को सुनकर आंग्ल शासका अंग्रेज शासक भीताज जाता भयभीत उठ चुके हो उठे इन्होंने रोलेट एक्ट के आने पर एक भाषण दिया इन्होंने रोलेट एक्ट के आने पर एक भाषण दिया और उस भाषण को सुनकर अंग्रेज शासक भयभीत हो गए डर गए उनका चड्डी गीला हो गया। बहुवारम कारागारे निक्षेपो बहुवार बहुत बार कारागारे कारागार में कारागार में जेल में सप्तमी एकवचन का रूप है निक्षिपो अपि फेंके जाने पर भी देश सेवाव्रतम अयं वीर यह वीर देश सेवाव्रतम नात्यजत देश के सेवा का व्रत नहीं छोड़ा इन्होंने इन्होंने
देश सेवा का व्रत नहीं छोड़ा ठीक है। हिंदी, संस्कृत आंग्ल भाषासु हिंदी, संस्कृत और आंग्ल भाषा में अस इनका समाना अधिकारासी समान अधिकार था। इनको हिंदी, अंग्रेजी और कोई है यहां पे सर 2 मिलियन हो गए। 2 मिलियन हो भी गए बेटा। उसका केक भी कट गया। तुम कहां थे? ठीक है। तो भैया इनको हिंदी संस्कृत और अंग्रेजी बराबर आती थी। बहुत ज्ञानी आदमी थे। हिंदी हिंदू हिंदुस्तान उत्थानाय हिंदी हिंदी के उत्थान के लिए हिंदुओं के उत्थान के लिए और हिंदुस्तान के उत्थान के लिए अयम इन्होंने निरंतरम प्रयत्नम अकरोत लगातार प्रयत्न किया। शिक्षाव शिक्षा से
ही देश में समाजेचा और समाज में नवीन प्रकाश उदयति नया प्रकाश उदय होता है। अतः इसलिए श्री मालवीय श्री मालवीय ने वाराणस्याम वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थापनम क्रोधत काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। अस निर्माण इसके निर्माण में अयम इन्होंने जनान लोगों से धनम धन अयाचत मांगा जनाश और लोगों ने महतस्मिन ज्ञान यज्ञ इस महान ज्ञान यज्ञ में प्रभुतम धनम अस्मई प्रायक्षण बहुत अधिक धन प्रभुतम धनम बहुत अधिक धन अस्मय इनको प्रायक्षण दिया इन्हें हिंदी संस्कृत एवं अंग्रेजी भाषा पर समान अधिकार था। इन्होंने हिंदी हिंदू एवं हिंदुस्तान के उत्थान के लिए निरंतरम प्रयत्न किया।
शिक्षा से ही राष्ट्र तथा समाज में नव प्रकाश का उदय होता है। इसलिए श्री मालवीय जी ने वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके निर्माण के लिए इन्होंने लोगों से धन मांगा तथा इस महान ज्ञान यज्ञ में लोगों ने इन्हें पर्याप्त धन दिया भी। क्या किया सर? 18 को कितने बजे क्लास होगी? 18 को क्लास होगी 4 या 5:00 बजे। क्लास लग चैनल सब्सक्राइब कर लो यार। नोटिफिकेशन ऑन कर लो। दो-तीन दिन की तो बात है। नोटिफिकेशन ऑन कर लो। चैनल सब्सक्राइब कर लो। तो जब भी क्लास लगेगी आ जाना। अब तो देखो
10:00 बज गया। मैं थोड़ा बगल में सर की क्लास में चला जाऊं। सुबह से नहीं गया। आता हूं। चलो चलो बेटा तेन निर्मितोयं विशाला विश्वविद्यालय गुलशन सर हमारे क्लास 10थ के बच्चों को पढ़ाते आपके छोटे भाई बहन जो 10थ में हो अगर उनको अपनी पढ़ाई में कोई दिक्कत आ रही है बेटा तो यूपी बोर्ड हाई स्कूल विद्याल उनको सजेस्ट करो। गुलशन सर हिंदी पढ़ा रहे हैं वहां पे और बहुत अच्छी पढ़ा रहे हैं। तो इस बार वहां भी इतिहास बनते देखोगे। इस बार यहां भी इतिहास बनते देखोगे। 3 लाख बच्चा तो ऐसे ही खड़ा होगा
यहां पे 4 लाख बच्चा क्या ही कहें उसके लिए। तेन निर्मितोयं उससे निर्मित विशाल विश्वविद्यालय विशाल विश्वविद्यालय। भारतीय नाम भारतीयों की दानशीलता या दानशीलता का श्री मालवीयस यशस और श्री मालवीय के यश की प्रतिमूर्ति विभाति उनकी प्रतिमूर्ति है या प्रतिमूर्ति के रूप में स्थापित है। प्रतिमूर्ति के रूप में शोभायमान है। ठीक है? साधारण स्थितोप साधारण स्थितो स्थिति कोप जना महतोत्साहन मनस्वतया पुरुष असाधारण कार्य करक्षमा विद्वानों में श्रेष्ठ इति दर्शयत मनीष मूर्धन्या मालवीय विद्वानों में श्रेष्ठ मालवीय जी ने यह दिखा दिया कि साधारण स्थिति वाला भी महान उत्साह विचारशीलता तथा पुरुषार्थ से असाधारण कार्य करने में
सक्षम होता है। ठीक है? एथव जनास्त महामनापाधना अभिधातु अभिधातुम आरधवता इसलिए लोगों ने इन्हें महामना उपाधि से संबोधित करना आरंभ कर दिया। ठीक है महामना कितने लोग अच्छा चलो खंड काव्य के लिए एक बार कमेंट करो। खंड काव्य के लिए एक बार कमेंट करो। कितने लोग खंड काव्य पढ़ना चाहते हैं? बताओ। कितने लोग खंड काव्य पढ़ना चाहते हैं? बताओ। थैंक यू भाई। महामना विद्वान वक्ता धार्मिकों नेता महामना मालवीय विद्वान वक्ता थे। धार्मिक नेता थे। पटु पत्रकार बहुत विद्वान पत्रकार थे। परमस्य सर्वोच्च गुणा लेकिन इनका सबसे बड़ा गुण जन सेवासीत लोगों की सेवा करना था। था
यत्र कुत्राप जहां कहीं भी अयं ये जनान दुखितान पीड्यमान शपसत लोगों को दुखी और पीड़ित देखते थे सभी लोग दिल रिएक्ट करो जिन्हें खंड काव्य पढ़ना हो तत्र शीघ्र में उपस्थित सर्वविधि सहाय चक्रोत प्राण सेवा अस स्वभाव एवासीत अस्स्मकम मध्य अनुपस्थितोपि महामना मालवीय स्वयशु प्रतिमूर्ति रूपेण प्रकाशम वितरण अंधे तमस नमग्नान जनान सन्मार्गम दर्शन स्थाने स्थाने जने जने उपस्थित एव स्थान स्थान पर जन-जन में उपस्थित होकर आज भी लोगों को गहन अंधकार में डूबे हुए लोगों को रास्ता दिखाते हैं। ठीक है? जयंतते महाभागा जन सेवा परायण। वह लोग हमेशा जीते रहते हैं जो लोगों की सेवा
में लगे रहते हैं। जना मृत्यु भयम नास्ति उनको जीवन और मृत्यु का डर नहीं होता। अच्छा एक बात बताओ मैं पीडीएफ दे दूंगा यार। खंड काव्य पढ़ाने का कोई मतलब है नहीं। दो-दो सवाल हैं उसके मैं तुमको पीडीएफ दे दूंगा। टेलीग्राम में अभी पीडीएफ पहुंच जाएगी खंड काव्य वाली अलग से। ठीक है? रस छंद अलंकार वाला जो छह नंबर है देखो खंड काव्य तो पांच ही नंबर का आता है। रस छंद अलंकार वाला छह नंबर मैं चाहता हूं पढ़ा दूं वो नहीं छूटना चाहिए। वो नहीं छूटना चाहिए। ठीक है? जो लोग अपना जीवन जल कल्याण
के लिए समर्पित कर देते हैं उनकी कीर्ति मृत्यु के बाद भी जीवित रहती है। पंचशील सिद्धांत पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। जितना पढ़ा दिया उतना पढ़ लो। रस छंद अलंकार थोड़ा देख लेते हैं। काव्य सौंदर्य के तत्व की बात कर लें। रस चंद अलंकार मैं तुम्हें पीडीएफ दे दूंगा। मुक्ति हां सबको दे दूंगा। सबको दे दूंगा। मैं तुम्हें पीडीएफ अभी भेज देता हूं। क्लास जैसे ही खत्म होगी सबसे पहले मैं खंड काव्य की पीडीएफ भेजूंगा। 100% भेजूंगा। चलो सबसे पहले रस पढ़ेंगे। तुम्हारे सिलेबस में पांच रस हैं। श्रृंगार रस, हास्य रस, करुण रस, वीर
रस, शांत रस। करुण- अब सवाल कैसे आता है? देखो यहां पर यहां पर मैंने स्क्रीनशॉट तुम्हारे पेपर का लगाया हुआ है। प्रश्न उत्तर संख्या 12 क वाला क्या है? करुण रस अथवा शांत रस का स्थायी भाव के साथ उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए। चाहे उदाहरण लिख दो, स्थायी भाव के साथ चाहे परिभाषा लिख दो। एक ही चीज लिखनी है। फिर भी तुम्हें इन सब का स्थायी भाव पता होना चाहिए। क्या तुम लोग कमेंट करके बता सकते हो कि श्रृंगार रस का स्थायी भाव क्या होता है? स्थायी भाव श्रृंगार रस का क्या होता है? मुझे बता सकते
हो। श्रृंगार रस का स्थायी भाव क्या होता है? श्रृंगार रस का स्थायी भाव क्या होता है? और हास्य रस का स्थायी भाव, करुण रस का, वीर रस का, शांत रस का सबका स्थायी भाव कमेंट करके मुझे बताओ। सबका स्थाई भाव सर गुलशन सर की क्लास में गए थे। हां गया था। आपके जो भी छोटे भाई बहन हो 10th में पढ़ते हो आप यूपी बोर्ड हाई स्कूल विद्या कुल पर भेजिए उन्हें। ठीक है? हां रदी होता है। क्या भाई? यही दिखाने आए थे। तुम तो यार आजकल वीडियो बना रहे भाई भूतत वाला है भाई हमारा एक
चैनल है बच्चों का मतलब हमारे एक कंप्यूटर महोदय का कंप्यूटर महोदय टेक्निकल हेड का हमारे रते की राइट्स रते की वाणी रते की वाणी क्या नाम है स्पेलिंग बताओ आर आई ड ये है जाके देखना भूतों की बढ़िया-बढ़िया कहानी बनाता है बहुत प्यारा बनाता है तुम वहां से एडिटिंग भी सीख सकते हो से बहुत कम रिसोर्सेज के साथ एडिटिंग की जा सकती है। गरीब है ना बनाता है तो जाके एक बार सर्च करना और सब्सक्राइब कर लेना। ठीक है? ठीक है। क्या ठीक ठीक है। चलो तो रति होता है। स्थाई भाव इसका। हास्य रस का
हास होता है बेटा। करुण रस का शोक होता है। वीर रस का वीर रस का उत्साह होता है। और शांत रस का निर्वेद होता है। ये स्थाई भाव याद कर लो। बस तुम्हारे रस जान लो तैयार। अब तुम कहोगे कैसे? अब तुम कहोगे कैसे? अब तुम कहोगे कैसे? अब तुम कहोगे कैसे? तो अब देखो आओ यहां पर श्रृंगार रस है। अब देखो परिभाषा देखो। रति नामक स्थायी भाव जब विभा अनुभाव और संचारी भाव से परिपूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को श्रृंगार रस कहते हैं। चलो हम लोग स्थायी भाव बदलते हैं।
शोक नामक स्थायी भाव जब विभा अनुभाव और संचारी भाव से परिपूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को करुण रस कहते हैं। परिभाषा बन गई। हम एक और बदलते हैं। निर्वेद कर देते हैं। निर्वेद नामक स्थायी भाव जो विभा संचारी भाव से पूर्ण रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को शांत रस कहते हैं। उसके बाद चलो एक और बदल देते हैं। हास नामक स्थायी भाव जो विभवान भाव संचारी भाव से परिपूर्ण होकर रस की निष्पत्ति करता है तो उसे हास्य रस कहते हैं। ठीक है? देखो तुम्हारी परिभाषा तैयार हो गई।
अब केवल उदाहरण याद करना है। जैसे अब तुम्हारी किताब से उदाहरण बताऊंगा। तुम्हारी किताब के बाहर से नहीं बताऊंगा कॉपी कैसे लिखें। 15 तारीख को 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे वाली जो क्लास आएगी उसमें मैं बताऊंगा कॉपी कैसे लिखें। कॉपी कैसे लिखें। 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे वाली क्लास में मैं आपको बताऊंगा कॉपी कैसे लिखें। सभी लोग तैयार रहिएगा। 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे वाली क्लास। रति नामक स्थायी भाव जब विभा भाव संचारी भाव से परिपूर्ण होता है तो रस की निष्पत्ति करता है। उस रस को श्रृंगार रस कहते हैं। श्रृंगार रस
को रसों का राजा कहा जाता है। श्रृंगार रस दो प्रकार का होता है। संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार। श्रृंगार रस दो प्रकार का होता है। संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार। उदाहरण बता देता हूं तुम्हें। संयोग श्रृंगार का उदाहरण क्या है? जब नायक नायिका का मिलन होता है। जैसे आज किस डे है? तो आज दो लोग मिले होंगे, एक दूसरे से मिले होंगे। तो आज मिलने को कहेंगे संयोग श्रृंगार। अब वहां के लिए तुम्हारे श्रद्धा और मनुपाठ से एक लाइन है। कौन हो तुम वसंत के दूत बृहस्पति झड़ में अति सुकुमार घन तिमिर में चपला की
रेख तपन में शीतल मन गैर हग डे को मिले थे ये लोग। श्रद्धा और मनु हग डे को मिले थे। नहीं प्रॉमिस डे को मिले थे ये लोग। और प्रॉमिस किया मनु ने श्रद्धा से कि मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। मैं श्रद्धा नहीं मनु से। ठीक है? वियोग श्रृंगार जब नायक नायिका का अलग हो जाए ब्रेकअप हो जाए जैसे तुमको तुमने कहा कि कुछ तुमने मैसेज किया उल्टा सीधा तुम ब्लॉक हो गए तो वहां वियोग पैदा हो गया अब वियोग पैदा हुआ तो मेरे प्यारे नवजलत से कंज से नेत्र वाले पवन दूतिका से है जाके आए
नमवन से अब क्या हुआ कृष्ण जी चले गए और भैया कृष्ण जी ने Instagram WhatsApp स्नैप चैट Telegram Twitter Facebook सब जगह ब्लॉक कर दिया राधा जी को अब राधा जी दुखी हो गई मेरे प्यारे नवजलत से कंज से नेत्र वाले जाके आए नमो वन से और ना भेजा संदेशा कोई मैसेज मैं नहीं भेजा मैं रो-रो के प्रिय ब्रह से बावली हो रही हूं जाके मेरी शब्द कथा श्याम को तू सुना दे पीडीएफ के चक्कर में तुम लोग बहुत रहते हो क्लास देख लेना पहले पूरी पीडीएफ 12 घंटे बाद भेजूंगा पीडीएफ 12 घंटे बाद भेजूंगा
कि जब तुम पूरी क्लास देख लो तब सभी लोग सेशन को लाइक कर लो बेटा जितने लोग लाइव हैं और एक बार अंतिम बार फिर से तुमसे कह रहा हूं कि सभी लोग अपने WhatsApp की स्टेटस पर लगा दो इस बच्चे ने तो हेलो पता नहीं क्या बेवकूफी कर रहा है। एक लड़का इतनी देर से कॉल कर रहा है। ठीक है? जाके मेरी शब्द दुख कथा श्याम को तू सुना दे। हास्य रस की बात कर लेते हैं। हास्य रस हास्य नामक स्थायी भाव जब विभा भाव संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है
तो उसे हास्य रस कहते हैं। हाथी जैसा देह, गैंडे जैसी चाल, खरबूजे सी खोपड़ी, तरबूजे से गाल। पीडीएफ 12 घंटे बाद भेजूंगा। 12 घंटे नेट 12 घंटे बाद पीडीएफ भेजूंगा। हेलो गधे हैं। बढ़ाई तो करनी नहीं है। बेवकूफी कर रहे हैं। चलो करुण रस का देखते हैं। शोक नामक स्थायी भाव जब विभा और संचारी भाव से पूर्ण रस की निष्पत्ति करता है तो उसे क्या कहते हैं बेटा? उसे करुण रस कहते हैं। हे आर्य रहा क्या? अब यह देखो यह तुम्हारे कैकई के अनुताप से है। यह तुम्हारे कैकई के अनुताप से हे आर्य रहा क्या
भरत अभिषे तब भी मिल गया आकंटक राज उसे जब तब भी पाया तुमने तरले अरेण्य बसेरा रह गया अभिषित शेष लपिका मेरा। वीर रस क्या होगा? उत्साह नामक स्थायी भाव जब भवान भाव और संचारी भाव से परिपूर्ण होकर रस की निष्पत्ति करता है तो उसे वीर रस कहते हैं। यहां पर होगा साझ चतुरंग सैयन अंग में उमंग धारी सरजा शिवाजी जंग जीतन चलत हैं। यहां पर तुम बुंदेले हर बोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। यह भी कर सकते हो। यह भी कर सकते हो। ठीक है?
आ लक्ष्य बड़ा है। हां। विद्या कुल YouTube चैनल केवल इतिहास बनाने के लिए है। सबसे ज्यादा बच्चे पढ़ाता हूं, पढ़ाता रहूंगा जब तक तुम्हें जरूरत होगी मेरी। जिस दिन तुमको जरूरत नहीं होगी, उस दिन मैं नहीं पढ़ा पढ़ाना बंद कर मतलब तुम मतलब यूपी बोर्ड के बच्चों को शांत रस निर्वेद नामक स्थायी भाव जो विभा भाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को शांत रस कहते हैं। माटी कहे कुमार से तू क्या रंदे मोहे एक दिन ऐसा आएगा मैं रदूंगी तोए। माटी कहे कुमार से तू क्या रंदे
मोहे एक दिन ऐसा आएगा जब मैं रदूंगी तोए ठीक है चलो अब मुझे क्लास में आओ एक बार सभी लोग मुझे कमेंट करके बताओ बेटा कि अगर रस से कोई सवाल आएगा तो कर लोगे अगर रस से कोई सवाल आएगा तो कर लोगे एक बार मुझे कमेंट करके सभी लोग दिल रिएक्ट करके बताएंगे अब रस से कोई सवाल आएगा तो कर लोगे इसमें ठीक है चलो हो जाएगा हां चलो अब आ जाते हैं बेटा छंद पर छंद तुम्हारे सिलेबस में चार हैं चौपाई दोहा सोरठा और कुंडलिया। अब देखो इनसे सवाल कैसे आता है। चौपाई अथवा
देखो इनसे सवाल कैसे आता है। चौपाई अथवा दोहा छंद का मात्रा सहित लक्षण तथा उदाहरण लिखिए। अब देखो ऐसे सवाल आता है। इसमें से कोई एक लिखना होता है। तो देखते हैं परिभाषा क्या है? सबसे पहले चौपाई छंद। यह एक सम मात्रिक छंद है। मतलब इसके सभी चरणों में समान मात्रा होती है। चार चरण होते हैं इसके। पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा। इसके हर एक चरण में 16 मात्राएं होती हैं। हर चरण में 16 मात्रा होगी। छोटा आ छोटी इ छोटा उ ऋ की एक मात्रा बड़ा बड़ी ई बड़ा ऊ ए ऐ ओ औ की दो
मात्रा। ठीक है? तुक पहले चरण का दूसरे चरण से होता है। तुक यानी तुकांत एक जैसे शब्द जैसे देखो ये पहला चरण ये दूसरा चरण ये तीसरा ये चौथा। तो देखो यहां समझावा है। यहां नावा तो आवा आवा आ रहा है। यह तुकांत है और यत यानी विराम रुकना। यति माने होता है बेटा विराम। यह क्या है? बदतमीज आदमी बीच में आ गया। यति माने क्या होता है बेटा? विराम। मतलब तुम्हें हर एक चरण को पढ़ने के बाद रुकना है। ठीक है? ये इसकी परफेक्ट परिभाषा है। यही परिभाषा तुम्हें याद करनी है। यही परिभाषा तुम्हें
याद करनी है। सभी लोग याद कर लो। चलो। यही विधि राम सबह समझावा गुरु पद पदुम हरस सिर नावा गणपति गौरी गिरी सुमनाई चले आशीष पाई रघुराई अब मात्रा लगा के देखते हैं। अब मात्रा लगा के देखते हैं बेटा। मात्रा लगा के देखते हैं। यह विधि। तो य छोटा आ है। छोटी इ है। छोटी इ छोटी इ। बड़ा आ। छोटा आ। छोटा आ छोटा आ छोटी इ छोटा आ छोटा ऊ बड़ा आ बड़ा आ छोटा ऊ छोटा ऊ छोटा छोटा आ छोटा आ छोटा आ छोटा ऊ छोटा आ छोटा आ छोटा आ छोटी इ छोटी
इ छोटा ऊ बड़ा आ बड़ा आ अब देखो 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 यहां तक 16 मात्रा हो गई 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 यहां भी 16 हो गई हर चरण में 16 16 मात्रा यही परिभाषा हो जाएगी बेटा यही परिभाषा हो जाएगी तुम्हारी। ठीक है? यही परिभाषा तुम्हारी हो जाएगी। सभी लोग ध्यान दो। अगला सवाल दोहा छंद क्या होता है? तमाम ठीक है? जब तुम पेपर देने जाओगे तो मैं तुम्हें आशीर्वाद दे के
भेजूंगा। परेशान मत हो। यह एक अर्ध सम मात्रिक छंद है दोहे में। इसमें चार शरण होते हैं। इसका स्क्रीनशॉट ले लो। देखो तीन छंद तैयार कर लो। मैं तुम्हें बता रहा हूं। देखो मैं तुम्हें एक बात बताता हूं। मान लो इस तरफ चौपाई यहां लिखी है। यहां दोहा लिखा है। यहां सोरठा लिखा है। ठीक है? अगर तुम्हें ये तैयार है तीनों तो इधर अगर कुंडलियां आ भी जाएगा तो कोई दिक्कत नहीं होगी। तो तीन तैयार कर लो। चौपाई, दोहा, सोरठा। पढ़ा, तो मैं तुम्हें कुंडलिया भी दूंगा, लेकिन तैयार तीन ही करना। दोहा क्या होता है?
यह अर्ध समम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके सम चरणों दूसरा और चौथा में 11-1 मात्राएं। विषम चरण पहला और तीसरा में 13 मात्राएं होती हैं। तुक दूसरे चरण का चौथे चरण से यति हर एक चरण के अंत में होती है। उदाहरण कारज धीरे होत है काहे होत अधीर। समय पाए तरवर फरे केतक सींचो नीर। ठीक है? रस्मरथी को कब पढ़ाओगे? रस्मरथी तुम्हें Telegram में भेज दूंगा। ऋषि सर ऋषि सर हिंदी को सब्सक्राइब कर लो। सभी लोग इस टेलीग्राम चैनल को ऋषि सर हिंदी पर जुड़ जाओ। ऋषि सर हिंदी पर जुड़ जाओ
सभी लोग जाके Telegram में और वहां पर तुम्हें पीडीएफ मिल जाएगी। वहां पर तुम्हें पीडीएफ मिल जाएगी। समझ लो इस बात को। सभी लोग इस बात को बहुत ध्यान से समझ लो। ठीक है। चलो। कारज धीरे होत है काहे होत अधीर समय पाए तरवर फरे केतक सींचो नीर सोरठा छंद की बात करते हैं। यह अर्ध सम मात्रिक छंद है। यह दोहा के ठीक उल्टा होता है। इसमें भी चार चरण होते हैं। दोहा के ठीक विपरीत सोरठा के सम चरणों दूसरा और चौथा में 13 मात्राएं तथा विषम चरणों पहला और तीसरा में 11-1 मात्राएं होती हैं।
अच्छा इसमें मात्रा लगाना तुम्हें नहीं बताया। देखो अब इसमें मात्रा कैसे लगाओगे? उदाहरण में कार्य धीरे होत है अब इसमें देखो ये पहला चरण ये दूसरा चरण ये तीसरा चरण ये चौथा चरण अब इसका दूसरा और चौथा सम चरण यानी समग गिनती वाला चरण सम चरणों में 11 11 मात्राएं है और एक और तीन जो विषम चरण है इसमें 13 है गिन लो 2 4 2 6 2 8 2 10 12 11 12 13 काहे होत अधीर 2 4 2 6 2 8 2 10 11 समय पाय तरुवर फरे 1 2 3 4 5 6
7 8 9 10 11 12 13 के तक सींचो नीर 2 4 2 6 2 8 2 10 11 ठीक है। 11 होता है। ठीक चलो मेरी आवाज आ रही है सभी को? ठीक है। 12 घंटे कुछ नहीं है यार। तुम्हारे लिए तो मैं 18 घंटे क्लास ले सकता हूं। 12 घंटे क्या होता है? अब यह तो YouTube की टाइम लिमिट है। मैं क्या कर सकता हूं? YouTube कहता है कि भाई 12 घंटे से ज्यादा पढ़ाओ। एक बार तो हमने 25 घंटे पढ़ा दिया था। तुम्हारे पिछले साल तुम्हारे सीनियर्स जानते हैं। लेकिन वीडियो ही गायब
हो गई। ठीक है? तुक प्रथम एवं तृतीय चरण में होता है। जे सुमिरत सिद्ध होए गणनायक करिव वदन करहु अनुग्रह सोए बुद्धि राशि शुभ गुण सदन। अब इसका भी एक उदाहरण याद रख लेना। अब ये पहला चरण या दूसरा चरण। ठीक है? ये पहला चरण ये दूसरा ये तीसरा ये चौथा अब ये दोहे का उल्टा होगा तो दूसरे चौथे में 13 13 मात्रा हो जाएगी और पहले और तीसरे में 11 11 हो जाएगी अगर तुम ध्यान से देखो तो दोहे में इधर 13 थी और उधर 11 थी सोठा में इधर 11 उधर 13 हो गई
अब गिन लो जिहहि सुमिरत सिद्धि होए 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 गणनायक करिवर बदन 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 ठीक है ऐसे करऊ अनुग्रह अनुग्रह अब आधी मात्रा है तो मात्रा भार पहले आ जाएगा सो पहले या बाद में कभी मात्रा भार लगा दो आधी मात्रा होगी तो आगे पीछे मात्रा भार जाएगा दो मात्रा हो जाएगी ठीक है और एक बात और तुम लोगों में से बहुत से बच्चे कहते हैं सर मात्रा लगानी पड़ेगी बेटा मात्रा सहित लिखा क्या हुआ है मात्रा
सहित तो मात्रा लगानी है अगर मात्रा नहीं लगाओगे तो नंबर काट लेगा अगर अगर तुम्हें दोहा याद है तो दोहे को उल्टा करके लिख सकते हो। अगर तुम्हें दोहा याद है तो दोहे को उल्टा करके दोहे का उल्टा ही तो सोरठा होता है। एग्जजेक्टली उल्टा होता है। जैसे एक दोहा है। श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधार बरनहु रघुवर विमल जस जो दायक फल चार। अब इसको दोहे के रूप में लिखना है तो लिख दो। निज मन मुकुर सुधार श्री गुरु चरण सरोज रज ऐसे लिख सकते हो। ठीक है। एक शायरी सुना दूं।
शायरी खोजनी पड़ेगी यार। शायरी मुझे याद नहीं रहती। हमने कब चाहा कि वो शख्स हमारा हो जाए। हमने कब चाहा कि वह शख्स हमारा हो जाए। इतना दिख जाए कि आंखों का सहारा हो जाए। इतना दिख दिख जाए कि आंखों का गुजारा हो जाए। हम जिसे पास बिठा लें। हम जिसे प्यास हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है। हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है। तुम जिसे हाथ लगा दो वो तुम्हारा हो जाए। तुमको लगता है तुम जीत गए हो मुझसे। है यही बात तो फिर खेल दोबारा हो जाए। फिर से
सुना दूं या अच्छे से पढ़ देता हूं। हमने कब चाहा कि वो शख्स हमारा हो जाए। हमने कब चाहा कि वो शख्स हमारा हो जाए। इतना दिख जाए कि आंखों का गुजारा हो जाए। हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है। हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है। तुम जिसे हाथ लगा दो वो तुम्हारा हो जाए। तुमको लगता है तुम कि तुम जीत गए हो मुझसे। तुमको लगता है कि तुम जीत गए हो मुझसे। है यही बात तो फिर खेल दोबारा हो जाए। ठीक है? 15 16 17 15 तारीख को सुबह 6:00
बजे आ जाना। बाकी क्लासेस वहीं पता चल जाएंगी। चलो आगे बढ़ते हैं। सोठा भी हो गया। कुंडलिया भी देख लो। कुंडलिया विषम मात्रिक छंद है। इसमें छह चरण होते हैं। 1 2 3 4 5 6 शुरू के दो चरण दोहा और बाद के चार चरण रोला के होते हैं। इस तरह हर चरण में 24 मात्राएं होती हैं। अब इसमें एक चीज और है। शुरुआत के जो दो चरण है ये दोनों चरण ये दोहा छंद है। और ये चार चरण रोला छंद है। ये दो छंदों के मेल से बनता है। दोहा और रोला। ठीक है और
एक बात यह जहां से शुरू होता है वहीं पर खत्म होता है। हरेभरे हो पेड़ सब छाया दे घनघोर। उपवन में हंसते सुमन सबको करें विभोर। सबको करें विभोर प्रदूषण हर लेते हैं। सबको करें विभोर प्रदूषण हर लेते हैं। कंकड़ पत्थर खाकर मीठे फल देते हैं। कंकड़ पत्थर खाकर मीठे फल देते हैं। का मयंक आचरण विचार साफ सुथरे हो। उपवन के सारे पादप नित नित हरेभरे हो। उपवन के सादे सारे पादप नित हरेभरे हो। चलो आगे बढ़ते हैं। अलंकार की बात कर लेते हैं। अलंकार तुम्हारे सिलेबस में कौन-कौन सा है? शब्दालंकार में तुमको अनुप्रास पढ़ना
है, यमक पढ़ना है और श्लेष पढ़ना है। अर्थालंकार में उपमा पढ़ना है, रूपक पढ़ना है, उत्प्रेक्षा पढ़ना है, भ्रांतिमान पढ़ना है, संदेह पढ़ना है। इस क्लास के 12 घंटे के बाद तुम्हें पीडीएफ दूंगा। जब तक यह क्लास ठीक से नहीं देख लोगे पीडीएफ नहीं दूंगा। सेशन को सभी लोग जितने भी नए बच्चे हैं, सेशन को लाइक कर लो बेटा। 25,000 तो अभी पूरे हो जाए। 1 लाख टारगेट है बाद में। उसको भी कंप्लीट कर लेंगे सभी लोग। ठीक है? क्लास के बाद भी सभी साथियों को इसे शेयर करना है तुम लोगों को। चलो उपमा अथवा
रूपक अलंकार का लक्षण लिखना है। अब ऐसे सवाल आएगा उपमा अथवा रूपक अलंकार का लक्षण अथवा उदाहरण लिखिए। अब इसको लिखने के लिए क्या करोगे तुम? अलंकार किसे कहते हैं? अलंकार सबसे पहले जान लो। अलंकार सबसे पहले जान लो किसे कहते हैं। तो जिस प्रकार आभूषण मनुष्यों की शोभा बढ़ाते हैं उसी प्रकार साहित्य के कुछ तत्व होते हैं जो शब्दों अर्थों के माध्यम से काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। उन्हीं को अलंकार कहते हैं। अलंकारो इति अलंकारा जो अलंकृत करता है वही अलंकार है। अलंकार के दो भेद होते हैं। शब्दों के माध्यम से चमत्कार अनुप्रास यमक
और श्लेष। अर्थालंकार अर्थ के माध्यम से चमत्कार उपमा रूपक उत्प्रेक्षा भ्रांतिमान और संदेह ठीक है हां 11:59 1059 पर रे 1159 पर तो 12 घंटे नहीं चार 13 घंटे हो जाएंगे 1159 तक अगर पढ़ा दूंगा तो वीडियो गायब हो जाएगी 1159 पर पढ़ा दूंगा तो वीडियो गायब हो जाएगी ठीक है चलिए चलिए सभी लोग नहीं यार 12 घंटे तुम्हारे लिए यार कुछ भी ऋषि का गाना सुन ये क्या है धन्यवाद गुरु जी हम आपका कर्ज कभी नहीं कर्ज नहीं है बेटा आशीर्वाद है तुम्हारे लिए कभी गुमनाम रहा व्यक्ति आज पूरे उत्तर प्रदेश को पढ़ा रहा
है। मुझे इससे ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए। कर्ज तो तुम्हारा है मुझ पर। उसको मैं उतार रहा हूं। ठीक है? शब्दालंकार सबसे पहले अनुप्रास यमक और श्लेष पढ़ते हैं। अनुप्रास की बात करें। जहां पर किसी व्यंजन वर्ण की आवृत्ति हो रही हो। जहां पर बार-बार किसी व्यंजन वर्ण की आवृत्ति हो रही हो। वहां पर अनुप्रास अलंकार होता है। जहां पर बार-बार किसी व्यंजना वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो रही हो वहां पर अनुप्रास अलंकार होता है। अनुप्रास अलंकार वैसे पांच प्रकार का होता है। छेकानुप्रास, लाटानुप्रास, अंत्यानुप्रा, व्यत्याप्रास, सुत्यात अनुप्रास। लेकिन तुमको केवल सिंपल अनुप्रास पढ़ना है।
सिंपल अनुप्रास पढ़ लेना है बेटा। तरन तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाए त वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो रही है। तरन तनुजा तट तमाल तर बहुछाए त वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो रही है। कोमल कलाप कोकिल कमनीय कूकती तो क वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो रही है। रघुपति राघव राजा राम र वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो रही है। ठीक है? चलिए अगले पर चलते हैं। अब ये ये समझ गए। अब बताओ अनुप्रास अलंकार से अगर तुमसे सवाल पूछा जाए कि अनुप्रास अलंकार की परिभाषा और उदाहरण लिखिए तो क्या तुमको कोई दिक्कत होगी लिखने में? क्या
किसी बच्चे को कोई दिक्कत होगी? मुझे बताओ। क्या किसी बच्चे को कोई दिक्कत होने वाली है? क्या किसी बच्चे को कोई दिक्कत होने वाली है अनुप्रास अलंकार से? क्या किसी बच्चे को अनुप्रास अलंकार से कोई दिक्कत होने वाली है? बेटा मुझे बताओ। हैं अनुप्रास अलंकार से किसी कोई दिक्कत होने वाली है? नहीं होने वाली है ना? चलो यमक अलंकार। जब एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए। शब्द एक ही है। दो या दो से अधिक बार आ रहा है। हर बार अर्थ अलग-अलग हो तो वहां पर यमक अलंकार होगा। उदाहरण के लिए
कनक-कनक ते 100 गुनी मादकता अधिकाय वा खाए बौराय जग वा पाए बौराय ठीक है। कनक-कनकते सौगुनी मादकता अधिकाए। अब यहां पर आपको ये चीज समझनी होगी। क्या कि कनक अब एक कनक का अर्थ यहां पर धतूरा है। और एक कनक का अर्थ है सोना। अब देखो दोनों शब्द तो एक ही हैं। अर्थ अलग-अलग हैं। तो यहां कनक शब्द दो बार प्रयोग हुआ है। प्रथम कनक का अर्थ है धतुरा। द्वितीय का अर्थ है सोना। ये आपको स्पष्टीकरण लिखना पड़ेगा। तभी पूरा नंबर मिलेगा। अगला उदाहरण क्या है? काली घटा का घमंड घटा। तो काली घटा से तात्पर्य
काले बादलों से है और घमंड के घटने से तात्पर्य घमंड के कम हो जाने से है। तो पहले घटा का अर्थ बादल है और दूसरे घटा का अर्थ कम होने से है। यह भी आपका एक सिंपल सा उदाहरण हो सकता है। लेकिन फिर भी स्पष्टीकरण लिखना पड़ेगा। तो चलो बताओ क्या यमक अलंकार हो जाएगा? क्या यमक अलंकार हो जाएगा? एक सेकंड बाय टॉप्स एंड शर्ट्स एट अप टू 35% ऑफ सभी लोग जाके क्लास लाइक कर लेना क्लास खत्म होने के बाद कल वाली एक सेकंड क्या कह रहे हो? वो क्या कह रही हैं? पीडीएफ तुरंत
नहीं दूंगा। पीडीएफ क्लास करने के बाद दूंगा। जब पूरी क्लास कर लोगे रिवाइज करने के लिए दूंगा। 12 घंटे थकान छुपाकर भी मुस्कुराते हैं। हमारी कामयाबी जिनकी पहचान है। ऋषि सर को दिल से प्रणाम है। लव यू बेटा। गुरु जी आप आशीर्वाद दीजिए। 18 से जो युद्ध है विजय हूं। विजय रहोगे। सभी लोगों को बहुत आशीर्वाद है। सर आपने खाना खाया अभी नहीं खाया। अभी खा लूंगा क्लास खत्म होने के बाद। टाइम स्टैंप लगवा दीजिएगा। हां वो जरूर करूंगा मैं। सर आपसे हिंदी में 96 नंबर लाई हूं पढ़ के। विभा 2025 में बहुत अच्छी बात
है बेटा। सर जी कॉमर्स का स्टूडेंट हूं। अकाउंट्स और बिजनेस स्टडी कहां से पढूं? सर्च कर लो। YouTube पर मिल जाएगा। हां रख लो वो अभी मम्मी वाला कमेंट कौन कर रहा था फिर से करूं उसी के लिए मैंने इंस्टा सर मेरा नाम ले लीजिए आशतोष तिवारी है मेरा नाम अच्छा ले लिया लो लक्ष्य बड़ा हो तो रातों को जागना पड़ेगा पड़ता है मंजिल पाने के लिए खुद को तपाना पड़ता है शुक्रिया ऋषि सर हमें इस काबिल बनाने के लिए 12 घंटे की यह मेहनत इतिहास रचने के लिए विद्या कुल YouTube बहुत अच्छी बात है
बेटा बिल्कुल इतिहास रचा जाएगा तुम्हारी सोच के सांचे में ढल नहीं सकता तुम्हारी सोच के सांचे में ढल नहीं सकता जुबान काट लो लहजा बदल नहीं सकता मुझे भी मोम का पुतला समझ रहे हो क्या तुम्हारी क्या है? इसके बाद की लाइन पता नहीं है क्या है। हां, मोस्टेंट क्वेश्चन की वीडियो कल आ जाएगी। उसको देख लेना। चलो अब जिसको जो कमेंट करना हो कर दो। मैं पढ़ लेता हूं क्योंकि लास्ट टाइम है। सोठा याद कर लेना। हां अकाउंटेंसी और ये सब तो किसी सीयूईटी की तैयारी के लिए आप लोग सीईटी विद्याल चैनल सब्सक्राइब कर
लो। 20 घंटे क्या मैं तो 50 घंटे की क्लास ले लूं बस ये YouTube नहीं मानेगा ना श्लेष अलंकार जहां पर कोई एक शब्द एक ही बार आए पर उसके अर्थ अलग-अलग हो वहां श्लेष अलंकार होता है उदाहरण के लिए रहीमन पानी राखिए अब देखो पानी यहां आया यहां नहीं अब देखो पानी गए ना उबरे मोती मानुष चून अब यहां मोती के लिए पानी का अर्थ है चमक मनुष्य के लिए आत्मसम्मान और चूने ने के लिए मुलायम होना। ठीक है? तो पानी का अलग-अलग अर्थ है। यह उदाहरण भी हो सकता है या यह भी हो
सकता है। चरण धरत चिंता करत चितवत चारों ओर। सुवर्ण को खोजत फिरत कवि वैभचारी चोर। यहां सुवर्ण का अर्थ कवि के लिए सुंदर रचना। व्यभचारी के लिए सुंदर स्त्री और चोर के लिए स्वर्ण है। लिख लोगे अब? सर जी मेरी स्टोरी लगा देना। मेंशन करूंगा। ठीक है। मेंशन कर देना। इंग्लिश मीडियम के लिए हिंदी तो यही आएगी ना। बाकी के लिए मैं मुकेश सर से बात करूंगा। रोला नहीं आता है। रोला नहीं आता है। रोला छंद नहीं आता। केवल दोहा, चौपाई, सोरठा और कुंडलिया आता है। रोला तो कुंडलिया में ही रहता है ना। अर्थालंकार की
बात करूं तो सबसे पहले उपमा अलंकार है। सबसे पहले उपमा अलंकार है जिसके लिए यह चार शब्द तुम्हें समझने पड़ेंगे। उपमेय क्या होता है? जिसकी तुलना की जा रही हो। मान लो मेरी तुलना इस पेन से की जा रही है। तो मैं उपमेय हूं। ये पेन उपमान है। और हमारे दोनों बीच लोगों के बीच में जो कॉमन है वो साधारण धर्म है। और हम दोनों की में तुलना बताने के लिए जो शब्द इस्तेमाल हो रहा है वो शब्द क्या है? वो शब्द क्या है? वह शब्दवाचक शब्द है। चलो आगे बढ़ते हैं। सभी लोग एक-एक शायरी
कमेंट सेक्शन में लिखो। उपमा अलंकार क्या होता है? उपमा शब्द का अर्थ होता है तुलना। जहां किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति से उसके समान गुणधर्म या स्वरूप के आधार पर की जाती है। वहां उपमा अलंकार होता है। उदाहरण देख लो। हरिपद कोमल कमल से या पीपल पात सरिस मन डोला। यहां पर एक बात ध्यान रखनी है बेटा तुम लोगों को। ध्यान यह रखना है कि तुमको स्पष्टीकरण जरूर लिखना है। इस उदाहरण में हरि के पैरों की तुलना कमल के फूल से की गई है। हरि के चरणों को कमल
के फूल के जैसे कोमल बताया गया है। बहुत सारे उदाहरण बनते हैं। हरि पद कोमल कमल से और ये सब। ठीक है? नेक्स्ट क्लास देखो नेक्स्ट क्लास। तीन क्लासेस लग चुकी हैं। कल तुम्हारी संपूर्ण फिजिक्स, संपूर्ण इंग्लिश और संपूर्ण केमिस्ट्री की क्लास चार-चार घंटे की लग चुकी है। और उसके बाद उसके बाद 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे मेरी क्लास है। 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे। आगे बढ़ते हैं। रूपक अलंकार जब गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय को ही उपमान बता दिया जाए। अर्थात जहां पर उपमेय और उपमान में कोई अंतर ना हो।
उपमेय मैंने बताया कि जिसकी तुलना की जाए। उपमान मैंने बताया कि जिससे तुलना की जाए। जिसकी तुलना जिससे तुलना समझ गए? चलो सभी लोग लाइक कर लो जल्दी से सेशन को लाइक कर लो। 400 लाइक बचे हैं 24000 होने में। जब गुण की अत्यंत समानता का कारण उपमेय को ही उपमान बता दिया जाए। अर्थात जहां पर उपमेय और उपमान में कोई अंतर ना दिखाई दे। जो उपमान हो वही उपमेय हो। यानी मैं और पेन एक ही हो जाए तो वहां पर रूपक अलंकार होता है। जैसे मैया मैं तो चंद्र खिलौना नहीं हो। अब वहां चंद्र
ही खिलौना है। खिलौना ही चंद्र है। समझ रहे हो इस गहराई को? चंद्र ही खिलौना है। खिलौना ही चंद्र है। इस बात को बहुत गहराई से समझो। आगे बढ़ते हैं। यहां बालक कृष्ण चंद्र को खिलौने जैसा नहीं कह रहा बल्कि चंद्रमा को ही खिलौना मान रहे हैं। चंद्रमा पर खिलौने का सीधा आरोप है। उत्प्रेक्षा अलंकार जहां उपमेय में उपमान के होने की संभावना या कल्पना की जाती है। वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इस अलंकार में मनु जनों जानो मानो मानो निश्चय एव ज आदिवाचक शब्द आते हैं। ठीक है? उत्प्रेक्षा अलंकार जहां पर उपमेय में उपमान
के होने की कल्पना की जाती है। जैसे मैं इस ग्लास को देख रहा हूं। मैं कहूं यार यह ग्लास तो नली के जैसा लग रहा है। यानी मुझे पता है कि यह ग्लास है। लेकिन मैं इसे नली के तह जैसे तुलना कर रहा हूं। मतलब यहां पर उपमेय होने की उपमान होने की उपमेय होने की संभावना की जा रही है। यह ग्लास उपमेय है। उपमान के होने की संभावना की जा रही है। ठीक है। चलो सभी लोग एक-एक शायरी लिख दो। सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात मनहु नीलमणि शैल पर आत परो प्रभात। स्पष्टीकरण
क्या होगा? मनो नीलम मणि सोहत ओढ़े पीत पट पीला वस्त्र पहने हुए कृष्ण बहुत सुंदर लग रहे हैं। श्याम सलोने गात गात माने शरीर श्यामल शरीर है सलोना सा सुंदर सा कृष्ण का बड़े सुंदर लग रहे हैं। मनहु नीलम मणि शैल पर लेकिन लेखक को चुल है। वो कह रहा है कि लग तो खड़े तो कृष्ण है। कपड़ा तो कृष्ण ने पहन रखा है लेकिन ऐसा लगता है जैसे कृष्ण कोई नीला पत्थर हो और उन पर सूर्य की पहली किरण पड़ रही हो। है तो मजा लेना यार। कोई काला आदमी हो। इस तरह मजा नहीं
लिया जाता कृष्ण जी का। यहां पर भगवान श्री कृष्ण के पीले वस्त्रों में शोभा को नीलमणि पर्वत पर सुबह में पड़ने वाले सूर्य की आभा के जैसा होने की संभावना की जा रही है। ठीक है? समझ रहे हो? समझ रहे हो क्या? तुम भी मॉम का पुतला समझ रहे हो क्या? तुम्हारी लव से यह लोहा पिघल नहीं सकता। चलो भ्रांतिमान अलंकार जब उपमेय में उपमान के होने का भ्रम हो जाए अर्थात जहां एक वस्तु को देखने पर दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाए वहां पर भ्रांतिमान अलंकार होता है। देखो मैंने इस रिमोट को देखा और
मुझे लगा कि मोबाइल है। कंफ्यूजन नहीं है। मुझे लगा कि मोबाइल है, रिमोट नहीं है, मोबाइल है। तो यहां पर एक वस्तु को मैंने देखा लेकिन मुझे लगा दूसरी वस्तु है तो वहां पर भ्रांतिमान होगा। कप कर हृदय विचार दीन मुद्रिका डारी तब जान अशोक अंगार सिंह हरस उठकर गयो। हनुमान जी ने अशोक वाटिका में सीता जी के पास राम की मुदरी गिराई। लेकिन उसके पहले अशोक से अंगारा मांग रही थी सीता जी। तो सीता जी को लगा कि अशोक ने अंगारा दिया है। वो मुदरी नहीं है। तो वहां पर क्या हो गया? भ्रांतिमान अलंकार
हो गया। वहां पर भ्रांतिमान अलंकार हो गया। स्पष्टीकरण देखो शब्दा अर्थालंकार में स्पष्टीकरण जरूर लिखना है बेटा। अर्थालंकार में स्पष्टीकरण जरूर लिखना है। बेटा ये बात ध्यान रखिएगा आप। अर्थालंकार में आपको स्पष्टीकरण जरूर लिखना है। चाहे जो हो जाए। अर्थालंकार में आपको स्पष्टीकरण जरूर लिखना है। चाहे जो हो जाए क्योंकि अगर नहीं लिखोगे तो बहुत अच्छा नहीं मामला बनेगा। ठीक है? नंबर दो ही मिलना है तो ठीक से मिले तो ज्यादा अच्छा है। ठीक है? समझ रहे हो? इस बात को ध्यान रखना है सभी लोग। एक चीज ध्यान रखना। अच्छी बात है बेटा। आगे बढ़ते
हैं। एक लड़का लिख रहा है। क्या लिख रहे हो बेटा? चलो। अच्छा आप देख लो संदेह अलंकार। मुझे लगता है संदेह ही बचा है। बाकी सब हो गया। हां संदेह ही बचा है। चलो जब उपमेय और उपमान में समता देखकर यह निश्चय नहीं हो पाता कि उपमान वास्तव में उपमेय है या नहीं। अर्थात जहां पर किसी वस्तु या व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे वहां संदेह अलंकार होता है। जैसे एक चीज समझो तुम। एक चीज तुम समझ लो बहुत ठीक से। तो बेटा चलो अब ये वाला आ गया संदेह अलंकार मान लो मैंने
इस रिमोट को देखा मान लो मैंने इस रिमोट को देखा अब इस रिमोट को देखकर मुझे लगा कि मोबाइल है कि रिमोट है कि मोबाइल है कि रिमोट है कंफ्यूजन बना हुआ है तो वहां पर क्या होगा वहां पर संदेह अलंकार होगा सबसे अच्छा उदाहरण इसका का है सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है यार ये तो समय ही खत्म होने लगा लगता है चलो तो ये साड़ी के बीच नारी और या नारी के बीच साड़ी इसका निश्चय नहीं हो पाने के
कारण संदेह अलंकार है ध्यान रखना इस बात का तो सभी लोग अब तुम्हारा रस छंद अलंकार ये छह नंबर पक्का हुआ ना चलो दिल रिएक्ट करो अगर तुम्हें सभी लोग कमेंट में लिखो कि हां सर हो गया ये छह नंबर तुम्हें मिल जाना चाहिए 15 तारीख को सुबह सुबह 6:00 बजे भी याद रखना सुबह 6:00 बजे ही मिलूंगा वहीं से बाहर लोग बात होगी आगे क्लासेस कैसे होंगी लेकिन समय का प्रतिबंध है तो समय के प्रतिबंध को थोड़ा सा ध्यान में रखते हुए हमें कुछ तो करना पड़ेगा समझ रहे हो जो भी आपकी परेशानियां हो
आप मुझे कमेंट करके बता दीजिएगा बेटा जिससे हम उन परेशानियों को सॉल्व कर पाएं अगर कोई टॉपिक आपको नहीं समझ में आया है कोई टॉपिक अगर आपको नहीं समझ में आया है कोई भी चीज आपको नहीं समझ में आई है तो आप मुझे बता दीजिएगा मैं उस चीज को सॉल्व कर दूंगा। उसके लिए क्लास ले आऊंगा। उसको पढ़ा दूंगा। क्योंकि एक बात तुम्हें पता होनी चाहिए। अगर तुम यूपी बोर्ड हिंदी मीडियम विद्या कुल की क्लास में जुड़ गए तो तुम्हें हिंदी में 100 में 100 कोई नहीं दिलवा कोई रोक नहीं सकता पाने से। तो 100
में 100 तुम्हें मिलेगा। सिलेबस पूरा करवा दूंगा। एक-एक लाइन बस अच्छे से लिख देना। और दूसरी बात रही कॉपी की तो तुम्हें पता है कि केवल पुरानी नहीं बल्कि नई और पुरानी दोनों कॉपी तुम्हें लिख के दूंगा। जिससे तुम हर एक चीज बहुत अच्छे से लिख पाओ जिससे कोई भी गलती एग्जाम टाइम पे ना हो। पेपर के साथ कॉपी नई पुरानी दोनों मिलेगी। हर एक चीज की तैयारी मैंने कर ली है। तो बेटा अब समय है विदा लेने का। चलते हैं और मिलते हैं 15 तारीख को सुबह 6:00 बजे जो क्लासेस लाइव में लगी