अल्बर्ट आइंस्टाइन या आक न्यूटन यह दो दुनिया के सबसे पॉपुलर साइंटिस्ट में ज्यादा बड़ा जीनियस कौन था से आइं वा ल स्मार्टर देन न्यूटन नो एक्ली इफ य वा पुटम हे हेड आ थक आ पुट न्यूटन अहेड आइन कम्स नेक्स्ट एफ्टर न्यूटन माय फवरेट फिजिसिस्ट इ आक न्यूटन इफ न्यूटन रा इन आइंस्टन टाइम न्यूटन वड डन ट ल इफ आइंस्टन राउंड इन न्यूटन टाइम नट सो मच यह है आज की जनरेशन के कुछ सबसे पॉपुलर साइंटिफिक माइंड्स और सभी ने आईक न्यूटन को एक अनरेवल्ड जीनियस घोषित किया यानी कि एक ऐसा जीनियस जैसे आज तक
कोई पैदा ही नहीं हुआ इनफैक्ट आइंस्टाइन ने खुद भी अपने ऑटोबायोग्राफी नोट्स में ये लिखा था कि न्यूटन एक क्रिएटिव जीनियस थे ऑफ दी हाईएस्ट ऑर्डर बट ऐसे ब्रिलियंट साइंटिस्ट जिनकी थिरी को 200 सालों तक पत्थर की लकीर माना गया और इवन आज भी हमें स्कूल्स और कॉलेजेस में न्यूटन के ही लॉज ऑफ मोशन तो सिखाए जाते हैं आइंस्टाइन का जिक्र तो डिग्री कॉलेजेस में कहीं जाकर आता है बट आइर कली न्यूटन को चुनौती देने वाले पहले शख्स और कोई नहीं बल्कि उनके सबसे डीपज एडमायब्रांड करते हैं अगर मैं इस बॉल को हाथ से ड्रॉप
करूं तो क्या होगा वेल न्यूटन के हिसाब से बॉल नीचे जाकर जमीन में गिरेगा ग्रेविटी की वजह से जो कि एक फोर्स है जो दो ऑब्जेक्ट्स को आपस में अट्रैक्ट करती है जैसे बॉल को और पृथ्वी को इस केस में बट आइंस्टाइन के हिसाब से ये गलत है ग्रेविटी तो फोर्स ही नहीं है इनफैक्ट ग्रेविटी तो बस एक इल्यूजन है एक छला और बॉल भी नीचे गिर ही नहीं रहा बल्कि बॉल तो अपनी ही जगह पर खड़ा है तो फिर क्या जमीन ऊपर आ रही है और चलो एक और एक बात यह मैं आपसे पूछता
हूं एक टेबल पर अगर मैं एक बॉल को रख दूं तो बताओ क्या यह बॉल इनर्टिया में है या इस पर कोई फोर्स है फिजिक्स में इनर्टिया का मतलब होता है एक ऑब्जेक्ट की टेंडेंसी कि वह अपने स्टेट को रिटेन करे अगर वह मोशन में है तो मोशन में ही रहे स्टेबल है तो स्टेबल रहे अंट्सल फोर्स उस पर एक्ट ना करे सो इस टेबल में रखे बॉल के एग्जांपल में वेल न्यूटन बोलेंगे यह इनर्टिया में है क्योंकि स्टेबल है बट आइंस्टाइन बोलेंगे इस पर फोर्स है एक्सीलरेशन का इनफैक्ट जब आप बॉल को हाथ से
छोड़ देते हो तब बॉल इनर्टिया में आ जाता है वेल ऐसे कई सारे कांट्रडिक्शंस आपको मिलेंगे न्यूटन और आइंस्टाइन दोनों की थरी को आमने-सामने कंपेयर करोगे तो बट अंत में आइंस्टाइन ने अपनी स्पेशल और जनरल रिलेटिविटी थ्योरी के जरिए न्यूटन की थ्योरी इस को इनकंप्लीट प्रूफ करके बताया और आज दुनिया यही मानती है सो अगर आइंस्टाइन ने न्यूटन जिस चीज के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं ग्रेविटी उसी को गलत प्रूफ कर दिया तो आइंस्टाइन फिर भी न्यूटन को इतिहास के सबसे बड़े जीनियस क्यों समझते थे क्या वह अपनी ऑटोबायोग्राफी में बस हंबल बनने की
कोशिश कर रहे थे जिस तरह जब हिस्ट्री के ग्रेटेस्ट रेटेड चेस प्लेयर मैग्नस कार्लसन से पूछा गया कि बेस्ट कौन है तो उसने खुद का नाम स्किप करके अपने इंस्पिरेशन गैरी कैस्पेरो का नाम बता दिया आई थिंक गैरी इ द बेस्ट ल टाइम्स और क्या हमें बचपन में जो कुछ भी ग्रेविटी के बारे में सिखाया गया क्या वह सब कुछ गलत था वेल फ्रेंड्स आज हम इस वीडियो में एगजैक्टली यही जानेंगे कि क्यों हमें आज भी न्यूटन की थोरी पढ़ाई जा रही है जबकि दुनिया जानती है कि वो इनकंप्लीट है न्यूटन के लॉज ऑफ मोशन
उसके मैथमेटिक्स और उसके एक्सप्लेनेशन में एगजैक्टली क्या-क्या गड़बड़ियां थी जो कि आइंस्टाइन ने देखी और उसे फिक्स की इवन हम यह भी जानेंगे कि यह एक्सपेरिमेंट जो आइंस्टाइन की ग्रेविटी को विजुलाइज करवाने के लिए दिखाया जाता है कैसे यह मिसली दिंग हो सकता है जिस वजह से आप ग्रेविटी को ठीक से ग्रस्प नहीं कर पा रहे और अंत में आइंस्टाइन ने न्यूटन में ऐसा क्या देखा जो उन्होंने उन्हें खुद से बड़ा जीनियस बताया यह सब एकदम रैशनल कंसीडर करके हम बेहतर जज कर पाएंगे कि दोनों में से ज्यादा बड़ा जीनियस कौन था सो तैयार हो
जाओ क्योंकि यह वीडियो आपकी रियलिटी की अंडरस्टैंडिंग को भयंकर तरह से चैलेंज करने वाला है तो चले शुरू करें आज से 400 साल पहले 1933 में रोमन चर्च ने गैलीलियो गैलीला को धमकी दे दी थी कि अगर उन्होंने अपने साइंटिफिक आइडियाज को प्रमोट करना बंद नहीं किया तो उन्हें फांसी की सजा दे दी जाएगी गैलीलियो की खोजें बाइबल में लिखी बातें और उस वक्त की मान्यताएं को गलत प्रूफ कर रही थी उस वक्त लोग ऐसा माना करते थे कि हमारी पृथ्वी सेंटर ऑफ सोलर सिस्टम है और सूरज और बाकी के ग्रह इसके चक्कर काटते हैं
इस मॉडल को जिओ सेंट्रिम कहते हैं मगर गैलीलियो ने अपने टेलिस्कोप से खुद जुपिटर के चार चांद देखे थे जो जुपिटर के चक्कर लगा रहे थे इसका मतलब सब कुछ पृथ्वी के आसपास नहीं घूम रहा वीनस के अलग-अलग फेजेस भी देखे थे जिसका मतलब वो भी सूरज के आसपास ही घूम रहा है यह डायरेक्ट प्रूफ था कि कॉपरनिकस का हीलियो सेंट्रिक मॉडल सही हो सकता है और चर्च गलत पर चर्च को यह सच मंजूर नहीं था और इसीलिए गलत नॉलेज फैलाने और धर्म के विरुद्ध जाने के जुर्म में 1633 में गैलीलियो को लाइफ इंप्रिजनमेंट की
सजा सुना दी [संगीत] गई उन पर रिसर्च पब्लिश करना किताबें लिखना और साइंस पढ़ाने सब पर बैन लगा दिया गया और 1942 में सच बोलने की सजा भुगते भुगते उनकी मौत हो गई मगर व कहते हैं ना सच्चाई को कभी भी दबाया नहीं जा सकता कभी छुपती नहीं इसे संयोग कहो या फिर क्या ठीक उसी साल 1642 में वो भी एगजैक्टली क्रिसमस के ही दिन एक ऐसे व्यक्ति ने जन्म लिया जो इस दबी हुई सच्चाई को सभी के सामने लाकर ही रहेगा मानो जैसे गैलीलियो ने एक और एक जन्म ले लिया था एक अलग शरीर
में क्योंकि यह शख्स और कोई नहीं बल्कि इंग्लैंड के लिंकन शायर काउंटी में जन्मे आइक न्यूटन [संगीत] थे सर आईक न्यूटन इतिहास के एक ऐसे मुकाम पर जन्मे थे जब साइंस जैसे सब्जेक्ट की बस एबीसी की ही की शुरुआत हुई थी न्यूटन एक ट्रबल्ड फैमिली से थे उनके जन्म से ती महीने पहले ही उनके अनपढ़ किसान पिताजी की मौत हो गई थी जब वह 3 साल के थे तो उनकी मां ने एक ऐसे पैसे वाले आदमी के साथ शादी कर ली जो न्यूटन को अपनाना तक नहीं चाहते थे न्यूटन का पूरा बचपन इसी वजह से
अपने मां के गैर मौजूदगी में अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ गुजरा और इस फीलिंग ऑफ एंडन मेंट ने ही शायद उन्हें व सदमा दिया जिसने उनकी पर्सनालिटी को बहुत ही अलग बना दिया एकदम एलूफ रहना किसी पर भी ट्रस्ट नहीं करना चीजों को पकड़ कर रखना एक्सट्रीमली ऑब्सेसिव बदला निकालना यह कुछ डार्क पर्सनालिटी ट्रेट्स है न्यूटन के जो आप उनकी बायोग्राफीज में जगह-जगह देखोगे जैसे उन्होंने बाद में अपने सिंस की एक लिस्ट बनाई थी जिसमें उन्होंने अपने टीनेज के थॉट्स को बयां किया था उसमें उन्होंने यह लिखा कि एक पॉइंट पर वह इतने फ्रस्ट्रेटेड हो गए
थे कि उन्हें अपनी मां और अपने स्टेप फादर को जला देने तक के थॉट्स आ रहे थे बट एनीवे उनकी मां का कुछ ही सालों में डाइवोर्स हो गया और वह वापस से न्यूटन के साथ रहने चली आई 15 साल की उम्र में वह न्यूटन की पढ़ाई को छुड़वा करर खानदानी जमीन में खेती कराने के लिए लगाना चाहती थी पर न्यूटन तो कुछ अलग ही मिट्टी के बने थे इनफैक्ट खेतीबाड़ी करते समय भी वह अक्सर पेड़ के नीचे बैठकर मैथ के प्रॉब्लम सॉल्व किया करते उनके स्कूल के हेडमास्टर ने न्यूटन में हुनर देखकर उनकी मां
को कन्वेंस किया कि वो उन्हें पढ़ाई करने केंब्रिज भेजे जहां से ही न्यूटन के ग्रेटनेस की जर्नी की शुरुआत होती है मतलब न्यूटन के सक्सेस में उनके हेड मास्टर का कितना बड़ा हाथ था उनकी काबिलियत पहचान कर उन्हें सही डायरेक्शन देने में अब सोचो अगर आज के हमारे इंजीनियरिंग और मेडिकल के स्टूडेंट्स को भी ऐसे ही मेंटर्स मिले तो आफ्टर ऑल आईआईटी या नीट क्रैक करना सिर्फ एक सफर नहीं बल्कि एक जुनून होता है हर दिन नई थिरी को एक्सप्लोर करना फिजिक्स के कॉम्प्लेक्शन को सिंपलीफाई करना और एक ही न्यूमेरिकल को मल्टीपल एप्रोचे से सॉल्व
करना यह सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि एक मिशन है और इसीलिए देश के फ्यूचर डॉक्टर्स और इंजीनियर्स की इसी मेहनत का सम्मान करने के लिए अनअकैडमी लेकर आया है आरंभ देश का सबसे बड़ा एजुकेशनल फेस्टिवल सिर्फ आपके लिए 1स्ट मार्च शाम के 7:00 बजे youtube2 ईयर का अनअकैडमी आरंभ पर्सनली मैंने भी अटेंड किया था तो इस बार का इवेंट और भी धमाकेदार होने वाला है इंडिया के मोस्ट लव्ड क्रिकेटर जसप्रीत बुमरा एक बड़ा सरप्राइज रिवील करने वाले हैं इवेंट में आपके फेवरेट एजुकेटर्स और जेड नीट टॉपर्स भी होने वाले हैं प्लस थोड़ा ह्यूमर ऐड करने के
लिए इस इवेंट को कॉमेडियंस रवि गुप्ता और सुनील ग्रोवर भी अटेंड करने वाले हैं इस इवेंट में गेम ऑफ ज्ञान साइंस क्विज भी होने वाला है जिसमें पार्टिसिपेट करके आप जीत सकते हैं प्राइजेस वर्थ लैक्स पिछले साल एक एस्परेंस पेक्टेनीअस में डाल रहा हूं नोटिफाई मी पर क्लिक करना और अब वापस से लौट आते हैं हमारे मेन टॉपिक पर हम डिस्कस कर रहे थे कि केंब्रिज में ऐसा क्या हुआ जिससे न्यूटन के ग्रेटनेस की जर्नी की शुरुआत हुई कॉलेज में एंटर करते ही वह कुछ ही दिनों में यह समझ गए कि यहां पर तो आउटडेटेड
कांसेप्ट पढ़ाए जा रहे हैं जैसे एरिस्टोटल के जमाने की फिजिक्स एरिस्टोटल फिजिक्स के हिसाब से ग्रेविटी जैसी कोई चीज ही नहीं होती हर एक ऑब्जेक्ट की बस एक नेचुरल टेंडेंसी होती है कि वो एक नॉन रेस्टेड स्टेट से रेस्टेड स्टेट में आए जैसे फॉर एग्जांपल एक बॉल को छोड़ने पर वह नीचे जमीन पर गिरकर स्टेट ऑफ रेस्ट में आ जाता है जितना बड़ा ऑब्जेक्ट होगा उतनी ज्याद उसकी टेंडेंसी होगी स्टेट ऑफ रेस्ट में आने की अब मैं आपको एक कॉमन सेंस वाला सवाल पूछता हूं इसका जवाब देना मुझे मैं दो बॉल्स लेता हूं एक बड़ा
ज्यादा मैस वाला और दूसरा कम मैस वाला अब ऊपर से एक साथ छोड़ने पर कौन सा बॉल पहले नीचे गिरेगा आपका कॉमन सेंस क्या बता रहा है वेल एरिस्टोटल के हिसाब से जिस बॉल का जितना ज्यादा मैस होगा उसकी उतनी ज्यादा स्टेट ऑफ रेस्ट में आने की टेंडेंसी होगी और इसीलिए ज्यादा मैसिव बॉल पहले नीचे गिरेगा बट न्यूटन को यह बात हजम नहीं हो रही थी अच्छा न्यूटन को उस जमाने के एरिस्टोटल हैन फिजिक्स की एक और एक बात हजम नहीं हो रही थी दावा कि एक ऑब्जेक्ट को आगे मूव होते रहने के लिए कांस्टेंट
फोर्स की जरूरत होती है फोर्स लगाना बंद तो ऑब्जेक्ट का मूव होना भी बंद और वो स्टेट ऑफ रेस्ट में आ जाएगा क्योंकि रिमेंबर हर ऑब्जेक्ट के पास तो नेचुरल टेंडेंसी होती है स्टेट ऑफ रेस्ट में रहने की यानी कि एरिस्टोटल के लिए इनर्टिया का भी कांसेप्ट नहीं था सो नो ग्रेविटी का कांसेप्ट और नो इनर्टिया का कांसेप्ट अब न्यूटन को क्यों यह नहीं जम रहा था क्योंकि उन्हें उन्हीं की एक इंस्पिरेशन गैलीलियो ने 1589 में ऑलरेडी लीनिंग टावर ऑफ पीसा में से एक एक्सपेरिमेंट करके दिखाया था कि दो बॉल्स को एक साथ फेंकने पर
दोनों बॉल्स वाकई में एक ही साथ नीचे गिरते हैं इरेस्पेक्टिव ऑफ देयर मैस सो ऑब्जेक्ट्स के मैस का ज्यादा या कम होने का नीचे पहले गिरने पर ज्यादा कोई लिंक नहीं है और इसीलिए सच्चाई की अकेले खोज करने के जुनून में न्यूटन मॉडर्न आइडियाज वाले साइंटिस्ट और फिलोसोफर जैसे गैलीलियो कॉपर डि कार्ड्स कवेल की किताबें सेल्फ स्टडी करने लगे जस्ट इमेजिन आप कॉलेज पढ़ने गए और कुछ ही दिनों में आप समझ गए कि ये तो आउटडेटेड कॉन्सेप्ट्स पढ़ा रहे हैं और खुद की ही पढ़ाई खुद ही करने लग गए ऐसी सोच वाले साइंटिस्ट कुछ अलग
ही कर दिखाते हैं उन्होंने एक स्पेशल नोटबुक भी बनाई थी क्वेश्चन क्वायडन फिलोसोफी के के नाम से जिसका मतलब है सर्टेन फिलोसॉफिकल क्वेश्चंस जिसमें उन्होंने एक बहुत ही ब्यूटीफुल बात लिखी थी एरिस्टोटल मेरे दोस्त है प्लेटो मेरे दोस्त है बट मेरी बेस्ट फ्रेंड है सच्चाई अपने यूनिवर्सिटी डेज में चार सालों तक सेल्फ स्टडी करने के बाद न्यूटन को मोशन और ग्रेविटी के कांसेप्ट में क्लेरिटी हासिल होने लगी न्यूटन ने जब चीजों को नीचे गिरते हुए देखा तो उनके दिमाग में दो पावरफुल थॉट्स आए और दोनों थॉट्स ने आगे जाकर दो बड़े इंवेंशंस किए पहला थॉट
यार ये जो चीजें नीचे की तरफ गिरती है ना क्या ये टेंडेंसी कोई फोर्स की वजह से है और कहीं यही सेम फोर्स हमारे चांद को अर्थ के ऑर्बिट में बनाए तो नहीं रखा हुआ है उस समय तक केप्लर के लॉज ऑफ प्लेनेटरी मोशन इन्वेंट हो चुके थे और इसीलिए न्यूटन को यह तो पता था कि चांद पृथ्वी के अराउंड एलिप्टिकल ऑर्बिट में घूमता है बट किसी को यह नहीं पता था कि आखिर क्यों बस फॉर सम रीजन यह अजूम कर लिया गया था कि घूमता है सो न्यूटन को बस किसी तरह यह प्रूफ करके
दिखाना था कि जो फोर्स एप्पल को नीचे गिरा रही है वही फोर्स चांद को भी पृथ्वी के अराउंड घुमाए रख रही है और इसी तरह ग्रेविटी का कांसेप्ट डिस्कवर हुआ अब यह आईडिया उस उस वक्त ना एरिस्टोटल के जमाने के फिलोसोफर और ना गैलीलियो ना कॉपरनिकस किसी को भी कभी नहीं आया कि एक फोर्स जो दो ऑब्जेक्ट्स को एक दूसरे से अट्रैक्ट करती है वो चांद को अर्थ के अराउंड कैसे घुमा रही है चांद अर्थ से क्रैश क्यों नहीं हो जाता वेल इसे न्यूटन के ही एक थॉट एक्सपेरिमेंट न्यूटंस कैनन बॉल के एग्जांपल से समझते
हैं अगर आप पृथ्वी से कैनन बॉल कम फोर्स से शूट करोगे तो पृथ्वी उसे नीचे अट्रैक्ट कर लेगी और वो नीचे गिर जाएगा और वहीं पर अगर आपने बहुत फोर्स से उसे शूट किया तो वह सीधा अर्थ के एटमॉस्फियर को चीरते हुए स्पेस में उड़ जाएगी जैसे रॉकेट्स उड़ जाते हैं बट अगर आपने ठीक उतना ही फोर्स लगाया कि अर्थ उसे नीचे जमीन पर भी ना खींच पाए और उसमें फॉरवर्ड एक्सीलरेशन भी उतना नहीं है कि वह सीधा स्पेस में ही उड़ जाए तो वह हमेशा के लिए बस नीचे गिरता ही चला जाएगा पर कभी
भी पृथ्वी के ग्राउंड को टच नहीं करेगा इसे ही उन्होंने एक ऑर्बिट कहा कि जो फोर्स चीजों को नीचे गिरा रही है वही चांद को भी अर्थ के अराउंड घुमा रही है बस उन्हें अब इसे मैथमेटिकली प्रूफ करके बताना था अब वह कैसे करते जस्ट वेट एंड वच बट उससे पहले दूसरा थॉट जो उन्हें गिरती हुई चीजों को देखकर आया वो यह था कि जैसे ही कोई ऑब्जेक्ट नीचे गिरता है तो उसके नीचे गिरने की स्पीड को तो हम इजली मेजर कर सकते हैं डिस्टेंस अपॉन टाइम के फार्मूला से बट प्रॉब्लम यह है कि ये
फार्मूला तो हमें उस ऑब्जेक्ट के नीचे गिरने की सिर्फ एवरेज स्पीड को ही कैलक लेट कराता है अगर हमें लेट्स से यह पता करना है कि गिरने के एग्जैक्ट दो सेकंड बाद उस एग्जैक्ट पॉइंट पर apple.us फिजिक्स इज ऑल अबाउट चेंज एंड कैलकुलस डिस्क्राइब्स चेंज यूनिवर्स में सिर्फ एक ही चीज कांस्टेंट है और वो है बदलाव कैलकुलस एक ऐसा मैथमेटिकल टूल है जो उन्हीं बदलावों को ध्यान में रखकर प्रिडिक्ट करता है कोई चीज कैसे इवॉल्व होगी कैलकुलस मोशन को डिस्क्राइब करता है जैसे ये इक्वेशन ऑफ अ फॉलिंग ऑब्जेक्ट कैलकुलस इलेक्ट्रिसिटी और मैग्नेटिज्म को डिस्क्राइब करता
है जैसे मैक्सवेल इक्वेशंस कैलकुलस जनरल रिलेटिविटी को डिस्क्राइब करता है जैसे आइंस्टाइन फील्ड इक्वेशन कैलकुलस क्वांटम मैकेनिक्स को डिस्क्राइब करता है जैसे श्रोडिंगर इक्वेशन में कैलकुलस थर्मोडायनेमिक्स को भी डिस्क्राइब करता है और भी बहुत-बहुत कुछ सो न्यूटन ने बेसिकली पृथ्वी पर हो रहे मोशन को मैथमेटिकली डिस्क्राइब करना सीख लिया था अब उन्हें बस स्पेस में हो रहे प्लानेट के मोशन को मैथमेटिकली डिस्क्राइब करना सीखना था ताकि वो प्रूफ कर सके कि ग्रेविटी पृथ्वी पर और पूरे यूनिवर्स में सेम तरीके से काम करती है ये एक यूनिवर्सल फोर्स है और फिर कुछ सालों की मेहनत के
बाद फाइनली उन्होंने फॉलिंग ऑब्जेक्ट्स मून के मोशन और कपलर्स थर्ड लॉ ऑफ एलिप्टिकल ऑर्बिट को कोबरे करके ग्रेविटी का य यूनिवर्सल लॉ डिवेलप कर ही लिया जो है यह इक्वेशन जिसे इवर्स स्क्वेयर लॉ भी कहते हैं अब एक पॉइंट टू नोटिस यह यूनिवर्सल इक्वेशन भले ही न्यूटन ने डिवेलप किया हो मगर इवर्स स्क्वेयर लॉ का आईडिया पुराना था जिसके लिए न्यूटन ने बुलिया और बरेली को क्रेडिट दिया जो कि पहले ही यह हाइपोथेसाइज कर चुके थे कि सूरज से एक फोर्स है जिसका इंपैक्ट हर स्क्वेयर डिस्टेंस में आधा होते जाता है पर कोई भी इन
आइडियाज को न्यूटन की तरह कनेक्ट करके मैथमेटिकली प्रूफ करके नहीं बता पाया था ओनली न्यूटन कुड डू इट बॉज ही वाज अ मैथमेटिकल जीनियस और इससे हमें एक और एक चीज सीखने को मिलती है साइंटिफिक डिस्कवरीज में मेरे हिसाब से 60 पर इमेजिनेशन और आइडियाज का रोल होता है और 40 पर मैथ का जो उस आईडिया को प्रूफ करने में हेल्प करता है आईडिया डायरेक्शन देता है और मैथ वहां तक चलाता है और इसीलिए आइंस्टाइन ने भी कहा था इमेजिनेशन इज मोर पावरफुल देन नॉलेज तो अपने इमेजिनेशन को कभी भी स्टॉप होने मत देना इन्हीं
लर्निंग से न्यूटन ने फिर अपने थ्री लॉज ऑफ मोशन को भी अपने प्रिंसिपिया मैथमेटिका बुक में पब्लिश किया अलोंग विद द कांसेप्ट ऑफ ग्रेविटी इस बुक ने मॉडर्न फिजिक्स का एक ऐसा स्ट्रांग फ्रेमवर्क खड़ा कर दिया कि न्यूटन की ये किताब साइंस की बाइबल की तरह हो गई और न्यूटन अपना काम करके हंसी खुशी 31 मार्च 1727 को चल बसे अब न्यूटन के जाने के बाद शुरुआत में तो साइंटिस्ट न्यूटन के मॉडल को प्लेनेट की ऑर्बिट को प्रिडिक्ट करने के लिए अच्छे से यूज कर पा रहे थे न्यूटन की थिरी में दरारें दिखनी तब शुरू
हुई जब एक छोटे से प्लेनेट मरक्यूरी न्यूटन के कायदे कानूनों को ओबे नहीं कर रहा था न्यूटोनिन मॉडल से मरक्यूरी का ऑर्बिट प्रिडिक्ट ही नहीं किया जा पा रहा था हर बार एप्रोक्सीमेटली 43 आर्क सेकंड्स पर सेंचुरी से कैलकुलेशंस गड़बड़ा जा रहा था कहीं कोई हिडन प्लेनेट तो नहीं था जिसकी ग्रेविटी मरक्यूरी के साथ इंटरफेयर करके यह कैलकुलेशन को गड़बड़ा रही थी ऐसा ही कुछ 1846 में अर्बेन ले वेरियर को लगा जिन्होंने एक मिसिंग प्लेनेट वल्कन के नाम से प्रपोज किया मगर यह मिसिंग प्लेनेट वल्कन कभी किसी को दिखाई नहीं दिया और इसी वजह से
इस कैलकुलेशन मिस्टेक के चलते न्यूटन की थरी पर सवाल खड़े होना शुरू हो गए तो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा समझा कुछ नहीं यह शब्द थे अल्बर्ट आइंस्टाइन के टीचर के जो आइंस्टाइन के ढीठ एटीट्यूड से परेशान हो गए थे एल्बर्ट आइंस्टाइन को आज पूरी दुनिया जीनियस जरूर समझती है बस जब वह बच्चे थे तब शायद ही किसी ने यह सोचा होगा वेल आइंस्टाइन का बचपन काफी इंटरेस्टिंग रहा चार साल की उम्र तक तो उन्होंने बात करना भी नहीं सीखा था उनके पेरेंट्स तो डर गए थे कि इसे कोई स्पीच डिफेक्ट तो नहीं है
इवन आज भी जो बच्चे लेट तक नहीं बोलना सीखते उन्हें आइंस्टाइन सिंड्रोम है ऐसा कहा जाता है बचपन में आइंस्टाइन एकदम शांत खोए खोए से बच्चे थे जो अपनी दुनिया में ही डे ड्रीमिंग किया करते वो पढ़ाई में तो एवरेज थे लेकिन उन्हें स्कूल का रट्टा मारने वाला कांसेप्ट और अननेसेसरी रूल्स बिल्कुल पसंद नहीं थे वो स्कूल को एक जेल की तरह समझते थे जहां पर बच्चों को नैरो माइंडेड बनाया जाता है और उनकी इमेजिनेशन और क्रिएटिविटी को दबाया जाता है इसी एटीट्यूड की वजह से कुछ टीचर्स उन्हें पसंद नहीं करते थे बट जहां पर
आइंस्टाइन को मेमोराइजेशन नहीं पसंद था उन्हें क्यूरियस सवाल पूछना थॉट एक्सपेरिमेंट्स करना और मैथ सीखने का बहुत ही शौक था और इसीलिए 12 साल की उम्र तक उन्होंने खुद को कैलकुलस जैसे एडवांस मैथ और ज्योमेट्री भी सिखा दिया था 12 से 14 की उम्र तक तो उन्होंने रियल एक्सपेरिमेंट्स कंडक्ट करना भी स्टार्ट कर दिया था जैसे साउंड की स्पीड को कैलकुलेट करना एक कोस को टाइम करके मॉडल फ्लाइंग प्लेंस और स्टीम इंजन बनाना उसी दौरान एक सवाल था जो उन्हें बहुत ही परेशान किया करता और जो ही आगे जाकर उनकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था
उन्हें लाइट का कांसेप्ट बहुत ही फेसिनेट करता था और इसीलिए व अक्सर सोचा करते थे कि अगर वह किसी तरह अपने आप को एक लाइट बीम में कन्वर्ट कर दें और पूरे ब्रह्मांड में घूमे तो उन्हें अपने पॉइंट ऑफ व्यू से क्या दिखाई देगा यह यूनिवर्स कैसा दिखाई देगा वंस अगेन इमेजिनेशन इवन टाइम के बारे में भी वो बहुत सोचते थे कि यह समय फंडामेंटली ऐसा क्यों है कि यह सिर्फ एक ही दिशा में आगे बढ़ते रहता है अब उस समय के हालातों को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि तभी हमें समझेगा कि आइंस्टाइन को आइंस्टाइन
बनने का ही इंस्पिरेशन कहां से मिला सो उस वक्त दो फिजिक्स की थिरी हमारे रियलिटी की अंडरस्टैंडिंग की रीड की हड्डी बनी हुई थी एक न्यूटन के लॉज ऑफ मोशन और दूसरा मैक्सवेल के लॉज ऑफ इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म जो जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने 1960 में दिए थे और जो ये रिवील करते हैं कि लाइट और कुछ नहीं बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है और इनके लॉज लाइट के मोशन और प्रोपेगेशन को डिस्क्राइब करते हैं अब उस वक्त ये प्रूफ तो नहीं था बट मैक्सवेल के इक्वेशंस ये इशारा कर रहे थे कि लाइट की स्पीड हर ऑब्जर्वर के लिए
हमेशा कांस्टेंट ही रहनी चाहिए जो है एप्रोक्सीमेटली 3 लाख किमी पर सेकंड फिर चाहे कोई ऑब्जर्वर मोशन में हो या फिर वह स्टैटिक हो अच्छा इसे एग्जांपल से समझो लेट्स से आप एक स्पेसशिप में ट्रेवल कर रहे हो 2 लाख किमी पर सेकंड की स्पीड से और आपके सामने एक स्पेसशिप स्टिल खड़ी है अब अगर आप उस 2 लाख किमी पर सेकंड की स्पीड से एक्सीलरेट होते स्पेसशिप से एक लाइट बीम शाइन करोगे तो इस ऑब्जर्वर स्पेस शिप को लाइट की स्पीड कितनी मेजर होगी वेल न्यूटन का कॉमन सेंस कहेगा लाइट की अपनी स्पीड 3
लाख किमी पर सेकंड प्लस स्पेसशिप की अपनी वेलोसिटी जो कि 2 लाख किमी पर सेकंड है = इ 5 लाख किमी पर सेकंड है ना सिंपल आई मीन अगर आपने एक मिसाइल लॉन्च किया होता 1 लाख किमी पर सेकंड की स्पीड से तो मिसाइल की वेलोसिटी स्पेसशिप की वेलोसिटी को ऐड होती है और नेट वेलोसिटी 3 लाख किमी पर सेकंड आता है अच्छा मैं यहां पर स्पीड और वेलोसिटी को जानबूझ के इंटरचेंज कर रहा हूं ताकि ज्यादा लोगों को समझ में आए बिकॉज स्पीड एक ज्यादा कॉमन वर्ड है सो यह सिंपल न्यूटोनिन रिलेटिव मोशन है
कि दो स्पीड्स ऐड होने चाहिए बट लाइट के केस में ऐसा नहीं होता है ऑब्जर्वर को लाइट की स्पीड कांस्टेंट यानी 3 लाख किमी पर सेकंड ही दिखाई देगी इनफैक्ट लाइट की स्पीड हमेशा हर ऑब्जर्वर के लिए हमेशा कांस्टेंट ही रहेगी अब क्योंकि लाइट एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव है तो मैक्सवेल के इक्वेशन एक और एक इंटरेस्टिंग दावा कर रहे थे कि एक बीम ऑफ लाइट को किसी इनविजिबल मीडियम से ट्रेवल करना ही पड़ेगा जैसे फॉर एग्जांपल साउंड वेव्स एयर के मीडियम से ट्रेवल करते हैं ना वैसे ही लाइट किस मीडियम से ट्रेवल करती होगी वेल इस
मीडियम को उस दौरान नाम दे दिया गया लुमिनी फेरस ईथर या सिंपली ईथर बट प्रॉब्लम यह थी कि ईथर होता भी है कि नहीं इसे किसी ने देखा ही नहीं था और ना ही किसी ने प्रूफ किया था जिसको फिर 19 87 में प्रूफ करने की कोशिश दो अमेरिकन फिजिसिस्ट एल्बर्ट ए माइकल्स और एडवर्ड डब्ल्यू मोर्ले ने की एंड टू देयर सरप्राइज वो एक्जिस्टेंस प्रूफ करने चले थे बट उन्होंने प्रूफ किया कि ईथर जैसा कोई मीडियम तो एजिस्ट ही नहीं करता है और यस मैक्सवेल के दावे को भी सही साबित कर दिया कि लाइट की
स्पीड इनडीड सभी ऑब्जर्वर के लिए सेम ही रहती है अब इस एक्सपेरिमेंट में कैसे प्रूफ किया गया और इन सारे इवेंट्स के बीच में कि पूरी डिटेल्स स्टोरी मैंने अपने इस वीडियो में ऑलरेडी कवर किया है जिसे आप देख सकते हो अगर आपको डिटेल पर्सपेक्टिव चाहिए तो अभी के लिए बस हम मेन पॉइंट्स पर ही फोकस करेंगे सो अब हम फाइनली इतिहास के उस पॉइंट पर पहुंच गए थे जहां पर न्यूटन की थरी को लेकर बहुत से सवाल खड़े हो गए अगर न्यूटन कहता है कि सारा मोशन रिलेटिव है यानी कि वेलोसिटीज ऐड होती है
जैसे हमने पहले स्पेसशिप वाले एग्जांपल में देखा तो मैक्सवेल के दावों पर खरे उतर कर माइकल सन और मोर्ले ने कैसे यह प्रूफ कर लिया कि लाइट की स्पीड कांस्टेंट ही है क्यों वो ऐड नहीं होती बाकी चीजों की तरह क्या लाइट स्पेशल है और इसी दौरान होती है इस कहानी में आइंस्टाइन की एंट्री और स्पेशल थिरी ऑफ रिलेटिविटी की शुरुआत जिसमें लाइट को आइंस्टाइन ने वो स्पेशल एलिमेंट कंसीडर किया आइंस्टाइन ने 1905 में इसी कंफ्यूजन को क्लियर करने के लिए एक साइंटिफिक पेपर पब्लिश किया जिसने फिजिक्स कम्युनिटी की दिशा को ही हमेशा के लिए
बदल कर रख दिया पेपर का नाम था इलेक्ट्रोडायनेमिक्स ऑफ मूविंग बॉडीज और इस पेपर में उन्होंने बेसिकली पूरे ईथर के कांसेप्ट को ही रिजेक्ट कर दिया इसी के साथ उन्होंने न्यूटन के लॉज के भी कुछ ग्लेयरिंग फॉल्ट्स पर उंगली उठा ली इस पेपर में बेसिकली आइंस्टाइन ने ईथर को आउट करके उसे एक बहुत ही न्यू और फैसटिकट सेप्ट स्पेस टाइम से रिप्लेस कर दिया सो बेसिकली यह जो हम आसपास और यूनिवर्स में हर जगह जो स्पेस देख रहे हैं ना वो सिर्फ स्पेस नहीं बल्कि वो स्पेस टाइम है जो थ्री डायमेंशन ऑफ स्पेस और वन
डायमेंशन ऑफ टाइम का बना हुआ है स्पेस और टाइम आपस में फंडामेंटली जुड़े हुए हैं इंसेपरेबल है देयर कैन बी नो स्पेस विदाउट टाइम एंड नो टाइम विदाउट स्पेस अकॉर्डिंग टू आइंस्टाइन मॉडल अब ये एक टोटली ग्राउंड ब्रेकिंग आईडिया था जो न्यूटन की थरी के अगेंस्ट जा रहा था इनफैक्ट आगे चलकर तो आइंस्टाइन एक के बाद एक ऐसे कांसेप्ट आइडियाज और थिरी पब्लिश करेंगे जो न्यूटन की थिरी की इनकंप्लीट को एक्सपोज करेंगे सो आखिर क्या थे वोह आइडियाज सो चलो अब इसके आगे ना हम स्टोरी से हटकर डायरेक्ट वन ऑन वन कंपैरिजन करेंगे न्यूटन वर्सेस
आइंस्टाइन की दुनिया देखने के नजरिए को क्योंकि कई बार तो यह दोनों साइंटिस्ट के व्यूज एकदम अपोजिट लगते हैं स्कूल में हमें न्यूटन के लॉस सिखाते हैं बट फिर आगे चलकर आइंस्टाइन क्यों बोलते हैं कि न्यूटन गलत है हमें किसको ट्रस्ट करना चाहिए आफ्टर ऑल और आइंस्टाइन ने न्यूटन के आईडिया को चैलेंज करते हुए कहा था कि एप्ल तो नीचे गिरता ही नहीं है बल्कि जमीन एक्सलरेट कर रही है सो जमीन आखिर चारों बाजू से एक्सलरेट कैसे कर सकती है अच्छा अब बहुत ही कम लोगों को यह भी पता होगा कि दो किस्म की ग्रेविटी
होती है एक रियल और एक फेक और आप और मैं जो ग्रेविटी एक्सपीरियंस करते हैं वो फेक ग्रेविटी है यह सारे कांसेप्ट बहुत ही फैसटिकट वरी यह सारे माइंड ब्लोइंग कांसेप्ट को जो हमारी रियलिटी को बनाते हैं मैं सीरीज के अगले और आखिरी वीडियो में डिटेल में कवर करूंगा और इतना सिप फाइड तरीके से कि इवन अगर आप आर्ट्स या कॉमर्स के बैकग्राउंड से हो तो भी आपको इंटूटिव समझ में आ जाएगा अगला पार्ट विदन अ वीक आ जाएगा सी यू वेरी सून जय हिंद