[संगीत] हेलो फ्रेंड्स यह डार्क साइकोलॉजी सीरीज का छठवां वीडियो है और आज से मैं स्टार्ट करने वाला हूं मनोवैज्ञानिक हेरफेर की कला यानी कि अगर मैं इंग्लिश में बोलूं तो द आर्ट ऑफ साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन और आज मैं जिस मैनिपुलेशन टेक्निक को डिस्कस करने वाला हूं उसका नाम है गैस लाइटिंग यह मैनिपुलेशन का सबसे खतरनाक तरीका है लेकिन यह काम काफी स्लो करता है इसका मतलब यह हुआ कि इसका जो असर होता है वह धीरे-धीरे होता है लेकिन अगर किसी मैनिपुलेटर ने इस टेक्निक का प्रयोग किसी पर कायदे से कर दिया ना तो उस इंसान को
पागल तक किया जा सकता है इसमें इंसान अपनी याददाश्त अपने दृष्टिकोण और उसके जीवन की जो रियलिटी होती है उस पर भी डाउट करने लगता है यानी कि शक करने लगता है इसको मैं एक उदाहरण से समझा देता हूं मान लो आपकी किसी फ्रेंड ने आपसे बदतमीजी से बात करने की कोशिश की आपकी इंसल्ट की लेकिन किसी वजह से आपने उस दिन उसे टोकना ठीक नहीं समझा लेकिन जब कुछ महीने बाद उस फ्रेंड से दोबारा मुलाकात होती है और आपने उसे उस घटना की याद दिलाई तो अगर आपका दोस्त मैनिपुलेटर होगा ना तो उस घटना
को डिनायर देगा और आपसे कहेगा कि नहीं यार मैं ऐसा कर ही नहीं सकता और करने की बात छोड़ो मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता लेकिन अगर मेरे से कोई गलती हुई हो जाने-अनजाने में तो मुझे मुझे माफ कर देना जैसे ही आपका दोस्त आपसे यह बातें कहेगा आपके मन में थॉट्स आएंगी कि शायद उसने उस दिन गलती से आपकी इंसल्ट कर दी होगी शायद उसका इंटेंशन ऐसा नहीं रहा होगा अगर आपके मन में ऐसी थॉट्स आ चुकी हैं तो कांग्रेचुलेशन आप गैसलाइट हो चुकी हैं क्योंकि थोड़ी देर पहले आपको पता था कि आपके दोस्त
ने जानबूझकर आपकी इंसल्ट की लेकिन जैसे ही दोस्त ने कुछ बातें कही आपके दिमाग में क्या आ चुका है कि शायद गलती से उससे ऐसा हो गया होगा यह तो बस उदाहरण है लेकिन सच्चाई यह है कि जो नॉर्मल लेवल की गैस लाइटिंग होती है ना वह हमारे साथ होती रहती है चाहे हम खुद को कितना भी स्मार्ट समझे तो चलिए अब मैं और आगे बढ़ता हूं और आपको समझा देता हूं कि ये जो गैस लाइट शब्द है यह आया कहां से 1938 में ब्रिटेन में एक नाटक खेला गया जिसका नाम था गैस लाइट और
आगे चलकर 1943 में इसी नाम से बोले तो गैस लाइट नाम से एक मूवी भी बनती है तो मैं इस मूवी की कहानी आपको शॉर्ट में बता देता हूं इसमें क्या होता है कि एक घर होता है और उस घर में सिर्फ दो इंसान रहते हैं हस्बैंड और वाइफ जो वाइफ होती है ना वो हस्बैंड पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट होती है और साथ में अपने हस्बैंड पर ट्रस्ट भी बहुत ही ज्यादा करती है लेकिन जो हस्बैंड होता है ना वो बहुत ही शातिर और एक मैनिपुलेटिव इंसान होता है तो उसके दिमाग में यह आया
कि क्यों ना वाइफ को यह एहसास दिला दिया जाए कि वो पागल हो चुकी है या फिर पागल हो रही है तो उस घर में थी एक गैस से जलने वाली लाइट यानी कि गैस लाइट तो हर रात को हस्बैंड क्या करता है कि उस लाइट को धीमी करता तेज करता धीमी करता तेज करता और जब वाइफ यह देखती कि लाइट धीमी तेज हो रही तो हस्बैंड से पूछती कि जो गैस लाइट है यह धीमी और तेज क्यों हो रही तो हस्बैंड कहता कहां धीमी तेज हो रही जल तो रही ठीक से और यह जो
घटनाएं हैं कई महीने तक चलती रही हर बार जब लाइट धीमी तेज होती वाइफ उससे पूछती तो हस्बैंड उस घटना को सीधे से निका देता और कहता कि लाइट ठीक से जल रई शायद तुम्हारा दिमाग खराब हो रहा और तुम पागल हो रही अब वाइफ के पास और कोई इंसान था नहीं जिससे कि वह कंफर्म कर पाती और साथ में वह हस्बैंड पर पूरे तरीके से ट्रस्ट भी करती थी तो उसके दिमाग में यह बैठने लगा कि शायद वह पागल हो रही और धीरे-धीरे वह पागल हो ही गई तो यहां से शब्द आया है कैस
लाइटिंग और हां यह मूवी शायद आपको में मिल जाएगी लेकिन इंग्लिश में होगी अब हम यह जान लेते हैं कि गैस लाइटिंग के लिए बेस्ट कंडीशंस कौन सी होती हैं अगर किसी रिश्ते में पावर का इंबैलेंस है तो वहां पर जिस इंसान के पास पावर होगी वह अपने पार्टनर को बड़ी आसानी से गैस लाइट कर सकता है इसको मैं हस्बैंड वाइफ के उदाहरण से समझा देता हूं मान लो जो वाइफ है वो अपने हस्बैंड पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट है तो यहां पर जो हस्बैंड होगा ना वो बड़ी आसानी से अपनी वाइफ को गैस लाइट
कर सकता है कैसे समझो जरा सबसे पहले जो हस्बैंड है ना अपनी वाइफ से छोटे-छोटे झूठ बोलना शुरू करेगा वाइफ को पता चल जाएगा कि उसका हस्बैंड उससे झूठ बोल रहा लेकिन फिर भी उसे इग्नोर करेगी क्योंकि वह अपने हस्बैंड पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट है और साथ में जो वाइफ है वह खुद को यह भी समझाने का प्रयास करेगी कि छोटा सा तो झूठ है इग्नोर करो लेकिन यह झूठ बढ़ते चले जाएंगे फिर क्या होगा जब हस्बैंड के झूठ बढ़ते जाएंगे तो एक दिन वाइफ को गुस्सा आ जाएगी और वह अपने हस्बैंड से बोल
देगी कि तुमने उस दिन उससे झूठ क्यों बोला था तो फिर हस्बैंड पता है क्या करेगा पूरे कॉन्फिडेंस के साथ मना कर देगा और कहेगा कि उसने कोई भी झूठ नहीं बोला था और हो सकता है साथ में अपनी वाइफ पर चिल्ला भी दे फिर जैसे ही ये होगा ना वाइफ तनाव में आ जाएगी क्योंकि वह जिस इंसान पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट थी उससे भी एक दूरी बनती नजर आ रही अब आगे हस्बैंड जब भी कोई झूठ बोलेगा ना तो वाइफ उसे इग्नोर करने लगेगी क्योंकि उसे कोई सपोर्ट करने वाला नहीं है और साथ
में अगर उसने उस झूठ का विरोध किया तो बदले में जो उसे तनाव झलना पड़ेगा उससे भी वो बचना चाहेगी और फिर धीरे-धीरे वह हस्बैंड के बड़े-बड़े झूठ को भी एक्सेप्ट करने लगेगी कुल मिलाकर हस्बैंड ना धीरे-धीरे अपनी वाइफ पर पूरी तरीके से साइकोलॉजिकल दबाव बना चुका होगा और धीरे-धीरे वाइफ अपने हस्बैंड के सारे झूठ को एक्सेप्ट करने लगेगी कहने का मतलब हस्बैंड के झूठ ही उसके जीवन की सच्चाई बन [संगीत] जाएंगे इसको मैं एक और हस्बैंड वाइफ के उदाहरण से समझा देता हूं मान लो एक हस्बैंड है जो बहुत कोशिश कर रहा लगातार प्रयास
कर रहा है लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी वह फेल होता जा रहा और धीरे-धीरे जो उसका कॉन्फिडेंस है वह गिरता जा रहा तो अगर उसकी वाइफ साथर होगी तो वह अपने हस्बैंड को बड़ी आसानी से अपने कंट्रोल में कर सकती है तो फिर वो सबसे पहले क्या करेगी हस्बैंड को अपनों से आइसोलेट कर देगी यानी कि दूर कर देगी इसके बाद चूंकि हस्बैंड को खुद पर कॉन्फिडेंस ही नहीं है तो धीरे-धीरे जो वाइफ के दृष्टिकोण होंगे वही हस्बैंड के दृष्टिकोण बन जाएंगे कोई भी डिसीजन लेना होगा तो हस्बैंड वाइफ की तरफ देखेगा क्योंकि उसे
खुद पर कॉन्फिडेंस ही नहीं और वाइफ भी उसे धीरे-धीरे यह एहसास दिलाने की कोशिश करेगी कि वो दुनिया को समझ ही नहीं रहा और ना ही वह जिंदगी को समझ पा रहा इसी वजह से वह लगातार फेल होता जा रहा फिर क्या होगा जो वाइफ होगी ना बदतमीजी भी करेगी तो हस्बैंड उसका विरोध नहीं कर पाएगा और वाइफ बीच-बीच में यह एहसास दिलाती रहेगी हस्बैंड को कि वह उससे बहुत प्यार करती है धीरे-धीरे क्या होगा जो लाइफ के मेजर डिसीजन होंगे ना वो वाइफ लेने लगेगी यानी कि किससे रिश्ता रखना है किससे तोड़ना है किससे
तुम्हें लड़ाई करनी है किससे लड़ाई नहीं करनी है सब कुछ कौन डिसाइड करेगी वाइफ हस्बैंड को भी यही लगेगा कि उसकी वाइफ ही सही है और बाकी दुनिया उसकी दुश्मन है और अगर हस्बैंड कुछ ज्यादा ही मूर्ख हुआ ना तो एक तरफ तो वह अपनी वाइफ के हिसाब से चलेगा और दूसरी तरफ वह यह भी सोचेगा कि वह अपनी लाइफ के डिसीजन खुद ले रहा अब पूरे समाज के स्तर पर गैस लाइटिंग कैसे होती है इसको भी मैं दो उदाहरण से समझा देता हूं पहला उदाहरण गैस लाइटिंग वहां पर आसान होती है जहां पर स्टीरियो
टाइपिंग कर दी जाती है जैसे कि परंपरागत रूप से यह कहा जाता रहा है कि महिलाओं के पास बाहरी दुनिया की समझ नहीं होती इस वजह से उन्हें बाहरी दुनिया के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए उन्हें बस किचन का काम देखना चाहिए इसके अलावा यह भी कहा जाता रहा है कि निचली जातियों के पास उतनी समझ नहीं होती जितनी कि ऊंची जाति के लोगों के पास होती है क्योंकि भगवान ने ऊंची जाति के लोगों को ज्यादा समझ और ज्यादा ज्ञान दिया है तो अगर कोई महिला या फिर निचली जाति का इंसान इन सब बातों
पर भरोसा करता होगा ना तो उसे गैस लाइट करना बहुत ही आसान है क्योंकि उसे खुद पर कॉन्फिडेंस ही नहीं दूसरा उदाहरण जैसे कि जो हमारा रिश्ता होता है अपने भगवान से वो बेहद निजी प्रकृति का होता है जो हम प्रार्थनाएं करते हैं यानी कि जो हम प्रेयर्स करते हैं वो चिल्लाकर नहीं बल्कि मौन में की जाती हैं लेकिन हजारों साल की मेंटल कंडीशनिंग के द्वारा लोगों के दिमाग में यह बैठा दिया गया है कि आपके द्वारा की गई कोई भी प्रार्थना और पूजा तभी ईश्वर तक पहुंचेगी जब वह खास वर्ग के लोगों के द्वारा
संपन्न कराई जाएगी सच का एहसास लोगों को है लेकिन इसके बावजूद भी जो लोग हैं वह उसी तरीके से पूजा पाठ संपन्न करवाते हैं जैसे कि उस खास वर्ग के लोगों ने कहा है क्योंकि लोगों को खुद पर कॉन्फिडेंस ही नहीं लोग यह सोचते हैं कि कहीं ऐसा ना हो कि इन लोगों ने जो बातें कही है वो सच हो जाएं यानी कि हम अकेले में पूजा प्रार्थना कर ले और भगवान जी फिर हमसे नाराज हो जाएं और उनका कहर बरस पड़े और हम लोगों ने जो समाज बनाया है जो अर्थव्यवस्था बनाई है और जो
जीवन की संरचना बना रखी है वह कुछ इस तरीके से बना रखी है कि हमारे जीवन में कहर बरसते ही रहते हैं यानी कि हमारे जीवन में परेशानियां आती ही रहती हैं फिर जैसे ही हमारे जीवन में कोई समस्या आती है ना फिर वही पूजा पाठ करवाने वाले लोग हमारे सामने आते हैं और हमसे यह कहते हैं क्योंकि आपने वोह जो पूजा करवाई थी वह पूरे विधि विधान से नहीं करवाई थी इस वजह से आपके जीवन में यह समस्याएं आई हैं और हम उन बातों को सच मान लेते हैं क्योंकि हमें खुद पर कॉन्फिडेंस ही
नहीं तो यह सब क्या है हजारों साल की परंपराओं के द्वारा पूरे समाज को गैस लाइट किया जा रहा सच्चाई का एहसास हम सबको होता है लेकिन फिर भी हम जीवन बिल्कुल उसी तरीके से जीते हैं जैसे कि यह परंपराएं हमसे कहते हैं [संगीत] अब यह समझ लेते हैं कि गैस लाइटिंग के कौन-कौन से तरीके हैं और जो भी तरीके हैं वह लंबे समय में अपना असर दिखाते [संगीत] हैं जैसे आपके साथ किसी ने कुछ गलत किया या फिर कोई प्रॉमिस तोड़ा और बाद में जब आपने उस इंसान को याद दिलाई कि आपने वह गलत
क्यों किया या फिर प्रॉमिस क्यों तोड़ा तो सामने वाला इंसान क्या करेगा सीधे-सीधे डिनायर देगा और वह क्या कहेगा कि उसने आपके साथ कुछ भी गलत नहीं किया और ना ही कोई प्रॉमिस तोड़ा [संगीत] है इसमें क्या होता है मान लो आप कोई जरूरी बात किसी से बता रहे लेकिन जिससे आप वो जरूरी बात बता रहे हैं वह एक मैनिपुलेटर है तो पता है क्या करेगा जब भी आप वह बातें बता रहे होंगे तो आपकी तरफ इस तरीके से देखेगा जैसे कि उसे समझ ही नहीं आ रहा कि आप उससे क्या कह रहे और थोड़ी
देर बाद वह आपकी बातों को ना सुनने की एक्टिंग करने लगेगा और ऐसा अगर आपके साथ अक्सर होने लगे ना तो उसके द्वारा किए गए गलत बिहेवियर के बारे में भी उससे कभी नहीं कहेंगे सब कुछ बर्दाश्त करने लगेंगे क्योंकि उसने लगातार आपकी बातों को इग्नोर करके आपका कॉन्फिडेंस ही तोड़ दिया है और आप खुद के बारे में यह सोचने लगे हैं कि शायद आपकी बातें किसी खास महत्व की नहीं होती इसमें क्या होगा मान लो आपने किसी इंसान को किसी घटना के बारे में बताया कि उस दिन यह यह हुआ था और इन इन
लोगों ने अपना दिमाग लगा के सब कुछ बिगाड़ दिया था अब सामने वाला इंसान मैनिपुलेटर होगा ना तो पता है वो क्या कहेगा वो यह कहेगा कि तुम्हारी यादाश्त ठीक नहीं है उस दिन ऐसा नहीं हुआ था बल्कि ऐसा हुआ था यानी कि वह एक काउंटर स्टोरी बता देगा क्योंकि आप उस पर पूरी तरीके से डिपेंडेंट है इस वजह से उसकी कहानी पर भरोसा करना ही उचित समझेंगे क्योंकि आपको तनाव से भी तो बचना है बहस तो करेंगे [संगीत] नहीं इसको भी समझ लो कि मान लो किसी दिन आपकी गर्लफ्रेंड ने आपसे बदतमीजी की और
अब आप उससे उस घटना के बारे में बात करना चाह रहे लेकिन अगर आपकी गर्लफ्रेंड मैनिपुलेटिव होगी तो पता है क्या होगा आप बात तो शुरू करेंगे लेकिन थोड़ी ही देर बाद पाएंगे कि आपकी जो बहस हो रही किसी दूसरे ही टॉपिक पर हो रही ओरिजिनल टॉपिक गायब हो चुका है तो यहां पर क्या हुआ होगा सबसे पहले आपकी गर्लफ्रेंड ने जो ओरिजिनल डिस्कशन था उसे ब्लॉक किया होगा और फिर बड़े साते तरीके से उस डिस्कशन को किसी और दिशा में डाइवर्ट कर दिया होगा जैसे मान लो आपने अपनी गर्लफ्रेंड से कहा कि तुमने उस
दिन मेरे से बदतमीजी क्यों की तो आपकी गर्लफ्रेंड यह बोलेगी कि मैंने तुमसे बदतमीजी की यह सच है लेकिन मैंने इसलिए की क्योंकि तुमने 10 दिन पहले मेरे साथ यह किया था और फिर डिस्कशन इस इस बात पर स्टार्ट हो जाएगा कि आपने उसके साथ 10 दिन पहले वह बदतमीजी की थी या नहीं की थी और फिर आप अपनी सफाई देने लगेंगे कि आपने वह बदतमीजी नहीं की थी यह कुछ ऐसे ही काम करता है इसी से जुड़ी हुई एक गांव की कहावत मुझे याद आ रही कि निकले थे हरि भजन को ओटे लगे कपास
यानी कि हम निकले थे ईश्वर का भजन करने लेकिन हम क्या करने लगे कपास के बिनोल से कपास निकालने लगे [संगीत] यह बहुत ही कॉमन है इसमें जो मैनिपुलेटर होता है ना वह आपको एहसास दिला देता है कि आप जो भी बोल रहे वह खास महत्व का नहीं है और वह आपसे यह कहेगा कि उस दिन जो कुछ हुआ था उसको लेकर आप ज्यादा ही ड्रामे हो र है ज्यादा ही इमोशनल हो र है इतना ड्रामे और इमोशनल होने की जरूरत नहीं है यानी कि वो आपकी बातों का महत्व कम करने की कोशिश करेगा तो
यह कुछ तरीके हैं जिनसे गैसलाइट की जाती है भले ही आपको यह सब तरीके खतरनाक ना लगे लेकिन अगर आप किसी इंसान पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट हैं और आपके साथ यह सब चीजें लंबे समय से हो रही तो यह सब बहुत ही खतरनाक हो जाता है आपकी अपनी लाइफ पर जो कंट्रोल होता है ना वह लगभग खत्म सा हो जाता [संगीत] है चलिए अब आपको मैं यह बता देता हूं कि आप कैसे पहचानेंगे कि आप गैस लाइट हो रहे या फिर नहीं जब भी कोई इंसान आपको गैस लाइट करेगा ना तो आपके जीवन में
ढेर सारी प्रॉब्लम्स आना शुरू हो जाएंगे उन प्रॉब्लम्स को ठीक से एनालाइज करके आप पहचान सकते हैं कि आप गैस लाइट हो रहे अथवा [संगीत] नहीं किसी घटना के बारे में कुछ समय पहले तक आपको अच्छे से पता था कि ऐसा हुआ था लेकिन अब अगर आपके मन में डाउट आ रहा और आप यह सोच रहे हैं कि सच में ऐसा हुआ था या नहीं हुआ था तो शायद आप गैस लाइट किए जा [संगीत] रहे आप बिल्कुल अलग थलग पड़ चुके हैं आपके साइट की स्टोरी पर कोई भी भरोसा नहीं कर रहा तो शायद आप
गैस लाइट किए जा रहे आपको अच्छे से पता है कि आपकी गलती नहीं है इसके बावजूद भी आपको यह लगने लगा है कि आपको ही माफी मांगनी पड़ेगी तो आप गैस लाइट किए जा रहे हैं [संगीत] जब भी कोई हमें गैस लाइट करता है ना तो उसका असर यह होता है कि धीरे-धीरे जो हमारा सेल्फ कॉन्फिडेंस होता है सेल्फ एस्टीम होता है वह खत्म होता चला जाता है तो अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है ना तो देखिए कोई आपको गैस लाइट तो नहीं कर [संगीत] रहा लाइफ की किसी बुरी सिचुएशन में आप फंस
चुके हैं आप परेशान हैं सब बदलना चाहते हैं इसके बावजूद भी आप बदल नहीं पा रहे आप होपलेस हो चुके हैं आपकी साइड की स्टोरी पर आपकी बातों पर कोई भी भरोसा नहीं कर रहा तो शायद आपको गैसलाइट किया जा चुका [संगीत] है जब भी कोई आपको गैस लाइट करेगा ना तो आप डिप्रेस्ड हो जाओगे एंजाइटी अपने पीक पर होगी सेल्फ एस्टीम खत्म हो चुका होगा और आप अपनी लाइफ के डिसीजन तक नहीं ले पाओगे और अगर चीजें अपने एक्सट्रीम तक पहुंच चुकी है तो आपको ऐसा लगेगा जैसे कि आप पागल हो रहे हैं [संगीत]
अब हम यह समझ लेते हैं कि लोग ऐसा करते क्यों हैं जो एब्यूजिंग और टॉक्सिक रिलेशनशिप होती है वहां पर गैस लाइटिंग बहुत ही कॉमन होती है यह जो अबूसिव और टॉक्सिक रिलेशनशिप प्रोफेशनल लाइफ से भी जुड़ी हो सकती है और पर्सनल लाइफ से भी जुड़ी हो सकती है इसमें जो मैनिपुलेटर होता है ना वह अपने टारगेट को पूरे तरीके से कंट्रोल करने के लिए और खुद पर डिपेंडेंट बनाने के लिए ऐसा करता है जैसे ही सामने वाला इंसान मैनिपुलेटर पर पूरे तरीके से डिपेंडेंट हो जाएगा इस के बाद क्या होगा मैनिपुलेटर जैसा चाहेगा वैसे
उसको मिसयूज [संगीत] करेगा अगर आप गैस लाइट किए जा रहे है तो आप कैसे डील कर सकते हैं अब यह समझ लो हमेशा हर एक डिसीजन के लिए हर एक बात के लिए सामने वाले का मुंह ताकना बंद करो खुद की इंस्टिंक्ट और गट लेवल फीलिंग पर भरोसा करना सीखो जब भी मैनिपुलेटर कुछ गलत बिहेव करे ना तो उसका प्रॉपर रिकॉर्ड रखो और आगे चलकर जब भी आप उसे याद दिलाओ ग कि तुमने उस दिन ऐसा क्यों किया था तो पता है क्या कहेगा कि उसने ऐसा नहीं किया था तब आप उसे कायदे से याद
दिलाओ कि किस दिन कितने बजे किन लोगों के सामने तुमने बत्तमीजी की थी किसी एक पर डिपेंडेंसी मत बनाओ और अपनों से खुद को आइसोलेट मत करो आपके लाइफ में कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिनसे आप सारी बातें शेयर कर सके उनके सुझाव जान सके उनका पर्सपेक्टिव जान [संगीत] सके अगर पॉसिबल हो तो मैनिपुलेटर से दूर हो जाओ इमोशनल कमजोरी के चलते उससे जुड़े रहने की कोशिश मत करो जब आपको ऐसा लगने लगे कि ऊपर मैंने जितने भी सुझाव दिए हैं वह आपके काम नहीं आ रहे आप खुद को बचा नहीं पा रहे तो मैं
हूं यहां पर और जल्दी मैं आपको अपना नंबर रिलीज कर दूंगा तो यह वीडियो यहीं खत्म होता है तो अब आप यह बताइए कि यह आपके पल्ले पड़ा या नहीं पड़ा अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो लाइक कर दीजिए अपनों से शेयर कर दीजिए और अगर आपने अभी तक फॉलो ना किया हो तो फिर फॉलो कर लीजिए [संगीत]