विकारी वृत्तियों में शोषण वृद्धियों में इंद्रियों के साथ फिसल जाना यह मां की आदत इंद्रिय आकर्षण राज्यों तमोगुण वादी जाए ये मानते अपने असुर कहिए और नहीं देव नहीं आकृति से डैन नहीं होते कर्मों से विचारों से और गुना से दानव मानव और देवबंदी कोई मनुष्य देवता जैसा दिखता है कोई मनुष्य मनुष्य जैसा देखा और कोई मनुष्य देवेन दोनों जैसा दिखता है तो कोई मनुष्य देव में मटका करता हुआ परब्रह्म परमात्मा स्वरूप देखा है [प्रशंसा] तुम्हारे भीतर का होता है वैसा ही बाहर तुम्हारा आचरण बंता है धरती पर जब असुरों का बोलबाला हुआ असुर उसे
कहते जो और नहीं सुमन जिनके हृदय में देवत्व नहीं है सज्जनता नहीं है ऐसे लोग बाढ़ गए प्रजा का शोषण करके अपने हाथ में अधिकार लेकर तमाम सैया तमाम बाल तमाम सातों पर वे लोग स्वर हो गए जो दायित्व वृत्ति के थे जो असुर थे डे ऊंची गाड़ियों पर ऊंची जगह पर आदि हो गए तो जो सज्जन के हाथ में व्यवस्था होती तो बहुजन हिताय बहुजन सुखे करता और दुर्योधन जैसे दुर्जन के हाथ में व्यवस्था होती है तो अपने लिए सब करता है की यह सब मेरे लिए करने को तैयार है और अर्जुन कहता है
की मैं इनके लिए युद्ध करता हूं मैं मेरे वालों की युद्ध मुझे राज्य नहीं चाहिए लेकिन प्रजाति व्यवस्था होती तो फिर मैं युद्ध करता हूं मुझे नहीं चाहिए और दुर्योधन कहता है यह मेरे लिए करने को तैयार है अर्जुन कहता है मैं इनके लिए तैयार हूं इनके लिए अर्थात ये जो सज्जन सुखद हैं उनके लिए तो आसुरी वृद्धि अपने लिए खींच दिया और देवी वृत्ति सबकी भलाई पर एक बार ब्रह्मा जी के पास असुर और दायित्व गए असुरों ने दैत्य ने कहा की भगवान की सृष्टि है और फिर भी इस भगवान की सृष्टि में हम
देखते की जब जब भगवान अवतार लेते हैं तो है ब्रह्मा जी साड़ी सृष्टि आपकी उत्पन्न क्यों है आप में सत्ता भगवान लेकिन भगवान देवों का पक्ष लेते और दायित्वों को हर दिलाते हैं ऐसा क्यों यह नहीं होना चाहिए अपने यहां प्रीति भजन की व्यवस्था है हम दैत्य को असुरों को भी आमंत्रण देते हैं और देवी देवताओं को भी आमंत्रण देते हैं यहां बहुत कार्यक्रम होगा उसमें तुम्हारे सवाल का जवाब मिल जाएगा दैत्य ने सोचा की पहले देवताओं को खिलाएंगे हम को रुख सुख देंगे या झूठ देंगे लेकिन ब्रह्मा जी ने डेटन के लिए सुंदर व्यवस्था
की उन्हें जो भजन प्रिया हो बाहर हो प्याज हो मिर्च हो मसाला हो बंसी होती कहो चमचमाता हो यह दायित्व को भजन प्रिया और जो पौष्टिक हो सात्विक हो डर तक डंबल वर्धन को बुद्धि में सज्जनता ले ऐसा भजन देवी स्वभाव वालों को जैसे खीर है जो है गेहूं है इससे बनी डेटन को पसंद पड़े ऐसे भजन की व्यवस्था [संगीत] तब से लेकर भजन जब तक पूरा नहीं हुआ तब तक तुम्हारे हाथ की कोनी सीधी कर देता हूं सकल से हाथ की कोनी मुड़ेगी नहीं वो सीधा रहेगा स्टेट हाईवे बच्चे भजन करो आप दैत्य ने
उठाया तो हाथ सीधे का सीधा तो मुंह में कैसे आए बस एकदम सीधी में लेकर आयो छोड़ें ग्रास यूं छोड़ें तो थोड़ा मुंह में जाए थोड़ा नाक के घूंगरे में घुस जो थोड़ा आंखों पर चित ग जाए अब कल्पना करो चमचमाता मसालेदार मिर्च वाला भजन मुंह में आए तो गनीमत है लेकिन आसपास में भी उसकी असर तो है कोई हाथी करें तो कोई आंखें लाल करें तो कोई कुछ करें लेकिन भजन करके उठाना है जैसे कैसे भजन किया और उठे देखा की अब देवताओं को तो ऐसा नहीं करेंगे लेकिन ब्रह्मा जी ने देवताओं के लिए
भी संकल्प किया के पुत्रों तुम जब तक पत्थर पर बैठे हो तब तक तुम्हारे हाथ की 19 सीधी रहेगी भजन कर लो देवताओं ने सोचा की अब हाथ की कौन सी सीधी है तो क्या फर्क पड़ता है उठाएं पाताल से और सामने वाले के मुंह में दाल दिया और सामने वाले ने उठाया आमने दाल दिया आमने सामने सामने भर पेट भजन किया ब्रह्मा जी ने कहा भगवान दायित्वों के दुश्मन नहीं है और देवताओं के पक्षपाती नहीं है जैसे सूर्य का प्रकाश कोल्स पर भी पड़ता है और मिनरल पर भी पड़ता है आईने में भी पड़ता
है अब कौन से में योग्यता नहीं है तो प्रकाश का प्रतिबिंब नहीं लेट देता और आईने में योग्यता है तो प्रकाश का प्रतिबिंब लेट है और बिलोरी आईना स्थिर होता है तो प्रकाश के साथ उसकी सूर्य की दहक शक्ति बिल आता है ऐसे ही जिनका देवी स्वभाव है सज्जनता का स्वभाव है वे भगवान का माधुरी भी लेते हैं और ध्यान करते हैं तो योगिया के हृदय में भगवान का समर्थ भी ए जाता है इसमें भगवान क्या करें वह मेरा हो जाता मैं उसका हो जाता हूं क्या करें उसका आदि भौतिक रूप है पृथ्वी देवी का
दूसरा आध्यात्मिक रूप होता है तीसरा आदि देवी रूप होता है जब पृथ्वी भगवान के पास गई तो यह कभी नहीं समझना की यह साड़ी की साड़ी उड़ के उधर पहुंच गए गंगा जी देवव्रत के आगे प्रकट हो गई देवव्रत ने मां को बुलाया और मां गंगा प्रगति हो गई तो ऐसा नहीं की भागीरथी का जल की धारा उसे लड़के के आगे प्रकट हो तो डब जाएंगे तो गंगा के तीन स्वरूप जो पानी होकर बहता है वह आदि बहुत ही स्वरूप और पुत्र पुकारता और मां प्रगति होती गंगा मां वो उसका आदि देवी स्वरूप है और
आत्मा रूप से गंगा आध्यात्मिक स्वरूप है ऐसे सूर्य कभी तीन रूप होते हैं मैं इस पपिया के बोझ से डब ही जा रही हूं सुखदेव जी महाराज कहते हैं भागवत में के परीक्षक पृथ्वी गांव का रूप लेकर आंसू भा रही थी और उसके आंसू उसके मुख्यमंत्री को भी मालिन कर दें करूं भाव से पुकार करते हुए ब्रह्मा जी को पृथ्वीपन की व्यथा सुने अब ब्रह्मा जी ने देवताओं आदिया को आमंत्रित करके सबल मीटिंग और भगवान शिवा जी से संपर्क करके भगवान आदिनारायण के पास चल दिए जी प्रकार का है उसके गन उसमें आते हैं भगवान
नारायण तो ब्रह्मा जी भी शांत आत्मा हो गए क्योंकि नारायण हमेशा अपने शांत स्वभाव में निमग्न रहते जैसे सागर की गहराई में सागर का जल शांत होता है ऊपर से लहरिया चलती है ऐसे जो शुद्ध बुद्ध सच्चिदानंद परमात्मा है वह अपने शुद्ध शांत स्वभाव में वो अवतार धरण करते तब थोड़ी उनके लीलाएं दिखती है लीलाएं दिखती हो करते लेते-देते दिखते हैं फिर भीतर से जॉन कहते हो श्री रामचंद्र जी भी ऐसे ही सितारे सीता करते हैं लेकिन भीतर्कनी पुरुष जैसा विलाप नहीं है लोग मर्यादा करने करते हुए भोगी तो योग में ले आते हैं संतो
को शांति में ले आते हैं अब भक्तों को भक्ति में ले आते हैं और भक्तों को माधुरी रस का दान कर देते हैं योगिया को अपना सुयोग्य स्वरूप का ज्ञान दे देते हैं भगवान जब न लीला करते हैं मनुष्य बापू में आते हैं तो मनुष्य जीवन का एक सिद्धांत है सुख और दुख भी हो अगर दुख नहीं है जीवन में तो ये मनुष्य लोक की लीला सफल हो जाएगी जय राम जी की संसार को दुखालय कहा है और संसार में आप आए और आपको दुख ना पड़े तो संसार बनाने वाला सफल व्यक्ति होगा जय राम
जी गाड़ी तुम्हारी सूरत थी दिल्ली जाए तो वह सूरत थी जो दिल्ली जाए तो बच्चे जाए कृष्णा कन्हैया अहमदाबाद तो भी उसके जीवन में दुख की रेखाएं दुख के प्रसंग होने ही चाहिए और कृष्णा आए तो भी वाइन बड़ा और दुख होने चाहिए और इन वाइन बड़ा दुखों में दुखी सुखी प्रसंग आते दुखी सुखी होते हुए दिखते हैं लेकिन दुख सुख के गहराई में डूबते नहीं तैरते रहते हैं वो आपको भी ये संदेश देते की भाई ये तो ऐसा ही है जब हम अवतार लेकर आते हैं तो हमको लोग नहीं छोड़ते तो तुमको क्यों छोड़ेंगे
भैया हम मुस्कुरा रहे तो तुम कहे को परेशान होते हो मां की एक विशेषता है तो बातें एक साथ मां में नहीं रहते जी समय मां में दुख राहत है उसे समय सुख नहीं और जी समय सुख है उसे समय दुख नहीं समझो भयानक दुख ए गया भयंकर प्रॉब्लम ए गया आप दुखी रहे कोई चार नहीं कोई असर नहीं मेरे जैसा दुखी तो दुनिया में पैदा ही नहीं होगा तुलसीदास की सखी याद करो तुलसी साथी विपत्र के विद्या विनय विवेक साहस स्वीकृत राम भरोसे एक विपत्ति के साथी क्या है विद्या का आश्रय लो ब्रह्म विद्या
का सत्संग की विद्या का सहारा हो तुलसी साथी विपत के विद्या फिर दुख के समय अकड़ मत बानो मत बानो भी नहीं हो जो यस सर थैंक यू चलते-चलते अथवा किसी करण से जो आदमी गिर जाते हो अकड़ के गिरते तो उनके फैक्चर बहुत होते और जो एकदम ढीला छोड़ देता है उसको फैक्चर ही नहीं होता तो तुलसी साथी विपत्र के विद्या विनय दो तीसरा विवेक की आया है दुख जो आता है वो जाता है अब जो जान वाला है उसको देखकर मैं दम मानो या ठीक नहीं है ठीक है इससे बचाने का उपाय करते
हैं लेकिन तब मरना ये हमारे लिए ठीक नहीं विद्या विनय विवेक फिर दुख में साहस का श्री ने वो दुख देने वाला प्रसंग दुख देने वाली घटना दुख देने वाली व्यक्ति दुख देने वाली स्थिति से भी ज्यादा आदमी कल्पना करके ऐसा हो जाएगा तो ऐसा हो जाएगा और सुख में इतना आकर्षण नहीं होता जितना हम उनके पीछे लल्लू टट्टू हो जाते अगर आप तटस्थ खड़े रहे तो आपको लगेगा लेकिन वह लल्लू टट्टू हो रहे हैं उनको सुख दिखे रहा है उधर सुख उतना है नहीं विवेक से देखो तो लेकिन उनका विवेक मारा गया तो सुख
दिखता है ऐसे किसी को इंटर और डर के भगत हूं मैं आम बैठा लो हुई होकर चलो दुख में तुम्हारे में वो डंडा करने के दौड़ने की वो क्षमता नहीं जितना वो दौड़ के भाग रहा है जय राम जी तो दुख में और सुख में इतना प्रभाव नहीं रामतीर्थ बोलते थे दुख के भैंस तो दुख ए जाए जान छूट निंदा के भैंस तो निंदा हो जाए पट जाए होली होली जो हो गया वो हो गया होली जो बात हो गई हो गई बताई दो तुम्हारे पास गाड़ी है ना या पैदल चलते हुए कभी कहानी यात्रा
करते हो तो कभी-कभी बढ़िया रास्ता आएगा ढलान का रास्ता आएगा गाड़ी आराम से भागेगी और कभी-कभी चढ़ाई आएगी तो चढ़ा उतार आएंगे उसको आप लांग टूटे जाएंगे तभी मंजिल ते करेंगे और अनुकूल रास्ते पे बैठ जाएंगे और प्रतिकूल रास्ते को देखकर उड़ने रोएंगे तो आप वहीं र जाएगी ऐसे ये संसार सागर में आते हो तो चढ़ा उतार के प्रसंग आएंगे अनुकूलता में फसाना मत और प्रतिकूलता से डरो मत चेयर वीटी चरैवेति यात्रा करते जो तो आप मंजिल पर पहुंच जाओगे और आपकी मंजिल है जहां कृष्णा गुनगुना रहे हैं जहां राम तुम्हारे चित में राम रहे
हैं लाल में तुम मंजिल किधर देखा है दिल ही तेरी मंजिल है तू दिल के दिलबर की और देखते रहना कम बन जाएगा यह टैंकर फल विषय एन भाई मनुष्य जीवन का फल यह नहीं की जरा हम भी सहयोगी कण का मजा ले लिया हमें तो लाइफ में एंजॉय किया अरे इंजॉय जितना ज्यादा करते हैं उतना ज्यादा बीमा उतना ज्यादा टेंशन उतना ज्यादा परेशान वो वस्तुओं का एंजॉय नहीं अपने आत्मा परमात्मा का इंजॉय कर तो तेरी निगाहें से भी दूसरों को एंजॉय मिल जाएगा ब्रह्म ज्ञानी की दृष्टि अमृत वर्षी उसे ब्रह्मवेद की चित में जो
परमात्मा सुख है उसने विवेक का उपयोग किया है तो वो परमात्मा भक्ति के किरण उसके आंखों के द्वारा झड़ते हैं उसकी वाणी परमेश्वर सुख को छूकर आई और हमारे कानों के द्वारा घुसकर हमारे चित्र को पवन करती है उसको हवाएं छूकर वातावरण में फैलती है कल एक व्यक्ति आई उनके पास यंत्र है की किस भूमिका कितना प्रभाव किन व्यक्तियों का कितना रेंज तकों से माफ किया तो उन्होंने बोला बापू जी आप इधर हैं तो हमारे यंत्र कम नहीं करते बोले बापू साधारण आदमी की तो 10 फिट 5 फिट 4 फिट तक की हो रहा होती
है आप 5 किलोमीटर दूर हम बता सकते की बापू है की नहीं क्योंकि 5 किलोमीटर तक आपके अब्बा पड़ती है ऐसे अब आप किसी के लिए इंदौर से आए हैं वो कल थे उनके पास कोई अंतर था तो हर एक व्यक्ति हो तो आप जब ईश्वर के साथ एक होकर बोलते हैं ईश्वर के साथ रमन करके आप संसार में विचारण करते हैं तो आपका मंडल होता है वहां मनुष्य में तो सुख शांति भक्ति का संचार होता है लेकिन पेड़ पौधों में भी धन्यवाद और आनंद का उल्लास होता है जब एक योगी के जीवन में होता
है तो योगेश्वर भगवान कृष्णा जब अवतार ले रहे थे नदियों का जल निर्मल बड़ा है आकाश स्वच्छ शीतल और पवन [संगीत] मंद सुगंध पुष्पों की सुगंध लेकर दूसरों को स्पष्ट का सुख देता हुआ बड़ा ऐसा सुंदर वातावरण हुआ क्योंकि भगवान धरती पर निर्गुण निराकार रूप से सबके हृदय में है लेकिन देवकी के चित में विशेष रूप से प्रगति हो रहे ऐसा सुंदर वातावरण हो गया वो वातावरण जी दिन हुआ बहुत दिन आज का दिन जन्माष्टमी का दिन है नारायण हरि नारायण तो तुलसीदास जी कहते हैं तुलसी साथी विपत के विद्या विनय विवेक साहस शुक्र एक
तो स दूसरा करें वह तो मेरे को नहीं छोड़ सकता मैं उसे नहीं छोड़ सकता हूं फिर डरना या घबरा जाना या सुसाइड का सोचना या निरसा हो जाना मेरा कोई नहीं मैं अनाथ हूं जगत का नाथ जी भी थे तो मैं अनाथ कैसे फिर पति मा गया हूं जगत नो पति जीवो से तो तू विधवा सनी बात करें बहुत मदद देता चारों तरफ से गिर गए मुसीबत से आक्रांत हो गए समझो अब कोई उभरते वाला नहीं बस अब हमारा बस सब कुछ गड़बड़ हो गया धीरे-धीरे धीरे-धीरे अब यह मेरे से तो जितना होता है
हो करता हूं अब यह नहीं हो रहा तू संभल अगर देखो की नहीं संभल रहे हैं तो आप एन जल थोड़ा छोड़ दो और उसको मानो उपवास बड़ी तपस्या है दो-चार घंटे में ऐसी शब्द प्रेरणा आएगी की बड़ी-बड़ी आंधी तूफान को ठीक राष्ट्र ठीक करने की अपने क्षमता आएगी या तो सहायता मिलेगी अगर दो-चार घंटे में नहीं तो 24 घंटे के अंदर तो ईश्वरीय अदृश्य सहायता ऐसा कुछ चमत्कार करती की आप कल्पना भी नहीं कर सकते की ऐसा भी कहानी होता है लेकिन इससे भी बहुत कुछ ज्यादा हो सकता है उसकी लीला अपरंपार है [प्रशंसा]
तो भगवान ने कहा की देवता लोग तुम अपना अच्छा होता है सुखदेव जी कहते हैं की राजा परीक्षा वासुदेव और देवकी देवकी का विवाह रथ चल रहे थे और सैकड़ो रथ चलने वाले लोग और कंस ने संभाली अपनी बहन को प्रश्न करने देवताओं ने देखा के पापी आदमी अगर अब उसको खौफ ए जाए डर ए जाए तो डर से वह जल्दी-जल्दी कुछ ऐसा करेगा की उसको रास्ता साफ हो जाए मूर्ख जिसको खुशी खुशी से छोड़ने जा रहा है उसके घर से जो आएगा वह तेरा कल होगा तेरी मौत हो गई कल सुबह से कुर्ता व्यक्ति
अपने स्वार्थ के करण कुछ भी कर सकता है पिता को जय में भी दाल दिया करूर राजा ने भाई की हत्या कर दी करूर औरंगज़ेब ने पत्नी क्यों मौत घाट उतार दे और प्रजा के कई युवान यूतियों को जय में बैंड कर दे अथवा कुछ भी कर सकता है करूर व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए देवत्व वाला नहीं कर सकता युधिष्ठिर नहीं कर सकता लेकिन कंस कर सकता है कंस ने माया से तलवार की अभी जी बहन को ले जा रहे थे ससुराल इस बहन की हत्या करने को तलवार कीजिए की मृत्यु से पर्यटन पूर्वक बच्चे
बलपूर्वक बुद्धिपूर्वक युक्ति पूर्वक शाम से दम से दंड से भेद से मृत्यु के अवसर को डालें परीक्षा बुद्धिमान वासुदेव ने देखा की एक करूर कंस को इस समय समझना जरूरी है और ऐसी युक्ति करें की मां जाए वासुदेव ने कहा के राजाधिराज ऐसा नहीं की अरे कंस का बच्चा यह क्या करता है यह नहीं चलेगा जय राम जी की रक्षक लोकनायक यह आप क्या कर रहे आप तो लोग रक्षक है और आपके द्वारा की हत्या यह इतिहास आपके लिए क्या लिखेगा आप यशस्वी पुरुष और आपके ऐसे निंदा उपयोग की हत्या आप ऐसा कलंक अपने जीवन
में क्यों ले देवकी तो आपको नहीं मारेगी देवकी की पुत्र मारेंगे अगर आप नहीं मानते तो ऐसा करिए देवकी का पुत्र जो होगा मैं आपको दे दूंगा जगत में जहां भी उन्नति और ऊंचाई और उनकी गहराई में कोई एन कोई व्रत और कोई एन कोई तप है तप के बिना कोई चमक नहीं सकता सूर्य ने तप किया सूर्य नारायण होकर चमक रहे ब्रह्मा जी ने तब किया और सृष्टि करने का समर्थ ले नर्मदा किनारे खूब यज्ञ और टपके तब यमराज नियमनपुरी के अधिष्ठाता हुई और इंद्र ने भी खूब तप किया और कई वर्षों में यज्ञ
तब इंद्र पद पर आप है कुबेर ने भी तब क्या और ऊंचे पद को पाया है और कलेक्टर ने भी पढ़ाई का और संयम का जवानी कल में तप किया तब आई एस हुआ और फिर आईएसबी ऐसे नहीं हुए हो हजारों हजारों में से कोई कोई इस पोस्ट मिलती है बाकी के सब अच्छे घिसते रहते बेचारे जय राम जी उसमें भी तब है डॉक्टर बने में भी थोड़ा टॉप है तब के बिना कोई भी उत्तम भोग को पानी सकता और पे तो भोग नहीं सकता टीका नहीं सकता [संगीत] ब्रह्मा परमात्मा तक पहुंच देता है तपेश्वरी
राजेश्वरी राजेश्वरी जोगेश्वरी जोगेश्वरी नारकेश्वरी बागेश्वरी जो संयम और सत्संगी बन जाए तो नरक नहीं वो तो जहां जाएगा स्वर्ग हो जाएगा जब देवकी का प्रथम पुत्र हुआ तो वासुदेव देवकी को जय में रख दिया और प्रथम पुत्र हुआ तो वासुदेव ले आए वासुदेव ले आए सोचा की आठवां मुझे मारेगा वासुदेव को दे डन देव कहां देवताओं को सजा के ये फिर कहानी दिलाना पद जाए देवताओं ने प्रेरणा की और उसकी बुद्धि और बच्चों की हत्या करने ग गया बाल हत्या बड़ा खतरनाक पाप है किसी से आपकी दुश्मन यह उसने आपका बिगड़ा है वह आपकी जान
ले रहा और आप लाड झगड़ के उसकी जान ले लेते हैं वो तो 302 तो होता है लेकिन फिर भी इतना बड़ा पाप नहीं होता जितना निर्दोष शिशु की हत्या से पाप होता है और उससे भी ज्यादा पाप होता है की जो गर्भ में भ्रूण है बालक है की है सचमुच में तो लड़का होता है लेकिन वो सोनोग्राफी वाले अपना धंधा करने के लिए बोलते की कन्या है क्योंकि हमको अबॉर्शन का चार्ज मिलेगा अब किसी को बता दिया करो [संगीत] ऐसे मेरे भक्तों को भी कहानी चस्का लगता और पहुंच जाते सोनोग्राफी वाले को और वह
बोलते हैं लड़की है फिर मेरे पास आते रहते मैं क्या लड़की है तो भी भगवान की लड़का है तो भगवान का धीरज रखो और फिर जब बच्चों का जन्म होता है तो लड़का होता है वो लोग बोलते हैं बापू ने बना दिया नए वो होता ही है हमारे पास युक्ति है अगर गर्भाधान हो गया वह कन्या है मां लो मद का बी है तो 60 दिन [संगीत] पूरा हुए तो कुछ बूटी है वह का ले तो वह कन्या में से बबलू हो जाएगा लेकिन उसकी भी कोई मर्यादा होती है ऐसा कुछ सोनोग्राफी कर पांच में
महीने में और कन्या अच्छी फिर रो धोए बापू मेंबर शंकर नहीं ये पाप मत लो इमोशन करती है माताएं बहाने उनके हाथ की रोटी साधु खाए तो साधु की तपस्या नस होती इतना पाप लगता है हम मौसम गर्भपात से गर्भपात महापापों में है जैसे शराब व्यभिचार और मां सर यह महापाप कर देता है इसे गम पापी महापाप में जीना गया है शराब पीने से जो शराब बंता है तो करोड़ करोड़ जीवाणुओं को मारना पड़ता है और दूसरा शराब पीने से बुद्धि इतनी छोटी हो जाति है की संत के प्रति भगवान के प्रति आत्मा के प्रति
जो आस्था और तत्परता है वह बुद्धि में रहती नहीं ईश्वर का दर्शन करने की योग्यता शराब मार देता है जो शराबी होगा वो पहले बार संत के पास अपने आप नहीं आएगा किसी के करण आएगा अगर फिर आया तो या तो उसका शराब जाएगा या तो वो खुद जाएगा जय राम जी नारायण हरि या तो वो खुद भाग जाएगा नहीं आएगा या तो आता रहेगा तो शराब चला जाएगा प्रेम गली अति संकरी जा में दो ना सम है शराबी बना भी रहे और भक्ति पन भी रहे संभावित नहीं याद तो भक्ति बनेगा महान आत्मा बनेगा
या तो भाग जाएगा [प्रशंसा] तो फिर रात को आप देखें और सपना दिखा रहा अपने मूंछ दिखाई हूं मेगा पी के दिखा दूंगा हमारे मां की योग्यता है दुख राहत है उसे समय सुख नहीं राहत राम रस राहत है उसे समय कामना का कम वासना नहीं रहते और कामवासना होती उसे होता है राम रस नहीं राहत रामायण की कथा है की कुंभकरण को रावण ने जगाया की भाई सब मा रहे हैं हमें तुझे जगत नहीं लेकिन अब मेरा कोई चार नहीं कुंभकरण तो जग में ऐसे-ऐसे सीता को लाया और राम जी युद्ध कर रहे हैं
और हमारा विनाश हो रहा है तो मदद करो कुंभकरण ने कहा की रावण भैया तुमको रूप बदलने की विद्या है तुम रूप राम का रूप लेकर सीता के पास चले जो सीता तो अशोक वाटिका तक तो ले आए हो राम का रूप बनाकर सीता के पास चले जो सीता का सत्य नष्ट हो जाएगा [प्रशंसा] जहां रामटहा नहीं कम जहां कम था नहीं राम तुलसी दोनों र एन सके रवि रजनी एक था कम यौन केंद्र मूलाधार केंद्रक में नाही के नीचे राम का रस यहां हूं जब हृदय का सुख मिलता है तो मां और आपके जीवन
में कितना भी बड़ा भारी कष्ट ए जाए तो क्या करूं यह भावना करो की जय में जिसका जन्म हुआ और जनमत ही पराई घर निभाया गया जिसके आने के पहले एक-एक करके उसके भाई बहन साथ मा गए ऐसे श्री कृष्णा के माता पिता को कष्ट सहाना पड़ा श्री कृष्णा के जीवन में इतना कष्ट आपके जीवन में कष्ट हैं आप कल्पना करो के कृष्णा मंद मंद मुस्कुरा रहे की मेरे दुख के आगे तेरा दुख क्या है मेरे शत्रु के आगे तेरे शत्रु का दम क्या मेरे पर जो लांछन लगे की यहां तक की बलराम भी मेरे
को सोचता था बोलना था की तुम ही ने चुराई होगी तो मेरे कासन के आगे तेरा कष्ट क्या है भूतनाथ का चाटे दिन मुझे जहर पीना पड़ा और तुझे तो छेड़ना में कोई जहर नहीं पीना पड़ा झटका और धन का सुरागसुर बकासुर से तो जूझता पड़ा चारों को मुश्तक मानों से भी जूझना पड़ा सिद्ध साल की उम्र तक कष्ट और वाइन बढ़ाओ से जूते जूते फिर महाभारत की लड़ाई में घोड़ा गाड़ी चलानी पड़ेगी डांडिया कृष्णा कन्हैया लाल की जय इसको नहीं बोलते जन्माष्टमी बोलते कृष्णा का उद्देश्य सफल हो किशन कृष्णा की दृष्टि समाज को मिले
कृष्णा का उद्देश्य समाज में व्याप्त जाए इसका नाम है जन्माष्टमी भगवान कृष्णा का अवतार प्रेम अवतार है कई बार आप यहां इसे आश्रम में सुन चुके हो की कई किम के अवतार होते भगवान की नित्य अवतार होता है जैसे कोई कभी राय कभी नानक आए कभी लीला सब आपो कभी रामानंद कवि बलभाचार्य कबीर रामायण कवि कोई नित्य कहानी एन कहानी संतो का संतो के हृदय में जो भगवान का अवतरण उसको बोलते नित्य अवतार दूसरा होता है नैतिक अवतार लेकर रावण का निमित्त लेकर कोई बड़ा निमित्त लेकर जो भगवान की चेतन विशेष अवतरित हुई उसको बोलते
तीसरा होता है प्रवेश अवतार द्रोपदी ने भीष्म की और देखा युधिष्ठिर की और देखा लेकिन जैसे कढ़ाई में पानी रखो तो अग्नि तो नीचे कढ़ाई के लेकिन अग्नि तत्व का प्रवेश हो जाता है पानी में पानी गम हो जाता है लोहे में प्रवेश हो जाता है अग्नि का ऐसे ही कभी बर भगवान का प्रवेश अवतार भी होता है द्रौपदी इधर उधर देख कर जब निरसा हुई तो पुकार के हजारों निराशामा आसन की किरण तो मेरे भगवान द्वारका बोले तो द्वारका दुशासन के हाथों में हाथों जैसा बाल इतने सारे हाथियों का बाल दुशासन के वास्ता उसने
भर स्वभाव में दुर्योधन के खाने से और अपनी वायर प्रति से द्रोपती को नॉन करना चाहा साड़ी खींच तो जाए अनिंद्रोपदी हम फटी जाए वो लोग हैं तो द्रोपती बापड़ी बढ़नी जाए वो खींचना जाए द्रोपती घूमती जाए वो खींचना जाए द्रोपदी घूमती जाए वो खींचना खींचना खींचना है वह बेचारी घूमती घूमती घूमती जाए कब तक बताओ [प्रशंसा] तो नित्य होता है नैतिक अवतार प्रवेश होता फिर कभी भगवान का कहीं-कहीं आवेश अवतार होता है किसी के हृदय में भी वो भागवत भाव का आवेश हो गया अपने पुत्र प्रहलाद को खूब कष्ट दिया लेकिन प्रहलाद ने भगवान
के प्रति दृढ़ता रखें तू बोलना है मेरा भगवान सर्वत्र है तो तेरा भगवान आप क्या यह टैप हुए लोहे के थांबे में भी है सब में बोले सब में है तेरा भगवान किया तो भगवान नरसी रूप में आवेश अवतार लेकर प्रकट हो गए [प्रशंसा] तो क्या तुम मेरे को क्या समझना हम जल्द से जल्द से कहानी तब से लोगों ने अपने नाम के पीछे सिंह लगाना चालू किया गोविंद सिंह अरिजीत सिंह सुरजीत सिंह सिंह सदैव और सिंधी सैयोन ने माल लगाना चालू किया मारवाड़ी और सिंधी माल दुर्बलता तो किसी को पसंद नहीं चाहे मां हो
चाहे सिंह हो चाहे भाई हो कहे चाहे श्री हो ना आए महात्मा बाल हिना लैब है गरीब दास महात्मा फालना दास दास तो कहलाया नम्रता के लिए लेकिन दुर्बलता तो उसको भी पसंद को सुलाया अपनी जान को पर बोल ऊपर है के नीचे बोले ना ऊपर ना नीचे तेरे को वरदान मिला था ना ऊपर मारे ना नीचे मारे देवता सिनेमा ब्रह्मा जी का बनाया नहीं हूं आधार न और आधार सिंह नरसिंह कैसी क्षमताएं कैसी शक्तियां हैं उसे सच्चिदानंद में अगर तुम शक्यम अन्यथा कर तुम पप्पू लावतार ज्ञान प्रधान होता तो नित्य अवतार नियमित होता प्रवेश
होता है इस प्रकार भगवान के और भी अवतार आयुध अवतार सुदर्शन गया पीछे पड़ा सुदर्शन दोस्त के पीछे पड़ा और उसने क्षमा याचना की तो सुदर्शन वापस ए गया अभी कोई हत्यारी फेंकता है बम और सामने देश वाला हाथ जोड़े के बम देवता तू वापस जा तो क्या बम का आप वापस जाएगा है अब बारिश के दिन उपवास खोलना है साधु संत ब्राह्मण ए जाए तो भजन करें तो आनंद की बात है दुर्वासा ऋषि आए दुर्वासा ऋषि आए तो बोले अच्छा तो हम अभी नहा कर आते हैं बरस का तुम्हारा भजन हम ग्रहण करते हैं
उन्होंने गए तो गए डर हो गई ब्राह्मण ने कहा की बरस खोलना का मुहूर्त चला जा रहा है अमरीश राजा मुहूर्त के समय व्रत खोल देना चाहिए तो अब महाराज नहीं खाए उसके पहले हम कैसे खाएंगे महाराज अतिथि हैं तो बोले जलपान करके भी खोल दो इंतजार करने के बाद दुर्वासाए और दुर्वासा ने देखा की हां हमारे आने के पहले तुमने व्रत खोल तुम देख लो आप हमारा अपमान करने का मजा तो वह तो जो फेंका त्रिज्या कृपया अमरीश को करने किया जाए अमरीश के नजदीक गए तो भगवान का सुदर्शन चक्र ए गया और सुदर्शन
के तेज से वह कृत्य इतनी परेशान हुए रखना वाले दुर्वासा घूमते घूमते ब्रह्मा जी के पास गए ब्रह्मा जी ने कहा एक्सिस में माफ करो आप ऐसा करें शिवा जी के पास है शिवा जी ने शिवा जी के पास गए शिवा जी ने कहा देखो ये भगवान नारायण का विषय है उधर ही चले जो नारायण के पास गए तो नारायण ने कहा की भाई मैं तो भक्तों के पराधीन भक्तों की रक्षा के लिए सुदर्शन रखा है भक्तों को तकलीफ हो तो सुदर्शन श्रेष्ठ दर्शन यह भी सुदर्शन और भगवान का युद्ध भी सुदर्शन आप अमरीश के
पास ही चले जो जब दुर्वासा घूम-घाम के अमरीश के पास आते के राजा अमरीश तुम्हारा अपमान करने से और तुमको अकारण दंड देने से भगवान का युद्ध मेरे पीछे पड़ा है तुम ही बच्चा सकते हो अमरीश शर्मिंदा से हुए आर्मी अमरीश को संकोच सा हुआ वे सज्जन आत्मा थे अमरीश ने सुदर्शन को हाथ जोड़कर प्रार्थना की ये तो संत पुरुष हैं इनका कोई दोष नहीं है गलती है तो मेरी है आप क्षमा करिए सुदर्शन अदृश्य हो गया यह भगवान का युद्ध अवतार है भगवान की चेतन उनके हत्यारा में भी [संगीत] भगवान का अर्चना अवतार माना
गया आप पत्थर की मूर्ति है शालिग्राम की उसमें आप भागवत बुद्धि करके अर्चना करते तो डर साबिर आपकी अर्चना केवल से आपका अंतर आत्मा स्वच्छ शुद्ध होता है और आपको उसे मूर्ति की पूजा से भी लाभ मिलता है यह भगवान का अर्चना अवतार भगवान का एक अवतार होता है प्रेरणा होता है आपने कोई शुभ कर्म किया और सच्चे हृदय से कुछ प्रेरणा मांगते तो अंतर्यामी परमेश्वर आपको सही प्रेरणा भी देता है आपकी कोई अच्छी कमाई है कुछ पुण्य है तो आपको देखेगा की यह संत है ये ऐसा है ये करना ठीक है ये करना एक
भगवान का अवतार है अंतर्यामी होता है आप कुछ बढ़िया करते सेवा करते हैं शुभ कर्म करते तो वह धर्म बन जाता है शुद्ध ज्ञान ऐश्वर्या ज्ञान आता है बुद्धि में तो ब्रह्म ज्ञान बन जाता है और आपके हृदय में भागवत प्रेम आता है तो प्रेम भक्ति बन जाति है वह भगवान की भक्ति का अवतरण आपके चित में होता है उसको बोलते प्रेरणा होता अंतर्यामी अवतार आपने बड़ा किया किसी ने नहीं देखा लेकिन वो अंतर्यामी तुम्हें कोस्टा है की नल गलती किया वैसे एक आदमी हमारा राहत तब तू तेरे को हिस्सा मिलेगा वो अंदर गए गठिया
में धनिया मां दी तुलसी दास ने आवाज मेरी सावधान कोई देख रहा है कोई देख रहा है कोई देख रहा है देख रहा है देख रहा है करके तुलसीदास के पास तो शंकर डा फूंक दिया [प्रशंसा] चोरों ने कहा यह क्या करते हो कौन देख रहा है इधर तो कोई आदमी नहीं बोले नहीं वो कोई देख रहा है अंतर्यामी ईश्वर देखना है मेरे हृदय में भी देख रहे हैं और आपके हृदय में देख रहा है आपने कहा था की कोई देखें तो आवाज मारना इसलिए मैंने आवाज मारा अरे बोले क्या आवाज मारा ये तो पड़ोस
के लोग भी आए भागो रे भाग बोले भागो क्या अंतर है भाइयों उन चोरों को तुलसीदास ने जो दो बातें कहानी चोरों ने देखा है तो संत पुरुष है अरे हमारा मंगल करने के लिए हमारे साथ चोरों के रूप में चलकर भी हमारा उधर करते हैं ये कैसे साहूकार संत हैं उन चोरों ने दीक्षा ले ली दीक्षा का मतलब है दिशा ले ले दीक्षा का दूसरा मतलब क्या है [संगीत] करना चाहता नस करना चाहता हूं जो सुख शांति भक्ति मुक्तिज आरोग्य देने की क्षमता रखना हो तो आयु आरोग्य शांति शक्ति देने की क्षमता रखें इन
दोनों के मेल का नाम होता है दीक्षा मंत्र दीक्षा व्यक्तिगत जीवन में निखार और सामाजिक जीवन में शान-मान बढ़ाने वाला पुष्टि देने वाला मंत्र दीक्षा मंत्र का दूसरा नाम मंत्र जाए उसे दिशा का नाम मंत्र तीसरा अर्थ है अंत में मनन करो उसको मंत्र बोलते हैं और मंत्र भक्ति मार्ग का पांचवा सोपान माना गया पांचवी प्रगतियों भक्ति न्यू मंत्र के बड़े जब करते हैं तो हमारी 84 नदियां 26 अप साथ जंक्शन उन पर आध्यात्मिक वाइब्रेशन सात्विक वाइब्रेशन पढ़ने हैं जैसे मंत्र है आपका राम राम तो आंतों का विश्व बाहर ए जाता है सूक्ष्म शरीर पुष्ट
हो जाता है अगर मंत्र में आओ शब्द है तो आपके अमु कामुक इंद्रियों पर उसकी इफेक्ट पड़ती है मंत्र में उसे शब्द है तो जिगर पेट एंट्राडिया आदि पर अच्छी असर पड़ती है मंत्र में रहो शब्द है तो उधर विकार दूर होते यह तो आज के वैज्ञानिक बोलते हैं लेकिन भारत के वैज्ञानिक संत तूने कहा की यह मंत्र फिजिकल शरीर को तो असर करते फायदा करते हैं लेकिन आपके मां पर भी असर करते बुद्धि पर भी असर करते हैं और पांच ओशो से भारत तुम्हारी परमात्मा चेतन को निखार कर तुम्हारे को संसार सागर से तारने
में भी सहायता करते हैं अजीन के पास गुरु मंत्र है उसका आश्रय ले तो बड़े-बड़े वाइन बड़ा और भाई के समय भी मंत्र जब से वो निर्भय व्यक्ति की नहीं सफल भी हो सकता है [संगीत]