[संगीत] इट्स माय फर्स्ट टाइम। तो बहुत लिटल भी धग-धग होती है। इतना स्पोर्ट्स में नहीं होती और आज तक भी नहीं हुई। जब सर ने प्राइम मिनिस्टर सर ने मुझे अवार्ड दिया था तब भी नहीं हुई थी जितना आज लग रहा है क्योंकि इट्स द फर्स्ट टाइम्स। तो और मुझे लगता है कि एक स्ट्रगल की स्टोरी 18 मिनट के लिए तो सही नहीं है ना ज्यादा होना चाहिए था टाइम तो इट्स ओके सो माय स्टोरी इज जो ये थीम है मुझे लगता है परफेक्ट है मेरे लिए अ बचपन में काफी स्ट्रगल किए क्योंकि इट्स नॉट
अ स्मॉल फैमिली इट्स अ बिग फैमिली और जब मैं फिफ्थ क्लास में थी तब मेरी मदर की डेथ हो गई और मेरी सिस्टर ब्रदर उन्होंने वो प्यार दिया जो मुझे एक मेरी मदर से मिलना चाहिए था और उन्होंने वो कॉम्प्रोमाइज किए जो उनको अपने ऊपर करने थे लेकिन उन्होंने मेरे ऊपर किए जैसे मुझे शौक था सनग्लासेस का कैप का शुरू से ही मुझे था कि यार मैं ना मैच देखती थी क्रिकेट का तो मुझे सचिन सर बहुत पसंद थे तो मुझे लगता था मुझे सचिन की तरह बनना है और मैंने क्रिकेट भी खेला है और
मैंने रानी झांसी ट्रॉफी भी खेली हुई है और नेशनल भी खेले हुए हैं क्रिकेट में तो लेकिन ये था कि ठीक है कॉलेज में एडमिशन हुआ लेकिन यह था कि कॉलेज में एडमिशन के लिए फीस भी चाहिए उतना तो मैंने सोचा क्यों ना हम ऐसी परफॉर्मेंस करूं कि अपना दिन रात मेहनत करके कि जैसे मैन ऑफ द मैच होता है ना वुमेन ऑफ द मैच मिल जाए वुमेन ऑफ द सीरीज तो उसमें बैट मिल जाए मुझे लेग गार्ड्स मिल जाए टीशर्ट मिल जाए स्टर्ट्स मिल जाए तो जिससे कि फैमिली के ऊपर वो प्रेशर ना आए
कि इतने पैसे लेने हैं या खरीदने हैं वो कहते कहते एडमिशन हुआ कॉलेज में मेरी अच्छी परफॉर्मस पे और मुझे याद है कि मैं जब कॉलेज जा रही थी तो मुझे चार बसेस बदलनी होती थी करोल बाग से करना कॉलेज के लिए और मुझे उस समय होता था कि काश भैया मुझे बोले फादर कि यार स्कूटी ले लो बाइक ले लो तो मैंने जिद भी करी एक दो बारी लेकिन उन्होंने बोला नहीं आप ना जाओ इसी से जाओ लेकिन आज मुझे वो चीज याद आ रही है अच्छी बात है उन्होंने नहीं दी क्योंकि अगर यह
स्ट्रगल अगर मैंने नहीं किया होता तो मुझे इंपॉर्टेंस नहीं पता होती लाइफ की कि कैसे कमाया जाता है, कैसे खर्च किया जाता है और कैसे आपके आगे सक्सेस होती है। लेकिन आपको सिर्फ पाना है उसको और पाने के लिए आपको यह देखना है कि आपको डायरेक्शन क्या चूज़ करनी है। मेरे सामने भी काफी चीजें थी। एंजॉयमेंट था, मूवीज़ थी, ग्रुप थे अच्छे-अच्छे। लेकिन मैंने चूज़ किया मेहनत को। उसके बाद एक टाइम ऐसा आया कि जब मैंने स्कूल जॉइ किया अपना डीपीएस आर्यपुरम उसके बाद मैंने लॉनव जॉइन किया और जैसे उसको जॉइन किया उसके बाद से
जब यह जॉइन किया 2009 में 2007 में फर्स्ट टाइम खेला उसके बाद 2009 में खेला और उसके बाद ये जर्नी शुरू हो गई और उसमें मैंने एशियन खेले एशियन चैंपियनशिप जितने भी अभी तक 2009 से 2023 तक जितना भी मैंने खेला उन सब में मेरे गोल्ड सिल्वर मेडल है। नेशनल लेवल पर भी नेशनल गेम्स लेवल पर भी एक वक्त आया कि अब शादी करनी है। घर वाले कहते हैं ठीक है। मैंने बोला ओके तो 2019 में मैंने शादी की और मुझे पिक्चर फ्रेम वही दिखाया गया जैसे एक को दिखाया जाता है कि ये है ये
है ऐसे है। जब मेरी शादी हुई उसके बाद मैं रहने लगी और मेरा शादी का घर जो था वो मेरे स्कूल से सवा घंटे का रास्ता था। जो जानते समय स्कूल बस में वो 2 घंटे भी जाते पौने दो घंटे भी हो जाते थे और वो ये चाहते थे उस समय कि जब मैं घर पहुंचूं मैं सुबह उठती थी 4:30 और 4 5:45 मेरी बस आ जाती थी और स्कूल हमारा है 7:10 का और जब मैं आती थी तो मुझे घर आते-आते 4:10 4:15 हो जाता था और उसमें वो चाहते थे कि पहले मैं उनके
साथ बैठूं सबके साथ और खाना खाऊं फिर मैं अपने रूम जाऊं और 20 मिनट में दोबारा नीचे आ जाऊं। ऐसा चलता था। मैंने बोला ठीक है यार सब कहते हैं शादी के बाद कॉम्प्रोमाइज करने होते हैं जैसे हर एक फैमिली कहती है और मैं नहीं कहती मॉडर्न फैमिली अभी ऐसी नहीं है अभी भी ऐसे ही है क्योंकि मैं भी उसी फैमिली का सपना देख के गई थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ धीरे-धीरे कोविड आया कोविड में चीजें चेंज हुई आपको ही पता है कोविड में जो टीचर्स थी वो ऑनलाइन क्लासेस ले रही थी सब कुछ तो
जब मैंने ऑनलाइन लेने लगी तो उनको इस चीज से प्रॉब्लम हुई कि आप यहां क्यों क्लासेस ले यहां नहीं लेनी है। आप अपने स्कूल में जाके लीजिए। आई एम अ फिजिकल एजुकेशन टीचर देयर इन डीपीएस आर केपुर। तो मुझे एरोबिक सिखाना था। नहीं नहीं आप यहां नहीं करेंगे कुछ भी। आपको स्कूल जाना है। और उस समय एक कैप के जो पैसे भी होते थे वो भी बहुत ज्यादा थे। तो उस समय जब मैं गई वहां मैंने बोला चलो यार ठीक है कॉम्प्रोमाइज करना है। सिखाया यही है। ये भी कर ले इतने कॉम्प्रोमाइज। तो जैसे ही
वहां जाने लगी फिर धीरे-धीरे यहां पर कुछ नहीं करना है आपको। आपने ये क्या पहना रखा है? पैग क्या पहन रखा है? आपने टीशर्ट इतनी क्यों है? आपकी टीशर्ट इतनी होनी चाहिए। आपके सर पे चुन्नी होनी चाहिए। हर एक चीज बोली गई जो कि नहीं होनी चाहिए थी। मुझे लगा कि ही इज़ एजुकेटेड एंड ही इज़ इन मीडिया। तब भी वो ऐसा होगा तो मैंने सोचा नहीं था कि यार यह मतलब यह क्या चीज होगी मेरी लाइफ के साथ। मैंने तो कुछ और ही सोचा था। तो काफी चीजें हुई उसके बाद फिर डिसीजन लिया कि
नहीं यार लेट्स मूव आउट क्योंकि उसके बाद ये बोला गया कि आपको ये भी करना है वो भी जो मैंने सोचा नहीं था कभी फिर जैसे ही सेकंड वेव आई चीजें और चेंज हुई मुझे मेरे फादर की बहुत याद आई थी क्योंकि उन्होंने ही मेरी केयर करी मेरी सिस्टर मेरे फादर मेरे भैया तो मुझे मिलना था उनसे क्योंकि शादी के बाद से कोविड को तीन महीने हो चुके थे। मैं नहीं मिल पा रही थी। फिर भी मैं किसी बहाने से किसी भी तरह मैं घर गई। मैंने तब भी घर पे कुछ नहीं बताया कि नहीं
यार पेरेंट्स को दुख होगा। उन्होंने इतनी मेहनत करी थी। सब कुछ अच्छा नहीं लगेगा। फिर धीरे-धीरे चीजें मैंने बोला अब राखी आ रही है तो आपको मेरे साथ घर चलना होगा। क्योंकि मेरी फर्स्ट राखी थी। तो यहां पर जो मैम हैं जो इवन बच्चे भी बैठे हैं उनको भी पता कि कितने क्रेजी होते हैं हम लोग। जब फर्स्ट फेस्टिवल होता है आफ्टर मैरिज भी कि आपकी सिस्टर की भी जब मैरिज हुई होगी या आपकी भी तो अच्छा लगता है कि फर्स्ट टाइम वो अपने हस्बैंड के साथ आए तो मेरा भी ड्रीम था मैं भी जाऊं
अपने हस्बैंड के साथ लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उसने मना कर दिया कि नहीं मुझे नहीं जाना है क्योंकि आप यह नहीं पहनते आप यह नहीं करते आपको सूट बोला है आपको यह बोला है और मुझे फ्रेंडली स्पीकिंग मुझे मेरे फादर ने बहुत पैंपर्ड रखा मेरी ब्रदर ने सिस्टर ने भी लेकिन मैं कभी पैंपर्ड नहीं रही क्योंकि छोटी उम्र ने बहुत कुछ सिखा दिया था मुझे। बहुत मैच्योर बना दिया था। लेकिन उसके बाद से मैंने बोला चलो ठीक है। मैंने वहां काम सीखा। मैंने खाना बनाना भी सीखा कि कैसे बनाया जाता है हर चीज सब्जी
रोटी। लेकिन तब भी उनको प्रॉब्लम थी हर चीज से कि नहीं आपने ये नहीं किया। अभी भी आपने ये नहीं किया है। मैंने बोला यार ठीक है मेरे से नहीं हो रहा। मैं स्टेप बाय स्टेप सीख रही हूं। लेकिन ऐसे नहीं होता है। मैंने उनको ये बोला आपको भी थोड़ी सी फिटनेस करनी चाहिए क्योंकि हेल्थ इशू थे। कहता है नहीं हो जाएगा आप करो यह काम और आपको नहीं जाना यह चीजें नहीं करनी है। मैंने बोला ओके मैंने नहीं बताया घर में फिर नहीं बताया। फिर मैंने धीरे-धीरे मुझे लगा नहीं एंड दे फोर्स मी कि
मुझे लगा कि नहीं अब चीजें वर्स्ट हो रही है। तो मैंने अपने ब्रदर को बताया और सबसे अच्छी चीज क्या थी? आज समझ आ गया कि आपकी लाइफ में जो वैल्यू है ना पेरेंट्स की वो ना पति की है ना किसी और की है। जो आपके पेरेंट्स है ना वही सब कुछ है। और सबसे जो मेरा डिवोर्स का डिसीजन रहा जिसने मेरा सबसे साथ दिया वो मेरी फैमिली थी। वो मेरे पिलर थे। अगर वो ना होते तो शायद मैं आज यहां ना होती। तो उन्होंने बोला अच्छा ठीक है। तो उसके बाद मैंने डिवोर्स लिया और
मेरा डिवोर्स 21 में हुआ। उस समय भी कोविड चल रहा था। अब कोविड में आपको ही पता है कि आप कहीं बाहर नहीं जा सकते थे। मैं किससे शेयर करूं अपनी बातें क्योंकि पेरेंट्स को आप इतना कितना बताओगे फादर को भी। आपको रोना आ रहा है सब कुछ क्योंकि फादर इमोशनल हो जाएंगे। लेकिन एक चीज अच्छी लगी मुझे कि जो शादी करी वो लव अरेंज मतलब लव नहीं थी। किसी ने बताया तो लव अरेंज हो गई। लव उसमें था नहीं। बस अरेंज शादी हो गई। तो आज भी मैं इस डिसीजन के लिए यह खुश हूं
कि कम से कम वह रिश्ता मैंने देखा। मेरे फादर ने नहीं देखा। अगर मेरे फ़ादर ने देखा होता तो वह शायद अपने आपको कभी माफ़ नहीं कर पाते। इस चीज के लिए कि मैंने अपनी बेटी की शादी कहां करी दी। वो इसी गम में बैठे रहते। तो जब मैंने वो डिसीजन लिया, फिर मैंने यह भी डिसीजन लिया, नहीं पापा मैं आपके साथ नहीं जाऊंगी। मेरी जॉब भी है। मैं अपना अलग से जाऊंगी। मेरे भैया ने मना किया नहीं आप वहीं चलेंगे भाभी दीदी सब ने लेकिन मैं नहीं अब मैं अपने फादर के साथ पंजाई बाग
में रहती हूं और ये खुशी होती है कि जो भी किया मैंने उस समय जब शादी करी सब कुछ अपने पैसे वगैरह सब लगा दिए और फिर मैंने दोबारा से शुरू किए जीरो से कि नहीं अब पैसे सारे खर्च हो चुके थे सब कुछ करना है तो मैंने दोबारा से शुरू किया और मैंने सोचा कि रोना आ रहा है क्या करना है क्या नहीं लाइफ में कुछ नहीं सोचा इतने में पता चला 22 में कॉमनव्थ गेम्स होने वाले हैं। 21 में उसका कैंप लगना शुरू हो जाएगा। तो मैंने 22 में एंड में और 21 के
एंड में कि अब क्या करना चाहिए कि मैंने फिटनेस के ऊपर ध्यान दिया और फिटनेस को ही अपना सब कुछ बना दिया कि नहीं मैं क्योंकि बात नहीं कर पा रही थी आप क्योंकि कोविड में जा नहीं सकते। कोई आपसे बात नहीं कर सकता। एक डिस्टेंस मेंटेन रखना है और अपनी परेशानी को आप दूसरों को क्यों बता रहे हो इतना लेट्स हैंडल इट। उस चीज ने मुझे फिटनेस में जाकर मुझे सुबह अपनी स्कूल की क्लास लेनी होती थी ऑनलाइन। उसके बाद मैं जिम करती थी। फिर शाम को आती थी। अपना खाना बनाया। सब कुछ वो
वन बाय वन तो जैसे ही थी मैं शहर वो अंधेरा था वो धीरे-धीरे उजाले में कन्वर्ट होता चला गया। फिर मुझे ये था कि मेरा सिलेक्शन हो गया कॉमनव्थ गेम्स के लिए और मुझे याद है मैं बहुत खुश हूं उस समय और फिर अब ये था कि अब सिलेक्शन तो हो गया। अब जाए या ना जाएं। क्या मेरा बेस्ट वाइफ में आ पाएगा या रहने दूं? क्योंकि पहले की तरह मेंटली वह दिमाग होगा कि नहीं? तो मैंने बोला नहीं यार जाना तो चाहिए क्योंकि मैं अपनी लाइफ में काश नहीं रखना चाहती थी कि काश ये
हो जाता काश वो हो जाता। मैंने डिसाइड किया नहीं मुझे जाना चाहिए। एंड आई एम वेरी हैप्पी जब टीम अनाउंसमेंट हुई कॉमनव्थ गेम्स की 2022 में बर्मिंगम जाने के लिए। आई एम द नंबर वन रैंक उस समय। एंड फिटनेस वाइज, गेम वाइज, लीडरशिप वाइज और जो मुझे सेटिस्फेक्शन मिली मुझे बहुत अच्छा लगा। लेकिन मुझे यह था कि नहीं यार अभी तो बहुत दूर है मंजिल क्योंकि मुझे किसी को कुछ करके दिखाना था कि तुमने ये किया और जब मेरा डिवोर्स हुआ इवन मैंने कुछ लिया भी नहीं। क्योंकि आपकी मेंटल हेल्प जरूरी है। मुझे था कि
अगर मैं केस फाइल करूंगी इसके ऊपर यह करूंगी। मुझे भाई मेरा सामान दे। तो उसके लिए भी मुझे लॉयर्स वगैरह ने बोला कि नहीं आपको यह करना होगा। यह भी बोलना होगा यह झूठ क्योंकि झूठ बोलना ही होता है इन चीजों के लिए इजीली नहीं मिलता है आजकल जो लगता है कि नहीं ईजी है ऐसा कुछ नहीं है जब मैं लॉयर्स वगैरह से मिली कि अगर आपको चाहिए तो आपको भी यह बातें बोलनी होगी मैं सर एक बात बताइए अगर ये बातें बोलनी होगी तो इसका मतलब मुझे याद भी रखनी होगी तो मैं याद क्यों
रखूं मैं वो चीज क्यों ना बोलूं जो सही है मैंने बोला जो सही है वो सच है मैं वही बोलूंगी और कुछ नहीं चाहे मुझे कुछ ना मिले क्योंकि मुझे अपनी मेंटल हेल्थ सही चाहिए और वही हुआ जैसे ही मैंने बोला कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। इमीडिएटली साइन कर दिए उसने पेपर डिवोर्स के। जैसे वो साइन हुए आप बिलीव नहीं करेंगे मैं 2 साल से नहीं सोई थी। लेकिन जिस दिन वो साइन हुए मुझे जज ने दिए लिटरली मैं दो दिन तक उठी नहीं। वो इतना रिलैक्स था मेरे लिए कि मतलब मुझे लग रहा था
मुझे क्या मिल गया कि एक मैं फ्री हो गई हूं। उसके बाद जब हम कॉमर्स गए और वहां पर मेडल जीता गोल्ड मेडल। तो जैसे ही हम सब जीते वो उछल गए लेकिन मैंने उस जमीन को टच किया एंड आई थैंक्स टू माय मदर और मैंने यह बोला उस समय भी वहां मेरे इंटरव्यूज हुए कि मुझे किसी को कुछ दिखाना था करके लाइफ में और उसके बाद से जो उजाला शुरू हुआ मेरी लाइफ में उसके बाद गेम को भी पता चला सबको लोगों को कि लॉन बॉल होती क्या है मेरे बारे में पता चला अब
लोग मुझे जानते हैं मुझे लगता है कि हमें हार नहीं माननी चाहिए किसी चीज से लेकिन बस यह लगता है कि यार यार इतना करने के बाद जैसे मुझे था कि यार हम जीत जाएंगे ना तो मीराबाई चानू की तरह हमें भी कोई पिज़्ज़ा बोलेगा कि हां भाई तुम्हारे लिए फ्री हो गया पिज़्ज़ा ऑर्डर या ये भी फ्री हो गया ये भी लेकिन ऐसा कुछ मतलब अगर स्पॉनसरशिप होती खुद के लिए तो अच्छा लगता लेकिन ठीक है यार इट्स लाइफ लेकिन इस लाइफ ने ये जरूर सिखा दिया मुझे और अभी भी मुझे स्कूल के लोग
बोलते हैं मेरी टीचर भी एक बैठी हुई है यहां पर कि मैम आप स्माइल करते रहते हो और मतलब आपने कैसे किया आपने कुछ सोचा आगे के बारे में तो तो मैं उनसे यही कहती हूं। मैंने आगे के बारे में नहीं सोचा। मैंने यह सोचा कि आज कैसा चल रहा है मेरा? अगर आज अच्छा गया ना तो मेरा कल खुद ही ऑटोमेटिकली अच्छा हो जाएगा। मगर लिटरली मैं तो कहती हूं कि हर एक इंसान को ये नहीं लगता कि मुझे कि मेरी स्ट्रगल लाइफ थी। अगर मैं इसको स्ट्रगल की जगह कह दूं, लर्निंग लाइफ थी,
तो इट्स गुड फॉर मी। क्योंकि स्ट्रगल में तो आप सोचते हो कि नहीं यार यह तो आपके ऊपर थोपा गया है। अगर किसी काम को हम ऐसे करेंगे कभी नहीं हो सकता। और लन बॉल दिखने में या अभी आप देखेंगे अगर आज जाके आपको अच्छा लगेगा। देयर इज़ नो एज बात कोई भी एज के इसको खेल सकते हैं। और जितने भी यंगस्टर्स यहां बैठे हैं मैं तो यही कहना चाहूंगी कि यार कभी हार मत मानना। और स्पेशली गर्ल्स जो भी यहां बैठी है मेरे स्टूडेंट्स भी हैं डीपीएस आरपुरम के भी तो मेरा कहना यही है
कि प्लीज कभी भी पीछे मत हटना और कभी हेल्प चाहिए हो आई एम देयर विद यू आप कभी भी मुझे बोल सकते हैं और इट्स योर लाइफ योर चॉइस जब आपको शादी करनी है आप कीजिए जो आपको लगता है वो कीजिए लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट है अपने पेरेंट्स को कभी दुख मत दीजिए अगर आपने उनको कभी नहीं दिया ना तो वो आपकी बात को समझेंगे आप उनको समझाइए। उनके सामने तर्क तो रखिए कि अच्छा क्या है आपके लिए। और बेकार क्या है? क्योंकि बेकार कहने के लिए दुनिया है। लेकिन सही करने के लिए पेरेंट्स हैं। जो
शुरू में आपको तो लगेंगे यार बहुत हार्श है। बहुत गुस्सा करती है। लेकिन आप कहीं जाओगे ना कुछ भी। आपके फ्रेंड एक दो भाई कॉल कर देंगे। हां भाई कैसे हो? लेकिन पेरेंट्स हर 10 मिनट बाद पूछेगा। बेटा कहां पर हो? कुछ खाया? गुस्से के बाद भी पूछेंगे वो आपसे। एंड मैं बहुत लकी हूं कि मुझे जो मेरे फादर हैं, मेरी सिस्टर, मेरे ब्रदर जो मेरी वीकनेस है और मेरे टाइम पे मेरे जो दोस्त इसलिए मेरे फ्रेंड्स ज्यादा नहीं है अच्छे सिर्फ दो हैं। क्योंकि वो भी मुझे बहुत ज्यादा लगते हैं क्योंकि टाइम कम हो
जाता है उनसे बात करने के लिए। क्योंकि फेक दुनिया बहुत है। लेकिन जो आपको समझे वो दुनिया बहुत कम है। जो अभी हम यहां पर हैं अंधेरे में तो शायद उस समय हम उजाले में आ जाए। थैंक यू।