रास्ते पर चाहे कितने भी कंकर पड़े हो लेकिन यह हमें अच्छा जूता पहनकर उस रास्ते पर चलते हैं तो हम उस रास्ते को बहुत ही आसानी से पार कर जाते हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर रास्ता कितना भी अच्छा हो लेकिन उस जूते में एक छोटा सा भी कराया है तो हम थोड़ी दूर भी नहीं चल पाते हैं यहां सीखने वाली बात यह है कि हम बाहर की चुनौतियों से नहीं बल्कि हमारे अंदर छुपी हुई कमजोरी के कारण हार हैं कई बार लोग सिर्फ बाहरी दुनिया को कोसने में लगे रहते हैं लेकिन स्वयं के अंदर क्या
कमजोरी हैं उन्हें देखने की कभी कोशिश नहीं करते हैं और इसी लिए वह हमेशा ही परेशान रहते हैं शायद दूसरों पर दोष लगाना बहुत ही आसान होता है क्योंकि उसके लिए हमें कुछ करना नहीं होता है सिर्फ अपना मुंह खोलना होता है जबकि को सुधारने के लिए हमें बहुत सारे दुख दर्द और तकलीफों का सामना करना पड़ता है इसी लिए चाय हम खुद को नहीं बदलते हैं लेकिन दूसरों की बुराइयां करके हमें कुछ नहीं मिलेगा हमें अभी कुछ मिलेगा जब हम अपनी कमज़ोरियों को जानेंगे और उसे सुधारेंगे