बात 320 ई की है एक ऐसा दिन आया जब राजा धनानंद ने राजगुरु चाणक्य को भारी सभा में अपमानित किया और गुरु चाणक्य ने इस बेइज्जती से आक्रोश में आके राज दरबार त्याग देने का निर्णय लिया रास्ते से गुर्जर ही रहे थे की अचानक उनकी नजर बगल में खेल रहे कुछ बच्चों पर पड़ती है उन सब में एक विशेष बालक था जो राजा की भूमिका निभा रहा था खेल खेल में ही खाने की चोरी के इल्जाम में कुछ बच्चे एक बच्चे को पड़कर राजा के सामने ले आते हैं राजा उसे चोर को पांच घोड़े की
सजा सुनता है और फिर खुद को भी 10 कोड करने का फैसला करता है चाणक्य देखकर हैरान र जाते हैं बाद में चाणक्य उसे बच्चे से पूछते हैं आपने खुद को 10 कूड़े क्यों मारे बच्चे ने जवाब दिया जो राज्य भूख से तड़प रहा है और लोग खाने की चोरी तक कर रहे हैं उसे राज्य का राजा इसी लायक है एक छोटे से बच्चे के मुंह से इतनी न्याय प्रिया बात सुनकर चाणक्य काफी प्रभावित हुए और वो उसे बच्चे के साथ उसके मां के पास गए उसकी मां से मिलने के बाद गुरु ने उनसे उसे
बच्चे को साथ ले जाकर शिक्षा देने का आग्रह किया इस पर कुछ सोने के बाद उसे बच्चे की मां ने बच्चे को उनके साथ जान की अनुमति दी और अगले ही दिन चाणक्य इस बालक को अपने गुरुकुल ले गए कालांतर में यही बालक धनानंद को मार कर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से विख्यात होते हैं और एक विशाल मौर्य अंपायर की नव रखते हैं स्वागत है आपका राजन सागा ऑफ इंडियास ग्रेटेस्ट रुलर्स के इस एपिसोड में भारतवर्ष के इतिहास में हमने कई साड़ी डायनेस्टीज के बड़े में सुना है पर आज हम एक ऐसे महान राजा के
बड़े में बात करने जा रहे हैं जिसे आप भारत का पहले महान शासन भी का सकते हैं हम बात कर रहे हैं उसे शासन की जिन्होंने आज से करीब 2000 साल पहले ही एक अखंड भारत की स्थापना कर दी थी यह कहानी है भारत के महानतम राजाओं में से चंद्रगुप्त मौर्य की जिसने अपने राजनीतिक गुरु चाणक्य के दिखाएं रास्तों को फॉलो करते हुए नंदा अंपायर जैसी एक विशाल अंपायर का खत्म किया और महान मौर्य अंपायर की स्थापना की बात करें तो यह ईस्ट में बंगाल और असम से लेकर वेस्ट में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक नॉर्थ
में कश्मीर और नेपाल से लेकर साउथ में डेक्कन प्लेटो तक फैला हुआ था हिस्टोरियन के मुताबिक 23 साल तक इस विशाल अंपायर पर शासन करने के बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने सिंहासन त्याग दिया और सॉन्ग बन गए आखिर में जैन धर्म अपने के बाद उन्होंने अपने अंतिम सालों में सल्लेखना रिचुअल परफॉर्म करते हुए अपने प्राण त्याग दिए आज के वीडियो में हम इसी महान रोलर की भाव साम्राज्य के बड़े में डीटेल्स में चर्चा करेंगे और देखेंगे की किस तरह नंदा डायनेस्टी का अंत करते हुए चंद्रगुप्त मौर्य ने एक नए अंपायर की शुरुआत की उनके रेन में
भारत में क्या-क्या डेवलपमेंट और चेंज हुए और हमारे इतिहास में इस लीजेंड के कौन-कौन से मेजर कंट्रीब्यूशन रहे हैं चंद्रगुप्त ओरिजन और लाइनेज चंद्रगुप्त मौर्य ओरिजिन के बड़े में कई साड़ी थिअरीज और लाइसेंस है चंद्रगुप्त का जन्म पाटलिपुत्र यानी मॉडर्न दे पटना के पास हुआ था और उनकी मां का नाम था मोर माना जाता है मोर नंदा डायनेस्टी में एक दासी थी चंद्रगुप्त के पिता मोरिया क्षत्रिय यानी एक वारियर कलन से बिलॉन्ग करते थे जब चंद्रगुप्त अपनी मां की कोक में थे तभी एक बैटल उनके पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद ऐसी सिचुएशन
में उनकी मां अपने भाई के घर पाटलिपुत्र शिफ्ट हो जाति है जहां चंद्रगुप्त का जन्म हुआ और आगे जाकर वो चक्रवर्ती सम्राट बने कुछ सोर्सेस के अनुसार चंद्रगुप्त नंदा प्रिंस और बड़ा के एलिजिनेट चाइल्ड थे चंद्रगुप्त को लेकर यह भी क्लेम किया जाता है की वो एक हंबल बैकग्राउंड से आते थे और उन्हें उनके बायोलॉजिकल पेरेंट्स द्वारा आबंदों कर दिया गया था जिसके बाद उन्हें एक पास्कल फैमिली ने अडॉप्ट कर लिया था और उनका ललन पालनपुर किया और फाइनली चाणक्य द्वारा गाइड किया गया यह तो बात हो गई उनके जन्म और अर्ली चाइल्डहुड की अब
आई कहानी को आगे बढ़ते हैं और देखते हैं की चाणक्य और चंद्रगुप्त के मिलने के बाद क्या हुआ कैसे उन्होंने उसे समय के सबसे शक्तिशाली नंद अंपायर को उखाड़ फेंका और ऑफ नंदा अंपायर चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य से मिलने के बाद उन्हें अपने साथ तक्षशिला ले गए जहां उन्होंने चंद्रगुप्त को वह एक विद्या में कुशल बनाया जो एक महान एंपरर बने के लिए जरूरी था लेकिन चंद्रगुप्त मौर्य और गुरु चाणक्य के लिए नंदा अंपायर को हरण कोई आसन काम नहीं था ना केवल धनानंद के पास एक विशाल सी थी बल्कि उनके पास एमेच्योर रक्षा जैसे कुशल
स्ट्रेटजिस्ट भी थे जींस इन दोनों को पर पन था खैर शुरू में चंद्रगुप्त मौर्य को नंदा सी के हाथों कई कारी डिफीट्स का सामना करना पड़ा था एक बार की बात है चंद्रगुप्त मौर्य और गुरु चाणक्य अपनी एक शिष्य के घर में रात को भजन कर रहे थे उन्हें भजन में ग्राम खिचड़ी दिया गया था उनके साथ उसे घर का एक बच्चा भी भजन कर रहा था उसे बच्चे ने जैसे ही खिचड़ी के बीच में अपना हाथ डाला उसका हाथ जल गया और इस पर उसकी मां ने उसे दांते हुए खिचड़ी को साइड से खाने
की सलाह दी गुरु चाणक्य यह बात सुनते ही रुक गए और वह इसे अपने वार स्ट्रेटजी से जोड़कर सोने लगे कुछ देर बाद ही उनको अपनी स्ट्रेटजी में गलती का एहसास हो गया वह समझ गए की जी तरह गम खिचड़ी में सीधे हाथ डालने से बच्चे का हाथ जल गया था ठीक इस तरह नंदा अंपायर पर सीधे हमला करने की वजह से चंद्रगुप्त हर रहे हैं बाद में उन्होंने चंद्रगुप्त के साथ मिलकर नई स्ट्रेटजी बनाई और इस बार उन्होंने चंद्रगुप्त को नंदा अंपायर पर सीधे अटैक करने के बजे छोटे-छोटे राज्यों के साथ अलायंस या फिर
उन्हें एक-एक करके हारने की सलाह दी इस समय भारत के नॉर्थ वेस्टर्न पार्ट में सिकंदर सेल्यूकस को अपना राज्य सौंपने के बाद ग्रीस की और लोट चुके थे उनके लौट के बाद भारत के नॉर्थ वेस्ट प्रोविंस में गवर्नर ने खुद को किंग डिक्लेअर कर दिया और ऐसे सिचुएशन को देख के चाणक्य की एडवाइस फॉलो करते हुए चंद्रगुप्त मौर्य ने लोकल रुलर्स के साथ एलाइंस फॉर्म की और एक-एक कर सारे गवर्नर को डिफीट करना शुरू कर दिया और इस तरह चंद्रगुप्त ने मगध के बॉर्डर्स रीजंस पर सिचुएटेड पंजाब के रीजंस में खुद को एस्टेब्लिश कर लिया
जो की चाणक्य के अकॉर्डिंग नंदा अंपायर को और करने की परफेक्ट जगह थी बाद में अपने मंटो और चाणक्य के कहे अनुसार चंद्रगुप्त ने हिमालय रीजन के किंग पर्वत का के साथ हाथ मिलाया और एक ह्यूज आर्मी फॉर्म की जिसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने इस कंबाइंड फोर्सेस की मदद से नंदा अंपायर पर अटैक कर दिया और धनानंद को मार दिया हिस्टोरियन के अनुसार 322 ई ने नंदा अंपायर का अंत हुआ और चाणक्य का रिवेंज पूरा हुआ और इस तरह मगध में मौर्य अंपायर की शुरुआत हुई एक्सपेंशन और कॉकुज चंद्रगुप्त ने ना सिर्फ मौर्य अंपायर की
फाउंडेशन राखी उसके अलावा उसका एक्सपेंशन भी किया चंद्रगुप्त मौर्य एक कुशल वार स्ट्रेटजिस्ट थे उनके फॉसिल्स में स्किल्ड वॉरियर्स के अलावा सीक्रेट सर्विसेज की एक स्पेशल विंग भी थी जिसका काम था दुश्मनों के बड़े में जानकारी इकट्ठा करना और इस वजह से मौर्य अंपायर को दूसरे राज्यों को हारने और अंपायर के एक्सपेंशन में बहुत मदद मिली मगध और बाकी रीजंस को कैप्चर करने के बाद चंद्रगुप्त ने मैसेज ओनियन सेंटर पीस को डिफीट कर भारत के नॉर्थवेस्ट रीजन को भी मॉडर्न अंपायर में मिला लिया मगध किंगडम के एक्सपेंशन के मोटिव से चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस के इस
टेरिटरी पर अटैक कर दिया और उसे हराकर सिंधु वाली रीजन और अफगानिस्तान के कुछ टेरिटरीज को जीत लिया आपको जानकर हैरानी होगी की इस बैटल में हारने के बाद भी सेल्यूकस मॉडर्न अंपायर के साथ अच्छे रिलेशंस बनाए रखना चाहते थे और इसलिए उन्होंने अपनी बेटी हेलिना की शादी चंद्रगुप्त से और मजिथिंस नाम के एम्बेसडर को भी इनके साथ मगध भेज दिया जिन्होंने भारत के ऊपर फेमस बुक इन डिकल लिखी थी जिसे आज भी भारत के असिएंट हिस्ट्री का एक विटल सोस माना जाता है [संगीत] चंद्रगुप्त मौर्य ने उन्हें 500 एलीफेंट भेंट में दिए भारत के
नॉर्थ वेस्टर्न पार्ट में अपनी पकड़ बनाने के बाद चंद्रगुप्त ने विंध्य रेंज के बॉन्ड और भारत के सदन पार्ट्स में अपने कॉक्वेस्ट की शुरुआत की और एक्सेप्ट तमिलनाडु और केरला चंद्रगुप्त ने पूरे भारतवर्ष पर अपना झंडा गढ़ दिया मॉडर्न अंपायर की इस मैसिव एक्सपेंशन को आज भी भारत के इतिहास की वन ऑफ डी ग्रेटेस्ट एक्सपेंशन माना जाता है क्योंकि कहते हैं की सिकंदर के बाद एशिया में अगर किसी ने ऐसा एक्सटेंशन अंपायर बिल्ड किया था तो वो चंद्रगुप्त मौर्य ही थे अखंड भारत इंटीग्रेशन ऑफ इंडिया साथ ही चंद्रगुप्त मौर्य की रेन के दौरान पूरा भारत
और साउथ एशिया का एक बड़ा हिस्सा यूनाइटेड किया गया था और यहां बुद्धिस्म जैनिज्म ब्रह्मैनिज्म यानी असिएंट हिंदुइज्म और अजीब का जैसे डिफरेंट रिलिजियस एक साथ को एक्जिस्ट करते थे और इसी करण आज भी चंद्रगुप्त को भारत के इंटीग्रेशन के लिए क्रेडिट देते हुए उन्हें वन ऑफ डी ग्रेटेस्ट एंपरर माना जाता है हैरानी की बात तो यह है की इतनी डाइवर्सिटी होने के बाद भी पूरे अंपायर में चाहे एडमिनिस्ट्रेशन हो या इकोनॉमिक्स या इंफ्रास्ट्रक्चर और एस्पेक्ट में एक गजब की यूनीफामिटी थी मौर्य एडमिनिस्ट्रेशन अंदर चंद्रगुप्त मौर्य अपने इस ह्यूज किंगडम को एफिशिएंट एडमिनिस्टर करने के
लिए उन्होंने चाणक्य की एडवाइस पर अपने अंपायर को फोर प्रोविंस यानी पाठ में डिवाइड किया था जो कुछ इस प्रकार थे उत्तर पाठ जिसका कैपिटल तक्षशिला था कृपया जिसका कैपिटल उज्जैन था पूर्व पद जिसका कैपिटल पाटलिपुत्र था और फाइनली दक्षिण पर जिसका कैपिटल सूअर नगरी था हालांकि मौर्य अंपायर का सुपीरियर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन पाटलिपुत्र में ही लोकेटेड था इस अरेंजमेंट के अकाउंटिंग हर एक प्रोविंस में एक रिप्रेजेंटेटिव अप्वॉइंट किया गए थे जो अपने रिस्पेक्टिव प्रोविंस को मैनेज कर रहे थे और इस एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम का मेंशन चाणक्य की फेमस कलेक्शन ऑफ टैक्स अर्थशास्त्र में भी किया गया
है जहां माना जाता है की एडमिनिस्ट्रेशन का यह तरीका मौर्य अंपायर में एक वेल ओल्ड मशीन की तरह ऑपरेट करता था जिसके नतीजतन मौर्य जैसे वस्त किंगडम भी स्मूथली फंक्शन कर पे थे चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने राज्य में इरिगेशन सिस्टम रोड्स और माइंस को डेवलप करने पर विशेष ध्यान दिया था चंद्रगुप्त ने ट्रांसपोर्टेशन के लिए पाटलिपुत्र से तक्षशिला को कनेक्ट करते हुए हजारों माइल्स से लंबे हाईवे का निर्माण भी करवाया अब तक की कहानी से यह तो स्पष्ट हो गया की चंद्रगुप्त मौर्य कोई साधारण शासन नहीं थे रिच सोर्सेस के अनुसार उनसे जुड़ी कई सारे
लीजेंड्स और कहानी हैं जो अपने आप में काफी रोचक है ग्रीक टेस्ट सोर्सेस में चंद्रगुप्त मौर्य को एक मिस्टेक वारियर माना गया है जो एग्रेसिव वाइल्ड एनिमल्स जैसे की लायन और एलीफेंट को भी कंट्रोल कर सकते थे पर्सनल लाइफ चंद्रगुप्त जैसे महान राजा के अचीवमेंट्स और विक्टोरिया के बड़े में तो सब ने सुना है पर उनके पर्सनल लाइफ के बड़े में बहुत काम लोग जानते हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पराक्रम की कहानी इतनी है की सर आकर्षण वहीं बना राहत है और उनकी पर्सनल लाइफ अछूतों र जाति है उनकी पर्सनल लाइफ की बात की
जाए तो चंद्रगुप्त की पहले पत्नी थी दुर्धरा जिनके साथ वो एक बहुत ही हैप्पी मैरिड लाइफ बता रहे थे लेकिन अफसोस की बात तो यह है की दुर्धरा की डेथ बहुत ही अनएक्सपेक्टेड तरीके से हुई और इस इंसिडेंट ने चंद्रगुप्त मौर्य के लाइफ में बहुत बड़ा इंपैक्ट डाला एक लीजेंड के अनुसार चाणक्य चंद्रगुप्त के खाने में स्मॉल परेशन में पॉइजन मिलने थे जिससे अगर कभी एनीमीज चंद्रगुप्त को जहर देकर मारना चाहे तो उनकी बॉडी ऑलरेडी इम्यून हो लेकिन एक दिन ऐसा हुआ की प्रेगनेंसी के लास्ट स्टेज में दुर्धरा ने प्वाइजन मिलाया हुआ वो खाना का
लिया जो चंद्रगुप्त के लिए था जब तक चाणक्य इस बात को चंद्रगुप्त तक पहुंचने तब तक देर हो चुकी थी और उन्होंने रिलाइज कर लिया था की दुर्धरा बैक नहीं पाएंगे जिसके बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसे पूरे मौर्य अंपायर को शौक ग गया जी हां चाणक्य ने दुर्धरा के बूंद में पाल रहे मगध के अगले राजा को बचाने की कोशिश में अपनी शॉर्ट से दुर्धरा के ओपन कट कर इस बच्चे को बच्चा लिया इस इमरजेंसी ऑपरेशन के दौरान दुर्धरा की तो डेथ गई पर प्वाइजन ब्लू का एक ड्रॉप इस छोटे बच्चे के फोरहेड
पर गिरा जिसके करण इसके सर पर एक ब्लू डॉट यानी बिंदु बन गया और इसी करण चंद्रगुप्त के बेटे का नाम बिंदुसार रखा गया दोस्तों दुर्धरा की डेथ के बाद चंद्रगुप्त की शादी सेलिब्रेसीज की बेटी हेलेना से हुई थी जो की डिप्लोमेसी और एलाइंस का परिणाम था इस तरह चंद्रगुप्त मौर्य ने कल दो शादियां की थी प्रेगनेंसी एशिया चंद्रगुप्त मौर्य के राइस होने की कहानी जितनी एग्रेसिव और ग्लैमरस है उतनी ही ग्लू कहानी इनके लास्ट दोनों की है जैन सोर्सेस के अकॉर्डिंग ये माना जाता है की लगभग 321 ई से 298 ई तक मौर्य जैसे
वेस्ट अंपायर पर रेन करने के बाद लाइफ के लास्ट पार्ट में चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन रिलिजन अपना लिया था और बच्ची हुई जिंदगी एक जैन भिक्षु की तरह बीते कहते हैं की जब बिंदुसार छोटे थे तभी चंद्रगुप्त ने यह डिसाइड कर लिया था की जब बिंदुसार बड़े हो जाएंगे तो बिंदुसार को राजभर सोप कर खुद पाटलिपुत्र से चले जाएंगे और उन्होंने ऐसा ही किया जब बिंदुसार बड़े हुए तो उन्होंने बिंदुसार को मगध का न्यू एंपरर डिक्लेअर कर दिया और साथ ही चंद्रगुप्त ने चाणक्य से रिक्वेस्ट की मौर्य डायनेस्टी के के एडवाइजर की भूमिका निभाते रहे
इसके बाद चंद्रगुप्त खुद साड़ी सुख सुविधा त्याग कर जैन ट्रेडीशन को मानते हुए जैन मोंक बन गए और दक्षिण भारत की और चले गए वहां जाकर वो जैन मॉम को भद्रबाहु और दूसरे मोंगस के साथ श्रवणबेलगोला में एक ऐसे तख्त की तरह जीवन बिताने लगे डेथ फिर 297 ई में अपने स्पिरिचुअल गुरु भद्रबाहु के गाइडेंस में जैन प्रैक्टिस सिलेक्ट ना करते हुए चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी मॉडल बॉडी को त्याग देने का डिसीजन लिया और इस तरफ फास्टिंग कंटिन्यू करते हुए श्रवणबेलगोला के एक केवी में उन्होंने अपनी आखरी सांस ली आज के समय में उसे किया
हुए चंद्रगुप्त मौर्य की याद में एक छोटा सा टेंपल बना दिया गया है और फिर बिंदुसार के बेटे हुए भारतवर्ष के एक और महान राजा अशोक दी ग्रेट जिनका नाम भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है चंद्रगुप्त मौर्य के डेथ के बाद भी लगभग 130 सालों तक कई जेनरेशन और कई महान मौर्य अंपायर्स के थ्रू मौर्य अंपायर फ्लोरिश करता रहा जिनके बड़े में हम आज भी बड़े चौक से पढ़ने हैं मिलते हैं आपसे राजन की एक और एपिसोड के साथ भारत के और महान राजा की कहानी के साथ तब तक के
लिए जय हिंद