हेलो गाइज मैं हूं वर्चुअल सापक इस वीडियो में मैं आपको पोर्न और मैस्टरबेशन एडिक्शन परमानेंटली एंड करने का तरीका बताऊंगा अगर आप इन चीजों से एडिक्टेड नहीं हो तब भी आपको ये वीडियो देखनी चाहिए क्योंकि इस वीडियो में बताए गए प्रिंसिपल्स हर तरह की एडिक्शंस को एंड करने में काम आएंगे इस वीडियो को बनाने से पहले मैं अलग-अलग फील्ड्स के पॉपुलर लोग जैसे सेल्फ इंप्रूवमेंट यूट्यूब साइकोलॉजिस्ट न्यूरोलॉजिस्ट न्यूरोसाइंटिस्ट फिलोसोफर रिलीजियस लीडर्स और स्पिरिचुअल टीचर्स के ओपिनियन इस टॉपिक पर ऑलरेडी सुन चुका हूं तो इस प्रॉब्लम को मैं काफी सारे पर्सपेक्टिव से एक्सप्लोर कर चुका हूं
और इन लोगों की टीचिंग्स में से मैंने बेस्ट पार्ट्स को चेरी पिक करके डिफरेंट आइडियाज के डॉट्स कनेक्ट करके और अपने खुद के ऑपिनियंस और एक्सपीरियंस के बाद पांच फाइनल सॉल्यूशंस फाइंड किए जो इंसान इस वीडियो को देखकर एक्चुअल में अप्लाई करेगा उसको इसके बाद इस टॉपिक पर और कोई वीडियो देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी सो लेट्स [संगीत] बिगिन सच बात यह है कि अगर आप इस एडिक्शन से गुजर रहे हो तो ये एक साइन है कि आप बहुत ही घटिया लाइफ जी रहे हो आपको लग रहा है पोन एडिक्शन एक प्रॉब्लम है इन रियलिटी
एक सिमम है ऐसी लाइफ का जिसमें कोई रेस्ट नहीं है आपके जीवन में कोई गोल्स नहीं है या अगर है भी तो वो ऐसे हैं जिनके पीछे आपको कोई क्लेरिटी नहीं है बस ऐसे ही कहीं से इन्फ्लुएंस होकर आपने उन गोल्स को अपना समझ लिया है फिर उन गोल्स पर काम करना होता है तो आप उन पर काम करने से मुंह चुराते हो क्योंकि काम से तो कभी प्रेम था ही नहीं प्रेम भी छोड़ो अगर आपके पास एक सिंपलिस्टिक सिस्टमिक रूटीन होता तो भी आप कुछ ना कुछ कर रहे होते रूटीन नहीं है तो वो
काम बस एक थॉट की तरह बैक ऑफ द माइंड चलता रहता है पर उसको करने की हिम्मत नहीं होती मन नहीं करता तो उस थॉट से एस्केप करने के लिए आप इंस्टेंट प्लेसर्स की तरफ जाते हो कभी प्लेजर हो गया मैस्टरबेशन एंड पॉन तो वो भी आप कर लेते हो और ऐसे में आपका दिन निकल जाता है यही रूटीन अगले दिन भी चलता रहता है फिर उसके अगले दिन भी और ऐसे करके एक हैबिट बन जाती है और आपको पता भी नहीं चलता कि मैं एडिक्ट कब बन गया फिर आपको लगने लगता है कि पोर्न
और मैस्टरबेशन में प्रॉब्लम है रियल प्रॉब्लम ये है कि तुम इतने खाली क्यों हो भाई एक खाली इंसान की हालत बहुत खराब होती है वो पूरे दिन बेचैनी में जीता है इधर-उधर मुंह मारता रहता है कि कुछ ऐसा मिल जाए जो उसका खालीपन भर दे इस वॉइड को भर दे उसका मन उसको छोटे-छोटे प्लेजर सजेस्ट करता रहता है कि ये करे क्या ये करें क्या फोन चला लेते हैं थोड़ी देर थोड़ी देर दो को मैसेज कर लेते हैं थोड़ा उनके साथ टाइम पास कर लेंगे ऐसे इंसान को कोई बाहर से देखेगा तो उसको लगेगा क्या
मौज की लाइफ जी रहा ये पर उसके दिन की सच्चाई सिर्फ वो इंसान जानता है कि कितना खोकला वो अंदर से फील कर रहा है खाली बैठोगे तो आपका ब्रेन शटी वेज सजेस्ट करेगा अपने आप को फुलफिल रखने के लिए इसलिए ये रिस्पांसिबिलिटी आपको खुद लेनी है कि आपका दिन आप खुद कुछ इस तरह से डिजाइन करो ऐसी चीजों से भर दो जिसके कारण ये छोटे प्लेजरस आपके दिमाग में ही ना आए यह एक प्रॉब्लम है जो मुझे नो फैप कम्युनिटी में दिखाई देती है जहां लोग अपने दिन गिन रहे हैं पूरे पूरे दिन अपनी
अर्जेस रजिस्ट करके स्ट्रगल कर रहे हैं उनका पूरा टाइम इसी के अराउंड रिवॉल्व कर रहा है कि वो फै नहीं कर रहे मुझे इसका पॉइंट समझ नहीं आता क्योंकि आप पूरे दिन नो फैप नो फैप नो पॉन करते रहोगे तो आप अपने आप को ही पॉन के बारे में याद दिला रहे हो तो आपके लिए अपने अर्ज इस को कंट्रोल करना और भी मुश्किल हो जाएगा और आपके रिलैक्स करने के चांसेस और ज्यादा बढ़ जाएंगे साथ ही उन अर्जी को कंट्रोल करते हुए आपका टाइम मेंटल एनर्जी और विल पावर तो वेस्ट हो ही गई ना
इससे तो बेटर ये रहता कि आप 5 मिनट में एक क्विक फैप करके अपने काम पे मूव ऑन कर जाते हैं कुछ लोग ऐसे भी है जो कहते हैं हम नो फैप फॉलो कर रहे हैं हम पॉन देख लेंगे पर फैप नहीं करेंगे उनका भी पॉइंट मुझे समझ नहीं आता उन्होंने अर् जिज कंट्रोल करते हुए सफरिंग भी झेल ली टाइम भी वेस्ट कर दिया और उनको क्या लग रहा उनके सबकॉन्शियस माइंड को पता नहीं चल रहा कि उनको क्या चाहिए तो जिसको आप रिटेन करने की कोशिश कर रहे हो वो भी नाइट फॉल में निकल
जाएगा और ये सब मैं उन लोगों को मजाक उड़ाने के लिए नहीं कह रहा मैं ट्रूली रिस्पेक्ट करता हूं उनके इस सेंटीमेंट को कि वो अपनी लाइफ बेद करना चाहते हैं बस मुझे उनकी अप्रोच थोड़ी मिसगाइडेड लगती है फैपिंग और पॉन को इतनी इंपॉर्टेंट चीज बनाकर उसको रेजिस्ट और सप्रे करने से मच बेटर रहेगा कि आप अपनी लाइफ फिक्स करो कि उसी में इतना आनंद रहे कि फैपिंग का ख्याल आपके दिमाग में ही ना आए तो इस पॉइंट से हम स्थापित कर चुके कि आपको पॉन एडिक्शन छोड़ने की जगह आपको लाइफ में अच्छी चीजें भरने
पे फोकस करना है इससे पॉन के साथ-साथ आपकी बाकी एडिक्शंस भी अपने आप छूट जाएगी अब बात कर करते ये अच्छी चीजें क्या [संगीत] है एक क्ट है यू कैन नेवर क्यूर हंगर बट यू कैन ऑलवेज चूज टू ईट बेटर फूड्स ये क्वट खाने के बारे में नहीं है ये आपके जीवन के बारे में है जिस तरह आप कभी भूख लगना बंद नहीं कर सकते उस तरह आपके मन की सुख शांति और आनंद पाने की परम चाहत को आप ठुकरा नहीं सकते दुनिया में आपको कोई ऐसा इंसान नहीं मिलेगा जो अपने लिए सुख शांति नहीं
चाहता इसी शांति की तलाश में हम पोन मैस्टरबेशन और बाकी सस्ते प्लेजरस में घुस जाते हैं इसलिए अगर आप भूख लगना नहीं रोक सकते तो एटलीस्ट अच्छा खाना खाने के अल्टरनेटिव्स तो चुन सकते हो इसी तरह सुख शांति तो चाहिए आपको पर जरूरी नहीं है कि आप इन सस्ती चीजों में इंडल्स करो ऊंचे प्लेजरस और छोटे प्लेजरस डेफिनेटली एजिस्ट करते हैं जैसे एक पिया निस्ट हो जो पियानो बजाते बजाते पूरी तरह उसी में डूब गया है और उसकी अवेयरनेस बढ़ जाती है और वहीं लस्ट में डूबे हुए इंसान की चेतना इतनी गिर जाती है कि
वो इंसान को इंसान की तरह नहीं देख पाता उसकी सारी मोरालिटी रैशनल एथिक्स सब कचरे के डब्बे में चले जाते हैं जब एक पिया निस्ट परफॉर्मेंस दे रहा होता है तो उसमें एक थिंग ऑफ ब्यूटी होती है जिसको वो अगर रिकॉर्ड करके बाद में देखे तो वो अपने ऊपर प्राउड फील करता है और उसको और बेहतर होने की इंस्पिरेशन मिलती है और वहीं दूसरा इंसान कभी अपने आप को जर्क ऑफ करते हुए रिकॉर्ड करें और उसको वो बाद में होश आने के बाद देखे तो वो अपने फेशियल एक्सप्रेशंस अपनी पशुता को देखकर अपने आप को
ही पहचानने से मना कर देगा क्योंकि उसको अपना वो रूप देखने को मिलेगा जो सिर्फ तब आता है जब इंसान अपना होश खो देता है अपना खाली टाइम भरने के लिए काफी अच्छा अल्टरनेटिव है एक्सरसाइज जब भी आप किसी भी तरह की एक्सरसाइज करते हैं जो आपको पसंद है तो आपके अंदर हेल्दी सोर्सेस है डोपामिन सेरोटोनिन और एंडोर्फिंस रिलीज होते हैं जो आपको अच्छा फील करवाते हैं जिसके बाद आपको जर्क ऑफ करके प्लेजर सप्लीमेंट करने की इतनी जरूरत नहीं रह जाती साथ ही में आपके अंदर जो एनर्जी भरी है उसको आप सही से चैनल कर
पाते हो इसी तरह की और भी काफी सारी अच्छी हैबिट्स है जिसमें आप इंडल्स कर सकते हो जो आपको प्रेजेंट में तो सुख देंगी ही साथ में आपके लिए लॉन्ग टर्म भी बेनिफिशियल है जैसे मीनिंगफुल वर्क क्रिएटिव एक्टिविटीज जो मैंने अपने हाउ टू लिव अ फुलफिलिंग लाइफ वाली शॉर्ट वीडियो में डिस्कस कि है और मैं फ्यूचर में इस पे एक डिटेल लॉन्ग वीडियो भी बनाऊंगा तो मेन बात ये नहीं है कि आपको सुख आनंद और प्लेजर की चाहत छोड़ देनी है मैं बस कह रहा हूं कि ऐसे अल्टरनेटिव्स एजिस्ट करते हैं जो आपको पॉन या
उससे भी ज्यादा सुख दे सकते हैं साथ ही में वो चीजें ऐसी होगी जिनको करने के बाद मे भी आप अपने बारे में शिटी फील करने की जगह प्राउड फील करो जब आप यह बात गहराई से समझकर अपने मन स्थापित कर लेते हो कि पॉन एक सस्ता और इनफीरियर सोर्स ऑफ सुख है और आप हायर टेस्ट डेवलप कर लेते हो तो लोअर वाले अपने आप छूटने लगते हैं आपका मन उसको अपने आप इंपॉर्टेंस के प्रायोरिटी ऑर्डर में बहुत नीचे फेंक देगा और जो चीजें आपके लिए अन इंपॉर्टेंट हो जाती है समय के साथ वो आपके
मन से भी उतर जाती है अभी तक का सराइज करूं तो पन छोड़ने के लिए आपको अपनी लाइफ फिक्स करनी है उसके लिए आपको खराब हैबिट्स को हटाकर उनको सुपीरियर हैबिट से रिप्लेस करना है तो यह प्रोसेस कैसा होगा और आपको किन चीजों का ध्यान रखना है अब थोड़ी इसकी बात कर लेते हैं [संगीत] पुरानी हैबिट को छोड़ना और नई हैबिट को पकड़ने का काम एक साथ करना होता है अगर पुराना नहीं छोड़ा तो नया करने का टाइम और एनर्जी कहां से आएगी स्पेशली पॉन के केस में जो आपके डोपामिन सिस्टम्स को ऑलरेडी फ्राई कर
देता है तो नए में एफर्ट ही नहीं डाल पाओगे कुछ करने का मन ही नहीं करेगा और तुम यह सोचो कि पहले पुराना छोड़ देता हूं उसके बाद नया पकडू तो ये भी एक गलत आईडिया है क्योंकि पुराने को छोड़ने के बाद उसके विड्रॉल सिम्टम्स ही तुम्हें इतना परेशान कर देंगे फॉर एग्जांपल कोई इंसान वेट लॉस कर रहा है और उसे सुबह ब्रेकफास्ट स्किप करना है पर उसके ब्रेन और पेट को तो सुबह-सुबह खाने की आदत हो गई है तो वो सुबह 8:00 बज से ही सिग्नल भेज देते हैं कि अब खाने का टाइम हो
गया है अब उस बंदे ने ब्रेकफास्ट तो हटा दिया पर कुछ और नहीं डाला अपने आप को बिजी और डिस्ट्रैक्टेड रखने के लिए अब उसको खाली बैठे हुए अपनी अर्जी पर कंट्रोल करना पड़ेगा और उसके थॉट्स में ब्रेकफास्ट ही चलता रहेगा और चांसेस है उसका ब्रेकिंग पॉइंट आ जाएगा और वो हार मान के ब्रेकफास्ट कर ही लेगा यही कारण है ज्यादातर लोग वेट लॉस भी नहीं कर पाते तो ऐसे नहीं करना है आपको पुराना छोड़ते वक्त न्यू को साथ में लेकर चलना है न्यू हैबिट्स इंप्लीमेंट करके अपने लिए परफेक्ट रूटीन कैसे डिजाइन करना है इस
पर मैं एक लॉन्ग डिटेल वीडियो बना दूंगा अगर आप लोग कहोगे तो आपको अपने पुराने हैबिट पैटर्स ब्रेक करने हैं जिसके बाद आप पॉन में घुस जाते हो हो सकता सता है आपको कोई सर्टेन टाइमिंग पर करने की आदत हो गई है तो उस टाइमिंग पर अपने आप को बिल्कुल ब्लॉक और बिजी कर लो हो सकता है आप रात को सोने से पहले करते हो तो दिन में जल्दी उठना शुरू करो हो सकता है आपकी लस की टेंडेंसी तब जागती है जब आप अकेले होते हो और आपके आसपास कोई नहीं है तो कुछ दिन अकेले
रहने की जगह अपने सिब्लिंग्स और पेरेंट्स के साथ टाइम बिताना शुरू करो एक बड़ा ट्रिगर है आजकल सोशल मीडिया वहां पर तो इस तरह का घटिया रिवीलिंग आपके अंदर काम मुक्ता बढ़ाने वाला कंटेंट हर जगह मिलेगा तो ऐसे ट्रिगर्स को तो पहली नजर में ही अपनी लाइफ से हटा दो instagram2 क्या है और आपको उस न्यूरल कनेक्शन को तोड़ना है ध्यान रखो किसी भी हैबिट को ब्रेक करते टाइम शुरुआत में विड्रॉल सिमटम्स आ सकते हैं आपको लगेगा कि कुछ मिसिंग मिसिंग सा लग रहा है और हो सकता है शुरू के कुछ दिन आपको सफर भी
करना पड़े और आपके मन में थॉट आए कि अभी जितना मैं सफर कर रहा हूं उससे अच्छा तो मैं एडिक्टेड ही ठीक था कम से कम कुछ प्लेजर तो मिल रहा था पर ये बस पहले 10 दिन की बात है 10 दिन झेल जाओ धीरे-धीरे आपके ब्रेन के न्यूरल कनेक्शंस और न्यूरोप्लास्टिसिटी वीक होती जाएगी और एक महीने बाद आप अपने न्यू काम में इतने इंडल हो जाओगे कि आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपने पोन को मिस करना भी छोड़ दिया है जिस इंसान ने अभी तक के पहले तीन स्टेप्स को फॉलो करके अपने दिन
की खालीपन की शिटी हैबिट्स को सुपीरियर हैबिट्स और रूटीन से भर दिया तो उसकी पॉन एडिक्शन गारंटीड खत्म हो जाएगी कमेंट्स में ऐसे लोग जिन्होंने एडिक्शन पहले ब्रेक की हुई है वो आपको बता देंगे कि उनकी लाइफ में भी कुछ सिमिलर हुआ है मे बी कॉलेज या जॉब स्टार्ट हो गई लाइफ में रिस्पांसिबिलिटीज आ गई कुछ अच्छी हैबिट्स पकड़ ली ओवरऑल फ्री टाइम कम होने लगा तो पॉन एडिक्शन अपने आप छूट गई इतना काफी है पर जब एक बार एडिक्शन छूट गई तो वह वापस भी आ सकती है और आने लगे तो उस टाइम क्या
करना है जानने के लिए बढ़ते हैं अगले पॉइंट में अगर एक बार अपने पोन एडिक्शन को ब्रेक करके लंबे टाइम तक छोड़ दिया और आपका न्यूरल कनेक्शन काफी वीक हो चुका है तो उसके बाद काफी हद तक आसान हो जाता है कि आपके लस के इमोशंस आपको इतना ओवर पावर नहीं करेंगे और आप इस चीज को रैशनल और इंटेलेक्चुअली अपने मन से खुद बातचीत करके रिजेक्ट कर सको पर उसके लिए एक रिक्वायरमेंट है कि आपको अपने थॉट्स को रियल टाइम में देखना आना चाहिए जिस टाइम थॉट उठे कि आओ पॉन देखते हैं उस टाइम उस
थॉट पर अनकॉन्शियसली एक्ट करने की जगह आप उस थॉट को ऑब्जर्व कर पाओ और कह पाओ कि ये जस्ट एक थॉट है जो कहीं से रैंडम उठाए और मुझे हर थॉट को अपना समझकर उस पर एक्ट करने की कोई जरूरत नहीं है अगर आपको पता ही नहीं चलता कि आपके थॉट्स कब एक्शन में ट्रांसलेट हो गए या फिर आपको थॉट का तो पता चल जाता है बट आपको अपने आप से बात करने का वक्त ही नहीं मिलता एकदम से एक्शन शुरू हो जाता है तो आपको अपनी माइंड फुलनेस बढ़ानी होगी जिससे आपको अपने थॉट्स देखने
का रिएक्शन टाइम बढ़ जाए अब आपको अपने अंदर फोर साइड डेवलप करनी है जैसे ही आपका मन किसी भी चीज में आपको इंडल्स करने को गए आप उसी वक्त 5च सेकंड का पॉज लो और देख पाओ जिस चीज में मैं अभी घुसने वाला हूं उससे मुझे अल्टीमेटली क्या मिलने वाला है सुख या दुख और रियलिटी में आपको काफी अच्छे से पता है कि क्या चीजें आपके लिए सही होती है और क्या खराब बस उस वक्त शॉर्ट टर्म सुख की चाद इतनी हावी हो जाती है कि हम देख ही नहीं पाते कि उसके बाद क्या होने
वाला है और यही बहुत बड़ी दिक्कत है कि हम बार-बार भूल जाते हैं कि लास्ट टाइम क्या हुआ था इसी के चक्कर में हम उन गलतियों को बार-बार रिपीट करते रहते हैं इसलिए जब भी आप अगली बार शॉर्ट टर्म प्लेजरस में डूबकर अपना पूरा दिन खराब करो और आपको दुख रिग्रेट और अंदर खोखले पन की फीलिंग हो तो उस फीलिंग से मुंह चुराकर किसी दूसरे सुख की खोज में मत भागने लग जाना उस फीलिंग को फेस करो उसको इतना एब्जॉर्ब कर लो कि वो हमेशा के लिए आपकी मेमोरी में छप जाए कि आप उस चीज
के बारे में जब भी सोचो तो आपको उस छोटे सुख से पहले उसके पीछे का बड़ा दुख दिख जाए और आप उस एक्टिविटी को करने के साथ अपने दिमाग में एक नेगेटिव एक्सपीरियंस जोड़ लो यही एग्जैक्ट टेक्निक यूज़ करके मैंने सालों पहले अपनी गेमिंग एडिक्शन को छोड़ा था एक रॉकेट लीग नाम से गेम है मैं उससे एडिक्टेड था जब भी फ्री टाइम मिलता था मैं गेम स्टार्ट कर लेता था और ऐसा भी नहीं कि मुझे खेलने में बहुत मज आ रहा था बस ऐसी आदत बनी हुई थी तो खेलता जा रहा था गेम पे काफी
हाई रैंक्स पे पहुंच गया था तो हारने में फ्रस्ट्रेशन भी होती थी टाइम तो खराब हो ही रहा था गेम भी काफी इंटेंस था तो आंखें और शरीर दोनों थक जाते थे डोपामिन लेवल्स इतने हाई हो जाते थे कि उसके बाद कुछ करने का मन ही नहीं करता था घंटों वेस्ट करने के बाद बस में एग्जॉस्ट होकर अपने सोफे पर लेट जाता था और सोचता था कर लिया ना आज का भी दिन खराब ऐसी लाइफ नहीं जीनी मुझे इस बार फोन उठाकर अपने आप को डिस्टक्ट करके इस फीलिंग से एस्केप करने की जगह मैंने इसे
फेस किया अगले दिन से मैंने अपने आप को थोड़ा बिजी रखना स्टार्ट किया लेकिन किसी चीज को इतने टाइम से कर रहे तो वो एकदम से छूट नहीं जाएगी तो उस काम के बीच में थॉट्स आने लगते हैं कि आज जा रॉकेट लीग खेलते हैं उस मूवमेंट में आपको अपने आप से बात करनी है भूल गया क्या लास्ट टाइम क्या हुआ था जो ये छोटा सुख दिखाई दे रहा है इसके पीछे एक बहुत गहरा दुख छुपा बैठा है और अपने मन में उन खराब मूवमेंट्स का फ्लैशबैक प्ले कर दो अगर आपके उन दुख के पलों
में एक सच में जेनुइन फीलिंग है कि मुझे वापस वहां नहीं जाना तो आपका मन भी कन्विंसिंग जाता है वो भी कहता है कि बात तो सही है मे बी गेम खेलना उतना अच्छा आईडिया नहीं है जितना मुझे लग रहा था और फिर वो उस पल के लिए शांत हो जाता है फिर वोह अगले दिन दोबारा उठेगा इसी सजेशन के साथ दोबारा आपको अपने मन के साथ यही बातचीत करनी है और वह शांत हो जाएगा इवेंचर आपके न्यूरल कनेक्शंस वीक होते जाएंगे और आपका मन भी सजेशन देना छोड़ देता है अब मुझे रॉकेट लीग खेले
हुए साल हो गए और अब मुझे उस गेम को खेलने का एक थॉट तक नहीं आता सो टाइम और डिस्टेंस के साथ ये और आसान होता रहता [संगीत] है यह इस वीडियो का सबसे कॉम्प्लेक्शन है और हो सकता है ज्यादातर लोगों को ये समझ भी नहीं आएगा क्योंकि इसको समझने के लिए अध्यात्म की थोड़ी नॉलेज चाहिए पर फिर भी मैं थोड़ा समझाने की कोशिश करता हूं ताकि एटलीस्ट आपके माइंड में एक सीड प्लांट हो जाए और आपकी इसमें रुचि आए तो आप इसमें अपनी खुद की रिसर्च कर सको इंसान जिस तरह से अपने आप को
देखता है जो आइडेंटिटी अपने लिए चुनता है वो उसी आइडेंटिटी के पॉइंट ऑफ व्यू से दुनिया को देखने लग जाता है जिस इंसान ने अपने आप को देखने का नजरिया बदल लिया उसके लिए संसार भी बदल जाता है दृष्टि बदली तो सृष्टि बदली और यहीं पे इंडियन फिलॉसफी की मेजर बुक्स जैसे अष्ट वक्र गीता और उपनिषद आपसे सवाल उठाने को कहते हैं कि अपने आप से पूछो कि मैं कौन हूं क्या आइडेंटिटी मानकर बैठे हो तुम अपने आप को ये आंसर आपको अपनी जर्नी में वेरियस बुक्स की मदद लेकर खुद फाइंड आउट करना है संत
ज्ञानी लोग जब वर्षों तक इस पथ पर चलते हैं तो उन्हें कुछ रिलाइजेशंस होती है कि ये शरीर उनकी असली पहचान नहीं है यह तो एक उदाहरने इस रियलाइफ के साथ उनका अपने शरीर के साथ आइडेंटिफिकेशन और अटैचमेंट कम होने लगता है वो जान जाते हैं कि लस्ट और शरीर की बाकी वृत्तियों पर एक्ट करना इतना इंपॉर्टेंट नहीं है क्योंकि उन पर एक्ट करने से उनको शांति नहीं मिलने वाली जितना शरीर मांगता वो उसको दे देते हैं पर उन वृत्तियों को वो अपने मन पर हावी नहीं होने देते हैं ऐसी अंडरस्टैंडिंग को ब्रह्म लीनता और
ब्रह्मचार्य भी कहा जाता है और ये एक लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन है पॉन एडिक्शन और दुनिया की सौथ तरह की प्रॉब्लम्स का और इसके बारे में मैं फ्यूचर वीडियोस में बात करता रहूंगा एंड दैट्ची तो कमेंट्स में अपने जेनुइन ओपिनियन बताना कौन से पार्ट अच्छे थे और कौन से खराब थे ताकि मैं आगे की वीडियोस में उनको इंप्रूव करके चेंजेज ला सकूं चलो फिर सी यू इन द नेक्स्ट वीडियो