दोस्तों काफी समय पहले यूनान में एक बादशाह रहता था बादशाह की एक बेटी थी जो बहुत ही खूबसूरत थी चूंकि उस बादशाह की एक ही बेटी थी इसलिए बादशाह अपनी बेटी को दहेज में ऐसी कीमती चीजें देना चाहता था कि जिन्हें दुनिया सदियों याद रखें इसके लिए वह दुनिया जहान से चीजें इकट्ठी कर रहा था इसलिए उसने पूरी दुनिया में ऐलान कर रखा था कि जिस शख्स के पास कोई भी खूबसूरत और अनोखी चीज मौजूद हो वह लाकर मुझे दे बदले में मैं उसे मुंह मांगी कीमत दूंगा यह ऐलान सुनकर दूर दूर से सौदागर आते
थे और अपनी चीजें बादशाह को पेश करके ढेरों इनाम हासिल करते थे काशिम भी एक सौदागर था वह बड़ा बेईमान और मक्कार सौदागर था हमेशा अपने ग्राहकों को घटिया माल देता था और चिकनी चुपड़ी बातें करके ज्यादा दाम वसूल कर लेता था बादशाह का ऐलान सुनकर उसके मुंह में भी पानी भर आया और वह सोचने लगा कि वह कौन सी चीज बादशाह के पास लेकर जाऊं आखिर उसके मक्कार मन में एक तरकीब आ गई जिससे वह बादशाह के पास इनाम हासिल कर सकता था उसने मुर्गी का एक अंडा लिया और उसे अच्छी तरह से उबाल
लिया ताकि वह टूट ना सके और उसे लेकर बादशाह के मुल्क की तरफ चल दिया बादशाह के मुल्क में जाकर वह एक सराय में ठहरा और रात को उसने उबले हुए अंडे पर रंग रोगन करके उसे बहुत ही खूबसूरत बना दिया फिर सुबह वह बादशाह के दरबार में पहुंच गया और उससे बोला जहां अपना मुझसे पहले सौदागरों ने आपको बहुत खूबसूरत और हैरत अंगेज चीजें पेश की होगी लेकिन जो चीज मैं आपके लिए लाया हूं उसका पूरी दुनिया में कोई जवाब नहीं बादशाह सौदागर की बात से बड़ा खुश हुआ उसने झट से कहा सौदागर अपनी
अनोखी चीज हमारे सामने पेश करो अगर यह वाकई अनोखी हुई तो हम तुम्हें मुंह मांगा इनाम देंगे और अगर तुम कहोगे तो हम तुम्हें अपने शाही दरबार में जगह दे देंगे बादशाह की यह बात सुनकर सौदागर की बांछें खिल गई उसने कमर के साथ बंधी हुई थैली में से मुर्गी का उबला हुआ अंडा जिस पर उसने रंग रोगन कर दिया था उसको निकालकर बादशाह के सामने पेश किया और दब से बोला आलम पनाह यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है दुनिया का कोई भी बादशाह इसकी कीमत अदा नहीं कर सकता मगर आपकी बेटी की शादी
है इसलिए मैं इसे आपके पास लेकर आया हूं मेरी तरफ से यह बेशकीमती मोती कबूल कीजिए मुझे उम्मीद है कि शहजादी साहिबा मोती को बहुत पसंद करेंगी बादशाह ने रंगीन अंडे को देखा तो खुशी से उछल पड़ा क्योंकि इसने इससे पहले वाकई ऐसा मोती कभी नहीं देखा था उसने सौदागर से कहा यह हीरा सचमुच मुझे बेहद हसीन लगा हमने पहले कभी ऐसा रहा नहीं देखा इसका हम तुम्हें मुंह मांगा इनाम देंगे लेकिन इससे पहले हम यह शहजादी का को दिखाएंगे हो सकता है कि हमारी बेटी को यह हीरा पसंद ना आए वैसे इसके साथ वाला
हीरा भी मौजूद होता तो मजा आ जाता यह कहकर बादशाह ने एक कनीज के हाथ सौदागर का पेश किया हुआ अंडा शहजादी के पास भेज दिया शहजादी अपनी सहेलियों के दरमियान बैठी थी उसने कनीज से मोती लेकर देखी तो फौरन समझ गई यह तो मुर्गी का अंडा है जिस पर रंग रोगन किया हुआ था शहजादी ने सौदागर की मक्कारी भांप ली मगर उसने इसका इजहार नहीं किया असल में वो सौदागर को उसकी धोखेबाजी पर सजा देना चाहती थी चुनांचे उसने कनीज के हाथों बादशाह को पैगाम भेजा कि हीरा मुझे पसंद आ गया है लेकिन सौदागर
को हुक्म दीजिए कि ऐसा ही एक और हीरा लाए ताकि मैं दोनों मोतियों को कानों में पहन सकूं अगर सौदागर दूसरा हीरा लाने से इंकार करें तो उसका सर कलम कर दीजिए कनीज ने यह पैगाम बादशाह को दिया तो बादशाह ने सौदागर से कहा भाई सौदागर हमारी बेटी को तुम्हारा हीरा पसंद आ गया है मगर उसने एक शर्त रखी है कि इस हीरे की कीमत सौदागर को तभी अदा की जाए जब वह ऐसा ही एक और हीरा लाए और अगर वह दूसरा हीरा नहीं लाया तो उसकी गर्दन काट दी जाए सौदागर ने बादशाह की जबान
से शहजादी की शर्त सुनी तो उसका रंग उड़ गया उसने सोचा कि अब क्या करूं मुर्गी का एक और अंडा उबाल कर लाऊं तो हो सकता है कि उस पर ऐसा रंग रोगन ना कर सकूं जैसा पहले अंडे पर किया था बहरहाल मौत के डर से उसने बादशाह से कहा हुजूर जैसा शहजादी साहिबा का हुक्म मैं दूसरा हिरा ले आऊंगा पर इसके लिए मुझे एक माह की मोहलत और साथ ही 1 लाख स्वर्ण मुद्राएं भी चाहिए ताकि मैं उन लोगों को रिश्वत दे सकूं जिनके कब्जे में इस किस्म के हीरे हैं क्योंकि बादशाह सीधा-साधा इंसान
था इसलिए शहजादी से पूछे बगैर ही सौदागर को 1 लाख स्वर्ण मुद्राएं दे दी जिन्हें लेकर सौदागर इस मुल्क से गायब हो गया उसने मुर्गी के एक अंडे की एक लाख अशर्फियां वसूल कर ली थी फिर अब उसे वहां ठहरने की भला क्या जरूरत थी सौदागर बादशाह के मुल्क से जैसे ही निकला एक दूर दराज के मुल्क में जा छुपा वहां उसने एक लाख अशरफियां की मदद से एक आलीशान महल खरीदा और ठाठ से रहने लगा उस सौदागर का नाम कासिम था जब वह भाग गया तो शहजादी ने अपने बाप बादशाह से कहा अब्बा जान
आपने उस धोखेबाज को एक लाख स्वर्ण मुद्राएं क्यों दे दी वह तो आपको एक मुर्गी का अंडा बेच गया और अब कभी नहीं वापस आएगा बादशाह ने बेटी की जबान से जब यह सब सुना तो गुस्से से लाल पीला हो गया उसने गुस्से से कहा वह मक्कार तो कहता था कि यह हीरा है इसीलिए मैंने उसे एक लाख मुद्राएं दे दी कि वह ऐसा ही एक और हीरा लाए बेटी तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया कि वह सौदागर शैतान का बच्चा है और हमें धोखा देने की कोशिश कर रहा था जवाब में शहजादी बोली अब्बा
जान मुझे क्या मालूम था कि आप इतनी जल्दी में उसे एक लाख अशरफिया दे देंगे मेरा ख्याल तो यह था कि आपको उसे कुछ देना होगा तो मुझसे जरूर मशवरा करेंगे इससे पहले भी तो हर सौदागर को आप इनाम मुझसे पूछ कर देते थे तब बादशाह को अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसने अपनी बेटी से मशवरा ना करके गलती की थी बहरहाल अब क्योंकि गलती हो चुकी थी इसलिए बादशाह ने गरज कर कहा हम उस मक्कार सौदागर को जिंदा नहीं छोड़ेंगे अगर वह जमीन के अंदर भी घुस जाए तो उसे ढूंढ निकालेंगे जिसने हमें
धोखा दिया है और धोखा देने वाले को मैं कभी माफ नहीं करता शहजादी ने अपने बाप का फैसला सुनी तो बोली अब्बा जान आप उस मक्कार सौदागर को कैसे गिरफ्तार करें द लाजमी बात यह है कि वह किसी और मुल्क में जा छुपा होगा और पता नहीं वह कौन सा मूलक होगा हो सकता है वह जिस मुल्क में हो वहां का बादशाह आपका दुश्मन हो और वह उस सौदागर को आपके हवाले ना करे बादशाह के दिमाग में यह ख्याल नहीं आया था फिर बादशाह ने शहजादी से कहा तुम्हारी बात तो ठीक है बेटी फिर क्या
किया जाए जवाब में शहजादी बोली आप फिक्र ना करें अब्बा जान सजा तो उस शैतान को मैं दूंगी और उसे ऐसी सजा दूंगी कि सारी दुनिया याद रखेगी यह कहकर शहजादी ने मर्दाना लिबास पहना और घोड़े पर बैठकर उस मक्कार सौदागर की तलाश में निकल पड़ी शहजादी ने एक मुल्क देखा दूसरा मुल्क देखा तीसरा और चौथा देखा और इस तरह वह कई मुल्कों के खाक छानती उसी मुल्क में जा पहुंची जिसमें वह सौदागर रहता था वहां के लोगों से पूछने पर जल्द ही उसका पता हासिल कर लिया और उसे पता चला कि यहां एक नया-नया
दौलतमंद शख्स आया है जिसने बहुत आलीशान महल तामीर कराया है और उसका नाम कासिम है शहजादी को यह शक हो गया कि हो ना हो यह वही शैतान सौदागर है लिहाजा वह सौदागर के महल पहुंच गई और दरबान से बोली मैं दूर के एक मुल्क से आया हूं और मैं तुम्हारे मालिक से मिलना चाहता हूं मुझे बहुत जरूरी काम है दरबान ने पूछा नौजवान तुम्हारा नाम क्या है सौदागर साहब से तुम्हें क्या काम है शहजादी जो लड़का बनी हुई थी बोली मेरा नाम समीर है और मुझे सौदागर से यह काम है कि मैं उनके पास
नौकरी करना चाहता हूं दरबान को शहजादी के मासूम चेहरे पर तरस आ गया उसने शहजादी को दरवाजे पर खड़ा किया और अंदर सौदागर को बताने चला गया सौदागर उस वक्त अशरफियां गिन रहा था उसने दरबान से कहा मुझे नौकर वॉकर की कोई जरूरत नहीं है आगे ही नौकर इतने ज्यादा है कि मेरी अच्छी खासी रकम उनकी तनख्वाह में खर्च हो जाती है उस नौजवान से कहो भाग जाओ यहां से जवाब में दरबान बोला हुजूर मुझे तो वह कोई बहुत मुसीबत में ज्यादा दिखाई देता है क्योंकि उम्र भी उसकी ज्यादा नहीं है और हो सकता है
कि उसके वालीदैन इस दुनिया में ना हो और मजबूरन उसे नौकरी करना पड़ रहा हो लिहाजा आप उसे नौकरी पर रख लीजिए सौदा गढ़ दरबान की बात सुनकर मुतासिर हो गया और उसने उसे कह दिया अच्छा उसे मेरे घोड़ों की मालिश के लिए मुलाजिम रख लो और उसे बता देना कि हर महीने चार अशरफियां मिलेंगी सौदागर यह कहकर दोबारा से अशरफियां गिनना शुरू कर दिया और दरबान खुशी खुशी महल से बाहर आ गया बाहर आकर उसने शहजादी से कहा लो तुम्हारा काम बन गया मेरा मालिक पहले तो मानता ही नहीं था मगर मैंने उसे मना
ही लिया मालिक ने तुम्हें घोड़ों की मालिश करने का काम लगाया है और तनख्वाह में हर महीने चार अशर्फियां मिलेंगी क्योंकि यह तनख्वाह बहुत कम है मगर मन लगाकर काम करोगे तो साल दो साल बाद ही तनख्वाह बढ़ा दिया जाएगा शहजादी को तो तनख्वाह से कोई मतलब था नहीं वह तो किसी तरह सौदागर के करीब पहुंचना चाहती थी ताकि उसे धोखेबाजी की सजा दे सके लिहाजा उसने घोड़ों की मालिश करने की नौकरी इख्तियार कर ली और सौदागर के महल के अंदर ही एक छोटे से कमरे में रहने लगी सौदागर बड़ा शैतान था हालांकि उसने शहजादी
को उस वक्त बिल्कुल नहीं देखा था जब वह उसके बाप बादशाह के हाथ उबला हुआ अंडा बेच आया था लेकिन जब शहजादी को मर्दाना लिबास में देखा तो उसे शक हुआ कि यह कोई लड़का नहीं बल्कि लड़की है और हो ना हो यह जरूर बादशाह की बेटी शहजादी है यह ख्याल करके वह मुनाफे मौके की तलाश में रहने लगा जब वह शहजादी को उसकी असल रूप में देख सकता और फिर उसे कत्ल करके महल के तहखाने में फेंक देता अपनी हरकतों से उसने शहजादी को बिल्कुल मालूम ना होने दिया कि मैंने तुम्हें पहचान लिया है
उन दोनों की हालत एक जैसी ही थी कि शहजादी सौदागर को सजा देने का मंसूबा बना रही थी और सौदागर शहजादी का कत्ल करने का मंसूबा बना रहा था दोनों मौके की तलाश में थे शहजादी घोड़ों को मालिश करने के बाद सीधे अपने कमरे में आ जाती थी और सारी रात खामोशी से सुरंग खोदी थी इस सुरंग के जरिए ही वह सौदागर के कमरे तक पहुंचना चाहती थी क्योंकि आम हालात में सौदागर के कमरे तक पहुंचना बहुत मुश्किल था इस सुरंग को खोदते हुए उसे 10 दिन हो गए थे और वह करीब-करीब सौदागर के कमरे
तक पहुंच गई थी कि सौदागर को सुरंग का पता चल गया उसने एक रात चुपके से आकर जब शहजादी सुरंग के अंदर गई हुई थी सुरंग के मुंह पर एक बड़ा सा पत्थर रख दिया इस तरह शहजादी सुरंग के अंदर कैद होकर रह गई जिससे सौदागर बहुत खुश हुआ और उसने सोचा कि खाना पानी ताजी हवा ना मिलने के बाद शहजादी सुरंग के अंदर ही मर खब जाएगी शहजादी को सौदागर की इस हरकत की खबर उस वक्त हुई जब सुरंग को सारी खुदाई कर दिन निकलने से पहले वापस कमरे की तरफ आकर देखा तो सुरंग
के मुंह पर बड़ा पत्थर पड़ा हुआ था जिसे वह बेचारी हिला भी नहीं सकती थी इससे वह समझ गई कि सौदागर को मेरी असलियत का पता चल गया है और यह पत्थर उसी ने रखा है चुनांचे मौत के डर से वह जोड़कर रोने लगी तभी उसने अपने पैरों के पास एक नाक की पुकार सुनी जिसे सुनकर शहजादी खौफ से बेहोश हो गई कुछ देर बाद जब होश में आई तो उसने देखा कि वहां नाक नहीं था बल्कि एक निहायत हसीन नौजवान था नौजवान शहजादी से बोला शहजादी आप फिक्र ना करें मैं आपको कुछ नहीं करूंगा
मैं वह नाक हूं जिसकी उम्र 100 साल से ज्यादा हो चुकी है और मैं जो चाहूं बन सकता हूं सौदागर बहुत शैतान है उसने जब यह महल बनवाया था तो मेरे दो बच्चे और बीवी को मार दिया था तब से मैं इंतकाम लेना चाहता था मगर मैं खुद से इंतकाम नहीं ले सकता था इसको सिर्फ कोई इंसान ही सजा दे सकता था अब आप इस से सजा देना चाहती हैं तो मैं आपकी पूरी मदद करूंगा मैं सुरंग के इस पत्थर को पानी की तरह बहा देता हूं जिसके बाद आप सुरंग से बाहर निकल जाइएगा शहजादी
नाग की बातें सुनकर खुश हो गई लेकिन उसने कहा मैं इधर से बाहर निकलना नहीं चाहती बल्कि सुरंग के दूसरे सिरे से सौदागर के कमरे में निकलना चाहती हूं ताकि उसे सजा दे सकूं लिहाजा तुम इसमें मेरी मदद करो नाग बोला ठीक है मैं अपना फूंकार मारकर सौदागर के कमरे के फर्श में सुराख कर देता हूं आप ऊपर जाकर उसे सजा द यह कहकर नाग और शहजादी सुरंग के दूसरे सिरे पर पहुंच गए जहां नाग ने जहरीली फूंक मारकर सुरंग से सौदागर के कमरे का फर्श फाड़ दिया जिसके रास्ते शहजादी ने ऊपर जाकर सोए हुए
सौदागर को कत्ल कर दिया उसके साथ ही नाग ने फूंक मारकर सुरंग का धारणा बंद कर दिया और हमेशा हमेशा के लिए गायब हो गया फिर शहजादी भी रातों रात महल वापस भाग आई प्यारे दोस्तों कभी किसी इंसान को धोखा नहीं देना चाहिए i