सुनवा ने अपनी माता को बताया कि मुझे देवी पूजन करना है तो अमर ढोल मंगवा दो माता ने राजा से कहा तो राजा ने साफ इंकार कर दिया कि रणभूमि से ढोल वापस नहीं लाया जाएगा सुनवा ने माता से कह दिया कि यदि ढोल नहीं आया तो मैं पेट में छुरी मारकर मर जाऊंगी अतः रानी ने राजा पर बहुत जोर डाला और अमर ढोल रणभूमि से मंगा लिया गया उधर उदल माली का रूप बनाकर घोड़े को एक ओर खड़ा करके बाग में देवी के मंदिर में जा पहुंचा योजना के अनुसार सुनवा ढोल बजवा हुए मंदिर
आई वह पूजा करने अंदर गई तो ढोल च भी अंदर चला गया उदल ने अवसर पाकर अमर ढोल उठाया और रज अपने डेरे पर लौट गया मलखान से उदल बोला कि अब युद्ध के लिए रणभेरी बजवा दो फिर तो नगाड़े बज उठे हाथी सवार हाथियों पर और घुड़सवार घोड़ों पर चढ़ गए जोगा ने भी राजा को बताया कि महोबा वाले फिर चढ़कर आ रहे हैं राजा ने भोगा जोगा विजय और पटना के राजा पूरण को फौज तैयार करने का आदेश दिया पहले डंके पर गोला फेंक सज गई दूसरे पर हाथी घोड़े सज गए और तीसरे
डं की चोट पर सारा लश्कर चल पड़ा दोनों सेनाएं फिर भिड़ गई मारा मारा होने लगी वीर फिर कटकट कर भूमि पर गिरने लगे फिर रक्त की नदियां बहने लगी बदुल घोड़े पर सवार उदल ने 22 हाथियों के हदे खाली कर दिए फिर वह जोगा के सामने पहुंचा उदल बोला अब हम तुम आपस में फैसला कर ले जोगा ने कहा पहले तुम अपना वार करो उदल ने कहा हम कभी पहला वार नहीं करते भागते को पीछे से नहीं मारते निहत्थे पर या स्त्री पर हथियार नहीं उठाते तुम अपना वार करो तब जोगा ने धनुष खींचकर
बाण चलाया बदुल ने दाए हटकर वार खाली जाने दिया फिर जोगा ने तीन बार तलवार के वार किए तब उदल ने भाला फेंका जोगा का घोड़ा पांच कदम पीछे हट गया फिर सामने से भोगा आ गया उसे जवाब देने को मलखान आ भेड़ा भोगा ने तलवार का वार किया पर मलखंब उदल ने आवाज लगाकर वार करने को मना किया अरे इसे मत भावर पर नेक कौन करेगा फिर मलखान और उदल ने रण में मारा मारा मचा दी नैनागढ़ की सेना भागने लगी तब राजा नेपाली देवी के मठ में अमर ढोल लेने गए वहां अमर ढोल
ना देखकर राजा नेपाली घबराया और पूजा करके हवन करवाया तब देवी प्रसन्न हुई और कहा तुम्हें इंद्र ने ढोल दिया था मैं इंद्र से फिर ढोल मंगा देती हूं देवी ने इंद्रलोक में जाकर इंद्र से ढोल लाने को कहा इंद्रदेव ने देवता भेजकर ढोल तो मंगा लिया पर देवी को बताया कि आल्हा को माता शारदा ने अमर रहने का वरदान दिया है अतः आल्हा के विरुद्ध हम कुछ नहीं करेंगे और अमर ढोल को फोड़ दिया गया देवी ने राजा नेपाली से कहा कि ढोल फट गया अब काम नहीं करेगा फिर राजा नेपाली ने अपने मित्र
सुंदरवन वाले हरिनंदन को पत्र भेजकर सहायता के लिए बुलाया सुंदरवन से हरिनंदन ने आकर नदी के पार डेरा डाला ों ही नदी में नावों पर नृत्य शुरू हुआ आल्हा देखने लगे तो हरिनंदन ने आल्हा का परिचय पूछा और नाव पर बिठाकर सुंदरवन को रवाना कर दिया बहुत देर तक आल्हा के ना मिलने पर उदल और मलके ने ढेवा से कहा कि अपने पतरा से देखकर बताओ तब तक रूपन ने आकर सारी घटना बता दी देवा ने उपाय बताया कि उदल सौदागर का वेश बनाकर जाए तब उदल ने वैदुवादी को खबर भेज दी कि घोड़ा खरीद
लें अरे नंदन ने कीमत पूछी तो ऊदल ने कहा पहले सवारी करके देख लो फिर कीमत पूछना राजा ने अपने दरबारी जनों को घोड़ा पर रखने को कहा परंतु वे घोड़े से डर गए उदल ने कहा कि घोड़े काबुल से लाए हैं पांच घोड़े महोबा में बेचे थे दो जूनागढ़ में बेचे हैं अरि नंदन ने आल्हा को बुलाया और कहा कि घोड़े पर सवारी करके दिखाओ तो कैद माफ कर देंगे आल्हा बजरंग बली को याद करके घोड़े पर सवार हुए उदल ने इशारा कर दिया उदल भी अपने वैद पर चढ़े और घोड़ों को तेजी से
दौड़ा लिया अल्हा उदल दोनों अपने दल में पहुंचे तो उदल मलखान से बोला जल्दी युद्ध शुरू करो और आल्हा भाई की भावर डलवाओ नगाड़ा बजा दिया हाथी वाले हाथी पर चढ़ गए घुड़सवार अपने अपने घोड़ों पर चढ़ गए उदल वैद पर मलखान कबूतरी पर जगनिक हर नागर घोड़े पर ढेवा मनरथा पर सुलिक घोड़े करेलिया पर और ताला सयद सिंहनी घोड़ी पर सवार हो गए गए आल्हा अपने पंच शव हाथी पर बैठे मन्ना गुजर और रूपण वारी सबने तैयारी कर ली दूसरी तरफ राजा नेपाली सिंह ने भी तीनों लड़के खड़े कर दिए दोनों लश्कर खेतों में
पहुंच गए पटना वाला पूरण भी चौथे भाई की तरह साथ था उदल ने कहा जल्दी सुनवा की भावर डलवा दो क्यों नाहक अपनी जान गवाते हो जोगा बोला बना फर छी जात है पूरे राजपूत नहीं है उदल ने तुरंत जवाब दिया मेरा नाम उदल सिंह राय है दसराज तथा मां देव कुंवरी के पुत्र हैं फिर तो दोनों ही आपस में जूझने को तैयार हो गए जोगा ने पहले तीर चलाया फिर भाला मारा परंतु वैदुर्य ने सिरोही का वार किया सिरोही टूटकर मूठ हाथ में रह गई ढाल को घुमा के मारा तो जोगा को धरती पर
गिरा दिया फिर तो उदल ने जोगा को जंजीर से बांध लिया भोगा ने अपना घोड़ा आगे बढ़ाया तो मलखान ने भी अपनी घोड़ी को आगे बढ़ा दिया भोगा ने तलवार के तीन वार लगातार किए जिन्हें मलखान ने बचा लिया फिर मलखान ने ढाल से धक्का मारा तो भोगा गिर गया इस प्रकार भोगा भी कैद हो गया विजया आगे बढ़ा तो ढेवा भिड़ गया यहां भी तलवार के वार खाली गए उसी प्रकार विजया को भी गिराकर बंदी बना लिया राजा पूरण हाथी पर सवार थे उनसे जगनिक भिड़ रहा था उसने एक झटके में महावत को मार
गिराया फिर हौदा के स्वर्ण पुष्प और अंबारी को गिरा दिया पूर घबरा गया था उसे भी जगनिक ने बांध लिया आ [संगीत]