से 12 वर्ष पहले आज ही के दिन मुंबई में एक बहुत बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था और यह भारत पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था हमला करने वाले 10 आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे मुंबई के अलग-अलग जगहों पर 60 घंटों तक आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चली जिसमें नौ आतंकवादी मारे गए थे 10वें आतंकवादी अजमल कसाब को मुंबई पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले ने जिंदा पकड़ा था उस दौरान कसाब ने तुकाराम ओंबले के पेट में गोली मारी थी गोली लगने के बावजूद तुकाराम ने कसाब को थोड़ा नहीं और
बाद में वह वीरगति को प्राप्त हुए शहीद तुकाराम ओंबले की बात आज इसलिए भी खास तौर पर कर रहे हैं क्योंकि अगर शहीद तुकाराम ने कसाब को जिंदा पकड़ा होता तो दुनिया कि के सामने भगवा आतंकवाद का झूठा का झूठ बेनकाब नहीं होता आपको याद होगा जब पाकिस्तान से आए आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को पकड़ा गया तो उसके हाथ में एक लाल रंग का धागा योनि के अलावा भी बंधा हुआ था और वह अपना नाम समीर चौधरी बता रहा था यह पाकिस्तान की बहुत बड़ी साजिश थी और यह भी धर्म के आधार पर बनाई गई
साजिश थी जिसमें पाकिस्तान के आतंकवादियों को हिंदू पहचान के साथ हमले के लिए भेजा गया था इस षड्यंत्र के मुताबिक यह एक सुसाइड अटैक था यानी इसमें सभी 10 आतंकवादियों को मर जाना था और अगर ऐसा हो जाता तो हिंदू आतंकवाद के प्रोपेगंडा को दुनिया भी सच मान लेते क्योंकि योजना यह थी कि सारे के सारे जो आतंकवादी थे इन्हें हिंदू नाम और हिंदू पासपोर्ट नामों के पासपोर्ट के साथ हिंदू पहचान के साथ यहां भेजा गया था कसाब के हाथ पर जान-बूझकर एक लाल धागा ज्यादा गया था जिससे यह लगे कि हिंदू है और इन
सबको क्योंकि मर जाना था यह किसी को यह भी नहीं बता पाते कि यह कहां से आए हैं इसलिए साजिश है थी कि इसे हिंदू टेरर का नाम दे दिया जाएगा लेकिन तुकाराम ओंबले ने कसाब को जिंदा पकड़ लिया और इस पूरे के पूरे षड्यंत्र को विफल कर दिया और यह साबित हो गया कि कसाब के हाथ में बंधा हुआ कलावा एक छलावा है और समीर वास्तव में कसाब है तुकाराम ओंबले ने देश का की राजनीति के एक बहुत बड़े झूठ को भी गलत साबित कर दिया हुए हमले के दो वर्ष बाद मुंबई में ही
छह दिसंबर 2010 को एक किताब में रिलीज की गई जिसका नाम था आर एस एस की साजिश 2611 यह किताब का नाम है जिसमें बताया गया था कि जो 2611 का हमला था यह आर एस एस की साजिश थी जिसे उर्दू के जाने-माने पत्रकार अजीज बर्नी ने लिखा था किताब को देश के सामने रखने आए थे कांग्रेस के बड़े नेता दिग्विजय सिंह जो आपको तस्वीर में दिख रहे हैं इस मंच पर उनके साथ मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक महेश भट्ट और उस समय महाराष्ट्र सरकार के पूर्व के गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह भी आपको तस्वीर
में दिख रहे हैं दिग्विजय सिंह उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सबसे करीबी लोगों में से एक माने जाते थे इसलिए आप कह सकते हैं कि इस किताब को कांग्रेस का भी आशीर्वाद प्राप्त डॉ मनमोहन सिंह ने है कि यूपीए सरकार की नीतियों का यह सबसे बड़ा विरोध आवाज था एक तरफ सरकार पाकिस्तान को हमले के दोषियों तक दिया करती थी दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के नेता भगवा आतंक के झूठे प्रचार में शामिल होते थे जिसमें मुंबई हमले को आर एस एस की साजिश बताया जाता था ऐसे में कई गंभीर सवाल तत्कालीन यूपीए सरकार
और उसके नेतृत्व पर भी उठते हैं कि मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई क्या 2611 अमले को हिंदू आतंकवाद से जोड़ने की यह साजिश थी मीण यदि कसाब जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो क्या पाकिस्तान को क्लीन चिट मिल जाती यह बहुत सारे सवाल है यह जो हम इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि पाकिस्तान को पता था कि भारत में विचारों के नाम पर लोग बैठे हुए हैं इसका फायदा अजमल कसाब को समीर नाम देकर उठाया जा सकता है नौ आतंकवादियों को हमारे सुरक्षा बलों ने हमले के दौरान ही मार
दिया कसाब को कानून के तहत फांसी दी गई लेकिन देश में बटी हुई सोच आज भी जिंदा है जिसे खत्म करने की जरूरत है और इसके लिए हमें एक जूट रहना होगा कि पाकिस्तान की हिंदू आतंकवाद वाली साजिश को सफल नहीं हो पाए लेकिन मुंबई हमले में 166 निर्दोष लोग मारे गए थे भी सुरक्षाकर्मी 26 विदेशी नागरिक भी तब मारे गए थे कि इस हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी जैसे आतंकवादी आज भी पाकिस्तान में आराम से अपना जीवन जी रहे हैं कि भारत ने ना केवल हिंदू आतंकवाद के प्रोपेगंडा को झूठा साबित
किया बल्कि दुनिया को समझाया कि आतंक सब की समस्या है और उसकी जड़ में पाकिस्तान है यूरोपियन यूनियन ने मुंबई हमले को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ब्राउन फ्रांस को एक चिट्ठी लिखी है और उसमें सवाल किया है यह पत्र लिखकर इमरान खान से पूछा गया है कि मुंबई हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर ए ताइबा के खिलाफ उसने क्या कदम उठाए हैं पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय है अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है यूरोपीय यूनियन ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उस बयान का भी जिक्र किया है जिसमें
उन्होंने माना कि मुंबई हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी है तो यूरोपियन यूनियन ने भी बड़ा सवाल यह चिट्ठी लिखकर पाकिस्तान पर उठा दिया है कि इस हमले पर आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक बयान दिया है अब आपको वह सुनना चाहिए कि इस हमले में के लोगों की है अब हम एक दो कि मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी लोगों को नियुक्त कर दो कि इस हमले में हमारे पुलिस बल के कई है कि उन्होंने भी नमन करता हूं कि मुंबई हमले के दो कि भारत भूल नहीं करता है कि आवाज
कम भारत नई नीति नई नीति से कि आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है कि मुंबई हमले की साजिश को नाकाम कर रहे हैं ऑप्शन को मुंहतोड़ जवाब देने वाले हैं कि भारत के रक्षा में प्रतिफल जुटे हैं कि हमारे सुरक्षा बलों का भी आज मैं वंदन करता है ऑन करो [संगीत] और [संगीत] प्रिंटिंग न्यूज़ फालैन गूगल प्ले एन एप्स डाउनलोड नाउ