[संगीत] हरि [संगीत] ओम [संगीत] ना हम बसाम वैकुंठे ना हम बसा योग नाम हदय नव मद भक्ता गायती तत्र तिमि नारदा हरि हरि [संगीत] ओम एक घड़ी आधी घड़ी एक घड़ी आधी घड़ी धी में पुनियाद आधी में पु तुलसी संगत साध की तुलसी संगत साध की हरे कोटि अपराध हरे कोटि हरि हरि [संगीत] ओम [संगीत] श्री कृष्ण कहते हैं गीता गजब का संदेश ले आई भगवान के श्री मुख से जो श्लोक उच्चारित हुए वो आपके श्री मुख से निकले उच्चारण हो बहुत अच्छा होगा गांधी जी यूं कहते थे कि अगर किसी युवान युति से अथवा
किसी नागरिक से मैं पूछता हूं कि आपको गीता कंठस्थ है जब वो ना बोलता है तो मुझे शर्म के मारे मेरा सिर नीचा करना पड़ता है अपने बच्चों को गीता रामायण के श्लोक दोहे रटा हो उसका ज्ञान दो यही भविष्य पीढ़ी का कल्याण है दिल के टुकड़े हजार कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा उस खिड़की में कोई चांद का टुकड़ा रहता है सत्यानाश कर लेंगे बेटे अपनी और उनकी ऐसी फिल्मों के गीतों की अपेक्षा बहादुरी के गीत और भक्ति और ज्ञान के गीत विवेकानंद तो कहते थे कि जिस घर में सत साहित्य नहीं है उस
घर के लोगों को अपने घर की दीवार पर बड़े अक्षरों में लिख देना चाहिए कि हमारा घर शमशान है यवन सुरक्षा और पुरुषार्थ परम देवव जैसी पुस्तक अपने बच्चों को भी पढ़ा और के बच्चों को भी प्रेम से दो और पढ़े यह उत्तम दान है अभय दान है सत्संग की कैसेट आप भी सुनो और आपका पड़ोसी भी रात को सुनते सुनते सो जाए तो छह घंटा उसका शयन भी भक्ति में बंदगी में बदल जाएगा आपको पुण्य होगा और उसका कल्याण होगा जैसे सत्यानाश के साधन बड़े तेजी से बढ़ रहे हैं विनाशकारी चीज बड़े तेजी से
बढ़ रही है शराब खुले आम मिल रहा है पी रहे हैं लोग शराब में एक प्रकार का अल्कोहल होता है जो शरीर के लिए कत ही जरूरी नहीं है विज्ञानी लोगों ने तो रिसर्च किया जीव विज्ञान के ज्ञाता ने कि जो लोग शराब पीते हैं उसके ब्लड में अल्कोहल का हिस्सा आ जाता है जो शराबी शराब पीते रहते हैं उनके ब्लड में अल्कोहल का प्रमाण बढ़ जाता है उस शराबी के शरीर से पैदा हुआ बालक उसको आंख का कैंसर होने की संभावना है अगर उस बेटे को नहीं हुआ तो बेटे के बेटे को होगा ही
उसको नहीं हुआ तो उसके बेटे को होगा उसको नहीं हुआ तो तिस के बेटे को होगा तिस को नहीं तो उसको उसको नहीं तो उसके टसके टसके टसके टसके से उसके बेटे को आज से दसवी पीढ़ी वाले आने वाले मासूम को आंख का कैंसर होगा तुम ऐसा शराब पीकर अपना भला क्या करते हो और दसवीं पीढ़ी में आने वाले संतान के लिए इतना जुल्म अपने साथ और उसके साथ कब तक करोगे अपने को जरा संभालो भाइयों बोतल की शराब जब 10 पीढ़ियां बर्बाद कर सकती है तो हम कहते हैं कि आप जब कीर्तन करते हो
डॉक्टर लेवली जरिया कहता है डॉक्टर डायमंड कहता है फ्रांस के कई विज्ञानी लोग इस नतीजे पर पहुंचे कि मंत्र जपने से रक्त के कण एक घन मिलीमीटर ब्लड में 1600 जैसे श्वेत कण आपके क्रिएट हो जाते हैं अगर अच्छे वातावरण में बैठ के आप भजन कीर्तन करते तो अगर दुष्ट वातावरण में आप पीते खाते और चिंतन करते तो एक घन मिलीमीटर ब्लड में 1500 जैसे श्वेत कण नष्ट भी हो जाते हैं इतनी दवाइयां इतना ऑपरेशन इतने उपचार केंद्र खुले फिर भी मानव जात रोगों और दुखों और क्लेश की क्यों शिकार हो रही है कि व्यसनों
ने सत्यानाश कर दी व्यसन और फैशन में जिंदगियां बर्बाद हो रही है बोतल की शराब जब 10 पीढ़ियां बर्बाद कर सकती है तो हरि नाम कीर्तन करो और आपके कण तेजस्वी हो तो 21 पीढ़ियां आबाद हो जाए इसमें क्या आश्चर्य है जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बीती सुबह को उतर जाएगी तू हरि नाम की प्यानिया पी ले तेरी सारी जिंदगी सुधर जाएगी सुधर जाएगी बाबा हम दारू नहीं पीते केवल तंबाकू पीते हैं तंबाकू पीते या तंबाकू गुटका में खाते अथवा नास लेते यह सब वही है निकोटिन समर्थ रामदास ने कहा है कि
एक माला जपने से तुम्हारे शरीर में जो सात्विक कण पैदा होते हैं एक बीड़ी पीने से वह नष्ट हो जाते हैं विज्ञानी कहते कि आप सिगरेट एक फकते हैं तो आपकी एक छ मिनट के लिए आयुष्य कम हो जाती है 10 बीड़ी पीते तो आप एक घंटा अपने को जल्दी मरने की तरफ ले जा रहे हैं अगर 25 बीड़ी का बंडल हड़प करते तो ढाई घंटा अपनी आयुष समय से आप नाश कर रहे हैं बीड़ी कहे में जम की मासी एक हाथ खड़क दूसरे हाथ फासी 64 बीमारियों को जन्म मिलता है बीड़ी से और बीड़ी
से जो सिगरेट से जो कैंसर होता है उसके रोगी 95 प्र तो मर ही जाते हैं 5 प्र जीते और वो भी पा साल के अंदर स्वाहा हो जाते हैं अभयम सत्व सं शुद्धि अभयम सत्व सं अभयम सत्व संशु अभयम सत्व संशु ज्ञान योग व्यवस्थित जन योग वव ज्ञान योग व्यवस्थित [संगीत] जनन यज्ञ दानम दम यज्ञ स्वाध्याय तप आर्जव स्वाध्याय स्वाध्याय तप आर्जव स्वाध्याय श्री कृष्ण कहते कि इंसान मात्र को ऐसा नहीं कहते हिंदू मात्र को मनुष्य मात्र के लिए बोलते हैं कुटुंब का बड़ा किसी बेटी के लिए ही नहीं सोचता है अथवा किसी एक
दो बेटों के लिए नहीं सोचता है केवल पत्नी के लिए नहीं सोचता है कुटुंब का जो सचमुच में बड़ा है वो पूरे कुटुंब के लिए सोचता है ऐसे सृष्टि का जो सचमुच में बड़ा परमात्मा है वह सब मनुष्य मात्र के लिए सोचता है और बोलता है और वही वचन गीता में आए हैं कहीं पर ऐसा नहीं लिखा कि हिंदुओं को ही ऐसा करना चाहिए अथवा फलानी जाति के व्यक्ति को ही ऐसा करना चाहिए मनुष्य मा के लिए गीता है अभयम सत्व सं शुद्धि आपके जीवन में सत्कर्म करते समय डर को मत फटकने दो एक होता
है भीतर का डर दूसरा होता है बाहर काडर चोर डाकू अथवा कोई बड़ा आदमी कहीं हमको प्रॉब्लम ना कर दे यह बाहर का डर है जय राम जी की दूसरा होता है भीतर का डर कि शराब मैं पीना तो नहीं चाहता हूं लेकिन अगर इनको कंपनी नहीं दूंगा तो हो सकता है मेरे बिजनेस में अथवा हो सकता है इनके मन को दुख हो चलो जरा पी ले नहीं कृष्ण बोलते अभयम सत्व सं शुद्धि मैं हिंदूजा वाले श्रीचंद को धन्यवाद दूंगा हिंदूजा वाला सेठ श्रीचंद व कई इस्लामी मुल्कों के कई कई राजाओं से दोस्ती रखते थे
और मिलजुल के भोजन करते लेकिन अपना वैष्णव भोजन बनवा के उनके सामने अलग टेबल पर आज तक करते हैं उनके चक्कर में शराब का बाव या प्याज के चक्कर में भी नहीं आए इसलिए मैं हिंदूजा को धन्यवाद देता हूं जय राम जी उन्होंने मेरे को प्रार्थना भेजी कि बापू आप नासिक से प्रवचन पूरा करके बम्बे फ्लाइट पकड़ने आएंगे आपको रात रुकना पड़ेगा मेरे को लोगों ने संदेशा लाने वालों ने बताया बड़ी-बड़ी पार्टी थे वे लोग बापू उनका 40 करोड़ का मकान है 50 करोड़ का मैं क्या 50 अरब का हो मैं उनके मकान में तब
तक नहीं जाऊंगा जब तक वह मेरे मकान में नहीं आए मेरा मकान कहां है सत्संग जय राम जी की मैं किसी सेठ का मकान का फायदा लेने के लिए साधु नहीं हुआ हूं मैं सेठों का सेठ जो उसमें छुपा है उनका उनको फायदा मिले इसलिए किसी के मकान में रहना पड़ता तो रहता हूं जय राम जी की मैं आपके रुपयों के लिए नहीं आया हूं आपकी कोठियों के लिए नहीं आया हूं आपके फूल हार के लिए नहीं आया हूं लेकिन आपके अंदर पिया का आनंद छुपा है वह जग जाहर आप आनंदित हो जाए मुक्त हो
जाए धन्य हो जाए बस इसलिए आया हूं और मुझे आपका कुछ नहीं चाहिए अभय सत्व सन शुद्धि आप निर्भय रए अगर भय करना है तो रज्जब बताते हैं रज्जब ऐसा भय करना हम मना नहीं करते शायद कृष्ण भी मना नहीं करेंगे हरि डर गुरु डर डर हरि डर हम ये कर्म करेंगे तो अंतर्यामी परमात्मा तो नहीं नाराज होगा इस प्रकार का डर अच्छा है हरि डर गुरु डर हम ऐसी मखोलिया ऐसा आहार व्यवहार करेंगे तो संत नाराज तो नहीं होंगे इस प्रकार का डर अच्छा है हितकारी है हरि डर गुरु डर डर जगत डर करनी
में सार रजब दरिया सो उदरिया गाफिल खाया मार माता-पिता और श्रेष्ठ जन का हृदय तो दुखी नहीं होगा भगवान संत और शास्त्र की अवज्ञा तो नहीं होगी इस प्रकार का डर वास्तविक में निर्भयता के द्वार पर पहुंचाएगा लेकिन यह शराबी रूट तो नहीं जाएगा लोग जरा क्या कहेंगे लोग सचमुच में वैष्णव होते हैं लेकिन जब विदेश जाते हैं तो कंपनी देने देने के बहाने जहाज में कुछ का कुछ पी लिया कुछ का कुछ खा लिया धीरे-धीरे जो अपने घर में चौके में लीपन किए बिना रसोई नहीं बनवाते थे ऐसे सेट विदोष में गए और क्लबों
में नाच रहे हैं और लेडी लेडी के एक दूसरे के मुंह चाट चाट के अपना हृदय सत्यानाश कर रहे हैं यह डर का ही तो फल है और क्या है इसीलिए अपने धर्म कर्म में अपने कल्याण करने में आदमी को निर्भग होना चाहिए कलकत्ता के रसोय की बात याद आती है एक मारवाड़ी सेठ के यहां रसोया काम करता था सेठ आड़ा तिलक लगाता था और रसोया था वैष्णव खड़ा तिलक लगाता था सेठ बोले कि मेरे यहां नौकरी करता मेरे कुल धर्म का तो तिलक नहीं लगाता नौकरी करना है तो जैसा हम लोग लगाते हैं तिलक
ऐसा लगाया दूसरे दिन भी देखा तो नौकर का वही खड़ा तिलक तीसरे दिन सेठ रोज डांटता जा नौकर अपना रोज वही का वही रसोया तिलक लगाता आखिर सेठ खपे होकर बोला के देख रसोया का बच्चा अगर तेरे को देसी घी का भोजन खाना है और मेरे इस मलात में कोठियों में रहना है और इतना सारा पगार लेना है तो कान खोल के सुन ले कल अगर तेरे ललाट पर हमारे कुल खानदान का तिलक नहीं होगा आड़ तो तेरी नौकरी खत्म समझना रोज टोक थे रसवे ने समझा कि कल तो बिल्कुल दरवाजे पर बैठेगा व सेट
रसोया फिर भी अपना तिलक लगा कर प पहुचा सेठ ने कहा बाहर भाग जा किसी भी कीमत पर अब तू मेरे यहां काम नहीं कर सकता है रसोल ने कहा सेठ नाराज मत होना मैंने तुम्हारे कुल धर्म का तिलक लगाया है बोले कहां लगाया है तूने तो वही खड़ा लगाया है बोले नहीं खड़ा नहीं मैंने आड़ा लगाया है सेठ ने आईना दिखाया तब रसोया कहता है आईना में तो खड़ा तिलक दिखेगा आपको लेकिन मैं नौकरी करता हूं पेट के लिए सेठ जी खमीस उठाकर दिखाया पेट पे आज तुम्हारा तिलक करके आया हूं भाग्य पे तो
गुरु का दिया हुआ तिलक ही करूंगा महाराज व्रते न दीक्षा मापन ती अवेद कहता है आपके जीवन में कोई ना कोई निष्ठा तो होनी चाहिए जिसके जीवन में कोई व्रत नहीं वह तो पशु है इतना करना है इतना य यह काम तो हम कम से कम नहीं कर सकते इतना यह पाप का काम हम नहीं कर सकते ये इतना सत्कर्म तो कमाई का इतना हिस्सा तो हमको अच्छी तर करना ही है मेरा तो मेरे बाप का और तुम्हारे में मेरा भाग रख रख के मर जाएंगे तो तुम्हारा दादा ले गया परदादा ले गया कि तू
ले जाएगा कई लोग बड़ी-बड़ी संस्था में ट्रस्टी हो जाते और उन बेचारे को पता ही नहीं कि संस्था में ट्रस्टी हुए हो तो सेवा करने के लिए संस्था की जमीन या सस्ता की धर्म की चीज हड़प करोगे तो आने वाली सात सात पीढ़ियां कंगाल हो जाएगी जय राम जी की धर्माता का जिसके घर में गया उस समय तो लगता है कि उसने बढ़िया कर लिया है अल का काम क्या बाद में उसकी सत्यानाश होते हुए मैंने कईयों को देखा सिद्धपुर में केशव भाई सेठ रहता है उसका दोस्त था मिल मालिक दोनों ने दो पाच 10
लोगों ने मिल मिलाकर कोई अच्छा काम किया अच्छे काम के लिए फंड रेज किया फंड रेज करने का जो खजांची उस सेठ को बनाया गया जिसकी मिले थी ारे थी अब उस सेठ ने भी 000 दिया उस फंड में सत्कर्म में अब सेठ ने क्या करा कि एडजस्टमेंट कर दिया जयराम जी की यू नो एडजस्टमेंट वाउचर तो बराबर फिक्स लगे के बड़े ईमानदार है लेकिन 5000 जो अपने दान के दिए थे वो उसने वापस हड़प लिए उस समय तो उस मूर्ख को लगा कि मैं बड़ा होशियार हूं लोगों के सामने दानी दिखता हूं और अपना
एक पैसा भी गया नहीं हरने लगे ना फटकड़ी रंग चको आवे चको तारो बाप रो नहीं आवे जो दूसरों को उल्लू बनाता है देर सवेर अंतर्यामी परमात्मा उसकी बुद्धि ऐसी करता कि वो महा उल्लू बन जाता है किसी को भी पता नहीं चले फिर भी उसको पता चल रहा है जो है सबका पता रखने वाला मैं उसका नाम नहीं लूंगा लेकिन वो बुढ़ा मरा तो बुरी हालत में मरा और अब उसके छोरे मीले भी बिक गई तेल की मकान भी छू हो गए कार बच्छू हो गई फुटपाथ निवासी हो गए बोलते कलयुग है मैं बोलता
हूं कर जुग है एक हाथ ले एक हाथ दे जो औरों को देता शक्कर है खुद भी शक्कर खाता है औरों को डाले चक्कर में वो खुद भी चक्कर खाता है शक्कर खिला शक्कर मिले टक्कर खिला टक्कर मिले नेकी का बदला नेक है बद को बदी देख ले तू इसे दुनिया मत समझ भैया ये सागर की मजदार है औरों का बेड़ा पार कर तो तेरा बेड़ा पार है लल्लू मिठाई वाले का बाप साधु संतों को देता लेता सेवा करता था तो अब देखो लल्लू के चार चांद लग रहे हैं जय राम जी की कभी कभार
ये भी देखा जाता है कि जो पाप करता है जुलम करता है वह बहुत बड़ा बड़ा राजा बड़ा बड़ा नेता बड़ा बड़ा व हो जाता है और जो बिचारे सीधे सेधे रहते उनकी हालत वैसी रहती है ऐसा भी कभी देखा जाता है होता है इसका रहस्य में आपको बता द गांव के बाहर किसी ने पेड़ काट दिया था पेड़ सूख गया उसको ठूठा बोलते ठू उस ठूंठ के साथ किसी गाय ने खुजली मिटाई खुजली मिटाते मिटाते जरा अच्छा लगा तो गाय ने जोर मारा तो ठूंठ के एक लकड़ी का टुकड़ा गाय के पेट में घुस
गया गाय थोड़ी देर में मर गए आने वाले ती बीते हुए दो तीन साल में तो ठू ही ठूं था लेकिन जिस साल जिस वर्ष गाय के पेट में उसने फचर घुड़ी उस साल की बरसात से वो फला फुला फूटा बड़ा हुआ लोगों ने कहा हद हो गई कसाई के यहां कुशलता और धर्मात्मा के वहां मुसीबत आज तक तो सूखा ठूठा था और गाय गाय की हत्या करने का निमित बना तब से वोह फला फूला गए महात्मा के पास महात्मा ये तो अंधेर हो गया महात्मा मुस्कुराए बोले देर है अंधेर नहीं है एक साल बीता
दूसरा साल बीता व वृक्ष तो महाराज फला फुला और आई जोरों की आंधी तो जड़ मूल से निकल कर चला गया तो कभी कभार जो घोर पात की होते और फलते फुलते एकदम दिखते हैं तो समझो कि वो जड़ मूल से विनाश के तरफ जा रहे हैं घोर पाप का फल यह फलना फूलना नहीं है फलना फूलना तो पुण्य के बल वाला ही टिकता है जय राम जी की इसलिए जो धर्म के पैसे हड़प कर लेते हैं या किसी संस्था की जमीने हड़प कर लेते हैं उनको हमारी मीठी सलाह है कि अपने आने वाली सात
पीढ़ियों के लिए आप जहर के कांटे मत बोए जय राम जी की अगर पुत सपुत है तो उनको अपने आप कृति देगी अकल से कमा लेंगे अगर कु पात्र है तो तुम्हारा हड़प किया हुआ धन कब तक संभालेंगे उनकी बुद्धि वो हर लेगा इसलिए अगर पूत सपूत है तो फिर ढेर धन काहे संचय और पूत कपूत है तो फिर काहे धन संचय कु पात्र है तो कब तक संभालेगा और सुपात्र है तो उसको टोटा क्या है मेरे पिता नगर सेठ थे उनके हिस्से जितनी मिल्कत थी वो हम दोनों भाइयों के हिस्से उतनी बनाना चाहते थे
वैसा ही मकान मेरे नाम हम अढ़ाई साल के थे उतना ही बड़ा मकान हमारे नाम करना चाहते थे जमीन तो ले ली थी और मकान बनाने का प्लान भी हो गया था दरवाजे लगे थे खूब ढेर दरी खिड़कियां और दरवाजे मेरे को बता रहे थे कि तेरे लिए मकान बनवाते हैं ढाई साल की वो मकान की खिड़की तो क्या मकान की ईंट भी मेरे काम नहीं आई मेरे प्रारब्ध में जो था जंगलों में और गिरी गुफाओं में भी मुझे खिलाने वाला खिला देता था पिता की संपत्ति वहीं रह गई और हमारे पिता ने को कभी
टोटा नहीं दिया वो बड़ा चिंतित रहते थे हमारे पिता का हमारे पर ज्यादा स्नेह था गुरु जी ने कहा किय अगले जन्म का जोगी है यह तुम्हारा नाम करेगा यह महान संत बनेगा तो उसका मेरे प्रति थोड़ा लगाव हो गया चांदी और उसम बर्तनों में मालपुए भगवा के दूध में घी में रख देता ले बेटा ये खा ले ले खा ले लेकिन कितना खिलाए वो जय राम जी की वो तो हम 10 साल तो वो तो हमको छोड़ के चले गए लेकिन करोड़ों जन्म से जो हमारे साथ थे वो कभी हमको छोड़ नहीं सकते हम
उसको नहीं छोड़ [संगीत] सकते तो आप निर्भय रहिए बेटे का क्या होगा बेटी का क्या होगा ऐसा नहीं करूंगा तो फलाना क्या होगा नहीं शास्त्र का नीति नियम का ध्यान रखकर आप निर्भग होकर निर्णय करिए जय राम जी की अभयम सत्व सं शुद्धि सात्विक भाव से आप अंतःकरण को शुद्ध रखिए फिर कृष्ण कहते हैं ध्यान योग व्यवस्थित ज्ञान योग व्यवस्थित आप ज्ञान स्वरूप आत्मा के साथ अपने मन को मिलाइए बुद्धि को मिलाइए मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री आते रहते हैं मुझे उन्होंने कहा मैंने उनको कहा कि ऐसा ऐसा तुमको करना चाहिए तो बड़े नम्रता से कहा
अलग से एकांत में पर्सनल बातें थी मैं उनकी पर्सनल किसी की बात किसी को बताना पसंद नहीं करता जय राम जी की तो कोई वरिष्ठ नेता आते रहते हैं कभी कोई बात होती तो उस मुख्यमंत्री ने जो अभी है उन्होंने बताया कि बापू जो आप सलाह देते ना मैं सचमुच में ऐसा रोज करता हूं जब भी कोई ऐसा निर्णय करना होता है तो पार्टी में कुछ बात होती है बुद्धि कुछ कहती है व्यवहार कुछ कहता है लेकिन फिर मैं कभी जैसा आपने बताया ऐसा मैं शांत हो जाता हूं और जब भीतर का आवाज आता हूं
मैं उसको पकड़ता हूं और बापू सफल हो जाता हूं मैं को इसको बढ़ाया करो जय राम जी अभयम सत्व संशु अभयम सत्व संशु ज्ञान योग व्यवस्थित ज्ञान योग व्यवस्थित दानम दमस यज्ञ दानम नमस यज्ञ स्वाध्याय तप आर्जव स्वाध्याय [संगीत] अभी पूरा श्लोक नहीं हुआ आधा श्लोक भी नहीं हुआ ध्यान से सुनना मैं कूद कूद के व्याख्या करता हूं एक तो आपके जीवन में निर्भयता आनी चाहिए अच्छे कर्म करने में डरने की जरूरत नहीं है बुरे कर्मों से भले ही डरो लेकिन अच्छे कर्म करने में वो रूठ जाएगा फलाना यह हो जाएगा वो हो जाएगा नहीं
सिंदी में कहावत है फनी नींदे वार खुस त खुस सच चव यार रुसन त रुसन कंगी देते एक दो बाल खुस जा हट जाए तो हट जाए और सत्य कहते और सत्य का आचरण करने से विलासी और दुष्ट मित्र हट जाए तो हट जाए फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है अभयम सत्व संशु ि एक तो निर्भय रहो दूसरा आप सात्विक आहार व्यवहार करके बुद्धि को सत्व गुण प्रधान बनाए रखो फिर भगवान बोलते ज्ञान योग व्यवस्थित उस ज्ञान स्वरूप आत्मा के साथ आप मिलते रहो जब बुद्धि कुछ कहे समाज कुछ कहे लेकिन अंतर्यामी उससे न्यारा
कहता है तो आप अंतर्यामी की आवाज को स्वीकार करिए भले बुद्धि कुछ कहती हो और अंतर्यामी दूसरा कहता हो तो आप अंतर्यामी की बात मानिए क्योंकि हृदय आपका अंतर्यामी के निकट है सात्विकता से अंदर के आवाज का आदर करिए जो देर रात को निर्णय करते हैं केंद्र के मंत्री उनके निर्णयों में कई बार विचारों को धोखा आ जाता है मेरे को तो यह लगा कि वीपी सिंह जब प्राइम मिनिस्टर थे कोई देर रात का निर्णय के लाल किल्ले से भाषण किया और उसी से उनको खींच कर पब्लिक ने मैदान में रख दिया होगा अगर बढ़िया
निर्णय करना हो तो सुबह ना धोके सात्विक बुद्धि हो तब ज्ञान योग में स्थिति करके बढ़िया निर्णय करना चाहिए इससे आपको धोखा नहीं मिलेगा आपके कार्य सफल होते जाएंगे और कभी कभार विफल हुए तो विषाद नहीं होगा फिर से पुरुषार्थ करके आप सफलता की सीढ़ियां सर कर सकते हैं तो यहां भगवान कहते हैं अभयम सत्व संशु ि ज्ञान योग व्यवस्थित फिर आगे कहते दानम दमस तुम्हारे आय का कुछ हिस्सा सत्कर्म में भी लगाओ दान फिर बोलते दमस मन इधर गया इंद्रिया इधर गई कभी कभार मन को और इंद्रियों को रोकने की तुम्हारी आत्मशक्ति ब्रेक भी
लगानी चाहिए राजा भरतरी साधु बन गए थे बोले भिक्षा मांगने जाऊंगा देर हो जाएगी दुकान से दो जले भी मांग रहे थे दुकान वाले ने कहा ध तेरे के साधु हो अभी जलेबी का स्वाद नहीं गया उसको पता नहीं कि सम्राट में से साधु बना है उसने दुकान वाले ने डांट दिया बोले जलेबी खाना है तो जाओ मजदूरी करो वहां तालाब खुद रहा है दिन भर तालाब खोदा और दो आने मिले दो आने की जलेबी लिया शेर भर एक किलो समझ लो एक हाथ में जलेबी दूसरे हाथ में भिक्षा पात्र उसमें गोबर भर लिया तलाव
के किनारे बैठे एक कोर जलेबी का और एक को गोबर का मन को कान पकड़ के बोलते अबे जलेबी खाना है ले ले ले ले जलेबी नजदीक लाला के गोबर भर दिया मुह में और जलेबी तलाव में फिर एक टुकड़ा जलेबी का लिया और जरा सा गोबर लिया ले खा खा खा ऐसे करके जलेबी तलाव में और गोबर मुंह में ठास दिया ऐसे करते करते किलो भर बंगाली शेर होता था किलो मतलब बंगाली से शेर भर जलेबियां पानी के हवाले हो गई आखिरी टुकड़ा बचा मन कहने लगा अब इतना तो खाने दो बहुत भूखा हूं
फिर कान पकड़ा और मारा थप्पड़ मैंने बहुत सारी अपने को थप्पड़ मारी तपस्या काल में जय जी कभी-कभी हमारा मन भी बदमाशी करता था एकदम ऐसे यहां नहीं लाया है बहुत उसने खेल खेले ऐसे ऐसी बदमासी करता था कि इसको य बराबर पकड़ के बराबर कस के देते थे अभी भी याद है लेकिन अभी इतना जोर से नहीं मारता हूं नारायण हरि नारायण हरि नारायण हरि बुरे लोगों की भी बदनामी होती है अच्छे लोगों की भी बदनामी होती है लेन बुरे लोग बदनामी में बह जाते और अच्छे लोग बदनामी होने पर भी भगवान की कृपा
से और अपनी निष्ठा से रह जाते हैं और देर सवेर भगवान का साक्षात्कार करके अमर हो जाते हैं मंसूर को सुकरात को मीरा को कबीर को नानक को बुद्ध को भी लोगों ने नहीं छोड़ा बदनामी उनकी भी हुई बुद्ध के पास तो वैशा को भेज देते थे और बड़ा प्लानिंग करते थे और कई बार वो लोग सफल भी हो जाते थे विवेकानंद के पास ईसाई मिशनरियों कई ऐसे लोग भेज देते थे और कई बार अखबारों में भी विवेकानंद को गंधा अंकित कर देते थे फिर भी विवेकानंद के लिए हमारे हृदय में करोड़ों हृदय में मान
है वो षड्यंत्र करने वाले लोग कौन से नरक में होंगे मुझे पता नहीं लेकिन बुद्ध के लिए या विवेकानंद के लिए हमारे हृदय में और लाखों हृदय में अभी भी मान है जो उस ज्ञान योग में व्यवस्थित करता है दानम दमस यज्ञ का सहारा लेता है वो सचमुच में विजय हो जाता है तो आप के जीवन में संयम भी हो दान भी हो मतलब जीवन में ब्रेक भी हो क्या करना क्या ना करना क्या खाना ना क्या खाना इसका भी आपके जीवन में श्री कृष्ण प्रभाव चाहते हैं फिर बोलते यज्ञ आपके जीवन में यज्ञ भी
हो यज्ञ शब्द बड़ा व्यापक है भूखे को अन्न देना भी यज्ञ है प्यासे को पानी देना भी एक यज्ञ है गुम राह को अच्छी राह पर लगाना यह भी यज्ञ है अ भक्त को भक्ति के तरफ लगाना यह भी यज्ञ है निगरे को सगरा बनाने में कोशिश करना यह भी यज्ञ है और माता-पिता और गुरुजनों की आज्ञा मानकर उनके हृदय को संतुष्ट करना यह भी यज्ञ है अब सभी यज्ञों में श्रेष्ठ यज्ञ क्या है कृष्ण बताते हैं यज्ञ नाम जप यज्ञ अस्म सारे यज्ञों में मंत्र जप का जो यज्ञ है वह मैं ही हूं मेरा
ही स्वरूप है आज फ्रांस के और यूरोप के कुछ विचारक चकित हो गए यज्ञ में जो शक्कर और गुड़ का प्रयोग होता है उससे क्या लाभ होता है उन्होंने अलग से रिसर्च किया शक्कर और गुड़ के धुव से माता के चेचक के दाग मिटाए गए जय राम जी की चिकने पदार्थ डालने से यज्ञ से क्या फायदा होता है चिकने पदार्थों के धुए से दम और टीबी जैसे रोग मिटाने में वे लोग सफल हो गए गाय के गोबर के धुए से हरम बैक्टीरिया नष्ट किए जाते हैं और इसी कारण कोई मर जाता है तो शमशान यात्रा
में एक आदमी कुल्लड़ लेकर चलता है उसमें धुआ करता है ताकि इसके बैक्टीरिया समाज में ना फैले वातावरण में ना फैले धुआ करते चले जाते हैं तो यह यज्ञ भी अच्छा है जो स्वधा स्वाहा करके किया जाता है और जप यज्ञ भी अच्छा है जिसकी जिसमें क्षमता और श्रद्धा हो ऐसा यज्ञ करना चाहिए दानम दमस यज्ञ हकीकत में जो भक्ति वाले हैं कई कभी कभार वो ज्ञान की बात काटते हैं जो ज्ञान वाले हैं वह भक्ति की बात काटते हैं और कभी कभार दोनों मिलकर योग की बात काटते हैं तो कभी योग वाला दोनों की
काटता है और कभी कथा वाला यज्ञ की काटता है तो कभी यज्ञ वाला कथा की काटता है यह सब एक एक अंग को पकड़ के उलझने वालों की बात है जो सर्वांगी परमात्मा के ज्ञान को जानता है और सर्व तत्व का उपदेश देने वाले सतगुरु की कृपा को जिसने पचा लिया है वो यज्ञ की क्रिटिसाइज नहीं करते जय राम जी की भक्ति की क्रिटिसाइज नहीं करते योग की क्रिटिसाइज नहीं करते सब अपनी अपनी जगह पर अलग-अलग व्यक्ति के लिए उपयोगी है जय राम जी की एक सुई भी इस सृष्टि में काम आती भैया और तो
क्या विषधर भी इस सृष्टि में विश्व निता ने व्यर्थ नहीं रखे विषधर नागों की भी जरूरत है बोलते साप क्यों रखा हो होगा अरे सांप सांप की भी अपनी महता है अपनी उपयोगिता है ऐसे जब सांप की भी उपयोगिता है बिच्छू की भी उपयोगिता है सृष्टि में तो यज्ञ की उपयोगिता क्यों नहीं भक्ति की उपयोगिता क्यों नहीं कभी कभी सखड़ ज्ञानी होते ना तोते छाप वो भक्ति की काटेंगे कभी-कभी भोले भगत होंगे कथावाचक तो ज्ञानी की बात काटेंगे ज्ञान मार्ग की काटेंगे मैं उनसे प्रार्थना करता हूं आप अगर भक्ति के रास्ते पर हैं तो आप
यह बात कान खोलकर सुन लीजिए कि आप भक्ति करते तो शास्त्र सम्मत करते के शास्त्र से विमुख होकर करेंगे शास्त्र सम्मत करते हैं तो आपके शास्त्र जिसने बनाए वे अज्ञानी है कि ज्ञानी है जय राम जी की वे तो ज्ञानी है व्यास जी और सुखदेव जी तो मेहरबान आप ज्ञान की बात क्यों काट रहे हो जय राम जी की तत्व ज्ञान श्री कृष्ण ने अर्जुन को तत्व ज्ञान दिया है और श्री कृष्ण भक्ति की बात भी करते हैं भागवत में तत्त्वज्ञान भी मिलता है भक्ति भी मिलती है योग भी मिलता है बहुत कुछ मिलता है
लेकिन हमारा एकांगी जीवन होता है तो हम अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए दूसरों के साथ अन्याय कर देते हैं तो हमारी श्रेष्ठता नहीं टिकती है फिर श्रेष्ठता तो वही है कि आप अपनी पकड़ छोड़कर परिछन होता छोड़कर उस परम श्रेष्ठ के नाते जो कुछ उसका पैगाम है वो सुनाते और कदम आगे बढ़ाते जाइए अपने और समाज के इसी में सबका भला है इसी में सबका मंगल है तो श्री कृष्ण कहते हैं अभयम सत्व सं शुद्धि अभयम सत्व संशु ज्ञान योग व्यवस्थित ज्ञानयोग दानम दमस यज्ञ दानम दमस यज्ञ स्वाध्याय तप आर्जव स्वाध्याय तप आर्जव
आपके जीवन में छोटी-मोटी बातों के लिए भय नहीं होना चाहिए और भय के कारण अपना नित्य नैमत और सत्कर्म कभी भी त्यागना नहीं चाहिए अगर भय करना है तो शास्त्र हरि और गुरु को जो बात पसंद नहीं है वो करूंगा तो अच्छा नहीं है ऐसा समझ के भय कर सकते हैं बाकी फालतू बातों में भय करने की जरूरत नहीं है बोलते सत्व सं शुद्धि अभय मतलब भय का सर्वथा अभाव अंतःकरण की शुद्धि ज्ञान के लिए योग में दृढ़ स्थिति और सात्विक दान इंद्रियों का दमन सात्विक दान एक सेठ बैठे थे एक बार पढ़ रहे थे
बाबा जी ने देखा कि यह कलयुग में सेठ लोग दान पुण नहीं करेंगे सब मुफत का ही मुफत का हड़प करेंगे तो आखिर कहां चुकाएंगे बाबा जी मस्त फकीर थे सेठ जी के यहां खड़े हो गए वैरागी महात्मा थे दूसरे महात्मा टोकने लगे आप वैरागी होकर इन भोगियों के पास क्यों जाते हैं बोले स्वामी जी छरे पर तलवार छरे पर खरबूज गिरे तभी कटेगा खरबूज खरबूजे पे छुरा गिरे तभी कटेगा खरबूज हमारा ज्ञान का छुरा है सेठ के पास हम जाए अथवा सेठ हम पर आकर गिरे लेकिन कटेगा तो सेठ का अज्ञान हमारा क्या मिटेगा
हमारा क्या बिगड़ेगा ूचा छरे पर गिरे अथवा छुरा खरबूजे पर गिरे ऐसे ज्ञान के छरे पर सेठ आकर चरणों में पड़े तभी भी उसका अज्ञान कटेगा अथवा हमको बिना हम वो बुलाता नहीं बिना बुलाए हम जा रहे उसके द्वार पर तभी भी उसका अज्ञान कटेगा ऐसे दयालु महात्मा होते हैं कभी कभार व्यवहार में आ जाते हैं सेठ जी अख बार पढ़ रहे हैं उस विरक्त महात्मा ने कहा सेठ जी कुछ मिल जाए बोले महाराज आगे बढ़ो बोले जी आगे तो बढ़ेंगे लेकिन तुम भी आगे बढ़ो कुछ दे दो बोले जेब में कुछ नहीं है बोले
जेब में कुछ नहीं है तो घर में से ही कुछ दे दे बोले घर में कोई नहीं है जेब में कुछ नहीं है जाओ महाराज मेहनत करके खाओ जरा महाराज ने कहा उल्लू के पट्ठे मेरे साथ आजा तू एयर कंडीशन में बैठे बैठे एक बार पढ़ मेरे को बोलता है मेहनत करके खा तू मेरे साथ आ जा सड़क पर भीख मांगने पता चले मेहनत किसको बोलते हैं जय राम जी की उस भी जा नहीं तो तू मेरे साथ आजा क्योंकि अब तेरे को जो मिलता है तू रख रहा है प्रकृति तो त्याग में संदेश देती
है रख रख के तो कोई ले नहीं गया य तो त्याग में इस प्रकृति का संदेश है सेठ जी अगर तू रख रहा है तो अभी से तू मेरे साथ आजा भीख मांगने के लिए क्योंकि अगले जन्म में तू भिखारी बनेगा नहीं देता तो तेरे को मिलेगा भी नहीं इसलिए अभी ट्रेनिंग स्कूल मेरी भर्ती कर ले अटेंड कर ले रहीमन वेनर मर चुके जो मांगन को जाए उसके पहले वे मुए जिस मुख निनक से नाए अपने स्वार्थ के लिए तो नहीं मांगना चाहिए और परमार्थ के लिए मांगते हैं तो संकोच ज्यादा नहीं करना चाहिए लेकिन
व परमार्थ के लिए जो मांगा है गलती से भी एक पैसा अपने कुटुंब में या अपने खर्च में नहीं आए नहीं तो बड़ा खतरनाक होता है जय राम जी की आजकल क्या है कि देने वाले का छूटता नहीं और मांगने वाले का पेट नहीं भरता है मांगने वाले अनाप सनाप खर्च करे और एडजस्टमेंट करने के चक्कर में रहते और देने वाला बचने के चक्कर में रहता है दोनों ठेलम ठेला दे नरक में ठेलम ठेला गुरु लोभी शिष्य लालची दोनों खेले धाव दोनों डूबे बावरे चढ़ी पत्थर में नाव दे धमाधम नहीं नहीं दानम दमस दम माना
मन इधर गया इंद्रिया इधर गई ये खा लिया वो देख लिया नहीं स्वास्थ्य का विचार करके खाए बोले ये जरा ब्रेक लगाए फिर बोलते स्वाध्याय स्व का अध्ययन हो ऐसे शास्त्र आजकल तो कैसेट भी मिल गई ऐसा सत्संग ऐसे विचार रोज कुछ नान कुछ सुने विचारे स्वाध्याय फिर भगवान बोलते स्वाध्याय तप अपने जीवन में तप लाओ वाणी का कटु ना होना और सत्य बोलना यह वाणी का तप है मन में किसी के लिए बुरा ना सोचना ये मन का तप है कथा कीर्तन में अथवा अपना कर्तव्य पालने में शरीर को जो कष्ट दिया जाता है
वो शारीरिक तप है और बुद्धि को तत्व विचार में एकाग्र किया जाता है यह बौद्धिक तप है आप कोई भी तप करके अपने को तेजस्वी बनाने के रास्ते लगते रहिएगा जय राम जी की अभयम सत्व सं शुद्धि ज्ञान योग व्यवस्थित दानम दमस यज्ञ स्वाध्याय तप और आर्जव आखरी बात कहते हैं सुखी होने की बहुत सुंदर बात है और जो मन आप सरलता का सहारा लीजिए लता चतुराई होशियारी में इतना सुख नहीं जितना सरलता में एक राजनेता थे चुने गए मिनिस्टर बन गए लोग लोगों को प्रॉब्लम था सफाई गंदगी बहुत थी तो उसी वार्ड के लोग
गए कि साहब आप हमारे वार्ड के चुने हुए मंत्री साहब और यहां इतनी गंदगी और इतनी बदबू और बैक्टीरिया फैल रही और अमुक पानी की समस्या है सड़कों की समस्या है लोग समस्या का चार्ट बना केर जा रहे थे नेता महाशय ने देखा कि लोग बहुत सारे पा सात 10 मिलके आ रहे हैं आगे वान बेटे को बोला देख मैं नीचे के बेसमेंट में चला जाता हूं और यह लोग आ जाए ना तो बोलना पप्पा घर नहीं है वो लोग गए राजनेता को मिलने के लिए तो राजनेता का पुत्र बोलता है कि मेरे पिताजी ने
कहा है कि मैं बेसमेंट में छुप जाता हूं वो लोग आए तो बोलना पापा घर नहीं है कितनी बच्चे की सरलता बच्चे जितने खुश रहते हैं उतने कावे दावे और कपट से अकल हुशार से सुखी रहने वाले उतने खुश नहीं रह सकते हैं तो आप भी कभी कभार बच्चों के साथ खेलिए और भगवान के तो हम सब बच्चे हैं बच्चे किना भगवान को पुकार ये प्यार करिए और अपने ध्यान के कमरे में कभी कीर्तन करिए कभी हंसिए कभी रोइए हसीब खेली बो धरी बो ध्यान अहर निश कथ बो ब्रह्म ज्ञान खावे पीवे न करे मन
भंगा कहे नाथ में तिस के संगा बाबा जी हमारा मन नहीं लगता भगवान में बहुत लोग ऐसा बोलते अरे भाई मन नहीं लगता है तो मेरे को क्यों बोलते हो अपने पूजा के कमरे में जाओ ठाकुर जी को बोलो कि मैं तो ऐसे हूं मेरो मन नहीं लगे अब तू जाने तेरो काम जाने मन नहीं लगा नाथ मेरो मन नहीं लगो उसके आगे रो मेरे आगे रोने में तो संकोच भी होगा कमरे में चुपचाप रहोगे तो काम बन जाएगा यार उसको बोलो मेरा मन नहीं लगता तू कृपा कर दे अब क्या करू ठ जगत में
मन तो खूब लगता है लेकिन तेरी सच्ची भक्ति में मन नहीं लग रहा है झूठी माया में तो जिंदगी बर्बाद हो रही है और माया पति की मोहब्बत नहीं मिल रहे तू ही दे दे तू ही दे दे तू ही दे [संगीत] दे