कहते हैं जी कि इस सवाल को करते हुए मैं मुझे शर्म आ रही है और मैं बहुत जुरत से यह सवाल कर रहा हूं सवाल यह है कि क्या मास्टरबेशन हराम है जी नहीं यह हराम नहीं य बहुत अच्छी तरह समझ लीजिए कि हमारे दन में जो चीज हराम की गई है वो किसी गैर से जिनसी ताल्लुक पैदा यह बात ख कुरान ने भी वाज कर दी है और अहले इलम ने भी इसको ठीक समझा है कुरान ने बहुत वाज कर दि आप चाहे तो इस पर मेरा एक तली आर्टिकल है वो मेरी किताब मकामा
में है मेरा ख्याल है उसका अंग्रेजी में भी तर्जुमा हो चुका है उसमें मैंने उन तमाम दलाल को भी बयान कर दिया यह बिल्कुल हराम नहीं सो इफ यू एसोसिएट मैस्टरबेशन विथ पोर्नोग्राफी और वि ऑन फोटोग्राफ इट इज हराम एंड दैट इज प्रोहिबिटेड एंड इट लीड्स टू दैट हाई चांसेस दैट द रीजन आई वड से दैट बेस्ट इज टू अवॉइड सो आई वड लाइक टू टेल यू दैट आई एम नॉट गिविंग अ ब्लंकेट रूल दैट डू इट आई एम जस्ट टेलिंग यू बेस्ट अवॉइड इट बट इफ यू हैव सेक्सुअल अर्जेस व्हिच यू कै नॉट सुप्रेस
डूइंग मास्टरबेशन इज नॉट हराम अकॉर्डिंग टू मी इट इज परमिस बल डोंट डू इट एक्सेसिवली वंस इन अ वाइल नो प्रॉब्लम डोंट बी मेंटली डिस्टर्ब दैट इट हराम एंड एज द क्वेश्चन आस्क आई वास्क फॉर फॉरगिवन अगेन आई डू इट आई रिपेंट अगेन आई डू इट सो लेट मी टेल यू दैट इफ यू कम इन दिस कैटेगरी वे यू हैव सेक्सुअल डिजायर इट कीप्स ऑन डिफरिंग फ्रॉम डिफरेंट पीपल सम पीपल हाई सेक्सुअल डिजायर सम पीपल आर मीडियम सम पीपल हैव लेस सो इफ यू फॉल इन द कैटेगरी ऑफ़ पीपल हुू हैव हाई सेक्सुअल डिजायर्स एंड
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इन द मकरू कैटेगरी बेस्ट इ टू अवॉइड इट इफ यू हैव दफर नट मैरिड बेटर दैट यू फास्ट इफ द यट दे देन मास्टरबेशन इ परमिटेड देर इज नो सिन देर इज नो पनिशमेंट यू डोंट हैव टू फील गिल्टी एंड इफ यू हैव द अर्ज एंड इफ यू थिंक फोर्निकेशन डू मास्टबेशन एंड अवॉइड फोर्निकेशन एंड मैरी एस सून एस पॉसिबल देखिए मेरे भाइयों ये जो डॉक्टर जाकिर नाइक हाफिजहुल्लाह ताला मिन जिन नास अल्लाह उनकी हिफाजत करे जिन्नो और इंसानों में छुपे हुए शयानो वीडियो मैंने खुद भी देखी है बड़ी तफसील के साथ उन्होंने इस टॉपिक
को अड्रेस किया है इस वीडियो को देखने के बाद मुझे यानी जाती तौर पर बहुत दुख हुआ इतनी बड़ी शख्सियत से इतना बड़ा ब्लंडर होना यह ना काबले फहम है और इसमें सिर्फ डॉक्टर जाकिर नाइक को सिंगल आउट नहीं कर करना चाहिए इनसे बहुत पहले हमारे जो मोहतरम उस्ताद है जावेद अहमद मदी साहब फिला ताला मिनल जिन नास उनकी वीडियो भी इस हवाले से ऑलरेडी मौजूद है लेकिन उसे इतनी पजरा नहीं मिली थी डॉक्टर जाकिर नाइक को बरल एक जो फंडामेंटलिस्ट किस्म के मुसलमान है जिन्हे गैर मुस्लिम ऑर्थोडॉक्स कहते हैं वह एटलीस्ट उनको एक अपना
रोल मॉडल के तौर पर एक्सेप्ट करते हैं एस कंपेयर टू आमदी साहब के अब उस वीडियो के अंदर वो है तो ऑलमोस्ट कोई 242 मिनट की वीडियो है लेकिन उस वीडियो के एंड पर जाकर आप अगर तीन चार मिनट सिर्फ सुन ले ना तो उन्होंने अपनी पूरी गुफ्तगू को कंक्लूजन फित्री काम है यह इस्लाम में ना पसंदीदा है अक्सर के नजदीक लेकिन फिर वह उसमें आसानी देने की आड़ में या जिस तरीके से भी इस हद तक गए हैं कि उन्होंने उसके लिए लफ्ज मुस्ताहब भी इस्तेमाल किया यानी नेकी का काम इस हवाले से कि
अगर कोई शख्स इसकी वजह से बड़ी बुराई यानी जिना से बदका से बच जाए तो वो आप वीडियो देख सकते हैं उस वीडियो के अंदर यानी उनके अल्फाज मौजूद है यानी मैं को अपनी तरफ से नहीं कर रहा वो इंशाल्लाह ताला हम अपनी इस वीडियो के अंदर वो छोटा सा क्लिप इंशाल्लाह ताला ऐड भी कर देंगे इंशा अल्लाह ताला अब मेरे भाइयों ये जो मस्टरबेशन जिसे इंग्लिश में कहा जाता है और अरबी जुबान के अंदर इसके लिए जो टर्मिनोलॉजी इस्तेमाल होती है वह है अल इस्तम बिल यद यानी हाथों के साथ इस तरह का फेल
करना उर्दू जुबान के अंदर हम इसके लिए मुश्त जनी का लफ्ज इस्तेमाल करते हैं इंग्लिश में एक और वर्ड भी यूज किया जाता है हमारे सबकॉन्टिनेंट में हैंड प्रैक्टिस के नाम से अब यह सारी गुफ्तगू मेरे मिजाज के बिल्कुल खिलाफ है मैंने आज तक सेक्स के ऊपर सिर्फ एक ही वीडियो रिकॉर्ड करवाई है मसला 155 उसके कई एक क्लिप्स मिलियंस ऑफ पीपल ने देखे हैं लेकिन वो वीडियो एक ही थी उसके बाद मैंने इस चैप्टर को क्लोज कर दिया था मेरा मिजाज नहीं कि मैं इस तरह की चीजों को इस तरह ओपनली डिस्कस करूं अब
चूंकि डॉक्टर जाकिर नायक एक बड़ी पर्सनालिटी है उनकी तरफ से यह एक फित उठाया गया है पंजाबी वाला फिना नहीं अरबी वाला आजमाइश वाली चीज जिस तरह के 2000 9 के अंदर इन्होंने यजीद इब्ने मुआविया के हवाले से एक फिना खड़ा किया था तो फिर मजबूरन मुझे उसका जवाब देना पड़ा तो हम तो सलूशन एंड पर खड़े हुए थे यहां पर भी चकि अब इन्होंने इशू उठाया है और ऑलमोस्ट अभी तक उस वीडियो को मेरे ख्याल में 600 के प्लस होने वाली है वो वीडियो चंद दिनों तक शायद एक मिलियन क्रास कर जाए क्योंकि हमारे
नौजवान तो दन में ऑलरेडी कोई आसानी ढूंढने के चक्कर में रहते हैं वो पंजाबी च क्या जाता है अन्ने न क्या चाहिए दो आखा अंधे को क्या चाहिए दो आंख ही चाहिए ना तो अगरचे उस पूरी वीडियो में उन्होंने खौफ खुदा रखते हुए पूरी कोशिश की है कि इसको डिस्कस किया जाए लेकिन जो उन्होंने उसमें रास्ता निकाला है ना वो अब वो रास्ता चकि अब निकाल दिया पिछली सारी वो जो उन्होंने शराय उसके साथ लगाई है कि जी कोई गंदा ख्याल जहन में ना लाया जाए और कोई गंदी वीडियो कोई तस्वीर इस तरह की कोई
चीज जहन में ना हो वैसे ही कोई करे वैसे कौन करेगा ये तो मतलब एक ऐसी थियोरेटिकल बात की है कि जो इंपॉसिबल है ऑन द फेस ऑफ अर्थ तो यह हो ही नहीं सकता कि आप आग के अंगारों के साथ खेल रहे हैं और आप कह कि यह सारी सारी शराय अगर होंगी तो तो उस तबार से तो ऑलमोस्ट उनको सीधा कहना चाहिए था कि फिर वह कोई फरिश्ता होगा जो इस तरह की चीज को कर सकता है अरवाज इंसान में तो यह पॉसिबिलिटी नहीं है तो दुख हुआ है उनकी वीडियो देख के मैं
तो यानी उनसे रिक्वेस्ट करूंगा कि अपने इस मौक से रुजू करें अदर वाइज जो उन्होंने उस वीडियो में खुद कहा है कि मैं बड़े अरसे से इस इशू को अवॉइड कर रहा था मेहरबानी कर दे ी अ वाइड ही कर दे अब अब बोले आप तो उससे ज्यादा मुसीबत खड़ी हो गई है और इससे कोई आपकी मकबूल में इजाफा नहीं होगा कोई भी जो मजहबी आदमी है जो किताबो सुन्नत के मिजाज से वाकिफ है वो कभी भी आपकी इस ओपिनियन को या फतवे को एक्सेप्ट नहीं करेगा जाहिर है इस्लाम के मिजाज में नहीं बैठती ये
चीज बिल्कुल ये हकीकत बात है लिहाजा मैं शुरू में एक चीज क्लियर कर दूं कि ये जो स्पेसिफिकली मस्टरबेशन का इशू है इसके ऊपर अगर हम यह दावा करें ना कि पूरी उम्मत का इजमा है सवाय चंद एक शाज अकवाले के कि यह हराम है गुनाह है अब हराम आप मकू तहरी की शक्ल में अगर उसको फ की टर्मिनोलॉजी में कहना तो वो हराम को ही कह रहे होते मकू रीमी तो यह हमारा दावा गलत नहीं होगा अहले सुन्नत में जितने भी मकाबे फिक्र है इस वक्त जो एसिस्टिंग है बरेलवी हो देबंदी हो अहले हदीस
हो इवन अगर आप फिक के पॉइंट ऑफ व्यू से देखें हनफी शाफ मालकी ये मुत्त फिक है कि यह हराम और गुनाह है इवन हंबली स्कूल ऑफ थॉट में भी दो ग्रोह पाए जाते हैं और अहमद बिन हंबल की तरफ जो चीजें मंसूब है वो कोई सही सना से हमें मिली नहीं है चलिए अगर कोई मान ले कि उनकी फिक में मौजूद है तो इस वक्त अहमद बिन हंबल की फिक को तकलीद की कैद के बगैर सबसे ज्यादा फॉलो किया जाता है सऊदी अरब के अंदर अगरचे मुफ्ती आजम सऊदिया जो थे इब्ने बास रमला ताला
अल मुत 1420 हिजरी 1999 में उनकी डेथ हुई ऑलमोस्ट 60 प्लस इयर्स तक वो मुफ्ती आजम रहे हैं सौदिया के उनके अपने फतवे मौजूद है उन्होंने अपने फतवा में लिखा है कि हम अन हंबल के मुकद नहीं है हम कुरान और सुन्नत को फॉलो करते हैं लेकिन हमारे लिए वो रिस्पेक्टबल पर्सनालिटी है लिहाजा जो उनको हमली भी समझते हैं वो उस तबार से देख ले जो कुरान और सुन्नत का समझते हैं वो उस तबार से देख लें तो बिन बाज के अपने फतवा में इसे हराम करार दिया गया और वो उर्दू जुबान में छप चुके
हैं इवन सऊदी अरब की जो मुस्तकिल फतवा कमेटी है उनके फतवा छपे हुए हैं उन्होंने भी इसे हराम करार दिया शेख अल्बानी जिनको डॉक्टर जाकिर नाईक खुद बहुत कोट करते हैं और हिजाब के मसले में उन्होंने उन्हीं का सहारा लिया हुआ है शेख अल्बानी रहिम उल्लाह ने भी बकायदा इसकी हुरमत में बात की है उन्होंने तो यहां तक लिखा है कि अगर किसी शख्स को बुराई में मुब्तला हो जाने का अंदेशा हो यानी जिना में पढ़ने का मैं उसके लिए भी इसे जायज नहीं समझता कि ये अमल करे ये इतना कबी फेल है तो अब
मुझे बताए पीछे फिर क्या बात रह जाएगी और पूरी दुनिया में अहले हदीस के यहां सबसे बड़ी रिस्पेक्टबल पर्सनालिटी इमाम इब्ने तैमिया अल मुत वफा 728 हिजरी उन्होंने भी इसे हराम और गुनाह करार दिया है बल्के उन्होंने कहा है कि अगरचे शरीयत के अंदर इसकी कोई हाद नहीं आई है लेकिन ताजन ऐसे शख्स को सजा दी जाएगी जो जो ये फेल करता है ये मैं बातें इसलिए कर रहा हूं कि कोई शख्स इसे डॉक्टर जाकिर नायक के ख्याल को अहले हदीस मकतब फिक्र के ऊपर थोप ना दे कि शायद उनका ये मौक होगा बिल्कुल ऐसा
नहीं है हनफी तो पहले ही बहुत सख खिलाफ है इसके तो लिहाजा चंद एक अकबाल के सिवा ओवरऑल पूरी उम्मत की मेन स्ट्रीम जो है चाहे सुन्नी हो शिया हो सब के सब इसे गुनाह समझते हैं और अहले तयो के यहां तो कोई दूसरी राय नहीं है वो तो बड़े शद मद के साथ इसे हराम कहते हैं चांद एक अकबाल जो मिले हैं लूले लंगड़े वो भी अहले सुन्नत के यहां है और उनकी कोई पजरा नहीं है अब डॉक्टर जाकिर नाइक साहब जो उसमें गुफ्तगू की है वो सारी उन्होंने उसूल बातें की है दलील उन्होंने
कोई पेश नहीं की है पूरे लेक्चर में उन्होंने एक आयत और एक हदीस बयान की और वो भी उनके मौक के खिलाफ थी उसका जवाब देने की कोशिश की या एक इब्ने अब्बास का कॉल जो बिल्कुल जफ है मैं इंशाल्लाह उसको डिस्कस करूंगा उसको उन्होंने डिस्कस किया बाकी सब उन्होंने सती बातें की है कि फलां का ये फतवा है वो फलां का ये फतवा है वो किधर लिखा हुआ है वो डिस्प्ले करें बताएं कहां पे लिखा हुआ है हम इंशाल्लाह ताला हर चीज रेफरेंस से करेंगे ये अल्लाह के फजल से वो प्लेटफार्म है जहां पे
चीजें पूरे रेफरेंस के साथ बयान की जाती है सिर्फ फतवे दे के साइड प नहीं हो जाते और हम इवन क्रिटिकल इश्यूज के ऊपर जेपीजी भी डिस्प्ले करवा देते हैं कि आप खुद पढ़ के देख सकते हैं ये बात किस तरीके से लिखी हुई है तो या मुझे दुख हुआ है इस हवाले से और अगर ये फित इस तरीके से आम ना होता मैंने अभी भी इसको डिस्कस नहीं करना था उसकी वजह ये है कि अक्सर जो अवामो नास है इस वक्त यंग जनरेशन क्योंकि वो इंग्लिश समझती है तो ये वीडियो इंग्लिश के अंदर है
तो उन्होंने तो यकीनन इसको देख लिया होगा बाकी र कि हमारे जो बड़ी उम्र के लोग हैं वो तो वैसे ही इस फतवे के बाद डॉक्टर जाकिर नायक को उन्होंने गालि ही निकालनी थी एक्सेप्ट तो कोई नहीं करना था असल इशू था यंग जनरेशन का जिनको इंग्लिश आती है उन तकक तो ये फतवा पहुंच गया अगरचे इंग्लिश में है तो मैं इसको कभी इस तरह एड्रेस ना करता अगर डॉक्टर जाकिर नाइक जैसी बड़ी शख्सियत इसके ऊपर जुबान ना खोलते तो जरूरत नहीं थी डिस्कस करने की तो यह कोई अहले हदीस के खाते में इसे ना
डाल दे खामखा वो मतलब बदनाम हो जाएंगे अहले हदीस के जी जाकिर नाइक चूंकि सल्फी स्कूल ऑफ थॉट को सपोर्ट करता है तो इसलिए सेल्फि का भी यही मौक होगा अक्सर औकात आप देखते हैं कि हमारे सबकॉन्टिनेंट में अक्सर जो ऊटपटांग किस्म की चीजें हैं ना वो अहले हदीस के खाते में डाल दी जाती हैं मैं कोई हदीस का नुमाइंदा नहीं हूं मैंने तो अक्सर ऐलान किया है कि ना मैं वहाबी ना मैं बाबी मैं हूं मुस्लिम इल्मी किताबी ना हम सो कॉल्ड वहाबी हैं कोई इल्मी बात करो उसे वहाबी का ताना देते हैं और
ना हम बाबों का दिफाई अर्ज करते हैं कि मरने से पहले ऐ मुसलमा कर ले इस परे गौर किताबों का खुदा और है बाबों का खुदा और है यानी जो तालीमाबाद और अल्लाह के दीन की बातें वो और हैं और जो बाबों ने तालीम की है अगरचे वो इसी खुदा को मानते थे लेकिन उन्होंने जो हमें तारुफ वो किताबों वाला नहीं है वो बाबों वाला है किताबों को फॉलो करें और उन बाबों को फॉलो करें जो किताबों को फॉलो करते हैं किताबो सुन्नत को फॉलो करते हैं तो मुझे कोई हमदर्दी नहीं है लेकिन जहां पे
आप ब्लेम लगाएंगे तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उस चीज को हाईलाइट करूं कि खम खवा किसी के खाते में इस तरह की बात नहीं डालनी चाहिए ये बिल्कुल एक जुर्म है अब मेरे भाइयों कुरान और सुन्नत में स्पेसिफिकली जाहिर है कि मास्टरबेशन या अल इस्तियाक ले या हैंड प्रैक्टिस कह दे कोई भी अल्फाज जर इन अल्फाज के साथ या इन टर्मिनोलॉजी के साथ तो किताब सुन्नत में डायरेक्टली तो हुरमत का कोई फतवा नहीं आया हु लेकिन इस्लाम का एक मिजाज है कुरान सुन्नत में उसूल बताए जाते हैं फिर जब कोई ऐसी चीज जो अनअटेंडेड
छोड़ी जाती है उनको अहले इल्म जो है किताब सुन्नत की रोशनी में समझ के उम्मत तक सही बात पहुंचा देते हैं तो उसूल तो अपनी जगह त है इसको आप मिसाल के तौर पर समझ ले कि इस वक्त तमाम मकाब फिक्र के तमाम जद उलमा इवन उनकी पब्लिक भी इस बात पर इत्तफाक करती है कि सिगरेट अगरचे नशा नहीं है क्योंकि इससे होश तो नहीं जाती लेकिन यह गुनाह और हराम है या कोई एहतियात में बोलेगा तो मकू तहरीम कह देगा वो कहते हराम के लिए नस कती किताब सुन्नत की चाहिए होती है चकि हमने
यह डिडक्ट किया है लिहाजा हम इसे मकरूह तहरी और दूसरे मनों में वो फिक कीटन में हराम ही होता है मकू तहरी इतनी कराह वाली चीज जिसकी ऑलमोस्ट हुरमत है तो दलाला तो है यह क दलाला नहीं भी तोय सिगरेट के ऊपर सबने जो गुना का फतवा लगाया है हराम का फतवा लगाया है तो वो किस आयत के तहत लगाया वो सरल बकरा की आयत है आयत नंबर है 195 वला अपने हाथों से अपने आप को हलाक में मत डालो अगरचे यह आयत का कांटेक्ट जो है वह इंफाक फी सबीला के हवाले से कि जो
लोग अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते हैं ना उनको अल्लाह ला ने डांटा है कि तुम अल्लाह की राह में खर्च करो और अपने आप को हलाक में ना डालो यानी यह अल्लाह की राह में माल खर्च करके आखिरत के लिए स्टोर कर लो लेकिन इस आयत को खुदकुशी के कांटेक्ट में भी यूज किया जाता है कि जी खुदकुशी हराम है कुरान की इस आयत की रू से अदीस तो बुखारी मुस्लिम में बहुत है लेकिन कुरान में अगर कहा जाए खुदकुशी कहां पे आराम है तो कहते हैं यहां हालांकि कुरान का कांटेक्ट तो यह
नहीं कह रहा डिडक्ट किया जाता है चले खुदकुशी के लिए तो आप कह सकते हैं कि अदीस अलग से मौजूद है लेकिन सिगरेट के लिए तो अदीस भी नहीं है अगर आप नशा वाली अदीस लगाएंगे तो नशा तो उस तबार से नहीं है कि होश गवा दे तो वो कहते हैं नहीं कुरान में आया अपने आप को हलाक में ना डालो यानी खुदकुशी करने की तरफ ही ले जाने वाली चीज है साइंटिफिकली ये चीज प्रूव है कि सिगरेट के जरिए फेफड़े खराब हो जाते हैं और इंसान वक्त से पहले एक्सपायर हो जाता है अब इसमें
कोई बेवकूफ वाली बात करे कि जी वो हमारे मोहल्ले में एक बाबा जी उसकी उम्र तो 80 साल हो गई वो अभी तक सिगरेट पीता है तो वो एक एक्सेप्शन केस होता है एक्सेप्शनल केस होता है इस तरीके से नहीं एनालिसिस किया जाता है एनालिसिस ये किया जाता है कि 100 बंदे लिए जाए जो सिगरेट पी रहे हो अपनी यंग एज से और 100 वो लिए जाए ना पी रहे हो अब देखेंगे कौन 80 तक पहुंचता है तो पता चलेगा वो एक ही बाबा 80 तक पहुंचा हु है उसके साथ के सारे 60 से पहले
एक्सपायर हो गए हु हैं तो इस तरीके से चंद एक चीजों को मसालों को उठा के आपने ये नहीं सिगरेट के फाइल नहीं सुनाने होते तो सिगरेट की हुरमत या उसको मकरू तहरी हमने ना कुरान और सुन्नत के दलाल की बुनियाद पर नहीं किया बल्कि हमने इस आयत के तहत किया है जो सूर अल बकरा की आयत नंबर 195 है लुका अपने आप को खुद अपने हाथों से हलाक में मत डालो अब कोई कह सकता है कि यह उलमा ने खम खा इस आयत से क्यों लिया ऐसे तो सहाबा भी इसी तरह लेते थे उसकी
मैं आपको एक मिसाल पेश करता हूं सही बुखारी और सही मुस्लिम दोनों में एक हदीस मौजूद है कि एक औरत अब्दुल्लाह इब्ने मसूद रज अल्ला ताला अ के पास आती है और कहती है कि मैंने सुना है कि आप ऐसी औरतों पर लानत करते हैं जो औरतें दांतों के दरमियान गैप बनवा हैं और गुंद वाती हैं जो टैटू बनवाना और चेहरे के बाल नोच है जिसकी आजकल एक मॉडर्न फार्म ये प्लकिंग है तो इन तीनों आमाल करने वाली औरतों पर आप लानत करते हैं तो इब्ने मसूद ने फरमाया हां मैं क्यों ना लानत करूं ऐसी
औरतों के ऊपर जिन पर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम ने लानत की है और इससे बढ़कर अल्लाह ने अपनी किताब के अंदर अपनी किताब में कुरान के अंदर लानत की हुई है तो मैं ऐसी औरतों पर क्यों ना लानत करूं तो वो औरत कहती है कि हजरत मैंने पूरा कुरान पढ़ा है मुझे तो कुरान में ऐसी कोई आयत नजर नहीं आई कि जिसमें अल्लाह ताला ने टैटू बनवाने को या दांतों में गैप बनवाने को या चेहरे के बाल उखाड़ने को को हराम कहा हो अच्छा वो चेहरे के बाल औरत उखाड़ सकती है उसम
इजमा है जो मछे या दाढ़ी निकल क्योंकि वो फितरत के खिलाफ है मर्द को अल्लाह ने दी है औरत को नहीं दी ये उन बालों की है कि जो बाल अल्लाह ने दिए हुए औरत को और वो जानबूझ के उखाड़ देती है तो जनाब वो एक सहाब ही ऐसी बात कर सकती थी या कोई ताबी औरत होगी वो आजकल की औरत तो इतने वूक से नहीं कह सकती कि मैंने कुरान पढ़ा हुआ है यहां पर तो हमारे बड़े बड़े उलमा कुरान को हदीस कह के हदीस को कुरान कह के बयान कर देते हैं तो इब्ने
मसूद र अल्लाने फरमाया कि तूने कुरान में आयत नहीं पढ़ी सूरतुल हशर की आयत नंबर सेन व माता रस जो रसूला तुम्ह दे सल्ला अ सलम व ले लो और जिससे मना फरमा जाए उससे रुक जाओ तो रसूलल्लाह ही ने लानत की है उनके ऊपर तो कुरान के अंदर जब रसूला कोई चीज दे तो रसने बात दी है मैंने खुद अल्ला के नबी सल्ला अ वसल्लम से ऐसी औरतों के बारे में लानत के अल्फाज सुने थे अच्छा आप कुरान खोल के सूरतुल हश्र की आयत नंबर सेवन पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा यह आयत माले गनीमत
के बारे में है कि जो माले गनीमत में से हिस्सा रसूलल्लाह तुम्हें देते हैं सल्लल्लाहु अ वसल्लम वो ले लो और जो किसी को ना दे ना वो बुरा ना माना करे क्योंकि अल्लाह के नबी सलाम की आपने इतबा इर करनी है इसका दूर दूर कोई लेना देना नहीं था प्लकिंग करने के साथ या दांतों में गैप बनवाने के साथ या टैटू बनवाने के साथ लेकिन इब्ने मसूद ने इस आयत को जनराइज कर दिया कि जनरल है आयत कुरान में स्पेसिफिक थी अब उस औरत ने कहा कि मैंने तो सुना है आपकी बीवी भी ऐसा
करती है तो इ मसूद ने कोई बुरा नहीं माना उन्होंने कहा अंदर जाओ मेरे घर में देख लो मेरी बीवी ये करती है या नहीं करती तो औरत अंदर गई तो वापसी पर शर्मिंदा होकर बाहर निकली उन्होंने कहा आपकी बीवी तो य नहीं करती यानी सहाबा के जमाने में भी सहाबा की बीवियों के बारे में अजीब गरीब बातें मशहूर हो जाती थी या प्रोपो गंडा कितनी बुरी चीज है तो इने मसूद ने फिर एक जुमला बोला उन्होंने कहा कि अगर मेरी बीवी ये करती होती तो वो फिर इब्ने मसूद की बीवी ना होती कि जो
अल्लाह के नबी की नाफरमान हो व ऐसी औरत मेरे साथ हो सकती है जिसने पूरी जिंदगी ूर सलाम के साथ गुजारी है रला ताला सलाम तो इस आयत से पता चला कि सहाबा कमन आयात को जनरलाइज भी कर लिया करते थे इसी के तहत हमने सिगरेट को उस कैटेगरी में फॉल किया है जो सूर अल बकरा की आयत नंबर 195 है ला यह मैंने आपको बुनियाद इसलिए बनाई ताकि आपको आगे पता चले कि हमारे आराम ने अगर कुरान की किसी आयत से मस्टरबेशन को हराम करार दिया है तो वह बिल्कुल सहाबा के तरीके के ऊपर
यह कोई उन्होंने अपनी तरफ से चीज इवेंट नहीं की है दन के अंदर दाखिल नहीं की अब हमारे आराम सलाम ने रला अजमा लाजमा ने कुराने हकीम की किस आयत से इस गैर फित्री अमल को हराम करार दिया या मकू तहरी वह है सूरतुल मोमिनून पारा नंबर 18 का आगाज सूरत मोमिनून से होता है उसकी इदा आयात है बला मता रम बिस्मिल्ला रहमान रहीमन बेशक फला पा गए अहले ईमान कौन से अन फ सला जो अपनी नमाज में खत रखते हैं खुश खुजू रखते हैं अल्लाह के खौफ के साथ नमाज पढ़ रहे होते हैं न
और उनकी एक और निशानी यह है कि हर तरह की लफ बात से व परहेज करते हैं और वह लोग हैं जो अल्लाह की राह में जकात देने वाले हैं एक यह माना भी हो सकता है और एक माना यह कि तकिया नफ्स करने वाले न फ और वह लोग जो अपनी शर्मगाह की हिफाजत करते हैं इला सवाय इस्ना के इस एक्सेप्शन के अला अवाज उनकी बीवियां और मा मलक मान या जो उनके हाथ का माल कनीज है जो अब एसोट हो चुका है सिस्टम उस जमाने के लिए लिए था अब सिर्फ इसकी एक फॉर्म
जो है वो बीवियों वाली बात बाकी है और निकाह मता या निकाह मिसिर वाला जो मामला वो भी इसमें शामिल नहीं है आप निकाह मिसिया तो खैर सौदिया के उलमा की बदत है निकाह मुता था बुखारी मुस्लिम में आता है लेकिन वो फिर मनसुख हो गया तो वो उसकी मनसुख के बाद अब वो अवाज में वो दाखिल नहीं है और ये याद रखिएगा य निकाह मुता निकाह हुआ करता था यह नहीं है कि वो नज बिल्लाह कोई और तरह का मामला था तो वो अब इसमें दाखिल नहीं है फर मलूमी तो अब ऐसों के ऊपर
कोई मलामत नहीं होगी अगर वो अपनी बीवियों के साथ शर्मगाह का इस्तेमाल करते हैं वो किसी भी तरीके से जो कुरान और सुन्नत के दायरे के अंदर आया है वो करें तो वो उसके ऊपर कोई मलामत नहीं है यानी मैं वो कोड वर्ड्स में ही बात कर रहा हूं इस हवाले से यानी जो सोहबत करने की जगह है वहीं पर होनी चाहिए चाहे आगे से आए मर्द अपनी बीवी की तरफ चाहे वो पीछे से आए लेकिन सोहबत वाली जगह पर सोहबत हो क्योंकि कुरान में आया कि तुम्हारी बीवियां तुम्हारी खेतिया हैं तो खेती बोने की
जो जगह है जहां से औलाद मिलती है उसी जगह पर सोबत इख्तियार की जा सकती है दूसरी जगह पे नहीं और इसका कांटेक्ट भी है बुखारी मुस्लिम में कि यहूदियों के हां इसे ऐब समझा जाता था और वो कहते थे कि औलाद जो है वो भैंगी पैदा होगी अगर कोई शख्स जो है वो दूसरी तरफ से आके सोहबत करेगा तो अल्लाह ताला ने इजाजत दी कि नहीं आगे से आके सोहबत करो या पीछे से आके आगे के मुकाम में सोहबत करो दोनों तरीके दुरुस्त है तुम्हारी बीवियां तुम्हारी खेतिया है हां जो कौम लूत वाला अमल
है वो अपनी बीवी के साथ करना भी हराम है और किसी और और मर्द के साथ करना भी हराम है वो अलग से एक टॉपिक है वो मेरी वीडियो लादा से रिकॉर्डेड मौजूद है मैं इंशाल्लाह एंड पे आपको बता दूंगा अब वो टॉपिक नहीं उस तरफ बात चली जाएगी अलबत्ता ये जो मैंने जुमला इस्तेमाल किया ना कि बीवियों के साथ आप इस्तेमाल कर सकते हैं तो इस हवाले से सही बुखारी में एक हदीस मौजूद है अम्मा आयशा कहती है और उम्मे सलमा कहती है उम्मे हबीबा कहती है र अल्लाहु कि नबी सल्लल्लाहु अहि वसल्लम हालत
हैज में भी अपनी बीवियों के साथ मुबाशरत कर लेते थे जिसको बाज मुनक ने हदीस उठाते हैं कि जी कुरान में तो आया है कि हैज की हालत में अपनी बीवियों से अलग रहो वो कुरान ने जो है मना किया है वो इंटरकोर्स से मना किया है और ये उम्माहतुल मोमिनीन का उम्मत प एहसान है कि उन्होंने फिर उसकी डिटेल भी बता दी सही बुखारी के अंदर कि नबी अ सलाम बुखारी मुस्लिम बल्कि दोनों में मिलता है कि अपनी बीवियों को हालत हैज में हुकम देते थे कि वो नाव से लेकर घुटनों तक एक मजबूत
कपड़े से यानी तहमत बांध ले और बाकी जिस्म के साथ आप अल सलाम मुबाशरत करते थे यानी आप इंटर कोर्स नहीं करते थे सिर्फ मुबाशरत करते थे तो वो भी इसी के अंदर शामिल है इस तबार से कि आप यानी औरतों के साथ शर्मगाह का इस्तेमाल हो सकता है लेकिन वह भी किन किन बाउंड्रीज के अंदर जो कोई इसके अलावा कोई और रास्ता इख्तियार करेगा फलाद तो व हद से तजावल का बागी शुमार होगा जो अपनी शर्मगाह का इस्तेमाल इस इस्ना के इलावा करेगा यानी बीविया या लौंडिया जो अब एसोट हो चुका है अब सिर्फ
बीवियों वाला और बीवियों के साथ आप किसी भी तरीके से इस्तेमाल करें और उसमें यह जो आपको बता रहे हैं यह वाला अगर केस बीवियों के साथ हो जाए यानी वो उनके जरिए ऐसा कोई मामला हो मस्टरबेशन वाला तो वह सबके नजदीक हलाल है खुद से इस मामले को ना किया जाए क्योंकि उसकी एक्सेप्शन जो है अल्ला लाने कुराने हकीम में दे दी है मैं यानी बहुत ज्यादा कंट्रोल अल्फाज में बात कर रहा हूं क्क जिनसे रिलेटेड य बात है अगरचे उनमें से कम लोग देखेंगे जिनसे रिलेटेड नहीं वो ज्यादा लोग देख रहे होंगे तो
उन तक य बात इश बात पहुंच जाए कोई नुक्ता ऐसा ना रह जाए जो वाले से मिसिंग हो तो ये आयत जो है सूर अल मोमिनून की आयत नंबर सेवन जो है और इसके कांटेक्ट में फाइव और सिक्स भी ये पूरी डॉक्ट्रिन क्लियर कर रही है कि शर्मगाह का इस्तेमाल इसके अलावा अल्लाह ताला ने कहा है कि वो हद को तोड़ने वाला है और यह रिजल्ट इस उम्मत में बहुत बड़ी पर्सनालिटी ने निकाला है वो है इमाम मोहम्मद बिन इद्रीस अ शाफ अल मुत फा 204 हिजरी जो अहले सुन्नत और अहले तश्य दोनों के यहां
बड़े इमाम माने जाते हैं उनकी रिस्पेक्ट है क्योंकि वो इमाम मूसा काजिम के शागिर्द थे इमाम शाफ रमला और उनका मशहूर शेर भी है इन मोहम्मद फला बिल फर्ज अगर अहले बैत की मोहब्बत का नाम राफी होना है तो जिन इ गवा हो जाओ मैं राफी हूं तो इमाम शाफ जोक बत से बहुत मोहब्बत रखते थे इसकी से उनको रायत का ताना मिलता था तो उनको य शेर कहना पड़ा अहले सुन्नत अले त दोनों उनका यह शेर कोट करते हैं उनको रिस्पेक्टबल पर्सनेलिटी के तौर पर प्रेजेंट किया जाता है और यह शेर उनके अपने दीवान
शाफ में मौजूद है और अ सुन्नत केमा ने बाकायदा अजल की किताबों में से नकल किया तो इमाम शाफी ने इन आयात के कांटेक्ट में रिजल्ट निकाला और उनकी अपनी किताब है किताब उल उम पूरी दुनिया में उनकी एक ऑथेंटिक बुक मानी जाती है उसके अंदर उन्होंने इन्हीं आयात के कांटेक्ट में लिखा है कि इन आयात की रोशनी में क्योंकि अल्लाह ने फरमाया कि शर्मगाह का इसके अलावा इस्तेमाल जो है वह हद को क्रास करने वाला है अल्लाह के हुजूर वह जुर्म है तो उन जरायम में उन्होंने कहा कि अल इस्ना बिल यद जो अरबी
में कहा जाता है मस्टरबेशन इंग्लिश के अंदर मुश्त जनी उर्दू के अंदर या हैंड प्रैक्टिस यह भी इस के तहत उन्होंने कहा कि हराम है और मना है और ये उनकी अपनी किताब में ये बात लिखी ई है और उनका ये कौल उम्मत ने इस तरह एक्सेप्ट किया है कि इन्हीं आयात की रोशनी में आप अहले सुन्नत की तमाम तफसीर उठा के देख लें तमाम ने इमाम शाफी के इस कॉल को इन आयात के कॉन्टेक्स्ट में नकल किया टॉप ऑफ द लिस्ट जो इस वक्त पूरी दुनिया में ऑथेंटिक तरीन तफसीर मानी जाती है अहले सुन्नत
के यहां तफसीर इब्ने कसीर तो हाफिज इब्ने कसीर ने भी इन आयात की रोशनी में बकायदा इमाम शाफी का ये कौल नकल किया है कि इमाम शाफी रहमतुल्लाह इसके तहत इसकी हुरमत के कायल है फिर उन्होंने साथ बल्के एक रिवायत भी लिखी अगरचे उसकी सनद कमजोर है लेकिन जब दूसरी तरफ से हर तरफ कमजोर बातें पेश की जा रही हो यह हमारी दलील नहीं है लेकिन मैं आपको बता दूं कि इब्ने कसीर ने अगरचे इस रिवायत को लिखा कि इस रिवायत के अंदर एक मजहू उल हाल रावी है लेकिन बकायदा अहले सुन्नत की एक मेन
स्ट्रीम की किताब में तो रिवायत मौजूद है इमाम हसन बिन आरफा एक इमाम गुजरे हैं उन्होंने एक अपनी किताब उनकी जुज छोटी किताब है जिस तरह इमाम बुखारी ने जुज रफल यदैन लिखी जुज अल किरा लिखी इस तरह उनके जुज के अंदर ये रिवायत मौजूद है कि सात लोग ऐसे हैं जिनसे कयामत वाले दिन ना अल्लाह ताला कलाम फरमाए ना उन्हें पाक करेगा ना उन्हें आलिम के साथ खड़ा करेगा ता वक्त के वो दुनिया से तौबा करके गए हो उनमें से एक शख्स वो है जो खुद अपने साथ निकाह करता है और अल इस्तम करता
है यानी अपने हाथों से ही बुराई करता है मुश्त जनी वाला मामला ये रिवायत कमजोर है लेकिन हाफिज इब्ने कसीर ने इसको नकल किया है कि ताकि एक नॉलेज एक जगह जमा हो जाए तो इमाम शाफी का ये जो कॉल है सिर्फ इब्ने कसीर ने नकल नहीं किया बल्कि सुनल कुबरा अल बहकी इमाम बहकी की किताब हदीस की किताब में एक चैप्टर उसका नाम ही अल इस्तेम है उसकी हेडिंग के ऊपर इमाम बहकी ने पहले तो ये आयत लिखी है सूर अल मोमिनून की आयत नंबर 567 उसके बाद इमाम शाफी का कॉल उन्होंने चैप्टर की
हेडिंग में लिया है और उसके नीचे फिर इससे मुतालिक रिवायत लेके अब वो रिवायत तो कमजोर है पहली जो उन्होंने रिवायत ली है वो खुद ही उन्होंने उसको कमजोर डिक्लेयर कर दिया है कि ये मुर्सल छूटी हुई है जो डॉक्टर जाकिर नाइक ने भी इब्ने अब्बास के हवाले से बयान की कि इब्ने अब्बास से किसी ने आके पूछा कि मैंने अपनी इस तरह शर्मगाह के साथ ऐसा मामला किया तो उन्होंने फरमाया कि शर्मगाह के साथ इस तरह का मामला करना इससे बेहतर है कि तुम निकाह कर लो और जिना से बेहतर यह है वो कहते
हैं देखि जी उन्होंने जिना से तो बेहतर इसे कहा है ना हालांकि इसका कंपैरिजन वो करा रहे हैं कि यानी ये उससे छोटी बुराई है इसका ये मतलब नहीं कि जिसको जिना में पड़ने का खर्चा है तो यह काम शुरू कर दे तो वो जिसको खचा है उसको क्या काम करना चाहिए वो अल्लाह के नबी बता के गए वो मैं बाद में आपको इंशाल्लाह ताला बता हूं कि वो क्या बता के गए हैं अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अ वसल्लम तो इब्ने अब्बास का वो कॉल जो खुद लिखा मुर्सल एक और रिवायत लेके आ वो भी
उसमें भी जफ रावी है तली का इशू है वो भी रिवायत कमजोर है और और इसी तरीके से इमाम बै हकी से भी ऑलमोस्ट 200 साल पहले इमाम बुखारी के उस्ताद है इमाम अब्दुल रज्जाक जिनकी मुसन अब्दुल रजाक है उन्होंने भी अल इस्तेम के ऊपर एक चैप्टर बांधा है उसमें रिवायत लेके आए हैं और इब्ने अब्बास वाली ये रिवायत वो भी लेके आए हैं वो भी रवायत कमजोर है यही वाली रिवायत थी और ब उसमें सही सनद से एक ताबी का कौल वो लेके आए अता बिन अबी रबाह का जो इमाम हनीफा हिल्ला के उस्ताद
भी हैं और जलील उल कदर ताबीन में से हैं और इमाम अबू हनीफा का कौल ये सही सनद से साबित है है कि मैंने रू अर्ज पे अता बिन अबी रबा से अफजल शख्स कोई नहीं देखा इसी के तहत हम समझते हैं कि इमाम हनीफा ने किसी सहाबी की जियारत नहीं की वरना कोई अदना सहाबी भी होता तो व उनसे तो अफजल होता और मजे की बात कश्फुल महजूब जो तसव्वुफ में दुनिया में ऑथेंटिक बुक मानी जाती है अली बिन उस्मान हवेरी अल मुत 465 हिजरी उन्होंने इमाम हनीफा को तब ताबीन वाले चैप्टर में डाला
है ताबीन वाले में नहीं तो यानी हालाकि उन्होंने मामनी की शान में अपना एक ख्वाब भी लिखा नबी सलाम को ख्वाब में देखा कि उन्होंने उनको गोद में उठाया हुआ इमाम हनीफा को तो समझ गए कि मेरा इमाम है और ये इतना मशहूर हुआ कि तजक तुल औलिया जो पूरी दुनिया में तसव्वुफ में तसव्वुफ के जो डिक्लेयर्ड औलिया है उनकी बायोग्राफी के ऊपर ऑथेंटिक किताब है जिसके हवाले फजा ने सुन्नत दावत इस्लामी की उसमें मौजूद है और फाइल आमाल और फजल सदका तब्लीगी जमात की उसमें मौजूद है तजक औलिया शेख फरीदुद्दीन अत्तार अल मुत फा
627 हिजरी उन्होंने बकायदा इमाम हनीफा प जो चैप्टर बांधा है ना उसमें उन्होंने कशु महजूब का हवाला दिया है कि शेख अली बिन उस्मान हजवरी नकल करते हैं हजवरी का लफ नहीं लिखा शेख अली बिन उस्मान अपनी किताब में नकल करते हैं तो वो हजवरी नहीं लिखा इसलिए आप लोगों तो पता नहीं चला वो उन्होंने कश महजूब का हवाला दिया हुआ है अपनी किताब में इमाम हनीफा की शान में तो इमाम हनीफा जो है वो कहते हैं कि मैंने अता बिन अबी रस से अफजल शख्स नहीं देखा और इमाम अब्दुल रज्जाक जो इमाम बुखारी के
उस्ताद हैं उन्होंने अता बिन अबी रबाह का कॉल नकल किया है सही सनद के साथ कि वो कहते हैं कि मैं इस अमल को अल इस्तम को बिल्कुल जायज नहीं समझता मैं इसे मकरूह समझता हूं किरात वाला अमल सम बता हूं बल्कि अल मुसन इने अबी शबा में जो इमाम अब्दुल रजक के जमाने में दूसरे इमाम गुजरे हैं और वो भी इमाम बुखारी और मुस्लिम के उस्ताद है बल्कि इमाम मुस्लिम ने 1500 हदीस इमाम इब्ने अबी शैबा से ली है अपनी सही मुस्लिम में उन्होंने अता बन अबी रबा का ये कल नकल किया है कि
जो इस तरह का काम करेगा उसका रोजा टूट जाएगा सही सनद के साथ और यह उर्दू जुबान में ऑलमोस्ट सारी किताबें आ चुकी है हम सबके जेपीजी भी साथ अटैच करेंगे किसी को अगर वहम हुआ तो वो देख ले खुद पढ़ ले तो उन्होने कहा रोजा टूट जाएगा अब रोजा टूट जाएगा अब इसके बाद इख्तिलाफ है कि उसका कफारा क्या वो 60 रोजों वाला होगा लेकिन उसमें उम्मत की एक सरीत ये कहती है नहीं उसके बदले एक ही रोजा रखेगा और तौबा करेगा 60 रोजों वाला सिर्फ उस एक्सट्रीम के लिए जो बुखारी और मुस्लिम में
है कि अगर कोई शख्स अपनी बीवी के साथ सोहबत कर लेता है या नज बिल्लाह कोई जिना वाला मामला करता है उसके लिए 60 रोज वाला कफारा है इस केस में सिर्फ एक रोजा ही वो रखेगा अलबत्ता रोजा उसका टूट जाएगा आप इससे अंदाजा लगाए कि हमारे आमा मुहसीन ने बकायदा यानी इसको टॉपिक बना के सुन कुबरा अल बई हकी में भी एड्रेस किया और मुसन अब्दुल रज्जा के अंदर तो अगर किताबें आप पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि किताबों के अंदर ये चीजें किस तरीके से लिखी है अलबत्ता ये जो हमारी बाकी मेन स्ट्रीम
की किताबें हैं बुखारी और मुस्लिम उसमें चैप्टर बना के इसे अड्रेस नहीं किया गया लेकिन अलग से इसके ऊपर डिस्कशन इस तबार से हुई हुई है इनडायरेक्टली वो अब अजान शुरू हो चुकी है इंशाल्लाह अजान के वक्फ के बाद मैं इंशाल्लाह आपको वो बताता हूं इंशा अल्लाह ताला सूरतुल नूर की आयत नंबर 33 है एक तो हम आयत ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं सूर अल मोमिनून की आयत नंबर 56 और सेन अब आ जाए सूरत नूर की आयत नंबर 33 जिससे आपको अल्लाह का मिजाज पता चलेगा अल्लाह ताला ने इसमें जो लोग निकाह की इस्तता
नहीं रखते अपनी गुरबत की वजह से उनको अटच करते हुए कहा है लला निका ऐसे लोगों को पाक दामन रहना चाहिए जो निकाह की इस्तता नहीं रखते हता यला यहां तक कि अल्लाह ताला अपने फजल से उन्हें गनी करते जब तक उनके पास फाइनेंशियल इस्तता नहीं है तो व अपने आप को पाक दामन रखें अब पाक दामन रखने में सब कुछ आ जाता है कि वो किसी भी इस तरह की एक्टिविटी की तरफ नहीं जाएंगे वरना यहां पर बता दिया जाता कि आपको एक सलूशन दे देते हैं जो बाद में डॉक्टर साकि नायक ने दिया
है नाज बिल्ला मिन जालिक इसी को सपोर्टिव वो मशहूर हदीस है जो सही बुखारी और सही मुस्लिम दोनों में है ऐ नौजवानों के ग्रह तुम में जिसके पास इस्तता हो यानी इस्तता कौन सी जो सूरत नूर की आयत नंबर 33 में आई है फाइनेंशियल इस्तता यहां उसकी यानी मर्दाना पन का इजहार नहीं हो रहा बल्कि फाइनेंशियल इस्ता यहां पर तो लोग कहते हैं ना जी वो कोई अगर लड़का काम नहीं करता इसकी शादी करवा दे अंदाजा करें करें ताकि वो दो खानदान का बेड़ा गरक कर दे और फिर वो एक जाली रिवायत पकड़ी हुई है
कि जी एक गरीब शख्स हुजूर के पास आया आपने फरमाया शादी कर लो वो और गरीब हो गया कहा दूसरी कर लो वो और गरीब हो गया कहा तीसरी कर लो और गरीब हो गया चौथी कीती तो फिर वो अमीर हो गया सर इस तरह क कोई अमीर नहीं होना ये झूठी रवायत ने घड़ी हु रिवायत हैं ये पता नहीं किन दिलजलों ने घड़ी है जिनकी एक भी नहीं हो रही होगी तो ये कुरान और सुन्नत का मिजाज ही नहीं है जो फाइनेंशली स्पोर्ट नहीं कर सकता उसके लिए बुखारी और मुस्लिम में ये हदीस आ
गई कुरान में तो आया सूरत नूर की आयत नंबर 33 में पाक दामन रहे हैं हदीस बुखारी और मुस्लिम में यह है कि आपने फरमाया ऐ नौजवानों के गरो अगर इस्तता हो तो निकाह करो और जो निकाह की इस्तता नहीं रखता तो उसे चाहिए कि वो रोजे रखे यह चीज उसकी शहवत को ठंडा कर देगी और उसमें और अल्फाज भी है कि ऐ नौजवानों के गुरुह इस्तता हो तो निकाह करो निकाह करना तुम्हारी इफत और इस्मत की हिफाजत का जरिया है तुम्हारी शर्मगाह की हिफाजत का जरिया है और यह निगाहों को नीचा रखने का जरिया
है जो सूरत नूर में आया कि नबी सलाम मोमिन मर्दों को हुकम दे कि अपनी निगाहों को नीचे रखें और मोमिन औरतों को भी हुकम दे निगाहों को नीचा रखें जिसे अरबी में गब बसर कहा जाता है इ निगाहों को नीचा रखना तो ये निगाहों को नीचा रखने और तुम्हारे शर्मगाह की हिफाजत का जरिया है और जो इस्तता नहीं रखता वो रोजे रखे यह चीज उसकी शहवत को कम कर देगी तो नबी अ सलाम ने शहवत को कम करने का तरीका जो बताया है वह है रोजे रखना अब डॉक्टर जाकिर नायक ने इस हदीस अब
उनके बिल्कुल खिलाफ थी इसको उन्होंने अजीब तरी अजीबो गरीब तरीके से से मंत के जरिए हल करने की कोशिश की तो यानी इंतहा अफसोस नाक चीज है नबी सलाम ने जो तरीका बताया है उसी तरीके को अडॉप्ट करना चाहिए आपको पता था आप कोई दूसरा भी तजवीज कर सकते थे लेकिन वो जाहिर है कि नबी सलाम के मिजाज में अल्लाह ताला के दीन के मिजाज में वो चीजें नहीं बैठती हैं तो यह बुखारी और मुस्लिम की हदीस बिल्कुल वाज सबूत है कि कोई शख्स इस किस्म की एक्टिविटी को परफॉर्म नहीं करेगा जो खुद साख किस्म
की होगी जो तरीका बताना था वो अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अ वसल्लम ने खुद बता दिया इसी को स्पोर्ट मोटि एक और हदीस है सही बुखारी और सही मुस्लिम में साद इबन अबी वकास कहते हैं कि उस्मान बिन मजून रज अल्लाह ताला अहो ने तरक दुनिया की इजाजत और तरक निकाह की इजाजत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम से मांगी तो आपने इस चीज को रद्द फरमा दिया और साद इबन अबी वकास कहते हैं कि अगर अल्लाह के नबी हमें इजाजत देते तो हमारा तो इरादा यह था कि हम अपने आप को शहवत से बचने के
लिए खसी कर लेते सेक्सुअली डिसेबल कर लेते लेकिन अल्लाह के नबी अ सलाम ने हमें निकाह की तरफ तरकीब दिलाई और सखसी करने से मना फरमा दिया अगर यह ऑप्शन मौजूद होता तो आप फरमाते कि चलो खसी तो ना हो वो तो तली को बदलना है जाहर है जी सर निसा की नंबर 19 है ला शैतान ने कहा था कि मैं उभू तेरी मखलूक को कि वो अल्लाह की तखक को बदलेंगे तो अपने आप को इस तरीके से खसी करना यह तो खलीक बदलना है तो नबी सलाम ने इस बड़े अमल से रोका तो आप
यह ऑप्शन दे सकते थे कि वो ना करो यह कर लो दरमियान रास्ता निकाल लो अगर तुमने शादी नहीं करनी लेकिन आपने कहा डायरेक्ट निकाह करो दरमियान का कोई रास्ता नहीं आपने छोड़ा तो यह हदीस भी बुखारी मुस्लिम की बिल्कुल सबूत है इस बात का कि जो हमारे आइमा अहले सुन्नत ने और आइमा अहले तश्य ने रिजल्ट निकाला है कि यह अल इस्तम बिल यद यह मस्टरबेशन हराम है और मकरूह तहरीम है और गुनाह है ये बिल्कुल ठीक रिजल्ट निकाला है एक और हदीस में भी इसका इशारा मौजूद है जो सही मुस्लिम में है हदीस
मिश्कत में भी आपको पहली जिल्द में जकात वाले चैप्टर में सदके की फजीलत के बयान में मिल जाएगी कि अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने फरमाया कि हर तस्बीह सदका है ये सदका पंजाबी वाला नहीं नेकी का काम में यानी सुभान अल्लाह कहना सदका है हर तहलील सदका है तहलील कहते हैं ला इलाह इल्लल्लाह कहने को हर तमीद सदका है यानी अल्हम्दुलिल्लाह सुभान अल्ला वल हमदुलिल्ला ला इला इल्लल्लाह अल्लाह अकबर यह सदका है अमर बिल मारूफ नेकी का हुकम देना यह भी सदका है नही मुनकर बुराई से रोकना यह भी सदका है हत्ता
के तुम्हारा अपने बीवियों के साथ इज वाजी तालुक कायम करना भी अल्लाह के हुजूर सदका है यानी नेकी है बाकी चीज तो साबा को हजम होगी उन्होंने कहा ये बीवियों के साथ यानी ताल्लुक कायम करना यह भी अल्लाह के हुजूर नेकी है तो आप अ सलाम ने फरमाया कि अगर तुम यही चीज किसी और तरीके से पूरी करो अब वो आपने वो तरीका बताया नहीं उसमें जाहर है जिना भी आ जाता है कौम लूत वाला अमल भी आ जाता है और ये अलना बिल यद यानी मस्टरबेशन भी आ जाता है आपने फरमाया कि और हराम
तरीके से पूरा करो तो क्या तुम्हें गुनाह मिलेगा तो साबा ने कहा कि मिलेगा तो आपने फरमाया फिर तुम्हें अपनी बीवियों से इस अमल के ऊपर सवाब भी मिलेगा इस हदीस के अंदर भी इसको यानी जो आमा सुन्नत का मौक है और आमा तयो का उसको सपोर्ट मिलती है अहमदुल्लाह अब उस सखत हदीस की तरफ आ जाए क्रिटिकल हदीस जो मैंने एंड पर रखी हुई थी उसकी तरफ तो इशारा ही नहीं किया किसी ने ना डॉक्टर जाकिर नायक ने अपनी गुफ्तगू में उसे डिस्कस किया ना उनके खिलाफ मजमीन लिखने वालों ने व हदीस बुखारी और
मुस्लिम दोनों में है कि नबी सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम ने फरमाया आंखों का जिना देखना है जुबान का जिना बोलना है कानों का जिना सुनना है हाथों का जिना पकड़ना है टांगों का जिना चलकर जाना है बुराई की तरफ और नफ्स आरजू और तमन्ना करता है और शर्मगाह उसकी तस्दीक कर देती है यानी नबी अ सलाम ने हर उज का जिना गिनवाला पूछे तो कहेंगे जी हां जी वो बद निगाही करना तो हराम है सूरत नूर के अंदर भी आया मोमिनीन और मोमिना को हुकम है कि अपनी निगाहों को नीचा रखो बल्कि उसमें तो वो
कहेंगे जी सूर अल मोमिन के अंदर जिसे सूर गाफिल कहते हैं उसके अंदर तो यहां तक आया कि अल्लाह ताला आंखों की खयानत को भी जानता है तो कहते हैं वो तो इसके अंदर आता है ये सब कुछ हराम है तो सर आंखों प ना रुके आगे आप जुबान पर भी जाए जुबान से बेहयाई की बातें करना आंखों में बेहयाई की वीडियोस देखना जो इस वक्त सोशल मीडिया इशू बन गया कान से बुराई की बातें सुनना हाथ से जो काम करना जो ये जिसकी तरफ यानी आज हम डिस्कशन कर रहे हैं जिस टॉपिक के ऊपर
मास्टरबेशन के ऊपर ये सब की सब चीजें उसके अंदर लाई करेंगे और फिर इसको सपोर्टिव एक और हदीस है जो सही बुखारी के अंदर आई है मिश्का में भी मौजूद है बड़ी मशहूर हदीस है कि अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो शख्स मुझे दो चीजों की गारंटी दे दे मैं उसे जन्नत की गारंटी देता हूं जमानत देता हूं मैं दो चीजें आपने फरमाई कि दो जबड़ो के दरमियान यानी जुबान और दूसरी चीज दो टांगों के दरमियान यानी शर्मगाह तो शर्मगाह की हिफाजत में हर वह चीज आएगी जो शर्मगाह की हिफाजत में अखलाकी
तौर पर उसे बुराई के तौर पर एक्सेप्ट किया जाता है कि यह बुराई है वैसे तो गादी साहब भी अक्सर कहते हैं कि तमाम मुश में जो अखलाकी अदार है वो सबको पता है तो सर आप इस यह जो अखलाकी चीज है अखलाकी बुराई इसको बुराई के तौर पर सारे मुश के अंदर माना जाता है मैं मेडिकल चीजों में नहीं पढ़ूंगा हमारे बाज उलमा जो है वो कहते हैं मेडिकली इसके बड़े नुकसान आत है सर मेडिकली इस अमल के एक्सेसिव करने के नुकसा आत है हम इसकी जो हुरमत बता रहे हैं किताब सुन्नत के दलाल
की रोशनी में बता रहे हैं अगर आप यह करेंगे तो वो तो मेडिकली अगर कोई शख्स ज्यादा अपनी बीवियों के साथ तालुक कायम करता है तो वो भी हमने कई एक्सपायर होते देखे लोग वो तो उसके भी नुकसान है एक्सेस ऑफ एवरीथिंग इज बैड ठीक है वो एक्सपायर इस तरह हो जाते हैं ना कि फिर वो इस किस्म के वो फिर कुश्ते और इस किस्म की अद्वित इस्तेमाल करते हैं कि उनके फिर वो गुर्दे खराब हो जाते हैं और वो फारिग ही हो जाते हैं तो अगर आप ये ये आप लूली लंगड़ी दलील देंगे ना
मेडिकल वो तो कहेंगे जनाब ज जायज वाले वो भी फारिग होए लिहाजा मैं उस मेडिकल वाले चक्कर में नहीं पड़ता और उसके लिए खैर उन्होंने बहुत और तरीके भी डिवाइज कर लिए हैं कि वो उसके वो वाला एस्पेक्ट ना आए वो मैं टॉपिक डिस्कस नहीं करना चाहता मैं सिर्फ इस हवाले से हमें कोई इंटरेस्ट नहीं उस टॉपिक में एक बुराई वाला एक मामला है तो हम उसको सिर्फ कंटेम करने के लिए यहां पे बैठे हैं इंशाल्लाह किताबो सुन्नत के दलाल की रोशनी में तो नबी अलाम फरमाए कि जो मुझे गारंटी देगा ना तो मैं उसे
जन्नत की गारंटी देता हूं जो अपनी जुबान की हिफाजत और अपनी शर्मगाह की हिफाजत की गारंटी देता है तो बिल्कुल यह वाज हो गया अब चकि यह टॉपिक बड़ा यानी एक सेंसिटिव है मैं कोशिश करता हूं इसे अवॉइड करूं अभी तक अवॉइड करता आया मैंने एक ही वीडियो रिकॉर्ड की है उसके कई क्लिप्स मिलियंस ऑफ पीपल तक पहुंचे हैं उस वीडियो का हम लिंक दे देंगे मसला 155 का वो आप देख ले उसमें मैंने कौम लूत का अमल जो है इसको भी डिस्कस किया है होमोसेक्सुअलिटी कह ले ओरल सेक्स का इशू डिस्कस किया है जाहर
है ये भी बुराई है जो मुश में आ रही है उसमें एक कहीं पर थोड़ा सा अगर आप एस्केप रूट किसी को दे सकते हैं तो वो यह है कि कंडोम के इस्तेमाल के साथ हो वरना तो डायरेक्टली जाहर है इस तरह का अमल करना तो उसको कौन जी शऊर शक्स जो है वो हलाल कहेगा हमारी वीडियो में से भी बाज लोगों ने नीचे जो है वो अजीबो गरीब कमेंट्स लिखे अली भाई ने ओरल सेक्स को जायज करार दे दिया मेरा दिमाग खराब है मैंने उसमें कहा था कि उसकी कोई सूरत जायज भी हो सकती
है और नाजायज भी हो सकती है तो मैंने इशारा तन बता दी वो चीज अच्छा इसके अलावा यह वकफा करने के लिए अद्वित जो इस्तेमाल की जाती है इसी तरीके से कोई जो है वो अपने काउंटर पार्ट का दूध पी लेता है ये सारे टॉपिक्स मैंने जो है वो उसमें डिस्कस किए हैं तो मैं अब उस डिटेल में जाना नहीं चाहता उन तमाम वीडियोस के लिंक हम इस वीडियो के नीचे डाल देंगे जिसे शौक है तो वो देखें क्योंकि हो सकता है बाज लोग कहेंगे जी फ्ला टॉपिक इससे रिलेटेड था वो आपने छोड़ दिया वो
जानबूझ के मैं छोड़ रहा हूं ताकि ये स्पेसिफिकली इसी इशू के ऊपर वीडियो रिकॉर्ड रहे और बीच में कोई ऐसी चीजें ना आ जाए अब ये जाकिर नायक का ये कहना कि जी अब उन्होंने खैर उनको भी अपनी आखिरत की फिक्र है उन्होंने कहा कि जी कोई बुरा ख्याल जहन में ना लेकर आए कोई किसी का जहन में तसव्वुर ना लेके आए यह ना करें ये ना करें बस सिर्फ वैसे ही कर ले तो वैसे तो नहीं हो रहा होगा और वो वैसे वाला शायद वो समझ रहे हो जो उनको सवाल भी आया था एक
बंदे का कि जी हम मिया और बीवी जो है वो वीडियो लिंक के ऊपर गुफ्तगू आपस में करते हैं और हम यह काम कर लेते हैं तो यह वीडियो आप क्या समझते हैं ये आपके दरमियान है ये वीडियो कल को नेट पर चढ़ी हुई होगी यानी ये वीडियोस तो इतना बड़ा फित है तो आपको इतनी तकलीफ क्या है अपनी बीवियों को साथ रखें ना कुरान हकीम में तो इरत इस चीज का जिक्र मौजूद है कि चार महीने से ज्यादा जो है वो कोई अपनी बीवी से दूर ना रहे तो अपनी बीवियों को अपने साथ लेके
जाए सर सु बकरा के अंदर है इसी के तहत सदना उमर ने जो है वो चार महीने के अंदर अंदर फौजियों को वापस बुला लेते थे जो बगैर बीवियों के गए होते थे अदर वाइज तो नबी अ सलाम ने कभी बीवी के बगैर सफर नहीं किया आपके तमाम सफर बीवियों के साथ है बल्कि बुखारी मुस्लिम में मौजूद है आप कुरा डालते थे जिसके नाम कुर्रा निकलता था उसको साथ लेकर जाते थे सफर में ठीक तो नबी सलाम का तो एक अमल है तो आप लोग खुद गलत काम करते हैं फिर उसको जस्टिफाई करने के लिए
और तरीके उलमा से डिमांड करते हैं कि जी हम वीडियो पे मियां बीवी आमने सामने बैठ जाए और हम ये कोई ना करें ये इस तरीके से तो फिर मामलात जो है वो बिगड़ना शुरू हो जाएंगे ये मतलब एक खतरनाक खेल है जो आप खेल रहे होंगे तो मैं तो य कहूंगा कि इससे बच जाए निगाहों की हिफाजत करें इस्लाम का मिजाज जो है वो गदे बसर का है इस पर भी मेरी वीडियो है मसला 161 ए निगाहों को झुकाने के बारे में गदे बसर और उसका पार्ट बी था औरतों से मुतालिक पर्दा हिजाब और
सारी औरतों के जो इस तरह के मसाइल है मैंने उसके अंदर डिस्कस किए हैं इंशाल्लाह उन दोनों वीडियोस का लिंक भी हम अपनी वीडियो के नीचे डाल देंगे इंशाल्लाह ताला और आखिर में मैं मां-बाप से रिक्वेस्ट करूंगा कि आप लोग यह तो कहते हैं कि जी वो औलाद हमारे हुकूक पूरे करें में आया कि मां बाप को उफ तक ना को जी बिल्कुल आया सर बनी इराल के अंदर जी कुरान हकीम में जो है वो कम से कम पांच मकामा पर अल्ला ताला ने तौहीद के बाद मां बाप के ताबे फरमान होने का हुक्म दिया
जी बिल्कुल दिया है आपके बारे में कोई हुक्म नहीं दिया हु कुरान के अंदर कि आपने औलाद के साथ क्या करना है तो वो भी आप जरा सूरत नूर पढ़ ले आयत नंबर 32 जिसमें अल्लाह ताला ने हुकम दिया है कि बेवा औरत हैं जो गुलाम है वो अगर इस्ता नहीं रखते फाइनेंशली तुम उन्हें सपोर्ट करके उनकी शादी करवाओ यह मां बाप को नहीं पता बच्चे नौकरियों प लग जाते हैं ठीक है जी उसके बाद भी पाच पाच साल तक उनकी शादी नहीं करते हैं उनको होता है कि चलो ये पा साल और निचोड़ ले
फिर तो इसने बीवी का मुरीद बन जाना है सर अगर आपने दीनी तालीम दी होगी ना तो वह बीवी और मां-बाप के दरमियान बैलेंस रखेगा आप बेफिक्र रहे और जो आपके नसीब में रिस्क लिखा है ना वो आपसे कोई छीन नहीं सकता और अगर आप ये इस तरह के हरबे इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा बच्चे हो जाते हैं जनाब नौकरी लग गए हैं 22 23 साल 25 साल की उम्र में 30 32 33 35 साल उम्र हो जाती है अगर बच्चा कहीं पे कह दे मेरी शादी करवा दो कह एडी केड़ी जल्दी है और और
अपनी इनकी शादी 18 2020 साल की उम्र में हुई हुई है तोन किनी जल्दी सी देख ले ये जितने लोग अपने बच्चों को कह रहे हैं ना तो ये बच्चों को मैं कहता हूं आगे से आप एहतराम से उनसे पूछना है कि अब्बा जी आपकी कितनी उम्र में शादी हुई थी तो आपको पता चलेगा कि अब्बा जी की उम्र उस वक्त 20 साल थी और आपकी अम्मा की उम्र 16 या 18 साल थी या अब्बा जी की उम्र 22 साल थी और अम्मा जी की उम्र 18 साल थी और आपको 18 द 3 भी हो
गया है ना तो कंद हाले इतनी किड़ी जल्दी है लेकिन ये पहलू ठीक है जो मैंने पहले भी डिस्कस किया कि अगर वो फाइनेंशली नहीं चल सक रहा तो आप इस तरह ना करें लेकिन अगर कोई फाइनेंशली मां-बाप स्ट्रंग है और वो अपनी औलाद को सपोर्ट कर सकते हैं तो सर वो जिस तर बाकी जरूरत पूरी करते हैं ठीक है शादी करवा दे और जब तक वो कहीं पर सेट नहीं होता उसको फाली सपोर्ट करें य तो कुरान में सर नूर की आयत नंबर 32 के अंदर आपको भी हुकम आया कि आपने अपनी औलाद के
साथ किस तरीके से बिहेव करना है आप सिर्फ अपने हुकूक की बात करते हैं और औलाद के कोई हुकूक नहीं है इसको भी देखने की जरूरत है उ का जो आया ना इस्लाम में पूरे के पूरे दाखिल हो जाओ अपने हुकूक तो आप ले रहे हैं और अपनी औलाद के हुक देने के लिए तैयार नहीं हो रहे अपनी जिंदगी में तो आपने बड़ा एंजॉय किया अब जब बच्चों की एंजॉयमेंट की बारी आती है उस वक्त जो है वो सास और सुसर जो है वो नई मुसीबत खड़ी कर लेते हैं आने वाली नई बहू के साथ
इल्ला माशाल्लाह अच्छे लोग भी है लेकिन ज्यादातर तो ये एक बुरा ही मामला इस हवाले से चल रहा होता है तो नौजवानों को मैं कहूंगा कि आप सब्र करें रोजा रखें और डॉक्टर जाकिर नायक के इस मशवरे पर बिल्कुल अमल ना करें अगरचे उन्होंने भी बड़ी कैद के साथ कहा है तो अल्टीमेटली वो यही कहना चाह रहे हैं कि ना ही करें क्योंकि जो कुयू उन्होंने लगाई है वो तो पॉसिबल ही नहीं है ठीक है जो कि अगर ये हो यह हो यह हो यह तो पॉसिबल ही नहीं है और फिर भी अगर आपको सब
ना आए तो हम आपको एंड प एक मदनी नुस्खा अर्ज कर देते हैं कि आप रोजाना एक मिनट के लिए मोत्ती के फ्लेम पर अपना हाथ रखा करें ताकि आपको जहन्नम की जो आग का अंदाजा हो जाए वैसे तो बुखारी मुस्लिम में है कि जो जहन्नम की आग है वो दुनिया की आग से 70 गुना ज्यादा तेज है तो जो लोग ये कहते हैं ना जी जहन्नम में फेर ही लगेगा फिर तो हम जन्नत में पहुंच ही जाएंगे अब फेरे की लेंथ नहीं किसी को पता तो वो फेरे वाले यहीं से प्रैक्टिस शुरू करें ना
कि एक मिनट के लिए फेरा लगाए ना दुनिया की आग का वो भी सिर्फ अपने हाथों तक तो लग पता जाएगा पता नहीं लगेगा लग पता जाएगा तो ये प्रैक्टिस शुरू कर द ये गुनाह से मुझे कहते हैं लोग जी हम बुराई से बचने का को मैं कोई तरीका भी तो बताए सर ये तरीका बता दिया रोजना प्रैक्टिस करें और सूरतुल फुरकान में तो अल्लाह ताला ने फरमाया कि जहन्नम हमेशा रहने के लिए भी बुरी जगह है और एक लमहे के लिए भी रहने के लिए बुरी जगह है जो कहते हैं ना एक पहरा ही
लगेगा एक लमहे के लिए भी बुरी जगह है रहने के लिए तो ये प्रैक्टिस शुरू करें तो इंशाल्लाह सबर आ जाएगा अच्छी सोबत इख्तियार करें कुरान के साथ अपना शग रखें तो इंशाल्लाह ताला आपको सबर नसीब होगा यंग एज में टीन एज में सब लोग इन आजमाइश से गुजरे होते हैं मेरी अपनी शादी भी 27 साल की उम्र में हुई है ये नहीं है कि ये इस तरह के इश्यूज जो है वो नौजवान की उम्र में लोगों को फेस नहीं करने पड़ते लेकिन अल्लाह का शुक्र है अल्लाह ने हमें पाक दामन रखा है खौफ खुदा
की वजह से आप ही कोशिश करें कि पाक दामन रहे और इस तरह की जो फतवे हैं इनके ऊपर बिल्कुल कान ना धर मैंने पूरे रिस्पेक्ट के साथ डॉक्टर जाकिर नायक का रद्द किया है यजीद वाले मसले में भी किया था इस मसले में भी इसकी वजह से अब कोई उनको जीरो से मल्टीप्लाई ना कर दे उनकी जो खिदमा है वो अपनी जगह है हम उनका दिल से एहतराम करते हैं लेकिन जो उन्होंने एक ओपन लासेंस दे दिया है इस हवाले से अगरचे उन्होंने बड़ी इतिहास से गुफ्तगू की है लेकिन मुझे पता है वो इतिहास
कायम नहीं रहनी लोगों ने पिक एंड चूज करना है और वो अपनी तरफ से पूरी नेक नीति के साथ ये फतवा दे रहे थे लेकिन यह नुकसानदेह है मैंने किताबो सुन्नत के दलाल आपके सामने रख दिए आप जाने और आपके खुदा का मामला है मेरा तो काम था आपको सही बात बताता तो मैं एंड पे फिर वर्डिक्ट दे दूं कि यह पूरी उम्मत का इजमा है इसके गुनाह और हराम यानी मकरूह तहरीम कह ले फिक की लैंग्वेज में सवाय चंद एक अकबाल के जो शाज है उनकी कोई अहमियत नहीं है अहले सुन्नत के तमाम ग्रह
बरेलवी देबंदी अहले हदीस और अहले तश्य तो 100% और अहले सुन्नत में भी हनफी शाफ मालकी तीनों के उलमा इसको हराम और गुनाह समझते हैं हना बला में भी दो ग्रह है उनमें से एक ग्रह इसको बुराई समझता है दूसरा ग्रह जो है वो बड़ी कोयद लगा के ल के मथे मारा हुआ व कोल पता नहीं उन्होने कहा है कि नहीं कहा बल उसकी कोई अहमियत नहीं है दूसरी तरफ तो पूरी उम्मत खड़ी हुई है तो यह इस पर अगर कोई इजमा उम्मत का भी दावा करे ना तो बुरा नहीं होगा इसलिए कि उम्मत की
अयतें लोग खड़े हुए तो चंद लोगों के अवाल की क्या अहमियत है अल मुस्त हाकिम में सही सन से हदीस है कि अल्लाह ताला मेरी उम्मत को कभी गुमराही पर जमा नहीं करेगा जमात प अल्लाह का हाथ है तो उम्मत ने अल्हम्दुलिल्लाह इसको ए बुराई किया हुआ लिहाजा उम्मत का इजमा भी हुज्जत है किताबो सुन्नत की तरह और इमाम शाफ का कॉल है के जो सूरत निसा की आयत नंबर 15 है मोमिनीन के रास्ते के बारे में वो इजमा की हुज प दलील है और अल मुस्त हाकिम की हदीस जो है 399 वो इजमा की
हुज्जत के ऊपर है तो इजमा को मानना किताबो सुन्नत को मानना है आप डायरेक्ट जाके इतिहा द में जाके कूद गए हैं इजहा तो वहां होता है जहां किताबो सुन्नत और इजमा में दलील ना हो तो यहां तो इतहाद की जरूरत ही नहीं है ठीक है मॉडर्न मसाइल में आप इतहाद करेंगे ये मॉडर्न मसला नहीं हमारे आइमा ने अलाफिया इसको कंक्लूजन इशू आएगा उसके लिए हम मॉडर्न एज की तरफ जाएंगे जो कुरान और सुन्नत के अह कामात है शरीयत के अह कामात है उसके लिए हम सलफ की तरफ देखेंगे जो मॉडर्न एज से ताल्लुक रखती
है चीजें कोई डिस्कवरीज है उसमें हम आज की बात करेंगे तो बाकी इसके ऊपर और भी कई चीजें मार्कीट के अंदर आई हुई है मैं उनको डिस्कस करके लोगों को मजीद इस टॉपिक में एजुकेट नहीं करना चाहता वो सब की सब जो चीजें हैं उनका इस्तेमाल जो है वो इस्लाम के अंदर मना है यह ताल्लुक सिर्फ बीवियों के साथ हो सकता है या लौंडिया वाला मामला जो एब्सलूट हो चुका है वो इधर एक भाई आए थे वो कह रहे थे ये जो हमारे घरों में काम करती हैं ये क्या लौंडिया होती है नहीं ये लौंडिया
नहीं है ये आपके मुलाजिम है ये उस कैटेगरी में फॉल नहीं करती और मैंने सुना है अरब मुल्कों में वो फिलीपाइन की औरतें हैं तो उनके उन्होने वही समझा हुआ है यहां पे भी हमारे केपी से भी लोग वो खरीद के ले आते हैं औरतों को वो वहां पे एक ट्रेडीशन है वो निकाह किया जाता है वो उस तरह नहीं होता कि पैसे के बदले उनको खरीदा जाता है ये मैंने इशरत गुफ्तगू कर दी है अल्लाह ताला से दुआ है जो हक बात मैंने कही अल्लाह ताला हमारे दिलों में रासक फरमाए अगर जज्बात में मेरे
मुंह से कोई गलत बात निकल गई तो अल्लाह ताला हमारे दिलों ही से उसे माफ कर दे हमें मुआफ भी फरमा दे हमें सुत की ताली मात पर अमल करके दूसरे भाईयों तक पहुचाने की तौफीक अता फरमाए सुभान अलाला इला इला