जो बड़े होते हैं उन्हें ह्यूमन बिहेवियर के बारे में ऐसा क्या पता होता है जो कॉमन लोगों को नहीं पता। आर इज इक्वल टू आई। रिलेशन डिपेंड्स अपॉन इंटरेस्ट। कि भैया लव जैसी कोई चीज नहीं होती। पावर होती है। कल एक लड़का मुझसे बोला मैं बहुत दुखी हूं। सिगरेट पी रहा हूं। क्यों? कहा मेरी गर्लफ्रेंड चली गई। मैंने कहा दूसरी बना ले। वो तुझे मैसेज देके गई कि तू कमजोर आदमी है। ताकतवर आदमी को कौन छोड़ता है? हमेशा कमजोर लोग छोड़े जाते हैं। तो एक नॉर्मल 20 ईयर ओल्ड कैसे कर सकता है? पावर जनरेट। आपका
मन आपका गुलाम होना चाहिए। मालिक कौन? जो खुद को डिसिप्लिन रखना जानता हो और नौकर कौन जिसको जबरदस्ती डिसिप्लिन रखा जाता है। पैसे से पावर आता है कि खुशी आती है। खुशी आएगी आनंद नहीं आएगा। अब एक क्लर्क का अगर मन बेचैन हुआ तो वो टीवी खोल के बैठ जाएगा। लेकिन जिसके पास पैसा है और मन बेचैन हुआ 40 लोग आपके साथ बैठ के आपकी सिर्फ कहानियां सुन रहे हैं। अब उनको पता है आप झूठ बोल रहे हो कि भैया एक बार जंगल में गए और चीता सामने पड़ा और एक चांटा मारे चीता को। उसको
पता है कि तुम कुत्ते को नहीं मार सकते हो चांटा। लेकिन लोग तुरंत उसमें से एक खड़ा हो के बोलेगा कि भैया हां पापा बता रहे थे जब आप पापा भी आपके साथ गए थे। ये काम करता है पैसा। कौन ज्यादा माइंड गेम्स खेलता है? लड़कियां कि लड़के? लड़कियां जब पहली बार किसी के अफेयर में पड़ती हैं तब वो माइंड गेम नहीं करती। जब वो पहली बार धोखा खाती हैं तब लड़कियां बहुत खतरनाक। आज तो नीले वाले ड्रम में बैठा दे रहे हैं। अमेरिका चाइना के आमने सामने किधर खड़े हुए हैं? ये तो हमसे बहुत
आगे। इंडिया सुपर पावर थी जब हमारे पास तक्षशिला और नालंदा जैसी यूनिवर्सिटीज थी। आज हमारे बच्चे चाइना पढ़ने जा रहे हैं। हम कैसे पावर हो सकते हैं? चाइना के ऐसा क्या है जो हमारे पास नहीं है। टेक्नोलॉजी है। उन्होंने बड़ा अच्छा काम किया। नो कास्ट, नो रिलीजन, नो रीजन। कोई मेंशन नहीं करेगा। एंड ऑफ पर्सनल आइडेंटिटीज। इंडिया को सुपर पावर बनने से भी क्या रोक? इकॉनमी इक्वल टू एंपायर। तो जब तक भारत को समझ में नहीं आएगा तब तक भारत सुपर पावर नहीं बनेगा। हम किससे कहा कंपेयर करते रहे पाकिस्तान से? हमने गलत आदमी से
कंपेयर ही करना शुरू कर दिया। इंडिया का सबसे बड़ा जिओपॉलिटिकल ब्लंडर कौन सा लगता है? [संगीत] जब हम कुछ भी डिलीवर करवाते हैं या किसी से मंगवाते हैं। सबसे बड़ा स्ट्रेस होता है कि डिलीवरी पार्टनर रिलायबल है या नहीं? क्या सामान सेफ रहेगा? ट्रैक कैसे होगा? और अगर कुछ अर्जेंट हो तो स्ट्रेस और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इसीलिए आई यूज पोर्टर पोर्टर की वेरीिफाइड डिलीवरी पार्टनर्स पे आप हमेशा डिपेंड कर सकते हैं फॉर रिलायबिलिटी ताकि आपको वो साइकोलॉजिकल सेफ्टी मिले कि हर डिलीवरी सेफ होगी। और अब पोर्टर ने ल्च किया है स्कूटर फॉर स्मॉल
डिलीवरीज दैट नीड एक्स्ट्रा स्पेस एंड एक्स्ट्रा केयर। चाहे बेकरीज के केक बॉक्सेस हो, हार्डवेयर शॉप्स के सामान हो या ऑफिसेस के डॉक्यूमेंट्स। पोर्टर स्कूटर सेफली डिलीवर करता है अक्रॉस द सिटी। तो अब डिलीवरी है हो जाएगा विद पोर्ट। क्लिक द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन टू नो मोर। और साइकोलॉजी की अंडरस्टैंडिंग सिर्फ लॉजिस्टिक्स में ही नहीं बट लाइफ में भी बहुत इंपॉर्टेंट है। और इस डेप्थ को हमारे आज के गेस्ट भी समझते हैं। अवध ओजा अ टीचर एंड मोटिवेशनल स्पीकर। वो जानते हैं कैसे सिस्टम अंडरस्टैंड करके आप पावर होल्ड कर सकते हैं और साइकोलॉजी यूज करके
अपना काम कैसे करवा सकते हैं। आज हमने उनसे जाना लव और पावर में क्या इंपॉर्टेंट है? एक 20 ईयर ओल्ड पावर कैसे बिल्ड कर सकता है? इंडिया सुपर पावर कब बनेगा? इंडियन सोसाइटी का माइंडसेट कैसे डेवलप हुआ? और साइकोलॉजिकली डेंजरस बनने के लिए कैसा माइंडसेट होना चाहिए। यह एपिसोड एंड तक जरूर देखना और मुझे बताना कि आपने इस एपिसोड से क्या सीखा। कौन सा ऐसा ह्यूमन इमोशन है जो इट्स इट्स द मोस्ट डेंजरस इमोशन जो लोग कंट्रोल नहीं कर पाते जो हर इंसान के लिए सेम है। बड़े से बड़े छोटे से छोटे के लिए मैक्सिमम
लोग उसे कंट्रोल नहीं कर पाते। बेसिक इंस्टेक्ट वो जो सेक्स का फरवर है ना हमारी बॉडी में दो चीजें हैं। एक मन एक कॉन्शियस। हम मन भी दिखाई नहीं पड़ता और कॉन्शियस भी दिखाई नहीं पड़ती। लेकिन मन आंख बंद करने पे दिखाई पड़ता है। इसलिए दुनिया में जितनी भी पूजा पद्धतियां हैं सब आंख बंद करके हैं। ये जो मन है इसको भोजन है बेहोशी। शराब कोई मोटिवेशन नहीं चाहिए। सेक्स कोई मोटिवेशन नहीं चाहिए। मूवी कोई मोटिवेशन नहीं चाहिए। चाहिए ही नहीं। जब ले आओ तब तैयार है। लेकिन पढ़ाई के लिए मोटिवेशन चाहिए। योग के लिए
मोटिवेशन चाहिए। काम करने के लिए चाहिए। ध्यान के लिए मोटिवेशन चाहिए। अब हर सेंस पावरफुल है। मन से जुड़िए। जबान पावरफुल है, आंख पावरफुल है, नाक। सेक्स इज अ एक्टिविटी जिसमें सारी सेंसेस कंबाइंड हो जाती हैं। इसलिए वो इमोशन बहुत पावरफुल हो जाता है। एक सेंस को कंट्रोल करना मुश्किल है। डायबिटीज के जो पेशेंट हैं कितने परेशान होते हैं बेचारे। क्रेविंग हम कुछ तो रोने लगते हैं। मेरी मदद इन लॉ वो रोने लगती हैं कि भैया थोड़ा सा चावल खिला दो। मर जाएंगे भैया। इतनी क्रेविंग होती है। तो जब एक सेंस इतनी पावरफुल है तो
जिस क्रिया में सारी सेंसेस मिल जाती हैं। वो बहुत पावरफुल हो जाती है। तो अधिकतर लोग बर्बाद उसी के चक्कर में जाते हैं। बर्बाद नहीं होते। बड़ा ये वो उससे भी अच्छा पॉइंट है। बर्बाद नहीं होते। एनीथिंग व्हिच क्रिएट्स थॉटलेसनेस इन यू इज़ हैप्पीनेस। क्लियर माइंड और कोई थॉट नहीं है। थॉट ही नहीं है। जैसे दुबई फ्रेम गए हो? अच्छा। उन्होंने क्या किया? 100 मंजिल का एक फ्रेम बनाया। हां। उस 100 मंजिल पर उन्होंने एक शीशे का प्लेट रखा है ऐसे। नाउ व्हेन यू विल मूव ऑन 100 फ्लो ऑन अ वाइट ग्लास यू विल सी
डाउन हम तो मन तो तुरंत रुक जाएगा हम तो मजा आएगा हम यू गौर करो जहांजहां तुम्हारे विचार रुकते हैं वहां वहां आपको मजा आता है। हम जैसे आप मूवी देख रहे हैं और आपके विचार गायब हो गए तो आपको 3 घंटे बाद पता चलेगा कि ये अच्छा खत्म हो गई मूवी। हां दिस इज हैप्पीनेस। हैप्पीनेस इज बेसिकली थॉटलेसनेस। नाइस। तो जहांजहां थॉटलेसनेस पैदा होती है वहां वहां सुख पैदा होता है। हम अनजाने में उसको पकड़ लेते हैं जाके। हम अब सेक्स ने थॉटलेसनेस पैदा की। अब 20 साल के बाद जिंदगी में चैलेंजेस शुरू होते
हैं। एनीवन हुस विदाउट स्ट्रेस विल नेवर थिंक अबाउट सेक्स विल नेवर थिंक अबाउट लकर नथिंग। जहां से स्ट्रेस शुरू होता है। 11th क्लास। अब पापा ने कहना शुरू किया कि देखो भैया 4 साल बाद हमारा रिटायरमेंट है। दो बहनों की शादी करनी है भैया। जल्दी से स्टेबल हो जाओ। भैया अब हम नहीं धो पा रहे हैं। स्ट्रेस पढ़ाई पापा परिवार जिंदगी। उसी में बाहर दोस्तों ने कहा कि टेक वन रिलैक्स वेरीेंट। और मार दिया उसने। निकोटीन ने ब्लड फ्लो को शांत कर दिया। हम तो अब जब भी वो परेशान होगा वो सिगरेट पिएगा। ये सारे
नशे का खेल 11 से शुरू होता है। हम क्योंकि वहीं से चैलेंज शुरू होता है। तो हर वो चीज जो आपको खुशी देती है आप उससे बंद जाते हो अनजाने में क्योंकि वो आपको थॉटलेस कर रही है। झूले थॉटलेस ही तो करते हैं और भाई स्पीड थ्रिल्स बट किल्स क्योंकि स्पीड में जितनी स्पीड आप जाओगे थॉटलेसनेस होते चले जाओगे। तो सबसे पावरफुल इमोशन है सेक्स क्योंकि वह तुरंत थॉटलेस करती है तुरंत बट बर्बाद करता है क्या डिस्ट्रैक्ट हां बर्बाद कैसे करता है आपने उसे पकड़ लिया आप उसको नहीं अनजाने में पकड़ रहे हो आप सुख
खोज रहे हो आप शांत होना चाहते हो कुछ लोग सुबह एक आदमी ने एक शराब के दुकान मालिक को फोन किया कहा भैया आपकी दुकान सुबह के कब खुलेगी बोले भैया 9:00 बजे खुलेगी फिर फोन किया उसने एक घंटे बाद 11:00 बजे रात में 12:00 बजे फोन किया। कहा कब खुले? कहा भैया 9:00 बजे खुलेगी। फिर उसने 1:00 बजे फ़ किया। कहा भैया आपकी दुकान कब खुलेगी? उसने कहा भैया बोल दिए 9:00 बजे खुलेगी। तुम बार-बार फ़ क्यों कर रहे हो यार? उसने कहा भैया मैं गलती से आपके दुकान में बंद हो गया हूं। वो
शराब की दुकान का मालिक भागते हुए आया। उसने दुकान खोला। जैसे उस दुकान खोल के अंदर गया पीछे से एक आदमी भागते हुए आया। कहा भैया खोल दी हो तेरी बोतल दे दी। मतलब शराब एक ऐसी चीज है जो कि मेरा एक्सपीरियंस है। उसमें उसका टेस्ट ही ऐसा नहीं कि उसे पिया जाए। उसका परिणाम ऐसा है कि उसे पिया जाए। भाई आप खीर खाते हो क्योंकि टेस्ट है। आप बिरयानी खाते हो क्योंकि टेस्ट है। चाय में भी थोड़ा बहुत टेस्ट है। चाय भी टेस्टी बनती है। हम पर शराब उसका परिणाम प्यारा है। वो थॉटलेस करती
है। और जितना ज्यादा थॉटलेस करती जाएगी इसलिए हर पैक के बाद चार पैक के बाद आदमी बोलेगा कि तेरा भाई तेरे लिए कुछ भी करेगा। और आठव पाक के बाद बोलेगा मैं बराक ओबामा और 12 पे तो है स्वर्ग में बैठा हुआ है वो कुछ भी कर रहा है तो ये चीजें क्या होती है सुख के चक्कर में लोग उसे भागने लगते हैं उसके पीछे वो पीछे भागना बर्बाद कर देता है अब इस कंट्री की एक अलग खास बात है इस कंट्री में जनरली 50 करोड़ लोग कायदे से रह सकते हैं 1 बिलियन 50 करोड़
हम हमारे पास जितना चैलेंज है उतना ब्रिटेन के आदमी के पास नहीं है हम हमारे पास ज्यादा है ट्रू दवा नहीं है खाना खाना नहीं है, दूध नहीं है, कुछ भी सही नहीं है। अब वहां जब चैलेंज ज्यादा है तो शक्ति भी तो ज्यादा चाहिए। हम तो अब अगर ये कंट्री ध्यान नहीं करेगी, योग नहीं करेगी तो फिर वो मारी जाएगी। फिर वो बहुत बुरा हश्र होगा उसका। जो लोग सक्सेसफुल होते हैं, बड़े बन जाते हैं वो लोग ऐसा क्या करते हैं कि वो कंट्रोल कर पाते हैं। कंट्रोल कोई नहीं करता। मैनेज कंट्रोल कोई करता
ही नहीं। पहला तरीका मेडिटेशन। हम मेडिटेशन। आपका मन स्ट्रेस फ्री है। आप उधर भागोगे। जब बेस्ट तरीका है ये बेस्ट मैं आ मैं आज यहां इस चैनल से सबको पूरे भारत को कह रहा हूं कि द कमिंग टाइम इज गोइंग टू बी अ वेरी टफ टाइम बहुत टफ हां इन इंडिया बिकॉज़ ऑफ़ पॉपुलेशन बहुत टफ टाइम होगा और चैलेंजेस बढ़ेंगी स्ट्रेस बढ़ेगा डिस्ट्रैक्शन सब कुछ बढ़ेगा और उसमें आपको ताकत चाहिए लड़ने के लिए तो व्हेनएवर यू विल बी इन स्ट्रेस इसका मतलब आपके थॉट प्रोसेस बहुत एक्टिव हो जाएंगे एक बैक थॉट आ रहा है अब
क्या होगा? नौकरी खत्म हो गई। ईएमआई कैसे देंगे? इकॉनमी क्रैश कर रही है। डिस्ट्रैक्शन और डिस्ट्रेस का मतलब क्या है? कि आपकी थॉट प्रोसेस बहुत तेज हो गई है। अब उस समय अगर आप ध्यान करते हो तो कितनी भी बुरी परिस्थिति हो आप थॉटलेसनेस स्थिति में बैठोगे। अगर आप चाहते हो कि आप खुश रहो तो आपको दूसरों को खुशी बांटनी पड़ेगी। मुझे तो लगता है कपिल शर्मा वैसे ही मस्त रहता होगा दिन भर। जो बंदा दूसरों को हंसा रहा है। आज लोगों ने दूसरों को हंसाना छोड़ दिया है। अगर आप किसी को हंसा रहे हो
तो उससे पहले तो आपको हंसना होगा। लोगों को मोटिवेट करो। कहानियां सुनाओ। हिम्मत दो लोगों को। तो जो बांटोगे वो तुम्हारे पास भी तो बढ़ेगा। आप किसी को मोटिवेशन की चार कहानियां सुना रहे हो। तो आप उसे सुना रहे हो। आप भी तो सुन रहे हो। और तीसरा बहुत प्यारा तरीका है। आप कोई कंस्ट्रक्टिव काम करो। गिटार बजाओ। कोई स्पोर्ट्स पकड़ लो। कुछ नहीं है। बच्चों को पढ़ाओ। आप सोसाइटी में रहते हो। 10 बच्चों को पढ़ाओ। तो ये तीन सबसे प्यारे काम हैं। व्हाट डू थिंक? ये सक्सेसफुल लोग जो होते हैं क्योंकि हम उनकी बात
करें जो बड़े होते हैं। उन्हें ह्यूमन बिहेवियर के बारे में ऐसा क्या पता होता है? जो कॉमन लोगों को नहीं पता हो। पहली चीज पता होता है r = i रिलेशन डिपेंड्स अपॉन इंटरेस्ट। उनके कांसेप्ट्स जिंदगी के बहुत क्लियर होते हैं। हम सिंपल कि भैया लव जैसी कोई चीज नहीं होती। पावर होती है। लव जैसी कोई चीज नहीं होती। पावर होती है। पावर होती है। नहीं तो रिक्शे वाले को भी गुलाब मिलते हैं यार वैलेंटाइन डे के दिन। उसका दिल नहीं होता। पिक्चरों में मजदूर को कि और ड्राइवर का अफेयर किसी मालकिन के बेटे से
होता है। बेटी से होता है। रियल लाइफ में कभी नहीं होता। होता ही नहीं। लव जैसी कोई चीज होती नहीं इस ब्रह्मांड में। सिंपल पावर होती है। मतलब भगवान मतलब क्या? लोग कहते हैं भैया हम भगवान को तन मन धन सब अर्पित तुमको। देखे हो? नहीं भैया देखे तो नहीं। लेकिन क्यों अर्पित तुमको? क्योंकि पावर है। ओमनीिसिएंट, ओमनीपोटेंट, ओमनीप्रेजेंट। यही तो गॉड की डेफिनेशन है। मुसलमान से पूछो किसको प्यार करते हो? जी अल्लाह को करते हैं। भले बेटे को मार रहा हो दिन भर। हिंदू से पूछो कहेगा भैया मैया श्री राम जी सियाराम बिना दुख
कौन हरे तो एक बार लक्ष्मी जी विष्णु भगवान ने कहा लक्ष्मी जी से कि देखो दुनिया में सब मेरा नाम दिन भर लेते रहते हैं। नारायण नारायण। लक्ष्मी जी ने कहा मेरी वजह से लेते हैं। अरे विष्णु जी ने कहा ऐसे थोड़ी बोले ऐसे ही है ना हो तो ट्राई करके देख लो। विष्णु जी ने कहा अच्छा कहा चलो आओ तो विष्णु जी पंडित जी का रूप लेकर आए सेठ जी के पास कि भैया हम कथा करना चाहते हैं। पंडित जी ने कहा एकदम कथा करिए सब प्रोवाइड कराते हैं। करिए कथा। कथा शुरू हुई। भीड़
आने लगी। भीड़ बैठी तो दो दिन बाद लक्ष्मी माता नीचे उतरी और एक बूढ़ी स्त्री बनकर एक लेडी के घर गई। वो भी कथा सुनने जा रही थी। मिटिया एक गिलास पानी पिला दो। कहां जा रहे हो? बोली कथा सुनने जा रहे हैं। अच्छा तो उसने पानी पिलाया तो वो जो गिलास था वो सोने का हो गया। अरे उसने कहा माता जी खाना भी हमारे यहां खा लो। भाड़ में गई कथा तो खाना भी खिलाया तो वो बाउल वगैरह भी सब सोने के हो गए। उस औरत ने जाके बताया कि यार एक औरत बाजार में
घूम रही है गांव में। वो जिस खाने में थाली में खाना खा रही है वो सोने का हो जा रहा है। हम आज हमारे घर आई थी। दूसरे दिन कोई औरत आई ही नहीं। तब उस बूढ़ी लेडी का इंतजार कर रही थी। वो तीन चार लोगों के घर और गई। उनकी भी ताली वाली सोने को हो गई। सेठ जी को पता चला जो पता करा रहे थे कि यार ऐसी ऐसी कहानी है तो बोले कहां है बूढ़ी माता? पता है फला फला घर में आज बैठी है तो गए कहे माता अब हमारे घर नहीं आई।
बोले आपके घर पंडित जी बैठे कथा कह रहे हैं। और जहां कथा होती है वहां मैं नहीं आती हूं। अरे बोले माता जी कैसी बातें कर रहे हो? सेठ जी भागते हुए आए। पंडित जी के महाराज आप जाओ हो गई कथा। तो लक्ष्मी जी ने कहा कि देखा यह जो नीचे नारायण नारायण चल रहा है यह मेरी वजह से चल रहा है। ये जो छोटी-छोटी बातें हैं कल मैं क्लास ले कल की घटना है। कल एक लड़का मुझसे बोला सर मेरा मैं बहुत दुखी हूं। मैं कुछ कर नहीं पा रहा हूं। सिगरेट पी रहा हूं।
मैंने कहा अच्छा क्यों? कहा मेरी गर्लफ्रेंड चली गई। है ना? दूसरी बना ले। अरे सर ऐसे कैसे? मैंने कहा तेरा प्यार अभी तेरे पास है ना? हां है दूसरे को दे दे। तेरा प्यार खत्म हो गया वो तो बात ही खत्म हो गई। वो चली गई जा रहा है। वो तुझे मैसेज देके गई कि तू कमजोर आदमी है। ताकतवर आदमी को कौन छोड़ता है? हमेशा कमजोर लोग छोड़े जाते हैं। ताकतवर आदमी को कोई नहीं छोड़ता। ये दिखाई पड़ने वाली चीजें हैं। ये रोने की चीजें हैं। ये दिखाई पड़ती है चीजें। क्यों इतना परेशान होना? क्यों
इतना टेंशन लेना? यहां लव जैसी कोई चीज नहीं। आप जितने ताकतवर हो आपको उतना प्रेम मिलेगा। कभी किडनी पे गाना सुना है? लीवर पे, पैंक्रियास पे। सारे गाने दिल पे हैं। किडनी फेल कर जाए रिप्लेस हो जाएगी। लीवर रिप्लेस हो जाएगा। पैंक्रिया ठीक हो जाएगी। लेकिन अगर हार्ट फेल किया तो आदमी खत्म। जिसकी जितनी यूटिलिटी उसकी उतनी कीमत। सिंपल। तो प्यार उसी से होगा जो पावरफुल है। सिंपल। तो पावरलेस लोगों की वैल्यू नहीं है कुछ। हां कुछ नहीं। उनके साथ तो लोग सिंपैथी करते हैं कि भैया बेचारा तो जो पावरफुल है वही अट्रैक्ट कर पाएगा।
पावर से लोग जुड़ना चाहते हैं ना। पावर आनंद है। हां मतलब बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वही बने हैं जो जिससे आपको लगता है कि ये मेरे बराबर या मेरे लेवल को बढ़ाता है। ये भाई जब अगर वो वैश जो होता है हम येलो कलर का होता है ना वैश? तो जब वो घर में हाईव लगाता है लोग तोड़ देते हैं क्योंकि वो स्टिंग करता है। जब मधुमक्खी हाईव लगाती है लोग रहने देते हैं। स्टिंग वो भी करती है लेकिन वो शहद देती है। तो जहां शहद बहेगा वो स्टिंग भी मारेगा तो लोग बर्दाश्त करेंगे। ये छोटे-छोटे कांसेप्ट
हैं। जेनुइनली फील बिना पावर, बिना गिव एंड टेक, बिना पैसे के कोई रिश्ता नहीं बनेगा। अगर होता रिश्ता तो वृद्धा आश्रम में कौन पड़ा हुआ है? जिनकी लाइफ की यूटिलिटी खत्म हो गई। आज जो ओल्ड एज होम है उसमें कौन लोग हैं? जिनका अब कोई यूज़ नहीं रहा घर में। भाई गवर्नमेंट ने कहा कि अगर हाउस 80 प्लस के आदमी के नाम पे है तो हम हाउस टैक्स नहीं लेंगे। तो वो स्टेप क्या था कि लोगों को ओल्ड एज होम जाने से बचाओ। इनकी यूटिलिटी बढ़ाओ। अगर किसी आदमी को ₹1 लाख महीने पेंशन मिलती हो,
कौन बच्चा उसे जाकर ओल्ड एज होम में छोड़ के आएगा? ओल्ड एज होम इज अ प्लेस व्हिच शोज़ यू कि इफ यू लूज़ योर यूटिलिटी इन योर लाइफ योर गेम इज ओवर। तो एक नॉर्मल 20 ईयर ओल्ड कैसे कर सकता है? पावर जनरेट। पावर का मतलब यह है कि आपका सबसे पहला टारगेट यह होना चाहिए कि आपका मन आपका गुलाम होना चाहिए। यह पावर का पहला अनब्रेकेबल लॉ है। अगर आप उसके गुलाम हो तो आप नौकर हो। मालिक कौन? जो खुद को डिसिप्लिन रखना जानता हो। और नौकर कौन? जिसको जबरदस्ती डिसिप्लिन रखा जाता है। और
जिंदगी बंधी हुई है मन से। और मन का सबसे प्यारा फीचर है डिसिप्लिन। ही शुड शब्द दैट डिसिप्लिन। इसीलिए स्कूल का सबसे प्यारा पार्ट है डायरी एंड डिसिप्लिन। बट वंस पीपल कम आउट ऑफ़ द स्कूल दे लीव बोथ द थिंग्स। एंड दोज़ हु लीव डायरी एंड डिसिप्लिन दे बिकम क्लर्क। इंटरेस्टिंग। द बिगेस्ट गिफ्ट ऑफ एव्री स्कूल टू एव्री ह्यूमन बीइंग इज डायरी एंड डिसिप्लिन। बट इन आवर कंट्री होते ही नहीं है। पीपल वांट पीपल लव वायलेटिंग डिसिप्लिन इन जर्मनी दे लव डिसिप्लिन। आप खाना छोड़ दोगे थाली में। दे विल चार्ज यू एक्स्ट्रा मनी। आप यह
नहीं कह सकते कि मेरा थाली का खाना है। मैंने छोड़ दिया। और कहते हैं नहीं आपने कैसे छोड़ दिया? इट्स अ डिसरिस्पेक्ट टू आवर फार्मर्स। आपको पैसे देने पड़ेंगे इसके। बट इन इंडिया आवर गेम फेवरेट गेम इज वलेटिंग डिसिप्लिन कि भैया देखो यहां लिखा था अंदर मत आना। हम कूद के गए फिर बाहर चले आए। जहां फूल तोड़ना लिखा वहीं फूल तोड़ने का मजा है। मजा आता है? साइकोलॉजी है हमारी। इस कंट्री की बड़ी प्यारी साइकोलॉजी है। इस कंट्री में कानून तोड़ना है। एंजॉयमेंट है ना? इट्स अ मैटर ऑफ़ प्रेस्टीज। एक्चुअली बहुत लोगों को प्रेस्टीज
लगता है फॉर हां इट्स अ प्रेस्टीज दैट इज व्हाई द पीपल हु आर डिसिप्लिन इन दिस कंट्री बाय देमसेल्फ ये सोसाइटी में मेरी सोसाइटी है मतलब मैंने एक लेडी को देखा अ वो डॉग का स्कूप लेके टहलते हुए इट्स अ वेरी ग्रेट थिंग शी वास द फर्स्ट लेडी आई सॉ हर वि द स्कूप कि डॉग लेके घूम अक्सर लोग डॉग लेके घूमते हैं तो अब उसने पू कर दिया तो आप उठा लो बट पीपल नेवर पिक अप एंड व्हेन दे स्टार्ट दे आर रेडी टू फाइट विद यू। ये आपके बाप की कॉलोनी है। आपका है।
आप ही साफ कर दो। हम लोग तो मेंटेनेंस देते हैं। इट्स अ ड्यूटी ऑफ़ द सोसाइटी टू मेक द थिंग्स क्लीन। हमारा डॉग करेगा। अरे भैया आपकी सोसाइटी है। कितने छोटी सी चीज है। बट आई सॉ दैट लेडी। मैं बाद में उनसे मिलने गया। मैडम 2000 लोगों की सोसाइटी में एक लेडी है जो सेल्फ डिसिप्लिन को मानती है। डिसिप्लिन इज द संजीवनी ऑफ़ माइंड। इफ यू हैव, नो वन कैन स्टॉप यू टू बिकम द किंग। बिकॉज़ यू आर टॉकिंग पावर, यूटिलिटी। पैसे की बात करते हैं। पैसे क्या डिनोट करते है? पैसा इज बेसिकली द इन्वेंशन
ऑफ अर्बन सिविलाइजेशन। पैसा पैदा हुआ जब शहर पैदा हुआ। उससे पहले नहीं पैदा हुआ। हम्म। जैसे हम इंडियन हिस्ट्री को लें तो ऋग वैदिक पीरियड में करेंसी नहीं है क्योंकि ट्राइबल पीरियड है। लेटर वैदिक पीरियड में नहीं है। पर जैसे ही बुद्धा का पीरियड आता है सिक्स सेंचुरी बीसी वहां शहर पैदा होते हैं। जैसे अमेरिकन डॉलर है। जैपनीज़ियन है। लेकिन अफगानिस्तान की करेंसी नहीं है। तो जब शहर पैदा हुए, लग्जरी गुड्स पैदा हुए, तो ये हुआ कि यार लग्जरी गुड्स तो वाटर में चलेगा नहीं। भाई आप एक बाउल गेहूं से आइसक्रीम ले सकते हो। एक
बाउल गेहूं से आप मसाला ले सकते हो। लेकिन आप एक ट्रक गन्ना ले जाओ दुकान पे Apple के और कह दो हमें दो मैकबुक दे दो तो बवाल हो जाएगा। तो पैसा इज अ इन्वेंशन ऑफ़ अर्बनाइजेशन हम लग्जरी एंड लग्जरी इज अ नीड ऑफ सोफेस्टिकेशन कि भाई आपको मुंबई से लखनऊ जाना है। तो आप स्लीपर क्लास में भी जा सकते हो। आप जनरल में भी जा सकते हो। आप फर्स्ट एसी में भी जा सकते हो, प्लेन से भी जा सकते हो। तो जिसको भी लग्जरी चाहिए और इंसान को लग्जरी चाहिए। ये बात उस पूंजीवादी मन
ने पकड़ लिया कि आदमी को सुविधा दो और उससे पैसा लो। मनी इज द आउटकम ऑफ पावर। ऑफ पावर क्यों? जिसके पास शक्ति है उसके पास पैसा है। जो पावर से पैसा आता है। क्योंकि पैसे से पावर आता है। बाबा रामदेव पावर योगा का पावर है। ज्ञान का पावर है। आ रहा है पैसा। कोई प्रोडक्ट है उनके पास बना हुआ सांस बेचते हैं कपालभाति और गजब का प्रोडक्ट है परिणाम दे रहा है लोग कायदे से कर रहे हैं ऐसा कौन सा इंडिया का शहर है हम इंटरनेशनल योगा डे मनाने लगे जो पावर पैदा कर लेगा
उसके पास पैसा अपने आप आएगा पैसे से पावर आता है कि खुशी आती है खुशी आएगी आनंद नहीं आएगा खुशी कैसे आएगी आपका मन जैसे ही बेचैन हुआ। अब एक क्लर्क का अगर मन बेचैन हुआ तो वो टीवी खोल के बैठ जाएगा। उसके पास तो एक ही साधन है। हम अगर टीवी नहीं खोलेगा तो पत्नी है तो पत्नी ले लेगा वो। भाई पॉपुलेशन बढ़ने का एक कारण ये भी माना गरीबी भी एक कारण माना जाता है कि भाई रिकक्रिएशन के बहुत ज्यादा साधन नहीं है। तो भाई सेक्सीी उनके लिए रिकक्रिएशन है। हम लेकिन जिसके पास
पैसा है और मन बेचैन हुआ। उसने तो बैग उठाया सीधे स्विट्जरलैंड पहुंचा। तो जितना पैसा आपको पैसा क्या हेल्प करेगा? आपको बिजी रखने में हेल्प करेगा। आप गोवा के कैसीनो में बैठ जाओगे। आप थाईलैंड के मसाज पार्लर में बैठ जाओगे। आप दुबई के बुर्ज खलीफा में बैठ के कॉफी पी रहे हो। 40 लोग आपके साथ बैठ के आपकी सिर्फ कहानियां सुन रहे हैं। अब उनको पता है आप झूठ बोल रहे हो। कि भैया एक बार जंगल में गए और चीता सामने पड़ा और एक चांटा मारे चीता को। उसको पता है कि तुम कुत्ते को नहीं
मार सकते हो चांटा। लेकिन लोग तुरंत उसमें से एक खड़ा हो के बोलेगा कि भैया हां पापा बता रहे थे जब आप पापा भी आपके साथ गए थे भाई उसको मजा नहीं आ रहा है कि भ मैं झूठ बोल रहा हूं। तुम काहे खड़े होकर झूठ बोल रहे हो? उसको पता है मैं झूठ बोल रहा हूं। ये काम करता है पैसा। आपको लोनली नहीं होने देता। पैसे में इतनी ताकत है। वो आपको कभी लोनली नहीं होने देगा। यू विल बी ऑलवेज सराउंडेड बाय एवरीथिंग यू नीड। कौन ज्यादा माइंड गेम्स खेलता है? लड़कियां कि लड़के? लड़कियां
जब पहली बार किसी के अफेयर में पड़ती हैं तब वो माइंड गेम नहीं करती। बिल्कुल नहीं खेलती। तब वो वाकई में इमोशनली अटैच होती हैं लड़कों से। जब वह पहली बार धोखा खाती हैं जैसे फिजिकल रिलेशन हो गए और फिर लड़के ने पैसरा दिया ऐसा है वैसा है फलाना धमाका तब उन्हें थोड़ा सा झटका लगता है कि यार बताओ यार ठीक है जब वही घटना दोबारा रिपीट होती है दोबारा रिपीट होती है तब लड़कियां बहुत खतरनाक हो जाती है तो जहां तक दिमाग का सवाल है दोनों लगाते हैं ना कोई ज्यादा लगाता है ना कोई
कम लगाता है अब सिर्फ उसमें डिसाइडिंग फैक्टर यह होता है कि दोनों में से ज्यादा मक्कार कौन है? मैच्योर कौन है? कौन किसके साथ क्यों आया है? जैसे कोचिंगें जब शुरू होती हैं तो लोग लड़के एक दूसरे का बड़ा केयर करते हैं लड़के लड़कियां कि अरे खाना खा लिया। तुम्हारा टिफिन अच्छा आता है। यू गॉट एनसीईआरटी? नोट्स बनते हैं, तो केयर। केयर फिर अफेयर में टर्न हो जाता है। लेकिन अफेयर शादी में टर्न होता है। ये सिलेक्शन पे डिपेंड करता है। बाकी किसी चीज पर डिपेंड नहीं करता। तो लड़कियों का जो पहला स्टेप होता है
वो तो इमोशनल होता है। पर धीरे-धीरे उन्हें समझ में आता है कि यार कोई इमोशन का कोई गेम नहीं है दुनिया में। भाई औरतें आधा सन्यासी होती हैं। सन्यासी कौन? जो अपना घर छोड़ दे। वो सन्यासी और औरतें शादी के वक्त अपना घर छोड़ के आती हैं। दैट मींस दे आर हाफ सन्यासी। अब वो हाफ सन्यासी जब आपके घर में आया और बाहर गोली चली और आप चारपाई के नीचे घुस गए तो वो डिसपॉइंट नहीं हुई कि अरे तू तो मेरे घर घोड़े पे बैठ गया था तलवार वलवार लगा के 100 लोग लेके और तू
इसके नीचे जा रहा है औरतों को सबसे बड़ा दर्द होता है जब आप उनके ऊपर शक करते हो आप उनका मोबाइल चेक करते हो ये सब आदमियों को नहीं करना चाहिए क्योंकि जहां पावर है वहां वुमन है भाई पार्वती जी शंकर जी के साथ जा ही नहीं सकती। भाई सीता जी को पता था कि मेरा आदमी भगवान है। क्लियर थी इस बात पे वो। तब उन्होंने राम का त्याग नहीं किया। 14 साल उनके साथ जंगल में रही। आज तो नीले वाले ड्रम में बैठा दे रही। आपने किसी का घर छुड़वाया है तो किसी ताकत पर
तो छुड़ाओगे। आपके पास वो ताकत ही नहीं है। वजह यह है। कि हमारे देश में तीन तरह के लड़के होते हैं। एक चतुर्लिंगम की तरह। किसकी तरह? चतुर्लिंगम की तरह जिन्होंने सिर्फ रटा है जिंदगी भर जो चमत्कार का कर देते हैं। उनका क्रिएटिव माइंड है ही नहीं। फिर एक राजू की तरह के लड़के हैं। जिनको जिंदगी में सिर्फ बहन की शादी करवानी है, नौकरी पाना है, जीना है। एक फरहान टाइप का लड़का है। जिसको अपने पापा का सपना पूरा करना है और उसकी और उसके पापा की आंतरिक कला चल रही है। रेंचो बहुत कम पैदा
हो रहे हैं इस कंट्री में। क्यों? उस मॉडल की एजुकेशन ही नहीं। हम सोचना ही नहीं सिखाते अपने बच्चों को। हम अपने बच्चों को परसेंटेज लाना सिखाते हैं। आपको लग रहा है कि लड़के सॉफ्ट हो गए। कमजोर हो गए। कमजोर हो गए। जनरेशन खा के ये लोग इनको ज्वार की रोटी खानी चाहिए। बाजरे की रोटी खानी चाहिए। 1000 दंड बैठक मानना चाहिए। कम से कम 50 सूर्य नमस्कार करना चाहिए। ताकत ही तो है। तो मेंटली जो धनुष तोड़ेगा सीता जी उसी के साथ जाएंगी। पता नहीं लोग कब सीखेंगे इस बात को। ये डीओ लगा रहे
हैं। अब वो डीओ का ऐड आ रहा है कि एक लड़का कॉलेज जा रहा है। उससे कोई लड़की कॉलेज में बात नहीं कर रही। दूसरे दिन वो एक डीओ लगा के जा रहा है। जैसे ही डीओ लगा रहा है रास्ते में परियां गिर रही है। ए जाहिल ऐसा कहीं होता है वो 500 मीटर चलता है कहता है सर बहुत अंदर से सर नहीं चल पा रहे सर इनके साथ स्त्रियां रहेंगी इनके साथ कौन रहेगा बताओ यार अरे जिम खुले चारों तरफ कहीं नहीं जा सकते जिम ही चले जाओ यार कितनी प्यारी जगह है जिम योग
नहीं कर सकते हो ध्यान नहीं कर सकते तो जिम तो चले जाओ एक घंटा हर लड़के को जिम देना ही चाहिए। मैं तो कहता हूं तीन जगह जाओ। एक लाइब्रेरी कुछ सोचने को मिलेगा। कोई विज़ मिलेगा। नवेल्स पढ़ो। नवेल भी अजीब अजीब सी पढ़ रहे हैं। पहले लोग नवेल्स लिखते थे तो थीम होता था। हिस्ट्री का होता था। सोसाइटी का होता था। थीम्स होती थी। जैसे चित्रलेखा है। थीम है। वुमन थीम सेक्स थीम है उसकी। अब पढ़ना ही नहीं है तो दिमाग विकसित कैसे होगा? तो मैं कहता हूं लाइब्रेरी जाओ, जिम जाओ और मंदिर जाओ।
मंदिर जाओगे ध्यान करोगे। आध्यात्मिक ताकत बढ़ेगी। ये जाते ही नहीं। ये तो फ्री की शर्ट पहनना चाहते हैं। मैं एक शादी में गया। हम अभी रिसेंट की बात है। 5 6 महीने पहले की बात है। मैं शादी में गया था। एक लड़का जो है वो सूट पहना हुआ था। हम और फ्री का पहना था और इनका जूता पहना हुआ था। और मैं तो यही स्केचर पहना हुआ था 4 5000 का इलेक्शन में मुझे वैसे भी ऐसा जूता चाहिए था जो खोलना उतारना पड़े। आया बोला सर मैंने कहा हां एक फोटो ले ले। देखा मैंने कहा
मैंने कहा कि सूट पहने हो मैंने कहा जला दो कहा क्यों सर अब मैंने कहा मैं रामराज की शर्ट पहना हूं ₹100 की और तुम ये कम से कम डेढ़ दो लाख का पहने हो जूता तुम्हारा ₹80 एक लाख से कम नहीं होगा कहा जी मैंने कहा जब इतनी कीमत तुमको सामाजिक वैल्यू नहीं दिला पा रही आजकल के कवर बड़े प्यारे हैं अंदर कुछ है ही नहीं बड़ा चमकीला सा कवर लगा रखा है चमकता होगा। जैसे ही डब्बा खोलो तो जो चिप्स का पैकेट होता है ना इतना बड़ा पैकेट उसमें 12 चिप्स गिन के निकलती
बाकी हवा निकलती है। वही हाल इन युवाओं का है। इनको अपने आप को अंदर से ताकतवर करना पड़ेगा। कोई ऑप्शन नहीं है। गोंडा की बातें बताओ दो तीन। गोंडा इज अ रूरल सिटी। एंड द मोस्टेंट फीचर इज़ इट्स अ फ्यूडल सिटी। फ्यूडलिज्म इज़ स्टिल अलाइव। ओके एक्सप्लेन फ्यूडलिज्म मतलब फ्यूडलिज्म मतलब लैंडेड अरिस्टोक्रेसी इज़ डोमिनेंट लाइक मुंबई कैपिटलिस्ट आर डोमिनेंट अंबानी इज़ हियर अडानी इज़ हियर बट गोंडा इज़ अ प्लेस वेयर लैंडेड एरिस्टोक्रेसी पीपल हैव ह्यूज ट्रैक्स ऑफ़ लैंड सो यू विल फाइंड इलिटरेसी यू विल फाइंड लैंडलेस लेबरर्स इफ यू सी अफगानिस्तान टुडे अफगानिस्तान इ हैज़
अ गुड एग्जांपल ऑफ़ यूलिज्म। हम मनी इज मिसिंग हम लैंड बहुत है लैंड बहुत है और लैंडेड एरिस्टोक्रेसी डोमिनेंट है जैसे यहां इंडस्ट्रियस डोमिनेंट है वहां लैंडेड एरिस्टोक्रेसी डोमिनेंट है कि जिसके जमीन है वही राजा है वही राजा है दिस इज द फीचर ऑफ यूपी बिहार बंगाल एंड ऑल मैक्सिमम लेकिन स्टेट्स में इंडिया में यही सीन है ना एक्चुअली हमारे यहां राज रेवोल्यूशन नहीं हुआ मॉडर्न वर्ल्ड इज़ बेसिकली द आउटकम ऑफ रेवोलशंस हम फ्रेंच रेवोल्यूशन हम एंड ऑफ फ्यूडलिज्म बिगनिंग ऑफ पार्लियामेंट्री फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट अमेरिकन रेवोल्यूशन रशियन रेवोल्यूशन जहरशाही खत्म ड्यूमा द ओनली कंट्री इन
द वर्ल्ड व्हिच हैज़ नॉट गॉन थ्रू रेवोल्यूशन बट इज़ अ मॉडर्न कंट्री इज़ जापान बिकॉज़ दे हैव वंटरीली अबोलिश्ड फ्यूडलिज्म या फिर चाइना हम माओ इज़ द बिल्डर ऑफ़ मॉडर्न चाइना मार डाला सारे सामंतों को पकड़ पकड़ के तो ये जो हम मॉडर्न वर्ल्ड देख रहे हैं दिस वर्ल्ड इज द वर्ल्ड ऑफ कैपिटलिस्ट उसके सेंटर है मुंबई हम इट्स अ कैपिटलिस्ट प्लेस एवरीवन टॉक्स अबाउट मनी आपको सांस लेना है तो बोलेगा भैया देखो ₹100 लगेगा दैट्स व्हाई व्हेन पीपल कम फ्रॉम दिस इज़ व्हाट राज ठाकरे सेस हम कि डेली 40 ट्रेनें आती हैं उसमें लोग
आते हैं दे डोंट हैव एनीथिंग देयर ना हम तो यहां जब वो आते हैं तो एटलीस्ट पैसे बनाने की उम्मीद होती है व्हाई डू यू थिंक कि इंडिया में अभी अभी तक ऐसा एकदम रेवोल्यूशन नहीं आया पैसे बनाने का। एक्चुअली हुआ क्या कि व्हेन वी गॉट इंडिपेंडेंस हम तो हमारे सामने एक बहुत बड़ा खतरा था कि यार हमारे यहां क्लास स्ट्रगल हो जाएगा। हम कैपिटलिस्ट और वर्कर्स हम जमींदर्स एंड फार्मर्स। हम्म तो गांधी जी ने कहा यार क्लास स्ट्रगल होगा तो इनफेंट कंट्री है। कंट्री खत्म हो जाएगी। तो हम एक काम करते हैं। हम क्लास
कोऑपरेशन की बात करते हैं। भूदान मूवमेंट हम सर्वोदया मूवमेंट सबका साथ सबका विकास। तो हमने ये सोचा कि हम यार एक पॉजिटिव नोट पे चलेंगे। एक रशियन राइटर है। उसने किताब लिखी अन टू द लास्ट। ये बेसिकली उसकी थीम है। क्लास कोऑपरेशन। तो गांधी जी ने कहा यार इसी पे काम करते हैं और क्लास कोऑपरेशन करके हम आगे बढ़ते हैं। सब साथ में बढ़ेंगे। बढ़ेंगे। तो शुरुआत तो बड़ी अच्छी रही उसकी। बट स्लोली स्लोली इन फ्यूडल लॉट्स ने क्या किया? पॉलिटी अपने हाथ में ले ली। पॉलिटी इज द गार्डियन ऑफ़ इकॉनमी। हम जिसके हाथ में
पॉलिटी उसकी पॉलिसी हम और फिर इन फ्यूडल लॉर्ड्स को लगा कि यार वोट कैसे लिया जाए? तो डिवाइड एंड रूल तो कास्ट, रिलीजन, रीजन दे। द कॉमन पीपल फॉरगॉट दैट डेमोक्रेसी इज़ बेस्ड ऑन एजुकेशन, हेल्थ, एंप्लॉयमेंट। तो कंट्री गलत डायरेक्शन में जानी शुरू हो गई। और फिर तब से आज तक चेंज ही नहीं हुआ। अब जो हमारे बच्चे हैं जो आज 10थ में है दे आर एआई जनरेशन हम मतलब दे डोंट बिलीव इन फ्यूडलिज्म एंड लैंड एंड एंड सो ऑल तो आफ्टर मतलब जो 29 का इलेक्शन होगा उसके बाद का जो इलेक्शन होगा दैट विल
बी अ बिग चेंज इन इंडिया कास्ट पॉलिटिक्स नहीं होगी रिलीजन पॉलिटिक्स नहीं होगी वो एआई जनरेशन के लड़के हैं वो दे डोंट बिलीव इन ऑल दीज़ थिंग्स तो वो दैट इज अ गुड फ्यूचर फॉर इंडिया एक ना मैं एक स्टेटमेंट सुन रहा था किसी एंटरप्रेन्योर रखा था कि इंडिया एक सोशलिस्ट कंट्री है जिसने कैपिटलिज्म का मास्क पहन रखा है। एक्चुअली कहना बिल्कुल सही है क्योंकि सोशलिज्म के जो कांसेप्ट्स हैं वो ये है कि वेलफेयर ऑफ द सोसाइटी। अब हमारे जो सरकारी स्कूल है उसमें कौन पढ़ना चाहता है? हम सोशलिज्म तो वहां होगा ना कि भाई
डीएम का लड़का कलेक्टर का लड़का वो सरकारी स्कूल में पढ़ना चाहे। वो डीएम कलेक्टर सरकारी हॉस्पिटल में जाना चाहे। पर यहां पे तो सरकारी हॉस्पिटल में वही जाता है जिसके पास पैसे नहीं है। हम तो वेयर इज़ सोशलिज्म? तो वी गिव द स्लोगन ऑफ़ सोशलिज्म बट वी जनरली बिलीव इन कैपिटलिज्म। या हां। तो हर आदमी चाहता है कि भैया इसीलिए हमारे गांव में महाराष्ट्र में, यूपी में, बिहार में, पंजाब में स्कूल जो है गांव में उनका नाम है सेंट मैथ्यूस इंटरनेशनल स्कूल। गांव में क्योंकि उनको पता है कि यार यहां पे नाम अगर मैथ्यू होगा
तो लोग सोचेंगे इंटरनेशनल लिख दिया तो आएंगे लोग पैसे हैव यू सेंस कभी ऐसा कि अपनी कंट्री में थोड़े ना अमीर लोगों को पावरफुल लोगों को लोग हेट भी करते हैं। एक्चुअली पावरफुल लोगों को लोग अपनी कंट्री में नहीं हर जगह हेट करते हैं। रियली? उसकी वजह मैं बताऊं। देयर इज नो मनी फॉर मेहनत। हमारे देश में एक कहावत है जो बिल्कुल गलत है कि कर्म का फल मिलता है। नहीं ज्ञान का फल मिलता है। कर्म का फल मिलता तो रिक्शा वाला बहुत अमीर होता। हम कितनी मेहनत करता है वो। ज्ञान का फल है। जिसकी
समझ जितनी ज्यादा है उसके पास उतना ज्यादा पैसा है। समझ का पैसा है। एन आईडिया कैन चेंज योर लाइफ। ट्रू। मैं अगर मुकेश अंबानी को जाके बोलूं कि सर मैं आपको एक फार्मूला देता हूं और आपकी कमाई 100 करोड़ पर डे है वो 500 करोड़ पर डे हो जाएगी। आई विल बी गॉड फॉर हिम। अरे कहेगा ओझा जी बताओ कितने चौपर्स तुम्हारे नाम करवा दूं एंटीलिया आधी तुम्हारी। तो इसलिए हेट्रेट पैदा होती है। वो साइकोलॉजी है उसकी। ये साइकोलॉजी इट्स अ साइकोलॉजी कि वर्कर्स दे हेट कैपिटलिस्ट। इसीलिए फोर्ड ने अपने ऑफिस के सामने अपनी एक
मूर्ति लगवा रखी थी और अपने वर्करों से कह रखा था कि बेटा जब भी तुम्हारे तुम्हें मेरे ऊपर कोई गुस्सा आए तो इसको जूते से मारना इस मूर्ति को तो वो आदमी जब तक जिंदा था उसकी फैक्ट्री में कभी स्ट्राइक नहीं हुई बिकॉज़ वर्कर्स वर हैप्पी क्यों? क्योंकि वो जूते मारते थे। जूते मारते थे। उन्हें खुशी होती थी कि आज फोर्ट को 10 जूते मारे। दिस इज़ व्हाट साइकोलॉजी सेस कैथरेसिस। तो हम क्या करते हैं? अब हम सबसे तो जूते मरवा नहीं सकते। हम तो हम आईपीएल करवाते हैं। क्या करते हैं आप? आईपीएल करवाते हैं।
आईपीएल में क्या होता है कि जितनी वर्किंग क्लास है ये चिल्लाती है बेचारी जाके। एक चौवा पड़ा चिल्ला रही है। पड़ा चिल्ला रही है। विकेट गिरा चिल्ला रही है। तो व्हेन यू स्क्रीन कतारसिज्म। दैट इज कथार्सिज्म। रिलीज होता है अंदर। हां। तो यू स्क्रीन फॉर अ 2 मंथ्स इन अ ईयर एंड 10 मंथ्स यू वर्क। नहीं यार? रियली? पागल हो ही नहीं सकते। एंटरटेनमेंट। बहुत लोग बोलते हैं कि स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट पुराने राजा के जमानों से ये इसी के लिए करा जाता है कि पब्लिक का गुस्सा और जो अंदर उनका भरा हुआ है वो रिलीज
हो। एंटरटेनमेंट। दैट दैट वाज़ अ पॉइंट। इसका अलग पॉइंट ये है कि स्पोर्ट इज अ फॉर्म ऑफ़ मेडिटेशन। वाचिंग तो मजा ले रहा है। हां। दोज़ हु मतलब जो खेल रहा है क्योंकि जिसका होश ज्यादा होगा वो अच्छा खेलेगा। तेंदुलकर इज़ अ वेरी गुड एग्जांपल। कामली वाज़ अ वेरी गुड प्लेयर। पर उस आदमी का होश खो गया हम तो वो आदमी सफल नहीं हो पाया तो कमिंग बैक टू द हेट पॉइंट ठीक है तो आपको बस इसलिए लगता है कि लोग अपने आपको कंपेयर टाइम के बेसिस पे करते हैं हम इसीलिए वो हेट करते हैं
पैसे वालों को पैसे वालों से एक ऐसा सेंटीमेंट भी तो है कि लोगों को ऐसा लगता है कि जो अमीर बना है जो पावरफुल बना है ना उसने कुछ बदमाशी करी होगी सब करना चाहते हैं पर हिम्मत चाहिए चाहिए ना मतलब झूठ बोलना एक आर्ट है। हम सच बोलना आर्ट थोड़ी है। भाई इफ यू आर सेइंग कि सूरज चमकता है। ये तो सच है। सब मान लेंगे। बट इफ आई से कि द सन शाइ बिकॉज़ ऑफ़ द एक्सटर्नल पावर्स ऑफ़ अवर दोज़ एंड आई प्रूव इट एंड 1 बिलियन 50 करोड़ में से 70 करोड़ बिलीव
करने लगे। दैट इज टैलेंट। हां। अगर झूठ बोलना आर्ट है। हम चाहते सब हैं बोल नहीं पाते। क्योंकि झूठ बोलने के लिए कई शर्तें हैं। आपको आंख में आंख डाल के बोलना है। कॉन्फिडेंस होना चाहिए चेहरे पे। बहुत लोग कहते हैं भैया हम झूठ नहीं बोल पाते। क्योंकि वो कॉन्फिडेंस नहीं रख पाते हैं। वो ऐसा नहीं कि बोलना नहीं चाहते। चाहते हैं पर तो हर वो काम करने के लिए जिसको सोसाइटी प्रोहिबिट करती है उसके लिए हिम्मत चाहिए। हम आप बोल लेते हो झूठ। अरे मुझे तो शौक है बोलने का। आई लव लाइंग। मतलब मुझे
ऐसा लगता है कि यार जो काम दूसरे नहीं कर सकते वो तो करना ही चाहिए। हम तो हमारे टीचर्स बोलते थे हमसे बचपन में कि यार झूठ बोलने से पाप लगता है। हम तो मैंने कहा मैडम अगर ऐसा होता तो यह सारे पॉलिटिशियंस वगैरह सब कहां जाते? मैंने कहा मैम ये सारा ये सारी दुनिया झूठ पे चलती है और जिस दिन वो आदमी उस झूठ को डिकोड कर लेता है वो या तो बुद्ध हो जाता है या महावीर हो जाता है या कबीर हो जाता है बस वो डिकोड करने की बारी है परेशान तो वो
रहता है पर वो छोड़ता नहीं क्योंकि मजा भी आ रहा होता है जब उसे डिकोड कर ले जाता है कि यार मेरी पत्नी को अगर मेरी शक्ति खुशी नहीं दे सकती तो वो मेरी पत्नी नहीं है यानी हर वो आदमी जो मुझसे जुड़ा हुआ है वो वो किसी ना किसी बेनिफिट से जुड़ा हुआ है। जिस दिन वो इस बात को डिकोड कर लेता है कि आई हैव टू गिव बेनिफिट टू एवरीवन टू बी विद मी तो उसको लगता है कि नहीं यार इतना फालतू में जीने से क्या मतलब? तो वो एक पार्ट ऑफ़ साइकोलॉजी है।
मतलब इट्स ऑल अबाउट अंडरस्टैंडिंग द थिंग्स। हम ये पूरी जिंदगी सिर्फ एक शब्द पे चलती है। उस शब्द का नाम है विज़डम। हम द मोस्ट प्रेशियस वर्ड इन लाइफ। ट्रू। बट इसके लिए अदर साइड भी तो होता है जिसको जिसने डिकोड कर लिया एक तरीके का लय या एक तरीके की कि दुनिया में ये ट्रुथ क्या है वो एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा सक्सेसफुल भी हो जाता है ना मजा लेने लगता है मजा क्योंकि अब उसको समझ रहा है कि दुनिया का चक्कर कैसे चलता है तो अब वो ये सब त्यागने की जगह और चला रहा है उसको
पता है कि अगर सब मेरे से बेनिफिट की वजह से जुड़े हुए हैं तो मैं हर किसी को मिनिमम लेवल का बेनिफिट कैसे दूं ताकि सब जुड़े रहे और मैं बढ़ाते जाऊं कैसे लोग किसको कांसेप्ट बोलता हूं क्या इसी चीज को कासेप्ट करता था ना तो मैं कहता हूं देख भाई अगर तेरा बच्चा है और तू अपने बच्चे को डेली चॉकलेट नहीं देता तेरा नेबर देता है हम तो वो उसको पापा बोलेगा ये कंफर्म है सिंपल सा गेम है तो हर वो आदमी जिसको तुम मजा देते हो हम मतलब तुम घर पहुंचे और महीने के
लास्ट में 5 लाख मदर को 5 लाख फादर को तुम्हारी बहन मिलने आई 10 लाख उसको तो हर आदमी कहेगा कि भैया तो भगवान की तरह है इसको मैं कासेप्ट बोलता हूं कि अगर आप मजा दे सकते हो दूसरों को तो आप राजा हो नहीं तो फिर आप रोते रहो दुहाई देते रहो इस दुनिया में कोई अच्छा नहीं है एवरीवन हुस क्राइंग इन दिस वर्ल्ड इज लैकिंग द कांसेप्ट ऑफ लाइफ व्हाट इज कांसेप्ट ऑफ़ लाइफ यू शुड नो व्हाट इज फोटोसिंथेसिस इफ यू कैन डू फोटोसिंथेसिस इन एवरीवनस लाइफ एवरीवन मतलब उसके पास क्लोरोफिल तो होना
ही चाहिए हम सनलाइट तो वो तुम्हारी यूज़ करेगा लेकिन उसके पास क्लोरोफिल होना चाहिए कि वो उसको एनर्जी में कन्वर्ट कर सके। बेस लेवल पे एक्सप्लेन करो। नोइंग समवन एंड यूजिंग समवन बोथ आर वेरी डिफरेंट थिंग। तो जो पत्ते सूखे होते हैं वो क्लोरोफिल नहीं कर पाते। वो फोटोसिंथेसिस के लिए हरा पत्ता होना बहुत जरूरी है। और कुछ ओवर स्मार्ट होते हैं वो पिचर प्लांट होते हैं। फोटोसिंथेसिस भी करते हैं। कीड़े मकोड़ों को भी खा जाते हैं। हमें बाहर से कुछ नहीं पढ़ना होता। जैसे लोग कहते हैं ना ज्ञान के लिए ध्यान संतों के पास
कुछ नहीं है। आपको अवेकन देखना है। ये पूरी दुनिया एक ज्ञान है। बस हमें कॉन्शियस हो के चीजों को देखना है। डेजर्ट में बारिश नहीं होती क्योंकि वहां पेड़ नहीं है। हम यानी जहां पेड़ होंगे ऑक्सीजन होगा वहीं बारिश भी होगी। अब इसका क्या मतलब हुआ कि पूरी जिंदगी गिव एंड टेक पे चलती है। हम कितना प्यारा कांसेप्ट है। हम इसके लिए किताब पढ़ने की क्या जरूरत है? अगर आप कुछ दे नहीं सकते तो आपको कुछ मिलेगा। मिलेगा ही। बस यह सिंपल कांसेप्ट है और इसीलिए कुछ लोग गरीब रह जाते हैं और कुछ लोग अमीर
बन जाते। गरीब इज बेसिकली कि आप कोई गरीब होता नहीं है। अगर लोग गरीब पैसे की वजह से होते तो फिर लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री मतलब जिस गांव में वो थे जहां से वो स्कूल जाते थे तो डेली उनको पास पैसा नहीं होता था कि ना वाले को पैसे दें। तो डेली स्विम करके जाते थे। अब तैरने में तो थकान होती है। तो उनके गांव के ही लड़के इस बात को बहाना बनाते थे कि तैरते हैं तो थक जाते हैं तो फिर पढ़ाई नहीं होती। पर वो उसको दूसरे पर्सेक्टिव से देखते थे। बोलते थे तैरने
से एक्सरसाइज होती है। बॉडी फिट रहती है। चुस्ती आती है। अब उसी एक चीज को गांव के 10 लड़के बहाना बना लिए। साहब नहीं तैरेंगे। तैर के पढ़ने जाएंगे तो नहीं पढ़ पाएंगे। एक आदमी ने उसको पॉजिटिवली ले लिया। हम और पढ़ाई की उस आदमी ने। एंड दैट पर्सन बिकम्स प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया जैसे मेरा दोस्त था उसके फादर पॉलिटिशियन थे तो मैं उसके उसके फादर को देखता था कि लोग आते थे नमस्ते करते थे पैर छूते थे मैं अपने फादर को देखता था मैं बोलता था नहीं ये जो कहा जाता है अच्छा अच्छा है
सब बेकार की बातें हैं खेल तो कहीं कुछ और ही है ये तो ये तो बिल्कुल गलत बात सिखाई जाती है कि तुम झूठ नहीं बोलोगे या ईमानदारी से रहोगे लोग तुम्हारी इज्जत करेंगे मैंने कहा ना इसका आंसर कहीं और है हम तो वो चीजें धीरे धीरे धीरे एक्सपेरिमेंट करता रहा मैं देखता रहा ऑब्जर्व करता रहा तो चीजें अपने आप खुलनी शुरू हो गई कि नहीं गरीबी का पैसे से कुछ भी नहीं फॉर अ टाइम बीइंग ऐसा हो सकता है कि आपके पास पैसे ना हो वो एक अलग बात है बट यू आर नॉट गरीब
तो गरीबी का किससे लेना देना है पर्सपेक्टिव से हां गरीबी का लेना देना है यू डोंट हैव अ थॉट सोच नहीं है सोच नहीं है बाबा रामदेव स्टार्टेड ह योगिक कैरियर एस अ वेरी सिंपल सेंट ऑफ हरिद्वार हम वेरी सिंपल बट ही केम विद अ आईडिया 1991 एलपीजी इन इंडिया अर्बनाइजेशन शहर बिजनेस मनी तो शहर बिजनेस मनी वन साइड स्ट्रेस प्रेशर डिप्रेशन ऑन द अदर साइड दे आर द आउटकम्स ऑफ़ शहर बिज़नेस मनी एंड देन ही थिंक्स कि या दिस इज द राइट टाइम फॉर योगा एंड मेडिटेशन एंड ही गेट्स दैट आईडिया टुडे ही इज़
हैविंग फोर चॉपर्स एस फार एस आई नो एंड टू प्राइवेट जेट्स कैन यू इमेजिन ही हैज़ अ थॉट ही हैज़ अ विज़ और चार पर्सनल चौपर है और दो प्राइवेट जेट है। फोड़ दिया उन्होंने लाइफ में। डू यू थिंक कि जो अच्छे लोग होते हैं वो अमीर या पावरफुल नहीं बन सकते। थोड़े तुम्हें बदमाशी तो करनी पड़ेगी। हमारे समाज में जो लोग कमजोर होते हैं वो कहते हैं भैया हम झूठ नहीं बोलते। भैया हम बदमाशी नहीं करते। बदमाशी करनी है। मतलब स्ट्रेंथ रखनी है। ये कंट्री बेसिक कांसेप्ट्स को मिस करती है। भैया हम बदमाशी नहीं
करते। अच्छी बात है। पावर रखने से कौन मना कर रहा है? इसीलिए तो कंट्री पे हमेशा हमला हुआ है। इस कंट्री को 2000 साल से गुलाम बनाया गया। जो भी आता इस कंट्री पे कब्जा कर लेता है। क्यों? क्योंकि इस देश का आदमी कंफ्यूज्ड है। शक्ति पैदा करो। शक्ति पैदा करके अच्छे रहो। कैसे कर सकते हैं? भाई आप योग करो, ध्यान करो। हमारी कंट्री में कितनी सारी विधाएं हैं। योग गिव्स यू अ पावरफुल माइंड। योगा गिव्स यू अ पावरफुल बॉडी। फिर मार्शल आर्ट्स के स्किल्स हैं। पहले गांव में लड़के लाठी चलाना सीखते थे। लाठी ले
लोग चलते थे। बट इन सब से पैसे बनाने का क्या ट्रेंड? नहीं इफ यू हैव अ इनर पावर यू हैव अ मोर स्ट्रेंथ टू फाइट। जैसे मुंबई में जो मुंबई का इनबर्न होता है ये बड़ा रियल फैक्ट है कि मुंबई के जो लड़के पैदा हुए और जो बाहर से आए जो बाहर से आए वो बहुत सक्सेसफुल हुए। उनका रेश्यो ज्यादा है। उसकी वजह क्या है? गांव से आए तो लड़ने की क्षमता बहुत है। इसी पे रामधारी सिंह दिनकर ने एक लाइन लिखी बहुत प्यारी बहुत प्यारी मतलब वो बड़ी विजन विजनरी लाइन है सोचने वाली प्रसादों
के कम काब शिखर होते कबूतरों के ही घर। प्रसाद मतलब महल तो जो बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स हैं, विलास है, महल है उनमें जो बच्चे पल रहे हैं, वो कबूतर हैं। प्रसादों के कनकाब शिखर होते कबूतरों के ही घर। महलों में गरुड़ ना रहता है कंचन पर कभी ना सोता है। वो जो गांव का लड़का है वो खेत काट रहा है। मई की दोपहर में वो दिसंबर की ठंडक में गन्ने के खेत में पानी लगा रहा है। बोझ उठा रहा है। उसके संघर्ष करने की क्षमता ज्यादा है। तो जिसके संघर्ष करने की क्षमता ज्यादा है। अगर उसमें
थोड़ी सी मैच्योरिटी आ गई तो वो सक्सेसफुल हो जाएगा। वो फोड़ देगा। अपने फायदे के लिए थोड़ा छल कपट करते हो। उनको कुछ झूठ बातें बताते हो तो ये जो इंसान करता है उसको फिर अच्छा इंसान नहीं बोला जाता है ना तो अगर आप ये सब करते हो तभी बड़े बनोगे ऐसे आपको बोलना है नहीं नहीं नहीं ये कोई फार्मूला नहीं है बड़े बनने का अब इसके दो पर्सपेक्टिव है दो एक आप लोगों को खुलेआम हम कॉटन बता के फाइबर बेच रहे हो वो बेईमानी है हम यू फील ह्यूमैनिटी होनी चाहिए सब में ह्यूमैनिटी होनी
चाहिए बाकी तो यार बिजनेस की डेफिनेशन क्या है कि जो गंजों के देश में कंगा बेचा है। अब आपने कहा कि साहब चवनप्राश है हमारा। इसको खाने से आपके अंदर घोड़े जैसी ताकत आ जाएगी। हम चलो यार घोड़े जैसी ना आए कम से कम गधे जैसी भी तो आ जाए। जिसके चवनप्राश खा के चूहे जैसी भी ताकत ना आए। वो बेईमान वो दूर दूर होगा। भाई हम तो मान के चलते हैं ना कि यार 100% तो कुछ होगा। कोई जवाब नहीं। हां मान के चलते हैं। हम जैसे मैं कोचिंग देता हूं लड़कों को इसको पढ़ाते
हैं। तो मैं जहां मैं उनको बोलता हूं कि देख भाई 100% तो ना पढ़ा पाएंगे। हां। वो तो पक्का है। हम तो लड़के भी कहते हैं ठीक है सर कोई बात नहीं। तो जब मैं उनको 60% पढ़ाता हूं और एकदम शानदार कि साहब ऐसे पढ़ना है। जैसे मैं वर्ल्ड वॉर पढ़ाता हूं। मैं कहता हूं यार वर्ल्ड वॉर का मुंबई गया हो? हां सर। छोटा रजन दाऊद इब्राहिम के बारे में सुने हो? हां सर सुने। क्या था वो? सर वो डाल दे दो ना। अरे मैंने कहा वो वो भी वर्ल्ड वॉर है पर शहर के लेवल
पे है। मुंबई इकॉनमी 10,000 करोड़ की है। अब जो शहर पे राज करेगा वो 10,000 करोड़ की इकॉनमी पे उसका कब्जा होगा। तो ये जो मुंबई शहर में हो रहा है छोटा राजा दाऊद इब्राहिम यही वर्ल्ड के लेवल पे हो रहा है। हम पहले वर्ल्ड वॉर में ब्रिटेन चाहता था कि पूरी दुनिया मेरी बाजार रहे। जर्मनी ने कहा आधा तो हम भी लेंगे। बस हो गया गैंग वॉर। हम्म। तो अब तुम उसे मुंबई के लेवल पे देखोगे तो वो गैंग वॉर है। लेकिन वर्ल्ड लेवल पे देखोगे तो वो वर्ल्ड वॉर है। तो अब इस तरह
से मैं उनको विज़न देता हूं कि भाई ऐसे पढ़ना तो सर बस 60 बहुत है सर। अगर 20 का मैंने उन्हें नोट्स दे दिया तो उसपे वो खुश है। लेकिन अगर मैंने 100 के बजाय 20 पढ़ाया और 10 के नोट्स दिए तब फिर वो बेईमानी है। बेईमानी हो जाएगी। उससे आदमी को बचना चाहिए। आपको ऐसा लगता है कि जो जो टॉप पे होता है जो पावरफुल होता है वो मैनपुलेट करता है? बिना मैनपुलेट किए कोई टॉप पे पहुंच ही नहीं सकता। लॉ है ये। इसको मैं जैसे हमारे से कलाम साहब थे हम वो प्रेसिडेंट तो
बन गए। हम पर वो इलेक्शन लड़ते तो हार जाते। ऐसा मैं सोचता हूं। क्यों? मैनपुलेटर नहीं है ना। वो एक सी मतलब एपीजे कलाम वास अ सेंट। साइंटिस्ट सेंट साइंटिस्ट मतलब आप मैं तो कहता हूं हिंदुस्तान में हर आदमी को उनकी किताब पढ़ना चाहिए इग्नाइटेड माइंड्स यू शुड हैव अ ड्रीम यू शुड हैव गाइड एंड कोचेस एंड ऑल बड़ी प्यारी किताब पढ़नी चाहिए तो अब किस्मत बहुत अच्छी थी कुछ समय भी था कि वो भारत के प्रेसिडेंट बन गए तो जब वो प्रेसिडेंट हाउस से निकलते हैं हम तो एक बैग उनके साथ है। दो चार
बैग हैं किताबों के हैं बस कहां पहुंच सकते हैं वो टॉप मोस्ट पे पोस्ट पे भाई इंदिरा गांधी ने किसी जमाने में कहा गरीबी हटाओ गरीबी हट गए नेपोलियन ने यही किया गुड डेज अहेड 1789 फ्रेंच रेवोल्यूशन जनता परेशान चारों तरफ डार्कनेस इकोनमिक पॉलिटिकल डार्कनेस वो समझ गया कि यार अंधेरा छाया हुआ है थोड़ा सा रोशनी दिखाओ इनको उसने रोशनी दिखा दी वो 1799 में फ्रांस का प्रेसिडेंट बन गया मुसोलनी यही करता है हिटलर तो लेकिन हां अब इन ये जो पॉलिटिशियंस हैं इनमें डिग्री है। मैनपुलेट सभी करते हैं। कुछ 100% कर देते हैं कि
भाई कि आप चप्राश खाओगे। घोड़े जैसी ताकत आएगी। पता लगा बकरी की भी नहीं आई। तो वहां भी पब्लिक चटपटाती है। वो परेशान होती है। लेकिन अगर गधे जैसे भी आ गई तो पब्लिक कहती है ठीक है भैया चलो इतना तो किया। तो पावर का एक वो है। जैसे लोग मैं चुनाव लड़ने आया तो लोगों ने कहा कि अरे मास्टर साहब एक आध हफ्ते तो लोग बड़े आए बताने मुझे बाहर से। अरे ऐसे थोड़े होता है चुनाव आपको पता है। बहुत खतरनाक इलाका है ये दिल्ली का। यहां बहुत मर्डर होते हैं। मैं भी उनसे कहता
था। अच्छा भैया तो भैया मैं ना लडू भैया। अरे आप टिकट वापस करिए। आप कहां चुनाव लड़ने लड़ने जा रहे हैं? फिर एक हफ्ते बाद जब मैंने उनको बिठाना शुरू किया, किसी को जर्मन में समझाया, किसी को फ्रेंच में। मैंने कहा बे देख मैं एक्सीडेंटल टीचर हूं। हम मैं बनना नहीं चाहता तो परमात्मा ने कह दिया कि भाई पढ़ा दे। मैंने कहा पढ़ा देता हूं। और ये सब बदमाशी बदमाशी की बात मत करना। मेरा पहला इलेक्शन था दिल्ली के पटपटगंज में जहां मेरी पार्टी का कोई आदमी मार नहीं खाया था। कैसे? उससे पहले जितने इलेक्शन
हुए, मेरी पार्टी के आध आदमी मार ही खा गया। कमजोर पर सीधे साधे लोग हैं। भाई नहीं बोलते थे कुछ। तो आपने क्या किया ऐसा? करना क्या था? मैंने कुछ कहा नहीं। मैंने कहा भैया मैं तो अहिंसा का पुजारी हूं। पर मैं कृष्ण से बहुत प्यार करता हूं। हमसे बदतमीजी मत करना। बाकी तो हो गई। ठीक है। आप बोले मैं हिंसा का पुजारी हूं। आपने बंदूक बंदूक चलाई है। मैंने पढ़ा था कहीं पे। चलाई क्या? मतलब अब कभी-कभी सरकमस्टेंस हो जाते हैं। बस ऐसे हो गया। एक सिचुएशन हो गई तो और हमारा जो इलाका है,
हमारा जो ये क्षेत्र है वो एग्रीकल्चरल डोमिनेंट एरिया है। है फ्यूडलिस्टिक। हम मतलब वहां अगर आप जमीन के साथ एक बड़ा प्यारा का्सप्ट है लैंड लॉर्ड हो जैसे लोग मुंबई में क्यों रहना चाहते हैं हम आप जॉब करते हो शाम को घर आते हो सोसाइटी है आपकी आप एक सेटल्ड और शांतिपूर्वक लाइफ जीते हो अभी गणपति बप्पा आ रहे हैं लोग सब मनाएंगे नाचेंगे गाएंगे खुश रहेंगे पर लैंडेड एरिस्टोक्रेसी का एक नियम है वोलिज्म का कि अगर आपके पास ताकत नहीं है तो तो आप जमीन पर कब्जा नहीं रख सकते हो। आपको लड़ना आना ही
चाहिए। इसलिए बहुत सारे जो लोग यूपी, बिहार, बंगाल, ओसा से आते हैं, यहां सेटल हो जाते हैं। वो वापस नहीं आते। क्योंकि यहां पीसफुल लाइफ है। पीसफुल है। ग्रोथ है। शांति है। सोसाइटीज में सब एक दूसरे से मिलके रहते हैं। हंसते बोलते हैं। किसी का किसी से कुछ जमीन का मामला है ही नहीं। ज्यादा होगा। पार्किंग का होगा वो भी सुलट जाएगा। तो इसलिए लोग यहां बट एक कांसेप्ट होता है ना ह्यूमन साइकोलॉजी में लेकिसिज्म कि अल्टीमेटली तो ह्यूमन ग्रीड डिजास्टर और डिस्ट्रक्शन चाहती है। पीसफुल ज्यादा लाइफ नहीं आती। थोड़ा तो ड्रामा चाहिए हमें। थोड़ा
तो हम क्रेव करते हैं सबकॉन्शियसली कि यार थोड़ा डिस्ट्रक्शन रहे लाइफ में। उतना वो तो बॉलीवुड में देख लेते हैं ना। पहले पहले ये जो चीज थी जो फुलफिल नहीं कर पाते थे वो बाहर। अभी क्या है ना कि बहुत सारी चीजें तो वो वर्चुअल देख लेते हैं। एंजॉयमेंट वर्चुअल सुहागरात रात की सीन टीवी में देख लिया खुश हो गए। मस्त है। हिंसा देख ली मस्त है। ताली बजा दिया देख लिया मिथुन चक्रवर्ती को साइकिल उठा के गोलियां रोकते हुए उसी में मस्त है। तो जब चीज दिख ही रही है पर्दे पे तो काम तो
चल ही रहा है ना। ये सारे इमोशंस वहां हो जाते हैं। हां वो अपना कर लेते हैं। बॉलीवुड को पता होता है कि किसको क्या चाहिए। वो अमेरिका में ना बहुत सारी चीजें अमेरिकन लीडर्स और उनके पावर और ह्यूमन बिहेवियर के बारे में पढ़ता हूं। मुझे मजा आता है देखने में क्योंकि उनके बारे में लिखा ज्यादा गया हुआ है और मॉडर्न वर्ल्ड एग्जांपल ज्यादा उनके पास हैं। तो पढ़ता हूं। उनमें ना एक चीज आती है जिससे अमेरिकन सोसाइटी काफी ओके है और वो इंडियन सोसाइटी नहीं है। द वर्ड इज अ डार्क साइकोलॉजी। हम उन्हें मजा
आता है और वो उसको यूज़ करते हैं एज अ टूल्स एंड टेक्निक्स एंड टैक्टिक्स। आपका भी उस सब्जेक्ट में रुझान है? बहुत ज्यादा। एक किताब है प्रेसिडेंट्स ऑफ वॉर। हम अमेरिकन प्रेसिडेंट्स की स्टोरी है। उसको पढ़ना जरूर। और शानदार किताब है। राइट फ्रॉम द वैरी बिगनिंग वाशिंगटन से लेकर अभी तक की किताब है वो। तो एक सिंपल लैंग्वेज में जो ये देख रहा है पहली बार, उसको अगर बताना डार्क साइकोलॉजी होती क्या है? तो कैसे बताऊं? मतलब मेरा मानना ये है कि साइकोलॉजी बड़ी प्यारी साइंस है। इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन की देन है वो। हम अगर वो
नहीं पैदा होती तो ब्रांड कभी नहीं पैदा होता। ब्रांड इज द आउटकम ऑफ साइकोलॉजी। साइकोलॉजी ने बड़ी मदद की कैपिटलिस्टों की। हम्। कि आदमी को मन को चेंज कैसे करना है? हम्। कब उसे फटे पैंट पहनाने हैं? कब उसे अह कलर्ड शर्ट्स पहनानी है। कब और साइकोलॉजी, ब्रांड और बॉलीवुड इन तीनों का बड़ा गहरा रिलेशन है। क्या? जैसे ही किसी ब्रांड को प्रमोट करना होता है। अगली मूवी में एक्टर और एक्ट्रेस वही ब्रांड वही चीज पहनते हैं। वहां वो तो कैपिटलिज्म की वजह से पैसा हर जगह बटता है इसलिए। हां हां हां बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल।
तो वो ब्रांड जो है ब्रांड मतलब हम हमने हमें कहां पता चला कौन सी घड़ी अच्छी कौन सी कार अच्छी है कौन सा कंट्री अच्छी है सब बॉलीवुड की देन है 91 के बाद जब पैसा भारत में आया तो लोगों ने कश्मीर और केरला जाना छोड़ दिया कि कौन मुन्नार जाएगा यार थी देखने कौन जाएगा तो मूवियां आई जिसमें स्विट्जरलैंड की सीन्स दिखाई गई लंदन लंदन स्विट्जरलैंड विगस वगैरह तो लोगों ने कहा भाई उधर जाएंगे भाई और पैसा भी आ ही रहा था और फिर बैंकों ने कहा नहीं है तो हम टूरिज्म लोन कहता है
यार जाओ उधार लेके जाओ उधार मांग के घी पियो चार भाग तो यही कहता है तो साइकोलॉजी मतलब कुएं सिगमंड फ्रॉयड इन दो आदमियों को तो मुझे लगता है हर आदमी को पढ़ना चाहिए पढ़ना ही चाहिए और डार्क साइकोलॉजी तो मतलब उसका कोई कहना ही नहीं है अगर उस गेम को आप समझते हो तो मुझे लगता है कि आप एज लेते हो मतलब जो भी लोग आपके साथ हैं उनसे आप एज लेते हो किसी को समझाना हो तो क्या समझाएंगे डार्क साइकोलॉजी कोई एक आ टैक्टिक या ट्रिक कहीं आपने एग्जांपल कल दिखाओ। अगर यह समझाने
वाला फैक्टर इंसान की पकड़ में आ जाए तो अमीर कभी गरीब होंगे ही नहीं। और गरीब कभी अमीर होगा ही नहीं। हम ये तो ब्लिस है कि समझ नहीं सकते लोग। कि किसी को बहुत बातें समझ में आ गई। डॉक्टर अंबेडकर कि ठीक है भैया करो बेइज्जती हमारी पर हम पढ़ेंगे। हम हमें बिठाओ क्लास के बाहर। हम पढ़ेंगे। हमें पानी पीने मत दो। हम पढ़ेंगे। समझ ही तो थी। और अब वो आदमी भगवान बन गया हिंदुस्तान में। भाई कई लोग हैं अगर हम उनसे कहते हैं भाई हम पानी नहीं पीने देंगे। वो दूसरे दिन स्कूल
ही नहीं आएंगे। मां-बाप केस फाइल कर देंगे। तो हम किसी को समझा नहीं सकते। हां, हम एक काम कर सकते हैं। हम उसको कुछ चीजें जैसे हमारे यहां क्या होता है कि अब लड़कों ने लिटरेचर पढ़ना छोड़ दिया। नवेल्स क्या है? विज़न ही तो देती है या या आप किताबें पढ़ते हो। अब लोग ऑडियो बुक सुनते हैं। वो नहीं करना चाहिए। मजबूरी है तो कर लिया अलग बात है। सुनने में ये बड़ा प्यारा बात ही क्यों? सुनने में हमारा मन मैकेनिकल हो सकता है। हमें एहसास होता है हम सुन रहे हैं पर ओरिजिनली हम सुने
ना लेकिन पढ़ने में हम विदाउट कंसंट्रेशन पढ़ नहीं सकते हम जब आपको पढ़ना है तो या तो आप नींद में आओगे या आप पढ़ोगे पैरेलली साथ नहीं चलेगी चीज तो ऑडियो बुक्स ठीक है अब भाई ट्रेवल कर रहे हैं सुन रहे हैं वो अलग बात है पर कोशिश करना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा बुक्स को पढ़ना चाहिए इसलिए हिंदुस्तान में जब बुक्स पैर पे लग जाती थी तो हम उसे उठा के म्थे पे लगाते थे क्योंकि बुक इज द बेस्ट मीडियम टू ओपन दिस हम कोई चाबी हो तो लिटरेचर है सीन्स हैं मतलब कुछ स्टोरीज
हैं जिनको हम बता सकते हैं दिखा सकते हैं केसेस दे सकते हैं कि भाई ऐसा हुआ ऐसा हुआ ऐसा हुआ तो वहां पे हो सकता है कि कुछ को बुद्ध की तरह कुछ सीन समझ में आ जाए बुद्ध ने डेड बॉडी देखी और ओल्ड एज पर्सन देखा बीमार आदमी देखा तो देखने से ही वो जाग गए तो ऐसा कुछ हम दिखा सकते हैं अगले को कि हो सकता है उसका दिमाग जिंदा हो जाए पर फिर यह वही ब्लिस है बाकी ये समझा नहीं सकते नहीं समझा सकते नहीं लोगों को अपने आप ही चमकेगा नहीं तो
नहीं चमकेगा हम बिल्कुल हर कोयला हीरा थोड़ी होगा पॉसिबल ही नहीं है पर अगर किसी को साइकोलॉजिकली डेंजरस बनना हो तो क्या कर सकता है कैसे कोई बन सकता है अब अगर नीम चाहे कि उसमें से आम निकले तो वो पॉसिबल नहीं है। उसकी मैं एग्जांपल वजह बता यशस्वी जैसवाल क्रिकेटर हमारा हम और अर्जुन तेंदुलकर तेंदुलकर साहब क्या नहीं सोचते होंगे कि मेरा बेटा मेरी तरह क्रिकेटर हो जाए लेकिन नहीं बना पाए। सारी सुविधा देने के बाद भी नहीं बना पाए। यही तो ब्लिस है। यही तो यहीं पर तो आदमी भगवान को मानने पर मजबूर
हो जाता है। यहीं पर तो आदमी सोचता है कि कुछ तो है जो उसके हाथ में है। बेस्ट एग्जांपल मतलब वो बंदा आता है यूपी के एक शहर से। यहां पे शाम को पानी पूरी लगाता है। जहां तक मैंने सुना है। हम बेचता है 3 घंटे। फिर पानी पूरी वो भी नहीं सोनार की दुकान पे बैठ वो पानी के बतासे बेचता है और फिर प्रैक्टिस करने जाता है और आज एक इंटरनेशनल क्रिकेटर है ओपनर विदाउट एनी फैसिलिटी विदाउट एनी बैकिंग विदाउट एनी गॉड फादर और एक आदमी है जिसके पास सब कुछ है। रोहन गावास्कर रोहन
गावस्कर इज द सन ऑफ गॉड ऑफ क्रिकेट सुनील गावस्कर कोई मामूली आदमी का बेटा नहीं है रोहन गावस्कर गावास्कर इज अ गॉड ऑफ़ क्रिकेट ऑफ़ माय टाइम मतलब हम जब उनको ग्राउंड पे देखते हैं तो भाई गवास्कर जी आ गए अब तो बढ़िया मजा आएगा तेंदुलकर इज़ अ गॉड हमारे टाइम हमारे टाइम मतलब आपके टाइम गए वो तो ये दोनों गॉड अपने बच्चों को देवता नहीं बना पाए इसलिए हम किसी को फैसिलिटी दे सकते हैं। बता सकते हैं। अगर उसकी इनर इंस्टिंक्ट नहीं होगी तो वो नहीं कर पाएगा। इनर इंस्टिंक्ट बहुत जरूरी है कुछ भी
बनने के लिए। जैसे आईएएस की तैयारी करने बहुत लड़के आते हैं। बहुत पर बहुत ऐसे लड़के आए मेरे पास। जैसे अभी हमारा एक आईपीएस ऑफिसर है सैफन हसन गुजरात में। भावनगर में शायद उसकी पोस्टिंग है। बहुत सिंपल घर का लड़का बहुत सिंपल। फर्स्ट अटेम्प्ट आईपीएस और क्या थॉट्स हैं उसके? क्या मतलब एक्सप्लेनेशन है? शशांक त्रिपाठी अभी ही इज़ अ डीएम ऑफ़ बाराबंकी। फिफ्थ रैंक संस्कृत ऑप्शनल है। आईआईटीए निषा ग्रेवाल एक लड़की अभी सीडीओ है बुलंदशहर की। और फादर उसके बाबा ग्रैंडफादर टीचर फादर शायद इलेक्ट्रिक विभाग में सिंपल बैकग्राउंड की लेडी 51 रैंक ये तीन एग्जांपल
मैंने दिया कि ये सब सामान घर के लड़के हैं हम और मैंने देखा कि कैपिटलिस्ट के घर का बेटा, डीजीपी के घर का बेटा, आईएएस के घर का बेटा मतलब ऐसे-से लड़कों को मैंने देखा जिन्होंने फादर ने वहां फ्लैट दे रखा था करोल बाग एक ड्राइवर रखा था, एक कुक रखा था, एक नौकर रखा था। कुछ नहीं हुआ। उसी को हम बोलते हैं इंस्टिट। तुम्हारे अंदर है कि नहीं है? जैसे जब अफेयर होता है बस 2:00 बजे रात में लड़की कहती है कहां हो? लड़का कहता है तुम्हारे दिल में है। वही अगर मां बुला ले
पानी देने के लिए तो उसको दर्द हो जाएगा। कहेगा सर दर्द करने लगा। तुमने नींद में से उठा दिया। फलाना हो गया। इंस्टिंक्ट आदमी को बनाती है। आप उसे कुछ बना नहीं सकते। कई पेरेंट्स आते हैं मेरे पास। साहब हमारे लड़के को आईएएस बना दीजिए। अरे मैंने कहा यार जिस दिन बनाने लगे ना उस दिन मुकेश अंबानी से ज्यादा पैसा मेरे पास होगा। तो कितने अरबपति लोग हैं जो चाहते हैं मेरे लड़के कुछ बन जाए। हम तो वी कैन प्रोवाइड द एटमॉस्फियर और अल्टीमेटली इंसान पे डिपेंडेंट है। क्योंकि द्रोणाचार्य ने 100 भाई को पढ़ाया और
पांच भाइयों को पढ़ाया। पर अर्जुन अकेला है जो मछली की आंख में मार रहा है। भीम को मारना वो पूरी हिरन बांध दो तो ना मार पाएंगे। इंस्टिंक्ट नहीं है। ये है तो जिसकी इंस्टिंक्ट है जो देख रहा है जिसके अंदर थोड़ी सी आग है वो आगे बढ़ना चाहता है। वो कुछ और नहीं ट्रेन कर सकता खुद के दिमाग को किसी तरह से ताकि वो और खतरनाक बन जाए। हां बनते ही है लोग। बनते ही हैं लोग। मतलब अगर हम इंडिया में प्रेजेंट टाइम में एग्जांपल लें तो हमारे प्राइम मिनिस्टर हैं। मतलब इंडिया जैसी कंट्री
में थर्ड टाइम प्राइम मिनिस्टर बनना हम इट्स नॉट इजी टास्क। ट्रू। इंडिया इज़ अ कंट्री ऑफ़ डायनेस्टिक डेमोक्रेसी। यहां एक नया डेमोक्रेसी है। जैसे हमारा फेडरलिज्म एक अजीब तरह का फेडरलिज्म है। क्वासी फेडरलिज्म। ना फेडरेशन है ना यूनिटरी है। क्वासी बोलते हैं हम। क्वासी। ऐसे इंडिया इज़ अ कंट्री ऑफ़ डायनेस्टिक डेमोक्रेसी। फादर एमपी है, बेटा एमएलए है। ऐसे है हम उस कंट्री में जहां रजवाड़े के घर के लोग राजनीति में दबदबा रखते हैं। 10,000 करोड़ के मालिक हैं। हम उस कंट्री में वो आदमी थर्ड टाइम प्राइम मिनिस्टर है। अनक्वेस्टनेबल। व्हाट डू यू थिंक? इंडिया को
सुपर पावर बनने से भी क्या रोक रहा है? E = e का कांसेप्ट जब तक भारत को समझ में नहीं आएगा तब तक भारत सुपर पावर नहीं बनेगा। मतलब इकॉनमी = एंपायर। एक्सप्लेन 1787 में अमेरिका पैदा हुआ। इट वास अ स्लम एरिया। 13 स्लम एरियाज। 1945 में अमेरिका बिकम्स वर्ल्ड पावर। आज जैसे हम अमेरिका की बात करते हैं वैसे हमारे दिमाग में आता है एप्पल। आज हम जैसे अब ये बात चाइना को समझ में आई कि बॉस अगर वर्ल्ड पावर बनना है तो पहले इकोनमिक पावर बनना है। तो अगर Apple दुनिया में जाना जाता है
तो OnePlus भी दुनिया में जाना जाता है। हम यह बात जापान को समझ में आई। अगर Apple और OnePlus जाना जाता है तो Sony भी दुनिया में जानी जाती है। हमारा कौन सा प्रोडक्ट दुनिया में बिक रहा है? हम किस प्रोडक्ट के नाम से दुनिया में जाने आते हैं? यह बात नॉर्थ कोरिया को समझ में नहीं आई। यह बात पाकिस्तान को समझ में नहीं आई। खत्म हो गई सारी कंट्रीज। आज व्हाट डू यू थिंक? हमारी क्या पोजीशन होगी ग्लोबली? ग्लोबल पावर में हम आज अमेरिका, चाइना के आस आमने सामने किधर खड़े होंगे? नहीं नहीं ये
तो हमसे बहुत आगे हैं। मतलब चाइना, इंडिया, पाकिस्तान ये तीन कंट्रीज एक साथ पैदा हुए हैं। इंडिया सुपर पावर थी जब हमारे पास तक्षशिला और नालंदा जैसे यूनिवर्सिटीज थी। हम्। मतलब ह्यूमनसांग भारत पढ़ने आ रहा है। फ़हान भारत पढ़ने आ रहा है। अलबरूनी भारत आ रहा है। अब्दुल रजाक भारत आ रहा है। आज हमारे बच्चे चाइना पढ़ने जा रहे हैं। हम कैसे पावर हो सकते हैं? ज्ञान का देश भारत और भारत का बच्चा भारत का पेरेंट्स प्राउड फील कर रहा है। भैया हमारा बेटा संजन में पढ़ रहा है भैया। हम गए थे शघाई भैया बहुत
बड़ी-बड़ी बिल्डिंग है भैया। जब हम एजुकेशनल स्टैंडर्ड नहीं पैदा कर पाए कि हम अपने बच्चों को अपने देश में रोक लें तो हम कैसे सुपर पावर बन सकते हैं? इतना तो हम कर ही सकते थे ना। हम बोइंग नहीं बना सकते। हम स्कूल तो अच्छा कर सकते थे। हम कॉलेज तो अच्छा हमारे यहां क्या लोगों के पास दिमाग की कमी है। दुनिया के सबसे स्मार्टेस्ट लोग भारत में पाए जाते हैं। हम स्कूल कॉलेज अच्छा बना सकते थे। हमारा बच्चा कहां? हमारे पेरेंट्स कहां प्राइड फील करते हैं कि भैया मेरा बेटा मॉस्को से एमबीबीएस कर रहा
है। जिसके पास बहुत पैसा है वो उनके बच्चे यूएस में पढ़ रहे हैं। जिसके पास थोड़ा सा कम है उनके यूरोप में पढ़ रहे हैं। जिनका और कम है वो रशिया में पढ़ रहे हैं। जिनका और कम है वो चाइना में पढ़ रहे हैं। पर इंडिया की पढ़ाई को कोई प्रेफरेंस नहीं दे रहा है। और बिना एजुकेशन के कोई कंट्री कभी पावरफुल बन ही नहीं सकती। तो हम पहले पावरफुल कैसे थे? सब बोलते हैं कि हम सोने की चिड़िया थे थे। एक्सक्ट्ली हम वही नालंदा और विक्रमशिला ये बाहर के लोग हमारे यहां पढ़ने आते थे।
एक्चुअल में थे हम सोने की चिड़िया। हां एक्सक्ट्ली हम थे। बिल्कुल थे। उसकी वजह थी। हम बता देता हूं उसकी वजह क्या थी। इकोनमी में एक टर्म है बैलेंस ऑफ़ पेमेंट। हम तो बिफोर इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन बैलेंस ऑफ़ पेमेंट हमारे फेवर में था। उसकी तीन वजह पहली वजह यह थी कि द कंट्री ऑफ़ नेचुरल रिसोर्सेज। हमारे पास कॉटन था। हमारे पास फर्टाइल प्लेेंस थी। दूसरी बात थी मसून। मसून ने क्या किया था? वेस्ट और ईस्ट का ट्रेड चलता था। पश्चिम के लोग यूरोप के लोग आते थे मसाला सिल्क लेने। हम हमारे पास उनसे सोना चांदी आता
था। तो जब सी ट्रेड शुरू हुआ तो मसून के बाद क्या हुआ कि मानसून के साथ आप सी शिप्स चलती थी। अब अगर आप मानसून के साथ चल रहे हो तो इंडिया इज अ डेस्टिनेशन। हम जून में जब आप मानसून के साथ चलोगे तो मानसून तो भारत से गुजरेगा तो आपको भारत आना है। जब रिटर्निंग मसून के साथ आप वापस होगे तो भारत आना है। तो मसून टर्नड इंडिया एस द हार्ट ऑफ वेस्टर्न ईस्ट। दूसरा दूसरा रीज़न ये हुआ। और तीसरा रीज़न ये हुआ कि हमारी जो कमोडिटीज थी, हमारा जो एक्सपोर्ट था, प्ली एक ग्रीक
रोमन राइटर है। वो रोता है एंशिएंट टाइम में। कहता है द एंटायर गोल्ड ऑफ रोम इस बीइंग ड्रेन टुवर्ड्स इंडिया। मैक्सिमम एक्सपोर्ट था हमारा। हम मसाला बेचते थे, कपड़ा बेचते थे, लेदर गुड्स बेचते थे, यूटेंसिल्स क्या नहीं बेचते थे? और उधर से हम सिर्फ शराब लेते थे और अरब से घोड़ा लेते थे। तो हमारा मिनिमम इंपोर्ट था, मैक्सिमम एक्सपोर्ट था। तो हम सोने की चढ़ जाते हैं। तो फिर क्या खराब हो गया? इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के बाद आज जो हमारी कंडीशन है नेचुरल रिसोर्स हमारे पास आज भी है। हम ह्यूमन रिसोर्स को कायदे का नहीं कर
पा रहे हैं। हम अपने बच्चों को पढ़ाई में मजा नहीं ला पाए। हमारे बच्चे रोते हैं स्कूल जाने के लिए। बहाने बनाते हैं। एजुकेशन सिस्टम। एजुकेशन सिस्टम। डू यू थिंक कि इतनी जब हम बात करते हैं इसका हिस्ट्री का बहुत बड़ा रोल है। इसमें अगर आप हिस्टोरिकली सारे लोग देखो सारे इंसिडेंट्स देखो अगेन एंड अगेन ऐसा देखते हैं कि हम जितना इनवेडर्स या कॉलोनाइजर से बर्बाद नहीं उतना हम खुद ही अंदर से बर्बाद हो गए। एक्सैक्टली उसकी वजह ये थी मैं जब तक मैंने इलेक्शन नहीं लड़ा था मैं बड़ा सिंपैथेटिक था हिंदुस्तान की जनता के
लिए। हम अब मेरी सिंपैथी ही खत्म हो गई। क्यों? उसकी वजह यह थी कि हिंदुस्तान की जनता कहती है भैया अगर हमें अच्छा ऑप्शन मिले तो हम भी वोट करें अच्छे लोगों को। अगर मैं चुनाव जीतता तो मेरे जैसे कितने लोगों को ये बात होती कि नहीं भैया जनता साथ देगी भैया। लेकिन हमारी जनता बुरी नहीं है। मासूम बहुत है। बह जाती है। बह जाती है। किस चीज से बैठ? जैसे पहली चीज मैंने अपनी जनता के अंदर क्या देखा? हम्म। इसको लगता है मेरे वोट से कुछ नहीं होगा। भैया हमारे एक वोट से क्या होगा
भैया? उसको पता नहीं है कि यही फीलिंग जो 2 लाख लोगों की डेवलप हो चुकी है। हर दो लाख आदमी को लग रहा है कि हमारे वोट से क्या होगा। जिस दिन यह देश डॉ. अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, जवाहरलाल नेहरू, अटल बिहारी वाजपेई इनके जैसे नेताओं को चुनेगा जो अपने लिए नहीं समाज के लिए जिएंगे। अपने लिए उन्हें जरूरत ही नहीं है। हम्म। उस दिन ये देश बहुत अच्छा होना। छूट जाएगा। बहुत अच्छा। तो क्या लगता है? अब हम विश्व गुरु कब बनेंगे? हम कब सुपर पावर बनेंगे? नहीं अभी तो चाइना की लड़ाई
चल रही है यूएसए सुपर पावर बनने की। अभी तो वो लोग रेस में हैं। उसमें कोई इंकार नहीं कर सकता। हमें थोड़ा सा होमवर्क करना पड़ेगा अपने ऊपर। स्ट्रिक्ट डिसीजंस लेने पड़ेंगे क्योंकि इट्स नॉट अ मैटर ऑफ़ टाइम। ये ऐसा नहीं कि आज हमने डिसीजन लिया कल हो जाएगा। पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स इमीडिएट हो जाते हैं। सोशल इकोनमिक डेवलपमेंट्स ग्रेजुअल होते हैं। हम तो अगर हम आज से एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री, हेल्थ इन चार चीजों पे काम करना शुरू करें पॉजिटिवली तो हमें मिनिमम 20 साल लगेगा। चाइना का ऐसा क्या है जो हमारे पास नहीं है। टेक्नोलॉजी है।
सोच में क्या है सर? उन्होंने उन्होंने उन्होंने बड़ा अच्छा काम किया। कुछ काम उन्होंने बहुत अच्छे किए जिसका वेस्ट ने बड़ा विरोध किया। पहला उनका पहला सुपरस्टार है डॉक्टर सनियत सन 1912 उस आदमी ने कहा कोई कोई पर्सनल आइडेंटिटी नहीं रहेगी नो कास्ट नो रिलीजन नो रीजन कोई मेंशन नहीं करेगा जैसे मेरा नाम अवध है तो ओनली अवध नो ओझा एंड ऑफ पर्सनल आइडेंटिटीज तो 1912 से लेके 2012 100 इयर्स अब वहां सब चाइनीस हैं। अब वहां कोई ब्राह्मण नहीं है, कोई दलित नहीं है, कोई हिंदू नहीं है, कोई मुसलमान नहीं है। उनका दूसरा सुपरस्टार
था माओ। फ्यूडलिज्म को एक झटके में खत्म कर डाला उसने। 1949 से 54 फ्यूडलिज्म खत्म। ग्राउंड सेटल हो गया कैपिटलिज्म के लिए। 76 में माऊ मरता है। डनोपिंग आता है। उसको लगता है कि बस अब भाई साहब ग्राउंड रेडी है। अब अमेरिका से हाथ मिलाना चाहिए। हम कितना सिस्टमेटिकली काम किया है इन लोगों ने। डेमोक्रेसी नो यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइज। ये ₹500 पे लेके वोट कर देंगे। तो पहले उनको समझाओ डेमोक्रेसी क्या है? सिंगल पार्टी सिस्टम विल क्योंकि डेमोक्रेसी ब्रिटेन में डेवलप हुई 400 ईयर में। तभी तो इतनी मैच्योर डेमोक्रेसी है। 125 से 1688 मैग्नाका से
ग्लोरियस रेवोल्यूशन 400 साल। दैट इज व्हाई दे हैव द स्ट्रंगेस्ट डेमोक्रेसी इन द वर्ल्ड। ग्रेजुअल। हमारे यहां लोग जानते नहीं डेमोक्रेसी मेजरिटी जानते नहीं जो बेचारे जानते हैं वह माइनॉरिटी में है वो जो शहर का पढ़ा लिखा आदमी है गांव में थोड़ा बहुत समझदार आदमी है उसकी कोई सुनता ही नहीं तो चाइना हमसे पॉलिटिकली इकोनॉमिकली बहुत आगे निकल गया बहुत आगे हम किससे कंपेयर करते रहे पाकिस्तान से हम हमने गलत आदमी से कंपेयर ही करना शुरू कर दिया हमने पाकिस्तान को अपना दुश्मन बना लिया कहते हैं ना मैन इज नोन बाय ह फ्रेंड्स मैं कहता
हूं अ मैन इस नोन आल्सो बाय ह एनिमीज़। सबसे दुश्मनी नहीं करना है। कुत्ता हर भौकते हुए कुत्ते को आप मारने लगोगे तो आप अपने डेस्टिनेशन तक कभी पहुंच ही नहीं पाओगे। ये सब बड़ी-बड़ी गलतियां की हमने। पाकिस्तान ने हमें दुश्मन बनाया ना? हमने थोड़ी किया। पाकिस्तान को हम विलय कर लेते ना अपने अंदर। है क्या उनके पास? कुछ है ही नहीं। अब उन्होंने अपने को मिसयूज़ किया। उनके पास चीजें बहुत थी। अगर वो भी पॉजिटिव नोट पर काम करते वो भी बिस्मार्क को अगर पढ़े होते कि पहले कंट्री को इकोनमिक पावर बनाओ फिर वो
पॉलिटिकल पावर बन जाएगी तो उनका भी कंडीशन अच्छा होता और दो पावरफुल पड़ोसी जब आपस में रहते हैं तो एक दूसरे का ख्याल रखते हैं हम भाई हम दोनों का पैलेस अगल-बगल है तो हम एक दूसरे को कभी डिस्टर्ब नहीं करेंगे हम एंड इफ वी बोथ आर लिविंग इन अ स्लम एरिया तो कभी हम यार तुम्हारे घर में पत्थर मार देंगे कभी हमारे घर में मार दोगे तो अगर पाकिस्तान पावरफुल हो जाता अचीवमेंट हो जाती तो वो भी कहता है कि छोड़ो यार हिंदुस्तान से दोस्ती करके रखो इन्होंने उन्होंने अपने को मिटा लिया। अब उनके
पास खोने को कुछ है नहीं। हमने अपने आप को काफी बना लिया है। हां, ऐसा नहीं कि हमने नहीं बनाया। हमने अपने को बहुत बनाया है। हम हम चाइना सूट में है। हम कुर्ता पजामा में है। पाकिस्तानी लुंगी में है। वो सोचते हैं क्या फटेगा? लुंगी तो फटेगी। फट जाने दो। लेकिन अब इंडिया को कुर्ता पजामा बांट डालेंगे। इसीलिए तो कहावत है ना नंगा नाचे फाटेगा। तो उनको हमसे लड़ने में डर नहीं लगता। वो जानते हैं हम तो ऑलरेडी नंगे हैं। तो यह जो चीजें हुई अभी क्या है ना कि आजकल के जो युवाओं को
मैं देखता हूं उनका पूरा माइंडसेट बहुत सारे युवाओं का बदल गया। बहुत ज्यादा बदल गया। मतलब पता नहीं कहां किस डायरेक्शन में जा रहे हैं, क्या सोच रहे हैं। लेकिन आने वाला समय हमारा अच्छा है। डू यू थिंक कि इंडिया क्योंकि अभी तो हमारे दोनों नेबर्स टेक्निकली ज्यादा खास नहीं है। तो डू यू थिंक इंडिया दो फ्रंट वॉर के लिए रेडी है। नहीं ये ये दिक्कत हमारे साथ एक से मिलिट्री वॉर है, एक से इकोनमिक वॉर है। हमारे साथ ये दिक्कत शुरू से थी। जब हम 1947 में वहां पैदा हुए इंडिया पैदा हुई। तो हमारे
पास एक बहुत बड़ा सुकून था कि तिब्बत इंडिपेंडेंट था। हम और शिमला एग्रीमेंट जो 1914 का था उसमें चाइना से हमने एग्रीमेंट किया था कि भैया तुम तिब्बत पे कब्जा नहीं करोगे। तिब्बत विल बी अ बफर बिटवीन इंडिया एंड चाइना। हम तो हम ठीक थे। सुकून में थे कि चलो यार तिब्बत का प्लेटो का क्रॉस करते-करते इनको टाइम लगेगा। हम मैनेज कर लेंगे। लेकिन जब चाइना ने तिब्बत पे कब्जा कर लिया वो हमारे लिए बहुत बड़ा चैलेंज हो गया। अभी वो ब्रह्मपुत्र पे डैम बना रहे हैं। अब चाइना को काउंटर बैलेंस करना क्योंकि चाइना हमसे
बारगेन करेगा। वो हमसे वॉर नहीं करेगा। वो हमसे बारगेन करेगा। वो हमसे कहेगा एक काम करो यार। हमको अपना जो तुम्हारा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स है ना वो हमको दे दो। क्योंकि हमने तो गुजरात का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट जापान को दे दिया। चाइना के पास फॉरेन रिजर्व की भरमार है। इन्वेस्टमेंट नहीं करेगा तो पैसा बढ़ेगा नहीं। अब वो हमारे ऊपर प्रेशर बनाएगा हमारी मार्केट को कब्जा करने का। और जहां वो मिस करेगा वहां वो पाकिस्तान को इंस्टीगेट कर देगा। हम कि भाई तेरे पास तो वैसे भी कुछ नहीं है। तू ले ले हमसे $500 मिलियन डॉलर।
जा। एक काम कर। इंडिया इकोनमिक कॉरिडोर बनाने जा रहा है मुंबई में। अटैक करवा दे। अब इंडिया अगर मुंबई में अटैक हो जाएगा तो जो वारेन के इन्वेस्टर है वो आएंगे ही नहीं कि भैया तुम्हारी कंट्री में तो सिक्योरिटी ही नहीं है। भाई आज दुनिया के इन्वेस्टर चाइना में क्यों बैठे हुए हैं? सिक्योरिटी है। बिज़नेसमैन को क्या चाहिए? सिक्योरिटी? लॉ एंड ऑर्डर। चाइना तुरंत भड़का देगा। जैसे इंडिया में इन्वेस्टर्स आएंगे वैसे ही चाइना पाकिस्तान को इन्वेस्ट करेगा। ये 40 मिलियन डॉलर करना क्या सरकार? दबाया दो चार बंद करके करते तो ये जो दो फ्रंट पे
हम लड़ रहे हैं यह हमारे लिए बहुत बड़ा चैलेंज है। बहुत बड़ा क्या करेंगे हम? हमें तो सबसे पहला काम ये करना है। हमने हमेशा इसकी कोशिश की कि हमने पाकिस्तान को हमेशा मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया। हम इसीलिए दिया क्योंकि हमें पता था कि अगर ये समझेंगे कि भाई हम तो बन रहे हैं। तुझे भी बना देंगे। तू चाइना से मदद लेते लेते एक दिन कॉलोनी बन जाएगा चाइना की। यह नाक में तेरी मदद नहीं कर रहे हैं। यह तुझको इतना पैसा दे देंगे और फिर तुझे अपनी कॉलोनी बना लेंगे और तू खत्म
हो जाएगा। लेकिन अब यह बात पाकिस्तान को समझने के लिए बहुत देर हो चुकी है क्योंकि चाइना के स्लीपर सेल्स इतने स्ट्रांग है पाकिस्तान में कि जो राजनेता इमरान खान की तरह पाकिस्तान को ताकतवर बनाने की कोशिश करेगा वो जेल में जाएगा या फिर उसकी हत्या होगी बेनजीर भुट्टो की तरह बट अमेरिका का भी तो बहुत ज्यादा इन्फ्लुएंस है पाकिस्तान के ऊपर एंड अमेरिका एंड चाइना की लड़ाई है आपस में तो अमेरिका कुछ नहीं कर रहा क्या इसमें नहीं नहीं करेगा अमेरिका का अमेरिका एक्चुअली अमेरिका के दो बेटे हैं। दो एक उनका अडॉप्टेड बेटा है,
एक रियल बेटा है। जो अडॉप्टेड बेटा है वो 1947 में पैदा हुआ पाकिस्तान। ये उनका अडॉप्टेड बेटा है। इसको उन्होंने पैदा इसलिए किया 1947 क्योंकि 45 में सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ। और 47 में अमेरिका ने मनी लैंडिंग शुरू कर दी। मार्शल प्लान। तो उधर रशिया कम्युनिस्ट कंट्री। हम और ये कम्युनिज्म की लहर चाइना में माओ ने स्ट्रांग कर रखी थी। इंडिया में स्ट्रांग हो रखी थी। नक्सलिज्म वगैरह बढ़ रहा था। तो अमेरिका को लगा कि इन केस चाइना कम्युनिस्ट कंट्री बना और बाय चांस भारत कम्युनिस्ट कंट्री बना तो हमारा एक अड्डा होगा सेंट्रल एशिया
में कैपिटलिस्टों का क्योंकि उन्हें ईरान के ऑयल रिजर्व्स पे नजर रखनी हम्म। तो एक बेटा पाकिस्तान जो ईरान पे नजर रखेगा और दूसरा बेटा इजराइल जो अरब वर्ल्ड पे नजर रखेगा और दोनों मिलकर कैपिटलिज्म के इंटरेस्ट की रक्षा करेंगे। तो रियल बेटा इजराइल। रियल बेटा इजराइल है। वो तो उन्होंने क्रिएट किया है ईस्टर्न क्वेश्चन के लिए। बट अब अमेरिका पहले पाकिस्तान की बात करते तो अमेरिका का भी अडॉप्टेड बेटा है। अडॉप्टेड बेटा है। इतना सारा पैसा फंसा हुआ है उनका पाकिस्तान में। इन्वेस्टमेंट फंसा हुआ है। तो फिर चाइना के कंट्रोल में आएगा। अमेरिका के कंट्रोल
में आएगा। अब अगर थर्ड वर्ल्ड वॉर होता है जो कि लगभग चल ही रहा है। हम मुझे तो जब इंडिया पाकिस्तान का वॉर शुरू हुआ तो मुझे लग गया कि हो गया भैया। पर पता नहीं कुछ पर उसे होना है। इट्स डेस्टिनी वर्ल्ड वॉर थ्री। आई डोंट थिंक होना है। अब इकोनमिकली पूरे पूरे वर्ल्ड बहुत ज्यादा इकोनमिक इंटरेस्ट अलाइन है तो ये नहीं हुआ। नहीं मैं बताऊं उसकी वजह क्या है? चेंज ऑफ़ वर्ल्ड ऑर्डर हो जाएगा। नहीं नहीं लिमिटेड वॉर होगा। लिमिटेड वॉर तो हो ही रहा है। हां तो लिमिटेड वॉर होगा। छोटे-छोटे पॉकेट में
तो हो ही रहा है। हां। तो जो वॉर होंगे इससे डिस्ट्रक्शन होगा। तभी रिकंस्ट्रक्शन होगा और इकॉनमी अलाइव होगी। तो वॉर तो होगा। हो सकता है छोटा सा वॉर 6 सात महीने में हमारा हो जाए पाकिस्तान के साथ। इट्स वेरी पॉसिबल। क्योंकि हम इंटरनल क्राइसिस में हैं। पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्राइसिस है। तो दोनों का इंटरनल क्राइसिस अगर दूर करना है तो अपने पब्लिक को बाहर तो उलझाना पड़ेगा ही। तो वो वॉर हो सकता है। हम उस वॉर को खेल सकते हैं। और ऊपर लेवल पे कुछ भी सेटल हो सकता है। पब्लिक को कहां पता चलता
है कि बड़े-बड़े लोगों के बीच में क्या सेट हो गया। भाई अखंडानंद त्रिपाठी और सीएम के बीच क्या सेट हुआ? यह बाहर के लोगों को कहां पता होगा? तो पब्लिक कुछ भी कर सकती है। अब यह डिसाइड होने का समय आ गया कि रियल वर्ल्ड पावर कौन है? जैसे 1914 में समय आ गया था कि जर्मनी या ब्रिटेन तो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हो गया। 1940 में समय आ गया था कि जापान या यूएस तो सेकंड वर्ल्ड वॉर हो गया। अब वो समय आ गया है कि चाइना या यूएस जो जीतेगा जो डोमिनेट करेगा पाकिस्तान उसकी
झोली में रहेगा। टेल मी इंडिया का आज तक इंडिपेंडेंस से लेके अभी तक सबसे बड़ा जिओपॉलिटिकल ब्लंडर कौन सा लगता है आपको? सबसे बड़ा जिओपॉलिटिकल ब्लंडर। हालांकि मैं उसे ब्लंडर नहीं कहूंगा। जब तिब्बत पर कब्जा हुआ चाइना का हम उस वक्त हमको प्रोटेस्ट करना चाहिए था बहुत स्ट्रांग तरीके से। दैट वास अ वेरी बिग ब्लंडर डन बाय नेहरू गवर्नमेंट। हम तो हिंदी चीनी भाई भाईाई करते रहे लेकिन भाई मेरा मकान थोड़ी कब्जा करेगा। अगर चाइना तिब्बत में नहीं बैठता तो आज जो हमारे ऊपर प्रेशर है उतना नहीं होता। और हमारे पास एग्रीमेंट था शिमला एग्रीमेंट।
हमने दलाई लामा को शेल्टर दे ही रखी थी। हम उसको स्ट्रांग प्रोटेस्ट करते। भयानक तरीके से प्रोटेस्ट करते कि साहब करना ही नहीं। मानना ही नहीं इस बात को। क्यों नहीं किया हमने? उसके पीछे कई सारी वजह थी। पहली वजह यह थी कि नेहरू जी को लगता था कि हम साथ में पैदा हुए हैं। तो इनफेंट नेशन एंड अ नेशन इन क्राइसिस अवॉइड वॉर्स। ये नेहरू जी की कैलकुलेशन थी कि इनफेंट नेशंस जो नेशंस पैदा होते हैं वो वॉर को अवॉइड करते हैं क्योंकि दोनों को अपनी एनर्जी को इन्वेस्ट करना होता है ग्रोथ एंड डेवलपमेंट
में। ट्रू। तो नेहरू जी को पता था कि भाई जैसे मैं अपने आय का 90% डेवलपमेंट में लगा रहा हूं वैसे चाइना भी लगा रहा है। तो चाइना हम पर कभी हमला नहीं करेगा। पर 1962 में चाइना ने कर दिया। तो वो जो 90% डेवलपमेंट में जा रहा था उसका 60% आर्म्स एंड एमुनेशन में जाने लगा। तो जिस पेस से हमारी ग्रोथ हो रही थी क्योंकि यूरोप टेस्ट को पता था कि 1787 में अमेरिका पैदा हुआ। और यह 1853 में जापान पर कब्जा कर लिया। वेस्ट के पास एक एग्जांपल बहुत बड़ा था कि अगर हमने
इंडिया को डिस्टर्ब नहीं किया तो भाई साहब अगला अमेरिका एशिया में तैयार हो जाएगा। ह्यूमन रिसोर्स नेचुरल रिसोर्स और वेस्ट की सबसे बड़ी इंडस्ट्री है आर्म्स एंड एमिनेशन इंडस्ट्री। हम तो जैसे ही हमारा 60% उधर शिफ्ट हुआ हमारी ग्रोथ अटक गई। अटक गई। चाइना की भी तो अटकी होनी चाहिए। उस टाइम चाइना भी थोड़ी ज्यादा कोई पावरफुल देश था। नहीं चाइना के साथ मैंने कहा ना सबसे बड़ी बात इंटरनल क्राइसिस खत्म हो गई थी। हमारे पास तो इंटरनल चैलेंजेस थे ना। दो साइड से लड़ रहे थे। हम दो साइड से लड़ रहे थे। वेल परफेक्ट
सर। थैंक यू सो मच। मजा आ गया बात करके। थैंक यू। आंसरिंग सारे क्वेश्चन। आपको एक्टर बनना है। नहीं नहीं नहीं। [संगीत] कोई एक आध सीन मिल गई। सुभाष गई की आदत थी ना बीच में एक थोड़ी सी सीन करने की। वो अलग बात है। अच्छा। क्योंकि एक्टिंग इज अ वैरी बिग आर्ट। हम्म। बहुत बढ़िया कला है। बट कहानियां सुनाओगे मजे कर। थैंक यू सो मच ये एपिसोड एंड तक देखने के लिए। अब आपको पता है आपको तीन चीजें करनी है। सबसे पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लो ताकि इसी तरह हम और भी वैलुएबल
गेस्ट लाते रहें। नंबर टू, मुझे कमेंट्स में बताओ कि इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा लगा? और और कौन से ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो हम इस एपिसोड में इस पॉडकास्ट में लेके आए। एंड यह एपिसोड किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना जिसको अपनी लाइफ में इससे कुछ बेटर चेंज करने का मौका मिलेगा। क्योंकि एक कन्वर्सेशन कैन चेंज समवनस लाइफ। आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम। अनंटिल देन कीप फिगरिंग अप। [संगीत] [संगीत]