बिस्मिल्ला र रहमान रहीम अस्सलाम वालेकुम हमारे चैनल में खुशामदीद मैं आपके देहाती जाहिल पोते से शादी नहीं कर सकती वह गुस्से से चिल्लाई वह वापस अपने शहर जाना चाहती थी पर उसके बाप के मरते ही उसे हवेली में कैद कर लिया गया था उसे नफरत थी हवेली के लोगों से जब उसे मालूम हुआ उसका निकाह हवेली के नए सरदार सरान शाह से हो रहा है सरान को बना देख ही व इससे नफरत करने लगी थी यह जाने बगैर कि वह एसपी ऑफिसर है जब रान हवेली में दाखिल हुआ और उसके अल्फाज और दादाजी बदतमीजी से
सुन गुस्से से उसके पास गया और मुंह पर थप्पड़ मारा आप निकाह की तैयारी करें दादा साई हमारा निकाह भी होगा और आज ही रुखसती भी मैं देखता हूं यह कैसे इंकार करती है बाबा गांव जाना जरूरी है क्या सर्ष अपना सारा सामान फैलाए लाउंज में बैठ इधर-उधर पटक रही थी कि अचानक बाबा दाखिल हुए और वह बेचार की सेन्ह देखने लगी बेटा जो कुछ भी हो लेकिन वह मेरा अाई वतन है उसे छोड़ तो नहीं सकता वैसे भी मेरी जिंदगी के चंद दिन है और मैं चाहता हूं कि यह आखिरी लमहे अपनों के साथ
गुजार बाबा का सांस भुला हुआ था वह फौरन उठी और बांसू पकड़कर सोफे पर बिठा दिया पानी का गिलास थ माते उनकी बातें सुनकर वो कई लमहे जम से गई थी लेकिन फिर हकीकत का सामना करते हुए यदम बोल पड़ी आप ऐसी बातें मत किया करें मैं इसलिए कह रही थी कि आपकी अचानक तबीयत खराब हो जाती है गांव में शहर जैसी सहूलियत और डॉक्टर्स हैं जो बर वक्त आपका चेकअप कर सकेंगे वजाहत से जवाब देने बाबा उसकी फिक्र मंदी पर बे इख्तियार हंसे और वह बाबा को यूं देखकर खुद भी आसूद कीी सी मुस्कुराई
इसकी तुम फिक्र मत करो तुम्हारे दादा ने वहां गांव के अस्पताल में काफी सहूलियत और अच्छे इंतजा मात कर रखे हैं काफी सालों से तरक्की हो चुकी है उन्होंने रशा की परेशानी को दूर करने की कोशिश करते हुए बताया चलिए ठीक है लेकिन फिर भी अगर कोई जरूरत दरपेश आई तो आपको मेरे साथ शहर आकर भी अपना चेकअप करवाना पड़ेगा और आपने इस बात पर मुझसे कोई बहस नहीं करनी पहले बता दो वरना मैं जाऊंगी ही नहीं सर श एकदम उठी और साथ ही अपनी शर्त रखते हुए डराने की नाकाम कोशिश की हालांकि वह जानती
थी उन पर किसी धमकी का असर नहीं होने वाला था अपनी बीमारी के बाइ वो लाट उठवा रहते थे अच्छा भाई जैसे तुम कहोगी वैसे ही होगा अभी जल्दी से अपनी और मेरी पैकिंग कर दो मैं जरा थोड़ी चहल कदमी कर लेता हूं कल सुबह हम निकल जाएंगे बाबा सोफे से सहारा लेकर उठने की कोशिश करने लगे व एकदम तेसी से उनकी जानिब चली आई पहले आप दवाई ले और यह दूध का गिलास भी खत्म करें बाकी के काम बाद में होंगे उसने दूध का गिलास उठाकर बाबा को पकड़ाया और सोफे पर पड़ी दवाइयों का
शॉपर खोलकर उनके सामने रखी तुम्हारी मां तो वक्त से पहले मुझसे दूर चली गई लेकिन तुम जैसी बेटी देकर उसने मुझ पर एहसान कर दिया व बाबा की अफसुर्दा मगर मुतमइन सी मुस्कुराहट के साथ बोलने पे अपने अंतर के तूफान को बाहर लाने से रोकने की कोशिश करने लगी वह जानती थी कि अगर व रो पड़ी तो बाबा की हिम्मत टूटने लगेगी व तबीयत खराबी की अजियत से दो चार थे ही लेकिन इसके आंसुओं से मजीद गमजदा हो जाएंगे लेकिन मामा के बाद अब आप भी मुझे छोड़ने की बातें कर रहे हैं यह तो कोई
अच्छी नहीं हुई ना बाबा एकदम उसने मुस्कुराकर अपने अंदर के तूफान को समेटा और शिकवा करने लगी जाना तो सबको ही है मुझे बीमारी भी तो ऐसी जानलेवा है कि बचने का इमकान ही नहीं लेकिन तुम तो मेरा बहादुर बच्चा हो पढ़ाई मुकम्मल कर चुकी हो मेरा कारोबार संभाल सकती हो उन्होंने दर्शा का गाल थपथपाते हुए उसे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के कई मशवरे दे डाले यानी वह अपनी जिंदगी से अब बिल्कुल हार बैठे थे बाबा प्लीज इससे आगे कुछ भी मत बोलिएगा खामोश हो जाए व एकदम रो देने वाले अंदाज में नाराज होकर
उन्हें चुप रहने को बोली अच्छा ठीक है नहीं बोलता कुछ भी बाबा ने ने एकदम अपने होठों पर उंगली रखकर खामोशी का तासुर दिया मैं पैकिंग करने जा रही हूं आप दवा लेकर बाहर जाइएगा सरसा की हिम्मत ना थी कि वह बाबा की बेबस और हिम्मत हार देने वाली बातें सुनती जब भी वह वहां से कपड़े समेटकर बासू पर डाली इन्हें ताकीद करती हुई लाउंज से निकलकर अपने कमरे में चली गई अी से अपनी और बाबा की पैकिंग करनी थी और रोते हुए वह पैकिंग करती जा रही थी दूसरे दिन वह सुबह सवेरे ही निकल
आए थे सरसा ड्राइविंग सीख चुकी थी वैसे भी पापा की तबीयत खराबी की वजह से अब वही सब काम करती थी गांव में दाखिल हुई तो वह हैरान हुई थी तब्दीली काफी हद तक हो चुकी थी व बचपन में ताया के फौत होने पर यहां आई थी और इसके बाद शायद एक दो मर्तबा फिर काफी अरसे तक पढ़ाई और बाकी चीजों में ही मसरूफ रही बाबा कभी कभार चक्कर लगाते थे हवेली में गाड़ी दाखिल हुई तो वह बाबा को अंदर भेजकर खुद पार करने हवेली के पिछली जानिब गाड़ी ले गई अस्सलाम वालेकुम अब्बा जी दाऊद
साहब ने अपने अब्बा जीी के सामने सर झुका दिया वालेकुम सलाम क्या हाल है पुतर कितना कमजोर हो गए हो ख्याल नहीं रखते सलाम का जवाब देते हुए उन्होंने लागर हड्डियों के से वजूद पर निगाह डालते हुए पूछने लगे हालांकि वह बाप होते हुए उनसे काफी सेहतमंद दिखाई देते थे रखता ह अब्बा जी आपकी पोती दिन रात कुछ ना कुछ खिलाती रहती है मजाल है जो सकून का सांस लेने दे दाऊ साहब ने जवाब देते हुए जरसा का जिक्र किया किधर है वह साथ लेकर नहीं आए दादाजी को भी बिलखिरिया आ गया इधर-उधर निगाह दौड़ते
हुए उ जर्ष के मुतालिक पूछने लगे जी जी साथ ही आई है बाहर गाड़ी पार कर रही है उन्होंने जवाब देकर भाभी की जानिब रुख किया कैसी है भाभी मैं ठीक हूं लेकिन तुमने तो शहर जाकर अपना आप बिगाड़ कर रख दिया है भाभी ने उनकी हालत देखकर शिकवा किया इतने में कदमों की आहट पर वह पलटे जशा गाड़ी पार करके आ चुकी थी उसे शहरी लिबास में देखकर दादा के चेहरे का रंग बदला बेटी की वजह से कुछ कह नहीं पाए हालांकि शहरी लिबास भी बराय नाम था बस कुटनो तक शर्ट और घेरे दार
शलवार पे वो नाग भो चढ़ा रहे थे क्योंकि गांव की औरतें लंबी कमी से पहनती थी आ जाओ वर्षा यह सब तुम्हारे अपने ही हैं वो दादा की नजरों में चुभन महसूस करते हुए वहीं रुक गई थी तो बाबा ने आगे बढ़कर उसके कंधे पर अपना बाजू रखे हिसार में किए सामने आई यह तुम्हारी ताई है और यह दादा बाबा ने मुता करवाया और मैं आपकी छोटी कजन यानी आपकी ताया जाद बहन अनुष इतने में एक 2021 साला लड़की जो घेरदार लंबी फ्रॉक पहने दुपट्टा लपेटे भागी भागी चली आई और बाबा से मिलने लगी अस्सलाम
वालेकुम सशा ने सलाम किया बेटी तो तुम्हारी अपने खानदान पर गई है हूबहू लहजा बोलने का अंदाज विरासत में मिलाया गया हुसन दादा ने मुस्कुराकर सलाम का जवाब दिया बापा से सरसा की तारीफ की लेकिन वह इनकी नजरों में अनायत महसूस ना कर पाई आखिर कजन किसकी है अनुष ने आगे बढ़ जशा को गले लगाया तो जबरदस्ती मुस्कुराई उसे यह चुलबुल सीताया जात कदर मुख्तलिफ लगी थी ताई के लहजे में भी कुछ अपनाई असी थी तुम तो चुप करो जाओ जाकर मुला स्मा को खाने पीने का बोलो ताई ने से डांटा और साथ ही हुकम
दिया तो वह मुंह बनाकर बोली अम्मा आप बोल देना देखें वर्षा आप भी आज ही आई हैं मैं इनको लेकर हवेली दिखाना चाहती हूं बातें भी करनी है चलो आज तुम अपने मनमानी कर लो क्योंकि इतने अर्से बाद यह बच्ची आई है ताही के साथ-साथ बाबा समय सर्ष भी इसके अंदाज पर बे इख्तियार मुस्कुरा दी ताई की इजाजत पाकर वह खिलखिला उठी थी आए आपी मैं आपको हवेली दिखाती हूं आपको पता है यह हवेली बचपन में सफेद हवेली थी क्योंकि इसके अंदर बाहर सफेद पेंट किया गया था लेकिन अब कुछ साल पहले ही हमने पेंट
अलग रंगों में करवाया है मैं आपको पुरानी तस्वीरें भी दिखाऊंगी वो जशा का बासू था यों से अंदर लेकर चली गई पूरी हवेली दिखाने के साथ अनुष उसे हवेली की कहानी भी सुना डाली कि कैसे यह हवेली दादाजी ने तामीर करवाई थी इसके अलावा हर कमरे और इसकी वजाहत भी अपने हसमुख अंदाज में देती जा रही थी जबकि जर्ष को गांव आना और ऐसे में अनुष्य जैसी कजन का मिल जाना किसी नेमत से कम ना लगा क्योंकि दादा का अंदाज देखकर ही वह बद्दल हो चुकी थी सरसा के वालदैन एक दूसरे को को पसंद करते
थे लेकिन उसके दादा को अपने खानदान से लाई गई बहू पसंद थी जिस पर सशा के बाबा ने इंकार करके कई शोर शराबी के बाद काफी मुश्किलात का सामना करके सरसा की मामा से शादी पसंद की की थी चूंकि इसके दादा को यह रिश्ता मंजूर ना था जैसे उन्होंने बड़े बेटे के लिए खानदान से बहू लाए थे वैसे ही वह छोटे के लिए भी लाना चाहते थे अपनी मर्जी ना चलने की बिना पर उन्होंने बेटे को घर से बेदखल कर यं सरसा के बाबा अपनी बीवी को लिए शहर में एक दोस्त के घर चले गए
और उससे मदद की दरख्वास्त की जिस भी उस दोस्त ने घर पर रखने के साथ-साथ नौकरी भी दे दी कुछ सालों बाद ही व वहां उन्होंने कई मेहनतों के बाद अपना एक छोटा सा घर और छोटा मोटा कारोबार भी शुरू कर लिया सरसा 10 साल की थी जब उसकी मामा एक कार एक्सीडेंट के हादसे का शिकार होकर वफात पा गई अभी गम कम भी ना हुआ था कि दो बाद ही गांव से कॉल आई कि उसके दाऊद साहब के भाई यानी सशा के ताया हार्ट अटैक के बायस चल बसे हैं सशा की मामा की वफात
पे गांव से कोई ना आया था सिवाय ननिल से खाला के इसके बावजूद व अपने भाई के जनाजे में चले गए और चाव तक वहीं कयाम पसी रहे यू इनका आना जाना फिर से अपने घर में चल पड़ा लेकिन मुस्तकिल व रहने को आमादा ना हुए क्योंकि जरसा शहर के स्कूल में पढ़ती थी और मां के जाने के बाद वो किसी से बात नहीं करती थी सिवाय बाबा के दिन महीने और साल गुजरे सर शह पढ़ाई मुकम्मल कर चुकी थी और नौकरी करने का इरादा था लेकिन आजमाइश की और घड़ी इसके सर पर आन पहुंची
बाबा को कैंसर था और वह भी आखिरी स्टेज पे उसके दादा ने अपने बेटे के लिए मुस्तकिल तौर पर हवेली के दरवाजे खोल दिए थे और बाबा की भी यही ख्वाहिश थी आखिरी पर वह अपने अाई घर गुजार सके ना चाहते हु उसे बाबा की ख्वाहिश के आगे सर झुकाना पड़ा और व इनके हमरा गांव चली आई बाबा आप ठीक है व कमरे में थी जब मुलाज में ने आकर इत्तला दी बाबा इसे बुला रहे हैं वो बिना दुपट्टा लिए नंगे सर और पैर भागी भागी उनके कमरे में चली आई हां मैं ठीक हूं मुझे
तुमसे कुछ बात करनी है व पहले सर्ष को इस हाल में देखकर हैरान हुए फिर सामने पड़ी अपनी चादर उसे थमा करर इत्मीनान से बोले सरसा बाबा के पास ही बैठ गई जी बोले कैसी बात सब ठीक है ना आपकी तबीयत ठीक है वो फिकर मंदी से इनका हाथ पूछने लगी हां हां सब ठीक है एक तो तुम बहुत जल्दी परेशान हो जाती हो बाबा ने मुस्कुरा कर उसे मुतमइन करते हुए कहा लेकिन वह फिर भी अभी तक इन्हें परेशानी से देख रही थी बाबा प्लीज अच्छा बाबा बात तो सुन लो मैंने तुम्हारी खाला से
रिश्ते की बात की थी कई लमहे खामोशी के बाद बाबा ने इसे गोया इत्तला दी किस रिश्ते की व चकते हुए बोली उसने समीर के लिए तुम्हारा हाथ मांगा है वह पढ़ा लिखा समझदार बच्चा है अपना कारोबार कर रहा है सबसे बढ़कर तुम्हारी सगी खाला का बेटा है उस घर में तुम खुश रहोगी अपनों के साय में पुर सुकून जिंदगी गुजारो कीी मैं इस रिश्ते के लिए राजी हूं और तुम्हारी खाला को रजामंदी दे भी चुका हूं शायद व दो दिन में आएंगी और चंद जरूरी बातों के बाद शादी की तारीख तय कर दी जाएगी
बाबा ने काफी तफसील के साथ उसे आगाह किया जैसे वह अपनी जानिब से इस रिश्ते पर पूरे दिल से राजी थे और यही चाहते थे कि वह भी रजामंद हो जाए लेकिन वह इन्हें हैरत से देख रही थी कि यं अचानक शादी का फैसला क्यों तभी वह पूछ भी बैठी लेकिन बाबा यह सब इतनी जल्दी आज नहीं तो कल यह सब तय होगा ही तो आज ही क्यों नहीं मैं अपनी जिंदगी में यह सब करना चाहता हूं तुम बताओ तुम्हें कोई तराज तो नहीं है मेरे फैसले पर या समीर से रिश्ता तय करने प बाबा
ने गहरी सांस लेकर उसके दिल की बात जानना चाही इतना तो वह जानते थे कि वह शहर में पड़ने के बावजूद उसकी जिंदगी में कोई शख्स की गुंजाइश नहीं बन पाई थी कैसी बातें कर रहे हैं आप भला मुझे क्यों तरा होगा आप जो फैसला करेंगे मुझे मंजूर है लेकिन पहले अपनी तबीयत पर ध्यान दें मेरी शादी अहम नहीं है बल्कि आपका ठीक हो जाना अहम है उसने नफी में सर हिलाते हुए बाबा के कंधे पर सर रखे मोहब्बत से फिकर मंदी का इजहार किया तो उन्होंने मुस्कुराकर सशा के सर पर हाथ फेरा मैं ध्यान
दे ही रहा हूं अब तुम मेरी बात पर गौर करो शायद कुछ खरीदारी करनी पड़ेगी बाकी के मामलात में और तुम्हारे दादा और ताया आजाद कर लेंगे बहतर तुम खुद को इसके लिए तैयार रखो बाबा ने अपने तई उसे हर चीज के लिए तैयार रहने की ताकीद की दिल ही दिल में यूं अचानक सब हो जाने पर वह थोड़ी परेशान थी लेकिन बाबा की सेहत और तबीयत को मद्देनजर रखते हुए खामोश रही चले जैसे आपकी खुशी अपना ख्याल रखना खुश रहना और जिंदगी के हर मोड़ पर अपने आप को साबित कदम रखना तुम मेरी बेटी
हो हिम्मत हार नहीं सकती कमरे से बाहर जाने से पहले बाबा ने उसे गले लगाकर ढेरों दुआएं दी मुस्कुराकर वह कमरे से बाहर निकल आई लेकिन फजर के वक्त किसी ने उसके ऊपर से लिहाफ खींच कर उतार कर उठाया पूछने पर मालूम हुआ कि रात को उसके वहां से निकलते ही बाबा सो चुके थे लेकिन अब इनकी तबीयत इस कदर खराब है कि वोह लड़खड़ा जुबान से बस दर्शा का नाम लिए जा रहे हैं व अंधाधुन भागकर बाबा के पास पहुंची उनका सर अपनी गोद में रखा तो बाबा ने दरशा के सर पर धीरे से
हाथ फेरते चंद लम्हो में अपनी आंखें हमेशा हमेशा के लिए बंद कर ली और वहीं जरसा भी अपने हवास खो बैठी कब तक क्यों खुद को खौल में बंद किए रखो गी कमरे से बाहर निकलो धूप में बैठो जहन इधर-उधर लगाने की कोशिश करो यूं तो तुम तन्हा बैठकर उलझती रहोगी ताई कमरे में आई तो व बैठते बसत सी पड़ी थी खामोशी से छत को देखे जा रही थी बाबा के दम तोड़ते ही वह होश मिला रही थी लेकिन सबने जबरदस्ती होश मिलाकर उसे उनकी मयत के आगे बिठाया तो वह चीख चीख कर पागल हो
गई तफन के बाद दो हफ्ते गुजर चुके थे लेकिन वह अपने होश में नहीं आई कोई जबरदस्ती मुंह में निवाला डाल दे तो ठीक वरना वह बेसुत पड़ी रहती थी अनुष भी कोशिश कर चुकी थी उसे किसी तरह बात करने पर आमादा कर सके लेकिन जशा तो मानो एक रोबोट बन गई थी अभी भी ताई जान के हमरा खाला भी कमरे में आई थी पापा मुझे अकेला छोड़कर कैसे जा सकते हैं पहले मामा और अब बाबा भी मैं तन्हा ही तो हो गई हूं कोई अपना नहीं रहा जिससे हर बात शेयर करूंगी हंसू रोंगी जिंदगी
में बस एक बाबा ही थे शुरू से जिनके साथ मैंने अपनी जिंदगी का हर लम्हा और ढेरों यादें बनाई हैं अब जब वही नजर नहीं आ रहे तो मैं कैसे जि खाला पे निका पढ़ते ही वह बड़बड़ा हुई इनके गले जा लगी और हिचकियां में घुट घुट कर रोने लगी बच्चे हम सबको जाना है हौसला करो क्यों अपने आप को रोग लगाए बैठी हो ऐसे तो भाई साहब की रू को भी तुम अजियत दे रही हो खाला ने इसे अपनी जानिब से मुमकिन तौर पर खामोश करवाना चाहा खाला मुझे शहर जाना है मैं बाबा की
गुजारे दिनों को इनके साथ जिस घर में थी वहां जाना चाहती हूं उसने एकदम खाला के गले से दूर होते हुए आंसू पूच कर कहा अच्छा चलेंगे मैं लेकर जाऊंगी तुम परेशान मत हो अभी कुछ खा लो दो दिन से तुमने कुछ नहीं खाया उन्होंने इसे समझाते हुए खाना खाने की जानिब मुत वज्जा किया जिस पर वह नफी में सर हिलाकर बेबसी से बोली व खाना पीना हर चीज बाबा के साथ ही करती आ रही थी और अब यं अकेले उसे बाबा याद आने लगते थे मेरा दिल ही नहीं चाह रहा कुछ खाने को जबरदस्ती
खाओ जीने को कुछ तो खाना पड़ता है जाओ अनुष आपी के लिए खाना लेकर आओ खाला ने उसे बोलकर कमरे में दाखिल होती अनूश की जानिब देखकर कहा तो व सर हिलाती हुई बाहर निकल गई और खाला ने रशा को फिर से अपने साथ लगा लिया था व चाचू की वफात के वक्त लौटा था कुछ जरूरी ऑपरेशन उसे सौपे गए थे घर लौटा तो एक लड़की जो अनुष्य दो ढाई साल की बड़ी थी यूं रोई जा रही थी रोते-रोते ही बेहोश हो जाएगी अम्मी और एक औरत उसे बड़ी मुश्किल से संभाल रही थी बचपन में
मालूम हुआ था कि चाचू की एक बेटी है जो पढ़ रही है जिसका जर्ष नाम है लेकिन उसे कोई दिलचस्पी ना हुई और आज तीन हफ्तों बाद दरशा को तन्हा गहरी सोच में देखकर उसका दिल बेचैन सा हुआ जिस लड़की को वह बराय नाम जानता था उसकी खामोशी और वीरान रोई आंखें उसे एक आंख नहीं भा रही थी व सीढियों के दरमियान पिलर से टेक लगाए गहरी नजरों से इसे देखे जा रहा था चाचू की बेटी प्यारी है ना भाई पता है उन्होंने मुझे अपने फोन में तस्वीरें भी दिखाई जिनमें य घूमने गई थी और
मुझसे बातें भी करती रही हैं लेकिन जब से चाचू गए हैं यह हंसना ही भूल गई हैं ना मुझसे बात करते हैं ना खाना खाते हैं कोई पकड़ कर ले आए कमरे से बाहर तो ठीक वरना बिस्तर पर लेटी सोचो में गुम रहती है अचानक ही किसी कोने से अनुष निकलकर उसके पास चली आई और जशा के बारे में बताने लगी जाहिर है बाप जैसी शफकत से महरूम हुई है दुनिया में सिर्फ चाचू ही इसका सब कुछ थे व जो अपनी इस हमदर्दी से उलझ रहा था कद्र नॉर्मल अंदाज में बोला अभी भी उन्होंने खाना
नहीं खाया अम्मी ही कमरे से बाहर जबरदस्ती लेकर आई हैं अनुष भाई के चेहरे के उतार चढ़ाव देखने की कोशिश कर रही थी थी उसने आगाह किया ताकि जान सके कि भाई के दिल में क्या चल रहा है वह काफी देर से देख रही थी जब ही औरतों की महफिल से उठकर चली आई थी तो तुम ख्याल रखा करो ना बातें करने की कोशिश करो ताकि व इस सदमे से बाहर निकल आए वो बेचैन होकर अनुष्य का हाथ था मेंे बोला अनुष्य की हल्की सी मुस्कुराहट देखकर उसने एकदम उसके हाथ छोड़ दिए आप क्यों नहीं
करती हमारी तो नहीं सुनती शायद आपकी सुनले उसने भाई को मशवरा दिया तुम लोगों की नहीं सुनी तो मेरी कैसे सुन लेगी खुद कोशिश करो ना व जो रशा से आज तक हम कलाम ना हुआ था यूं कहने पर बत का जैसे वह इंसान नहीं कोई और मखलूक हो लेकिन भाई जाओ शाबाश अम्मी बुला रही हैं मैं भी जरा बाहर का काम देख लू कल चावा है तो काफी काम करने को पड़े हुए हैं सरान ने दूर ही से जशा की आंखों में आसू बहते देखे तो अनूश की बात काटकर बहाना बनाते हुए वहां से
तेजी से निकल गया जबक वह पीछे भाई भाई करती रह गई जाने क्यों से लगा कि जरान शह सरसा दाऊ से पहली ही नजर में मोहब्बत कर बैठा है लेकिन उसका यह वहम भी बहुत जल्द दूर होने वाला था वह नहीं जानती थी मैं आपसे कुछ बात करने आई हूं जानती हूं यह वक्त मुनासिब नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि में भलाई है शायद सरसा जिस सदमे में है वो निकल आई सरसा की हालत देखकर उसकी खाला बेहद बेचैन हुई उन्होंने तय किया कि वह इसके दादा से साद की से निकाह करने की गुजारिश
करेंगी क्योंकि यह बसंत थोड़ी अच्छी ना थी मगर इन्हें यही बेहतर लगा था कि वह अपने घर रखेंगी खुद ख्याल रखेंगी और समीर से भी इसकी काफी हद तक दोस्ती थी वह संभल जाएगी खुलकर बोलो क्या कहना चाहती हो दादाजी खाला को ना समझी से देखकर बोले मैं वर्षा को अपनी बहू बनाना चाहती हूं यह बात मैंने दाऊद भाई साहब की वफात से एक दिन पहले कर चुकी थी और वह रजामंद थी एक दो दिन में तारीख तय करनी थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था खाला ने कदर झिझक हुए सारी बात गोश
गुजार की यह तुम क्या कह रही हो दाऊद ने इस सिलसिले में मुझसे कोई बात नहीं की पहले तो दादा सुनकर ठट के फिर सभ हलकर लामी का इजहार किया किस्मत ने शायद इन्हें मौका ही नहीं दिया वरना यह सब तय हो चुका था मैं यही चाहती हूं वर्षा जिस सदमे में चुप चुप सी रहती है शायद निकाह कर दे तो कुछ संभल जाए उसका दिल इधर उधर लगे तो चुप भी टूटे ला ने नम आंखों से बहनोई की हालत जानकर कहा और सशा के मुतालिक अपनी फिकर मंदी जाहिर की जबकि दादा सोफे पर बैठे
मगरूर अंदाज में गहरी सोच में ना जाने क्या सोच रहे थे माफ करना पुत्र पर यह रिश्ता नहीं हो सकता चलम हो बाद दादा सोचकर खाला से बोले तो वह हैरान हुई लगा था कि नाराज होंगे कि बेटे की वफात को चंद हफ्ते हुए थे कि शादी की बात कर रही थी लेकिन यहां वह सिरे से रिश्ते से ही इंकार कर रहे थे लेकिन क्यों क्योंकि हम अपनी बरादरी से बाहर शादी नहीं करती दाऊद ने कर ली वो अलग बात थी मर्द था जवान औलाद के मुंह को आते तो वह हमसे बद गुमान हो जाता
मगर बेटियों को अपने बाहर नहीं दे सकते दादाजी ने बेटे की पसंद की शादी करने को भी बीच मिलाना जरूरी समझा खाला जानती थी जिन हालात में दाउ साहब और इनकी बहन की शादी हुई थी यह कैसी पुरानी बात कर रहे हैं भाई साहब इस रिश्ते को राजी थे आज के दौर में भला ऐसी बातें कौन करता है खाला ने सर अफसुर्दगी से हिलाया वक्त बदल सकता है दौर बदल सकते हैं लेकिन हम अपनी रिवायत और रसूलों को तोड़ नहीं सकते नसल दर नसल से हम अपनी बहन बेटी बच्चियों के रिश्ते खानदान से बाहर नहीं
करते आ रहे तो आज क्यों करेंगे खाला ने दादाजी को देखा जिनके चेहरे पर बेटे की जुदाई का गम कहीं दूर जा सोया था बस कायम था तो जनून व जनून जो रस्म रिवाजों और असू पर कायम रहने का जनून था बेटे की ख्वाहिश या पोती की हालत उनके लिए रत्ती बराबर थी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था लेकिन यह सब तय था वर्षा की हालत को देखकर मैं आपके पास तय था या नहीं था यह अलग मामला है हम जिंदा हैं सर श हमारी पोती है तो फैसला करने का हक भी हमारा है जल्द
ही हम कोई फैसला कर लेंगे और वह अपने सद में से भी निकल आएगी तुम बेफिक्र हो जाओ खाला की बात अभी पूरी भी ना हुई थी कि दादा ने इन्हें बीच में ही टोक दिया और अपना दो टोक फैसला सुना दिया खाला बेबसी से इन्हें देखती रह गई और कमरे से बाहर खड़े एक इंसान मुस्कुराया था उसे इस फैसले पर बेहद खुशी हुई थी जैसे उसकी दिली मुराद पूरी हो चुकी हो या कारूनीलम है आपकी खाला रिश्ता लेकर आई थी लेकिन दादाजी ने इंकार कर दिया उसने आज सबके साथ बैठकर खाना खाया मेपस का
ताया जाद भी बैठा हुआ था जिसे उसने आंख उठाकर भी ना देखा था बस चंद एक निवाले खाकर व अपने कमरे में चली आई पीछे पीछे अनूश भी चली आई थी उसे ताई जान ने भेजा था कि अकेले रहने से ही हालत खराब हो रही थी तो अनूश की बातों की वजह से उसे कुछ सोचने का मौका नहीं मिलेगा लेकिन कमरे में आकर जो बात अनुष ने उसे बताई व एकदम पलटी क्या मतलब है वह रानगी से बोली तनुष ने उसे दादाजी और खाला दरमियान हुई गुफ्तगू सारी सुना दी जो उसे अम्मी के मुंह से
सुनने को मिली थी सब जानने के बाद वह दादाजी से बद गुमान हो चुकी थी और खाला की बेजती प इसका खून खोल उठा था उसने तय कर लिया था कि वह आज ही दादाजी से बात करेगी उठकर नीचे चली आई थी लेकिन वह खाना खाकर मेहमान खाने में जा चुके थे व नीचे ही सोफे पर बैठी इनका इंतजार करने लगी आप ने खाला को रिश्ते से इंकार क्यों किया मेहमान खाने से दादा निकले तो उनके सामने जा खड़ी हुई तुम हमारे खानदान से हो यह फैसला करने का हक हमारा है तुम्हारी खाला का नहीं
दादा जवाब देकर वहां से जाने लगे तो फ इन के रास्ते में जा खड़ी हुई ना वह आगे बढ़ सकते थे और ना ही पलट जाने की कोई वजह थी मगर यह फैसला मेरे बाबा कर चुके थे दुनिया से जाने से पहले एक दिन वो मुझे बता चुके थे तो फिर यह सब करने की वजह यह जानते हुए भी कि बाबा की ख्वाहिश है आपने इंकार कर दिया सरसा ने मेरे बाबा पर जोर देकर कहा और थोड़ा लहजा सख्त करके बोली थी जिस पर दादाजी के चेहरे पर गुस्से के आसार नुमाया हुए क्योंकि हम जात
बरादरी से बाहर रिश्ते नहीं किया करते तो टोक जवाब दिया गया जिस पर वह तंसिया हंसी आप सरासर ज्यादती कर रहे हैं अपने असूल और नजरिया की वजह से अपने ही बेटे की ख्वाहिश को भुला दिया व गुस्से के आलम में थी बस में ना था वरना सब जला कर राग कर देती ए लड़की चुप कर जाओ हमारे यहां बेटियों को यूं सरेआम ऐसी बातें करने पर इनका मुंह तोड़ दिया जाता है अगर लिहाज कर रहे हैं तो मजबूर मत करो कि हाथ उठ जाए दादा का खुसे से चेहरा सुर्ख हो चुका था लब भीजे
वो धाड़ी लेकिन सामने इन्हीं का अपना खून था उस परे धरने का लमहे भर को भी असर ना हुआ था वो डट के खड़ी थी उसे सामने खड़े इंसान से बेहद उलझन महसूस हुई थी और नफरत भी जिन्होंने उसके बाबा की ख्वाहिश को नजरअंदाज करके अपने असूल पर तरजीह दी थी बेटियों को ऐसी बातें बोलना मना है उन पर हाथ उठाना जायज है जबरदस्ती असूल की बेड़ियां डालना पसंद है मैं भी देखती हूं मुझे कैसे रोकते हैं मेरी शादी बाबा की पसंद से ही होगी और आप भी जानते हैं कि इनका इंतखाब कौन था उसने
झनझना कर पूछा और अपना फैसला सुनाया तुम अब अपनी हस से बढ़ रही हो यह ना हो कि जैसे तुम जैसी बच्चियों की जुबान दरा पर इन्हें सजा दी जाती है हम गांव के इन उसूलों की पास दारी करने पर आ जाएं दादाजी खड़े खड़े धाड़ी शोर शराबी के बाइस ताई जान अनुष और घर के मुलाजिम भी वहां चले आए थे जरान शह दोस्तों की तरफ गया हुआ था सर श चलो क्या हो गया क्यों अपनी जिंदगी खराब करने पर तुली हो अब्बा जी जो कर रहे हैं करने तो यही हमारी रिवायत है ताई जान
ने आगे बढ़कर उसे अपनी जानिब खींचा लेकिन वह टस से मसना हुई थी वही खड़ी रही कैसी रिवायत जुर्म ज्यादती या फिर बेटियों को पुराने वक्त की तरह जिंदा दफन ना कर पाए तो ऐसे हालात पैदा कर दे कि इन्हें लाश ही बना दिया जाए जो इनके असू के खिलाफ आवाज ना उठा सके ना बोलकर अपने ऊपर जुल्म को रोक सके उसने पलटक ताई जान से गुस्से से पूछने लगी जवाबन वह बेबसी से सुसर के जलाली चेहरे को देख रही थी जो खतरनाक हद तक दिल दहलाने को काफी थे यह खामोशी नहीं होगी चलो तुम
मेरे साथ हला रखी बड़े कमरे का दरवाजा खोलो फौरन दादा आगे बढ़े और मुलाज मा को हुकम देते हुए सशा का पकड़ से घसीट कर हवेली के अंदरूनी जानिब बढ़े छोड़े मेरा हाथ आप मुझ पर जुल्म नहीं कर सकते मैं यहां से शहर चली जाऊंगी लेकिन आपकी रस्मों रिवाजों को बिल्कुल नहीं मान सकती व अपना बाजू छुड़वाने की कोशिश करती हुई चीखी अब्बा जी छोड़ दे बच्ची है मैं समझाऊ समझ जाएगी इसे यहां के रस्मो रिवाज का इल्म नहीं है ताई जान ने आगे बढ़कर सुसर के आगे हाथ जोड़े लेकिन घसीट कर सीधा उसे बड़े
कमरे के बा हर जा रुके और सशा को अंदर धकेल करर दरवाजे को ताला लगाकर चाबिया मुलाज के हवाले कर द अब तुम इस कमरे में ही कैद रहोगी जब तक तुम्हारे अंदर की अकड़ और हमारे उसूलों से इख्तिलाफ करने से ना रुकी बाहर से दादाजी ने जरसा को अपनी जलाली आवाज में हुकुम दिया और बहू की जानिब मुड़े और तुम खबरदार जो अंदर जाकर दिलज करने की कोशिश की सिर्फ और सिर्फ खाने पीने का सामान पहुंचा सकता इससे ज्यादा मुझे किसी किस्म की खबर सुनने को ना मिले ताई जान सुनकर अफसुर्दगी से बेबस हुई
दादाजी वहां से जा चुके थे जबकि ताई और अनुष जशा की चीखें सुनने लगे जो बाहर निकलने के लिए पुकार रही थी तुम्हारा निकाह मैंने अपने पोते से तय कर दिया है इस खानदान की अगली पेरी के सरदार जरान शाह के साथ आने वाले जुम्मे को तुम्हारा निकाह है अगर कोई जोड़ा पसंद करना चाहो तो कर सकती हो और शहर से किसी सहेली को दावत भी दे सकती हो हम इतनी छूट दे ही सकते हैं तुम्हारी बस जुबानी के बाद भी दो दिन बाद ही दादाजी ने बड़े कमरे का दरवाजा खोला और सशा को अपना
फैसला सुनाते हुए दो मेहरबानियां भी कर द लेकिन वह सुनकर हते से ही उखड़ गई थी मैं यह निकाह ही नहीं कर सकती तो छूट कैसी आप कुछ भी कर ले मगर यह निकाह नहीं होगा मैं आपके देहात जाहिल गवार पोते से शादी नहीं करूंगी आप पैसे हैं तो वह भी आप जैसा सूल परस्त जालिम शख्स होगा सशा ने सफा चट इंकार करते हुए जरान शह को जाहिल गवार कहकर बात खत्म कर दी लेकिन दादाज के चेहरे के उतार चढ़ाओ गुस्से को काबू करने का तासुर दे रहे थे जिसे सर्ष ने एक निगाह डालकर नाक
से मक्खी की तरह उड़ा दिया था तुम फिर से अपनी हदें भूल बैठी हो मैं समझा था कि अब तक सारे बल निकल चुके हो होंगे वो गुस्से से चिल्लाए कुछ भी हो जाए मैं आपके देहाती जाहिल पोती से शादी नहीं करूंगी सरसा ने इनसे दुगना चीख कर कहा हवेली में दाखिल हुए जरान श ने सरसा के मुंह से अपने लिए यह अल्फाज सुने तो उसके चेहरे का रंग जर्द पड़ गया व गुस्से और तैश के आलम में सीधा जरसा के सर पर जा पहुंचा और दादा की जानिब देखा आप निकाह की तैयारी करें दादा
साई निकाह भी होगा और रुखसती भी मैं भी देखता हूं यह कैसे इंकार करती है दादा को बेफिक्र रहने की तल कीन करता हुआ व जर्ष का बाजू था में उसे घसीट कर अपने कमरे में ले आया था वो जो बाजू छुड़वाने की कोशिश कर रही थी सरान को धक्का दिया तो उसने जोरदार थप्पड़ उसके मुंह पर दे मारा तुमने मुझ पर हाथ उठाने की कोशिश की होते कौन हो मुझ पर जबरदस्ती करने वाले मैं तुमसे शादी नहीं करूंगी सुना तुमने सरसा गाल पर हाथ रखे बे यकीनी से चिल्लाई उसकी आंखों में आंसू बहने लगे
थे तो क्या शादी किए बिना शादी का रिश्ता रखना चाहती हो सरान के चेहरे पर कमीन कीी सी मुस्कुराहट थी सर श बदक कर उससे दूर हुई दूर हटो मुझसे कैसे घटिया शख्स हो अपने ही घर की इज्जत में यूं सशा ने लड़खड़ाते हुई जुबान के अल्फाज अदा किए और उसे शर्म दिलाना चाहि जिस पर गुस्से से लाल पीला होने लगा खबरदार इससे आगे कुछ कहा तो वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा और हां निकाह के लिए जुम्मत खुद को आमादा कर लो वरना इसके बाद अंजाम की जिम्मेदार तुम खुद होगी रबू प उंगली रखे
व इसे खामोश रहने की धमकी दे रहा था साथ ही बाजू से पकड़कर उसे अपने कमरे से बाहर धक्का दिया और दरवाजा बंद कर दिया मैं तुम जैसे जाहिल से निकाह नहीं करूंगी सुना तुमने सबको बता दो कभी नहीं करूंगी जशा बंद दरवाज के पार सरदार जरान को चीख चीख कर अपना इंकार सुना रही थी लेकिन अब अंदर सिर्फ और सिर्फ खामोशी थी मैं यह निकाह नहीं कर सकती हाल आप समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही जानती है ना कि बाबा ने मेरा रिश्ता समीर से तय किया है फिर आप क्यों खामोश है उसके
इनकार भूख हरताल के बावजूद कोई भी जर श को नहीं बचा पाया था दिन गुजरते गए और बिलखिरिया उसने खाला के गले लगकर उनसे इल्तजा की वो बचा ले लेकिन खाला का बे तासुर चेहरा और नम आंखें उसकी उम्मीदों पर पानी फेर रही थी वर्शा मेरी बच्ची चुप कर जाओ ये लोग बहुत जालिम है क्यों अपनी जिंदगी को जहन्नुम बनाना चाहती हो मैंने बहुत कोशिश की लेकिन किसी ने मेरी एक नहीं सुनी तुम्हारे दादा तो हते से ही उखड़ चुके थे कल भी मैंने आखिरी बार बोला लेकिन आगे से उन्होंने तुम्हारे और समीर के दरमियान
चक्कर चल रहा है यह बोलकर मेरे रोंगटे खड़े कर दिए मैं तुम्हारी जात पर कीचड़ नहीं उछालने दे सकती जो हो रहा है होने दो खाला ने उसे अपने सीने से लगाते हुए चीख पुकार से लेकिन वो थी के बस नफी में सर हिलाते हुए एहतेजाज बोली कैसे होने दू खाल और क्यों मैं जीती जागती इंसान हूं जानवर नहीं कि इनके जुल्म सहती रहूं और खामोश भी रहूं इतने दिनों से वह सिर्फ एक बार रुई थी अब भी हालात का रुख तबाही की जानिब देखकर उसे उम्मीद थी कि शायद कुछ हो जाएगा खाना या समीर
उसकी बेबसी देखकर कुछ तो करने की कोशिश करेंगे सरान अच्छा लड़का है पुलिस में है और व अपने दादा पर नहीं गया मुझे लगता है कि वह तुम्हारा बेहतर ख्याल र सकता है ला ने जरान शह की तारीफ की तो उसका हलक कड़वा हो गया मुझे समीर से बात करनी है आप एक बार मेरा से राबता करवा द उसकी बात सुनकर खाला ने जर्ष के मुंह पर अपना हाथ रख दिया हर आसपास नजरें दौड़ाई कहीं किसी ने यह बात सुन ना ली हो समीर तुमसे नहीं मिल सकता वरना यह लोग उसे मार भी सकते हैं
निकाह की तैयारियां हो रही है थोड़ी देर में बरादरी के लोग और औरत भी इकट्ठी हो जाएंगी कुछ मत बोलना खुदारा खाला ने अबकी मर्तबा हाथ जोड़े तो वह बेबसी से वहीं हार बैठी उसे लगा कि अब वह चारों खाने चित होकर भी हार चुकी थी मजीद बचाओ के लिए हाथ पैर मारना बेकार है बेहतर है कि वह खुद ही हार मान ली जाए स व खामोश हो गई थोड़ी ही देर के बाद अनूश और कई औरतें ताई जान के साथ कमरे में दाखिल हुई थी ताई जान ने उसके सर पर सुर्ख ओड़नी डाली निकाह
हुआ तो वह बेजान मुजस्पे की मानिंद जम गई जैसे वह पत्थर की हो चुकी है सबने गले लगाकर मुबारकबाद दी लेकिन वह सभी को बस खामोश नजरों से देखती गई निकाह के बाद उसे तैयार करके सरदार जरान शह के कमरे में ले जाया गया कमरे की सजावट देखकर उसे हॉल उठने लगे थे भला यह शादी कोई बाहे में रसा मंदी की थी जो सजावट की गई व सर टकर सोच में गुम थी कि कमरे में जरान श दाखिल हुआ उसे देखकर वह भारी जोड़ा उठाए और बाहर जाने लगी यतम ही वह सामने आया और सवाल
करने लगा कहां जा रही हो जीत तो चुके हो मुझे हासिल करके अब क्या खाना पीना सांस लेना उठना बैठना भी तुम्हारी मर्जी से करूंगी नजरे झुकाए जवाब देकर रास्ते से हटने का इंतजार करने लगी नहीं मेरा मतलब है घर में मेहमान है यह कमरे से बाहर जाने पर 100 सवाल करेंगे तुम बैड प सो जाओ मैं सोफे पर सो जाता हूं सरान के लहजे में नरमी के साथ समझाने वाला अंदाज देखकर वह चौकी कल तक तो जलाली शख्स थे आज इस मेहरबानी की वजह उसने गुस्से से पूछा तो वह पहले गड़बड़ा गया फिर लहजा
हवार करके बोला हग रास नहीं आ रही चलो सोफे पर सो जाओ फिर उसने खामोशी बहस मुल्तवी करके बैठ पे जा के सोना मुनासिब समझा इतने दिनों की लड़ाई बहस के चक्कर वो थक चुकी थी कहां जा रही हो सुबह व उठी तो मुहा धोकर कमरे से बाहर जाने लगी सारांश जो सोफे पे आड़ा तिरछा सोया था सुबह सवेरे ही जाग चुका था सरसा को बाहर जाते देखकर पूछने लगा बाहर जा रही हूं नजर नहीं आ रहा यह अंधे हो पलटकर जशा ने नागा बरी से जवाब दिया उसे अपने सामने जरान शह के वजूद देखकर
शदीद गोफत हो रही थी जभी बाहर भागने का इरादा किए हुए थी कमरे में हम अजनबी हैं लेकिन बाहर एक कपल है हमें अच्छे से खुशहाल जोड़े की तरह रवैया इख्तियार करना पड़ेगा सरान ने उसे गांव के उसूलों के साथ हस्त वाजी जिंदगी को बेहतर दिखाने का मशवरा दिया अच्छे रवैए के लिए इंसान के सामने अच्छा शौहर भी होना चाहिए लेकिन मेरे सामने एक जाहिल देहाती है और ऐसे में समझौता किया जा सकता है खुशहाल जोड़ों की तरह रहा नहीं जाता वह नफरत से बोली तुम हस से बढ़ रही हो मत भूलो कि मैं एक
मर्द हूं अपने जाहिरा पन पर आ गया तो मुंह छुपाने को जगह नहीं मिलेगी सारांश सोफे से उठकर उसके सामने आ खड़ा हुआ और शदीद गुस्से से सरसा का बाजू थामकर उसे अपनी जानिब घसीटा उ लड़ खड़ा कर उसके सीने से लगते लगते बची थी और एकदम बदक कर पीछे हुई इसके अलावा मुझे तुमसे और कोई तवक भी नहीं है संभलकर उसने कहा वरना जरान शह के इरादे जानकर व दिल ही दिल में खौफ जदा हो चुकी थी जर श जबान संभाल कर बात करो वो चीखा चीख मत मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूं कि जो
चाहोगे वैसा ही होगा अगर जबरदस्ती शादी कर चुके हो तो मैं जानती हूं तुम जबरदस्ती सारे हक भी वसूल कर सकते हो ठहरी जो देहाती तुम जैसे के लिए भला किसी के जज्बात मायने रखते हैं दूब दू जवाब देकर इससे धकेल कर बाहर जाने को लपकी लेकिन उसने दोबारा बाजू पकड़कर बेड पर धक्का देते हुए उसके कान के करीब जाकर राते हुए कहा मैं चाहूं तो अभी तुम्हारी जुबान को लगाम लगा दूं लेकिन इसका जवाब तुम्हें किसी वक्त भी दूंगा हो नहा कोई जवाब होगा तो तब दोगे ना सरसा बड़बड़ आती रही सारांश वहां से
जा चुका था लेकिन उसका दिल खौफ से कांप रहा था अगर व अपने रादों में कामयाब हो गया तो शादी को दो हफ्ते हो चुके थे इन दोनों में उस दिन के बाद बातचीत बराय नाम ही होती थी जशा दादा से हम कलाम नहीं होती थी अलबत्ता ताई जान और अनुष से बातचीत कर लेती थी जरान भी किसी काम के सिलसिले में दूसरे शहर जा चुका था वह भी खुश थी कि ना सामना जितना कम हो इतना ही अच्छा है क्या हुआ है क्यों रो रही हो सशा बैठी हुई थी कि अचानक अनुष रोते हुए
चली आई उसे यं रोते हुए पहली बार देखा था पूछने की कोशिश की तो व इसकी गले जा लगी दादा साई ने मेरा रिश्ता खानदान के एक लड़के से तय कर दिया है सर्ष ने सुनकर इसका कंधा सहला करर खुसे दूर करके उसकी आंखों से आंसू साफ किए इसमें रोने की क्या बात है हैरत से पूछा गया वो लड़का मुझसे 10 साल बड़ा है अनुष्य की बात सुनकर व यदम गुस्से में आ गई थी अगर शादी करनी ही है तो किसी हम उम्र से तय कर देते इस जुर्म की क्या जरूरत थी सर्ष को दादा
साई के उसूलों से सख्त नफरत होने लगी जब अनुष ने इसे इसकी वजह बताई जिन लड़कियों की उम्र के हिसाब से जोर ना मिले तो खानदान में करने की शर्त की वजह से उम्र से 10 साल बड़े इंसान से तय कर देते हैं यह ज्यादती है ताई जान और तुम्हारे भाई को क्या हो गया है अफसोस से सर हिलाते हुए जरान के बारे में पूछ बैठी भाई को तो मालूम ही नहीं और अम्मी कुछ भी नहीं कह सकती सरान की लाइल में का सुनने के बावजूद उसे कोई उम्मीद ना थी कि वह बहन के खिलाफ
एहतेजाज करेगा आप कुछ करें ना भाभी प्लीज अनुष ने दर्शा के गले रखते कहा तो व बेबस हुई भला खुद को इन रस्मों से बचा नहीं पाई थी उसे क्या बचा सकेगी रोना तो बंद करो अपने भाई को आने दो फिर कुछ करते हैं उसे खामोश करवाकर वह गहरी सोच में घम रही लेकिन कोई सिरा ना मिला जिससे वह कुछ कर पाती यह सोचकर चुप हो गई कि शाम को जरान शह की आमद यकीनी थी उसके आते ही वह बात करेगी शायद वह समझ जाए आप बिना मेरी मर्जी के अनुशे का रिश्ता नहीं कर सकते
व मेरी बहन है कोई खिलौना नहीं कि सौदेबाजी कर दू सर्ष सोई हुई थी जब नीचे से चीख पुकार की आवाजें आने लगी थोड़ा गौर किया तो मालूम हुआ कि रान श वापस आ गया है दुपट्टा गले में डालते व नंगे पांव नीचे भागी चली आई आकर मालूम हुआ कि रान को दादा साई के फैसले का इल्म हो चुका है और वो इनके सामने दीवार बनकर अपनी बह के लिए खड़ा हो चुका है सशा के लबों पर एक गहरी मुस्कुराहट आई यह तुम किस लहजे में बात कर रहे हो दादा यं बे यकीनी से पोते
को देख रहे थे जैसे उसने कोई अनोखी बात कह दी हो या शायद वह जरान शह से बेहद उम्मीदें वाबस्ता रख चुके हो जबी इन्हे इस लहजे की तवको ना थी इसी लहजे में जैसे करनी चाहिए आप अनुष को लावारी समझ रहे होंगे लेकिन इसका भाई अभी जिंदा है सर नहीं है कि यतीम समझकर कुछ भी कर ले जारा ने एकदम पलटक जशा की जानिब इशारा करते हुए दादा साई को हकीकत का आईना दिखाने की कोशिश की तो वह पथरीली निगाहों से जान से ज्यादा अी इस पोते को देखने लगे ये तुम इस लड़की की
पढ़ाई गई पट्टी पढ रहे हो तो तुम गलत कर रहे हो मैं तुम्हें जायदाद से बेदखल कर दूंगा इन्हे अपना पड़ा छोटा महसूस हुआ तो आखिरी दांव खेलने की कोशिश की जिस उम्मीद थी कि जरान शाह की लगा में वो खींच कर रख सकते थे मगरूर अंदाज में जायदाद की बात करते हुए वो तंजिया साह से थे कौन सी पट्टी की बात कर रहे हैं मैं आपके इस घर जायदाद हर चीज पर लानत भेजता हूं अपनी मां बहन को लेकर चला जाऊंगा रहिए आप अपनी सो कॉल्ड रस्मों रिवाजों की दुनिया में रान ने एकदम ही
जमीन पर थोक कर उनका यह गरूर खाक में मिला दिया था यकीनन दादा साई का आखरी बार भी जाया हो चुका था कहानी बदल चुकी थी सरदार जरान शाहने असूल के दरवाजे का तसल्ली तोड़ने को जरप लगा द थी दादा साई पोते बहू और पोतियो को एक साथ देखकर हार चुके थे दूसरे दिन ही दादा साई ने रिश्ते से इंकार कर दिया वह काफी हद तक दिल में डर चुके थे सारा शह की बहस और फैसला सुनकर उन्हें अंदाजा हो चुका था कि अब जिद या किसी किस्म की मर्जी चलाने का कोई फायदा नहीं है
अगर उसी रात तबीयत खराब ना होती तो जरान शह हवेली छोड़ने का इरादा भी कर चुका था लेकिन दादा साई की तबीयत को मद्देनजर रखते हुए उसने यह फैसला भी मुल्तवी कर दिया तैजान बातचीत करती थी अनुशी जरान और सशा मुकम्मल खामोशी तियार किए हुए थे अभी सशा कमरे में किताब पढ़ रही थी कनू से चली आई शुक्रिया भाभी आपकी वजह से मैन रस्मों की भेड़ चढ़ने से बच गई उसकी बात सुनकर जशा ने किताब साइड पर रखी और हैरान कीी से देखने लगी मेरी वजह से कैसे वह सोच में पड़ गई क्योंकि जरान की
इससे कोई बात ना हुई थी हल भत्ता ताई जानने उसे फोन करके अनुष्य के रिश्ते के मुतालिक जरूर बताया था आप ही की वजह से तो बची हूं भाई की शादी जैसी भी हुई लेकिन आपसे होने के बाद भी वह बातों को समझ पाए हैं इन्हें आपका दुख समझने के बाद मेरी जिंदगी का फैसला करने में आसानी हुई वरना वह मुझे भी इन रस्मों के आगे सूली पर लटका देते वभी भी इस मेहरबानी और जान खुलासे की वजह से रशा को करार दे रही थी और साथ ही जरान शह के दुख समझने वाली बात पे
उसे रसी हुई मेरे साथ शादी तो इनकी जद और आना थी भला मेरा तोत क्यों समझा जाएगा व अफसुर्दगी से बड़बड़ा रही जिसे अनुष ने बखूबी सुना था दादा के फैसले से पहले ही भाई आपको कई कई लमहे खड़े देखते रहते थे अनुष के इंके शफ पर जरसा चौकी झटके से सर उठाकर बे यकीनी से देखा तुम्हें किसने कहा व बेतिया पूछ बैठी क्योंकि मैंने अपनी आंखों से देखा है अनुष ने मुस्कुरा कर इत्तला दी अचानक ही कमरे में जरान श चला आया हराते ही अनुष को घड़ते हुए बोला अनुष अम्मी बुला रही है मुझे
तुमसे बात कर सरान अनुष के जाते ही यदम बोला व जो बे यकीनी से हकीकत जान चुकी थी अब सारी कहानी समझने के बाद सर झुकाए बैठी रही ह बोले झुके सर के साथ उसने किताब उठा ली जनुष के आने से पहले व पढ रही थी एक साथ बैठकर बात हो सकती है सरान ने पास बैठने की इजाजत मांगी तो उसने बेतिया सर उठाया सारांश की निगाहे झुकी हुई थी मैं सुन रही हूं क्या तुम मेरी गलतियां माफ करके नई जिंदगी शुरू करने में मेरा साथ दे सकती हो माफी की दरख्वास्त के साथ लहजे में
गोया लते जाथ जाने क्यों से जरान श पे तस आया मैं आपको माफ कर चुकी हूं और मुझे अच्छा लगा कि किसी का ना सही लेकिन अपनी बहन का हक में आवाज बुलंद कर पाए हैं उसने फिर भी लहजा अजनबियों का सरक कर जवाब दिया मुझे माफ कर दो बस तुमने ऐसे अंदाज में बात की थी कि मुझे अपना बुरा रवैया इयार करना पड़ा वरना मैं तो तुमसे मोहब्बत करता था जरान श उसके पैरों में जा बैठा था जर श को लगा कि बेबसी के आलम में कहीं वह पांव ना पकड़ ले उठकर बैठ गई
और शिकवा करते हुए बोली इंसान जिससे मोहब्बत करता है उसकी गलतियां भी माफ कर देता है तो आप भी कर देते आगे से ऐसा नहीं होगा अब तुम माफ नहीं करोगी देखो तुम्हारी वजह से मैं दादा साई के फैसलों के दरमियान रुकावट बन चुका हूं उसने कानों को हाथ लगाते हुए माफी तलब की तो सर्ष ने सर हिलाकर माफ कर दिया दोनों बे इख्तियार मुस्कुराए थे अगर आपको हमारी कहानियां पसंद आ रही हैं तो हमारी चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन को प्रेस करना मत भूलिए का ताकि हमारी हर कहानी आप तक बर वक्त
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