अरे भाभी आप पैसों की चिंता मत करिए। मेरे पति बहुत पैसे कमाते हैं। आप बस हमारे साथ घूमने चलिए। सारा खर्चा वही उठा लेंगे। यह सुनकर शिल्पा ने विनम्रता से कहा, नहीं दीदी आप लोग जाइए। हम फिर कभी आपके भैया के साथ चले जाएंगे जब वो घर आएंगे। शिल्पा की बात सुनकर उसके साथ मंजुला देवी तंज कसते हुए बोली, अरे बेटी बहू को एक बार और बोल देगी तो यह तुरंत तैयार हो जाएगी। यह बस ऊपर से ना करती है पर अंदर ही अंदर घूमने के लिए मरी जाती है। मैं इसे अच्छी तरह से जानती
हूं। फिर वह कनक की ओर देखते हुए बोली तू अपनी छोटी भाभी कनक को ले जा। वो ना तो तेरा पैसा खर्च करने देगी और ना ही मुंह बनाकर बैठेगी। यह तो ऐसी औरत है। ना ही इसके पास पैसे हैं। ना कभी ढंग से बोलती है। शिल्पा अपनी सास मंजुला देवी की कटाक्ष भरी बातें सुनकर चुप हो गई। उसका मन उदास हो गया और वह अपने पुराने दिन याद करने लगी। वह समय याद आ गया जब उसकी शादी युवराज से तय हो रही थी। उस वक्त युवराज एक बड़ी कंपनी में मैनेजर के पद पर काम
करता था और उसकी सैलरी लगभग ₹1.5 लाख महीने की थी। शिल्पा के पिता सुरेश बाबू जब शिल्पा का रिश्ता लेकर युवराज के घर पहुंचे तो उसकी मां मंजुला देवी ने बिना हिचकिचाए कहा, देखिए जी, लड़का हमारा नौकरी करता है। वह भी मैनेजर है। कम से कम 15 लाख का दहेज तो बनता ही है। यह सुनते ही सुरेश बाबू का चेहरा उतर गया। उन्होंने विनम्रता से हाथ जोड़ते हुए कहा, बहन जी मेरी तीन बेटियां हैं। अगर सिर्फ एक होती तो शायद मैं 15 लाख का इंतजाम कर भी लेता। आप कृपा करके 8 लाख में बात तय
कर लीजिए। मंजुला देवी का चेहरा सख्त हो गया। उन्होंने तीखे स्वर में कहा भाई साहब जुबान तो आपकी बड़ी मीठी है लेकिन जमाना तो देखिए आजकल लोग लाखों ले रहे हैं और फिर हमारी युवराज की सैलरी देखिए 1.5 लाख से ऊपर है। आप सोचिए ऐसी नौकरी वाला लड़का हाथ से जाने देंगे आप। युवराज पास ही खड़ा यह सब देख और सुन रहा था। जब इसने अपने होने वाले ससुर को हाथ जोड़ते गिड़गिड़ाते देखा तो उससे रहा नहीं गया। वह अपनी मां के पास आकर उनके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, मां 9 लाख में तय
कर लीजिए। मंजुला देवी ने बेटी की ओर देखा और थोड़ी देर बाद ठंडी सांस लेते हुए बोली, जब तू बोल रहा है तो ठीक है। 9 लाख में ही सही। यह सुनकर सुरेश बाबू ने राहत की सांस ली। उन्होंने मिठाई का डिब्बा निकाला और युवराज और मंजुला देवी को खिलाते हुए बोले तो फिर जल्दी ही शादी की तारीख तय करते हैं। लेकिन उनकी मन में चिंता अभी भी बनी हुई थी। ₹9 लाख जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। फिर भी युवराज की नौकरी और व्यवहार देकर उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी शिल्पा इस घर में
खुशी से रहेगी। घर लौटकर जब उन्होंने सारी बात शिल्पा और उसकी मां को बताई तो शिल्पा चिंतित होकर बोली पापा आप इतना पैसे कहां से लाएंगे? सुरेश बाबू ने उसके सिर पर प्यार से हाथ रखते हुए कहा, बेटा तेरा बाप अभी जिंदा है। तू इसकी चिंता मत कर। बस अपनी शादी की तैयारी कर। यह सब सुनकर शिल्पा मुस्कुरा तो दी, लेकिन उसके दिल में चिंता थी। वह जानती थी कि पापा के पास इतने पैसे नहीं है और घर की बड़ी बेटी होने के नाते उसके मन में यह विचार आया कि उसके पीछे दो छोटी बहनें
और हैं जिनकी भी शादी करनी है। फिर भी अगले दिन से शादी की तैयारियां शुरू हो गई। बहुत मेहनत और कर्ज के साथ सुरेश बाबू ने अपनी बेटी की शादी धूमधाम से कर दी। जब शिल्पा विदा होकर युवराज के घर पहुंची तो जैसे ही उसने गृह प्रवेश किया उसकी ननंद दीपाली और सास मंजुला देवी ने मुस्कुराते हुए बोला आओ बहू यह तुम्हारा ही घर है और यह सुनकर शिल्पा के दिल के थोड़ा सुकून मिला। उसे लगा शायद यह लोग उसे अपनाएंगे उसे सम्मान देंगे। उसी समय उसका छोटा देवर संदीप शरारत से उसकी गोद में आकर
बैठ गया और बोला भाभी मेरा नेक यह सुनकर घर के बाकी सदस्य भी हंस पड़े। दीपाली ने कहा हां भाभी आपका तो एक ही देवर है। कुछ अच्छा सा नेक दीजिए। शिल्पा मुस्कुराई और अपने पर्स से ₹10,000 निकालकर संदीप के हाथ पर रख दिए। यह वही पैसे थे जो उसकी मां ने उसे विदाई के समय दिए थे। धीरे-धीरे शिल्पा उस घर में घुलने मिलने लगी। उसकी सास मंजुला देवी और ननद दीपाली ने आगे पीछे घूमने लगी क्योंकि युवराज अच्छी खासी पैसे कमाता था। सबका व्यवहार शिल्पा के प्रति बेहद शौ और सम्मानजनक हो गया था। करीब
1 साल बाद घर में संदीप की शादी की बात चली। एक दिन कनक के पिता उसके घर आए और मंजुला देवी से संदीप के लिए अपनी बेटी के रिश्ते के लिए कहा। संदीप एक छोटी-मोटी कंपनी में काम करता था। मंजुला देवी ने इस बार केवल ₹5 लाख दहेज की मांग की। संदीप और कनक की शादी भी धूमधाम से हो गई। शादी के बाद धीरे-धीरे सास मंदुला देवी और दीपाली का झुकाव शिल्पा की तरफ ज्यादा हो गया। वे दोनों हर बात में शिल्पा से सलाह लेने लगती। उसे मानसान देने लगती। जबकि कनक को अक्सर नजरअंदाज कर
दिया जाता। यह देखकर कनक को बहुत दुख होता। पर वह चुप रहती। एक दिन यह बात वह संदीप से कह बैठी। संदीप ने शांत स्वर में कहा। कोई बात नहीं कनक जो भाग्य में लिखा होता वही मिलेगा। और फिर हंसते हुए बोला कहा भी जाता है देने वाला जब देता है तो छप्पर फाड़ के देता है और जब लेता है तो छप्पर फाड़ के ले भी लेता है। एक सुबह युवराज ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था लेकिन रास्ते में भारी ट्रैफिक के कारण उसे देर होने लगी। जैसे ही वह ऑफिस पहुंचा उसके बॉस
पहले ही उसे गुस्से में थे। सबके सामने उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, तुझे इतनी सैलरी में लेट आने के लिए देता हूं क्या? यह बात युवराज को बहुत अपमानजनक लगी। वह खुद को संभाल नहीं पाया और गुस्से में बोल पड़ा। अगर आप सैलरी देते हैं तो हम भी काम करते हैं। आप बैठने का पैसा नहीं देते मुझे। यह सुनकर बॉस का पारा चढ़ गया। वह तमतमाते हुए बोले, बहुत ज्यादा जबान चलने लगी है तुम्हारी। आज शाम तक तुम्हारा रिजाइनिंग लेटर मेरी टेबल पर होना चाहिए। युवराज ने बिना झिझकते हुए गुस्से में जवाब दिया, ठीक है, दे
दूंगा। मेरे पास टैलेंट है। मैं किसी और कंपनी में नौकरी कर लूंगा। लेकिन मैं अपमान सहकर नहीं जी सकता। वह तुरंत अपने कंप्यूटर पर जाकर रिजाइनिंग लेटर टाइप किया और बॉस को सौंप दिया। युवराज के इस आत्मविश्वास से बॉस और भड़क गए। उन्होंने आंखें तरते हुए कहा, अब देखना मैं तेरा ऐसा एक्सपीरियंस बनाऊंगा कि कोई भी कंपनी तुझे नौकरी नहीं देगी। यह सुनकर युवराज का गुस्सा शांत हो गया। वह घबराते हुए बोला, "सर, मैं कंपनी छोड़ रहा हूं, लेकिन मेरे साथ ऐसा मत कीजिए। मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। लेकिन बॉस ने उसकी एक ना
सुनी। वह मायूस होकर अपने किराए के रूम पर पहुंचकर शिल्पा को फोन करके पूरी बात बता दी। यह सुनकर शिल्पा भी प्रसन्न रह गई। उसे सबसे पहले अपनी ननद दीपाली को 2 महीने बाद होने वाली शादी की चिंता होने लगी। इधर जब मंजुला देवी को इस बात का पता चला तो वह तुरंत युवराज को फोन लगाकर गुस्से में बोली तुझे तो थोड़ा भी गुस्सा कंट्रोल नहीं होता है। अब तू क्या करेगा? दीपाली की शादी भी 2 महीने बाद है। युवराज बोला मां वो सबके सामने मेरी बेइज्जती कर रहा था। गुस्से में मुझसे गलती हो गई।
मुंह से रिजाइन शब्द निकल गया। मंजुला देवी ने सख्त लहजे में कहा तो अब सुन ले। जब तक तू नौकरी नहीं ढूंढ लेता घर मत आना। यह सुनकर युवराज को गहरा झटका लगा। वह अंदर ही अंदर टूट गया। वह सोचने लगा मैंने 7 साल तक अपने सपनों को बुलाकर हमेशा घर वालों की जरूरत का ख्याल रखा। घर पर पैसे भेजा। उनकी हर जिम्मेदारी निभाई और आज जब मैं मुश्किल में हूं तो यही लोग मुझसे अकेला छोड़ रहे हैं। तभी शिल्पा का फिर से फोन आया। युवराज ने गुस्से में फोन उठाया और बोला हां बोलो। अगर
तुम्हें भी कुछ सुनाना है तो सुना दो। लेकिन शिल्पा ने बड़े प्यार से कहा युवराज जी आप टेंशन मत लीजिए। आपके पास टैलेंट है। आप जरूर नौकरी पा लेंगे। मैं हमेशा आपके साथ हूं। शिल्पा की बातों ने युवराज को थोड़ा सुकून दिया। अगले ही दिन उसने नई नौकरी की तलाश शुरू कर दी। वह एक-एक कंपनी में गया इंटरव्यू दिए। लेकिन जैसे ही पुराने बॉस द्वारा दिया गया खराब एक्सपीरियंस देखते ही उसे रिजेक्ट कर दिया जाता। बार-बार हर जगह से रिजेक्ट किया जाने लगा। उसके आत्मविश्वास को तोड़ने लगा। उधर कुछ ही दिन में संदीप का प्रमोशन
हो गया और उसकी सैलरी 12 लाख सालाना हो गई। जब उसने घर आकर यह खबर दी तो मंजुला देवी और दीपाली खुशी से झूम उठे। दीपाली ने शिल्पा की ओर तंज कसते हुए कहा मां देखो ना कुछ लोग को कंपनी से निकाला जा रहा है और हमारी संदीप भैया को प्रमोशन हो रहा है। यह सुनकर शिल्पा को बहुत चोट पहुंची। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। शिल्पा अब खोए-खोए रहने लगी। वह मंजुला देवी और दीपाली पूरी तरह कनक की चापलूसी करने लगी। उसे हर बात में शामिल किया जाने लगा। उसकी तारीफ की जाने लगी। यह सब
देखकर शिल्पा को गहरा अफसोस हुआ। उसने मन ही मन सोचा कैसा घर है यह। यहां इज्जत और प्यार उस बहू को मिलता है जिसके पति की कमाई ज्यादा होती है। वह दिन आ ही गया जब दीपाली की शादी थी। युवराज और ने अपनी पूरी जमा पूंजी दीपाली की शादी में लगा दी। जब शिल्पा ने यह देखा तो वह बोली युवराज जी कुछ पैसे सेविंग भी कर लीजिए। आपकी नौकरी नहीं है। बाद में आपको सबके सामने हाथ फैलाना पड़ेगा। लेकिन युवराज ने शिल्पा की बात अनसुनी कर दी। दीपाली की शादी धूमधाम से कर दी। अब युवराज
के पास सारे पैसे खत्म हो गए थे। एक दिन शिल्पा के घर में पूजा थी। युवराज और शिल्पा पूजा में जाने के लिए तैयार हो रहे थे। तभी युवराज का जूता फट गया। उसने अपनी मां से नए जूते के लिए पैसे मांगे। मंजुला देवी ने उसे ₹2000 देते हुए कहा, युवराज संदीप से बात कर लो। शायद वह तुम्हारी नौकरी अपनी कंपनी में दिलवा दे। वह तो अब मैनेजर भी बन गया है। यह सुनकर युवराज को बहुत दुख हुआ। लेकिन उसने मुस्कुराते हुए कहा, ठीक है मां, पूजा होने के बाद मैं बात कर लूंगा। शिल्पा के
मायके में पूजा खत्म होने के बाद सभी लोग एक साथ बैठे थे। तभी शिल्पा के पिता ने युवराज से पूछा बेटा तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही है? युवराज ने शिल्पा की ओर देखा और धीरे से कहा पापा जी मुझे कंपनी से निकाल दिया गया है। यह सुनकर वहां बैठे सभी लोग हैरान हो गए। लेकिन कोई भी डर के मारे कुछ नहीं बोलता ताकि दामाद जी को बुरा ना लगे। फिर शिल्पा की मां ने शिल्पा से धीरे से कहा। इसी दिन के लिए मैंने कर्ज लेकर 9 लाख का दहेज दिया था। यह सुनकर युवराज को बुरा
तो लगा लेकिन उसने चुपचाप सुना। यह खाना खाकर घर लौट रहे थे। तो युवराज ने शिल्पा से पूछा शिल्पा तुमने अपने मां-बाप को हमारे हालात के बारे में नहीं बताया था क्या? शिल्पा बोली युवराज जी मैंने मायके में आपके बारे में नहीं बताया था क्योंकि वहां आपकी बहुत इज्जत होती है। मैं नहीं चाहती कि मेरे घर में आपकी बेइज्जती हो। यह सुनकर युवराज चुप हो गया। घर लौटकर युवराज ने संदीप से नौकरी के लिए बात की। संदीप ने प्यार से कहा, भैया कल ही आ जाइए। लेकिन आपको मेरे अंडर में काम करना होगा। अगर अच्छा
काम किया तो प्रमोशन भी मिलेगा। युवराज ने हामी भर दी और अगले दिन से काम करने जाने लगा। घर में अब भी मंजुला देवी कनक की चापलूसी करती रही। वह शिल्पा से कोई बात नहीं करती। अगले दिनपाली घर आई और शिल्पा से तंज कसती हुई बोली भाभी चलिए मुझे शॉपिंग पर जाना है और आप भी घूम लीजिए। आप पैसे की वजह से नहीं जाती। चलिए मैं आपको घुमा दूंगी। शिल्पा ने शांत स्वर में कहा नहीं दीदी मैं आपके पैसे से नहीं जाऊंगी। यह सुनकर दीपाली बोली अरे भाभी पैसे की चिंता मत करिए। आपके नंदोई खूब
पैसे कमा रहे हैं। यह सुनकर सिलवा को बुरा लगा और वह गुस्से में बोली, दीदी, मैंने कह दिया ना, मैं नहीं जाऊंगी। यह कहकर अपने कमरे में चली गई। अब कई महीने ऐसे ही तारीफ सुनने के बाद युवराज की मेहनत रंग लाई। उसका प्रमोशन हो गया और संदीप से भी ज्यादा सैलरी पाने लगा। जब मंजुला देवी को यह पता चला तो शिल्पा के पास आई और बोली, देख बहू, संदीप के कारण ही उसका प्रमोशन हुआ। तभी संदीप और युवराज घर आ गए। संदीप ने कहा नहीं मां यह प्रमोशन भैया की मेहनत की वजह से हुआ
मेरी वजह से नहीं अब हमें उनके अंडर में काम करना होगा यह सुनकर मंजुला देवी का चेहरा उतर गया तभी कनक शांत स्वर में बोली मां जी 7 साल तक भैया की सैलरी डेढ़ लाख से ऊपर थी तो आप शिल्पा भाभी का मान करती थी अब जब भैया का बुरा समय आया तो आप मेरी मान करने लगी यह तो गलत है ना मां जी संदीप भी बीच में बोल पड़ा हां मां पैसे देखकर मां का प्यार कम ज्यादा नहीं होना चाहिए। समय कभी एक जैसा नहीं रहता। सबके जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। बुरे वक्त
में अपनों का साथ देना चाहिए। लेकिन आप हमेशा पैसों वालों को ज्यादा प्यार देती हैं। यह गलत है। यह सुनकर मंजुला देवी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने युवराज का हाथ पकड़ कर कहा, बेटा, उसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे माफ कर दो। फिर शिल्पा की ओर मुड़ी और बोली, बहू, मैंने तुम्हें बहुत ताने मारे हैं। मुझे माफ कर दो। शिल्पा ने उनका हाथ पकड़ते हुए कहा, मां जी, माफ कीजिए। बस कभी दो बेटों और बहुओं के बीच भेदभाव मत कीजिएगा। फिर मंजुला देवी ने चारू को
गले लगा लिया और बोली, अब से कोई भेदभाव नहीं होगा बेटा। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे माफ कर दो। अब सभी लोग खुशी-खुशी रहने लगे। क्या एक मां को अपने बेटों और बहुओं के बीच में पैसे देकर भेदभाव करना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। अगर आपको हमारी कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें धन्यवाद।