आपने कभी सुना है कि कैसे एक छोटा सा दान किसी की किस्मत बदल सकता है इस कहानी में हम जानेंगे कि जब भाग्य भी किसी के खिलाफ हो तब कैसे सच्चे मन से किया गया दान मौत को भी मात दे सकता है यह कहानी एक ऐसे राजा और रानी की है जिनकी जिंदगी में कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उनकी पूरी किस्मत पलट दी नमस्कार दोस्तों विजडम बोदी जो शिवजी के बड़े भक्त थे उनकी सुबह मंदिर में पूजा से शुरू होती थी और वे अपने राज्य में न्याय और धर्म का
पालन करते थे राज्य के लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे लेकिन उनकी एक बड़ी चिंता थी उनके कोई संतान नहीं थी राजा राजवीर और रानी सुमित्रा की उम्र ढल रही थी और संतान ना होने के कारण वे भीतर से बहुत दुखी थे एक दिन जब राजा रानी मंदिर जा रहे थे रास्ते में उन्होंने देखा कि एक फल बेचने वाला और उसकी पत्नी राजा को देखते ही मुंह फेर लेते हैं राजा को यह बात अजीब लगी लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया और मंदिर चले गए पूजा के बाद राजा ने अपने सैनिकों को उस फल बेचने
वाले को महल में बुलाने का आदेश दिया जब वह महल में आया तो राजा ने उससे पूछा तुमने मुझे देखकर मुंह क्यों फेर लिया था क्या मैं जान सकता हूं ऐसा क्यों किया तुमने फल बेचने वाले ने जवाब दिया महाराज आप बहुत दयालु और न्यायप्रिय हैं लेकिन लोगों का मानना है कि जिस राजा की कोई संतान नहीं होती उसका चेहरा देखना अशुभ होता है इसलिए मैंने आपका चेहरा देखकर मुंह फेर लिया राजा यह सुनकर स्तब्ध रह गए उन्हें बहुत बुरा लगा लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि बिना संतान के उनका राज्य का भविष्य में संकट में
पड़ सकता है उन्होंने रानी सुमित्रा से कहा लोग अब हमारा चेहरा देखना भी पसंद नहीं करते क्योंकि हम संतान हीन हैं पुत्र प्राप्ति के लिए हमें शिवजी की विशेष पूजा और हवन करना होगा शायद तभी हमें संतान की प्राप्ति हो राजा और रानी ने शिवजी के मंदिर में एक बड़ा हवन और पूजा करवाई लेकिन महीनों बीत गए और फिर भी उन्हें संतान का सुख नहीं मिला वे बहुत निराश हो गए और सोचने लगे कि उनकी प्रार्थना हों का फल उन्हें क्यों नहीं मिल रहा क्या उनका जीवन बिना पुत्र सुख के ही खत्म हो जाएगा एक
दिन राजा राजवीर के महल के बाहर एक साधु आया राजा ने आदेश दिया कि उस साधु को सम्मान पूर्वक महल में लाया जाए साधु ने राजा से कहा राजन मैंने सुना है कि आपने पुत्र प्राप्ति के लिए बहुत प्रयास किए हैं और बहुत बड़ी पूजा और हवन करवाया है लेकिन फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई मैं जानता हूं कि आपके घर पुत्र प्राप्ति क्यों नहीं हो रही राजा ने बहुत जिज्ञासा से पूछा बताइए महाराज ऐसा क्यों हो रहा है तो साधु ने बताया आपके पिछले जन्म के कुछ बुरे कर्मों का असर है आपने एक आर्शी
का अपमान किया था और उसी के श्राप के कारण आप संतान सुख से वंचित है राजा ने व्याकुल होकर पूछा क्या इस श्राप से मुक्ति का कोई उपाय है साधु ने कहा हां मैं आपको इस श्राप से मुक्त कर सकता हूं और आपके घर पुत्र भी जन्म ले सकता है यह सुनकर राजा राजवीर खुश हो गए और उनके पैरों में बैठ गए साधु ने अपनी पोटली से कुछ फल निकाले और राजा और रानी को खाने को दे दिए साधु ने कहा यह फल खाने से आपको पुत्र प्राप्ति होगी लेकिन साधु ने एक शर्त रखी कि
आपके पुत्र की उम्र केवल 20 वर्ष होगी और जब वह 20 वर्ष का होगा उसी दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी राजा के लिए यह सुनना दिल दहला देने वाला था लेकिन उन्होंने सोचा अगर हमें पुत्र प्राप्त हो और उसकी शादी कर दूं तो शायद उसके वंश से मेरा राज्य आगे चल सकेगा साधु के दिए फल को राजा और रानी ने श्रद्धापूर्वक खा लिया कुछ सम बाद रानी सुमित्रा ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया जिसे उन्होंने देवांश नाम दिया राजा और रानी की खुशी का ठिकाना ना रहा पूरे राज्य में बहुत धूमधाम से जश्न मनाया
गया वर्षों बीत गए और राजा का पुत्र देवांश बड़ा होने लगा जैसे-जैसे उसकी उम्र 20 के करीब आई राजा की चिंता बढ़ने लगी दूसरी ओर एक पड़ोसी राज्य में एक सुंदर और दानी राजकुमारी कल्याणी थी जो प्रतिदिन गरीबों और भूखों को भोजन और दान देती थी राजा राजवीर ने अपने बेटे देवांश की शादी राजकुमारी कल्याणी से करवा दी और दोनों की शादी धूमधाम से हो गई अब वह दिन करीब आ रहा था जब राजा राजवीर का पुत्र देवांश 20 साल का होने वाला था राजा और रानी चिंता से घिर गए थे एक दिन राजकुमारी कल्याणी
ने अपने पति के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया और उसे परोसने की तैयारी कर रही थी तभी एक भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आया और उससे भोजन मांगा राजकुमारी ने सोचा आज मैंने किसी की मदद नहीं की किसी को दान नहीं किया यह भोजन मैं इस भूखे को दे देती हूं और अपने पति के लिए दूसरा भोजन बना देती हूं वह बूढ़ा आदमी खाना लेकर अपने घर चला जाता है और खाना अपनी बेटी को दे देता है तभी देवांश जब अपने कमरे की ओर जा रहा था तब वहां दो यमदूत उसकी आत्मा लेने के लिए खड़े थे
कमरे में एक सांप भी था जो उसे डसने के लिए तैयार था यमदूत सोच रहे थे कि जैसे ही सांप देवांश को डसेगा वैसे ही हम उसकी आत्मा लेकर चले जाएंगे वहां उस गरीब की बेटी ने खाना खाया और कहा जिसने भी हमें यह खाना दिया है उसका सुहाग 100 साल जी यह आशीर्वाद उसके दिल से निकला था जब देवांश अपने कमरे में जा रहा था और सांप उसे काटने वाला था उसी प्रार्थना की शक्ति से एक देवदूत प्रकट हुआ जिसने उस सांप को भगा दिया और यमदू तों को रोक दिया और कहा तुम इसकी
जान नहीं ले सकते क्योंकि अगर किसी का श्राप लग सकता है तो किसी का आशीर्वाद क्यों नहीं यमदूत यह बात सुनकर यमराज के पास गए और कहा हम देवांश के प्राण नहीं ले सके क्योंकि राजकुमारी कल्याणी के दान और पुण्य ने देवदूत को बहुत ताकतवर बना दिया था यमराज स्वयं धरती पर आए और बोले इस राजकुमार की उम्र पूरी हो चुकी है मैं उसकी आत्मा लेने आया हूं देवदूत ने उत्तर दिया अगर आप किसी के श्राप का मान रख सकते हैं तो उसी तरह आशीर्वाद का भी सम्मान रखना होगा यही भगवान की मर्जी है यमराज
ने कुछ देर सोचा और देवांश की उम्र 100 साल कर दी राजकुमार की जान राजकुमारी कल्याणी के दान और आशीर्वाद के कारण बच गई और मौत भी टल गई अब राजा राजवीर और उसका परिवार खुशी-खुशी जीवन जीने लगे तो दोस्तों यह कहानी हमें बताती है कि दान की महानता कैसे इंसान की जिंदगी और कर्मों को बदल सकती है राजा राजवीर के बेटे देवांश की मौत की भविष्यवाणी हो चुकी थी लेकिन राजकुमारी कल्याणी के अच्छे कर्मों और भूखे को खाना देने से देवांश की उम्र बढ़ गई यह सच है भोजन का दान सबसे बड़ा दान है
अच्छे कर्म और आशीर्वाद से विधि के विधान को भी बदला जा सकता है तो दोस्तों अगर आपकी जे कहानी अच्छी लगी तो हमारे चैनल विजडम बोधी को लाइक और सब्सक्राइब करना ना भूलें धन्यवाद