गांव के सबसे सुनसान कोने में एक पुराना मकान था जहां हाफिज करीम अपनी बेटी आयत के साथ रहता था लोग उसे इज्जत से हाफिज साहब कहते थे मगर उसकी आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी जैसे कोई गहरा राज छुपा हो आयत अब भी सिर्फ 13 साल की थी मगर उसके जिस्म और चेहरे में अजीब से बदलाव हो रहे थे उसकी मां जब जिंदा थी तब वह बिल्कुल आम लड़कियों की तरह थी मगर मां के इंतकाल के बाद उसके पिता ने उसे अलग-अलग तरह की दवाइयां और जड़ी बूटियां खिलानी शुरू कर दी कभी मीठे शरबत
में कुछ घोल कर पिलाते तो कभी रात में सिर पर कोई तेल मलते और कभी बाजू में एक इंजेक्शन लगाते अब्बा यह सब क्या है एक रात आयत ने सहमते हुए पूछा हाफिज करीम ने उसे गहरी नजरों से देखा और हल्के से मुस्कुरा दिया बेटा यह तेरा ख्याल रखने के लिए है तू बहुत खास है अल्लाह ने तुझे बड़ी नियामत के साथ भेजा है आयत को समझ नहीं आया मगर अब्बा के चेहरे पर जो रहस्यमई मुस्कान थी उसने उसकी रूह तक को हिला दिया कुछ ही महीनों में आयत की कद काठी में अजीब तरह का
बदलाव आ गया उसकी हड्डियां जल्दी-जल्दी बढ़ रही थी चेहरे पर एक अलग सी चमक आ रही थी और उसकी शक्ल अब पहले जैसी मासूम नहीं लगती थी गांव की औरतें फुसफुसाना लगी यह लड़की कुछ अलग ही है अल्लाह खैर करे मगर हाफिज करीम को किसी की परवाह नहीं थी वह तो किसी गहरे मकसद में डूबा हुआ था एक ऐसा मकसद जिसे कोई नहीं जानता था आयत की हालत दिन बदिरा थी उसका जिस्म जैसे उसके काबू में नहीं था कभी हड्डियों में झनझनाहट होती कभी हाथ पैर सुन्न पड़ जाते और कभी यूं महसूस होता जैसे उसके
अंदर कुछ दौड़ रहा हो उस रात जब वह सोई तो आधी रात को अचानक उसकी आंख खुल गई उसके पूरे जिस्म में अजीब सी गर्मी फैल रही थी जैसे खून उबल रहा हो उसने उठकर शीशे में खुद को देखा तो चौक गई उसकी आंखें हल्की लाल हो गई थी और उसके बाल पहले से ज्यादा घने और चमकदार हो गए थे वह दौड़कर अब्बा के कमरे में गई अब्बा मुझे कुछ हो रहा है मेरा जिस्म जल रहा है हाफिज करीम ने उसे गौर से देखा और मुस्कुरा दिया फिर उसने अपना हाथ आयत के सिर पर रखा
और कुछ बुदबुदा आया अचानक आयत को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसे बर्फ में डाल दिया हो उसकी हालत थोड़ी संभल गई मगर डर उसकी आंखों में साफ झलक रहा था डरने की जरूरत नहीं बेटी यह सब उसी अमल का असर है जो मैं तुझ पर कर रहा हूं तू अब आम इंसानों की तरह नहीं रही तू बहुत खास बन रही है मगर क्यों अब्बा आयत ने घबराकर पूछा हाफिज करीम ने गहरी सांस ली और बोला क्योंकि तुझे उस मुकाम तक पहुंचाना है जहां कोई लड़की नहीं पहुंची तू वह ताकत हासिल करेगी जिससे तू पूरे
जमाने को हैरान कर देगी आयत समझ नहीं पा रही थी कि यह कौन सा खेल चल रहा है मगर अब्बा की आंखों में जो जुनून था वह उसे और भी डरा रहा था अगले दिन सुबह जब आयत ने गांव की औरतों से बात करनी चाही तो उन्होंने उससे कतरा शुरू कर दिया कुछ ने [संगीत] फुसफुसाना जिस्म में एक अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी जब वह चलती तो लगता जैसे उसके कदम जमीन से हल्के हो गए हो जब वह कुछ पकड़ती तो उसकी उंगलियों में अनजानी ताकत महसूस होती लेकिन सबसे खौफनाक बात यह थी
कि अब वह लोगों के दिलों की धड़कनें सुन सकती थी यहां तक कि उनकी सांसों की आवाज भी यह सब क्या हो रहा है उसने अपने आप से बुदबुदा या उस रात जब वह सोने गई तो अंधेरे में उसे अपने कमरे में किसी की मौजूदगी महसूस हुई वह घबराकर उठी और इधर-उधर देखने लगी अचानक उसकी खिड़की के पीछे एक साया हिला कोई खड़ा था आयत के हलक से चीख निकलने ही वाली थी कि तभी दरवाजा खुला और अब्बा अंदर आ गए क्या हुआ बेटी हाफिज करीम की आवाज में अजीब ठंडक थी अब्बा वहां कोई था
कोई मुझे देख रहा था आयत ने कांपती आवाज में कहा हाफिज करीम की आंखों में हल्की चमक आई कोई नहीं था यह सिर्फ तेरा वहम है तू अब एक नई दुनिया में कदम रख रही है तुझे इन छोटी मोटी चीजों से डरना नहीं चाहिए नई दुनिया अब्बा आप आखिर मुझ पर क्या कर रहे हैं आयत ने गहरी नजरों से उन्हें देखा हाफिज करीम आगे बढ़े और अपनी जेब से एक शीशी निकाली उसमें गहरा लाल रंग का कोई द्रव्य था इसे पी ले आयत ने पीछे हटने की कोशिश की मगर अब्बा ने उसका हाथ पकड़ लिया
नहीं मुझे डर लग रहा है डर तुझे तब लगेगा जब तेरा बदन इस अमल को पूरा नहीं कर पाएगा अगर तुझे जीना है तो इसे पीना ही होगा आयत कांपते हाथों से शीशी को देखा उसकी नजरों में हजारों सवाल थे मगर अब्बा की आंखों में जो रहस्य था उसने उसे और चैन कर दिया वह जानती थी कि अगर आज उसने यह नहीं पिया तो शायद अब्बा उसके साथ कुछ और कर सकते थे धीरे-धीरे उसने शीशी को अपने होठों से लगाया और घूंट भर लिया अचानक उसका बदन झनझना उठा उसकी आंखें अपने आप बंद होने लगी
और जिस्म में एक ऐसी गर्मी दौड़ी जैसे उसके अंदर आग जल उठी हो और फिर अंधेरा छा गया आयत को लगा जैसे वह किसी गहरी खाई में गिर रही हो उसका जिस्म सुन्न पड़ चुका था दिल की धड़कने असामान्य हो गई थी और दिमाग सुन्न होने लगा था मगर फिर अचानक उसकी आंखें झटके से खुल गई उसने खुद को अपने कमरे में नहीं बल्कि एक अजीब सी जगह पर पाया चारों ओर सफेद धुंध थी और उसके सामने जमीन पर एक अजीब सा नक्शा बना था कुछ रहस्यमई निशान जो हल्की नीली रोशनी से चमक रहे थे
यह मैं कहां हूं उसने खुद से कहा मगर उसकी आवाज गूंजती हुई बहुत दूर तक चली गई अचानक उसकी नजरों के सामने वही साया फिर से उभर आया जो रात को खिड़की के पास खड़ा था तू अब पूरी तरह बदल चुकी है आयत आयत का जिस्म कांप गया कौन हो तुम उसने हिम्मत जुटाकर पूछा साया हंसा और उसकी हंसी किसी दूर गुफा से आती लग रही थी तुझे अपने असली वजूद के बारे में कुछ नहीं पता पर जल्दी ही सब समझ आ जाएगा अचानक एक तेज झटका लगा और आयत ने खुद को फिर से अपने
बिस्तर पर पाया वह बुरी तरह हाफ रही थी पसीने में लथपथ यह क्या था तभी दरवाजा खुला और हाफिज करीम अंदर आए तो आखिरकार असर शुरू हो गया उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी अब्बा यह सब क्या है मुझे क्या हो रहा है आयत ने घबराकर पूछा हाफिज करीम उसके पास बैठे और धीरे से बोले बेटी तेरा यह बदलाव सिर्फ दवाइयों और इंजेक्शन का नतीजा नहीं है यह एक बहुत बड़े अमल का हिस्सा है कैसा अमल एक ऐसा अमल जो तुझे एक आम लड़की से बहुत ऊपर ले जाएगा तुझे दुनिया की सबसे खास
औरत बनाएगा आयत ने अब्बा की आंखों में देखा उसमें कोई नरमी नहीं थी बस एक जुनून था एक अजीब डरावना जुनून मगर मुझे ऐसा नहीं बनना मैं यह सब नहीं चाहती आयत की आवाज में घबराहट थी हाफिज करीम की मुस्कान गहरी हो गई अब यह तेरे चाहने या ना चाहने की बात नहीं है बेटी यह सब अब शुरू हो चुका है आयत का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था उसने अपने हाथों को देखा उसकी उंगलियां कांप रही थी और उनकी रंगत पहले से कुछ अलग लग रही थी उसकी चमड़ी पहले से ज्यादा सफेद और मुलायम
हो गई थी मगर अंदर से वह खुद को पहले से कहीं ज्यादा भारी महसूस कर रही थी जैसे कोई अनदेखी ताकत उसके जिस्म में समा रही हो अब्बा मुझ में यह सब क्या हो रहा है उसकी आवाज घबराई हुई थी हाफिज करीम ने मुस्कुराते हुए कहा तेरा जिस्म अब एक नए दौर में दाखिल हो रहा है आयत तेरा खून अब आम इंसानों जैसा नहीं रहा आयत के माथे पर पसीना आ गया उसे याद आया कि जब उसने कल रात वह लाल रंग का द्रव्य पिया था तभी से उसके अंदर कुछ अजीब सा महसूस हो रहा
था मगर यह आखिर हो क्या रहा था अचानक उसके कानों में एक अजीब आवाज गूंजने लगी एक धीमी फुसफुसाना तू बदल चुकी है आयत ने झट से अपने कानों को पकड़ा और चीख पड़ी रुक जाओ मुझे अकेला छोड़ दो हाफिज करीम ने गहरी सांस ली और उसके करीब आए उन्होंने उसके सिर पर हाथ रखा और कुछ बुदबुदा लगे आयत को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर की सारी बेचैनी ठंडी पड़ने लगी हो अब कुछ दिनों तक यह असर और बढ़ेगा मगर घबराने की जरूरत नहीं तू एक बहुत खास मुकाम तक पहुंच रही है मगर अब्बा आखिर
यह सब क्यों हो रहा है आप मुझसे सच क्यों छुपा रहे हैं आयत की आंखों में आंसू थे हाफिज करीम ने पहली बार एक लंबी खामोशी अख्तियार की फिर उन्होंने धीरे से कहा क्योंकि तू सिर्फ मेरी बेटी नहीं तू एक बहुत बड़े मकसद का हिस्सा है आयत के पैरों तले जमीन खिसक गई आयत के अंदर अजीब सा डर समा गया था वह हाफिज करीम की बातों को समझने की कोशिश कर रही थी मगर हर चीज उसके दिमाग में उलझती जा रही थी मैं सिर्फ आपकी बेटी नहीं तो फिर मैं कौन हूं उसकी आवाज लड़खड़ा गई
हाफिज करीम ने ठंडी सांस भरी और कमरे के कोने में रखी लकड़ी की अलमारी की तरफ बढ़े उन्होंने उसकी एक पुरानी दराज खोली और उसमें से एक मोटा धूल से भरा काला किताब निकाला किताब के पन्ने पीले पड़ चुके थे और उस पर अजीब से नक्श बने हुए थे यह देख आयत उन्होंने किताब खोलते हुए कहा आयत ने किताब के पन्नों पर नजर डाली और उसके रोंगटे खड़े हो गए उसमें एक लड़की की तस्वीर बनी थी बिल्कुल उसकी ही तरह यह यह मैं हूं हाफिज करीम मुस्कुराए नहीं यह तू नहीं है मगर यह वही लड़की
थी जिससे तेरा रिश्ता बहुत गहरा है आयत की धड़कनें तेज हो गई मगर यह कौन है सालों पहले एक लड़की इसी गांव में पैदा हुई थी मगर वह आम लड़की नहीं थी उसके जिस्म में कुछ खास था एक ताकत जो इंसानों के लिए नहीं बनी थी वह बड़ी हुई मगर उसका जिस्म और दिमाग इंसानों से अलग होता चला गया उसकी खूबसूरती और ताकत इतनी बढ़ गई कि दुनिया उसे पाने लगी हाफिज करीम ने किताब के अगले पन्ने पलटे जहां वही लड़की किसी अंधेरी जगह पर खड़ी थी और उसके चारों ओर अजीब सी रोशनी थी फिर
क्या हुआ आयत ने धीरे से पूछा हाफिज करीम की आंखें गहरी हो गई वह लड़की मर गई मगर उसके खून में जो ताकत थी वह कभी खत्म नहीं हुई आयत सहम गई तू हाफिज करीम की आवाज धीमी मगर सख्त हो गई उसी लड़की की वारिस है तेरा जिस्म अब वही ताकत हासिल कर रहा है जो उस लड़की के पास थी आयत के पैरों तले जमीन खिसक गई नहीं नहीं यह सच नहीं हो सकता उसने अपना सिर पकड़ लिया मगर इससे पहले कि वह कुछ और पूछती अचानक कमरे की खिड़कियां जोर से खुल गई और एक
तेज हवा अंदर आई हवा में किसी की फुसफुसाना तू अब वापस नहीं जा सकती आयत की सांस अटक गई आयत की सांसें तेज हो गई थी खिड़कियों से आती तेज हवा उसके बालों को उड़ा रही थी और हवा में गूंजती वह अजनबी फुसफुसाना रही थी आयत तू अब वापस नहीं जा सकती वह घबराकर पीछे हटी मगर उसके पैरों ने जैसे उसका साथ छोड़ दिया हो उसकी टांगों में अजीब सी सुन्नता थी और जिस्म अब भी गर्म था जैसे खून उबल रहा हो अब्बा यह क्या हो रहा है उसकी आवाज कांप रही थी हाफिज करीम ने
किताब बंद कर दी और गहरी सांस लेते हुए बोले यह बस शुरुआत है बेटी जिस लहू को तेरे अंदर दौड़ाने के लिए मैंने सालों तक मेहनत की अब वह जाग रहा है क किंतु मैं तो आपकी बेटी हूं ना आयत की आंखों में डर था हाफिज करीम की आंखों में एक ठंडी चमक थी हां तू मेरी बेटी है मगर अब तू सिर्फ एक आम लड़की नहीं रही आयत की धड़कन तेज हो गई वह अपना हाथ सीने पर रखकर सांसें संभालने की कोशिश करने लगी तभी अचानक उसे लगा कि उसके कान तेज हो रहे हैं बाहर
का हर छोटा शोर हर हलचल उसे साफ-साफ सुनाई देने लगी गली में कोई धीमी आवाज में बातें कर रहा था मगर आयत उन फुसफुसाना पा रही थी क्या तुमने आयत को देखा उसकी आंखें पहले जैसी नहीं लग रही थी हां मुझे भी अजीब लगा लता है उसके अंदर कुछ और समा गया है आयत की आंखें फैल गई मैं मैं इतनी दूर से सब सुन पा रही हूं उसने धीरे से कहा हाफिज करीम ने सिर हिलाया हां और यह तो बस शुरुआत है तेरी ताकत अभी पूरी तरह जागी नहीं है मगर यह सब क्यों आयत की
आवाज में गुस्सा था मुझ पर यह सब क्यों किया हाफिज करीम कुछ पल चुप रहे फिर धीरे से बोले क्योंकि तुझे वही बनाना है जो तुझे बनना था तेरा जन्म ही इस काम के लिए हुआ है आयत आयत ने घबराकर उनके चेहरे की तरफ देखा अब्बा की आंखों में जो जुनून था उसने उसे और ज्यादा डरा दिया नहीं मुझे ऐसा कुछ नहीं चाहिए वह तेजी से भागी मगर जैसे ही दरवाजे तक पहुंची अचानक उसके अंदर की अजीब ताकत भड़क उठी उसके पैरों में इतनी तेजी आ गई कि वह दरवाजे से पहले ही जमीन पर गिर
पड़ी उसके जिस में कुछ अलग हो रहा था बहुत तेजी से उसने अपने हाथों को देखा उसकी उंगलियां हल्की नीली पड़ रही थी नसों में गहरा रंग दौड़ रहा था उसकी सांसें भारी हो रही थी अब्बा यह क्या हो रहा है मुझ में उसकी आवाज कांप गई हाफिज करीम मुस्कुराए तेरा असली रूप अब सामने आ रहा है आयत अब तू कभी पीछे नहीं जा सकती आयत की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा आयत के जिस्म में उठती सनसनी बढ़ती जा रही थी उसकी उंगलियां अब हल्की नीली नहीं बल्कि काली पड़ने लगी थी नसों में जैसे
आग बह रही थी वह हाफ रही थी मगर उसे महसूस हुआ कि उसकी सांसें पहले जैसी नहीं रही उसकी धड़कने धीमी हो गई थी ना नहीं उसने घबराकर अपने हाथ देखे अब्बा यह क्या हो रहा है उसकी आंखों में आंसू थे मगर हाफिज करीम के चेहरे पर सिर्फ एक अजीब सी संतुष्टि थी शुरुआत हो गई है वह धीरे से बोले आयत ने उनका हाथ झटक दिया और अपने कमरे के आईने की तरफ दौड़ी जैसे ही उसने खुद को देखा उसका जिस्म कांप गया उसकी आंखें पूरी काली हो चुकी थी नहीं यह झूठ है यह मैं
नहीं हूं वह पीछे हटी मगर अचानक उसके अंदर एक तेज झटका उठा उसका सिर घूमने लगा और उसके पैरों में इतनी ताकत आ गई कि वह अनजाने में फर्श पर जोर से पैर मार बैठी धड़ाम जमीन जैसे अंदर तक हिल गई फर्श में एक दरार पड़ गई थी आयत हा फते हुए अपनी टांगों को देख रही थी यह यह कैसे हुआ तू अब आम इंसानों की तरह नहीं रही हाफिज करीम की आवाज आई आयत ने डर कर उनकी तरफ देखा मगर अब्बा मुझे यह नहीं चाहिए मुझे वापस मेरी पुरानी जिंदगी चाहिए हाफिज करीम ने सिर
हिलाया अब लौटने का कोई रास्ता नहीं है आयत तू अब एक आम लड़की नहीं रही अब तेरे जिस्म में वह लहू दौड़ रहा है जो दुनिया में किसी और के पास नहीं है कौन सा लहू हाफिज करीम मुस्कुराए वही लहू जो बर्सों पहले मैंने सुरक्षित रखा था आयत के दिल की धड़कन रुकने लगी के क्या मतलब हाफिज करीम धीरे से आगे बढ़े तेरे जिस्म में अब इंसानी खून नहीं बल्कि एक ऐसी मखलूक का लहू दौड़ रहा है जिसे कभी मारा नहीं जा सकता आयत को लगा जैसे उसके चारों ओर और सब कुछ घूम रहा हो
आयत के जिस्म में एक अजीब सी सनसनी थी उसकी सांसें अब पहले जैसी नहीं थी उसे लग रहा था कि वह कोई और बन चुकी है मगर कौन अब्बा यह खून किसका है उसकी आवाज में गूंज थी हाफिज करीम ने गहरी सांस ली और उसकी आंखों में देखा यह उस मखलूक का खून है जिसे कयामत से पहले कोई मार नहीं सकता आयत का जिस्म बुरी तरह कांप गया क्या हां हाफिज करीम बोले जिस दिन तू पैदा हुई थी उसी दिन तेरा मुकद्दर लिख दिया गया था आयत के कदम लड़खड़ाए तो मैं अब इंसान नहीं रही
हाफिज करीम ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा अब तू इंसानों से बहुत ऊपर है आयत तू अब वह बन गई है जिसे लोग सदियों से तलाश रहे थे आयत की आंखों में खौफ था आयत को लग रहा था जैसे उसके अंदर कोई और जाग चुका हो कोई ऐसा जिसे वह पहचानती नहीं थी मगर जो उसकी रगों में बस चुका था उसका बदन अब भी कांप रहा था मगर डर से नहीं बल्कि एक अजीब सी ताकत से जो उसके अंदर उमड़ रही थी अब्बा यह सब यह सब सच नहीं हो सकता उसकी आवाज फट रही थी
हाफिज करीम मुस्कुराए तेरा जिस्म अब तेरा नहीं रहा आयत अब तू वही बन रही है जिसके लिए तेरा जन्म हुआ था लेकिन यह सब क्यों मैं कौन हूं हाफिज करीम ने किताब उठाई और उसका एक पन्ना खोला उस पर किसी अजीब शक्ल वाली मखलूक की तस्वीर बनी थी एक ऐसी शक्ल जो इंसानों जैसी तो थी मगर उसकी आंखें काली थी और उसकी चमड़ी किसी इंसान जैसी नहीं लग रही थी यह वह पहली लड़की थी जिसमें यह खून दौड़ा था हाफिज करीम बोले और अब यह खून तुझ में दौड़ रहा है आयत की सांसें तेज हो
गई नहीं मुझे यह नहीं चाहिए मुझे वापस मेरी जिंदगी चाहिए अब वापस जाने का कोई रास्ता नहीं आयत हाफिज करीम की आवाज में सख्त थी आयत ने घबराकर अपने हाथों को देखा उसकी उंगलियां अब पूरी तरह काली पड़ चुकी थी और उनमें एक हल्की सी चमक थी मानो किसी और दुनिया की रोशनी उसमें आ चुकी हो अब्बा मेरे अंदर यह सब कैसे आ सकता है मैंने तो कभी कुछ नहीं किया हाफिज करीम की आंखों में एक रहस्यमई चमक आ गई नहीं तूने कुछ किया नहीं लेकिन तेरा जिस्म इसके लिए चुना गया था आयत की आंखों
के सामने अंधेरा छाने लगा यत के पूरे बदन में अजीब सी हरारत थी उसके हाथ कांप रहे थे मगर इस बार डर से नहीं बल्कि किसी अजनबी ताकत से अब्बा मुझे अच्छा नहीं लग रहा उसने लड़खड़ा आवाज में कहा हाफिज करीम चुपचाप उसकी तरफ देखते रहे अब यह तेरा नसीब है आयत अब तुझे खुद को कबूल करना ही होगा अचानक आयत की आंखों के सामने अंधेरा छा गया उसकी नसों में अजीब सा दर्द उठा और फिर धड़ाम वह जमीन पर गिर गई लेकिन अगली ही पल उसके जिस्म ने खुद बखुदा अब बाहर आ रही है
आयत अब तू इंसानों जैसी नहीं रही आयत का जिस्म अब खुद बखुदा थी और उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके अंदर कुछ भयानक करवटें ले रहा हो अब्बा मेरे अंदर यह क्या जाग रहा है हाफिज करीम के चेहरे पर संतोष की झलक थी अब तू वोह बन रही है जो तुझे बनना था आयत तेरे जिस्म में अब इंसानी लहू नहीं बल्कि एक अजीम ताकत दौड़ रही है मगर यह ताकत किसकी है अचानक आयत के पूरे जिस्म में जबरदस्त झटका उठा उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और अगले ही पल धड़ाम कमरे की
दीवारें हिल गई अलमारी में रखे शीशे जमीन पर गिरकर चकनाचूर हो गए खिड़कियों की लकड़ियां चरमरा लगी आयत का जिस्म अब खुद उसके काबू में नहीं था उसके हाथ हवा में उठ गए और उसके अंदर से एक अजीब सी आवाज निकलने लगी यह यह मैं नहीं हूं उसकी उंगलियां हवा में हिल रही थी मगर वह खुद उन्हें रोक नहीं पा रही थी आयत यह बस शुरुआत है हाफिज करीम बोले आयत की सांस तेज हो गई उसके पूरे जिस्म में जैसे आग दौड़ रही थी उसकी नजरों के सामने चीजें साफ-साफ दिखने लगी इतनी साफ कि वह
कमरे की दूर रखी किताब पर लिखे शब्द भी पढ़ सकती थी यह सब क्या हो रहा है उसने घबरा कर कहा तभी अचानक कमरे का दरवाजा खुला दरवाजे पर नौकरानी फातिमा खड़ी थी साहब यह क्या हो रहा है अंदर से अजीब आवाजें आ रही थी आयत ने जैसे ही फातिमा की तरफ देखा कुछ अजीब हुआ फातिमा की आ में डर समा गया आयत बीबी आपकी आंखें आयत ने जल्दी से आईने की तरफ देखा उसकी आंखों की पुतलियां अब पूरी तरह सुनहरी और चमकदार हो चुकी थी नहीं यह क्या हो गया मुझे फातिमा के चेहरे पर
खौफ साफ नजर आ रहा था आयत बीबी आपकी आंखें यत ने खुद को आईने में देखा और उसके रोंगटे खड़े हो गए उसकी आंखों की पुतलियां अब पूरी तरह सुनहरी और चमक दार हो चुकी थी उनमें एक अजीब सा नूर था मगर यह नूर कोई आम रोशनी नहीं थी यह कुछ ऐसा था जो किसी इंसान में नहीं हो सकता था नहीं नहीं आयत पीछे हटी लेकिन तभी फातिमा की चीख गूंज उठी बीबी आपसे अजीब रोशनी निकल रही है आयत ने अपने हाथों की तरफ देखा उन पर हल्की चमक थी जैसे उनमें कोई अनजानी ताकत आ
चुकी हो अब्बा यह क्या हो रहा है हाफिज करीम के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान थी अब तू अपने असली रूप में आ रही है आयत मगर यह सब क्यों फातिमा धीरे-धीरे पीछे हट रही थी उसकी आंखों में खौफ था और वह दरवाजे की तरफ भागने लगी ना नहीं मुझे बाहर जाना है मुझे बाहर लेकिन इससे पहले कि वह दरवाजे तक पहुंच पाती धड़ाम दरवाजा अपने आप बंद हो गया फातिमा चीख उठी क क्या हो रहा है आयत ने घबराकर अपने हाथों को देखा दरवाजा उसकी सोच से बंद हुआ था यह सब मैंने किया हाफिज
करीम की आंखों में एक अजीब सी चमक थी हां आयत अब तू समझ रही है कि तू क्या बन चुकी है आयत कांप उठी ना नहीं मुझे यह सब नहीं चाहिए मुझे अपनी पुरानी जिंदगी वापस चाहिए अब वापसी का कोई रास्ता नहीं हाफिज करीम बोले तभी अचानक फातिमा जोर से हिलने लगी उसकी आंखें उलट गई और उसके जिस्म में झटके उठने लगे बीबी मुझसे कुछ हो रहा है फातिमा के जिस्म में कुछ अजीब हो रहा था और फिर आहा एक झटके में उसकी सांसें बंद हो गई वह जमीन पर गिर चुकी थी बिल्कुल शांत फातिमा
आयत की आंखें फटी रह गई उसने पहली बार किसी की जान ली थी और उसे इसका एहसास तक नहीं हुआ आयत की आंख फटी की फटी रह गई फातिमा मर चुकी थी वह जमीन पर बेजान पड़ी थी उसकी आंखें खुली थी मगर उनमें कोई हरकत नहीं थी उसका चेहरा एक भयानक डर में जमी हुई चीख के साथ स्थिर हो चुका था ना नहीं यह मैंने नहीं किया आयत कांपते हुए पीछे हटी उसके हाथ अब भी हल्की रोशनी से चमक रहे थे मैंने किसी को नहीं मारा मगर तूने ही मारा है हा करीम की आवाज आई
अब तू वह बन चुकी है जो इंसानों से अलग है आयत तेरा वजूद अब किसी आम लड़की जैसा नहीं रहा नहीं नहीं आयत की सांसें तेज हो रही थी उसने अपना सिर पकड़ा उसके अंदर कुछ अजीब हो रहा था उसकी नसों में जैसे आग दौड़ रही थी अब्बा यह सब आपने किया आपने मुझे इस जानवर में बदल दिया जानवर हाफिज करीम हसे तू इसे जानवर समझती है आयत तू अब इंसानों से ऊपर जा चुकी है तेरा जन्म किसी आम जिंदगी के लिए नहीं हुआ था मगर फातिमा मैंने उसे वह एक कुर्बानी थी आयत ना नहीं
आयत भागने लगी वह अपने कमरे से बाहर निकली मगर जैसे ही वह गलियारे में पहुंची अचानक उसके कानों में अजीब आवाजें गूंजने लगी फुस फुसा हट किसी और दुनिया की आवाजें तू अब हमारी है आयत कौन आयत ने अपने सिर को जोर से पकड़ लिया उसकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा फिर अचानक एक जबरदस्त झटका उसके जिस्म में उठा और वह घुटनों के बल गिर गई उसके अंदर से कुछ जाग रहा था कुछ जिसे अब रोका नहीं जा सकता था आयत घुटनों के बल गिरी उसकी सांसें बेकाबू हो रही थी अंदर से कुछ फूटने
की कोशिश कर रहा था कोई अजनबी ताकत जो उसके जिस्म पर काबू पाना चाहती थी तू अब हमारी है आयत वह आवाजें फिर से गूंजने लगी कौन हो तुम आयत ने कांपती हुई आवाज में पूछा हम वो हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है अचानक उसका पूरा बदन झनझना उठा उसकी हड्डियां मानो खुद बखुदा मेरा जिस्म बदल रहा है हाफिज करीम यह सब शांत खड़े देखकर मुस्कुरा रहे थे अब तुझे तेरी हकीकत पता चल रही है आयत मुझे पहले क्यों नहीं बताया आयत चीख पड़ी क्योंकि तुझे खुद अपने अंदर की ताकत को महसूस
करना था तेरा जिस्म अब इंसानी नहीं रहा अब तेरा असली रूप सामने आ रहा है आयत दर्द से चीख पड़ी उसका बदन अब पूरी तरह बदल चुका था उसकी आंखें पूरी तरह सुनहरी हो गई थी उसकी त्वचा पर अजीब चमकदार निशान उभर आए थे उसने कांपते हुए खुद को आईने में देखा और उसका दिल दहल गया आईने में जो चेहरा था वह उसका नहीं था आयत की आंखें डर से चौड़ी हो गई आईने में जो चेहरा था वह उसका नहीं था वह कोई और थी उसकी सुनहरी चमकती हुई आंखें किसी दूसरी दुनिया की लग रही
थी उसकी त्वचा पर उभरे अजीबो गरीब निशान हल्के नीले रंग के थे जो धीमे-धीमे चमक रहे थे यह यह मैं नहीं हो सकती उसने खुद को छूकर देखा मगर उसकी उंगलियों का एहसास भी बदल चुका था उसकी उंगलियां लंबी हो चुकी थी नाखून नुकीले हो गए थे अब तू इंसान नहीं रही आयत पीछे खड़े हाफिज करीम की आवाज में एक अजीब सा संतोष था अब तेरा जन्म पूरा हुआ है नहीं आयत ने जोर से सिर हिलाया मुझे वापस मेरी जिंदगी चाहिए मुझे वापस वह बनना है जो मैं थी अब वापसी का कोई रास्ता नहीं आयत
तू कायनात के उन रहस्यों का हिस्सा बन चुकी है जिनसे इंसान को दूर रखा गया था आयत ने गुस्से से हाफिज करीम की तरफ देखा आपने मेरे साथ क्या किया हाफिज करीम ने धीरे से किताब उठाई वही पुरानी किताब जिसमें अजीब गरीब शक्लों वाली मखलूक की तस्वीरें बनी थी उन्होंने किताब का एक पन्ना खोला और उसमें बनी एक लड़की की तस्वीर की तरफ इशारा किया वह तस्वीर हूबहू आयत की नई शक्ल जैसी थी आयत का दिल जोर से धड़क उठा ये यह कौन है हाफिज करीम की आंखों में जुनून था तू ही है आयत यह
तेरा असली रूप है नहीं यह झूठ है मैं इंसान हूं मैं एक आम लड़की हूं नहीं हाफिज करीम की आवाज गूंज उठी तेरा खून आम नहीं है तेरी रगों में एक पुरानी मखलूक का अंश बह रहा है तेरा जिस्म बस एक खोल था और अब वह खोल टूट चुका है आयत का दम घुटने लगा नहीं यह सब झूठ है तू देख चुकी है आयत खुद को देख आईने में देख तेरा जिस्म अब आम नहीं रहा तेरा वजूद बदल चुका है आयत कांप गई आईने में जो चेहरा था वह किसी और दुनिया का था वह अब
किसी इंसान जैसी नहीं दिख रही थी मैं मैं अब इंसान नहीं रही आयत की सांसें तेज हो गई उसकी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था वह उसकी समझ से परे था कमरा हिल रहा था दीवारों पर अजीब सी दरारें पड़ रही थी और उसके चारों ओर रखी चीजें हवा में तैरने लगी थी यह यह क्या हो रहा है आयत घबराकर पीछे हट गई हाफिज करीम मुस्कुराए उनकी आंखों में एक अजीब सा जुनून था अब तू अपनी असली ताकत को महसूस कर रही है आयत नहीं यह मुझसे नहीं हो सकता आयत ने डर
से अपने हाथों को देखा उसकी उंगलियां अब पहले जैसी नहीं थी वे पतली और नुकीली हो गई थी उसके नाखून हल्के नीले रंग के थे जैसे किसी और दुनिया की कोई मखलूक मैं मैं क्या बन गई हूं तू वही बन रही है जो तुझे बनना था यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि तेरी तकदीर थी आयत के दिल की धड़कन तेज हो गई नहीं मुझे वापस जाना है मुझे फिर से इंसान बनना है हाफिज करीम ने धीरे से सर हिलाया अब तुझे वापस जाने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा झूठ हर चीज हल होता है आयत का गुस्सा
बढ़ता जा रहा था और तभी धड़ाम कमरे के शीशे खुद बखुदा टूट गए हवा में उड़ रही किताबें जमीन पर गिरने लगी पूरा माहौल भारी और डरावना हो गया देखा हाफिज करीम की आवाज गूंज उठी यह तेरी ही ताकत है आयत तेरा जिस्म अब सिर्फ एक खोल नहीं रहा यह एक नए दौर की शुरुआत है आयत ने गुस्से से उन पर नजरें गड़ा दी अगर यह ताकत मेरी है तो मैं इसका इस्तेमाल तुम्हें रोकने के लिए करूंगी आयत की सांसें तेज हो गई उसके जिस्म में एक अजीब सी गर्मी दौड़ रही थी उसके हाथ कांप
रहे थे मगर यह डर से नहीं था यह एक नई अनजानी ताकत थी जो अब उसके अंदर जाग चुकी थी हाफिज करीम की आंखों में वही पुरानी रहस्यमई मुस्कान थी अब तुझे समझ आ गया होगा आय तू अब पहले जैसी नहीं रही मुझे यह ताकत नहीं चाहिए आय चीखी मगर अब य यह तेरे बस में नहीं है हाफिज करीम ने ठंडे लहजे में कहा तू चाहे या ना चाहे यह तेरा नसीब बन चुका है आयत की आंखों में आंसू थे मगर उसके दिल में अब डर की जगह गुस्सा भरने लगा था अगर यह ताकत मेरी
है तो मैं इसका इस्तेमाल तुम्हें रोकने के लिए करूंगी और तभी धड़ाम कमरे में रखा एक भारी लकड़ी का टेबल अपने आप हवा में उठ गया और जोर से दीवार पर जा टकराया हाफिज करीम की भोह तन गई तो अब तू अपने अंदर की ताकत को महसूस कर रही है आयत ने महसूस किया कि उसके अंदर कुछ जाग चुका था कुछ ऐसा जिसे वह अब दबा नहीं सकती थी अगर यह ताकत मेरी है उसने गहरी सांस ली तो इसका पहला वार तुझ पर होगा हाफिज करीम और फिर बिना सोचे समझे उसने अपने हाथ उठाए गड़गड़ाहट
पूरे कमरे में बिजली सी चमकी और हाफिज करीम पीछे हट गए पहली बार उनकी आंखों में हल्का डर दिखाई दिया हैरत की बात है उन्होंने धीरे से कहा तूने इतनी जल्दी इस ताकत पर काबू पा लिया आयत ने अपनी मुट्ठी भींच ली अब तुम्हारे झूठ तुम्हारे जादू और तुम्हारी चालाकियां का खेल खत्म हाफिज करीम हल्के से मुस्कुराए यह तो बस शुरुआत है आयत तुझे अभी यह भी नहीं पता कि तेरा असली दुश्मन कौन है दुश्मन आयत चौक गई हां और वह कोई और नहीं बल्कि तू खुद है आयत के कदम डगमगा गए तुम तुम क्या
कह रहे हो जल्द ही तुझे खुद पर ही शक होने लगेगा और जिस दिन तू अपनी असली सच्चाई जानेगी उस दिन तुझे एहसास होगा कि तू कभी इंसान थी ही नहीं आयत के दिल की धड़कन तेज हो गई यह झूठ है मगर हाफिज करीम बस मुस्कुराते रहे आयत को पहली बार ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके पैरों तले से जमीन खिसक रही हो आयत की आंखों में अंधेरा छाने लगा हाफिज करीम के शब्द उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहे थे तू कभी इंसान थी ही नहीं झूठ यह झूठ है आयत चीख पड़ी मगर हाफिज
करीम की आंखों में एक अजीब सा इत्मीनान था अगर यह झूठ है तो फिर तुझे बार-बार अजीब चीजें क्यों महसूस होती हैं क्यों तेरा जिस्म आम इंसानों जैसा नहीं रहा क्यों तुझ में वह ताकतें जाग रही हैं जो किसी इंसान में नहीं हो सकती आयत की सांसें उखड़ने लगी उसने अपने हाथों को देखा उसकी उंगलियां फिर से नुकीली हो रही थी उसकी त्वचा हल्की नीली और चमकदार हो रही थी ना नहीं यह मेरी कल्पना है मैं इंसान हूं अगर इंसान होती तो क्या तुझे पानी से डर लगता आय ठिठक गई हां पानी से उसे याद
आया कुछ दिनों से जब भी वह पानी के करीब जाती उसका शरीर कांपने लगता उसका दम घुटने लगता पहले उसने सोचा था कि यह बस एक डर है मगर मगर अब नहीं मैं कोई और नहीं मैं आयत हूं उसने खुद को समझाने की कोशिश की हाफिज करीम आगे बढ़े और धीमे स्वर में बोले तेरी मां कौन थी आयत क्या तुझे याद है आयत की आंखों में अजीब सा खालीपन उभर आया उसकी मां मुझे मुझे ठीक से याद नहीं क्यों नहीं याद शायद शायद बचपन में ही उनका इंतकाल हो गया था या फिर शायद हाफिज करीम
ने ठंडी हंसी हंसी तेरी मां इंसान ही नहीं थी आयत के दिल की धड़कन तेज हो गई बस मुझे और कुछ नहीं सुनना गुस्से में उसने हाथ उठाया और पूरे कमरे में एक तेज हवा चली चीजें बिखर गई खिड़कियां चरमरा उठी और हाफिज करीम दो कदम पीछे हट गए देख रही है यह गुस्सा नहीं है आयत यह तेरी असली फितरत है नहीं मैं इंसान हूं मगर तभी आयत पीछे से किसी ने उसे जोर से पुकारा वो पलटी और देखा रिजवान आयत की आंखें भर आई रिजवान रिजवान उसके करीब आया और उसका चेहरा अपने हाथों में
थाम लिया आयत मेरी तरफ देखो तुम वही हो जो मैं जानता हूं चाहे जो भी हो मैं तुम्हारे साथ हूं मगर हाफिज करीम हंसने लगे बेचारा रिजवान उसे क्या पता कि जिससे वह मोहब्बत कर रहा है वह एक इंसान नहीं बल्कि एक ऐसा वजूद है जिसे इंसानों के साथ रहने की इजाजत नहीं आयत के कदम पीछे हट गए नहीं ऐसा मत कहो रिजवान ने उसे थामने की कोशिश की मगर तभी आयत को ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसे जकड़ लिया हो हवा में अजीब सी गूंज उठी अब तेरी सच्चाई तुझसे छुपी नहीं रहेगी आयत
और अगले ही पल कमरे में एक जबरदस्त धमाका हुआ और आयत की आंखों के सामने अंधेरा छा गया धमाके के बाद सब कुछ धुंधला हो गया आयत ने महसूस किया कि वह किसी गहरे अंधकार में गिर रही है चारों ओर बस एक सन्नाटा था भयानक ठंडा और डरावना आयत कोई उसे पुकार रहा था उसने अपनी आंखें खोलने की कोशिश की मगर कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था अचानक उसे लगा जैसे वह पानी में डूबी हुई है उसकी सांस रुकने लगी वह छटपटा लगी ऊपर आने की कोशिश करने लगी मगर उसका जिस्म जैसे बंधा
हुआ था मैं डूब रही हूं मगर तभी पानी के अंदर एक परछाई उभरी एक औरत जिसकी आंखें बिल्कुल वैसी ही थी जैसी आयत की कौन हो तुम आयत ने मुश्किल से पूछा औरत ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया मैं तुम्हारी मां हूं आयत आयत का दिल जोर से धड़क उठा झूठ मेरी मां तो बचपन में ही नहीं आयत जो सच तुम्हें बताया गया वह सिर्फ एक धोखा था तुम्हारी असली मां मैं हूं और मैं इंसान नहीं थी आयत की सांसें अटक गई अगर तुम इंसान नहीं थी तो फिर क्या थी औरत की आंखों में
अजीब सी चमक आई मैं पानी की दुनिया की रानी थी और तुम भी मेरी ही संतान हो आयत तुम इंसानों की तरह जिंदगी नहीं जी सकती तुम पानी से भाग नहीं सकती क्योंकि पानी ही तुम्हारा असली घर है आयत की आंखों के सामने पूरी जिंदगी घूम गई उसकी बचपन की यादें उसका अजीब सा पानी से डरना उसका अलग महसूस करना सब कुछ अब साफ हो रहा था नहीं मैं इंसान हूं मैं मगर तभी पानी के अंदर उसकी अपनी परछाई बदलने लगी उसके हाथ पहले से ज्यादा नर्म और चमकदार हो गए थे उसके पैर हल्के हल्के
पानी में घुलने लगे थे तू इंसान थी ही नहीं आयत यह हाफिज करीम की आवाज थी जो कहीं दूर से गूंज रही थी अब तुझे अपनी सच्चाई को अपनाना ही होगा आयत जोर से चीखी नहीं और तभी चारों ओर से पानी की एक तेज लहर आई और उसे पूरी तरह अपने अंदर समेट लिया और फिर सब कुछ अंधेरा हो गया आयत ने जब आंखें खोली तो उसने खुद को एक अजीब और रहस्यमई जगह पर पाया चारों ओर बस नीला पानी था मगर यह कोई आम पानी नहीं था यह हल्की रोशनी से चमक रहा था जैसे
इसके अंदर कोई जादू बसा हो क्या मैं मर चुकी हूं नहीं आयत एक जानी पहचानी आवाज उसके कानों में पड़ी उसने पीछे मुड़कर देखा वह औरत वहीं खड़ी थी जिसने खुद को उसकी मां बताया था तुम अब असलियत की दहलीज पर खड़ी हो अब तुम्हें तय करना होगा कि तुम कौन हो एक इंसान या हमारी दुनिया की वारिस आयत की सांसें तेज हो गई नहीं मैं इंसान हूं मुझे वापस जाना है रिजवान मेरा इंतजार कर रहा है औरत ने गहरी सांस ली अगर तुम वापस जाना चाहती हो तो तुम्हें अपनी इस शक्ति को हमेशा के
लिए छोड़ना होगा मगर याद रखना इंसानों की दुनिया तुम्हें कभी वैसे नहीं अपनाए गी जैसे तुम चाहती हो आयत के दिल में हलचल मच गई मैं मैं रिजवान के बिना नहीं रह सकती मगर क्या रिजवान तुम्हें वैसे ही अपनाए जब उसे तुम्हारी सच्चाई पता चलेगी आयत की आंखों के सामने रिजवान का चेहरा आ गया उसका प्यार उसकी परवाह मगर फिर हाफिज करीम के शब्द उसके कानों में गूंज उठे तू इंसान थी ही नहीं आयत क्या रिजवान सच में उसे वैसे ही प्यार करेगा जब उसे पता चले कि वह इंसान नहीं है या फिर वह भी
उसे छोड़ देगा क्या मुझे इंसानों की दुनिया में कभी सुकून मिलेगा उसकी मां ने धीरे से सिर हिलाया तुम्हें खुद इसका जवाब ढूंढना होगा आयत मगर फैसला करने से पहले सोचो क्या तुम अपनी असली पहचान से भाग सकती हो आयत की आंखों में आंसू आ गए मुझे रिजवान के पास जाना है तो फिर तुम्हें सबसे बड़ा इम्तिहान देना होगा अगर तुम रिजवान की सच्ची मोहब्बत जीत सक तो तुम्हें इंसानों की दुनिया में लौटने का हक मिलेगा मगर अगर रिजवान ने तुम्हें ठुकरा दिया तो तुम्हें हमेशा के लिए इस पानी की दुनिया का हिस्सा बनना पड़ेगा
आयत का दिल तेजी से धड़कने लगा क्या रिजवान उसकी सच्चाई जानकर भी उसे अपनाए का या फिर वह भी उसे छोड़ देगा जैसे किस्मत ने हमेशा उसके साथ किया था आयत की आंखों में सवाल थे दिल में बेचैनी थी क्या रिजवान उसे वैसे ही अपनाए जैसे उसने अब तक प्यार की था या फिर उसकी सच्चाई जानकर वह भी उसे छोड़ देगा उसकी मां ने अपना हाथ आगे बढ़ाया अगर तुम रिजवान से सच्ची मोहब्बत करती हो तो यह इम्तिहान पार करो आयत ने बिना सोचे हाथ थाम लिया अचानक उसकी आंखों के सामने फिर से अंधेरा छा
गया और जब उसने खुद को होश में पाया तो वह उसी पुरानी दुनिया में थी इंसानों की दुनिया में रिजवान से आखिरी मुलाकात आयत ने चारों तरफ देखा वह अपने घर में थी उसे यकीन नहीं हुआ कि वह वापस आ चुकी थी मगर उसके अंदर कुछ बदल चुका था तभी दरवाजे पर दस्तक हुई आयत रिजवान की आवाज सुनकर उसका दिल तेजी से धड़क उठा वह भागती हुई दरवाजे तक पहुंची और दरवाजा खोला रिजवान उसे देखकर चौक गया आयत तुम ठीक हो तुम कई दिनों से गायब थी मैंने तुम्हें हर जगह ढूंढा आयत ने उसकी आंखों
में देखा वहां मोहब्बत थी पर क्या यह मोहब्बत उसकी सच्चाई जानने के बाद भी कायम रहेगी रिजवान ने उसका हाथ थामा आयत क्या हुआ था मुझे सच बताओ आयत की आंखों में आंसू आ गए रिजवान अगर मैं तुमसे कहूं कि मैं इंसान नहीं हूं तो क्या तुम मुझे वैसे ही प्यार करोगे रिजवान पीछे हट गया क्या हां रिजवान मैं एक आम लड़की नहीं हूं मेरी सच्चाई कुछ और है मेरी मां पानी की दुनिया की रानी थी और मैं भी उसी दुनिया से हूं रिजवान की आंखों में अविश्वास था आयत यह तुम क्या कह रही हो
यह मुमकिन नहीं मगर यही सच है आयत ने आंसू पहुंचते हुए कहा अगर तुम मुझसे सच्चा प्यार करते हो तो मेरी सच्चाई को अपनाओ ग रिजवान का चेहरा बुझ गया वह चुप था आयत ने उसकी आंखों में देखा अब फैसला तुम्हारे हाथ में है रिजवान क्या तुम मुझे वैसे ही अपनाओ ग जैसे मैं हूं कुछ पलों तक सिर्फ खामोशी रही फिर रिजवान ने धीरे से अपना हाथ पीछे खींच लिया आयत मैं मैं नहीं जानता कि मैं इस सच्चाई को कबूल कर सकता हूं या नहीं आयत को लगा जैसे उसकी दुनिया फिर से बिखर गई हो
तो फिर तुम्हारी मोहब्बत भी झूठी थी रिजवान ने कुछ नहीं कहा आयत की आंखों से आंसू गिरने लगे समझ गई मेरी कस्मत में इंसानों की दुनिया नहीं थी उसने ने एक आखिरी बार रिजवान को देखा और फिर धीरे-धीरे उसकी आंखें नीली होने लगी उसका जिस्म चमकने लगा और अगली ही पल वह पानी की बूंदों में बदलकर हवा में गायब हो गई रिजवान ने अपने हाथ आगे बढ़ाए मगर बहुत देर हो चुकी थी आयत मगर वह जा चुकी थी हमेशा के लिए अंत या एक नई शुरुआत कहते हैं कि जब बारिश की पहली बूंदे जमीन पर
गिरती हैं तो उनमें एक अजीब सी नरमी और सुकून होता है शायद क्योंकि वह