यशोमती मैया के नंदलाला बिना कछु बताए भाग गयो ये भी ना सोचा तेरे बिना मैया बाबा व्रत कैसे तोड़ेंगे देखो देखो अभी भी हंस रहा हूं मैं ये क्या होगा वैसे रुक प्रसाद लेके आती हूं क्षमा करो दो मैया पर जैसा आपके लिए मैं हूं वैसे ही मेरे लिए मेरे भक्त इसीलिए भोाराम का व्रत तुड़वाने जाना आवश्यक था। सुधा फिर से खो गई तुम अरे कौन से स्वप्नलोक में चली जाती हो तुम बार-बार हमें भी बताओ माया का प्रभाव ममता पर अधिक समय तक नहीं रह पाता प्रभु अरे बोलो ना यशोदा क्या सोच रही थी
मैंने ना श्री नारायण को देखा है हां वो तो मैं भी देख रहा हूं यही तो है हमारे सामने ये वाले ना तो मैंने साक्षात श्री नारायण को देखो अपने कान्हा के भीतर देखो कान्हा के भीतर ना मतलब कान्हा और ये दोनों आमने सामने थे मैं कुछ समझूं ना यशोदा नारायण और कान्हा दोनों आमने-सामने थे। ना मेरे कहने का अर्थ है कि कान्हा और श्री नारायण एक दूसरे के आगे पीछे थे। अच्छा तो मतलब श्री नारायण आगे थे और कान्हा पीछे था। पर अगर कान्हा पीछे था तो तुमने कैसे देखा? ओह हो कान्हा आगे था।
श्री नारायण पीछे थे। यशोदा एक बार फिर से सोच कर बताओ के नारायण आगे थे या कान्हा आगे था? ठीक से याद करो। बहुत बता तो रही हूं मुझे। थोड़ी धुंधली धुंधली सी स्मृति है बाबा इससे पहले कि उनके संदेह की अग्नि स्मृति की वायु पाकर और भड़क जाए कुछ भी करो और बुझाओ इसे। स्वप्न देखा है तुमने। हां, संभव है स्वप्न ही था। पर यदि स्वप्न था तो सुबह-सुबह उठते ही उसकी स्मृति क्यों ना आई? अब क्यों आ रही है उसकी स्मृति? और वो भी तब से जब से मैं भोाराम के यहां से कान्हा
को लेके आई हूं। और जब मैं गई थी तो छड़ी मेरे हाथ में थी। पर फिर कान्हा ने मुझे छड़ी दी और मैं बैठी हुई थी। इस बीच कछु तो हुआ है। भैया की आज चेतन समिति वापस आ रही है। अब मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे लगता है जी जब मैं वहां गई ना भैया व्रत पूरा करने का सुबह मुहूरत निकल जागो और अब तो भूख भी बहुत तीव्र लग रही है। गई कि लल्ला अभी तो कल से भूखा है। ले खा संतान की चिंता में सब कुछ भुला दे। ऐसी ही होती है मंदा।
और कान्हा को अच्छे से पता है कि इसको लाभ कैसे उठाना है। हां बाबा लाभ ना। मैं तो मैया की ममता का आनंद उठाना चाहता हूं। जितना संभव है उससे भी अधिक। बलराम कान्हा को फिर से गौ चारा लाने के लिए केवल तू ही मना सकता है। तुम में ही वो क्षमता है। हमारी टोली के मुख्य गोपालक जो हो तुम हां और कान्हा के दाव भी तो हो तुम। हां वो तुमको मना ना कर पाएगा। तुझे छोटा होने के नाते तुम्हारे आदेश का पालन तो करना ही चाहिए कान्हा को। चिंता मत करो सखा। मैं कछु
कहूं और कान्हा ना माने ये तो संभव ही ना है। आज जो हुआ ना जाने और कितने समय तक मेरा सत्य आपसे छिपा रह पाएगा। इसीलिए अब से अधिक से अधिक समय मैं आपके साथ ही बिताऊंगा। मैंने कह दिया तो समझ लो पत्थर पे रेखा खींच गई। कल से गाना हम सबके साथ अवश्य आएगा। अपना सारा समय हमारे साथ बिताएगो। अभी तक तैयार नहीं हुए? तैयार? गौचारण के लिए चलना है ना। तो मैं लेने आया हूं। नाना दाऊं मैं ना चल सकता। मुझे आज्ञा ना है। वो तो माखनचोरी के लिए भी नहीं थी। उस दिन
जब वकासुर के सामने चले गए थे तुम। तभी तो नहीं थी आज्ञा। इसीलिए आज्ञा का बहाना मत ही बनाओ ना। आना नहीं जाऊं। मैं तो सच्ची कह रहा हूं। मैया को फिर से दुखी ना कर सकते हो। और हम सबको दुखी कर सकते हो तुम। आज मैं तुम्हारी एक ना सुनूंगा गाना। घर पे रहते हुए कितने सप्ताह हो गए तुम्हें? तुम गोपालों का ना गोपालन करना तुम्हारा दायित्व है। आज तुम्हें हमारे साथ चलना ही पड़ेगा। ना जाऊं मैं ना चल पाऊंगा। बोल रहा तुम तो कह रहे थे कि कान्हा तुम्हारी हर बात मानता है। पर
इसने तो बड़े भाई का अनादन कर दिया। रुक जाओ कान्हा। सत्य बताओ। तुम छोटी मां के कारण वन नहीं चल रहे हो। क्या अब तुम्हें हमारे साथ रहना ही अच्छा नहीं लगता? कहीं ऐसा तो नहीं गौचारण में तुम्हारी रुचि समाप्त हो गई हो? ना दाऊ ऐसा कछु ना है। मुझे गौचारण ही बात प्रिय है और आप सबका साथ भी। तो फिर वहीं चलने में क्या समस्या है तुम्हें? अपने दाऊ की बात मान लो और चलो चुपचाप। मैंने सबको वचन दिया है कि तुम हम सबके साथ चलोगे। पर ताऊ मैंने भैया को भी वचन दिया है
कि मैं नहीं जाऊंगा। इसका अर्थ है कि मेरे वचन का कोई मूल नहीं है। मैं तुमसे बड़ा हूं कान्हा। तुम्हें मेरी आज्ञा माननी चाहिए। मुझे भी तो वचन दिया था तुमने। अब समझ क्यों आ रहा है? मैंने कहा ना मैं नहीं जा सकता। ऐसे कैसे नहीं आ सकते? मैंने बल्कि हम सब ने तुम्हारी हर शरारत में तुम्हारा साथ दिया है। चाहे माखन चोरी हो या गौचारण। और अब तुम अपने दाऊ को ही पीस दिखा के जा रहे हो। ताऊ मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं। पर मैंने कहा ना मैं नहीं जा सकता। मुझे मेरी मैया
के साथ ही रहना है तो फिर तुम्हारे लिए मैं यही महत्वपूर्ण है। दाऊ नहीं सखा नहीं गया भी नहीं। कान्हा ने तो तुम्हारी बात मानने से मना कर दियो बलराम लग तो है सच्चो भाई ना है। जानते हो इससे क्या सिद्ध होता है कान्हा? कि तुम छोटी मां के पुत्र नहीं हो। ये तुम छोटी मां के पुत्र नहीं हो। ताऊ ये क्या कह रहे हो आप? और नहीं तो क्या तुम उनके वास्तविक पुत्र होते तो अपने दाऊ की आज्ञा कभी नहीं टालते। ऐसा मत ही कहो ताऊ। मैं अपने मैया का ही लल्ला हूं। मुझे तो
लगता है छोटी मां हाथ से खड़े करके लाई है तुम्हें। आप ऐसा क्यों बोल रहे हो ताऊ? क्योंकि मैं वो सत्य देख रहा हूं जो तुम नहीं देख पा रहे हो। छोटी मां और छोटे पापा दोनों गोरे हैं और तुम अपना रंग देख लो स्वयं विचार कर लो। ये तो मैंने भी सोचा था। बस बोला नहीं। हां तो क्या हुआ? मेरी त्वचा का रंग अलग है। मैं उन्हीं का ही लल्ला हूं। बस धूप मैं तुम सबके साथ इतना खेला हूं कि मेरी त्वचा का रंग बदल को है। बड़बोली बात मत ही कर कान्हा। स्वयं को
बचाने के लिए हम पर दोष लगा रहो है। सत्य तो ये है कि तेरी त्वचा सदैव से ऐसी थी गाना। लग तो है ये कि बल सही कह रहा है। इसका अर्थ है कि सस्ती में नन काकार यशोदा काकी इसके हाथ से क्रैक करके आए हैं। बालक हाथ थोड़ी ना मिलता है। हमारे घर में जो बछड़ा है उसको तो मेरे बाबा हाथ से ही लाए थे। पर मुझे हाथ से कोई ना लायो है। मैं अपनी मैया का ही लल्ला हूं। यशुमती मैया का नंदाला ही हूं मैं। तुम्हें वन चलना है तो चलो या फिर मत
चलो। पर छोटी मां और छोटे बाबा का लल्ला होने का स्वांग करने की कोई आवश्यकता नहीं है। तुम भी अति करते हो कान्हा। कब एक बालक की तरह व्यवहार करते हो और कब भगवान की तरह। कुछ समझ में नहीं आता। भगवान क्या? मैंने भगवान क्या? हां। हां कह दिया तो कह दिया। खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो? चलो। या फिर तुम सबको भी अपने मैया के पल्लू में बंधकर घर पे ही रहना है। जानते हो इससे क्या सिद्ध होता है कान्हा कि तुम छोटी मां के पुत्र नहीं हो कि तुम छोटी मां के पुत्र
नहीं हो आ क्या गोल रो क्यों रहा है? अरे मैया को ना बताए लल्ला क्या हुआ? हां लल्ला क्यों रो रहा है लल्ला? बता किसी ने कछु कही है क्या? क्या होगा लल्ला? मैं आपका लल्ला हूं। ऐसा क्यों कह रहा है तू? क्या होगा? आपका भी लल्ला हूं मैं। अल्लाह! कान्हा! ये क्यों कह रहे हो लल्ला? मुझे पता चल गया है। मैं आप दोनों का लल्ला ना हूं। कुछ भी उल्टा सीधा बोल रहे हो। वो मेरा ही लल्ला है। ना आप मुझे हाथ से गिरा करके लाई हो। लल्ला तुझे किसने कही कि हार्ट में बालक
मिलते हैं? मिलते हैं। पूरी गैया का बालक भी तो हार्ट से ही आयो है। अच्छा क्षण भर के लिए मान लिया कि हार्ट में बालक मिलते हैं। पर तुझे कैसे पता चला कि तुझे हार्ट से ही लेके आए हैं? मेरा रंग देखो और फिर अपना हाथ देखो। मैं रात के अंधेरे जैसा हूं और आप दिल की उजाली जैसी। बाबा का रंग भी आप जैसा ही है। बस मैं ही बावला हूं। तो उससे क्या अंतर पड़ता है लल्ला? पढ़ तो मैं तभी तो दाऊ अन्य सभी सखाओं ने ऐसा कहा। इस बात पर ध्यान मत ही दे।
मां की ममता और बाबा का स्नेह इसका कोई रंग ना हो तो है लल्ला तो फिर आप ही बताओ मैया क्यों गोरी और मैं क्यों काला हाट से आया क्रय होके सुन हो गए कृष्ण धीर मैया गोरी बाबा गोरे लल्ल मैं क्यों चल मेरे साथ अभी सिद्ध हो कि तू मेरा ही लल्ला है। चल ये दोनों लल्ला और मैया का मन कछु समझ ही ना आता। कछु ना कछु उटपटांग करते ही रहते हैं दोनों। मैया ऐसे ले जा रही है मुझे। कहां और क्यों? कान्हा खाना आए हैं। कितने दिनों के बाद खाना आए हैं? आंखें
पथरा गई थी मार्ग देखतेदेखते। आज बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन करके मेरे वन का और मेरे मन का कोना-कोना जैसे खिल उठा हो। बलराम तुम्हारी योजना का भी कोई लाभ ना हो। योजना बना के छल में फंसाना मुझे नहीं आता। इस सब में तो केवल कान्हा ही प्रवीण है। कल उसने यशोदा काकी से हम सबकी शिकायत कर दी तो ले लग तो है करेगी। वो देखो। आजा बलराम बलराम ये बसंती कहां है? ये देख बसंती। हां और उसका लल्ला वो गोपी। उन दोनों की त्वचा का रंग एक सा है। कान्हा तू देख के बता।
बसंती और उसके लल्ला का रंग एक सा है। और ये देख डमरू। इसका जन्म तो तेरे सामने हुआ था ना। हां। और उसकी मैया गोमती इन दोनों की त्वचा का मिलान कर। एक सा रंग है। सब के सब गोपालक सामने आओ। अब तुम सब भी देख के बताओ दोनों की त्वचा एक जैसी है या रंग अलग-अलग है? अलग-अलग है। सीधामा तेरी गैया ये देख सुबह उन दोनों का रंग एक सा है कि अलग-अलग तो जब सुबह और श्यामू का रंग अलग होो है, डमरू और गोमती का रंग अलग-अलग हो है और जे गोपी और बसंती
का रंग अलग-अलग हो है तो भी ये सब मैया और लल्ला ही है ना इसका अर्थ है कि मैं सच्ची में आपका ही लल्ला हूं। किसी को कोई संदेह है कि हम मैया लल्ला ना हैं? कोई संदेह है? नहीं नहीं छोटी मां। मुझे कोई संदेह नहीं है। मैं तो बस अपने छोटे भाई के साथ परिहास कर रहा था। तन्हा। तू सदैव मेरा ही लल्ला था। मेरा ही लल्ला है और मेरा ही लल्ला रहे। समझ आई? सुन लियो सपने। यशोमती मैया का नंदाला यशोमती मैया का नंदाला यशोमती मैया का नंदाला यशो की मैया के नंदलाला यशोदा
की मैया के नंदलाला मैं यशोमती मैया काला यशोमती मैया काला यशोमती मैया काला क्षमा कर दो कान्हा। जब तुमने मेरी बात ना मानी तो मैंने क्रोध में उल्टा सीधा बोल दिया। मैं तो बस यही चाहता था कि तुम फिर से बनाने लगो। फिर से बन जाओ अपनी गोपालक टोली की मुखिया। फिर आ गया तू दुर्जन रहो आओ और इस बालक को बंदी ग्रह में डाल दो। सचेत होइए महाराज। ओ वो विष्णु अवतार कहां है? वो बालक कहां है? यहां नहीं है वो। आपके मस्तिष्क में है। उसे अपने साथ खिलवाड़ मत करने दीजिए महाराज। वो यहीं
है। मैंने देखा है उसे। स्वयं को संभालिए महाराज। आपको भयभीत होने का कोई अधिकार नहीं है। आप स्वयं को भूल चुके हैं महाराज। आप तो वो कंस हैं जिन्होंने अपने पिता को भी कारागार में बंद करवा दिया था और उनसे सिंहासन का अधिकार छीन लिया था। आप तो वो कंस हैं जिन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए वर्षों से अपनी प्रिय बहन और बहनोई को बंदी बनाकर रखा है। आप तो वो कंस हैं जिन्होंने अपने कितने ही भांजों को अपने ही हाथों से यमलोक पहुंचा दिया है ताकि आपका शत्रु ना पनप सके। यह समय भयभीत होने का
नहीं है महाराज। पर यदि आपके मन में यह संशय ऐसे ही बना रहा तो मैं आपको भी आपके पिताजी के साथ कारागार में बंदी बना दूंगी। और उस विष्णु अवतार का सामना मैं स्वयं करूंगी। राजद्रोह का परिणाम जानती हो ना? महारानी यही यही क्रोध उसे दिखाइएगा महाराज। किसी ऐसे योद्धा को ढूंढ के लाइए जो उसका वध कर सके। और हां, किसी ऐसे योद्धा को खोज कर लाइए जो अब तक भेजे गए। हर योद्धा से शक्तिशाली हूं। यदि आप चाहे तो मैं इस कार्य में आपकी सहायता कर सकती हूं महाराज। ये लो कान्हा ना अब ये
दायित्व आप ही संभालो। फिर तो मुझे मेरी मैया के साथ ही रहना है। अपना सारा समय बस इन्हीं के साथ ही बिताना चाहता हूं मैं। पर तू दोनों कार्य कर सकता है कान्हा दिन में हमारे संग रह ले रहे और शेष बचा सारा समय काकी के संग बिता ले पिछले दिनों में कितना सीखा है हम सबने पर तुम वरना आकर ये सुनहरा अवसर गवा रहे हो कान्हा हां कान्हा मैंने लव साधना सीख लिया है बिल्कुल सदिट बैठ तो है मेरा लक्स है। अरे वाह वसंता तूने तो बहुत अच्छा लग शादु है। तूने देखा कान्हा मैंने
गैयाओं के साथ बात करना सीख लियो है। ये देख कान्हा। देखा मैंने भी लाठी चलाना सीख लिया है। अब मैं सबकी रक्षा कर सकता हूं। मैंने भी सीख लिया कि गैया की गिनती कैसे की जाती है। वो देखो बलराम शक्तिशाली होने का अभ्यास कर रहा है। मैं तुम सबके लिए बहुत प्रसन्न हूं। बस मुझे तो अपनी मैया के साथ ही रहना है और हां सखाओ ताऊ को बता दो मुझे इनसे बात ना करनी भैया चलो घर और हां सखाओ दाऊ को बता दो मुझे इनसे बात ना करनी रोहिणी जीजी बलराम क्या हो इतना दुखी क्यों
है बलराम क्या होगो छोटे बाबा इतने दिन हो गए कान्हा हमारे साथ आ ही नहीं लगता है मुझसे क्रोधित है क्योंकि क्रोध में मैंने उसे कह दिया था कि वो आपका और छोटी मां का पुत्र नहीं है। हम क्रोध कितना भी क्यों ना हो बलराम हमें सदैव अपने शब्दों का प्रयोग सोच समझ करना चाहिए। शब्द ना बाण की तरह होते हैं। यदि एक बार मुख रूपी धनुष से निकल जाए तो वापस ना आते। मुझे पता चल गया छोटे बाबा। पर मैं उसे कैसे मनाऊं? इस कला में तो तारा ही प्रवीण है। मुझे तो उसकी तरह
भोलेपन से मुस्कुराना भी नहीं आता। बलराम तेरी भावना तो सच्ची है ना बस उतना ही पर्याप्त नहीं इतना पर्याप्त नहीं है छोटे बाबा मैंने बहुत प्रयास किया आज क्षमा भी मांगी उससे पर वो नहीं माना शब्दों से जो घाव लगते हैं ना बलराम वो एक बार में ना भरते और वैसे भूल तो तुम ही ने की थी तो कान्हा को मनाने का प्रयास भी तुम्हें ही करनी चाहिए। आज तूने अपने दाऊ से अच्छे से बात ना की? क्यों? दूध पीने के बाद अपने दाऊ के पास जा और ठीक से बात कर। मैं क्यों जाऊं मैया?
उन्होंने मुझे चिट्टा कछु बोला है। तेरे दाऊ की भावना तुझे दुख पहुंचाने की ना थी लल्ला कब तक क्रोधित रहेगो हम और वैसे भी वो है तो तेरे दाऊ ही ना छोटा भाई है ना तुम्हारा अच्छे से मनाएगो तो मान जाएगा एक बार और प्रयास करके देखो पहल करने से हम छोटे ना हो जाते लल्ला और अपनों की भूल को हमें क्षमा कर देना चाहिए इसे ऐसे छोटी-छोटी बातों को हृदय से लगाने से संबंध बिगड़ जाते हैं। समझ आई? आप सही कह रहे हो छोटे बाबा। बलराम का बल तो छोटे भाई से ही है। मैं
अपने संबंध को और भी अधिक बलशाली बनाऊंगा। अरे कहां जा रहे हो? अरे मैं भी आ रहा हूं। मैं अभी जाके उनसे बात करता हूं। तेरा क्षमा कर दो कान्हा आप तो पहले ही क्षमा मांग चुके पर तुम क्यों क्षमा मांग रहे हो क्योंकि मैंने अपने दाऊ की आज्ञा ना मानी नहीं कान्हा मैया की आज्ञा मेरी आज्ञा से अधिक महत्वपूर्ण है। आ कितने अच्छे लगते हैं ना दोनों एक साथ। एक दूसरे की भूल से ऐसे ही सीखेंगे। एक साथ बड़े होंगे दोनों भाई। सुनो जी आपको पता है क्या पररा में इतने दिनों में क्या-क्या सीखो
भाभी बता रही थी कि सुबह स्वयं से ही उठ जाता है और तैयार भी हो जाता है। समय का आदर करना सीख लियो है इसने। मुझे लगता है कि गौचारण पे जाना बलराम के विकास के लिए सहायक बनरो है। अपने कान्हा को गौचारण के लिए जाने से रोक के कहीं मैं कोई भूल तो ना कर रही। आइए आइए ना महाराज। ये कहां लेकर आई हो प्राप्ति मौन क्यों हो? मौन कौन है वहां? कौन है? और महारानी प्राप्ति कहां है? मैंने पूछा कौन है यहां? सामने आओ। मैंने पूछा कौन है यहां? सामने आओ। ये कैसे संभव
है? ये कैसे संभव है? कौन है तू? कौन हो तुम? मेरे सामने तलवार लहरा रहा है। इतना दुस्साहस मेरे सामने तलवार लहरा रहा है। इतना दुस्साहस यदि तूने पलक में चपकाने का प्रयास किया मेरी ये तलवार तेरे रक्त से स्नान करेगी। कौन है तू? अपनी पहचान बता और सामने आ। महाराज महाराज मुझे छोड़ दीजिए। इसी क्षण अपने वास्तविक रूप में आ। अन्यथा तेरा ये शीश तेरे धड़ से अलग हो जाएगा। क्यों मासूम तुम अपने दास का प्रणाम स्वीकार करें महाराज कभी तुम्हारे प्राण ही ले लेता मैं पर अब आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि अब
आपके लिए उस विष्णु अवतार का प्राण लेगा ही। योमासुर आपकी आज्ञा का पालन ना करें। यह तो संभव नहीं है महारानी। आप निश्चिंत रहिए। किसी को पता नहीं चलेगा कि उस बालक को किसने मारा है। उसके भाई बलराम ने या उसके सखाओं ने? या फिर स्वयं उसके माता-पिता ने मुझे तुम्हारा ध्यान पहले क्यों नहीं आया बहमासुर तुम तो वो छाया हो जो अपने ही तन को निकल जाए। अब अपनी प्रशंसा करने में मैं समय नष्ट क्यों करूं महाराज? आपका कार्य हो जाएगा। मैं आज रात्रि ही निकल जाऊंगा वृंदा नवन के लिए। आज्ञा है। कान्हा कृष्णा
गोपाल ना ठीक ना है ना ना कान्हा के विकास में बाधा ना बन सकती ना कान्हा कृष्णा गोपाल कान्हा कृष्णा गोपाल कान्हा कृष्णा गोपाल कान्हा कृष्णा गोपाल वृंदा देवी, यमुना देवी, देवी गंगा, आप तीनों क्या इस समय कान्हा के नटखट लीला और मजेदार कारनामे देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब और बेल आइकॉन दबाना ना भूलें।