खुद से जीतने वालों को मेरा सलाम एक देर रात स्टीव जॉब्स को जरूरी मेल भेजना था उन्होंने अपना मैक यानी एल कंप्यूटर चालू किया कंप्यूटर शुरू होने के दौरान स्टीव जॉब्स ने महसूस किया कि ऑपरेटिंग सिस्टम को बूट होने में यानी स्टार्ट होने में काफी समय लग रहा है अगले ही दिन स्टीव ऑफिस पहुंचे और इंजीनियर लेरी कैनियन से मिले उन्होंने कहा लैरी हमें किसी भी तरह मैक के बूट टाइम को कम करना है लरी ने कहा बूट टाइम को कम करना असंभव है क्योंकि डाटा स्पीड की अपनी सीमाएं हैं हार्ड डिस्क इससे तेज नहीं
चल सकती ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड होने में इतना समय तो लगेगा ही जॉब्स ने लैरी को बीच में रोकते हुए कहा लैरी मेरी बात ध्यान से सुनो अगर मैं कहूं कि कंप्यूटर 10 सेकंड जल्दी स्टार्ट होने से किसी की जान बच सकती है तो क्या तुम ऐसा कर पाओगे लरी अचानक गंभीर हो गए और बात को ध्यान से सुनने लगे स्टीव वाइट बोर्ड पर लिखने लगे और कहा लैरी मान लो कि हर दिन 50 लाख लोग दिन में दो बार हमारा कंप्यूटर चालू करते हैं अब केवल 10 सेकंड बूट टाइम कम करने से तुम हर
साल लोगों के 10 करोड़ घंटे बचा सकते हो दूसरी तरफ एक इंसान 60 साल के जीवन में 35 लाख घंटे जागता है यानी 10 करोड़ घंटे 30 जीवन काल के बराबर होते हैं स्टीव ने कहा लैरी तुम्हारा काम बहुत जरूरी है केवल 10 सेकंड कम करके तुम हर साल 30 जिंदगियां बचा सकते हो लहरी की आंखें फैल गई जैसे उसके सामने नया सत्य प्रकट हो गया हो इस मीटिंग के दो हफ्ते बाद लैरी ने मैक के बूट टाइम को 10 सेकंड्स नहीं बल्कि 28 सेकंड कम कर दिया लैरी अभी तक अपनी प्रॉब्लम को चिप टेक्नोलॉजी
की सीमाओं में देख रहा था लेकिन जैसे ही उसने 30 जिंदगियों के बारे में सोचा उसके काम को नया पर्पस मिल गया और लैरी का दिमाग नए उत्साह से नए सॉल्यूशंस के बारे में सोचने लगा उसने बूट लोडिंग का नया तरीका खोज निकाला और लैरी ने खुद को आश्चर्य चकित करते हुए 10 सेकंड की बजाय 28 सेकंड कम कर दिए रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड जितने भी सफल लोग हैं वे अपने चारों तरफ रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड बनाते हैं पहले वो सोच समझ के डिसाइड कर लेते हैं कि उनका विजन क्या है उन्हें छ महीने में क्या करना
है उसके बाद लीडर्स उन सभी फैक्ट्स को सच मान लेते हैं जो उनके विजन को सपोर्ट करते हैं और जो फैक्ट्स उनके विजन से मेल नहीं खाते उन कारणों या फैक्ट्स को वे पूरी तरह नकार देते हैं अपनी सोच के फील्ड में आने नहीं देते स्टीव जॉब्स कहते हैं एनीथिंग दैट डंट हार्मोनाइज मस्ट को इस बात को अगली कहानी से समझते हैं जब आई डेमो सफल हुआ तब स्टीव जॉब्स बहुत नाखुश थे कारण था प्लास्टिक का डिस्प्ले जिस पर स्क्रैच बहुत जल्दी पड़ रहे थे कांच का डिस्प्ले भी नहीं लगा सकते थे क्योंकि उस समय
जो कांच उपलब्ध था व गिरने से आसानी से चटक जाता फिर स्टीव कॉर्निंग कॉरपोरेशन के सीईओ वेंडल वीक से मिले और यह मुलाकात ऐतिहासिक रही पहले मीटिंग में स्टीव जॉब्स बहुत देर तक क्लास टेक टेक्नॉलॉजी पर बात करते रहे नया ग्लास बनाने के बारे में समझाते रहे वीक्स ने कहा स्टीव मुझे ग्लास सिखाना बंद करो शांत रहो और मेरी बात ध्यान से सुनो हमने 1960 में मजबूत कांच बनाने का तरीका पहले ही विकसित कर लिया था यह कांच इतना मजबूत है कि हमने इसकी ताकत के चलते इसका नाम गोरिला ग्लास रखा फिर वीक्स ने स्टीव
को कांच की मजबूती और क्वालिटी पर यकीन दिला दिया जैसे ही स्टीव जॉब्स को बात समझ आई वैसे ही उन्होंने हर आईफो पर लगाने के लिए बहुत बड़ा ऑर्डर दे दिया जो अगले 6 महीने में पूरा करना था वीक्स ने कहा स्टीव यह असंभव है इतना बड़ा ऑर्डर तो हमारी सारी फैक्ट्रीज मिलकर पूरा नहीं कर सकती स्टीव जॉब्स ने वीक्स की आंखों में आंख डालकर कहा वीक्स तुम डरो मत तुम कर लोगे यह मान लो कि ऐसा संभव है अब अपना दिमाग इस बात पर लगाओ कि करोगे कैसे स्टीव जॉब्स की आंखों में विश्वास देखकर
वीक्स भी मान गए अगले दिन अपने इंजीनियर्स और मैनेजर्स को बुलाया एलसीडी का प्रोडक्शन रोका और गोरिला क्लास पर काम शुरू किया 20 साल बाद आज हर स्मार्टफोन पर यही ग्लास लगा हुआ है बाद में वक्स कहते हैं कि मुझे आज भी विश्वास नहीं होता कि हमने 6 महीने में व असंभव ऑर्डर पूरा कैसे किया दोस्तों यह रियलिटी डिस्टॉर्शन फीड का कमाल है पहले स्टीव सोच रहे थे कि नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है लेकिन जैसे ही उन्हें समझ आया कि टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है तो तत्काल उन्होंने अपना गोल ठीक किया और उस पर अट
गए स्टीव जॉब्स कहते हैं कि हर चीज जो मेरे और विजन के बीच में बाधा पैदा करती है मैं उसे अपनी सोच से दूर कर देता हूं स्टीव जॉब्स ने रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड कैसे सीखा कॉलेज के दौरान स्टीव जॉब्स रॉबर्ट फ्रिडलैंड से मिले यह वही रॉबर्ट है जिन्होंने स्टीव जॉब्स को नीम करुली बाबा के आश्रम भेजा लेकिन उस समय रॉबर्ट फ्रिडलैंड ने स्टीव जॉब्स को एक पर्सनल फोर्स फील्ड के बारे में बताया जिसके द्वारा इंसान अपने डर डाउट्स हेसिटेशन को ब्लॉक करके अपने गोल्स पूरे कर सकता है और तत्काल अपनी पर्सनालिटी भी बदल सकता है
स्टीव जॉब्स आरडीएफ का प्रयोग अपने ऊपर करने लगे वे अपनी इच्छा शक्ति से अपने आसपास एक फील्ड इमेजिन करते जिसमें सभी चीजें उनके विजन के हिसाब से होती जा रही हैं सही अपॉर्चुनिटी सही लोग अपने आप पास खींचे आते जा रहे हैं और मुश्किलें गायब होती जा रही हैं रॉबर्ट फ्रिडलैंड से मिलने से पहले स्टीव शर्मीले और अपने तक सीमित रहते थे लेकिन उसके बाद उनकी पर्सनालिटी पूरी तरह बदल गई वे बहुत कॉन्फिडेंट हो गए जॉब्स अपनी बायोग्राफी में कहते हैं कि आरडीएफ से मेरा दुनिया देखने का तरीका और मेरी चेतना का स्तर ही बदल
गया इट टर्न मी ऑन टू अ डिफरेंट लेवल ऑफ कॉन्शियस मैंने रियलाइफ चीजें कर सकता है रियलिटी बेंड कर सकता है स्टीव एक वीडियो में कहते हैं अपने चारों तरफ देखो जितनी भी टेक्नोलॉजी और प्रगति है जितने भी इन्वेंशन हैं यह आप और हम जैसे इंसानों ने ही किए हैं रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड पैदा कैसे करते हैं हमें अपने अंदर तीन चीजें चाहिए पहली इच्छा शक्ति कि जो लक्ष्य मैंने चुना है उसे मैं पूरा करके रहूंगा यानी मैं विजन बनाए रखूंगा और इस विजन के लिए जो करना पड़े मैं करने को तैयार हूं दूसरी बात सोच
रियलिटी से बड़ी है सबसे पहले स्वीकार करो कि मेरी सोच रियलिटी से बड़ी है चुनौतियों से शक्तिशाली है असलियत में क्या हुआ यह मायने नहीं रखता बल्कि हम उस चीज को कैसे देखते हैं केवल यह मायने रखता है और तीसरी बात है पैशन आपको लक्ष्य के लिए उत्साह महसूस होना चाहिए कि एक गोल मेरे जीवन में कितना मायने रखता है अगर आप अटके हुए हो या हताशा है तो एक्साइटमेंट पैदा करने के लिए आप सोचो कि इस चैलेंज को पार करके मेरे जीवन में कितने रास्ते खुल जाएंगे मेरे लिए कितनी चीजें करना आसान हो जाएंगी
मुझे कितना बूस्ट मिलेगा मेरा कॉन्फिडेंस किस लेवल पर होगा आपको सोचना चाहिए कि यह 30 दिन का चैलेंज पूरा करके मेरे जीवन का नया चैप्टर शुरू हो जाएगा समरी ट्रांसफॉर्म रियलिटी एल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं कि सच यह है कि रियलिटी मात्र सपना है लेकिन यह सपना बहुत अड़ियल भी है अड़ क्यों है क्योंकि आपकी सोच अड़ियल है यानी पुरानी सोच के चलते प्रॉब्लम्स भी अड़ी रहती हैं मतलब आपकी सोच रियलिटी से बड़ी है चैलेंस के प्रति नजरिया बदलकर अपनी क्षमताओं के प्रति नजरिया बदलकर आप जितना सोच सकते हो उससे भी ज्यादा हासिल कर सकते हो
और इस पूरे प्रोसेस से अपना जीवन ट्रांसफॉर्म कर सकते हो चैलेंज जीतने के लिए उत्साह पैदा करो कोई भी मुश्किल हो जिसे आप पार नहीं कर पा रहे तो मुश्किल से नजर हटाओ और खुद से पूछो कि मैं इस मुश्किल को पार कर जाऊं तो मेरे लिए कितने रास्ते खुल जाएंगे खुद से पूछो कि जिस चीज को मैं रुकावट सोच रहा हूं असल में वह चीज मुझे क्या सिखा रही है और इच्छा शक्ति जो मुझे चाहिए उसका विजन हमेशा आंखों के सामने रखूंगा और इसे पाने के लिए जो मेहनत करना पड़ेगा जो सीखना पड़ेगा उसके
लिए में तैयार हूं दोस्तों लॉ ऑफ अंपन कहता है कि गोल के बारे में जितने एंगल से सोचोगे गोल उतना ही आपके नजदीक आता जाएगा इसके अलावा एक्नॉलेजमेंट की ऐसी शक्ति होती है जो आपके पॉजिटिव बिलीफ सिस्टम को और ताकतवर बनाती है दोस्तों यह वीडियो आपके जरूर काम आएगा इसे बात के लिए जरूर सेव कर लीजिए और याद रखिए आपके समय से कोई वीडियो कोई ऐप कोई न्यूज कीमती नहीं है मैं काम के किस्से लाता रहूंगा हिम्मत हरकत होशियारी हम जीतेंगे