यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो रोजाना अपने गांव के करीब जंगल में बकरियां चराने जाया करती थी वह एक प्रसक जगह थी जहां एक पुराना कनवा भी था बुजुर्गों का कहना था कि यह कनवा सदियों पुराना है और उसके आसपास अजीबो गरीब वाक्यात पेश आते रहते हैं मगर फातिमा को उन बातों पर ज्यादा यकीन नहीं था वह रोजाना [संगीत] बिकयाओ पहुंची तो देखा कि एक नौजवान वहां कन्वे के पास खड़ा है है वो पहले कभी इस इलाके में किसी अजनबी को नहीं देखती थी इसलिए हैरान हुई नौजवान ने उससे पूछा यह कनवा कब
से यहां है फातिमा ने डरते हुए कहा पता है नहीं हमेशा से यही सुना है कि यह बहुत पुराना है मगर आप कौन है यहां क्या कर रहे हैं नौजवान मुस्कुराया मगर कोई जवाब दिए बगैर कन्वे के अंदर झांकने लगा फातिमा को यह सब अजीब लगा मगर वह ज्यादा देर वहां रखी नहीं और बकरियों की तरफ मतवल तो वह बिरियां लेकर वापस जाने लगी मगर अचानक उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसके पीछे चल रहा हो उसने पलट कर देखा मगर वहां कोई नहीं था तभी एक भारी गहरी आवाज गूंजी अपना हिजाब ठीक करो फातिमा
का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा उसने फौरन अपना दुपटा संभाला और तेजी से गांव की तरफ बढ़ गई घर पहुंचकर उसने उम्मा के सवालों के जवाब देने से ग्रीज किया और बस यही कहा तुम ही कहती हो ना कि मगरिब से पहले घर आ जाया करो रात को वह सोने के लिए लेटी तो अजीब सा ख्वाब देखा एक धं चेहरा सरख चमकती आंखें और वही आवाज आज के बाद तुम्हारे सर से हिजाब ना उतरे डडड के मारे उसकी आंख खुल गई कमरे में हल्की सी खुशबू फैली हुई थी उसने उम्मा से पूछा यह खुशबू कैसी
है मगर उम्मा ने कहा मुझे तो कुछ महसूस नहीं हो रहा अगले दिन जब वह जंगल पहुंची तो वहां का माहौल बदला बदला सा था कनवे के करीब गैर मामूली खामोशी थी जैसे वहां कोई होता ही ना हो मगर जोन ही वह बकरियां चलाने में मसरूफ हुई अचानक वही हो नौजवान उसके सामने आ खड़ा हुआ क्या कुछ पानी मिल सकता है उसने मुस्कुराकर पूछा फातिमा ने हैरत से देखा कल शाम तो उसने उसे यहां नहीं देखा था फिर यह आया कब उसने जल्दी से अपनी पानी की मुश्क उसकी तरफ बढ़ा दी नौजवान ने पानी पिया
और नरमी से कहा हर बात पर परेशान मत हो जाया करो और जहां तुम्हारी उम्मा रिश्ता तय कर रही है वहीं शादी कर लेना तुम्हारे लिए बेहतर होगा यह सुनकर फातिमा के रोंगटे खड़े हो गए उसे हैरानी हुई कि उसे कैसे पता चला कि आज उसके रिश्ते वाले आ रहे हैं मगर जब उसने नौजवान की तरफ फिर से देखा तो व गायब हो चुका था घर पहुंचते ही उसने देखा कि मां मेहमानों को बठ चुकी थी जैसे ही वह अंदर आई एक औरत ने कहा बहुत खूबसूरत है फिर वह एक नौजवान की तरफ देखकर बोली
जैनी कैसी लगी फातिमा फातिमा का दिमाग सुन हो गया यह वही नौजवान था जो कन्वे के पास खड़ा होता था उसकी जुबान से बेतिया निकला यह तो वही लड़का है पूरा कमरा हैरत में डूब गया मगर जीनी सिर्फ मुस्कुरा दिया फातिमा के कानों में बस एक ही आवाज गूंज रही थी जीनी जिन जीनी जिन जब जब यह नाम पुकारो गगी तुम्हारी मदद हो जाएगी मेहमान हैरत से उसकी तरफ देखने लगे उमा ने हैरानी से पूछा कौन लड़का फातिमा कुछ कह नहीं पाई उसकी धड़कने तेज हो गई थी और वह अपने दिल को समझाने की कोशिश
कर रही थी कि यह वही शख्स कैसे हो सकता है यह वही था जिसने कल रात कहा था बा पर परेशान मत हुआ करो और जहां अम्मा कह रही है वहां शादी कर लो सामने खड़ा शख्स हल्के से मुस्कुराया और बोला फातिमा अब तो तुम मुझे पहचान ही गई हो उसकी बात सुनकर फातिमा का खून जैसे जम गया उसने खुद को संभाला और कपक पाती आवाज में बोली तुम तुम कौन हो सामने वाले ने उसकी आंखों में गहराई से देखा और कहा मैं वो हूं जो तुम्हारी हर पुकार पर तुम्हारे साथ होगा जैसा कि मैंने
कहा कहा था जब भी होगा तुम मुझे पिकारो गी तुम्हारी मदद हो जाएगी फातिमा के हाथ पैर ठंडे पड़ गए अब उसे एहसास हो रहा था कि पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा था वह आम बात नहीं थी उम्मा और बाकी घर वाले उसे एक आम रिश्ता समझ रहे थे मगर फातिमा की हालत देखकर उम्मा ने धीरे से पूछा बेटी क्या हुआ तुम इतनी घबराई हुई हो क्यों हो फातिमा ने कुछ कहने की कोशिश की मगर अल्फाज गले में ही टिक गए वो बस सामने खड़े शख्स को देखती रही जो बदस्तूर पसरा मुस्कुराहट
के साथ उसे घूर रहा था लड़के की मां बोली बेटा तुम किसी और की बात तो नहीं कर रही क्या तुम्हें कोई और पसंद है फातिमा ने घबराकर फौरन सर हिला दिया नहीं ऐसी कोई बात नहीं औरत मुस्कुरा कर बोली तो फिर ठीक है हम आज ही शादी की तारीख पकी कर देते हैं हमें जल्द से जल्द शादी करनी है हमारा एक ही बेटा है और हमें उहे की शादी की बहुत ख्वाहिश है उमा भी खुश हो गई मेरी भी बेटी सबसे बड़ी है मैं भी उसकी शादी के बारे में बहुत सोच रही थी मगर
फातिमा के दिल में अब भी वही अजीब आवाजें गूंज रही थी वह सोच रही थी कि आखिर यह सब क्या है रात को उसने तहज्जुद के वक्त दुआ करने का फैसला किया जब वह नमाज पढ़ने खड़ी हुई तो उसे महसूस हुआ कि जैसे कोई और भी उसके साथ इबादत कर रहा रहा हो जब व कुरान की आयतें पढ़ रही थी तो कोई और भी उन्हीं अल्फाज को दोहरा रहा था वह खौफ जदा हो रहा था हो गई मगर उसने अपनी नमाज मुकम्मल की दुआ के लिए हाथ उठाए तो एक धीमी सरगोशी सुनाई दी अपनी दुआ
लंबी कर लो और अपने लिए बेहतरी मानो तुम्हें वही मिलेगा जो तुम चाहोगी उस आवाज ने उसे एक अजीब सा सुकून दिया उसका दिल गवाही दे रहा था कि जो भी यह वजूद है नेक रूह है वरना वे इबादत में शामिल ना होता उसने अपने नसीब की बेहतरी मांगी हर व चीज मांगी जिसकी ख्वाहिश कर सकती थी और आखिर में कहा अगर जीनी मेरे हक में बेहतर है तो मुझे मिल जाए मगर बार-बार वही आवाजें गूंज रही थी जीनी जीनी उसी सोच में गुम उसने अपना चेहरा हाथों से धया और जैसे ही पीछे मुड़ी उसके
होश उड़ गए पीछे जीनी खड़ा था फातिमा के मना से चीख निकल गई स तुम यहां जीनी मुस्कुराया मैं अंधेरे में ही आता हूं मुझे अंधेरा बहुत पसंद है और तुम इतनी हैरान क्यों हो रही हो तुम्हें तो अब हमेशा के लिए मेरे पास आना है मेरा पूरा घर अंधेरे है मैं डूबा रहता है तुम वहां कैसे रहोगी फातिमा के रोंगटे खड़े हो गए उसने कांपती हुई आवाज में कहा मुझे तुमसे खौफ महसूस हो रहा है तुम यहां कैसे आए दरवाजा तो बाहर से बंद था जीनी हल्का सा हंसा जनों को दरवाजे खोलने की जरूरत
नहीं होती फातिमा सुनकर साक रह गई नहीं यह मुमकिन नहीं तुम तुम एक जन हो जीनी ने गहरी नजरों से उसे देखा अभी तो तुम्हें सुकून महसूस हो रहा था अब मैंने सच बता दिया तो तुम डरने लगी मुझसे खौफ मत खाओ मैं तुम्हें नुकसान पहुंचाने नहीं आया बल्कि सच तो यह है कि मुझे तुम बहुत पसंद हो तुम्हारा यह हिजाब जो हर वक्त तुम्हारे सर पर रहता है मुझे उससे इश्क है फातिमा की सांसे तेज हो गई जैनी ने नर्मी से कहा हमारा रिश्ता आसमान पर ते हो चुका है तुम्हें मुझसे शादी करनी ही
होगी यह सुनकर फातिमा ने जल्दी से पीछे हटने की कोशिश की फिर अचानक दरवाजे की तरफ भाग पड़ी उम्मा से टिकरा गई उम्मा घबरा गई बैटी क्या हुआ कहां भाग रही हो फातिमा कप कपाती हुई बोली उम्मा कमरे में जीनी वो वही है उमा हैरानी से बोले तुम्हारा दिमाग तो ठीक है जीनी वहां कैसे आ सकता है फातिमा ने लती आवाज में कहा उमा वो इंसान नहीं है वह एक जिन है उसने खुद बताया यह सुनते ही उम्मा के चेहरे का रंग बदल गया उन्होंने गुस्से में फातिमा को एक थप्पड़ रसीद किया और बोले यह
तुम कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो क्या बकवास कर रही हो तुम होश में भी हो उमा के थप्पड़ की गोंज अभी भी उसके कानों में थी उसकी आंखों में आंस मगर व चुप थी जिस मां ने उसे हमेशा प्यार दिया आज वही उसकी बात पर यकीन करने को तैयार नहीं थी उसका दिल भारी हो गया था वह चुपचाप कमरे से बाहर निकली और अपने काम में लग गई मगर उसके जहन में बस एक ही सवाल था आखिर हो गया था जिनी चाहता क्या है वह कौन है और सबसे ज्यादा तकलीफ उसे इस बात
की थी किमा ने उसकी एक भी बात पर यकीन नहीं किया अभी वो ख्यालों में गुम थी कि अचानक किसी ने उसके सामने चंद हजार रुप रख दिए उसने हैरत से इन पैसों को देखा और जैसे ही नजर उठाई उसका गुस्सा आसमान को छने लगा सामने कोई और नहीं बल्कि वही था जनी वह गुस्से से खड़ी हुई और झटके से उसका गबान पकड़ लिया तुम चाहते क्या हो तुम हो कौन चले जाओ यहां से आइंदा के बाद मुझे अपनी शक्ल भी मत दिखाना मगर जिनी उसकी बात पर सिर्फ मुस्कुरा दिया उसकी आंखों में अजीब सी
चमक थी जैसे वह हर चीज पहले से जानता हो सोच लो तुम्हारी उम्मा तो मुझसे ही तुम्हारी शादी करना चाहती है और हां एक बात और आइंदा उनसे कुछ कहने की जरूरत नहीं है वरना जिस तरह आज उन्होंने मेरे इशारे पर तुम्हारे साथ रविया तियार किया वैसे ही आइंदा भी करेंगी मैं उनकी आंखों पर ऐसी पटी बांध दूंगा कि इन्हें कुछ दिखाई ही नहीं देगा उसके लहजे में नरमी थी मगर अल्फाज में अजीब सा डर समाया हुआ था फातिमा के पैरों तले जमीन खसक गई तुमने तुम्हारी उम्मा सिर्फ तुम्हारी मां नहीं है वह मेरी भी
मां है बस अब तुम्हें यह मान लेना चाहिए कि तुम्हारा और मेरा रिश्ता पहले से ते है तुम्हारे इंकार करने से कुछ बदलने वाला नहीं है फातिमा यह बात जितनी जल्दी समझ जाओगी इतना ही बेहतर होगा फातिमा का जिस्म काम पुठा उसका दिल चाह रहा था कि भाग जाए मगर उसके पैरों में जैसे जंजीरें पड़ गई थी तुम तुम एक जन हो मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती इस बार जनी ने लंबी सांस ली और एक कदम आगे बढ़कर उसके करीब आ गया मैंने तुमसे पूछा था कि तुम्हें मेरी
मदद चाहिए या नहीं तुम्हें जब भी जरूरत होगी मैं तुम्हारे पास आ जाऊंगा उसकी आवाज कानों में गूंजने लगी वही अल्फाज वही लहजा जो पहली बार उसने सुना था फातिमा को महसूस हुआ जैसे उसकी दुनिया अचानक बदल गई हो इसके सामने कोई आम इंसान नहीं था बल्कि एक ऐसा वजूद था जो उसकी सोच से परे था मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है तुम मेरे साथ यह सब क्यों कर रहे हो तुम चाहते क्या हो जिनने जवाब दिया मैं तुम्हें चाहता हूं मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं कितनी बार बताऊंगा लड़की ने साफ लहजे में कहा तुम
एक जिन हो और मैं यह हकीकत जान चुकी हूं उसके बावजूद भी तुम्हें इतना यकीन क्यों है कि मैं तुमसे ही शादी करूंगी मैं तुमसे किसी भी सूरत में शादी नहीं करूंगी और तुम यह बात आज ही लाख लो जनी ने गहरी नजरों से उसे देखा और बोला मुझसे शर्त मत लगाना और मेरी अना को मत ललकारना वरना तुम खुद मजबूर हो जाओगी यह कहने पर कि तुम्हें मुझसे ही शादी करनी है लड़की की आंखों में आंसू आ गए उसकी बातें उसे तकलीफ दे रही थी तुम यहां से चले जाओ जब मैं ही तुमसे शादी
करने के लिए राजी नहीं हूं तो तुम क्यों जद कर रहे हो मैं तुम्हारे साथ कभी खुश नहीं रह सकती मैं एक आम इंसान हूं और एक इंसान के साथ ही शादी करना चाहती हूं यह सुनकर जिन आग बगोला हो गया इसने लड़की का हाथ पकड़ लिया और बोला मुझे बस दो मट लगेंगे तुम्हें यहां से ले जाने में फिर तुम बैठी रहना अपनी मर्जी करती हुई मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा लेकिन तुम मेरी दुनिया में चली जाओगी मेरी बस्ती में जहां मेरा राज चलता है वहां तुम मेरे हाथों की कुट पतली बनकर रह जाओगी लड़की
खौफ से कांप गई उसने गड़गड़ा हुए कहा नहीं तुम मुझे कुछ मत करना मैं जैसा कहोगे वैसा ही करूंगी जिन उसकी बात पर मुस्कुरा दिया तुम्हें मुझसे डरने की जरूरत नहीं है तुम तो बेवकूफ हो एक तुम ही तो हो जो मेरे दिल पर राज करती हो तुम चाहो तो मुझ मुझ से कुछ भी करवा सकती हो मगर प्यार और मोहब्बत से लेकिन अगर जद करोगी तो याद रखना मैं तुमसे ज्यादा जदी हूं लड़की ने सिर लाया और कहा ठीक है मैं आज के बाद तुमसे जद नहीं करूंगी मगर तुम मुझे कहीं मत लेकर जाना
मैं अपनी मां के पास रहना चाहती हूं उनकी खिदमत करना चाहती हूं मेरे सिर से मेरे बाप का साया उठ चुका है मेरी मां अकीली है खुदा के लिए तुम ऐसा मत करो जिन कुछ पल चुप रहा फिर बोला ठीक है लेकिन शादी तो तुम्हें करनी ही पड़ेगी और वह शादी मेरे साथ ही होगी अगर तुमने किसी और के बारे में सोचा या अपनी मां से किसी और का जिक्र किया तो फिर मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनूंगा यह कहकर वह अचानक धुए की तरह गायब हो गया लड़की वहीं खड़ी कांप रही थी वह सोच
रही थी कि अब वह क्या करे किससे मदद मांगे क्या मलंगी ठीक कह रही थी क्या उसे वाकई जंगल के ने कनवे पर जाना चाहिए लेकिन उसकी मदद करने वाला तो सिर्फ अल्लाह था यही सोचकर उसने अपना सामान बांधा और घर की तरफ चल दी मगर ना जाने क्यों घर जाने को दिल नहीं कर रहा था रास्ते में एक सरसब्ज मैदान था जहां वह हमेशा दौर से देखती थी मगर आज वहां जाने का दिल चाहा वह मैदान में दाखिल हुई वहां के फूल बेहद खूबसूरत थे जैसे किसी और दुनिया से आए हूं उसने सोचा मैंने
पहले कभी भी इन फूलों को क्यों नहीं देखा वहां कोई माली भी नहीं था फिर यह फूल यहां आए कहां से हल्की हल्की हुआ चल रही थी ठंड बढ़ रही थी और धं भी पड़ने लगी थी तभी वहां एक बुजुर्ग आए और आराम से बैठ गए उनका चेहरा इतना रोशन था कि जैनब की आंखें हैरत से चमक उठी बुजुर्ग ने मुस्कुरा कर पूछा बेटी तुम कौन हो तुम तो बहुत खूबसूरत हो ऐसा लगता है जैसे बस्तान की शहजादी हो किसी और दुनिया से आई हो फातिमा हैरान रह गई और मुझे लगता है कि शायद आप
भी किसी और दुनिया से हैं बुजुर्ग हंस पड़े फिर बोले तुमने बिल्कुल सही पहचाना तुम में वह ताकत है जो दूसरी दुनिया के लोगों को पहचान सकती है मैं शाहे जनात हूं और मैं यहां अपने बेटे की माफी मांगने आया हूं फातिमा के कदमों तले जमीन निकल गई जब मैं अपनी बस्ती के लोगों को तकलीफ में नहीं देख सकता तो तुम तो फिर इंसानों की बस्ती से हो और मेरे बेटे की पसंद भी हो मैं जानता हूं कि उसने तुम्हें बहुत तंग किया है लेकिन उसने यह सब अनजाने में किया है मैंने उसे बहुत डांटा
है मगर अब मैं तुमसे भी माफी मांगने आया हूं मेरे बेटे को माफ कर दो बेटी बुजुर्ग ने गहरी सांस ली और बोले अगर तुम उसे माफ नहीं करोगी तो मुझे मजबूरन उसे अपनी बस्ती से निकालना होगा हमारे यहां ऐसा कोई भी नहीं रह सकता जो इंसानों को डराए हम तो प्यार हैं और मोहब्बत बांटने वाले हैं और अगर हमारी बस्ती में कोई ऐसा करता है तो उसे सख्त सजा दी जाती है बताओ बेटी क्या तुम उसे माफ कर दोगी उसे यूं समझो कि तुम्हारा बाप तुमसे कुछ मांग रहा है बुजुर्ग की बातें सुनकर लड़की
की आंखों में आंसू आ गए शाहि जनाथ आगे बोले अगर तुम शादी के लिए हां कर दोगी तो हमारी बस्ती का एक बहुत बड़ा मसला हल हो जाएगा बस्ती में एक नेक इंसान की जरूरत है क्योंकि हमारी बस्ती पर एक बदिया है और सिर्फ एक इंसान ही हमें उससे निकाल सकता है इंसान की शादी किसी जिन जादे से हो जाए तभी हमारी बस्ती उस बद्दा से पाक हो सकती है बताओ बैटी क्या तुम मेरे बेटे से शादी करोगी क्या तुम हमें इस बद्दा से हटा सकेंगी निकालो लड़की यह सुनकर साक रह गई उसे समझ नहीं
आ रहा था कि वो इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे उठाएगी वो बोली मैं इस काबिल नहीं हूं और ना ही इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठा सकती हूं मैं यह सब कैसे करूंगी बुजुर्ग ने गहरी सांस ली और कहा खुदा ने तुम में वह ताकत रखी है जिससे तुम यह जिम्मेदारी उठा सकती हो और हमें उस मुश्किल से निकाल सकती हो क्या तुम नहीं चाहोगी कि जब तुम दुनिया में आई हो तो किसी की मदद करके जाओ यह तुम्हारी भी नेकी होगी और हमारी भी मदद हो जाएगी हमें हमें तुम्हारी जरूरत है और मैं जानता हूं कि तुम
हमारी जरूरत को पूरा करोगी बोलो बेटी करोगी ना बुजुर्ग की इल्तजा ने लड़की के दिल पर असर किया वह खुद हैरान थी कि उसे उन पर तुरस क्यों आ रहा था बना सोचे समझे उसके मना से निकल गया हां मैं तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूं जैसे ही उसने यह अल्फाज कहे उसे महसूस हुआ कि वह किसी ट्रांस जैसी कैफियत में है उसे यकीन नहीं आ रहा था कि उसने यह फैसला कैसे कर लिया ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उससे जबरदस्ती यह अल्फाज कहवा दिए हो तभी अचानक इसकी आंखें बंद हो गई
जब उसने दोबारा आंखें खोले तो बुजुर्ग वहां से गायब हो चुके थे उसने इधर उधर देखा मगर वह खूबसूरत बाग जहां हूं हो चुका था अब वह जगह संन लग रही थी तभी एक औरत उसके करीब आई और कहने लगी लड़की तुम कौन हो इतनी खूबसूरत होकर इस संन है जगह पर बैठी हुई हो लड़की ने हैरानी से उसकी तरफ देखा उसे यकीन नहीं आया कि वह क्या कह रही थी सुनसान जगह लड़की ने खुद से सवाल किया यह तो अभी कुछ लमहे पहले एक हसीन बाग था मगर जब उसने दोबारा उर्द गर्द देखा तो
उसकी आंखें हैरत से फिटी कि फटी रह गई वह वाकई ससा जगह थी अब उसे तन्हाई का एहसास होने लगा था जिससे वह पहले अनजान थी वो घबराकर खड़ी हो गई और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े झाड़ने लगी उसे खुद से घन महसूस होने लगी कि वह वीरान जगह पर क्यों बैठी थी वो भागते हुए घर पहुंची और बना कुछ बोले सीधे कमरे में जा घुसी उसकी मां परेशान होकर पीछे पीछे आए और दरवाजे के बाहर खड़ी होकर पूछने लगे फातिमा क्या हुआ तुम्हारी तबीयत तो ठीक है आज से पहले तो तुमने कभी ऐसा रविया नहीं रखा
आते ही कमरे में क्यों घुस गई हो सब ठीक तो है ना लड़की अंदर रो रही थी उसने बुलंद आवाज में कहा कुछ ठीक नहीं है उम्मा मुझे लग रहा है कि मैं पागल हो जाऊंगी फिर लड़की ने अपनी उम्मा को सारा माजरा सुनाया उम्मा ने गहरी सांस ली और पूछा तो फिर तुम क्या चाहती हो लड़की ने जवाब दिया उम्मा हम किसी मौलवी साहब के पास चलते हैं उनसे कोई वजीफा पूछ लेते हैं या कोई कुरानी आयत जिससे मेरी मदद हो सके उम्मा ने उसकी बात मान ली और कहा ठीक है हम पास की
मस्जिद के मौलवी साहब के पास चलते हैं अगली सुबह लड़की और उसकी अम्मा मस्जिद के मौलवी साहब के पास जाने के लिए निकल पड़े उन्हें उम्मीद थी कि शायद अब उस परेशानी का कोई हल मिल जाएगा लेकिन क्या वाक उनकी परेशानी खत्म होने वाली थी जब फातिमा ने अपने हालात इमाम साहब को बताए तो व भी गहरी सोच में पड़ गए कुछ देर खामोश रहने के बाद बोले तुम लोग जमारा की रात मेरे पास आओ मैं देखता हूं कि उस मामले में क्या क्या जा सकता है फातिमा घर आकर अपनी उम्मा से बोली मैं कुछ
दिन तक काम पर नहीं जाऊंगी उम्मा ने हामी भर ली और कहा कोई बात नहीं हो सकता है ज्यादा काम की वजह से तेरा दिमाग थक गया हो उसी लिए तुझे यह सब महसूस हो रहा हो फातिमा ने भी यही सोचा कि हो सकता है ज्यादा काम की वजह से तेरा दिमाग थक गया हो इसीलिए तुझे यह सब महसूस हो रहा हो शायद यही वजह होगी इसलिए अगले कुछ दिन घर पर ही रही ना कहीं गई और ना ही इम्मा ने उसे जाने दिया आखिरकार जुमारा की रात आ गई फातिमा अपनी उम्मा के साथ फिर
से इमाम साहब के पास गई उन्होंने बैठने का इशारा किया और कहा मुझे तुमसे कुछ जरूरी बातें करनी है फिर वह गहरी सोच में पड़ गए और बोले क्या तुम कभी जंगल या कनवा वगैरा के पास गई हो फातिमा ने सर लाया और कहा हां मैं जंगल में एक कनवा के पास बिकयाओ [संगीत] [संगीत] सिर में दर्द हो रहा हो या सांस लेने में खत हो रही हो फातिमा चुक गई और झट से सर हिलाकर बोली हां अक्सर ऐसा होता है खास तौर पर जब मैं जंगल से वापस आती हूं इमाम साहब ने सिर झुकाया
और कहा तब तो यकीनन वह तुम्हारे साथ ही आता है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं मैं तुम्हें एक अमल बताता हूं जो तुम्हें सात दिन तक करना होगा फातिमा ने बना किसी झक के हामी भर ली इमाम साहब ने उसे सरकल जिन का वजीफा बताया जो सुबह तहज्जुद के वक्त करना था हालांकि तहज्जुद के वक्त फातिमा को अजीब सा खौफ महसूस होता था उसे लगता था जैसे कोई उस हर तरफ से देख रहा हो के साथ खड़ा होकर इबादत कर रहा हो लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और जैसे तेसे सात दिन तक यह वजीफा किया
आखिरी दिन जब उसने वजीफा मुकम्मल किया तो उसे महसूस हुआ कि इसके कुंधन से कोई भारी बोझ हट गया है उसे एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ जैसे किसी ने उसकी तकलीफ छीन ली हो व फौरन इमाम साहब के पास गई और बोली मौलवी साहब मैंने सात दिन का वजीफा मुकम्मल कर लिया है इमाम साहब मुस्कुराए और बोले अब सात दिन तक सरशर रहमान की तिलावत करो अपने पास एक पानी का गलास रखना जब सूरत रहमान मुकमल हो जाए तो तीन बार दिल में मोहब्बत के साथ अल्लाह कहना और फिर इस पानी को पी लेना
इंशा अल्लाह उसके बाद तुम्हें कोई उस रात नहीं होंगे फातिमा ने ऐसा ही किया सातवें दिन जब वह सुई तो उसे खवाब में जीनी नाम का एक जिन नजर आया उसने नरमी से कहा अच्छा होता अगर तुम मेरी दुनिया में मेरे साथ आ जाती लेकिन कोई बात नहीं हमारा रिश्ता हमेशा रहेगा तुम जब भी मुझे दिल से याद करोगी मैं हूंगा तुम्हारे आसपास ही रहूंगा मैं जानता हूं कि तुम मुझसे डरती हो लेकिन घबराओ मत मैं तुम्हें कभी नुकसान नहीं पंचांगा यह मेरा तुमसे वादा है फातिमा खवाब में ही सहम गई जैनी ने आगे कहा
तुम्हारी पाकी तुम्हारा हिजाब तुम्हारी इबादत यही वह चीजें थी जिनकी वजह से मैं तुमसे मोहब्बत करने लगा था मैं तुम्हारे जिस्म से नहीं बल्कि तुम्हारी रूह से मोहब्बत करता हूं उसी लिए मैं तुम्हें आसानी से छोड़कर जा रहा हूं लेकिन अगर कभी तुम्हें मेरी जरूरत महसूस हो तो मुझे मोहब्बत से याद करना फिर वो धीमे लहजे में बोला स्टोर है रूम में खड़की के पास एक खूबसूरत माला रखी है अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे पास आया करूं तो इस माला को अपने गले में डाल लेना और जब भी मुझे याद करना हो उसे
हाथ में पकड़ लेना मैं तुम्हारे पास चला आऊंगा फातिमा घबराकर जाग गई उसने फौरन उम्मा को जगाया और सारी बात बताई उमा चूट गई और बोले चलो इमाम साहब से पूछते हैं कि यह सब क्या है जब इमाम साहब के पास पहुंचे तो उन्होंने फातिमा की पूरी बात सुनी और संजीदगी से बोले यह कोई बरी रूह नहीं थी बल्कि नेक जनात में से था इसीलिए उसने तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि तुम्हारी मदद का रास्ता भी दिखा गया अगर कभी तुम्हें उसकी जरूरत महसूस हो तो उसे याद कर सकती हो वह तुम्हारी मदद के लिए जरूर
आएगा फिर उन्होंने एक और बात कही अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारा और उसका रिश्ता नेक रा पर कायम रहे तो हर जमारा को इसी स्टर रोम में बैठ कर सूर अल जिन की तिलावत कर लिया करो उससे ना सिर्फ तुम्हारी मदद होगी बल्कि उसकी भी फातिमा अब समझ चुकी थी कि उसकी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ वह कोई बड़ा ख्वाब नहीं था बल्कि एक हकीकत थी और अब उसे अपनी इबादत और अल्लाह की रहमत पर पूरा यकीन था दोस्तों अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो हमारे ैनब करें और वीडियो को लाइक
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