बहुत समय पहले की बात है कासगंज नामक एक सुंदर सा गांव हुआ करता था उस गांव में एक लकड़हारा रहता था जिसका नाम रामू था रामू बहुत ही ईमानदार और मेहनती था वह हमेशा अपने काम से खुश रहता था उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे लेकिन वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था रामू के परिवार में उसकी पत्नी और उसके दो बच्चे थे रामू सेठ लालचंद यहां लकड़ी काटने का काम करता था और लकड़ी काटने के बदले में सेठ लालचंद रामू को पैसे देता था जिससे रामू और उसके परिवार का जीवन व्याप होता था सुमन मैं
काम पर जा रहा हूं आज बहुत देर हो गया है तो तुम बच्चों को स्कूल छोड़ आना जी स्कूल तो मैं छोड़ आऊंगी लेकिन मोनू और पिछले दो दिन से कह रहे हैं कि उनके स्कूल की टीचर स्कूल की फीस मंगा रही है हां तो जाकर दे आओ ना स्कूल की फीस अजी कहां से दूं आप जो पड़ लाते हैं उसमें मुश्किल से तो घर चल पाता है अब उतनी सी तनख्वाह में मैं बच्चों की फीस का इंतजाम कैसे करूं अजी मैं एक बात आपको साफ-साफ कह देती हूं आप सेठ लालचंद जी से पगार बढ़ाने
की बात कहिए दिन पर दिन खर्च बढ़ता जा रहा है बाजार में अगर सब्जी लेने निकलो तो सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई का खर्चा घर का खर्चा अब इतनी कम तनख्वाह में कैसे गुजारा होगा ठीक है मैं आज ही सेठ जी से थोड़ा पगार बढ़ाने की बात करता हूं इतना कहकर रामू काम पर चला जाता [संगीत] है अरे भाई आज तो पगार का दिन है देखो अब यह सेठ लालचंद कोई ना कोई लोचा जरूर करेगा हमेशा कोई ना कोई बहाना बनाकर पगार कम कर देता है और अगली बार तो
मेरी आधी पगार काट ली थी यह कहकर कि जो मैंने लालचंद जी से ₹ उधार लिए थे उसका ब्याज बढ़कर 000 हो गया है इसलिए मैं तुम्हारी पगार में से हज काट रहा हूं हां हरिया भाई तुम एकदम ठीक कह रहे हो यह सेठ लालचंद ना एक नंबर का चालाक और लालची इंसान है एक तो दुगुना काम ले लेता है और बदले में पैसे भी पूरे नहीं देता हां भाई मेरे भी अगली बार सेठ लालचंद ने पगार काट लिए थे मैंने बस दो छुट्टी ली थी जब मेरी बिटिया बहुत बीमार थी और इस लालचंद ने
इस बात का फायदा उठाकर मेरी पूरी आधी पगार काट ली हे भगवान बस सेठ जी इस बार मेरी पूरी पगार दे दे बच्चों के स्कूल की फीस भी भरनी है ऐसे सभी लकड़हारे अपने काम पर लग जाते हैं काम करने के बाद सेठ लालचंद के पास जाते हैं सेठ जी महीना पूरा हो गया है हमें हमारी तनख्वाह दे दीजिए देखो भाइयों अभी मेरे पास तुम्हें देने के लिए पैसे नहीं है अभी माल नहीं बिका है सारा माल गोदाम में ही पड़ा हुआ है कल या परसों तक तुम्हें तुम्हारी तनख्वाह मिल जाएगी पर सेठ जी अभी
हमारे पास बिल्कुल पैसे नहीं बचे हैं घर का भी सामान लाना है बच्चों की फीस भरनी है अरे मैंने कहा तो सही एक दो दिन और रुक जाओ कल या परसों तक पैसे मिल जाएंगे अभी मेरे पास पैसे नहीं है सभी लकड़े निराश मन से अपने-अपने घर आ जाते हैं अजी क्या हुआ इस बार कितना पगार मिला है सुमन अभी कोई पगार नहीं मिला सेठ जी ने कहा है कि एक दो दिन में पगार मिल जाएगा पगार नहीं मिला आपको तो पता है ना बच्चों की फीस भरनी है इनकी स्कूल टीचर ने आज साफसाफ चेतावनी
दे दी है कि अगर कल फीस नहीं लाई तो बच्चों को घर पर ही बिठा लेना अब बताओ मैं क्या करूं मैं क्या करूं सुमन यह सेठ जी समय पर कभी पैसे देते ही नहीं है अब तो बस हम इंतजार के सिवा और कुछ नहीं कर सकते एक दो दिन की बात है देख लेते हैं ऐसे ही दो दिन गुजर जाते हैं दो दिन बाद सेठ लालचंद सबको पगा देता है अरे हरिया यह ले अपनी इस महीने की पगार सेठ जी यह तो बस 2000 है मैंने तो इस महीने 3000 तक का काम किया है
हां काम तो किया है लेकिन तूने एक एक घंटे आराम भी तो किया है यह पैसे उसी आराम के कांटे हैं पर सेठ जी आपने तो कहा था आठ घंटे काम के के महीने में 3000 मिलेंगे और मैंने तो आठों घंटे काम किया और एक घंटे आराम देख हरिया मुझे ज्यादा हिसाब किताब ना समझा यह 2000 रख अगर चाहिए तो और अगर नहीं चाहिए तो कहीं और काम ढूंढ ले बेचारे हरिया के पास उन पैसे को लेने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं था हरिया चुपचाप वह पैसे रख लेता है रामू यह लो तुम्हारे ाज
पर सेठ जी 00 क्यों मेरे तो पूरे 3000 बनते हैं ना मैंने तो कोई छुट्टी भी नहीं की और ना ही कोई आराम मैंने तो अपना सारा काम समय पर किया है हां समय पर तो किया है पर इस समय बाजार में लकड़ियों का दाम काफी सस्ता हो गया है इस वजह से अभी तुम्हें भी पगार कम ही मिलेगी जब तक लकड़ियों का दाम नहीं बढ़ता पर सेठ जी बात तो 3000 की हुई थी ना अब 00 में मैं कैसे घर चलाऊंगा बच्चों की स्कूल की फीस भी भरनी है सेठ जी इस बार आप पूरे
पैसे दे दीजिए 00 ही मिलेंगे तुझे यहां काम करना है तो कर वरना कहीं और काम ढूंढ ले बेचारे हरिया के पास उन पैसे को लेने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं था अरे भाई यह सेठ लालचंद एक नंबर का बेईमान इंसान है सारे पैसे अपने जेब में भर लेता है और बहाने बनाता है कि लकड़ियों के दाम सस्ते हो गए हैं देख लेना हम गरीबों की किसी ना किसी दिन इसे जरूर हाई लगेगी नहीं हरिया ऐसे नहीं कहते वह हमारे अनन दता है है आखिर उन्हीं के वजह से तो हमारा घर चल रहा है
अरे काहे का अन्य दाता काम के पूरे पैसे तो देता नहीं है पूरे महीने मेहनत करके भी क्या मिलते हैं बस यह 000 इसमें घर खर्च कैसे चलाएं ऐसे तो हम कभी तरक्की नहीं कर पाएंगे और हम कर भी क्या सकते हैं हरिया हमें लकड़ी काटने के सिवा और कोई काम कहां आता है और कोई काम खोलना भी चाहे तो उसके लिए हमारे पास इतने पैसे कहां हैं अब जो भी हो हमारा तो बस यह सेठ लालचंद ही सहारा है ना कुछ देर बातें करने के बाद अपने घर की ओर निकल पड़ते हैं जी आ
गए आप कितनी पगार मिला है सुमन इस बार सेठ जी ने बस 00 ही दिए हैं बस 2000 इतने में कैसे घर चलाएंगे बच्चों की फीस में ही हज निकल जाएंगे फिर 1500 में क्याक करेंगे अब मैं क्या कहूं सुमन अब तुम्हें इसी में ही गुजारा करना होगा तुम सबसे पहले बच्चों की फीस भर देना इसके बाद बाकी का मैं देखता हूं अजी आप क्या देख लोगे सेठ जी से पूरे पैसे तो मांगे नहीं गए आपसे नहीं सुमन मैंने सेठ जी से पैसों के लिए कहा था पर सेठ जी ने साफ इंकार कर दिया और
कहा यह लेना है तो लो वरना कहीं और काम ढूंढ सकते हो मैं सोच रहा हूं कि लकड़ी काटने के बाद में कहीं और भी काम ढूंढ लू सेठ जी के यहां से काम करने के बाद मैं दूसरी जगह पर काम किया करूंगा इससे कुछ ज्यादा आमदनी हो जाएगी आज ही मैं सेठ जी के यहां पर काम करने के बाद और भी जगह काम ढूंढने जाऊंगा इतना कहकर रामू काम पर निकल जाता है और जैसा कि रामू ने कहा था वह लालचंद के यहां काम करने के बाद काम की तलाश में निकल जाता है रामू
पूरे गांव में काम ढूंढता है दुकानों दुकानों पर जाकर लोगों से काम मांगता है मगर हर जगह रामू को केवल निराशा ही हाथ लगती है अंत में थक हारकर रामू वापस जाने लगता है तभी वह देखता है कि अचानक बहुत सारे भैंसों का झुंड उसकी तरफ दौड़े आ रहा है यह देखकर रामू बहुत डर जाता है वह इधर-उधर देखता है तो उसे एक गुफा दिखती है और वह गुफा में जाकर छुप जाता है जब भैंसों का झुंड वहां से निकल जाता है तब रामू की जान में जान आती है हे भगवान आज तो बालबाल बच
गया मैं वरना आज तो मैं इन भैंसों के पैरों तलों तो कुचला ही जाता पर यह मैं कहां आ गया रामू यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसकी नजर गुफा में रखी एक टोकरी पड़ जाती है रामू उस टोकरी के पास जाता है यह कैसी गुफा है यह कैसी टोकरी यहां पड़ी है इसे मैं घर ले जाता हूं सामान रखने के काम आ जाएगी रामू जैसे ही उस टोकरी को हाथ लगाता है गुफा में से एक आवाज आती है रुक जाओ इसे छूने की कोशिश मत करो यह आवाज सुनकर रामू एकदम पीछे हट
जाता है तभी गुफा में एक झिन प्रकट हो जाता है और वह रामू से कहता है कौन हो तुम और मेरी गुफा में क्या कर रहे हो मुझे माफ करना आप जो भी हो कुछ भैंसों का झुंड मेरे पीछे पड़ गया था और उनसे बचने के लिए मैं इस गुफा में आकर छिप गया और फिर मेरी नजर इस टोकरी पर गई माफ कीजिए मुझे लगा यहां कोई नहीं है तो यह टोकरी किसी की नहीं होगी इसलिए मैंने इसे छुआ रामू तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हारे बारे में सब जानता हूं मेरी नजर एक
बार भी जिस पर पड़ जाती है मैं उसका इतिहास अपनी खुली आंखों से देख सकता हूं पर आप है कौन और आप इतने विचित्र क्यों दिखाई पड़ रहे हैं आप अपना परिचय दीजिए कौन है आप मैं एक जिन हूं और मैं कई सालों से इस गुफा की रक्षा कर रहा हूं यह गुफा मेरे पूर्वजों की है इस गुफा में केवल वही इंसान घुस सकता है जिस का मन बिल्कुल पवित्र हो अगर तुम अपवित्र होते तो तुम इस गुफा में कभी नहीं घुस पाते तुम एक सच्चे इंसान हो इसलिए तुम इस गुफा में घुस पाए और
इस टोकरी को छू पाए अब तुमने इस टोकरी को छुआ है तो यह टोकरी तुम्हारी हुई नहीं मुझे यह टोकरी नहीं चाहिए मैं तो बस देख रहा था डरो मत रामू तुम यह टोकरी ले जाओ यह कोई साधारण टोकरी नहीं है बल्कि यह जादुई टोकरी है जादुई टोकरी क्या यह वही जादुई टोकरी है जिसके बारे में हमारी दादी कहानी सुनाई करती थी कि किसी गांव में एक जादुई टोकरी हुआ करती थी और वह सबकी इच्छाएं पूरी करती थी हां रामू यह वही जादुई टोकरी है अब तुम इस टोकरी के मालिक हो तुम इसके इस्तेमाल से
अपनी स्थिति सुधार सकते हो पर याद रखना तुम जो भी वस्तु इस टोकरी में एक बार डालोगे वह चीज ही तुम्हें बार-बार इस टोकरी में डालनी होगी इसके अलावा तुम और दूसरी कोई चीज इस टोकरी में नहीं डाल सकते अगर तुमने ऐसा किया तो इसका परिणाम तुम्हें ही भुगतना होगा मेरी इस बात को हमेशा ध्यान में रखना और सोच समझकर बिना लालच किए इस टोकरी में वही सामान रखना जिसकी तुम्हें जरूरत हो रामू टोकरी को लेकर घर आ जाता है सुमन यह देखो यह मैं क्या लेकर आया हूं क्या लाए हो आप बस यह एक
टोकरी सबसे पहले यह बताइए आप तो काम की तलाश में गए थे ना तो कोई दूसरा काम मिला कि नहीं नहीं अरे सुमन मेरी पूरी बात तो सुनो यह कोई ऐसी वैसी टोकरी नहीं है बल्कि यह एक जादूई टोकरी है रामू सुमन को वह सारी घटना के बारे में बताता है जो उसके साथ हुई अच्छा तो आपका कहने का मतलब है कि इस टोकरी में हमें कोई ऐसी चीज डालनी होगी जिसकी हमें सबसे ज्यादा जरूरत हो हां सुमन हमें सोच समझ कर ही इसमें कोई चीज डालनी होगी रामू थोड़ी देर सोचता है फिर फिर उसका
ध्यान उन लकड़ियों पर जाता है जो एक बार उसने सुमन को रखने को दी थी सुमन तुम्हें याद है एक बार मैं जंगलों में लकड़ियां काटने गया था तो मुझे एक चंदन की लकड़ी मिली थी और वह मैंने तुम्हें लाकर दे दी थी हां दी तो थी तो तुम उस लकड़ी को ले आओ हम उस चंदन की लकड़ी को ही इसमें डालेंगे और उस लकड़ी से अपना एक व्यापार शुरू करेंगे सुमन चंदन की लकड़ी को ले आती है और उसे टोकरी में डाल देती है वह जैसे ही चंदन की लकड़ी उस टोकरी में डालते हैं
उसमें कई सारी लकड़ियां आ जाती हैं अरे वह यह तो चमत्कार ही हो गया यह देखिए कितनी सारी चंदन की लकड़ियां हो गई अगर आप इसको बेचेंगे तो इससे काफी अच्छे पैसे मिलेंगे हां राधा मैं कल सुबह बाजार जाकर इनको बेच आऊंगा और जो पैसे मिलेंगे उससे हम अपने मोनू और के स्कूल की फीस भर देंगे और बाकी बचे पैसों को संभाल कर रख लेंगे अगले दिन रामू लाल चंद सेठ के यहां काम पर ना जाकर चंदन की लकड़ियों को बेचने के लिए बाजार की ओर निकल पड़ता है वहां पर रामू चंदन की लकड़ियों को
बहुत ही कम दामों में बेचा जिसकी वजह से आम लोगों के साथ-साथ बड़े व्यापारियों ने भी रामू से चंदन की लकड़ियां खरीदी लकड़ियों को बेचकर रामू को काफी अच्छे पैसे मिले पैसों को लेकर चंदन घर आ जाता है यह देखो सुमन उन लकड़ियों को बेचकर मुझे कितने सारे पैसे मिले हैं ये लो कुछ पैसे इससे तुम कल मोनू और के स्कूल के फीस भर देना अच्छा तो मैं काम पर जाता हूं अजी आपके पास तो अब यह जादुई टोकरी है तो अब आपको उस सेठ लालचंद के यहां काम करने की क्या जरूरत है हां सुमन
मैं सेठ लालचंद जी के यहां काम पर नहीं जा रहा बल्कि मैं तो वहां पर जो काम कर रहे बाकी के लकड़हारे हैं उन्हें यह खुशी की खबर देने जा रहा हूं क्योंकि सेठ लालचंद जी से मेरे साथ-साथ वह लकड़े भी बहुत परेशान थे इसलिए अगर मेरा भला हो रहा है तो क्यों ना मैं उन सब का भला करूं वह सभी बहुत ईमानदार लकड़हारे हैं वह सभी बहुत मेहनत से काम करते हैं मगर लालचंद ने कभी भी उनको उनकी मेहनत के सही पैसे नहीं दिए इसलिए मैंने सोचा है क्यों ना मैं उनको अपने इस काम
में शामिल कर लूं हां जी बात तो आपकी बिल्कुल सही है अगर आप सभी लोग एक साथ मिलकर काम करेंगे तो हम सब बहुत जल्द ही तरक्की हासिल कर लेंगे