आज से 33 साल पहले यह 21 मई 1991 की ही बात थी जब धनु नाम की सुसाइड बॉम्बर महिला ने राजीव गांधी को माला पहनाने के जस्ट बाद बटन दबाकर ऐसा खतरनाक बम ब्लास्ट किया कि देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ-साथ आसपास के 15 लोगों की भी हत्या हो गई असल में हुआ यह था कि राजीव गांधी की हत्या से 6 घंटे पहले यानी 4:00 बजे श्रीलंका में लोकेटेड जो इंडियन एंबेसी थी उसमें एक अननोन कॉल आया और कॉल करने वाले ने पूछा कि क्या राजीव गांधी अभी भी जिंदा हैं हालांकि राजीव गांधी जिंदा
भी थे और आने वाले इलेक्शन के लिए देश भर में रैलियां भी कर रहे थे इस अननोन कॉल के दो घंटे बाद यानी शाम को 6:00 बजे राजीव गांधी विशाखापट्टनम की एक इलेक्शन रैली से फ्री होकर एयरपोर्ट की तरफ जा रहे थे ताकि चेन्नई के पास श्री पेरंबदूर में होने वाली एक और रैली को अटेंड कर सकें अब जैसे ही राजीव गांधी विशाखापट्नम एयरपोर्ट पर पहुंचे तो पायलट ने उन्हें बताया कि वो अभी फ्लाई नहीं कर सकते क्योंकि एयरप्लेन के कम्युनिकेशन डिवाइस में कुछ खराबी है जितनी देर कम्युनिकेशन डिवाइस सही किया जा रहा था उतनी
देर राजीव गांधी वहीं एयरप्लेन के पास बैठे रहे लेकिन जैसे-जैसे टाइम बहुत ज्यादा लगने लगा वैसे ही राजीव गांधी वहां से चल पड़े आज अटैक वाले दिन यानी 21 मई 1991 को राजीव गांधी ने ये डिसाइड किया कि वो विशाखापट्टनम में ही सरकारी गेस्ट हाउस में रुकेंगे अपनी टीम के साथ राजीव गांधी का काफिला कुछ ही दूरी तय कर पाया था कि तभी एक पुलिस ऑफिसर बाइक से राजीव गांधी की कार का पीछा करने लगता है थोड़ी ही देर में उसने राजीव गांधी की कार को रुकवा करर उनको बताया कि एयरप्लेन ठीक हो गया है
अगर आप चेन्नई जाना चाहते हैं तो एयरप्लेन आपका वेट कर रहा है यह सुनते ही राजीव गांधी ने तुरंत यूटर्न लेकर अपनी कार को इतनी तेजी से दौड़ाया कि उनकी टीम पीछे ही रह गई और बताया जाता है कि व हवाई जहाज में बैठकर चेन्नई के लिए रवाना भी हो गए यहां ये सुनकर आपको थोड़ा अजीब लगेगा कि अरे ये कैसा प्रधानमंत्री है जो खुद ही गाड़ी भगा रहा है और वो भी इतनी तेज तो जिन लोगों को नहीं पता उनको को बता दूं कि राजीव गांधी ड्राइविंग और फ्लाइंग को लेकर काफी पैशनेट थे सोर्सेस
हैं कि वो अपनी गाड़ी खुद ही चलाते थे और इतनी ज्यादा स्पीड से भगाते थे कि कई बार उनकी सिक्योरिटी टीम तक पीछे रह जाती थी कहीं जाते थे तो एयरप्लेन भी खुद ही उड़ा लिया करते थे असल में राजीव गांधी एक ट्रेड पायलट थे जिन्होंने साल 1970 में इंडियन एयरलाइंस में 5000 पर मंथ सैलरी पर जॉब भी की थी और वो मोस्टली दिल्ली जयपुर रूट पर फ्लाई किया करते थे खैर शाम 8:2 पर राजीव गांधी चेन्नई एयरपोर्ट पर लैंड कर जाते हैं और कांग्रेस वर्कर्स वहां पर उनका बढ़िया वेलकम करते हैं इन सभी वर्कर्स
में से बस एक इस लेडी को याद रखना इनका नाम रा गतम चंद्रशेखर था ये कांग्रेस पार्टी से थी ये फॉर्मर मेंबर ऑफ पार्लियामेंट थी और इस रैली में राजीव गांधी को इन्होंने ही होस्ट किया था इसके बाद एंबेसडर कार से राजीव गांधी मरा गथ के साथ उनकी कांस्टीट्यूएंसी श्री पेरंबू दूर में एक इलेक्शन रैली को एड्रेस करने के लिए निकल जाते हैं अभी चेन्नई एयरपोर्ट से राजीव गांधी का काफिला निकला है जो कि यहां से लगभग 33 किमी दूर श्री पेरंबदूर के इस ग्राउंड तक आना है हां वही इलेक्शन रैली ग्राउंड जिसमें राजीव गांधी
की एक सुसाइड बंबर के द्वारा हत्या होने वाली है राजीव गांधी के इस ग्राउंड में पहुंचने से पहले चलो हम इस ग्राउंड के लेआउट को समझने के साथ ही यह भी देख लेते हैं कि राजीव गांधी कहां-कहां से होकर जाने वाले थे और क्या-क्या करने वाले थे ये वो पूरा ग्राउंड है जहां इलेक्शन रैली ऑर्गेनाइज्ड की गई है इस ग्राउंड में यहां पर वो स्टेज है जहां से खड़े होकर राजीव गांधी लोगों को संबोधित करेंगे स्टेज तक चलकर आने के लिए बीच में ये रेड कार्पेट एरिया है स्टेज के पास ही रेड कार्पेट एरिया के
इस तरफ ये लेडीज सेक्शन है और स्टेज से कुछ दूरी पर रेड कार्पेट एरिया के अपोजिट डायरेक्शन में यहां पर ये वो सेक्शन है जहां राजीव गांधी के स्वागत के लिए लोग खड़े होने वाले हैं इस स्टेज के बिल्कुल सामने 100 मीटर की दूरी पर ये राजीव गांधी की मां यानी इंदिरा गांधी की ये बड़ी कार्डबोर्ड वाली मूर्ति है ओवरऑल ल इस प्रोग्राम की प्लानिंग कुछ इस तरीके से की गई है कि जब राजीव गांधी यहां पहुंचेंगे तब सबसे पहले वो इंदिरा गांधी की मूर्ति को माला पहनाए उसके बाद इस बंबूज की बैरिकेडिंग के बीच
मौजूद इस रेड कार्पेट एरिया में उनका वेलकम किया जाएगा आफ्टर दिस वो सीधा मंच पर जाकर भीड़ को एड्रेस करेंगे याद है मैंने आपको एक लेडी मरागाथा के बारे में बताया था जो राजीव गांधी को इस रैली में होस्ट कर रही हैं और उनके साथ उन्हीं की गाड़ी में इस रैली ग्राउंड की तरफ आ रही हैं उन्हीं का एक असिस्टेंट था जिसका नाम था एजे डोज और इस इलेक्शन रैली के पूरे अरेंजमेंट और प्लानिंग की जिम्मेदारी एजे डॉस की ही थी अब डॉज की प्लानिंग के अकॉर्डिंग यहां रेड कारपेट एरिया के पास टोटल 21 लोग
राजीव का वेलकम करेंगे जिसमें से ये तीन लोग माला पहनाए और ये 18 कांग्रेस कार्यकर्ता और पत्रकार राजीव से मिलेंगे ये सब कुछ डिसाइडेड था लेकिन लास्ट मोमेंट पर मराग दम की बेटी की रिक्वेस्ट पर इस औरत और इसकी बेटी को भी इस एरिया में रहकर एक्स पीएम राजीव गांधी से मिलने की परमिशन दे दी जाती है यहां आपको बता दूं कि इस बच्चे का नाम कोकिला है जो कि आज राजीव गांधी को एक कविता सुनाएगी इस बात पर भी ध्यान दो कि उस दिन चेन्नई में राजीव गांधी के लिए सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स काफी अच्छे थे
क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि एक्स पीएम उस ड्यूरेशन में कई टेररिस्ट ग्रुप्स के टारगेट पर ऑलरेडी थे अब एक बार यहां के सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स भी देख लेते हैं इस पूरे एरिया की सिक्योरिटी के लिए आईपीएस ऑफिसर आर के राघवन के नेतृत्व में यहां पर 300 पुलिस वाले तैनात हैं रेड कारपेट एरिया में राजीव गांधी से मिलने वाले इन 23 लोगों पर नजर रखने और इनकी मेटल डिटेक्टर से थोली चेकिंग करने की रिस्पांसिबिलिटी इन सब इंस्पेक्टर्स और कांस्टेबल्स की है इस सब इंस्पेक्टर को तलाशी के बाद डिसाइड करना था कि यह लोग राजीव गांधी
के वेलकम के लिए इस रेड कार्पेट एरिया में खड़े हो सकते हैं या नहीं अभी रात के 9:30 बज रहे हैं राजीव गांधी को देखने के लिए यहां भारी भीड़ जमा हो चुकी है और सभी भी उनका बेसब्र से इंतजार कर रहे हैं लेकिन दिक्कत वाली बात ये है कि आज इस भीड़ में पांच लोग ऐसे भी हैं जो नहीं होने चाहिए थे जिनका सिर्फ एक मकसद है कैसे भी करके राजीव गांधी की हत्या करना इन पांचों में से तीन लेडीज हैं और दो जेंट्स हैं दोनों जेंट्स यानी कि ये शिवराजा और हरिबाबू पत्रकारों के
भेष में इस वेलकम सेक्शन एरिया में खड़े हुए हैं तीनों की तीनों लेडीज यानी नलिनी धनु और सुभा यहां वेलकम सेक्शन एरिया के साइड में खड़ी हुई हैं इन तीनों में से नलिनी तो इस साजिश में सिर्फ एक हेल्पर है दिक्कत वाली बात थी इन दोनों की ये दोनों धनु और सुभा सुसाइड बॉम्बर्स हैं इन्होंने अपने कपड़ों के नीचे बॉम जैकेट पहनी हुई है जो इन बटंस की मदद से ब्लास्ट होने वाली है अब धनु और सुबा को किसी भी तरह इस रेड कारपेट एरिया में खड़े हुए लोगों में शामिल होना था क्योंकि ये 23
लोग ही हैं जो राजीव गांधी के बिल्कुल पास जा सकेंगे इसलिए ये दोनों फीमेल सुसाइड बमबर्ग गांधी को अपने साथ उड़ा सकें लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद शिवराज और हरिबाबू इनका नाम राजीव गांधी के स्वागत करने वालों की लिस्ट में नहीं जुड़वा पाते हैं इससे यह सुभा और नलिनी स्टेज के सामने बने इस लेडीज सेक्शन में जाकर बैठ जाती हैं पर धनु अभी भी मौके की तलाश में थी कि कैसे भी करके रेड का कार्पेट एरिया में एंट्री मिल जाए इसी बीच अचानक से यहां काफी ज्यादा लोग एक साथ आकर डॉज से जिद्द करते हैं
कि उनका नाम भी इस लिस्ट में ऐड करो ताकि वो भी राजीव गांधी से मिल सके इससे यहां रेड कार्पेट एरिया के आसपास अचानक अफरातफरी सी मच जाती है इस वेलकम सेक्शन को भी आगे इस वीडियो में रेड कार्पेट एरिया से रेफर किया गया है इस मौके का फायदा उठाकर धनु जल्दी से इन मां बेटी के पीछे आकर खड़ी हो जाती है हालांकि पुलिस इस भीड़ को यहां से हटाती है लेकिन धनु पर अब भी किसी का कोई शक नहीं होता यह यहीं रेड कार्पेट एरिया में खड़ी रहती है इसी बीच जल्दी से डॉस स्टेज
की ओर दौड़ता है और स्टेज पर पहुंचकर माइक से अनाउंस करता है कि राजीव गांधी यहां पहुंचने वाले हैं तभी राजीव गांधी के काफिले की ग्राउंड में एंट्री होती है अब राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी की स्टैचू पर माला पहनाई और मंच की ओर आने लगते हैं जब राजीव रेड कार्पेट एरिया में पहुंचे तो इन लोगों ने इन्हें चादर उड़ाकर इनका स्वागत किया मरा कथम ने राजीव से पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को भी मिलवाया अब आदमियों से मुलाकात के बाद राजीव इन तीन लेडीज से मिलने के लिए आगे बढ़े इनमें से इस बच्ची यानी कोकिला
ने राजीव गांधी को कविता सुनाई तभी यहां लोगों की भारी भीड़ पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़कर राजीव गांधी से मिलने आ जाती है इससे राजीव गांधी को एक सिक्योरिटी ऑफिसर यहां से जल्दी से जल्दी निकालने की कोशिश करता था लेकिन राजीव गांधी ने तमिल लोगों को देखकर उनके बीच रहने का और उनसे मिलने का ही फैसला किया इस धक्का मुक्की में सुसाइड बंबर धनु काफी पीछे चली जाती है अब धनु एग्रेसिवली राजीव गांधी तक पहुंचने की कोशिश करती है लेकिन तभी सब इंस्पेक्टर अनुसूया धनु का हाथ पकड़कर उसे आगे बढ़ने से रोक लेती है
अब राजीव गांधी यह देखकर सब इंस्पेक्टर अनुसूया को इशारा करते हैं कि धनु को आने दो अगले ही पल राजीव गांधी की मौत यानी कि धनु उनके सामने खड़ी थी अब धनु राजीव गांधी को चंदन की माला पहना है और उनके पैर छूने के लिए झुकती है नीचे झुकते वक्त धनु अपने बॉम जैकेट के सबसे पहले तो पीछे वाले बटन को दबाती है और फिर आगे वाले बटन को दबाती है और तभी एक जोरदार धमाका होता है जिससे यहां की धरती ही हिल जाती है इस विस्फोट के बाद चारों ओर आग और धुआं फैल जाता
है इससे ग्राउंड में हाहाकार और भगदड़ बच जाती है और कुछ देर बाद जैसे ही रेड कार्पेट एरिया में धुआं कम होने लगा तो चारों तरफ खून और लाशें दिखने लगी इस ब्लास्ट में कोकिला कोकिला की मां मराग दम धनु पुलिस कर्मी और सुरक्षा अधिकारियों के साथ राजीव गांधी के शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे यहां 15 लोग मारे जा चुके थे और 40 से ज्यादा लोग सीरियसली इंजर्ड थे वहीं इस हरी बाबू के कैमरा में लास्ट के कुछ पलों की ये 10 पिक्चर्स थी देश में इतना बड़ा हादसा हुआ एक पूर्व प्रधानमंत्री को पुलिस
वालों के सामने सुसाइड बॉम्बर्स ने जान से मार दिया पर उस 21 मई 1991 की दहशतगर्दी एक ही सवाल से जूझ रहा था राजीव गांधी को किसने मारा और क्यों मारा आज की इस वीडियो में 3d एनिमेशन की मदद से इस एसासिनेशन की पूरी प्लानिंग को स्टेप बाय स्टेप समझेंगे और ये भी देखेंगे कि इंडियन एंबेसी में उस शाम 4:00 बजे जो कॉल आया था उसको सीरियसली क्यों नहीं लिया गया लेकिन हर बार की तरह शुरू से शुरू करते हैं देखो ये है अपना भारत और यह रहा श्रीलंका श्रीलंका को आजादी साल 1948 में मिली
थी तो ओबवियस सी बात हुई कि उससे पहले यहां ब्रिटिशर्स का राज चलता था अब श्रीलंका के मैप को एकदम केयरफुली समझो ब्रिटिशर्स के टाइम श्रीलंका के इस हाइलाइटेड एरिया में तमिल रहते थे और इस रिमेनिंग लैंड में सिंहलीज यानी बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग रहते थे वीडियो में इसी जगह पर यह बात भी आपको 100% क्लियर हो जानी चाहिए कि राजीव गांधी की मौत का कारण इन तमिल और सिनली लोगों के बीच की लड़ाई ही थी कैसे क्या हुआ था आगे इस वीडियो में आपको और क्लीयरली पता चलेगा खैर मैप में ध्यान से
देखो ये है श्रीलंका और इंडिया के सदर्न साइड में ये है तमिलनाडु श्रीलंका को आजादी मिलने से पहले यहां के खेतों में काम करने के लिए भारत के तमिलनाडु से तमिल स्पीकिंग वर्कफोर्स को श्रीलंका में लाया जाता था इसको इस तरह से समझो कि इंडिया के यूपी बिहार से लोग हरियाणा पंजाब में काम करने के लिए आते हैं और हरियाणा पंजाब वाले विदेशों में काम करने के लिए जाते हैं इसी तरह तमिलनाडु से लोग काम के लिए श्रीलंका जाते थे और श्रीलंका में इनको इंडियन तमिल्स कहा जाता था वहां पर पहले से रह रहे तमिल्स
को श्रीलंकन तमिल कहा जाता था श्रीलंका में मौजूद श्रीलंकन तमिल्स अलग हैं और इंडियन तमिल्स अलग हैं उस टाइम श्रीलंका में तमिल्स यानी हिंदुओं की पॉपुलेशन सिर्फ 23 पर ही थी और सिनली यानी बौद्धों की पॉपुलेशन 70 पर थी एक बार फिर से बता रहा हूं यह सारा मामला तमिल वर्सेस सिनली का ही था लेकिन ये पूरी कहानी सिर्फ इन लोगों की लड़ाई की नहीं है इसमें और भी ज्यादा अनबिलीवर्स को आजादी मिली तो उस समय गवर्नमेंट पोस्ट पर ज्यादातर लोग तमिल थे और तमिल लोगों ने अपनी मेहनत के बलबूते पर यह मुकाम हासिल किया
था लेकिन प्रॉब्लम ये थी कि सेनलीस लोगों को यानी कि बौद्ध कम्युनिटी के लोगों को यह डर था कि कहीं तमिलियंस उन पर ओवर पावर ना कर दें यानी कि वो कहीं उनके मालिक ना बन जाएं इसलिए 1948 में श्रीलंका को आजादी मिलने के बाद सिनली गवर्नमेंट ने तमिल लोगों को साइडलाइन करने के लिए काफी सारे अनवाइज डिसीजंस लिए जैसे सबसे पहले इंडिया से माइग्रेटेड तमिल्स के वोटिंग राइट्स छीन लिए इंग्लिश की जगह सिहाला लैंग्वेज को श्रीलंका की ऑफिशियल लैंग्वेज डिक्लेयर कर दिया सिलीज स्टूडेंट्स को एजुकेशनल रिजर्वेशन दे दिया और कुछ साल बाद 1972 में
एक नया संविधान लागू करके देश का प्राइमरी रिलीजन बुद्धिज्म अनाउंस कर दिया एक्सेट्रा सिनली ज कम्युनिटी ने श्रीलंका में ओवरऑल ये सिचुएशन कर दी कि तमिलियंस का वजूद ही खत्म हो जाए और अगर तमिलियंस इन अनफेयर डिसीजंस के खिलाफ आवाज उठाते थे तो श्रीलंका गवर्नमेंट श्रीलंका के तमिल रीजंस में मिलिट्री लगा देती थी और आवाज उठाने वालों के साथ बलात्कार करके उनके पूरे परिवार को गोली मार दी जाती थी तमिलियन लोगों पर इन सभी अत्याचारों के चलते इस असल कहानी में एंट्री होती है एक ऐसे बंदे की जिसने राजीव गांधी की हत्या करवाई जिसने जाफना
डिस्ट्रिक्ट के मेयर को गोलियों से भून दिया और जिसने श्रीलंकन गवर्नमेंट और सिनली लोगों से लड़ने के लिए एक रिबेल ग्रुप बनाया लिट्टे यानी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम और यह बंदा जिसकी अपन बात कर रहे हैं जिसने लिट्टे बनाया वो है ये वेलू पल्ले प्रभाकरण देखो ओवरऑल यह कांसेप्ट ऐसा है कि अगर इसे आप कहानी में घुस के समझने की कोशिश करोगे तो काफी ज्यादा डिफिकल्टी होगी और अगर मेरे एक पर्सनल एग्जांपल के थ्रू समझने की कोशिश करोगे तो बहुत आसानी से समझ आ जाएगा इस 3d मैप में ये जितना भी रेड कलर का
एरिया आपको दिख रहा है यह वो एरिया है जिसमें तमिलियंस रहते थे और तमिलियंस की तरफ से लड़ कौन रहा था लिट्टे और लिट्टे का हेड कौन था यह प्रभाकरण सिमिलरली इस मैप में ये जो वाइट एरिया आपको दिख रहा है यह वो एरिया है जिसमें सिनली यानी बौद्ध धर्म के लोग रहते थे और सिनली लोगों की तरफ से कौन लड़ रहा था ओबवियसली श्रीलंकन गवर्नमेंट और साइड में लीडर कौन हुआ श्रीलंकन आर्मी का हेड तो बेसिकली मैं आपको बस यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि यह लड़ाई अपने-अपने वजूद के लिए प्रभाकरण और
श्रीलंकन आर्मी के हेड के बीच की है या यूं भी कह सकते हो कि लिट्टे वर्सेस श्रीलंकन आर्मी की है अब यहां लिट्टे अपने हक की लड़ाई तो लड़ ही रहा था लेकिन उसके अलावा उसकी एक बहुत डेंजरस डिमांड ये भी थी कि श्रीलंका के दो टुकड़े हो जाएं जिसमें से जितना भी तमिल लोगों का एरिया था वो अपना एक अलग इंडिपेंडेंट कंट्री होना चाहिए तमिल ईलम लिट्टे के फुल फॉर्म को भी अगर दोबारा देखोगे तो इसमें भी आपको नोटिस होगा लिबरेशन टाइ गर्स ऑफ तमिल इलम खैर जो एक्सपेक्टेड था वही हुआ लिट्टे के फॉर्मेशन
के बाद श्रीलंका में रहने वाले तमिल लोग तो सेफ हो गए लेकिन लिट्टे और श्रीलंकन गवर्नमेंट में ऐसा युद्ध हुआ जो सोच से भी परे था दोनों ग्रुप्स एक दूसरे को जितना ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते थे उतना ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया दूसरे ग्रुप्स की फीमेल्स के साथ रेप कर दिए जाते थे हजारों लोगों की जानें भी गई और एक समय ऐसा आ गया जब इंडिया में मौजूद जो तमिल लोग थे उन्होंने इंडियन गवर्नमेंट पर दबाव बनाना शुरू किया कि श्रीलंका में जो सिविल वॉर चल रहा है उसमें इंडियंस भी सफर कर रहे
हैं तो इंडियन गवर्नमेंट को श्रीलंका के मैटर में इंटरफेयर करना चाहिए यहां इस बात को भी अच्छे से समझना कि इसी दौरान इंदिरा गांधी को उनके बॉडीगार्ड्स ने जान से मार दिया था और सिर्फ 40 की एज में राजीव गांधी नए-नए देश के प्रधानमंत्री बने थे द यंगेस्ट प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया जिन लोगों को नहीं पता उनको बता दूं कि इसी प्रोफेसर ऑफ हाउ youtube-dl कन तमिलियन की हेल्प के लिए इंडिया से श्रीलंका कुछ बिना हथियारों वाली इंडियन नेवी शिप्स से कई टन खाना और दवाइयां भेजी लेकिन श्रीलंकन नेवी ने इन सभी शिप्स को वापस
मोड़ दिया इसके दो दिन बाद दिल्ली स्थित श्रीलंकन हाई कमीशन को इफॉर्म किया गया कि इंडियन एयरफोर्स श्रीलंका के तमिल बहुल एरिया में ऑपरेशन पूमलाई करने जा रही है जिसमें इंडिया की तरफ से वॉर सरवाइवर्स के लिए खाना और मेडिकल चीजें ड्रॉप की जाएंगी अगर अबकी बार श्रीलंकन फोर्सेस ने रोका तो भारत इसको बर्दाश्त नहीं करेगा अब इंडिया से पांच मिलिट्री एयरक्राफ्ट में लगभग 25 टन फुड एंड मेडिसिंस इन चार मिराज फाइटर जेट के स्कोटिंग के साथ नॉर्थ श्रीलंका में एयर ड्रॉप किया जाता है और इंडियन गवर्नमेंट शक्ति से श्रीलंकन गवर्नमेंट को तमिलियंस पर हो
रहे अत्याचार को रोकने के लिए बोलती है यहां आपको बता दूं कि इंडियन गवर्नमेंट का स्टैंड एकदम क्लियर था कि श्रीलंका में तमिल्स को उनका हक मिले और यह सिविल वॉर खत्म हो अब जैसे ही इंडिया ने ऑपरेशन पूमलाई किया वैसे ही श्रीलंका बोला कि इस पूरे सिविल वॉर के मामले में हम इंडिया से बातचीत करना चाहते हैं इस मामले में बातचीत के लिए इंडियन पीएम राजीव गांधी श्रीलंका की कैपिटल में पहुंचते हैं यानी कि यहां कोलंबो में पहुंचते हैं इस सीन को अच्छे से समझ लो आज दिन है 29 जुलाई 1987 का ये श्रीलंकन
प्रेसिडेंट जे आर जयवर्धने हैं और ये इंडियन प्राइम मिनिस्टर राजीव गांधी हैं इन दोनों के सामने ये जो डॉक्यूमेंट आपको दिख रहा है ये इंडिया श्रीलंका पीस अकॉर्ड है आसान भाषा में समझाऊं तो ये एक ऐसा शांति समझौता है जिसकी बेसिकली दो डिमांड्स हैं सबसे पहले डिमांड तो यह कि श्रीलंकन गवर्नमेंट श्रीलंका के तमिल्स को उनके राइट्स और सभी फैसिलिटी प्रोवाइड करेगी लेकिन बदले में श्रीलंका में मौजूद सभी तमिल मिलिटेंट्स ग्रुप को अपने हथियार डालने होंगे या यूं कह लो कि लिट्टे को अपने हथियार डालने होंगे लेकिन यहां एक छोटा सा ट्विस्ट है सबको पता
था कि इतनी मार काट होने के बाद और इतनी जानें गवाने के बाद लिट्टे इतनी आसानी से तो हथियार सरेंडर करने नहीं वाला इसलिए आज पीस अकॉर्ड साइन करने से दो दिन पहले ही यानी 27 जुलाई को ही राजीव गांधी ने लिट्टे हेड प्रभाकरण को दिल्ली में एक मीटिंग के लिए बुला लिया था जिसमें राजीव गांधी ने प्रभाकरण को समझाया कि ऐसे-ऐसे दो दिन बाद शांति समझौता पर साइन किया जाएगा तो मान जाना प्रभाकरण ने पहले तो थोड़ी सी नानुक की लेकिन उसके बाद वोह समझौते के लिए मान जाता है अब आज यानी 29 जुलाई
1987 को इधर श्रीलंका के कोलंबो में समझौते पर साइन हो गए हैं लेकिन यहां आपको एक बात बता दूं कि कोलंबो में पिछले कुछ दिनों से ब्रूटल राइट्स हो रहे हैं लेकिन ये राइट्स आज इतने ज्यादा वायलेंट हो गए हैं कि दंगाइयों ने श्रीलंका के प्रेसिडेंट जे आर जयवर्धन के घर का एक पार्ट जला दिया अब इस राइट को रोकने के लिए प्रेसिडेंट जयवर्धन ने राजीव गांधी से कहा कि वह श्रीलंकन फोर्सेस को श्रीलंका के इन तमिल एरियाज में से यहां कोलंबो वापस बुलाना चाहते हैं और साथ में इंडियन पीएम राजीव गांधी से इंडियन फोर्सेस
का सपोर्ट मांगते हैं अब आर्मी सपोर्ट के लिए पीएम राजीव गांधी तैयार हो जाते हैं और मात्र 6 घंटे में इंडियन पीसकीपिंग फोर्स यानी कि आईपीकेएफ इंडिया से श श्रीलंका आ जाती है यह बात सुनने में आपको थोड़ी सी अजीब लगेगी लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि राजीव गांधी का यह बहुत ही बचकाना डिसीजन था अगर आप भी इसको अच्छे से विजुलाइज करोगे तो आई एम श्यर आपको भी कुछ ऐसा ही फील होगा देखो ओवरऑल ये लड़ाई बस इस बात की थी कि श्रीलंकन आर्मी वर्सेस लिट्टे की लड़ाई चल रही थी शांति समझौता साइन करते वक्त
जो कोलंबो में राइट्स हुए उनका समाधान करने के लिए श्रीलंकन आर्मी वापस कोलंबो आ गई और खुद के बदले लिट्टे के सामने किसको खड़ा कर दिया आईपीकेएफ यानी इंडियन पीसकीपिंग फोर्स अब इंडियन पीसकीपिंग फोर्स में कौन है इंडियंस बिट्टे में भी कुछ मात्रा में कौन है इंडियन तमिल्स यानी इंडियंस अब राजीव गांधी के इस एक डिसीजन की वजह से भारतीय नागरिक ही भारतीय नागरिक के सामने लड़ने के लिए खड़ा हुआ था यहां से एक बहुत बड़ी चीज हमको यह भी सीखने को मिलती है कि देश के प्रधानमंत्री के पास एक्सट्रीम डिप्लोमेटिक समझ होना कितना ज्यादा
जरूरी है एक गलत डिसीजन और हजारों लोगों की मौत एनीवेज उस पीस अकॉर्ड साइन के अगले दिन यानी 30 जुलाई 1989 को श्रीलंका में राजीव गांधी को श्रीलंकन फोर्सेस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था तभी अचानक से एक सेलर राजीव गांधी पर अपनी राइफल से बट अटैक कर देता है यानी राजीव गांधी बाल-बाल बचते हैं यह पहली बार था जब किसी श्रीलंकन ने राजीव गांधी पर अटैक किया था अनफॉर्चूनेटली इस केस में भी यही हुआ लिट्टे ने हथियार डालना शुरू तो किया लेकिन समय के साथ आईपी केएफ और लिट्टे के रिलेशंस इस कदर
बिगड़ गए कि दोनों तरफ से खतरनाक युद्ध हुआ और हजारों लोगों ने अपनी जान गवाई इंक्लूडिंग इंडियन सोल्जर्स अब नो डाउट लिट्टे और आईपी केएफ वाले आपस में लड़ रहे थे लेकिन इस असल कहानी में एक और अनबिलीवर्स [संगीत] इलेक्शंस में रण सिंघे प्रेम दासा नए प्रेसिडेंट बनते हैं प्रेम दासा जैसे ही प्रेसिडेंट बने तो उन्होंने कुछ ऐसा किया जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था उन्होंने लिट्टे से ही हाथ मिला लिया पिछले दो सालों में लड़ लड़ के आईपी केएफ ने लिट्टे को ऑलमोस्ट खत्म ही कर दिया था अब मरता क्या ना
करता लिट्टे ने भी प्रेमदासा के शांति प्रस्ताव को एक्सेप्ट किया और श्रीलंकन गवर्नमेंट से हाथ मिला लिया लेकिन लेकिन लेकिन प्रभाकरण इस लेवल का चंट आदमी था उसने शांति समझौता एक्सेप्ट करते वक्त प्रेम के आगे एक शर्त भी रख दी और वो शर्त यह है कि पहले आईपी केएफ को श्रीलंका से निका लो इससे अब श्रीलंकन प्रेसिडेंट प्रेम दासा आईपीकेएफ को श्रीलंका छोड़ने के ऑर्डर दे देते हैं इधर अपने इंडिया में भी इलेक्शन होते हैं राजीव गांधी इलेक्शन हार जाते हैं और नई सरकार बनती है राजीव गांधी प्रधानमंत्री पद से हट जाते हैं और देश
के नए प्रधानमंत्री बनते हैं जनमोर्चा पार्टी के विश्वनाथ प्रताप सिंह यानी कि वीपी सिंह अब इंडिया में वीपी सिंह की सरकार आईपीकेएफ को मार्च 1990 में वापस इंडिया बुला लेती है अब तक आईपीकेएफ ने श्रीलंका में अपने 1248 सोल्जर्स खो दिए थे और हजार करोड़ इंडियन रुपीज से ज्यादा ऐसे युद्ध में खर्च किए जो हमारा था ही नहीं साल 1991 की है सब कुछ सही चल रहा था और लिट्टे की सबसे बड़ी दुश्मन यानी इंडियन पीसकीपिंग फोर्स यानी आईपीकेएफ वापस भारत आ चुकी थी तभी एक दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजीव गांधी ने एक ऐसी
बात बोल दी जो आगे चलकर उनकी मौत का कारण बनी राजीव गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हैं कि राजीव गांधी की सरकार अगर वापस पावर में आती है तो व आईपी केएफ को फिर से श्रीलंका भेजेंगे जैसे ही प्रभाकरण ने रेडियो पर यह बात सुनी उसका खून खोलने लगा ये आज का ही दिन था जब प्रभाकरण ने यह ठान लिया कि इससे पहले कि राजीव गांधी इलेक्शन जीत के दोबारा पावर में आए उनका असस करना ही पड़ेगा फॉलोइंग दिस प्रभाकरण ने लिट्टे के इंटेलिजेंस विंग के साथ मिलकर यह प्लान बनाया इस प्लान को एग्जीक्यूट करने
के लिए लिट्टे के नौ मेंबर्स जिसमें सिवराजन सुसाइड बॉम्बर धनु सुभा और बॉम्ब एक्सपर्ट मुरुगन भी शामिल थे इन सबको मई 1991 में एक शिप के थ्रू श्रीलंका से भारत के तमिलनाडू में भेजा जाता है आगे यह सभी चेन्नई में इस भाग्यनाथ के घर आते हैं यहां आपको बता दूं कि भाग्यनाथ अपनी मां पद्मा और अपनी बहन नलिनी के साथ रहता है और अपनी प्रिंटिंग प्रेस में लिट्टे के पोस्टर्स और बुक्स प्रिंट करता है इस पूरे एसिनेट का मास्टरमाइंड यह बंदा था सिवराजन शिवराजा ने राजीव गांधी की हत्या के लिए कई प्लांस बनाए थे एक
प्लान था नारियल बॉम फेंक कर अटैक करना दूसरा था स्नाइपर अटैक करना और तीसरा प्लान जो फाइनलाइज किया गया वो था सुसाइड बॉम्ब से अटैक में उड़वा सुसाइड बॉम्बर्स के लिए इन तीन कैंडिडेट्स को चुना गया था सुभा धनु और सोनिया बॉम जैकेट नलिनी के हस्बैंड मुरुगन ने बनाई थी मास्टरमाइंड शिवराजा ने सोनिया को दिल्ली भेज दिया क्योंकि राजीव गांधी दिल्ली रहते थे तो सोनिया वहां पर राजीव गांधी को मारने के सब अरेंजमेंट्स के लिए गई थी लेकिन दिल्ली में राजीव गांधी को मारना लास्ट ऑप्शन था क्योंकि इस प्लानिंग के दौरान इन सभी लिट्टे मिलिटेंट्स
को राजीव गांधी की श्री पेरंबदूर रैली के बारे में पता चल गया था तो अब शिवराजा इन दो सुसाइड बॉम्बर्स धनु और सुभा को यहीं चेन्नई में ही रोक लेता है इस समय यानी मई 1991 में इंडिया में इलेक्शन होने वाले हैं अब चुनाव प्रचार के दौरान शिवराज की टीम ने राजीव गांधी की हत्या के रिहर्सल का प्लान बनाया जिसमें यह सभी देखना चाहते हैं कि देश की एक्स पीएम की सिक्योरिटी कैसी होती है और एक्स पीएम तक कैसे पहुंचा जा सकता है इस समय वीपी सिंह भी प्रधानमंत्री नहीं थे उनकी सरकार भी गिर चुकी
थी अब शिवराज धनु सुभा और नलिनी एक्स पीएम वीपी सिंह को माला पहनाने के लिए उनकी चेन्नई रैली में आते हैं यहां पर धनु और सुभा वीपी सिंह को माला पहना देती है लेकिन नलिनी जो यहां इस मूमेंट की फोटो खींचने आई थी वो इस समय नर्वस हो जाती है और फोटो नहीं खींच पाती है यह सब देख के इस प्लेन का मास्टरमाइंड बहुत गुस्सा करता है इस रिहर्सल से इन लिट्टी मिलिटेंट्स को सिक्योरिटी से लेकर एक्स पीएम राजीव गांधी के पास कैसे पहुंचना है इसका अंदाजा लग गया है अब 21 मई 1991 यानी राजीव
गांधी के जीवन के आखिरी दिन यह धनु और सुभा अपने बॉम वेस्ट पहनती हैं इसके बाद ये पांचों शाम को चेन्नई से श्री पेरंबदूर में राजीव गांधी की रैली को अटेंड करने के लिए इस ग्राउंड में पहुंचते हैं यहां आपको बता दूं कि शिवराज हरी बाबू को आज ₹5000000 देके यहां लाया है ताकि ये राजीव गांधी के एसिनेट की फोटोज ले सके यहां शिवराजा और हरिबाबू पत्रकारों के वेश में आए हैं अब ये पांचों यहां की इतनी सिक्योरिटी को देखकर थोड़ा नर्वस होने लगते हैं लेकिन आज इनका इरादा राजीव गांधी को मारने का है इसलिए
सिवराजन और हरिबाबू आगे बढ़ते हैं यहां पर इनकी चेकिंग के बाद इनको इस रेड कार्पेट एरिया में एंट्री दे दी जाती है लेकिन इन फीमेल सुसाइड बॉम्बर्स को पकड़े जाने का डर होता है इसलिए ये तीनों इधर इस सेक्शन में जनता के साथ आकर खड़ी हो जाती हैं लेकिन नलिनी और सुभा जल्द ही ही छोड़ देती हैं और ये दोनों ग्राउंड में इधर इस फीमेल सेक्शन में आके बैठ जाती हैं पर धनु अब भी यहीं इस रेड कार्पेट एरिया के पास ही वेट करती रहती है और धीरे-धीरे इस पूरे ग्राउंड में भीड़ बढ़ने लगती है
यहां इस भीड़ में खड़े लोगों को जैसे ही पता चलता है कि रेड कार्पेट एरिया में खड़े हुए लोग राजीव गांधी से पर्सनली मिलकर उनका वेलकम करेंगे तो इस भीड़ से काफी लोग एजे डॉज से मिलते हैं और राजीव से पर्सनली मिलने की इच्छा जाहिर करते हैं यहां आपको बता दूं कि अब तक इस रेड कारपेट एरिया में ये 21 मेल और ये दो फीमेल्स हैं जो राजीव से पर्सनली मिलेंगे लेकिन अचानक से यहां काफी ज्यादा भीड़ भरने से इस सेक्शन में खड़ी धनु भीड़ का फायदा उठाकर रेड कार्पेट एरिया में इन दो फीमेल के
पीछे आकर खड़ी हो जाती है अब पुलिस भीड़ को कंट्रोल करती है और इन एक्स्ट्रा लोगों को यहां से निकालती है इतने में राजीव गांधी यहां पहुंचते हैं और धनु उनको माला पहनाकर राजीव के पैर छूने के बहाने नीचे झुकती है और अपने लेफ्ट साइड में लगे इस बटन को प्रेस करती है इससे यहां एक पल के लिए बारूद जलने जैसी आवाज आती है और अगले ही पल यहां कोहराम मत जाता है इस ब्लास्ट में ये हरी बाबू भी मारा जाता है लेकिन इसका ये कैमरा जिसमें राजीव गांधी के एसासिनेशन की ये 10 फोटोज खींची
थी इन फोटोज के और कुछ दूसरी लीड्स के आधार पर शिवराज सुभा नलिनी और कई लिट्टे मिलिटेंट्स को पकड़ने के लिए तमिलनाडु में रेड की जाती है लेकिन इनमें से ज्यादातर लिट्टे मिलिटेंट्स आत्महत्या कर लेते हैं एक्सपर्ट्स बताते हैं कि श्रीलंका में शांति के लिए जो समझौता भारत के मेडिएशन से लिट्टे और श्रीलंकन गवर्नमेंट में होना चाहिए था वो समझौता राजीव गांधी ने खुद करके अपनी मौत को बुलावा दिया और रही बात उस दिन एंबेसी में आए हुए कॉल की तो आपको बता दूं कि ऐसे धमकी भरे कॉल्स एंबेसी में आए दिन आते रहते थे
तो इस कॉल को एक फेक कॉल समझकर इग्नोर कर दिया गया था खैर इंडिया में डीप फेक फ्रॉड दिन परदन बढ़ रहे हैं और और इस वीडियो में मैंने डिटेल में बताया है कि डीप फेक फ्रॉड से एगजैक्टली बचना कैसे है क्लिक करो और जरूर देखो