अमेरिका की सीआईए भारत के अंदर अलग-अलग प्रकार के ऑपरेशंस करती आई है। अगर एक ब्रीफ ओवरव्यू लिया जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि सीआईए के ऑपरेशंस भारत की ब्यूरोक्रेसी के ऊपर, भारत की मिलिट्री के अंदर, भारत के इंटेलिजेंस के एजेंसीज के अंदर तक पेनिट्रेटेड रही है। इसके साथ-साथ भारत के डिफेंस प्रोडक्शन सेटअप, डीआरडीओ, स्पेस रिसर्च इन सारे रेल में पहली बात तो सीआईए ने इंटरफेरेंस करने की कोशिश की। सीआईए के हिस्टोरिकल इंटरफेरेंस को अगर हम ऑब्जर्व करें तो वो केवल और केवल इन पर्टिकुलर डायमेंशंस में नहीं बल्कि पॉलिटिकल पार्टीज के अंदर तक पेनिट्रेशन
सीआईए करती आई है। लेकिन एक ऐसा पर्टिकुलर डायमेंशन है जो सीआईए ने 20089 से एक्सप्लोर करना चालू किया था। जिसको आज सीआईए ने अपना प्रिंसिपल फोकस भारत के अंदर बना लिया है। और आज इस वीडियो में हम इस स्पेसिफिक डायमेंशन के ऊपर फोकस करेंगे क्योंकि आने वाले समय में सीआईए के लिए यह सबसे बड़ा कोर डायमेंशन है जिसमें सीआईए भारत के अंदर अपने ऑपरेशंस को अंजाम दे रही है। एक चीज को गौर करने की कोशिश कीजिए। 2008 में जब भारत और अमेरिका के बीच में न्यूक्लियर डील के बारे में डिस्कशन और डिबेट चल रहा था
और वो न्यूक्लियर डील का एग्रीमेंट साइन होने वाला ही था। उस स्पेसिफिक टाइम पीरियड के दौरान अमेरिका के अंदर एक कांग्रेसमैन जिसका नाम था लॉयड डोजेट उसने अक्सर स्पीचेस दी कि पहली बात अमेरिका को भारत के साथ यह पर्टिकुलर न्यूक्लियर डील नहीं करनी चाहिए। उसने जानबूझकर इस प्रकार के स्टेटमेंट्स को दिया कि भारत के ग्लोबल राइज को हमें किसी तरीके से फंड नहीं करना चाहिए। अमेरिका के हितों में नहीं है कि भारत एक ग्लोबल प्लेयर बने। भारत की एक्सटर्नल इंटेलिजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग ने जब लॉयड डोजेट के बारे में उसकी पूरे इतिहास की
जानकारी प्राप्त करी तो माना गया और पता चला कि यह व्यक्ति के एफिलिएशंस अमेरिका की सीआईए के साथ थे। जो सीआईए के बिहाफ पर एक कोवर्ट प्रोपोगेंडा अमेरिका में चला रहा था। अमेरिका के बाकी लॉ मेकर्स को इन्फ्लुएंस करने के लिए कि किस तरीके से भारत के ग्लोबल राइज को रोका जाए। 2008 में जो शुरुआत हुई यह वहां पर खत्म नहीं होती। इनफैक्ट 2008 के बाद एक स्पेसिफिक चीज जो सीआईए की गतिविधियों के बारे में देखी गई वो यह है कि सीआईए की इंटरफेरेंस और भारत में कोवर्ट ऑपरेशंस ओवर अ पीरियड ऑफ टाइम और स्ट्रक्चरर्ड
होने लगे। आज वो स्ट्रक्चरर्ड के साथ-साथ पॉलिटिकल हैं। वो भारत के इंटरनल लॉस, भारत के सिक्योरिटी डिसीजंस, भारत की सोशल पॉलिसीज इन सबको टारगेट करके इनको ग्लोबल लेवल पर प्रोपोगेट करके यहां पर एक प्रोपोगेंडा कैंपेन चलाकर एक नैरेटिव वॉर खेल रहे हैं। 2010 की बात है कि एक संस्था जिसका नाम था इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल। इस संस्था इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने जो सीआईए का एक फ्रंट ऑर्गेनाइजेशन है अमेरिका के अंदर। उसने 2010 में एक रिपोर्ट पेश करी जिसका नाम था एडवांसमेंट्स ऑफ ह्यूमन राइट्स, चैलेंजेस एंड ओपोरर्चुनिटीज इन इंडिया। एडवांसमेंट्स इन ह्यूमन राइट्स चैलेंजेस एंड
ओपोरर्चुनिटीज इन इंडिया रिपोर्ट जो ह्यूमन राइट्स के रिलेटेड इन्होंने मैन्युफैक्चर करी वहां पर उस रिपोर्ट में क्लेम किया गया कि भारत के अंदर गौर कीजिए 2010 में रिलीजियस माइनॉरिटीज को डिस्क्रिमिनेट किया जा रहा है। रिलीजियस माइनॉरिटीज के ऊपर अत्याचार हो रहे हैं और अमेरिका को भारत के अंदर की रिलीजियस माइनॉरिटीज के ऊपर इन अत्याचारों को लेकर भारत की सरकार को कठोर कदम लेने के लिए आवश्यक तरीके से मजबूर करना चाहिए। अगर आप इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल को देखें तो वह अपने आप को एक सिविल राइट ऑर्गेनाइजेशन के नाम से पेश करती है। पर आज जब
भारत की इंटेलिजेंस एजेंसीज ने इस इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल को ध्यान से एनालाइज करने की कोशिश करी तब मालूम चला कि यह एक ऐसी संस्था है जो भारत के अंदर स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया सिममी जो कि एक बैंड ऑर्गेनाइजेशन है अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत। पहली बात तो इसके तार उससे जुड़े हुए हैं। इस रीजन से आप देखिए कि यह पर्टिकुलर लोग इस तरीके का गेम खेलते आए हैं। दूसरी बात 2010 से लेकर 2014 तक उस समय तक किसी प्रकार की कोई गतिविधियों में सिवाय इस रिपोर्ट के कोई अंजाम नहीं दिया गया। छुटकर
पुटकर लेवल पर बातें की गई 2010 से 14 तक कि भारत में डेमोक्रेसी स्लाइडिंग डाउन हो रही है। ह्यूमन राइट्स का रिकॉर्ड बिगड़ता जा रहा है। रिलीजियस फ्रीडम जो है वो कहीं ना कहीं कॉम्प्रोमाइज हो रही है। यह 2014 तक छोटे-छोटे सिग्नेचर्स देने के बाद 2015 में जो इन्होंने नया गेम प्लान शुरू किया वह यह था कि अब इन पर्टिकुलर टूलकिट्स को यानी कि जिस टूलकिट में ह्यूमन राइट, डेमोक्रेसी, रिलीजियस फ्रीडम, माइनॉरिटी सप्रेशन चार पॉइंट याद रखिएगा जो सीआईए के टूलकिट के एक एप्रोप्रियट फ्रेमवर्क के तहत बैठते हैं। इसको अब इन्होंने उजागर करके सोचा कि
अब क्यों ना हम इसको अग्रेसिव लेवल पर आगे बढ़ाएं। क्योंकि चारप सालों में इसके सिग्नेचर्स यानी कि छोटे-छोटे लेवल पर इनको कहीं ना कहीं हम प्रयोग कर चुके हैं। 2017 में ये गेम शुरू होती है और अग्रेसिव लेवल पर 2017 में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल जो है ये बाकी अन्य संस्थाएं जो भारत के विरोधी हैं। भारत में हिंदू हिंदू सनातन इन सबके विरोधी हैं। इन सबके साथ जुड़ती हैं और जुड़ने के बाद ये एक नैरेटिव मैन्युफैक्चर करना शुरू करती हैं कि भारत में मेजॉरिटेरियनिज्म बढ़ना चालू हो गया है। मेजॉरिटेरियनिज्म का सबसे पहला कॉन्सिक्वेंस है कि
भारत में जो माइनॉरिटीज हैं उनके ऊपर अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। जैसे ही यह टूलकिट अग्रेसिव लेवल पर यहां पर स्टार्ट होता है इन्होंने अपने डोमेस्टिक एजेंट्स के थ्रू यहां पर अवार्ड वापसी कैंपेन इसके बाद वो सेल्फ प्रोक्लेम्ड इंडिविजुअल्स ने पूरे न्यूज़पेपर्स में भर-भर के नैरेटिव कि कैसे यहां पर मेजॉरिटेरियनिज्म बढ़ना चालू हो गया। यह डोमेस्टिक एजेंडा को मैन्युफैक्चर किया। 2018 में इन्होंने एक नए टूलकिट को यहां पर एक्सप्लोर करने की कोशिश करी। 2018 में हुआ क्या कि जो भारत की रेगुलेटरी इनफोर्समेंट एजेंसीज थी, इन्होंने अब उनको टारगेट करना चालू करा। गौर कीजिए। 2018
का जो टाइम पीरियड है बड़ा क्रूशियल है। क्योंकि 2018 में भारत के अंदर इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने जो एक संस्था थी जिसका नाम था एमनेस्टी इंटरनेशनल। उस एमनेस्टी इंटरनेशनल के अकाउंट्स को पहली बात तो फ्रीज किया क्योंकि उस अकाउंट्स के ऊपर वायलेशन पाया गया था फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट एफसीआरए के तहत और एफसीआरए के वायलेशन के तहत इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने यह पाया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक प्राइवेट संस्था बना रखी है जिसका नाम था एमनेस्टी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और सरप्राइजिंग बात है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल जो है अब आप ध्यान दीजिए एमनेस्टी इंटरनेशनल अपने अकाउंट में पैसा
ले रही है। वहां से उसने एक प्राइवेटली एक सेपरेट एंटिटी बना रखी है। जिसके बारे में उसने अथॉरिटीज को किसी भी तरीके से डार्क में रखने के बाद कोई क्लेरिटी नहीं दी जिसका नाम था एमनेस्टी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड। ये कमर्शियल एंटिटी के तहत उसने फॉरेन फंड्स लेने की कोशिश करी। इन फॉरेन फंड्स को बिनेस ट्रांजैक्शंस दिखाने की कोशिश करी। और सबसे बड़ी बात जब इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के ऊपर कारवाई शुरू करी तब सीआईए ने इस प्रोपोगेंडा को पहली बात तो इंटरनेशनललाइज करके बढ़ाना शुरू करा कि ये भारत के अंदर एमनेस्टी इंटरनेशनल के ऊपर
हो रहे लॉ एंड ऑर्डर के प्रॉब्लम को टैकल करते हुए फाइनेंशियल फ्रॉड को टैकल करते हुए इशूज़ को उन्होंने फ्री स्पीच और ह्यूमन राइट्स के ऊपर अटैक बोलना शुरू करा। और एक यहां पर गौर कीजिए कि जैसे ही फ्री स्पीच और ह्यूमन राइट के अटैक के ऊपर ये चर्चा 2018 में शुरू होती है। सीआईए के बैठे हुए डोमेस्टिक सांप भारत के अंदर यही चर्चा पूरे के पूरे टाइम पे अग्रेसिव लेवल पर प्रोपोगेंडा तुरंत चालू कर देते हैं। इसके बाद 2019 में एक गेम आगे बढ़ता है। 2019 में भारत का जो पार्लियामेंट है वो एक लॉ
पास करता है सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट। सबसे बड़ी बात देखिए कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट पास करते ही अमेरिका के अंदर एक लॉ मेकर जिम मैक गवर्न जिसका नाम है यह व्यक्ति तुरंत कहता है कि भारत ने एक अनोखा सा कानून पास कर दिया है जो एक ऐसी रिलीजियस आइडेंटिटी पर बेस्ड है कि जिस लॉ के तहत प्रॉब्लम यह होगी कि भारत के मुसलमानों के ऊपर अब डिस्क्रिमिनेशन होगी और उनकी सिटीजनशिप और नागरिकता छीन ली जाएगी। जिम मैक गवर्न अमेरिका का लॉ मेकर जब यह स्टेटमेंट देता है और इसका प्रोपोगेंडा चालू करता है अमेरिका से कि सिटीजनशिप
अमेंडमेंट एक्ट के तहत ध्यान दीजिए भारत के मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। यह स्टेटमेंट तुरंत वहां से उस टूलकिट का प्रयोग का हिस्सा बनते हुए तुरंत भारत में आता है और भारत में फिर स्टार्ट हो जाते हैं स्ट्रीट प्रोटेस्ट। इन स्ट्रीट प्रोटेस्ट्स में आप देखते हैं क्या होता है। हर जगह एक सिंगल पॉइंट नरेटिव चलता है कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट इसलिए लाया गया है कि मुसलमानों की नागरिकता को यहां से छीन लिया जाए। सरप्राइजिंग बात यह है कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट इसलिए बना था कि पहली बात वो सिटीजनशिप प्रदान करें। उस एक्ट का लॉजिक
तो यह था ही नहीं कि वो किसी की भी नागरिकता छीने। वो बना ही इसलिए था कि वो नागरिकता को प्रदान करेगा दूसरे देशों में जो लोग हैं उनको पहली बात तो लेकिन यह नरेटिव जो वहां से उठा सीआईए की लेबोरेटरी से निकल कर जब ये भारत पहुंचा तो आपने उसके बाद जो भारत के अंदर स्ट्रीट प्रोटेस्ट देखे जिसमें अलग-अलग व्यक्ति शजील इमाम से लेकर जितने भी ये सारे इनवॉल्वड थे लोग उमर खालिद से लेकर जितने भी ये पूरे लोगों ने प्रोपोगेंडा किया। कुछ फेमस बॉलीवुड के एक्टर्स भी जिनको वैसे कोई बॉलीवुड में काम मिलता
नहीं। तो वहां जाकर उन्होंने कुछ एक्टिंग करने की कोशिश भी करी। आप समझ रहे हैं किनकी बातें हैं। यहां पर इन लोगों ने पूरे के पूरे गेम प्लान को एक प्लंड तरीके से इस तरीके से यहां पर कोशिश करी पेश करने की कि जैसे ये एक अनजस्ट लॉ है। और जैसे ही यह प्रोपोगेंडा यहां पर चल ही रहा था। उसी दौरान जब भारत ने अनुच्छेद 370 आर्टिकल 370 अपने कॉन्स्टिट्यूशन से कश्मीर घाटी का लेकर हटा के उसको एब्रोगेट किया। तो यहां पर फिर से यही टूलकिट एक्टिवेट हो गया और यहां पर उस समय आप सोचिए
कि आर्टिकल 370 का एब्रोगेशन जो कि भारत का एक इंटरनल मैटर है तुरंत इस पर्टिकुलर इंटरनल मैटर के बाद यूएस हाउस का एक रेजोल्यूशन पास होता है जिसको पास करते हैं उस समय यूएस के एक लॉ मेकर जिनका नाम है प्रमिला जयपाल और यह रेजोल्यूशन पास करके बोला जाता है कि भाई भारत कश्मीर के अंदर आर्टिकल 370 हटाने के बाद किसी प्रकार के कोई भी रिस्ट्रिकशंस को इंपोज ना करें। भाई पहली बात आप किसी प्रकार के इंटरनल अफेयर्स में यहां पर कमेंट्री देना कि हम क्या रिस्ट्रिकशंस लगाना चाहेंगे या नहीं लगाना चाहेंगे। आप कौन होते
हैं? लेकिन इस गेम पैटर्न को समझिए। यह नरेटिव स्टार्ट वहां से होता है। एक लाइन वहां से छोड़ी जाती है। उस लाइन के बेसिस पर यहां पर जो बैठा हुआ फाइव फ्रंट भारत में है जिसके लिए मैं सेपरेटली वीडियो बना भी चुका हूं आप लोगों के साथ कि उसमें कौन लोग हैं। वो यहां पर तुरंत एक्टिवेट हो जाते हैं। और जैसे ही वो वहां की लाइनें पकड़ कर यहां पर एक्टिवेट होकर वो लाइनें बोलना चालू करते हैं तो एक तरीके से पूरा का पूरा प्रोपोगेंडा होना स्टार्ट हो जाता है। तो 2019-20 तक एक गेम प्लान
भारत की एजेंसीज को समझ आ रहा था बहुत क्लियर कट तरीके से कि भारत के अंदर कोई भी कानून अगर पास हो तो उस कानून को सीआईए की तरफ से प्रोपोगेंडा करके पहली बात डिस्क्रिमिनेटरी दिखाना है। दूसरा इस टूलकिट का हिस्सा ये था कि भ अगर भारत कोई भी सिक्योरिटी डिसीजन लेता है तो उस सिक्योरिटी डिसीजन को रिप्रेशन के नजरिए से दिखाना है। तीसरा अगर भारत कोई भी अपनी इनफोर्समेंट एजेंसी लाइक इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट हो या इनकम टैक्स अथॉरिटीज हो या नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी हो अगर इसका प्रयोग करके कोई इनफोर्समेंट का काम करता है तो वो
इनफोर्समेंट को अटैक ऑन फ्री स्पीच एंड ह्यूमन राइट्स दिखाना। ऑब्जेक्टिव सिर्फ ये था कि ये थ्री पॉइंट टोलकिट के तहत पूरे के पूरे इंडियन डोमेस्टिक इशज़ को यहां पर पहली बात तो इंटरनेशनलाइज करने की मुहिम चलाई गई। अच्छा सबसे बड़ी बात यह है कि ये जो नरेटिव्स अमेरिका में बने ये नरेटिव्स केवल यहां तक नहीं रुके क्योंकि ये जब भारत में आते थे तो भारत में ये एक प्लंड कास्परेसी के तहत इस तरीके से ग्राउंड लेवल पर मैनिफेस्ट करते थे कि जिसका सबसे पहला मैनिफेस्टेशन हमने 2020 में दिल्ली रायट्स के केस में देखा। 2020 में
जो दिल्ली रायट्स हुए उसमें जो शाहीन बाग मॉडल था जिसमें प्रोटेस्टर सड़क पर बैठे। प्रोटेस्टर्स में भी प्रोटेस्टर्स जो वहां पर बैठे उनकी जो पूरी की पूरी डेमोग्राफी थी बड़ी केयरफुली प्लंड थी कि आगे बच्चों को बिठाओ बच्चों के पीछे महिलाओं को बिठाओ महिलाओं के हाथ में संविधान पकड़ाओ संविधान के बाद बच्चों के हाथ में झंडा हो और पूरी ग्रेफी और आर्ट के तहत इस प्रोटेस्ट को इस तरीके से मैन्युफैक्चर करो कि इस प्रोटेस्ट के अंदर एक प्रकार के नए-नए डायमेंशंस देखने को मिले कि ये तो सड़क पर बच्चे महिलाएं ये सब लोग उतरे हुए
हैं। और यहां पर इस पूरे के पूरे 2020 के जो प्रोटेस्ट हुए यहां पर जिसको शाहीन बाग मॉडल आज की डेट में बोला जाता है। यह मॉडल बहुत तरीके से पीसफुल नजरिए से पेश किया गया। लेकिन जैसे ही ये पीसफुल प्रोटेस्ट स्टार्ट हुए अल्टीमेटली इसका कॉन्सिक्वेंस क्या निकला? इसका कॉन्सिक्वेंस ये निकला कि जितने भी हिंदू नेबरहुड्स थे पहली बात तो वहां पर यहां इन लोगों ने वायलेंस करी। दूसरा इस पूरे प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल को मारा गया। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी को मारा गया। इस पर्टिकुलर चीज के बारे में इंटरनेशनलाइजेशन में कोई
डिबेट चालू नहीं हुआ। इंटरनेशनल लेवल पर यह कभी भी चर्चा नहीं हुई कि यहां पर आप आर्म्ड फोर्सेस हो या भारत की सिक्योरिटी फोर्सेस हो या भारत के इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स हो उनके ऊपर जिस प्रकार का अत्याचार किया गया। ये चीजों के बारे में कोई भी चर्चा नहीं की गई क्योंकि ये रायट्स किसी भी तरीके से स्पॉनटेनियस नहीं थे। एक स्पार्क स्टार्ट होता है। ध्यान दीजिए अमेरिका से। उस स्पार्क को अपनाया जाता है भारत में और एक प्रीप्लंड कास्परेसी के तहत मल्टीपल लोग यहां पर इस पूरे के पूरे गेम प्लान में पहली बात तो इनवॉल्व हो
जाते हैं। जब ये यहां पर इनवॉल्व होते हैं फिर सर जाहिर सी बात है कि सरकार इन कॉनस्पिरेटर्स को जैसे कि यहां पर वो पकड़ती है फॉर दैट मैटर उमर खालिद को तो उमर खालिद को पकड़ने के बाद यहां पर गेम प्लान दूसरा स्टार्ट हो जाता है कि वो कोई कॉनस्पिरेटर नहीं है। वो तो एक स्टूडेंट एक्टिविस्ट है। वह एक स्कॉलर है और वह स्टूडेंट एक्टिविस्ट और स्कॉलर जो है उसने किसी प्रकार की कोई भारत विरोधी बात नहीं करी। भारत विरोधी स्पीच नहीं दी। भाई अगर इस प्रकार की कोई गतिविधि आपकी तरफ से की ही
नहीं गई थी तो भारत की जो सुरक्षा एजेंसीज हैं उन्होंने आपको अभी तक पकड़ के क्यों रखा है? आपके ऊपर मामला क्यों चल रहा है? भारत की सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में आपको एक साल के लिए बेल का डिनाइल फिर से क्यों किया है? अब देखिएगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी अब ये बात बोल दी कि वन ईयर तक आपको बेल का एप्लीकेशन अलाउड नहीं होगा। आप अगले छ महीने ध्यान से ऑब्जर्व कीजिएगा कि भारत के सेल्फ प्रोक्लेम्ड इंटेलेक्चुअल्स यहां पर न्यूज़ पेपर से लेकर मैगजीन से लेकर सोशल मीडिया में खास करके Instagram
पर लेकर रीले बनेंगी और क्या दिखाया जाएगा कि एक स्टूडेंट एक्टिविस्ट एक स्कॉलर एक प्रसिद्ध विज्ञान वाला व्यक्ति एक ऐसा व्यक्ति जिसको इतना ज्ञान था उसको बेचारे के ऊपर अत्याचार किया जा रहा है। शजील इमाम इस व्यक्ति के ऊपर अत्याचार किया जा रहा है। कोई व्यक्ति यह बात नहीं करेगा कि दिल्ली राइट्स के दौरान यही वह व्यक्ति था शरजील इमाम जिसने यह बात बोली थी कि भारत के चिकन स्नेक जिसको सेलीगुड़ी कॉरिडोर कहते हैं उसको काट देना चाहिए और भारत का पूरा का पूरा नॉर्थ ईस्ट का एक्सेस कंप्लीटली खत्म कर देना चाहिए। इस स्टेटमेंट को
कोई नहीं सुनाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर गुल्फिशाह फातिमा जिसको आज की डेट में फिर से बेल का डिनाइल हुआ है, उसको एक ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट के नजरिए से पेश किया जाएगा। लेकिन कोई यह बात नहीं बताएगा कि यह वही लेडी है जिसके ऊपर यह पर्टिकुलर पॉइंट का चार्ज लगा था कि इसने लाल मिर्ची का प्रयोग करके सुरक्षा फोर्सेस की आंखों में लाल मिर्ची फेंकी थी उस समय और उनको लाठियों से मारने की कोशिश की थी। तो आप गेम प्लान को समझिए। कोई भी प्रोटेस्टर जो इनके टूलकिट का हिस्सा है उसको इस
नजरिए से पेश करो कि वह व्यक्ति एक स्कॉलर है। एक पीसफुल प्रोटेस्टर है। उस स्कॉलर और पीसफुल प्रोटेस्टर ने कोई देश विरोधी हरकत नहीं करी और कंप्लीट ब्लैंकेट बैन कर दो उन सारी गतिविधियों पे जिन गतिविधियों के तहत यह शो होता है कि इन्होंने कोई एंटीनेशनल काम किया हो। इस चीज से समझने की कोशिश कीजिए कि यहां पर अक्यूज़्ड को सिंबल्स बनाना पीसफुल प्रोटेस्ट का। यह काम इन लोगों ने मैन्युफैक्चर करके चालू कर रखा है। अब सबसे बड़ी बात आप देखिएगा और मैं आपको यह बात बता रहा हूं कि जनवरी 2026 का महीना चल रहा
है। कुछ ही समय में आप देखेंगे कि यूएस कमीशन ऑन इंटर रिलीजियस फ्रीडम यूसीएफ ये अपनी एक रिपोर्ट निकालने जा रहा है। यह रिपोर्ट निकाल के भारत के नैरेटिव को शेप करेगा कि देखिए भारत में कैसे यहां पर शजील इमाम हो या फॉर दैट मैटर या गुल्फी शाह फातिमा हो उमर खालिद हो इनके डेलीबेटली जेल में रखने से इनको लीगल इनजस्टिस के तहत यहां पर भारत के अंदर माइनॉरिटीज के ऊपर अटैक सप्रेशन ये सब किया जा रहा है। यूसीएफ की ये रिपोर्ट आएगी। ये यूसीएफ की रिपोर्ट फिर पार्लियामेंट में भी उठाई जाएगी। स्टेट लेजिसलेटिव असेंबलीज़
में उठाई जाएगी। सेल्फ प्रोक्लेम्ड इंटेलेक्चुअल्स इस पे न्यूज़पेपर में एडिटोरियल्स लिखेंगे। न्यूज़पेपर में आर्टिकल्स छपेंगे। मैगजीन में फ्रंट लाइन लेवल के कवर्स बनेंगे इन लोगों को लेकर। तो आप ये पूरा का पूरा प्रोपोगेंडा यहां पर होते हुए देखेंगे कि किस तरीके से यह गेम प्लान अब आगे धीरे-धीरे पहली बात तो बढ़ता जाएगा। ऑब्जेक्टिव सिंपल है कि नरेटिव को इस प्रकार से शिफ्ट करो कि किस तरीके से यहां पर एक डिटेंशन में रखे हुए व्यक्ति का जो ट्रायल चल रहा है जो एक कॉनस्पिरेटर है पुलिस के मुताबिक सिक्योरिटी एजेंसीज के मुताबिक वो व्यक्ति को इस तरीके
से पेश किया जाए कि वहां पर कोई आउटरेज ना हो बल्कि उस व्यक्ति को कंप्लीट सिंपथी मिले। सरप्राइजिंग बात क्या है? 2023-24 में इन प्रकार के व्यक्तियों के जब ट्रायल्स चल रहे थे तो यही व्यक्ति थे जब बार-बार अपने लॉयर्स के थ्रू एड्जर्नमेंट्स मांगते थे। यह एड्जर्नमेंट्स इसलिए मांगते थे कोर्ट्स में क्योंकि इनका ऑब्जेक्टिव था कि इनके केस को कुछ स्पेसिफिक वकील ही सुने। पूर्व भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूद ने तक यह बात कैटेगोरिकली पब्लिक डोमेन में बोली थी कि भारत के अंदर आज की डेट में कुछ स्पेसिफिक वकील हैं। कुछ पॉलिटिकल
विचारधारा से जुड़े हुए जो बार-बार कोर्ट्स के अंदर आकर एड्जमेंट्स मांगते हैं। क्योंकि उनका उद्देश्य होता है कि कुछ स्पेसिफिक जजेस के तहत ही उनके केसेस सुने जाए और यह प्रकार का जो रवैया है यह जुडिशरी के ऊपर एक बर्डन बनता जा रहा है। अब आप समझ सकते हैं कि किस प्रकार से अमेरिका जो भारत को एक जगह पर बार-बार यह नरेटिव के तहत कि आप ह्यूमन राइट्स, माइनॉरिटी, फ्रीडम इन चीजों के ऊपर जो है नरेटिव्स बना बनाकर भारत को इनवॉल्व कर रहे हो। यह वही देश है जिसने गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे ख़स्तानी आतंकवादी को
अपने देश में पनाह दे रखी है। वो ख़स्तानी आतंकवादी भारत को तोड़ने की बातें करता है। पंजाब के अंदर रेडिकलाइजेशन की बातें करता है। वो कलंक सरदारों के नाम पर सिख धर्म के नाम पर गुरपतवंत सिंह पन्नू फ्रॉड सिख वो वहां पर बैठकर जब इस प्रकार की गतिविधियां करता है तो उस समय अमेरिका को नहीं दिखता कि वो बातें क्या हो रही है। आई रोने के लिए भारत की सरकार को भी गुरुपतवंत सिंह पन्नू को लेकर यह चार्ज बार-बार लगाना चाहिए। भारत की सरकार को भी बोलना चाहिए यह बात कि किस तरीके से अमेरिका के
अंदर कुछ रेडिकल एलिमेंट्स बैठे हुए हैं। यह रेडिकल एलिमेंट्स इस प्रकार की रेडिकलाइजेशन कर रहे हैं। देखिए एट द एंड ऑफ द डे आप माने या ना माने एक चीज तय है। अमेरिका के अंदर भी बहुत सारी खुद की उनकी फॉल्ट लाइंस हैं। और ऐसा नहीं है कि भारत की एक्सटर्नल इंटेलिजेंस एजेंसीज को ये फॉल्ट लाइंस नहीं पता है। अगर आप चाहेंगे तो खैर हम कभी एक सेपरेट वीडियो में अमेरिका की क्या फॉल्टर लाइंस हैं जो भारत एक्सप्लइट कर सकता है और जिस तरीके से वह गेम खेल सकता है उसके बारे में चर्चा कभी अलग
से कर लेंगे लेकिन यहां पर गौर करने की बात सिंपल है कि डेलीबेटली कुछ लोगों के साथ यह जिस प्रकार का व्यवहार दिखाया जा रहा है सॉलिडरिटी दिखाई जा रही है जो ममदानी ने भी अभी एक चिट्ठी लिखकर अपने भाई के साथ एक बड़ी यहां पर सॉलिडेरिटी शो करने की कोशिश करी यह एक सोची समझी साजिश के तहत गेम प्लान है। क्योंकि इधर ऑब्जेक्टिव बड़ा सिंपल है। ह्यूमन राइट, फ्रीडम, डेमोक्रेसी, रूल ऑफ लॉ और माइनॉरिटीज। ये चार से पांच ऐसे शब्द हैं जिन शब्दों को आपको समझ के याद रखने की आवश्यकता है क्योंकि ये शब्द
अमेरिका की टूलकिट में आज की डेट में उनके पूरे के पूरे सीआईए ऑपरेशंस की गतिविधियां बन चुके हैं। अब आप सोचेंगे कि ये शब्दों से आफ्टर ऑल भारत पे हाम क्या हो रहा है? हम यह हो रहा है बड़ा सिंपल लेवल पर कि जब आप भारत के अंदर फ्रीडम, डेमोक्रेसी, रूल ऑफ लॉ, माइनॉरिटीज की चर्चा करेंगे तो आप पहली बात तो एक नरेटिव यह पेश करना चाह रहे हैं कि भारत अनस्टेबल है। दूसरा एक अनस्टेबल भारत इसलिए मैटर करता है अमेरिका के लिए इस मोमेंट पर ये नैरेटिव क्योंकि उससे जो ग्लोबल इन्वेस्टर कम्युनिटी है वो
डरी रहे। उसको यह रहे कि भाई जो भारत है जहां पर इतने सारे फ्रीडम, ह्यूमन राइट्स यह सारे इश्यूज चल रहे हैं। वहां जाकर हमें पहली बात तो पूंजी या इन्वेस्टमेंट लगाने की क्या आवश्यकता? तीसरा आप माने या ना माने एक बात तो फैक्ट है कि मेजॉरिटी कैपिटल इस मोमेंट पर अमेरिका और यूरोप के इन्वेस्टर्स के पास है। जब अमेरिका और यूरोप के इन्वेस्टर्स जो हैं उनके पास अगर मेजॉरिटी कैपिटल है और वही इन्वेस्टमेंट डिसीजंस ग्लोबल लेवल पर ले सकते हैं तो यह प्रकार के नरेटिव को मैन्युफैक्चर करके उन इन्वेस्टर्स के मन में एक भ्रम
पैदा करना कि देख लीजिए अगर कल को आप अमेरिका की तरफ से या यूरोप के किसी कैपिटल से उठकर भारत के अंदर पैसा लगाना चाहेंगे तो भूलिएगा नहीं कि वहां पर तो माइनॉरिटीज के ऊपर अत्याचार हो रहा है। रूल ऑफ लॉ नहीं है। मेजॉरिटेरियनिज्म है। वहां पर जो है एक्सट्रीमिज्म और रेडिकलाइजेशन है। किसी भी तरीके से रूल ऑफ लॉ फॉलो नहीं होता और वहां पर दिन प्रतिदिन डेमोक्रेसी स्लाइडिंग डाउन करती जा रही है। जब यह प्रकार के नरेटिव्स आप पेश कर करके इनको रीइंफोर्स कर करके बार-बार इन सारे लोगों के तहत आप भेजने की कोशिश
करोगे तो एक चीज तो तय है कि जो ग्लोबल इन्वेस्टर कम्युनिटी है कहीं ना कहीं वो अपने मन में एक संकोच पैदा कर लेगी कि भारत जाएं या कहीं और जाएं और अमेरिका का अंत में ऑब्जेक्टिव इन पूरे गेम प्लांस के तहत यही है। क्योंकि देखिए अमेरिका को इस मोमेंट पर भारत के अंदर आकर कोई अग्रेसिव मिलिट्री लेवल पर ऑपरेशंस करने की आवश्यकता नहीं है। जो कोवर्ट लेवल पर वो सीआईए के तहत भारत के मिलिट्री या इंटेलिजेंस आर्किटेक्चर में ऑपरेशंस करता था। अमेरिका ने भारत की एक बहुत जबरदस्त फौ्ट लाइन पकड़ ली है। फौल्ट लाइन
यह है कि भारत के ओवरऑल ग्रोथ एंबिशन को रोकना है। भारत को एक विश्व का प्लेयर बनने नहीं देना है। विश्व का प्लेयर ना बनने के लिए दो काम करने हैं। पहला काम ये है कि पूरी की पूरी जो जनता है भारत की उस जनता को बेसिकली डिवाइड कर दो जो आज की डेट में ऑलरेडी हुई हुई है। क्योंकि आज की डेट में जनता को आप एक चीज गौर करके देखिए कि देश की कितनी समस्याएं हैं। मैं ये नहीं कह रहा कि देश में कोई समस्या नहीं है। प्रदूषण की भी समस्या है। अरावली की भी
समस्या है। बेरोजगारी की भी समस्या है। सारी समस्याएं हैं। लेकिन अगर सुबह से रात हम केवल समस्याओं को ही ग्लोरिफाई करते रहेंगे तो फिर समझ से क्वेश्चन यहां पर ये उठता है कि सॉल्यूशन कब आएगा? अमेरिका ने पूरे के पूरे भारत को इस ट्रैप में फंसा दिया है। ट्रैप ये है कि आप समस्या को ग्लोरिफाई करते रहो ताकि आपके अंदर वो सोचने की क्षमता कि सॉल्यूशन क्या हो सकता है वो कभी आएगा नहीं। भाई पोल्यूशन जापान में भी था। जापान ने पोल्यूशन को लेकर क्या टैकल करने की रणनीति बनाई? एक ही रणनीति यह थी कि
लेट्स फोकस ऑन सशंस। लेकिन हमारे यहां पर आप देखिए Instagram पर सस्ते लोग रीले बनाएंगे। YouTube पे सस्ते लोग जो है YouTube शॉट्स बनाएंगे। सिर्फ प्रॉब्लम को ग्लोरिफाई करेंगे। तो एक चीज क्लियर है जब आप पूरे देश की जनता को इस तरीके से बना दो। उसको डिजाइन कर दो कि उनका सारा फोकस सिर्फ प्रॉब्लम ग्लोरिफिकेशन पे है। तो जनता एक तरफ पे ब्रेन करप्ट हो गई। दूसरी जगह पर आप विश्व के सारे इन्वेस्टर कम्युनिटी में यह मैसेज भेज दो कि भैया इंडिया के अंदर ये छोटे-छोटे छोटे-छोटे मैन्युफैक्चरर्ड इश्यूज इतने सारे हैं और एक-एक इशू को
इंटरनेशनल करके ग्लोरिफाई कर दो कि देख लीजिए कल को अगर आप इस देश में गए तो आप ऐसे देश में पूंजी लगाना चाहेंगे जहां पर इतने सारे ह्यूमन राइट के चैलेंजेस और इश्यूज हैं। इस गेम प्लान में अमेरिका दिन प्रतिदिन अगर सक्षम हो जाए तो यह दो पॉइंट गेम प्लान से ना बिना कोई मिसाइल फायर करे ना कोई गोली मारे ना किसी चीज को कुछ करे हुए अमेरिका भारत के अंदर जिस प्रकार का गेम प्लान खेल रही है इस गेम प्लान का खामियाजा हमें अगले 15 साल बाद ही मिलेगा। लोग कहते हैं कि क्या हमें
पोल्यूशन के बारे में क्या हमें आज की डेट में अनइंप्लॉयमेंट या इनफ्लेशन के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए? करो। पर चर्चा क्या इस पॉइंट पर होनी चाहिए कि सिर्फ आपने यह बोला कि देश में बेरोजगारी है, बेरोजगारी है। भाई अगर बेरोजगारी है तो पांच तरीके बता दो कि बेरोजगारी को सॉल्व करने के ये पांच तरीके हैं। वो आपके पास हैं। वो आपके दिमाग में ही नहीं है। क्योंकि आपको पता ही नहीं कि उसका सॉल्यूशन क्या है? क्योंकि आपने सॉल्यूशन के लेवल पर कभी सोचा ही नहीं। आप रेडिकलाइज सिर्फ इस पॉइंट पर हो कि प्रॉब्लम
को इतना ग्लोरिफाई कर दो कि ब्रेन की थिंकिंग कैपेसिटी जो है सॉल्यूशन ओरिएंटेड कभी बने ही ना। प्रॉब्लम जाननी बहुत जरूरी है। पर सिर्फ प्रॉब्लम को लेकर सुबह से रात रोते रहना किसी प्रकार का विकल्प नहीं है। आप अपने लाइफ में झांक कर देखिए। आपको कल को कोई बीमारी होती है। बीमारी होने के बाद क्या आप रात सारा दिन सुबह से रात इसी चीज को लेकर रोते रहेंगे कि हमें यह बीमारी हो गई या आप अपने आप को भरोसा दिलाएंगे कि कोई बात नहीं बीमारी हो गई तो क्या हुआ? आगे बढ़ेंगे। जीवन को आगे चलाएंगे।
इस बीमारी को ठीक करेंगे। माइंडसेट का गेम है सारा सर। अमेरिका ने इस माइंडसेट को भारत के टैप कर लिया है। तो अमेरिका को पता है कि गेम सराह इस मोमेंट पर नैरेटिव का है। यूथ को नरेटिव में बिजी रखो और ग्लोबल लेवल पर नैरेटिव को मैन्युफैक्चर करते रहो। ये दोनों कॉम्बिनेशन पॉइंट से क्या होगा? जो इंडिया का ओवरऑल ग्लोबल राइज है वो ग्रेजुअली रुकेगा। स्लो डाउन होगा। ये अमेरिका के जो ऑपरेशंस है इनको आप आने वाले समय में और अनफोल्ड होते हुए देखोगे। ये जो चार पांच छह शब्द हमने इस वीडियो में प्रयोग किए
इन शब्दों को गौर कीजिएगा और ये ध्यान दीजिएगा दो चीजों के बारे में। पहला कि यह शब्द अमेरिका से इमर्ज कैसे करते हैं? और दूसरा जैसे ही यह अमेरिका से इमर्ज करके भारत में यह एक्सपोर्ट होके यहां पर हमारे यहां पहुंचते हैं। यहां पर कौन से ऐसे व्यक्ति हैं जो उसी वोकैबलरी का प्रयोग सुबह से रात करते हैं। तब आप समझेंगे कि यह एक कैसे कोऑर्डिनेटेड गेम प्लान है और कैसे यह कोऑर्डिनेटेड गेम प्लान यहां पर मटेरियलाइज हो रहा है। धन्यवाद।