उस समय मेरे को ऐसा लग रहा है खजाना हाथ लग गया ₹ 77000 का स्टापन मैं बम्बे जाऊंगा जो साइकिल चलाई है वो तो जयपुर में चलाई है और अब यहां पे [संगीत] है बाकी सब [संगीत] है मैं 9 साल का था जब मेरे पिताजी एक्सपायर हो गए थे फाइनेंशियल स्थिति कुछ ऐसी थी ना पढ़ाई के पैसे थे ना कोचिंग के ना किताबों के और हर चीज के लिए जो बचपन में शौक होते हैं आदमी यह करना चाहता है वो करना चाहता है बचपन में बहुत सारी चीजें हैं कुछ नहीं कर पाए लेकिन कट टू
लाइफ राइट नाउ द कंडीशन ऐसी है कि 2 लाख से ज्यादा बिजनेसमैन को ट्रेन कर चुके हैं 500 से ज्यादा बिजनेस बिसमैन की पर्सनल हैंडहोल्डिंग करते हैं उनमें से 100 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनका टर्नओवर जीरो से स्टार्ट करवा के 100 करोड़ से ऊपर हम अभी तक ले जा चुके हैं और अगले 5 साल में 50 आईपीओ लाने वाले हैं अब एक सवाल आता है कि इतनी टफ कंडीशन थी और अब इतना सक्सेसफुल फ्यूचर है तो आखिर बीच में ऐसा क्या हुआ तो ये कहानी पूरी उसके ऊपर है और क्योंकि मैं बिजनेस कोच हूं
तो और बहुत सारे यूथ मुझे जो स्टॉक में इस माध्यम से सुन रहे हैं तो मैं जाते टाइम ये जरूर बता के जाऊंगा किसको बिजनेस करना चाहिए कब बिजनेस करना चाहिए और बिजनेस में किस चीज का ध्यान रखना चाहिए तो शुरुआत करते हैं मेरी कहानी से आई होप आपको इंस्पायर कर पाएगी कुछ करने के लिए प्रेत कर पाएगी कहानी शारू होती है 89 से 89 में मेरा बर्थ हुआ मेरे पिताजी डॉक्टर थे और लंदन से करके आए थे काफी फाइनेंशियलीईएक्सप्रेस समझ सकते हैं किस तरह से था और उस गांव में बहुत अच्छी लाइफ हम जी
रहे थे लेकिन 9 साल की उम्र में मेरे पिताजी एक्सपायर हुए और कुछ पैटरनल कंडीशन दादाजी पिताजी की तरफ कुछ ऐसी कंडीशन रही कि मैं 9 साल के बाद वहां नहीं रह पाया और मुझे आना पड़ा मेरे ननिहाल जयपुर सो 1998 में मैं जब जयपुर आया मेरे ननिहाल तो कंडीशन कुछ ऐसी थी पांच कमरों का एक घर था और 22 जनों की फैमिली थी जॉइंट फैमिली थी और बहुत ज्यादा पैसे वाले नहीं थे और बिजनेस फैमिली से कोई नहीं था और सब छोटी-मोटी जॉब करते थे मेरे नाना जी की चाय की एक दुकान थी पूजा
सेवा करते थे मंदिर में तो मेरे मामा वगैरह ने बचपन में कपलेट वगैरह भी धोए थे तो ऐसा सीन था कि अच्छा ये आ गया कोई बात नहीं अब आ गया है ये भी कपलेट धोने में लग जाएगा पर मम्मी ने कहा नहीं या डॉक्टर का बेटा है और बच्चा इंटेलिजेंट है कुछ करना चाहता है तो इसको हम करने का कुछ मौका देंगे तो उन्होने कहा ठीक है चलो कोई बात नहीं थोड़ा और पढ़ा लो अभी तो बच्चा है 9 साल का है 12 13 साल तक पढ़ा लो फिर लगा लेंगे तो फिर मैं एक
फिफ्थ क्लास में एक स्कूल में पढ़ा इंग्लिश मीडियम स्कूल था जिंदगी में पहली बार इंग्लिश की तरफ गया क्योंकि चौथी क्लास तक मैं हिंदी मीडियम स्कूल में था वो प्योर हिंदी मीडियम मतलब गुड मॉर्निंग सर वाले नहीं आचार्य जी प्रणाम वाले स्कूल में मैं था तो फिर इंग्लिश टफ थी मतलब मेरे लिए तो राहुल को आर को ए से और ए को एच से मिलाना मुश्किल था धीरे-धीरे सीखा और पांच फिफ्थ क्लास में वो स्कूल टॉप किया लेकिन पैसे उस स्कूल की फीस थी ₹ 3300 वो भी देना बहुत बड़ी बात थी तो दूसरे स्कूल
में किया जहां फीस माफ हो सके वैसे स्कूल में हम गए सिक्सथ सेवेंथ एथ वहां किया वहां उसको टॉप किया एथ क्लास हुई अब घर वालों ने कहा अब तो उसको जॉब पे लगा देते हैं सिक्स्थ क्लास में मैंने टाइपिंग सीखी थी कि यार यह को कॉ कोर्ट के बाहर कहीं पेज टाइप करेगा ₹ एक पेज 0 पेज के किसको मिल जाएंगे कहीं 4 5000 में किसी का असिस्टेंट बना देंगे ये मेंटालिटी थी तो नाइंथ में कोई पढ़ाना नहीं चाहता था लेकिन मैं अकेला खुद की साइकिल लेके अलग-अलग स्कूलों में गया मैंने कहा भैया मुझे
पढ़ना है मुझे पढ़ना है लोगों ने कहा या नाइंथ क्लास का एक बच्चा है साइकिल से आ रहा है और आके कहता है कि भाई साहब मेरे को पढ़ना है मेरे को स्कॉलरशिप दे दो मेरे पास पैसे नहीं है तो फिर किसी ने एक ने कहा कि देखो अगर हमारे स्कूल टॉप करोगे तो हम आपको फीस देंगे मैंने कहा सर एक काम करो आप मेरा नाम लिख दो स्कूल में अगर मैं फेल हो जाऊं तो मुझे आप हटा देना और नहीं तो भाई साहब मेरे को आप रख ही लेना तो नाइंथ क्लास में मैंने मेरी
क्लास और सेक्शन और स्कूल टॉप किया तो 10th 11थ 12थ तक मेरे को फ्री में पढ़ने को मिला 11थ क्लास में जब मैंने कॉमर्स लिया सब जने कह रहे थे इता इंटेलिजेंट बच्चा है इंटेलिजेंट बच्चों का क्या होता है साइंस ही लेता है लेकिन भैया साइंस मैंने कहा नहीं साइंस लेंगे तो किसी ने कहा भाई घर वालों के कपड़े बिक जाएंगे भाई तेरे पास पैसे नहीं है कोचिंग के किताबों के डॉक्टर इंजीनियर कहां बन पाएगा कॉमर्स ले ले उसमें क्या है हा पार्ट टाइम अर्निंग जल्दी चालू हो जाती है और बहुत पैसा भी नहीं लगता
तो मैंने इसलिए कॉमर्स किया मैंने कहा कुछ करना चालू कर देंगे कमाई चालू हो जाएगी अकाउंटिंग सीख लेंगे कहीं अकाउंटिंग कर लेंगे 12थ क्लास के बाद मेरे पास ऑप्शन था कि भाई क्या करें तो किसीने कहा एमबीए भी कर सकते हैं सीए भी कर सकते हैं बट अगर बीबीए या एमबीए तरफ जाएंगे फिर वही पैसा सीए बोले सस्ता है बहुत टफ है लेकिन सस्ता है मैं कहा टफ से डर नहीं लगता साहेब पैसे से लगता है तो टफ वाली चीज हम कर लेंगे तो सी में मैंने पहला एग्जाम दिया तो मेरा फर्स्ट एग्जाम था सीपीटी
का जब हुआ था पहला एग्जाम था एंड आई गट ऑल इंडिया 3 सेकंड रंक और दैट टू विदाउट कोचिंग एंड ऑल उसके बाद फिर मैं नेक्स्ट लेवल पर गया नेक्स्ट लेवल पर गया तो उस समय सीए की ट्रेनिंग के दौरान स्टापन मिलता है 000 का उस समय 000 मिलता था अभी कितना मिलता है मुझे पता नहीं और 1000 भी कोई देता था कोई नहीं देता 1000 बहुत टफ है मतलब ऑफिस आने जाने में लग जाता है तो किसी ने कहा यार बम्बे में अगर जाओगे ना सा 000 स्टापन मिलता है उस समय मेरे को ऐसा
लग रहा खजाना हाथ लग गया 7000 का स्टेपन मैं बंबे जाऊंगा तो घर को झूठ बोल के कि भैया मैं तो जा रहा हूं बंबई और झूठ बोल के बैकपैक करके 000 लेके बंबे चला गया घर वालों को बोला कि वहां पे हॉस्टल मिल गया है वहां पे जॉब मिल गई है एक भैया है उनके यहां रह लेंगे घर वालों ने कहा ठीक है कोई साथ लगा नहीं कि चलो हम तेरे साथ चलेंगे बंबे देख के आएंगे किसी के पास टाइम नहीं है ना कोई वैल्यू है कि भाई हम चले तो हम गए अकेले बम्बे
गए वहां पे सारी चीजें देखी और बहुत स्ट्रगल दो दिन इसके घर तीन दिन इसके घर पांच दिन उसके घर यहां इंटरव्यू दे रहे हैं वहां इंटरव्यू दे रहे हैं फाइनली 2021 दिन के बाद तो मुझे हॉस्टल मिला था 28 दिन के आसपास मेरा एक जॉब का सिलेक्शन हुआ था महाजन एंड आबरा एक कंपनी में मैं लगा वहां पे मुझे पहली बार पता चला वो एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म थी वहां वेट का काम नहीं होता ऑडिट नहीं होती वहां पे सिंपल रिस्क कंसल्टेंसी रिस्क ऑडिट एसओ पी बनाना मैनेजमेंट कंसल्टिंग और मैंने पहली बार देखा कि
इस तरह के भी बिजनेस में काम होते हैं और इतने बड़े-बड़े मैं पहली बार जीवन में जब रेमंड्स के प्लांट में गया थाने वाले में तो जितना बड़ा वो प्लांट था उतना बड़ा तो मेरा मोहल्ला नहीं था जहां पे मैं रहता था मैंने कहा इतने बड़े बिजनेस भी होते हैं इतनी बड़ी फैक्ट्री भी होती है इतने लोग एक साथ काम भी करते हैं तो माइंडसेट एकदम सेही वहां से शिफ्ट हुआ फिर वहां से बातचीत में आज मैंने ये किताब पढ़ी वो किताब पढ़ी इस किताब में ये लिखा था तो वहां से बुक्स के प्रति बुक्स
के प्रति पैशन बचपन से था लेकिन जो मेन पैशन बिजनेस बुक्स का था वो वहां से लेके आया कि अच्छा ये बिजनेस में पढ़ा अच्छा रेमंड्स में बैठे रेमंड्स की कहानी पढ़ते हैं अच्छा मनी का डिस्कशन चल रहा है रू भा मनी की कहानी पढ़ते हैं तो कहानी पढ़ के वहां से बिजनेस के प्रति इंटरेस्ट जगा वहां पे एक दो साल रह के बहुत बढ़िया काम किया वहां पे जो कहत ना लग्जरी जो पहली बार मिलती है कि एक व्यक्ति जिसको साइकिल पे घूम रहा था मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर तक साइकिल प गया था
बसों में लटक लटक के जाते थे वो छह जनों के ऑटो में 16 जने जो ड्राइवर के पास बैठ के जाते हैं ना वैसे हम जाते थे और एक एक रुपए की मतलब बचपन में ₹ की कुल्फी के लिए हम स्ट्रगल कर रहे हैं ₹10 की कचोरी के लिए चार दोस्त लड़ रहे हैं तू पैसे देगा तू पैसे देगा वैसे से निकले और सीधे वहां कंसल्टिंग में सीधे फ्लाइट में बैठ रहे हैं फाइव स्टार होटल में रुक रहे हैं तो ऐसा लगा भैया ड्रीम कम ट्रू अब ऐसे टाइम पे मुझे टेक्निकली सेटल हो जाना चाहिए
था कि यार अच्छे पैसे मिलेंगे और पूरी सुविधा है यही सेटल हो जाते हैं लेकिन जैसे ही सीए बना पहला थॉट दिमाग में आया कि नहीं यार अपन जो साइकिल चलाई है वो तो जयपुर में चलाई है और अब यहां पे टी हुई है और हेलमेट है हाथ में बाइक पे आया है और एक बिजनेसमैन को कह रहा है मैं आपको कंसल्टिंग करता हूं कि देखें आपका बिजनेस कैसे आगे बढ़ेगा अरे बोले भाई जा ना तू क्या सिखाएगा तो उसके बाद फिर मैंने सीए की प्रैक्टिस चालू की नॉर्मल वेट रजिस्ट्रेशन करा लो सीए के रिटर्न
भर लेते हैं आपकी ऑडिट कर लेते हैं लेकिन परपज वही था अभी क्लाइंट मेरे पास एक छोटा व्यापारी आ था मेरी इनकम टैक्स की रिटर्न भ दो मैं मेरे स्टाफ को कहता सुनो मेरे पार्टनर को कह ता भाई तू रिटर्न भर मैं इनसे बैठ के बात कर रहा हूं और बताओ सर कितने एंप्लॉई हैं कैसे माल लेते हो कैसे माल बेचते हो कितना मार्जिन है क्या दिक्कत आ रही है परचेस कैसे करते हो मार्केट कैसे करते हो सेल कैसे करते हो वेबसाइट प क्या है तो जब ये सारी चीजें पता करी तो मुझे अंदर की
बातें पता पड़ी अच्छा मैं आपकी फैक्ट्री आता हूं एक बार मैं एक बार आपके गोदाम आके देखता हूं आपकी दुकान प दो घंटा में बैठता हूं तो वहां पे जाके मुझे एगजैक्टली पता पड़ा कि छोटे व्यापारी के भैया प्रॉब्लम क्या है मैं पूछता हूं यार मार्केटिंग कैसे करते हो बोले मार्केटिंग वो क्या होती है हमको करने की जरूरत क्या है हम तो दुकान खोल के बैठ जाते हैं जो आ जाता है ले जाता है इसमें कगी मार्केटिंग मैं चार लोगों को जानता हूं मैं कहा तो मार्केटिंग तो जा जानता ही नहीं है और मार्केटिंग क्या
होती है और कैसे होती है वो तो मैं कॉर्पोरेट में करके आया हूं मैंने कहा मार्केटिंग तो इतनी खतरनाक चीज है इतनी मस्त चीज है ऐसा होता है रे तो करही नहीं रे अच्छा एक काम करो अच्छा फब साइट बोले वो क्या होती है सोशल मीडिया बोले सर उसपे तो है ही नहीं मैंने कहा यार भाई साहब ये चाह क्या रहे हैं एंप्लॉई मैनेजमेंट अगेन सेम चीज है तो मैंने देखा यार ये छोटा व्यापारी सुबह से 12 से 14 घंटे लगा हुआ है साल में कहता है कि मैंने यार लाख रप महीने की बचत हु
है ₹ लाख महीने की बचत है और अपने हेल्थ से परेशान है मेरे पास ऐ ऐसे लोग आते थे जो कहते थे सर आपका बच्चा कौन सी क्लास में है बोले यार पता नहीं होगा सेकंड में थर्ड में पता नहीं मुझे तो पता ही नहीं कि मेरे बच्चों को मैंने ऐसे बड़ा होते नहीं देखा मैंने ऐसे बड़ा होते देखा है मैं बच्चों का संडे पापा हूं क्योंकि जब मैं उठ के जब मैं सुबह उठता हूं तो बच्चे स्कूल जाए होते हैं और रात को वापस आता हूं तो बच्चे सो गए होते हैं मैं तो बच्चे
से मिलता ही संडे का हूं तो सर मेरी फैमिली लाइफ शून्य है मैं मेरे दोस्तों के साथ घूम नहीं पाता मैं क्रिकेट का शौक था छूट गया गाने का शौक था छूट गया तो मैंने कहा अरे एक व्यापारी तो अति परेशान है यार इस इसके सारे पैशन छूट गए ये फैमिली छूट गई ये हेल्थ को ध्यान नहीं दे रहा ये 14 से 14 घंटे 14 से 16 घंटे एक स्ट्रगल में लगा हुआ है और रिजल्ट इतना सा मिलता है और बड़े बिजनेसमैन क्या-क्या कर रहे हैं इसको बेसिक चीजें नहीं पता मैंने कहा अपने बेसिक चीजें
इनको बताएंगे तो हम मैंने फ्री में कंसल्ट करना चालू किया कि सुनो मैं कोई पैसे नहीं लूंगा बस मैं बोलता जाता हूं आप करते जाओ और जब किया तो कईयों को रिजल्ट मिला कई दो घंटे में ऑफिस जाने कई कह रहे हैं कि चार घंटे ऑफिस जाते हैं हमारा काम हो जाता है कई लोग कहते हैं हमारा बिजनेस डबल हो गया किसी का ट्रिपल हो गया कोई फैमिली को टाइम देने लग गया तो मुझे लगा ये जो मैं काम कर रहा हूं ना ये बहुत भले का काम कर रहा हूं इसको ही आगे बढ़ाते हैं
और मुझे मजा आने लग गया इस चीजों में लेकिन अभी तक पैसे नहीं आ रहे थे सिर्फ मजा ही आ रहा था पैसे नहीं आ रहे थे फिर जब थोड़ा सीए बने चार पांच साल हो गए लोग जानने लग गए लोगों को सफलता मिली टेस्टिमोनियल क्रिएट हो गए तब मैंने इफेक्टिवली कहा कि अब मैं कंसल्टेंट हूं और अब मैं पैसे चार्ज करूंगा उस समय आसपास दौर था सुपर 30 मूवी आई थी तो जब मूवी आई तो बात चली कि आनंद कुमार करके एक व्यक्ति है जो 30 बंदे सिलेक्ट करता है और उनको बताता है तो
मैंने कहा क्यों ना अपन ऐसा करें कर कि मेरे को इनसे एक बंदों से मीटिंग करके भी यही कहना है कि मार्केटिंग में ऐसे ऐसे करो ये गलत है फिर इनसे मिलके भी यही कहना है तो 30 आदमियों से बात एक ही करनी है तो 300 को एक साथ बिठा के नहीं करते क्या तो मैंने जितने भी क्लाइंट थे सबको एक कमरे में बुलाया मैंने कहा सुनो अपन क्या करते हैं आप मेरे से है ना मुझे इं फीस बड़ी मत दो छोटी सी फीस देना लेकिन मेरे को भी क्या है कि 50000 एक आदमी से
लेने की बजाय 5000 मैं 20 आदमी से लूंगा मेरे लिए भी ठीक है और 20 आदमियों की वेटिंग भी नहीं है तो मैंने कहा अब मैं स्टेज प खड़ा रहूंगा मैं तुम्हारी प्रॉब्लम बताऊंगा मैं सॉल्यूशन बताऊंगा और क्यू एंड ए करूंगा काम तुम अपने आप से कर लेना अटको ग तो पूछ लेना सो मैं कंसल्टिंग से कोचिंग की भूमिका में आ गया ऐसा नॉर्मली नहीं होता जो कंसल्टेंट होते हैं बहुत हाई पैकेज पे होते हैं मैं 500 चार्ज कर रहा था मैं 5 लाख भी चार्ज कर लेता लेकिन मेरे को नॉलेज ज्यादा से ज्यादा लोगों
तक पहुंचा नहीं थी तो कोचिंग वाले फॉर्मेट में आना पड़ा द मोमेंट आई वेंट इन टू कोचिंग सुपर 30 का फर्स्ट बैच चालू हुआ पहला बैच 30 आदमियों का था खत्म होते ही अगला बैच बन गया 40 का उसके खत्म होने से अगला बैच बन गया 50 का और उसका बैच खत्म होने से पहले 100 का बैच बन था उससे पहले कोरोना आ गया तो जब कोरोना आ गया तो सब बंद हो गया मैंने कहा कोई नहीं 1015 दिन की बात है निकल जाएंगे पर वो एक महीने में बदल गया पहली लहर निकल गई मैंने
कहा चलो अब ठीक है दूसरी लहर आ गई मैंने कहा अब ठीक है दूसरी लहर निकल गई तीसरी की बातें होने लग गई मैंने कहा अपने तो भैया ईएमआई वाला चक्कर है इनकम बंद है कैसे करेंगे फिर किसी ने कहा इस काम करो इसी काम को ऑफलाइन कर रहे हो उसको ऑनलाइन ही कर लो मैंने कहा मुझे ऑनलाइन में तो कुछ भी नहीं आता ना तो मुझे वेबसाइट का आईडिया ना मुझे जूम का आईडिया ना क्या आईडिया उन्होने कहा नहीं आप ट्राई करो मैं ने कहा नहीं यार मैं तो नहीं करूंगा लेकिन फिर एकदम सही
किसी ने कहा कि यार चैरिटी का इवेंट कर रहे थे कि जो सुपर 30 के कुछ लोग थे उनके फोन आया कि सर मेरा ऐसे-ऐसे प्रॉब्लम थी मैं एंप्लॉई निकाल दूं क्या मैंने कहा नहीं नहीं एंप्लॉई मत निकालना बोले सर मैं निकालने वाला था आपने कह दिया तीन आदमी की जॉब बच गई फिर दूसरे का फोन आया मैंने सॉल्व किया तीसरे का आया मैंने सॉल्व किया मैंने कहा मैंने तीन फोन पे अब तक 11 लोगों की जॉब बचा चुका हूं और लोग बाग यही गलती कर रहे हैं शायद तो कुछ करें तो मैंने जूम किसी
को बोला कि यार मेरे को एक जूम सेटअप करके दो और फ्री जूम जो होता था एक घंटे का वो मैंने सेशन किया 12:00 बजे का मैंने टाइम दिया था और घर पे बैठ के मैं क्लास ले रहा था 12:1 पे दोस्त का फोन आया मेरी एंट्री नहीं हो रही मैंने कहा क्या बात हो गई पता चला हाउसफुल था 12:1 पे तो 100 बंदों की क्लास ली और हर बंदे का ये था कि हम एंप्लॉई निकालने की सोच रहे थे बिजनेस बंद करने की सोच रहे थे टूट गए थे हार गए थे पर से एक
घंटे से कॉन्फिडेंस मिला है तो फिर मैंने कहा कि अगला करते हैं 300 आदमियों का किया वो भी हाउसफुल था और उस समय मैंने पहले दो तीन फ्री किए फिर बाद में मैंने ₹1 00 00 लेना चालू किया और जो पैसे मिलते थे सब मैं कोरोना में दान कर देता था कि ठीक है कोरोना में भी कुछ मिशन चल रहा है ये अन्न में दे दो 2100 वहां दे दो 1100 वहां दे दो 100% चैरिटी की फिर मैंने कहा धीरे-धीरे कोरोना की लहर बाहर आई मैंने कहा अब फिजिकल इवेंट में कोई कंफर्टेबल नहीं है अब
कोई होटल में नहीं आएगा अब कोई बात नहीं होगी सो देन वी टेक इट टू द ऑनलाइन कोर्स तो किसी से हेल्प ली पहले छोटा कोर्स बनाया फिर बड़ा कोर्स बनाया तो मंथली हमारे पास उस समय 150 से 200 लोग आते थे और लाना भी बहुत बड़ी बात थी मतलब ऐड की शूटिंग मैं करता था फिर वो ऐड के कमेंट का जवाब मैं देता था फिर उसके बाद जो लोग के फोन आते थे मैं बात करता था फ whatsapp2 लोग थे और जर्नी ऐसी चली आपका प्यार इतना मिला कई लोगों ने कोरोना में अच्छा बिजनेस
किया कोरोना के बाद नीचे चला गया मैं कोरोना के बाद चालू हुआ था और वो 150 आदमी जो पर मं थे वो आज की रेट में 11000 आदमी जो व्यक्ति ₹ के लिए परेशान था 10-2 हज ड्रीम जॉब थी आज मेरे पास 80 आदमियों से 80 से ज्यादा आदमियों का स्टाफ है और वो हमने रोक रखा है अगले 3 साल में 200 से 250 आदमी का स्टाफ हो जाएगा हमारे पास टोटल मतलब जितनी मेरी ड्रीम इनकम थी ना कि श काश इतने पैसे आ जाए तो मैं हो जाऊं उतना शायद हम रेंट दे देते होंगे
आज की डेट में दैट इज द कंडीशन और स्टॉक मार्केट में अगर मैं बात करता हूं हमारी कंपनी की वैल्यूएशन की मैं टर्नओवर प्रॉफिट डिस्कस करने ब्रैग नहीं करना जाता मगर आज की डेट में हम लिस्ट होते हैं तो इट इज अ मल्टी करोड़ कंपनी कई लोग मुझसे पूछते हैं सर आपका youtube0 से ग्रो कर रहा है आपके 3 मिलियन 35 मिलियन हमारे देखते देख देखते हो गए मैं कहता हूं सर मेरे देखो वहां 4 मिलियन है instagram2 के है और इकलौता कारण है कि जो भी मैं नॉलेज देता हूं सरल होती है और मेरा
नॉलेज को लेके दो ही कांसेप्ट है पहला ज्ञान वो होना चाहिए जो सरल हो आपने आज मेरी बात सुनी और वीडियो खत्म करके अगर आप अप्लाय कर सकते हो तो ज्ञान है बाकी सब मुह में आया है और दूसरी चीज ज्ञान अफोर्डेबल होना चाहिए और मैं जीवन में हर चीज कहता हूं कि मुझे अगर किसी भी चीज से मैं सफल हूं सफलता है ग्रोथ है जो भी है तो मैं कहता हूं यह सब नॉलेज के पीछे ये चाणक्य ने भी का है कि भैया एवरीथिंग इज नॉलेज आपके पास किसी भी आदमी के पास कितना भी
पैसा हो या कोई कितना भी सुंदर हो या राजा हो या धनवान हो ज्ञानी व्यक्ति के सामने सब झुक जाते हैं और मैंने देखा है कि बचपन में जब मुझे कोई घर में प्रॉब्लम आ रही है रेस्पेक्ट आ रही है मैं मोहल्ले में कहीं जा रहा हूं तो बाकी लोग मुझे कह रहे हैं कि अरे बेटा तू चाय पी ले तू काजू बादाम खा ले तेरे लिए गाजर का हलवा बना दे तू बस मेरे बेटे के साथ बैठ के थोड़ा पढ़ लिया कर ये मेरा बेटा कमजोर है इसके साथ बैठ के पढ़ लिया कर इसके
साथ रहा कर इसका होमवर्क करा दिया कर तो मेरी नॉलेज के चक्कर में हर जगह रिस्पेक्ट थी स्कूल में भी मैं मस्ती करता था तो टीचर डाट ते कम थे मैं हर चीज में मुझे प्रायोरिटी मिलती थी तो वो सब चीज क्या थी एक ही चीज नॉलेज नॉलेज एंड नॉलेज अब बिजनेस किसको करना चाहिए मेरा ऐसा मानना है बिजनेस हर व्यक्ति को करना चाहिए क्योंकि इंडिया की जो इकॉनमी जिस तरह से बढ़ रही है उसमें हर व्यक्ति को जब बिजनेस देखो आप चाहते हो कि मैं जितनी मेहनत करूं उतना रिजल्ट मिले या उससे ज्यादा मिले
तो वोह आपको बिजनेस में ही मिल पाता है पहली बात आप बोले कि कई बने देते हम करना ही नहीं चाहते हम तो जॉब करना ही पसंद करते हैं आपका अगर अंदर से इच्छा है कि मैं तो जॉब ही करूंगा तो जॉब के अंदर यू बिकम इंट्रप्रेन्योर इंट्रप्रेन्योर का मतलब आप जॉब में ऐसे काम करो कि ये कंपनी चाहे मैंने स्टार्ट नहीं की चाहे इस कंपनी में नाम मेरा नहीं है पर इस कंपनी में ये डिपार्टमेंट मेरा है ये जो सिस्टम मेरे अंडर है जितने लोग मेरे अंडर हैं या जो इस कंपनी ने ओवरऑल टारगेट
का जो मुझे जिम्मा दिया है ये मेरा है ओनरशिप लेके काम करो देन यू डेफिनेटली मतलब आप माइक्रोसॉफ्ट नहीं बना पाओगे कोई बात नहीं सत्या नडेला बन सकते हो आप सुंदर पची जरूर बन सकते हो दूसरी बात सर बिजनेस करें तो कौन सी इंडस्ट्री में करें मैं आपको यहां से जो भी इंडस्ट्री बताऊं मैं गलत बताऊंगा और जो भी कोई भी आपको बताएगा वो सब गलत बताएंगे सुनना इंडस्ट्री वो सही होती है जिसमें आपका इंटरेस्ट हो और जिसके आप एक्सपर्ट हो सपोज मैं कहता हूं आज की डेट में बहुत ग्रोथ है एआई इंडस्ट्री में आपका
एआई में ग्रो इंटरेस्ट ही नहीं है आप तो आर्टिस्टिक आदमी हो आप तो कुछ क्रिएटिव करना चाहते हो आप तो स्पोर्ट्स में कुछ करना चाहते हो तो करना स्पोर्ट्स में चाहते हो मैं एई में भेज दूं तो आप फेल हो जाओगे आप पोटेंशियल वेस्ट हो जाएगा आप स्पोर्ट्स आपको स्पोर्ट्स समझ में आता है आप उसमें काम करो जो चीज आपको काम आती है कि यार ये चीज मेरे को अच्छी लगती है उसमें काम करो एक सवाल सर पता कैसे पड़ेगा बहुत आसान है 20 साल की उम्र में खुद पे प्रेशर मत डालो 17 18 19
20 साल में और स क्या करें हमारी जिंदगी खत्म हो गई भाई साहब तुम्हारी जिंदगी चालू हुई है 20 आर फॉर लर्निंग 30 आर फॉर डडूइंग एंड 40 आर फॉर बिल्डिंग 20 साल से 30 साल तक तुम पे कोई प्रेशर नहीं है कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है तुम बस सीखो 20 का फोकस क्या है कि तुमने ये इंडस्ट्री में मन गया इस पे काम किया छ महीने में या तो ज्यादा मन करेगा या बोलोगे बेकार है छोड़ दूसरी 20 साल से 2223 साल तक तीन चार साल तो अलग-अलग जगह पांच छह अलग-अलग इंडस्ट्री को टैप
कर लो जहां तुमको हल्का सा भी मन करे जाके देख लो या तो इंटरेस्ट बढ़ जाएगा या कम होगा तो छोड़ देना बढ़ेगा तो उसमें आगे बढ़ जाना तो दो-तीन साल काम करके तुम्हें पता पड़ जाएगा कि अच्छा ये इंडस्ट्री समझ में आती है फिर उस इंडस्ट्री के अंदर उसके तीन-चार कंपनियों में काम करोगे तुम्हें पता पड़ जाएगा ये वाली कंपनी सही काम करती है ऐसा काम करती है और फिर तुम्हें अपने काम का आईडिया लग जाएगा तुम अगर 28 30 तक भी क्लियर हो गए ना कि मुझे ये इंडस्ट्री में ये वाला काम समझ
में आता है और तब तक तुम्हारे कनेक्शन बन चुके होंगे तुम्हारा पास थोड़ा सा पैसा इकट्ठा हो गया होगा तुमको दुनियादारी समझ में आ गई होगी अच्छा बुरा उसके बाद 30 है बिल्ड करने के लिए 30 से 40 का ऐसा दौर है जब अपनी जो सर्वाइवल वाला काम है वो दाल रोटी वाली व्यवस्था वो करो घर परिवार को सेटल करो 40 के बाद से आप ना एंपायर जो बिल्ड होते हैं जो जिस भी बड़े आदमी का आप इंटरव्यू लेते हो कि यार ये तो वो 40 के बाद से चीजें बढ़नी चालू होती है कि अरे
बिलिनियर भी है तो उसका बिलिनियर का जो गेम बना है ना वो 30-35 के बाद से बना है 3035 ठीक ठाक सर्वाइवल में जाती है तो खुद पे बहुत ज्यादा प्रेशर मत डालो आज की कहानी के बाद ये रोना तो रोना मत कि पैसे नहीं थे पैसे तो अपने पास भी नहीं थे जब पैशन है आपके पास तो चीजों के रिजल्ट निकल जाते हैं आप लगे द ओनली गेम नेम ऑफ द गेम इज कंसिस्टेंसी अगर आप लगे रहोगे कि यार मुझे ये चीज चाहिए तो छ महीने में नहीं आएगी वो एक साल में आएगी एक
साल में नहीं दो साल में आएगी आ जाएगी कई लोग हैं कि यटर बनना है 10 वीडियो बनाई अब चल रही नहीं है अब 11वी नहीं बना रहा भाई साहब youtube1 वीडियो तक देखो ही मत बिजनेस करने में उतरे हो 1000 दिन तक देखो ही मत लगे रहो रोज डिफिकल्टी आएगी रोज सॉल्व करो दूसरी पकड़ो सॉल्व करो आगे बढ़ते रहो ये स्ट्रगल है देखो तुमने अगर प्रकृति से गॉड से यूनिवर्स से बड़ी चीज मांगी है ना तो पहले बड़े-बड़े स्ट्रगल देके तुमको टेस्ट करेगी टेस्ट में पास होगे तो आगे बढ़ जाओगे तुम भगवान से बड़ी
चीज मत मांगो बोलो मैं 20000 की सैलरी चाहिए तो 20000 की सैलरी आराम से मिल जाएगी उसमें कोई स्ट्रगल नहीं कोई माता फोड़ी नहीं कहीं भी कोई भी दे देगा 12 15000 लगोगे दो पा साल में 20 पे पहुंच जाओगे इतनी सी चीज मांगोगे इतने से स्ट्रगल आएंगे चीज बड़ी मांगोगे बड़े स्ट्रगल आएंगे स्ट्रगल नने पड़ेंगे उसके लिए क्या चीज होती है सबसे पहला पॉजिटिव थॉट अफर मेंे से आएंगे विजुलाइजेशन से आएंगे एक्सपोजर से आएंगे अपना एक्सपोजर बढ़ाओ भैया तुम बैठ के देखते हो टीवी कि टीवी पे देखे साउथ की मूवी आई है एक उसने
पैर रखा 25 गाड़ियां उड़ गई क्या होगा उससे उसकी जगह भैया जोश टॉक का एक एपिसोड देखो तुम्हें पता लगे अरे यार क्या चीज मिली है अरे हम जैसे लोगों ने किया है मोटिवेशन आपको मिलती है आप जा हो बार में पार्टी करने उसकी जगह किसी सेमिनार में जाओ एग्जिबिशन में जाओ चीजों को देखो क्या है आपकी जो किस्मत है ना वोह आपके हाथ है आप क्या देखते हो आप क्या खाते हो किन लोगों के साथ बैठते हो कैसे टाइम बिताते हो यह सब सही है तो आपकी ग्रोथ पक्की है और आप कह रहे हो
मुझे अगर दोस्त नहीं है सर्किल नहीं है किताबों को दोस्त बना लो [संगीत] अपनी राय नीचे कमेंट सेक्शन में हमें बताएं और अपने दोस्तों के साथ यह वीडियो शेयर करना ना भूलें